प्रासाद मण्डन (मण्डन सूत्रधार - मन्दिर निर्माण, शिखर, मण्डप एवं वास्तु लक्षण सटीक)
Prasada Mandanam of Sutradhara Mandana with Commentary
मण्डन सूत्रधार (महाराणा कुम्भा के प्रधान वास्तुकार) द्वारा
( २१६ ) खुर } पु. प्रासाद की दीवार का प्रथम थर खुरक } खुरा. ग गगारक न. देहली के आगे अर्द्धचंद्राकृति के दोनो तरफ की फूलपत्ति वाली आकृति । गंज पु. सातवां आय, गजथर । गजतालु न. गुंबज के उदय में रूपकंठ के ऊपर का थर । गजदन्त न. हाथी दांत की आकृतिवाला मंडल । गजधर पु. देवालय और मकान आदि बनाने वाला शिल्पी । गणेश पु. गणपति । गण्डान्त पु. तिथि नक्षत्र आदि की संधि का समय गन्धमादन पु. वैराज्यजातिका बीसवां प्रासाद । गन्धमादिनी स्त्री. बीसवी संवरणा । गन्धर्व पु. वास्तुदेव । गन्धर्वा स्त्री. नवशाखाओ मे दूसरी और पांचवी शाखा । गरुड पु. केसरी जाति का तेइसवां प्रासाद । गर्भ पु. गर्भगृह । गह्वर न. गुफा । गान्धर्व पु. केवाल थर का देव । गान्धारी स्त्री. चार शाखावाला द्वार । गिरि पु. वास्तुदेव, पर्वत । गुणा पु. तीन की संख्या, रस्सी, डोरी । गुरु पु. बृहस्पति, पांचवा ग्रह । गुह पु. कार्तिक स्वामी । गूढ पु. गूढमंडप, दीवार वाला मंडप । गृह न. घर, मकान । गृहक्षत पु वास्तुदेव गृहित् पु. घरका मालिक । गेह न. घर, गर्भगृह । गोधूम पु. गेहूॅ. धान्य विशेष । गोपुर न. किला के द्वार ऊपर का मकान । गोमेद न. गोमूत्र के रंग का रत्न विशेष । गौरितिलक न. मंडल विशेष । ग्रन्थि स्त्री, गांठ । ग्रह पु. नवकी संख्या । ग्रास पु. जलचर प्राणी विशेष । ग्रासपट्टी स्त्री. ग्रास के मुखवाला दासा । ग्रीवा स्त्री. शिखर का स्कंध और आमलसार के नीचे का भाग । ग्रीवापीठ न. कलश के नीचे का गला । घ घट पु. कलश, आमलसार । घण्टा स्त्री. कलश, आमलसार । घण्टिका स्त्री. छोटी आमलसारिका, संवरणा के कलश । घृत न. घी । च चण्ड पु. महादेव का गणदेव, यह शिवंलिग की जलाधारी के नीचे स्थापित किया जाता है, जिसे स्नात्र- जल उसके मुख मे जाकर बाहर गिरता है, यह स्नात्रजल पीछे दोष कर्त्ता नहीं रहता । चण्डिका स्त्री. देवी विशेष । चतुरस्र वि. समचोरस । चतुर्दश सं. चौदह की संख्या । चतुष्किका स्त्री. चौकी मंडप । चत्वर न, चौक, चाररस्ता, यज्ञ स्थान । चन्द्र पु. द्वारशाला का देव, चंद्रमा । चन्द्रशाला स्त्री. खुली छत । चन्द्रावलोकन न. खुला भाग । चन्द्रिका स्त्री. आमलसार के ऊपर औंधे कमल की आकृतिवाला भाग । चम्पका स्त्री. दशवी संवरणा. चरकी स्त्री. वास्तुचक्र के ईशान कोण की देवी । चरभ न. सरलग्न । चापाकार न. धनुष के आकार वाला मंडल । चार पु. जिसमे पाव पाव भाग सोलह वार बढाया जाता है, ऐसी संख्या । चित्रकूटा स्त्री. ठारहवी संवरणा । चित्रा स्त्री. चौदहवा नक्षत्र । चिन्तारमन् पु. आठवां व्यय ।
( २१७ ) चूडामणि पु. चौदहवीं संवरणा। ताम्र न. धातु विशेष, तावा। चूर्ण न. चूना। तिथि स्त्री. पद्रह की सख्या। छ तोरण न. दोनो स्तम्भो के बीच में वलयाकार प्राकृति, तोरण। छन्दस् न. तल विन्यास। त्रिक पु, चौकी मडप। छाय न. छाया। त्रिदश पु. देव. छिद्र न छेद। त्रिदशा स्त्री. तेर ही सवरणा। ज त्रिधा अ. तीन प्रकार. जगती स्त्री. प्रासाद की मर्यादित भूमि, पीठिका, त्रिपुरष पु ब्रह्मा, विष्णु और शिव। जङ्घा स्त्री. प्रासाद की दीवार या साउवा थर त्रिमूत्ति स्त्री. देखो