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रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)

Rasaratna Samuchchaya Hindi

रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा

स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)

DevanagariHindipublished362 पृष्ठ

प्रथमोऽध्यायः । | ३१


रसपुष्पं रससुमं कुसुमो रसपूर्वकम् ।
मतं निरूच्यते कैश्चित्सुधानिर्झरसाह्वया ॥

विशेष के लिये पृष्ठ नं. ३९ से ४८ तक रस्तरङ्गिणी पढें ।

( ४ ) पारद का चौथा खनिज प्राकृतिक पारद ( Native Mercury.) है ।
यह बहुत अल्पमात्रा में प्राप्त होता है । कभी कभी इसके कण खनिज हिङ्गुल के साथ बिखरे हुए पाये जाते हैं । यह पारद प्राप्ति का गौण खनिज समझा जाता है तथा इटली और स्पेन की खानों में यह मिलता है ।

( ५ ) पारद रजत मिश्रक (Silver Amalgam. )
यह पारद का खनिज प्रकृति में पारद और रजत के भिन्न भिन्न परिणाम में बना पाया जाता है । यह अधिकतर चीनी ( Chile ) देश की खानों में पाया जाता है । इन खानों के अतिरिक्त जर्मनी स्पेन और यूनाईटेड स्टेट्स की खानों में भी पाया जाता है । यह पर्पटी जैसा है ।

( ६ ) टेट्राहीड्राइट या मर्क्युरियल फेहलोर ( Tetrahedrite or Mercurial Fahlore. )
इस खनिज में से भी व्यापार के योग्य पारद निकल सकता है किन्तु यह वास्तव में ताम्र का ही खनिज है और बहुत अल्प मात्रा में पाया जाता है । जर्मनी के बोसनिया ( Bosnia ) और पेलेटिनेट ( Palatinate ) नामक स्थानों में ही विशेषतः मिलता है ।

परीक्षा

ऊपर लिखे हुए किसी भी खनिज को पारद के लिये परीक्षा कर सकते हैं । एक कांच की परीक्षा नलिका ( Tastube ) में उक्त पारदीय खनिजों में से कोई भी (जिसकी परीक्षा करनी हो) पारद खनिज का चूर्ण तथा चूना या खाने का सोडा भर कर स्पिरिट लेम्प पर तपाने से नलिका के शीतल प्रदेश में पारद के कण जमे हुए नजर आवेंगे । यदि पारद का खनिज पारद और गन्धक का यौगिक ( हिङ्गुल ) हुवा तो नलिका के शीतल प्रदेश में लाल हिङ्गुल और पारद दोनों दिखाई देंगे तथा जलते हुए गन्धक की तीव्र गन्ध भी प्रतीत होगी ।

पारद प्राप्ति के कुछ गौण खनिज

उक्त खनिजों के अतिरिक्त अल्पमात्रा में प्राप्त होने वाले कुछ पारदीय खनिज ऐसे भी हैं जो किसी स्थान विशेष में ही प्राप्त होते हैं और उन से भी पारद निकाला जा सकता है ।

उनके निम्न नाम हैं ।

( १ ) लिविङ्गस्टोनाइट ( Livingstoneite 2 Sb₂ S₃ Hg S )

३२रसरत्नसमुच्चये-

यह हिङ्गुल और एण्टोमनी का फौलाद सा कृष्ण-वर्ण यौगिक है इसमें धातु की सी द्युति होती है। घिसने पर लाल लकीर खिंचती है। यह रवेदार वल्मीक शिखराकार पिंड सा होता है। कठोरता २, विशिष्ट गुरुत्व ५. ८१ होता है। मेक्सिको देश का पारद निकालने का यह मुख्य खनिज है। वहां पर चिरकाल तक इसकी खान का कार्य होता रहा है।

यह गन्धक और गोदन्ती के साथ भी पाया जाता है। इसका वर्णन रसरत्नसमुच्चय में लिखे "स्रोतोञ्जन" के साथ बहुत मिलता है-

यथा-वल्मीकशिखराकारं भङ्गे नीलोत्पलद्युति ।
घृष्टं तु गैरिकच्छायं स्रोतोऽजं लक्षयेद् ध्रुवम् ॥ ( र० र० स० प्र० अ० )

अर्थात् दीमक की बामी जैसा शिखराकार (कोलुमनरमॅस्सिव फार्म columnar Massive Form. ) तथा तोड़ने पर नील कमल के समान वर्ण का दिखाई दे तथा कसौटी पर घिसने से गैरिक की सी लाल लकीर पड़े वह अवश्य स्रोतोञ्जन है। साफ फौलाद का रङ्ग नील कमल के पत्ते के वर्ण के समान होता है। इस यौगिक में सुरमा है इस लिये इसको स्रोतोञ्जन मानना ठीक है।

( २ ) बासनाहट ( Barcenite )

यह बहुत जटिल मात्रा में पाया जाने वाला खनिज है। इसका प्रादुर्भाव उपर्युक्त लिविंग्स्टोनाइट से ही होता है। केवल मेक्सिको देश के हिजुको (Huitzuco) नामक स्थान पर ही प्राप्त होता है। सन् १८७८ ई० में जे० डब्ल्यु० मेलेट ( J. W. Mallet ) ने मेरियानो बार्सीना ( Merisno Baercena ) के नाम पर ही इस खनिज का नामकरण किया है। मेक्सिकल भूगर्भ-विज्ञों का मत है कि यह खनिज हिंगुल और एन्टिमनिऑक्साइड ( Antimony oxide Sb₂O₃ ) का यौगिक है। यह मृत्तिका के ढेले के आकार का कृष्ण वर्ण होता है। कसौटी पर घिसने से राख ( Ash grey ) और कुछ हरापन लिये हुए रंग की लकीर खिंचती है। कठोरत ६. ५, विशिष्ट गुरुत्व ५. ३४३.

( ३ ) ग्वाडालकाज़़ाराइट ( Guadalcazarite )

यह खनिज प्रायः कृष्ण हिंगुल की ही जाति का है। इस में थोड़ा सा यशद ( २ से ४% ) और अत्यल्प मात्रा में सेलेनियम् (Selenium १%) मिला रहता है ! ( यह धातु गन्धक का सा होता है और आज कल वायरलेस टेलिग्राफी में फोटो भेजने के कार्य में उपयोगी है) इसके सहयोगी खनिज रक्त हिंगुल, बेराइटस (Barytes) और स्फटिक ( quartz ) हैं। यह मेक्सिको प्रान्त के ग्वाडलकाजार ( Guadalcazar ) स्थान में प्राप्त होने के कारण इस का नाम ग्राम नाम पर ही अन्य खनिजों से पृथक् समझने के लिये रख दिया गया है।

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अब पारद के वे खनिज लिखे जाते हैं जो अत्यल्प मात्रा में पाये जाते हैं किन्तु ब्रिवस्टर कौन्टी (Brewster county), टेक्सास (Texas) में इतनी मात्रा में मिलते हैं कि जिनसे खान का व्यवसाय किया जा सकता है—

( १ ) टेर्लिङ्ग्वाइट (Terlinguaite Hg 2 clo) यह खनिज पारद, क्लोरिन और ओक्सिजन का यौगिक (Oxychloride of Mercury) है। यह गन्धक के से पीले रवों में पाया जाता है। वायु में रखने से इसका रङ्ग पीले से गहरा जैतून जैसा हरा (Olive Green) हो जाता है। इसकी कठोरता २ से ३ तक तथा विशिष्ट गुरुत्व ८.७२५. है।

( २ ) इग्लेस्टोनाइट (Eglestonite Hg 4 Cl 2 O) यह छोटे २ भूरे पीले रङ्ग के रवों में पाया जाता है। इसके कणों में रोजन (सूखा गन्धा विरोजा) की सी द्युति नजर आती है। यह धूप में रखने से शीघ्र काला पड़ जाता है। इसकी कठोरता २ से ३ तक तथा विशिष्ट गुरुत्व ८.३२७.।

