आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
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साहिब बन्दगी
| खॉसी है | 27 |
|---|---|
| खुजली है | 30 |
| खून की उल्टियाँ हो रही हैं | 31 |
| खून की कमी है | 31 |
| खूनी बवासीर है | 31 |
| गंज हो गयी है | 32 |
| गंडमाला ( कण्ठमाला ) है | 33 |
| गठिया है | 33 |
| गर्भ के समय रक्तस्त्राव | 34 |
| गर्भ के समय उल्टियाँ | 34 |
| गर्भ गिरने की आशंका है | 34 |
| गलगण्ड ( घेघा ) है | 35 |
| गले में दर्द है | 35 |
| गले में सूजन है | 36 |
| गुर्दे में दर्द है | 36 |
| ग्रहणी रोग है | 36 |
| घाव में कीड़े हो गये हैं | 37 |
| घाव हो गया है | 37 |
| घुटनों में दर्द है | 38 |
| चेहरे पर कौल-मुँहासे हैं | 38 |
| छाती में दर्द है | 40 |
| जलोधर रोग है | 40 |
| जुकाम है | 40 |
| जोड़ों में दर्द है | 42 |
| छाँड़ियों से चेहरा खराब है | 43 |
| टॉन्सिल है | 44 |
| टी. बी. है | 44 |
| दमा ( श्वास रोग ) है | 45 |
| दस्त हैं | 46 |
| दस्त में खून आ रहा है | 48 |
| दाद है | 48 |
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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| □ | दाँत निकल रहे हैं ( बच्चों के ) | 49 |
|---|---|---|
| □ | दाँत में कीड़े हैं | 49 |
| □ | दांतों में पीड़ा है | 49 |
| □ | दिमागी नुक़्स है | 50 |
| □ | नक़सीर आ रही है | 51 |
| □ | नपुंसकता है | 51 |
| □ | नाखुन नहीं बढ़ते हैं | 51 |
| □ | निम्न रक्त चाप है | 52 |
| □ | पथरी है | 53 |
| □ | पाचन शक्ति कमज़ोर है | 55 |
| □ | पाण्डु रोग है | 56 |
| □ | पायोरिया है | 56 |
| □ | पित्ती उछल आई है | 56 |
| □ | पित्त की खराबी है | 57 |
| □ | पित्त का ज्वर है | 57 |
| □ | पीठ में दर्द है | 57 |
| □ | पुराना कब्ज़ है | 57 |
| □ | पुराना ज्वर है | 58 |
| □ | पेट में कीड़े हैं | 59 |
| □ | पेट में दर्द है | 61 |
| □ | पेट में मरोड़ है | 62 |
| □ | प्रदर रोग है | 62 |
| □ | प्रमेह रोग है | 63 |
| □ | प्लीहा ( तिल्ली ) वृद्धि है | 64 |
| □ | प्रसव नहीं हो रहा है | 64 |
| □ | फोड़े-फुंसियाँ हैं | 65 |
| □ | बवासीर है | 65 |
| □ | बाँझपन है | 66 |
| □ | बाल गिर रहे हैं | 67 |
| □ | बिस्तर पर बच्चा पेशाब कर देता है | 68 |
| □ | बाल तोड़ है | 68 |
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साहिब बन्दगी
| बालों में रूसी है | 69 |
|---|---|
| बोलने में हकलाहट है | 69 |
| भाग का नशा है | 69 |
| मधुमेह है | 69 |
| मलेरिया है | 71 |
| मसूड़ों में पीड़ा है | 71 |
| माथे में पीड़ा है | 71 |
| मासिक धर्म में रुकावट है | 71 |
| मासिक स्नाव अधिक है | 72 |
| मिरगी रोग है | 72 |
| मुँह आया है | 72 |
| मुँह में छाले हैं | 73 |
| मुँह से दुर्गंध आती है | 73 |
| मूत्र बार-बार आता है | 73 |
| मूत्र रुक-रुक कर आता है | 74 |
| मेदा कमजोर है | 75 |
| मोच आई है | 75 |
| मोटापा है | 75 |
| रक्त प्रदर है | 76 |
| रक्त विकार है | 76 |
| रक्त स्नाव हो रहा है | 76 |
| लकवा है | 77 |
| वात ज्वर है | 77 |
