संग्रह पर लौटें




















सेहत संजीवनी
Sehat Sanjivani
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: June 2009 First Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Post-Raya, Distt.-Samba (J & K) · 2009 (उद्गम)
DevanagariHindipublished104 पृष्ठ
पृष्ठ 54स्थायी लिंक
54
साहिब बन्दगी
- ❑ कलेजे को भी शक्ति प्रदान करता है।
खीरे का शरबत ( प्रमेह.... )
- ❑ 25 ग्राम खीरे के बीज, 2 ग्राम मिर्च, 1 ग्राम पीपल, 5 ग्राम इलायची-सबको कूटपीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ चिलिक प्रमेह का नाश करता है।
कातका शरबत ( वात रोग... )
- ❑ 1 पाव मिर्च, 100 ग्राम घी, आधा किलो तुलसी के पत्तों का रस, डेढ़ किलो मिश्री-सबको मिलाकर गर्म करके शर्बत तैयार कर लें। अब किसी शीशी में रख लें।
- ❑ 1 तोला यह शरबत नित्य सेवन करें तो वायु विकार दूर होता है।
- ❑ अगर भूख नहीं लग रही हो तो भी यह शरबत लाभकारी है।
हर्र का शरबत ( कफज्वर... )
- ❑ 20 ग्राम हर्र का छिलका ढाई गिलास पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह मलकर किसी कपड़े से छान लें। फिर इसमें 1 ग्राम सेमर का गोद और 1 ग्राम रूई का खार मिलाकर पीएँ।
- ❑ कफज्वर को दूर करता है।
- ❑ पित्तज्वर का भी नाश करता है।
एरंडी का शरबत ( गठिया... )
- ❑ 1 ग्राम एरंडी के बीज, 2 ग्राम मिर्च दोनों को पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ गठिया को खत्म करता है।
पृष्ठ 55स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
55
अनार का शरबत ( जलन... )
- □ 12 ग्राम अनार के दाने, 2 ग्राम मिर्च दोनों को पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ छाती की जलन को दूर करता है।
- □ पित्तचर का भी नाश करता है।
ब्रह्माण्डी का शरबत ( बुद्धि... )
- □ 1 पाव बच, आधा किलो ब्रह्माण्डी, आधा किलो शंखाहोली को तीन किलो पानी में डालकर आग पर रखें। जब तीसरा हिस्सा रह जाए तो उतारकर छान लें और किसी बर्तन में डाल दें। फिर उसमें डेढ़ किलो मिश्री और 125 ग्राम घी मिलाकर चासनी बना लें। यह शरबत तैयार हो गया।
- □ उन्माद, अपस्मार आदि को समाप्त करता है।
- □ कलेजे को ठंडक पहुँचाता है और बुद्धि को बल प्रदान करता है।
गुलखुल का शरबत ( प्रमेह... )
- □ 20 ग्राम गुलखुल का पंचांग, 5 ग्राम मिश्री, 1 ग्राम मिर्च-सबको आधा किलो पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह छानकर पीएँ।
- □ सर्व प्रकार के प्रमेह को दूर करता है।
- □ भूख को भी खोलता है।
ककड़ी का शरबत ( मूर्छा... )
- □ 12 ग्राम ककरी के बीज, 12 ग्राम पीपल, 12 ग्राम तरबूज के बीज-सबको कूटपीसकर आधा किलो पानी में डालकर छान लें।
पृष्ठ 56स्थायी लिंक
56
साहिब बन्दगी
- ❑ रोगी की मूर्छा को दूर करता है।
- ❑ सिर दर्द को दूर करता है।
