भारतकोश
संग्रह पर लौटें

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

( १६ )

अन्त में वक्तव्य तथा विशेष वचन दिये गये हैं, जो ग्रन्थ के आशय को स्पष्ट करने में सहायक होंगे। यद्यपि 'अष्टांगहृदय' में ग्रन्थकार ने तन्त्रयुक्तियों का उल्लेख नहीं किया है जिसका अष्टांगसंग्रह में उल्लेख हुआ है। अतः उनका परिगणन मात्र हमने यथाश्रम अपने वक्तव्य में कर दिया है। औषधनिर्माण प्रसंग में जहाँ-जहाँ आवश्यक समझा गया वहाँ-वहाँ औषध द्रव्य परिमाण तथा उसके निर्माण-विधि का भी उल्लेख कर दिया गया है। प्रस्तुत 'निर्मला' व्याख्या की ये विशेषताएँ हैं।

अष्टांगहृदय एक संग्रह-ग्रन्थ है। इसमें चरक, सुश्रुत, अष्टांगसंग्रह के तथा अन्य अनेक प्राचीन आयुर्वेदीय ग्रन्थों से उद्धरण लिये गये हैं। वाग्भट ने अपने विवेक से अनेक प्रसंगोचित विषयों का प्रस्तुत ग्रन्थ में समावेश किया है, यही कारण है कि इस ग्रन्थ का रूप अद्यतन बन पड़ा है। चरक आदि प्राचीन तन्त्रकारों ने जिन विषयों का सामान्य रूप से वर्णन किया था, उन्हें वाग्भट ने प्रमुख रूप देकर पाठकों का इस और विशेष ध्यानकर्षण किया है; जैसे—रक्तविकारों में रक्तनिर्हरण (सिरावेध, फस्द खोलना) एक महत्त्वपूर्ण चिकित्सा है। वातविकारों में आयुर्वेदीय विधि से बस्तित-प्रयोग करना अपने में एक दायित्वपूर्ण चिकित्सा है। जिसकी आज का चिकित्सक समाज प्रायः उपेक्षा कर बैठता है। शिलाजतु प्रयोग—शास्त्रीय विधि से इसका दीर्घकाल तक सेवन करना तथा कराना चाहिए। पथ्य-अपथ्य का विचार करके किया गया इसका प्रयोग रोग को नष्ट करके दीर्घायु प्रदान करता है। अग्रद्वयसंग्रह—यह (अ.हू.उ. ४०।४८-५८) प्रमुख रोगों में हितकर है। भूल किसी से भी हो सकती है, क्योंकि कहा गया है—'प्रमादो धीमतामपि'। अतः प्रामादिक अंशों को छोड़कर महत्त्वपूर्ण विषयों का ग्रहण करना विद्वानों का कर्तव्य है।

आभार—प्रस्तुत व्याख्या लिखते समय मेरे सामने श्रीअरुणदत्त, श्रीहेमद्रि कृत व्याख्याएँ तथा श्रीहरि शास्त्री द्वारा संगृहीत पाठभेद एवं टिप्पणियों से युक्त निर्णयसागरीय अष्टांगहृदय तथा पूज्य गुरुवर्य स्व० लालचन्द्रजी वैद्य की व्याख्यायुक्त अष्टांगहृदय था। इन सबसे मुझे प्रेरणा मिली, तदर्थ उन सबके प्रति मैं नतमस्तक हूँ।

आत्रेयकल्प सम्प्रति दिवंगत पीयूषपाणि गुरुवर्य पण्डितप्रवर लालचन्द्रजी वैद्य, प्रधानाचार्य श्रीअर्जुन आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी का आभार मैं किन शब्दों द्वारा प्रकट करूँ, जिनकी स्नेह-सुधा से छात्रावस्था में सिंचित मेरा शरीर, ज्ञानामृत से आप्लावित मेरा उत्तमांग तथा अमोघ आशीर्वादों से मेरा भूत, वर्तमान एवं भविष्यत् संवर्धित एवं परिरक्षित है, उनके प्रति सदैव नतमस्तक रहना ही मेरी शोभा है।

व्याकरण में पतञ्जलि, न्याय में गौतम, वैशेषिकदर्शन में कण्ठा, सांख्य में कपिल, मीमांसा में जैमिनि, छन्दःशास्त्र में पिंगलमुनि, साहित्य में भास एवं कालिदास के प्रतिस्पर्धी, पाश्चात्य साहित्य के विशेषज्ञ महाकवि पण्डितप्रवर बसन्त च्यम्बक शेबडे का भी मैं अधर्मण हूँ। जिन्होंने विविध शास्त्रों के उद्भट विद्वान् वाग्भट की प्रस्तुत कृति में स्थान-स्थान पर आये हुए व्याकरण सम्बन्धी पदों को स्पष्ट कर मेरा पथ प्रशस्त किया।

इस अवसर पर कुशकाय किन्तु अदम्य उत्साह-सम्पन्न अपनी सहधर्मिणी के स्वास्थ्थ सम्पन्न दीर्घायुष्य की कामना करता हूँ। जिनके सहयोग से मैं आज तक का साहित्य सृजन कर सका और भविष्य में भी कुछ कर सकूँ, यही साम्बसादाशिव से मेरी करबद्ध प्रार्थना है।

अन्त में प्रस्तुत अष्टांगहृदय के साज-सज्जा पूर्ण प्रकाशन में होने वाले व्ययभार आदि की चिन्ता न करके इसे यथासम्भव शुद्ध छापने में दत्तावधान चौखम्बा सुरभारती परिवार, वाराणसी ने जो तत्परता दिखायी है, तदर्थ उन्हें अनेकानेक साधुवाद देते हुए उनकी श्रीवृद्धि एवं यशोवृद्धि की कामना करता हूँ। इस ग्रन्थ के प्रूक-संशोधन में श्री योगेशकुमार पण्ड्या ने मनोयोगपूर्वक कार्य किया है, एतदर्थ वे धन्यवादार्ह हैं।

विदुषां विधेयः

डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी

विषयानुक्रमणिका

सूत्रस्थानम्

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
( १ ) आयुष्कामीयाध्यायःरोग की परीक्षा१८
मंगलाचरणदेश-भेदों का वर्णन१८
आयुर्वेद का प्रयोजनभूमिदेश का वर्णन१९
आयुर्वेदावतरणकाल के भेद१९
अष्टांगहृदय का स्वरूपऔषध के भेद२०
आयुर्वेद के आठ अंगशारीरिक दोषों की चिकित्सा२०
दोषों का वर्णनमानसिक दोषों की चिकित्सा२०
विकृत-अविकृत दोषचिकित्सा के चार पाद२०
दोषों के स्थान एवं प्रकोपकालवैद्य के चार लक्षण२१
वय आदि के अनुसार कालऔषध-द्रव्य के चार लक्षण२१
दोषों का अग्नि पर प्रभावपरिचारक ( उपस्थाता ) के चार लक्षण२१
दोषों का कोष्ठ पर प्रभावरोगी के चार लक्षण२१
दोषों से गर्भप्रकृति का वर्णन१०साध्य-असाध्य के अनुसार व्याधि के भेद२२
वातदोष के गुण१०सुखसाध्य रोग के लक्षण२२
पित्तदोष के गुण१०कष्टसाध्य रोग के लक्षण२३
कफदोष के गुण११याप्य रोग के लक्षण२३
संसर्ग-सन्निपात परिभाषा११प्रत्याख्येय रोग के लक्षण२३
धातुओं का वर्णन११त्याज्य रोगी२३
मलों का वर्णन११अध्याय-संग्रह वर्णन२४
दोष, धातु, मलों की वृद्धि एवं क्षय१२सूत्रस्थान के अध्याय२४
रसों का वर्णन१२शारीरस्थान के अध्याय२४
रसों का वात आदि पर प्रभाव१३निदानस्थान के अध्याय२४
द्रव्य का वर्णन१३चिकित्सास्थान के अध्याय२५
वीर्य का वर्णन१४कल्प-सिद्धिस्थान के अध्याय२५
विपाक का वर्णन१४उत्तरस्थान के अध्याय२५
द्रव्य के गुणों का वर्णन१५अष्टांगहृदय के छः स्थान२५
रोग एवं आरोग्य के कारण१५( २ ) दिनचर्याध्यायः
रोग-आरोग्य में भेद१६ब्राह्ममुहूर्त में जागना२६
रोगों के दो भेद१६दत्तवन का विधान२६
दो प्रकार के रोगाधिष्ठान१७दत्तवन करने की विधि२७
मानसिक दोषों का परिचय१७दत्तवन का निषेध२७
रोगी की परीक्षा१७अञ्जन-प्रयोग२८

