भारतकोश
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सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ
  • ➤ यदि किसी दवा को पतले पदार्थ में मिलाना हों तो चाय, कॉफी या दूध में न मिलाकर छाछ, नारियल पानी या सादे पानी में मिलाना चाहिए।
    • ➤ हींग को सदैव देशी घी में भून कर ही उपयोग में लाना चाहिए। लेप में कच्ची हींग लगानी चाहिए।

त्रिदोष सिद्धान्त

आयुर्वेद में 'त्रिदोष सिद्धान्त' की विस्तृत व्याख्या है, वात, पित्त, कफ-दोषों के शरीर में बढ़ जाने या प्रकृपित होने पर उनको शांत करने के उपायों का विशद वर्णन है। आहार के प्रत्येक द्रव्य के गुण-दोष का सूक्ष्म विश्लेषण है, ऋतुचर्या-दिनचर्या, आदि के माध्यम में स्वास्थ्य-रक्षक उपायों का सुन्दर विवेचन है तथा रोगों से बचने व रोगों की चिरस्थायी चिकित्सा के लिए पथ्य-अपथ्य पालन के लिए उचित मार्ग दर्शन है। आयुर्वेद में परहेज-पालन के महत्व को आजकल आधुनिक डॉक्टर भी समझने लग गए हैं और आवश्यक परहेज-पालन पर जोर देने लग गए हैं।

वात-पित्त-कफ रोग लक्षण

पित्त रोग लक्षण - पेट फूलना दर्द दस्त मरोड़ गैस, खट्टी डकारें, ऐसीडीटी, अल्सर, पेशाब जलन, रूक रूक कर बूंद-बूंद बार बार पेशाब, पथरी, शीघ्रपतन, स्वप्रदोष, लार जैसी घात घात गिरना, शुक्राणु की कमी, बांझपन, खून जाना, ल्यूकोरिया, गर्भाशय ओवरी में छाले, अण्डकोश बढ़ना, एलर्जी खुजली शरीर में दाने शीत निकलना कैसा भी सिर दर्द मधुमेह से उत्पन्न शीघ्रपतन कमजोरी, इंसुलिन की कमी, पीलिया, खून की कमी बवासीर, सफेद दाग, महावारी कम ज्यादा आदि।

वात रोग लक्षण - अस्सी प्रकार के वात, सात प्रकार के बुखार, घुटना कमर जोड़ों में दर्द संधिवात सवाईकल स्पांडिलाइटडिस, लकवा, गठिया, हाथ पैर शरीर कांपना, पूरे शरीर में सूजन कही भी दबाने से

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गढ़ा हो जाना, लिंग दोष, नामर्दी, इन्द्री में लूजपन, नसों में टेढ़ापन, छोटापन, उत्तेजना की कमी, मंदबुद्धि वीर्य की कमी, बुढ़ापे की कमजोरी, मिर्गी चक्कर, एकांत में रहना आदि।

कफ रोग लक्षण – बार-बार सर्दी, खांसी, छींक आना, एलर्जी, ईयोसिनोफिलिया, नजला, टी.बी., सीने में दर्द, घबराहट, मृत्यु भय, हार्ट अटैक के लक्षण, स्वास फूलना, गले में दर्द गांठ, सूजन, टॉन्सिल, कैंसर के लक्षण, थायराइड, ब्लड प्रेशर, बिस्तर में पेशाब करना, शरीर मुंह से बदबू, लीवर किडनी, का दर्द सूजन, सेक्स इच्छा कमी, चेहरे का कालापन, मोटापा, जांघों का आपस में जुड़ना, गुप्तांग में खुजली, घाव, सुजाक, कान बहना, शरीर फूल जाना, गर्भ नली का चोक होना, कमजोर अण्डाणु आदि।

