रोगी रोग मुक्त बिना दवाई: योगासन एवं प्राणायाम
Rogi Rog Mukt Bina Dawai: Yogasan evam Pranayama
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Chikitsa & Yogasan Series · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
वजन बढ़ता है, जीवनी शक्ति का विकास होता है।
यह मुद्रा पाचन-क्रिया ठीक करती है, सात्विक गुणों का विकास करती है, दिमाग में शांति लाती है तथा विटामिन की कमी को दूर करती है।
A close-up photograph of a right hand performing the Surya Mudra. The thumb is bent at the knuckle and pressed against the base of the ring finger. The other fingers are extended upwards. The hand is set against a light blue background.
❖ सूर्या मुद्रा :
सूर्य-मुद्रा विधि: अनामिका (तीसरी) अंगुली को अंगूठे के मूल पर लगाकर अंगूठे से दबायें।
सूर्य-मुद्रा का लाभ: शरीर संतुलित होता है, वजन घटता है, मोटापा कम होता है।
शरीर में उष्णता की वृद्धि, तनाव में कमी, शक्ति का विकास, खून का कोलेस्ट्रॉल कम होता है।
यह मुद्रा मधुमेह, जिगर के दोषों को दूर करती है। सावधानी: दुर्बल व्यक्ति इसे न करें। गर्मी में ज्यादा समय तक न करें।
A close-up photograph of a right hand performing the Surya Mudra. The thumb is bent at the knuckle and pressed against the base of the ring finger. The other fingers are extended upwards. The hand is set against a light grey background.
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❖ वरूण मुद्रा :
वरूण मुद्रा विधि: कनिष्ठा (छोटी) अंगुली को अंगूठे से लगाकर मिलायें।
वरूण मुद्रा का लाभ: यह मुद्रा शरीर में रूखापन नष्ट करके चिकनाई बढ़ाती है, चमड़ी चमकीली तथा मुलायम बनाती है।
चर्मरोग, रक्त विकार एवं जल-तत्व की कमी से उत्पन्न व्याधियों को दूर करती है।
मुंहासों को नष्ट करती है और चेहरे को सुंदर बनाती है। सावधानी: कफ-प्रकृतिवाले इस मुद्रा का प्रयोग अधिक न करें।
❖ अपान मुद्रा :
अपान-मुद्रा विधि: मध्यमा तथा अनामिका अंगुलियों को अंगूठे के अग्रभाग से लगा दें।
अपान-मुद्रा का लाभ: शरीर और नाड़ी की शुद्धि तथा कब्ज दूर होता है। मल-दोष नष्ट होते हैं, बवासीर दूर होता है।
वायु-विकार, मधुमेह, मूत्रावरोध, गुर्दों के दोष, दांतों के दोष दूर होते हैं।
पेट के लिये उपयोगी है, हृदय-रोग में फायदा होता है तथा पसीना अधिक स्रावित होने से शरीर के अनावश्यक तत्व बाहर निकलते हैं।
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❖ अपानवायु या हृदय रोग मुद्रा :
हृदय-रोग-मुद्रा विधि: तर्जनी अंगुली को अंगूठे के मूल में लगायं तथा मध्यमा और अनामिका अंगुलियों को अंगूठे के आगे वाले हिस्से से लगा दें।
हृदय-रोग-मुद्रा का लाभ: जिनका दिल कमजोर है, उन्हें इसे प्रतिदिन करना चाहिये। दिल का दौरा पड़ते ही यह मुद्रा कराने पर आराम होता है। पेट में गैस होने पर यह उसे निकाल देती है। सिरदर्द होने तथा दमे की शिकायत होने पर लाभ होता है।
सीढ़ी चढ़ने से पांच-दस मिनट पहले यह मुद्रा करके चढ़ें।
❖ प्राण मुद्रा :
- • प्राण-मुद्रा विधि: कनिष्ठा तथा अनामिका अंगुलियों के अग्रभाग को अंगूठे से मिलायें।
- • प्राण-मुद्रा का लाभ: यह मुद्रा शारीरिक थकान दूर करती है, मन को शांत करती है, आंखों के दोषों को दूर करके ज्योति बढ़ाती है,
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- • शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है, विटामिनों की कमी को दूर करती है तथा थकान दूर करके नवशक्ति का संचार करती है।
- • लंबे उपवास-काल के दौरान भूख-प्यास नहीं सताती तथा चेहरे और आंखों एवं शरीर को चमकदार बनाती है। अनिद्रा में इसे ज्ञान-मुद्रा के साथ करें।