कुलफी का शरबत ( कफज्वर... )
- ❑ 25 ग्राम कुलफी के बीज बहुत बार अच्छी तरह से धोएँ। फिर 1 ग्राम जवाखार के साथ अच्छी तरह से कूटपीस लें। एक पाव पानी में डालकर पी लें।
- ❑ कफज्वर को दूर करता है।
- ❑ कमर दर्द को ठीक करता है।
- ❑ सिर दर्द को भी लाभ देता है।
बहेड़े का शरबत ( सर्व ज्वर... )
- ❑ 4 ग्राम बहेड़े का छिलका लेकर ढाई गिलास पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह मसलकर किसी साफ कपड़े से छान लें। फिर उसमें 1 ग्राम चन्दन, 1 ग्राम मिर्च, 1 ग्राम कूट पीसकर मिला लें।
- ❑ कफ, पित्त और वात ज्वर को दूर करता है।
- ❑ सिर दर्द को समाप्त करता है।
इनाई का शरबत ( जाड़े का ज्वर... )
- ❑ 20 ग्राम इनाई, 2 ग्राम मिर्च दोनों को पीसकर ढाई गिलास पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ जाड़े का बुखार दूर करता है।
पृष्ठ 57स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
57
शतावरी का शरबत ( माथे का दर्द... )
- □ 20 ग्राम शतावरी, 1 ग्राम पीपर, 1 ग्राम अदरक, 1 ग्राम चिरायता—सबको एक पाव पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह मसलकर छानें और पी लें।
- □ माथे का दर्द दूर करता है।
- □ कमर दर्द में भी लाभकारी है।
उन्नाब का शरबत ( उदर रोग, खाँसी... )
- □ आधा किलो उन्नाब, 125 ग्राम गुलाब के फूल, 25 ग्राम मुलहठी, आधा किलो लिसोड़ा, 60 ग्राम सौंफ—सबको कूटपीसकर डेढ़ किलो पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह आग पर रखें और आधा रह जाने पर उतारकर छान लें। फिर 1 किलो सफेद कन्द मिलाकर दुबारा आग पर रखें। चासनी हो जाए तो उतार लें। उन्नाब का बढिया शरबत तैयार है। इसे किसी शीशी में सुरक्षित रख लें। 15 ग्राम यह शरबत सेवन करें।
- □ अजीर्ण को दूर करता है।
- □ उदर रोगों से बचाता है।
- □ 12 ग्राम उन्नाब की जड़—पत्ता, 1 ग्राम मिर्च पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ खाँसी को नष्ट करता है।
- □ कफ को दूर करता है।
नीम का शरबत ( फोड़ा.... )
- □ 40 ग्राम नीम की छाल, 2 ग्राम मिर्च, 1 ग्राम खुरासानी बच सबको कूटपीसकर आधा गिलास पानी में मिलाकर पीएँ।
पृष्ठ 58स्थायी लिंक
58
साहिब बन्दगी
- ☐ फोड़े-फुंसी को दूर करता है।
- ☐ गंदे खून को साफ करता है।
नीलोफर का शरबत ( पित्तज्वर... )
- ☐ नीलोफर के 40 ग्राम फूल लेकर सवा दो किलो पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह उसमें सवा किलो चीनी मिलाएँ। शरबत तैयार हो जायेगा। 10 ग्राम यह शरबत लें।
- ☐ पित्तज्वर का नाश करता है।
बाईसुरठि का शरबत ( विषमज्वर... )
- ☐ 12 ग्राम बाईसुरठि, 1 ग्राम मिर्च-दोनों को पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ☐ विषम ज्वर दूर करता है।
काहू का शरबत ( अरुचि... )