२ अ० भू०

( १८ )

विषय

रसाजन-प्रयोगविधि नय्य आदि सेवन-निर्देश ताम्बूलसेवन-विधि ताम्बूलसेवन-निषेध अभ्यंगसेवन-विधान अभ्यंग के प्रमुख स्थान अभ्यंग का निषेध व्यायाम का विधान व्यायाम का निषेध अर्धशक्ति एवं काल-निर्देश शरीरमर्दन-निर्देश अतिव्यायाम से हानि व्यायाम आदि का निषेध उबटन के गुण स्नान के गुण उष्ण-शीत जलप्रयोग स्नान का निषेध भोजन आदि कर्तव्य सुख का साधन धर्म मित्र-अमित्र सेवन-विचार पापकर्मों का त्याग अनुकूल व्यवहार-निर्देश समदृष्टिता का निर्देश सम्मान करने का निर्देश याचकों की सम्मान-विधि उपकार का निर्देश समभाव का निर्देश मधुरभाषण-निर्देश भाषण-विधि विचारों को गुप्त रखें परच्छन्दानुवर्तन इन्द्रियव्यवहार-विधि विवर्ग-विरोध का निषेध सभी धर्मों का आचरण शरीरशुद्धि के प्रकार रत्न आदि का धारण छाता आदि धारण दण्ड आदि धारण गमन-निर्देश

पृष्ठांक

२८ २८ २८ २९ २९ ३० ३० ३० ३१ ३१ ३१ ३१ ३२ ३२ ३२ ३३ ३३ ३३ ३४ ३४ ३४ ३४ ३५ ३५ ३५ ३५ ३५ ३५ ३६ ३६ ३६ ३६ ३६ ३६ ३६

विषय

निषिद्ध कार्य छौंक आदि करने की विधि आंगिक चेष्टाओं का निषेध शारीरिक आदि चेष्टाओं की मात्रा १. अन्य सदाचार २. अन्य सदाचार मद्यविक्रय आदि का निषेध अन्य निषिद्ध कर्म अन्य सदुपदेश सदाचारसूत्र विचार-पद्धति सदवृत्त का उपसंहार

( ३ ) ऋतुचर्याध्यायः

छः ऋतुएँ उत्तरायण तथा आदानकाल अग्निगुण-प्रधान आदानकाल विसर्गकाल-दक्षिणायन विसर्गकाल-परिचय बल का चयापचय हेमन्त ऋतुचर्या प्रातःकाल के कर्तव्य स्नान आदि की विधि शीतनाशक उपाय निवास-विधि शिशिर ऋतुचर्या वसन्त ऋतुचर्या मध्याह्नचर्या वसन्त ऋतु में अपथ्य ग्रीष्म ऋतुचर्या सेवनीय पदार्थ सत्सेवन-विधि मद्यसेवन-विधि मद्यपान का निषेध भोजन-विधान पेय-विधान रात्रि में दुग्धपान-विधि मध्याह्नचर्या १. शयन-विधान २. शयन-विधान

पृष्ठांक

३७ ३७ ३७ ३७ ३७ ३८ ३८ ३८ ३९ ३९ ३९ ४० ४० ४१ ४२ ४२ ४२ ४३ ४३ ४४ ४४ ४४ ४५ ४५ ४६ ४६ ४६ ४६ ४७ ४७ ४७

( १९ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
रात्रिचर्या४८शोधन की आवश्यकता५९
मनोहर वातावरण४८संशोधन कर्म की प्रशंसा५९
वर्षा ऋतुचर्या४८रसायन, वाजीकरण योगों का प्रयोग६०
शरीर-शुद्धि४८शोधनोत्तर चिकित्सा६०
सैकनीय विहार४९चिकित्सा का फल६०
त्याज्य विहार४९आगन्तुज रोग६१
शरद् ऋतुचर्या४९निजागन्तुज रोगों का निरोध एवं शमन६१
आहार-विधि५०शोधन योग्य ऋतुएँ६२
हंसोदकसेवन-निर्देश५०स्वस्थ रहने के उपाय६२
विहार-विधि५०( ५ ) द्रवद्रव्यविज्ञानीयाध्यायः
अपथ्य-निषेध५०अथ तोयवर्गः
संक्षिप्त ऋतुचर्या५०गंगा का जल६४
रससेवन-निर्देश५२गंगाजल का परिचय६४
ऋतुसन्धि में कर्तव्य५२सामुद्र जल६५
( ४ ) रोगानुत्पादनीयाध्यायःपानीय जल६५
वेगों को न रोकने का निर्देश५४न पीने योग्य जल६५
अपानवायु को रोकने से हानि५४१. नदीजल का वर्णन६६
मलवैगरोधज रोग५५२. नदीजल का वर्णन६६
मूत्रवैगरोधज रोग५५३. नदीजल का वर्णन६६
उक्त रोगों की चिकित्सा५५कूप आदि का जल६७
मूत्रवैगरोधज रोग-चिकित्सा५५जलपान-विधि६७
उदगारवैगरोधज रोग-चिकित्सा५५जलपान का प्रभाव६७
छाँक के वेग को रोकने से हानि५६शीतल जलपान के लाभ६७
छिन्कावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६उष्ण जलसेवन के लाभ६८
तृषावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६श्रुतशीत एवं बासी जल६८
क्षुधावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६मारियल का जल६८
निद्रावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६उत्तम एवं अधम जल६८
कासवेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७अथ क्षीरवर्गः
श्वमशवासवेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७सामान्य दूध के गुण६८
जुम्भावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७गाय के दूध के गुण६९
अश्ववेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७भैंस के दूध के गुण६९
छर्दिवेगनिरोधज रोग५८बकरी के दूध के गुण६९
छर्दिवेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५८ऊँटनी के दूध के गुण७०
शुक्र के वेग को रोकने के कारण उत्पन्न रोग५८मानुषी दूध के गुण७०
शुक्र के वेग को रोकने के कारण उत्पन्नभेड़ी के दूध के गुण७०
रोगों की चिकित्सा५८हथिनी के दूध के गुण७०
वेगरोधी के असाध्य लक्षण५८एकशफ दूध के गुण७०
सामान्य चिकित्सा५९आम-श्रुत दुग्ध-गुण७०
धारणीय वेग५९धारोष्ण दूध के गुण७०

( २० )

विषय

दक्षिण-वर्णन तक्र का वर्णन मस्तु का वर्णन नवनीत-वर्णन दूध का नवनीत घृत के गुण पुराने घृत के प्रयोग किलाट आदि का वर्णन उत्तम-अधम विचार

अथ इक्षुवर्गः

ईख के रस का वर्णन अगले भाग का रस यान्त्रिक रस के भेद ईख के भेद एवं गुण शतपर्वक आदि ईखों के गुण फाणित के गुण गुड़ के गुण पुराने-नये गुड़ के गुण मत्स्यण्डिका आदि के गुण यासशर्करा के गुण सभी शर्कराओं के गुण शर्करा की उत्तमता

अथ मधुवर्गः

मधु का वर्णन उष्ण मधुसेवन का निषेध संशोधन में मधु-प्रयोग

अथ तैलवर्गः

सानान्य तैल का वर्णन एण्डतेल के गुण सरसों का तेल बहेड़े की गिरी का तेल नीम की गिरी का तेल अतसी-कुसुम्भ तेल प्राणिज स्नेह

अथ मद्यवर्गः

मद्य का वर्णन नया एवं पुराना मद्य मद्य का निषेध विभिन्न सुराओं का वर्णन

पृष्ठांक

विषय

७१ वाहणी-परिचय ७१ यव ( जो से निर्मित ) सुरा ७२ बहेड़ा की सुरा ७२ कौहली सुरा ७२ मधूलक सुरा ७३ अरिष्ट-परिचय ७३ मुनक्का ( मार्ट्रिक ) आसव ७३ खाजूँ, शार्कर आसव ७३ गुड़-निर्मित आसव सीधु का वर्णन

७४ मध्वासव का वर्णन ७४ शुक्त का वर्णन ७४ गुड़ आदि शुक्त ७४ कन्द आदि शुक्त ७५ शाण्डाकी-वर्णन ७५ धान्याम्ल आदि का वर्णन ७५ सौवीरक तथा तुषोदक

