संग्रह पर लौटें




















विष्णु पुराण
Vishnu Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished558 पृष्ठ
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४८०
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| एष पाषण्डसम्भाषात् | ३ | १८ | ९६ | अंशावतारो ब्रह्मर्षे | ५ | १ | २ |
| एष चोर्ध्ववत्या | ४ | ७ | १९ | अंशेन तस्या जज्ञेऽसौ | ३ | १ | ३६ |
| एष ब्रह्मा सहास्माभिः | १ | ९ | ६३ | क० | |||
| एष मे संशयो ब्रह्मन् | १ | १५ | ८१ | ककुद्मति हतेऽरिष्टे | ५ | १५ | १ |
| एष मन्वन्तरे सर्गः | १ | २१ | २७ | ककुत्स्थस्याप्यनेनाः | ४ | २ | ३३ |
| एष स्वायम्भुवः सर्गः | २ | १ | ४३ | कंकस्तु पञ्चमः षष्ठः | २ | ४ | २७ |
| एष तूद्देशतो वंशः | ४ | २४ | १२२ | कच्चित्स्मरति नः कृष्णः | २ | २४ | १४ |
| एष मोहं गतः कृष्णः | ५ | ७ | १९ | कच्चिन्नमैषां बाहूनाम् | ५ | ३३ | २ |
| एष रामेण सहितः | ५ | १८ | २१ | कच्चिन्नु शूर्पवातस्य | ५ | ३८ | ४० |
| एष कृष्णरथस्योच्चैः | ५ | १८ | ३१ | कच्चिदस्मत्कुले जातः | ६ | ८ | ३६ |
| एष ते तनयः सुभ्रु | ५ | २७ | २६ | कटकमुकुटकर्णिकादिभेदैः | ३ | ७ | १६ |
| एष द्वीपः समुद्रेण | २ | ४ | ३३ | कण्टकैरिव तुन्नांगः | ६ | ५ | १७ |
| एष साम्बस्सपत्नीकः | ५ | ३५ | ३४ | कण्डुर्नाम मुनिः पूर्वम् | १ | १५ | ११ |
| एष नैमित्तिको नाम | ६ | ४ | ७ | कण्डूयनेऽपि चासक्तः | ६ | ५ | १८ |
| एषा मही देव महीप्रसूतैः | ५ | १ | ५७ | कण्डोरपत्यमेवं सा | १ | १५ | ५१ |
| एषा वसुमती तस्य | २ | १३ | २५ | कण्वान्मेधातिथिः | ४ | १९ | ३१ |
| एषां सूतिप्रसूतिभ्याम् | १ | ८ | १० | कथयामि यथापूर्वम् | १ | २ | ८ |
| एषां ज्येष्ठो वीतिहोत्रः | ४ | ११ | २४ | कथमेभिरसद्वृत्तम् | ४ | ४ | १४ |
| एषैष रथमारुह्य | ५ | १८ | १९ | कथय वत्से कस्यायमात्मजः | ४ | ६ | ३२ |
| एह्येहि दुष्ट कृष्णोऽहम् | ५ | १६ | ७ | कथमेष नरेन्द्राणाम् | ४ | २४ | १२८ |
| ऐ० | कथाशरीरत्वमवाप यद्वै | ४ | २४ | १४८ | |||
| ऐन्द्रमिन्द्रः परं स्थानम् | १ | ११ | ४७ | कथितस्तामसः सर्गः | १ | ८ | १ |
| ऐरावतेन गरुडः | ५ | ३० | ६६ | कथितं मे त्वया सर्वम् | १ | १० | १ |
| ऐलीनस्य दुष्षन्तात् | ४ | १९ | ९ | कथितो भवता वंशः | १ | १६ | १ |
| ऐश्वर्यमददुष्टात्मन् | १ | ९ | १२ | कथितो भवता ब्रह्मन् | २ | २ | १ |
| ऐश्वर्यस्य समग्रस्य | ६ | ५ | ७४ | कथितं भूवलं ब्रह्मन् | २ | ७ | १ |
| ओ० | कथिता गुरुणा सम्यक् | ३ | १ | १ | |||
| ओषध्यः फलमूलिन्यः | १ | ५ | ५० | कथितं चातुराश्रम्यम् | ३ | १० | १ |
| ॐकारब्रह्मसंयुक्तम् | २ | ८ | ५२ | कथिते योगसद्भावे | ६ | ७ | ९८ |
| ॐकारो भगवान् विष्णुः | २ | ८ | ५४ | कथं मन्त्रिष्वमात्येषु | १ | १९ | ३० |
| ॐनमो वासुदेवाय | ५ | १८ | ५८ | कथं ममेयमचला | ४ | २४ | १२४ |
| ॐनमो वासुदेवाय | १ | १९ | ७८ | कथं युद्धमभूद्ब्रह्मन् | ५ | ३२ | ९ |
| ॐनमो विष्णवे तस्मै | १ | १९ | ८४ | कथ्यतां च द्रुतं गत्वा | ५ | ३० | ४९ |
| ॐनमः परमार्थार्थ | १ | २० | ९ | कथ्यतां मे महाभाग | ६ | ७ | ४६ |
| ॐपराशरं मुनिवरम् | १ | १ | १ | कदन्नानि द्विजैतानि | २ | १५ | १३ |
| औ० | कदम्बस्तेषु जम्बूश्च | २ | २ | १९ | |||
| औत्तमेऽप्यन्तरे देवः | ३ | १ | ३८ | कदाचिच्छकटस्याधः | ५ | ६ | १ |
| औत्तानपादितपसा | १ | १२ | ३५ | कनकमपि रहस्यवेक्ष्य बुद्ध्या | ३ | ७ | २२ |
| औत्तानपादे भद्रं ते | १ | १२ | ४२ | कन्दमूलफलाहाराः | ६ | १ | २५ |
| औरभ्रगव्यैश्च तथा | ३ | १६ | २ | कन्यापुत्रविवाहेषु | ३ | १३ | ५ |
| अं० | कन्यान्तःपुरमभ्येत्य | ५ | ३३ | ६ | |||
| अंशकाश्यपतार्यास्तु | २ | १० | १३ | कन्याश्च कृष्णो जग्राह | ५ | ३१ | १५ |
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४८१
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कन्यापुरे स कन्यानाम् | ५ | २९ | ३१ | कलाद्वयावशिष्टस्तु | २ | १२ | ८ |
| कन्याद्वयं च धर्मज्ञ | १ | ७ | १९ | कलाकाष्ठामुहूर्त्तादि० | १ | ९ | ४५ |
| कपटवेषधारणमेव | ४ | २४ | ९२ | कलाकाष्ठानिमेषादि० | १ | २२ | ७९ |
| कपिलर्षिर्भगवतः | २ | १४ | ९ | कलिकलुषमलेन यस्य नात्मा | ३ | ७ | २१ |
| कपिलादानजनितम् | ६ | ८ | ५४ | कलिकल्मषमृत्युग्रम् | ६ | ८ | २१ |
| कमलनयन वासुदेव विष्णो | ३ | ७ | ३३ | कलिस्साध्विति यत्रोक्तम् | ६ | २ | १२ |
| कम्बलाय च तेनोक्तम् | ६ | ८ | ४७ | कलिंगमाहिषमहेन्द्र० | ४ | २४ | ६५ |
| करम्भबालुकावह्नि० | ६ | ५ | ४५ | कलिंगराजं चादाय | ५ | २८ | २४ |
| करालसौम्यरूपआत्मन् | १ | २० | ११ | कलेस्स्वरूपं भगवन् | ६ | १ | ८ |
| करूषश्च पृषध्रश्च | ३ | १ | ३४ | कलेस्स्वरूपं मैत्रेय | ६ | १ | ९ |
| करिष्ये सर्वदेवानाम् | ५ | ३६ | ४ | कलेवरोपभोग्यं हि | ६ | ७ | १४ |
| करिष्ये तन्महाभाग | ५ | १८ | ८ | कलौ ते बीजभूताः | ४ | २४ | १२१ |
| करिष्यत्येष यत्कर्म | १ | १३ | ५६ | कलौ जगत्पतिं विष्णुम् | ६ | १ | ५० |
| करीषभस्मदिग्धांगौ | ५ | ६ | ११ | कल्पान् कल्पविभागांश्च | १ | १ | ८ |
| करेण परमाकृष्य | ५ | २० | ३६ | कल्पादावात्मनस्तुल्यम् | १ | ८ | २ |
| करोति कर्णिणो यश्च | २ | ६ | १७ | कल्पान्ते यस्य वक्त्रेभ्यः | २ | ५ | १९ |
| करोति चेष्टाश्श्वसनस्वरूपी | ४ | १ | ८८ | कव्यं यः पितरूरुपधृग्विधिहुतम् | ६ | ८ | ५९ |
| करोति हे दैत्यसुताः | १ | १७ | ६५ | कश्यपस्य तु भार्यायाः | १ | १५ | १२४ |
| करोत्येवंविधां सृष्टिम् | १ | ५ | ६६ | कश्चश्रद्ध्यात्सगांगेयान् | ५ | ३८ | ६८ |
| कर्कटावस्थिते भानौ | २ | ८ | ६८ | कस्य माता पिता कस्य | ६ | १ | ५६ |
| कर्णाद्वृषसेनः | ४ | १८ | २९ | कस्मिन्कालेऽल्पको धर्मः | ६ | २ | २ |
| कर्णं दुर्योधनं द्रोणम् | ५ | ३५ | २७ | काकपक्षाधरौ बालौ | ५ | ६ | ३३ |
| कर्ता क्रियाणां स च इज्यते क्रतुः | २ | ७ | ४३ | काचित्प्रविलसद्बाहुः | ५ | १३ | ५४ |
| कर्दमश्चोर्वरीयांश्च | १ | १० | १० | काचित्कृष्णेति कृष्णेति | ५ | १३ | १९ |
| कर्दमस्यात्मजां कन्याम् | २ | १ | ५ | काचिच्चावावसथस्यान्ते | ५ | १३ | २० |
| कर्मभिर्भाविताः पूर्वैः | १ | ५ | २८ | काचिदालोक्य गोविन्दम् | ५ | १३ | ४४ |
| कर्मणा जायते सर्वम् | १ | १८ | ३२ | काचिद् भ्रूभंगुरं कृत्वा | ५ | १३ | ४५ |
| कर्ममार्गेण खाण्डिक्यः | ६ | ६ | ९ | काचिदालोक्य गोविन्दम् | ५ | १३ | ४६ |
| कर्मणा मनसा वाचा | १ | १९ | ६ | काठिन्यवान् यो बिभर्त्ति | १ | १४ | २८ |
| कर्मभावात्मिका ह्येका | ६ | ७ | ४९ | का त्वन्या त्वामृते | १ | ९ | १२२ |
| कर्मवश्या गुणाश्चैते | २ | १३ | ७० | काद्रवेयास्तु बलिनः | १ | २१ | २० |
| कर्म यज्ञात्मकं श्रेयः | २ | १४ | १४ | कानिष्ठ्यं ज्यैष्ठ्यमप्येषाम् | १ | १५ | ८४ |
| कर्माणि रुद्रमरुदश्विशतक्रतूनाम् | ५ | २० | १०५ | कान्त कस्मान्न जानासि | ५ | २० | ४ |
| कर्माण्यत्रावतारे ते | ५ | १६ | २१ | कापि तेन समायाता | ५ | १३ | ३३ |
| कर्माण्यसंकल्पिततत्फलानि | २ | ३ | २५ | कामक्रोधभयद्वेष० | ६ | ५ | ५ |
| कर्षणाच्चासावपि | ४ | १५ | २९ | कामरूपी महारूपम् | ५ | ३६ | ९ |
| कर्षता वृक्षयोर्मध्ये | ५ | ६ | १७ | कामगर्भा तथेच्छा त्वम् | ५ | २ | ११ |
| कर्षकाणां कृषिवृत्तिः | ५ | १० | २९ | कामोऽवतीर्णः पुत्रस्ते | ५ | २७ | ३० |
| कलत्रपुत्रमित्रार्थ० | ६ | ५ | ५६ | कामः क्रोधस्तथा दर्पः | ३ | ९ | ३० |
| कलामुहूर्त्तादिमयश्च कालः | ४ | १ | ८४ | काम्योदकप्रदानं ते | ३ | ११ | ३८ |
| कलाकाष्ठानिमेषादि० | ३ | ५ | १८ | कारणं कारणस्यापि | १ | ९ | ४९ |
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४८२
| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कारूषा मालवाश्चैव | २ | ३ | १७ | किंकरैस्समुपानीतम् | ५ | ३१ | १४ |
| कार्त्तिक्यां पुष्करस्नाने | १ | २२ | ८९ | किञ्चित्परस्वं न हरेत् | ३ | १२ | ४ |
| कार्यकारयस्य यत्कार्यम् | १ | ९ | ४८ | किन्नरादन्तरिक्षस्तस्मात् | ४ | २२ | ५ |
| कालस्वरूपं विष्णोश्च | १ | ३ | ६ | किन्निमित्तमसौ शस्त्रैः | १ | १६ | ६ |
| कालस्तृतीयस्तस्यांशः | १ | २२ | २५ | किमनेनाल्पसारेण | ५ | १६ | ६ |
| कालनेमिर्हतो योऽसौ | ५ | १ | २३ | किमयं मानुषो भावो | ५ | ९ | २३ |
| कालस्वरूपी भगवान् | ५ | ३८ | ५८ | किमत्रानुष्ठेयमन्यथा | ४ | १३ | १४० |
| कालानलात्समुञ्जयः | ४ | १८ | ३ | किमर्थं मथितः पाणिः | १ | १३ | १० |
| कालियो दमितस्तोये | ५ | १३ | ४ | किमस्वाद्ध च मृष्टम् | २ | १५ | २७ |
| काले तत्रातिथिं प्राप्तम् | ३ | १५ | २३ | किमादित्यैः किं वसुभिः | ५ | ४ | ५ |
| कालेन गच्छता तौ तु | ५ | ६ | ३५ | किमिन्द्रेणाल्पवीर्येण | ५ | ४ | ४ |
| कालेन च कुमारम् | ४ | १२ | ३४ | किमिदं देवदेवेश | ५ | ७ | ३५ |
| कालेन गच्छता मित्रम् | १ | १२ | ८४ | किमिदमेकदैव | ४ | १३ | ११४ |
| कालेऽतीतेऽतिमहति | १ | १७ | २९ | किमेतदिति सिद्धानाम् | १ | ९ | १४ |
| कालेन न विना ब्रह्मा | १ | २२ | ३६ | किमुर्व्यामवनीपालाः | ५ | ४ | ८ |
| कालेन गच्छता सोऽथ | २ | १३ | ३१ | किरीटकुण्डलधरम् | ५ | ३४ | १८ |
| काले धनिष्ठा यदि नाम तस्मिन्... | ३ | १४ | १६ | किरीटहारकेयूर० | ६ | ७ | ८४ |
| कालेन गच्छता राजा | ३ | १८ | ६१ | किं करोमीति तान्सर्वान् | १ | १३ | ३५ |
| कालेन गच्छता तस्य | ४ | २ | ११२ | किं चापि बहुनोक्तेन | १ | १८ | २६ |
| कालेन गच्छता सौदासः | ४ | ४ | ४५ | किं चापि बहुनोक्तेन | १ | ८ | ३४ |
| कालो भवाय भूतानाम् | ५ | ३८ | ५५ | किं त्वेकं ममैतद्दुःख० | ४ | २ | १०७ |
