वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
धातुसूची । ( २ पृष्ठाङ्काः धातवः | पृष्ठाङ्काः धातवः | पृष्ठाङ्काः धातवः | पृष्ठाङ्काः धातवः २७८ मुडि | ३०४ मेह् | २७४ युति | २८१ रफ २८० मुडि | ३०४ मेघृ | २७५ युच्छ | २८२ रफि ३४२ मुण | ३०४ मेथ् (पा.) | ३३४ युज | २८१ रबि २६८ मुद् | २८१ मे | ३५९ युज | ३११ रम ३५८ मुद् | २८७ मेतृ | ६ युजिर् | २८१ रभि (पा.) ३४३ मुर | ३५८ मोक्ष | ३५० युज् | ३०३ रसु २७५ मुर्च्छा | ३०७ म्ना | २६१ | २८७ रय २८९ मुर्ती | २९३ म्रक्ष (पा.) | ३१४ युध | २९० रवि ३५२ मुष | ३५६ म्रक्ष | ३३७ युप | २९४ रस ३३७ मुस | २९८ म्रद | ३३७ युष (पा.) | ३६४ रस ३५५ मुस्त | २७५ म्रुचु | २०१ यूष | २९५ रह ३३६ मुह | २७५ म्रुञ्चु | २७९ यौट् | ३५५ रह ३१० मूङ् | २७९ म्रेड् | ३५८ रक | ३६० रह ३६२ मूत्र | २७५ म्लुचु | २९३ रक्ष | २९५ रहि २८९ मूल | २७५ म्लुञ्चु | २७३ रख | ३५८ रहि ३५४ मूल | २७५ म्लेच्छ | २७३ रखि | ३२४ रा २९३ मूष | ३५६ म्लेच्छ | ३५८ रग (पा.) | २७३ राख २९३ मूक्ष | २७९ म्लेद् | २७३ रगि | २७३ राघ् ३६२ मृग | २८७ म्लेतृ | २९९ रगे | ३०२ राज् ३४४ मृङ् | ३०७ म्लै | ३५८ रघ (पा.) | ३३४ राध ३६० मृज् | ३५६ यक्ष | २७३ रघि | ३३९ राध ३२५ मृज् | ३१४ यज | ३५८ रघि | २९१ रास् ३४२ मृड | ३५८ यत | ३६१ | ३४४ रि ३५१ मृड | २६९ यती | ३१४ रञ्ज | ३४० रि ३४२ | ३५३ यत्रि | ३३४ रञ्ज | २७३ रिख (पा.) ३५१ मृद् | ३१२ यभ | २७९ रट | २७३ रिंगि ३०४ | ३१३ यम | २८० रट | ३५९ रिच ३४५ | ३०१ यम | २८० रठ (पा.) | ३४६ रिचिर् ३३४ | ३५५ यम | २८५ रण | ३४२ रिफ्र ३६० मृष | ३३६ यसु | २९९ रण | २९० रिवि २९४ | ३२३ या | ३०१ रणि (पा.) | ३४५ रिश ३५० म | ३०४ (टु) याच् | २७१ रद | २९३ रिष ३१० मेड् | ३२० यु | ३३५ रध | ३३७ रिष ०४ मेथृ (पा.) | ३५७ यु | २८२ रुप | ३४२ रिह (पा.) | | | ३५० री
? It has a dot above: रुं, then ड or ङ with virama? Wait, in भ्वादि: 'रुडि'? No, 'रुड' or 'रुण्ड'? Wait, on page ३१०, what is there? Look at the glyph: ३१० रुंङ / रुङ. Let's look closely: it is रु and ड with virama, and dot above? रुंड. Or रुंङ.) Col 2: ३५६ Col 3: ३४१ ( ओ ) लस्मी Col 4: २७५ लुञ्च
Row 4: Col 1: २९५ रुच Col 2: ३५३ Col 3: ३१४ ला. Col 4: ३३७ लुभ
Row 5: Col 1: ३५९ रुज Col 2: २७३ लख् Col 3: २७३ लावू (Wait, is it लावू or लावृ? Look at २७३: भ्वादि roots often have ृ like लाघृ, लाछि... Wait, लावृ? Look at २७३ लावू: the loop goes down like an u-kar, or ृ? In Devanagari, वू has a curve down-right. But wait, next line is 'लाघृ' which has a distinct ृ curve. Row 5 has 'लावू' with a hook. So 'लावू'.) Col 4: ३४५ लुप्ल
| पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धातुसूची। | (२०३) | ||||||
| पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः |
| २८० | वठ | ३२८ बश्च | ३५६ | विष्क | २८९ | वेल्ल | |
| ३५४ | २९३ | वष | ३६४ | विष्क | ३२८ | वेवडिँ | |
| २७८ | वठि | ३१४ | वस | ३३१ | विष्क्ऌ | २७८ | वेष्ट |
| २७८ | वडि | ३१९ | वस | ३२३ | वी | २९१ | वेहृ |
| ३५४ | वडि (पा.) | ३५८ | वस | ३६२ | वीर | ३०७ | (ओ) वै |
| २८५ | वण | ३६४ |
( ४४ ) धातुसूची ।
| पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः | पृष्ठाङ्काः | धातवः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ३०३ | शटृ | ३३६ | शिल्टू | ३०४ | शेवृ | ३०९ | श्लथ |
| ३०३ | शङ्क | ३५८ | शीक | ३५८ | शैङ् | २७३ | श्लाघ |
| ३१४ | शण | ३५३ | शीक | ३५० | शै | २७३ | श्लातृ |
| ३३४ | शप | २७२ | शीक | २८९ | शेलृ | ३३५ | श्लिष |
| ३५७ | शब्द | ३२० | शीङ् | २८८ | शेवृ (पा.) | ३३५ | श्लिष |
| ३५६ | शम | २८१ | शीभृ | ३०७ | शौ | २९३ | श्लिपु |
| ३०१ | शम | २८८ | शील | ३३३ | श्चो | २७२ | श्लोकृ |
| ३३६ | शमु | ३६१ | शील | २८५ | श्चोतृ | २८५ | श्लोणू |
| ३५३ | शम्ब | २७५ | शुच | २७९ | श्चोट् | २७२ | श्वकि |
| २८२ | शर्व | ३३४ | (ई)शुचिर् | २७० | श्च्युतिर् | २७४ | श्वच |
| २८९ | शर्व | २८८ | शुच्च | २८८ | श्मील | २७४ | श्वचि |
| २८७ | शल | २८० | शुट | ३१० | श्यैङ् | ३५४ | श्वठ |
| ३०२ | शल | ३५५ | शुट | ३७२ | श्रकि | ३६० | श्वट |
| २८१ | शलभ | २८० | शुठ | २७३ | श्रगि | ३५४ | श्वटि (पा.) |
| २९५ | शव | २८० | शुठ (पा.) | २३९ | श्रण | ३५५ | श्वभ्र |
| २९५ | शश | ३५५ | शुठि | ३५४ | श्रम | ३५४ | श्वर्त |
| २९३ | शष | ३३५ | शुण | २९९ | श्रथ | २७९ | श्वल |
| २९१ | (आङः) शसि | ३४२ | शुन | ३५३ | श्रथ | ३५४ | श्वल्क |