| वायु गोला ( गैस ) है | 78 |
| विष खा लिया है | 79 |
| वीर्य की कमी है | 79 |
| वीर्य पतला है | 79 |
| शरीर से दुर्गंध आती है | 80 |
| श्वेत प्रदर है | 80 |
| सन्निपात है | 80 |
| सफेद कोढ़ है | 81 |
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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| □ | सफेद दाग हैं | 81 |
|---|---|---|
| □ | सामान्य ज्वर हैं | 81 |
| □ | सिर में जुएँ हैं | 82 |
| □ | सिर में दर्द है | 83 |
| □ | सुनाई कम देता है | 84 |
| □ | सूजन है | 84 |
| □ | सूजाक है | 84 |
| □ | स्तनों में दूध की कमी है | 85 |
| □ | स्वप्न दोष है | 85 |
| □ | हाथी पाँव है | 86 |
| □ | हिचकियाँ आ रही हैं | 86 |
| □ | हिस्टोरिया है | 86 |
| □ | हृदय रोग है | 87 |
| □ | हैजा है | 88 |
- | विषधारियों ने काटा है | 89
- | कुछ ध्यान देने योग्य बातें | 92
- | प्राणायाम और योगासनों द्वारा स्वास्थ्य रक्षा | 95 □ | वस्त्रिका प्राणायाम | 95 □ | कपालभाती प्राणायाम | 95 □ | अनुलोमविलोम प्राणायाम | 95 □ | भुजंगासन की विधि | 96 □ | मत्स्यासन की विधि | 97 □ | वज्रासन की विधि | 98 □ | सिंहमुद्रासन की विधि | 98 □ | योग मुद्रासन की विधि | 99 □ | पद्मासन की विधि | 99 □ | धनुरासन की विधि | 100
- | चिंता का जहर छोड़ें भरोसे की दवा खाएँ | 101
नोट : दवा की जो भी मात्रा है, बच्चों को उससे आधी मात्रा ही देनी चाहिए
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साहिब बन्दगी
दो शब्द संगत की ओर से
अपने हरमन प्यारे सतगुरु जी के चरण कमलों में अर्पण दो शब्द जिन्होंने देश सेवा के समय बड़ी सादगी से फौज की डियूटी करते समय अपना जीवन बिताया। आप पहरावे में फौज की हरी वर्दी में रहते हुए रोजाना शाम को सत्यसंग देते थे।
आप आम सैनिकों की तरह फिल्म देखने अथवा घूमने-फिरने कभी नहीं जाते थे। हमेशा एक ही धुन में रहें, या तो साहिब के भजन गाते या सत्संग करते थे।
अब मानव कल्याण के लिए आपने पूर्ण तौर पर अपने आप को अर्पण किया है। सुबह साहिब के कुल्ले का दरवाजा खुलने से पहले ही लोग लम्बी-2 कतारों में खड़े हो जाते हैं वह इन्तजार में होते हैं कि कब दरवाजा खुले और बन्दगी करते समय अपने दुःख तकलीफों का साहिब जी से हल करवा सकें।
इसके बाद भी जब साहिब जी को देखा तो संगत में घिरे हुए और मुस्कराते हुए देखा। दिन में घंटों सत्संग करने के बाद आप संगत की सेवा में हर समय व्ययस्थ रहते। मानव सेवा ही उनकी जिन्दगी का लक्ष्य है। ऐसा सन्त सतगुरु फिर शायद ही मिले जो अपने हाथों से संगत का भोजन भी बना कर देता हो।
आप जी सत्संग में आने वाले लोगों को सर्गुण भक्ति जो कि खुले तौर पर मूर्ती पूजा, जल पूजा, अग्नि पूजा, मड़ीया व मट्ट ठू पूजा, यज्ञ और हवन आदि के बिना दूसरी निर्गुण भक्ति जोकि इस शरीर की कोशिकायों को मुद्राओं द्वारा जगाने वाली भक्ति का खण्डन करके निरंजन अथवा काल पुरुष की इस भूल-भुलईया से निकाल कर सत्य भक्ति की ओर ले जाने का प्रयास करते हैं।