| कालः क्रीडनकान्ते | १ | १२ | १८ | किं देवैः किं द्विजैर्वेदैः | ६ | १ | ५१ |
| कालः क्रीडनकानां यः | १ | १२ | १९ | किं देवैः किमनन्तेन | १ | १८ | १२ |
| काव्याशापाच्चाकालेनैव | ४ | १० | ७ | किं न पश्यसि दुग्धेन | ५ | २० | ५७ |
| काव्यालापांश्च ये केचित् | १ | २२ | ८५ | किं न दृष्टोऽमरपतिः | ५ | ४ | ६ |
| काशिराजबलं चैवम् | ५ | ३४ | २१ | किं न वेत्सि यथाऽहं च | ५ | ९ | २५ |
| काशिराजसुतेनेयम् | ५ | ३४ | ३५ | किं न वेत्ति नृशंसोऽयम् | ५ | १८ | २० |
| काशिराजश्च तामात्मजाम् | ४ | १३ | १२० | किं पुनर्यैस्तु संत्यक्ता | ३ | १८ | ९९ |
| काशिराजस्य विषये | ४ | १३ | ११६ | किं ममात्र विधेयमिति | ४ | २० | १८ |
| काशिराजगोत्रेऽवतीर्य | ४ | ८ | १० | किं वदामि स्तुतावस्य | १ | १२ | ४७ |
| काशिराजपत्नयाश्च | ४ | १३ | ११७ | किं वा सर्वजगत्स्रष्टः | १ | १२ | ६९ |
| काशी च भीमसेनात् | ४ | २० | ४६ | किं वृकैर्भक्षितो व्याघ्रैः | २ | १३ | २४ |
| काश्यपदुहिता सुमतिः | ४ | ४ | १ | किं श्रान्तोऽस्यल्पमध्वानम् | २ | १३ | ६१ |
| काश्यपतनयायास्तु | ४ | ४ | ६ | किं हेतुभिर्वदत्येषा | २ | १३ | ८८ |
| काश्यपः संहिताकर्ता | ३ | ६ | १८ | कीदृशं देवराज्यं ते | ५ | ३० | ७२ |
| काश्यस्य काशेयः | ४ | ८ | ७ | कीर्त्यते स्थिरकीर्तीनाम् | ४ | ६ | २ |
| काश्याकाशगुत्समद० | ४ | ८ | ५ | कुकुरभजमानशुचि० | ४ | १४ | १२ |
| काष्ठां गतो दक्षिणतः | २ | ८ | १० | कुकुराद्दधृष्टस्तस्माच्च | ४ | १४ | १३ |
| काष्ठाः पञ्चदशाख्याताः | १ | ३ | ८ | कुण्डिनं न प्रवेश्यामि | ५ | २६ | ९ |
| काष्ठा निमेषा दश पञ्च चैव | २ | ८ | ५९ | कुन्तेर्धृष्टिर्धृष्टेर्निधृतिः | ४ | १२ | ४१ |
| किंकराः पाशदण्डाश्च | ३ | ७ | ३८ | कुपितास्ते हरिं हन्तुम् | ५ | २६ | ८ |
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४८३
| श्लोका: | अंशा: | अध्या० | श्लो० | श्लोका: | अंशा: | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कुमारं चायुषमस्मै | ... ४ | ६ | ७३ | कृते कृते स्मृतेर्विप्र | ... ३ | २ | ४७ |
| कुमुदश्चोन्नतश्चैव | ... २ | ४ | २६ | कृते पापेऽनुतापो वै | ... २ | ६ | ४० |
| कुमुदैश्शरदम्भांसि | ... ५ | १० | ६ | कृते जपे हुते वह्नौ | ... ३ | ११ | ७८ |
| कुरुध्वं मम वाक्यानि | ... ३ | १८ | ५ | कृते युगे परं ज्ञानम् | ... ३ | २ | ५६ |
| कुरुक्षेत्रे चाम्भाजसरस्यन्याभिश्च | ... ४ | ६ | ६३ | कृतोद्यमौ च तावुभावुपलभ्य | ... ४ | १३ | ८१ |
| कुरु: पुरु: शतद्युम्न: | ... १ | १३ | ५ | कृतोपनयनं चैनमौर्व: | ... ४ | ३ | ३७ |
| कुरोरजनयत्पुत्रान् | ... १ | १३ | ६ | कृतौ सन्तिष्ठतेऽद्यम् | ... ४ | ५ | ३२ |
| कुर्वतस्ते प्रसन्नोऽहम | ... १ | २० | १७ | कृतौर्ध्वदैहिकं चैनम् | ... ५ | २१ | ११ |
| कुर्वतां याति य: काल: | ... ५ | २१ | ३ | कृतं त्रेता द्वापरश्च | ... १ | ३ | १५ |
| कुलद्वयेऽपि चोच्छिन्ने | ... ३ | १३ | ३३ | कृतं त्रेता द्वापरं च | ... ६ | १ | ५ |
| कुलालचक्रपर्यन्त: | ... २ | ८ | २७ | कृत्तिकादिषु ऋक्षेषु | ... २ | ९ | १५ |
| कुलालचक्रपर्यन्त: | ... २ | ८ | ३२ | कृत्यां च दैत्यगुरव: | ... १ | १६ | ९ |
| कुलालचक्रमध्यस्थ: | ... २ | ८ | ३५ | कृत्यया दह्यमानांस्तान् | ... १ | १८ | ३८ |
| कुलालचक्रनाभिस्तु | ... २ | ८ | ४० | कृत्या वाराणसीमेव | ... ५ | ३४ | ३९ |
| कुलं शीलं वय: सत्यम् | ... १ | १५ | ६५ | कृत्याकृत्यविधानञ्च | ... १ | १९ | ३१ |
| कुशस्थलीं तां च पुरीमुपेत्य | ... ४ | १ | ९४ | कृत्वा भारावतरणम् | ... ५ | ३७ | ३ |
| कुशस्थली या तव भूप रम्या | ... ४ | १ | ९१ | कृत्वाग्निहोत्रं स्वशरीरसंस्थम् | ... ३ | ९ | ३२ |
| कुशलो मन्दगश्चोष्ण: | ... २ | ४ | ४८ | कृषिवणिज्या तद्वच्च | ... ५ | १० | २८ |
| कुशस्यातिथि: | ... ४ | ४ | १०५ | कृष्णस्तानुत्सुकान्दृष्ट्वा | ... ५ | १० | १७ |
| कूटसाक्षी तथा सम्यक् | ... २ | ६ | ७ | कृष्ण कृष्ण हिये ह्येष: | ... ५ | ९ | २० |
| कूपेषूद्धृततोयेन | ... ३ | ११ | २६ | कृष्णश्चिन्तयामास | ... ४ | १३ | १३१ |
| कूष्माण्डा विविधै रूपै: | ... १ | १२ | १३ | कृष्णस्तु विमलं व्योम | ... ५ | १३ | १४ |
| कृच्छ्राच्चङ्क्रमणोत्थान० | ... ६ | ५ | ३० | कृष्णद्वैपायनं व्यासम् | ... ३ | ४ | ५ |
| कृतध्वजस्य पुत्रोऽभूत् | ... ६ | ६ | ८ | कृष्ण कृष्ण शृणुष्वेदम् | ... ५ | १२ | ६ |
| कृतसंवन्दनांश्चाह | ... ६ | २ | १० | कृष्णस्तु तत्स्तनं गाढम् | ... ५ | ५ | ९ |
| कृतकृत्यमिवात्मानम् | ... ५ | १९ | ३ | कृष्णमक्लिष्टकर्माणम् | ... ५ | ७ | ८२ |
| कृतसंवन्दनौ तेन | ... ५ | १८ | ३ | कृष्णश्चिच्छेद बाणैस्तान् | ... ५ | ३३ | ३२ |
| कृतज्ज्याद्राणञ्जय: | ... ४ | २२ | ७ | कृष्णरामौ विलोक्यासीत् | ... ५ | ३२ | २४ |
| कृतप्रणिपातस्तवादिकम् | ... ४ | १३ | १६ | कृष्णस्तोशालकं भूय: | ... ५ | २० | ७९ |
| कृतवीर्यादर्जुन: | ... ४ | ११ | ११ | कृष्णस्य ववृधे बाहु: | ... ५ | १६ | ११ |
| कृतपादादिशौचस्तु | ... ३ | ११ | ११९ | कृष्णश्शरच्चन्द्रमसम् | ... ५ | १३ | ५२ |
| कृतकाकृतयोर्मध्ये | ... २ | ७ | २० | कृष्ण कृष्ण जगन्नाथ | ... ५ | ३३ | ४१ |
| कृतमाला ताम्रपर्णी | ... २ | ३ | १३ | कृष्णाजिनं त्वं कवचम् | ... ६ | ६ | २२ |
| कृतकृत्योऽस्मि भगवन् | ... १ | २० | २६ | कृष्णे निबद्धहृदया: | ... ५ | १३ | २५ |
| कृतकृत्यमिवात्मानम् | ... १ | १२ | २ | कृष्णोऽपि बलभद्रमाह | ... ४ | १३ | ९५ |
| कृतानुरूपविवाहश्च | ... ४ | २ | ९६ | कृष्णोऽपि द्विक्रोशमात्रम् | ... ४ | १३ | ९८ |
| कृतवार्तात्ततस्तस्मात् | ... १ | ९ | १५ | कृष्णोऽपि तं दधारैव | ... ५ | ११ | २० |
| कृतावतंसस्स तदा | ... ५ | २५ | १७ | कृष्णो हि सहितो गोभि: | ... ५ | १२ | २६ |
| कृतार्थोऽहमसन्देह: | ... ६ | ८ | ९ | कृष्णोऽहमेष ललितम् | ... ५ | १३ | २६ |
| कृताच्चोग्रायुध: | ... ४ | १९ | ५३ | कृष्णोऽपि युयुधे तेन | ... ५ | २० | ७० |
| कृते युगे त्विहागम्य | ... ४ | २४ | ११९ | कृष्णोऽपि वसुदेवस्य | ... ५ | २० | ९२ |
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४८४
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृष्णोऽपि चिन्तयामास | ... ५ | २३ | ९ | कंसाय चाष्टमो गर्भः | ... ५ | १ | ६७ |
| कृष्णोऽपि घातयित्वारिम् | ... ५ | २४ | ६ | कंसाय नारदः प्राह | ... ५ | १५ | ३ |
| कृष्णोऽपि बलभद्राद्यैः | ... ५ | २६ | ५ | कंसे गृहीते कृष्णेन | ... ५ | २० | ९० |
| कृष्णोऽपि कुपितस्तेषाम् | ... ५ | ३७ | ४९ | कंसोऽपि कोपरक्ताक्षः | ... ५ | २० | ८२ |
| कृष्णो ब्रवीति राजार्हम् | ... ५ | २१ | १५ | कंसोऽपि तदुपश्रुत्य | ... ५ | १ | ६८ |
| कृष्यान्ता प्रथिता सीमा | ... ५ | १० | ३२ | कंसो नाम महाबाहुः | ... ५ | १२ | २१ |
| केचिच्चतुर्युगं यावत् | ... १ | १२ | ९३ | कंसः कुवलयापीडः | ... ५ | २९ | ५ |
| केचिन्निन्दां वेदानाम् | ... ३ | १८ | २५ | कः केन हन्यते जन्तुः | ... १ | १८ | ३१ |
| केचिन्नीलोत्पलश्यामाः | ... ६ | ३ | ३२ | क्रकचैः पाट्यमानानाम् | ... ६ | ५ | ४६ |
| केचिद्रासभवर्णाभाः | ... ६ | ३ | ३३ | क्रतुर्भर्गस्तथोर्णांयुः | ... २ | १० | १४ |
| केचित्पुरवराकाराः | ... ६ | ३ | ३६ | क्रतोश्च सन्ततिर्भार्या | ... १ | १० | ११ |
| केन बन्धेन बद्धोऽहम् | ... ६ | ५ | २२ | क्रथस्य स्नुषापुत्रस्य | ... ४ | १२ | ४० |
| केवलात्सुधृतिर्भूत् | ... ४ | १ | ३९ | क्रमेण विधिवद्यागम् | ... ६ | ६ | ३६ |
| केवलाद्वन्धुमान् | ... ४ | १ | ४३ | क्रमेण तत्तु बाहूनाम् | ... ५ | ३३ | ३८ |
| केशास्थिकण्टकामेध्य० | ... ३ | १२ | १५ | क्रमेण येन पीतोऽसौ | ... २ | १२ | ५ |
| केशिध्वजो विमुक्त्यर्थम् | ... ६ | ७ | १०५ | क्रमेणानेन जेष्यामः | ... ४ | २४ | १३० |
| केशिध्वज निबोध त्वम् | ... ६ | ७ | २ | क्रियमाणेऽभिषेके तु | ... ५ | १२ | १४ |
| केशिनो वदने तेन | ... ५ | १६ | १० | क्रियतां तन्महाभागाः | ... ५ | १ | २८ |
| केशी चापि बलोदग्रः | ... ५ | १६ | १ | क्रियते किं वृथा वत्स | ... १ | ११ | ७ |
| केशेष्वाकृष्य विगलत् | ... ५ | २० | ८६ | क्रियाहानिगृहे यस्य | ... ३ | १८ | ९८ |
| कैवर्त्तवटुपुलिन्द० | ... ४ | २४ | ६२ | क्रोडेन वत्सानाक्रम्य | ... ५ | ११ | ११ |
| को धर्मः कश्च वाधर्मः | ... ६ | ५ | २३ | क्रोष्टोस्तु यदुपुत्रस्य | ... ४ | १२ | १ |
| को नग्नः किं समाचारः | ... ३ | १७ | ४ | क्रौञ्चद्वीपो महाभाग | ... २ | ४ | ४६ |
| को नु स्वप्नस्सभाग्याभिः | ... ५ | १८ | २७ | क्रौञ्चद्वीपे द्युतिमतः | ... २ | ४ | ४७ |
| कोपं यच्छत राजानः | ... १ | १५ | ६ | क्रौञ्चश्च वामनश्चैव | ... २ | ४ | ५० |
| कोपः स्वल्पोऽपि ते नास्ति | ... ५ | ७ | ५३ | क्रौञ्चद्वीपः समुद्रेण | ... २ | ४ | ५७ |
| कोऽयं कथमयं मत्स्य० | ... ५ | २७ | ९ | क्रौञ्च्यो वैतालिकास्तद्वत् | ... ३ | ४ | २४ |
| कोऽयं विष्णुः सुदुर्बुद्धे | ... १ | १७ | २१ | क्रोधा तु जनयामास | ... १ | २१ | २४ |
| कोऽयं शक्रमखो नाम | ... ५ | १० | १८ | क्रौर्यमायामयं घोरम् | ... ३ | १७ | २१ |
| कोशलान्ध्रपुण्ड्रताम्र० | ... ४ | २४ | ६४ | क्लेशादुत्क्रान्तिमाप्नोति | ... ६ | ५ | ४२ |
| कौटिल्य एव चन्द्रगुप्तम् | ... ४ | २४ | २८ | क्व च त्वं पञ्चवर्षीयः | ... १ | १२ | १७ |
| कौपीनाच्छादनप्रायाः | ... ५ | ३० | २० | क्वचिद्रहन्तावन्योन्यम् | ... ५ | ६ | ३४ |
| कौरवाणां महीपत्वम् | ... ५ | ३५ | २३ | क्वचिद्गोभिस्समं रम्यम् | ... ५ | ६ | ४५ |
| कंसपलयस्ततः कंसम् | ... ५ | २१ | ७ | क्वचित्कदम्बस्रक्चित्री | ... ५ | ६ | ४६ |
