आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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अन्य और सहायक उपचार
- ❑ चुकंदर का सेवन करें।
- ❑ तरबूज का रस पीएँ।
- ❑ सहजन की सब्जी खाएँ।
- ❑ पद्मासन एवं धनुरासन करें।
छाँड़ियों आदि से चेहरा खराब है
बेर का कमाल
बेर की गुठली की गिरी और गुड़ को अच्छी तरह पीस लें। अब इनमें शहद और मक्खन मिलाकर चेहरे पर लेप करें।
चमेली का कमाल
चमेली के पत्ते, वट के पीले पत्ते, अगरू, लाल चन्दन, लोध और कूठ-सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसका लेप चेहरे पर करें।
नींबू का कमाल
नींबू की जड़ की छाल, मैनशिल, बिजौरा और घी सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसका लेप करना बड़ा ही लाभकारी सिद्ध होता है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ लोध, जौ का आटा (भूसी रहित) को पीसकर लेप करना बड़ा लाभकारी है।
- ❑ मसूर को अच्छी तरह दूध में पीस लें। अब इसमें घी मिलाकर लेप चेहरे पर लेप करें।
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साहिब बन्दगी
टॉन्सिल है
बायविडंग का कमाल
बायविडंग, हल्दी और सेंधा नमक-तीनों 7-7 ग्राम की मात्रा में लेकर 600 ग्राम पानी में डालकर उबालें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें। इस पानी से सुबह-शाम दोनों समय गरारे करें।
अन्य और सहायक उपचार
- □ पानी को गर्म करके उसमें आधा चम्मच नमक डालकर गरारे करें।
- □ सिंह मुद्रासन, मत्स्यासन करें।
टी. बी. है
लहसुन का कमाल
लहसुन की 12 कलियाँ एक गिलास दूध में उबालें। अब उन कलियों को निकालकर चबा-चबाकर खाएँ और फिर दूध पी लें।
केले का कमाल
केले के मोटे तने का टुकड़ा ले आएँ और उसका रस निकाल लें। अब उसे छानकर एक गिलास रस ढाई घण्टे के अन्तराल में रोगी को देते रहें। रस ताजा ही हो। यह बहुत ही लाभकारी है।
खजूर का कमाल
7-8 खजूर को आधा किलो दूध में उबाल लें। यह दवा अत्यन्त हितकारी है।
प्याज का कमाल
150 ग्राम प्याज चबाकर खाएँ। दिन में कम-से-कम 3 बार यह
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प्रयोग करें।
अन्य सहायक उपचार
- ❑ शहद को मक्खन के साथ मिलाकर लेने से टी. बी. दूर होती है। यह प्रयोग दिन में दो बार जरूर करें।
- ❑ पेठे का सेवन करें।
- ❑ शक्कर, किशमिश और पीपल-तीनों बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। दवा तैयार है। सुबह-शाम यह दवा चम्मच-भर खाएँ।
- ❑ फूलगोभी को उबालकर उसका रस नित्य लें।
- ❑ रोज थोड़ा नारियल खाया करें।
- ❑ एक गिलास पानी में 50 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
दमा ( श्वास रोग ) है
अगस्त का कमाल
100 ग्राम सनाय के पत्ते, 12 ग्राम आँवले-दोनों को पानी के साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। यह गोली दम के रोगी के लिए बड़ी लाभकारी है।
सुहागे का कमाल
सुहागे को कूट-पीसकर तवे पर रखें। जब पिघलकर सूख जाए तो धीरे-धीरे फूलने लगेगा। तब उतारकर रख लें। अब यह फूला हुआ सुहागा और मुलहटी-दोनों को कूटकर चूर्ण कर लें। अब किसी कपड़े से छानकर शीशे में रख लें। 800 मि. ग्रा. यह दवा दिन में दो बार शहद के साथ चाटना बहुत लाभकारी सिद्ध होगा।