शरीर की बनावट के बारे में साहिब जी बड़ी सहजता से बताते हैं कि पांच तत्व, 25 प्रवितियाँ और तीन गुण ही काल का रूप है इसीलिए आप काल पुरुष के काया के नाम को छोड़कर, शरीर को चलाने वाली चेतना (आत्मा) को नाम देते हैं जिसको आपने विदेह नाम कहा। प्रथम आप ही हैं जिसने संसार को काल पुरुष और दयाल पुरुष का भेद दिया है। विदेह नाम पाने वाले को कमाई की जरूरत नहीं पड़ती इसके कुछ नियम हैं जिसमें रहकर वह खुद-ब-खुद महत्त्मा बन जाता है।
1. सत्य बोलना 2. शाकाहारी रहना 3. नशा ना करना 4. पर स्त्री गमन ना करना 5. चोरी ना करना 6. जूआ ना खेलना 7. हक हलाल की कमाई करना।
अनथक सतगुरु जी ने बहुत थोड़े समय में 103 से ऊपर आश्रम बना कर लाखों लोगों को सतलोक की सत्य भक्ति में लगा दिया है। मगर यह समाज कल्याण का काम मीडिया वालों को नजर नहीं आता। साहिब जी के जाने के बाद स्कूलों और कॉलेजों में इस सदगुरु जी के बारे में पढ़ाया जायेगा और खोजें होंगी।
रोगों से बचे रहने के पाँच सर्वोत्तम फार्मूले
रोगों से बचे रहने के पाँच
सर्वोत्तम फार्मूले
पाँच चीजें स्वास्थ्य के मामले में अपनाओगे तो रोग आपके पास आयेंगे ही नहीं।
नाम-भजन करना
सर्व रोग की औषध नाम
नाम सभी प्रकार के रोगों की औषधी है। इतना ही नहीं, यह नाम जन्म-मरण रूपी महारोग का भी नाश करने वाला है।
सतगुरु शब्द सहाई।
निकट गये तन रोग न व्यापे, पाप ताप मिट जाई॥
शरीर के रोग भी नहीं आयेंगे। नाम रक्षा करता है। पर शर्त है कि गुरु के शब्द का उल्लंघन न हो।
यह नाम रोगों का नाश कैसे करता है, इसे समझते हैं। पहले समझना होगा कि रोगों का मुख्य कारण क्या है।
जैसे डाक्टर आँख के रोग में दूषित पदार्थ के जमाव को नहीं समझ पाते हैं, वो आँखों का इलाज करने लगते हैं। वो आँख के परे की गहराई में नहीं जा पाते, गंदे पदार्थ की तरफ उनका कोई ध्यान नहीं होता। ऐसे ही नजरिया वैद्य भी केवल दूषित पदार्थ तक ही पहुँच पाते हैं। डॉ० आँख तक ही रहा, उसके लिए आँख ही रोग की जड़ है। अन्य-अन्य चिकित्सा पद्धतियाँ अपनी-अपनी तरह से रोग की जड़ बताती हैं। आयुर्वेद शरीर में कफ, पित्त और वायु की मात्रा में असंतुलन को रोग की जड़ मानता है।
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साहिब बन्दगी
सभी अपने-अपने तरीके से रोग की जड़ बता रहे हैं, पर रोगों की असली जड़ को कोई भी नहीं जानता है। वो जड़ है—मन। यह एक परम रहस्य है।
मन के पाँच हाथ हैं—काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार। ये पाँचों से ही भयंकर शारीरिक रोग उत्पन्न होते हैं। उदाहरण के लिए जिसमें काम अधिक है, उसे टी.बी. होने की पूरी-पूरी संभावना रहती है। इन सबको काबू करने के लिए सदगुरु नाम देता है। इसलिए नाम ही वास्तव में सब रोगों का नाश करने वाला है। जो नाम करने वाला है, उसे रोग आयेंगे ही नहीं।
व्यायाम करना
व्यायाम जैसा पीछे कहा गया, वैसा ही करना। यह भी रोगों को पास में नहीं आने देता है, शरीर में मौजूद दूषित द्रव्य को पसीने के द्वारा बाहर कर देता है।
मूली पपीते का सेवन करना
यदि आप भोजन के द्वारा अपने स्वास्थ्य को ठीक रखना चाहते हैं तो सबसे पहले तो आप सुबह खाली पेट मूली, पपीते और खीरे का सेवन शुरू कर दें। लोगों को किसी चीज़ के खाने का सही समय भी मालूम नहीं है। अधिकतर लोग मूली और खीरा रात को ही खाते हैं। यह परम हानिकारक हो जाता है। इस फार्मूले को सदैव याद रखें—