अथ मूत्रवर्गः

मूत्रों का वर्णन

( ६ ) अत्रस्वरूपविज्ञानीयाध्यायः

अथ शूकधान्यवर्गः

७६ शूकधान्यों का वर्णन ८७ रक्तशालि का वर्णन ८७ क्रमशः गुणहीनता ८७ यवक आदि शालिधान्य ८७ व्रीहिधान्य का वर्णन ८७ सामान्य गुण वाले षष्ठिक ८८ अन्य व्रीहिधान्य-वर्णन ८८ तुणधान्यों का वर्णन ८८ प्रियंगुधान्य का वर्णन ८८ कोटोधान्य का वर्णन ८८ जौ का वर्णन ८९ अनुयव का वर्णन ८९ वंशज जौ का वर्णन ८९ गोधूम का वर्णन ८९ नन्दीमुखी का वर्णन

अथ शिम्बोधान्यवर्गः

८९ शिम्बोधान्य-परिचय ९० मूँग, मटर, राजमाष

पृष्ठांक

८१ ८१ ८१ ८१ ८१ ८१ ८२ ८२ ८२ ८३ ८३ ८३ ८३ ८४ ८४ ८४ ८४

( २१ )

विषय

कुलथी का वर्णन १० सेम का वर्णन १० माष ( उड़द ) का वर्णन १० काकाण्डोला एवं केवाँच १० तिल का वर्णन ११ अतसी एवं कुसुम्भ बीज ११ माष, यवक-वर्णन ११ धान्य-विवेचन ११

अथ कृतान्नवर्गः

पकाये गये अन्नों का वर्णन १२ पेया का वर्णन १२ विलेपी का वर्णन १२ औदन ( भात ) का वर्णन १३ संक्षिप्त निर्देश १३ मांसरस के गुण १३ मूँग का यूप १३ कुलथी का यूप १३ तिल, पिण्याक आदि १३ रसाला के गुण १३ पानक ( शीतल पेय ) के गुण १४ लाजा का वर्णन १४ पृथुक ( च्यूड़ा ) का वर्णन १४ धाना का वर्णन १४ सतुओं का वर्णन १५ पिण्याक-वर्णन १५ वेसवार-वर्णन १५ मूँग आदि के वेसवार १५ अपूपों का वर्णन १६

अथ मांसवर्गः

मुग-परिचय १६ विष्किर-परिचय १६ प्रतुद-परिचय १७ बिलेशय-परिचय १७ प्रसहमुग-पक्षी १७ महामुग-परिचय १८ जलचर पक्षी १८ मत्स्य-परिचय १८ आठ प्रकार के मांस १८ बकरी-भेड़ का वर्णन १८

पृष्ठांक

१० शेष प्राणियों का निर्णय १८ मांसों का वर्णन १९ शशकमांस के गुण १९ वर्तक आदि के मांस १९ मोर का मांस १९ कुक्कुट का मांस १९ पालतू मुर्गा का मांस १९ क्रकर एवं उपचक्रक के मांस १९

काणकपोतक का मांस १९ चटक का मांस १९ आठों मांसों का वर्णन १९ महामुर्गों के मांस १०० बकरा का मांस १०० भेड़ का मांस १०० गाय का मांस १०० भैंसा का मांस १०० सूअर का मांस १०० मत्स्य का मांस १०० चिलिचिम मत्स्य का मांस १०० लाव आदि का वर्णन १०१ भक्ष्यमांस-वर्णन १०१ अभक्ष्यमांस-वर्णन १०१ विशिष्ट अवयवों के मांस १०१

अथ शाकवर्गः

शाकों का वर्णन १०२ सुनिष्पणक का वर्णन १०२ राजक्षव का वर्णन १०२ वास्तुक का वर्णन १०२ काकमाची का वर्णन १०२ चांगेरी का वर्णन १०२ पटोल आदि शाक १०३ परबल का शाक १०३ बृहतीद्रव्य का वर्णन १०३ अडूसा का वर्णन १०३ करेला का वर्णन १०३ बैगन का वर्णन १०३ करीर का वर्णन १०३ तोरई ( कोशातकी ) तथा बाकुची १०४ ( भवल्युज ) का शाक १०४

( २२ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
तण्डुलीय का वर्णन१०४उत्तम-अधम निर्णय११०
मुआतक का वर्णन१०४अथ फलवर्गः
पालंकी का वर्णन१०४द्राक्षा-परिचय१११
उपीदिका का वर्णन१०४दाडिमफल का वर्णन१११
चक्षु का वर्णन१०४केला आदि फलों का वर्णन१११
विदारीकन्द का वर्णन१०४ताल आदि फलों का वर्णन११२
जीवन्ती का वर्णन१०४बिल्वफल का वर्णन११२
कूम्भाण्ड आदि का वर्णन१०५कपित्थफल का वर्णन११२
त्रपुस का वर्णन१०५जामुनफल का वर्णन११२
तुम्ब का वर्णन१०५आम का वर्णन११३
शीर्णवृन्त-फल-शाक१०५वृक्षाम्ल का वर्णन११३
मुणाल आदि का वर्णन१०५शमीफल का वर्णन११३
कलम्ब आदि का वर्णन१०६पीलुफल का वर्णन११३
चिल्ली शाक का वर्णन१०६मातुलुंग ( बिजौरानीबू ) का वर्णन११३
तकारी आदि शाक का वर्णन१०६भिलावा का वर्णन११४
पुनर्नवा एवं कालशाक१०६पारेवत का वर्णन११४
करञ्ज का शाक१०६आरुक्फल का वर्णन११४
शतावरी का शाक१०६कच्चे दाख आदि फल११४
वंशकरीर का शाक१०७करमर्द ( करौदा ) के कच्चे फल११५
पत्तूर का शाक१०७कोल, कर्कन्धु-वर्णन११५
कासमर्द का शाक१०७इमली एवं बैर के सूखे फल११५
कुसुम्भ का शाक१०७बड़हर के फल११५
सरसों ( सर्षप ) के पत्तों का शाक१०७त्याज्य धान्य, शाक एवं फल११५
बालमूली का शाक१०७अथोषधवर्गः
वृद्धमूली का शाक१०७लवण सामान्य के गुण११५
स्नेहसिद्ध मूली का शाक१०७संधानमक के गुण११६
सूखी मूली का शाक१०८सौवर्चलनमक के गुण११६
कच्ची मूली का शाक१०८विड़नमक के गुण११६
पिण्डालु का शाक१०८सामुद्र नमक के गुण११६
कुटेरक आदि शाक१०८औदुभिद् नमक के गुण११७
सुरस का शाक१०९कृष्णलवण के गुण११७
सुमुख का शाक१०९रोमकलवण के गुण११७
धानिया ( आर्दिवा ) का शाक१०९सामान्य निर्देश११७
लशुनकन्द का शाक१०९यवक्षार के गुण११७
पलाण्डु का शाक१०९सभी प्रकार के क्षार११७
गूञ्जनक का शाक१०९हींग का वर्णन११८
सूरण का शाक११०हरीतकी का वर्णन११८
भूकन्द का शाक११०आमलक का वर्णन११८
शाकों में उत्तरोत्तर गुहता११०बिभीतक का वर्णन११८