| २९५ | शसु | २७२ | शुन्ध | ३५९ | श्रथ | २८९ | श्वल्ल |
| २९५ | शंसु | ३५९ | शुन्ध | ३६१ | श्रथ | ३२६ | श्वस |
| २७३ | शाकृ | २९५ | शुभ | १६१ | श्रथि | ३१६ | (टुओ) श्वि |
| शाङ्क | २८३ | शुभ | ३६१ | श्रन्थ | २९५ | षिता | |
| ३१४ | शान | ३४२ | शुभ | ३५१ | श्रन्थ | २६८ | ष्विदि |
| ३१९ | (आङः) शासु | २८३ | शुभ्भ | ३६० | श्रन्थ | २९९ | षगे |
| ३२४ | शासु | ३४२ | शुभ्भ | ३३६ | श्रमु | ||
| २९१ | शिक्ष | ३५४ | शुल्क | २८१ | श्रम्भु | २३९ | षध |
| २७३ | शिखि (पा.) | ३५४ | शुल्व | ३०० | श्रा | २७४ | षच |
| २७४ | शिखि | ३३५ | शुप | ३२३ | श्रा | ३१४ | षच |
| ३१९ | शिजि | ३६२ | शूर | ३०५ | श्रिञ् | ३१३ | षञ्ज |
| ३३८ | शिञ् | ३३३ | शूरी | २९३ | श्रिषु | २७१ | षट |
| २७९ | शिट | ३५४ | शूर्प | ३४९ | श्रीञ् | ३५५ | षट्ट |
| ३४३ | शिल | २८८ | शूल | ३०९ | श्रु | २८५ | षण |
| २९३ | शिष | २९३ | शूप | ३०७ | श्रै | ३४७ | षणु |
| ३५९ | शिष | २९६ | शृधु | २८५ | श्रोण | ३५९ | (आङः) षद |
| २७२ | श्लकि | ३०३ | षद्लृ | ||||
| २७३ | श्लगि |
धातूसूची । ( २०५ )
पृष्ठाङ्काः धातवः पृष्ठाङ्काः धातवः पृष्ठाङ्काः धातवः पृष्ठाङ्काः धातवः ३४५ बदॢ २६९ बूद ३३६ ष्णुह २६८ स्कुदि २८२ बप ३५७ ३०७ ष्णै २१८ स्वद ३०२ बस २८३ बमू ३०९ षिष्ङ् २८९ स्खल ३५३ बम्ब २८३ २६८ षद ३०१ स्खलि (पा.) २७६ बर्ज २८९ बेल्ट् (पा. ३५९ षद ३६० स्तृ १८४ बर्ब २८७ बेतृ ३२६ (जि) ष्वप् २९३ स्तृ २८९ बर्ब ३०७ बै २७३ ष्वष्क ३३८ स्तुन् २८९ बल ३३२ षो २९५ (जि) ष्बिदा ३४३ स्तुहू ३२८ बस २९९ ष्वक ३१२ (जि) ष्बिदा ३५० स्तृञ् २७५ बस्ज २९९ ष्ये ३३५ ष्बिदा ३६२ स्तेन ३०३ बह २८५ ष्म ३६२ सङ्केत ३०७ स्तै ३३२ बह २८९ ष्मि ३६४ सङ्ग्राम ३६४ स्तोम ३५९ बह ३०२ ष्म ३६२ सत्र ३४२ स्थुड ३५४ बान्धव ३३९ ष्ठिघ ३६१ सभाज ३६२ स्थूल ३४५ बिच्च २८० ष्ठिट् ३३७ समी (पा.) २६८ स्पादि ३३८ बिज् ३३२ ष्ठिम ३२८ सस्ति २६७ स्पर्ध ३४९ बिज् ३३२ ष्ठीम ३३९ साध ३०४ स्पश २७९ बिट २७४ ष्ठुव ३६१ साम ३५६ स्पश २७० बिष ३२१ ष्ठुज् ३५४ साम्ब (पा.) ३३९ स्पृ ३३५ बिधु ३५६ ष्ठुप ३६१ सार ३४५ स्पृध २७० बिधू २८१ ष्ठुभ् ३६४ सुख ३६१ स्पृह २८३ बिभु (पा.) २८० ष्टुपृ ३६१ सूच ३४३ स्फर (पा.) २८३ बिम्सु (पा.) ३०७ ष्ठै ३६३ सूत्र २८७ स्फायी ३४३ बिल ३०७ ष्ठ्यै २९३ सूक्ष् ३५४ स्फिंट (पा.) ३३२ बिवु ३०२ ष्ठल २८८ सूर्क्ष्य ३५५ स्फिड् ३०८ बु ३०७ ष्ठा ३०८ सृ २७८ स्फुट ३२१ बु २८९ ष्ठिवु ३३१ सृ ३४३ स्फुट ३३८ बुज् ३३२ ष्ठिवु ३३४ सृज ३५७ स्फुट ३५४ बुट्ट ३३२ ष्णातु ३४४ सृज २८० स्फुटि (पा.) ३४२ बुर ३२३ ष्णा ३१२ सृप्ऌ ३५३ स्फांट (पा.) ३३२ बुह ३३६ ष्णिह २७२ सेकृ २८० स्फाटर् ३४४ बू ३५४ ष्णिह ३१२ स्कन्दिर् ३४३ स्फुड ३१९ बृङ् ३२० ष्णु २८१ स्काभ ३२२ [विलोपितम्] ३३२ बृङ् ३३२ ष्णुसु ३४९ स्कुज् ३४३ स्फुर २७५ स्फुन्द्रा
( २०६ ) धातुसूची । पृष्ठाङ्काः धातवः | पृष्ठाङ्काः धातवः | पृष्ठाङ्काः धातवः | पृष्ठाङ्काः धातवः ३४३ स्फुल ( पा. ) | ३६१ स्वर | २७८ हिडि | २९१ हेष्टृ २७७ ( दुञो ) स्कूञी | १६८ स्वर्दृ | ३४२ हिल | २७९ होडू ३५४ स्मिङ् ( पा. ) | २६९ स्वाद | २९० हिवि | २८० होडू ३५४ स्मिट | ३५९ स्वाद ( पा. ) | ३५६ हिष्क ( पा. ) | ३२९ ह्लु २८८ स्मील | ३०८ स्वृ | ३४७ हिसि | ३०० ह्वल ३०० स्मृ | २७९ हट | ३५९ हिसि | २९९ ह्वगे ३०८ स्मृ | २८० हठ | ३२९ हु | २९४ ह्वस ३३९ स्मृ ( पा. ) | ३१२ हद | २७८ हुडि | २६९ ह्वाद २९६ स्यन्दू | ३१७ हन | २७९ हुडि | ३२९ ह्वी ३५६ स्यम | २८६ हम्म | २८० हुडू | २७५ ह्लोछ ३०२ स्युमु | १८८ हय | २७५ हुर्छीं | २९१ ह्वेषृ १७२ स्त्रकि | २८८ हयं | ३०२ हुल | २९९ ह्वगे २९६ स्त्रन्सु | ३०१ हल | २८० हूडू | ३५५ ह्वप २९६ स्त्रंभु | २९५ हसे | ३३१ हृ | २९४ ह्वस ३३२ स्त्रिवु | ३३० ( ओ ) हाक् | ३०६ हृञ् | २६९ ह्वादी ३०८ स्त्रु | ३३० ( ओ ) हाङ् | ३३७ हृष | ३०० ह्वल २३२ स्त्रंकु | ३३९ हि | २९४ हृपु | ३०८ ह्वृ ३११ स्वञ्ज | ३०३ हिक | २७८ हेठ | ३०७ ह्वृ ३०१ स्वन | १७९ हिट ( पा. ) | १९८ हेड | ३१६ ह्वृञ् ३०२ स्वन | ३५२ हिठ | २७९ हेडृ | इति धातुसूची समाप्ता ।