दिनचर्या

  • ➤ रात को दाँत साफ करके सोये। सुबह उठ कर गुनगुना पानी बिना कुल्ला किए बैठकर, घूंट-घूंट करके पीये। एक दो गिलास जितना आप सुविधा से पी सकें उतने से शुरूआत करके, धीरे-धीरे बढ़ा कर सवा लीटर तक पीना है।
  • ➤ भोजनान्ते विषमबारी अर्थात् भोजन के अंत में पानी पीना विष पीने के समान है। इस लिए खाना खाने से आधा घंटा पहले और डेढ़ घंटा बाद तक पानी नहीं पीना। डेढ़ घंटे बाद पानी जरूर पीना।
  • ➤ पानी के विकल्प में आप सुबह के भोजन के बाद मौसमी फलों का ताजा रस पी सकते हैं, दोपहर के भोजन के बाद छाछ और अगर आप हृदय रोगी नहीं हैं तो आप दही की लस्सी भी पी

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सकते हैं। शाम के भोजन के बाद गर्म दूध। यह आवश्यक है कि इन चीजों का क्रम उलट-पलट मत करें।

  • ➤ पानी जब भी पीये बैठ कर पीयें और घूंट-घूंट करके पीये फ्रीजर का पानी कभी ना पीये। गर्मी के दिनों में मिट्टी के घड़े का पानी पी सकते हैं।
  • ➤ सुबह का भोजन सूर्योदय के दो से तीन घंटे के अन्दर खा लेना चाहिए। आप अपने शहर में सूर्योदय का समय देख लें और फिर भोजन का समय निश्चित कर लें। सुबह का भोजन पेट भर कर खाएं। अपना मनपसंद खाना सुबह पेट भर कर खाएं।
  • ➤ दोपहर का भोजन सुबह के भोजन से एक तिहाई कम करके खाएं, जैसे सुबह अगर तीन रोटी खाते हैं तो दोपहर को दो खाएं। दोपहर का भोजन करने के तुरंत बाद बाईं करवट लेट जाए, चाहे तो नींद भी ले सकते हैं, मगर कम से कम 20 मिनट अधिक से अधिक 40 मिनट। 40 मिनट से ज्यादा नहीं।
  • ➤ इसके विपरीत शाम को भोजन के तुरंत बाद नहीं सोना। भोजन के बाद कम से कम 500 कदम जरूर सैर करें। संभव हो तो रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा लें। भोजन बनाने में फ्रीजर, माइक्रोवेव ओवन, प्रेशर कूकर तथा एल्युमीनियम के बर्तनों का प्रयोग ना करें।
  • ➤ खाने में रिफाइन्ड तेल का इस्तेमाल ना करें। आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ जो तेल के बीज उगाये जाते हैं उसका शुद्ध तेल प्रयोग करें, जैसे यदि आपके क्षेत्र में सरसों ज्यादा होती है तो सरसों का तेल, मूंगफली होती है तो मूंगफली का तेल, नारियल है तो नारियल का तेल। तेल सीधे सीधे घानी से निकला हुआ होना चाहिए।

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  • ➤ खाने में हमेशा सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए, ना कि आयोडिन युक्त नमक का। चीनी की जगह गुड़, शक्कर, देसी खाण्ड या धागे वाली मिश्री का प्रयोग कर सकते हैं।
    • ➤ कोई भी नशा ना करें, चाय, काफी, मांसाहार, मैदा, बेकरी उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
    • ➤ रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध दाँत साफ करने के बाद पीये।
    • ➤ सोने के समय सिर पूर्व दिशा की तरफ तथा संबंध बनाते समय सिर दक्षिण दिशा की तरफ करना चाहिए।

❖ गौ चिकित्सा

देशी गाय घी के दिन रात काम आने वाले उपयोग

हम यदि गोरस का बखान करते करते मर जाए तो भी कुछ अंग्रेजी सभ्यता वाले हमारी बात नहीं मानेंगे क्योंकि वे लोग तो हम लोगों को पिछड़ा, साम्प्रदायिक और गँवार जो समझते हैं। उनके लिए तो वही सही हैं जो पश्चिमी कहे तो हम उन्ही के वैज्ञानिक शिरोविच की गोरस पर खोज लाये हैं जो रूसी वैज्ञानिक हैं। गाय का घी और चावल की आहुति डालने से महत्वपूर्ण गैसे जैसे – एथिलीन ऑक्साइड, प्रोपिलीन ऑक्साइड, फॉर्मल डीहाइड आदि उत्पन्न होती हैं। इथिलीन ऑक्साइड गैस आजकल सबसे अधिक प्रयुक्त होने वाली जीवाणुरोधक गैस है, जो शल्य-चिकित्सा से लेकर जीवनरक्षक औषधियाँ बनाने तक में उपयोगी है। वैज्ञानिक प्रोपिलीन ऑक्साइड गैस को कृत्रिम वर्षा का आधार मानते हैं।

