मानमेयोदय (नारायण भट्ट - भाट्ट मीमांसा प्रमाण एवं प्रमेय शास्त्र सटीक)
Manameyodaya of Narayana Bhatta with Commentary
नारायण भट्ट एवं नारायण पण्डित द्वारा
xxviii आकरग्रन्थसंकेतः पुट. पङ्कि. सङ्केताः. | पुट. पङ्कि. सङ्केताः. 34 12 श्लोक 735 | 65 8 बृ. उ. शं 5-8-12 35 11 न्या. म 94 | 66 5 भा. भा 134 36 8 न्या. भा 1-1-1 | 66 15 ,, 16 36 13 सि. मु 2 श्लो. | 67 13 ,, 96 37 17 न्या. म 560 | 67 15 ,, 99 38 3 न्या. कु 5 स्त. | 68 3 अर्थसंग्रहः 38 5 न्या. क 167 | 69 7 न्या. क 287 39 13 स. सं 9 द. | 70 5 पञ्चपादिकाविवरण 39 15 वै. भा. मङ्गलम् | 71 9 स. सि 1-6 40 10 न्या. म 433 | 73 2 वे. सं 135 41 14 न्या. कु 1 स्त. | 73 9 तत्त्वसंख्यानम् 42 8 न्या. प 16 | 74 14 अनुव्याख्यानम् 44 10 भा. भा 116 | 75 7 स. सं 5 द. 45 3 ,, 87 | 76 3 स. सं 3 द. 45 10 पा. भा 4-34 | 77 12 प्र. त 5-3 46 3 त. कौ 9 का. | 78 13 प्र. त 4-15 46 5 श्लोक 302 | 78 17 आप्तमीमांसा 46 14 त. कौ 33 का. | 79 7 प्रमेयकमल 48 12 ,, 27 का. | 79 17 त. क 5-133 49 11 पा. भा 2-13 | 81 1 न्या. कु 1 स्त. 50 17 ,, 1-24 | 81 6 प्र. त 4-10 52 11 राजमा. 4-29 | 81 17 वे. सं 11 53 1 पा. भा 1-48 | 82 10 श्लोक 190 54 18 स. सि 4-30 | 85 3 शब्द 19-97 57 5 राजमा. 4-23 | 85 11 शक्तिवादः 59 9 पा. भा 4-13 | 86 7 श्लोक 202 61 9 पा. भा 4-31 | 87 3 प्रक 5 प्र. 63 13 मानमेयोदय | 87 17 श्लोक 438 64 13 श्लोक 177 | 89 7 न्या. कु 3 स्त. 65 3 श्लोक 297 | 89 11 श्लोक 563
आकारग्रन्थसंकेतः पुट. पङ्कि. संकेताः | पुट. पङ्कि. संकेताः 90 14 न्या. र 740 | 115 9 न्या. र 181 90 18 स. सि 1-60 | 115 11 ,, 183 91 17 वा. प 1-111 | 115 13 न्या. ता 97 92 1 वि. वि 75 | 116 10 न्या. र 146 92 5 न्या. म 136 | 116 20 श्लोक. 188 96 15 स. सि 1-66 | 117 9 न्या. म 73 97 17 वे. सं 68 | 117 19 किर 75 98 13 प. म 3 भ. | 118 18 श्लोक 763 99 19 पा. भा 3-51 | 120 1 ,, 508 100 15 भा. भा 196 | 120 12 भा. भा 72 101 13 वै. सू 2-1-27 | 121 1 प्र. त 48 102 3 वा. प 1-117 | 122 12 प. म 6 भ. 102 7 स. सि 1-42 | 124 3 न्या. र 150 105 1 स. सि 1-8 | 126 3 ,, 664 105 13 न्या. म 503 | 129 13 न्या. सू 3-1-1 105 19 स. सि 1-18 | 130 5 ,, 1-1-30 107 1 मनु 8 132 | 130 13 न्या. म 429 107 1 याज्ञ 1-361 | 132 7 शा. भा. आत्मच 107 5 स. सि 1-19 | 145 15 तन्त्र 376 108 19 श्लोक 650 | 147 17 ,, 381 109 7 स. सि 2-27 | 148 5 ,, 372 109 15 न्या. सू 1-1-11 | 149 3 ,, 375 109 17 श्री भा 2-1-9 | 149 10 प्र. क 8 प्र. 110 9 प. म 17 भ | 152 1 ब्र. सू. शं 3-3-5 110 17 तन्त्र 3-1-7 | 154 11 स. सि 2-1 112 13 सा. का 39 | 156 3 प्र. त 145 113 13 वेदान्तपरिभाषा | 158 11 स. सि. 1-8 114 1 स. सि 1-11 | 159 15 न्याम. 94 114 7 न्या. कु 1 स्त. | 159 1 न्या. ता 89 115 7 प. म 3 भ. | 160 1 न्या. र 590
