आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)
Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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मुँह में छाले हैं
बाल का कमाल
बाल का 50 ग्राम रस रोज़ पिएँ।
फिटकरी का कमाल
फिटकरी को पानी में घोल कर गराये करें।
काली मिर्च का कमाल
17 काली मिर्च और 32 किशमिश-दोनों को मिलाकर चबाएँ।
मुँह से दुर्गंध आती है
तुलसी का कमाल
तुलसी के पत्ते चबाना लाभकारी होता है।
अदरक का कमाल
गर्म पानी में थोड़ा अदरक का रस मिलाकर कुल्ले करें।
नीम का कमाल
नीम की दातुन करना अतिउत्तम है।
अन्य और सहायक उपचार
❑ जीरा भून कर खाएँ।
❑ हरे धनिये का सेवन करें।
मूत्र बार-बार आता है
कंघी का कमाल
कंघी के चारों प्रकार की जड़ की छाल को ले पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को फाँककर ऊपर से दूध पी लें।
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साहिब बन्दशी
अन्य और सहायक उपचार
- □ रोज 70-75 ग्राम भुने हुए चने खाकर ऊपर से मिश्री या थोड़ा गुड़ खा लें।
- □ तिल के लड़ूँ जरूर खाएँ।
- □ पालक की सब्जी खाएँ।
- □ छुहारे का सेवन करें।
मूत्र रुक-रुक कर आता है
कटेरी का कमाल
कटियाली के रस में शहद मिलाकर पिएँ। बहुत लाभकारी है।
जीरे का कमाल
जीरे में गुड़ मिलाकर रोज खाएँ। अत्यन्त लाभकारी है।
असर्गंध का कमाल
असर्गंध का काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिए।
जौ का कमाल
जौ का दलिया बनाकर दूध के साथ सेवन करें।
छोटी इलायची का कमाल
इलायची, पिप्पली, ककड़ी के बीज, पाषाण भेद, खीरा, सेंधा नमक, केसर, शिलाजीत-सबको पीसकर चूर्ण कर लें। अब चावल के पानी में 10ग्राम यह चूर्ण डालकर पी लें।
गेहूँ का कमाल
75 ग्राम गेहूँ रात के समय पानी में भिगो दें। सुबह उठकर उन्हें अच्छी तरह से पीस लें और फिर छानकर उसमें मिश्री मिलाकर सेवन करें।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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कपूर का कमाल
पेशाब के रास्ते में कपूर रखें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ केले के तने का रस निकाल लें। 5 चम्मच इस रस में इससे आधा घी मिलाकर सेवन करें। बहुत लाभकारी है।
- ❑ 210 ग्राम शिलाजीत में 750 मि. ग्रा. दूध को मिलाकर सेवन करें।
- ❑ बथुए का साग खाएँ।
मेदा कमजोर है
पित्तपापड़ा का कमाल
पित्तपापड़ा के पत्तों का रस पिएँ।
मोच आई है
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ मोच वाली जगह को पानी से धोकर मिट्टी का तेल लगाकर मालिश करें।
मोटापा है
नींबू का कमाल
रोज सुबह-सुबह खाली पेट पौन गिलास गुनगुने जल में एक नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर सेवन करें। यह बड़ा ही आसान और उतना ही लाभकारी प्रयोग है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ छाछ का सेवन करें।
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साहिब बन्दगी
रक्त प्रदर है
सीसम का कमाल
40 ग्राम सीसम के फल और इतने ही पत्ते, 3 इलायची, 12 ग्राम मिश्री, 10 काली मिर्च-सबको खरल में घोंट जल के साथ सेवन करें।
अजवायन का कमाल
22 ग्राम अजवायन 110 ग्राम पानी में रात के समय भिगो दें। सुबह उसमें मिश्री मिला उसी पानी के साथ पीसें। फिर थोड़ा और शीतल जल मिलाकर सेवन करें।