❖ सहज शंख मुद्रा :
- • दोनो हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर हथेलियां दबाएं। दोनो अंगूठों को मिलाकर तर्जनी उंगली को हल्के से दबाएं, 15 – 15 मिनट तीन बार करें।
- • इससे हकलाने और तुतलाने की समस्या दूर होगी।
❖ लिंग मुद्रा :
लिंग-मुद्रा विधि: चित्र के अनुसार मुट्ठी बाँधें तथा बायें हाथ के अंगूठे को खड़ा रखें, अन्य अंगुलियां बंधी हुई रखें।
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लिंग-मुद्रा का लाभ: शरीर में गर्मी बढ़ाती है। सर्दी, जुकाम, दमा, खांसी, साइनस, लकवा तथा निम्न रक्तचाप में लाभप्रद है, कफ को सुखाती है।
सावधानी: इस मुद्रा का प्रयोग करने पर जल, फल, फलों का रस, घी और दूध का सेवन अधिक मात्रा में करें। इस मुद्रा को अधिक लंबे समय तक न करें।
❖ योनि मुद्रा :
- • योनि मुद्रा विधि – दोनों हाथों की अंगुलियों का उपयोग करते हुए सबसे पहले दोनों कनिष्ठा अंगुलियों को आपस में मिलाएं और दोनों अंगूठे के प्रथम पोर को कनिष्ठा के अंतिम पोर से स्पर्श करें। फिर कनिष्ठा अंगुलियों के नीचे दोनों मध्यमा अंगुलियों को रखते हुए उनके प्रथम पोर को आपस में मिलाएं।
- • मध्यमा अंगुलियों के नीचे अनामिका अंगुलियों को एक-दूसरे के विपरीत रखें और उनके दोनों नाखूनों को तर्जनी अंगुली के प्रथम पोर से दबाएं। शरीर की सकरात्मक सोच का विकासकरती है और मस्तिष्क, हृदय और फेफड़े स्वस्थ बनते हैं।
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❖ शक्तिपान मुद्रा :
शक्तिपान मुद्रा विधि – दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी अंगुली को इस तरह से मिला लें कि पान की सी आकृति बन जाएं तथा दोनों हाथों की बची हुई तीनों अंगुलियों को हथेली से लगा ले।
ब्रेन की शक्ति में बहुत विकास होता है।
❖ माण्डुकी मुद्रा :
- • मुंह बंद करके जीभ को पूरे तालू के ऊपर दाएं-बाएं और ऊपर नीचे घुमाएं। तालू से टपकती हुई लार को पीये।
- • स्वास्थ्य सुधरता है इससे त्वचा चमकदार बनती है तथा इसके नियमित अभ्यास से वात-पित्त एवं कफ की समस्या दूर हो जाती है।
❖ पुष्पांजलि मुद्रा :
- • पुष्प अर्पण करते समय या भगवान से कुछ मांगते समय आपके हाथ जैसे रहते हैं वैसे ही यह मुद्रा बनती है –
- • दोनों खुली और सीधी हथेलियों को अगल – बगल सटा कर।
- • इसको निरंतर अभ्यास करने से नींद अच्छी तरह से आने लगती है। आत्मविश्वास बढ़ता है।
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हाथ की पांचों उंगलियों के दबाने के लाभ देखे -
(एक्यूप्रेशर पद्धति)
- • हमारे हाथ की पांचो उंगलिया शरीर के अलग अलग अंगों से जुडी होती है।
- • इसका मतलब आप को दर्द नाशक दवाइयां खाने की बजाए इस आसान और प्रभावशाली तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए।
(१.) अंगूठा
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हाथ का अंगूठा हमारे फेफड़ों से जुड़ा होता है। अगर आप की दिल की धड़कन तेज है तो हलके हाथो से अंगूठे पर मसाज करे और हल्का सा खिचे, इससे आप को आराम मिलेगा।
(२.) तर्जनी
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ये उंगली आंतों gastro intestinal tract से जुड़ी होती है | अगर आप के पेट में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा रगड़े , दर्द गायब हो जायेगा।
(३.) बीच की उंगली
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ये उंगली परिसंचरण तंत्र तथा circulation system से जुड़ी होती है | अगर आप को चक्कर या आपका जी घबरा रहा है तो इस उंगली पर मालिश करने से तुरंत रहत मिलेगी |
(४.) तीसरी उंगली