xxx आकरग्रन्थसंकेतः पुट. पङ्कि. सङ्केतः | पुट. पङ्कि. सङ्केतः 160 9 त. टी 32 | 184 12 न्या. कु 1 स्त. 161 6 त. कौ 9 का | 185 1 स. सि 2-1 161 11 स. सि 1-8 | 185 15 वे. सं 73 162 11 न्या. ता 107 | 186 8 साहित्यरत्नाकरः 164 17 न्या. सि 1 परि | 187 1 मानमेय 495 165 13 श्लोक. 178 | 187 9 श्री भा. श्रुतिघट्टः 166 11 ,, 297 | 187 18 वे. सं 248 166 17 ,, 588 | 188 4 न्या. म 74 167 7 ,, 632 | 188 7 न्या र 319 168 2 तत्त्ववै. 3-13 | 189 3 श्लोक 318 169 5 श्लोक. 169 | 190 7 प्र. त 35 169 9 तत्त्वार्थराज | 190 15 श्रीभा महासिद्धान्त 170 1 पा. भा 3-43 | 191 15 स. सि 1-8 170 5 ,, 3-43 | 191 16 वा. प 1-112 170 13 श्लोक. 202 | 192 3 न्या. सू. वृ 2-2-1 172 11 मुण्डकभा. रं 1 मु | 192 11 वा. प 1-117 172 16 मानमेयोदयः | 192 15 ,, 1-1 173 19 स. सि 5-33 | 192 17 प. म 14 भ. 174 1 श्लोक. 835 | 192 20 प. म 14 भ. 174 6 काव्यादर्शः | 193 11 न्या. म 216 175 1 स. सि 5-27 | 194 7 शा. भा 1-1-5 176 3 न्यायकन्दळी | 195 9 श्लोक 802 176 8 उपस्कारवृत्तिः | 195 11 ,, 806 176 9 स. सि 5-41 | 196 1 ,, 811 177 7 ,, 5-45 | 196 11 ,, 526 178 11 ,, 5-51 | 196 19 न्या. म 220 179 3 श्रीभा. महासिद्धान्तः | 197 5 श्लोक 763 179 7 स. सि 5-52 | 198 6 ,, 511 180 15 ,, 5-56 | 199 8 वा. प 1-94 181 3 ,, 5-58 | 199 17 श्लोक 786
आकरग्रन्थसंकेतः पुट. पङ्क्ति. सङ्केताः | पुट. पङ्क्ति. सङ्केताः 200 7 सि. मु 161 का. | 219 2 श्री भा 2-2-3 200 12 न्या. कु 1 स्त. | 219 7 भ. गी 9-10 200 17 श्लोक 107 | 220 3 श्री भा 2-2-3 201 19 ,, 49 | 220 17 श्लोक 683 202 11 न्या. म 471 | 221 3 ,, 684 203 5 न्या. कु 1 स्त. | 221 10 गौ. ध 11-31 203 17 स. सि 2-48 | 221 15 न्या. सू 2-1-57 204 3 श्लोक 120 | 222 13 श्लोक 657 204 15 ,, 118 | 223 9 ,, 655 204 17 मनु. 5-55 | 223 19 तन्त्र 81 205 1 बृ. उ 3-4-14 | 224 1 वेदान्तपरिभाषा 205 13 आप. ध 1-20-7 | 224 9 याज्ञ. 1-384 207 3 तन्त्र 380 | 225 1 भ. गी 18-14 207 9 रामा 4-18 | 226 9 पाणिनि. 1-4-45 207 14 न्या. र 4 | 226 9 श्लोक 865 207 16 गौ. ध 21-4 | 226 13 ब्र. सू 2-3-40 208 3 याज्ञ 3-219 | 227 6 ,, 2-3-41 208 15 न्या. मा 103 | 229 18 तात्पर्य 18-14 208 19 आप. ध 1-20-3 | 230 20 ,, 3-30 209 5 श्लोक 653 | 230 6 स. सि 5-107 209 19 व्युत्पत्तिवादे लिङर्थः | 230 20 न्या. र 371 210 15 श्लोक 117 | 231 3 पा. भा 4-21 211 6 श्री भा 3-1-25 | 231 13 वै. सू 1-1-11 212 3 त. टी 145 | 231 15 वै. सू. वृ 5-1-1 212 17 भार. नारायणीयम् | 232 4 जै. सू 3-1-10 215 11 विष्णु 4-6-94 | 232 9 श्लोक 927 216 15 भार 3-30-28 | 232 17 व्या. सि 5 परि. 216 18 स. सं 6 दृ. | 233 9 न्या. म. 220 217 10 तात्पर्य 3-8 | 233 15 ,, 225 218 4 श्रु. त प्र 2-3-41 | 233 19 श्लोक 689
xxxii आकारग्रन्थसंकेताः पुट्. पङ्कि. सङ्केताः. पुट्. पङ्कि. सङ्केताः. 235 17 न्या. म 278 247 17 रहस्यत्रय—प्रभाव 236 3 प्रक. 3 प्र. व्यवस्थ 237 1 त. टी 74 248 4 सच्चरित्ररक्षा 31 237 5 न्या. म 298 248 5 मनु 10-5 237 13 न्या. र 578 248 7 प्रमेयकमल. 238 19 प्र. क 3 प्र. 252 1 न्या. र 819 239 5 श्लोक 557 252 3 न्या. म 312 240 13 ,, 622 252 9 श्लोक 622 241 1 वैया. भूषणं 252 14 शतदू 10 भ. 241 11 सिद्धान्तकौ. स्त्री. 252 15 त. कौ 9 का. 241 15 त. टी 75 254 4 न्या. भा 2-1-34 242 13 ,, 78 254 19 न्या. म. 359 242 16 प्र. त 74 256 5 श्लोक 272 243 8 सेश्वर 1-2-2 257 3 स. सि. 4-28 243 9 मनु 9-20 257 14 श्रीभा. अहमर्थात्मस 243 11 जै. सू 1-2-2 257 16 न्या. र 319 [मर्थ 244 3 पाणिनि 2-2-6 258 17 न्या. सि. बुद्धिपरि. 