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गौघृत में मनुष्य

शरीर में पहुँचे रोडियोधर्मी विकिरण का दुष्प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता है। अग्नि में गाय का घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है, वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता है। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच गौघृत को अग्नि में डालने से एक टन प्राण वायु (ऑक्सीजन) बनती है जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं है।

देसी गाय के घी को रसायन कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बुढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं जिसमें अद्भुत औषधीय गुण होते हैं, जो कि गाय के घी के अलावा अन्य घी में नहीं मिलते। गाय के घी में वैक्सीन एसिड, ब्यूट्रिक एसिड, बीटा-कैरोटीन जैसे माइक्रोन्यूट्री मौजूद होते हैं। जिस के सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। गाय के घी से उत्पन्न शरीर के माइक्रोन्यूट्री में कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है। यदि आप गाय के 10 ग्राम घी से हवन अनुष्ठान (यज्ञ) करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप वातावरण में लगभग 1 टन ताजा ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकते हैं। यही कारण है कि मंदिरों में गाय के घी का दीपक जलाने कि तथा, धार्मिक समारोह में यज्ञ करने कि प्रथा प्रचलित है। इससे वातावरण में फैले परमाणु विकिरणों को हटाने की अद्भुत क्षमता होती है।

गाय के घी के अन्य महत्वपूर्ण उपयोग -

  • ➤ मासिक साव में किसी भी तरह की गड़बड़ी में 250 ग्राम गर्म पानी में (घी पिघला हो तो 3 चम्मच जमा हुआ हो तो 1 चम्मच) डालकर पीने से लाभ होगा। यह पानी मासिक साव वाले दिनों के दौरान ही पीना है।
  • ➤ गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है, ये दुनिया की सारी दवाइयों से तेज असर दिखाता है।

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  • ➤ गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना आपरेशन के ठीक हो जाता है।
    • ➤ नाक में घी डालने से नाक की खुशकी दूर होती है और दिमाग तरों ताजा हो जाता है।
    • ➤ गाय का घी नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
    • ➤ गर्भवती माँ को गौ माँ का घी अवश्य खाना चाहिए, इससे गर्भ में पल रहा शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान होता है।
    • ➤ दो बूँद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होती है।
    • ➤ जिस व्यक्ति को बहुत हार्ट ब्लेकेज की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मना किया गया हो, तो गाय का घी खाएं, हार्ट ब्लेकेज दूर होता है।
    • ➤ देशी घी के प्रयोग से नाक से पानी बहना, नाक की हड्डी बढ़ना तथा खरटि बूँद हो जाते हैं।
    • ➤ सर्दी जुकाम होने पर गाय का घी थोड़ा गर्म कर 2-2 बूँद दोनों नाम में डाल कर सोयें।
    • ➤ अच्छी नींद के लिए, माइग्रेन और खरटि से निजात पाने के लिए भी उपरोक्त विधि अपनाएँ।
    • ➤ गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
    • ➤ गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
    • ➤ गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
    • ➤ 20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।
    • ➤ गाय का घी नामक में डालने से कान का पर्दा बिना ऑपरेशन के ही ठीक हो जाता है।
    • ➤ नाक में घी डालने से नाक की खुशकी दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जाता है।
    • ➤ गाय का घी नाक में डालने से बाल झड़ना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते हैं।

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  • ➤ गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
    • ➤ हाथ पाव में जलन होने पर गाय के घी को तलवों में मालिश करें जलन ठीक होता है।
    • ➤ हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी स्वयं रुक जाएगी।
    • ➤ गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
    • ➤ गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है।
    • ➤ गाय के पुराने घी बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है।
    • ➤ अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
    • ➤ हथेली और पांव के तलवों में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा।
    • ➤ गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
    • ➤ जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाई खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हृदय मजबूत होता है।
    • ➤ देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
    • ➤ संभोग के बाद कमजोरी आने पर एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिलाकर पी लें। इससे थकान बिल्कुल कम हो जाएगी।
    • ➤ फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है। गाय के घी की छाती पर मालिश करने से बच्चों के बलगम को बाहर निकालने में सहायक होता है।