अदरक का कमाल
अदरक का रस, नींबू का रस और शहद-तीनों को मिलाकर
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साहिब बन्दशी
पीना बड़ा लाभकारी रहता है।
अन्धाहुली का कमाल
अन्धाहुली की जड़, जीरा, सोंठ, काली मिर्च-सबको पीसकर मिला लें। पाँच हफ्ते इसका सेवन करें। बहुत लाभकारी है।
अडूसे का कमाल
अडूसे की छाल का रस, मुनक्के का काढ़ा, कटेली की रस, मिश्री और चिचिड़ी का रस-सब 510-510 ग्राम लेकर अच्छी तरह गर्म कर लें। गाढ़ा होने पर उतार लें। अब इसमें भारंगी, मुलहठी, पीपल, सुहागा, वंशलोचन और आँवला-सब 32-32 ग्राम लेकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण भी उस काढ़े में मिला लें। जब काढ़ा कुछ ठंडा हो जाए तो उसमें 500 ग्राम शहद मिला लें। यह दवा दिन में दो बार 10 ग्राम की मात्रा में रोगी को दें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ अंगूर का सेवन करें।
- ❑ दो चम्मच ईसबगोल दिन में दो बार रोजाना लम्बे समय तक गर्म पानी के साथ सेवन करें। यह तो बहुत ही लाभकारी प्रयोग है।
- ❑ अंजीर का सेवन करें।
- ❑ करेले की सब्जी खाएँ।
- ❑ खजूर का सेवन करें।
सावधानी बरतें
- ❑ नारियल, तरबूज का सेवन मत करें।
दस्त हैं
जामुन का कमाल
जामुन की तीस पत्तियाँ पीसकर उसमें स्वादानुसार थोड़ा-सा
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संधा नमक मिलाकर गोली बनाकर चूसें। दिन में दो बार इस गोली का सेवन करें।
चन्दन का कमाल
लाल चन्दन, खस, चिरायता, गिलोय, सोंठ, धनिया, बेलगिरी, कुड़ा की छाल, अतीस, नागरमोथा, पाघाख, नेत्रबाला—सबको पीसकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा बहुत लाभकारी है।
आम का कमाल
आम की गुठली की गिरी को दही के पानी के साथ अच्छी तरह से पीस लें। इसका लेप नाभि स्थान पर करें।
बेल का कमाल
बेल फल की गिरी और आम की गुठली को पीसकर काढ़ा बनाएँ। 22 ग्राम यह काढ़ा पीना लाभकारी है।
अन्य और सहायक उपचार
❑ मीठे अनार को मिट्टी का लेप करके भूनें। अब उसका रस निकालकर एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें। बहुत लाभकारी है।
❑ डेढ़ चम्मच ईसबगोल को दही में मिलाकर खाएँ। यह बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।
❑ कच्चे केले को उबालकर उसकी रोटी बनाकर खाएँ।
❑ अमरूद की ताजी पत्तियों को उबालकर वो पानी छान लें। यह पानी बड़ा लाभकारी है।
❑ कच्चे पपीते को उबालकर खाना बहुत ही लाभकारी है।
❑ शहद में अतीस का चूर्ण मिलाकर चाटें।
❑ ढाई चम्मच खसखस के दानों को पानी के साथ पीस लें। फिर उन्हें थोड़े दही में डालकर रोगी को दें। सुबह-शाम यह दवा
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साहिब बन्दशी
रोगी को दें या फिर 5 घण्टे का अंतर रख लें।
दस्त में खून आ रहा है
बेल का कमाल
12 ग्राम बेलगिरी, 22 ग्राम मिश्री और 13 ग्राम सूखा धनिया लेकर सबको अच्छी तरह से पीस लें। 6 ग्राम यह चूर्ण 2-3 बार दिन में सेवन करें।
दाद है
अमलतास का कमाल