( २३ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
त्रिफल का वर्णन११९दोषों को दूषित न करें१२९
त्रिजात एवं चतुर्जात११९तीन उपस्तम्भ१२९
मरिच के गुण११९आहार नामक उपस्तम्भ१२९
पिप्ली के गुण११९निद्रा नामक उपस्तम्भ१३०
सोठ के गुण११९निद्रा का अभाव१३०
आद्रक के गुण११९निद्रा के गुण-दोष१३०
त्रिकटु के गुण११९निद्रा सम्बन्धी विचार१३०
चव्य तथा पीपलमूल१२०दिन में न सोने का निर्देश१३०
चित्रक के गुण१२०अकालशयन से हानि१३१
पञ्चकोल के गुण१२०चिकित्सा-निर्देश१३१
बृहत्पञ्चमूल के गुण१२०निद्रानाश के लक्षण१३१
लघुपञ्चमूल के गुण१२०निद्रासेवन-निर्देश१३१
मध्यमपञ्चमूल के गुण१२०पूर्ण निद्राप्राप्ति-विधि१३१
जीवनपञ्चमूल के गुण१२०ब्रह्मचर्य नामक उपस्तम्भ१३१
तुणपञ्चमूल के गुण१२१स्त्रीसहवास का वर्णन१३२
( ७ ) अन्नरक्षाध्यायः
प्राणाचार्य की नियुक्ति१२२मैथुन के अयोग्य स्थिति१३३
चिकित्सक का कर्तव्य१२२मैथुन सम्बन्धी अन्य निर्देश१३३
विषैले भात के लक्षण१२२विपरीत व्यवहार का फल१३३
विषैले व्यञ्जनों के लक्षण१२३संयम का महत्त्व१३३
विषैले मांस आदि के लक्षण१२३मैथुनोत्तर कर्तव्य१३४
विषदाता के लक्षण१२३राजा आदि का कर्तव्य१३४
विषैले अन्न की परीक्षा१२४( ८ ) मात्रादशितियाध्यायः
विषैले अन्न का प्रभाव१२४आहारमात्रा का वर्णन१३५
स्पर्शज विषचिकित्सा१२४मात्रा में गुरु-लघु विचार१३५
मुख में विष का प्रभाव१२५हीनमात्रा वाले आहार से हानि१३६
आमाशयगत विष के लक्षण१२५अधिक मात्रा वाले आहार से हानि१३६
पक्वाशयगत विष के लक्षण१२५विमूचिका के लक्षण१३६
उक्त दोनों की चिकित्सा१२५अलसक की परिभाषा१३६
ताम्र एवं स्वर्ण भस्म-प्रयोग१२५विमूचिका की परिभाषा१३६
स्वर्णभस्म का प्रभाव१२५विमूचिका के लक्षण१३६
विरोधी आहार१२६अलसक का वर्णन१३७
आनुपदेशीय मांस१२६दण्डालसक का वर्णन१३७
दुग्धपान-विचार१२६आमविष का वर्णन१३७
विरुद्ध द्रव्यों के लक्षण१२६आमदोष की चिकित्सा१३७
विरोधी आहारों का सेवन१२८पाण्डिदाह-प्रयोग१३८
अपथ्य का त्याग एवं पथ्य का सेवन१२९अन्य उपचार१३८
सहसा त्याग का निषेध१२९अपतर्पण-प्रयोग१३९
दोषों का ह्रास, गुणों की वृद्धि१२९हेतुविपरीत आदि चिकित्सा१३९
विपरीतार्थकारी चिकित्सा१३९

( २४ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
आमाजीर्ण के लक्षण१३९द्रव्य-वर्णन की समाप्ति१४८
विष्टद्र्धाजीर्ण के लक्षण१३९रसवर्णन-प्रस्ताव१४८
विद्र्धाजीर्ण के लक्षण१३९द्रव्यगत वीर्य-वर्णन१४८
चिकित्सासूत्र१३९चरकसम्मत वीर्य१४८
विलम्बिका के लक्षण१३९वाग्भट का मत१४८
रसशेषाजीर्ण-चिकित्सा१४०रस आदि में वीर्य की श्रेष्ठता१४८
अजीर्ण का सामान्य लक्षण१४०वीर्य सम्बन्धी अन्य मत१४८
अजीर्ण के विविध कारण१४०वाग्भट का समर्थन१४८
समशन आदि के लक्षण१४०वीर्य के लक्षण१४९
शास्त्रीय भोजन-विधि१४१विपाक का वर्णन१४९
त्याज्य भोजन-विधि१४१विपाकज रस-क्षेद१४९
असेवनीय आहार१४१रस, वीर्य, विपाक, प्रभाव१४९
सेवनीय आहार१४२द्रव्य का स्वाभाविक बल१५०
रात में सेवनीय पदार्थ१४२रस आदि का स्वाभाविक बल१५०
अन्य पदार्थों को खाने की विधि१४२प्रभाव का वर्णन१५०
आमाशय के चार भाग१४२द्रव्य आदि के कर्म१५०
विभिन्न प्रकार के अनुपान१४२भिन्नता के उदाहरण१५०
उत्तम अनुपान१४३( १० ) रसभेदीयाध्यायः
अनुपान-सेवन का फल१४३मधुर आदि रसों की उत्पत्ति१५२
१. अनुपान का निषेध१४३मधुररस के लक्षण१५२
२. अनुपान का निषेध१४३अम्लरस के लक्षण१५२
३. अनुपान का निषेध१४३लवणरस के लक्षण१५३
भोजन-समय का निर्देश१४४तिक्तरस के लक्षण१५३
( ९ ) द्रव्यादिविज्ञानीयाध्यायःकटुरस के लक्षण१५३
द्रव्य की प्रधानता१४५कषायरस के लक्षण१५३
द्रव्य का स्वरूप१४५रसों के स्वरूप१५३
द्रव्य की उत्पत्ति१४५रसों के कर्म१५३
उत्पत्ति के कारण१४५मधुररस के कर्म१५३
नामकरण में कारण१४५अम्लरस के कर्म१५३
द्रव्य में अनेक रस१४६लवणरस के कर्म१५४
अनेक दोषज रोग१४६तिक्तरस के कर्म१५४
द्रव्यगत गुरु आदि गुण१४६कटुरस के कर्म१५४
पार्थिव द्रव्य का वर्णन१४६कषायरस के कर्म१५४
आयु द्रव्य का वर्णन१४६मधुरस्कन्ध के द्रव्य१५५
आग्नेय द्रव्य का वर्णन१४७अम्लस्कन्ध के द्रव्य१५५
वायव्य द्रव्य का वर्णन१४७लवणस्कन्ध के द्रव्य१५५
नाभस द्रव्य का वर्णन१४७तिक्तस्कन्ध के द्रव्य१५५
औषधमय द्रव्य१४७कटुस्कन्ध के द्रव्य१५५
द्रव्यों की विशेषता१४७कषायस्कन्ध के द्रव्य१५६

( २५ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
मधुररस का विशिष्ट वर्णन१५६स्वेदक्षय के लक्षण१६४
अम्लरस का विशिष्ट वर्णन१५६अन्य मलों के क्षय-लक्षण१६४
लवणरस का विशिष्ट वर्णन१५६वृद्धि एवं क्षय-निर्देश१६५
तिक्त एवं कटु रसों का विशिष्ट वर्णन१५६पुरीष आदि मलों का महत्त्व१६५
कषायरस का विशिष्ट वर्णन१५६वात आदि के विशिष्ट स्थान१६५
रसों का वर्णन१५६वातज रोग प्रतीकार१६५
रसों के ६३ भेद१५७वृद्धरक्तादि की चिकित्सा१६५
रससंयोगों के असंख्य भेद१५८मलों की वृद्धि एवं क्षय की चिकित्सा१६६
( ११ ) दोषादिविज्ञानीयाध्यायः
शरीर के आधार१६०धातुओं की वृद्धि-क्षय१६६
प्रकृतिस्य दोषों के कर्म१६०वृद्धि-क्षय का कारण१६६
रस आदि धातुओं के कर्म१६०वृद्धि-क्षय का अन्य स्वरूप१६७
मलों के प्रमुख कर्म१६१दोष, धातु, मल एवं स्रोतों की दुष्टि१६७
वातवृद्धि के लक्षण१६१मलायनों का परिचय१६७
पित्तवृद्धि के लक्षण१६१ओजस् का वर्णन१६७
कफवृद्धि के लक्षण१६१ओजःक्षय के कारण, लक्षण एवं चिकित्सा१६७
रक्तवृद्धि के लक्षण१६१ओजोवृद्धि के लक्षण१६८
मांसवृद्धि के लक्षण१६२वृद्धि-क्षय का चिकित्सासूत्र१६८
मेदोवृद्धि के लक्षण१६२द्वेष एवं प्रार्थना का कारण१६८
अस्थिवृद्धि के लक्षण१६२अवस्थानुसार दोषों के कर्म१६८
मज्जावृद्धि के लक्षण१६२दोषों को सम रखना१६९
शुक्रवृद्धि के लक्षण१६२( १२ ) दोषभेदोपाध्यायः
पुरीषवृद्धि के लक्षण१६२वात के प्रमुख स्थान१७०
मूत्रवृद्धि के लक्षण१६३पित्त के प्रमुख स्थान१७०
स्वेदवृद्धि के लक्षण१६३कफ के प्रमुख स्थान१७१
अन्य मलवृद्धि के लक्षण१६३वात के पाँच भेद१७१
वातदोष के क्षय-लक्षण१६३पाँच वातों का वर्णन१७१
पित्तदोष के क्षय-लक्षण१६३उदानवायु का वर्णन१७१
कफदोष के क्षय-लक्षण१६३व्यानवायु का वर्णन१७१
रसधातु के क्षय-लक्षण१६३समानवायु का वर्णन१७१
रक्तधातु के क्षय-लक्षण१६४अपानवायु का वर्णन१७२
मांसधातु के क्षय-लक्षण१६४पित्त के पाँच भेद१७२
मेदोधातु के क्षय-लक्षण१६४पाचकपित्त का वर्णन१७२
अस्थिधातु के क्षय-लक्षण१६४रञ्जकपित्त का वर्णन१७२
मज्जाधातु के क्षय-लक्षण१६४साधकपित्त का वर्णन१७२
शुक्रधातु के क्षय-लक्षण१६४आलोचकपित्त का वर्णन१७२
पुरीषक्षय के क्षय-लक्षण१६४भ्राजकपित्त का वर्णन१७३
मूत्रक्षय के क्षय-लक्षण१६४कफ का वर्णन१७३
अवलम्बक कफ का वर्णन१७३
वलेदक कफ का वर्णन१७३