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  • ➤ सांप के काटने पर 100-150 ग्राम घी पिलायें ऊपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उल्टी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
    • ➤ दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक होता है। सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरो के तलवे पर मालिश करें, सर दर्द ठीक हो जाएगा।
    • ➤ यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नहीं बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है। यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा कम होता है।
    • ➤ एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बुरा और ¼ चम्मच पिप्सी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है।
    • ➤ गाय के घी को ठंडे जल में फेट ले और फिर घी को पानी से अलग कर लें यह प्रक्रिया लगभग सौ बात करें और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे जिसे त्वचा संबंधी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक मरहम कि तरह से इस्तेमाल कर सकते हैं। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।
    • ➤ गाय का घी एक अच्छा (LDC) केलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है। अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदे दिन में तीन बार, नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है।
    • ➤ घी, छिलका सहित पिंसा हुआ काला चना और पिप्सी शक्कर(बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड़ड़ बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड़ड़ खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के

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प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।

गोमूत्र-घृत-दुग्ध के गुण

  • ➤ गोमूत्र माने देशी गाय (जर्सी नहीं) के शरीर से निकला हुआ सीधा साधा मूत्र जिसे सती के आठ परत की कपड़ों से छान कर लिया गया हो।
  • ➤ गोमूत्र वात और कफ को अकेला ही नियंत्रित कर लेता है। पित्त के रोगों के लिए इसमें कुछ औषधियाँ मिलायी जाती हैं।
  • ➤ आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से दमा अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा सब ठीक होता है और गोमूत्र पीने से टीबी भी ठीक हो जाता है, लगातार पांच छह महीने पीना पड़ता है।
  • ➤ गोमूत्र में पानी के अलावा कैल्शियम, सल्फर की कमी से होता है। घुटने दुखना, खाँसी, जुकाम, टीबी के रोग आदि सब गोमूत्र के सेवन से ठीक हो जाते हैं क्योंकि यह सल्फर का भंडार हैं।
  • ➤ टीबी के लिए डोट्स का जो इलाज है, गोमूत्र के साथ उसका असर 20-40 गुणा तक बढ़ जाता है।
  • ➤ शरीर में एक रसायन होता है, इसकी कमी से कैंसर रोग होता है। जब इसकी कमी होती है तो शरीर के सेल बेकाबू हो जाते हैं और ट्यूमर का रूप ले लेते हैं। गोमूत्र और हल्दी में यह रसायन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • ➤ आँख के रोग कफ से होते हैं। आँखों के कई गंभीर रोग हैं जैसे ग्लूकोमा (जिसका कोई इलाज नहीं है एलोपैथी में), मोतियाबिंदू आदि सब आँखों के रोग गोमूत्र से ठीक हो जाते हैं। ठीक होने

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का मतलब कंट्रोल नहीं, जड़ से ठीक हो जाते हैं। आपको करना बस इतना है कि ताजे गोमूत्र को कपड़े से छानकर आँखों में डालना है।