( ३ ) क्लेनाइट (Kleinite MercuryAmmoniumchloride.) यह पारद और नौसादर का प्राकृतिक यौगिक है। इसके रवे गन्धक जैसे पीले होते हैं और उनमें विकृत स्थानों पर नारंगी के वर्ण के दाग होते हैं। इसकी कठोरता ३ से ४ तक तथा विशिष्ट गुरुत्व ७.९८. है। यह भी टेर्लिङ्ग्वाइट के साथ ही पाया जाता है।

( ४ ) मोजेसाइट (Mosesite) यह खनिज भी प्राकृतिक पारद और नौसादर का यौगिक है। एवं टेर्लिङ्ग्वाइट के साथ ही पाया जाता है।

( ५ ) मान्ट्रोयडाइट (Montroydite) यह नारङ्गी के से लाल रवों में पाया जाता है जिनमें कांच की सी चमक रहती है। इसकी कठोरता २ से भी कम है। यह खनिज उपर्युक्त चारों खनिजों के साथ पाया जाता है। उक्त पांचों खनिज रस शास्त्रोक्त “सुपीतः शुकतुण्डकः” इस जाति के पारदीय खनिजों के साथ समता रखते हैं। ये गन्धक से पीले और नारंगी से लाल वर्ण के होते हैं। सभी ये खनिज पारद प्राप्ति के साधन हैं। इनके अतिरिक्त कुछ ऐसे भी पारदीय खनिज हैं जो बहुत ही अत्यल्पाल्प मात्रा में पाये जाते हैं। उनके नाम ये हैं-

( १ ) टिमेनाइट (Tiemanite Hg Se.) यह सिलेनियं और पारद का खनिज है।

( २ ) ओनोफ्राइट (onofrite HgS, Se.) यह गन्धक, सिलेनियं और पारद का यौगिक है।

( ३ ) कोलोरेडोआइट (Coloradoite Hg Te.) यह टेलुरियं नामक खनिज और पारद का यौगिक है।

रस० ३

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-रसरत्नसमुच्चये-

( ४ ) लेहर बेकाइट ( Lehrbachite a Selenide of Lead and mercury ) यह सेलेनाइड, सीसा ( नाग Lead ) और पारद का यौगिक है ।

( ५ ) आयोडोराइट ( Iodyrite ) यह अत्यल्प मात्रा में चीली ( Chile ) नामक स्थान पर आयोडाइड, रजत, और पारद का यौगिक पाया जाता है । आयुर्वेद के रस-शास्त्रों में हिंगुल के शीर्षक में जो वर्णन मिलता है वह समस्त पारद के खनिजों के विषय में समझना चाहिये । पारद के मुख्य खनिज तो स्पष्ट रूप से लिख दिये हैं और गौण खनिज उन्हीं के अन्तर्गत करने का प्रयत्न किया गया है । आज कल भी प्रधान खनिजों से ही पारद निकालने का व्यवसाय चलता है । शेष खनिज किसी देशविशेष के स्थानविशेष में मिलते हैं । उनका उपयोग पारद निकालने के लिये कभी २ किया जाता रहा है ।

इसका वर्णन रस शास्त्रियों ने एक श्लोक के अर्धभाग में कर दिया है ।

“पिण्डरूपमिदं साक्षात् दृश्यते दृष्टि सौख्यदम्।” ( रसकामधेनु पृ० २७३ )

इन सब अवतरणों को देखने से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्राप्य रसग्रन्थों में हिंगुल के वर्णन में जितना भी साहित्य मिलता है वह सब ठीक है, केवल ग्रन्थ संग्राहात्मक होने के कारण सिलसिले वार खनिजों का स्वरूप समझना कठिन हो गया है । तथापि जितनी सामग्री उपलब्ध है उससे यह निर्णय सहज में निकाला जा सकता है कि प्राचीन भारतीय रस-शास्त्रियों को पारद प्राप्ति के प्रायः सारे खनिज विदित थे ।

उन्होंने उनका इतना ही वर्णन किया है कि जितना औषधि निर्माता के ज्ञान के लिये आवश्यक है । आधुनिक काल में भी औषधियों के गुणधर्म बतलाने वाली पुस्तकों ( मेटेरिया मेडिका आदि ) में औषधि निर्माणोपयोगी खनिजों का वर्णन संक्षेप में दिया गया है । परन्तु खनिज सम्बन्धी वैज्ञानिक ग्रन्थों में बहुत विस्तार के साथ सूक्ष्मातिसूक्ष्म वर्णन पाया जाता है । सम्भवतः इसी प्रकार यहां के खनिज शास्त्रों में भी विशद वर्णन रहा हो पर दैव दुर्विपाक से आज कल उपलब्ध नहीं है ।

रस शास्त्रियों ने औषधोपयोगी खनिजों का संक्षेप में परिचय देकर उनके शोधन मारण और औषधि गुण धर्म पर विशेष प्रकाश डालने का प्रयास किया है । वैद्यों का यह अभिमान ठीक हो सकता है कि गत भारतीय संस्कृति के समय में जब देश की उन्नत दशा रही हो, सर्वत्र ज्ञान प्रसार करने का कार्य यहाँ के विद्वान् करते रहे हों, पर आज कल की पारतन्त्र्य दशा में उक्त अभिमान छोड़कर रसशास्त्रोक्त खनिजों का वर्तमान कालिक उपलब्ध ज्ञान प्राप्त करना वैद्य मात्र के लिये परमावश्यक है । क्योंकि जो औषधि के द्रव्य बाज़ार में आ रहे हैं वे प्रायः कृत्रिम और अशुद्ध मिलते हैं । पन्सारी उनमें अनेक वाह्य अशुद्धियां मिलाकर बेचते हैं । ऐसी दशा में पूर्णतया

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द्रव्य ज्ञान के बिना शुद्ध औषधि बनाना अत्यन्त कठिन हो गया है; जिसका फल यह हो रहा है कि शास्त्रोक्त गुण, प्रभाव औषधियों में नहीं देखे जाते हैं। इसी कठिनाई को दूर करने के लिये पारद के समस्त प्राप्य खनिजों का वर्णन कर दिया गया है।

पारदीय खनिज प्राप्ति के स्थान

ब्रिटिश बोर्नियो ( British Borneo ) इस प्रान्त में रक्त हिङ्गुल ( हंसपाद ), प्राकृतिक पारद और रसपुष्प ( कैलोमल Calomel ) अल्प मात्रा में पाया जाता है।

भारतवर्ष ( इण्डिया India ) यहां अब तक कोई निश्चित स्थान पारद या उसके खनिजों की प्राप्ति का विदित नहीं हुआ है। अभी हाल ही में चित्राल ( पंजाब ) की नदी की रेत में हिङ्गुल के अस्तित्व का पता लगा है। यह स्थान सावधानी पूर्वक सुरक्षित कर दिया गया है ( मानोग्राफ ऑनमर्क्युरी ओर्स पृष्ठ १२ )

इसके अतिरिक्त अदन ( Aden ), अफ़गानिस्तान ( Afghanistan ), अण्डमन आइलेण्ड ( Andaman Islands ) बर्मा ( Burma ), तिब्बत ( Tibet ) आदि पार्श्ववर्ती देशों में भी हिङ्गुल के मिलने की सन्दिग्ध सूचनाएँ समय समय पर प्रकाशित हुई हैं।

( बिब्लोग्राफी भाग २ पृष्ठ ३६३ )

अफ़्रीका ( Africa ) न्यासालेन्ड ( Nyasaland ) नामक स्थान में पारद का होना बताया गया है। किन्तु उसकी ब्योरेवार रिपोर्ट अभीतक प्रकाशित नहीं हुई है।

यूनियन आफ् साउथ अफ्रिका ( Union of South Africa ) ट्रान्सवाल जिले में स्फटिक के साथ मिला हुआ हिंगुल पाया जाता है। एवं इसी देश के अन्य स्थानों में गेलेना ( Galena ) or Lead Sulphide-लेड सल्फाइड) यशद (Zinc), स्फटिक, रेणुशिला आदि के साथ में मिलता है। एक स्थान पर प्राकृतिक पारद सुवर्ण के साथ भी पाया जाता है।

उत्तरीय अमेरिका ( North America ) केनाडा ( Canada ) के सब प्रान्तो में भिन्न भिन्न जातीय खनिज पाषाण और उष्ण स्रोतों में प्राकृतिक पारद और हिंगुल पाया जाता है।