| कंसस्य रजकः सोऽथ | ... ५ | १९ | १५ | क्व नाकपृष्ठगमनम् | ... २ | ६ | ४४ |
| कंसस्तदोद्विग्न मनाः | ... ५ | ४ | १ | क्व निवासो भवान्विप्र | ... २ | १५ | १८ |
| कंसस्तूर्णमुपेत्यैनाम् | ... ५ | ३ | २५ | क्व निवासस्तवेत्युक्तम् | ... २ | १५ | २३ |
| कंसस्य करदानाय | ... ५ | ३ | १९ | क्व पन्नगोऽल्पवीर्योऽयम | ... ५ | ७ | ५६ |
| कंसश्च त्वामुपादाय | ... ५ | १ | ८० | क्व यौवनोन्मुखीभूत० | ... ५ | २० | ६० |
| कंसस्तयोर्वररथम् | ... ५ | १ | ६ | क्व शरीरमशेषाणाम् | ... १ | १७ | ६२ |
| कंसाकंसवतीसुतनु० | ... ४ | १४ | २१ | क्वाथ्यतां तैलमध्ये च | ... ६ | ५ | ४८ |
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४८५
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्षणेन नाभवत्कश्चित् ... | ५ | ३७ | ५३ | खाण्डिक्यश्चाह तान्सर्वान् ... | ६ | ६ | २८ |
| क्षणेन शार्ङ्गनिर्मुक्तैः ... | ५ | ३४ | २० | खाण्डिक्योऽपि पुनर्दृष्ट्वा ... | ६ | ६ | ४१ |
| क्षणेनालङ्कृता पृथ्वी ... | ५ | ८ | १२ | खाण्डिक्योऽपि सुतं कृत्वा ... | ६ | ७ | १०३ |
| क्षणं भूत्वा त्वसौ तूष्णीम् ... | ५ | १३ | ९ | ख्यातिः सत्यथ सम्भूतिः ... | १ | ७ | २५ |
| क्षत्रवृद्धात्सहोत्रः ... | ४ | ८ | ४ | ख्यातिं भूतिं च सम्भूतिम् ... | १ | ७ | ७ |
| क्षत्रवृद्धसुतः ... | ४ | ९ | २५ | ग० | |||
| क्षत्रियाणामयं धर्मः ... | ६ | ७ | ३ | गंगाद्याः सरितस्तोयैः ... | १ | ९ | १०३ |
| क्षराक्षरमयो विष्णुः ... | १ | २२ | ६५ | गंगा गंगेति यैर्नाम ... | २ | ८ | १२१ |
| क्षात्रं कर्म द्विजस्योक्तम् ... | ३ | ८ | ३९ | गंगां शतद्रूं यमुनाम् ... | ३ | १४ | १८ |
| क्षारोदेन यथा द्वीपः ... | २ | ४ | १ | गच्छ त्वं दिव्यया गत्या ... | ५ | ३७ | ३४ |
| क्षितितलपरमाणवोऽनिलान्ते ... | ३ | ७ | १७ | गच्छन्तो जवनाशवेन ... | ५ | १८ | ३३ |
| क्षितेश्च भारं भगवान् ... | ५ | ३७ | २ | गच्छ पापे यथाकामम् ... | १ | १५ | ४० |
| क्षिप्तस्समुद्रे मत्स्येन ... | ५ | २७ | ११ | गच्छेदं ब्रूहि वायो त्वम् ... | ५ | २१ | १४ |
| क्षिप्तं वज्रमथेन्द्रेण ... | ५ | ३० | ६९ | गच्छैनं पितामहायाश्वम् ... | ४ | ४ | २६ |
| क्षिप्तः समुद्रे मत्स्यस्य ... | ५ | २७ | १७ | गजो योऽयमधो ब्रह्मन् ... | २ | १६ | १० |
| क्षीणशस्त्राश्च जगृहुः ... | ५ | ३७ | ४४ | गजः कुवलयापीडः ... | ५ | १५ | ११ |
| क्षीणासु सर्वमायासु ... | १ | १९ | २५ | गजः कुवलयापीडः ... | ५ | १५ | १७ |
| क्षीणाधिकारः स यदा ... | १ | २० | ३४ | गणं क्रोधवशं विद्धि ... | १ | २१ | २३ |
| क्षीर्ण पीतं सुरैः सोमम् ... | २ | १२ | ४ | गते सर्पे परिष्वज्य ... | ५ | ७ | ८१ |
| क्षीरमेकशफानां यत् ... | ३ | १६ | ११ | गते च तस्मिन् सुप्तमेव ... | ४ | १३ | ७१ |
| क्षीरवत्य इमा गावः ... | ५ | १० | २१ | गते सनातनस्यांशे ... | ४ | २४ | ११० |
| क्षीराब्धिः सर्वतो ब्रह्मन् ... | २ | ४ | ७२ | गते शक्रे ते गोपालाः ... | ५ | १३ | १ |
| क्षीराब्धौ श्रीः समुत्पन्ना ... | १ | ८ | १६ | गतेऽनुगमनं चक्रुः ... | ५ | १३ | ५७ |
| क्षीरोदो रूपधृक्तस्यै ... | १ | ९ | १०४ | गते तस्मिन्स भगवान् ... | ५ | ३७ | ७४ |
| क्षीरोदमध्ये भगवान् ... | १ | ९ | ८८ | गत्वा गत्वा निवर्त्तन्ते ... | १ | ६ | ४० |
| क्षीरोदस्योत्तरं कूलम् ... | ३ | १७ | १० | गत्वा च ब्रूहि कौन्तेयम् ... | ५ | ३७ | ६२ |
| क्षुतवतश्च मनोरिक्ष्वाकुः ... | ४ | २ | ११ | गदतो मम विप्रर्षे ... | ५ | ३४ | ३ |
| क्षुत्क्षामानन्धकारेऽथ ... | १ | ५ | ४२ | गन्तव्यं वसुदेवस्य ... | ५ | १९ | ११ |
| क्षुत्तृष्णोपशमं तद्वत् ... | १ | १७ | ६० | गन्धमादन वर्ष तु ... | २ | १ | २३ |
| क्षुत्तृष्णे देहधर्माख्ये ... | २ | १५ | २१ | गन्धमादनकैलासौ ... | २ | २ | ४२ |
| क्षुधस्य तस्य भुक्तेऽन्ने ... | २ | १५ | १९ | गन्धर्वयक्षरक्षांसि ... | २ | २ | ४८ |
| क्षेत्रज्ञः करणी ज्ञानम् ... | ६ | ७ | ९४ | गन्धर्वाप्सरसः सिद्धाः ... | २ | ५ | २४ |
| क्षोभितः स तया सार्द्धम् ... | १ | १५ | १३ | गन्धर्वयक्षदैत्याद्याः ... | ६ | ७ | ५७ |
| क्ष्वेलमानौ प्रगायन्तौ ... | ५ | ९ | ३ | गमनाय महाभाग ... | १ | १५ | २१ |
| ख० | गयामुपेत्य यः श्राद्धम् ... | ३ | १६ | ४ | |||
| खट्वाङ्गाद्दीर्घबाहुः ... | ४ | ४ | ८३ | गरुडक्षतवाहश्च ... | ५ | ३३ | २६ |
| खड्गमांसमतीवात्र ... | ३ | १६ | ३ | गरुडो वारुणं छत्रम् ... | ५ | ३० | १ |
| खसा तु यक्षरक्षांसि ... | १ | २१ | २५ | गरुडं च ददर्शाच्चैः ... | ५ | १२ | ४ |
| खाण्डिक्यजनकायाह ... | ६ | ५ | ८१ | गरुत्मानपि तुण्डेन ... | ५ | ३० | ६४ |
| खाण्डिक्यः कोऽभवद्ब्रह्मन् ... | ६ | ६ | ६ | गर्गश्च गोकुले तत्र ... | ५ | ६ | ८ |
| खाण्डिक्य संशयं प्रष्टुम् ... | ६ | ६ | २५ | गर्गाच्छिनिः ततश्च ... | ४ | १९ | २३ |
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४८६
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| गर्भजन्मजराज्ञान० | ६ | ५ | ९ | गृहान्ता द्रव्यसङ्घाताः | ६ | १ | २० |
| गर्भसंकर्षणात्सोऽथ | ५ | १ | ७६ | गृहीत्वामरराजेन | १ | ९ | ९ |
| गर्भश्च युवनाश्वस्य | ४ | २ | ५६ | गृहीतानिनिन्द्रियैरर्थान् | १ | १४ | ३५ |
| गर्भप्रच्युतिदोषेण | २ | १३ | १७ | गृहीतनीतिशास्त्रं तम् | १ | १९ | २७ |
| गर्भवासादि यावत्तु | १ | १७ | ५९ | गृहीतनीतिशास्त्रस्ते | १ | १९ | २८ |
| गर्भमात्मवधार्थाय | १ | २१ | ३५ | गृहीतो विष्टिना विप्रः | २ | १३ | ५६ |
| गर्भेषु सुखलेशोऽपि | १ | १७ | ६९ | गृहीतग्राह्यवेदश्च | ३ | ९ | ७ |
| गर्वमारोपिता यूयम् | ५ | ३५ | १७ | गृहीतविद्यो गुरवे | ३ | १० | १३ |
| गवामेतत्कृतं वाक्यम् | ५ | १२ | १६ | गृहीत्वा भ्रामयामास | ५ | ८ | ९ |
| गाण्डीवस्रिषु लोकेषु | ५ | ३८ | ५० | गृहीतास्त्रौ ततस्तौ तु | ५ | २१ | २६ |
| गार्ग्यं गोष्ठ्यां द्विजं श्यालः | ५ | २३ | १ | गृहीत्वा तां हलान्तेन | ५ | २५ | १० |
| गाधिश्च सत्यवतीं कन्याम् | ४ | ७ | १२ | गृहीतचिह्नवेषोऽहम् | ५ | ३४ | १० |
| गाधिरप्यतिरोषणाय | ४ | ७ | १४ | गृहीत्वा विधिवत्सर्वम् | ५ | ३५ | १० |
| गायतामन्यगोपानाम् | ५ | ६ | ४८ | गृहीता दस्युभिर्याश्च | ५ | ३८ | ७० |
| गायतोऽङ्गात्समुत्पन्नाः | १ | ५ | ४६ | गृह्णाति विषयान्नित्यम् | १ | १४ | ३४ |
| गायन्ति चैतत्पितरः कदा नु | ३ | १४ | १९ | गोपुरीषमुपादाय | ५ | ५ | १३ |
| गायन्ति देवाः किल गीतकानि | २ | ३ | २४ | गोकुले वसुदेवस्य | ५ | १ | ७४ |
| गायत्रं च ऋचश्चैव | १ | ५ | ५३ | गोत्रभेदभयाच्छक्तोऽपि | ४ | १३ | २८ |
| गावस्तु तेन पतता | ५ | ११ | १० | गोदावरी भीमरथी | २ | ३ | १२ |
| गावस्त्वतः समुद्भूताः | १ | १२ | ६१ | गोपवृद्धास्ततः सर्वे | ५ | ६ | २१ |
| गावश्शैलं ततश्चक्रुः | ५ | १० | ४६ | गोपगोपीजनैर्हृष्टैः | ५ | ११ | २१ |
| गिरितटे च सकलमेव | ४ | १३ | ४० | गोपालदारकों प्राप्तौ | ५ | २० | १९ |
| गिरियज्ञस्त्वयं तस्माद् | ५ | १० | ३६ | गोपांश्चाह हसञ्छौरिः | ५ | ११ | १७ |
| गिरिमूर्द्धनि कृष्णोऽपि | ५ | १० | ४७ | गोपाः केनेति केनेदम् | ५ | ६ | ४ |
| गीतावसाने च भगवन् | ४ | १ | ७० | गोपीपरिवृतो रात्रिम् | ५ | १३ | २३ |
| गीतं सनत्कुमारेण | ३ | १४ | ११ | गोपीकपोलसंश्लेषम् | ५ | १३ | ५५ |
| गीयमानः स गोपीभिः | ५ | ७ | ८३ | गोपैश्च पूर्ववद्रामः | ५ | २४ | २१ |
| गुणसाम्यमनुद्रिक्तम् | ६ | ४ | ३४ | गोपैस्सम्मानैससहितौ | ५ | ६ | ५१ |
| गुणप्रवृत्त्या भूतानाम् | २ | १४ | ५ | गोप्यश्च वृन्दशः कृष्ण० | ५ | १३ | २४ |
| गुणत्रयमयं ह्येतद् | १ | ७ | ४८ | गोप्यस्त्वन्या रुदन्त्यश्च | ५ | ७ | २५ |
| गुणसाम्ये ततस्तस्मिन् | १ | २ | २७ | गोप्यः पप्रच्छुरपराः | ५ | २४ | १२ |
| गुणसाम्यात् | १ | २ | ३३ | गोभिश्च चोदितः कृष्ण | ५ | १२ | ११ |
| गुणा न चास्य ज्ञायन्ते | १ | १३ | ५५ | गोमेदश्चैव चन्द्रश्च | २ | ४ | ७ |
| गुणाञ्जनगुणाधार० | १ | २० | १० | गोवाटमध्ये क्रीडन्तौ | ५ | ६ | १२ |
| गुरुदेवद्विजातीनाम् | ५ | २१ | ४ | गौतमादिभिरन्यैस्त्वम् | १ | ९ | २१ |
| गुरूणामपि सर्वेषाम् | १ | १८ | १६ | गौरवेणातिमहता | ५ | २० | ८९ |
| गुरूणामग्रतो वक्तुम् | ५ | १८ | २२ | गौरजः पुरुषो मेषः | १ | ५ | ५१ |
| गृत्समदस्य शौनकः | ४ | ८ | ६ | गौरी लक्ष्मीर्महाभागा | १ | ८ | २८ |
| गृहस्थस्य सदाचारम् | ३ | ११ | १ | गौरी कुमुद्वती चैव | २ | ४ | ५५ |
| गृहस्य पुरुषव्याघ्र | ३ | ११ | ४५ | गौरीं वाप्युद्वहेत्कन्याम् | ३ | १६ | २० |
| गृहाणि च यथान्यायम् | १ | ६ | १९ | गाः पालयन्तौ च पुनः | ५ | ८ | १ |
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४८७
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग्रहर्क्षतारकागर्भा | ५ | २ | १२ | चतुर्दंष्ट्रानागजांश्चाग्र्यान् | ५ | २९ | ३२ |
| ग्रहर्क्षताराधिष्ठ्यानि | २ | १२ | २५ | चतुर्युगाण्यशेषाणि | ६ | १ | ६ |
| ग्रहर्क्षतारकाचित्र० | ५ | १ | २० | चतुर्युगसहस्रान्ते | ६ | ३ | १४ |
| ग्राम्यारण्याः स्मृता ह्येताः | १ | ६ | २६ | चतुर्थस्स्यादंगिरसः | ३ | ६ | १४ |
| ग्राम्यो हरिरयं तासाम् | ५ | १८ | १८ | चतुःप्रकारतां तस्य | १ | २२ | ४३ |
| ग्राव्णि रत्ने च पारक्ये | ३ | ८ | २५ | चतुःपञ्चाब्दसम्भूतः | १ | ११ | ३४ |
| घ० | चत्वारिंशदष्टौ च | ४ | २ | १४ | |||
| घृतमात्रं च ममाहारः | ४ | ६ | ४६ | चत्वारिंशत्सहस्राणि | २ | ८ | ६ |
| च० | चत्वारि त्रीणि द्वे चैकम् | १ | ३ | १२ | |||
| चकर्ष पद्भ्यां च तदा | ५ | २० | १० | चत्वारि भारते वर्षे | २ | ३ | १९ |