  • ➤ बाल झड़ते हैं तो ताम्बे के बर्तन में गाय के दूध से दही को 5-6 दिन के लिए रख दें। जब इसका रंग बदल जाए तो इसे सिर पर लगा कर 1 घंटे तक रखें। ऐसा सप्ताह में 4 बार कर सकते हैं। कई लोगों को तो एक ही बार से लाभ हो जाता है।
  • ➤ गाय के मूत्र में पानी मिलाकर बाल धोने से गजब की कंडशनिंग होती है।
  • ➤ छोटे बच्चों को बहुत जल्दी सर्दी जुकाम हो जाता है। 1 चम्मच गोमूत्र पिला दीजिए सारी बलगम साफ हो जाएगी।
  • ➤ किडनी तथा मूत्र से संबंधित कोई समस्या हो जैसे पेशाब रुक कर आना, लाल आना आदि तो आधा कप (50 मिली) गोमूत्र सुबह-सुबह खाली पेट पी लें। इसको दो बार पीएँ यानी पहले आधा पीएँ फिर कुछ मिनट बाद बाकी पी लें। कुछ ही दिनों में लाभ का अनुभव होगा।
  • ➤ बहुत कब्ज हो तो कुछ दिन तक आधा कप गोमूत्र पीने से कब्ज खत्म हो जाती है।
  • ➤ गोमूत्र की मालिश से त्वचा पर सफेद धब्बे और डार्कसर्कल कुछ ही दिनों में खत्म हो जाते हैं।
  • ➤ गोमूत्र को सुबह खाली पेट पीना सर्वोत्तम होता है। जो लोग बहुत बीमार हैं, उन्हें 100 मिली से अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। यह TEA CUP का आधे से अधिक भाग होता है। इसे कुछ मिनट का अंतराल देकर दो किशतों में पीना चाहिए। निरोगी

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व्यक्ति को 50 मिली से अधिक नहीं पीना चाहिए। गोमूत्र केवल उन्हीं गोमाता का पीएँ जो चलती हों क्योंकि उन्हीं का मूत्र उपयोगी होता है। बैठी हुई गोमाता का मूत्र किसी काम का नहीं होता। जैसे – जर्सी गाय कभी नहीं घूमती और उसके मूत्र में केवल 3 ही पोषक तत्व पाए जाते हैं। वही देसी गाय के मूत्र में 18 पोषक तत्व पाये जाते हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सा

❖ कब्ज

हमारे द्वारा भोजन ग्रहण करने के बाद उसका पाचन संस्थान द्वारा पाचन होता है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रूकावट होती है, तो फिर भोजन सही ढंग से नहीं पचता तथा अपच होती है और फिर कब्ज होती है। सही ढंग से मल का न निकलना कब्ज कहलाता है।

  • • सौंठ+काली मिर्च+पीपल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें, सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें। कब्ज दूर होगी।
  • • रात में दूध के साथ दो चम्मच ईसबगोल खाने से कब्ज में आराम मिलता है।
  • • रात को गर्म दूध के साथ एक चम्मच त्रिफला लेने से कब्ज दूर होगा।
  • • भोजन के साथ सुबह शाम पपीता खाने से कब्ज दूर होता है।
  • • सौंठ + हरड + अजवायन को समान मात्रा में पानी में उबालें तथा वह पानी लेने से कब्ज दूर होगा।

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❖ पेट दर्द, एसिडिटी (अम्लपित्त)

पेट में कब्ज के दौरान अम्लपित्त बनने लगता है। खट्टी डकारें आती हैं। पेट में भारीपन लगता है। कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती।

  • • 1. अजवायन का चूर्ण शहद में मिलाकर लेने से बदहजमी दूर होती है।
  • • 2. अजवायन और नमक की फंकी गर्म पानी के साथ लें।
  • • 3. एक ग्राम सौंठ के चूर्ण में चुटकी भर हींग और सेंधा नमक मिलाकर सुबह शाम पानी के साथ सेवन करें।

❖ अतिसार एवं संग्रहणी

यह आंतों का रोग है। पतले और बदबूदार दस्त होना अतिसार कहलाता है। यह अधिकांशतः दूषित जल के कारण होता है या दूषित भोजन के कारण। इसमें पेट में दर्द, मरौड़, एंठन होती है और कभी गाढ़ा या पतला दस्त होता है।

  • • भुने हुए जीरे का चूर्ण दही के साथ खायें।
  • • थोड़ी सी सौंफ तवे पर भूनकर उसका पावडर बनाकर मठे के साथ लें।
  • • तेजपात के पत्ते + दालचीनी + ¼ मात्रा कल्पा का काढ़ा बनाकर पिलाने से दस्त तुरन्त बंद होते हैं।
  • • चावलों का मांड तथा थोड़ा काला नमक और जरा सी भुनी हींग मिलाकर पीने से दस्त में लाभ मिलता है।
  • • 5.10 दाने तुलसी के बीज पीसकर गाय के दूध के साथ लें।

