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रसतरङ्गिणी (सदानन्द शर्मा - पारद, धातु, उपधातु एवं भस्म रसायन शास्त्र सटीक)

Rasatarangini of Sadananda Sharma with Prasadani Commentary

सदानन्द शर्मा (टीकाकार: पं. हरिदत्त शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished799 पृष्ठ

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उत्तम विधि से वर्णित है। मेरी दृष्टि में आधुनिक काल में लिखी हुई स्व० कविराज सदानन्द शास्त्री कृत रसतरंगिणी बहुत उत्तम सिद्ध हुई। अतः मैंने उसी का सरल हिन्दी अनुवाद 'रस विज्ञान' नाम से यह लिखा है। इस पुस्तक में प्रकरण के स्थान-स्थान पर उन पाश्चात्य योगों का भी दिग्दर्शन करा दिया गया है, जो एक रसचिकित्सक को जानने जरूरी हैं। साथ ही यथासम्भव खनिजादि द्रव्यों का परिचय, उनमें पाये जानेवाले तत्वों का विश्लेषण, उपयोग-विधि और उनके योगों का भी वर्णन किया गया है, जिससे रसचिकित्सक आधुनिक रसविज्ञान से भी परिचित हो जायें। यदि यह चिरकालीन धारणा क्रियात्मक रूप धारण कर रसशास्त्र के प्रेमियों के लिए उपयोगी सिद्ध हुई तो मैं अपनी धारणा और प्रयत्न को सफल समझूँगा। धर्मानंद

तरङ्गानुक्रमणिका तरङ्गाः पृष्ठाङ्काः रसशालाविज्ञानीयः प्रथमस्तरङ्गः १ परिभाषाविज्ञानीयो द्वितीयस्तरङ्गः ११ मूषादिविज्ञानीयस्तृतीयस्तरङ्गः २७ यन्त्रविज्ञानीयश्चतुर्थस्तरङ्गः ४१ पारदस्य अष्टसंस्कारविज्ञानीयः पञ्चमस्तरङ्गः ७१ मूच्छर्नाविज्ञानीयः षष्ठस्तरङ्गः १०२ पारदमारणविज्ञानीयः सप्तमस्तरङ्गः १४३ गन्धकविज्ञानीयोऽष्टमस्तरङ्गः १७४ हिंगुलविज्ञानीयो नवमस्तरङ्गः १८८ चपलनिर्णयः २०६ अभ्रकविज्ञानीयो दशमस्तरङ्गः २२१ तालकादिविज्ञानीय एकादशस्तरङ्गः २४४ शङ्खादिविज्ञानीयो द्वादशस्तरङ्गः २८५ क्षारत्रिकविज्ञानीयस्त्रयोदशस्तरङ्गः ३०७ क्षारविशेषादिविज्ञानीयश्चतुर्दशस्तरङ्गः ३२५ सुवर्णविज्ञानीयः पञ्चदशस्तरङ्गः ३६० रजतविज्ञानीयः षोडशस्तरङ्गः ३८५ ताम्रविज्ञानीयः सप्तदशस्तरङ्गः ४०८ वङ्गविज्ञानीयोऽष्टादशस्तरङ्गः ४३५ सीसकादिविज्ञानीय एकोनविंशस्तरङ्गः ४५५ लोहादिविज्ञानीयो विंशस्तरङ्गः ४८७ उपधात्वादिविज्ञानीय एकविंशस्तरङ्गः ५१६ मिश्रलौहादिविज्ञानीयो द्वाविंशस्तरङ्गः ५६६ रत्नविज्ञानीयस्त्रयोविंशस्तरङ्गः ५८६ विषोपविषादिविज्ञानीयश्चतुर्विंशस्तरङ्गः ६४६

विषय सूची

विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ प्रथम तरङ्ग | | अपर अम्ल पञ्चक | १४ मङ्गलाचरणम् | १ | पञ्चतिक्त | ” अहङ्कार परिहार | २ | पञ्चमृत्तिका | ” अनुबन्ध चतुष्टय | ३ | मधुरत्रिक | ” पुस्तक परिचय | ३ | पञ्चामृत | १५ रसवैद्य प्रशंसा | ४ | पञ्चगव्य | ” रसशाला | ५ | क्षीरत्रय | ” रसशाला में कर्मविभाग | ६ | दुग्धवर्ग | ” रसशाला के लिए उपकरण द्रव्य | ६ | तैल वर्ग | १६ परिचारक लक्षण | ८ | कज्जली का स्वरूप | १६ रससिद्ध आचार्यों का नाम | ६ | रसपङ्क ” ” | ” रसशास्त्र के आचार्य का स्वरूप | ६ | पिष्टिका ” ” | ” शिष्य का स्वरूप | १० | हिङ्गुलाकृष्ट रस | ” अनधिकारी शिष्य | १० | धातु सत्त्व लक्षण | १७ द्वितीय तरङ्ग | | वनौषधि सत्त्व ,, | ,, परिभाषा ज्ञान का फल | १२ | सिक्थ तैल ” | ,, परिभाषा लक्षण | ११ | द्रावक गण | १८ लवण पञ्चक | ११ | ढालन | ,, लवणत्रय | ११ | मित्रपञ्चक | ,, सैन्धव की प्रधानता | १२ | आवाप लक्षण | ,, क्षारद्वय, क्षारत्रय | ” | निर्वाप ” | १६ क्षार पञ्चक | ” | शुद्धावर्त लक्षण | ,, क्षाराष्टक | ” | पर्पटी स्वरूप | ,, मूत्राष्टक | ” | ताडन | २० गोर्वर | १३ | घोषाकृष्टताम्र | ,, अम्लवर्ग | १३ | वङ्कनाल | ,, अम्ल पञ्चक | १४ | स्वाङ्ग शीत लक्षण | ,,

