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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

( २० ) भगणादिकल्पवर्षैर्⁵ लब्धं¹ रविमंडलान्तिका⁶मध्या⁴ । मेषाद्द्यु²गुण³फलाधिका भवन्तीष्टदिनमध्याः ॥ ५६ ॥ शुद्धीश ११ बंधे शुद्धे¹देवमशेषात् सावनद्युगण शुद्धिः⁴ । व्येकावमं² गृहीत्वा गुणस्वमुने³ युतान्न⁵ शुध्यति चेत् ॥ ५७ ॥ ५६. (घ) १. र्लब्धम् for (लब्धं) (ग) (क) (ख) लब्ध for (लब्धं) २. मेखादि for (मेषादि) ३. द्युगण (ग) (क) for (द्युगुण) (क) ४. मध्याः (ख) मध्यः (च) मध्य for (मध्या) (ख) ५. वर्षेः for (वर्षै) ६. लान्तिको for (लान्तिका) (च) १. ब्धं for (लब्धं) ३ क्क (द्यु) गण for (द्युगुण) ५७. (घ) १. शुद्धेऽवशेषा (ग) शुद्धेऽवमशेषात् (ख) शुद्धेवमशेषात् for (शुद्धेदेवमशेषात्) २. व्येकामवं (ख) एकावमं for (व्येकावमं) ३. खमुने (क) खमुनि for (स्वमुने) (ग) शुद्धीश के पश्चात् ११ की संख्या नहीं दी गई है । (क) (क) १. ऽवमशेषोत्सावन for (देवमशेषात्सावन) ४. सिद्धिः (ख) सुद्धिः for (शुद्धिः) (ख) ५. युतानि for (युतान्न) ६. सुध्यति for (शुध्यति) (च) १. शुद्धेइवमशेषात् for (शुद्धेदेवमशेषात्) २. व्येकामवं for (व्येकावमं)

+2+2+1+2 = 12 matras!) इन्-दुच्-चं पा-त-म-ल्प-गं स्व-ग-तेः (2+2+2 + 2+1+1+2+1 + 1+1+2 = 18 matras!) Yes! If it is "पा-तं स्व-ल्प-गं": पा(2)तं(2) स्व(0)ल्प(2)गं(2) = 8 matras, but with पातमल्पगं: पा(2)त(1)म(1)ल्प(2)गं(2) = 8 matras! Wait, "स्व" before "ल्प" makes "तं" guru, so: पा(2) तं(2) स्व(0)ल्प(2)गं(2) = 2+2+2+2 = 8 matras! Wait, what about चाल्पगं? पा(2)तं(2) चा(2)ल्प(2)गं(2) would be 2+2+2+2 = 8, but "तं" is guru, "चा" is guru... Anyway, "स्वल्पगं" is an excellent reading, but let's re-verify the letters: Is it स्वल्पगं? Wait, look at line 23: Does it say स्वल्पगं? The first letter:

( २२ ) मध्यगतिज्ञं वीक्ष्य¹ श्री³षेणार्यभटविष्णु⁵चन्द्राज्ञाः⁴। सदसि न भवन्त्यभिमुखाः सिंहं दृष्ट्वा² यथा हरिणाः ॥ ६० ॥ युगभगणमान याता⁵हर्गण¹ दिनवारमध्यमाद्येषु । मध्यमगति द्विषष्ट्यार्याणां² प्रथमकृतो³ है⁴ ॥ ६१ ॥

६०. (ग) १. वीक्ष for (वीक्ष्य)
२. दिष्ट्वा for (दृष्ट्वा)
(क) ३. श्रीहर्षेणार्य for (श्रीषेणार्य)
(ख) ५. विभुचन्द्राद्या for (विष्णुचन्द्राज्ञाः)
६. हरिणाः for (हरिणाः)
६१. (घ) १. हर्गण for (हर्गण)
२. द्विषष्ट्यार्याणां (ग) द्विषष्ट्यार्या (क) द्विषष्ठ्यार्याणां for (द्विषष्ट्यार्याणां)
३. प्रथमः कृतोध्यायः (ग) (क) प्रथमाः for (प्रथमकृतो है)
(ग) वि० + इति श्री ब्रह्मसिद्धांते मध्यमाधिकारः प्रथमः +
(ख) ५. यतो for (याता)
२. द्विषष्टार्याणां for (द्विषष्ट्यार्याणां)
(ख) की दृष्टि से ६३ श्लोक हैं, २३ वां अधिक है।
(च) ३. प्रथमः for (प्रथम)
४. कृतोध्यायः for (कृतोहै)