त्रिपुरुष, उत्तरस के देव। जम्भा स्त्री. वास्तुचक्र के यग्निकोण की देवी त्रिंशत् स. तीसकी सख्या। जय पु. वास्तुदेव। त्रैलोक्यभूषण पु. वेराज्यादि नववा प्रासाद। जया स्त्री. शेवरी शिला का नाम त्रैलोक्यविजय पु. वैराज्यादि पन्द्रहवा प्रासाद। जलदेव पु. कुंभा के गृह का ६१, वरण। त्र्यंश न. तृतीयाश, तीजा भाग। जलाधिर पु वास्तुचक्र का देव। द जाड्यकुम्भ पु पीठ के नीचे का बाहर गोरखना हुआ दग्धा स्त्री, तिथि विशेष। गजाकार थर। दण्ड पु. ध्वजा लटकाने का दड। जानु न. घुटना। दन्त पु. बत्तीस की सख्या, दात, शिखर। जाम न. जालीदार खिड़की दर्पण न. मायना, रूप देखने का काच। जालक न. महदी का बाना, जालीदार खिड़की दल न. फालना, जाह्नवी स्त्री. गंगा, नामो का देव. दशाक्षा स्त्री. तीसरी संवरणा। जिन पु. जैनधर्म के देव, चौबीस की सख्या। दारु न. काष्ट, लकडी, कारीगर। जीर्ण न. पुराना। दारुण वि. भयकर। जीव-न्यास न देवों की प्राणप्रतिष्ठा। दिक् स्त्री. दिशा, दश की सख्या। जूर्णा स्त्री. धान्यविशेष, जुआर। दिक्पाल पु. दिशा के अधिपति देव। ज्योतिमती स्त्री, मालकंगनी औषधि विशेष। दिक्साधन पु दिशा का ज्ञान करने की क्रिया ट दिङ्मुख} वि. प्रासाद, गृह आदिका टेढापन। टङ्काभ न. यज्ञमण्डल विशेष। दिङ्मूढ} त दिति पु. वास्तुदेव। तडाग न. तालाब, सरोवर। दिवाकर पु. बारह की सख्या, सूर्य। तत्पुरुष पु. प्रासाद की दीवार के रथ का देव। दिश स्त्री. दश की सख्या, दिशा। तल न. नीचे का तल भाग। दिशिपाल पु अथा घर के देव। तल्प न. शय्या, आसन। दीर्घ वि. लंबाई। तवङ्ग न. प्रासाद के थर मादि में छोटी साईझ के दृढ वि. मजबूत। तोरण वाले स्तम्भ युक्त रूप। दृष्टि स्त्री. भाख, निगाह। देवगान्धारी स्त्री. चौदहवी सवरणा। प्रा० २८
( २१९ ) देवतायतन पु. देवो की पंचायत । देवनक्षत्र न. देवगणवाले नक्षत्र । देवपुर. देवनगर । देवसुन्दरी स्त्री. चौथी संवरणा । दैर्ध्य वि. लबाई । दोला स्त्री. झूला । हिंडोला । दौवारिक पु. वास्तुदेव । द्राविड पु. प्रासाद की एक जाति । द्राविडी पु. अधिक शृंगोवालो प्रासाद की दीवार, जंघा । द्वादश सं. बारह की संख्या । द्वार न. दरवाजा । द्वारपाल पु. द्वारका रक्षक, चौकीदार । द्विरष्ट सं. सोलह की संख्या । ध धनद पु. उत्तर दिशा का अधिपति कुवेर देव । धनुः न. नववी राशि, धनुष्य । धरणी स्त्री. गर्भगृह के मध्य नीव मे स्थापित नवमी शिला । धराधर पु. कंपिलो मंडप के देव । धिष्ण्य न. २७ की संख्या । नक्षत्र धूम पु. दूसरा आय । ध्रुव पु. उत्तर दिशा का एक तारा, ध्रुव तारा । ध्वज पु. पहला आय, ध्वजा । ध्वजा स्त्री. पताका, झंडा, ध्वजा । ध्वजादंड पुं. ध्वजा रखने का दंड, जिसमे ध्वजा लटकाई जाती है । ध्वजाधार पु. ध्वजादंड रखने का कलावा ध्वांक्ष पु. आठवां आय, काक । न नकुलीश पु. ऊर्ध्वरेता महादेव । नगर न. गांव, शहर । नन्द पु. नव की संख्या । नन्दन पु. केसरी जाति का तीसरा और वैराज्यादिका दूसरा प्रासाद । नन्दशालिक पु. केसरी जाति का चौथा प्रासाद । नन्दा स्त्री. प्रथम शिला, जो ईशान अथवा अग्नि कोण में प्रथम स्थापित किया जाता है । नन्दिन् पु. महादेव का वाहन, बैल, सांठ । नन्दिनी स्त्री. पंचशाला वाला द्वार, जाड्यकुम्भका देव, दूसरी संवरणा । नन्दी स्त्री. काणी, भद्र के पास की छोटी कोनी । नन्दीश पु. केसरी जाती का पांचवा प्रासाद । नर पु. नरथर, पुरुष की आकृति वाली पट्टी । नर्त्तकी स्त्री. नाच करतो हुई पुतली । नलिका स्त्री. नववी संवरणा । नवनाभि पु. यज्ञमंडल विशेष । नवमङ्गल पु. वैराज्यादि १६ वां प्रासाद । नष्टच्छन्द पु. जिसकी तलविभक्ति बराबर न हो । नाग पु. वास्तुदेव. हाथी । नागकुल पु. भीट्ट थर के देव । नागर पु. प्रासाद की एक जाति । नागरा स्त्री. उपर का अर्थ देखो । नागरी स्त्री. रूपविनाकी सादी जंघा । नागवास्तु पु.