आस्ट्रेलिया ( Australia ) इस देश में हिंगुल और प्राकृतिक पारद अनेक स्थानों में पाया जाता है। सन् १८९२ तक केवल क्वीन्सलेन्ड ( Queensland ) से १३७०० पाउण्ड (१ पाउण्ड आधा सेर के बराबर होता है ) पारद निकाला गया है। यहां ज्वालामुखी पाषाणों में भी

३६ रसरत्नसमुच्चये—

अधिकतर पारदीय खनिज मिलते हैं । पारद के खनिज निकालने के लिये यहां अनेक कूप खने गये हैं, जिनकी गहराई ५० से २४० फीट तक है ।

पापुआ ( Papua ) इस देश में भी पारद के खनिज पाए जाते हैं। किन्तु अभी तक पारद निकालने का काम प्रारम्भ नहीं हुआ है इसलिये यहां के खनिजों का व्यवहारिक मूल्य का पता नहीं लग सकता है ।

न्यूज़ीलैण्ड ( New Zealand ) इस देश में सोना, चांदी, माक्षिक आदि खनिजों के साथ अनेक स्थानों में पारदीय खनिज पाये जाते हैं । सन् १९१७ से १९२० ई० तक ५०० फ्लास्क पारद पुही पुही (Puhi Puhi) नामक स्थान से निकाला गया था । इस देश के एक स्थान पर उष्ण-स्रोत में हिंगुल प्राकृतिक गन्धक के साथ अन्य खनिजों के सहयोग में पाया जाता है ।

अल्वेनिया ( Albania ) यह विदित हुआ है कि इस देश में भी पारद के खनिज हिंगुल और प्राकृतिक पारद पाये जाते हैं । किन्तु ब्योरा अभी तक मालूम नहीं हो सका है ।

जोकोस्लोवेकिया ( Czechoslovakia ) इसके दो तीन प्रान्तों में हिङ्गुल, पारद-मिश्रक (Amalgam) माक्षिक, स्फटिक आदि के साथ पाया जाता है । खड़िया के रूपान्तरित स्लेट और लावा के तर ( Sheet ) के बीच में हिगुल, गेलेना और यशद भी पाये जाते हैं ।

फ्रान्स और कार्सिका ( France and corsica ) इस देश के अनेक प्रान्तों में हिङ्गुल और प्राकृतिक पारद चूने ( calcite ) की भूमि में माक्षिक, स्फटिक, यशद, खर्पर ( Calarmine ), गेलेना ( Galena ) पारदीय मिश्रक ( Amalgam ), एन्टिमनि, गन्धक, आर्सेनिक, प्लेटिनम् ( Plati-num ) आदि के साथ पाया जाता है । इस में प्लेटिनम् का अल्पांश ही मिलता है ।

जर्मनी ( Germany ) जर्मनी में पारद के खनिज अधिक नहीं प्राप्त होते हैं । जितने भी अब तक प्राप्त हुए थे वे सब काम में आगये हैं । तथापि किसी किसी स्थान विशेष पर अनेक अन्य खनिजों के साथ धागे की शकल के तार से हिङ्गुल के रेशे पाये जाते हैं । एक स्थान पर फोसिल मछियों में भी हिङ्गुल जमा हुआ पाया गया है ।

इस के अतिरिक्त प्राकृतिक पारद, रजत मिश्रक ( silver amalgam ), केलोमल ( रसपुष्प ), मेटे सिन्नावार ( कृष्ण हिङ्गुल ), मर्क्युरियल फेहलोर ( Mercurial Fehlore ताम्र मिश्रक ) भ. पाये जाते हैं । इन के साथ साथ माक्षिक, रक्त और पीत गैरिक, साइडराइट ( Siderite ), सुरमा ( Gelena ), टेट्रा हीड-

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राइट ( Tetrahedrite ) सुवर्ण-रौप्यमाक्षिक, स्फटिक, एन्टिमनि, अयस्कान्त ( Pyrolusite ), सिलो मेलेन, ( Psilomelane ) आदि खनिज भी मिलते हैं । एक स्थान पर २७०० फुट और दूसरे स्थान पर १२०० फुट की बिस्तृत भूमि पर फैले हुए पारदीय खनिज पाये गये हैं । राइनलेन्ड ( Rhinland ) के ज़िले में ९० फ्लास्क पारद प्रतिवर्ष यशद खनिज के साथ निकलता है ।

हङ्गरी ( Hungary )

महायूद्ध के पूर्व हङ्गरी में वार्षिक ९० टन पारद निकलता था । अब उस के प्रान्त बदल गये हैं । हङ्गरी में एन्टिमनि के साथ पारदीय खनिज पाये जाते थे, जहां तक विदित हुआ है आज कल इस देश में पारद निकलने का व्यवसाय नहीं होता है ।

इटली ( Italy )

इटली में सर्वत्र पारदीय खनिज प्राप्त होते हैं । वहां पर कई एक पुरानी बड़ी बड़ी खानें हैं । पारदीय खानों का प्रबन्ध राजकीय तरफ से किया जाता है । इटली में पारद के मुख्य चार खनिज पाये जाते हैं ।

१—स्टील और दैस्ट्येन्डरफ ( Steel orestahlerz ) ।
इस में ७५ फीस दी पारद मिलता है।

२—लोवर ओर ( Liverore--Lebererz ) यकृदाकार हिङ्गुल या दरदः । यह मृत्तिका जाति का हिङ्गुल है। इस पर स्टेह लर्ज ( Stehlerz ) का कञ्चुक ( Kernels ) चढ़े रहते हैं ।

३—कोरे लाइन ( Coralline = corallenerz )
प्रवालाभ हिङ्गुल ( श्वेतेरेखः प्रवालाभः )

४—ब्रिक ( Brickore ) और गिरि सिन्दूर या रक्त हिङ्गुल ( जपाकुसुमसदृकाशः हंसपादो महोत्तमः ) यह पारदीय खनिजों के किनारे पाया जाता है । सम्भवतः इसी प्रकार के खनिजों को देखकर ऊपर के वाक्य प्राचीनों ने लिखे हैं । इटली के इड्रिया ( Idria ) नामक स्थान में सब से पुरानी पारद की बड़ी खाने हैं । इन खानों में एक स्थल पर फन्नेल (Funnel) की शक्ल के पाइप (नल या छिद्र) हैं । सम्भव है एसे ही कूपाकार छिद्र देख कर इस ग्रन्थ ( रसरत्न समुच्चय ) में 'जाताः कूपाश्च पञ्च च' वाक्य किसी महर्षि ने लिख दिये हों । इस विषय में मानो ग्राफ आफ मर्करी के पृष्ठ ४९ का निम्न लिखित अवतरण ध्यान में रखने योग्य है—

In the Immediately neighbouring rock are several funnel-shaped cavities also filled with metallif erous sands and Clays. The proportion of cinnabar mereasing with the depth.

३८ रसरत्नसमुच्चये—

These funnel-shaped cavities appear to bear some analogy to the vertical pipes or holes (Trajas) in Gypsum-at the mercury mines of Huitzuco,-Gnerrero, Mexico. Broadly Speaking, the hole deposit forms a large funnel the position of which is marked on the surface By a distinct depression.