( २३ ) ५ ॥ श्रीगणेशायनमः ॥ यस्मान्न मध्य⁴तुल्यः प्रतिदिवसं दृश्यते ग्रहो भगणे । तस्माद्¹ कल्पकरं वक्ष्ये³ मध्यस्फुट²करणम् ॥ १ ॥ अर्धज्याभूयमला मुनियमवेदा वसुऽनलषट्का² । रसकृतवसवः शशिपंचखेन्दवश्चन्द्रशरसूर्याः³ ॥ २ ॥ षटुदधि⁵मनवो भूवा³ग्निरसशशांका मुनींद⁴वसुचन्द्राः⁶ । इन्दुन्वनन्दचन्द्रा रसतिथय¹ यमला² रवित्रियमाः ॥ ३ ॥

१. (घ) १. सस्माह for (तस्माद्) (ग) तस्माहक् तुल्यकरं (क) तस्माहक् तुल्यकरं
for (तस्माद्कल्पकरम्)
२. स्फुटं for (स्फुट) (ग) स्फुटीकरणम् (क) स्फुटीकरणम् for (स्फुटकरणम्)
(ग) ३. वक्षे for (वक्ष्ये)
(क) ४. मध्यम for (मध्य)
(ख) १. तस्माहक् तुल्यकरं for (तस्माद् कल्पकरं)
२. स्फुटीकरणम् for (स्फुटकरणम्)
(च) ५. "मंगलसूचक शब्द" लुप्त है !
१. तस्मात् ह for (तस्माद्) २ स्फुटं for (स्फुट)
२. (घ) १. मनुयमला for (भूयमला (ग) (क) अर्धज्यामनुयमला for (अर्धज्या-
भूयमला)
२. वसुज्वलखट्काः (ग) (क) वसुज्वलनषट्काः for (वसुऽनलखट्का)
(ख) १. अर्धज्यामनुयमला for (अर्धज्याभूयमला)
२. वसुज्वलनषट्काः for (वसुऽनलखट्का)
३. चन्द्रमसूर्या for (चन्द्रशरसूर्याः)
(च) १. अर्द्धज्यामनुयमला for (अर्धज्याभूयमाला)
२. वसुज्वलनषट्काः for (वसुऽनलषट्का)
३. (घ) १. तिथिय for (तिथय) (ग) (क) रसतिथि (ख) रसतिथि for (रसतिथय)
२. यम्नाः for (यमाः) (ख) for (यमाः)
(ग) ३. भूताग्नि (क) (ख) (च) for (भूवाग्नि)
४. मुनींदु (क) (ख) (च) for (मुनींद)
(क) ५. षडवब्धि for (षटुदधि)
६. चन्द्रा for (चन्द्राः)
(ख) ७. चन्द्राः for (चन्द्रा) (च) १. तिथि for (तिथय)

( २४ ) ऋतुनवखगुणा:<sup></sup> नवशरचन्द्रगु<sup></sup>णा: सप्तशून्ययमदहना<sup></sup> । द्विजिनगुणा स्त्रिरस<sup></sup>रदा खस प्रयम छिद्रे<sup></sup>षु जिना: ॥ ४ ॥<sup></sup>

४ &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; (घ) १. चन्द्रागुणा (च) for (चन्द्रगुणा:)
२. सप्त for (सप्त) (ग) सप्तयम वह्लयो व्यस्ता: ॥ ५ ॥ for (सप्रयम-
छिद्रेषु जिना: ॥ ४ ॥)
(ग) ३. गुणा for (गुणा:)
४. दहना: for (दहना)
५. रदा: for (रदा)
(क) 'क' में अंकित नहीं। इसके स्थान में दूसरा श्लोक अंकित है जो अगले पृष्ठ
पर दिया है।
(ख) यहां यह श्लोक अंकित नहीं है।
(च) २. सप्त for (सप्र)
६. छिद्रेशु for (छिद्रेषु)
७. क्रमसंख्या लुप्त ।
(क. ख. ग.) में अतिरिक्त श्लोक —
छिद्रेषु जिना कृतनव पंचयमा दं<sup>१</sup> नंद<sup>२</sup> चन्द्रमुनि पक्षा: ।
दन्ता<sup>५</sup>ष्टयम<sup>६</sup>मागुणा रामनवयमा: शशिख<sup>३</sup> रामा: ॥ ४ ॥
ऋतुनव खगुणा नवशरचंद्रगुणा: सप्तशून्ययमदहना: ।
द्विजिन<sup>४</sup> गुणास्त्रिरसरदा: खसप्तयम वह्नयो व्यस्ता:<sup>७</sup> ॥ ५ ॥
(क) १. यमा: for (यमा)
२. 'दं' लुप्त पद है। (ख)
३. शशियमखरामा: ॥ ४ ॥ (ख) शशिगुणखराम for (शशिखरामा:)
४. जित for (जिन)
(ख) ५. दताष्ट for (दन्ताष्ट)
६. यमगुण for (यमागुणा)
७. व्यास्ता: for (व्यस्ता:)
(च) वि० इस स्थान पर यह श्लोक लुप्त हैं ।
पृष्ठ ८b पर नीचे की ओर अन्य लेख में "ऋतुनव············से-खसप्रयम"
तक विद्यमान है । इस पर क्रम संख्या कोई नहीं ।