[ १४ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ बहिःशीत लक्षण २१ | कोष्ठिका लक्षण ३३ भावना " २१ | अङ्गार कोष्ठिका " भावना में द्रवभाग २१ | पाताल कोष्ठिका ३४ शोधन २२ | पुट लक्षण ३५ वारितर लक्षण " | पुट प्रयोजन ३५ मृत लौह लक्षण " | सामान्यपुटक्रम ३६ अपुनर्भव " २३ | सूर्यपुट ३७ निरुत्थ " २३ | महापुट ३७ अमृतीकरण २४ | गजपुट ३७ परिस्रुत सलिल " | वाराहपुट ३८ मान परिभाषा २५ | कुक्कुटपुट " धन्वन्तरिभाग २६ | कपोतपुट " विश्वासघातक वैद्य " | गोर्वरंपुर ३६ तृतीय तरङ्ग | भाएडपुट ३६ मूषा नाम २७ | वालुकपुट ३६ पिधान २८ | भूधरपुट ३६ सन्धिलेप " | लावकपुट ४० मूषानिर्माणयोग्य मट्टी " | पुट नाम न रहने पर पुट देने का सामान्यमूषा २६ | विचार ४० वज्रमूषा " | उपलों का नाम ४० योगमूषा " | चतुर्थ तरङ्ग वज्र द्रावणिका मूषा ३० | यन्त्र का लक्षण ४१ गारमूषा ३० | दोलायन्त्र ल० ४२ गोस्तनीमूषा ३१ | ऊर्ध्वपातन यन्त्र ल० ४३ मल्लमूषा ३१ | अधःपातन यन्त्र ल० ४५ महामूषा ३१ | तिर्यक् पातन यन्त्र ल० ४६ वृन्ताक मूषा ३२ | भस्म यन्त्र ल० ४७ मूषाप्यायनकम् ३२ | कच्छप यन्त्र ल० ४८ अङ्गारधानिका ३३ | भूधर यन्त्र ल० ४८

[ १५ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ मृदङ्ग यन्त्र ल० ४६ | आकाश पातन यन्त्र ७० स्थाली यन्त्र ल० ५२ | तप्त खरल यन्त्र ७१ बालुका ,, ,, ५२ | पञ्चम तरङ्ग लवण ,, ,, ५४ | पारद के नाम ७१ पुट ,, ,, ५४ | शुद्ध अशुद्ध पारद का स्वरूप ७२ बाष्प स्वेदन यन्त्र ल० ५४ | अविशुद्ध पारद का स्वरूप ७२ दर्विका यन्त्र लक्षण ५६ | पारा में स्वाभाविक दोष ७३ पालिका ,, ,, ५६ | पारा के सात दोष ७५ डमरुकाख्य यन्त्र लक्षण ५७ | सातों दोषों का परिचय ७५ नाडिका यन्त्र लक्षण ५७ | पारा शुद्धि की आवश्यकता ७६ पाताल ,, ,, ५८ | शोधन के लिए पारा का मान ७७ खल्व ,, ,, ६० | शुद्धि का समय ७७ खल्व यन्त्र का प्रयोजन ६० | रस पूजन ७८ खल्व यन्त्र के दो भेद ६० | रस की सामान्य शोधन विधि ७८ वर्त्तुल खल्व ६० | प्रथम शोधन वि० ७८ द्रोणीरूपखल्व ६१ | द्वितीय शोधन वि० ७९ उलूखल यन्त्र ६१ | तृतीय शोधन वि० ८० इष्टिका यन्त्र ६२ | चतुर्थ शोधन विधि ८० जारणा ,, ६२ | पञ्चम शोधन ८१ सांमनाल ,, ६३ | षष्ठ शोधन विधि ८१ हंसपाक ,, ६४ | हिङ्गु से पारा निकालने की विधि ८२ नाभि ,, ६४ | पारा के अष्ट संस्कार ८३ धूप ,, ६५ | स्वेदन लक्षण ८४ कोष्ठी ,, ६६ | प्रथम स्वेदन विधि ८५ वलभी ,, ६७ | द्वितीय स्वेदन विधि ८५ स्वेदनी ,, ६८ | तृतीय स्वेदन विधि ८५ पातना ,, ६८ | मर्दन स्वरूप ८६ पातना यन्त्र का अन्य प्रकार ६६ | प्रथम मर्दन विधि ८६ उष्ण यन्त्र ६६ | मर्दन की द्वितीय विधि ८७

[ १६ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ मूर्च्छन स्वरूप ८७ | जारणा स्वरूप ६६ प्रथम मूर्च्छन विधि ८७ | षड्गुण गन्धक जारण का प्रयोजन ६६ द्वितीय मूर्च्छन विधि ८७ | षड्गुण गन्धकजारण का प्रथम उत्थापन स्वरूप ८८ | प्रकार ६७ उत्थापन का प्रथम प्रकार ८८ | षड्गुण गन्धक जारण का द्वितीय उत्थापन का द्वितीय प्रकार ८६ | प्रकार ६७ उत्थापन का तृतीय प्रकार ८६ | षड्गुण गन्धक जीर्ण रस का गुण ६८ उत्थापन का चतुर्थ प्रकार ८६ | छठवा तरङ्ग पातनातितय स्वरूप ८६ | मूर्च्छना का स्वरूप १०२ ऊर्ध्वपातन का प्रथम प्रकार ६० | मूर्च्छना के दो भेद १०३ ऊर्ध्वपातन का द्वितीय प्रकार ६१ | सगन्ध मूर्च्छना के दो भेद १०४ ऊर्ध्वपातन का तृतीय प्रकार ६१ | अन्तर्धूम मूर्च्छना का स्वरूप १०४ अधः पातन का प्रथम प्रकार ६१ | सगन्धनिर्र्गन्धमूर्च्छितरसका भेद १०४ अधः पातन का द्वितीय प्रकार ६१ | मुग्ध रस का स्वरूप १०५ तिर्यक् पातन का लक्षण ६२ | मुग्ध रस का गुण १०५ बोधन का लक्षण ६२ | मुग्ध रस की मात्रा १०६ बोधन का प्रथम प्रकार ६२ | मुग्ध रस का आमयिक प्रयोग १०६ बोधन का द्वितीय प्रकार ६२ | रसपुष्प का नाम १०७ बोधन का तृतीय प्रकार ६३ | रसपुष्प का निर्माण १०७ नियामन का स्वरूप ६३ | रसपुष्प का द्वितीय निर्माण १०८ नियामन का प्रथम प्रकार ६३ | रसपुष्प का तृतीय निर्माण १०६ नियामन का द्वितीय प्रकार ६४ | रसपुष्प की परीक्षा ११० नियामन का तृतीय प्रकार ६४ | रसपुष्प का गुण १११ रस नियामक गण ६४ | रसपुष्प की मात्रा १११ दीपन स्वरूप ६५ | रसपुष्प का आमयिक प्रयोग ११२ दीपन का प्रथम प्रकार ६५ | चन्दनादि वटिका ११२ दीपन का द्वितीय प्रकार ६५ | रसपुष्प मलहर ११३ दीपन का तृतीय प्रकार ६६ | रसपुष्पाद्यमलहर ११३ दीपन का चतुर्थ प्रकार ६६ ! | रसपुष्पाद्य मलहर का गुण ११४