- ☐ काहू के चार पत्ते, 1 ग्राम जवाखार-दोनों को पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ☐ भूख लगती है।
- ☐ भोजन पचता है।
आँवले का शरबत ( जलन... )
- ☐ 40 ग्राम आँवला ढाई गिलास पानी में शाम को भिगो दें। सुबह छान लें। फिर उसमें 1 ग्राम दालचीनी, 2 ग्राम बायबिडंग मिलाकर पीएँ।
- ☐ हाथों-पैरों की जलन को दूर करता है।
पृष्ठ 59स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
59
दादोरी का शरबत ( शीतज्वर... )
- ❑ 12 ग्राम दादोरी, 5 ग्राम मिर्च, 6 ग्राम अदरक-सबको कूटपीसकर आधा किलो पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ शीतज्वर को नष्ट करता है।
- ❑ आमवात को दूर करता है।
बड़ का शरबत ( सुजाक... )
- ❑ 12 ग्राम बड़ का बरोह, 12 ग्राम बताशा, 1 ग्राम मिर्च पीसकर पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ सुजाक को दूर करता है।
- ❑ शरीर की गर्मी का नाश करता है।
फालसे का शरबत ( स्त्री रोग... )
- ❑ 20 ग्राम फालसे, 1 तोला मिश्री, 1 मासा मिर्च पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ प्रसूत रोग दूर करता है।
- ❑ स्त्री के कलेजे की गर्मी को समाप्त करता है।
भूंगराज का शरबत ( सर्व रोग... )
- ❑ 6 ग्राम भूंगराज, 1 ग्राम मिर्च पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ सर्व रोगों में लाभकारी है।
- ❑ खून को साफ करता है।
पृष्ठ 60स्थायी लिंक
60
साहिब बन्दगी
बिहीदाना का शरबत ( प्रमेह... )
- ❑ 12 ग्राम मोंगलीबिहीदाना, 1 ग्राम मिर्च, 12 ग्राम मुरला पीसकर आधा किलो पानी में शाम के समय भिगो दें। फिर सुबह मसलकर पीएँ।
- ❑ सूजाक को नष्ट करता है।
- ❑ प्रमेह रोग का नाश करता है।
कासनी का शरबत ( कलेजे की गर्मी... )
- ❑ 6 ग्राम कासनी के बीज, 1 ग्राम मिर्च, 5 ग्राम ककड़ी के बीज पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ कलेजे की गर्मी को समाप्त करता है।
तुलसी का शरबत ( सर्व रोग... )
- ❑ 12 ग्राम तुलसी के पत्ते, 1 ग्राम मिर्च पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ सर्व ज्वर को दूर करता है।
हुरहुर का शरबत ( बवासीर... )
- ❑ 20 ग्राम हुरहुर के पत्ते, 1 ग्राम मिर्च पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ बवासीर को नष्ट करता है।
- ❑ वायुगोला को भी खत्म करता है।
पृष्ठ 61स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
61
महुआ का शरबत ( प्रमेह )
- □ 6 ग्राम महुआ की छाल, आधा ग्राम मिर्च पीसकर आधापाव पानी में मिलाकर पीएँ।
सहदेई का शरबत ( सर्वरोग... )
- □ 12 ग्राम सहदेई का पंचांग, 2 ग्राम मिर्च पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ सर्व ज्वर का नाश करता है।
- □ भूख खोलता है।
कटेरी का शरबत ( खाँसी... )
- □ 12 ग्राम कटेरी की जड़, 1 ग्राम इलायची, 1 ग्राम पीपल पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ दमा और खाँसी को नष्ट करता है।