( २६ )

विषय

बोधक कफ का वर्णन तर्पक कफ का वर्णन श्लेषक कफ का वर्णन उपसंहार वात के चय, कोप, शम का वर्णन पित्त के चय, कोप, शम का वर्णन कफ के चय, कोप, शम का वर्णन दोषों के चय का वर्णन दोषों के प्रकोप का वर्णन चय, कोप, शम का वर्णन चय आदि का विशेष वर्णन कालस्वभाव का वर्णन दोषों की व्याप्ति एवं निवृत्ति निदान, रूप, चिकित्सा-वर्णन रोगों की उत्पत्ति के कारण दोषों के प्रकोप के कारण हीनयोग आदि का वर्णन काल का वर्णन कर्म का वर्णन उपसंहार एवं रोगमार्ग बाहरी रोगमार्ग आभ्यन्तर रोगमार्ग मध्यम रोगमार्ग वातदोष के कर्म पित्तदोष के कर्म कफदोष के कर्म दोषलक्षण निर्वाचन का हेतु चिकित्सा में अभ्यास का महत्त्व रोगों के तीन भेद रोगों का परिचय त्रिविध रोग-चिकित्सा रोगों के दो भेद रोग-भेदों के नाम स्वतन्त्र रोग परतन्त्र रोग मलों का विचार दोषों का विचार चिकित्सासूत्र उपद्रवचिकित्सा-निर्देश

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विषय

रोगनामनिर्धारण-विचार दोषों का रोगकर्तृत्व चिकित्साविधि-निर्देश दूष्य आदि ज्ञान-निर्देश रोग की गुरुता-लघुता का विचार भ्रिषणबूब की निन्दा शूल का दुष्परिणाम चिकित्सक का कर्तव्य दोषभेदों का वर्णन दोषवृद्धि के तीन भेद संसर्ग के तीन भेद संसर्ग के छः भेद समस्त दोषवृद्धि के १३ भेद १३ भेदों के उदाहरण एक भेद का निर्देश पुनः छः भेद वृद्ध दोषों का योग क्षीण दोषों का योग वृद्धि, सम, क्षय भेद से छः क्षय-वृद्धि भेद से पुनः छः ६ भेद ६२ दोषभेद ६३वों भेद दोषों के अनन्त भेद

पृष्ठांक

१८० १८० १८१ १८१ १८१ १८१ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२ १८२

( १३ ) दोषोपक्रमणीयाध्यायः

वातदोष की चिकित्सा पित्तदोष की चिकित्सा कफदोष की चिकित्सा विषयोपसंहार चिकित्सा-निर्देश चिकित्सा का समय शुद्ध प्रयोग का परिचय दोषों का स्थानान्तर गमन दोषों का कोष्ठगमन पुनः रोगोत्पादन अन्य स्थानों में दोषप्रकोप चिकित्सा-निर्देश तिर्थगत दोष-चिकित्सा चिकित्सा-विधि साम-निराम दोषों के लक्षण

( २७ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
आम का वर्णन१८८स्थूलता से कृशता श्रेष्ठ१९५
आमसम्बन्धी मतान्तर१८८कृशता, स्थूलता-चिकित्सा१९५
सामदोष एवं सामरोग१८८कृशता चिकित्सा१९६
सामदोषों की चिकित्सा१८८मांस की महत्ता१९६
दोषनिर्हरण-विधि१८८स्थूलता-कृशता की चिकित्सा१९६
आसन्न दोष का निर्हरण१८९( १५ ) शोधनादिगणसंग्रहार्धध्यायः
दोषनिर्हरण-निर्देश१८९वमनकारक द्रव्य१९७
दोषनिर्हरण-विवेक१८९विरेचनकारक द्रव्य१९७
शोधन का काल१८९निर्हृणोपयोगी द्रव्य१९८
सहेतुक शोधनकाल१८९शिरोविरेचनोपयोगी द्रव्य१९८
शोधन का दृष्टिकोण१८९वातनाशक द्रव्य१९८
शोधन की विशिष्ट विधि१८९पित्तनाशक द्रव्य१९८
औषधसेवन के १० काल१९०कफनाशक द्रव्य१९८
रोगानुसार औषध-सेवनकाल१९०जीवनीय गण१९८
( १४ ) द्विविधोपक्रमणीयाध्यायःविदार्यादि गण१९८
चिकित्सा के दो भेद१९१सारिवादि गण१९९
सन्तर्पण तथा अपतर्पण१९१पद्माकादि गण१९९
तत्त्वों की प्रधानता१९१पुरुषकादि गण१९९
स्नेहन आदि का वर्णन१९१अञ्जनादि गण१९९
प्रत्येक के दो भेद१९१पटोलादि गण१९९
शोधन कर्म एवं उसके भेद१९२गुड्डुच्चादि गण१९९
शमन के लक्षण एवं उसके भेद१९२आररब्धादि गण१९९
बृंहण के लक्षण१९२असनादि गण२००
सन्तर्पण योग्य रोग-रोगी१९२वर्हणादि गण२००
सन्तर्पण-चिकित्सा के उपादान१९२ऊष्कादि गण२००
अपतर्पण योग्य रोग-रोगी१९२वौरतर्वादि गण२००
शोधन, शमन के योग्य रोग-रोगी१९३रोध्नादि गण२००
सन्तर्पण का निषेध१९३अर्कादि गण२००
अपतर्पण-निर्देश१९३सुरसादि गण२०१
सन्तर्पण के लाभ१९३मुष्ककादि गण२०१
अपतर्पण के लाभ१९४वत्सकादि गण२०१
योग, अतियोग, हीनयोग१९४वचादि गण२०१
उनके लक्षण१९४हरिद्रादि गण२०१
अतिस्थूलता आदि रोग१९४प्रियङ्गन्वादि गण२०१
चिकित्सासूत्र१९४अम्बच्छादि गण२०२
विशेष चिकित्सा१९४मुस्तादि गण२०२
विडंग्गादि योग१९४न्यग्रोधादि गण२०२
व्योषादियोग की फलश्रुति१९५एलादि गण२०२
कृशता आदि रोग१९५श्यामादि गण२०२

विषय

द्रव्यग्रहण -निर्देशि

गणोक्त द्र॒व्यों के प्रयोग

(१६ ) स्नेहविधिरध्यायः

स्नेहन एवं रूक्षण-वर्णन

चार प्रकार के स्नेह

घुत की प्रधानता

स्‍्नेहों के प्रमुख गुण

उत्तरोत्तर गुरुता

स्नेहयोगों के नाम

स्नेहनयोग्य व्यक्ति

स्नेहन के अयोग्य व्यक्ति

घृतस्नेह के योग्य व्यक्ति

तैलस्नेह के योग्य व्यक्ति

वसा-मज्जास्नेह

वसास्नेह का क्षेत्र

ऋतुभेद से स्नेह-निर्देश

दिन में स्नेहसेवन-निर्देश

शीतकाल में तैल-प्रयोग

रात्रि में घृतपान-विधान

कारण-भेद से रात्रि में घृतपान

स्नेहसेवन-विचार

स्नेहसेवन के भेद की युक्ति

स्नेहसेवन - प्रकार

, स्नेह की विचारणाएँ

विचारणा पर विचार

अच्छपेय के लाभ

स्नेहमात्रा-विचार

शोधनार्थ स्नेहमात्रा

शमनार्थ स्नेहमात्रा

बुंहणार्थ स्नेहपान- विधि

बृंहणस्नेहपान के योग्य व्यक्ति

स्नेहसेवन का प्रभाव

विविध स्नेहों के अनुपान

स्नेहपानार्थ आहार-विचार

स्नेहपानार्थ विहार-विचार

सर्वत्र त्याज्य कर्म

शमनस्नेहपान में उपचार

स्नेहपान की अवधि

सम्यक्‌ स्निग्ध पुरुष के लक्षण

है जछ ॥

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२०९

२०९

२०९

विषय

अतिस्निग्ध के लक्षण

मिथ्या स्निग्ध के लक्षण

स्नेहव्यापत्‌-चिकित्सा

विरूक्षण -निर्देश

स्वेदन आदि के प्रयोग

स्नेहन के पूर्व रूक्षण विधि

असात्म्य स्नेह की शक्ति

सद्यःस्नेहन का निर्देश

सात सद्यःस्नेहन-योग

लवण के गुण

स्नेहनयोगों का निषेध

कुष्ठादि के योग्य स्नेह

क्षीण पुरुषों के योग्य स्नेह

स्नेहसेवन से लाभ

( १७ ) स्वेदविधिरध्याय:

