भारतकोश
संग्रह पर लौटें

ब्रह्मचर्य ही जीवन है

Brahmacharya Hi Jeevan Hai

स्वामी शिवानन्द द्वारा

स्रोत: Chatra Hitkari Pustakmala, Daraganj, Prayag (1926) · Kedarnath Gupta, Chatra Hitkari Pustakmala · 1926 (उद्गम)

DevanagariHindipublished199 पृष्ठ

नवयुवकों को स्वर्गीय सन्देश पहुँचाने वाली

व्यावहारिक कारी पुस्तकमाला

की अनुपम, शिक्षाप्रद पुस्तकें

(१) ईश्वरीय बोध—जगतविख्यात स्वामी विवेकानन्द के गुरु परमहंस श्रीरामकृष्ण के उपदेशों का संग्रह है। एक एक उपदेश अमूल्य हैं। मनुष्यमात्र के लिये बहुत उपयोगी है। मूल्य ॥१॥

(२) सफलता की कुञ्जी—श्रीयुत स्वामी रामतीर्थ पत्र १० के “सीक्रेट आफ सक्सेस” नामक लेख का हिन्दी अनुवाद। क्या आप प्रत्येक कार्य में सफलता चाहते हैं? क्या आप को अपना जीवन सुखमय बनाना है? यदि है तो इस पुस्तक को अवश्य पढ़िये। मूल्य ॥१॥

(३) मनुष्य जीवन की उपयोगिता—यह पुस्तक तिब्बत के प्राचीन पुस्तकालय में पड़ी हुई थी, जिसे एक चीनी पं० ने खोज निकाला था और उसको चीनी भाषा में अनुवादित किया था। प्रस्तुत पुस्तक उस चीनी पुस्तक का रूपान्तर है। यूरोप की प्रत्येक भाषा में इसके अनुवाद हो चुके हैं। इस विचित्र पुस्तक में जीवन की सब समस्याओं और अवस्थाओं पर पूर्ण प्रकाश डाला गया है। काम, क्रोध, लोभ, मोहादि

( २ )

विकारों को किस प्रकार वश में करना चाहिये, इसकी समुचित शिक्षा दी गई है। पुस्तक की उत्तमता एक बार पढ़ने ही से ज्ञात होगी। मूल्य ॥४॥

(४) भारतके दश रत्न—यह जीवनियों का संग्रह है। भीष्मपितामह, श्रीकृष्ण, महाराणा प्रतापसिंह, स्वामी विवेकानन्द आदि दश महापुरुषों को जीवनियाँ बड़ी खूबी के साथ संक्षेप में लिखी गई हैं। मूल्य प्रति पुस्तक का ।-१)

(५) ब्रह्मचर्य ही जीवन है—इस पुस्तक की प्रशंसा सभी पत्र-पत्रिकाओं ने की है। अधिक न लिख कर कुछ पत्र-पत्रिकाओं की सम्मतियाँ हम यहाँ उद्धृत करते हैं:—

“अभ्युदय” इस पुस्तक की विस्तृत समालोचना करते हुए अन्त में लिखता है:—“यह पुस्तक क्या है, नवयुवकों के लिये कल्पबुद्ध है। हम “अभ्युदय” के पाठकों से जोरों के साथ अनु-रोध करते हैं कि वे एक बार इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें और अपने बालकों को दें। समालोचक ने स्वयं इसे बीसों बार पढ़ा है पर तृप्ति नहीं हुई।”

“प्रताप” लिखता है—“इस पुस्तक में ब्रह्मचर्य के सम्बन्ध में लगभग सभी ज्ञातव्य बातों का समावेश किया गया है। ब्रह्मचर्य की महिमा, अष्टमैथुन, वीर्य नाश के मुख्य लक्षण, गृहस्थी में ब्रह्मचर्य, वीर्य रक्षा के नियम आदि का वर्णन अच्छे ढंग से किया गया है।”...यह पुस्तक नवयुवकों के बड़े काम की है। हम चाहते हैं कि प्रत्येक युवक इस पुस्तक को पढ़कर लाभ उठावे।”

( ३ )

( ६ ) वीर राजपूत—यह एक वीररस पूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास है एक सच्चे राजपूत की बहादुरी का जीता जागता चित्र खींचा गया है इसे पढ़ कर कायर पुरुषों का हृदय वीररस पूर्ण हो जायगा । एक प्रति मंगा कर देखिये । छपाई सफाई सराहनीय है । ढाई सौ से अधिक पृष्ठों की पुस्तक का दाम केवल १।

( ७ ) हम सौ वर्ष कैसे जीवें—पुस्तक का विषय नाम ही से स्पष्ट है । इसमें बतलाया गया है कि हम लोग किस प्रकार सौ वर्ष की आयु तक स्वस्थ तथा नीरोग रह कर जीवन के आनन्द का उपभोग कर सकते हैं । हम दावे के साथ कहते हैं कि हिन्दी में यह पुस्तक अपने हंग की एक ही है । इसकी भूमिका 'आज' के विद्वान तथा यशस्वी पादक पं० बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लिखी है, जो भूमिका के अन्त में लिखते हैं:— “ऐसी उपयोगी पुस्तक लिखने के लिए मैं श्रीयुत केदारनाथ गुप्त को बधाई देता हूँ । आशा है कि हिन्दी संसार इसका समुचित आदर करेगा । तथा भारत की भावी आशा के अंकुर हमारे होनहार विद्यार्थी इससे विशेष रूप से लाभ उठावेंगे ।”

( ८ ) महात्मा टाल्मटाय की वैज्ञानिक कहानियाँ—विज्ञान की शिक्षा देने वाली रोचक तथा मनोरञ्जक पुस्तक है । मूल्य १।