खीरा सुबह हीरा दिन को खीरा रात को पीड़ा।
मूली सुबह पूली दिन को मूली रात को सूली।।
यानी खीरा सुबह के समय खायेंगे तो हीरे की तरह लाभकारी सिद्ध होगा, यदि दिन के समय खायेंगे तो केवल खीरा ही रह जायेगा और रात को सेवन करेंगे तो वो आपको पीड़ा देने वाला सिद्ध होगा। ऐसे ही मूली भी सुबह खायी तो उत्तम है, दिन के समय मध्यम और रात को खाना तो समझो कि अपने को सूली पर चढ़ाने के बराबर है।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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उपवास रखना
10 दिन में एक बार व्रत रखना चाहिए। यह व्रत कैसे रखना, ध्यान से समझें। पूरा दिन कुछ नहीं खाना; रात को भी नहीं खाना; केवल पानी पी लेना। सुबह उठकर एक बड़ा गिलास पानी पीकर शौच जाना। बड़ा सख्त मल बाहर आयेगा; आँतें खुलेंगी। फिर मुँह-हाथ धोकर 4 लीटर पानी पीना। पेट में गैस होगी, इसलिए डकारते जाना, गैस बाहर निकालते जाना और पानी पीते जाना। ऐसे में दिल घबराने लगेगा। चिंता नहीं करना। शुरू-2 में मुश्किल आयेगी, फिर आसान हो जायेगा। इतना पानी पीना कि आँतों के नीचे उतर जाए। अब शौच जाने की इच्छा होगी। पहले तो रोटी के सड़े हुए अंश, काले-काले दाने, छिलके आदि, जो शरीर में फँसे होंगे, पानी के साथ बाहर आयेंगे। ये ही गैस बनाते हैं। फिर पीला-पीला पानी बाहर आयेगा। यदि पानी नीचे से उतरे तो थोड़ा हिलना-डुलना। तो तीसरी बार अब बची-खुची गंदगी के साथ थोड़ा-थोड़ा साफ़ पानी निकलेगा। चौथी बार नल की तरह साफ़ पानी बाहर आयेगा। फिर हाथ साफ़ करके मुँह में अंगुली डालकर बचा पानी भी बाहर निकाल लेना। इसके बाद अब हल्का भोजन करना। जब ऐसा व्रत होगा तो शरीर का वात, पित्त और कफ़ सब ठीक हो जायेगा, इसलिए रोग नहीं हो पायेंगे।
जैसे किसी मशीन से काम लेने के बाद समय-समय पर आप उसकी सफ़ाई करते हैं, ताकि वो ठीक से काम करती रहे, लंबे समय तक चले। आप उसकी सर्विस करवाते हैं। ऐसे ही इस शरीर में जो पाचन-क्रिया की मशीनें हैं, उन्हें भी सफ़ाई की जरूरत पड़ती है। भोजन के अंश जहाँ-तहाँ फँस जाते हैं, जिन्हें निकालने के लिए पीछे बताई गयी विधि के अनुसार 10 दिन में एक बार व्रत रख लेना चाहिए।
हमारा च्यवनप्राश खाना
यह हमारा च्यवनप्राश खाना इसलिए कहा कि हमारे च्यवनप्राश
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साहिब बन्दगी
की बात ही सबसे निराली है। जो च्यवनप्राश हम बनाते हैं, मेरा दावा है कि दुनिया में कोई नहीं बना पायेगा। जिस च्यवन ऋषि ने इसे सबसे पहले बनाया था, वो भी ऐसा नहीं बना पाया था। क्योंकि इसमें मैंने सांसारिक बूटियाँ ही नहीं मिलायी हैं, एक अलौकिक बूटी भी मिलायी है। इसलिए बोल रहा हूँ कि ऐसा च्यवनप्राश कोई नहीं बना पायेगा।