[ १७ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ सिक्थ तेल की निर्माण विधि ११४ | पर्पटी सेवन में अन्य प्रकार से पथ्य १३३ सिक्थ तेल की दूसरी निर्माण विधि ११५ | पर्पटी सेवन में अपथ्य १३४ सिक्थ तेल का प्रयोग ११५ | रससिन्दूर का निर्माण प्रकार १३५ रस कर्पूर की निर्माण विधि ११५ | रससिन्दूर का अन्य निर्माण १३६ रस कर्पूर का गुण ११७ | तलस्थ रससिन्दूर का निर्माण १३७ रस कर्पूर की मात्रा (साधारण) ११८ | अर्ध गन्धक जीर्ण रससिन्दूर १३८ अन्तःप्रयोग की मात्रा ११८ | समान गन्धक जीर्ण रससिन्दूर १३८ अन्तप्रयोग में चूर्णरूपी मात्रा ११८ | द्विगुण गन्धक जीर्ण रससिन्दूर १३६ रस कर्पूर का आमयिक प्रयोग ११६ | त्रिगुणादि गन्धक जीर्ण रससिन्दूर १३६ रस कर्पूर गुटिका ११६ | षड्गुण गन्धक जीर्ण रससिन्दूर १४० बाह्य प्रयोग के लिए भूतघ्न चक्रिका १२० | रससिन्दूर का गुण १४० निम्बूकाम्ल का निर्माण प्रकार १२१ | सहपान का लक्षण १४२ रसकर्पूर द्रव का निर्माण प्रकार १२२ | अनुपान का लक्षण १४३ रसकर्पूर द्रव की दूसरी विधि १२२ | रससिन्दूर का आमयिक प्रयोग १४३ रसकर्पूर द्रव का गुण १२३ | रससिन्दूर की मात्रा १४८ रसकर्पूर द्रव का प्रयोग १२४ | मकरध्वज का निर्माण १४६ कज्जली का स्वरूप १२४ | श्री सिद्ध मकरध्वज १५१ कज्जली का प्रयोगों में विधान १२४ | मकरध्वज का गुण १५२ कज्जली का गुण १२६ | सर्वाङ्ग सुन्दर रस १५२ कज्जली का आमयिक प्रयोग १२६ | सर्वाङ्ग सुन्दररस का गुण १५३ कज्जलिकोदय मलहर १२६ | सप्तम तरङ्ग रसपर्पटीका निर्माण १२६ | पारद का सामान्य मारण १५३ रसपर्पटिका का त्रिविध पाक १३० | मृत पारद का लक्षण १५४ रसपर्पटिकाके त्रिविधपाकका ल० १३० | पारदमारण का प्रथम प्रकार १५४ रसपर्पटिका का गुण १३१ | वह्नि मृत्स्ना लक्षण १५५ रसपर्पटिका की मात्रा १३१ | पारद मारक गण १५५ रसपर्पाटिका का आमयिक प्रयोग १३१ | पारदमारण का द्वितीय प्रकार १५७ पर्पटी सेवन में जल का निषेध १३३ | पारदमारण का तृतीय प्रकार १५७ पर्पटी सेवन में पथ्य १३३ | पारदमारण का चतुर्थ प्रकार १५७

[ १८ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ पारदमारण का पञ्चम प्रकार १५८ | शुद्ध गन्धक का गुण १८१ पारदमारण का षष्ठ प्रकार १५६ | शुद्ध गन्धक की मात्रा १८२ पारदमारण का सप्तम प्रकार १५६ | शुद्ध गन्धक का आमयिक प्रयोग १८२ मृत पारद का गुण १६० | दद्रु विद्रावण मलहर १८६ मृत पारद का आमयिक प्रयोग १६१ | गन्धकाद्य मलहर १८६ रसायन में पारद सेवन की विधि १६६ | पहला गन्धक कल्प १८७ क्षेत्रीकरण स्वरूप १६७ | दूसरा गन्धक कल्प १८७ क्षेत्रीकरण क्रिया १६७ | तीसरा ,, ,, १८८ रसायनोचित रस १६८ | चौथा ,, ,, १८८ रस भक्षण काल १६६ | पाँचवाँ ,, ,, १८८ मात्रा का भेद १६६ | छठाँ ,, ,, १८६ रसायन सेवन में अपथ्य १६६ | सातवाँ ,, ,, १८६ रस सेवन में पथ्य १७० | आठवाँ ,, ,, १६० रस सेवन में अपथ्य १७० | नवाँ ,, ,, १६१ रस विकार में उपचार १७० | दशवाँ ,, ,, १६१ अशुद्धरस भक्षण में गन्धकविधान १७३ | गन्धक तैल निर्माण १६१ कूष्माण्डादि गण १७३ | गन्धक तैल का २ रा निर्माण १६२ अष्टम तरङ्ग | गन्धक तैल का ३ रा निर्माण १६२ गन्धक नाम १७४ | गन्धक तैल का चौथा निर्माण १६३ गन्धक स्वरूप १७५ | गन्धक सेवन में अपथ्य १६४ अशुद्ध गन्धक दोष निरूपण १७५ | गन्धक द्रावक निर्माण १६४ गन्धक शोधन का प्रथम प्रकार १७६ | गन्धक द्राव नाम १६५ गन्धक शोधन का द्वितीय प्रकार १७७ | अशुद्ध गन्धक द्राव के दोष १६६ गन्धक शोधन का तृतीय प्रकार १७८ | गन्धक शोधन प्रकार १६६ गन्धक शोधन का चतुर्थ प्रकार १७८ | सजल गन्धक द्राव १६६ गन्धक शोधन का पञ्चम प्रकार १७६ | सजल गन्धक द्राव की मात्रा १६७ गन्धक शोधन का षष्ठ प्रकार १७६ | सजल गन्धक द्राव का सहपान १६७ सुधा लवण १८० | गन्धक द्राव का गुण १६७ गन्धक की गन्ध दूर करने का | नवम तरङ्ग उपाय १८० | हिङ्गुल नाम १६८