244 8 मनु 10-5 259 4 श्लोक 288 244 9 भारत 14-39 259 19 ,, 866 244 12 श्रुतप्र 1-3-7 260 2 स. सि 1-26 244 15 शतपथ 3-1-1-40 260 9 श्रीभा 2-3-45 244 17 पाद्म-चर्या 1-8 260 11 स, सि 4-84 245 1 तत्त्वत्रयव्या 173 260 19 वे. सं 110 245 5 तन्त्र 1-2-3 264 4 न्या. म 63 245 15 श्लोक 620 265 9 न्या. सि 6 परि. 246 7 मी. कौस्तुभः 1-2-2 265 17 भा. भ 99 246 13 सेश्वरमी 1-2-2 266 4 श्रीभा. भेददूषणम् 247 2 प. म 6 भ. 266 6 वेदान्तपरिभाषा. 247 3 याज्ञ 1-96 266 14 न्या. कु 1 स्त. 247 11 भ. गी 18-42 266 19 न्या. म 49
आकारग्रन्थसंकेतः | xx.. पुट. पङ्कि. सङ्केताः | पुट. पङ्कि. सङ्केताः 271 11 श्लोक 475 | 297 17 न्या. म 15 273 5 स. सि 4-18 | 298 5 स. सि 4-25 274 3 श्लोक 249 | 298 9 न्या. म 87 275 15 शा. भा 2-1-7 | 299 4 प्र. क 4 प्र 276 15 न्या.प.अनुमानाध्यायः | 300 12 श्लोक 242 277 7 न्यायबिन्दुटीका | 301 6 प्रमाणपद्धतिः 278 3 श्लोक 157 | 301 12 श्रीभा. ख्यातिवादः 278 8 प्र. त 1-3 | 302 14 स. सि 4-11 278 11 ,, 90 | 302 17 खण्डनखण्डखाद्यम् 279 1 न्या. कु 4 स्त. | 303 1 वेदान्तपरिभाषा 279 7 न्या. र 157 | 303 15 स. सि 4-16 280 5 श्लोक 318 | 304 15 श्लोक 255 280 17 ,, 833 | 305 7 काव्यप्रकाश सं 67 281 1 प्रक. 5 प्र. | 306 7 स. सि 3-50 281 17 न्या. सू 1-1-15 | 306 9 ,, 4-18 282 9 आत्मसिद्धिः 21 | 306 20 श्री भा. ख्यातिवाद 283 5 न्यायपरिशुद्धिः 21 | 307 7 श्लोक 218 284 17 न्या. म 432 | 310 2 वा. प 2-441 284 19 प्रमाणपद्धतिः | 310 5 न्या. म 448 285 4 न्यायपरिशुद्धेः | 311 11 वा. प. 2-347 287 1 श्लोक 54 | 312 3 शा. भा 1-1-5 290 2 त. कौ 64 का | 312 15 पात. 4-19 290 11 प्र. क 4 प्र. | 313 9 स. सि 4-2 291 5 न्या कु 2 स्त. | 317 9 त. कौ 5 का 294 14 भा. भा 123 | 317 17 न्या. म 23 294 20 न्या. म 17 | 317 19 न्या. म 33 295 3 अधिकरण 2-2-30 | 318 3 पात. 4-1 295 15 श्लोक 327 | 319 11 श्लोक. 88 296 7 स. सि 4-30 | 319 12 तञ्च. 178 297 3 श्लोक 279 | 319 15 श्लोक. 75 M. R. | c
xxxiv \qquad\qquad आकरग्रन्थसंकेतः पुट. \quad पङ्क्ति. \quad सङ्केताः \qquad\qquad\quad\mid\quad पुट. \quad पङ्क्ति. \quad सङ्केताः ३२१ \quad १ \quad आप. ध. व्या १-१-२ \quad\mid\quad ३४५ \quad १९ \quad न्या. सू २-१-२८ ३२१ \quad १७ \quad श्लोक. ९१ \qquad\qquad\mid\quad ३४६ \quad ३ \quad न्या. म ४३२ ३२२ \quad ३ \quad न्या. सि १ परि \qquad\quad\mid\quad ३४६ \quad ५ \quad न्या र १७६ ३२२ \quad १३ \quad न्या. म १०५ \qquad\qquad\mid\quad ३४७ \quad ७ \quad ,, \qquad ५९० ३२४ \quad १ \quad स. सि ३-२ \qquad\qquad\mid\quad ३४७ \quad ९ \quad ,, \qquad ५९२ ३२४ \quad ३ \quad ,, \qquad ३-७६ \qquad\mid\quad ३४७ \quad १३ \quad श्लोक. १६९ ३२४ \quad ६ \quad न्या. म १०८ \qquad\qquad\mid\quad ३४७ \quad १७ \quad वा. प १-१२४ ३२४ \quad १० \quad स. सि ४-११६ \qquad\quad\mid\quad ३४८ \quad ७ \quad न्या. सू १-१-४ ३२५ \quad १९ \quad स. सं ३ द \qquad\qquad\mid\quad ३४९ \quad १ \quad सि. मु १३५ का ३२६ \quad ३ \quad भ. गी ४-३८ \qquad\qquad\mid\quad ३४९ \quad ३ \quad वि. वि ११४ ३२६ \quad ७ \quad भा. भा १२३ \qquad\qquad\mid\quad ३४९ \quad ११ \quad त कौ २७ का ३२६ \quad १९ \quad वै. भाष्यम्. \qquad\qquad\mid\quad ३५० \quad १ \quad न्या. र ५७८ ३२७ \quad ३ \quad न्या. म ५३६ \qquad\qquad\mid\quad ३५० \quad ७ \quad श्लोक १७३ ३२९ \quad ५ \quad न्या. र २६४ \qquad\qquad\mid\quad ३५२ \quad १ \quad वे. सं ४९ ३३३ \quad ३ \quad त. कौ ११ का \qquad\quad\mid\quad ३५२ \quad १९ \quad न्यायबिन्दुटीका ३३३ \quad ६ \quad न्या. ता १४६ \qquad\qquad\mid\quad ३५४ \quad ७ \quad मानमेयोदयः ३३३ \quad १३ \quad श्लोक. २९२ \qquad\qquad\mid\quad ३५४ \quad ११ \quad प्र. क ५ प्र ३३४ \quad १ \quad ,, \qquad २८५ \qquad\mid\quad ३५६ \quad ५ \quad न्या. म ६४ ३३६ \quad १९ \quad स. सि ४२० \qquad\qquad\mid\quad ३५६ \quad १५ \quad न्या. र ७५९ ३३८ \quad १९ \quad न्या. म ४४८ \qquad\qquad\mid\quad ३५८ \quad ७ \quad श्लोक. ७७५ ३४० \quad ७ \quad ,, \qquad ४५३ \qquad\mid\quad ३५९ \quad १६ \quad श्लोक. ४१३ ३४१ \quad ११ \quad श्लोक. ८४१ \qquad\qquad\mid\quad ३६० \quad १ \quad स. सि ४-४१ ३४३ \quad १ \quad न्या. सू ३-१-१९ \qquad\mid\quad ३६२ \quad ५ \quad प्र. त ३-९ ३४३ \quad ९ \quad स. सि १-२६ \qquad\qquad\mid\quad ३६२ \quad ७ \quad स. सि ४-५८ ३४३ \quad १७ \quad न्या. कु १ स्त \qquad\quad\mid\quad ३६३ \quad ९ \quad न्या. म १२४ २४३ \quad १९ \quad न्या. सि १ परि \qquad\quad\mid\quad ३६४ \quad ७ \quad न्या र ४८८ ३४४ \quad ९ \quad तन्त्र. ८१ \qquad\qquad\mid\quad ३६४ \quad ९ \quad न्या. त १०५ ३४४ \quad १३ \quad न्या. सू ४-२-२९ \qquad\mid\quad ३६६ \quad २ \quad स. सं २ द्. ३४५ \quad ७ \quad न्या. म ९२ \qquad\qquad\mid\quad ३६६ \quad ५ \quad न्या. कु. १ स्त ३४५ \quad १५ \quad प्रक. ५ प्र \qquad\qquad\mid\quad ३६६ \quad १५ \quad न्या. र ३९६
आकरग्रन्थसङ्केतः पुट. | पङ्कि. | सङ्केताः | पुट. | पङ्कि. | सङ्केताः 367 | 7 | न्या. र 402 | 383 | 16 | तत्त्वचिन्तामणि 368 | 7 | न्या. म 33 | 384 | 7 | न्या. म 122 368 | 9 | न्या. र 250 | 384 | 10 | न्या. मा 57 369 | 2 | न्यायक 167 | 384 | 11 | श्लोक 348 369 | 11 | स. सि 4-42 | 385 | 5 | न्या. मा 122 370 | 5 | न्या. म 109 | 385 | 17 | श्लोक 381 371 | 3 | सि. मु 136 ता. | 386 | 3 | न्या. मा 56 371 | 19 | श्लोक 359 | 386 | 13 | प्र. त 3-38 372 | 11 | स. सि 4-43 | 386 | 18 | न्या. म 111 374 | 8 | ,, 4-44 | 387 | 3 | न्या. र 387 374 | 15 | न्यायपरिशुद्धिः | 387 | 14 | श्लोक 585 375 | 13 | प्र. त 3-11 | 389 | 7 | न्यायपरि 79 375 | 14 | ,, 2-1 | 389 | 18 | स. सि 4-53 376 | 2 | न्यायपरि | 390 | 17 | तत्त्वमुक्ता 4-51 376 | 10 | न्या. र 402 | 391 | 2 | स सि 4-49 376 | 20 | प्र. त 13 | 391 | 15 | न्या. वा 120 377 | 7 | न्यायपरि 150 | 392 | 20 | न्या. म 118 377 | 17 | न्यायबिन्दुः | 393 | 3 | ,, 123 377 | 19 | न्या. र 377 | 394 | 3 | वैशेषिकभाष्यम् 378 | 8 | किर 143 | 394 | 6 | न्या. भा 1-1-32 378 | 11 | न्या. ता 109 | 395 | 8 | न्या. म 584 378 | 13 | वैशेषिकभाष्यम् | 395 | 11 | मानमेयोदयः 378 | 15 | न्या. सू 1-1-5 | 396 | 1 | प्र. त 3-9 379 | 5 | वै. सू 3-2-7 | 396 | 5 | ,, 3-13 380 | 1 | श्लोक 392 | 396 | 15 | ,, 3-42 381 | 9 | न्या. म 133 | 397 | 9 | न्या. र 250 381 | 15 | न्यायपरि 80 | 397 | 17 | ,, 258 382 | 7 | शा. भा 1-1-2 | 398 | 5 | श्लोक 260 382 | 10 | न्या. सू 2-1-8 | 398 | 11 | ब्र. सू. शं 2-1-1 383 | 7 | न्या. र 388 | 399 | 12 | मानमेय 305