यह हर रोग की दवा है। यहाँ तक कि विरोधी रोगों को भी यह ठीक कर देगा। यानी यदि आपको उच्च रक्तचाप होगा तो कम कर देगा और यदि निम्न रक्तचाप होगा तो बढ़ा देगा। यह आपका स्टेमिना भी बढ़ायेगा। यह आपको आलसी भी नहीं बनने देगा। ऐसा है यह च्यवनप्राश। जोड़ों के दर्द में यह लाजवाब है, आँखों की रोशनी पक्का बढ़ायेगा, खाँसी को जड़ से मिटा देगा, साँस की बीमारी होगी तो उसका नामोनिशान भी नहीं रहेगा। सार यह है कि शरीर के रोम-रोम को यह च्यवनप्राश चेतन कर देता है। आप जल्दी बूढ़े भी नहीं होंगे। यह मत सोचना कि कहीं व्यवसाय के लिए है। नहीं, 100 के करीब डिब्बे तो महीने में ऐसे ही मुफ्त में बाँट देता हूँ और फिर है भी बहुत ही सस्ता। इतना सस्ता कहीं नहीं होगा। फिर इसकी शुद्धता का क्या कहना! एक और बड़ी बात यह कि इसमें हम कोई केमिकलस भी नहीं डाल रहे हैं और न ही कोई मिलावट कर रहे हैं। आप हमारे बच्चे ही तो हैं। जैसे माता-पिता को बच्चों की फिकर होती है, ऐसे ही हमें भी आपकी फिकर है। इसलिए आपके लिए यह परम औषधी बनायी है। इसके सेवन में तीन बातें ध्यान में रखना-
- 1. भोजन के बाद एक चम्मच दिन में दो बार ले सकते हैं।
- 2. बच्चों और बूढ़ों को आधा चम्मच ही खिलाएँ।
- 3. च्यवनप्राश खाने के आधे घण्टे बाद तक पानी मत पिएँ।
- 4. दूध के साथ च्यवनप्राश मत लें।
रोगों के नाश में वनस्पति जगत का कमाल
रोगों के नाश में वनस्पति
जगत का कमाल
अनिद्रा रोग है
अरंड का कमाल
अरण्ड के बीज को जलाकर काजल बना लें। उसे काजल की तरह ही आँखों में लगाएँ।
पीपल चूर्ण का कमाल
पीपल चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर खाएँ।
जायफल का कमाल
जायफल को घी में घिसें और फिर पलकों पर लगा लें।
अन्य सहायक उपचार
- ❑ भुंगराज तेल की सिर पर मालिश करें।
- ❑ धनिये के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करें। बड़ा लाभकारी है।
- ❑ सेब का मुरब्बा खाएँ।
अपच ( बद्धज्मी ) है
अडूसे का कमाल
अडूसे के वृक्ष की छाल को साफ कर उबालकर काढ़ा बना लें। 60 से 80 ग्राम यह काढ़ा रोगी को देना बड़ा ही लाभकारी सिद्ध होता है।
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साहिब बन्दगी
अदरक का कमाल
अदरक का रस निकालकर उसमें उतना ही नींबू का रस और थोड़ा-सी सेंधा नमक डालकर भोजन के पहले और बाद में दोनों समय सेवन करें।
अनार का कमाल
अनार के पतों को सुखाकर उन्हें पीस लें। फिर उसमें सेंधा नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन करें। यह दवा 4-5 ग्राम लें।
हर्र का कमाल
हर्र की छाल, दाख और मिश्री-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। अब इसमें शहद मिलाकर छोटी-छोटी 15-15 ग्राम की गोलियाँ बना लें। रोज एक गोली जल के साथ लें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ अनन्नास को काटकर उसकी एक फाँक लेकर उसपर काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर सेवन करें।
- ❑ भोजन के साथ सलाद रूप में टमाटर पर सेंधा नमक डालकर खाएँ।
- ❑ ढाई ग्राम राई को पीसकर पानी के साथ सेवन करें।
- ❑ तुलसी का काढ़ा बनाकर उसमें सौंठ मिलाकर पिएँ।
आँख आई है
कपूर का कमाल
5 ग्राम भीमेनी कपूर, 5 ग्राम केसर और 230 ग्राम गुलाबजल लें। अब तीनों को पीसकर मिला लें। यह आँखों की बहुत अच्छी दवा बन गयी। इसे किसी शीशे में रख लें। 2-3 बूँद यह दवा आँखों में डालें।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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आँख में जाला है
अगस्त का कमाल