रक्त विकार है
अनन्तहुली का कमाल
अनन्तहुली की जड़ को पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण पानी के साथ लें।
अंजीर का कमाल
अंजीर का सेवन करें।
अन्य और सहायक उपचार
❑ परवल का साग खाएँ।
रक्त स्त्राव हो रहा है
फिटकरी का कमाल
ग्राम-भर फिटकरी और 120 ग्राम दही की एक गिलास पानी के साथ लस्सी बना लें। यह लस्सी पीना बहुत लाभकारी है।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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लकवा है
सहजने का कमाल
30 ग्राम सहजने की छाल, 20 ग्राम लहसुन, 100 ग्राम मेथी, 240 ग्राम पाव गेहूँ की भूसी (आटे का बूरा), 120 ग्राम गुड़-सबको गाय के डेढ़ किलो दूध में डालकर खीर की तरह बना लें। यह खीर यदि लकवे का रोगी खाए तो बहुत लाभ हो।
लहसुन का कमाल
30 ग्राम लहसुन को छीलकर पीस लें। अब इसे दो गिलास दूध में डालकर उबालें। जब गाढ़ा हो जाए तो उतार लें। इसका सेवन बहुत लाभकारी है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ करेले की सब्जी खाएँ।
- ❑ छुहारे का सेवन करें।
- ❑ सोठ, गुड़ और उड़द की दाल-तीनों को अलग-अलग पीस लें। अब उड़द की दाल को घी में सेंक लें। फिर उतारकर तीनों को मिलाकर उसके लड्डू बनाएँ। ऐसा एक लड्डू रोज़ खाना बढ़ा ही हितकर रहेगा।
वात ज्वर है
नागरमोथा का कमाल
नागरमोथा, पित्तपापड़ा, चिरायता, गिलोय, सोठ-सबको 3-3 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। यह काढ़ा रोगी को डेढ़ हफ्ता तक पिलाएँ।
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साहिब बन्दगी
वायु गोला ( गैस ) है
हींग का कमाल
सोंठ, सेंधा नमक, भुनी हुई हींग, पीपर, मिर्च काली, जीरा-सबको बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण भोजन के बाद सेवन करें। यदि पहले भी कर लें तो सोने पर सुहागा है।
लौंग का कमाल
पौन कप पानी उबालें। अब उसमें 5-6 लौंग पीसकर डालें। अब उतारकर थोड़ा ठंडा करें और पी लें। यह दवा दिन में 2-3 बार लेना बहुत लाभकारी है।
पुदीने का कमाल
27 ग्राम पुदीने का रस और 32 ग्राम शहद-दोनों को एक गिलास (बड़ा) पानी में मिलाकर पी लें।
अदरक का कमाल
कच्चे अदरक को काटकर उसपर सेंधा नमक डालकर खाएँ। दिन में 4-5 बार जरूर खाएँ।
नींबू का कमाल
हररोज सुबह आधे नींबू को एक गिलास पानी में मिलाकर सेवन करें। यह अत्यंत लाभकारी प्रयोग है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ नारंगी का सेवन करें।
- ❑ बथुए के साग को उबालकर उसका पानी पिएँ।
- ❑ एक बड़े गिलास पानी में 9 काली मिर्च उबालें और पी लें।
- ❑ गुड़ का सेवन करें। यह भोजन के बाद खाएँ।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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विष खा लिया है
लहसुन का कमाल
जितना अधिक हो सके, लहसुन खिलाएँ ताकि उल्टी हो सके।
हींग का कमाल
हींग को पानी में घोल पर पिलाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
- ▣ दूध में 225 ग्राम गाय का या कोई भी देसी घी डालकर पिला दें।
वीर्य की कमी है
अदरक का कमाल
- ▣ 5 ग्राम अदरक को पीसकर, 5 ग्राम शहद, 5 ग्राम सफेद प्याज का रस और 5 ग्राम देसी घी में मिलाकर सुबह खाली पेट चाटा करें। बहुत ही लाभकारी है।
अन्य और सहायक उपचार
- ▣ उड़द के लड्डू दूध के साथ खाएँ।