[ १६ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ हिङ्गुल का स्वरूप १६६ मण्डूकाभ्रक का लक्षण २२३ हिङ्गुल के दो भेद १६६ मण्डूकाभ्रक का दोष ,, कृत्रिम हिङ्गुल निर्माण १६६ वज्राभ्रक का लक्षण ,, अशुद्ध हिङ्गुल का दोष २०० वज्राभ्रक का दोष ,, हिङ्गुल शोधन का १ ला प्रकार २०१ जात्याभ्रक का स्वरूप :” ,, द्वितीय प्रकार ,, देश भेद से अभ्रक में विशिष्टता २२४ ,, तृतीय प्रकार ,, अभ्रक खनने की विधि ,, ,, चौथा प्रकार २०२ अशुद्ध अभ्रक का दोष ०” शोधित हिङ्गुल का गुण ,, अभ्रक शोधन का प्रथम प्रकार २२५ शुद्ध हिङ्गुल का प्रयोग २०३ अभ्रक शोधन का द्वितीय प्रकार ,, हिङ्गुलाद्य मलहर ,, अभ्रक शोधन का तृतीय प्रकार ,, हिङ्गुलामृतमलहर २०४ अभ्रक शोधन का चतुर्थ प्रकार २२६ हिङ्गुलीय रससिन्दूर निर्माण ,, धान्याभ्रक का स्वरूप ,, हिङ्गुलीय रससिन्दूर का गुण ,, धान्याभ्रक निर्माण ,, श्री सिद्ध दरदामृत २०५ अभ्रक मारण में पुट संख्या २२७ श्री सिद्ध दरदामृत का गुण २०६ अभ्रक मारण का प्रथम प्रकार ,, श्री सिद्ध दरदामृत की मात्रा २०७ अभ्रक मारण का द्वितीय प्रकार ,, हिङ्गुलीय माणिक्य रस ,, अभ्रक मारण का तृतीय प्रकार २२८ हिङ्गुलीय माणिक्यरस का गुण २०८ अभ्रक मारण का चतुर्थ प्रकार ,, हिङ्गुलीय माणिक्यरस की मात्रा ,, अभ्रक मारण का पंचम प्रकार ,, श्री सिद्ध हिंगुलेश्वर ,, अभ्रक मारण का षष्ठ प्रकार २२६ चपल का निर्णय २०६ अभ्रक मारण का सप्तम प्रकार ,, अभ्रक मारण का अष्टम प्रकार २३० दशम तरङ्ग अभ्रक मारण का नवम प्रकार ,, अभ्रक नाम २२१ मृताभ्रक लक्षण २३१ अभ्रक के चार भेद ,, अभ्रक का मारक गण ,, काले अभ्रक का भेद २२२ अभ्रक भस्म का लोहीतीकरण २३२ काले अभ्रक का दोष ,, अभ्रक भस्म का अमृतीकरण २३३ नागाभ्रक का लक्षण ,, अभ्रकभस्म के अमृतीकरणका नागाभ्रक का दोष ,, द्वितीय प्रकार

[ २० ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ अभ्रकभस्म का तृतीय प्रकार २३३ | तालक शोधन की पञ्चम विधि २४८ मृत अभ्रक का गुण २३४ | तालक मारण का प्रथम प्रकार २४८ मृत अभ्रक का आमयिक प्रयोग २३५ | तालक मारण का द्वितीय प्रकार २४६ सत्त्वों की विशेषता २३७ | तालक मारण का तृतीय प्रकार २४६ अभ्रक सत्त्व पातन की प्रथम विधि ,, | तालक मारण का चतुर्थ प्रकार २५० अभ्रक सत्त्व पातनकी द्वितीय विधि ,, | तालक मारण का पञ्चम प्रकार २५० अभ्रक सत्त्व पातन की तृतीय विधि २३८ | तालक मारण का षष्ठ प्रकार २५१ अभ्रक सत्त्व पातन की चतुर्थ विधि २३६ | मृत तालक का गुण २५२ अभ्रक सत्त्व का पिण्डीकरण ,, | शुद्ध तालक का गुण २५२ अभ्रक सत्त्व का सामान्य शोधन ,, | हरिताल की मात्रा २५३ अभ्रक सत्त्व का विशेष शोधन २४० | मृत तालक की परीक्षा २५३ अभ्रक सत्त्व का मारण ,, | मृत तालक का आमयिक प्रयोग २५४ अभ्रक सत्त्व का द्वितीय मारण ,, | तालकोदय मलहर २५६ अभ्रक सत्त्व का गुण २४१ | रसमाणिक्य २५७ अभ्रक सत्त्व के सेवन में वर्ज्य वस्तु २४२ | द्वितीय रसमाणिक्य २५८ अभ्रक का प्रथम कल्प ,, | तालक सत्त्वपातन प्रकार २५६ अभ्रक का द्वितीय कल्प २४३ | द्वितीय तालक सत्त्वपातन प्रकार २६० एकादश तरङ्ग | तालक के विकार में उपचार २६० हरताल का नाम २४४ | मैनसिल का नाम २६० तालक के दो भेद ,, | मैनसिल का स्वरूप २६१ पत्र ताल का स्वरूप ,, | अशुद्ध मैनसिल का दोष २६१ पिण्ड ताल का स्वरूप ,, | मैनसिल का शोधन २६१ पत्र, पिण्ड, ताल में विशेषता २४५ | मैनसिल का दूसरा शोधन २६२ कृत्रिम ताल निर्माण ,, | मैनसिल का तीसरा शोधन २६२ अशुद्ध ताल का दोष २४६ | मैनसिल का चौथा शोधन २६२ तालक शोधन की प्रथम विधि ,, | मैनसिल का पाचवाँ शोधन २६२ तालक शोधन की द्वितीय विधि २४७ | मैनसिल का छठवाँ शोधन २६२ तालक शोधन की तृतीय विधि ,, | मैनसिल का गुण २६३ तालक शोधन की चतुर्थ विधि ,, | विशुद्ध मैनसिल की मात्रा २६३