न. शेषनाग चक्र, राहुमुख । नाटयेश पु. नटराज । नाभि स्त्री. मध्यभाग । नाभिच्छन्द पु. दो जाति की मिश्र आकृति वाली छत । नाभिवेध पु. गर्भवेध । नारायणी स्त्री. आठवी संवरणा । नाल न. नाली, पानी नीकलने का परनाला । नाली स्त्री. देखो उपर का अर्थ । नासक न. कोना । निरन्धार पु. विना परिक्रमावाला प्रकाश मय प्रासाद । निर्गम पु. बाहर नीकलता हुआ भाग । निशाकार पु. आमलसार का देव, चंद्रमा । निःस्वन पु. शब्द । नृत्य पु. नृत्यमंडप, रंगमंडप । नैर्ऋत पु. नैर्ऋत्य कोणके अधिपति दिक्पाल । प पक्षिराज पु. केसरी जाति का २३ वां प्रासाद, पञ्च सं. पांच की संख्या ।
( २१६ ) पञ्चगव्य न. गाय का दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर। पञ्चत्रिंशत् सं० ३५वें भाग की संज्ञा। पञ्चदेव पु. ब्रह्मा, विष्णु, सूर्य, ईश और सदाशिव ये पांच देवों का समूह, उत्सङ्ग के देव। पञ्चाशत् न. पचास की संख्या। पट्ट पु. पाषाण का पाट। पट्टभूमिका स्त्री. ऊपर की धूप घुंडी का। पट्टशाला स्त्री. दलान, बरामदा। पत्ताहा स्त्री. छाया। पत्त्रशाखा स्त्री. द्वार की प्रथम शाखा का नाम। पद न. भाग, हिस्सा। पद्मक पु. कमल दल। पद्मभव पु. कमल से पैदा होने वाला प्रासाद। पद्मरत्न न. मणियों के आधार वाला घर, सभा। पद्मराग पु. हस्ती जाति का १८ वां प्रासाद। पद्मशिला स्त्री. गुम्बज के ऊपर की मण्डलशिला, यह नीचे से गोल होती है। पद्मा स्त्री. पद्मशिला, आरम्भ की सवरणा। पद्माक्ष पु. पद्माक्ष (राजा) के देव। पद्मिनी स्त्री नवशाखा वाला द्वार। पद्मासन न. देव के बैठने का स्थान, पीठिका। पर्जन्य पु. वास्तुदेव, ध्वजा का देव। पर्यङ्क पु. पलंग, खाट। पर्यन्त न. प्रासाद की दो मुंडो का मध्य भाग। पर्वत पु. रत्न का देव। पल्यङ्क पु. पलंग, खाट। पाद पु. चरण, चौथा भाग। पापराक्षसी स्त्री. वास्तुचक्र के वायु कोणाकी देवी। पार्वती स्त्री. कलश के देव। पार्श्व पु. न. एक तरफ, समीप। पालव न. छज्जा के ऊपर छाद्य का एक थर। पिण्ड वि. जाडाई, मोटाई। पितामह पु. ब्रह्मा। पितृ पु. वास्तुदेव, पूर्वज, पितर देव। पितृपति पु. यम, दक्षिण दिशा का दिक्पाल। पिप्पल पु. वृक्ष, पाकर, विजयन। पिशाच पु. क्षेत्रगणित के आय और व्यय दोनो बराबर जानने की संज्ञा। पीठ न. प्रासाद की खुरसी, आसन। पीलीपीच्छा स्त्री. वास्तुचक्र के ईशान कोण की देवी। पुनर्वसु पु. सातवां नक्षत्र। पुर न. गाव, शहर। पुराण न. अठारह की संज्ञा। पुरुष पु. प्रासाद का जीव, जो सुवर्ण का पुरुष बनाकर आमलसार मे पलंग पर रखा जाता है। पुष्पंज् पुं, वास्तुदेव। पुष्पकंठ पुं, दासा, अंतराल। पुष्कर न. जलाशय का मंडप, वलाएक। पुष्पगेह न. पूजनगृह। पुष्पदन्त पुं. वास्तुदेव। पुष्पराग न. पुखराज, रत्न विशेष। पुष्पिका स्त्री. गुम्बद के पर बनी हुई प्रथम सवरणा। पुष्य न. आठवा नक्षत्र। पूतना स्त्री. वास्तुचक्र के नैऋत्य कोण की