( २५ ) कृतनव पंचयमो$^२$ नन्द चन्द्र$^३$ दन्ताष्ट यमंगुण$^१$ रामनवयमाः$^४$। शशियम खरामाः$^५$ मुनिपक्षाः वह्नयो व्यस्ताः ॥ ५ ॥ मुनयोष्टयमास्त्रिरसा रुद्र$^४$ शशांकाः समुद्रमुनिचन्द्राः। नववेदयमामुनिगुणा$^३$ हुताशना$^२$ वसुगुणसमुद्राः ॥ ६ ॥ रूपेन्द्रियेषवोरसनगर्तु$^१$वंश्चन्द्रशीतकरवसवः। वसुशरनन्दाः$^३$ सागररुद्रशशांकाः$^२$ नवागार्काः$^४$ ॥ ७ ॥ त्रिविषयवेदशशांकाःपंचत्रिर$^४$सेंदवोब्धियमधृतयः। श्रुतिधृति$^२$स्त्वयमानवशशियम्पक्षा$^३$ सागर द्विजिना ॥ ८ ॥$^१$ ५. (घ) १. यमा (च) for (यम) (ग) वि० यहां चौथे और पांचवें श्लोक की चारों पंक्तियों को कुछ भिन्न प्रकार से लिखा है। (क) (क) १. क+षट् छिद्रेषु जिना २४५६+ २. यमाः+२५६४+for (यमा) ३. चन्द्रमुनिपक्षाः २७१६ for (चन्द्रदन्ताष्ट) १. यमाः+२८३२ for (यम)। इसके पश्चात् दूसरी पंक्ति प्रारम्भ ४. +२६३३+ ५. +३०२१+ (ख) यहां पर यह श्लोक 'लुप्त' है। ६. (ग) ३. गुण (च) for (गुणा) (क) ४. रुद्राः for (रुद्र) (च) २. कुताशना for (हुताशना) ७. (घ) १. त्वंवश्चन्द्र for (तंवश्चन्द्र) (क) २. शशांका (च) for (शशांकाः) (ख) ३. नन्दा for (नन्दाः) ४. नवागार्का for (नवागार्काः) ८. (घ) १. द्विजिनाः (ग) (च) for (द्विजिनाः) २. ख (क) (च) for (स्व) (ग) ३. पक्षाः (क) for (पक्षा) (ख) ४. भि for (त्रि) (वि० देखिए पृष्ठ २६—सारणी के लिए)

Here is the line-by-line transcription of the page into pure Unicode Devanagari:

( २६ ) ३ रदरसयमला गुणवेदवसुयमाः षट्क विषयशून्यगुणाः । १ ४ २ खमुनिरसां व्यासाद्धं नवरदचन्द्रा जिनांशज्याः ॥ ६ ॥ २४।१३२६ | २१४ | १ १८८७ | २६३३ | ७ | ५५१ | १८२४ | | ४२७ | १९६१ | ३०२१ | २८ | ६७६ | २०१६ | | ६३८ | २१५६ | ३०६६ | ६३ | ८११ | २२१६ | | ८४६ | २३१२ | ३१५६ | १११ | ६५८ | २४२४ | | १०५१ | २४५६ | ३२०७ | १७४ | १११४ | २६७२ ३ | | १२५१ | २५६४ | ३२४२ | २४६ | १२७६ | २८४३ | | १४४६ | २ २७१४ | ३२६३ | ३३७ | १४५३ |

( २७ ) लिप्तास्तत्त्वयम॑हता २२५ लब्धं द्योष्राष्टुचांतरादृता छेषात् । तिथिकृति २२५ हृत्फल्युता लब्धषष्ट्या द्वा ग्रहणमेवम् ॥ १० ॥ ज्यां प्रोह्य शेषगुणितास्तत्त्वयमा ज्यांतरा धृतालब्धम् । क्षेप्यं विशुद्धजीवासंख्यातिथि कृतिवधे चापम् ॥ ११ ॥

१०. (घ) १. ज्याष्टचांतरा (ग) ज्याज्यांतरा (क) ज्याज्यांतरा (च) for (द्याष्टचांतरा)
२. हृतात् (क) for (हृत्)
३. ष्ट्या (ग) ज्या (क) (ख) षष्ट for (षष्ट्या)
४. ज्या (ग) ज्या (क) (ख) ज्या for (द्वा)
(ग) ५. मलहता (ख) यमाहृता for (यमहृता)
६. २२५ हृतातफल for (हृत्फल)
७. लब्धं for (लब्ध)
(क) २. हृतातफलयुतात् for (हृत्फलयुता)
(ख) १. लब्धद्याष्टचां for (लब्धद्याषष्टचां)
८. ग्रहणमेव for (ग्रहणमेवम्)
(च) ६. २., २२५ हृतातफलयुता for (२२५ हृत्फलयुता)
३. ष्ट्या for (षष्ट्या)
४. द्वा for (द्वा)
११. (घ) १. ज्यांतरो (क) ज्यांतरोद्धृता (च) ज्यांतरोधृता for (ज्यांतराधृता)
२. संख्या for (संख्या)
(ग) ३. गुणितातत्त्वयमा २२५ for (गुणितास्तत्त्वयमा)
४. ++न++
५. ++२२५++
(क) ६. सेष (ख) सेष for (शेष)
(ख) ७. प्रयोज्यय for (प्रोह्य)
८. क्षेपं for (क्षेप्यं)
(च) ७. प्रोज्य for (प्रोह्य) ८. क्षेप्यं for (क्षेप्यं)