[ २१ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ मैनसिल का आमयिक प्रयोग २६३ | चूर्णोदक का निर्माण २८० मैनसिल के उपद्रव में उपचार २६४ | चूर्णोदक का गुण २८० मैनसिल का निर्माण प्रकार २६५ | चूर्णोदक की मात्रा २८१ मैनसिल का सत्वपातन २६५ | चूर्णोदक का आमयिक प्रयोग २८१ शङ्ख विष का नाम २६५ | दुग्ध पाषाण का गुण २८२ शंख विष (संखिया) के दो भेद २६६ | दुग्ध पाषाण का नाम २८२ शंखविष का शोधन २६६ | दुग्धपाषाण का आमयिक प्रयोग २८२ शंखविष का द्वितीय शोधन २६७ | गोदन्त का नाम २८३ शंखविष का तृतीय शोधन २६७ | गोदन्त का स्वरूप २८४ शंखविष का चतुर्थ शोधन २६७ | गोदन्त का शोधन २८४ विशुद्ध संखिया का गुण २६७ | गोदन्त का मारण २८४ शंख विष की मात्रा २६८ | गोदन्त का गुण २८४ शंखविष की मात्रा में दूसरा मत २६६ | गोदन्त की मात्रा २८४ शंखविष की मात्रा का निर्माण २६६ | द्वादश तरङ्ग मात्रा निर्माण में सावधानी २६६ | शंख का नाम २८५ शंखविष का आमयिक प्रयोग २७० | शंख का स्वरूप २८५ शंख विषोदय रस २७१ | शंख का भेद २८५ चण्डेश्वर रस २७२ | शंख का शोधन २८५ मङ्गलमारण विधि २७३ | द्वितीय शंख शोधन २८६ फिटकिरी का नाम २७४ | तृतीय शंख शोधन ,, फिटकिरी का परिचय २७४ | चतुर्थ शंख शोधन ,, फिटकिरी का गुण २७४ | पंचम शंख शोधन ,, फिटकिरी का आमयिक प्रयोग २७५ | त्रिरेख वर्तिका ,, खरिया मिट्टी का नाम २७८ | अर्जुनहर शंख चूर्ण २८७ खरिया मिट्टी के दो भेद २७८ | शंखवर्ति ,, खरिया मिट्टी का शोधन २७६ | शंख मारण ,, खरिया मिट्टी का गुण २७६ | मृत शंख का गुण २८८ खरिया मिट्टी का आमयिक प्रयोग २७६ | शंख भस्म का आमयिक प्रयोग ,, चूना का नाम २८० | शंख कल्प २८६

[ २२ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ शंख द्राव २६० | अपर प्रकार ३०१ शंखद्राव का गुण २६१ | गुण और मात्रा ,, द्वितीय शंख द्राव २६२ | वराटिका का आमयिक प्रयोग ३०२ द्वितीय शंख द्राव का गुण ,, | शृङ्ग का नाम ,, तृतीय शंख द्राव २६३ | ग्राह्य शृङ्ग का स्वरूप ३०३ चतुर्थ सजल शंख द्राव ,, | शृङ्ग का मारण ,, चतुर्थ सजल शंख द्राव की मात्रा २६४ | शृंगभस्म का आमयिक प्रयोग ,, क्षुद्र शंख ( घोंघा ) का नाम ,, | समुद्रफेन का नाम ३०४ क्षुद्र शंख का शोधन ,, | समुद्रफेन का शोधन ,, क्षुद्र शंख का मारण ,, | समुद्रफेन के गुण और मात्रा ३०५ क्षुद्र शंख का गुण ,, | समुद्रफेन का आमयिक प्रयोग ,, क्षुद्र शंख का आमयिक प्रयोग २६५ | समुद्र फेन की उत्पत्ति ३०६ शुक्ति का नाम २६५ | त्रयोदशतरङ्ग शुक्ति का शोधन ,, | यवक्षार का नाम ३०७ शुक्ति का द्वितीय शोधन २६६ | यवक्षार का निर्माण ,, शुक्ति का मारण ,, | यवक्षार का गुण ३०८ शुक्ति भस्म की मात्रा ,, | यवक्षार की मात्रा ,, शुक्ति भस्म का आमयिक प्रयोग २६७ | यवक्षार का आमयिक प्रयोग ,, जल शुक्ति का नाम २६८ | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का नाम ३११ जल शुक्ति का शोधन मारण ,, | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का निर्माण ३१२ जल शुक्ति का गुण ,, | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का गुण ,, वराट का नाम २६६ | निम्बूकाम्लीय यवक्षार की मात्रा ३१३ वराट के भेद ,, | निम्बूकाम्लीय यवक्षार का आमयिक प्रयोग ,, ग्राह्य वराटिका स्वरूप ,, | सज्जीखार का नाम ,, वराटिका शोधन ३०० | सज्जीखार का निर्माण ,, द्वितीय शोधन ,, | सज्जीखार का गुण ३१४ तृतीय शोधन ,, | सज्जीखार की मात्रा ,, चतुर्थ शोधन ,, वराटिका मारण ,,

[ २३ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ सज्जीखार का आमयिक प्रयोग ३१४ | नवसादर की मात्रा ३३० निम्बूकाम्लीय सज्जी का निर्माण ३१५ | नवसादर सत्व प्रयोग विधि ,, निम्बूकाम्लीय सज्जीखार का गुण ३१६ | सोरक नाम ,, निम्बूकाम्लीय सज्जीखार की | सोरक गुण ३३१ मात्रा ३१६ | सोरक निर्मलीकरण ,, निम्बूकाम्लीय का आमयिकप्रयोग ३१७ | सोरक की निर्माण विधि ३३२ टंकण का नाम ३१८ | सोरक शोधन ,, टंकण निर्मलीकरण ,, | शुद्ध सोरक गुण ३३३ टंकण शोधन ,, | सोरक की मात्रा ,, टंकण का गुण ३१६ | सोरक का आमयिक प्रयोग ,, टंकण का आमयिक प्रयोग ,, | सोरक द्राव का नाम ३३५ टंकणामृत मलहर ३२१ | सोरक द्राव का निर्माण ,, टंकणाम्ल का नाम ३२२ | मजलसोरक द्राव का निर्माण ,, टंकणाम्ल का निर्माण ,, | सोरक द्राव का गुण ३३६ टंकणाम्ल का गुण ३२३ | सजल सोरक द्राव का गुण ,, टंकणाम्ल की मात्रा ,, | सजलसोरक द्राव की मात्रा ३३७ टंकणाम्ल का आमयिक प्रयोग ,, | क्षार का सामान्य निर्माण ,, टंकणाम्ल मलहर ३२४ | सामान्यतः क्षार का गुण ३३८ टंकणाम्ल का गुण ,, | सामान्यतः क्षार की मात्रा ,, टंकणाम्लद्रव का निर्माण ,, | अपामार्ग क्षार का नाम ३३६ टंकणाम्ल द्रवका आमयिक प्रयोग ,, | अपामार्ग क्षार का गुण ,, चतुर्दश तरङ्ग | अपामार्ग क्षार का आमयिक नवसादर का नाम ३२५ | प्रयोग ३३६ नवसादर का शोधन ३२६ | अर्क क्षार का नाम ३४० नवसादर का गुण ,, | अर्क क्षार का गुण ,, नवसादर की मात्रा ३२७ | अर्कक्षार का आमयिक प्रयोग ३४१ नवसादर का आमयिक प्रयोग ,, | तिल क्षार का नाम ,, नवसादर का सत्वपातन ३२६ | तिल क्षार का गुण ,, नवसादर का गुण ,, | तिल क्षार का आमयिक प्रयोग ३४२