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ये उंगली आपकी मनोदशा से जुड़ी होती है | अगर किसी कर्ण आपका मनोदशा अच्छा नहीं है या शांति चाहते हो तो इस उंगली को हल्का सा मसाज करे और खिचे, आपको जल्द ही इस के अच्छे नतीजे प्राप्त हो जयेगे, आप का मूड खिल उठेगा।
(५.) छोटी उंगली
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छोटी उंगली का किडनी और सिर के साथ सम्बन्ध होता है | अगर आप को सिर में दर्द है तो इस उंगली को हल्का सा दबाये और मसाज करे, आप का सिर दर्द गायब हो जायेगा | इसे मसाज करने से किडनी भी तंदुरुस्त रहती है |
एक्यूप्रेशर पद्धति के द्वारा कुछ उपचार
- 1. अंगूठा दबाने से सिर दर्द दूर हो जाता हैं और दिमाग की सारी दुर्बलताएं दूर होती हैं।
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- 2. चारो उंगली के ऊपर का हिस्सा दबाने से साइनस ठीक होता है जैसे - नाक बहना, सर्दी लगना, खाँसी जुकाम, माइग्रेन आदि
- 3. पहली उंगली (तर्जनी) के ठीक नीचे वाले पाइंट को दबाने से आँखों के रोग दूर होते हैं, ज्योति बढ़ती है, बंहगापन दूर होता है।
- 4. दूसरी उंगली के ठीक नीचे वाले पाइंट को दबाने से फेफड़े स्वस्थ होते हैं।
- 5. छोटी उंगली के नीचे वाले पाइंट को दबाने से कान के सभी रोग दूर होते हैं, जैसे कान से मवान आना, कम सुनाई देना, पर्द फट जाना, इससे थोड़ा और नीचे दबाने से हृदय रोग दूर होते हैं।
- 6. उससे और नीचे दबाने पर मधुमेह रोग दूर होता है।
- 7. हथेली के उभरे हुए भाग को दबाने से (अंगूठे के पास) थायराइड ठीक होता है।
- 8. दूसरी उंगली को मोड़कर जिस पाइंट पर लगेगी उस पाइंट को दबाने पर किडनी स्वस्थ होती है एवं किडनी के रोग दूर होते हैं।
- 9. हथेली की शुरुआत में , हाथ की कलाई के मध्य भाग को दबाने से मूत्र संबंधित रोग दूर होते हैं।
- 10. अंगूठे के दायी और बायी तरफ से दबाने पर , गर्दन में दर्द या कमर में दर्द रोग दूर होता है।
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- 11. छोटी उंगली के नीचे , हथेली के नीचे साईड की और पाइंट दबाने पर कन्धे के दर्द के रोग दूर होते हैं।
- 12. हथेली के बीचों बीच दबाने पर पेट स्वस्थ रहता है।
- 13. बड़ी उंगली के ऊपरी हिस्से को दबाने पर निम्न रक्तचाप संतुलित होता है।
- 14. अनामिका उंगली के ऊपरी भाग को दबाने पर हार्ड रक्तचाप संतुलित होता है।
- 15. घुटना के दर्द दूर करने के लिए, अनामिका उंगली को पीछे के तरफ से पूरी उंगली को दबाये।
- 16. छोटी उंगली के ऊपरी भाग को दबाने से , छोटे बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना छूट जाता है।
कुछ महत्वपूर्ण एक्यूप्रेशर बिन्दू
- 1. जॉइनिंग द वैली – यह प्वाइंट हमारे अंगूठे और इंडेक्स फिंगर (तर्जनी) के बीच में होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से शरीर के कई प्रकार के दर्द जैसे कि सिर दर्द, दांत का दर्द, गर्दन का दर्द, कंधे का दर्द, अर्थराइटिस और कब्ज जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं।
- 2. पैरीकार्डियम – ये प्वाइंट हमारे हथेली से लगभग दो अंगुल नीचे की तरफ हमारी कलाई में मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से सिर दर्द, वॉर्मिंटिंग, सीने में दर्द, हाथों में दर्द और बैचेनी दूर हो जाती हैं।
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3. थर्ड आई – नाम के अनुसार ही ये प्वाइंट हमारे माथे पर दोनों आईब्रो के बीच मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से हमारी थकान और स्ट्रेस दूर होता है। इसके अलावा सिर दर्द, आंख का दर्द दूर होने के साथ-साथ मानसिक शांति भी मिलती है।
4. सी ऑफ ट्रेकालिटी – ये प्वाइंट चेस्ट की बीचो बीच मौजूद होता है। इस प्वाइंट पर दबाने से डिप्रेशन, नर्वसनेस और एंज्वाइटी दूर होती है।