पोर्तुगाल ( Portugal )
कुछ वर्षों से इस देश में भी पारद की निकासी होने लगी है।

रूमानिया ( Rumania )
इस प्रदेश के जलाटना ( Zalatna ) नामक स्थान के पारदीय खनिजों से पारद निकालने का व्यवसाय किया जाता था। किन्तु व्यवसाय लाभ प्रद न होने के कारण प्रायः बन्दसा हो गया है।

रस्सिया ( Russia )
योरोप और एशिया के अन्दर युक्रेन ( Ukraine ) सहित इस देश में सन् १८९७ में ६१६ मेट्रिक टन पारद निकला था। सन् १९१० में तीन चार सौ मेट्रिक टन के लग भग पारद की निकासी हुई और उसके एक ही वर्ष के बाद सन् १९११ में केवल २६ मेट्रिक टन की उपज रह गई। अब बहुत अल्पमात्रा में इस देश में पारद का रोजगार होता है। सारे एशिया में हिङ्गुल, प्राकृतिक पारद आदि पारदीय खनिज प्राप्त होते हैं। माक्षिक, एन्टिमनी, गन्धक, गेलेना, स्फटिक, चूना आदि खनिजों के साथ साथ व पत्थर के कोयले के साथ भी हिङ्गुल मिला पाया जाता है।

स्केण्डिनेविया ( Scandinavia )
यहां पर प्राकृतिक रजत के साथ पारद् पाया जाता है। स्वीडन के साला ( Sala ) नामक स्थान पर पारदीय रजत-मिश्रक ( Silver Amalgam ), प्राकृतिक पारद और किसी किसी स्थान पर अल्प मात्रा में हिङ्गुल भी पाया जाता है।

स्पेन ( Spain )
इस समय संसार में स्पेन देशीय अलमाडन ( Almadan ) नामक स्थान की पारदीय खनिजों की खानें सर्व प्रधान हैं। संसार की पारद की माँग एक तिहाई इसी की खानों से पूरी होती है। इस स्थान की खानों में विशेषता यह है कि गहराई के साथ साथ ऊँचे दर्जे के उत्तम पारदीय खनिज निकलते जाते हैं। इस समय तक १३०० फुट की गहराई की खानें खुद चुकी हैं। इस देश में शताब्दियों से पारद् निकालने का व्यवसाय हो रहा है। यहां का मुख्य खनिज पारद निकालने योग्य रक्त हिङ्गुल ( cinnabar ) ही अधिकता से मिलता है। यह हिङ्गुल बहुत तेज लाल रङ्ग का

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होता है ( Cinnabar of Bright Red colour ) यहाँ से सम्भवतः रसशास्त्रियों का "जपाकुसुम सङ्काशो हंसपादो महोत्तमः" इस प्रकार का हिङ्गुल आता रहा है । यहाँ शुद्ध रवेदार हिङ्गुल अल्पमात्रा में पाया जाता है । जितना भी मिलता है वह स्फटिक, माक्षिक और बराइट के रवोंके साथ में मिलता है । ढेले की शक्ल का हिङ्गुल जिसमें ७५ से ८५ फीसदी पारद रहता है बहुतायत से पाया जाता है । इसके सहयोग में अन्य खनिज बहुत कम मिलें पाये जाते हैं । प्राकृतिक-पारद, केलोमल, बहुत कम मात्रा में मिलता है । स्पेन के एक प्रान्त में रक्त और कृष्ण हिङ्गुल, हरिताल, मनः शिला, आर्सेनिक ( Arsenic ), सुधा पाषाण ( Lime Stone ), रेणु पाषाण ( Sand stone ) आदि के साथ में पाया जाता है ।

अल्माडन की खानों में सन् १५६४ ई० से १९१९ ई० तक नीचे लिखो सारणी के अनुसार पारद की निकासी हुई है ।

समयमेट्रिक टन्सवार्षिक निकासी
१५६४-१७००१७८६३१०३
१७००-१८००४२१४९४२१
१८००-१८७६६०१६८०२
१८७६-१९१९४३००० (अनुमान)१००० (अनुमान)

युगोस्लेविया ( Yugoslavia )

इस स्टेट में बोसनिया ( Bosnia ), सर्विया ( Servia ), स्लोवेनिया कार्नियुला ( Slovania-Carniala ) प्रान्तों में मुख्यतः पारद के खनिज पाये जाते हैं ।

एशिया माइनर ( Asiaminor )

इस देश में ३००० वर्षों से पारद निकालन का व्यवसाय हो रहा है। सन् १९०६ और १९०७ में वार्षिक ३००० फ्लास्क पारद कोनिया और केरो बुरम माइन्स् (खान) ( Konia And Karo Burum Mines ) में निकला था । इसी प्रकार एनाटोलिया ( Anotolia ) में ४००० से ५००० फ्लास्क प्रतिवर्ष निकलता रहा है । सन् १९०९ में तुर्क स्थानीय ( Turkish ) पारद की निकासी १४२ टन्स ( ३७८६ फ्लास्क ) हुई थी । महायुद्ध के समय एशियाटिक तुर्की की पारदीय खानें जर्मनी के अधिकार में आगई थीं ।

चाइना या चीन ( China )

चीन के अनेक स्थानों में पारदीय खनिजों के मिलने की सूचनायें समय समय पर प्रकाशित होती रही हैं । इस समय केवल युआनशानचङ्ग (yuanshanchang) नामक स्थान की खाने ही प्रसिद्ध हैं । यहां पर दो प्रकार का हिङ्गुल पाया जाता है । एक का रङ्ग तेज लाल ( Bright Red ) और दूसरे का गहरा लाल ( Dark Opequered ) होता है । यहां बहुत ही प्राचीन प्रणाली से हिङ्गुल एकत्रित किया

४० रसरत्नसमुच्चये—

जाता है। एवं इसे इंगुर ( Vermillion ) के रूप में ही तैयार करते हैं, जिसका स्थानीय व्यापारी रङ्गसाज़ी में उपयोग करते हैं। प्राचीन काल में इसी प्रकार के हिङ्गुल के व्यापार के कारण भारतीय रस शास्त्रियों ने 'चीन पिष्ट' और चूर्णपारदः पर्याय शब्द रखकर हिङ्गुल के चीन सम्बन्धी व्यापार को चिरस्मरणीय बना दिया है। चीन में सन् १९०६ ई० के पूर्व अनेक वर्ष तक प्रति वर्ष ६४० फ्लास्क पारद निकलता रहा है। सन् १९१८ ई० में ६४६८०० पाउन्ड पारद चीन से निकला था।

जापान ( Japan ) वर्तमान समय में जापान में केवल एक स्थान की खानें पारद निकालने के लिये खनी जा रही हैं। यहां पर हिङ्गुल चूने के पाषाण ( Calcite ) और रेणु शिला के साथ पाया जाता है।

न्यूकेलेडोनिया ( New Caledonia ) न्यूकेलेडोनिया के बोरेल ( Bourail ), केनाला ( Canala ), कोनो आना ( Konaona ) और पिवाका ( Piwaka ) नामक स्थान पर पौने-दो से सवा-दो फीसदी पारद निकालने वाले खनिज प्राप्त होते हैं, किन्तु आजकल यहां पर पारद की निकासी का कारोबार बन्द है।

फारस ( Persia ) पर्सिया प्राचीन समय से ही फारस में पारदीय खनिजों का होना विदित था। तख्तई-सुलेमान ( Takht-i-Suleiman ) नाम के प्रदेश के ज़िलों में हिङ्गुल, प्राकृतिक पारद, पत्र हरिताल, और मनः शिला मिलते हैं। हरिताल और मनः शिला पर्सियन कुर्दिस्तान ( Persian Kurdistan ) नामक स्थान पर भी पाये जाते हैं।

अफ्रीका ( Africa ) अफ्रीका के एलजीरिया ( Algeria ) नामक स्थान से कुछ समय पूर्व थोड़ा पारद विदेशों में भेजा गया था। इस देश में यशद रजत युक्त स्रोतोञ्जन ( Argenti Ferous ), खर्पर (Calamine) नीलाञ्जन ( Antimony ) आदि के साथ में हिङ्गुल पाया जाता है।

एलजीरिया ( Algeria ) के अतिरिक्त बीर-बेनी-सोलाह ( Bir-Beni-sulah ) नामक स्थान में जो कोलो ( Collo ) से ६ माईल की दूरी पर है गेलेना के साथ में हिङ्गुल मिलता है। और भी अफ्रीका के अनेक प्रदेश हैं जिन में गेलेना या यशद के साथ हिङ्गुल पाया जाता है। कहीं कहीं स्वतन्त्र रूप से भी हिङ्गुल मिलता है।

इटालियन सोमेलिलेण्ड ( Italian Somaliland ) इस देश के उत्तरी भाग में हिङ्गुल होने की सूचना प्रकाशित हुई है।

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ट्यूनिस ( Tunis )