xxxvi आकारग्रन्थसंकेताः पुट. पङ्कि. संकेताः | पुट. पङ्कि. संकेताः 399 13 वैशेषिकभाष्यम् | 419 7 श्लोक 488 400 1 सि. मु 71 का. | 419 13 न्याः र 482 400 13 प्र. त 6-47 | 419 17 श्लोक 197 401 3 स. सं 2 द् | 420 1 न्या. र 483 401 5 न्यायप 167 | 422 3 प्र. क 9 प्र. 401 8 न्या. कु 3 स्त. | 422 5 न्या. र 588 402 18 शास्त्रदी 1-1-5 | 422 17 ,, 941 403 5 श्लोक. 375 | 423 5 ,, 410 403 20 न्यायप. 175 | 423 7 ,, 562 404 5 न्या. म 590 | 424 5 श्लोक. 410 405 10 शतदू. 9 | 424 7 ,, 432 405 11 स सि 4-63 | 424 11 न्या. र 503 407 9 न्या. ता 499 | 425 10 मानमेय 411 408 11 श्लोक 433 | 427 17 सं. वा 500 श्लो 409 7 न्या. भा 1-1-6 | 427 20 न्या. र 402 409 17 न्या र 435 | 428 1 श्लोक. 418 409 19 न्या. कु 3 स्त | 428 8 न्याः कु 3 स्त 410 4 श्लोक. 433 | 428 19 श्लोक. 913 411 9 न्या. म 245 | 429 5 ध्वन्या 200 411 12 श्लोक. 680 | 430 12 मानमेयोदयः 411 17 वै. सू 7-2-20 | 430 17 मानमेय 110 412 3 श्लोक 450 | 431 7 न्या. कु 2 स्त 413 1 प्रक 5 प्र. | 431 9 न्या. र 909 413 19 न्या. कु. 3 स्त | 432 3 ,, 367 414 5 श्लोक 463 | 432 9 काव्यप्रकाशसं 2 415 3 पा. सू 1-4-36 | 433 2 मानमेय 519 415 7 श्लोक 49 | 433 11 न्या. सि 6 परि 415 11 ,, 475 | 434 9 स. सि 4-81 417 5 न्या. कु 3 स्त | 435 3 श्लोक. 924 418 1 न्या. र 486 | 435 6 शब्दशक्तिप्रका
आकरग्रन्थसङ्केतः पुट. पङ्क्ति सङ्केताः | पुट. पङ्क्ति सङ्केताः 436 1 वा. प 1-134 | 458 1 न्या. ता 42 436 7 तन्त्र 199 | 458 8 तन्त्र 80 437 8 स्तोत्ररक्षा 4 श्लो. | 458 15 जै. मा 12 437 9 तन्त्र 233 | 460 7 प्रक. अतिदेशपार 438 1 ,, 157 | 463 6 तन्त्र 731 438 5 ,, 429 | 463 11 न्यायसु 3-3-14 438 11 ,, 535 | 463 13 बालप्रकाशः 441 17 ऋक्संहिता 10-71-3 | 463 19 न्या. म 589 441 18 मनु 2-1 | 465 10 बालप्रकाशः 442 2 तन्त्र 132 | 469 12 सुधीविलोचनम् 442 12 स. सि 4-113 | 470 9 वि. वि 450 443 15 तन्त्र 115 | 485 6 तन्त्र 337 444 19 श्लोक 59 | 487 5 वै. सू. वृ 5-1-1 445 19 तन्त्र 170 | 487 19 न्या. सू 3-1-25 446 10 स. सं 2 दृ | 488 19 न्यायसु 26 446 18 न्या. कु 1 स्त | 489 4 वि. वि 243 449 20 आप-परिभाषा | 489 7 न्या. सू 1-1-24 450 15 स. सि 594 | 489 15 न्या. कु 5 स्त 451 7 स्मृतिचन्द्रिका | 490 3 वा. प 2-1 452 11 आगमप्रामाण्यम् | 490 17 ,, 2-30 452 20 न्यायपरिशुद्धिः | 491 3 रघुवं 1-1 453 15 श्रुत. अथशब्दार्थः | 491 19 वा. प 2-145 454 14 न्यायसुधा 183 | 492 1 ,, 2-30 455 4 न्या. भा 4-1-62 | 494 7 ,, 2-57 455 8 ब्र. सू 2-1-1 | 494 11 न्या. म 330 455 14 न्या. भा 1-1-1 | 495 15 तन्त्र 345 455 18 मनु 7-43 | 496 7 पा. भा 4-20 456 3 न्यायपरिशुद्धिः | 497 11 तन्त्र 351 456 11 प. म 15 भ. | 498 5 ,, 345 457 7 श्लोक 209 | 498 8 न्यायसु 579