अमलतास की हरि पत्तियों को दाद वाले स्थान पर मलें।
तुलसी का कमाल
तुसली के पत्ते दाद वाली जगह मलें।
आक का कमाल
आक का दूध निकालकर दाद वाली जगह मला करें।
अंजीर का कमाल
किसी चीज़ से दाद को खुजलाई और फिर उसपर अंजीर का दूध लगाएँ। बड़ा लाभकारी प्रयोग है।
सिंघाड़े का कमाल
सिंघाड़े की बेल को पीसकर दाद वाली जगह लगाएँ।
नींबू का कमाल
नींबू के रस में नौसादर पीसकर लगाएँ।
नीम का कमाल
□ नीम, देवदार, बायविडंग, खादर और कनेर की छाल को पीसकर
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लेप करें।
▣ नीम की पत्तियों को दही के साथ पीस लें और फिर उसे दाद वाले स्थान पर लगाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
▣ जमीकन्द की सब्जी खाना लाभकारी है।
दाँत निकल रहे हैं ( बच्चों के )
अंगूर का कमाल
ढाई चम्मच अंगूर के रस में थोड़ा-सा शहद मिलाकर बच्चे को दें।
दाँत में कीड़े हैं
मूसाकर्णी का कमाल
मूसाकर्णी के रस में शहद मिलाकर कुले करें।
कपूर का कमाल
थोड़ी-सी कपूर को आँवले के रस में मिलाकर दाँत पर लगाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
▣ दालचीनी के तेल में रूई भिगोकर दाँत के नीचे या ऊपर रखकर दबाएँ।
दाँतों में पीड़ा है
कटेरी का कमाल
कटेरी के फल-फूल-दोनों को पीसकर उनका रस (निचोड़कर) निकाल लें। इस पानी से कुले करना दाँतों के दर्द में बड़ा ही लाभकारी है।
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साहिब बन्दगी
अकरकरा का कमाल
अकरकरा की जड़ को पीसकर दर्द वाली जगह मलें।
हल्दी का कमाल
दारु हल्दी को भूनकर जिस दाँत में दर्द है, उसके नीचे या ऊपर रखकर कुछ देर दबाए रखें।
विजयसार का कमाल
विजयसार के पत्तों को सुखाने के बाद अच्छी तरह पीस लें। अब इसके चूर्ण को सरसों के तेल में मिलाकर दाँतों में लगाएँ।
कपूर का कमाल
दर्द वाले दाँत के बीच कपूर रखकर दबाए रखें।
अन्य और सहायक उपचार
❑ 6-7 लौंग लेकर पीस लें। फिर उसमें नींबू का रस मिलाएँ और दाँतों पर दर्द वाले स्थान पर मलें।
❑ जरा-सी हींग को पीसकर उसमें पिंसी हुई हल्दी मिलाकर जरा-से पानी की सहायता से गोली बना लें और उसे दर्द वाले दाँत के बीच रखकर दबाए रखें।
❑ अमरूद के पत्ते चबाएँ।
❑ दिन में दो बार स्वच्छ मिट्टी से मंजन करें।
दिमागी नुक्स है
मंडूकपर्णी का कमाल
मंडूकपर्णी के रस में शहद और कूट मिलाकर रोगी को नित्य दें।
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नकसीर आ रही है
सुहागे का कमाल
ढाई ग्राम सुहागा लेकर उसे जल में घोलें और नाक के दोनों नथुनों पर लेप करें। जब तक यह लेप तैयार करें तब तक नकसीर वाले को सिर पर ठंडा पानी डालने के लिए कहें।
नींबू का कमाल
नींबू का रस निकालकर मात्र 2-3 बूँद दोनों नथुनों में डालें।
दूब का कमाल
दूब का रस निकालकर सुँघाने और नाक में 3-4 बूँदें डालने से नकसीर बंद होती है।
नपुंसकता है
चने का कमाल
30 ग्राम चनों को पानी में भिगो दें। उस पानी को निकालकर उसमें शहद मिलाकर सेवन करें। अत्यंत लाभकारी है।
नारखून नहीं बढ़ते हैं
नींबू का कमाल