[ २४ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ स्नुही क्षार का नाम ३४३ | सौवर्चल लवण का गुण ३५४ स्नुही क्षार का गुण ,, | सौवर्चल लवण का निर्माण ३५५ स्नुही क्षार का आमयिक प्रयोग ,, | रोमक लवण का नाम ३५५ पलास क्षार का नाम ३४४ | रोमक लवण का उत्पत्ति स्थान ३५५ पलास क्षार का गुण ,, | रोमक लवण का गुण ३५६ पलास क्षार का आमयिक प्रयोग ३४५ | लवण द्राव का नाम ३५६ चिञ्चा क्षार का नाम ,, | लवण द्राव का निर्माण ३५६ चिञ्चा क्षार का गुण ३४६ | सजल लवण द्राव का निर्माण ३५७ चिञ्चा क्षार का आमयिक प्रयोग ,, | सजल लवण द्राव का गुण ३५८ सैन्धव का नाम ३४७ | सजल लवण द्राव की मात्रा ३५८ सैन्धव का गुण ,, | सजल लवण द्राव का आमयिक सैन्धव का उत्पत्ति स्थान ३४८ | प्रयोग ३५६ सैन्धव का आमयिक प्रयोग ,, | पञ्चदश तरंग नारिकेल लवण ,, | धातुओं की संख्या ३६१ नारिकेल लवण का गुण ३४६ | सब धातुओं का सामान्य नारिकेल लवण का आमयिक | शोधन ३६२ प्रयोग ३५० | द्वितीय शोधन ३६३ अर्क लवण ३५० | धातुओं का सामान्य मारण ३६३ अर्क लवण का गुण ,, | सुवर्ण का नाम ३६३ अर्क लवण का आमयिक | ग्राह्य सुवर्ण का स्वरूप ३६३ प्रयोग ,, | ग्राह्य सुवर्ण का २ रा लक्षण ३६४ सामुद्र लवण का नाम ३५१ | अग्राह्य सुवर्ण का स्वरूप ,, सामुद्र लवण का गुण ,, | सुवर्ण शुद्धि का प्रयोजन ३६५ सामुद्र लवण का परिचय ,, | सुवर्ण का प्रथम शोधन ,, विड् लवण का नाम ३५२ | सुवर्ण द्वितीय शोधन प्रकार ,, विड् लवण का गुण ,, | सुवर्ण तृतीय शोधन ३६६ विड् लवण का १ ला निर्माण ,, | शुद्ध सुवर्ण प्रयोग ३६७ विड् लवण २ रा निर्माण ३५४ | घिसे हुए शुद्ध सुवर्ण का गुण ३६७ सौवर्चल लवण का नाम ,, | सुवर्ण पन्नी का नाम ३६७

[ २५ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ सुवर्ण पन्नी का गुण ३६८ | तृतीय मारण ३६० सुवर्ण पन्नी की प्रयोग विधि ३६८ | चतुर्थ मारण ३६१ सुवर्ण लवण का नाम ३६८ | पञ्चम मारण ३६१ सुवर्ण लवण का निर्माण ३६६ | छठा मारण ३६२ सुवर्ण लवण का गुण ३७० | सातवाँ मारण ३६३ सुवर्ण लवण की मात्रा ३७० | रजत भस्म गुण ३६४ सुवर्ण लवण का प्रयोग क्रम ३७० | विशिष्ट गुण ३६५ सुवर्ण लवण का प्रथम मारण ३७१ | रजत भस्म की मात्रा ३६६ सुवर्ण लवण का द्वितीय मारण ३७२ | रजत भस्म का आमयिक प्रयोग ३६६ सुवर्ण लवण का तृतीय मारण ३७३ | सोरकाम्लीय रजत का निर्माण ३६६ सुवर्ण लवण का चतुर्थ मारण ३७४ | नवसादर बाष्पद्रव निर्माण ४०२ सुवर्ण लवण का पञ्चम मारण ३७४ | नवसादर बाष्पद्रव का गुण ४०३ मृत सुवर्ण का गुण ३७५ | नवसादर बाष्पद्रव का आमयिक मृत सुवर्ण का विशेष गुण ३७६ | प्रयोग ४०४ सुवर्ण भस्म की मात्रा ३७६ | सोरकाम्लीय रजत का गुण ४०५ सुवर्ण भस्म का आमयिक प्रयोग ३७६ | सोरकाम्लीय रजत द्रव का निर्माण ४०६ षोडश तरङ्ग | आमयिक प्रयोग ४०६ रजत का नाम ३८५ | द्वितीय सोरकाम्लीय रजत द्रव ४०७ ग्राह्य रजत का स्वरूप ३८५ | प्रयोग विधि ४०७ त्याज्य रजत का स्वरूप ३८६ | तृतीय सोरकाम्लीय रजतद्रव ४०७ रजत शोधन का फल ३८६ | प्रयोग विधि ४०८ रजत शोधन का प्रथम प्रकार ३८७ | सप्तदश तरङ्ग रजत शोधन द्वितीय विधि ३८७ | ताम्र का नाम ४०८ रजत का तृतीय शोधन ३८८ | ग्राह्य ताम्र स्वरूप ४०८ रजत पन्ना का नाम ३८८ | त्याज्य ताम्र स्वरूप ४०६ रजत पन्नी का गुण ३८८ | ताम्र के दो भेद ,, रजत पन्नी का प्रयोग ३८६ | नेपाल ताम्र का लक्षण ४१० रजत मारण ३८६ | म्लेच्छ ताम्र का लक्षण ,, द्वितीय मारण ३६० | ताम्र शोधन का फल ,,