xxxviii आकरग्रन्थसंकेताः पृट. पङ्क्ति सङ्केताः | पृट. पङ्क्ति सङ्केताः 499 5 भाट्टररहस्यम् | 526 12 रामा 7-74 499 15 वि. चि 48 | 526 16 हेमा 661 499 17 न्या. म 345 | 526 19 गौ. ध 3-36 501 3 तन्त्र 240 | 527 1 ब्र. सू 3-4-18 502 7 जै. सू 6-2-9 | 527 10 मनु 4-176 503 1 भगी 4-1 | 527 12 प. म 6 भ. 503 7 प्रक. वाक्यार्थमातृका | 528 3 भ. गी 16-21 507 11 वादावलिः | 528 5 बृ. उ 7-2 508 5 तात्पर्यदी 215 | 528 13 न्या. ता 97 508 11 श्लोक 930 | 528 17 संबन्ध. 1008 श्लो 511 5 याज्ञ 3-219 | 529 3 रामा 2-105 511 13 न्या. सु 603 | 531 3 गौ. का 2-29 512 2 न्या. सू 3-1-25 | 531 10 तै. उ 4-10 512 16 न्या. म 356 | 531 12 मनु. 2-94 513 17 तन्त्र 240 | 531 18 श्वेता. 4 अ. 514 14 न्या. सू 1-1-24 | 531 19 तै. सं 6-3-10 515 14 न्या. कु 5 स्त. | 531 20 गौ. ध 3-36 515 17 वे. सं 214 | 532 7 वे. सं 248 516 10 अधिकर 20 श्लो. | 532 15 स. सि 2-75 519 9 न्या. म 395 | 533 2 न्या. सि 2 परि. 519 18 स. सि 4-91 | 533 13 न्यायपरिशुद्धिः 520 8 श्लो. क 432 | 534 9 तै. उ. शं 1-1 521 1 न्या. र 909 | 534 11 किर. 8 521 17 न्या. म 401 | 534 14 तन्त्र. 241 523 4 मनु 2-224 | 534 14 प्रक. 8 प्र. 523 10 भारत 18-6 | 537 15 न्या. भा 4-1-63 524 9 विष्णु 1-18 | 540 7 प्रश्नो. शं 6-3 524 14 तन्त्र 16 | 540 11 स. सं 6 दृ. 525 10 वे. सं 199 | 541 4 श्लोक. 695 525 18 भ. गी 17-11 | 541 6 तन्त्र. 375
आकरग्रन्थसङ्केतः xxx पृष्ट. पङ्क्ति. सङ्केताः | पृष्ट. पङ्क्ति. सङ्केताः 541 13 संवित्सिद्धिः | 552 7 भा. भा 175 542 17 स. सि 2-17 | 552 15 वि. वि 440 542 20 न्या. कु 1 स्त. | 553 11 जै. सू 6-2-9 543 5 श्लोक. 696 | 554 1 याज्ञ. 1-123 544 7 ,, 105 | 554 2 मनु. 11-16 544 13 श्रीभा. 2-2-3 | 554 7 न्या. मा 193 545 1 श्लोक. 667 | 554 13 श्लोक 671 545 9 पा. भा 2-22 | 555 10 न्या. कु 1 स्त 545 13 न्यायक. 270 | 555 17 स. सं 3 द. 545 17 वै. भा गुणभागः | 557 11 याज्ञ. 3-113 546 5 न्यायसु. 330 | 559 13 स. सि 1-4 546 13 श्लोक. 671 | 560 16 सिद्धान्तलेशः 546 17 पा. भा 2-13 | 562 11 स. सि 4-18 547 5 न्या. म 520 | 563 11 शतदू. 7 स. 547 10 भ. गी 18-66 | 565 9 तात्पर्यदी. 2-3 547 12 ब्र. सू 4-1-7 | 565 5 वे. सं 248 548 4 संबन्ध. 117 | 565 9 काव्यालंका 2-2-2 548 15 न्या. सु 330 | 567 1 आगमप्रामाण्यम् 548 19 तै. उ शं 1-1 | 568 15 श्रीभा. 2-2-42 549 5 मु. उ 1-2 | 569 12 श्रीभाष्यारम्भे 549 6 भ. गी. 2-42 | 569 16 अधिकरण 15 श्लो 549 10 किर 12 | 571 1 ब्र. सू. 4-4-22 549 17 संबन्ध 238 श्लो. | 571 3 ,, 2-3-46 549 19 ब्र. सू 3-4-2 | 571 5 ,, 1-3-22 550 3 संबन्ध. 1133 श्लो. | 571 8 भ. गी. शं. 13-4 550 5 ,, 345 श्लो. | 571 13 ब्र. सू. 1-1-1 550 9 बृ. उ 6-4 | 572 3 भामत्यारम्भे 550 11 सिद्धान्तलेशसंग्रहः | 572 8 तत्त्वटीका 551 11 भा. भा 207 | 573 12 नैष्कर्म्य 90 श्लो. 552 1 श्रीभा. 1-1-4 | 574 11 स. सि 3-79