एक गिलास पानी गर्म करके थोड़े खुले बर्तन में डालें और फिर उसमें एक नींबू निचोड़ दें। अब अपने दोनों हाथों की अँगुलियाँ उसमें 4-5 मिनट के लिए डुबो दें। फिर वहाँ से निकालकर कुछ देर ठंडे पानी में रखें।
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साहिब बन्दगी
निम्र रक्तचाप है
वसंत कुमार रस का कमाल
दिन में दो बार 1-1 गोली अनार के रस के साथ या शर्बत बनाकर लें।
बादाम का कमाल
8-10 बादाम शाम को पानी में भिगो दें। सुबह दूध के साथ उसकी टंडाई बनाकर लें।
चूड़ामणि रस का कमाल
210 मि. ग्रा. यह दवा शहद के साथ दिन में दो बार (सुबह-शाम) सेवन करें।
नवजीवन रस का कमाल
दिन में दो बार 1-1 गोली शहद के साथ सेवन करें।
कांचनाभ रस का कमाल
50 मि. ग्रा. की 1-1 गोली सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ बाईं ओर करवट करके लेट जाना सर्वप्रथम उपचार है।
- ❑ छाछ का सेवन नित्य करें। (केवल सितंबर महीने में मत करें।)
- ❑ चुकन्दर के रस का सेवन करें।
- ❑ शहद का शरबत बनाकर सुबह-शाम लें।
- ❑ तिलों का चूर्ण बनाकर आँवले के चूर्ण में अच्छी तरह मिला लें। यह मिक्स चूर्ण रोज सुबह-शाम चम्मच-भर शहद के साथ चाटें।
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पथरी है
पाषाणभेद का कमाल
पाषाणभेद, गोखरू, सोंठ, बड़ी कलैसी, मुलहठी, अरण्य की छाल, अरण्डी, पीपल, बेहेड़े की छाल, महुआ, वरणा कूट, इन्द्रयव, हरे की छाल, अमलतास की गिरी, गुग्गल, काहू का बकला, नागर मोथा, तिवसी के बीज-सबको समान मात्रा में लेकर कूट-पीसकर रख लें। 22 ग्राम इस दवा को पानी में डालकर उबालें और काढ़ा बना लें। अब भुनी हुई हींग, सेंधा नमक और जवाखार-तीनों चीजें एक-एक ग्राम लेकर कूटकर चूर्ण करके उसमें डालें।
इन्द्रजौ का कमाल
इन्द्रजौ के ढाई ग्राम बीजों को गर्म पानी में भिगोकर वो पानी पिएँ। यह मूत्राशय की पथरी में बहुत ही लाभकारी औषधी है।
अजमोद का कमाल
22 ग्राम अजमोद को दो गिलास पानी में 25-30 मिनट तक उबालें। अब उतारकर उस पानी को छान लें। कप-भर की मात्रा में यह पानी चार घण्टे के अन्तराल में रोगी को पिलाएँ। यह अत्यन्त ही लाभकारी प्रयोग है। यदि दर्द अधिक हो तो समय चार घण्टे से ढाई तक कर लें।
मूली का कमाल
रोज 22 ग्राम मूली के बीजों का काढ़ा बनाकर सेवन करें।
बथुए का कमाल
कच्चे बथुए का रस निकालकर उसमें मिश्री मिलाकर पी लें।
गोखरू का कमाल
यदि पथरी बार-बार बन जाती है तो नित्य 5 ग्राम गोखरू चूर्ण
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साहिब बन्दगी
को एक-डेढ़ चम्मच शहद के साथ चाटें और ऊपर से बकरी का एक गिलास ताजा-ताजा दूध पी लें।
अन्य और सहायक उपचार
▯ सबसे पहले कब्ज को दूर करें। यह पथरी रोग की चिकित्सा का पहला जरूरी हिस्सा है।
▯ सुबह एक बड़े गिलास पानी में डेढ़ चम्मच शहद मिलाकर नित्य सेवन करें।
▯ नित्य सेब का रस पिएँ।
▯ छाछ का सेवन रोज करें।
▯ गाजर, खीरा और चुकन्दर का रस मिलाकर दिन में 2-3 बार पीएँ।
▯ रोज सुबह खाली पेट 55-60 ग्राम प्याज के रस का सेवन करें। करेले के रस का सेवन करें।
▯ 5 ग्राम पत्थर फोड़ी बूटी को पानी में डालकर उबालें और पी लें। यह दवा रोज लेना बहुत ही लाभकारी है।
