महाभारत (खंड २) - वन पर्व
Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(मार्कण्डेयसमस्यापर्व)
**१८२-** वर्षा और शरद्-ऋतुका वर्णन एवं युधिष्ठिर आदिका पुनः द्वैतवनसे काम्यकवनमें प्रवेश **१८३-** काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन **१८४-** तपस्वी तथा स्वधर्मपरायण ब्राह्मणोंका माहात्म्य **१८५-** ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें अत्रिमुनि तथा राजा पृथुकी प्रशंसा **१८६-** तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद **१८७-** वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा **१८८-** चारों युगोंकी वर्ष-संख्या एवं कलियुगके प्रभावका वर्णन, प्रलयकालका दृश्य और मार्कण्डेयजीको बालमुकुन्दजीके दर्शन, मार्कण्डेयजीका भगवान्के उदरमें प्रवेश कर ब्रह्माण्डदर्शन करना और फिर बाहर निकलकर उनसे वार्तालाप करना **१८९-** भगवान् बालमुकुन्दका मार्कण्डेयको अपने स्वरूपका परिचय देना तथा मार्कण्डेयद्वारा श्रीकृष्णकी महिमाका प्रतिपादन और पाण्डवोंका श्रीकृष्णकी शरणमें जाना **१९०-** युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन **१९१-** भगवान् कल्कि के द्वारा सत्ययुगकी स्थापना और मार्कण्डेयजीका युधिष्ठिरके लिये धर्मोपदेश **१९२-** इक्ष्वाकुवंशी परीक्षित्का मण्डूकराजकी कन्यासे विवाह, शल और दलके चरित्र तथा वामदेव मुनिकी महत्ता **१९३-** इन्द्र और बक मुनिका संवाद **१९४-** क्षत्रिय राजाओंका महत्त्व—सुहोत्र और शिबिकी प्रशंसा **१९५-** राजा ययातिद्वारा ब्राह्मणको सहस्र गौओंका दान **१९६-** सेदुक और वृषदर्भका चरित्र **१९७-** इन्द्र और अग्निद्वारा राजा शिबिकी परीक्षा **१९८-** देवर्षि नारदद्वारा शिबिकी महत्ताका प्रतिपादन **१९९-** राजा इन्द्रद्युम्न तथा अन्य चिरजीवी प्राणियोंकी कथा **२००-** निन्दित दान, निन्दित जन्म, योग्य दानपात्र, श्राद्धमें ग्राह्य और अग्राह्य ब्राह्मण, दानपात्रके लक्षण, अतिथि-सत्कार, विविध दानोंका महत्त्व, वाणीकी शुद्धि, गायत्री-जप, चित्त-शुद्धि तथा इन्द्रिय-निग्रह आदि विविध विषयोंका वर्णन