इमली का शरबत ( पित्तज्वर... )
- □ 35 ग्राम इमली, 12 ग्राम मिश्री, 1 ग्राम मिर्च पीसकर पावभर पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ पित्तज्वर को नष्ट करता है।
रत्नज्योति ( सन्निपात... )
- □ 20 ग्राम रत्नज्योति, 1 ग्राम मिर्च, 2 ग्राम अदरक पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ सन्निपात रोग का नाश करता है।
पृष्ठ 62स्थायी लिंक
62
साहिब बन्दगी
केंवाज का शरबत ( प्रमेह... )
- □ 15 ग्राम केंवाज के बीज शाम के समय पानी में भिगो दें। सुबह पीसकर एक गिलास गाय के दूध में मिश्री सहित मिलाकर पीएँ।
- □ प्रमेह रोग का नाश करता है।
सीसों का शरबत ( प्रमेह, सूजाक... )
- □ 20 ग्राम सीसों के पत्ते, 2 ग्राम मिर्च पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ सूजाक और प्रमेह को दूर करता है।
बेलपत्र का शरबत ( संग्रहणी... )
- □ 6 ग्राम बेलपत्र, 1 ग्राम मिर्च, 2 ग्राम काला नमक पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ संग्रहणी रोग को दूर करता है।
- □ उलटी को शांत करता है।
मूली का शरबत ( अजीर्ण... )
- □ 25 ग्राम मूली की जड़, 2 ग्राम मिर्च, 12 ग्राम पाँचों नमक पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ अजीर्ण रोग को दूर करता है।
अरहर का शरबत ( हैजा... )
- □ 10 ग्राम अरहर के पत्ते, 1 ग्राम मिर्च, 12 ग्राम नींबू का रस पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
पृष्ठ 63स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
63
☐ हैजे में लाभकारी है।
ककही का शरबत ( प्रमेह... )
- ☐ 35 ग्राम ककही के पत्ते, 12 ग्राम मिश्री, 1 ग्राम मिर्च-सबको कूटपीसकर आधा किलो पानी में मिलाकर पीएँ।
- ☐ प्रमेह को नष्ट करता है।
- ☐ नींबू के रस के साथ सेवन करें तो सुजाक को भी नष्ट करता है।
कइत का शरबत ( वायुगोला... )
- ☐ 5 ग्राम कइत, 3 ग्राम खार, 6 ग्राम पाँचों नमक पीसकर 1 पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ☐ वायुगोला नष्ट होता है।
- ☐ अन्य उदर रोग भी दूर होते हैं।
चिरायते का शरबत ( सर्व ज्वर... )
- ☐ 12 ग्राम चिरायता, 3 ग्राम पीपल, 12 ग्राम धनिया पीसकर एक पाव पानी में शाम के समय भिगो दें। सुबह छानकर पीएँ।
- ☐ सर्व ज्वर को दूर करता है।
यशवंती का शरबत ( प्रमेह... )
- ☐ 50 ग्राम यशवंती के पत्ते, 12 ग्राम मिश्री, 2 ग्राम मिर्च पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ☐ प्रमेह को दूर करता है।
- ☐ इंद्री की जलन भी समाप्त करता है।
पृष्ठ 64स्थायी लिंक
64
साहिब बन्दगी
फिटकरी की शरबत ( विष... )
- ❑ 6 ग्राम फिटकरी, 2 ग्राम नीलाथोथा पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ वमन होता है, जिससे खाया हुआ विष निकल जाता है।