| चकार सृज्य कृच्छ्राच्च | ५ | ३८ | २२ | चपलं चपले तस्मिन् | २ | १३ | ३० |
| चकार शङ्खनिर्घोषम् | ५ | ३० | ५६ | चम्पस्य हर्यंगः | ४ | १८ | २१ |
| चकार यानि कर्माणि | ५ | १ | ३ | चर्मकाणकुशैः कुर्यात् | ३ | ९ | २० |
| चकारानुदिनं चासौ | २ | १३ | १९ | चलत्स्वरूपमत्यन्तम् | १ | २२ | ७१ |
| चक्रप्रतापनिर्दग्धा | ५ | ३४ | ३८ | चलितं ते पुनर्ब्रह्म | २ | ८ | ८७ |
| चक्रमेतत्समुत्सृष्टम् | ५ | ३४ | २३ | चाक्षुषस्यान्तरे पूर्वम् | १ | १५ | १३२ |
| चक्रवर्त्तिस्वरूपेण | ३ | २ | ५७ | चाक्षुषे चान्तरे देवः | ३ | १ | ४१ |
| चक्रे नामान्यथैतानि | १ | ८ | ७ | चाक्षुषाश्च पवित्राश्च | ३ | २ | ४३ |
| चक्रे कर्म महच्छौरिः | ५ | ३४ | १ | चाक्षुषाच्चातिबलपराक्रमः | ४ | १ | २५ |
| चक्रं गदा तथा शार्ङ्गम् | ५ | ३७ | ५२ | चाणूरोऽत्र महावीर्यः | ५ | १५ | ७ |
| चक्षुश्च पश्चिमगिरीन् | २ | २ | ३७ | चाणूरमुष्टिकौ मल्लौ | ५ | १५ | १६ |
| चङ्क्रम्यमाणौ तौ रामम् | ५ | ३७ | ५४ | चाणूरेण ततः कृष्णः | ५ | २० | ६५ |
| चचाराश्रमपर्यन्ते | २ | १३ | २० | चाणूरेण चिरं कालम् | ५ | २० | ७४ |
| चतुर्युगाणां संख्याता | १ | ३ | १८ | चाणूरे निहते मल्ले | ५ | २० | ८० |
| चतुर्दशगुणो ह्येषः | १ | ३ | २२ | चान्द्रस्य तस्य युवनाश्वस्य | ४ | २ | ३७ |
| चतुर्विभागः संसृष्टौ | १ | २२ | २३ | चापाचार्यस्य तस्यासौ | ३ | १८ | ५८ |
| चतुराशीतिसाहस्रः | २ | २ | ८ | चारयन्तं महावीर्यम् | ५ | १२ | ३ |
| चतुर्दशसहस्राणि | २ | २ | ३१ | चारुदेष्णं सुदेष्णं च | ५ | २८ | १ |
| चतुर्गुणोत्तरे चोर्ध्वम् | २ | ७ | १४ | चारुविन्दं सुचारुं च | ५ | २८ | २ |
| चतुर्युगान्ते वेदानाम् | ३ | २ | ४६ | चारुवर्मा चारुकश्च | ५ | ३७ | ४७ |
| चतुर्दशभिरेतैस्तु | ३ | २ | ५० | चिक्षेप च शिलापृष्ठे | ५ | ३ | २६ |
| चतुर्युगेऽप्यसौ विष्णुः | ३ | २ | ५५ | चिक्षेप स च तां क्षिप्ताम् | ५ | ३६ | १७ |
| चतुर्धा स बिभेदाथ | ३ | ४ | १७ | चित्तं च वित्तं च नृणां विशुद्धम् | ३ | १४ | २० |
| चतुष्टयेन भेदेन | ३ | ६ | १९ | चित्रसेनविचित्राद्याः | ३ | २ | ४१ |
| चतुर्थश्चाश्रमो भिक्षोः | ३ | ९ | ३४ | चित्रांगदस्तु बाल एव | ४ | २० | ३५ |
| चतुर्दशो भूतगणो य एषः | ३ | ११ | ५५ | चिन्तयामास चाक्रूरः | ५ | १७ | २ |
| चतुर्दश्यष्टमी चैव | ३ | ११ | ११८ | चिन्तयन्ती जगत्सूतिम् | ५ | १३ | २२ |
| चतुष्पथं चैत्यतरूम् | ३ | १२ | १३ | चिन्तयन्निति गोविन्दम् | ५ | १८ | १ |
| चतुष्पथान्नमस्कुर्यात् | ३ | १२ | ३२ | चिन्तयेत्तन्मयो योगी | ६ | ७ | ८६ |
| चतुर्थेऽह्नि च कर्तव्यम् | ३ | १३ | १४ | चिरं नष्टेन पुत्रेण | ५ | २७ | ३२ |
| चतुर्णां यत्र वर्णानाम् | ३ | १८ | ४९ | चीर्णं तपो यत्तु जलाश्रयेण | ४ | २ | १२३ |
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४८८
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चेरतुर्लोकसिद्धाभिः | ... | ५ | ९ | ६ | जमदग्निरिक्ष्वाकुवंशोद्भवस्य | ... | ४ |
| चैत्रकिम्पुरुषाद्याश्च | ... | ३ | १ | १२ | जम्बूद्वीपं महाभाग | ... | २ |
| चैत्यचत्वरतीर्थेषु | ... | ३ | ११ | १२२ | जम्बूद्वीपे विभागांश्च | ... | २ |
| चोरो विलोहे पतति | ... | २ | ६ | १४ | जम्बूद्वीपे स्वरो यस्तु | ... | २ |
| च्यवनात्सुदासः सुदासात् | ... | ४ | १९ | ७१ | जम्बूद्वीपः समस्तानाम् | ... | २ |
| छ० | जम्बूप्लक्षाह्वयौ द्वीपौ | ... | २ | ||||
| छत्रं यत्सलिलस्रावि | ... | ५ | २९ | १० | जम्बूद्वीपं समावृत्य | ... | २ |
| छायासंज्ञा ददौ शापम् | ... | ३ | २ | ५ | जम्बूद्वीपस्य विस्तारः | ... | २ |
| छायासंज्ञासुतो योऽसौ | ... | ३ | २ | १३ | जम्बूद्वीपस्य सा जम्बूः | ... | २ |
| छिनत्ति वीरूधो यस्तु | ... | २ | १२ | १० | जम्बूवृक्षप्रमाणस्तु | ... | २ |
| छिन्ने बाहुवने तत्त | ... | ५ | ३३ | ३९ | जय गोविन्द चाणूरम् | ... | ५ |
| ज० | जयद्रथो ब्रह्मक्षत्रान्तराल० | ... | ४ | ||||
| जगदादौ तथा मध्ये | ... | १ | २२ | ३४ | जयध्वजात्तालजङ्घः | ... | ४ |
| जगतः प्रलयोत्पत्त्योः | ... | ३ | ३ | २४ | जयाखिलज्ञानमय | ... | १ |
| जगदेतदनाधारम् | ... | ३ | १८ | १९ | जयेश्वराणां परमेश केशव | ... | १ |
| जगत्यर्थं जगन्नाथ | ... | ५ | ७ | ३८ | जरायुजाण्डजादीनाम् | ... | ३ |
| जगदेतन्महाश्चर्यं | ... | ५ | १९ | ७ | जरासन्धस्य पुत्रः सहदेवः | ... | ४ |
| जगदेतज्जगन्नाथ | ... | ५ | २० | १०१ | जरासन्धसुते कंसः | ... | ५ |
| जगतामुपकाराय | ... | ६ | ७ | ७२ | जरासन्धादयो येऽन्ये | ... | ५ |
| जगाम वसुधा क्षोभम् | ... | १ | १६ | ३ | जराजर्जरदेहश्च | ... | ६ |
| जगाम सोऽभिषेकार्थम् | ... | २ | १३ | १२ | जलधिर्द्विज गोविन्दः | ... | १ |
| जग्मुर्मुदं ततो देवाः | ... | १ | ९ | ९३ | जलदश्च कुमारश्च | ... | २ |
| जघान धरणीं पादैः | ... | ५ | १६ | १३ | जलस्य नाग्निसंसर्गः | ... | ६ |
| जघान तेन निश्शेषान् | ... | ५ | ३७ | ५० | जलेचरा भूनिलयाः | ... | ३ |
| जज्वाल भगवांश्चोच्चैः | ... | १ | ९ | ११४ | जहि कृत्यामिमामुग्राम् | ... | ५ |
| जठरो देवकूटश्च | ... | २ | २ | ४१ | जह्नोश्च सुमन्तुर्नाम | ... | ४ |
| जडानामविवेकानाम् | ... | १ | १९ | ४५ | जह्नोस्तु सुरथो नाम | ... | ४ |
| जतुगृहदधानां पाण्डुतनयानाम् | ... | ४ | १३ | ७० | जातस्त्रैलोक्यविख्याते | ... | १ |
| जनस्थैर्योगिभिर्देवः | ... | १ | ३ | २५ | जातस्य जातकर्मादि० | ... | ३ |
| जनलोकतैस्सिद्धैः | ... | १ | ४ | १० | जातस्य नियतो मृत्युः | ... | ५ |
| जनलोकतैस्सिद्धैः | ... | ६ | ४ | ५ | जातमात्रश्च म्रियते | ... | ६ |
| जनश्रद्धेयमित्येतत् | ... | ३ | १८ | ३० | जातिस्मरत्वादुद्विग्नः | ... | २ |
| जनकगृहे च माहेश्वरम् | ... | ४ | ४ | ९२ | जातिस्मरेण कथितः | ... | ३ |
| जननाज्जनकसंज्ञाम् | ... | ४ | ५ | २२ | जातुकर्णोऽभवन्मत्तः | ... | ३ |
| जनकराजश्च | ... | ४ | १३ | १०३ | जातेऽपि तस्मिन्नमितेतजोभिः | ... | ४ |
| जनमेजयस्यापि | ... | ४ | २१ | ३ | जातेन च तेनाखिलम् | ... | ४ |
| जनमेजयात्सुमतिः | ... | ४ | १ | ५८ | जातोऽसि देवदेवेश | ... | ५ |
| जन्मन्यत्र महद्दुःखम् | ... | १ | १७ | ६८ | जातो नामैष कं धास्यतीति | ... | ४ |
| जन्मदुःखान्यनेकानि | ... | ६ | ५ | २० | जानामि भारते वंशे | ... | ५ |
| जन्म बाल्यं ततः सर्वः | ... | १ | १७ | ५६ | जानाम्यहं यथा ब्रह्मन् | ... | २ |
| जन्मोपभोगलिप्सार्थम् | ... | ६ | ७ | ५ | जानामि ते पतिं शक्रम् | ... | ५ |
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४८९
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जानीम नैतत्क्व वयं विलीने | २ | ३ | २६ | ज्योतिर्धामा पृथुः काव्यः | ३ | १ | १८ |
| जाम्बवतीं चान्तःपुरे | ४ | १३ | ६३ | ज्योतींषि विष्णुर्भुवनानि विष्णुः | २ | १२ | ३८ |
| जाम्बवानप्यमलमणिरत्न० | ४ | १३ | ३३ | ज्योत्स्नागमे तु बलिनः | १ | ५ | ३९ |
| जायमानास्तु पूर्वे च | २ | ८ | ८८ | ज्योत्स्ना रात्र्यहनी सन्ध्या | १ | ५ | ४० |
| जायमानः पुरीषासृक् | ६ | ५ | १४ | ज्योत्स्ना लक्ष्मीः प्रदीपोऽसौ | १ | ८ | ३० |
| जितेष्वसुरसङ्घेषु | ५ | ३८ | ७२ | ज्योत्स्ना वासरगर्भा त्वम् | ५ | २ | १० |
| जिते तस्मिन्सुदुर्वृत्ते | ५ | २२ | ९ | ज्वराक्षिरोगातीसार० | १ | १७ | ८८ |
| जितं बलेन धर्मेण | ५ | २८ | २२ | ज्वलज्जटाकलापस्य | १ | ९ | २३ |
| जित्वा त्रिभुवनं सर्वम् | १ | १७ | ६ | ज्वालापरिष्कृताशेष० | ५ | ३४ | ४३ |
| जिह्वा ब्रवीत्यहमिति | २ | १३ | ८७ | ज्वाल्यतामसुरो वह्निः | १ | १७ | ४५ |
| जीर्यन्ति जीर्यतः केशाः | ४ | १० | २७ | त० | |||
| जुषन् रजोगुणं तत्र | १ | २ | ६१ | तच्च विष्णोः परं रूपम् | ६ | ७ | ५४ |
| जुहुयाद्व्यञ्जनक्षार० | ३ | १५ | २६ | तच्च द्विधागतम् | ४ | १९ | ६६ |
| जृम्भकास्त्रेण गोविन्दः | ५ | ३३ | २४ | तच्च पुत्रत्रितयमपि | ४ | १९ | २६ |
| जृम्भाभिभूतस्तु हरः | ५ | ३३ | २५ | तच्च रूपमुत्फुल्लपद्म० | ४ | १५ | १३ |
| जृम्भिते शंकरे नष्टे | ५ | ३३ | २७ | तच्च शुचिना ध्रियमाणम् | ४ | १३ | ३० |
| जैमिनिं सामवेदस्य | ३ | ४ | ९ | तच्च विपरीतं कुर्वत्याः | ४ | ७ | २८ |
| ज्ञातश्चतुर्विधो राशिः | ६ | ८ | ७ | तच्च तथैवानुष्ठितम् | ४ | २ | ९८ |
| ज्ञातमेतन्मया त्वत्तः | ३ | ३ | १ | तच्च कलशमपरिमेय० | ४ | २ | ५३ |
| ज्ञातमेतन्मया युष्माभिः | ४ | २ | २५ | तच्च ज्ञानमयं व्यापि | १ | २२ | ४२ |
| ज्ञातोऽसि देवदेवेश | ५ | ७ | ४८ | तच्च त्रिमार्गपरिवृत्तः | ४ | १ | ६९ |
| ज्ञात्वा प्रमाणं पृथ्व्याश्च | १ | १५ | ९९ | तच्चास्य भ्रातृशतम् | ४ | २ | २ |
| ज्ञात्वा तं वासुदेवेन | ५ | ३४ | २९ | तच्चारिचक्रमपास्त० | ४ | १२ | १६ |
| ज्ञानस्वरूपमत्यन्त० | १ | २ | ६ | तच्चित्तविमलाह्लाद० | ५ | १३ | २१ |
| ज्ञानस्वरूपमखिलम् | १ | ४ | ४० | तच्छचीराम्बरादिषु | ४ | १३ | ९९ |
| ज्ञानत्रयस्य वै तस्य | १ | २२ | ४९ | तच्छापाच्च मित्रावरुणयोः | ४ | ५ | ११ |
| ज्ञानमेव परं ब्रह्म | २ | ६ | ५० | तच्छिरः पतितं तत्र | ५ | ३४ | २८ |
| ज्ञानस्वरूपो भगवान्यतोऽसौ | २ | १२ | ३९ | तच्छेषं मणिके पृथ्वी | ३ | ११ | ४४ |
| ज्ञानशक्तिबलैश्वर्य | ६ | ५ | ७९ | तच्छ्रुत्वा तत्र ते गोपाः | ५ | ७ | २० |
| ज्ञानप्रवृत्तिनियमैक्यमयाय पुंसः | ६ | ८ | ६२ | तच्छ्रुत्वा यादवास्सर्वं | ५ | ३५ | ६ |
| ज्ञानात्मा ज्ञानयोगेन | ६ | ४ | ४३ | तज्जन्मदिनमर्त्यर्थम् | ५ | ३ | ३ |
| ज्ञानात्मकस्यामलसत्त्वराशेः | ५ | १७ | ३२ | ततश्च निष्क्रम्य | ४ | १३ | १४६ |