( २८ मध्याद्विशोध्य मंदं शीघ्रात्संशोध्य मध्यमं केन्द्रम् । अयुतिगता^१ यया यो^३ युति पदेऽन्यथा^४ बाहुकोटिज्ये^२ ॥ १२ ॥ त्रिज्याहता^४ भुजज्या २२७०^५ युगयुक्परिधि द्वयांतर^१ गुणाप्त्या^२ । युग्मांत^३ परिधिरधिको हीनोऽधिकः^६ हीनोधिकः^८ स्पष्टः ॥ १३ ॥ तद्गुणितेज्ये भांशैः ३६२ हृते^२ फले कोटिफलयुता त्रिज्या ३२७० । आद्यन्तयोर्निहीनो^१ पदयोर्द्वितृतीययोः^३ कोटिः ॥ १४ ॥

१२. (घ) १. व्युयुगतयेयोर्युजि (ग) अयुजिगतयेयोर्युजि for (अयुतिगताययायो युति)
(क) १. अयुजिगतैयोंज्ययोर्युजि for (अयुतिगताययायोयुति)
(च) १. अयुतिगतं for (अयुतिगता) २ या for (यो) ३ युंक्ति for (युति)
४. अवग्रहचिह्नलुप्त
१३. (घ) १. द्वयांतर (ग) द्वयांत (क) द्वयांतर (ख) द्वध्वयांतर for (द्वयांतर)
२. गुणात्प्या (ग) गुणाप्त्या for (गुणाप्त्या)
३. परिधिको हीनो हीनाधिकः for (परिधिरधिको हीनोऽधिकः हीनोऽधिकः)
(ग) ४. ३२७० हृता (क) त्रिज्याहृता (च) for (त्रिज्याहता)
५. यह संख्या अंकित नहीं।
६. 'ऽधिकः' शब्द अंकित नहीं (क)
(क) ७. 'युग्मांतर for (युग्मांत)
(ख) ६. 'हीनोऽधिकः' पद लुप्त हैं
८. हीनाधिकः for (हीनोऽधिकः)
(च) ५. २७७० for (२२७०) २+८+
३. परिधिकोहीनो for (परिधिरधिको हीनोऽधिकः)
१४. (घ) १. विहीना (ग) विहीना (क) विंहीना for (निहीनो)
(ग) २. हृंते (क) for (हृते)
३. द्वित्रितीययोः for (द्वितृतीययोः)
(ख) १. विहीनो for (निहीनो)
(च) १. विहीना for (निहीनो)

( २६ ) तद्भूुजफल कृतियोगान्मूलं कर्णः<sup></sup> पदेष्वयुग्युक्षु<sup></sup> । स्वपरिधिगुणा<sup></sup> क्रमोत्क्रमजीवा भांशै<sup></sup> ३६० हृ<sup></sup>तान्मन्दे ॥ १५ ॥ क्षयधनधनक्षयास्तत्फलानि शीघ्रेऽन्यथा धनं धनयोः । ऋणमृणयोर्योगा<sup></sup>न्तरमृणधनयोस्तुल्ययोः<sup></sup> शन्यं ॥ १६ ॥ तच्चापं मन्दफलं फलयोगान्तरवशाद्धनमृणं<sup></sup> वा । शीघ्रफलं तद्गुणिताद्व्या<sup></sup>सार्द्धात् कर्णालब्धधनुः ॥ १७ ॥ ३२७० देशान्तरे खमध्ये<sup></sup> भुजफलचापे भुजांतरे च कृते । उन्मण्डलेऽर्क<sup></sup> चन्द्रौ स्पष्टौ रविचरदले क्षितिजे ॥ १८ ॥ अर्कोदया<sup></sup>स्तमययोर्विना चरार्द्धेन रात्रिदिनदलयोः । न स्फुटमार्यभटोक्तं स्पष्टीकरणं स्फुटोक्तिरतः ॥ १६ ॥