( ९ ) वीरों की सच्ची कहानियाँ—यदि आप को अपने प्राचीन भारत के गौरव का ध्यान है, यदि आप वीर और

( ४ )

महादुःख बनना चाहते हैं, तो इसे पढ़िये। इस में अपने पुरुषार्थों की सच्ची वीरता पूर्ण यश गायायें पढ़ कर आप का हृदय फड़क उठेगा। नसों में वीररस प्रवाहित होने लगेगा पुरुषार्थों के गौरव का रक्त उबलने लगेगा। स्कूल में बालकों को इतिहास पढ़ाने में अपने पुरुषार्थों की वीरता पूर्ण घटनाएं नहीं पढ़ाई जाती। विदेशी पुरुषों की प्रशंसा के ही पाठ पढ़ाये जाते हैं। आवश्यकता है देश का कोई बालक ऐसे समय इस पुस्तक को पढ़ाने से न चूके। मूल्य केवल ॥॥

( १० ) आहुतियाँ—यह एक विलकुल नये प्रकार की नयी पुस्तक है। देश और धर्म पर धलिदान होने वाले वीर किस प्रकार हँसते हँसते मृत्यु का आवाहन करते हैं ? उनकी आत्मायें क्यों इतनी प्रबल हो जाती हैं ? वे मर कर भी कैसे जीवन का पाठ पढ़ाते हैं ? इत्यादि दिल फड़काने वाली कहानियाँ पढ़नी हों तो “आहुतियाँ” आज ही मँगा लीजिये। मूल्य केवल ॥॥

( ११ ) जगमगाते हीरे—प्रत्येक आर्य संतान के पढ़ने लायक यह एक ही नयी पुस्तक है यदि रहस्यमयी, मनोरंजक, दिल में गुद गुदी पैदा करने वाला महापुरुषों की जीवन घटनायें पढ़नी हैं। यदि छोटी छोटी बातों से ही महापुरुष बनने की ज़रा भी अभिलाषा दिल में है तो एक बार अवश्य इस सचित्र पुस्तक को आप खुद पढ़िये और अपनी स्त्री बच्चों को पढ़ाइये। मूल्य केवल १।

( १२ ) पढ़ो और हँसो—विषय जानने के लिये पुस्तक का नाम ही काफी है। एक एक लाइन पढ़िये और लौट पीट होते जाइये। आप पुस्तक अलग अकेले में पढ़ेंगे; पर सरेंदू

( ५ )

लोग समझेगे कि आज किससे यह कहकहा हो रहा है। पुस्तक की तारीफ़ यह है कि पूरी मनोरंजक होते हुए भी अश्लीलता का कहीं नाम नहीं। यदि शिक्षा-प्रद मनोरंजक पुस्तक पढ़नी है तो इसे पढ़िये। मूल्य केवल ॥॥)

१ ( १३ ) कुसुम-कुञ्ज—कविवर गुरु भक्त सिंह 'भक्त' कृत अमनीय कविताओं का संग्रह है। ये कवितायें अपने ढंग की एकही हैं। मूल्य ॥॥)

( १४ ) चारचिन्तामणि कोष—इस पुस्तक में श्री गास्वामी तुलसीदास जी के सब ग्रन्थों से उन भागों का संग्रह किया गया है जिनका सम्बन्ध श्री रामनाम से है। संग्रहकर्ता राम के अनन्य भक्त श्री जयरामदास जी हैं। पुस्तक अपने ढंग की एकही है। मूल्य ॥॥)

मैनेजर व्हाच हितकारी पुस्तकमाला

दारागंज, प्रयाग

सस्ती साहित्य पुस्तकमाला

प्रकाशित पुस्तकें

वंकिम ग्रन्थावली—प्रथम खंड—वंकिम बाबू के आनन्द मठ, लोक-रहस्यं तथा देवी चौधरानी का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४१२ मू० १)

गोरा—जगत् विख्यात रवीन्द्रनाथ ठाकुर कृत गोरा नामक पुस्तक का अविकल अनुवाद । पृष्ठ-संख्या ६८८ मू० १।-॥ सजिल्द १॥३॥

वंकिम ग्रन्थावली—द्वितीय खण्ड—वंकिम बाबू के सीताराम और दुर्गेश नन्दिनी का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४३२ मू० ॥-॥ सजिल्द १॥३॥

वंकिम ग्रन्थावली—तीसरा खण्ड—वंकिम बाबू के कृष्ण कान्तेर बिल, कपाल कुण्डला, और रजनी का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४३२ मू० ॥-॥ सजिल्द १॥३॥

चण्डी चरण ग्रन्थावली—प्रथम खण्ड । अर्थात् टॉम काका की कुटिया ( Uncle Toms Cabin ) का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या ४६२ मू० १॥॥ सजिल्द १॥॥

चण्डी चरण ग्रन्थावली—दूसरा खण्ड—चण्डी चरण सेन के दीवान गंगा गोविन्द सिंह का अविकल अनुवाद । पृष्ठ संख्या २६० मू० ॥॥

श्रीमत् बाल्मीकीय रामायण—बालकाण्ड—साहित्याचार्य पं० चन्द्रशेखर शास्त्री कृत सरल हिन्दी अनुवाद सहित बड़े साइज का १६२ पृष्ठ का मू० ॥॥

अयोध्या काण्ड—मू० १॥॥

आरण्य काण्ड—मू० ॥॥

सस्ती साहित्य पुस्तकमाला कार्यालय, बनारस सिटी ।

A completely blank white page with no visible content, text, or markings.