देवी। पृथिवीजय पुं. केसरी जाति का बारहवा प्रासाद। पृथिवीधर पु. वास्तुदेव। पृथु वि. विस्तार, चौडाई। पेट } न. पाट आदि के नीचे का तल। पेटक } पौर पु. दूसरा व्यय का काक। पौरुष पुं. प्रासाद पुरुष सबंध की विधि। पोली स्त्री. प्रासाद की पीठ के नीचे भीडू का थर। पौष्ण न. २७ वां रेवती नक्षत्र। प्रणाल न. पानी निकलने की नाली, परनाला। प्रतिकर्ण न कोनेके समीप का दूसरा कोना। प्रतिभद्र न. मुखभद्र के दोनो तरफ के साचे। प्रतिरथ पुं. कोनेके समीप का चौथा कोना। प्रतिष्ठा स्त्री. देवस्थापन विधि। प्रतोली स्त्री. पोल, प्रासाद आदि के आगे तोरण वाला दो स्तंभ। प्रत्यङ्ग न. शिखर के कोनेके दोनो तरफ के लंबा चतुर्थांश मानका श्रृंग।
( २२० ) प्रदक्षिणा स्त्री. परिक्रमा. फेरी । प्रद्योत पुं. तीसरा व्ययका नाम । प्रभा स्त्री. तेज, प्रकाश । प्रवाल न. मूंगा, रत्नविशेष । प्रवाह पुं. पानीका वहाव । प्रवेश पुं. थरो के भीतर का भाग । प्रहार पुं. शृंगो के नीचे का थर । प्राक् स्त्री. पूर्वदिशा । प्राकार पुं, किला, कोट, दीवार । प्राग्रीव पुं. प्रासाद के गर्भगृह के आगे का मंडन । प्राची स्त्री. पूर्वदिशा । प्रासाद पुं. देवमंदिर, राजमहल । प्लक्ष पुं. वृक्ष विशेष, पाकर, पिलखन । प्लव पुं. पानीका बहाव । फ फणिमुख न. शेषनागका मुख, यह नींव खोदने के प्रारंभ मे देखा जाता है । फालना स्त्री. प्रासाद की दीवार के छाचे । फांसना स्त्री. प्रासाद की एक जाति विशेष । ब
( २२१ ) मत्तालम्ब पु. गवाक्ष, झरोखा, आला, ताक । मन्त्र न. जाप विशेष । मध्यस्था स्त्री. प्रासाद के ३ भाग के मान का कोली मंडप का नाम । मनु पुं. चौदह की संख्या । मनोहर पुं. पाचवा व्यय का नाम । मन्दर पुं. केसरी जाति का छट्ठा प्रासाद । मन्दरा स्त्री. इक्कसवी सवरणा । मन्दारक पुं. प्रासाद की देहली के मध्यका गोल भाग, एक जात की छत । मन्दिर पुं. वैराज्यादि पाचवा प्रासाद देवालय । मरुत् पुं. वायुदिशा का अधिपति, दिक्पाल । मर्कटी स्त्री. ध्वजादंड के द्वार की पाटली, जिसमे ध्वजा लटकाई जाती है । मलय पुं. वैराज्यादि छट्ठा प्रासाद । महानस न. रसोई घर, रसोडा । महानील पु. केसरी जाति का १५वा प्रासाद । महाभोग पुं. वैराज्यादि २४वा प्रासाद । महीधर पु, वैराज्यादि १७वां प्रासाद । महेन्द्र पु. वास्तुदेव । माड पुं. मंडप, मडवा । मातृ स्त्री. सप्त मातृ देवता । मार्कटिका स्त्री. ध्रुवतारे के समीप का दो तारा, जो ध्रुव के चारो तरफ घूमते हैं । मालिनी स्त्री. छह शाखावाले द्वार का नाम, २२ वी सवरणा । माहेन्द्र पु, वैराज्यादि दसवा प्रासाद । माहेन्द्री स्त्री. पूर्वदिशा । मित्र पुं. वास्तुदेव । मिश्रका स्त्री. प्रासाद की एक जाति । मिश्रसंघाट न. ऊचा नीचा खाचा वाला गुम्बद का नदोवा, छत । मीन पु. सूर्य की १२वी संक्रान्ति, १२वी राशि, मछली । मीनार्क पुं. मीनराशि का सूर्य, मीन सक्रान्ति मुकुटोज्ज्वल पुं. केसरी जाति का २०वा प्रासाद । मुकुली स्त्री. आठ शाखावाले द्वार का नाम । मुक्ता स्त्री. मोती । मुखभद्र न. प्रासाद का मध्य भाग । मुखमण्डप पुं. गर्भगृह के आगे का मंडप, वलाएक । मुख्य पुं. वास्तुचक्र के देव । मुण्डलीक न. छज्जा के ऊपर का एक थर । मुद्ग पु. मूंग, धान्य विशेष । मूठ न. टेढा, तीरछा । मूल न. क्षेत्रफल, क्षेत्र की लंबाई और चौड़ाई का गुणा- कार को २७ से भाग देने