रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
94
साहिब बन्दगी
लें। अब इतनी ही मिश्री को भी पीसकर दोनों को मिला लें। यह दवा 5 ग्राम की मात्रा सुबह शाम बासी पानी से लें। इस दवा के कम-से-कम डेढ़ घण्टे बाद ही भोजन करना चाहिए।
अनिद्रा होने पर
□ धनिए की चटनी खाएँ।
खूनी बवासीर होने पर
□ धनिये के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए।
गंज होने पर
□ हरे धनिये का रस गंज वाले स्थान पर लगाएँ।
नारियल द्वारा रोगों का निदान
सिर दर्द होने पर
□ 20 ग्राम नारियल की गिरी में मिश्री मिलाकर सुबह-सुबह ही खाएँ।
बुखार होने पर
□ नारियल का पानी पिएँ।
बालों के गिरने पर
□ नारियल का तेल सिर में लगाएँ।
आग से जल जाने पर
□ नारियल के तेल में चूने का पानी मिलाकर लेप करें।
कील मुँहासे होने पर
□ नारियल का पानी चेहरे पर रोज सुबह-शाम लगाएँ।
टी. बी. होने पर
□ 20 ग्राम कच्चा नारियल रोज खाएँ।
पथरी होने पर
□ नारियल का पानी पिएँ।
रोगों की पहचान
95
लौकी से रोगों का निदान
गुर्दे में दर्द होने पर
- ▣ लौकी का रस निकालकर थोड़ा गर्म करके धीरे-धीरे मालिश करें। फिर लौकी को पीसकर उसका लेप कर दें।
बवासीर होने पर
- ▣ लौकी के पत्तों को पीसकर लेप करें।
बिच्छू के काटने पर
- ▣ लौकी का रस निकालकर पिलाएँ और लौकी को पीसकर काटे स्थान पर लेप कर दें।
पैरों में जलन होने पर
- ▣ लौकी को काटकर पैरों के तलवे पर मलें।
टी. बी होने पर
- ▣ लौकी के गूदे पर स्वादानुसार मिश्री डालकर नित्य खाएँ।
पपीते से रोगों का निदान
नोट : गर्भावस्था में पपीते का सेवन अधिक करने से गर्भ गिर सकता है।
पेट में कीड़े होने पर
- ▣ पपीते के 8 बीज पानी में पीस कर आधा प्याली पानी के साथ हफ्ता-दस दिन लें।
लीवर की खराबी होने पर
- ▣ सुबह मूली के साथ नित्य पपीते का सेवन करें।
कब्ज होने पर
- ▣ सुबह पपीता खाकर ऊपर से दूध पी लें।
७६
साहिब बन्दगी
सेब द्वारा रोगों का निदान
भूख कम लगने पर
☐ खट्टे सेब का रस निकालकर उसमें आटा गूँदे और वो रोटी खाएँ।
अनिद्रा होने पर
☐ सेब का मुरब्बा नित्य खाएँ।
बवासीर के मससे होने पर
☐ खट्टे सेब का रस मससों पर लगाएँ। बहुत लाभकारी है।
पथरी होने पर
☐ नित्य सेब के रस का सुबह-शाम सेवन करें।
ज्वर होने पर
☐ सेब ज्वर को उतारने में सहायक है। अतः ज्वर में इसका सेवन करें।
जामुन द्वारा रोगों का निदान
नोट : जामुन के साथ या एक घण्टे तक दूध पीना ठीक नहीं।
पाचन क्रिया में खराबी होने पर
☐ पेड़ से उतारे गये ताजे जामुन का सेवन करें।
पेट दर्द होने पर
☐ जामुन के रस में सेंधा नमक डालकर पिएँ।
मधुमेह होने पर
☐ हररोज़ जामुन का सेवन करें और जामुन की गुठली का चूर्ण पानी के साथ लें। यह बहुत ही लाभकारी है।
रोगों की पहचान
97
पेट में कीड़े होने पर
- ▣ पेट भरकर जामुन खाएँ।