आम का शरबत ( संग्रहणी... )
- ❑ 12 ग्राम आम की गुठली, 1 ग्राम मिर्च पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ संग्रहणी रोग का नाश करता है।
- ❑ विष का असर भी कम करता है।
ईसबगोल का शरबत ( प्रमेह... )
- ❑ 12 ग्राम ईसबगोल, 12 ग्राम नींबू का रस, 25 ग्राम मिश्री पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- ❑ प्रमेह रोग को दूर करता है।
कुकुरौँधा का शरबत ( भूख... )
- ❑ 40 ग्राम कुकुरौँधा को पीसकर आधा पाव पानी में मिलाकर गाय का घी डालकर पीएँ।
- ❑ भूख खोलता है।
- ❑ आँखों की रोशनी बढ़ाता है।
बबूल के पत्तों का शरबत ( सूजाक... )
- ❑ 20 ग्राम बबूल के पत्ते, 3 ग्राम मिर्च पीसकर आधा पाव पानी में
पृष्ठ 65स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
65
मिलाकर पीएँ।
- □ सूजाक का नाश करता है।
- □ पेशाब को खोलता है।
बकाइन का शरबत ( बवासीर.... )
- □ 20 ग्राम बकाइन की छाल, 2 ग्राम मूली के बीज पीसकर आधा पाव पानी में मिलाएँ और छान लें। फिर मिश्री डालकर पीएँ।
- □ खूनी बवासीर को दूर करता है।
- □ संग्रहणी रोग का नाश करता है।
- □ प्लीहा रोग भी दूर करता है।
पीपर का शरबत ( संग्रहणी रोग.... )
- □ 12 ग्राम पीपर की छाल, 1 ग्राम मिर्च पीसकर एक पाव पानी में मिलाकर पीएँ।
- □ संग्रहणी रोग का नाश करता है।
गूलर का शरबत ( प्रमेह... )
- □ 12 ग्राम गूलर का फल और जड़, 1 ग्राम मिर्च पीसकर 1 पाव पानी में मिलाकर सेवन करें।
- □ सूजाक, प्रमेह को दूर करता है।
ॐ ॐ ॐ
सेहत संजीवनी चूर्ण
पृष्ठ 66स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी चूर्ण
वायुनाशक चूर्ण ( वायु विकार... )
- □ 3 ग्राम पीपल, 6 ग्राम पाँचौं नमक, 7 ग्राम अजवाइन, 3 ग्राम अदरक, 3 ग्राम सुहागा, 2 ग्राम काली मिर्च, 7 ग्राम हरड-सबको कूटपीसकर सहजने के रस के साथ छोटी-छोटी गोलियाँ बनाएँ। सुबह-शाम 1-1 गोली रोज खाएँ।
- □ यह गोली हर तरह का वायु-विकार दूर करती है।
आमवात चूर्ण ( आमवात... )
- □ पीपल, बायबिडंग, हरड, सेंधा नमक, अदरक-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छान लें।
- □ 4 ग्राम यह चूर्ण 3-4 दिन में ही आमवात को नष्ट कर देता है।
सुदर्शन चूर्ण ( अजीर्ण, सन्निपात... )
- □ काली मिर्च, दारुहल्दी, हल्दी, नागरमोथा, कटहरी की जड़, पीपरामूल, बच, आँवला, हरड, बहेड़ा, काकड़ासिंधी, सौफ, अदरक, कमलगट्टा, देवदारु, खस, गोखरू, अतीस, पत्रज, चीता, मंजीठ, कुड़ा की छाल, मुलहठी, पुष्करमूल, गिलोय, पीपल, कूट, जवासा, कचूर, इंद्रयव, तज, मिश्री, बेलगिरी, अजवाइन-
66
पृष्ठ 67स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
67
सब 25-25 ग्राम लेकर अच्छी तरह से कूटपीसकर छान लें। इस चूर्ण की गर्म जल के साथ फंकी लें।
- □ यह चूर्ण सन्निपात को दूर करता है।