से जो शेष बचे वह मूलराशि माना जाता है । नीचे का भाग, एक नक्षत्र । मूलकर्ण न. पुं. शिखर के नीचे का कोना । मूलरेखा स्त्री. शिखर की नीचे के दोनो कोणे के बीच का नाप, कोना । मूपा स्त्री. लबा अलिंद । मृग न. मृगशीर्ष नक्षत्र, मकर राशि, वास्तु देव । मृगार्क पु. मकर राशि का सूर्य, मकर सक्रान्ति । मृत स्त्री मिट्टी । मेखला स्त्री. दीवार का छाघा । मेढ्र पुं. पुरुष चिन्ह, लिंग । मेरु पु. प्रासाद विशेष, एक पर्वत । मेरुफूटोद्भवा स्त्री. पचीसवी सवरणा । मैत्र्य न. अनुराधा नक्षत्र । य यक्ष पुं, आय से कम व्यय जानने की संज्ञा, देहुली का देव । यक्ष्मन् पु. वास्तुदेव । यज्ञाङ्ग पुं. वृक्ष विशेष, गूलर । यम पुं. दक्षिण दिशा का दिक्पाल, वास्तुदेव, भरणी नक्षत्र । यमाश पुं. क्षेत्रफल का नाम विशेष । यसचुल्ली स्त्री. सम्मुख लबा गर्भगृह । यव पुं. जब, धान्य विशेष । यान न. आसन, सवारी, याम्या स्त्री. दक्षिण दिशा । युग्म न. दो की सख्या ।
( २२२ ) योगिनी स्त्री चौसठ देवी, योनि स्त्री. मंडल विशेष । र रंगभूमि स्त्री. गर्भगृह के सामने पांचवां नीचा मंडप, नृत्य मंडप । रजत न. चांदी, धातु विशेष । रत्नकूट पु. केसरी जाति का सोलहवां प्रासाद । रत्नगर्भा स्त्री. पंद्रहवी संवरणा । रत्नशीर्ष पु. वैराज्यादि ११वां प्रासाद । रत्नसम्भवा स्त्री २४वी संवरणा । रथ पु. विशेष प्रकार की गाडी, कोने के समीप का दूसरा कोना, फालना विशेष । रथा स्त्री. प्रासाद की जाती विशेष । रथिका स्त्री. भद्र का गवाक्ष, आला । रन्ध्र न. प्रवेश द्वार । रम्या स्त्री. छठ्ठी संवरणा । रवि पु. बारह की संख्या, सूर्य । रश्मि पु. किरण । रस पु. छह की संख्या । राक्षस पु. आय से व्यय अधिक जानने की संज्ञा । राजगृह न. राजमहल । राजपुर न. राजधानी का शहर, राजनगर । राजमन्दिर न. राजमहल । राजमार्ग पु. सार्वजनिक आम रास्ता । राजसेन न. मण्डप की पीठ के ऊपर का थर । राजहंस पु. केशरी जाति का २२ वां प्रासाद । राजांश पु. क्षेत्रफल का नाप विशेष । राम पु. तीन की सख्या (राम, परशुराम और बलराम) रासभ पुं. खर आय का नाम । राहुमुख न. शेषनागचक्र का मुख । रिक्ता स्त्री नींव की चौथी शिला, ४, ६ और १४ तिथि । रीति स्त्री. पीत्तल, धातु विशेष । रुचक पुं. समचोरस स्तंभ । रुद्र पुं. ग्यारह की संख्या, वास्तुदेव । रुद्रदास पु. वास्तुदेव, रूपकण्ठ पुं. गुम्बद के उदय में कर्णदर्दोरिका के ऊप का थर. रूपस्तंभ पुं. द्वारशाखा के मध्य का स्तंभ. रेखा स्त्री. खांचा, कोना । रोग पुं. वास्तुदेव । रोहिणी स्त्री. चौथा नक्षत्र । रौप्यज न. चांदी का बना हुआ । ल लक्ष्मीनारायण पुं. विष्णुदेव । लक्ष्य त. उद्देश्य, चिह्न । लतालिगोद्भव न. मंडल विशेष । लतिन पुं. प्रासाद की एक जाति । लतिना स्त्री. प्रासाद की एक जाति । लय न. मकान, गृह । लाटी स्त्री. स्त्रीयुगलवाली प्रासाद की जंघा । लिङ्गोद्भव न. वास्तु मंडल विशेष । लोह पुं. धातु विशेष, लोहा । व वक्त्र न. मुख । वज्र न. हीरा । वज्रक पु. केसरी जाति का १६ वां प्रासाद । वज्री स्त्री. ओषधि विशेष, गडूची । वट पुं. वृक्ष विशेष, बरगद, वड़, वत्स पु. आकाशीय कल्पित एक संज्ञा । वपुष् न. शरीर । वराटका स्त्री. प्रासाद की एक जाति । वराल पुं. ग्रास, जलचर जीव विशेष, मगर । वरुण पुं. पश्चिम दिशा का दिक्पाल, वास्तुदेव । वर्द्धमान पुं. प्रतिकर्णवाला स्तंभ । वलभी स्त्री प्रासाद की एक जाति । वल्कल पुं. औषधि विशेष । वसु पुं. आठ की संख्या, आठ देव विशेष । वह्नि पुं. अग्निकोण का दिक्पाल, अग्नि, वास्तुदेव, चित्रक ओषधि । वह्निभ न. कृत्तिका नक्षत्र ।