xi आकारग्रन्थसंकेताः पुट. पङ्क्ति. सङ्केताः | पुट. पङ्क्ति. सङ्केताः 575 11 वे. सं 170 | 593 13 स. सि 2-42 575 19 छान्दो 8-1-1 | 594 1 भ. गी 9 माध्यायः 576 19 तै. उ 4-50, 51 | 594 7 ,, 18-56 576 18 श्वेता 6-18 | 594 19 पाञ्चरात्ररक्षा 577 1 छान्दो 2-2-23 | 595 3 प्र. त 166 577 4 रहस्यत्रयसारः | 595 8 गौतमधर्ममस्करी 579 3 न्या. सि 2 प | 596 3 भ. गी भा व्या 18- 579 8 भ. गी 18-66 | 597 1 शा. भा 1-1-20 581 7 न्यासदशकम् | 597 1 ब्र. सू 4-4-5 581 9 न्या. म 507 | 598 9 पाणिनि 4-4-34 582 15 किर 12 | 598 19 मनु 12-9 584 7 दिनकरीयारम्भे | 599 2 श्रीभाष्य 584 13 तन्त्र 240 | 600 16 न्या. कु 1 स्त 586 7 श्लोक 669 | 602 3 तत्त्वचिन्ता मङ्गलव 586 11 ,, 667 | 603 8 श्रीभा महापूर्वपक्ष 586 13 ,, 670 | 603 14 श्लोक 362 587 9 तन्त्र 16 | 604 7 शतदू 11 भ 587 11 श्लोक 673 | 605 17 तै. ब्रा 3-12-9 589 20 शास्त्र-मोक्षवादः | 606 1 कठोप 2-8 590 1 जै. सू 6-1-2 | 606 3 ,, 6-12 590 6 ब्र. सू 1-3-33 | 606 7 ,, 2-9 590 7 बृ. उ 5-5 | 606 9 केनोप 4 590 13 स. सि 2-37 | 606 11 जै. सू 1-1-2 590 13 सिद्धान्तलेश 3 प. | 606 12 ब्र. सू 1-1-3 591 3 मुण्ड. शं 1-1-1 | 606 13 ,, 2-1-10 591 4 वेदान्तपरिभा. व्या | 606 15 वा. प 1-34 591 18 सिद्धान्तलेश 3 प. | 606 19 ,, 1-137 592 18 ब्र. सू. शं 3-4-50 | 607 1 ,, 2-316 593 5 छान्दो 8-15 | 607 3 ,, 1-139 593 7 बृ. उ 5-5 | 607 9 मनु. 12-106
आकरग्रन्थसङ्केतः XII [पृ]ट. पङ्कि. सङ्केतः | पुट. पङ्कि. सङ्केतः 607 11 मनु. 4-256 | 614 3 श्लोक. 75 607 13 स्मृतिचन्द्रिका | 614 5 ,, 88 608 1 न्या. सु 350 | 614 7 तन्त्र. 178 609 18 तन्त्र. 104 | 614 11 आ. ध-व्या 1-1-2 610 7 वा. प 2-119 | 615 16 प्र. चं 2-4 610 9 ,, 1-123 | 615 18 विष्णु. 3-18 610 11 ,, 2-149 | 619 1 स. सि 3-68 611 5 न्या. म 589 | 619 5 श्लोक. 202 612 11 वृ.-उ 4-4 | 619 9 ,, 331 612 13 स्मृतिचन्द्रिका | 622 5 मा. वृ 4 613 5 वा. प 2-140 | 622 9 त. टी 86 613 11 श्लोक. 520 | 628 17 रामा. 2-105 613 17 वा. प 2-143 | 628 18 भारत. शा 328
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॥ श्रीरस्तु ॥ मानमेय रहस्य श्लोकवार्तिक प्रारम्भः
प्रमेयकाण्डः. (1) पीठिका 1 शुद्धस्वाभाविकप्रज्ञाशक्तिकारुण्यभूषणम् । नमिकर्मीकरोम्यद्यं विद्यादेवं श्रियः पतिम् ॥ अभिवन्द्य महोदारामस्मद्गुरुपरंपरम् । किंचित् करोमि जगतां प्रज्ञाविभवतोऽधुना ॥ 2 यः श्रीलक्ष्मीपुरंश्रीनिवासार्यो विदुषां मणिः । यं जन्मना ब्रह्मणा च वेंकटस्वाम्यजीजनत् ॥ श्रीमान् रामानुजाचार्यो येन पौत्र्यजयत् क्षितौ श्रीमत्तिरुमलै नल्लान् वात्स्यवंशाब्धिचन्द्रमाः ॥ श्रीमत्कस्तूरिरङ्गेन्द्रविद्वद्रत्नकृपाभरः । सर्वतन्त्रस्वतन्त्रत्वं यस्मै प्रायच्छदव्ययम् ॥ पितृव्यस्स विरक्तश्रीरघूद्वहगुरुद्वहः । आत्मरक्षाभरं यस्मादादत्त करुणाकरः ॥ यस्य वृत्तिं प्रतिष्ठां चानन्यतुल्यामकल्पयत् । महीशूरमहीधुर्यतुर्यश्रीकृष्णभूपतिः ॥
२ मानमेयरहस्यश्लोकवार्तिके यस्मिन् लोकाः प्रसीदन्ति ताताम्बातपसां निधौ। स व्यातानीत् मानमेयरहस्यश्लोकवार्तिकम् ॥ ३ शास्त्रेषु विस्तृतांशस्य गतार्थत्वान्न विस्तरः । सुखबोधाय सारांशः संक्षेपेण प्रदर्श्यते ॥ कुतो वा नूतनं वस्तु वयमुत्प्रेक्षितुं क्षमाः । वचोविन्यासवैचित्र्यमात्रमत्र विमृश्यताम् ॥ प्रायः प्रागनुभूतेषु सर्वेष्वपि च वस्तुषु । अपूर्वरचने तत्र तुष्यन्ति हि सुमानुषाः ॥ प्रज्ञाविवेकं लभते विभिन्नागमदर्शनैः । कियद्वा शक्यमुन्नेतुं स्वयत्नमनुधावता ॥ तत्तदुत्प्रेक्षमाणानां पुराणैरागमैर्विना । अनुपासितवृद्धानां विद्या नातिप्रसीदति ॥ संकेताद्वा वासनया तथा मीमांसयाऽपि वा । कस्मैचिद्रोचते किंचित् मध्यस्थमनसामपि ॥ सर्वसिद्धान्तसारार्थचिन्ताचातुर्यशालिनाम् । न कश्चिदपराधो नः निगूढार्थनिवेदनात् ॥ प्रकाश्यते च प्रायेण स्वाभिप्रायो निबन्धृभिः । अत्र त्वस्मदभिप्रायः सर्वाभिप्रायसंग्रहः ॥ प्रज्ञाप्रासादमारुह्य ह्यशोच्यः शोचतो जनान् । भूमिस्थानिव शैलस्थः सर्वान् प्राज्ञोऽनुपश्यति ॥