वीर्य पतला है
बबूल का कमाल
बबूल की फली (कच्ची), शतावर, मौलिसरी की छाल, मोचरस-सबको कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 3 ग्राम यह चूर्ण रोज खाएँ।
जामुन का कमाल
जामुन की गुठली को पीसकर चूर्ण बना लें। 6 ग्राम यह चूर्ण दूध के साथ लें।
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साहिब बन्दगी
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ नारियल का सेवन करें।
शरीर से दुर्गंध आती है
बेल का कमाल
बेल के पत्तों का रस मलें।
श्वेत प्रदर है
गूलर का कमाल
25 ग्राम कच्चे गूलर को पीसकर उसमें बराबर की मात्रा में ही मिश्री और शहद मिलाकर खाने के बाद गाय का एक कप दूध पी लें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ इमली के पत्तों के रस का सेवन करें।
- ❑ फालसे का सेवन करें।
- ❑ चुकन्दर का रस निलाकर उसमें 3-4 गुणा गाजर का रस मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
- ❑ रोज 2 पके हुए केले खाएँ।
सन्निपात है
थूहर का कमाल
थूहर का दूध निकालकर उसमें पीपल को डाल दें। ढाई दिन तक भिगोने के बाद निकालकर सुखा लें। अब अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम यह चूर्ण डेढ़ हफ्ता सेवन करें।
नागरमोथा का कमाल
नागरमोथा, बड़ी हर की छाल, सोंठ-सबको पीसकर चूर्ण बना
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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लें। 5 ग्राम यह चूर्ण हफ्ता-भर खिलाएँ।
सफेद कोढ़ है
अकरकरा का कमाल
अकरकरा के पत्तों का रस निकालकर कोढ़ वाली जगह लगाएँ।
अकरकरा का कमाल
अकरकरा और कालेदाने-दोनों को पीसकर कोढ़ वाली जगह लेप करना बड़ा ही लाभकारी सिद्ध होता है।
नीम का कमाल
नीम की पत्ती, फूल और निबौली-सबको पीसकर शरबत बनाकर पिएँ।
सफेद दारा हैं
काले चने का कमाल
सुबह 8-9 बजे 30 ग्राम काले चनों में 12 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिलाकर पानी में भिगोने के लिए रख दें। शाम को 8-9 बजे कोई साफ कपड़ा लें और उसमें डालकर बाँध दें। सुबह खाली पेट खूब चबा-चबाकर खाएँ।
सामान्य ज्वर है
चिरायता का कमाल
चिरायता, नागरमोथा, सोंठ, नीम की छाल, निशोथ, पीपली, कुटकी, बायविडंग-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम यह चूर्ण रोज पानी के साथ लें।
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साहिब बन्दगी
करौंदे का कमाल
करौंदे की जड़ को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का रोगी के शरीर पर लेप करें।
बेल का कमाल
बेल की जड़ का काढ़ा बनाकर पिलाएँ।
अगस्त का कमाल
अगस्त के पत्तों का रस निकालकर (हाथों से ही रगड़कर) कुछ देर तक सूँघें। यह काम दिन में तीन बार कर लें। बहुत ही लाभदायक प्रयोग है।
तुलसी का कमाल
60 ग्राम तुलसी के पत्ते, 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम लौंग-सबको कूट-पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। दिन में दो बार यह गोली पानी के साथ लें।
अन्य और सहायक उपचार
□ पिसे हुए एक लौंग को गर्म पानी के साथ रोगी को 2 बार दें।
सिर में जुएँ हैं
सीताफल का कमाल
सीताफल के बीज का तेल बालों की जड़ों में मलें।
नींबू का कमाल
नींबू के रस से सिर की मालिश करें। यह काम नहाने के आधा घण्टा पहले करें।
बथुए का कमाल