अगस्त के फूलों का रस निकालकर आँख में डालें।
आँखों से दिखाई कम देता हो तो
मुलहठी का कमाल
मुलहठी के रस की बूँदें आँखों में डालें।
बहेड़े का कमाल
4 ग्राम बहेड़े और मिश्री को मिलाकर गर्म पानी से सेवन करें। यह दवा सुबह ही लें।
सौँफ का कमाल
बड़ी सौँफ, कूजे वाली मिश्री और बादाम की गिरी-तीनों को कूट-पीसकर चूर्ण करके किसी बर्तन में रख लें। सोने के लिए जाने से पहले 12 ग्राम यह चूर्ण रोज़ पौन गिलास दूध के साथ सेवन करें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ 5 ग्राम सूखे आँवले रात के समय एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह उठने पर छानकर उस पानी से आँखों पर छीटें मारकर उन्हें धोएँ।
- ❑ पालक के रस का सेवन करें।
- ❑ केले का सेवन करें।
- ❑ 7 बादाम रात को पानी में भिगो दें। सुबह छिलका उतारकर ठंडाई बनाकर पीएँ।
- ❑ सुबह हरि दूब पर नंगे पाँव चलना चाहिए।
- ❑ कोई भी दिमागी काम करते हुए या पढ़ते हुए बीच-बीच में
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साहिब बन्दगी
बार-बार पलकें झपकाएँ। जब भी हम पलकें झपकाते हैं तो आँखों की एक ग्रन्थि से निकलने वाला एक तरल पदार्थ गोलों के ऊपर से निकलकर जाता है और आँखों को तरल रखता है।
आँखें बंद करके सूर्य की तरफ मुँह करके खड़े हो जाएँ। कुछ देर सिर को दाएँ-बाएँ घुमाकर एक सैकेंड के लिए आँखें खोलें, पर सूर्य की तरफ मत देखें, उसके आस-पास ही कहीं देखें और फिर बंद कर लें।
आँखों की कसरत करें। (दोनों पैरों के बीच कुछ फासला रखकर खड़े हो जाएँ। फिर पूरी शरीर को पैर की एड़ी के साथ दाएँ और बाएँ 90° घुमाएँ।) यह कसरत 6 मिनट रोज करें।
सावधानी बरतें
बहुत तेज या कम रोशनी में मत पढ़ें। ज्यादा रोशनी में आँखें ज़रूरत से ज्यादा रोशनी से बचने के लिए सिकुड़ जाती हैं और कम रोशनी में आँख की पुतलियाँ अधिक रोशनी की तलाश में ज्यादा खुल जाती हैं। दोनों ही स्थितियाँ आँखों के लिए हानिकारक सिद्ध होती हैं।
लेटे हुए मत पढ़ें।
चलते हुए या यात्रा के दौरान मत पढ़ें।
बीमारी की हालत में मत पढ़ें।
आँखों में दर्द है
कटेरी का कमाल
कटियारी के पत्तों को पीस रस निकालकर 2-2 बूँद आँखों में डालें और पिये हुए कुछ पत्तों को आँखों पर कुछ समय के लिए बाँध दें।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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फिटकरी का कमाल
250 मि. ग्रा. फिटकरी को पीस लें। अब इस पिंसी हुई फिटकरी को गुलाबजल में अच्छी तरह घोलें। यह आँखों की पीड़ा की बहुत ही लाभकारी दवा बन गयी। इस दवा को किसी शीशी में रख लें। दिन में दो बार 3-3 बूँद यह दवा आँखों में डालें।
ग्वारपाठे का कमाल
ग्वारपाठे का रस आँखों में लगाएँ।
आँखों में फुंसी है
इमली का कमाल
इमली के बीज की गिरी निकालकर उसे किसी पत्थर पर घिसें और वो लेप फुंसी पर करें।
आग से जला है
अरंड का कमाल
सरसों के तेल में अरंड के पत्तों का रस मिलाकर लगाना चाहिए।
शहद का कमाल
शहद का लेप करें।
नारियल का कमाल
नारियल के तेल में चूने का पानी समान मात्रा में अच्छी तरह मिलाकर लेप तैयार करके लगाएँ। दिन में दो बार यह लेप लगाएँ।
आँखों में लालिमा है
चावल का कमाल