१५. (घ) १. कर्णं पटेष्वग्युक्षुः for (कर्णः पदेष्वयुग्युक्षु)
२. गुणाः (च) for (गुणा)
३. म्यांशे for (भांशै ३६०) (ग) हृताफलं मंदे for (हृतान्मन्दे)
४. मांदेः (क) हृतामांदो (ख) हृतामन्दे for (हृतान्मन्दे)
(क) ५. पदेष्वयुक् युक् स्यात् for (पदेष्वयुग्युक्षु)
(ख) ६. क्रमोक्रमजीवा for (क्रमोत्क्रमजीवा)
(च) १. कर्णंपदेष्वयुक्षः for (कर्णः पदेष्वयुग्युक्षु)
३. ज्यां (भां) शै for (भांशै) ४ हृतामंदं for (हृतान्मन्दे)
१६. (घ) १. धनयोः for (धनयोस्)
(ग) २. योगोत्तर for (योगान्तर)
३. तुल्ययो for (तुल्ययोः)
१७. (घ) १. गुणुता for (गुणिताद्)
(ग) २. व्यासाद्धैत् (क) व्यासोर्द्धात् for (व्यासार्द्धात्)
(क) ३. मृणांवति for (मृणांवा)
(च) १. तद्गुणिताद् for (तद्गुणिताद्)
१८. (घ) १. स्वमध्यो (ग) स्वमध्ये (क) स्वमध्यौ (ख) स्वमध्यो for (खमध्ये)
(च) १. स्वमध्यो for (खमध्ये)
२. र्का for (ऽर्क)
१६. (ख) १. अर्कोदयास्तममयोर्विना for (अर्कोदयास्तमययोर्विना)
२. राभि for (रात्रि)
(च) १. अर्ककोदयास्तमययोर्विना for (अर्कोदयास्तमययोर्विना)

( ३० ) १ सूर्यस्य मनुद्वितयं त्रिंशोनं⁴ दिनदलेन तस्य प्राक् ।₅ १/४ ३/३० तिथि²घटिकाभिस्त्र्यं³शाधिकोनमूनाधिकं पश्चात् । ६ २ं०¹ ।। २० ।। द्युदले जिनलिप्तोनं दशनद्वितयं (३/३ ६)⁵ द्विशर¹ ५२ कलोनु प्राक्² । पश्चाद्युतोर्नमिदोः³ सूर्यवहण धन परिध्यंशाः⁴ ।। २१ ।।

२०. (घ) १. १/४ ३/३० | १/४ ३/३ (ग) for (१/४ ३/३०)
२. तिथि + १५ + (ग) for (तिथि)
३. त्र्यंशा (ग) स्त्रियंशाधिकोन १४।०।। १३।२०।। for (स्त्र्यंशाधिकोन)
(ग) ४. त्र्यंशोनं (क) for (त्रिंशोनं)
५. पश्चात् व for (पश्चात्)
(च) २. + १५ +           १ संख्या लुप्त
३. त्र्यं ३/४ ३/३ | ३/४ ३/३ शाधिको for (त्र्यंशाधिको)
२१. (घ) १. कलोनं (ग) (क) (ख) कालोनं for (कलोनु)
२. यहां ‘५२’ संख्या जो ‘द्विशर’ के बाद अंकित है, लिखी है ।
३. मंदोः for (मिदोः)
(ग) ५. संख्या अंकित नहीं है ।
६. संख्यां अंकित नहीं है ।
(क) ७. सूर्याहरण for (सूर्यवहण)
(ख) ८. द्युदलेतिन for (द्युदलेजिन)
(च) ६. संख्यालुप्त        १ कलोनं for (कलोनु)
२. + ५२ +        ७ सूर्यवहण for (सूर्यवहण)

( ३१ ) तद्द्यु दलपरिध्यन्तरं गुणांकृता^१ त्रिज्यया^२ स्वनतजीवा । ऊने धनमृणमधिके^४ दिनार्द्ध^६ परिधौ स्फुटः^५ परिधिः ॥ २२ ॥ भुजफलचापं केन्द्रे षड्राश्यूने^१ खावृणं मध्ये । स्वभुजबल^२चापमिन्दौ षड्राश्यधिके^३ धनं भवति ॥ २३ ॥ देशान्तराद्यमेवं स्पष्टीकरणं दिनार्द्धपरिधिभ्याम् । कृत्वा तत्तिथ्यन्तं^१ स्फुटपरिधिभ्यां स्फुटावसकृत् ॥ २४ ॥ २२. (घ) १. हृता (ग) (क) (च) for (कृता) २. तृज्यया for (त्रिज्यया) (क) त्रिज्ययाश्च नतजीवा for (त्रिज्यया स्वनत- जीवा) (ग) यहां निम्नांकित संख्या अधिक है—

३१३१५२३०३२३०
३६३६४४२८४४
(क) ३. तत्
४. मधिका for (मधिके)
(ख) ३. तद्युदलं for (तद्द्युदल)
(च) ६. परिवो for (परिधौ)
२३. (घ) १. षड्राशून्ये (च) for (षड्राश्यूने)
२. फल (च) for (बल)
(ग) ३. षड्राशधिके (क) षड्रास्यधिके (ख) षड्राश्याधिके for (षड्राश्यधिके)
२४. (क) १. तत्तिथ्यन्तः (ख) तत्तिथ्यन्तं for (तत्तिथ्यन्त)