( २२३ ) वाजिन् पुं. अश्वथर, घोडा का थर । वानरेश्वर पुं. हनुमान देव । वापी स्त्री. वावडी । वामन न. मंडप के व्यास के आधे मान के उदयवाला गूम्बद, प्रथम का देव, जगती के आगे का बलाणक मंडप । वायव्य पु. वायुकोना । वायस पुं. ध्वाक्ष आय, कौआ । वाराह पुं. मंडप के व्यासार्ध के ३/२ मान के उदयवाला गुम्बद । खरशिला का देव । वारि न. पानी, जल । वारिमार्ग न. दीवार से बाहर नोकला हुआ खाचा । वारुण न. शतभिषा नक्षत्र, वासव न. धनिष्ठा नक्षत्र । वास्तु पुं. न. निवास स्थान, गुहाप्रसाद में विशेष प्रकार की देवपूजन विधि । वाहन न. सवारी, गाडी । विघ्नेश पुं. गणपति, गणेश । विजयानन्द पुं. वैराज्यादि २२वा प्रासाद । वितथ पुं. वास्तु मंडल के देव । विदारिका स्त्री वास्तुमण्डल के अग्नि कोने की देवी । विद्याधर पुं. गूम्बद में नृत्य करने वाले देवरूप । केवाल घर का देव । विधि पुं. वास्तुमण्डल के देव, ब्रह्मा । विधु पु. चन्द्रमा, एक सख्या । विद्ध वि. वेध, रुकावट । विपर्यास पुं. विपरीत, उलटा । विभव पुं. सातवा व्यय । विमान पुं. वैराज्यादि सातवा प्रासाद, राजद्वार के आगे का बलाणक मण्डप । विमानजा स्त्री. प्रासाद की एक जाति । विमाननागरच्छन्दा स्त्री. प्रासाद की एक जाति । विमानपुष्पका स्त्री. प्रासाद की एक जाति । विलोक्य पुं. खुला भाग । विवस्वन् पु. वास्तुमण्डल का देव, सूर्य । विंशति स. बीस की सख्या । विशाल पुं. वैराज्यादि आठवा प्रासाद । विश्व न. जगत्, तेरह की संख्या । विश्वकर्मन् पु. जगत की रचना करने वाला देव- शिल्पी । विष्णुक्रांता स्त्री. औषधि विशेष अपराजिता विस्तीर्णा वि. विस्तार वीतराग पुं. रागरहित जिनदेव । वृत्त वि. गोलाई । वृद्धि वि. बढाना । वृष पुं. पाचवी आय, नदीगण, वृषभ । वृषभध्वज पुं. केसरी जाति का २४वा प्रासाद । वेद पुं. चार की सख्या । वेदिका स्त्री. पीठ, प्रासाद आदिका आसन । वेदी स्त्री. राजसेन के ऊपर का थर, पीठ । वेश्मन् न. मंदिर, घर । वैडूर्य पु. केसरीजाति का १७ वा प्रासाद, रत्न विशेष । वैधृति पुं. सत्तावीस योग मे से एक योग । वैराज्य पु. प्रासाद की एक जाति । वैराटी स्त्री. प्रासाद की कमलपत्र वाली दीवार । वैष्णव पु. श्रवण नक्षत्र । व्यक्त वि. प्रकाशवाला । व्यङ्ग वि. टेढा । व्यजन न' पखा । व्यतिक्रम वि. मर्यादा से अधिक । व्यतिपात पुं. सत्तावीस योग मे से एक योग । व्यय पु. आठ की सख्या, खर्च । व्यास पुं. विस्तार, गोल का समान्तर दो भाग करने वाली रेखा । व्योमन् न. शून्य, आकाश । व्रीही स्त्री जब, धान्य विशेष । श शक्र पु. चौदह की सख्या, इन्द्र । शङ्कर पु ईशानकोन, महादेव । शङ्कु पु. छाया मापक यंत्र । शङ्खावर्त्त पुं. प्रासाद की देहली के आगे की अद्ध'चंद्र के आकारवाली शंख मोर लताभो वाली आकृति ।