बथुए के साग को उबालकर उस पानी से सिर धोना बहुत
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में लाभकारी रहता है।
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सिर में दर्द है
अगस्त का कमाल
अगस्त वृक्ष के पत्तों के रस की 2-2 बूँद नाक के दोनों नथनों में डालें। बड़ा लाभकारी है।
छोटी इलायची का कमाल
छोटी इलायची को पीसकर सिर पर लेप करें।
नीम का कमाल
नीम की छाल, हरड, गुरुच, योगराज गुग्गुल, बहेड़ा, चिरायता, हल्दी और आँवला-सबको मिलाकर काढ़ा बना लें और फिर उसमें गुड़ मिलाकर सेवन करें।
नींबू का कमाल
नींबू की पत्तियों को घोंट रस निकालकर सूँघें और फिर उसके बाद चाय में एक नींबू निचोड़कर पी लें। सुबह की चाय में ही यह प्रयोग करें तो पुराने सिर दर्द में बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो।
अंजीर का कमाल
अंजीर का सेवन करने से सिर का दर्द दूर होता है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ लौंग को पीसकर उसका लेप सिर पर करना चाहिए।
- ❑ मिट्टी को गीला करके उसकी पट्टी बनाकर सिर पर रखें।
- ❑ चाय में नींबू का रस डालकर पीने के बाद कुछ देर के लिए लेट जाएँ। ध्यान रहे कि चाय में दूध न डालें।
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साहिब बन्द्शी
सुनाई कम देता है
लहसुन का कमाल
7 लहसुन की कलियों को 60 ग्राम तिली के तेल में डालकर तड़का दें। फिर उस तेल को संभालकर किसी शीशी में रख लें। 2 - 3 बूँद रोज़ाना इस तेल को कानों में डालना बड़ा ही लाभकारी रहता है।
सूजन है
मुलहठी का कमाल
मुलहठी, काली मिर्च-दोनों को पीसकर उसमें मक्खन और भैंस का दूध मिलाकर लेप करें।
सूजाक है
भिण्डी का कमाल
मिश्री के साथ कच्ची भिण्डी खाना बड़ा लाभदायक रहता है।
जटासंकरी का कमाल
जटासंकरी की गाँठ को छीलकर उसे टुकड़ों में बदल दें। अब इन टुकड़ों को सुखा लें। सुखाने के बाद 15 ग्राम उन टुकड़ों को दूध के साथ सेवन करें। यह दवा बड़ी हितकारी है।
अन्य सहायक उपचार
- ❑ सेमल की जड़ का रस निकालकर 20 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करें।
- ❑ पिप्सी हुई फिटकरी को थोड़े से जल में घोलकर सेवन किया करें।
- ❑ 10 ग्राम पिप्सी हुई हल्दी जल से साथ लें। यह दवा आप दिन
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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में 2-3 बार ले सकते हैं।
- ▣ 15 ग्राम सत्यनाशी की जड़ की छाल को पीसकर पानी के साथ सेवन करें।
स्तनों में दूध की कमी है
जीरे का कमाल
- ▣ सफेद जीरा, मिश्री और सौंफ-सबको अलग-अलग चूर्ण बनाकर आपस में मिला लें। आधा चम्मच (बड़ा) यह चूर्ण दूध के साथ सुबह-शाम लें।
- ▣ जीरे में समभाग गुड़ मिलाकर छोटी-2 गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 3-3 गोलियाँ पानी के साथ लें।
अन्य और सहायक उपचार
- ▣ गाजर का रस पीएँ।
- ▣ कच्ची मूँगफली का सेवन बहुत लाभकारी रहता है।
- ▣ अरबी की सब्जी बनाकर खाना लाभकारी है।
स्वप्रदोष है
जामुन का कमाल
जामुन की गुठली को पीसकर चूर्ण कर लें। 5 ग्राम यह चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ लें।
गुलाब का कमाल
गुलाब के 5 फूल तोड़ लाएँ। अब मिश्री को पीसकर उन पर नमक की तरह डालें और चबा-चबाकर खाएँ। इस दवा के बाद दूध का सेवन जरूर करें।