गला बैठने पर
- ▣ जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर उसमें शहद मिलाकर छोटी-छोटी बेर के बराबर गोलियाँ बना लें। ऐसी 3 गोलियाँ दिन में तीन बार चूसें।
अतिसार होने पर
- ▣ जामुन की तीन पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर छोटी-छोटी बेर के समान गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम यह गोली खाएँ।
बथुए से रोगों का निदान
मूत्र संबंधी रोग होने पर
- ▣ 600 ग्राम बथुए को सवा किलो पानी में उबालें। बाद में पानी को अच्छी तरह से छान लें। फिर इसमें काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर पी लें।
मासिक धर्म में रुकावट होने पर
- ▣ ढाई चम्मच बथुए के बीजों को सवा गिलास पानी में डालकर उबालें। जब पानी लगभग आधा रह जाए तो उसे उतार कर छान लें और पी जाएँ।
जुएँ होने पर
- ▣ बथुए को उबालकर उस पानी से सिर को धोएँ।
पेट दर्द होने पर
- ▣ बथुए का रस पिएँ।
५८
साहिब बन्दगी
फालसे द्वारा रोगों का निदान
सूज़ाक होने पर
☐ फालसे खाएँ।
रक्त की कमी होने पर
☐ फालसे रक्तवर्द्धक हैं, अतः रक्त की कमी में इसका सेवन करें।
हृदय रोग होने पर
☐ एक कप पानी में फालसे मसल कर डालें और उसमें शक्कर मिलाकर पी लें।
श्वेत प्रदर होने पर
☐ फालसे का सेवन करें, लाभकारी है।
मौसमी से रोगों का निदान
टायफायड होने पर
☐ मौसमी का रस न पीकर ऐसे ही खाना ज्यादा हितकर है।
दमा होने पर
☐ मौसमी के रस में जीरा, सोंठ और थोड़ा गर्म पानी मिलाकर पिएँ।
हृदय रोग होने पर
☐ मौसमी का सेवन करें।
जुकाम होने पर
☐ मौसमी के रस को थोड़ा-सा गर्म करके अदरक की 4 बूँदें मिलाकर पिएँ।
अनिद्रा होने पर
☐ मौसमी का रस लगातार सेवन करें।
रोगों की पहचान
99
दूध से रोगों का निदान
दूध अमृत समान है। जिनको दूध अच्छा नहीं लगता, वे अभागे हैं। दूध को गर्म करके खूब फेंटकर झाग बनाकर पीना चाहिए। हो सके तो रात को दूध मत पिएँ। इसका समय शाम 7 बजे से पहले-पहले ही रखें। इसे बिना चीनी मिलाए पीने की आदत डालें। दूध के स्वाभाविक स्वाद को नष्ट मत करें। दूध पीने वाले ताकतवर होते हैं। दूध तमाम रोगों से बचाता है। कब्ज हो, फेफड़े संबंधी रोग हों, आँखों के रोग हों, थकान हो जाए, सूखा रोग हो जाए, दूध का सेवन करें।
सावधानी बरतें
- ❑ दूध के साथ खट्टी वस्तुएँ भूल से भी मत खाएँ। कई भयंकर रोगों की उत्पत्ति हो सकती है।
- ❑ खाँसी, दमा, पेट दर्द आदि में दूध का सेवन मत करें।
अनन्नास से रोगों का निदान
अजीर्ण होने पर
- ❑ अनन्नास की फाँक पर काली मिर्च और नमक डालकर खाएँ।
टॉक्सिल होने पर
- ❑ अनन्नास रोज खाएँ।
फुँसिया होने पर
- ❑ अनन्नास का गूदा लगाएँ।
पाचन शक्ति कमज़ोर होने पर
- ❑ अनन्नास का सेवन खाली पेट करें।
करेले से रोगों का निदान
पथरी होने पर