- □ अजीर्ण को ठीक करता है।
- □ विशूचिका में लाभकारी है।
- □ पेट-दर्द को दूर करता है।
नवहर्गर्ग चूर्ण ( मन्दाग्नि )
- □ 12 ग्राम काला जीरा, 40 ग्राम सफेद जीरा, 20 ग्राम हरड् की छाल, 20 ग्राम अदरक, 20 ग्राम छोटी हरड्, 20 ग्राम निसोत, 20 ग्राम लाहोरी नमक, 20 ग्राम अनारदाना, 20 ग्राम तंतरीक-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से छानकर रख लें। ढाई ग्राम यह चूर्ण भोजन के बाद खाएँ।
- □ मन्दाग्नि को नष्ट करता है।
अग्निदीपक चूर्ण ( मन्दाग्नि, अजीर्ण... )
- □ 5 ग्राम हरड्, 2 ग्राम काली मिर्च, 12 ग्राम मीठी तेलिया, 8 ग्राम सुहागा, 4 ग्राम पारा, 4 ग्राम अदरक, 15 ग्राम जली हुई लाल कौड़ी, 15 ग्राम शंख, 4 ग्राम गंधक-सबको कूटपीस 6-7 नीबू के छींटे देकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
- □ यह गोली मन्दाग्नि के लिए बढ़िया दवा है।
- □ अजीर्ण को ठीक करती है।
- □ आधे शरीर का दर्द हो तो इसका सेवन करें।
- □ विशूचिका में लाभदायक है।
- □ भूख कम लगती हो तो बहुत हितकारी है।
पृष्ठ 68स्थायी लिंक
68
साहिब बन्दगी
चन्दनादि चूर्ण ( उदर रोग )
- ❑ चन्दन, कमलगट्टा, सफेद जीरा, काला जीरा, काला नमक, कपूर, लौंग, अनारदाना-सब 25-25 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें।
- ❑ यह चूर्ण पेट के सभी विकारों का नाश कर देता है।
भास्कर चूर्ण ( सन्निपात, अजीर्ण... )
- ❑ सफेद जीरा, चव्व, काली मिर्च, अनारदाना, सांभर नमक, पीपल, पत्रज, तालीस, पीपरामूल, बायबिडंग, सौंफ, इलायची, तज, काला जीरा-सबको कूटपीसकर छान लें। यह चूर्ण गर्म जल के साथ सेवन करें।
- ❑ अजीर्ण को ठीक करता है।
- ❑ सन्निपात रोग में हितकर है।
- ❑ उदर विकारों में यह चूर्ण बड़ा लाभकारी है।
अजवायनादि चूर्ण ( श्वास, संग्रहणी... )
- ❑ अजवायन, पीपल, जीरा, काली मिर्च, अदरक, बायबिडंग, अनारदाना, तंतरीक, अमलबेल-सबको 25-25 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। 2-3 ग्राम यह चूर्ण रोज खाएँ।
- ❑ श्वास, खाँसी आदि रोग दूर होते हैं।
- ❑ हृदय रोग में लाभकारी है।
- ❑ रक्त-विकार में यह चूर्ण बड़ा हितकर है।
शृंग्यादिक चूर्ण ( वायु, नजला... )
- ❑ 25 ग्राम काकड़ासिंधी, 70 ग्राम त्रिफला, 25 ग्राम पुष्करमूल,
पृष्ठ 69स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
69
120 ग्राम तोले नमक, 25 ग्राम निसगन्ध, 25 ग्राम खरेटी की जड़, 25 ग्राम भारंगी-सबको कूटपीसकर छान लें। गर्म पानी के साथ यह चूर्ण फांके।
- □ नजला ठीक करता है।
- □ वायु आदि रोगों में लाभ करता है।
पाचन चूर्ण ( पाचन क्रिया )
- □ पीपल, आँवला, हरड, चीता, संधानमक, पाँचों को बराबर मात्रा में कूटपीसकर चूर्ण बना लें। इस थोड़े-से चूर्ण को पानी के साथ लेना चाहिए।
- □ पाचनक्रिया को ठीक करता है।
वैश्वानर चूर्ण ( अजीर्ण... )