स्वेदन के चार भेद

तापस्वेद का वर्णन

उपनाहस्वेद का वर्णन

बन्धनद्रव्य - निर्देश

ऊष्मस्वेद का वर्णन

द्रवस्वेद का वर्णन

अवगाहनस्वेद -विधि

स्वेदन-विधि

स्वेदन-विधिभेद

दोषभेद से स्वेदन

स्थानभेद से स्वेदन

अन्यत्र स्वेदन-निर्देश

स्वेदन का सम्यक्‌ योग

स्वेदन का अतियोग

स्वेदन एवं स्तम्भन औषध

स्तम्भन के सम्यक्‌ योग के लक्षण

स्तम्भन के अतियोग के लक्षण

स्वेदन के अयोग्य रोगी एवं रोग

स्वेदन के योग्य रोगी

अनाग्नेय स्वेदनयोग्य रोग

अनाग्नेय स्वेदों का वर्णन

स्वेदन-प्रयोग का फल

( १८ ) वमन-विरेचनविधिरध्याय:

वमन-विरेचन-व्यवस्था

पुष्ठांक

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२१०

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२१६

२९६

२१६

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२१८

२१९

( २९ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
वमन-निर्देश२१९औषध-प्रयोग में सावधानी२२७
वमन के अयोग्य व्यक्ति२२०दुर्बल के दोषों पर विचार२२७
वमन आदि का निषेध२२०दोषनिर्हरण की आवश्यकता२२७
विरेचन के योग्य रोग२२०पुनः शोधन-निर्देश२२७
विरेचन के अयोग्य रोग२२०विरेचन में विविध विचार२२७
वमनकारक औषधद्रव्य एवं प्रयोग-विधि२२१शोधन के अयोग्य रोगी२२७
वमन की प्रतीक्षा२२१शोधन के भेद२२७
वमनकारक यल्ल२२१स्नेहन-स्वेदन-प्रयोग२२७
वमन में औषध-प्रयोग२२१मलों का उल्केशन२२८
वमन की अवधि२२२स्नेहन-स्वेदन के लाभ२२८
हीनयोग में औषध-प्रयोग२२२संशोधन से लाभ२२८
वमन का हीनयोग२२२( १९ ) बस्तिविधिरध्यायः
वमन का सम्यगयोग२२२बस्ति का वर्णन२२९
वमन का अतियोग२२२बस्ति का प्रयोग२२९
वमन के पश्चात् कर्म२२२बस्तिप्रयोग से लाभ२२९
स्नान एवं भोजन विधि२२३बस्ति-परिचय२३०
पेया आदि क्रम-निर्देश२२३निरुहण के अयोग्य२३०
पेया आदि से लाभ२२३निरुहण एवं अनुवासन के योग्य२३१
वमन-विरेचन के वेग एवं परिमाण२२३निरुहण एवं अनुवासन के अयोग्य२३१
वमन-विरेचन की अवधि एवं मान२२४बस्तिनेत्र-परिचय२३१
भारमापन-विधि२२४नेत्र-निरुक्ति२३१
वमन के बाद विरेचन२२४नेत्र का आकार२३१
मुटुकोष्ठ का वर्णन२२४नेत्र की मोटाई२३२
कूरकोष्ठ का वर्णन२२४बस्तिनेत्र का छिद्र२३२
दोषानुसार विरेचन२२४कर्णिका का वर्णन२३२
विरेचक उपाय२२४बस्तिपुट का वर्णन२३३
पुनः विरेचन-प्रयोग२२५अन्य बस्तिपुट-विधान२३३
हीनयोग के लक्षण२२५निरुहणबस्ति की मात्रा२३३
समयोग के लक्षण२२५अनुवासनबस्ति की मात्रा२३३
अतियोग के लक्षण२२५बस्ति देने की विधि२३३
समयोग में पश्चात् कर्म२२५बस्तिनेत्र के प्रवेश की विधि२३४
समयोग में भोजनविधि२२५बस्ति के पश्चात् कर्म२३४
लंघन-निर्देश२२५स्नेह के लौटने पर आहार२३४
लंघन का फल२२६स्नेह के न लौटने पर चिकित्सा२३४
पेया आदि का आवश्यकता२२६विशेष-चिकित्सा२३४
पेयासेवन का निषेध२२६पुनः अनुवासन-प्रयोग२३५
वमन-विरेचन की प्रतीक्षा२२६निरुहणबस्ति-प्रयोग२३५
वमन-विरेचन की चिकित्सा२२६निरुहण-प्रयोगविधि२३५
मुटुविरेचन का निर्देश२२६बस्तिद्रव-निर्माणविधि२३५

( ३० )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
अन्य आचार्यों का मत२३६वमन आदि में कालनिर्देश२४२
बस्तिद्रव्य-मिश्रणविधि२३६बस्ति द्वारा दोषनिर्हरण२४३
निरुहण का पश्चात्कर्म२३६बस्तिप्रयोग की प्रशंसा२४३
बस्ति के लौटने की अवधि२३६सिरावेध का महत्त्व२४३
अनेक बस्ति-प्रयोग२३६( २० ) नस्यविधिरध्यायः
सम्यग्योग आदि का संकेत२३७नस्य का वर्णन२४४
सम्यग्योग में पश्चात् कर्म२३७नस्यकर्म के भेद२४४
विकारों का शमन२३७विरेचननस्य का प्रयोग२४४
पुनः अनुवासन-प्रयोग२३७बृंहणनस्य का प्रयोग२४५
अनुवासन के विविध योग२३७शमननस्य का प्रयोग२४५
सम्यग्योग का वर्णन२३७विरेचननस्य के द्रव्य२४५
दोषानुसार बस्तिसंख्या२३७बृंहणनस्य के द्रव्य२४५
आहार-विधान२३८शमननस्य के द्रव्य२४५
वातदोष में बस्तिप्रयोग२३८नस्य के भेद२४५
पित्तदोष में बस्तिप्रयोग२३८नस्य-प्रयोगविधि२४५
कफदोष में बस्तिप्रयोग२३८नस्य की मात्रा२४६
सन्निपात में बस्तिप्रयोग२३८नस्य के अयोग्य व्यक्ति२४६
तीन ही बस्तियाँ२३८नस्य के योग्य समय२४६
बस्तिनाम-भेद२३८रोगानुसार नस्य-प्रयोग२४६
उक्त मतों की प्रामाणिकता२३८नस्यसेवन की सीमा२४६
बस्तिकर्म की अवधि२३८नस्य का पूर्वकर्म२४७
बस्तिकर्म का वर्णन२३९नस्य-प्रयोगविधि२४७
बस्तिकाल का वर्णन२३९मूच्छाशान्ति की विधि२४७
बस्तियोग का वर्णन२३९स्नेहनस्य-प्रयोग२४७
स्नेह एवं निरुहण प्रयोग२३९नस्यप्रयोग की प्रतीक्षा२४७
बस्तियों का प्रयोगक्रम२३९धूमपान-प्रयोग२४७
बस्ति की त्रिदोषनाशकता२३९स्नेहननस्य का सम्यग्योग२४८
मात्राबस्ति का वर्णन२३९लूक्षनस्य का हीनयोग२४८
मात्राबस्ति-सेवन२४०स्नेहननस्य का अतियोग२४८
मात्राबस्ति की विशेषता२४०विरेचननस्य का सम्यग्योग२४८
उत्तरबस्ति का वर्णन२४०मिथ्यायोग, हीनयोग के लक्षण२४८
उत्तरबस्ति में नेत्र का प्रमाण२४०प्रतिमर्शनस्य-प्रयोग२४८
स्नेहमात्रा का प्रमाण२४०प्रतिमर्शनस्य का निषेध२४८
उत्तरबस्ति-प्रयोगविधि२४१प्रतिमर्शनस्य के काल२४८
उत्तरबस्ति की संख्या२४२प्रतिमर्शनस्य के लाभ२४९
स्त्रियों में उत्तरबस्ति२४२अवस्था का विचार२४९
बस्तिनेत्र का परिमाण२४२नस्य में तेल का प्रयोग२४९
स्नेहमात्रा का निर्देश२४२मर्श-प्रतिमर्श में फलभेद२४९
उत्तरबस्ति-प्रयोगविधि२४२अणुतेल का वर्णन२५०

( ३१ )