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❖ अल्सर / पेटिक अल्सर

पेटिक अल्सर एक तरह का घाव है जो कि पेट के भीतरी हिस्से की परत में, भोजन नली में और छोटी आंत में विकसित होते हैं। पेटिक अल्सर के दौरान पेट में दर्द होता है और ये दर्द नाभि से लेकर छाती तक महसूस होता है, अल्सर कि वजह से पेट में जलन, दांत काटने जैसा दर्द, ये दर्द हमारे पीछे के हिस्से में भी हो सकता है। आमतौर पर पेट में दर्द तब होता है जब खाना खाने के कई घन्टे के बाद तक हमारा पेट खाली रहता है।

  • • गुडहल के लाल फूलों को पीसकर, पानी के साथ इसका शर्बत बनाकर पीए।
  • • गाय के दूध में हल्दी की कुछ मात्रा मिलाकर इसे प्रतिदिन पीये।
  • • बेल का जूस या बेलपत्र को पीसकर इसे पानी में घोलकर बनाए गए पेय का सेवन करने से अल्सर में लाभ मिलता है।

❖ पीलिया (जॉन्डिस)

इसका मुख्य कारण शरीर में सही ढंग से खून ना बनना है। इस कारण शरीर में पीलापन आ जाता है। सबसे पहले आंखों में पीलापन आता है उसके बाद शरीर और मूत्र पीला होता है। भूख न लगना, भोजन को देखकर उल्टी आना, मुंह का स्वाद कड़वा होना, नाड़ी की गति धीरे चलना आदि लक्षण हैं।

  • • गिलोय का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम सादे पानी के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।
  • • त्रिफला चूर्ण का काढ़ा बनाएँ उसमें मिश्री और घी मिलाकर सेवन करें।
  • • 10 ग्राम सौंठ का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम उपयोग करें।

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❖ बवासीर(अर्श)

यह रोग मुख्यतः कब्ज के कारण होता है। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत लंबे समय तक रहती है उनको मुख्यतः यह रोग होता है। बवासीर दो प्रकार की होती है। 1. खूनी बवासीर 2. बादी बवासीर। इस रोग में मल बहुत कठिनाई से निकलता है और मल के साथ खून भी निकलता है।

  • • आँवले चूर्ण 10 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ लेने पर बवासीर में लाभ मिलता है।
  • • मूली का रस काला नमक डालकर पीने से भी आराम मिलता है।
  • • 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण शहद के साथ चाटें।
  • • काले तिल और ताजे मक्खन को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट होता है।

❖ उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप हृदय, गुर्दे और रक्त संचालन प्रणाली की गड़बड़ी के कारण होता है। यह रोग किसी को भी हो सकता है। जो लोग क्रोध, भय, दुख या अन्य भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्हें यह रोग अधिक होता है। जो लोग परिश्रम कम करते हैं तथा अधिक तनाव में रहते हैं, शराब या धूम्रपान अधिक करते हैं। इसमें सिर में दर्द होता है और चक्कर आने लगते हैं। दिल की धड़कन तेज हो जाती है। आलस्य होना, जी घबराना, काम में मन न लगना, पाचन क्षमता कम होना, और आँखों के सामने अंधेरा आना, नींद न आना आदि लक्षण होते हैं।

  • • कच्चे लहसुन की एक दो कली पीसकर प्रातः काल चाटने से उच्च रक्तचाप सामान्य होता है।
  • • उच्च रक्त चाप के रोगी को साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग लाभकारी होता है।

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  • • सौफ, जीरा और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनायें तथा सुबह-शाम सादे पानी से लें आराम मिलेगा।
    • • आधा चम्मच दालचीनी, आधा चम्मच शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह लें।
    • • एक चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर, पानी में उबालकर पीयें।

❖ निम्न रक्त चाप

व्यक्ति के भोजन न करने से अथवा अधिक आयु होने से निम्न रक्त चाप होता है। यानि कि बुढ़ापे में सामान्य रूप से यह बीमारी होती है। पाचन तंत्र ठीक न होना, असफलता, निराशा और हताशा से निम्न रक्त चाप होता है। चक्कर आना, थकाना होना, नाड़ी धीरे चलना, मानसिक तनाव, हाथ पैर ठंडे पड़ना इसके लक्षण हैं।