एलजीरिया के समान यहां भी अनेक प्रकार के खनिजों के साथ हिङ्गुल का जमाव मिलता है।

अपर सेनेगल और नीगर ( Upper Senegal and Neger )

इस देश के बम्बोक ( Bambouk ) प्रान्त में पारदीय खनिज मिलते हैं।

नार्थ अमेरिका ( North America )

उत्तर अमेरिका के पारदीय खनिज अलस्का ( Alaska ) से सेन्ट्रल अमेरिका ( Central America ) तक कार्डिलेरनरीजन ( Cardilleranregion ) में प्राप्त होते हैं।

होन्डुरस ( Honduras )

होन्डुरस के प्रजासत्तात्मक राज्य में पारदीय खनिजों का होना चिरकाल से विदित है। सन् १९०९ ई० में १३८ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। स्पेनिश लोगों के राज्यकाल में उत्तम हिङ्गुल का जमाव कोमायागुआ ( comayuga ) विभाग में रहा किन्तु फिर उसका उपयोग न हीं किया गया।

मेक्सिको ( Mexico )

मेक्सिको में सर्वत्र पारदीय खनिजों का जमाव पाया जाता है किन्तु मुख्यतः सान लुइस पोटासी ( San Louis Potasi ) और ग्वरेरो ( Guerrero ) राज्य में पाये जाते हैं।

यहां के सब पारदीय खनिज ज्वालामुखी के उद्गम स्थानीय उष्ण स्रोतों की रासायनिक क्रिया से उत्पन्न हुए विदित होते हैं। इस देश में रक्तहिङ्गुल, कृष्णहिङ्गुल और रसपुष्प ( केलोमल ) व प्राकृतिक पारद बहुतायत से पाये जाते हैं।

यूनाइटेड स्टेट्स ( United States )

प्रायः सारे युनाईटेड स्टेट्स आफ अमेरिका में पारदीय खनिज पाये जाते हैं। संसार में स्पेन के उपरान्त कैलिफो-र्निया का नम्बर दूसरा है। इस देश में रक्तहिङ्गुल, कृष्णहिङ्गुल, रसपुष्प (कोलोमल) और प्राकृतिक पारद प्रायः सहयोग में मिलते हैं। पारदीय अन्य खनिज भी साधारणतया इस देश में यत्र तत्र मिल जाते हैं। अमेरिका के संयुक्त राज्यके पारदीय खनिज हल्की जाति के हैं। इनमें पारद ः५% फीसदी निकलता है। सन् १९१८ के उपरान्त पारद का मूल्य गिर जाने से और खान के व्यवसाय का व्यय बढ़ जाने से यहां के पारद की निकासी पर बुरा प्रभाव पड़ा है। जिससे सन् १९२१ में ६३३९ फ्लास्क ही पारद निकाला गया। यह मात्रा सन् १९२० की अपेक्षा अधिक है और सन् १९१२ से १९१९ तक की अपेक्षा चतुर्थांश के लगभग है और जो सन् १८५० से अब तक की निकासी को देखने से सब से अल्प मात्रा मानी

४२ रसरत्नसमुच्चये—

जाती है। इस निकासी में भी टेक्सास से ३१ फ्लास्क, केलिफोर्निया से ३०९१, नवाडा से १०० और इहाडो से १ फ्लास्क पारद निकला है। सन् १९१७ से अलस्का और एरिजोना से पारद बिलकुल नहीं निकाला गया। इसी प्रकार इहाडो से सन् १९१९ और १९२० में औरेगन से १९२१ में एक दम पारद की निकासी नहीं हुई।

अलस्का ( Alaska ) इस प्रदेश में जार्ज टाउन ( GeorgeTown ) के १५ मील ऊपर नदी के उत्तरी किनारे पर १९०६ में हिङ्गुल के अस्तित्व का पता लगा है और वहां पारद निकालने का कार्य प्रारम्भ किया गया।

यहां पर स्टिबनाइट ( Stibnite ), स्फटिक ( quarty ), साइडराइट ( Side-rite ) आदि खनिज के सहयोग में हिङ्गुल पाया जाता है। स्टिबनाइट ( एन्टिमनि सल्फाइड ) और हिङ्गुल मालूम होता है कि साथ ही साथ भूगर्भ से निकल कर जमा हुए हैं; क्योंकि ये एक दूसरे पर जमे हुए पाये जाते हैं। कहीं पर स्टिबनाइट पर हिंगुल जमा हुआ मिलता है तो कहीं पर स्टिबनाइट हिङ्गुल पर। जहां पर ये खनिज प्राप्त होते हैं वह स्थान दुर्गम होने के कारण पारद निकालने का कार्य बन्द सा रहा तथापि सन् १९१९ में वहां पर नवीन पद्धति से कार्य प्रारम्भ किया गया और जो माल निकला वह वहां के ही व्यवसायियों के हाथ बेच दिया गया। इसी नदी के बहाव की तरफ १०० मील नीचे की ओर एक स्थान पर हिंगुल पाया गया है। किन्तु वहां पर भी पारद निकासी का कार्य अब तक प्रारम्भ नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त भी अन्य कई स्थानों में हिंगुल पाया जाता है और सैकड़ों पाउण्ड निकाला जा सकता है। नोमे सीवार्ड पेनिन्सुला ( Nome seward peninsule ) से लगभग ६० मील की दूरी पर 'पलेसर माइनिङ्ग डेनियल क्रीक' नामक स्थान है वहाँ पर एकत्रित संगृहीत रूप से अच्छी मात्रा में हिंगुल मिलता है। इसी ज़िले में एक स्थान और है जिसे 'फ्लेसर्स आफ ऐरन क्रीक' कहते हैं वहां पर हिंगुल का जमाव अधिक मात्रा में है।

एरिज़ोना ( Arizona ) इस प्रदेश में ६ मील तक लम्बे और ११ मील तक के चौड़े फैलाव में पारदीय खनिज पाये जाते हैं। जिस भाग में हिंगुल मिलता है वह ३०० से ५०० फीट की दूरी पर क्षेत्र रूप से विभक्त है। पारद निकालने का सारा कार्य खनिज की अधिकता को देख कर बीच के भाग में प्रारम्भ हुआ है। यहां पर हिङ्गुल पृथ्वी की शिरा और छोटे ३ गर्त व खण्डहरों में पाया जाता है। कभी कभी रौप्यमाक्षिक, सुवर्णमाक्षिक, गरिक आदि के साथ में भी हिंगुल मिल जाता है। एक स्थान पर ३ मील चौड़ा हिंगुल प्राप्ति का क्षेत्र है, जहां पर कृष्ण और रक्त दोनों प्रकार का हिंगुल, स्फटिक,

प्रथमोऽध्यायः । \hfill ४३

सुधापाषाण, गैरिक आदि की भूमि में पाया जाता है। सन् १९१७ में ४० फ्लास्क पारद इस प्रदेश से निकला था।

केलिफोर्निया ( California )

सन् १८५० से १९२१ तक केलिफोर्निया पारद निकालने का प्रधान देश रहा है। यहां से २२६११८१ फ्लास्क या ७६२९३ मेट्रिक टन्स पारद वार्षिक निकलता है यह मात्रा प्रसिद्ध स्पेनदेशीय अल्माडन की खानों की निकासा से ५० वर्ष की पारद की पैदाइश के बराबर है। किसी कारण वश केलिफोर्निया की अपेक्षा टेक्सास की पारद की निकासी सन् १९२१ में अधिक रही है। लगभग ८०% फीसदी अमेरिका के संयुक्त राज्य की पैदाइश १० खानों से हुई है। इन खानों में मुख्य न्यूएल्माडन की खान है जहां से सन् १८५० से १९१७ ई० तक १०२११८६३ फ्लास्क पारद निकला है। इस से दूसरे नम्बर पर न्यू इड्रिया की खाने हैं, जहां से सन् १८५८ से १९१७ तक ३०६४७५ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। तीसरा नम्बर ओटहिल का है यहां से सन् १८७६ से १९१७ ई० तक १५२०६६ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। केलिफोर्निया का पारदीय खनिज प्राप्ति का स्थान ४०० मील लम्बा और ७५ मील चौड़ा है और यहां पर प्राचीन व अर्वाचीन ज्वालामुखी के उद्गम चिह्न अनेक पाये जाते हैं। सन् १९१९ ई० में पारदीय खानों के मुख्य जिले सानबेनीटो, न्यू इड्रिया, माइन्स ( San Benito, New Idria Mines ), सान्टा क्लेरा ( Santa clara ), सोनोमा ( Sonoma ), सान लुइस ओबिस्पो (San Luis obispa), नापा (Napa) और लेक ( Lake ) गिने जाते हैं।