विषय

स्नेहनस्य से लाभ

( २१ ) धूमपानविधिरध्यायः

धूमपानविधि का वर्णन धूम के भेद तथा प्रयोग धूमपान का निषेध धूमपान से हानि धूमपानजनित रोगों की चिकित्सा त्रिविध धूम के सेवनकाल धूमनेत्र का वर्णन धूमनेत्र की लम्बाई धूमपान की विधि नासिका एवं मुख से धूमपान धूम का निर्हरण नासिका से धूम न निकालें तीन बार धूमपान करें धूमपान की संख्या मृदुधूम के द्रव्य मध्यधूम के द्रव्य तीक्ष्णधूम के द्रव्य धूमवर्ति-निर्माणविधि कासघ्न धूमपान-विधि धूमपान के लाभ

( २२ ) गण्डूषादिविधिरध्यायः

गण्डूष के भेद गण्डूषों के प्रयोग स्निग्ध-गण्डूष शमन-गण्डूष शोधन-गण्डूष रोपण-गण्डूष गण्डूषों में द्रव्यप्रयोग रोगानुसार गण्डूषप्रयोग स्वस्थ के लिए गण्डूष घी या दूध का गण्डूष मधुगण्डूष-प्रयोग काज़ी के गण्डूष क्षाराम्लगण्डूष सुवोष्णोदकगण्डूष गण्डूष-प्रयोगविधि गण्डूषधारण-अवधि

पृष्ठांक

विषय

२५० गण्डूष एवं कवल परिभाषा कवलधारण के लाभ २५१ प्रतिसारण के भेद २५१ प्रतिसारण का प्रयोग २५२ मुखालेप के तीन भेद २५२ मुखालेप का उपयोग २५२ मुखालेप का प्रमाण २५२ लेपसम्बन्धी निर्देश २५२ मुखालेप में अपथ्य २५२ मुखालेप का निषेध २५३ मुखालेप का सम्यग्योग २५३ मुखालेप के ६ योग २५३ मुखालेप से लाभ २५३ मूर्धतैल के ४ भेद २५३ उत्तरोत्तर गुणवत्ता २५३ अभ्यंग का प्रयोग २५४ परिषेक का प्रयोग २५४ पिचु का प्रयोग २५४ बस्ति का प्रयोगस्थल २५४ शिरोबस्ति-सेवनविधि २५४ शिरोबस्ति-धारणकाल २५५ पश्चात्-कर्म २५५ शिरोबस्तिसेवन-अवधि २५६ कर्णपूर्ण का काल २५६ मात्राकाल की परिभाषा २५६ मूर्धतैल का फल

( २३ ) आश्र्वोतनाञ्जनविधिरध्यायः

२६३ आश्र्वोतन का वर्णन २६३ दोषानुसार आश्र्वोतन २६३ आश्र्वोतन-विधि २६४ आश्र्वोतन का निषेध २६४ आश्र्वोतन के लाभ २६४ अंजनप्रयोग के लाभ २६४ अंजन के तीन भेद २६५ लेखन अंजन-परिचय २६५ रोपण अंजन-परिचय २६५ प्रसादन अंजन-परिचय २६५ प्रत्यञ्जन २६५ अञ्जनशलाका

पृष्ठांक

२५८ २५८ २५८ २५९ २५९ २५९ २५९ २५९ २५९ २६० २६० २६० २६० २६१ २६१ २६१ २६१ २६१ २६१ २६२ २६२

( ३२ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
अज्ञनों की त्रिविध कल्पना२६५यन्त्रों की विविधता२७५
अज्ञनों की मात्रा२६५स्वस्तिकयन्त्र-परिचय२७५
तीक्ष्ण अज्ञनों की मात्रा२६५सन्दशयन्त्र-परिचय२७५
अज्ञनप्रयोग-निर्देश२६६सन्दशयन्त्र के भेद२७५
अन्य आचार्यों का मत२६६मुजुण्डायन्त्र का वर्णन२७५
तीक्ष्णाज्ञन का रात्रिप्रयोग२६६ताल्ययन्त्र-परिचय२७६
उष्णकाल में तीक्ष्णाज्ञन-निषेध२६६नाडीयन्त्र-परिचय२७६
लौह एवं नेत्र की समानता२६६कण्ठशल्यावलोकनी नाड़ी२७६
तीक्ष्ण अज्ञन का निषेध२६६द्विकर्ण, चतुष्कर्ण नाडीयन्त्र२७६
अज्ञन के अयोग्य व्यक्ति२६७विविध नाडीयन्त्र२७६
निषिद्ध अज्ञन का वर्णन२६७शल्यनिर्घातनी नाड़ी२७७
अज्ञन-प्रयोगविधि२६७अशौयन्त्र-परिचय२७७
नेत्रप्रक्षालन-विधि२६७शमीयन्त्र-परिचय२७७
नेत्रशोधन-विधि२६७भगन्दर-यन्त्र२७७
नेत्रशोधन में हेतु२६७घ्राणयन्त्र-परिचय२७७
तीक्ष्णाज्ञन या धूमपान२६८अंगुलित्राणक यन्त्र२७७
प्रत्यञ्जन का वर्णन२६८योनिव्रणेश्मण यन्त्र२७८
( २४ ) तर्पणपुटपाकविधिरध्यायःनाडीव्रण के यन्त्र२७८
तर्पणविधि-वर्णन२६९नाडीयन्त्र२७८
तर्पण की दूसरी विधि२६९अन्य अनेक यन्त्र२७८
स्नेह-धारणकाल२७०भृंगानाडीयन्त्र२७८
तर्पण का पश्चात् कर्म२७०तुम्बीयन्त्र-परिचय२७९
दोषानुसार तर्पण२७०घटीयन्त्र-परिचय२७९
तर्पण के विविध योग२७०शलाकायन्त्र२७९
पुटपाक का वर्णन२७१एषणी शलाका२७९
दोषानुसार पुटपाक-प्रयोग२७१स्रोतःशल्यहारिणी शलाका२७९
स्नेहन पुटपाक के द्रव्य२७१छः शंकुयन्त्र२८०
लेखन पुटपाक के द्रव्य२७१व्युहन शंकुयन्त्र२८०
प्रसादन पुटपाक के द्रव्य२७१चालन शंकुयन्त्र२८०
पुटपाक-रचनाविधि२७२आहार्य शंकुयन्त्र२८०
धारणकाल-अवधि२७२गर्भशंकुयन्त्र२८०
उष्णशीत-प्रयोगभेद२७२अश्मरीहरण यन्त्र२८०
पश्चात्-कर्म२७२दन्तपातन यन्त्र२८०
योगों का निर्देश२७२प्रमार्जनी शलाकायन्त्र२८०
तर्पण एवं पुटपाक का निषेध२७२पायुयन्त्र२८०
तर्पण एवं पुटपाक की अवधि२७२घ्राण एवं कर्णयन्त्र२८१
नेत्ररक्षा की आवश्यकता२७३कर्णशोधन-यन्त्र२८१
( २५ ) यन्त्रविधिरध्यायःविविध शलाकायन्त्र२८१
यन्त्रों का वर्णन२७४अनुयन्त्रों का वर्णन२८१