गर्म उबले हुए चावल को किसी कपड़े में बाँधकर आँखों में सेंकें।
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साहिब बन्दशी
करें। ध्यान रहे कि चावल बहुत अधिक गर्म न हों।
आधे सिर में दर्द है
अदरक का कमाल
अदरक को पानी में पीस लें। अब छानकर इस पानी की 2-2 बूँदें नाक के प्रत्येक नथुने में डालकर सूर्य की तरफ मुँह करके कुछ देर लेटे रहें या बैठे रहें।
हींग का कमाल
थोड़े-से पानी में हींग को घोलें और रोगी को सुँघाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
□ रोज सुबह सूर्योदय से पहले अंगूर का रस निकालकर पिएँ।
आँव पड़ रही है
बायविडिंग का कमाल
बायविडिंग को नींबू रस में मिलाकर दें।
सॉफ का कमाल
सॉफ के तेल की 6 बूँदें मिश्री पर डालकर 2 घण्टे के अन्तराल से दिन में 3-4 बार लें।
आवाज़ बैठ गयी है
मंडूकपर्णी का कमाल
मंडूकपर्णी के पत्तों को घी के साथ पीसकर सेवन करें।
सुहागे का कमाल
600 मि. ग्रा. कच्चे सुहागे को चूसना बड़ा लाभकारी सिद्ध होगा।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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हींग का कमाल
गर्म पानी में हींग घोलकर गराये करें। घर से बाहर रहकर वहाँ की जलवायु के परिणामस्वरूप आवाज बैठी हो तो यह दवा बहुत हितकारी है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ 1 ग्राम पिप्पा हुआ आँवला खाकर ऊपर से पानी पी लें।
- ❑ पिप्पी हुई काली मिर्च में घी मिलाकर सेवन करें।
- ❑ शलगम का साग खाएँ।
- ❑ गर्म हलवा खाएँ।
- ❑ पौन गिलास पानी को गर्म करके उसमें चम्मच-भर शहद मिलाकर उस पानी से गराये करें।
सावधानी बरतें
- ❑ तेलयुक्त पदार्थ, ठंडे पदार्थ, खट्टे पदार्थ आदि का सेवन मत करें।
- ❑ मौन रखें।
इन्फ्लूएंजा है
अदरक का कमाल
छोटे चम्मच जितना अदरक का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर सेवन करें। यह बड़ा लाभकारी दवा है।
उच्च रक्तचाप है
योग वटी का कमाल
दिन में दो बार शहद के साथ 2-2 गोलियाँ लें। अधिक रक्तचाप होने पर तीन बार भी ले सकते हैं।
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साहिब बन्दशी
लहसुन का कमाल
कच्चे लहसुन की दो कलियाँ छीलकर छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी के साथ चबा लें। भोजन के बाद यह दवा लें।
सर्पगंधा वटी का कमाल
सर्पगंधा धन्सत्व और सूर्यतापी शिलाजीत-दोनों को बराबर की मात्रा में लें। अब इनको कूट कर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 2-2 गोलियाँ सेवन करें।
नींबू का कमाल
एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर दिन में 2-3 बार पिएँ।
सारस्वत वटी का कमाल
दिन में दो बार (सुबह-शाम) जल के साथ 1-1 गोली लें।
अन्य और सहायक उपचार
☐ सुबह सेब का छिलका उतार कर खाएँ। शाम को भी ऐसे ही सेब खाएँ।
☐ रोज एक आँवले का मुरब्बा खाएँ।
☐ केले का सेवन करें।
☐ दही का सेवन करें।
☐ टिण्डे की सब्जी खाएँ।
सावधानी बरतें
☐ मिठाई, खट्टी वस्तुएँ, नमक, तेल, मक्खन, गुड़, चाय, चीनी, आलू आदि का सेवन न करें।
☐ शराब, सिगरेट आदि नशीली वस्तुओं का सेवन तो बिल्कुल ही बंद कर दें।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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उल्टियाँ हो रही हैं