कार्न कौन्टी ( Karn county )

कार्न कोन्टीं नाम के प्रान्त में पारदीय खनिज प्राप्ति का जो स्थान है वह केलिफोर्निया के ज्ञात पारदीय खनिज प्राप्ति स्थान से भिन्न है। यहां का कारखाना हाल ही के शोध का फल है। यहां की गहराई केवल ३० फीट ही भूगर्भ में है। यहां से पारद की निकासी हुई है, किन्तु उसका ब्योरा उपलब्ध नहीं है। ग्रेट वेस्टर्न नामक खान से सन् ३८११ से १९०९ तक ९८३१६ फ्लास्क पारद निकाला गया। बाद को यह खान बन्द कर दी गई है। प्रसिद्ध सल्फर-बेङ्क नामक गन्धक की खान से जहां पहिले केवल गन्धक की ही निकासी होती थी ७२४०० फ्लास्क पारद निकाला गया है। यहां के स्रोत के जल से जो गैसें निकली हैं वे कार्बोनिक एसिड, सल्फ्युरेटेड हाइड्रोजन, सल्फर डाई ओक्साइड और मार्श गैस हैं। इन जलों में कार्बोनेट्स, बोरेटस, सोडियम् क्लोराइड ( नमक ), पोटासियम् क्लोराइड, अमोनियम् क्लोराइड ( मोसादर ), व अल्कलाइन सल्फाइड घुले पाये जाते हैं। हिङ्गुल विकृत बेसाल्ट नामक ज्वालामुखी पाषाण खण्डों के तले पाया जाता है जो किसी

४४ रसत्नसमुच्चये -

स्थान पर दानेदार और किसी स्थान पर मृत्तिकाकृति का हिङ्गुल जमा मिलता है। यहां के हिङ्गुल के सहयोग में गन्धक, ओपल, स्फटिक और रौप्यमाक्षिक पाये जाते हैं। बेकर (Becker) का कथन है कि सल्फर बैंक के अन्तराल को खान केलिफोर्निया के प्रधान पारदीय खानों के मुकाबले की है।

१९१७ में सल्फर-बैंक नामक खानों का माल ८००,००० टन बाष्प यन्त्रों से पीसा गया था और सब से अधिक पारद इस देश से सन् १९१८ में निकाला गया, किन्तु सन् १९१९ में फिर पारद की निकासी नाम शेष रह गई। लेक ज़िले में पारद निकालने के स्थान सेन्ट जोन्स (St Johns) और हेलन (Helen) हैं। नापा ज़िले में सन् १८६३ से १९१९ तक ३३८९११ फ्लास्क पारद की निकासी हुई। इस के अतिरिक्त कोरोना ((Corona), नाक्से विल (Knox ville), मनहाटन (Manhattan) नामक खानों में भी रक्त हिङ्गुल, कृष्ण हिङ्गुल, रौप्यमाक्षिक, गन्धक, स्टिबनाइट के साथ पाया जाता है, किन्तु सन् १९२० से इन खानों का व्यवसाय बन्द है। ओट हिल (oat Hill) की खान में रेणुशिला के अन्दर जमा हुआ हिङ्गुल पाया जाता है। सन् १८७६ से १९१७ तक १९२५६६ फ्लास्क पारद की निकासी हुई है। सानबेनिटो (San Benito) ज़िले में ३३४२५९ फ्लास्क पारद सन् १८६५ से १९१९ तक निकाला गया। अमेरिका के संयुक्त राज के पारद निकासी का यह ज़िला सब से अधिक उपजाऊ समझा जाता है। न्यू इड्रिया की खान से इस स्टेट के सब पारद निकासी की अपेक्षा आधा पारद निकाला गया है। न्यू इड्रिया की खान में अधिकतर कृष्ण हिगुल पाया जाता है। यहां पारद प्राप्ति का स्थान २।। मील के फैलाव में है। १५-२० मील भूगर्भ के अन्तराल में खुदाई का काम हो रहा है। सान, लुइस, ओबिस्पो जिलों (San Luis obispo country) में वहां के आदिमनिवासी (Indians) शताब्दियों से हिङ्गुल को रङ्ग के काम में उपयोग करते हैं। व्यापारियों ने सब से प्रथम सन् १८६२ में इस स्थान के खान की रक्षा की और सन् १८७६ से १९१८ तक ४९६०० फ्लास्क पारद निकला।

क्लो (Klau) नामक खान से १४२१३ फ्लास्क पारद निकाल कर सन् १९१६ में काम बन्द कर दिया गया था और फिर सन् १९१९ में प्रारम्भ हुआ। यहाँ पर हिङ्गुल स्फटिक और रौप्य माक्षिक के सह योग में पाया जाता है।

ओसीनिक (Oceanic) नामक खान से १९१७ के अन्त तक २३५५१ फ्लास्क पारद निकाला गया था। इस ज़िले में केवल इसी खान से सन् १९१८ में १४६० फ्लास्क पारद की निकासी हुई। यहां की भूमि मे हिङ्गुल एकसा सर्वत्र पाया जाता है। यहां सन् १९१९ में पारद का एक ओर खनिज १५० फुट की गहराई पर पाया गया है।

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सेन्टाक्लेरा कौन्टि ( Santa clara county )

इस प्रान्त में न्यू एल्माडन की खानों का पता सन् १८२४ में लग गया था, किन्तु सन् १८४५ तक यहां के पारदीय खनिज हिङ्गुल की पहिचान न हो सकी। यहां की खानों से पारद की बडी मात्रा निकलने का उल्लेख अन्यत्र किया जा चुका है। इस समय तक १८ कूप ( Shapcha ) खोदे गये हैं। यहां के भूगर्भवर्ती कन्दराओं की लम्बाई १०० मील के लगभग है। इन कन्दराओं में से अनेक कन्दराएँ अपने आप बैठ भी गई हैं। सन् १९१७ में सब से अधिक गहराई २४५० फुट मानहिल नामक पहाड़ी की चोंटी जो १६०० फुट ऊँची है के नीचे थी। इस लिये संसार में यह सब से बड़ी और गहरी खान गिनी जाती है। ८०० फुट गहराई के नीचे का भाग कुछ वर्ष हुए बन्द कर दिया गया है। स्पेन की अल्माडन खानों के हिङ्गुल की अपेक्षा यहां का माल अत्यन्त निम्न-श्रेणी का है, जिसमें केवल ॥ से १ फीसदी तक पारद पाया जाता है। इस खान का वर्णन पढ़कर यह सहज में ही समझ में आजाता है। कि इस ग्रन्थ ( रस रत्न समुच्चय ) में जो “शतयोजननिम्नास्ते जाताः कूपास्तु पञ्च च” लिखा है, वह कहां तक सत्यता युक्त है। संसार में अनेक परिवर्तन होते रहते हैं। उस समय पारद निकालने के केवल पांच ही कूप खुदे मिले होंगे। आज यहां पर अठारह कूप खुदे पाये जाते हैं। शतयोजन निम्न मानना इस दशा में ठीक हो सकता है कि पृथिवी के उप-रितल से जो पारद निकालने के लिये भूगर्भ में खुदाई की गई वह खुदाई नापकर जोड़ने से शतयोजन अर्थात् ४५०० मील के लगभग गहराई समझी जावे। आजकल भी इसी प्रकार की मापने की प्रथा प्रचलित है। योजन शब्द से चार कोस साधार-णतया माने जाते हैं, किन्तु इसका भी शास्त्रीय विचार करने से पता लगता है कि एक योजन ४ मील नौ सौ साठ गज का होता है। मेदिनीकारने “योजनं परमात्मनि चतुष्कोश्यां च योगे च” लिखा है, जिससे चार कोस स्पष्टतया माना है। इसी प्रकार तारानाथ ने “स्याद्योजनं क्रोशचतुष्टयेन” लिखा है। लीलावती में भी विशेष गणना करके चार कोस ही का योजन माना है। किन्तु उस गणना से ३२००० हाथ का योजन होता है। हाथ के नाप के लिए मान शास्त्र में १२ अंगुल का हाथ माना है। लीलावती और मान शास्त्र की संज्ञाओं में कुछ भेद है।

“द्वादशाङ्गुलिकाहस्त तद्द्वयन्तु शयः स्मृतः ।
तच्चतुष्कं धनुः प्रोक्तं क्रोशो धनुःसहस्रिकः ॥
तच्चतुष्कं योजनं स्यात् ....................”