| ज्ञानादात्यन्तिकः प्रोक्तः | १ | ७ | ४३ | ततश्चासौ भगवानकथयत् | ४ | १ | ७१ |
| ज्ञानं विशुद्धं विमलं विशोकम् | २ | १२ | ४४ | ततश्चितास्थं तं भूयः | ३ | १८ | ९३ |
| ज्ञेया ब्रह्मर्षयः पूर्वम् | ३ | ६ | ३० | ततस्सा पितरं तन्वी | ३ | १८ | ८८ |
| ज्येष्ठामूले सिते पक्षे | ६ | ८ | ३८ | ततस्तु जनको राजा | ३ | १८ | ८५ |
| ज्येष्ठा मूले सिते पक्षे | ६ | ८ | ३७ | ततस्स दिव्यया दृष्ट्या | ३ | १८ | ६५ |
| ज्येष्ठं च राममित्याह | ५ | ६ | ९ | ततस्तु वैश्वदेवाख्यम् | ३ | १५ | ५० |
| ज्योतिराद्यमनौपम्यम् | १ | १४ | २४ | ततस्स्ववर्णधर्मा ये | ३ | १३ | २२ |
| ज्योतिष्मतः कुशद्वीपे | २ | ४ | ३५ | ततश्च प्राह भगवान् | १ | १ | २८ |
| ज्योतिष्मान्दशमस्तेषाम् | २ | १ | ८ | ततस्तु तत्परं ब्रह्म | १ | २ | २८ |
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४९०
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ततश्चुक्रोध भगवान् | १ | ९ | ११ | ततस्सा ब्राह्मणी बहुशस्तम् | ४ | ४ | ६१ |
| ततस्ते जगुहृर्दैत्याः | १ | ९ | १०८ | ततश्चातिकोपसमन्विता | ४ | ४ | ६४ |
| ततस्तमृषयः पूर्वम् | १ | १३ | १५ | ततस्तस्य द्वादशाब्द० | ४ | ४ | ६७ |
| ततस्ते मुनयः सर्वे | १ | १३ | २७ | ततश्च समस्तशस्त्राणि | ४ | ६ | १७ |
| ततश्च मुनयो रेणुम् | १ | १३ | ३० | ततश्च भगवान् | ४ | ६ | १९ |
| ततस्तत्सम्भवा जाताः | १ | १३ | ३६ | ततश्चोर्वशीपुरूरवसोः | ४ | ६ | ५१ |
| ततस्तावूचतुर्विप्रान् | १ | १३ | ५४ | ततश्चोन्मत्तरूपो जाये | ४ | ६ | ६४ |
| ततस्तु नृपतिर्दिव्यम् | १ | १३ | ६९ | ततस्तामृचीकः कन्याम् | ४ | ७ | १६ |
| ततस्तु पृथिवीपालः | १ | १३ | ६५ | ततश्चान्ये | ४ | ७ | ३८ |
| ततस्तं प्राह वसुधा | १ | १३ | ७२ | ततश्च कुवलयनामानम् | ४ | ८ | १५ |
| तत उत्सारयामास | १ | १३ | ८२ | ततश्च सत्यकेतुस्तस्मात् | ४ | ८ | २० |
| ततश्च देवैर्मुनिभिः | १ | १३ | ९० | ततश्च बहुतिथे काले | ४ | ९ | १७ |
| ततस्ते तत्पितुः श्रुत्वा | १ | १४ | १२ | ततस्तानपेतधर्माचार० | ४ | ९ | २१ |
| ततस्तानाह भगवान् | १ | १४ | ४७ | ततश्च स्वातिः | ४ | १२ | २ |
| ततस्तमूचुर्वरदम् | १ | १४ | ४८ | ततश्चांशुस्तस्माच्च | ४ | १२ | ४३ |
| ततस्स साध्वसो विप्रः | १ | १५ | ३१ | ततश्चानमित्रस्तथा | ४ | १३ | ९ |
| ततस्तैश्शतशो दैत्यैः | १ | १७ | ३४ | ततस्स्वस्पष्टमूर्तिधरम् | ४ | १३ | १३ |
| ततश्च मृत्युमभ्येति | १ | १७ | ५७ | ततस्तमाताम्रोर्ज्वलम् | ४ | १३ | १५ |
| ततस्तं चिक्षिपुः सर्वे | १ | १९ | १२ | ततश्चास्य युध्यमानस्य | ४ | १३ | ५० |
| ततस्ते सत्वरा दैत्याः | १ | १९ | ५५ | ततस्तत्प्रदानाद्वज्रात् | ४ | १३ | ६६ |
| ततश्चचाल चलता | १ | १९ | ५६ | ततश्चासावानकदुन्दुभि० | ४ | १४ | २९ |
| ततश्च भारतं वर्षम् | २ | १ | ३२ | ततश्च तत्कालकृतानाम् | ४ | १५ | १२ |
| ततस्तमः समावृत्य | २ | ४ | ९५ | ततस्तमेवाक्रोशेषु | ४ | १५ | १४ |
| ततश्च नरका विप्र | २ | ६ | १ | ततश्च सकलजगन्महातरु० | ४ | १५ | ३० |
| ततश्च मिथुनस्यान्ते | २ | ८ | ३१ | ततश्च पौरवं दुष्यन्तम् | ४ | १६ | ५ |
| ततश्चाज्याहुतिद्वारा | २ | ८ | १०६ | ततश्चित्ररथः | ४ | १८ | १६ |
| ततश्च तत्कालकृताम् | २ | १३ | ३३ | ततश्चम्पो यश्चम्पाम् | ४ | १८ | २० |
| ततस्सौवीरराजस्य | २ | १३ | ५१ | ततश्च हर्यश्वः | ४ | १९ | ५८ |
| ततस्स ऋच उद्धृत्य | ३ | ४ | १३ | ततश्चोपरिचरो वसुः | ४ | १९ | ८० |
| ततश्च नाम कुर्वीत | ३ | १० | ८ | ततश्चाशेषराष्ट्रविनाशम् | ४ | २० | १५ |
| ततस्स्ववर्णधर्मेण | ३ | ११ | २३ | ततश्च तमूचुर्ब्राह्मणाः | ४ | २० | १६ |
| ततस्स भगवान् किञ्चित् | ४ | १ | ८२ | ततस्ते ब्राह्मणाः | ४ | २० | २७ |
| ततश्चासौ विकुक्षिः | ४ | २ | १८ | ततश्च बृहद्राजः | ४ | २२ | ६ |
| ततश्च शतक्रतोः | ४ | २ | ३१ | ततश्च क्षुद्रकस्ततश्च | ४ | २२ | ९ |
| ततस्तु मान्धाता | ४ | २ | ६३ | ततश्च सेनजित्ततश्च | ४ | २३ | ५ |
| ततश्च मान्धात्रा | ४ | २ | ८६ | ततश्च विशाखयूपः | ४ | २४ | ४ |
| ततश्च पितृराज्यापहरणात् | ४ | ३ | ४० | ततश्च शिशुनाभः | ४ | २४ | ९ |
| ततश्चासमञ्जसचरित० | ४ | ४ | १२ | ततश्चाजातशत्रुः | ४ | २४ | १४ |
| ततस्तत्तनयाश्च | ४ | ४ | १८ | ततश्च नव चैतानन्दान् | ४ | २४ | २६ |
| ततश्चोद्यतायुधा दूरात् | ४ | ४ | २१ | ततश्च कृष्णनामा | ४ | २४ | ४४ |
| ततस्तेनापि भगवता | ४ | ४ | २२ | ततश्चारिष्टकर्मा | ४ | २४ | ४६ |
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४९१
| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ततष्षोडश शकाः | ४ | २४ | ५२ | ततश्चापो हतरसाः | ६ | ४ | १८ |
| ततश्चाष्टौ यवनाः | ४ | २४ | ५३ | ततस्तु मूलमासाद्य | ६ | ४ | २३ |
| ततश्च एकादश भूपतयः | ४ | २४ | ५४ | ततश्शब्द्गुणं तस्य | ६ | ४ | २७ |
| ततस्तत्पुत्रास्त्रयोदश | ४ | २४ | ५७ | ततस्स मन्त्रिभिस्सार्द्धम् | ६ | ६ | २६ |
| ततश्च कोशलायां तु | ४ | २४ | ५९ | ततस्तमभ्युपेत्याह | ६ | ६ | ३२ |
| ततश्चानुदिनमल्पल्प० | ४ | २४ | ७३ | ततस्सर्वं यथावृत्तम् | ६ | ६ | ३३ |
| ततश्चार्थ एवाभिजनहेतुः | ४ | २४ | ७४ | ततस्तौ जातहर्षौ तु | ५ | १ | २ |
| ततश्च खनित्रः | ४ | १ | २३ | ततस्त्वान्दोलिकाभिश्च | ५ | १ | ८ |
| ततश्चातिविभूतिः | ४ | १ | २८ | ततस्तत्रातिरूक्षेऽपि | ५ | ६ | २९ |
| ततश्च नरः | ४ | १ | ४० | ततस्तद्गोकुलं सर्वम् | ५ | ११ | १३ |
| ततश्च तृणविन्दुः | ४ | १ | ४६ | ततश्चन्द्रः | ४ | १ | ५१ |
| ततश्चालम्बुसानाम् | ४ | १ | ४८ | ततश्च कृशाश्वो नाम | ४ | १ | ५५ |
| ततश्शङ्खमुपाधासीत् | ५ | ३० | २ | ततश्च रथीतरः | ४ | २ | ९ |
| ततस्समस्तदेवानाम् | ५ | ३० | ५३ | ततश्च कृशाश्वः | ४ | २ | ४६ |
| ततश्शरसहस्रेण | ५ | ३० | ६५ | ततश्च सुमनास्तस्यापि | ४ | ३ | २० |
| ततश्शङ्खमुपाध्माय | ५ | ३१ | १० | ततश्चाभिषेकमंगलम् | ४ | ४ | ९८ |
| ततस्ते यादवास्सर्वे | ५ | ३१ | १३ | ततश्च धृष्टकेतुः | ४ | ५ | २६ |
| ततस्सकलचित्तज्ञाः | ५ | ३२ | १२ | ततश्चैवमगायत | ४ | १० | २२ |
| ततस्त्रिपादस्त्रिशिराः | ५ | ३३ | १४ | ततश्च सेनजित् | ४ | १९ | ३५ |
| ततस्स युद्ध्यमानस्तु | ५ | ३३ | १६ | ततश्च विष्वकसेन० | ४ | १९ | ४६ |
| ततश्च क्षान्तमेवेति | ५ | ३३ | १८ | ततश्च ऋक्षोऽन्योऽभवत् | ४ | २० | ६ |
| ततस्समस्तसैन्येन | ५ | ३३ | २१ | ततस्ते पुनरप्यूचुः | ४ | २० | १९ |
| ततस्तु केशवोग्रोगम् | ५ | ३४ | १४ | ततस्सत्यजित् | ४ | २३ | १० |
| ततश्शाङ्ङ्गधनुर्मुक्तैः | ५ | ३४ | २६ | ततस्त्वां शतदुकूछ्रकः | ५ | १ | ८१ |
| ततस्तद्वचनं श्रुत्वा | ५ | ३५ | ११ | ततश्च दामोदरताम् | ५ | ६ | २० |
| ततस्तु कौरवास्सम्बम् | ५ | ३५ | ३८ | ततस्तमतिघोराक्षम् | ५ | १४ | ७ |
| ततस्स वानरोऽथैत्य | ५ | ३६ | १३ | ततस्समस्तगोपानाम् | ५ | १५ | १९ |
| ततस्ते यौवनोन्मत्ताः | ५ | ३७ | ७ | ततस्तलप्रहारेण | ५ | १९ | १६ |
| ततस्ते यादवास्सर्वे | ५ | ३७ | ३८ | ततस्तां चिबुके शौरिः | ५ | २० | ९ |
| ततश्चान्योन्यमभ्येत्य | ५ | ३७ | ४३ | ततस्तूत्प्लुत्य वेगेन | ५ | २० | ४० |
| ततश्चार्णवमध्येन | ५ | ३७ | ५१ | ततस्सान्दीपनिं काश्यम् | ५ | २१ | १९ |
| ततश्च ददृशे तत्र | ५ | ३७ | ७० | ततस्तस्याः सुवचनम् | ५ | २५ | १३ |
| ततस्तं भगवानाह | ५ | ३७ | ७२ | ततस्स्नातस्य वै कान्तिः | ५ | २५ | १५ |
| ततस्ते पापकर्मणः | ५ | ३८ | १४ | ततश्च पौण्ड्रकश्रीमान् | ५ | २६ | ७ |
| ततश्शरेषु क्षीणेषु | ५ | ३८ | २७ | ततस्तस्याः पिता गान्दिनी | ४ | १३ | १२४ |
| ततस्सुदुःखितो जिष्णुः | ५ | ३८ | २९ | ततोऽर्जुनो धनुर्दिव्यम् | ५ | ३८ | २१ |
| ततस्त्रितयमप्येतत् | ६ | २ | ३६ | ततो राजा हतां श्रुत्वा | ६ | ६ | १४ |
| ततस्सम्पूज्य ते व्यासम् | ६ | २ | ३८ | ततो गजकुलप्रख्याः | ६ | ३ | ३१ |
| ततस्स भगवान् विष्णुः | ६ | ३ | १७ | ततो दग्धा जगत्सर्वम् | ६ | ३ | ३० |
| ततस्तस्यानुभावेन | ६ | ३ | २० | ततो निर्दग्धवृक्षाम्बु | ६ | ३ | २३ |
| ततस्तापपरीतास्तु | ६ | ३ | २८ | ततो यान्यल्पसाराणि | ६ | ३ | १५ |
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४९२
| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ततो निर्भर्त्स्य कौन्तेयः | ... | ५ | ३८ | १९ | ततोऽन्यदन्नमादाय | ... | ३ |
| ततो वायुर्विकुर्वाणः | ... | १ | २ | ४० | ततोऽन्यानि ददौ तस्मै | ... | १ |
| ततो यष्टिप्रहरणाः | ... | ५ | ३८ | १८ | ततो यथाभिलषिता | ... | १ |
| ततो लोभस्समभवत् | ... | ५ | ३८ | १३ | ततो ननाश त्वरिता | ... | १ |
| ततोऽर्जुनः प्रेतकार्यम् | ... | ५ | ३८ | ५ | ततो गुरुगृहे बालः | ... | १ |
| ततोऽर्घ्यमादाय तदा | ... | ५ | ३७ | ५६ | ततो विलोक्य तं स्वस्थम् | ... | १ |
| ततो बलेन कोपेन | ... | ५ | ३६ | १९ | ततो भगवता तस्य | ... | १ |
| ततो विध्वंसयामास | ... | ५ | ३६ | ५ | ततो दैत्या दानवाश्च | ... | १ |
| ततो निर्यातयामासुः | ... | ५ | ३५ | ३५ | ततो रात्रिः क्षयं याति | ... | २ |
| ततो विदारिता पृथ्वी | ... | ५ | ३५ | २१ | ततो राज्यद्युतिं प्राप्य | ... | १ |
| ततो ज्वालाकरालास्या | ... | ५ | ३४ | ३३ | ततो मनुष्याः पशवः | ... | १ |
| ततो हाहाकृते लोके | ... | ५ | ३४ | २५ | ततो विवस्वानाख्याते | ... | ३ |
| ततो बलेन महता | ... | ५ | ३४ | १५ | ततो व्यासो भरद्वाजः | ... | ३ |
| ततोऽनिरुद्धमारोप्य | ... | ५ | ३३ | ५२ | ततोऽत्र मत्सुतो व्यासः | ... | ३ |
| ततोऽर्कशतसङ्घात० | ... | ५ | ३३ | ३५ | ततोऽनन्तरसंस्कार० | ... | ३ |