- ❑ करेले की सब्जी और करेले का रस दोनों का सेवन करें।
100
साहिब बन्दगी
पेट में कीड़े होने पर
☐ करेले का रस पिएँ।
जोड़ों में दर्द होने पर
☐ करेले के पत्तों के रस की मालिश करें।
रक्त दूषित होने पर
☐ रोज करेले के 80 ग्राम रस का सेवन करें।
अजवायन से रोगों का निदान
जोड़ों में दर्द होने पर
☐ अजवायन के तेल की मालिश करें।
हैजा होने पर
☐ रोज पाँच बूँद अजवायन के तेल का सेवन करें।
हृदय में पीड़ा होने पर
☐ अजवायन का सेवन करें।
खाँसी होने पर
☐ अजवायन खाकर ऊपर से थोड़ा गर्म पानी पी लें।
मुँहासे होने पर
☐ 25 ग्राम अजवायन को बारीक पीस लें। अब उसमें इतना ही दही मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर मुँहासों पर लगाएँ। रात को यह काम करें तो अच्छा है। सुबह ठंडे पानी से चेहरा न धोकर गर्म पानी का इस्तेमाल करें।
बाँझपन होने पर
☐ 25 ग्राम अजवायन और 25 ग्राम मिश्री, 100 ग्राम पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। यह काम रात के समय ही करें। फिर सुबह उसे पीसकर पी लें। जैसे ही मासिक धर्म शुरू हो, यह
रोगों की पहचान
101
प्रयोग लगातार 7 दिन तक करें।
खाज, खुजली होने पर
- ▣ अजवायन को गर्म पानी में पीसकर लेप करें।
फ्लू होने पर
- ▣ 10 ग्राम अजवायन को एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा शेष रह जाए तो उतार लें। अब ठंडा होने पर छानकर पी लें।
गुर्दे में दर्द होने पर
- ▣ अजवायन को पीसकर उसमें अच्छी तरह से गुड़ मिलाकर रख लें। दिन में तीन बार एक सामान्य चम्मच यह दवा खाएँ।
गुर्दे में पथरी होने पर
- ▣ रोज 5 ग्राम अजवायन को ऐसे ही फाँक लें।
आम से रोगों का निदान
रक्त की कमी होने पर
- ▣ आम खाकर ऊपर से ठंडा दूध पिएँ।
गुर्दे कमजोर होने पर
- ▣ आम का सेवन गुर्दे को ताकत प्रदान करता है।
दाँत कमजोर होने पर
- ▣ आम के पत्ते चबाएँ।
अनिद्रा होने पर
- ▣ रात के समय आम खाकर ऊपर से ठंडा दूध पी लें।
बवासीर होने पर
- ▣ 20 ग्राम दही, एक चम्मच अदरक के रस को पौन कप मीठे आमरस में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करें।
102
साहिब बन्दगी
पाचन शक्ति कमजोर होने पर
- ▣ 60 ग्राम मीठे आमरस में ढाई ग्राम सॉट का रस मिलाकर सुबह रोज़ पिएँ।
नीम से रोगों का निदान
मलेरिया होने पर
- ▣ 50 ग्राम नीम के पत्तों के साथ 3 काली मिर्च पीसकर पौन गिलास पानी में मिला लें। फिर छानकर यह पानी पी लें। बड़ा लाभदायक है।
चेचक होने पर
- ▣ चेचक के रोगी को नीम की छत्रछाया में रखें। नीम की पत्तियों का रस पिलाएँ, नीम की पत्तियों पर लियाएँ, रात को सोते समय नीम की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लेप कर दें और सुबह धो लें।
बाल झड़ने पर