<div align="right">( मानशास्त्र )</div>

इस हिसाब से १६००० हाथ का १ योजन होता है।

४६ रसरत्नसमुच्चये—

“हस्तैश्चतुर्भिर्भवतीहदण्डः क्रोशः सहस्रद्वितयेन तेषाम् ।
स्याद्योजनं क्रोशचतुष्टयेन”

इस हिसाब से ३२००० हाथ का एक योजन होता है । इन हिसाबों का आज कल के हिसाब से मुकाबला करें तो ८००० गज का १ योजन होता है । एक मील १७६० गज का होता है ।

इन अवतरणों को देखने से साधारणतया यह विदित होता है कि निम्न का अर्थ-वही करना चाहिए जो ऊपर किया गया है, अर्थात् निम्न का अर्थ एकदम गहरा नहीं किन्तु भूगर्भ में जो अनेक गुफाएं पारद निकालने के लिये खोदी जाती हैं उनका नाप करके एकत्रित लिखी गई है । एक स्थान पर कूप की गहराई २४५० फुट तक हुई है । यह गहराई यदि एक योजन तक चली जावे तो वहां पर मनुष्य का जीवन सम्भव नहीं है । मेरे विचार में आजकल की प्रथा के अनुसार गणना और नाप का व्यवहार पूर्व काल में भी था और उसका उपयोग इसी तरह समझने के लिये इस समय भी करना चाहिए । ऐसा करने से व्यवहार में सरलता हो जाती है तथा असम्भवता का दोष दूर हो जाता हैं । इस भाव को स्पष्ट समझने के लिये आजकल पारद की खान के विषय में जो प्रत्यक्ष है वह नीचे लिखे अवतरण को विचारने से ठीक समझ में आसकता है ।

Santa Clara County—
The new Almadan groups of mines was discovered in Santa Clara County by two Mexicans in 1824, but the ore was not recognized as a Cinnabar until 1845. The large output of mercury from this mine has already been mentioned, altogether 18 shafts have been sunk, and there are nearly 100 miles of underground workings a large proportion of which have of course caved in the greatest depth in 1917 was 2450 ft. below the top of Mine Hill ( 1600 ft. Altitude ). So it is the deepest and most extensive mercury mine in the world. Monographs on mercury are Page 757

सोलेनो ( Solano ) नामक ज़िले में सन् १८७३ से १९१८ तक १७११६ फ्लास्क पारद की निकासी हुई । यहां की खान का नाम सेन्ट जौन्स ( St. Johns ) है । इस खान का पता सन् १८५२ में लगा और सन् १८७३ में यहां से पारद निकालने का व्यवसाय प्रारम्भ हुआ । तब से सन् १९१७ तक १६४६५ फ्लास्क पारद निकाला गया था । यहाँ पर हिंगुल रौप्यमाक्षिक या विमल ( Marcasite ) के साथ पाया जाता है । हिंगुल के समीप जाड़ों में गाढ़ा गाढ़ा खनिज तैल भी जमा मिलता है । यह खान ६६० फुट गहरी है ।

प्रथमोऽध्यायः । ५७

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सोनोमा ( Sonoma ) ज़िलेमें १८७३ से १९१९ ई० तक ६९०६३ फ्लास्क पारद निकाला गया । जिस में ग्रेट ईस्टर्न और माउन्ट जेक्सन नामक खानों से १८७५ से १९१७ तक ४२०९२ फ्लास्क पारद की निकासी हुई । यहां पर भी हिंगुल रौप्य माक्षिक के साथ में पाया जाता है । इसी ज़िले में रैटल स्नेक ( Rattle snake ) खान में प्राकृतिक पारद ( Native Mercury ) काली मिट्टी की शक्ल में जमा हुआ मिलता है । इसके साथ स्नेहयुक्तशिलाजतु ( oily Bitumen ) भी मिला पाया जाता है ।

सोक्रेट की खान ( Socrate's Mine ) में भी प्राकृतिक पारद पाया जाता है । नीचे की गहराई में हिंगुल भी मिलता है । सन् १९१८ में यहां से कुछ पारद की निकासी की गई किन्तु १९१९ में काम बन्द रहा ।

ट्रिनिटि ( Trinity ) ज़िले में १८७५ से १९१७ तक ३११६६ फ्लास्क पारद उत्पन्न हुआ इसमें से केस्टेला ( Castella ) के पास की अल्टूना ( Altoona ) खान से २९००० फ्लास्क पारद निकला, शेष अन्यत्र से निकला । यहां पर जो हिंगुल मिलता है उसका क्षेत्रफल ४०० फुट लम्बा और ४ से २० फुट चौड़ा है । येलो ( Vellow ) ज़िले में रीड ( Reed ) नामक खान में कृष्ण हिंगुल ही मुख्य खनिज रौप्यमाक्षिक के साथ पाया जाता है । यहां की खान ३०० फुट गहरी है ।

इडाहो ( Idaho )

वेली ( Velly ) ज़िले में १ मील लम्बी चौड़ी भूमि में हिंगुल रौप्यमाक्षिक के साथ मिला पाया जाता है । यहां की फन नामक खान से १९१७ में ५ फ्लास्क और १९१८ में २२ फ्लास्क पारद की निकासी हुई ।

निवाडा ( Nevada )

इस स्टेट में बहुत सी जगह फैला हुआ हिंगुल पाया जाता है । पिलोर नामक पहाड़ के उत्तर पूरब दो मील की दूरी पर और मीना स्थान से दक्षिण पूरब आठ मील की दूरी पर एक पहाड़ है उसमें हिंगुल अधिकता से मिलता है । इस लिए उसका नाम हिंगुल पर्वत ( Cinnabar Mountain ) रख दिया गया है । क्या हमारे देश में आसाम की हिंगुलाज देवी का इसी कारण से तो नाम नहीं स्थिर हुआ है ?, प्रति वर्ष हजारों यात्री वहां पर दर्शन करने जाते हैं । सन् १९१० से १९१९ तक निवाडा से १३७४६ फ्लास्क पारद निकाला गया है किन्तु १९१९ से यहां का कार्य शिथिल हो गया है और १९२० में ७९ फ्लास्क ही पारद निकाला गया । सन् १९२१ में १०० फ्लास्क पारद की निकासी हुई ।

ओरेगन ( Oregon )

इस राज्य में हिंगुल सर्वत्र पाया जाता है किन्तु पारद के निकालने की खानें

४८ रसरत्नसमुच्चये—

थोड़ी सी हैं। जेक्सन ज़िले में गोल्डहिल (सुमेरु) के उत्तर १२ मील दूरी पर हिंगुल अधिक मात्रा में पाया जाता है। यहां १०० से ३०० फुट चौड़ा क्षेत्र है जहां पर ग्रेनाइट रेणु पाषाण का संयोगिक जमाव है। यहां के खनिज में हिंगुल प्राकृतिक पारद, रौप्यमाक्षिक, सुवर्ण, यशद् और कृष्ण हिगुल सा एक भारी खनिज पाया जाता है। सर्वत्र उत्तम श्रेणी का खनिज मण्डूर की शक्ल का १ से २० इञ्च मोटा और वृक की आकृति में पाया जाता है। यहां पारद निकालने का व्यवसाय क्रमशः उन्नति कर रहा है। यहां भी खान २७५ फुट गहरी और ६० फुट लम्बी इस समय है। यहां से १६०० टन खनिज से ४२३५६ पाउण्ड पारद निकाला गया।