| ततोऽग्नीन्भगवान्यञ्च | ... | ५ | ३३ | २० | ततोऽहं रक्षसां सत्रम् | ... | १ |
| ततो गुहार्चनं कुर्यात् | ... | ३ | ११ | ४१ | ततोऽन्यं स तदा दध्यौ | ... | १ |
| ततो गरुडमारुह्य | ... | ५ | ३३ | १२ | ततोऽर्वाक्स्रोतसां सर्गः | ... | १ |
| ततो हाहाकृतं सर्वम् | ... | ५ | ३० | ६८ | ततो देवासुरपितॄन् | ... | १ |
| ततो दिशो नभश्चैव | ... | ५ | ३० | ५७ | ततो दुर्गाणि च यथा० | ... | १ |
| ततो निरीक्ष्य गोविन्दः | ... | ५ | ३० | ५५ | ततो ब्रह्मात्मसम्भूतम् | ... | १ |
| ततो ददर्श कृष्णोऽपि | ... | ५ | ३० | ३० | ततो धन्वन्तरिर्देवः | ... | १ |
| ततोऽनिरुद्धमादाय | ... | ५ | २८ | २८ | ततो देवा मुदा युक्ताः | ... | १ |
| ततो हाहाकृतं सर्वम् | ... | ५ | २८ | २६ | ततो नादानतीवोग्रान् | ... | १ |
| ततो बलः समुत्थाय | ... | ५ | २८ | २३ | ततो नानाविधान्दानान् | ... | १ |
| ततो जहास स्वनवत् | ... | ५ | २८ | १५ | ततो नहुषवंशम् | ... | ४ |
| ततोऽभिध्याय तस्तस्य | ... | १ | ७ | १ | ततोऽस्य वितथे पुत्रजन्मनि | ... | ४ |
| ततो दशसहस्राणि | ... | ५ | २८ | १४ | ततो नन्दी | ... | ४ |
| ततो हर्षसमाविष्टौ | ... | ५ | २७ | ३१ | ततो महानन्दी | ... | ४ |
| ततो दृढसेनः | ... | ४ | २३ | ७ | ततो विविंशकः | ... | ४ |
| ततोऽपरश्शतानीकः | ... | ४ | २१ | १४ | ततो रघुरभवद् | ... | ४ |
| ततो भूतानि | ... | ४ | ५ | १९ | ततो ब्रह्मा हरेर्दिव्यम् | ... | ५ |
| ततो वृकस्य बाहुर्योऽसौ | ... | ४ | ३ | २६ | ततोऽहं सम्भविष्यामि | ... | ५ |
| ततोऽनवरतेन | ... | ४ | २ | १०० | ततो ग्रहणगस्सम्प्यक् | ... | ५ |
| ततो मान्धातृनामा | ... | ४ | २ | ६१ | ततोऽखिलजगत्पद्म० | ... | ५ |
| ततोऽवाप तया सार्द्धम् | ... | ३ | १८ | ९४ | ततो बालध्वनिं श्रुत्वा | ... | ५ |
| ततो मैत्रेय तन्मार्ग० | ... | ३ | १८ | ३६ | ततो हाहाकृतं सर्वः | ... | ५ |
| ततो देवासुरं युद्धम् | ... | ३ | १८ | ३४ | ततो गावो निराबाधाः | ... | ५ |
| ततो दिगम्बरो मुण्डः | ... | ३ | १८ | २ | ततो धृते महाशैले | ... | ५ |
| ततोऽन्नं मृष्टमत्यर्थम् | ... | ३ | १५ | २९ | ततो ददृशुरायान्तम् | ... | ५ |
| ततो गोदोहमात्रं वै | ... | ३ | ११ | ५८ | ततो गोप्यश्च गोपाश्च | ... | ५ |
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४९३
| श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशा० | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ततो विज्ञातसद्भावः | ५ | १८ | ४७ | ततः परमर्षिणा | ४ | २ | ९९ |
| ततो हाहाकृतं सर्वम् | ५ | २० | ९१ | ततः कोपपरीतात्मा | ५ | ३६ | १५ |
| ततो रामश्च कृष्णश्च | ५ | २२ | ५ | ततः प्रबुद्धो रात्र्यन्ते | ६ | ४ | १० |
| ततो युद्धे पराजित्य | ५ | २२ | ८ | ततः प्रणम्य वरदम् | ५ | ३३ | ४ |
| ततो निजक्रियासूति | ५ | २३ | ४५ | ततः कृष्णेन बाणस्य | ५ | ३३ | ३१ |
| ततो गोपांश्च गोपीश्च | ५ | २४ | ९ | ततः काशीबलं भूरि | ५ | ३४ | ४० |
| ततः पटे सुरान्दैत्यान् | ५ | ३२ | २२ | ततः क्रुद्धा महावीर्याः | ५ | ३५ | ५ |
| ततः प्रबुद्धाः पुरुषम् | ५ | ३२ | १६ | ततः पुनर्व्युत्पन्न | ४ | १ | ८० |
| ततः काले शुभे प्राप्ते | ५ | ३१ | १६ | ततः किञ्चिदवनतशिराः | ४ | १ | ७३ |
| ततः परिघनिस्त्रिंश० | ५ | ३० | ५४ | ततः काकत्वमापन्नम् | ३ | १८ | ८१ |
| ततः कृष्णस्य पत्नी च | ५ | ३० | २६ | ततः क्रोधव्यवायादीन् | ३ | १५ | १० |
| ततः प्रीता जगन्माता | ५ | ३० | ५ | ततः स्ववासिनीदुःखि० | ३ | ११ | ७१ |
| ततः कोपपरीतात्मा | ५ | २८ | १८ | ततः कल्यं समुत्थाय | ३ | ११ | ८ |
| ततः कदम्बात्सहसा | ५ | २५ | ६ | ततः क्रुद्धो गुरुः प्राह | ३ | ५ | ९ |
| ततः कलियुगं मत्वा | ५ | २४ | ५ | ततः प्रबुद्धो भगवान् | ३ | २ | ५३ |
| ततः कोपपरीतात्मा | ५ | २३ | २ | ततः पितृत्वमापन्ने | ३ | १३ | ३० |
| ततः कुवलयापीडः | ५ | २० | ३२ | ततः पुनः स वै देवः | ३ | १ | ३७ |
| ततः समस्तमज्जेषु | ५ | २० | २५ | ततः खड्गं समादाय | २ | १३ | ५० |
| ततः पूरयता तेन | ५ | २० | १६ | ततः सा सहसा त्रासात् | २ | १३ | १५ |
| ततः प्रहृष्टवदनः | ५ | १९ | २२ | ततः शङ्खगदाचक्र० | ६ | ७ | ८८ |
| ततः प्रभाते विमले | ५ | १८ | १२ | ततः सम्भवत्तत्र | २ | १३ | १४ |
| ततः प्रवृत्ते रासः | ५ | १३ | ५१ | ततः प्रभवति ब्रह्मन् | २ | ८ | १०८ |
| ततः काञ्चित्प्रियालापैः | ५ | १३ | ४७ | ततः सप्तर्षयो यस्याः | २ | ८ | ११० |
| ततः फलान्यनेकानि | ५ | ८ | १० | ततः प्रयाति भगवान् | २ | ८ | ५८ |
| ततः क्षणेन पृथिवी | ५ | ११ | ७ | ततः सूर्यस्य तैर्युद्धम् | २ | ८ | ५१ |
| ततः कुरु जगत्स्वामिन् | ५ | ७ | ५७ | ततः स ससृजे मायाम् | १ | १९ | १७ |
| ततः प्रवेष्टितस्सर्पैः | ५ | ७ | १७ | ततः सूदा भयत्रस्ता | १ | १८ | ७ |
| ततः क्षणेन प्रययुः | ५ | ६ | २६ | ततः स दिग्गजैर्बालः | १ | १७ | ४२ |
| ततः कटकटाशब्द० | ५ | ६ | १८ | ततः सर्वासु मायासु | १ | १२ | ३१ |
| ततः पुनरतीवासन् | ५ | ६ | ६ | ततः सम्मन्त्र्य ते सर्वे | १ | १३ | ३३ |
| ततः क्षयमशेषास्ते | ५ | १ | ६३ | ततः स नृपतिस्तोषम् | १ | १३ | ५७ |
| ततः शुचिरथः | ४ | २१ | ११ | ततः प्रणम्य वसुधा | १ | १३ | ७७ |
| ततः परमसौ स्त्रीभोगम् | ४ | ४ | ६८ | ततः प्रसन्नो भगवान् | १ | १४ | ४५ |
| ततः केवलोऽभूत् | ४ | १ | ४२ | ततः प्रहस्य सुदती | १ | १५ | २६ |
| ततः पुष्पमित्राः पटुमित्राः | ४ | २४ | ५८ | ततः सोमस्य वचनात् | १ | १५ | ७३ |
| ततः कणवानेषा भूः | ४ | २४ | ३८ | ततः प्रभृति वै भ्राता | १ | १५ | १०० |
| ततः प्रभृति शूद्रा भूपालाः | ४ | २४ | २१ | ततः प्रभृति मैत्रेय | १ | १५ | ७९ |
| ततः कुमारः कृपः | ४ | १९ | ६८ | ततः स कथयामास | १ | ११ | ३७ |
| ततः प्रभृत्यक्रूरः प्रकटैनैव | ४ | १३ | १६१ | ततः प्रसन्नाः सूर्यः | १ | ९ | ११३ |
| ततः स्वोदरवस्त्रनिगोपित० | ४ | १३ | १४५ | ततः पपुः सुरगणाः | १ | ९ | ११० |
| ततः प्रस्फुरदुच्छ्वसिताम् | ४ | ६ | ३३ | ततः स्मयित्वा स बलः | ५ | ३६ | १६ |
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४९४
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ततः कालाग्निरुद्रोऽसौ | ... | ६ | ३ | २४ | तत्पुत्रो विधिसारः | ... | ४ |
| ततः पार्थो विनिःश्वस्य | ... | ५ | ३८ | ४२ | तत्पुत्रो जनमेजयः | ... | ४ |
| ततः स्नात्वा यथान्यायम् | ... | ६ | २ | ९ | तत्प्रमाणेण स द्वीपः | ... | २ |
| ततः प्रहस्य तानाह | ... | ६ | २ | ३२ | तत्प्रसादितश्च तन्मात्रे | ... | ४ |
| ततः स भगवान् विष्णुः | ... | ६ | ३ | १६ | तत्प्रसादविवर्द्धमानः | ... | ४ |
| ततः संक्षीयमाणेषु | ... | १ | १ | १५ | तत्प्रसीदाखिलजगत् | ... | ५ |
| ततः प्रीतः स भगवान् | ... | १ | १ | २२ | तत्प्रमाणैः शतैः | ... | १ |
| ततः समुत्क्षिप्य धरां स्वदंष्ट्रया | ... | १ | ४ | २६ | तत्प्रसिदार्थाय दत्तम् | ... | ५ |
| ततः क्षितिं समां कृत्वा | ... | १ | ४ | ४७ | तत्प्रभावाच्च सकल० | ... | ४ |
| ततः पुनः ससर्जादौ | ... | १ | ५ | ५८ | तत्प्रमाणं चांगुलैः कुर्वन् | ... | ४ |
| ततः कालात्मको योऽसौ | ... | १ | ६ | १४ | तत्प्रभया चोर्वशी | ... | ४ |
| ततः सा सहजा सिद्धिः | ... | १ | ६ | १६ | तत्प्रभावादत्युत्कृष्ट० | ... | ४ |
| ततः प्रभृति निःश्रीकम् | ... | १ | ९ | २६ | तत्र विष्णुश्च शक्रश्च | ... | १ |
| ततः शीतांशुर्भवत् | ... | १ | ९ | ९७ | तत्र प्रनुत्ताप्सरसि | ... | १ |
| ततः स्वस्थमनस्कास्ते | ... | १ | ९ | ९९ | तत्र ज्ञाननिरोधेन | ... | १ |
| ततः स्फुरत्कान्तिमती | ... | १ | ९ | १०० | तत्र सर्वमिदं प्रोतम् | ... | १ |
| तत्कथमस्मिन्नपक्रान्तेऽत्र | ... | ४ | १३ | १२८ | तत्र चागतमात्र एव तस्य | ... | ४ |
| तत्कर्मकर्तृत्वं च | ... | ४ | ५ | ८ | तत्र चोपविष्टेष्वखिलेषु | ... | ४ |
| तत्कथ्यतां महाभाग | ... | २ | १६ | ९ | तत्र चातिबलिभिरसुरैः | ... | ४ |
| तत्कर्म यन्न बन्धाय | ... | १ | १९ | ४१ | तत्र चान्तर्जले सम्मदः | ... | ४ |
| तत्किमेतेन मथुराम् | ... | ५ | १९ | ८ | तत्र चाशेषशिल्पकल्प० | ... | ४ |
| तत्क्रमेण विवृद्धं सत् | ... | १ | २ | ५५ | तत्र कतिपयदिनाभ्यन्तरे | ... | ४ |
| तत्क्षन्तव्यमिदं सर्वम् | ... | ५ | २१ | ५ | तत्र च सिंहाद्धमवाप | ... | ४ |
| तत्क्षोभाय सुरेन्द्रेण | ... | १ | १५ | १२ | तत्र त्वखिलानामेव | ... | ४ |
| तत्तन्नयशशिबिन्दुः | ... | ४ | १२ | ३ | तत्र च हिरण्यकशिपुः | ... | ४ |
| तत्तनेयो धूम्राक्षः | ... | ४ | १ | ५२ | तत्र च कुमारः | ... | ४ |
| तत्तनेयस्सुदासः | ... | ४ | ४ | ३९ | तत्र पुण्या जनपदाः | ... | २ |
| तत्तस्य हृदयं प्राप्य | ... | १ | १८ | ३५ | तत्र पूज्यपदार्थोक्ति | ... | ६ |
| तत्तत्त्ववेदिनो भूत्वा | ... | १ | १८ | २३ | तत्र चोत्सृष्टदेहोऽसौ | ... | २ |
| तत्तत्पात्रमुपादाय | ... | १ | १३ | ९१ | तत्र ते वशिनः सिद्धाः | ... | २ |
| तत्तनेयो महिष्मान् | ... | ४ | ११ | ९ | तत्र तावदपह्रुते | ... | ४ |
| तत्तु तालवनं पक्व० | ... | ५ | ८ | ३ | तत्राव्यक्तस्वरूपोऽसौ | ... | १ |
| तत्तु तालवनं दिव्यम् | ... | ५ | ८ | २ | तत्राप्यासन्नदूरत्वात् | ... | १ |
| तत्त्वया नात्र कर्तव्यः | ... | ५ | ३८ | ८५ | तत्रापि पर्वताः सप्त | ... | २ |
| तत्त्वया नात्र कर्तव्यम् | ... | १ | ११ | १८ | तत्रापि देवगन्धर्व० | ... | २ |
| तत्पित्रा तु वसिष्ठवचनात् | ... | ४ | १ | १६ | तत्रापि विष्णुर्भगवान् | ... | २ |
| तत्पुत्रश्च सुमित्रः | ... | ४ | २२ | १० | तत्रासते महात्मानः | ... | २ |