( २२४ ) शंखिनी स्त्री. शंखावली, औषधि विशेष । शतमूल न. दश की संख्या । शताद्धं पं. पचास की संख्या । शम्भुदिशा स्त्री. ईशान कोन । शयनासन पुं. शेषनाग की शय्या ऊपर शयन करने वाला विष्णुदेव । शय्या स्त्री. प्रासाद के ३/२ भाग के मान का कोलीमंडप । शाखोदर न. शाखा का पेटा भाग । शान्त पुं. प्रथम व्यय । शालभञ्जिका स्त्री. नाच करती हुई पाषाण की पुत्तलियां । शाला स्त्री. प्रासाद, गभारा. छोटा कमरा, भद्र, परशाल बरामदश । शाली स्त्री. चावल, धान्य विशेष. शिखर न. शिवलिंग के आकार वाला गुम्बद । शिरः न. शिखर शिरावटी, ग्रासमुख, एक संख्या वाचक । शिरःपत्रिका स्त्री. ग्रास के मुखवाली पट्टी, दासा । शिरावटी स्त्री. भरणी के ऊपर का थर । शिला स्त्री. नींव में प्रथमवार रखी जाती पाषाण शिला । शिव पु ईशान कोन. महादेव । शिर्य न. भरणी के ऊपर का थर, शिरावटी । शुकनास न. प्रासाद की नासिका । शुक्र पु. छट्ठा ग्रह, यवनाचार्य । शुक्ला स्त्री. नींव में प्रथम रखी जाती सातवी शिला । शुण्डिकाकृति स्त्री. हाथी । शुद्धसङ्घाट न. गुम्बद का समतल चंदोवा, छत शृङ्ग न. शिखर, छोटे छोटे शिखर के आकार वाले अंडक. शेष पु. वास्तुमण्डल का देव । शैलज पु. पाषाण का बना हुआ । शैलराज पु. मेरु पर्वत । श्रवण न. २२वां नक्षत्र. श्रियानन्द पु. चौथा व्यय । श्रीनन्दन पुं. वैराज्यादि चौथा प्रासाद । श्रीवत्स पुं. छठ्ठा व्यय, प्रासाद विशेष, एक ही सादा शृंग । श्रीवृक्ष पुं. केसरी जाति का सातवां प्रासाद श्वान पु. चौथा आय । ष षट् सं. छह की संख्या । षड्दारु न. दो दो स्तंभ और उसके ऊपर एक एक पाट षष्ठि सं. साठ की संख्या । षोडश सं. सोलह की संख्या । स संवरणा स्त्री. अनेक छोटे छोटे कलशों वाला गुम्बद । सकलीकरण न. देव प्रतिष्ठा की विधि विशेष । सङ्घाट पु. तल विभाग । सत्य पु. वास्तुमंडल का देव । सत्रागार न. यज्ञशाला । सदाशिव पुं. कलशका देव, महादेव । सद्य पुं. कोना का देव । सन्धि स्त्री. सांध, जोड । सन्ध्या स्त्री भद्रघर का देव । सप्त सं. सात की संख्या । सप्तविंशति सं. सत्तावीस की संख्या । सभामार्ग पुं. तीन प्रकार की आकृति वाली छत । सम्भ्रमा स्त्री प्रासाद के ३/२ भाग के मान का कोलीमण्डप समुद्भवा स्त्री. बारहवीं संवरणा । समोसरण न. तीन प्राकारवाली वेदी । सरस्वती स्त्री. मंचिका थर का देवता । सर्वतोभद्र पु. केसरी जाति का दूसरा प्रासाद । सर्वाङ्गतिलक पु. वैराज्यादि २३वां प्रासाद । सर्वाङ्गसुन्दर पु. वैराज्यादि २१ वां प्रासाद । सवितृ पुं. वास्तुमण्डल का देव, सूर्य । सहदेवी स्त्री. औषधि विशेष । सान्धार पु. परिक्रमावाले नागर जाति के प्रासाद । सान्धारा स्त्री. प्रासाद की जाति । सारदारु पु. श्रेष्ठ काष्ठ, सावित्र पु. वास्तुमंडल का देव । सावित्री स्त्री भरणी थर का देवता । सिंह पुं. तीसरी आय, वैराज्यादि प्रासाद ।
( ६२५ ) सिंहशाखा स्त्री. द्वार की नववी शाखा सिंहस्थान न. शुकनास । सिंहार्क पु सिंह राशिका सूर्य । सिंहावलोकना स्त्री. प्रासाद की एक जाति । सितशृंग पु. वैराज्यादि १२वा प्रासाद । सिद्धाश्रम पु सिद्ध पुष्पो का निर्वाणस्थान । सीसक न. सीसा, धातुविशेष । सुग्रीव पु वास्तुमडल का देव । सुनोल न अच्छा नीलम रत्न । सुप्रभा स्त्री दो शाखावाला द्वार का नाम । सुभगा स्त्री. तीन शाखावाला द्वार । सुर पु अन्तराल थर का देव । मुरवेश्मन् न. देवालय, देव मंदिर । सुवर्ण न. सोना, धातु विशेष । सुपिर न. छेद, पोलापन । सूत्रधार पु शिल्पी, मंदिर और मकान आदि बनाने वाला कारीगर । सूत्रारम्भ पु नीव खोदने के प्रारंभ मे प्रथम वास्तुभूमि मे कीले ठोककर उसमे सूत्र बाधने का आरंभ । सूर्य पु. बारह की सख्या, वास्तुदेव, द्वारशाखा