- □ चित्रक का खार, पुर्नवा का खार, पलास का खार, आक का खार, शूहर का खार, तिल्ली का खार, डासरा का खार, आँधोफोड़ का खार, अरंडी का खार, कदली का खार, जीरा, पीपरि, कालीमिर्च, जीरा, अदरक, हींग-सबका चूर्ण कर अदरक के रस की 5-6 छींटे देकर घोट लें। शीतल जल के साथ इस चूर्ण का सेवन करें।
गंगाधर चूर्ण ( अतिसार, संग्रहणी... )
- □ इंद्रयव, मोचरस, धवई के फूल, अदरक, नागरमोथा, अतीस, लजालू की जड़, पेटे के बीज, लोध, पोस्त-सब 25-25 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। यह चूर्ण चावल के धोवन के साथ लें।
- □ संग्रहणी रोग को दूर करता है।
पृष्ठ 70स्थायी लिंक
70
साहिब बन्दगी
- □ अतिसार और पेट के अन्य छोटे-छोटे रोगों के लिए हितकारी हैं।
मूत्रकृच्छ्रका चूर्ण ( पथरी, मूत्रकृच्छ्र... )
- □ आम की पुरानी गुठली, नीम की कॉपल, इन्द्रयव, खस, बड़ की जटा, चीता, पीपल की जटा, महुआ, लोध, हरड, भिलावाँ, पवांड की जड़, बरने की छाल, आलूबुखार, धौ का गोद-सबको कूटपीसकर छान लें। यह चूर्ण शहद के साथ खाएँ।
- □ पथरी को दूर करता है।
- □ मूत्रकृच्छ्र की बढ़िया दवा है।
अग्रिमुख चूर्ण ( गुदा के रोग )
- □ करंज के बीज, पुष्करमूल, बच, पद्माख, नागरमोथा, अनारदाना, दारुहल्दी, अजवाइन, हरड, खार, बार्यबिडंग, जवाखार, चीता, सज्जी, समुद्र फेन, बच, इन्द्रायव, त्रिकुटा, अजमोद, अतीस, कीटी कुश्ता, बावची की खार, सहिजने की खार, ढाक की खार, तिल की खार, निसोत, हाऊबेर-सब 25-25 ग्राम लेकर अदरक के रस के साथ 2 दिन तक अच्छी तरह कूटपीस लें। इस चूर्ण को दूध के साथ फांकना बड़ा लाभकारी है।
- □ गुदा के रोगों का नाश करता है।
अग्रिकर चूर्ण ( सर्दी, गर्मी... )
- □ 4 पैसा भर लौंग, 1 पैसा काली मिर्च, एक पाव मिश्री, 4 पैसा मीठा चूक, 1 पैसा बड़ी इलायची, 1 पैसा पीपल-सबको कूटपीसकर छान लें। फिर इसे चूक में मिला लें। इसके बाद इसे
पृष्ठ 71स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
71
मिट्टी के पात्र में मलें।
- □ यह दवा सर्दी-गर्मी दोनों को दूर करती है।
- □ ज्वर का नाश करती है।
समुद्र चूर्ण ( क्षय )
- □ समुद्र नमक, जवाखार, पुष्करमूल, अदरक, सेंधा नमक, खारा नमक, सोंघर नमक, निसोत, पीपल, अजवायन, अजमोद, हरड, बायबिडंग-सबको कूटपीसकर छान लें। 4 ग्राम यह चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करें।
- □ क्षय रोग का नाश करता है।
- □ भूख बढ़ाने में भी यह चूर्ण काफी लाभदायक है।
बायखाण्डव चूर्ण ( कण्ठ रोग )
- □ आँवला, हरड, बहेड़ा, काली मिर्च, धमासा, लोध, अदरक, जवाखार, पेठे के बीज, पीपल-सब 25-25 ग्राम लेकर कूटपीस लें। अब किसी साफ कपड़े से छान लें।
- □ यह चूर्ण शहद के साथ सेवन करें तो कण्ठ के सब रोग जाते रहें।
सिद्धार्थ चूर्ण ( सन्निपात, ज्वर... )