शास्त्रारम्भः 4 मेयं मानाधीनमपि तदेवादौ निरूप्यते । प्रोपसर्गप्रयोगस्तु प्रमाभ्रमविवेकतः ॥ विज्ञानाद्वैतसिद्धान्ते प्रविवेको न कश्चन । तथाऽसत्ख्यातिसिद्धान्ते व्यवहारो ह्युपप्लवः ॥ मानाधीना मेयसिद्धिः मानसिद्धिश्च¹ लक्षणात् तल्लक्षणप्रमाणाभ्यां वस्तुसिद्धिरितीर्यते ॥ ज्ञातं सम्यगसम्यग्वा यन्मोक्षाय भवाय वा । तत्प्रमेयमिहाभीष्टं न प्रमाणार्थमात्रकम् ॥ इति न्यायविदः प्राहुः प्रमाणपरिनिष्ठिताः । काणादास्तु पदार्थज्ञाः प्रमेयपरिनिष्ठिताः ॥ प्रमेयं च प्रमाणं च प्रयोजनमिति त्रिभिः । विभागैः प्रविभक्तोऽयं प्रबन्ध इति हि क्रमः ॥ (2) शास्त्रारम्भः. 1 विषयश्च फलं चैव संबन्धश्चाधिकार्यपि । प्रेक्षावतां प्रवृत्त्यङ्गमनुबन्धचतुष्टयम् ॥ अभिधेयादयश्शास्त्रे कथ्यन्ते प्रथमं बुधैः । न निश्चीयन्त एवैते कृत्स्नशास्त्रश्रुतेः पुरा ॥ प्रेक्षावतां प्रवृत्त्यङ्गं स्यात्तथाप्यर्थसंशयः । अनर्थसंशयो दृष्टः निवृत्त्यङ्गं परीक्षकैः ॥
4 मानमेयरहस्यश्लोकवार्तिके 2 तेष्वनर्थेष्वशक्यानुष्ठानं प्रथममुच्यते । यथा च तक्षकमणिः ज्वरपीडां हरेदिति ॥ विफलं तु द्वितीयं स्यात् काकदन्तपरीक्षणम् । तृतीयं चानभिमतं जननीपाणिपीडनम् ॥ असंबद्धं तुरीयं स्यात् जरद्गववचो¹ यथा । संभावितेनाप्येकेन प्रवृत्तिः प्रतिबध्यते ॥ इति धार्मोत्तरं वर्त्म न्यायबिन्दुमुखे स्थितम् । न्यायवार्तिकतात्पर्यटीकारम्भेऽपि सूचितम् ॥ व्यतिरेकदृशः केचित् केचिदन्वयदृष्टयः । प्राचीनाः प्रायशः पूर्वे पराचीनाः परे मताः ॥ ततोऽभिधेयसम्बन्धकथनं स्यादिहादितः । तच्चाभिधेयसम्बन्धसमर्थनमपीष्यते ॥ 3 प्रमाणनयतत्त्वाख्यालोकालंकारमूलके । रत्नाकरावतारेऽस्य निदानं विदितं यथा ॥ शास्त्रादावभिधेयार्थो दुर्निंरूपोऽभिधित्सितः । सोऽसंबद्धोऽथ संबद्धः नाद्यः प्रागेकवाक्यतः ॥ सर्वशास्त्रार्थसंदर्भगर्भाविर्भावसंभवात् । कृतं शास्त्रेण शेषेण बहलक्लेशकारिणा ॥ ¹ जरद्गवः कम्बलपादुकाभ्यां द्वारि स्थितो गायति मद्रकाणि । तं ब्राह्मणी पृच्छति पुत्रकामा राजन् रुमायां लवणस्य कोऽर्घः ॥
शास्त्रारम्भः 5 नान्त्यश्शब्दाभिसंबन्धे विकल्पानुपपत्तितः । संयोगाद्यास्तु संबन्धाः नैव संभावनापदम् ॥ तादात्म्यं वा तदुत्पत्तिः वाच्यवाचकताऽथवा । स्यादाद्यपक्षे प्रायेण जगतो मिश्ररूपता ॥ क्षुरमोदकशब्दाभ्यां स्यातां पाटनपूरणे । द्वितीयपक्षोऽपि मिथोऽनुपलम्भपराहतः ॥ तृतीयोऽपि स्वरूपं वा भिन्नो वेति विकल्प्यते । आद्ये नाधिकमुक्तं स्यात् अन्त्ये नित्योऽथवेतरः ॥ नित्यश्चेन्नित्यतापत्तिः एतत्संबंधिनोरपि । अनित्यश्चेत्स्वरूपं चेत् नाधिकं स्यादितीरितम् ॥ भिन्नश्चेदनवस्था स्यात् तादात्म्यादिविकल्पतः । सर्वेषामपि नित्यत्वं क्षणभङ्गपराहतम् ॥ दुर्ग्रहश्चापि संकेत: स्वरसक्षणभङ्गिनी । विकल्पयोनयश्शब्दा विकल्पाइशब्दयोनयः ॥ कार्यकारणता तेषां नार्थं शब्दाः स्पृशन्त्यमी । इति प्राचामुक्तिरेषा सकलार्थप्रदर्शिनी ॥ अतोऽभिधेयसंबन्धभङ्गुरः शास्त्रडम्बरः । सोऽयं सौगतसिद्धान्तः शास्त्रारम्भप्रभञ्जकः ॥ 4 क्षेप्तुं वादानवमादीन् दृश्यते किल वार्तिके । सिद्धे शब्दार्थसंबन्ध इति वाररुचं वचः ॥