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साहिब बन्दशी
हल्दी का कमाल
6 ग्राम त्रिफला और ढाई ग्राम कच्ची हल्दी को पीसकर कपड़े से छान लें। 4 ग्राम यह चूर्ण पानी के साथ लें। यह दवा दिन में दो बार जरूर लें।
हाथी पाँव है
तुलसी का कमाल
□ रोज सुबह तुलसी और नीम के 11-11 पत्ते खाएँ।
हिचकियाँ आ रही हैं
अदरक का कमाल
ताजे अदरक को काटकर चूसना बड़ा ही लाभकारी है।
ग्वारपाठे का कमाल
ग्वारपाठे के रस में सोंठ डालकर सेवन करें।
नींबू का कमाल
एक चम्मच शहद में इतना ही नींबू का रस और थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर सेवन करें।
अन्य और सहायक उपचार
□ चम्मच-भर देसी घी को गर्म करके पी लो।
हिस्टीरिया है
लहसुन का कमाल
जब भी बेहोशी आए तो लहसुन का रस नाक में टपकाएँ।
हींग का कमाल
हींग, नींबू, जीरा, पोदीना, नमक-थोड़ी-2 मात्रा में लेकर गर्म
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पानी में डालकर पीएँ।
असगन्ध का कमाल
3 ग्राम असगन्ध, 3 ग्राम खुरासानी और 13 ग्राम जटामासी लेकर 125 ग्राम पानी में पका लें। जब पानी आधा रह जाए तो उतारकर छान लें। इस दवा का सेवन बड़ा ही लाभकारी है।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ फलों का सेवन करें।
- ❑ दौरा आने पर हींग सुँघाएँ।
हृदय रोग है
अडूसे का कमाल
अडूसे के छोटे पेड़ को जड़ और पत्तों सहित उखाड़कर पानी से साफ कर लें और फिर कुछ देर छाया में सुखा लें। अब अच्छी तरह से पीसकर छान लें। यह चूर्ण (हथेली-भर) रोज़ खाना बहुत लाभदायक सिद्ध होता है।
पीपल का कमाल
पीपल, कचूर, हर की छाल, सोंठ, पुष्करमूल, बच और राक्षा सबको समान मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस लें। यह चूर्ण आपको रोज़ दूध के साथ लेना है। इसे जल के साथ भी लिया जा सकता है।
आँवले का कमाल
सूखे आँवलों को कूट-पीस लें। फिर मिश्री मिलाकर रख लें। दवा तैयार है। ढाई चम्मच यह दवा रोज़ सुबह खाली पेट पानी के साथ लें।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ नारंगी का सेवन करें।
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साहिब बन्दगी
- ❑ मौसमी का सेवन करें।
- ❑ अंगूर खाएँ और उसका रस निकालकर पिएँ।
- ❑ पिसे आँवले को गाय के दूध के साथ सेवन करें।
हैजा है
बेल का कमाल
बेल और सोंठ दोनों का काढ़ा बनाकर रोगी को दें।
छोटी इलायची का कमाल
गुलाबजल लेकर उसमें छोटी इलायची का 20 ग्राम छिलका डाल दें। अब इसे उबालने के लिए आग पर रखें और जब गुलाबजल लगभग आधा रह जाए तो उतार लें। यह दवा रोगी को पिलाएँ।
नीम का कमाल
- ❑ नीम की 22 पत्तियाँ लेकर पीस लें। अब आधा गिलास पानी में इसे मिलाकर रोगी को पिलाएँ।
विषधारियों ने काटा है
विषधारियों ने काटा है
कनखजूरा चिपका है
मूली का कमाल
कनखजूरे पर सरसों का तेल डालना ठीक रहता है। ऊपर से यदि मूली के पत्तों का रस भी डाल दिया जाए तो कनखजूरे के पास उतर जाने के सिवा कोई चारा नहीं रहता है। पर यह सब करने से पहले आपको एक काम कर लेना होगा और वो यह कि जहाँ कनखजूरा चिपका हो, उस जगह के चारों तरफ गीला गूँथा हुआ आटा लगा दें। यह इसलिए कि न तो कनखजूरा आगे बढ़ने पाए और न ही उसपर डाली गयी दवा उसके स्पर्श से दूसरों अंगों तक न जाने पाए।
कुत्ते ने काट लिया है
साबुन का कमाल
कुत्ते ने काट लिया हो तो उस जगह को साबुन से अच्छी तरह धो लें।