- ▣ 100 ग्राम नीम की पत्तियों को उबालकर ठंडा कर लें। फिर इस पानी से सिर धो लें। यह प्रयोग लगातार डेढ़ हफ्ते तक करें।
मासिक धर्म में जाँघों में पीड़ा होने पर
- ▣ 10 ग्राम अदरक का रस और 5 ग्राम नीम के पत्तों का रस थोड़े-से पानी में मिलाकर पिलाएँ। बहुत लाभकारी है।
आँख आने पर
- ▣ नीम की पत्तियों के रस का सेवन करें।
हैजा होने पर
- ▣ नीम की 21 पत्तियाँ लेकर पीस लें। फिर इसे आधा गिलास
रोगों की पहचान
103
पानी में मिलाकर रोगी को पिलाएँ।
स्तन पीड़ा होने पर
- ▣ नीम की पत्तियाँ, साँठी के चावल, सफेद जीरा सबको दूध में पकाकर कुछ दिन पिएँ।
साँप के काटने पर
- ▣ नीम के पत्ते खिलाएँ। जब पत्ते कड़वे लगना शुरू हो जाएँ तो समझ लेना चाहिए कि विष उतर गया है।
कील मुँहासे होने पर
- ▣ नीम के बीजों को सिरके में पीसकर लेप करें।
मोतियाबिंद होने पर
- ▣ ताजी निबौली लेकर पत्थर पर घिस लें। रोज़ रात को सुरमँ की तरह आँखों में दो-2 सलाई लगाएँ।
घाव होने पर
- ▣ नीम के हरे पत्तों को पीसकर उनका रस निकाल लें। अब रूई को इस रस में डालकर अच्छी तरह से तर कर लें। फिर एक प्याली में थोड़ा देसी घी डालकर उसमें रूई को डालकर गर्म करने के लिए रखें। अब उतारकर सहने योग्य गर्म रहने पर उस रूई को घाव वाली जगह रखें और पट्टी बाँध दें। नित्य यह पट्टी बदलें।
मूत्राशय या गुर्दे में पथरी होने पर
- ▣ नीम की पत्तियों की राख को फॉक कर डेढ़ चम्मच शीतल जल पी लें। यह काम दिन में 4 बार करें।
सफेद कोढ़ होने पर
- ▣ नीम की पत्तियाँ, फूल, निबौली-सबको पीसकर शरबत के रूप में सेवन करें। लगातार दो महीने यह दवा लें।
104
साहिब बन्दगी
गठिया होने पर
▣ नीम के तेल की मालिश करें।
मासिक धर्म में रुकावट होने पर
▣ 20 ग्राम नीम की छाल, 5-5 ग्राम सोंठ और गुड़ लेकर काढ़ा बनाकर पिएँ। यह लाभकारी है।
उल्टियाँ होने पर
▣ 20 ग्राम नीम के पत्ते पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर अच्छी तरह से छान लें। यह पानी रोगी को दें।
लौंग से रोगों का निदान
एसीडिटी होने पर
▣ चार लौंग, 10 ग्राम आँवला रस और एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार पिएँ।
गैस होने पर
▣ एक कप पानी में तीन लौंग डालकर उबालें और ठण्डा करके पी लें। यह प्रयोग दिन में दो बार करें।
ज्वर होने पर
▣ लौंग को पीसकर फाँक लें और गुनगुना पानी पी लें। दिन में 3-4 बार कर लें।
सिर दर्द होने पर
▣ लौंग को अच्छी तरह पीसकर लेप बना लें। यह लेप सिर दर्द में बड़ा ही लाभकारी है।
अमरूद से रोगों का निदान
पुराना जुकाम होने पर
▣ 2-3 दिन केवल अमरूद का सेवन करें।
रोगों की पहचान
105
पुराने दस्त होने पर
- ▣ अमरूद की नयी पत्तियों को उबालकर उनका पानी पिएँ।
कब्ज होने पर
- ▣ अमरूद खाकर ऊपर से गर्म दूध पी लें।
पेट दर्द होने पर