( ३२ ) प्राक् पश्चाद्वा याभिर्घटिकाभिर्दिनदलान्नतः^४ सूर्यः^३ । तिथ्यंते तद्रहिते^१ त्रिंशत्^२ घटिकावशेषाभिः^५ ॥ २५ ॥ विपरीतमर्धरात्राच्चन्द्रग्रहणे^२ शशी रविग्रहणे । सूर्योतस्ततस्ताभिरेव^१^३ घटिकाभिरिन्दुरपि ॥ २६ ॥ दिनदल^१ परिधि स्फुट तिथिनतकेन्द्रज्यावधो^२ गुणोर्केन्दोः^३ । इंदू^४ धृति धृतिभि १६१ नवनववेदै^८ ४६६ व्यासार्द्धकृतिर्भक्तः^५ ॥ २७ ॥ १०६६२६००^६ २५. (घ) १. तद्रहिव for (ग) (तद्रहिते) (ग) तद्रहितस्त्रिंशद् for (तद्रहिते त्रिंशत्)(क) तद्रहितं for (तद्रहिते) २. त्र्यंशद् (क) त्रिदशत for (त्रिंशत्) (ग) ३. नतसूर्यः for (नतः सूर्यः) (ख) ४. घटिकामि for (घटिकाभि) ५. त्रिंशदधिकावशेषाभिः for (त्रिंशत्घटिकावशेषाभिः) (च) ३. दिनदलान्नत् सूर्यः for (दिनदलान्ततः सूर्यः) २. त्रिशद् for (त्रिंशत्) २६. (घ) १. यतस्वषः for (यतस्ततस्) २. चन्द्रग्रहणे (क) चन्द्रग्रहादिनिग्रहाणः for (चन्द्रग्रहणे) ३. रेवमथ for (रेव) (च) २. चन्द्रग्रहणो for (चन्द्रग्रहणे) २७. (घ) १. दज for (दल) २. व्या for (ज्या) (क) ज्यावाधो for (ज्यावधो) ३. केंन्दोः (ग) (ख) केंन्द्रो for (केंन्दोः) ४. इंद्धृतिधृतिभि (ग) (क) इंदुविधृतिभि for (इंदूधृतिधृतिभि) ५. भक्तः for (र्भक्तः) (ग) (ख) कृतिर्भक्ति for (कृतिर्भक्तः) ६. १०६६ ।। २६०० for (१०६६२६००) (ग) ७. व्यासाद्धंकृति (क) व्यासाद्धंकृते for (व्यासार्द्धकृति) वि० रेखाङ्कित दोनों संख्याएं "वेद" के पश्चात् एक स्थान पर हैं । (१६१, ४६६) (क) ३. गुणोर्केस्तः for (गुणोर्केन्दोः) ८. नंवनववेदै (च) for (नवनववेदै) वि० संख्याएं मूल में लुप्त हैं । (च) ३. केंद्रोः for (केंन्दोः) ५. भक्तः for (र्भक्तः)

? Let's check the meter: Line 2-3: फलविकला वा सूर्ये प्रागृणमसकृन्नते धनं पश्चात् । (Arya: 12 + 18) फ ल वि क ला (5) वा (2) सूर् ये (3) प्रा गृ ण म स कृ न्न ते (9) = 19? Wait: फलविकला वा सूर्ये (12 morae: फ(1) ल(1) वि(1) क(1) ला(2) वा(2) सूर्(2) ये(2) = 12) प्रागृणमसकृन्नते धनं पश्चात् (18 morae: प्रा(2) गृ(1) ण(1) म(1) स(1) कृन्(2) न(1) ते(2) ध(1) नं(2) पश्(2) चात्(2) = 18). Line 3: केन्द्रफलमृणं चन्द्रेऽन्यथा धनं चेदृणं स्पष्टौ ॥ २८ ॥ (12 + 15) केन्(2) द्र(1) फ(1) ल(1) मृ(1) णं(2) चन्(2) द्रेऽ(2) = 12. न्य(1) था(2) ध(1) नं(2) चे(2) दृ(1) णं(2) स्पष्(2) टौ

( ३४ ) स्वदिनार्द्ध परिधिभुजफलचापं मध्योर्क²चन्द्रयोः कृत्वा । पूर्ववदन्यत्स्पष्टं¹ संव्यवहारार्थमेवं वा ॥ ३२ ॥ आर्यभटस्याज्ञानान्मध्यममन्दोच्चशीघ्रपरिधिना¹ । न² स्पष्टा भौमाद्याः³ स्पष्टा⁴ ब्रह्मोक्तमध्याद्यैः ॥ ३३ ॥⁵ मंदोच्चनीचवृत्तस्य परिधिभागाः सितस्य विषमांते । नव ६ युग्मांते रुद्राः⁴ ११ शीघ्रौ³ जान्तेऽ⁵ग्निरसयमलाः¹ ॥ २६३² ॥३४॥ युग्मांतेष्ट⁴शरयमाः⁵ २५८ मंदफलात्¹मध्यमः² स्फुटो मध्यः । शीघ्रफलात्स्पष्टो सकृदेवं स्वफलैर्ज्ञगुरुसौराः³ ॥ ३५ ॥