  • • गुड़ पानी में मिलाकर, नमक डालकर, नीबू का रस मिलाकर दिन में दो – तीन बार पीयें।
  • • मिश्री में मक्खन मिलाकर खाये।
  • • पीपल के पत्तों का रस शहद में मिलाकर चाटें।
  • • कच्चे लहसुन का प्रयोग करें, एक या दो कली प्रतिदिन दांतों से कुचलकर खायें।

❖ हृदय में दर्द

आजकल की जीवन शैली में, व्यापार में, घर में तनाव के कारण यह रोग अधिक होता है। हृदय में धमनियों द्वारा रक्त संचार बराबर मात्रा में नहीं होता। धमनियों में रूकावट के कारण ही यह रोग होता है।

  • • कच्ची लौकी का रस थोड़ा हींग, जीरा मिलाकर सुबह-शाम पीने से तत्काल लाभ मिलता है।

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  • ● अर्जुन की छाल का 10 ग्राम पाउडर और पाषाणवैध का 10 ग्राम पाउडर लेकर 500 मिली पानी में उबालें और पानी आधा रहने पर ठंडा करके सुबह शाम पीयें। इससे हृदय घात की बीमारी दूर होती है।
    • ● गाजर का रस निकालकर सूप बनाकर पीने से लाभ मिलता है।
    • ● इस बीमारी में लहसुन का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ हैं। खाने में पके रूप में और कच्चे रूप में भी ले सकते हैं

❖ मोटापा

शरीर में जब वसा की मात्रा बढ़ जाती है और वह शरीर में एकत्र होने लगती है तो इसी से मोटापा आता जाता है। वह एकत्र वसा ही मोटापा है। मोटापा आने के बाद शरीर में सुस्ती रहती है, थकान होने लगती है। इसी कारण शुगर, हृदय रोग, अपच, कब्ज आदि बीमारी होने लगती है।

  • ● सुबह-शाम खाली पेट गर्म पानी में नींबू निचोड़कर, सेंधा नमक मिलाकर पीयें।
  • ● 10 ग्राम सौंठ को शहद में मिलाकर चाटने से भी मोटापा कम होता है।
  • ● मूली के सलाद में नींबू और नमक मिलाकर प्रतिदिन लें।
  • ● खाने के बाद एक चुटकी काले तिल चबाकर खायें।

❖ खाज खुजली

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खाज-खुजली एक संक्रामक रोग है। जिसके कारण त्वचा पर छोटी-छोटी फुन्सियां निकल आती हैं और उनमें से पानी भी निकलता है। कभी-कभी पेट साफ न होने से, कब्ज रहने से तथा खून में अशुद्धि होने से भी ये खुजली पैदा होती है।

  • ● नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गरम करें और खुजली वाले स्थान पर लगायें।
  • ● गाय के घी में कुछ लहसुन मिलाकर गर्म करें और उसकी मालिश खुजली वाले स्थान पर करें।
  • ● नींबू के रस में पके हुए केले को मसलकर खुजली वाले स्थान पर लगायें।
  • ● भुने हुए सुहागे को पानी में मिलाकर लगाने से खुजली में आराम मिलता है।

❖ फोड़ा फुन्सी

खून में विकार होने से फोड़े फुन्सी निकलते हैं। वर्षा ऋतु में अधिक आम खाने से या गंदे पानी में घूमने से फोड़े फुन्सी निकलते हैं।

  • ● लौंग को चंदन के साथ घिसकर लगाने से फुन्सियों में लाभ होता है।
  • ● नीम की पत्तियों की पुल्टीस बांधने से तथा नीम की छाल का पानी लगाने से फोड़े फुन्सी जल्दी ठीक हो जाते हैं।

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  • ● फोडे-फुन्सियों पर लौंग धिसकर लगाने से आराम मिलता है।
    • ● हल्दी के साथ शहद चाटें।

❖ दाद (छलन)