- □ सरसों, बायबिडंग, कलौंजी, भांगी, हींग, बच, मिर्च, जीरा, अजमोद, जायफल, पीपल, कुटकी, मंजीठ, पाड़ा, पीपरामूल-सब 25-25 ग्राम ले कूटपीसकर छान लें। गोमूत्र के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें।
- □ सन्निपात को दूर करता है।
- □ पसेब का भी नाश करता है।
पृष्ठ 72स्थायी लिंक
72
साहिब बन्दगी
- □ करंज के बीज, सफेद सरसों, सफेद चमेली की छाल, अदरक, आँवला, हरड, बहेड़ा, देवदारु, बच, पीपल, काली मिर्च, हींग, दारुहल्दी, सिरस की छाल, मंजीठ-सबको कूटपीसकर छान लें। गाय के मूत्र के साथ यह चूर्ण खाएँ।
- □ सन्निपात को दूर करता है।
- □ ज्वर का भी नाश करता है।
अमलबेत लवणभास्कर चूर्ण ( उदर विकार... )
- □ 1 पैसा भर सफेद जीरा, 1 पैसा भर काला जीरा, 1-1 पैसा भर पाँचों नमक, 2 पैसा भर तालीस, 2 पैसा भर पीपलामूल, 2 पैसा भर अजवाइन, 2 पैसा भर त्रिफला, 2 पैसा भर नागकेशर, 2 पैसा भर पीपल, 1 पैसा भर अदरक, 2 पैसा भर जवाखार, 1 पैसा भर खुरासानी, 1 पैसा भर अनारदाना, 2 पैसा भर इचायची, 2 पैसा भर लौंग, 1 पैसा भर पत्रज, 7 मासे दालचीनी, 1 पैसा भर मूली के बीज-सबको कूटपीस कर छान लें। फिर अमलबेत की गिरी को काढ़कर उसमें चूर्ण को भर दें। फिर उसे 1 दिन पूरा सुखाएँ। 3 ग्राम यह चूर्ण रोज खाएँ।
- □ उदर विकारों को नष्ट करता है।
- □ अन्न को पचने में सहायता देता है।
पाचक चूर्ण ( पाचक क्रिया )
- □ चित्रक, बायबिडंग, सेंधा नमक, पीपल, लौंग, त्रिकटु, तीनों शोरा, शुभ्र फूल, सुहागा, तज, त्रिफला-सबको कूटपीसकर छान लें।
पृष्ठ 73स्थायी लिंक
सेहत संजीवनी
73
- □ 2 ग्राम यह चूर्ण रोज़ खाने से भूख खुलकर लगती है।
- □ हाजमा ठीक रहता है।
मिरचादि चूर्ण ( प्रमेह... )
- □ मिर्च, कलौंजी, नागकेशर, सुगंधवाला, जायफल, छिकरा की छाल, पत्रज, कपूर, लौंग, कमलगट्टा, अगर, कंकोल, सोंघर नमक, केले की जड़, असगंध, नागरमोथा, अंजीर, भांगरा, अदरक, पीपल, लाल चन्दन, नागकेसर, वंसलोचन, उडुद की दाल, सिंधाड़ा, मोचरस, मुसली, निर्गुण्डी, गंगेरन-सब 12-12 ग्राम लेकर कूटपीस लें। फिर 80 ग्राम बंग, 80 ग्राम अम्रक, 80 ग्राम मग्न ले कूटपीसकर उसमें मिला लें। फिर 2 सेर कच्ची चीनी लेकर कूटपीसकर इस चूर्ण में अच्छी तरह से मिला लें। यह चूर्ण 20 ग्राम के करीब सुबह-शाम खाएँ।
- □ प्रमेह में लाभ करता है।
- □ खाँसी को दूर करता है।
- □ जलन रोग में आराम देता है।
हिंगवाष्टक चूर्ण ( अजीर्ण, पेट दर्द )
- □ हींग, पीपल, अजमोद, सेंधा नमक, काली मिर्च, काला जीरा, सफेद जीरा, गजपीपल, अदरक-सब बराबर मात्रा में लेकर अदरक के रस के साथ गोलीयाँ बना लें।
- □ यह गोली सभी रोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- □ 50 ग्राम जीरा, 50 ग्राम अजमेद, 50 ग्राम काली मिर्च, 25 ग्राम हींग, 50 ग्राम अदरक, 50 ग्राम पीपल, 25 ग्राम सेंधा नमक, 25 ग्राम सांभर नमक-सबको कूटपीसकर किसी साफ कपड़े से