कौमुद्यन्तर्गतवार्तिकसूची । वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः . अकच्प्रकरणे तूष्णीं० २३८ | अनपत्याधिकार० ७८ | अमुष्यत्यन्तः ५१७ अकर्मकधातुभि० ९२ | अनव्ययस्येति० १९ | अमेह्रुकत० १९३ अकारान्तोत्तरपदो० १३७ | अनाचमिकमिव० ४०५ | अरण्याण्णः १९४ अक्षरसमूहे छन्दस० ५०३ | अनाम्नवातिन० १५ | अर्णसो लोपश्च २३२ अक्षादूहिन्यामुप १० | अनुपसर्ग० ५२९ | अर्त्तिश्रुहशिभ्य० ३१४ अगोवत्सह्ले० १४५ | अनेकप्राप्तावेकत्र० १५१ | अर्थवेदयोश्च० ३८६ अग्निकलिभ्यां ढग्० १७० | अनो नलोपश्च १३८ | अर्थाच्चासंनि० २३४ अग्नीध्रः शरणे० २०४ | अनेकाशेषेष्वि० १५६ | अर्थाद्वान्तु २२० अग्रग्रामाभ्यां नयते० ४३४ | अन्तःशब्दस्याङ्के० २६० | अर्थेन नित्यसमासो० १२१ अग्रादिपश्चाड्डुमच् १९८ | अन्ताच १५९ | अर्धाच्चेति० २१६ अङ्गनक्षत्रधर्मत्रि० १८८ | अन्ताच १९८ | अयंक्षत्रियाभ्यां वा स्वार्थे ५८४ अङ्गगात्रकण्ठे० ८६ | अन्यात्पूर्वो वा नुम् ७० | अर्हतो तुम्च० २२२ अचि शीर्ष इति वा० २१३ | अन्यत्रापि दृ० ४३३ | अहीनां कर्तृत्वे० १५१ अजेः क्यपि विभा० ४८५ | अन्येभ्योऽपिदृश्यते २३३, २३२ | अलावूतिलोमा० २२६ अज्वरिसंताप्यो० १०६ | अन्वादेशे नपुं० ६१ | अवरस्योपसंख्यानम् १२० अञ्जस उपसंख्या० १५९ | अपरस्वार्थे पश्चभावो० १२६ | अवर्णान्ताद्वा १५७ अडभ्यासव्यवी० ३४४ | अपादाने ब्रि० ४७८ | अवहाराधारा० ४०९ अतद्धित इति वा० ५१५ | अपोल्वादीनामिति० १६६ | अवाद्यः क्रुष्टाद्यर्थे० १३१ अतद्धित इति वा० १६७ | अपुरि इति० ३० | अवारपाराद्विप्रहीता० १९३ अतेर्धातुलोप इ० ५४० | अपो योनियन्म० १६० | अवेर्दुग्ध० १८४ अत्यन्तापह्नवे० ४१० | अप्रत्ययादिभि० ११२ | अव्ययस्य स्वा० २४५ अत्यादयः क्रान्ताद्यर्थे० १३१ | अप्राणिचित्त्यपनीय० १०१ | अव्ययानां० १९३ आदिखाद्योर्न ९४ | अप्राणिजातेश्च ८७ | अव्ययानां न ५१६ अदेः प्रतिषेधः ४०१ | अमितः परितः-९५ | अव्ययीभावस्य० ५१६ . अद्रवन्मूर्ति० ८५ | अभिवादिदृशोरात्मनेपदे० ९५ | अव्ययं नञ्कु० ५२५ अद्वन्द्वतत्पुरुष० १५५ | अभुक्त्यर्थस्य न ९५ | अविष्टव्यवहारे० ९८ अधर्मीचेति वक्त० २०९ | अभूततद्भाव इ० २४५ | अश्मनो विकारे० २०५ अधिकरणाच्चेति व० ३८१ | अभ्यर्हितं च १५१ | अश्ववृषयोर्मै० ३८१ अध्यात्मादेष्ठञ्जि० २०१ | अभ्रकुंसादीना० १६२ | अष्टका पितृदे० ७६ अध्वपरिमाणे च ८ | अमन्त्रनाति व० १४३ | अष्टनः कपाले० १३५ अनजादौ च० २३९ | |
असमासे नञः ८ असंख्या व० ४८, ७४ असंज्ञायां ११९ आतोऽर्कण्डे च ० ४२६ असितपलितयो० ८२ अस्तोश्श्वेति व० १६३ अस्मिन्नर्थेऽण् विद्वा० १८३ अस्य संबुद्धौ वा० ६७ अहरादीनां प० २३ अहर्ग्रहणं द्वन्द्वार्थम् १३२ अहः खः क्रतौ १८४ आकालाट्ठञ् २२१ आकृतिग्रहणा जाति० ८८ आख्यानाख्यायिके० १८४ आख्यानात्कृत० ३६२ आगमेः क्षमा० ३९१ आग्रोग्रसाया० २४४ आड्व्याजयराम्र० ५०८ आङः प्रतिज्ञाया० ३९२ आङि चम इति० २८६ आङि नुप्रच्छयोः ३९२ आङ्पूर्वाद्विजेः ० ४२० आचारेऽवगल्भ० ३८१ आचार्यादणत्वं च ८४ आथर्वणिक० २०५ आदिकर्मणि० ४४० आर्यादिभ्य उ० २४५ आद्युदात्त० ५३२ आनुपूर्व्ये द्वे वा० २४७ आपदादिपू० १९५ आवन्तो वा १२८ आब्ग्रहणं व्यर्थम्० ७३ आमनडुहः स्त्रियां ८२ आमन्त्रितं छन्दसि० ५१३ आमयस्योप० २३३ आनुष्यायणामुष्य० १६० आलस्यमुखा० ४२७ आविष्ट्यस्योप० ५०२ आशंकायां सन्व० ३७१ आशतः कौ० ४३४ आशिषि नाथः ० ३९० आशिषि नाथ इति० २६७ आशिषि वुनश्श्व० ७६ आसुरेरुपसं० ७९ आहृतप्रकरणे० २१९ आहो प्रभूतादिभ्यः १०४ इकन्पदोत्तरपदा० १८८ इकारादाविति० २०८ इके चरतावुष० १६१ इक्कॄष्यादिभ्यः ४८८ इक्तिपौ धातुनि० ४८७ इखपादिभ्यः ४८८ इणजादिभ्यः ४८८ इण्वदिकः ३२३ इत्यङ्नभ्यासस्य १६३ इत्यात्वा० ३१० इदम इश् सम० २३५ इदमेश् यश्च ” इयाडियाजीकाराणाम्० ५०८ इयडुवङ्भाविना० १६२ इर इत्संज्ञा वा० २७० इरिकादिभ्यः प्र० १६७ इवेन समासो० ११३ इपेरनिच्छार्थ० ४८६ इपेस्त० ३५२ इ कक्व १६९ ईक्षिक्षमिभ्या० ४२६ ईद्रथिनः ५११ ईयसो बहुव्रीहे० १४९ ईष्येतेस्तृतीय० ३६९ ईषद्गुणवचनेनेति० १२९ ईषा अक्षादीनां० ५०६ ईहायामेव ३९२ उगिदणूग्रह० ६ उत्तरपदत्वं चा० ६१ उत्तरपदलोपे० ७६ उत्तरपदस्थ चेति० १६२ उत्तरादाहञ् १९४ उत्तरपदेन परिमाणिना० १२७ उत्तानादिषु० ४२८ उत्पातेन ज्ञापिते च १०० उत्फुल्लसंफुल्ल० ४३९ उपविशब्दा० २१४ उपमानात्पक्षान्न पुच्छाच्च ८६ उपसर्गादस्य० ३९५ उपाद्देवपूजा० ३२३ उपायो ह्रस्वत्वं २४४ उभयसंज्ञान्य० ४५७ उभयोऽन्यत्र २९ उभसर्वतसोः कार्या० ९७ उरसो लोपश्च ४३३ उवर्णात् इलस्य २३९ उस्योमाङ्श्वटः० ३८४ उष्णभद्रयोः करणे १६२ ऊङ् च गमा० ४३५ ऊठ्युपधाग्रहणं ० ५२४ ऊधसोऽनङ् च २१३ ऊर्णोतेराम्र्नोत्० ३२० ऊर्णोर्नगुवद्वा० ४३७ ऋलृवर्णयोर्मिथः० ४
वार्तिकसूची। (१०९)
| वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|
| ऋचि चेरुत्तरपदा० | ५०५ | कमेश्च्लेश्चङ् वक्तव्यः | २४४ | क्रुकन्नपि वाच्यः | ४४९ |
| ऋति सवर्णे ऋ० | १२ | क.तृकर्मणोरिष्यर्थ० | ४९० | क्रोशशतयोजन० | २१८ |
| ऋतुनक्षत्राणां समा० | १५१ | कर्मणः करणसंज्ञा० | ९८ | क्लृपि संपद्यमाने च | १०० |
| ऋते च तृतीया० | १० | कर्मणि समि च | ४३३ | क्लिन्नस्य चिलिपहल० | २२६ |