▯ कुड़े की छाल को अच्छी तरह से पीस लें और फिर उसे दही में डालकर सेवन करें। यह बड़ा लाभकारी प्रयोग है।
▯ सहजन की सब्जी खाएँ।
▯ बेर पत्थर की पिछी में पाषाणभेद का चूर्ण मिलाकर गन्ने के रस के साथ सेवन करें।
▯ जब लगे कि पथरी के छोटे-छोटे कण बन रहे हैं और कभी-कभी पेशाब के रास्ते बाहर आ जाते हैं तो ऐसा करें कि जब भी मूत्र आए तो उसे कुछ देर रोक लें। अब पानी गर्म करके टब में भर दें। इस टब में थोड़ी देर बैठने के बाद इसी में मूत्र करें। यह पथरी के छोटे-छोटे कणों को निकालने का सरह और लाभकारी उपाय है।
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सावधानी बरतें
- ❑ चावल, मटर, टमाटर मत खाएँ।
- ❑ चिकनाई वाले पदार्थों से परहेज रखें।
पाचन शक्ति कमजोर है
अजवायन का कमाल
अजवायन का सेवन करें।
तुलसी का कमाल
22 तुलसी के पत्ते और 6 काली मिर्च लेकर भोजन के बाद चबा-चबाकर खाएँ।
अनार का कमाल
6 ग्राम अनार के दाने, 1 ग्राम धुना हुआ जीरा, 4 मुनके के दाने, सेंधा नमक, नींबू का ढाई ग्राम रस, 7 छोटी इलायची, ढाई ग्राम अदरक का रस-सबको मिलाकर चटनी तैयार कर लें। यह चटनी खाना बड़ी ही लाभकारी है।
अदरक का कमाल
- ❑ नित्य भोजन से ठीक पहले 2 ग्राम अदरक पर सेंधा नमक डालकर खाएँ।
- ❑ आधा किलो अदरक को पानी में उबालने के बाद छीलकर पीस लें। अब इसमें 90 ग्राम पिप्सी हुई हल्दी मिलाकर ऊपर से एक किलो पुराना गुड़ मिला लें। दवा तैयार है। इसे सुरक्षित रख लें। ढाई ग्राम यह दवा रोज सेवन करें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ शहद में 225 मि. ग्रा. अग्नि रस मिलाकर चाटें।
- ❑ ब्रजासन, योगमुद्रासन, पद्मासन आदि करें।
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साहिब बन्दगी
पाण्डु रोग है
नीम का कमाल
नीम के कोमल-2 पत्ते तोड़ कर ले आएँ। फिर इन पत्तों का रस निकालकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर नित्य सेवन करें।
बेल का कमाल
बेल पत्तों का रस निकाल लें। 5-6 ग्राम इस रस में पिप्सी हुई ग्राम-भर काली मिर्च डालकर रोगी को पिलाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
□ शहद में नवायस लौह मिलाकर चाटें। यह दवा दिन में 2-3 बार ले सकते हैं।
पायोरिया है
अन्य और सहायक उपचार
□ पालक को रस का नित्य सेवन करें। सुबह खाली पेट ही लें।
□ पिप्सी हुई फिटकरी में थोड़ा नमक मिलाकर सुबह-शाम मसूड़ों पर मलें।
पिप्ती उछल आई है
अजवायन का कमाल
60 ग्राम अजवायन लेकर अच्छी तरह से कूट-पीस लें। फिर इसमें इतना ही गुड़ मिलाकर 5-5 ग्राम की छोटी-छोटी गोलियाँ बनाकर रख लें। दिन में दो बार एक-2 गोली ताजे जल के साथ सेवन करना बड़ा लाभकारी रहता है।
अन्य और सहायक उपचार
□ रोज 6 निबौली (हरी) चबाएँ।
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पित्त की खराबी है
करेले का कमाल
करेले के पत्तों का रस निकालकर ही पिपैँ।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ केले पर घी डालकर खाना लाभकारी है।
- ❑ शहतूत खाएँ।
पित्त ज्वर है
नीम का कमाल