लेन ( Lane )

इस ज़िले में हिंगुल और प्राकृतिक पारद साथ साथ पाये जाते हैं। रौप्यमाक्षिक और विमल भी हिंगुल के सहयोगी खनिज हैं। यहां का मुख्य खन्दाक ( Stapa ) १९० फुट लम्बा और १६ फुट चौड़ा है जिसकी गहराई लगभग ४०० फुट के नीचे चली गई है। इसके अन्दर का खनिज १६०००० टन कूता गया था। यहां की खान पारद निकालने की मुख्य खान समझी जाती थी किन्तु १९१९ में बन्द कर दी गई। सन् १९१६ से १९२० तक १८५२ फ्लास्क पारद की निकासी ओरगन राज्य से हुई।

टेक्सास ( Texas )

इस राज्य की सारी पारद की निकासी ब्रिवस्टर ज़िले ( Brewster County ) से हुई। इस स्थान की खोज १८९३ में हुई और १८९९ से १९१९ तक ८९६७० फ्लास्क पारद निकाला गया। यहां का पारद प्राप्ति का क्षेत्र १६ मील लम्बा और दो मील चौड़ा है। यहां की सबसे अधिक गहराई १९०६ में ३०० फुट थी किन्तु चर्न-ड्रिल ( Churn drill ) से ४४७ फुट की गहराई पर भी हिंगुल के सब चिह्न प्राप्त हुए। यहां पर पारद के अनेक खनिज पाये जाते हैं। किसी किसी कन्दरा में ओक्सीक्लोराइड, टर्लिङ्ग व्हाइट, ईगलस्टोनाइट, मेट्रोडाइट, प्राकृतिक पारद और अल्प मात्रा में केलोमल ( रसपुष्प ) हिंगुल के साथ २ पाये जाते हैं। टेक्सास के टर्लिङ्गुओ ( Terlingua ) ज़िले में केलिफोर्निया की अपेक्षा अधिक उत्तम श्रेणी में हिंगुल प्राप्त होता रहा है। यहां की खान २६०० फुट लम्बी और ७५० फुट गहरी है। यहां पर चूने के कङ्कड़ के साथ साथ हिंगुल, प्राकृतिक पारद, खालिस गन्धक, रौप्य माक्षिक और विमल अन्य खनिजों के सहयोग में पाये जाते हैं। १८९९ से १९२० तक टेक्सास से ९३२७१ फ्लास्क पारद की निकासी की गई। सबसे अधिक माल १९१७ में १०७९१ फ्लास्क पारद निकाला गया, बाद में काम शिथिल पड़ गया तथापि सन् १९२१ में केलिफोर्निया की अपेक्षा टेक्सास में पारद अधिक निकाला गया। उसकी मात्रा ३१४४ फ्लास्क थी।

प्रथमोऽध्यायः । ४९

प्रथमोऽध्यायः । ४९

उटाह ( Utah )

यहां पर मृत्तिका जाति के हिंगुल से बहुत मात्रा में पारद निकालने का अध्य-वसाय होता रहा है। यहां पर सोने की खान में से ही पारद के खनिजों के निकास का पता लगा है। इस खान में टिमानाइट ( Tiemannite Hgsse ) और ओना-फ़्राइट ( Ono frite Hgsse ) नामक पारदीय खनिजों से भी थोड़ा पारद निकाला गया । १९०६ में १११३ फ्लास्क पारद निकाला गया था ।

वाशिंगटन Washington )

यहां के प्रान्तों में भी पारद की पर्याप्त निकासी हुई है तथापि १९१२ के उपरान्त पारद के भाव के गिर जाने से और निकासी का खर्च बढ़ जाने से इस का व्यवसाय मन्द पड़ गया है। स्पेन की सरकार अपने यहां पारद की निकासी अधिक बढ़ाने के लिये नवीन आविष्कारों का बाहुल्य से उपयोग कर रही है। ऐसी दशा में अमेरिका के संयुक्त राज्य के पारद व्यवसाय को अवश्य हानि पहुंचेगी। यहां पर १०% फीसदी वर्तमान में पारद निकासी पर कर लगता है । सन् १९१४ से १९२१ तक नीचे लिखी सारणी के अनुसार संयुक्त राज्य में पारद निकाला गया है। यह मान ७५ पाउण्ड फ्लास्क का है ।

सन्केलिफ़ॉर्नियाटेक्सासनिवादाओरेगनऐरजौना इडाहो, वाशिंगटनटोटलफ्लास्क
१९१४११३०३३१९६२०८९१६५६८"
१९१५१४२८३४४२३(अ)२३२७(क)२१०३३"
१९१६२१०४६६३०६(ब)२१९८३७८५(ख)२९९३२"
१९१७२३९३८१०७९१९९७३१३१२०(ग)३६१९९"
१९१८२२६६४८४५११०४४७०२२२(घ)३२८८३"
१९१९१९२०५५०१९७५६४३५२१४१९"
१९२०९८४९३४३६८३२४१३३९२"
१९२१३०५५३१२३१००६३३९"

रस० ४

५० रसरत्नसमुच्चये-

( अ ) इसमें ऐरिजोना की निकासी भी सम्मिलित है ।
( ब ) इसमें भी ऐरिजोना और ओरेगन की निकासी मिली हुई है ।
( क ) टेक्सास के साथ निकासी दी गई है ।
( ख ) केवल ऐरिजोना की उत्पत्ति है ।
( ग ) एरिजोना ४० वाशिंगटन ७५ इडाहो ५ फ्लास्क है ।
( घ ) केवल इडाहो की निकासी है ।

दक्षिण अमेरिका ( South America )

ब्राजिल ( Brazil ) यहां पारद के खनिज पेट्रोलियम वाले शिलाजतु की भूमि में छोटे छोटे कणों के रूप में बिखरे पाये जाते हैं या सुवर्ण युक्त स्फटिक के साथ हिंगुल मिला पाया जाता है ।

चिली ( Chile )

इस देश में हिंगुल, रेड पाउडर ( Red Powder oxide ), गिरिसिन्दूर, प्राकृतिक पारद, टेट्रे हाईड्रैट ( Tetrahedrite ) आदि पारद के खनिज पाये जाते हैं । इन के सहयोग में रौप्यमाक्षिक, सुवर्णमाक्षिक, गरिक, कठिन स्फटिक आदि मिले रहते हैं । इसी जिले में प्राकृतिक पारद रजतमिश्रक चिरकाल से पारद निकालने के लिये ज्ञात रहा है । इसके आसपास के स्थानों में हिंगुल भी पाया जाता है ।

कोलम्बिया ( Columbia )

इस देश में हिङ्गुल सूक्ष्म चूर्ण के रूप में इधर उधर फैला हुआ पाया जाता है । रौप्यमाक्षिक और हिंगुल के साथ साथ प्राकृतिक पारद भी मिला पाया जाता है । सुवर्ण और रजत के प्राकृतिक पारदीय मिश्रक भी यहां पर प्राप्त होते हैं । यहां के खनिज हल्की जाति के होने के कारण पारद निकालने का व्यवसाय चिरकाल तक नहीं चल सकता है ।

डचगायना ( Dutchguina )

इस देश में ९ मील के फैलाव में हिङ्गुल का विस्तार मालूम हुआ और परीक्षा के लिये जो कूप खोदा गया उसमें २० फुट की गहराई पर उत्तम श्रेणी का खनिज प्राप्त हुआ । इस के उपरान्त यहाँ का विशेष विवरण प्रकाशित नहीं हुआ न व्यापार के लिये यहां कोई अध्यवसाय ही किया गया है ।

यूकोडर ( Ecuador )

यहां पर पारद निकालने का व्यवसाय बहुत प्राचीन काल से चलता है । आज कल खान में खनिज शेष नहीं है तथापि आसपास की भूमि में प्राकृतिक पारद पाया जाता है । कहीं कहीं पर हिङ्गुल भी मिला है ।

पेरू ( Perul )

पेरू के आदिम निवासी लोग हिङ्गुल को रङ्गसाज़ी में व्यवहार करते थे; ऐसी