5. लेग श्री माइल्स – ये प्वाइंट हमारे घुटनों से लगभग चार अंगुल नीचे की तरफ मौजूद होता है। यहाँ दबाने से पेट दर्द, उल्टी, पेट फूलना, कब्ज और इनडाइजेशन जैसी समस्या दूर हो जाती है।
6. कमांडिंग मिडिल – ये प्वाइंट हमारे घुटनों के ठीक पीछे मौजूद होता है जहाँ दबाने से अर्थराइटिस का दर्द, कमर और कुल्हे का दर्द दूर हो जाता है।
7. शेन मैन – ये प्वाइंट कान के ऊपरी हिस्से में पाया जाता है। यहाँ दबाने से स्ट्रेस, एंज्वाइटी और डिप्रेशन जैसी समस्या दूर हो जाती है।
8. हेवनली पिलर – ये प्वाइंट हमारी गर्दन और खोपड़ी के जोड़ पर पीछे की तरफ होता है जहाँ दबाने से सिर दर्द, गर्दन का दर्द, स्ट्रेस और थकान से राहत मिलती है।
9. सैकरल प्वाइंट्स- यह प्वाइंट रीढ़ की हड्डी के नीचे टेल बोन पर पाया जाता है। इस प्वाइंट पर दबाने से लोवर बैक पेन और पीरियड्स में होने वाले दर्द से राहत मिलती है।
10. बिगर रशिंग – यह प्वाइंट हमारे पैरों पर अंगूठे और बड़ी उंगली के बीच पाया जाता है। इस प्वाइंट को दबाने से सिर दर्द और आंखों की थकान से राहत मिलती है।
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आयुर्वेदिक दिनचर्या
- 1. सुबह उठते ही बासी मुँह से जितना ज्यादा पी सको गुनगुना पानी पीए।
- 2. जब भी पानी पीये नीचे बैठ कर एक-एक घूँट मुँह में गोल गोल घुमा के पीए।
- 3. भोजन बनाते समय सूर्य प्रकाश और पवन का स्पर्श भोजन को जरूर मिलना चाहिए।
- 4. भोजन पकने के बाद जितना जल्दी हो सके उसका उपभोग हो जाना चाहिए।
- 5. सुबह का भोजन सूर्योदय से ढ़ाई घंटे के अंदर करें, जो सबसे ज्यादा पंसद है वो खाये। दोपहर का भोजन सुबह से थोड़ा कम करें। शाम का भोजन सूर्यास्त होने से पहले बिल्कुल कम करें (ना ही करे तो अच्छा) ।
- 6. खाने के 45 मिनट पहले और खाने के डेढ़ घंटे बाद तक पानी ना पीए।
- 7. खाने के बाद सुबह किसी भी फल का रस, दोपहर को छाछ और रात को देशी गाय का दूध पीए।
- 8. हमेशा संध्या नमक का रसोई में उपयोग करे। इससे शरीर को बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं।
- 9. भोजन में मैदे का उपयोग ना करें। गेहूँ का आटा 10 दिन और मकाई, बाजरा और जुआर का आटा सात दिन से पुराना ना खाये।
- 10. सुबह और दोपहर का भोजन करके 10 मिनट वज्रासन में बैठे और 20-25 मिनट वाम कुक्षी (बायीं ओर) अवस्था में सोये। इससे भोजन पचता है और काम करने की क्षमता बढ़ती हैं।
- 11. ठंडे पेय, शराब और चाय ना पीए, उसकी जगह पीने पिलाने की बहुत सी चीजे हैं। जैसे नींबू पानी, नारियल पानी, संतरे का जूस आदि।
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- 12. सोते समय पारिवारिक व्यक्ति को दक्षिण दिशा में सन्यासी, ब्रह्मचारी और विद्यार्थी को पूर्व दिशा में सर रखकर सोना चाहिए
- 13. भोजन खूब चबा चबा कर करे। आयुर्वेद में निवाले को 32 बार चबाने का विधान हैं।
- 14. घर में एल्युमीनियम के बर्तनों का उपयोग ना करें। उसकी जगह मिट्टी के बर्तन या तांबे, पित्तल, लोहे और स्टील का उपयोग कर सकते हैं।
- 15. भोजन के बाद बिना सुपारी, तंबाकू और कत्था का पान जरूर खाये। ये कफ, वात औरपित्त को बराबर रखता है।
- 16. 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को गेहूँ के दाने जितना चूना, पानी या छाछ या दही के साथ जरूर लेना चाहिए। चूना वात के रोगो का नाश करता हैं। इससे कमर, घुटने व जोड़ो के दर्द नहीं होते। (पथरी वाले चूना ना खाये।)
इस पुस्तक को लिखने का मेरा उद्देश्य हैं कि सभी लोग बिना डॉक्टर के पास जाये स्वस्थ रहें।
आज हमारे देश में लगभग 85% लोग किसी ना किसी रोग से ग्रस्त हैं। यदि हम अपना थोड़ा सा भी ख्याल रखे तो हम बड़ी से बड़ी बीमारी से बचा जा सकता हैं।
- स्वदेशी रोबिन सिराना (राजीव दीक्षित समर्थक)
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