नीम की छाल, धनिया, गिलोय, अंजीर लाल चंदन, पद्माक्ष-सब 3-3 ग्राम लेकर अच्छी तरह कूट-पीस लें। फिर उसे पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा रोगी को कुछ दिन पिलाएँ।
पीठ में दर्द है
कनेर का कमाल
कनेर के फूलों को एक पाव मीठे तेल में डेढ़ महीने के लिए डाल दें। डेढ़ महीने बाद उसमें जैतून का एक पाव तेल डालें और एक शीशी में उस तेल को डाल दें। इस तेल की मालिश करें।
पुराना कब्ज है
किशमिश का कमाल
28 ग्राम किशमिश, 3 मुनके, 1 अंजीर-तीनों को पौन गिलास पानी में रात के समय भिगो दें। सुबह अच्छी तरह मसलकर छान लें। अब उसमें दो-ढाई चम्मच शहद और एक नींबू का रस और आधा गिलास पानी और मिलाकर पी लें। यह बहुत ही लाभकारी दवा है।
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साहिब बन्दशी
नींबू का कमाल
10 ग्राम नींबू के रस में इतनी ही शक्कर मिलाकर रात के समय कुछ दिन तक सेवन करें।
अन्य सहायक उपचार
- □ इमली के पत्तों के रस का सेवन करें।
- □ अंजीर का सेवन करें।
- □ साबुन को तेल लगाकर गुदा द्वार के अंदर रखें।
- □ पतागोभी के कच्चे पत्ते खाने की आदत डालें।
- □ पीछे पाँच फार्मूलों में बताया गया व्रत रखना।
पुराना ज्वर है
कटेरी का कमाल
कटियाली, सोंठ और गिलोय-सबको पानी में उबाल इनका काढ़ा बनाकर रोगी को हररोज कुछ दिन तक पिलाएँ। लाभकारी है।
भुईआँवला का कमाल
भुईआँवला के पंचाग को पानी में उबालकर जब पानी आधा रह जाए तो छानकर पिलाने से बहुत लाभ होता है।
अतीस का कमाल
अतीस का चूर्ण बनाकर रख लें। 4 ग्राम इस चूर्ण को पानी के साथ सुबह-शाम रोगी को दें।
अजवायन का कमाल
12 ग्राम अजवायन और 3 बड़ी पीपर पौन कप पानी में सुबह-सुबह मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। अगली सुबह पीपर और अजवायन को उस पानी के साथ कूट-पीसकर सेवन करें। बड़ा लाभकारी है।
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फिटकरी का कमाल
फूलों हुई फिटकरी को पीसकर चूर्ण कर लें। अब उसमें इतनी मिश्री पीसकर मिला लें कि दवा कड़वी न लगे। ढाई ग्राम यह चूर्ण ढाई-2 घण्टे के अन्तराल में 4 बार कुनकुने पानी सहित लें।
चिरायता का कमाल
पानी में चिरायता और कत्था डालकर कुछ समय के लिए भिगो दें। फिर उसे छानकर रोगी को वो पानी पिला दें।
पित्तपापड़ा का कमाल
12 ग्राम पित्तपापड़ा को 6 काली मिर्च के साथ पीस लें। अब इसे पानी में डालकर उबालें। अब उतारकर गुनगुना करके इसमें सेंधा नमक डालकर रोगी को पिलाएँ। यह बहुत ही लाभकारी दवा है।
इन्द्रयव का कमाल
इन्द्रयव के दो बीजों को गर्म पानी में भिगो दें। भिगोने से पहले यदि आग पर रखकर सेंक लें तो बहुत अच्छा है। कुछ देर भिगोने के बाद यह पानी रोगी को पिला दें।
अन्य और सहायक उपचार
❑ परवल का साग खाएँ।
❑ 1 ग्राम जीरे को पीसकर गुड़ मिला लें और रोगी को खिलाएँ। सुबह-शाम रोगी को यह दवा खिलाएँ। हो सके तो दुपहर में भी खिला दें।
पेट में कीड़े हैं
अंकोल का कमाल
अंकोल की जड़ का रस निकालकर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पिएँ।
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साहिब बन्दशी