- ▣ अमरूद की नयी पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर पिएँ।
मुनक्के से रोगों का निदान
टी. बी. होने पर
- ▣ मुनक्के के साथ पीपल और शक्कर पीसकर रोज खाएँ।
चक्कर आने पर
- ▣ 22 ग्राम मुनक्के को घी में सेंक लें। फिर उसपर सेंधा नमक डालकर खाएँ।
भूख न लगने पर
- ▣ मुनक्के में मिर्च-नमक डालकर गर्म करके खाने से लाभ मिलता है।
हल्दी से रोगों का निदान
चेचक होने पर
- ▣ इमली के बीजों का चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का हल्दी के साथ सेवन करें।
स्तन पीड़ा होने पर
- ▣ हल्दी की गाँठ को साफ पत्थर पर पानी के साथ घिसकर स्तनों पर लेप करें।
जुकाम होने पर
- ▣ गर्म दूध में हल्दी डालकर सेवन करें।
106
साहिब बन्दगी
अन्दरूनी चोट लगने पर
❑ ढाई ग्राम हल्दी को पाव-भर दूध में अच्छी तरह से उबालें और उतारकर गुनगुना होने पर पी लें।
दांतों में दर्द होने पर
❑ हल्दी के साथ हींग को थोड़े-से पानी के साथ पीस लें। अब इसकी छोटी-सी गोली बनाकर दुखते हुए दाँत के नीचे रख दें।
घाव या घाव में कीड़े हो जाने पर
❑ हल्दी में थोड़ा-सा तेल डालकर घाव वाली जगह डालें।
जुकाम होने पर
❑ आधा गिलास गर्म दूध में डेढ़ चम्मच (छोटा) हल्दी घोल कर पी लें।
पोदीने से रोगों का निदान
गैस होने पर
❑ 50 ग्राम पोदीना, 7 ग्राम अजवायन, 8 ग्राम अदरक-सबको पौन गिलास (बड़े) पानी में उबालें। फिर इसमें पौन कप दूध और थोड़ी मिश्री या गुड़ मिला लें। यह दवा बहुत लाभकारी है।
रक्त जम जाने पर
❑ पोदीने का रस निकालकर पिएँ। लाभदायक है।
पेट दर्द होने पर
❑ ढाई चम्मच सूखे पोदीने में मिश्री मिलाकर लें। बच्चा है तो डेढ़ चम्मच ही दें।
गाजर से रोगों का निदान
नोट : बुखार होने पर गाजर का रस मत पिएँ।
रोगों की पहचान
107
पित्ताशय में पथरी होने पर
- ▣ गाजर के 225 ग्राम रस में इतना ही सलाद के पत्तों का रस मिलाकर पिएँ। बहुत लाभदायक है।
घाव हो जाने पर
- ▣ गाजर को उबालकर अच्छी तरह से पीस लें। अब उसका लेप घाव वाली जगह करके पट्टी बाँध दें।
पीलिया होने पर
- ▣ गाजर का रस पिलाएँ और गाजर का ही सूप भी रोगी को दें।
मूत्र संबंधी रोग होने पर
- ▣ गाजर के रस में आधी मात्रा में पालक का रस मिलाकर पिएँ।
गुर्दे या मूत्राशय की पथरी होने पर
- ▣ गाजर का रस पीना बहुत लाभदायक है।
दमा होने पर
- ▣ दिन में दो बार एक बड़ा गिलास गाजर का रस पिएँ। रात को गाजर का रस मत पिएँ।
गुर्दे के रोग होने पर
- ▣ पौन गिलास पानी में डेढ़ चम्मच गाजर के बीज उबालकर पिएँ और साथ ही गाजर के रस में उससे आधी से भी कम मात्रा में पालक का रस मिलाकर भी पिएँ।
सीने में दर्द होने पर
- ▣ गाजरों को उबालकर उनका रस निकाल लें। फिर उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर रोगी को पिलाएँ।
खून के लाल कणों की कमी होने पर