| तत्पुत्रश्च ऋतूपर्णः | ... | ४ | ४ | ३७ | तत्रापि श्वपचादिभ्यः | ... | ३ |
| तत्पुत्रः सञ्जयस्तस्यापि | ... | ४ | ९ | २६ | तत्राप्यासामर्थ्ययुतः | ... | ३ |
| तत्पुत्रो जनकः | ... | ४ | २४ | ५ | तत्रापि दृष्ट्वा तं प्राह | ... | ३ |
| तत्पुत्रः काकवर्णो भविता | ... | ४ | २४ | १० | तत्राप्यनुदिनं वैखान० | ... | ४ |
पृष्ठ 506स्थायी लिंक
४९५
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तत्राग्निं निर्मथ्य | ४ | ६ | ९१ | तथापि यो मनुष्याणाम् | ५ | २२ | १६ |
| तत्रायं श्लोकः | ४ | २ | ६४ | तथा हि सजलाम्भोद० | ५ | २३ | २९ |
| तत्राचिते कृते होमे | ५ | १० | ४० | तथापि कच्चिदालापम् | ५ | २४ | १७ |
| तत्रानेक प्रकाराणि | ५ | १६ | २६ | तथापि यत्नाद्भर्तारम् | ५ | ३२ | २९ |
| तत्राल्पेनैव यत्नेन | ६ | १ | ६० | तथाक्षिरोगातीसार० | ६ | ५ | ४ |
| तत्राशक्तस्य मे दोषः | ६ | ७ | ४ | तथात्मा प्रकृतेस्संगात् | ६ | ७ | २४ |
| तत्रेश तव यत्पूर्वम् | ३ | १७ | १६ | तथेति तद् गुरुवचनम् | ४ | ३ | ४६ |
| तत्रैवावस्थिता देवम् | १ | १४ | २० | तथेत्युक्ते ऽल्पैरेहोभिः | ४ | ४ | ५ |
| तत्रैकाग्रमतिर्भूत्वा | १ | १५ | ५३ | तथेत्युक्ते चाक्रूरः | ४ | १३ | ९० |
| तत्रैव चेन्द्राद्रपदा नु पूर्वा | ३ | १४ | १७ | तथेत्याह ततः कंसः | ५ | १ | ११ |
| तत्रैकान्तमतिर्भूत्वा | ६ | ७ | १०४ | तथेत्युक्त्वा बलदेवः | ४ | १३ | ९७ |
| तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामः | ६ | २ | १३ | तथेत्युक्त्वा च राजानम् | ५ | १५ | २४ |
| तत्सर्वं विस्तराच्छ्रुत्वा | ५ | १८ | ७ | तथेत्युक्तस्ततःस्नातः | ५ | १८ | ३५ |
| तत्संगात्तस्य तामृद्धिम् | १ | १२ | ८५ | तथेति तानाह नृपान् | ५ | २८ | १२ |
| तत्ससर्ज तदा ब्रह्मा | १ | ५ | ६० | तथेति चोक्त्वा धरणीम् | ५ | २९ | ३० |
| तत्साम्प्रतममी दैत्याः | ५ | १ | २२ | तथेत्युक्त्वा च देवेन्द्र | ५ | ३१ | ९ |
| तत्संज्ञान्येव तत्रापि | २ | ४ | ६१ | तथेत्युक्त्वा तु सोऽप्येनम् | १ | १९ | २२ |
| तत्स्मर्यताममेयात्मन् | ५ | ९ | ३३ | तथेत्युक्त्वानिदाघेन | २ | १५ | ३६ |
| तथाभिधायतस्तस्य | १ | ५ | १६ | तथेति चोक्ते तैर्विप्रैः | ३ | १५ | ४६ |
| तथापि तुभ्यं देवेश | १ | १२ | ७८ | तथैव योषितां तासाम् | ५ | ३६ | १४ |
| तथापि दुःखं न भवान् | १ | ११ | २२ | तथैव ग्रहसंस्थानम् | २ | ७ | २ |
| तथा चाहं करिष्यामि | १ | ९ | ८१ | तथैवालकनन्दापि | २ | २ | ३६ |
| तथा तथैनं बालं ते | १ | १७ | ५० | तथैकोऽसौ द्विधा स्त्रीत्वम् | १ | ७ | १४ |
| तथा हिरण्योरोमाणम् | १ | २२ | १४ | तथोपमदगुमृदामृद० | ४ | १४ | ८ |
| तथा पूयवहः पापः | २ | ६ | ४ | तदन्वयाश्च क्षत्रियास्सर्वे | ४ | १ | १७ |
| तथा कर्मस्वनेकेषु | २ | ७ | ३९ | तदहं श्रोतुमिच्छामि | ३ | ८ | २० |
| तथा केतुरथस्याश्वाः | २ | १२ | २३ | तदनेनैव वेदानाम् | ३ | ४ | ४ |
| तथान्यैर्जन्तुभिर्भूपा | २ | १३ | ७४ | तदन्तरे च भवता | २ | १४ | ८ |
| तथा त्वमपि धर्मज्ञ | २ | १६ | २१ | तदस्य वंशस्यानु० | ४ | १ | ४ |
| तथा चोपपुराणानि | ३ | ६ | २५ | तदस्माकं प्रसीदेश | १ | १२ | ३७ |
| तथाप्यव्ययशीलैश्च | ३ | १२ | ७ | तदन्वयाश्च क्षत्रियाः | ४ | २ | ३ |
| तथा देवलकश्चैव | ३ | १५ | ८ | तदवगमात्किंकिमेतत् | ४ | २ | ९५ |
| तथा मातामहश्राद्धम् | ३ | १५ | १६ | तदम्भसा च | ४ | ४ | २९ |
| तथाप्यरातिविध्वंस० | ३ | १७ | १३ | तदनन्तरं प्रतिपाल्यताम् | ४ | ५ | ४ |
| तथापि केन वा जन्म | ४ | २ | १०५ | तदहमिच्छामि | ४ | ५ | १८ |
| तथामावसोर्भीमनामा | ४ | ७ | २ | तदहं तत्र तदाहरणाय | ४ | ६ | ८४ |
| तथाप्यनेकरूपस्य | ५ | १ | २१ | तदलमनेन जीवता | ४ | १३ | ६९ |
| तथान्ये च महावीर्याः | ५ | १ | २५ | तदनन्तमसंख्यात० | २ | ७ | २६ |
| तथापि खलु दुष्टानाम् | ५ | ४ | १० | तदन्यश्शरणम् | ४ | १३ | ८६ |
| तथाप्यज्ञे जगत्स्वामिन् | ५ | ७ | ७५ | तदपक्रान्तिदिनादारभ्य | ४ | १३ | ११२ |
| तथा च कृतवन्तस्ते | ५ | १० | ४४ | तदस्य त्रिविधस्यापि | ६ | ५ | ५८ |
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४९६
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तदयमत्रानीयतामलम् | ४ | १३ | १२९ | तदेवाफलदं कर्म | २ | १४ | २५ |
| तदलं यदुलोकोऽयं बलभद्रः | ४ | १३ | १५८ | तदेतद्भवता ज्ञात्वा | २ | १५ | ३१ |
| तदलमेतेन तु तस्मै | ४ | २० | २१ | तदेव प्रीतये भूत्वा | २ | ६ | ४८ |
| तदलं परितापेन | ५ | ४ | १६ | तदेतदुपदिष्टं ते | २ | १६ | १८ |
| तदस्य नागराजस्य | ५ | ७ | ८ | तदेनमेवाहमग्नि | ४ | ६ | ८७ |
| तदलं सकलैर्देवैः | ५ | ३० | ४४ | तदेतत्समुद्धहामीति | ४ | १२ | २० |
| तदलं पारिजातेन | ५ | ३० | ७६ | तदेनं विश्रब्धा | ४ | १३ | २३ |
| तदग्निमालाजटिल० | ५ | ३४ | ३७ | तदेतं नातिदूरस्थम् | ५ | ७ | १० |
| तदप्यम्बुनिधौ क्षिप्तम् | ५ | ३७ | १४ | तदेतत्परमं धाम | ५ | १७ | २६ |
| तदतीतं जगन्नाथ | ५ | ३७ | २० | तदेतं सुमहाभारम् | ५ | ३७ | २७ |
| तदतीव महापुण्यम् | ५ | ३८ | ११ | तदेतत्कथितं बीजम् | ६ | ७ | २५ |
| तदर्थमवतीर्णोऽसौ | ५ | ३८ | ६० | तदेकावयवं देवम् | ६ | ७ | ९० |
| तदा हि दह्यते सर्वम् | १ | ३ | २३ | तदेव भगवद्वाच्यम् | ६ | ५ | ६९ |
| तदाधारं जगच्चेदम् | २ | ९ | ७ | तदैव विषुवाख्योऽयम् | २ | ८ | ७८ |
| तदाकर्ण्य तं च | ४ | ४ | २८ | तदंशभूतस्सर्वेषाम् | ५ | १ | १६ |
| तदाकर्ण्य भगवते | ४ | ३ | ७ | तद्गच्छत न भीः कार्या | ३ | १७ | ४४ |
| तदा तुल्यमहोरात्रम् | २ | ८ | ७५ | तद्गच्छ बल मा वा त्वम् | ५ | ३५ | १५ |
| तदा प्रवृत्तश्च कलिः | ४ | २४ | १०७ | तद्गच्छ धर्मराजाय | ५ | ३८ | ९० |
| तदाकर्ण्य राजा माम् | ४ | ६ | ५४ | तद्गच्छ श्रेयसे सर्वम् | ६ | ७ | १०१ |
| तदाख्यातमवैतत् | ४ | ६ | ३४ | तद्दर्शनाच्च तस्याम् | ४ | १२ | १८ |
| तदार्त्तरवश्रवणानन्तरम् | ४ | १३ | ४५ | तद्धनुस्तानि शस्त्राणि | ५ | ३८ | ३० |
| तदाश्रममुपगताश्च | ४ | २० | २४ | तद्ब्रह्म परमं नित्यम् | १ | २ | १३ |
| तदागच्छत गच्छामः | ५ | १ | ३२ | तद्ब्रह्म परमं योगी | १ | २२ | ५४ |
| तदा निष्कण्टकं सर्वम् | ५ | १५ | २१ | तद्ब्रह्म तत्परं धाम | २ | ७ | ४१ |
| तदाप्नोत्यखिलं सम्यक् | ६ | ८ | ३२ | तद्ब्रह्म तत्परं धाम | ६ | ५ | ६८ |
| तदिदं ते मनो दिष्ट्या | ६ | ७ | १० | तद्ब्रह्म परमं धाम | ६ | ४ | ३८ |
| तदिदं स्यमन्तकरत्नम् | ४ | १३ | १४४ | तद्द्रवानेव धारयितुम् | ४ | १३ | १५९ |
| तदियं त्वदीयापहासना | ४ | १३ | ७३ | तद्भस्मस्पर्शसम्भूत० | ५ | ३३ | १५ |
| तदीक्षणाय स्वाध्यायः | ६ | ६ | ३ | तद्भर्तुषु तथा तासु | ५ | १३ | ६१ |
| तदुग्रसेनो मुसलम् | ५ | ३७ | १२ | तद्भावभावमापन्नः | ६ | ७ | ९५ |
| तदुभयविनाशात् | ४ | १३ | ७९ | तद्भूरिभारपीडार्त्ता | ५ | १ | २७ |
| तदुत्तिष्ठारुह्यतां रथः | ४ | १३ | ८० | तद्यथा सकलजगताम् | ४ | १ | ५ |
| तदुपभोगात्तिखेदाच्च | ४ | २० | ३७ | तद्ये यशस्विनः केचित् | ५ | ४ | ११ |
| तदेतदवगम्याहम् | १ | १९ | ४२ | तद्रूपं विश्वरूपस्य | ६ | ७ | ७३ |
| तदेभिरलमर्त्यर्थम् | १ | १९ | ३९ | तद्रूपप्रत्यया चैका | ६ | ७ | ९१ |
| तदेतत्कथ्यतां सर्वम् | १ | १६ | १६ | तद्द्वारीतकेभ्यश्च | ३ | ११ | ८५ |
| तदेतद्वै मयाख्यातम् | १ | १७ | ७७ | तद्धान्धवाश्च | ४ | १३ | ४९ |
| तदेवमतिदुःखिनाम् | १ | १७ | ७० | तद्वृष्टिजनितं सस्यम् | ५ | १० | २० |
| तदेष तोयमध्ये तु | १ | १९ | ६१ | तनया भद्रविन्दाद्याः | ५ | ३२ | ३ |
| तदेव सर्वमेवैतत् | १ | २ | १४ | तन्नामसन्ततिसंज्ञाश्च | ४ | १८ | १४ |
| तदेतदक्षरं नित्यम् | १ | २२ | ६० | तन्नादश्रुतिसन्त्रस्ताः | ५ | ५ | ११ |
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| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
| तन्निबोध यथा सर्गे | १ | ३ | ३ | तयापि च सर्वमेतत् | ४ | २ | १०९ |
| तन्नूनमस्य सकाशे | ४ | १३ | १३४ | तया चैवमुक्तः | ४ | १३ | ७४ |
| तन्मम प्रीयते पुत्र्राः | १ | १४ | ११ | तयैवं स्मारिते तस्मिन् | ३ | १८ | ७१ |
| तन्मह्यं प्रणताय त्वम् | २ | १४ | ११ | तयैवमुक्तः स मुनिः | १ | १५ | १५ |
| तन्माता च विश्वामित्रम् | ४ | ७ | ३३ | तयैवमुक्तो देवेशः | १ | १५ | ६७ |
| तन्मात्राणां द्वितीयश्च | १ | ५ | २० | तयैव देव्या शैव्यायाम् | ४ | १२ | २२ |
| तन्मात्राण्यविशेषाणि | १ | २ | ४५ | तयोर्विहर्तोरैवम् | ५ | १० | १ |
| तपसस्तत्फलं प्राप्तम् | १ | १२ | ७५ | तयोः सैव पृथग्भाव | २ | ७ | ३० |
| तपश्च ब्रह्मलोकश्च | ५ | २ | १६ | तयोश्छिद्रान्तरप्रेप्सुः | ५ | ९ | ११ |
| तपश्चरत्सु पृथिवीम् | १ | १५ | १ | तयोश्चायं श्लोकः | ४ | १३ | ४ |
| तपस्तपस्यौ मधुमाधवौ च | २ | ८ | ८१ | तयोश्च परस्परम् | ४ | १३ | ४६ |
| तपस्तप्यन्ति मुनयः | २ | ३ | २० | तयोरुत्तानपादस्य | १ | ११ | २ |
| तपसा कर्षितोऽत्यर्थम् | २ | १ | ३१ | तयोश्च तमतिभीषणम् | ४ | ४ | ६० |
| तपस्वी सुतपाश्चैव | ३ | २ | ३५ | तरत्यविद्यां वितताम् | ५ | १७ | १४ |
| तपस्यभिरतान्सोऽथ | ३ | १८ | १ | तरुवल्कलपर्णचीर० | ४ | २४ | ९६ |
| तपस्विब्यसनाथीय | ५ | २९ | ४ | तल्लिप्सुरसुरस्तत्र | ५ | ९ | ९ |
| तपसो ब्रह्मचर्यस्य | ६ | २ | १६ | तवाष्टगुणमैश्वर्यम् | ५ | ७ | ६१ |
| तपांसि मम नष्टानि | १ | १५ | ३६ | तवोपदेशदानाय | २ | १६ | १७ |
| तप्तं तपो यैः पुरुषप्रवीरैः | ४ | २४ | १४४ | तस्मादुशीनरतितिक्षू | ४ | १८ | ८ |
| तमप्याज्ञाप्य दृष्ट्वा च | ५ | २० | २४ | तस्माच्च महामनाः | ४ | १८ | ७ |