छोटे-2 कीड़े-मकौड़े, मच्छर आदि ने काटा है
नींबू का कमाल
काटे गये स्थान पर नींबू का रस मलें।
पागल कुत्ते ने काटा है
लाल मिर्च का कमाल
लाल मिर्च पीसकर उसमें सरसों का तेल मिलाएँ और काटे स्थान पर लेप कर दें।
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साहिब बन्दगी
बंदर ने काटा है
शहद का कमाल
प्राथमिक चिकित्सा के रूप में शहद में गोबर मिलाकर लगाएँ।
बिच्छू ने काटा है
लाल मिर्च का कमाल
लाल मिर्च पीसकर काटे स्थान पर लगाएँ।
नीम का कमाल
नीम के पत्ते मसलकर लगाएँ।
लौकी का कमाल
लौकी को काटकर रस निकालकर लें। लौकी को पीसकर उस स्थान पर लेप कर दें और निकाला हुआ रस रोगी को पिला दें।
फिटकरी का कमाल
फिटकरी को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर लेप बनाकर लगाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
❑ बिच्छू काट लेने पर सबसे पहले तुरंत नहा लेना दर्द को ऊपर चढ़ने से रोकता है।
❑ लहसुन और अमचूर को समान मात्रा में पीसकर मिला लें। इस दवा को काटे हुए स्थान पर लगाएँ।
भौरै ने काटा है
तुलसी का कमाल
तुलसी के पत्तों को पीसकर नमक मिलाकर लेप करें।
आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में
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मकड़ी ने काटा है
आम का कमाल
अमचूर को पानी के साथ घिसकर लेप बना लें। यह लेप काटे हुए स्थान पर लगाएँ।
मधुमक्खी ने काटा है
शहद का कमाल
- ❑ शहद में माचिस का मसाला मिलाकर लगाएँ।
- ❑ शहद में आक का दूध मिलाकर लगाएँ।
साँप ने काटा है
अंकोल का कमाल
अंकोल की जड़ को अच्छी तरह से पीस रस निकालकर पिलाएँ।
बेल का कमाल
बेल और कैथ-दोनों की जड़ को पानी में पीसकर पिलाएँ। बड़ी लाभकारी है।
करौंदे का कमाल
करौंदे की जड़ को पानी में उबालकर पिलाएँ।
अन्य और सहायक उपचार
- ❑ 18 ग्राम प्याज के रस में इतना ही सरसों का तेल मिलाकर रोगी को पिलाएँ। पौन घण्टे बाद फिर यही दवा दें। फिर पौन घण्टे बाद एक और दवा दें।
- ❑ नीम की पत्तियाँ खिलाएँ।
- ❑ विषखपरा का रस पिलाएँ।
- ❑ पानी में फिटकरी घोल कर पिलाएँ।
कुछ ध्यान देने योग्य बातें
कुछ ध्यान देने योग्य बातें
मल-मूत्र के विसर्जन में ध्यान दें
- ▣ मल-मूत्र को अधिक देर तक रोके रखना रोगों को आमंत्रित करना है।
- ▣ उकडू बैठकर मल-विसर्जन करें। इससे मल अच्छी तरह विसर्जित होता है।
भोजन करने में ध्यान दें
- ▣ जब मल-मूत्र का वेग हो तब भोजन नहीं करना चाहिए।
- ▣ भोजन करते समय मौन रहें।
- ▣ भोजन करते समय पानी 1-2 घूँट करके ही पिएँ। बहुत अधिक पानी भोजन के साथ मत लें। भोजन के साथ घूँट-2 पानी अमृत समान है, लेकिन बहुत अधिक पानी ठीक नहीं। भोजन के तुरंत बाद पानी मत पिएँ, यह विष समान है।
- ▣ एक बार भोजन करके दूसरी बार भोजन करने में पाँच-छः घण्टे का अंतर जरूर रखें।
- ▣ भोजन को चबा-चबाकर तरल बनाकर खाएँ।
- ▣ हो सके तो भोजन खुली-ताजी-स्वच्छ हवा और धूप में खाएँ। पर यदि कमरे में खाना हो तो ताजी हवा के आने का मार्ग बंद न करें।
- ▣ भोजन का समय भी निश्चित होना चाहिए। असमय भोजन करना भी हानिकारक हो जाता है। यदि आप शाम को 6 बजे भोजन करते हैं तो ज्यादा-से-ज्यादा साढ़े छः ही होने दें।
- ▣ सुबह पाचन-शक्ति तेज होती है, फिर यह शाम तक लगातार
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