- ▣ 225 ग्राम गाजर के रस में इतना ही पालक का रस मिलाकर सेवन करें।
108
साहिब बन्दगी
माताओं-बहनों के दूध में कमी होने पर
☐ गाजर का रस पिएँ।
आँखें कमजोर होने पर
☐ गाजर का रस लाभदायक है।
कैंसर होने पर
☐ गाजर का रस जरूर पिएँ, लाभकारी है।
जीरे से रोगों का निदान
पुराना बुखार होने पर
☐ डेढ़ ग्राम पिप्सा हुआ जीरा और गुड़-दोनों को अच्छी तरह से मिला लें। सुबह-शाम यह दवा लें।
बवासीर होने पर
☐ एक चम्मच जीरे में काली मिर्च पीसकर शहद में मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करें।
खुजली होने पर
☐ जीरे को गर्म पानी में पीस, लेप करें।
मुँह में दुर्गंध होने पर
☐ जीरे को भूनकर खाएँ।
अंगूर से रोगों को निदान
दमा होने पर
☐ अंगूर का सेवन करें।
गुर्दे की पीड़ा होने पर
☐ 25 ग्राम अंगूर के पत्तों को पीस लें। फिर उसमें पानी मिलाकर अच्छी तरह से छान लें। अब उसमें नमक मिलाकर रोगी को
रोगों की पहचान
109
पिलाएँ। यह बहुत लाभकारी है।
फेफड़ों के रोग होने पर
▣ अंगूर खाएँ। यह बहुत लाभकारी है।
चने से रोगों का निदान
श्वेत प्रदर होने पर
▣ भुने हुए चने पीसकर उसमें मिश्री मिलाकर खाएँ और ऊपर से घी युक्त गुनगुना दूध पी लें।
बार-बार पेशाब आने पर
▣ भुने हुए चने गुड़ सहित खाएँ।
हृदय रोग होने पर
▣ हृदय रोगियों को काला चना खाना चाहिए, लाभदायक है।
वीर्य पतला होने पर
▣ शाम को चने पानी में भिगो दें। सुबह उन्हें खाकर ऊपर से दूध पी लें।
मधुमेह होने पर
▣ चने की रोटी दो हफ्ते तक खाएँ। लाभकारी है।
अनार से रोगों का निदान
दस्त होने पर
▣ अनार को भूनकर फिर उसका रस निकाल लें। उस रस में एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें।
मुँह में दुर्गंध होने पर
▣ अनार के छिलकों का चूर्ण पानी के साथ लें।
110
साहिब बन्दगी
गंजापन होने पर
❑ अनार के पत्तों को पीसकर गंज वाली जगह लेप कर दें।
नकसीर आने पर
❑ अनार का रस नथुनों में डालें।
पेट दर्द होने पर
❑ अनार के दाने निकालकर उसमें सेंधा नमक और जरा-सी काली मिर्च डालकर खाएँ। यह बहुत लाभकारी है।
मासिक स्त्राव अधिक होने पर
❑ अनार के सूखे हुए छिलकों को पीसकर चूर्ण बना लें। फिर किसी साफ़ बारीक कपड़े से छान कर डेढ़ चम्मच (छोटा) चूर्ण खिलाकर थोड़ा-सा शीतल जल पिला दें। यह प्रयोग सुबह-शाम करें।
नारंगी से रोगों का निदान
गुर्दे का रोग होने पर
❑ सुबह खाली पेट नारंगी का रस पिएँ।
मुँहासे होने पर
❑ नारंगी के छिलके पीसकर लगाएँ।
गैस होने पर
❑ सुबह खाली पेट नारंगी का रस पिएँ।
देसी घी से रोगों का निदान
सिर दर्द होने पर
❑ सोते समय पैर की तलियों में देसी घी की मालिश करें।
रोगों की पहचान
111
चेहरे पर दाग होने पर
- ▣ सोते समय देसी घी चेहरे पर अच्छी तरह मलकर लगा लें। सुबह ठंडे पानी से चेहरा धो लें।
पुरानी खाँसी होने पर