( ३३ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
यन्त्रों के विविध कर्म२८२जौक रखने एवं लगाने की विधि२९०
कंकमुख यन्त्र२८२दुष्टरक्तग्रहण-दुष्टान्त२९०
( २६ ) शस्त्रविधिरध्यायःजौक छड़ाने की स्थिति२९०
शस्त्रों का वर्णन२८३जौक का उपचार२९१
मण्डलमशस्त्र२८४रक्तमद से रक्षा२९१
वृद्धिपत्रशस्त्र२८४रक्तवमन का सम्यग्योग२९१
उत्पल, अर्धघंटाकर शस्त्र२८४रक्तवमन का अतियोग२९१
सर्पवक्त्र-शस्त्र२८४रक्तवमन का मिथ्यायोग२९१
१. एषणी-शस्त्र२८४जलौका-पालनविधि२९१
२. एषणी-शस्त्र२८४जलौकावचारण का पश्चात् कर्म२९१
वेतस-शस्त्र२८५रक्तावरोधक उपचार२९१
शरारिमुख, त्रिकूर्चक शस्त्र२८५रक्तघ्रावण का फल२९२
कुशपत्रक एवं आटामुख शस्त्र२८५पुनः रक्तघ्रावण२९२
अन्तर्मुख-शस्त्र२८५अलाबूयन्त्र निषिद्ध२९२
ब्रीहिमुख-शस्त्र२८५अलाबूयन्त्रप्रयोग विहित२९२
कुठारी-शस्त्र२८५शृंगयन्त्रप्रयोग-निषेध२९२
ताम्रशलाका-शस्त्र२८५शृंगयन्त्रप्रयोग-निर्देश२९२
अंगुली-शस्त्र२८६प्रच्छानकर्म-निर्देश२९२
बडिशा-शस्त्र२८६प्रच्छान आदि का विकल्प२९२
करपत्र-शस्त्र२८६जलौका-प्रयोग२९२
कर्तरी-शस्त्र२८६तुम्बी एवं शृंगी यन्त्र२९३
नख-शस्त्र२८६सिरावेध-प्रयोग२९३
दन्तलेखनक-शस्त्र२८६रक्तघ्रावण-विधिविकल्प२९३
सूचीशस्त्र२८६रक्तघ्रावण में उपद्रव एवं शान्ति२९३
कूर्च-शस्त्र२८७( २७ ) सिराव्यधविधिरध्यायः
खजशस्त्र२८७शुद्धरक्त का वर्णन२९४
मृथिका-शस्त्र२८७रक्तदूषक तत्त्व२९४
आराशस्त्र२८७रक्तज रोग२९५
कर्णबिधनी सूची२८७सिरावेध का निर्देश२९५
अनुशस्त्रों का परिगणन२८८सिरावेध-विधि२९५
शस्त्रकर्मों का वर्णन२८८रोगविशेष में सिरावेध२९५
शस्त्रों के आठ दोष२८८कर्णरोग में सिरावेध२९५
शस्त्रग्रहण-विधि२८८नासारोग में सिरावेध२९६
शस्त्रकोष का विस्तार२८९पीनसरोग में सिरावेध२९६
जौकों का प्रयोग२८९मुखरोग में सिरावेध२९६
त्याज्य जौकों का वर्णन२८९जत्रुध्वंरोगों में सिरावेध२९६
त्याज्य जौकों का निषेध२८९उन्मादरोग में सिरावेध२९६
गह्म जौकों का वर्णन२९०अपस्माररोग में सिरावेध२९६
त्याज्य जौकों के लक्षण२९०विद्रधि एवं पाश्चर्वशूल में सिरावेध२९६

३ अ० भू०

( ३४ )

विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
तृतीयकज्वर में सिरावेध२९६पुनः सिरावेध३०२
चतुर्थकज्वर में सिरावेध२९६अधिक रक्तघ्राव का निषेध३०२
प्रवाहिकारोग में सिरावेध२९६भृंगयन्त्र का प्रयोग३०२
शुक्र एवं शिशुनरोगों में सिरावेध२९८रक्तशुद्धि के उपाय३०२
गलगण्डरोग में सिरावेध२९७स्तम्भनक्रिया-निर्देश३०२
गुग्घसीरोग में सिरावेध२९७रक्तस्सम्भन-उपचार३०२
अपचीरोग में सिरावेध२९७रक्तघ्रावण का पश्चात् कर्म३०२
प्रमुख वातरोगों में सिरावेध२९७रक्तघ्रावण में पथ्य३०३
पादवाह आदि में सिरावेध२९७रक्तशुद्धि के लक्षण३०३
विश्वनाचीरोग में सिरावेध२९७( २८ ) शल्याहरणविधिर्ध्यायः
अन्यत्र सिरावेध-निर्देश२९७शल्य की गतिर्था३०४
सिरायन्त्रण-विधि२९७अन्तःशल्य के लक्षण३०४
सिरावेधन-विधि२९८त्वचागत शल्य के लक्षण३०४
कुठारिका-प्रयोग२९८मांसगत शल्य के लक्षण३०५
उपनासिका-सिरावेध२९८पेशीगत शल्य के लक्षण३०५
जिह्वासिरावेध२९८स्नायुगत शल्य के लक्षण३०५
ग्रीवासिरावेध२९८सिरागत शल्य के लक्षण३०५
बाहुसिरावेध२९९स्रोतोगत शल्य के लक्षण३०५
पाशर्वस्थ सिरावेध२९९धमनीगत शल्य के लक्षण३०५
लिंग का सिरावेध२९९अस्थिसन्धिगत शल्य के लक्षण३०५
जंघासिरावेध२९९अस्थिगत शल्य के लक्षण३०६
पादसिरावेध२९९सन्धिगत शल्य के लक्षण३०६
सिरावेध-निर्देश२९९कोष्ठगत शल्य के लक्षण३०६
वेध का परिमाण२९९मर्मागत शल्य के लक्षण३०६
सम्यक् वेध का वर्णन२९९सामान्य निर्देश३०६
दुर्बेध आदि का वर्णन२९९शल्यव्रण का रोपण३०६
रक्त न बहने के कारण३००पुनः पीड़ाकर्तृत्व३०६
रक्तघ्रावण के उपाय३००शल्यज्ञान के उपाय३०७
रक्तघ्राव-वर्णन३००मांसगत शल्य३०७
घ्रावण-उपायों का निषेध३००पेशी आदिगत शल्य३०७
मूच्छ्छा में कर्तव्य३००अस्थिगत शल्य३०७
वातदूषित रक्त के लक्षण३००सन्धिगत शल्य३०७
पित्तदूषित रक्त के लक्षण३०१स्नायु आदिगत शल्य३०७
कफदूषित रक्त के लक्षण३०१मर्मागत शल्य३०७
द्वन्द्वज रक्त के लक्षण३०१सामान्य निर्देश३०७
त्रिदोषज रक्त के लक्षण३०१शल्य के स्वरूपों का अनुमान३०७
सिरावेध में रक्त का परिमाण३०१शल्यनिर्हरण के उपाय३०८
विविध चिकित्सा३०१अर्वाचीन आदि शल्य३०८
उपचार-विधि३०१तिर्यग्गत शल्य३०८

( ३५ )

विषय

निर्घातन के अयोग्य शल्य विशाल्यन्त शल्याहरण-निषेध शल्यनिर्हरण-विधि दृश्यशल्यनिर्हरण अदृश्यशल्यनिर्हरण संदेशवन्त्र-प्रयोग तालयन्त्र-प्रयोग नाडीयन्त्र-प्रयोग शेषयन्त्र-प्रयोग निर्हुत शल्य का पश्चात्कर्म सिरा, स्नायुगत शल्य हृदयगत शल्य शल्याहरण की अन्य विधि अस्थिगत शल्य दूसरी विधि तीसरी विधि चौथी विधि पाँचवीं विधि छठी विधि सातवीं विधि आठवीं विधि नवीं विधि दसवीं विधि पक्वाशयगत शल्य वात आदि शल्य कण्ठस्रोतोगत शल्य जतुशल्यनिर्हरण अन्य शल्यनिर्हरण गले में फँसे हुए शल्य को निकालना आँख एवं व्रण में पड़े शल्य को निकालना उदरगत जल निकालने की विधि कर्णगत जल एवं क्रिमि निकालने की विधि शरीर में शल्य का विलयन विलीन न होने वाले शल्य शल्यनिर्हरणोपाय शल्यनिर्हरण-निर्देश

पृष्ठांक

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विषय

आमशोथ के लक्षण पच्यमान व्रणशोथ के लक्षण पक्वशोथ के लक्षण व्रण में वात आदि के लक्षण अतिपक्व व्रण के लक्षण गम्भीर पाक का वर्णन दारण एवं पाटन लेप शस्त्रकर्म का निषेध शस्त्रकर्म का विधान अनिश्चितकारी वैद्य की निन्दा शस्त्रकर्म के पूर्वकर्म आहार एवं मरुपापन का निषेध शस्त्रप्रयोग-विधि महान् व्रणशोथ में कर्तव्य प्रशस्त शल्यचिकित्सक तिर्यक्छेदन-विधि पश्चात्कर्म-निर्देश पट्टी आदि का निर्देश व्रणरक्षा-विधान औषधधारण-निर्देश आचार-निर्देश दिन में सोने का निषेध अन्य निषिद्ध कर्म व्रणरोगी का आहार लाभ एवं हानि त्याज्य आहार व्रणोपचारार्थ उपदेश पुनः प्रशालन आदि कर्म विकेशिका-वर्णन इनके दुष्परिणाम विकेशिका का सद्‌उपयोग विरुद्धव्रण का उपचार सद्योव्रण के उपचार सीवनकर्म का निषेध सीवनकर्म-विधि सीवन का पश्चात् कर्म सीवनकर्म का निर्देश बन्धनद्रव्यों का वर्णन बन्धनभेदों का निर्देश

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( २९ ) शस्त्रकर्मविधिरध्यायः

व्रण के उपचार व्रणशोथ-चिकित्सा

३१५ ३१५