[ २६ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ ताम्र शोधन ४११ | भूनाग सत्व का आमयिक प्रयोग ४३४ द्वितीयताम्र शोधन ,, | मयूर पिच्छ का सत्व पातन ,, तृतीय शोधन ४१२ | अष्टादश तरङ्ग चतुर्थ शोधन ,, | वङ्ग (रांगा) का नाम ४३५ पञ्चम शोधन ,, | वङ्ग के दो भेद ,, छठा शोधन ,, | खुरक का लक्षण ,, ताम्र मारण ४१३ | मिश्रक का लक्षण ४३६ द्वितीय ताम्र मारण ,, | ग्राह्य और हेय वङ्गका स्वरूप ,, तृतीय मारण ४१४ | वङ्ग शोधन का फल ,, चतुर्थ मारण ,, | वङ्ग शोधन ४३७ पञ्चम मारण ४१५ | द्वितीय वङ्ग शोधन ,, छठा मारण ४१६ | तृतीय शोधन ४३८ अमृतीकरण का फल ,, | चतुर्थ शोधन ,, ताम्र के आठ दोष ४१७ | वङ्ग मारण ,, अमृतीकरण ,, | द्वितीय वङ्ग मारण ४३६ द्वितीय अमृतीकरण ४१८ | तृतीय वंग मारण ४४० तृतीय अमृतीकरण ४१६ | चतुर्थ वंग मारण ४४१ ताम्रभस्म का गुण ,, | क्षार शून्य की परीक्षा ४४२ विशेष गुण ४२२ | पञ्चम मारण ,, ताम्र भस्म की मात्रा ,, | वंग भस्म का गुण ४४३ ताम्र भस्म का आमयिक प्रयोग ,, | विशेष गुण ४४४ रविताण्डव रस ४२६ | वंग भस्म के शीत उष्ण होने हृदयार्णव रस ४३० | में हेतु ४४५ त्र्यम्बकेश्वर रस ,, | वंग भस्म की मात्रा ,, सूर्यावर्त रस ४३१ | वंग भस्म का आमयिक प्रयोग ४४६ शूलेभकेशरी रस ४३२ | स्वर्ण वंग का मारण ४४८ भूनाग सत्व पातन ४३३ | द्वितीय मारण प्रकार ४५१ भूनाग सत्व मारण ४३३ | स्वर्ण वङ्ग का गुण ,, भूनाग सत्व का गुण ४३४ | स्वर्ण वंग की मात्रा ४५२

[ २७ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ स्वर्णवङ्ग का आमयिक प्रयोग ४५२ | सजलारनालीयक का आमयिक सुवर्णवङ्गपञ्चक रसायन ४५४ | प्रयोग ४७२ एकोनविंशस्तरंगः | सजलारनालीयक के प्रयोग का सीसे का नाम ४५५ | निषेध ४७३ ग्राह्य सीसा का रूप ४५६ | सजलारनालीयक विकार हेय सीसा ४५७ | उपचार ४७३ सीसा शोधन फल ,, | यशद का नाम ,, प्रथम सीसा शोधन ,, | ग्राह्य यशद का स्वरूप ४७४ द्वितीय शोधन ४५८ | हेय यशद का स्वरूप ,, सीसा मारण ,, | यशद शोधन का प्रयोजन ,, द्वितीय सीसा मारण ४६० | यशद का शोधन ४७५ तृतीय मारण ,, | यशद का द्वितीय शोधन ,, चतुर्थ मारण ४६१ | तृतीय शोधन ,, पञ्चम मारण प्रकार ४६२ | चतुर्थ शोधन ४७६ छठा मारण ४६३ | यशद का मारण ,, सप्तम मारण ,, | द्वितीय मारण ४७७ सीसा भस्म का गुण ४६४ | तृतीय मारण ,, सीसा भस्म की मात्रा ४६६ | चतुर्थ मारण ४७८ सीसा भस्म का आमयिक प्रयोग ,, | सुमृत यशद का गुण ४७६ आन्त्रशोपांतकरस ४६७ | यशद का विशेष गुण ,, आन्त्रशोपान्तक रस का गुण ४६८ | यशद भस्म की मात्रा ४८० आरनालीय सीसा का नाम ४६६ | यशद भस्म का आमयिक प्रयोग ,, आरनालीय सीसा का निर्माण ४६६ | यशदामृत मलहर ४८३ आरनालीय सीसा द्रव निर्माण ४७० | यशदामृत मलहर का गुण ,, तीव्रकाञ्जिकाऽम्ल का निर्माण ४७१ | गन्धकाम्लीय यशद निर्माण ४८४ सजलारनालीयक सीसा द्रव का | गन्धकाम्लाय यशद का गुण ,, निर्माण ,, | गन्धकाम्लीय यशद द्रव का सजलारनालीयक सीसा द्रव का | निर्माण ४८५ प्रकार क्रम ४७२ | गन्धकाम्लीय यशद द्रवका गुण ४८५

[ २८ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ गन्धकाम्लीय यशद का आमयिक | भानुपाक विधान ४१६ प्रयोग ४८६ | स्थाली पाक लक्षण ४६७ द्वितीय गन्धकाम्लीय यशद द्रव का | स्थाली पाक विधान ,, निर्माण ४८६ | पुट पाक लक्षण ४६८ गन्धकाम्लीय यशद द्रव और गुण ४८६ | पुटपाक विधान ,, गन्धकाम्लीय यशद द्रव प्रयोग | पुटपाक में द्रव्य मान ५०० विधि ४८६ | लोह मारक गण ,, यशदामृत द्रव निर्माण ४८७ | वातहर गण ५०१ यशदामृत द्रव का गुण ,, | पित्तनाशक गण ,, आमयिक प्रयोग ,, | कफ नाशक गण ,, विंशस्तरङ्गः | लोह मारक गण में विशेषता ५०२ लोह का भेद ,, | लोह मारण का अन्य प्रकार ,, मुण्ड लोह का नाम ४८८ | लोह मारण का तृतीय प्रकार ५०३ तीक्ष्ण लोह का नाम ,, | चतुर्थ मारण ५०४ कान्त लोह का नाम ,, | पञ्चम मारण ,, मुण्ड लोहों का परिचय ,, | छठा मारण ५०५ मारणयोग्य लोह ४८६ | सातवाँ मारण ५०६ ग्राह्यतीक्ष्ण लोह ४६१ | लोह निरुत्थीकरण ,, कान्त लोह लक्षण ,, | निरुत्थ लोह की परीक्षा ५०७ लोह शोधन प्रयोजन ४६३ | लौह भस्म का गुण ,, शोधन में उचित लौह ,, | विशेष गुण ५११ शोधन लौह का मान ४६४ | लोह की मात्रा ,, लौह शोधन ,, | लोहभस्म का आमयिक प्रयोग ५१३ जल क्वाथ का मान ,, | प्रदरान्तक लोह ५१५ द्वितीय शोधन ४६५ | मंडूर का स्वरूप ,, तृतीय शोधन ,, | मंडूर का नाम ५१६ चतुर्थ शोधन ४६६ | श्रेष्ठ मंडूर ,, शुद्धि बाद पाकक्रम ,, | मंडूर शोधन ,, भानुपाक लक्षण ,, | अन्य शोधन विधि ५१७