- ▣ देसी घी में गुड़ डालकर आग पर रखें और फिर इसका सेवन करें।
होंठ फटने पर
- ▣ घी में नमक डालकर होंठों पर लगाएँ।
हिचकी आने पर
- ▣ दो चम्मच देसी घी को गर्म करके पी लें।
पित्ती होने पर
- ▣ देसी घी में जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर मालिश करें।
अखरोट से रोगों का निदान
बच्चों के बिस्तर पर पेशाब करने पर
- ▣ बिस्तर पर पेशाब करने वाले बच्चों को तीन अखरोट और 21-22 किशमिश के दाने रोज खिला दें।
सफेद दाग होने पर
- ▣ अखरोट खाएँ। यह लाभकारी है।
टी. बी. होने पर
- ▣ नित्य 2 अखरोट, 4 लहसुन की कली को पौन चम्मच (बड़ा) गाय के घी में भूनकर रोगी को खिलाएँ।
मरोड़ होने पर
- ▣ अखरोट को पीसकर (पानी के साथ) नाभि स्थाप पर लेप करना चाहिए।
112
साहिब बन्दगी
बच्चों के पेट में कीड़े होने पर
- ❑ रोज बच्चों को दूध देते समय पहले तीन अखरोट भी दे दें।
आलू से रोगों का निदानु
उच्च रक्तचाप होने पर
- ❑ पानी में थोड़ा-सा नमक डालकर आलू उबालें। उबल जाने के बाद उनका छिलका उतारकर खाएँ।
गुर्दे की खराबी होने पर
- ❑ आलू खाना लाभकारी रहता है।
गठिया होने पर
- ❑ आलू को कोयलों पर भून लें। फिर उनका छिलका उतारकर स्वादानुसार नमक-मिर्च लगाकर खाएँ।
गुर्दे की पथरी होने पर
- ❑ आलू के साथ-साथ पानी पर ज़ोर रखें।
खड़ी डकारें आने पर
- ❑ आलू को राख या कोयलों पर भून कर खाएँ।
आँखों में जाला होने पर
- ❑ कच्चे आलू को किसी पत्थर पर घिसें और फिर आँखों में जैसे काजल लगाते हैं, ऐसे लगाएँ। यह काम दिन में 2-3 बार 100 दिन करें।
मूली से रोगों का निदान
पीलिया होने पर
- ❑ 120 ग्राम मूली के पत्तों का रस, 40 ग्राम मिश्री-दोनों को मिलाकर रोगी को पिलाएँ। यह दवा सुबह ही दें। मूली, पपीता बगैरह सुबह-2 ही अपना सही असर दिखाते हैं।
रोगों की पहचान
113
आवाज़ बैठ जाने पर
- ▣ पौन चम्मच मूली के बीजों को पीसकर गर्म पानी के साथ सेवन करें और एक कप पानी में इतना ही मूली का रस डालकर गराये करें।
खूनी बवासीर होने पर
- ▣ सुबह-सुबह कच्ची मूली खाएँ। लाभ मिलेगा।
मूत्राशय की पथरी होने पर
- ▣ 40 ग्राम मूली के बीजों को एक बड़े गिलास पानी में अच्छी तरह उबालें। फिर छानकर पी लें। इसके अतिरिक्त मूली के पत्ते भी चबाएँ।
हिचकी आने पर
- ▣ मूली के पाँच पत्ते लेकर अच्छी तरह से धोकर चबाएँ।
मेथी से रोगों का निदान
पेट दर्द होने पर
- ▣ दानेदार मेथी की फँकी लेकर ऊपर से गर्म पानी पी लें।
मधुमेह होने पर
- ▣ दानेदार मेथी को अच्छी तरह पीसकर आटे में मिला लें। उस आटे की रोटी खाएँ।
आग से जल जाने पर
- ▣ दानेदार मेथी को पीसकर (पानी के साथ) जले हुए स्थान पर लेप कर दें। यह लाभकारी प्रयोग है।
खूनी बवासीर होने पर
- ▣ 5 चम्मच दानेदार मेथी को एक गिलास दूध में डाल उबालकर सेवन करें।