अनार का कमाल
देसी घी में चीनी मिलाकर चाशनी बना लें। यह चाशनी अनार के पौन गिलास रस में मिलाकर रोगी को पिलाएँ।
हर्र का कमाल
हर्र को पीस लें। फिर इसमें शहद मिलाकर चटाएँ।
तुलसी का कमाल
तुलसी की पत्तियों का रस पिएँ।
नीम का कमाल
22 ग्राम नीम के पत्तों को आधा गिलास पानी में डालकर उबालें। अब इस पानी को छानकर रोगी को पिलाएँ।
लौंग का कमाल
5 लौंग पीसकर आधा गिलास (छोटा) पानी में डालकर उबालें। जब पानी लगभग आधा रह जाए तो उतारकर छान लें। इस पानी में थोड़ी मिश्री मिलाकर सेवन करें। यह दवा दिन में 3-4 बार लें।
कफ की खाँसी है
अलसी का कमाल
- ❑ 100 ग्राम शहद, 100 ग्राम अलसी, 30 ग्राम काली मिर्च-तीनों को मिलाकर चाटना बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।
- ❑ 400 ग्राम पानी में 30 ग्राम अलसी को पीसकर उबालें। जब पानी तीसरे हिस्से से भी कम रह जाए तो अच्छी तरह मलें और फिर छान लें। इसके बाद इसमें 12 ग्राम मिश्री मिला लें। यह कफ को नष्ट करने वाला काढ़ा तैयार हो गया। चम्मच-भर इस
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साहिब बन्दगी
काढ़े को सवा घण्टे के अन्तर से रोगी को देते रहें।
पीपल चूर्ण का कमाल
पीपल चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर ही खाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
- □ अमरूद को आग पर भून लें। भूना हुआ अमरूद खाना इसमें लाभकारी है।
- □ सरसों के दाने पीस लें। अब इसे शहद के साथ चाटें।
कफ ज्वर है
कुटकी का कमाल
कुटकी, पटोल, नागरमोथा, गिलोय, पीपल, नीम की छाल, इन्द्रियव, सोठ, चंदन, अगर—सबको बराबर की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। अब दो गिलास पानी को उबालें और जब एक कप रह जाए तो उसे ऊपर के 4 ग्राम चूर्ण के साथ लें।
काली मिर्च का कमाल
चाय बनाते समय 6 काली मिर्च, 6 तुलसी के पत्ते, एक इलायची, थोड़ा अदरक और एक लौंग डालें। ऐसी चाय बड़ी लाभकारी है।
कब्ज है
अमरूद का कमाल
300 ग्राम अमरूद खाकर ऊपर से गर्म-गर्म दूध पी लें।
पपीते का कमाल
सुबह डेढ़ पाव पपीता खाकर ऊपर से दूध पी लें।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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अन्य और सहायक उपचार
❑ सोते समय गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर सेवन किया करें।
कमर में दर्द है
हींग का कमाल
6 ग्राम हींग, 12 ग्राम अरंड के बीज, 12 ग्राम देवदार की लकड़ी, 10 ग्राम सेंधा नमक—सबको पीसकर गेहूँ के आटे में मिला लें और उस आटे को गूँथकर रोटी पकाएँ। ध्यान रहे, रोटी केवल एक तरफ से ही पकाएँ और दर्द वाली जगह बाँध दें।
अदरक का कमाल
50 ग्राम अदरक पाक का रोज सेवन करना बड़ा लाभकारी रहता है।
अन्य और सहायक उपचार
❑ सहजन की सब्जी खाएँ।
काँच निकलती है
कमल का कमाल
कमल के पत्तों को पीसकर उसमें मिश्री डालकर खाना बड़ा लाभदायक रहता है।
अन्य और सहायक उपचार
2-3 माजूफूल पीसकर पानी (एक गिलास) में अच्छी तरह 7-8 मिनट तक उबालें। फिर उतारकर ठंडा करके इस पानी से मलद्वार को धोएँ।