मूसाकर्णी का कमाल
मूसाकर्णी का रस निकालकर सेवन करें।
नीम का कमाल
3-4 बूँद नीम के तेल का सेवन करें।
बायविडंग का कमाल
बायविडंग को पानी में मिलाकर पिएँ।
करेले का कमाल
करेले के पत्तों का रस निकालकर पिएँ।
नींबू का कमाल
नींबू के बीजों का ढाई ग्राम चूर्ण पानी के साथ लें।
अजवायन का कमाल
सुबह खाली पेट 20 ग्राम गुड़ खाएँ। 20 मिनट बाद डेढ़ ग्राम अजवायन-चूर्ण रात को रखे हुए पानी के साथ सेवन करें। यह अत्यन्त लाभकारी प्रयोग है।
अनार का कमाल
ढाई किलो पानी में 65 ग्राम अनार की जड़ की छाल को डालकर उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो उतार छानकर ठंडा कर लें। यह पानी पौन घण्टे के अन्तराल में एक कप रोगी को पीने के लिए देते रहें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ अनार के रस का सेवन करें।
- ❑ पपीते के 12-13 बीजों को अच्छी तरह से कूट-पीसकर थोड़े-से पानी के साथ सेवन करें।
- ❑ तुलसी की पत्तियों का रस पिएँ।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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- ❑ करेले का रस पीएँ।
- ❑ अखरोट का सेवन करें।
पेट में दर्द है
हींग का कमाल
हींग, सेंधा नमक, अजवायन और हरड-सबको पीसकर सेवन करें।
अजवायन का कमाल
अजवायन को पीसकर चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण में पाँचवाँ हिस्सा काला नमक मिलाएँ। ढाई ग्राम यह चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करें।
अदरक का कमाल
5 ग्राम अदरक का रस, 10 ग्राम नींबू का रस और 5 ग्राम शहद-तीनों को मिलाकर सेवन करें।
आक का कमाल
आक के फूल को पीसकर उसमें जरा-सा सेंधा नमक डालकर सेवन करें।
मीठे सोडे का कमाल
500 मि. ग्रा. मीठे सोडे को गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
जीरे का कमाल
भोजन के बाद चम्मच-भर जीरे को आग पर भूनें। फिर उतारकर पीस लें। अब उसे शहद में मिलाकर चाटें।
अरंड का कमाल
अरंड की लकड़ी को जलाकर उसकी राख चुन लें। एक ग्राम
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साहिब बन्दगी
राख को फॉक थोड़ा पानी पी लें।
नींबू का कमाल
नींबू का बीच से काटकर उसकी एक फॉक पर काली मिर्च, जीरा और काला नमक डालकर चूसें।
अन्य और सहायक उपचार
- □ अनार के दानों पर काली मिर्च और सेंधा नमक डालकर सेवन करें।
- □ धनिया के का शरबत पिएँ।
- □ गर्म पानी वाली बोटल में गर्मागर्म पानी डालकर उससे पेट को संक कराएँ। यह बड़ा ही प्राकृतिक फार्मूला है।
- □ अमृत धारा की दो बूँदों को मिश्री या चीनी पर डालकर खाएँ। यह तो बहुत ही जल्दी और बेहतरीन प्रयोग है।
पेट में मरोड़ है
लौंग का कमाल
लौंग और अनार की जड़ की छाल को पानी में उबालकर छानकर वो पानी रोगी को पिलाएँ। बहुत बढ़िया औषधी है।
प्रदर रोग है
कमल का कमाल
नीले कमल का केसर (कमल के बीच का गूदा), मुलहटी, काला नमक, जीरा-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इस चूर्ण में शहद मिलाकर हदी के साथ खाएँ। बहुत लाभकारी है।
गूलर का कमाल
गूलर के फूलों को पीसकर चूर्ण बना लें। फिर उसमें शहद और