| ऋतोर्वृद्धिर्माद्विधा० | १९८ | कर्मप्रवचनीयानां० | २३१ | क्विब्वचिप्रच्छ्यो० | ४४९ |
| ऋदुपधेभ्यो लिटः० | २९२ | कर्मव्यतिहारे० | ४८० | क्षो लुप्ते न स्थानि० | ३८ |
| ऋल्वादिभ्यः |
( २१० ) वार्तिकसूची । वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः गिर्निन्यादीनां वा १६७ | चिरपरुत्परारिभ्य० १९८ | ण्यल्लोपाविहङ्० २४४ गिरौ डश्छन्दसि० ४२८ | चीवरादर्जने० ३८५ | तकिशशिच्ति० ४१८ गिलगिले च १६३ | चुलू च २३६ | तक्षणोऽण्० १८० गिलेऽगिलस्य १६३ | चेलराज्य० ५३३ | ततोऽभिगमन० २१८ गुग्गुलुमथु० ५०२ | च्यर्थं इति वाच्यम् १३० | तत्पचतीति० २१६ गुणकर्मणि वेष्यते १०८ | छत्वममीति वा० १६ | तत्परे च ८ गुणवचनेभ्यो म० २३० | छन्दसि क्रमेके ८२ | तदन्ताच्च २३४ गुणात्तरेण तरलोप० १२१ | छन्दसि परे० ४९९ | तदस्मिन्वर्तत० १८५ गुपेर्निन्दायाम् ३११ | छन्दसि वेति ५०४ | तदाहेति० २०७ गोरजादिप्र० १७० | छन्दसि स्त्रियां० ५०६ | तदो दावचनमन० २३५ गोर्यूतौ छ० ८ | छन्दसीति व० ४२१ | तद्वृहतौः करप० १६८ गोष्ठजादयः २२६ | छन्दसी वनिपौ० ५०४ | तद्युकादध्वनः० १०३ घञर्थे क० ४८१ | छन्दोविनप्रकरणे ५०४ | तद्राजाञ्छाणः १७१ घटीखारीखरी० ४३२ | छागवृषयोरपि १८० | तनिपतिदरिद्रा० ३६९ घटिद्वन्द्विविदि० ४८६ | जलप्रतिप्रभृतीनामुपसंख्यानं ९४ | तनोतेरुपसं० ४२५ घोषग्रहणमपि० २०४ | जसादिषु छन्दसि वा० ५१० | तन्यादीनां छन्दसि ५०७ च्यन्तादजाद्यन्तं० १५१ | जागर्तेरकारो० ४८६ | तपसः परस्मै० ३८५ ङावुत्तरपदे प्रति० ५१ | जातान्तान्न ८५ | तप्यर्वमरुद्व्यायम् २३३ चञ्चद्वृड्ढतोरुप० २४२ | जातार्थे प्रति० १९९ | तस्य दोषः संयो० ३३ चटकस्येति वाच्यम् १७७ | जातिकाल्सुखादि० १५० | तस्येदमित्यप० १७१ चतुरश्छयता० २२७ | जातिपूर्वादिति वक्तव्यम् ८५ | तादर्थ्ये चतुर्थी० १०० चतुर्थीदच्च० २३९ | जुगुप्साविराम० १०१ | तारका ज्योति० ७६ चतुर्थादिन० २३९ | जुहोतेर्दी० ४४९ | तावतित्थेन गृ० २२९ चतुर्थ्यर्थ० २१६ | ज्योतिरुद्गमन० ३९६ | तिजेः क्षमायाम् ३११ चतुर्मासाण्ण्यो० २२० | ज्योत्स्नादिभ्य उ० २३१ | तितउत्रेण्वग्रहादी० ४८६ चतुर्वर्णादीनां० २१३ | झलादाविति० ४९२ | तिलान्निष्फला० १८५ च्यो द्वितीयाः श० १७ | ठञ्छसोश्च १४२ | तिष्यपुष्ययोर्नक्षत्राणि० ८२ चरणाद्धर्माम्नाय० २०४ | डाचि बहुलं द्वे० ११ | तीयादीकक् स्वार्थे० २३७ चरिचलिपतिव० ४२५ | डाचि विवक्षिते० २४६ | तेन न तत्र ४१९ चोराडि चा० ४१८ | डे च विहायसो० ४३३ | त्यकनश्व नि० ७६ चायतेः क्तिनि० ४८५ | णिश्रन्थ्रिग्रन्थि० ४०९ | व्यक्त्यपोश्च ७६ चारौ वा ४३३ | ण्यत्प्रकरणे त्यजे० ४२२ | त्यजेश्च ४२२ चितः सप्रकृते० ५२३ | ण्यत्प्रकरणे ल० ४२२ | त्यदादितः शेषे पुं० १५५ चित्रारेवती १९९ | ण्यन्तभादीनामु० ४१८ | त्यदादीनां फिञ्वा० १८१
वार्तिकसूची। (२११) वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः त्यदादीनां मिथः० १५५ त्यब्नेध्रुव इति० १९३ त्रिचतुर्भ्यां हायन० ८० त्रौ च १६५ त्र्युपसंख्यां चतुरो० १५७ त्वतलोगुणव० १४१ दम्भे० ३३९ दरिद्रा० ३२७ दंशेश्चन्दस्युन० ४४७ दानेरा० ३११ दारजारौ कर्त० ४७७ दारावाइणो० ४३३ दिक्शब्देभ्यस्तीरस्य० १६५ दिवश्च दासे १६० दुग्वोर्दीर्घश्च ४३७ दुरः षत्वणत्वयो २४० दुरो दाशनाशदभ० १६५ दुहिपच्योर्बहुल० ४०७ दूतवणिग्भ्याञ्च २१३ दूरादेत्यः १९४ [L
( २१२ ) वार्तिकसूची । वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः पात्राद्यन्तस्य न १३८ पादशतग्रहण० २४२ पार्श्वादिपूप्० ४२८ थालकान्तान्न ८४ पावकवादीनां छ० ५१० पाशकल्पकका० १९ पिड्जेश्छन्दसि डिच्च १८५ पितुर्भातरि व्यत् १८९ पिबतेः सुराशी० ४२८ पिशङ्गादुपसं० ८२ पिशाचाच्च २३३ पीतात्कन् १८३ पुण्यसुदिनाभ्यामहः ० १३८ पुच्छाच्च ८६ पुच्छादुदसने० ३८५ पुरुषाद्वधविकार० २१३ पुष्पमूलेषु ० २०६ पुंसानुजो जनुषा० १५९ पुंसि जाते १७५ पूज एवेह० ४१८ [L24
वार्तिकसूची । (२१३) वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः यथासंख्यं ने० ४३२ यथेष्टं नामधातुषु ३९० यदायत्तोरुपसं० ४१३ यमाञ्चेतिकाशिका० १६९ यवलपरे यव० १७ यवनाल्लिप्याम् ८४ यवादोषे ८४ यातुस्वयमेवाध्या० ८४ युवादेर्न १६७ युष्मदस्मदोः० ५०४ यूनश्च कुत्सायां० १७२ यौपधप्रतिषेधे० ८७ रञ्जेर्णौ मृगरमणे० ३६९ रणकरणे खमु० २३१ रयेमंतौ बहुलम् ५०५ राज्ञ उप० ४३४ राज्ञो जातावेवेति० १७८ रादिफः ४८८ राधो हिंसायां० ३७२ रीगृतवत इति० ३७५ रूपँराँत्रिरथन्त० २३ रेशब्दाच्च ५२४ रोगे चायमिष्यते २३३ लघ्वक्षरं पूर्वम् १५१ लुटि वा ३२७ लुवाख्यायिकाभ्यो० १८८ लृति सवर्णे लृ० १२ लोकस्य पृणे १६३ लोपः पूर्वपदस्य० २३९ लोम्नोऽपत्येषु बहु०३६, १७० लोहितडाग्भ्यः० ३८४ लोहिताल्लिङ्गबाधनं २४४ ल्यब्लोपे कर्मण्य० १०३ वटकेभ्य इन् २२९ वत्वन्तात्स्वार्थे० २२७ वधेश्चित्तविकारे ३११ वन उपसंख्यानम् ५१४ वनो न हश इतं० ७४ वयस्यचरम इ० ७९ वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः वयोवाचकस्यैव हा० ८० वेञो वक्तव्यः १४६ वर्जने० ३१९ वर्णका तान्तवे ७६ वर्णत्कारः ४८७ वर्णानामानुपूर्व्ये० १५१ वर्तका शकुनौ० ७६ वर्तमाने पृष० ६४ वलादावार्धधा० २७६ वशिरण्योर० ४८१ वसेस्तव्यत्कर्तरि० ४१७ वस्त्रात्समा० ३८६ वहेस्तुरणिट् च २०४ वा केशेषु २१३ वा गोमयेषु १९६ वाग्दिक्पश्यद्द्रयो० १६० वातपित्तश्लेष्मभ्यः० २१६ वातशूनीतिल० ४३१ वातात्समूहे० २३३ वा नामधेयस्य० १९४ वा नामधेयस्य ५१७ वा प्रियस्य १५० वा बह्वर्थमनु० ५४४ वायुशब्दप्रयोगे० १५४ वा लिप्सायामिति० १९३ वा इतजश्श्वयोः ८ वा हितनाम्न इति० ११९ विदिप्रच्छिस्वरती० ३९४ विद्यायोनिसंबन्धे० १६० विद्यालयक्षण० १८८ विनापि प्रत्ययं० २२९ विन्दीन्दिन्खिदि० ५२५ विभक्तौ लिङ्गीव० ४३ विभाजयितु० २१० विभाषाप्रकरणे ३१ विरूपाण्यापि० १५४ विंशतेश्शिति० ५०४ विशुसितु० २१० विष्णौ न १५४ विस्तारे पटञ् २२६ वार्तिकानि पृष्ठाङ्काः विस्मितप्रति० ४४२ विहायसो विह० ४३२ विहितविशेषणञ्च० ४० वुञ्मुटावुवङ्य० २५४-३३२ वृजेरिति० ५२८ वृत्तेश्च २३१ वृद्धस्य च पूजायां० १७२ वृद्धाच्चेति वक्तव्यम् १८६ वृद्धेर्वृषिविभावे० २०९ वृद्धयौत्पत्युञ्भ्दाव० ४१० वृषण्वस्वश्वयोः ४९७ वैरे देवासुरादिभ्यः २०४ व्याधिमत्स्यवलेषु० ४७६ व्यासवरुडनिषाद० १७३ व्रतान्दोजनतन्निवृत्त्योः ३८६ व्रीहिवत्सयोर्० ४३१ शकलकर्दमाभ्या० १८३ शकन्ध्वादिषु प० ११ शक्तिलाङ्गला० ४२८ शतरुद्राद्ववश्च० १८५ शतसहस्रयो० २२७ शप उपालम्भे ३९२ शब्दायतर्न० ९४ शब्द्यकरणे० ४४० शरः खयः १८ शश बहुलपार्थस्य० १४१ शश्व यो वा ३१९ शाकपार्थिवादीनां० १२७ शानेनिशाने ३११ शिक्षेर्जिज्ञासा० ३९१ शीङो वाच्यः ४४८ शीतोष्णतृप्रेभ्य० २३३ शीले कौ मलोपश्च २३८ शीलिकाभिम्० ४२६ शुनो दन्तदंष्ट्राकर्णे० १६६ शूद्रा चामहत्पूर्वा० ७४ शृङ्गवृन्दाभ्यां० २३६ श्व वायुकर्ण० ४७८ श्वै तृम्फादीनां० ३४२ श्वेपपुच्छलाङ्गुले० १६०
( २१४ ) वार्तिकसूची ।
| वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः | वार्तिकानि | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|---|---|
| शेषे विभाषा | १०८ | समाहारे चायमिष्यते | ११७ | सोपसर्गस्य न | ४४२ |
| श्वदन्तरुप० | ४८६ | समिधामाधाने० | २०४ | स्तने धेटो० | ४३२ |
| श्वविष्ठाषाढाभ्यां० | १९९ | समोऽक्रूजने | ३९१ | स्तोमे डविधिः | २१७ |
| श्व्यजीषि० | ४८४ | समो वा लोपमेके | १८ | स्त्रियां न | १३ |
| श्रेण्यादिषु च्व्यर्थवचनं० | १२७ | सम्राजः क्षत्रिये | ८१ | स्त्रियामपत्ये० | १७७ |
| श्वयते० | ३१६ | सर्वजनाट्ठञ्० | २१३ | स्त्रीनपुंसकयोः० | २४८ |
| श्वशुरस्वोकाराकारलोपश्च | ८७ | सर्वत्रपन्नयोरुप० | ४३३ | स्त्रीप्रत्यययोरकाकार० | १०८ |
| श्वेतवहादीनां० | ४९९ | सर्वनामसंख्ययो० | १५० | स्थाम्नोऽकार० | १६९ |
| षट्त्वे षड्गवञ्च | २२६ | सर्वनाम्नो वृत्तिमात्रे० | १२५ | स्थेणोलुँङीति व० | १५२ |
| षष उत्त्वं दतृदशधा० | १३६ | सर्वप्रातिपदि० | ३८१ | स्नेहे तैलच् | २२६ |
| षष्ठाजादिव० | २३९ | सर्वप्रातिपदिके० | ३८२ | स्पृशमृश० | ३१३ |
| षष्ठ्यर्थे चतु० | ४९७ | सर्वाण्णो वेति० | २१३ | स्यान्तस्योपोत्तमं | ५१७ |
| षष्ठ्यामन्त्रित० | ५१६ | सर्वादेश्च | २३४ | स्वज्ञेरुपसं० | ३१२ |
| षाद्यञ्श्चाब्वाच्यः | ८८ | सर्वादेः सादेश० | १८८ | स्वतिभ्यामेव | १५८ |
| संख्यापूर्वपदानां० | २१४ | सर्वोभयार्था० | ३३५ | स्वरत्यादे० | ४९१ |
| संख्याया अल्पीयस्याः | १५० | सविशेषणस्य प्रतिषेधः | १३७ | स्वरदीर्घयलोप० | २७६ |
| संख्याया नदीगो० | १५७ | सस्थानत्वं नमः० | ३२४ | स्वराद्यन्तोपसर्गा० | ३९८ |
| संख्यायास्तत्पुरु० | १४५ | सहायाद्वा० | २२४ | स्ववःस्वतवसो० | ५१० |
| संधाते कटच् | २२६ | सहितसहायाभ्यां चेति० | ८८ | स्वाङ्गकर्मकाचे० | ३१३ |
| संज्ञायां वा | ८३ | साधुकारिण्यु० | ४३५ | स्वादीरेरिणोः | १० |
| संज्ञायामण् | २२० | साध्वसाधुप्रयोगे च | ११० | स्वार्थ उपसंख्यानम् | १८७ |
| संज्ञायामिति | ५२९ | सामान्ये नपुंसकम् | १३८ | हनुचलन इति | १८५ |
| संनिपाताच्चेति० | २१६ | सासाहिवावांह० | ४४९ | हनो वा यद्वध० | ४१८ |
| संपदादिभ्यः० | ४८५ | सिक्लोप एकादेशे० | २६९ | हन्तेर्घत्वं च | ४२५ |
| संपुंकानां सो० | १८ | सिति च | १३ | हन्तेर्हिंसायाम्० | ३७५ |
| संबुद्धौ नपुंसका० | ५५ | सिनोतेर्घासक० | ४३७ | हरेतेरप्रति० | ३९१ |