३२. (घ) १. स्पष्टो (ग) स्पष्टौ (क) स्पष्टौ for (स्पष्टं)
(च) २. मध्यार्कं for (मध्यार्क)
३३. (घ) १. परिधीनाम् (ग) (क) (च) for (परिधिना)
२. त for (न)
३. भौमाद्या for (भौमाद्याः)
(क) ४. स्पष्ट for (स्पष्टा)
(च) २. ते for (न) ३ भौमाद्या for (भौमाद्याः)
५. क्रमसंख्या लुप्त
३४. (घ) १. यमलाः (च) for (यमलाः)
२. ३४।२६३ for (२६३।३४) (क) संख्या लुप्त है ।
(क) ३. शीघ्रो (च) for (शीघ्रौ)
(ख) यह श्लोक यहां ३० वें श्लोक के पश्चात् है । यद्यपि इस प्रति में श्लोक
संख्या नहीं दी गई है ।
(च) ४. विसर्गलुप्त ५. अवग्रहचिह्न लुप्त
३५. (घ) १. फलान् (ग) (क) (ख) मंदफला for (मंदफलात्)
(ग) २. मध्यम for (मध्यमः)
(क) ३. सौरः for (सौराः)
(ख) ४. युग्मांतिष्ठ for (युग्मांतेष्ट)
५. शरयमा for (शरयमाः)
(च) १. फलान् for (फलात्)

( ३५ ) ^१बुधमंदपरिधि^७भागांवसु^६रामाः ३८ सुरगुरो^८र्खयँस्त्रिशत्^२ । रविजस्य^१०शून्यारामा ३० ^३सशीघ्रपरिधि^४द्विगुण^९श्चन्द्राः ॥ ३६ ॥^५ देवगुरोरष्ट^१रसा ६८ भास्कर पुत्रस्य शरगुणाः ३५ ^२स्पष्टाः । कुजशीघ्रकेन्द्रपदगत ये ^३अल्पज्या^४भिभागो^५नैः ॥ ३७ ॥

३६. (घ) १. बुधमंदपरिधि for (बुधमंदपरिधि)
२. + ३३ + (ग) (च)
३. ज्ञ (ग) (क) (ख) (च) for (स)
४. द्विगुण (ग) for (द्विगुण)
५. + १३२ + (ग) (च)
(ग) ६. रामा for (रामाः)
(क) वि० मूल में अंकित संख्याएं यहां लुप्त हैं ।
(ख) ७. रंशा for (भागा)
८. त्रयंस्त्रिशत् for (त्रयंस्त्रिशत्)
९. चन्द्रा for (चन्द्राः)
(च) १०. रामाः for (रामा)
३७. (घ) १. रस्य (क) रस for (रसा)
२. शरगुणा स्पष्टाः । ३५ for (शरगुणाः ३५ स्पष्टाः)
३. याल्पज्या (ग) (क) for (अल्पज्या)
४. त्रि (ग) (क) (च) for (त्रि)
५. नौः for (नैः)
(च) २. झरगुणास्पष्टाः ३५ for (शरगुणाः ३५ स्पष्टाः)
३. याल्पद्या for (अल्पज्या)

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Let's check the footnotes line-by-line:

[L...] ३८. (घ) १. गुणिताः (च) for (गुणिता) [L...] २. २३।१२ (ग) (च) for (२३।१) [L...] ३. नः (ग) (क) (च) for (न) [L...] ४. स्फुटो (ग) (क) (ख) (च) for (स्फुटौ) [L...] ५. भवति (ग) (क) भवंति (ख) भवति (च) for (भवतीति) [L...] (ग) ६. यहाँ यह संख्या नहीं है (च) '४०' संख्या लुप्त [L...] (क) ७. दिवाद्धं for (दिवर्द्धं) [L...] वि० मूल में दी गई संख्याएं लुप्त हैं । [L...] (ख) ८. हताप्ताशः for (हृताप्तांशं) [L...] ६. शृगकवचादौ for (मृगकर्कदौ) [L...] (च) ६. मृगकक्कादौ for (मृगकर्कदौ)

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( ३७ ) मन्दफलं मध्येऽङ्कौ तच्छीघ्रफलं च मध्यमे सकले । मध्ये सकृत् क्षितिसुतः स्पष्टो भुक्ति स्फुटाग्रहवत् ॥ ४० ॥ ग्रहकेन्द्रभुक्तिज्याकरगुणिताद्यजीवया भक्ता २१४। लब्धं स्फुट परिधिगुणं भगणांशहृतं कलाभिस्तु ॥ ४१ ॥