| तमप्यसाधकं मत्वा | १ | ५ | १२ | तस्मान्महाशालः | ४ | १८ | ६ |
| तमतीव महारौद्रम् | ५ | ७ | ५ | तस्मादपि सञ्जयः | ४ | १४ | ३ |
| तमाह वसिष्ठोऽहमिन्द्रेण | ४ | ५ | ३ | तस्मादुशना | ४ | १२ | ८ |
| तमालोक्य सर्वयादवानाम् | ४ | १३ | १४९ | तस्माद्द्रुश्रेण्यः | ४ | ११ | १० |
| तमालोक्यातीव बलभद्रः | ४ | १३ | १५० | तस्मादेतामहं त्यक्त्वा | ४ | १० | २९ |
| तमाह रामं गोविन्दः | ५ | ९ | २२ | तस्माद्धिरण्मनाभः | ४ | ४ | १०७ |
| तमापतन्तमालोक्य | ६ | ६ | २१ | तस्माच्च खट्वांगः | ४ | ४ | ७६ |
| तमुपायमशेषात्मन् | ३ | १७ | ४० | तस्मादससमञ्जसात् | ४ | ४ | ७ |
| तमुह्यमानं वेगेन | २ | १३ | १६ | तस्माद्धारीतः | ४ | ३ | ३ |
| तमूचुस्सकला देवाः | ३ | १७ | ३६ | तस्मात्पाषण्डिभिः | ३ | १८ | ९७ |
| तमूचुर्मन्त्रिणो राज्यम् | ६ | ६ | ४५ | तस्मादेतानरो नग्नान् | ३ | १८ | ५१ |
| तमूचुः संशयं प्रष्टुम् | ६ | २ | ११ | तस्मात्परिश्रिते कुर्यात् | ३ | १६ | १४ |
| तमूचुर्मन्त्रिणो वध्यः | ६ | ६ | २७ | तस्मादभ्यर्चयेत्प्राप्तम् | ३ | १५ | २५ |
| तमोद्रेकी च कल्पान्ते | १ | २ | ६३ | तस्मात्प्रथममत्रोक्तम् | ३ | १५ | १२ |
| तमो मोहो महामोहः | १ | ५ | ५ | तस्मादुत्तरसंज्ञायाः | ३ | १३ | ४१ |
| तया चाधिष्ठितः सोऽपि | २ | ११ | १५ | तस्मात् सत्यं वदेत्प्राज्ञः | ३ | १२ | ४३ |
| तया तिरोहितत्वाच्च | ६ | ७ | ६३ | तस्मात्स्वशक्त्या राजेन्द्र | ३ | ११ | १०९ |
| तया जघान तं दैत्यम् | ५ | २७ | २० | तस्मादनुदिते सूर्ये | ३ | ११ | १०३ |
| तया सह स चावनिपतिः | ४ | ६ | ४८ | तस्मादतिथिपूजायाम् | ३ | ११ | ७० |
| तया विलोकितादेवा | १ | ९ | १०६ | तस्मात्सदाचारवता | ३ | ८ | ११ |
| तया च रमतस्तस्य | १ | १५ | २३ | तस्माच्छ्रेयांस्यशेषाणि | २ | १४ | २८ |
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४९८
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तस्मात्पार्थ न सन्तापः | ५ | ३८ | ६३ | तस्माच्चरेत वै योगी | २ | १३ | ४३ |
| तस्मात्त्वया नरश्रेष्ठ | ५ | ३८ | ८९ | तस्मान्न विज्ञानमृतेऽस्ति किञ्चित्... | २ | १२ | ४३ |
| तस्मादपि महाताप० | ६ | ३ | २९ | तस्मात्प्रातस्तनात्कालात् | २ | ८ | ६२ |
| तस्मान्नैनं हनिष्यामि | ६ | ६ | ३१ | तस्मात्समस्तशक्तीनाम् | ६ | ७ | ७५ |
| तस्मादपि शान्तिः | ४ | १९ | ५७ | तस्मात्तत्प्राप्तये यत्नः | ६ | ५ | ६० |
| तस्मान्मुद्गलसृञ्जय० | ४ | १९ | ५९ | तस्मान्माध्याह्निकात्कालात् | २ | ८ | ६३ |
| तस्मात्सहदेवस्सहदेवात् | ४ | १९ | ८४ | तस्मान्नोल्लङ्घनं कार्यम् | २ | ८ | ५७ |
| तस्मात्सार्वभौमः | ४ | २० | ४ | तस्माद्दिश्युत्तरस्यां वै | २ | ८ | २० |
| तस्माद्दीर्घेण कालेन | २ | ८ | ३६ | तस्माद्दुःखत्मकं नास्ति | ३ | ६ | ४९ |
| तस्माद्देवक्षत्रस्तस्यापि | ४ | १२ | ४२ | तस्मादहर्निशं विष्णुम् | २ | ६ | ४५ |
| तस्मादप्यधिसौमकृष्णः | ४ | २१ | ६ | तस्माच्च सूक्ष्मादिविशेषणानाम् | १ | १९ | ७५ |
| तस्माद्वृष्णिमांस्ततः | ४ | २१ | १२ | तस्माद्यतेत पुण्येषु | १ | १९ | ४६ |
| तस्माच्चोदयन उदयनात् | ४ | २१ | १५ | तस्मात्परित्यजैनां त्वम् | १ | १८ | १३ |
| तस्मादुरुक्षयस्तस्माच्च | ४ | २२ | ३ | तस्माद्गाल्ये विवेकात्मा | १ | १७ | ७६ |
| तस्मात्सहदेवः | ४ | २२ | ४ | तस्मात्प्रजाविवृद्ध्यर्थम् | १ | १४ | १५ |
| तस्मादर्भकः | ४ | २४ | १५ | तस्मात्प्रजाहितार्थाय | १ | १३ | ८० |
| तस्माच्चोदयन्तः | ४ | २४ | १६ | तस्माद्यदद्य स्तोत्रेण | १ | १३ | ५८ |
| तस्माच्छृणुष्व राजेन्द्र | ३ | ११ | ७५ | तस्मात्तु पुरुषाद्देवी | १ | ७ | १८ |
| तस्मादपि नन्दिवर्द्धनः | ४ | २४ | १७ | तस्मात्ते दुःखबहुलाः | १ | ५ | १८ |
| तस्मात्सुज्येष्ठस्ततः | ४ | २४ | ३५ | तस्मिन्नेव महायज्ञे | १ | १३ | ५२ |
| तस्माद्देवभूतिः | ४ | २४ | ३६ | तस्मिन् जाते तु भूतानि | १ | १३ | ४१ |
| तस्मात्पुलोमाचिः | ४ | २४ | ४९ | तस्मिन्धर्मपरे नित्यम् | १ | १६ | १३ |
| तस्माच्चाक्षुषः | ४ | १ | २४ | तस्मिन्प्रसन्ने किमिहास्त्यलभ्यम् | १ | १७ | ९१ |
| तस्माच्च खनिनेत्रः | ४ | १ | २७ | तस्मिन्वसन्ति मनुजाः | २ | ४ | ३७ |
| तस्मादप्यविक्षित् | ४ | १ | ३० | तस्मिन्नन्तरे बह्वृचश्च | ४ | २ | ६९ |
| तस्माच्च दमः | ४ | १ | ३५ | तस्मिन्शेषौजांसि सर्वरूपि० | ४ | २ | १२७ |
| तस्माच्चन्द्रः | ४ | १ | ४१ | तस्मिंश्च विवृते | ४ | १२ | १७ |
| तस्माच्च निकुम्भः | ४ | २ | ४४ | तस्मिन्काले यशोदापि | ५ | ३ | २० |
| तस्माच्च प्रसेनजित् | ४ | २ | ४७ | तस्मिन्नासभदैतेये | ५ | ९ | १ |
| तस्मादप्यजः | ४ | ४ | ८५ | तस्मिंस्तस्मिंस्तु | १ | २ | ४४ |
| तस्माच्चाणुहः | ४ | १९ | ४३ | तस्मिन्काले समभ्यर्च्य | ६ | ८ | ३९ |
| तस्माद्देवातिथिः | ४ | २० | ५ | तस्मै चापुत्राय | ४ | १४ | ३३ |
| तस्माच्च क्षेमकः | ४ | २१ | १६ | तस्मै त्वमेनं तनयां नरेन्द्र | ४ | १ | ९२ |
| तस्मात्सुबलः | ४ | २३ | ८ | तस्य वै जातमात्रस्य | १ | १३ | ५१ |
| तस्माद्विश्वजित् | ४ | २३ | ११ | तस्य शापभयाद्भीता | १ | १५ | २२ |
| तस्माद्दालेषु च परः | ५ | ४ | १३ | तस्य पुत्रास्तु चत्वारः | १ | १५ | १२१ |
| तस्मात्प्रावृषि राजानः | ५ | १० | २४ | तस्य प्रभावमतुलम् | १ | १६ | ५ |
| तस्माद्गोवर्धनशैलः | ५ | १० | ३८ | तस्य पुत्रो महाभागः | १ | १७ | १० |
| तस्मादहं भक्तिविनम्रचेताः | ५ | १७ | ३३ | तस्य तद्भावनायोगात् | १ | २० | ३ |
| तस्माद्दुर्गं करिष्यामि | ५ | २३ | ११ | तस्य तच्चेतसो देवः | १ | २० | १४ |
| तस्माद्भवद्भिरसर्वैस्तु | ५ | ३७ | ६० | तस्य पुत्रा बभूवुस्ते | २ | १ | १६ |
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४९९
| श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० | श्लोकाः | अंशाः | अध्या० | श्लो० |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तस्य पुत्रो महावीर्यः | ... | २ | १ | ३९ | तस्य वाचं नदी सा तु | ... | ५ |
| तस्य वीर्य प्रभावश्च | ... | २ | ५ | २१ | तस्य मायावती | ... | ५ |
| तस्य संस्पर्शानिर्धूत० | ... | २ | ९ | १३ | तस्य स्वरूपममृत्युग्रम् | ... | ६ |
| तस्य तस्मिन्मृगे दूरः | ... | २ | १३ | २२ | तस्य चालम्बनवतः | ... | ६ |
| तस्य शिष्यो निदाघोऽभूत् | ... | २ | १५ | ४ | तस्य शिष्यास्तु ये पञ्च | ... | ३ |
| तस्य मन्वन्तरं ह्येतत् | ... | ३ | २ | १४ | तस्याभिध्यायतः सर्गः | ... | १ |
| तस्य शिष्यप्रशिष्येभ्यः | ... | ३ | ४ | २० | तस्याभिमानमुद्धिं च | ... | १ |
| तस्य रेवती नाम | ... | ४ | १ | ६६ | तस्याश्चैवान्तरप्रेप्सुः | ... | १ |
| तस्य पुत्रशतप्रधानाः | ... | ४ | २ | १२ | तस्यास्समन्ततश्चाष्टौ | ... | २ |
| तस्य च तनयास्समस्ताः | ... | ४ | २ | ४१ | तस्यात्मपरदेहेषु | ... | २ |
| तस्य चापुत्रस्य | ... | ४ | २ | ४९ | तस्याप्युत्कलगय० | ... | ४ |
| तस्य च पुत्रपौत्रदौहित्राः | ... | ४ | २ | ७१ | तस्याश्च सपत्न्या गर्भः | ... | ४ |
| तस्य च पुत्रैरधिष्ठितम् | ... | ४ | ४ | १७ | तस्यापि भगवान् | ... | ४ |
| तस्य बृहद्वलः | ... | ४ | ४ | ११२ | तस्यात्मजः प्रसुश्रुतः | ... | ४ |
| तस्य पुत्रार्थं यजनभुवम् | ... | ४ | ५ | २८ | तस्यापि शतध्वजस्ततः कृतिः | ... | ४ |
| तस्य चन्द्रस्य च बृहस्पतेः | ... | ४ | ६ | १२ | तस्याकाशे नीयमानः | ... | ४ |
| तस्य च धन्वन्तरेः पुत्रः | ... | ४ | ८ | ११ | तस्याप्यपह्नियमाणः | ... | ४ |
| तस्य च वत्सस्य | ... | ४ | ८ | १६ | तस्याप्यायुर्धीमानम् | ... | ४ |
| तस्य च हर्यधनः | ... | ४ | ९ | २७ | तस्याप्यजकस्ततः | ... | ४ |
| तस्य हैहयहेहय० | ... | ४ | ११ | ७ | तस्याप्यलर्कस्य | ... | ४ |
| तस्य च श्लोकः | ... | ४ | ११ | १५ | तस्यापि वृष्णिप्रमुखम् | ... | ४ |
| तस्य च पुत्रशतप्रधानाः | ... | ४ | ११ | २१ | तस्यापि रुक्मकवच० | ... | ४ |
| तस्य च शतसहस्रम् | ... | ४ | १२ | ४ | तस्यायमद्यापि | ... | ४ |
| तस्य च शितपुर्नाम | ... | ४ | १२ | ९ | तस्यामयमक्रूरः | ... | ४ |
| तस्य च विदर्भ इति | ... | ४ | १२ | ३५ | तस्यापि सत्यकः | ... | ४ |
| तस्य च सत्राजितः | ... | ४ | १३ | ११ | तस्यार्जुने महाक्लेशः | ... | ६ |
| तस्य ह्येवंविधाः प्रभावाः | ... | ४ | १३ | १३५ | तस्या विवाहे रामाद्याः | ... | ५ |
| तस्य च धारणक्लेशेनाहम् | ... | ४ | १३ | १४२ | तस्याप्याहुक आहुकी | ... | ४ |
| तस्य च देवभाग० | ... | ४ | १४ | ३० | तस्यापि कृतवर्म० | ... | ४ |
| तस्य त्रय्यारुणिः | ... | ४ | १९ | २५ | तस्याश्च सपत्नी माद्री | ... | ४ |
| तस्य संवरणः | ... | ४ | १९ | ७५ | तस्यामनिरुद्धो जज्ञे | ... | ४ |
| तस्य च शान्तनो राष्ट्रे | ... | ४ | २० | १४ | तस्यामस्य वज्रो जज्ञे | ... | ४ |
| तस्य च नन्दिवर्धनः | ... | ४ | २४ | ६ | तस्यापि हेमो हेमस्यापि | ... | ४ |
| तस्य च पुत्रः क्षेमधर्मा | ... | ४ | २४ | ११ | तस्यापि धृतव्रतः | ... | ४ |
| तस्य महापद्मस्यान्तु | ... | ४ | २४ | २४ | तस्यापि मेधातिथिः | ... | ४ |
| तस्य पुत्रो भूमिमित्रः | ... | ४ | २४ | ४० | तस्यापि नामनिर्वचनश्लोकः | ... | ४ |
| तस्य च हस्तः | ... | ४ | ३ | १९ | तस्यापि धृतिमांस्तस्माच्च | ... | ४ |
| तस्य चाश्मक इत्येव | ... | ४ | ४ | ७२ | तस्यापि देवापिशान्तनु० | ... | ४ |
| तस्य पादप्रहारेण | ... | ५ | ६ | २ | तस्याप्युष्णः पुत्रः | ... | ४ |
| तस्य दर्पबलं भङ्क्त्वा | ... | ५ | १४ | १२ | तस्यापि बलाकानामा | ... | ४ |
| तस्य हेषितशब्देन | ... | ५ | १६ | ३ | तस्यापि क्षतौजाः | ... | ४ |