| संभ्रमाजिह्नशण० | ७४ | सिन्बहुलं नि० | ५०० | हरतेर्गतिता० | ३९२ |
| संभ्रमेण प्रवृत्तौ० | २४७ | सुडपि हर्षा० | २९२ | हरिद्रामहार० | १८३ |
| संवत्सरात्फल० | १९८ | सुदिनहुर्दिन० | ३८५ | हरितक्यादिषु० | १९१ |
| सकर्मकाणां प्र० | ४०७ | सुदुरोरधिकर० | ४३३ | हलिकल्योर० | ३८६ |
| सतिशिष्टस्वरव० | ५१५ | सुब्धातुश्विषु० | २७३ | इत्यादिभ्यो० | ३८६ |
| सत्रकक्षकष्टकृच्छ्र० | ३८४ | सुसर्वादिर्दिक्शब्देभ्यो० | १९८ | हस्तिसूचकयो० | ४२८ |
| सदच्चकाण्डप्रान्तश० | ७४ | सूचिसूत्रिमूत्र्य० | ३७३ | हितयोगे च | १०० |
| सनि णमुलि० | ३२७ | सूतकापुत्रिका० | ७६ | हिमाचेल्लः | २३३ |
| समवपूर्वाच्च | ४२१ | सृतयुवत्याम् | १८२ | हिमारण्ययोर्महत्त्वे | ८४ |
| समश्च बहुलम् | ४२० | सूत्रान्तात्त्वक० | १८७ | हिरण्य इति० | ४९९ |
| समानवाक्ये निघा० | ६१ | सूत्रे च धार्ये० | ४२८ | हुग्रहोर्भश्छ० | ५०० |
| समानस्य० | २३५ | सूर्यागस्त्ययोश्छे० | ८२ | हृदयाच्चालुरन्य० | २३३ |
| समानान्ययोश्चे० | ४३४ | सूर्याद्देवतायां चाब्वाच्यः | ८४ | हृद्युभ्यां च | १५९ |
| समासेप्रत्यय० | ६ | सुजियुभ्यो० | ४०८ | हृदय्या उप० | ५०५ |
| सृजेः श्रद्धोपपन्ने० |
6970: 67: अभ्यासविकारे बाधकं न बाध्यते (in some editions: अभ्यासविकारेषु...) 68: ताच्छीलिके णेऽण् न बाध्यते (or ताच्छीलिके णेऽपि) 69: "कॄद्ग्रहणे..."? No. Wait, is 69: "कृत्यल्युट्..."? Wait, what starts with कृत्य? "कृत्यल्युटो बहुलम्" is a Panini sutra (3.3.113), not a Paribhasha. Wait, what Paribhasha is 69? "क्त्वो ल्युट् तुमुन्..."? Wait, what about: "कृत्यल्युट्खुलन्..."? Wait, look at the letters in the image: ६९ (69) क (ka) - wait, is it 'क'? Look at the hook below: there is no hook. Wait, is it 'कृ'? Look at कृ in row 6 and 7: Row 6: कृ त्रि मा कृ त्रि म यो ः Row 7: कृ द्ग्र ह णे Row 8: कृ त्य ल्यु ट् तु मु न् ० Wait, look at row 8: the first letter has a loop to the left: 'कृ'? Yes, exactly like कृ in कृद्ग्रहणे! Then त्य (tya)? Yes, त्य: the loop of त
( २१६ ) परिभाषासूची । गण० परिभा० पृष्ठाङ्काः | गण० परिभा० पृष्ठाङ्काः | गण० परिभा० पृष्ठाङ्काः ९४ यत्रानेकविध० ६ | ४२ विकरणेभ्यो निय० | ८७ सन्नियोगशिष्टानाम् १९२ २ यथादेशं संज्ञा० | १०९ विधिनियमसंभवे० | ८५ समासान्तविधि० १२. यदागमास्तद्गुणी० | १०२ विधौ परिभाषापति० | १२९ सम्प्रसारणं त० ३६६ ३४ यस्मिन्विधित० | ७३ विभक्तौ लिङ्गवि० ४३ | १०० सर्वोविधिभ्यो० ४८ यस्य च लक्षण० | ३१ व्यपदेशिवद्भे० | ३६ सर्वे विषयश्छ० ४९ यस्य च लक्षणा० | १३ व्यपदेशिवद्भावो० | ३६ सर्वो द्वन्द्वो विभा० ५८ येन नाप्राप्ते यो० १८ | १०८ व्यवस्थितविभाष० | ११२ सहचरितासह० ११४ योगविभा० | १ व्याख्यानतो विशेष० | ७७ सांप्रतिकाभावे० ११४ लक्षणप्रतिपदो० ३०० | ४४ शब्दान्तरस्य० | ११० सामान्यातिदेशे० ४६ लक्ष्णान्तरेण० | ४५ शब्दान्तरात्मा० | ७४ सूत्रे लिङ्गवचन० १२१ लक्ष्ये लक्षणं० | १३२रितपाशपानुबन्धेन.२६३ | २७ स्त्रीप्रत्यये चानु० १६२ ७० लादेशेषु वासरू० | ११३ श्रुतानुमितयोः० | ५० स्वरभिन्नस्य च० ७० लाश्रीयमनुबन्ध० ७८ | ४१ सङ्गादती० ३२५ | ८० स्वरविधौ व्य० ९१ लुलिविकरणाल्लु० ३०० | १४ संज्ञापूर्वको वि०१४४ | ८१ हल्स्वरप्राप्तौ० २१ वर्णाश्रये नास्ति० | २८ संज्ञाविधौ प्र० २९ | ५६ वार्णादाङ्गं बलीयः२७४ | ८६ सन्निपातलक्षणो० | इति परिभाषासूची समाप्ता ।
उणादिसूत्रसूची। पृष्ठाङ्काः सूत्रा० पृष्ठाङ्काः सूत्रा० पृष्ठाङ्काः सूत्रा० ४५४ अगारे णिच्च ४७२ अग्ने च ४५८ अतेर्निरि ४७० अघ्न्यादयश्च ४६१ अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते ४६३ अतेश्च ४७३ अङ्गतैरसिरु० ४५२ अपद्वःसुपु स्थः ४७३ अतेश्च ४६६ अङ्गिमदिमन्दिभ्य० ४६९ अब्दादयश्च ४५४ अतेश्च तुः ४६८ अङ्गेर्नलोपश्च ४७१ अमिचिमिशिदिश० ४५८ अदेर्दीर्घश्च ४७१ अच इः ४५८ अमितम्योर्दीर्घश्च ४७४ अर्मकपुक० ४७४ अच् तस्य जङ्घ च ४६४ अमिनाक्षियाजिवधि० ४६४ अशैर्देवने ४६३ अजियमिशीङभ्यश्च ४७५ अमेस्तुट् च ४६७ अलीकादयश्च ४६२ अजियुधुनीभ्यो० ४७३ अमेर्डुक्कच् ४५६ अवतेष्टिलोपश्च ४५३ अजिरशिशिरशिथिल० ४७४ अमेः सन् ४७४ अवचावमाधमा० ४६३ अजिवरीभ्यो णिच्च ४५२ अमेर्दीर्घश्च ४५३ अविमद्योष्ठिपच् ४५९ अजेरज च ४७२ अमेर्डिपति चित् ४५६ अविमिवितिशृ० ४७० अज्यातिभ्यां च ४६८ अमेरतिः ४६६ अवितृस्तृतन्त्रिभ्य ईः ४६८ अञ्चेः को वा ४६७ अम्बरीषः ४५७ अवे भृञः ४७३ अञ्च्यञ्जिपुजि० ४६१ अर्चिशुचिहुसृ० ४७२ अशित्रादिभ्य इत्रोत्रौ ४६४ अञ्जिमृजिभ्यः कः ४५२ अर्जिटशिकम्प्यमि० ४७० अशिपूणाब्व्योण्डा० ४५१ अणश्च ४६७ अर्जेर्ड्रन्ज च ४७१ अशिशाकिभ्यां० ४५५ अणो डश्च ४६३ अर्जेर्णिलुक् च ४५७ अशुपूषिलटिकणि० ४५६ अण्ड्कूसूभूवूजः ४६६ अर्तिकिमिश्रा ४६४ अशेः सरः ४६५ अत्यविचमितमि० ४६६ अर्तिगृभ्यां भन् ४६० अशेरश च ४७३ अदि भुवो डुतच् ४६१ अर्तिपृवपिभ्यजी० ४५३ अशेर्णित् ४६८ अदिशादिभ्रूशभि० ४६१ अर्तिसृधृधम्य० ४७२ अशेर्देवने युट् च ४५८ अदेर्दीर्घश्च ४५६ अर्तिस्तुसुहु० ४६६ अशेर्नित् ४७० अदेर्घ च ४५९ अर्तेः किदिच्च ४६३ अशेर्लशश्च ४७२ अदेर्नुम्धौ च ४७४ अर्तेः क्युवुञ्च ४६८ अशोतेरश्च ४६१ अदेर्मुट् च ४६० अर्तेर्गुणः शुट् च ४७५ अशोतेराशु० ४६८ अदेस्त्रिनिश्च ४६४ अर्तेर्णिच्च ४७४ अश्वादयश्च ४६७ अनिह्विभ्यां किच्च ४६८ अत्तेरंरुः ४६६ असिसंजिभ्यां क्थिन् ४६३ अनुङ् नदेश्च ४६८ अर्तेरुञ्च ४५३ असेररन् ४५५ अन्दूद्दम्बूजम्बूकफेलू० ४७२ अर्तेरुच्च ४५२ आङ्पदयोः खनि
( २१८ ) उणादिसूत्रसूची । पृष्ठाङ्काः सूत्रा० | पृष्ठाङ्काः सूत्रा० | पृष्ठाङ्काः सूत्रा० ४६७ आडि पित् | ४७२ उब्जेर्बले बलोपश्च | ४५५ कलस्तृपञ्च ४५१ आडि पणिव्रति० | ४६७ उल्कादयश्च | ४६१ कलिकद्योरमः ४६१ आडिण्डुणेः सनश्छन्दसि | ४६९ उल्वादयश्च | ४७४ कलिगलिभ्यां ० ४७१ आडि त्रिहनिभ्यां | ४६४ उल्मुकदर्विहोमिनः | ४६७ कशेर्मुद्र च ४६४ आणको नञू० | ४४६ उषिकुटिदालिकचि० | ४६७ कापेद्गुपिभ्यामीकन् ४५४ आतुक्रन्वांश्च | ४७२ उपः कित् | ४५५ कपेश्च्छश्न ४६४ आनकः श्लोद्भिभ्यः | ४५७ उपिकुषिमर्ति० | ४७१ कायतेर्डिम्सिः ४७२ आपः कर्माख्यायाम् | ४७१ उपिखनिभ्यां कित् | ४५३ किलेर्बुवच ४५९ आप्नोतेर्ह्रस्वश्च | ४७४ ऊर्जिदृणाते० | ४५४ किशोरदयश्च ४५४ आप्नोतेर्ह्रस्वश्च | ४७४ ऋणीतेरीः | ४५१ किञ्जरयोः श्रिणः ४७२ आसन्दिणिकशिख्याम् | ४५२ ऋणीतेर्नुलोपश्च | ४६९ कुटः किञ्च ४७० इगुपधात् कित् | ४६५ ऋच्छेररः | ४५५ कुटिकटिकौति० ४७२ इण आगसि | ४७४ ऋजेः कीकन् | ४७१ कुडिकम्प्योर्नलोपश्च ४७३ इण आगोऽपराध च | ४६७ ऋजेरञ्च | ४७२ कुडिकुटिभ्यां० ४७३ इण आसिः | ४५८ ऋजेन्द्राग्रवज्र | ४६९ कुणिपुल्योः किन्दच् ४६६ इणः कित् | ४६० ऋजिवृधिमन्दि० | ४६९ कुपेर्वी वश्च ४६६ इणस्तशन्तरप्तुनौ | ४६६ ऋतन्याञ्जिवन्य ऊय० | ४५४ कुम्भेर्नलोपश्च ४६२ इण्णिञ्जीदीङ्युष्य० | ४५५ ऋतेररञ्च | ४६२ कुयुभ्यां च ४६३ इण्भीकापाश० | ४६५ ऋपिदृपिभ्यां कित् | ४५२ कुमेश्च ४५७ इण्व्योभ्यां वणू | ४६४ ऋपेर्जातौ | ४६६ कुवः करन् ४६६ इडालिभ्यां भः | ४६८ ऋदृनिभ्यामूषन् | ४६९ कुवश्चट् दीर्घश्च ४७१ इन्देः कमिर्नलोपश्च | ४५६ एतेस्तुट् च | ४७२ कुपेर्लश्च ४७१ इन्धिमदिमन्दिर्वादि० | ४५४ एधिवर्द्धाश्वतुः | ४६९ कुतेरुम्भोभेटाः ४५६ इपियुवीन्द्विछन्दसि० | ४६१ एतेणिच्च | ४६९ कुकदिकाडिकटि० ४६६ इपेः क्स्नुः | ४६६ कञ्जिमृजिभ्यां चित् | ४५१ कुके वच्चः कश्च ४६६ इर्ष्याशभ्यां तकन् | ४६४ कटिकुषिभ्यां काकुः | ४५२ कुम्रोहरुच्च ४५२ इषेः किच्च | ४५४ कटिचकिभ्यामोरन् | ४६७ कुञ्ज उच्च ४६७ इषेः किडरवश्च | ४५५ कणेष्ठः | ४७० कुञ्ज उदीचां काएट् ४५९ उदकं च | ४६९ कदेर्नित्पक्षिणि हि | ४५४ कुञः क्तुः ४७२ उदके सुम्भो च | ४५७ कनियुवृक्षिताक्ष० | ४७४ कुञः पासः ४७२ उदके शुद् च | ४६३ कन्युक्षिक्षिवेध्च | ४७४ कुञादिभ्यः संज्ञायाम् ४७२ उदके नुट् च | ४५४ कपिगाडिगण्डिकटि ० | ४६६ कृतांभिदलितिन्यः कित् ४७३ उदि केर्डीडिः ० | ४६६ कपेदेवाक्रमरणस्य | ४५८ कृतेश्छः क्र च ४७४ उदि दृणातेर० | ४५४ कबेरोतच्चश्च | ४५२ कृतेराद्यन्तविपर्य० ४६९ उद्यर्तेश्चित् | ४५४ कमिमनिजनिगा० | ४६४ कृतेर्नुम् च ४६४ उन्दिश्रुथिकुषिभ्यश्च | ४६६ कमेः किदुच्चोपधायाः | ४६२ कृत्यशूभ्यां क्सनः ४५२ उन्देरिच्चादेः | ४५४ कमेः पश्च | ४७४ कुदरादयश्च ४६० उन्देर्नलोपश्च | ५५ कमेरठः | ४६३ कुदाधाराचिकटिच ४६५ उपसर्गे वसेः | ४६७ कलश्च | ४६४ कृधूमदिभ्यः कित्
उणादिसूत्रसूची । (२१९) पृष्ठाङ्काः सूत्रा० पृष्ठाङ्काः सूत्रा० पृष्ठाङ्काः सूत्रा० ४५० कृवापाजिम्येस्वादि० ४६९ खर्जिपिञ्जादिभ्य० ४७२ चेर्वृत्ते ४६८ कृविवृष्विच्छिवि० ४६५ खलतिः ४७५ चेश्र्च ४५४ कृषिचमितनिधनि० ४६२ खषाशिल्पशश्व० ४७२ चायतेरन्ने ह्रस्वश्च ४६१ कृपेरादेश्च चः ४६६ गडेः कड च ४५४ चायः किः ४६२ कृपेर्वर्णे ४६५ गडेरादेश्च कः ४५९ चिक् च ४५९ कृपेर्वृद्धिश्चोदीचाम् ४६८ गडेश्च ४७२ चितेः कणः कश्च ४७० कृपेर्वृद्धिश्चन्दसि ४५६ गण्डकनौ ४७४ चीकयतेराद्य० ४६३ कृहनिभ्यां क्तुः ४७३ गतिकारकोप० ४५५ चुपेरचोपधायाः ४५७ कृहृभ्यामेणुः ४५६ गन्गम्ब्योः ४६२ च्युवः किच्च ४५७ कृगॄशॄदृभ्यो वः० ४६७ गभीरगम्भीरौ ४६० चिरव्ययम् ४७१ कृगॄघापकुटि० ४७२ गमेरा च ४६० छन्दस्यानच् शु० ४६१ कृगॄशॄवृञ्क्षिम्यः ० ४६० गमेर्गश्च ४५१ छन्दसीणः ४७२ कृतकृपिभ्यः कीटन् ४६० गमर्डोंः ४५६ छापखडिभ्यः कित् ४६७ कृत्यभ्यामीषन् ४६७ गमेरिनिः ४६१ छित्वरच्छत्वरध्वीर० ४६० कृपॄवजिमन्दि० ४६३ गमेः सन्वच्च ४५५ छो गुह्ह्रस्वश्च ४६२ कृवृदारिभ्य उनन् ४५९ गवेरत उच्च ४६९ जन्त्वादयश्च ४६२ कृवृञ्जिस्तृपभ्यनि० ४५८ गक्ष्णोदि ४६९ जनिदान्युसृत्वमदिषा० ४६७ कृशपकटिपटिशौटि० ४६२ गादाभ्यामिणुन् ४७१ जनिमृड्भ्यामिमनिन् ४६५ कृशशालिकलिगदि० ४७१ गिर उडन् ४७० जनिवसिभ्यामिण् ४५५ कॄश्र एरङ् चास्य ४७३ गुधेरूमः ४७४ जनेररष्ट च ४५३ कोकतेर्वा कुक् ४७२ गुधृवीपचिवचिभ्य० ४६१ जनेरुसिः ४७१ कोररन् ४५४ गुपादिभ्यः कित् ४७० जनेर्यक् ४६९ कौतेर्नुम् ४६४ गृधिपप्योर्दकौ च ४७४ जनेष्टन् लोपश्च ४७४ क्रमिगमिक्षमि० ४५६ ग्रसेरा च ४७४ जनेस्तु रश्च ४७० क्रमितमिशितिरत० ४७५ ग्रहेरनिः ४६० जसिसहोस्सिन् ४५९ क्रिय इकन् ४५६ ग्रीष्मः ४६३ जहातेर्डेऽन्तलो० ४७४ क्रिशेरन्लो लोपश्च ४५५ ग्रो मुट् च ४५९ जहातेर्डे च ४७५ क्लिशेरीच्चोप० ४६० ग्लानुदिभ्यां डोः ४५६ जहातेः सन्वदा० ४६६ कणेः संप्रसारणं च ४५६ घर्मः ४७४ जीर्यतेः क्रिन्नश्च वः ४५५ कादिभ्यः कित् ४६७ घसेः किच्च ४५४ जीवेरातुः ४५९ किब्वचिप्रच्छि० ४६८ घृणिपृक्षिपार्णि० ४५८ जुषृभ्याम्मूथन् ४५९ कन् शिल्पिसंज्ञ० ४५८ चक्रिरम्योश्चो० ४६५ जतृषिभ्यां झच् . ४७५ क्षमेरुपधालोपश्च ४७३ चक्षेर्बहुल शिच्च ४६५ जूशस्तृजागृभ्यः किन् ४६१ क्षिपेः किच्च ४६१ चक्षेःशिच्च ४६४ जम्भूटचोदात्तः ४६३ क्षुधिपिशिमथि० ४६७ चङ्कणः कङ्कणश्च ४५८ जोरी च ४६७ खजेराकः ४७५ चतेरुरन् ४५५ जस्तूताड्डुः ४७१ खनिकष्यज्यखि० ४७३ चन्देरादेश्च छ० ४७४ डित्खनेर्मुट् सु० ४५३ खरुशङ्कुकुपायः ४७३ चन्द्रे मो डित् ४५५ णित्कासिपच्यर्तैः ४६४ तनिमद्भ्यां किञ्च
| पृष्ठाङ्काः सूत्रा० | पृष्ठाङ्काः सूत्रा० | पृष्ठाङ्काः सूत्रा० |
|---|---|---|
| ४६० तनोतेरनश्च वः | ४६४ दुतनिभ्यां दीर्घश्च | ४७३ नौ दीर्घश्च |
| ४७४ तनोतेर्ड उः सन्वच्च | ४५८ दुरिणो लोपश्च | ४७१ नौ व्यो यलोपः पू० |
| ४६४ तन्वर्तिभ्यां क्सरन् | ४५६ दृणातेः पुग्घ्रस्वश्च | ४६९ नौ वञ्जेर्घिन् |
| ४५६ तमिदिशिविदिमां० | ४७२ दृगातेर्ह्रस्वश्च | ४६१ नौ सदेः |
| ४६९ तमेरुक्तृत्राद्विश्च | ४६६ दृदलिभ्यां भः | ४६३ नौ सदेर्डिच्च |
| ४७५ तरतेर्डिः | ४५१ दृशिनिजनिकरि० | ४६३ नौ हः |
| ४५६ तरल्यादिभ्यश्च | ४७३ देशे ह च | ४५४ पः किच्च |
| ४५९ तल्पिशुल्बिभ्यां च | ४५९ द्यतेः | ४६७ पच एलिमच् |
| ४५३ तवीर्गद्धा | ४६१ द्युतेरिसिन्नादेश्च जः | ४५९ पचिनशोर्णुकन्क्० |
| ४६५ ताडेर्णिलुक्च | ४५९ दुदाक्षिभ्यामिनन् | ४७४ पचिमच्योरिच्चो० |
| ४६२ तिजेर्दीर्घश्च | ४५१ धान्ये नित् | ४७३ पचिवचिभ्यां सुट् च |
| ४५८ तिथपृष्ठगूथयूथ० | ४६२ धापृवस्यज्यतिभ्यो० | ४६० पणेरिज्यादेश्च वः |
| ४६६ तुषारादयश्च | ४७० धाप्योः संप्रसारणं च | ४६७ पतस्थ च |
| ४६३ तृणाख्यायां चित् | ४६२ धेट इच्च | ४५४ पतिकठिकुठि० |
| ४६० तृन्तृचौ शंसिक्षदा० | ४६० धृषेर्धिषू च सं० | ४५६ पतिचण्डिभ्यामालञ् |
| ४६२ तृषिक्षुषिरसि० | ४६३ धेट इच्च | ४५६ पतेरङ्गन्पक्षिशि |
| ४७२ तृंदेः क्नो हलोपश्च | ४५९ ध्मो धम च | ४६४ पतेरश्च लः |
| ४६५ तृभ्रूवहिवासिभासि० | ४६१ नजि च नन्देः | ४६८ पतेरत्रिन् |
| ४५६ त्यजितिनयिजिभ्यो० | ४५७ नजि अहातेः | ४७२ पदिप्रथिभ्यां नित् |
| ४५५ त्रौ डुद् च | ४५५ नजि लम्भेर्नलोपश्च | ४७३ पयसि च |
| ४५१ त्रौ रश्च लः | ४५३ नजि व्यथेः | ४६७ परमे कित् |
| ४६३ त्रौ रश्च लो वा | ४७३ नजि इन एह् च | ४५९ परौ व्रजेः पः पदान्ते |
| ४७४ दधातैर्यन्नुद् च | ४६४ नञ्याप इट् च | ४६४ पर्जन्यः |
| ४७२ दमेरुनसिः | ४६० नप्तृनेष्टृत्वष्टृहोट्ट० | ४७२ पातेर्डुम्सुन् |
| ४६० दमेर्डोसिः | ४६१ नयेतेर्डिच्च | ४७३ पातेरतिः |
| ४५५ दरिद्रातेर्यलोपश्च | ४७२ नहोर्दीवि मश्च | ४६८ पातेर्डितिः |
| ४६८ दल्मिः | ४७४ नहेर्हलोपश्च | ४७२ पातर्बले जुट् च |
| ४७३ दंशेश्च | ४७० नहो भश्च | ४५८ पातुतुदिव्रांदरिचि० |
| ४७३ दंसेष्टटनौ० | ४७१ नामन्सीमन्वो० | ४७० पांद् च |
| ४७५ दहेर्गेा लोपो० | ४५२ नावश्चेः | ४६१ पानीविषिभ्यः पः |
| ४७२ दादिभ्यश्छन्दसि | ४५८ निन्देर्नलोपश्च | ४५६ पारयतेरोजिः |
| ४६३ दाभाभ्यां नुः | ४६८ नियो मिः | ४६७ पिनाकादयश्च |
| ४६४ दिविवाय्यः | ४५८ निशीथगोपीथा० | ४६१ पिवतेस्थुक् |
| ४६१ दिवेर्वः | ४७३ नुवो धुट् च | ४६४ पिशेः किच्च |
| ४६५ दिवः कित् | ४५५ नृतिशृभ्योः क्रूः | ४६८ पीयेरूषन् |
| ४७१ दिवेर्युवच्च | ४६४ पीयुक्षणिभ्यां० | |
| ४६८ दिवो ढ़ेल्डीधिश्च० | ||
| ४६६ दीङो नुट् च | ||
| ४६९ दुंकोकुक्व च |