दाद रोग अपच होने, लू लगने, खून में विकार रहने, साबुन , चूने का अत्याधिक प्रयोग करने, माँ के दूध में खराबी होने से तथा स्त्रियों में मासिक धर्म की गड़बड़ियों की वजह से होता है। यह रोग हाथ, पैर, मुहँ, कोहनी, गर्दन, पेट आदि कहीं पर भी हो सकता है। लाल फुन्सियां शरीर पर हो जाती हैं।

  • ● सबसे पहले अत्याधिक मिर्च मसाले, मिठाई, तेल और अचार, खट्टी चीजे खाना बंद करना चाहिए। क्योंकि यह पदार्थ रोग को बढ़ाते हैं। पेट साफ रखें और कब्ज न होने दें।
  • ● नींबू के रस में सुहागे को मिलाकर लगाने से दाद समाप्त होता है।
  • ● भूना हुआ सुहागा और भुनी हुई फिटकरी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और दाद पर लगायें।

❖ जलजाना

आग या किसी गर्म चीज से अचानक से जल जाने से शरीर में फफोले पड़ जाते हैं। घी, तेल, दूध, चाय, भाप, गर्म तवे से जलने से भी फफोले पड़ जाते हैं। काफी तेज जलन होती है। कभी-कभी फफोलों में मवाद भी आ जाता है।

  • ● सबसे पहले जले हुए हिस्से को ठंडे पानी में डालकर रखें।

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  • ● दही के पानी में थोड़ा सा चूना मिलाकर जले हुए स्थान पर लगायें। (तेल से जलने पर)
    • ● आग से जल जाने पर तारपीन के तेल में कपूर मिलाकर लेप करें।
    • ● नारियल के तेल में मोम मिलाकर गरम करें और ठंडा होने पर मरहम की तरह लगायें।
    • ● मुल्लानी मिट्टी को दही में मिलाकर जले हुए स्थान पर लेप करें।

शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट

❖ मिरगी

शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को मिरगी अधिकांश रूप से आती है। अत्याधिक शराब पीना, अधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से यह बीमारी हो सकती है। इस रोग में अचानक से दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ती है। हाथ और गर्दन अकड़ जाती है, पलकें एक जगह रूक जाती हैं रोगी हाथ पैर पटकता है, जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती, मुँह से पीला झाग निकलता है। चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं। इस तरह के दौरे 10-15 मिनट से लेकर 1-2 घंटे तक के भी हो सकते हैं।

  • ● दौरा पड़ने पर रोगी को दायीं करवट लिटायें ताकि उसके मुँह से सभी झाग आसानी से निकल जायें। दौरा पड़ने के समय रोगी को कुछ भी न खिलायें बल्कि दौरे के समय अमोनिया या चुने की गंध सुघानी चाहिए, इससे उसकी बेहोशी दूर हो सकती है।
  • ● ब्रह्मी बूटी का रस 1 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पिलाने से आधा रहने पर हल्का सा संधा नमक मिलाकर दिन में 2 बार पिलायें।

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  • ● नीम की कोमल पत्तियाँ, अजवायन और काला नमक इन सबको पानी में पीसकर पेस्ट बनाकर सेवन करें।
    • ● तुलसी के 4-5 पत्ते कुचलकर उसमें कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाये।

❖ लकवा

लकवा/पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनहीन हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव बढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है।

  • ● 250 मिली गाय के दूध में 8-10 लहसुन की कलियाँ डालकर उबालें। गाढ़ा होने पर रोगी को पिलायें।
  • ● 250 ग्राम सरसों के तेल में थोड़ी काली मिर्च पीसकर डालें और मालिश करें।
  • ● तुलसी के 8-10 पत्ते, सेंधा नमक और दही की चटनी बनाकर लकवे वाले स्थान पर लेप करें।
  • ● सौंठ और उड़द उबालकर उसका पानी पीने से लकवे में काफी लाभ होता है।

❖ आधा सीसी

आधा सीसी का दर्द अधिकांशतः दिन में ही होता है। यह अत्याधिक मानसिक श्रम, पेट में वायु के बने रहने से शरीर में धातु दोष होने से होता है। यह पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक होता है। आधा सीसी का रोग सिर के आधे हिस्से में ही होता है और काफी ते दर्द होता है और रोगी बैचेन हो जाता है।

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