४०. (घ) १. फलं (ग) (क) (ख) फलस्य for (फल)
२. सकलो (ख) (च) for (सकले)
३. मध्येऽसकृत् (क) मध्यशकृत for (मध्येसकृत्)
४. भुक्तिः (ग) (च) for (भुक्ति)
६. क्षितिसुते (ख) for (क्षितिसुतः)
७ स्फुटौ for (स्फुटा)
(ख) ८. र्द्धा (च) र्द्ध for (ऽङ्कौ)
(च) ६. तत्शीघ्र for (तच्छीघ्र)
४१. (घ) १. ग्रहमंदकेन्द्र (ग) (क) ग्रहमंद्रकेंद्रा (ख) ग्रहमंदकेन्द्र for (ग्रहकेन्द्र)
२. ज्यतिर (ग) ज्यांतर (क) ज्यतिर (ख) ज्याँतर for (ज्याकर)
३. फलकबाभिः । (ग) (क) फलकलाभिः for (कलाभिस्तु)
(ग) ४. द्युजीवया (क) (ख) गुणिताद्या for (द्यजीवया)
(ख) ५. भक्ताः for (भक्ता )
६. स्फुटि for (स्फुट)
३. फलकलाभि for (कलाभिस्तु)
(च) १. ग्रहमंदकेंद्र for (ग्रहकेन्द्र )
२. ज्याँतर for (ज्याकर)
३. फलकबभिः for (कलाभिस्तु)

( ३८ ) मृगकर्काद्यादूनाधिका स्वमध्यमगतिः स्फुटाकेंदोः । शीघ्रगतिमंदफलस्फुटभुक्तच्यूनां कुजादिना ॥ ४२ ॥ शीघ्रफलं भोग्यजीवागुणिता माघजीवया विभजेत् । फलगुणितं व्यासाद्धं विभाजयेत् शीघ्रकरणेन ॥ ४३ ॥ ४२. (घ) १. मृगक्कर्धादावूना (ग) (क) मृगकर्काद्यवूनाधिका for (मृगकर्काद्यादूनाधिका) २. स्फुटाकेंदो: (ग) (क) स्फुटाकेंदो: for (स्फुटाकेंदोः) ३. शीघ्रगति (क) शीघ्रगतिः for (शीघ्रगति) ४. भक्तूनां (ग) भुक्तच्यूनां (क) भुत्तचूनां (ख) for (भुक्तच्यूनां) ५. कुजादीनाम् । (ग) (क) (ख) कुजादीनाम् for (कुजादिना) (ग) ६. स्वमध्या for (स्वमध्यम) ७. मंदफल (ख) म

( ३६ ) लब्धोनाशीघ्रगतिस्फुटभुक्तिर्लब्धमधिकं चेत् । शीघ्रगतेः शीघ्रगतिः लब्धा संशोध्य वक्रगतिः ॥ ४४ ॥ देयमसुताय नेदं शपथैरपि दत्तसुकृतनाशायैः । यात्राविवाहजातक फलस्फुटत्वं यतः स्पष्टैः ॥ ४५ ॥ मेषादितः प्रवृत्तानार्यभटस्य स्फुटाः युगस्थादौ । श्रीषेणस्य कुजाद्याः सूर्याद्यविष्णुचन्द्रस्य ॥ ४६ ॥ दूरभ्रष्टाः स्पष्टा श्रीषेणार्यभटविष्णुचन्द्रेषु । यस्मात् कुजादयस्तेषु न विदुषामादरस्तस्मात् ॥ ४७ ॥

४४. (घ) १. शीघ्रगतिः (ग) (क) गतिं (ख) शीघ्रगतिः (च) for (शीघ्रगति)
२. र्भवति लब्ध (ग) र्भवति लब्ध (ख) भवति लब्ध for (र्लब्ध)
३. शीघ्रगंति (ग) (क) (ख) शीघ्रगतं for (शीघ्रगतिः)
(क) ४. लब्वात् for (लब्धा)
(ख) ५. संसोध्य for (संशोध्य)
६. वक्तगतिः for (वक्रगतिः)
(च) २. +भवति+
३. शीघ्रगंति for (शीघ्रगतिः)
४५. (घ) १. जातकं (ख) जातव for (जातक)
२. स्पष्टै for (स्पष्टैः)
(क) ३. नाशोचैः (ख) नशायैः for (नाशायैः)
४. यत्र for (यात्रा)
(च) ५. नेदशपंयै for (नेदं शपथै)
४६. (घ) १. स्फुटा (ग) (क) (ख) स्फुटा (च) for (स्फुटाः)
२. ज्या (ग) द्या (ख) द्याः for (द्य)
(ख) ३. विष्नचंद्रस्य for (विष्णुचन्द्रस्य)
(च) २. सूर्याद्या for (सूर्याद्य)
४७. (घ) १. (चंट) for (भट)
(ग) २. स्पष्टाः (ख) for (स्पष्टा)
(ख) ३. दूरम्यष्टः for (दूरभ्रष्टाः)
४. ‘आर्य’ लुप्त है
५. चन्देषु for (चन्द्रेषु)