[ २६ ] विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ मण्डूर मारण ५१७ | शोधन का फल ५३१ मण्डूर भस्म का गुण ५१७ | प्रथम शोधन ५३१ मण्डूर भस्म की मात्रा ५१८ | द्वितीय शोधन ५३२ मण्डूर भस्म का आमयिक प्रयोग ५१८ | तृतीय शोधन ५३२ | मारण ५३२ एकविंशतरंग | सामान्य मारण ५३३ सुवर्ण माक्षिक का नाम ५१६ | गुणादि निरूपण ५३३. ग्राह्य सुवर्णमाक्षिक ५२० | सत्व पातन ५३३ हेय सुवर्णमाक्षिक ५२० | तूतिये का नाम ५३३ स्वर्णमाक्षिक शोधन ५२० | ग्राह्य तूतिया ५३४ प्रथम शोधन ५२१ | शोधन ५३४ द्वितीय शोधन ५२१ | शुद्ध तूतिया का गुण ५३४ तृतीय शोधन ५२२ | तुत्थ द्रव का निर्माण ५३५ चतुर्थ शोधन ५२२ | आमयिक प्रयोग ५३५ प्रथम मारण ५२३ | तुत्थोदया वटी ५३६ द्वितीय मारण ५२३ | तुत्थकोदया वर्ति ५३६ तृतीय मारण ४२४ | तुत्थकादि वर्ति ५३७ स्वर्णमाक्षिक भस्म का गुण ५२४ | शिखिग्रीवादि वर्ति ५३७ स्वर्णमाक्षिक भस्म की मात्रा ५२५ | तुत्थामृत मलहर ५३८ आमयिक प्रयोग ५२६ | तुत्थकाद्य मलहर ५३६ स्वर्णमाक्षिक सत्व पातन ५२८ | शुद्ध तूतिया का प्रयोग ५३६ द्वितीय विधि ५२८ | अन्तः प्रयोगार्थ शोधन ५४० तृतीय विधि ५२८ | द्वितीय शोधन ५४० स्वर्ण माक्षिक सत्व मारण ५२६ | तृतीय शोधन ५४० स्वर्ण माक्षिक सत्व का गुण ५२६ | चतुर्थ शोधन ५४१ आमयिक प्रयोग ५२६ | तुत्थामृत वटी ५४१ रजत माक्षिक नाम ५३० | तुत्थक मारण ५४२ श्रेष्ठ रजत माक्षिकलक्षण ५३० | द्वितीय मारण ५४२ हेय रजतमाक्षिक लक्षण ५३१ | तृतीय मारण ५४३

[ ३० ] विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ तुत्थभस्म का गुण | ५४३ | द्वितीय मारण | ५५६ तुत्थभस्म की मात्रा | ५४३ | खर्पर भस्म का गुण | ,, आमयिक प्रयोग | ५४४ | खर्पर भस्म की मात्रा | ५५७ तुत्थसत्त्व पातन | ५४५ | आमयिक प्रयोग | ,, द्वितीय सत्त्व पातन | ५४५ | सत्त्व पातन | ५५८ तृतीय सत्त्व पातन | ५४६ | द्वितीय सत्त्व पातन | ५५६ तुत्थसत्त्वका मारण गुण और फल | ५४६ | खर्पर सत्त्व मारण | ,, नकली तुत्थ निर्माण | ५४६ | खर्पर सत्त्व भस्म गुण | ,, सिन्दूर का नाम | ५४६ | खर्पर भस्म की मात्रा | ५६० श्रेष्ठ सिन्दूर | ५४७ | कान्तपाषाण नाम | ,, सिन्दूर का गुण | ५४८ | कान्तपाषाण शोधन | ,, सिन्दूर का आमयिक प्रयोग | ५४८ | द्वितीय शोधन | ५६१ सिन्दूराद्य मलहर | ५४८ | कान्तपाषाण मारण | ,, द्वितीय सिन्दूराद्य मलहर | ५४६ | कान्तपाषाण भस्म गुण | ,, सिन्दूराद्य तैल | ५४६ | कान्तपाषाण भस्म की मात्रा | ५६२ मुर्दा शंख का नाम | ५५० | कान्तपाषाण भस्म का आमयिक | मुर्दा शंख का स्वरूप | ५५१ | प्रयोग | ५६२ मुर्दा शंख का शोधन | ५५१ | काशीस का नाम | ,, मुर्दा शंख का गुण | ५५१ | काशीस के दो भेद | ५६३ शुद्ध आमयिक प्रयोग | ५५२ | काशीस का स्वरूप | ,, मृद्दारशृङ्गाद्य मलहर | ५५२ | काशीस का शोधन | ५६४ द्वितीय मृद्दारशृङ्गाद्य मलहर | ५५३ | काशीस का गुण | ,, खर्पर नाम | ५५३ | काशीस का निर्माण | ,, खपर का लक्षण | ५५३ | काशीस द्रव निर्माण | ५६५ खर्पर के दो भेद | ५५४ | काशीस की मात्रा | ५६६ खर्पर का शोधन | ५५५ | काशीस का आमयिक प्रयोग | ,, द्वितीय शोधन | ५५५ | काशीस मारण | ५६८ तृतीय शोधन | ५५५ | द्वितीय मारण | ५६६ खर्पर मारण | ५५६ | काशीस भस्म का गुण | ,,