के देव । सृष्टि स्त्री. दाहिनी ओर से गिनना, उत्पत्ति पृ वी । सोपान न. सीडी । सोम पु. वास्तुमडल का देव । सौध पु राजमहल, हवेली । सौभाग्यिनी स्त्री. आठवी शिला का नाम । सौम्य पु शुभग्रह, बुध । सौम्या स्त्री. उत्तर दिशा । स्कन्दा स्त्री. वास्तुमडल के नैऋत्य कोन की देवी । स्कन्ध पु शिखर के ऊपर का भाग स्तम्भ पु थंभा, खभा, ध्वजादंड स्तम्भवेध पु ध्वजाधार, कलावा । स्तात्र न स्तुति । स्थ'ण्डल न. प्रतिष्ठा मडल मे बालु (रेती) की वेदी। जिसके ऊपर देव को स्नान कराया जाता है । स्थावर न. प्रासाद के थर, शनिवार । स्थूल वि. मोटा । स्नानोदक न स्नान जल, चरणामृत । स्मरकीर्त्ति स्त्री. एक शाखा वाला द्वार । स्वयम्भू पु बिना घडित शिवलिग । स्वर्ण न. सोना । स्वस्तिक न. वास्तुमडल विशेष । स्वाति स्त्री. पद्रहवा नक्षत्र । ह हरि पु कणिका का देव, विष्णु हर्म
? Look at १७-२३ vs १८-२३: १७-२३, १८-२३, २०-१६, २१-२३, Wait, in line L4: १७-१३, १८-२३, Wait, look at the first pair: १७-१३, wait, look at '१' in १७-१३: it has a straight vertical, looks like १. But wait, why would lines be 17 to 13? It would be 17-something. Line numbers in pages: 17 to 23 (१७-२३)! Wait, is that a misprint in the book itself? Yes, the book printed '१७-१३' or '१७-२३'? It looks like '१७-१३'. We transcribe what is printed.
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( २२७ ) पृष्ठ लाईन अशुद्ध शुद्ध पृष्ठ लाईन शुद्ध शुद्ध १७५ २३ चतुष्टद्यंशको चतुपटद्यशको २०८ ६ तत्प्रभाण तत्प्रमाण १७६ ४ उरुशृङ्ग उरुशृङ्गं ,, २२ षड्विशपद षड्विंशपद ,, ८ इन्दनील इन्द्रनील ,, २४ वेदहप वेदरूप १७७ ३ 'रखलें' के बाद छूटा ओर कोने के २११ ३ पद्ममम् पद्मम् हुआ मेटर— ऊपर से एक ,, १४ पुरमध्यें पुरमध्ये शृंग हटा ,, २५ धुरे पुरे करके उसके २१४ २४ कङ्ग कङ्ग बदले तिलक २१५ २५ खाड खंड रखलें २१६ १३ शिवर्लिंगकी शिवलिंग की १८० १३ प्रत्यङ्ग प्रत्यङ्ग तु २१७ ३५ सचारणा सवरणा १९२ २५ तिलक तिलरु २१६ २६ देध देव १९५ ४ दिपद द्विपद ,, २३ व्यबका काम व्यय का नाम ――――
8403 अनुवाद के सहायक ग्रंथ ग्रन्थ कर्त्ता १ अपराजितपृच्छा ... भुवनदेवाचार्य २ क्षीरार्णव .. विश्वकर्मा ३ ज्ञानप्रकाश दीपार्णव ... " ४ राजवल्लभ मंडन ... मंडन सूत्रधार ५ देवता मूर्त्ति प्रकरण .... " ६ रूपमंडन .... " ७ समरांगण सूत्रधार .... महाराजा भोजदेव ८ वास्तुसार .... ठक्कुर फेरु ९ मयमतम् .... मय सूत्रधार १० शिल्प रत्नम् भाग १-२ .... कुमार मुनि ११ विश्वकर्म प्रकाश .. विश्वकर्मा १२ काश्यप शिल्पम् .. महर्षि काश्यप १३ शिल्प दीपक .. गंगाधर १४ परिमाण मंजरी .. मल्ल सूत्रधार १५ जिन संहिता .. एक संधि भट्टारक १६ बृहत्संहिता .. वराह मिहिर १७ विवेक विलास . जिन दत्त सूरि १८ बृहच्छिल्पशास्त्र .... जगन्नाथ अंवाराम सोमपुरा १९ प्रासाद मंडन भाग १ .... अंवाराम विश्वनाथ सोमपुरा २० शिल्प रत्नाकर .... नर्मदाशंकर सोमपुरा २१ मानसार शिल्पशास्त्र .... मान सार ऋषि २२ विश्वकर्म वास्तु शास्त्र .... विश्वकर्मा २३ मुहूर्त्त चिन्तामणि ... श्री रामदेवज्ञ २४ आरंभसिद्धि वार्तिक .... उदयप्रभ देवसूरि २५ प्रतिष्ठासार .... वसुनंदी
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