रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
[ ६ ]
इस तरह मैने टीका की विशेषता को संक्षेप में दिखलाई है। विमर्शा-नुक्रमणिका के अवलोकन करने से विज्ञ महानुभावों को विदित हो जायगा कि यह टीका कहां तक उपयुक्त है।
इस टीका के लिखने में चरक, सुश्रुत, वाग्भट, रसेन्द्रसारसङ्ग्रह, भैषज्यरत्नावली, रसतरङ्गिणी, खनिजविज्ञान, प्रारम्भिक रसायन आदि अनेक ग्रन्थों की सहायता प्राप्त हुई है अतः उन ग्रन्थकर्त्ताओं के प्रति परम श्रद्धा प्रकट करता हूं तथा उनके ऋण से कभी भी निर्मुक्त नहीं हो सकता। सर्वप्रथम श्रीमान् विप्रकुलावतंस, हिन्दूविश्वविद्यालय के प्राण, देशोद्धारक, भगवद्भक्त, कुलपति महोदय श्रीमनामना मदनमोहन मालवीय जी के प्रति असीम श्रद्धा प्रगट करता हूं क्यों कि आप ही की साधना से यह प्राच्यनव्यायुर्वेदीय विद्यालय स्थापित हुआ और इसी में मैंने जन्तुशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र तथा आयुर्वेद और डाक्टरो का उच्चज्ञान प्राप्त करके इस प्रकार की वैज्ञानिक टीका के लिखने में प्रवृत्ति प्रदर्शित की। इस टीका के लिखने में विशेष कर अनेक जटिल स्थलों पर पूज्यपाद गुरुवर्य, चिकित्सकचूडामणि, आयुर्वेद विद्यालय (हिन्दू यूनिवरसीटी) के प्रधानाध्यक्ष श्रीमान् पं० सत्यनारायण जी शास्त्री ने चिकित्सा के सिद्धान्तों में तथा खनिजविषयों पर श्रीमान् कविराज प्रतापसिंह जी (रसशास्त्राध्यापक आयुर्वेद फार्मेसी सुपरिन्टेण्डेण्ट) ने अत्यन्त सहायता प्रदान की है अतः उक्त दोनों महानुभावों के प्रति मैं परम श्रद्धा प्रगट करता हूं। साथ ही साथ आयुर्वेद कालेज के पाश्चात्य चिकित्साशास्त्र के अध्यापक तथा अनेक ग्रन्थों के लेखक आयुर्वेदाचार्य डा० भास्कर गोविन्द घाणेकर जी के प्रति परमश्रद्धा प्रगट करता हूं क्यों कि आप ही ने सर्व प्रथम अपनी सुकृतियों के द्वारा हम लोगों की इस नवीनप्रकार की टीका लेखन पद्धति में रुचि उत्पन्न की तथा एक मार्ग सा बना दिया। इनके अतिरिक्त डा० मुकुन्द स्वरूप जी वर्मा (सरसुन्दरलाल हास्पिटल सुपरिन्टेण्डेण्ट तथा वायस-प्रिंसिपल आयुर्वेदकालेज तथा सर्जरी के प्रोफेसर) तथा पं० जगन्नाथजी शर्मा वाजपेयी एम० ए० (प्रोफेसर आयुर्वेद कालेज) तथा अन्य समस्त-
[ १० ]
गुरुओं के प्रति भी परम श्रद्धा प्रकट करता हूं, क्यों कि आप लोगों के सदुपदेश तथा प्रोत्साहन का ही फल है कि मैं इस टीका के लिखने में सफल हुआ।
आयुर्वेद प्रेमी तथा छात्रों के हितचिन्तक और सरस्वतीसेवापरायण परम वैष्णवभक्त चौखम्बा पुस्तकालय के अध्यक्ष श्रीमान् जयकृष्णदास जी को मैं अनेक धन्यवाद देता हूं, क्यों कि आपने अपने उदारभावसे तथा सरस्वती की सेवा और आयुर्वेद की उन्नति तथा छात्रों के हित आदि अनेक विषयों का विचार रखकर आयुर्वेद ग्रन्थों के प्रकाशन की सदिच्छा प्रगट की तथा अब दिनों दिन प्रत्यक्ष रूप में प्रगट भी हो रही है, इस ग्रन्थ के प्रकाशन में तन, मन, धन सब कुछ व्यय करके इस कार्य को पूर्ण किया। अन्त में मैं इस ग्रन्थ के प्रारम्भिक प्रूफ संशोधन में पं० रामचन्द्र पराशीकरजी ने अपना समय दिया अतः उन्हें धन्यवाद देता हूं।
ग्रन्थ की छपाई का कार्य बहुत ही शीघ्रता से हुआ है इसलिये अनेक स्थानों पर अत्यन्त ध्यान देने पर भी सम्भव है अशुद्धियां रह गई हों तो पाठक क्षमा करें, आगामी संस्करण में सब ठीक कर दी जायगीं। इस टीका से यदि वैद्यक शास्त्र तथा वैद्यसमुदाय का स्वल्प भी उपकार हुआ तो मैं अपने श्रम को सफल समझूंगा।
गच्छतः स्खलनं क्वापि भवत्येव प्रमादतः।
हसन्ति दुर्जनास्तत्र समादधति सज्जनाः ॥
सारं ततो ग्राह्यमपास्य फल्गु
हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात्।
इति।
| संवत् १९९६<br>ज्येष्ठ शुक्ल<br>पूर्णिमा | निवेदयति-विद्वदनुचरः<br>अम्बिकादत्तशास्त्री<br>आयुर्वेदाचार्य ( A. M. S. )<br>हिन्दू विश्वविद्यालय<br>आयुर्वेदकालेज, काशी |
|---|
समर्पणम्
श्रीमन्महीमहेन्द्रमहाराजाधिराजमहाराणेति
विरुदालङ्कृतानां हिन्दूकुलपतीनां
के० सी० एस० आई० जी० सी० आई० इत्युपाधिविभूषितानां
६ श्रीमेदपाटेश्वराणां
"श्रीभूपालसिंहवर्म" महोदयानां
करकमलयोः
द्वितीयमिदं कृतिपुष्पं सप्रणयोल्लसन्मानसा समर्प्यते
श्रीएकलिङ्गेश्वरपादपद्म
सम्पूजयन् धर्मपुरःसरेण ।
सम्पालयन् स्वाः प्रकृतीरिदानीं
श्रीमेदपाटाऽवनिपालकोऽसौ ॥ १ ॥
"भूपालवर्मा" वसुधाधिपेन्द्र
आस्ते तदीये च करारविन्दे ।
रत्नोज्ज्वलाख्यां रसरत्नटीकां
समर्पयेऽहं मुदितात्मना वै ॥ २ ॥
श्रीमतां शुभचिन्तकः
अम्बिकादत्त शास्त्री "आयुर्वेदाचार्यः"
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रसरत्नसमुच्चयस्य मूलविषयानुक्रमणिका—
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्रथमोऽध्यायः । | अभ्रभेदाः | ६० | |
| मङ्गलाचरणम् | १ | पिनाकादीनां लक्षणानि | " |
| टीकाकारकृतमङ्गलाचरणं व्याख्या-प्रयोजनञ्च | " | वर्णभेदेनाभ्रकस्य भेदास्तेषां क्रियाविषयश्च | " |
| ग्रन्थकर्तॄणां नामानि | २ | ग्रासयोग्याभ्रम् | ६१ |
| हिमालयवर्णनम् | ३ | निश्चन्द्रसचन्द्राभ्रयोर्गुणदोषौ | " |
| महादेवस्थितिवर्णनम् | ४ | अशुद्धाभ्रस्य दोषाः | " |
| रसोत्कर्षवर्णनम् | ५ | अभ्रशोधनमारणे | ६२ |
| पारदस्य विशेषतो महत्ता | ६ | धान्याभ्रकम् | ६३ |
| मूर्च्छितादिपारदगुणाः | ७ | धान्याभ्रमारणम् | " |
| पारदे सर्वौषधाना मन्तर्भावः | ९ | अभ्रमारणम् | " |
| रसस्य जीवन्मुक्तिकारणता | १० | मतान्तर | " |
| रसोत्पत्तिवर्णनम् | १३ | अभ्रकसत्त्वपातनम् | ६४ |
| रसानां भेदाः | १४ | प्रकारान्तर | " |
| रसादीनां निरुक्तिः | १६ | किट्टात्सत्त्वग्रहणम् | ६५ |
| रससंस्कारकारणम् | १७ | सत्त्वशोधनम् | " |
| रसस्य स्थानान्तरगतिवर्णनम् | १८ | सत्त्वानां मृदुकरणम् | " |
| हिङ्गुलोत्पत्तिवर्णनम् | १९ | अभ्रमारणम् | ६६ |
| द्वितीयोऽध्यायः । | मारणे प्रकारान्तरम् | ६७ | |
| महारसाः | ५८ | सत्त्वस्यशोधनमारणे | " |
| गन्धाभ्रयोः स्वरूपम् | " | अभ्रप्रयोगः | ६८ |
| अभ्रकगुणाः | " | वैक्रान्तः | " |
| वैक्रान्तस्य वर्णभेदाः | " |
२ र० स०
[ २ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्कः |
|---|---|---|---|
| वैक्रान्तस्य गुणाः | ६९ | विमलस्य मारणम् | ७८ |
| वैक्रान्तोत्पत्तिः | ,, | विमलस्य सत्त्वपातनविधिः | ,, |
| वैक्रान्तस्य स्थानं निरुक्तिश्च | ७० | मतान्तरेण सत्त्वपातनम् | ७९ |
| मतान्तरेण वर्णभेदकथनम् | ,, | विमलस्य प्रयोगविधिर्गुणाश्च | ,, |
| वर्णभेदेन कार्यभेदकथनम् | ,, | अथ शिलाजंतु | ८० |
| आहरणविधिः | ७१ | शिलाजतुभेदाः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | शिलाजतुन उत्पत्तिः | ,, |
| शोधनम् | ,, | शुद्धशिलाजतुलक्षणम् | ८१ |
| मतान्तरे शोधनमारणे | ७० | गुणाः | ८२ |
| मतान्तरम् | ७१ | शोधनम् | ८३ |
| सत्त्वपातनम् | ७२ | शिलाजतुमारणम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | प्रयोगविधिः | ,, |
| मृतवैक्रान्तस्य प्रयोगविधिर्गुणाश्च | ,, | सत्त्वपातनम् | ,, |
| प्रयोगान्तरम् | ७३ | कर्पूरशिलाजतुनो लक्षणादिकम् | ८४ |
| अथ माक्षिकम् | ,, | सस्यकः | ,, |
| माक्षिकोत्पत्तिवर्णनम् | ,, | सस्यकोत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| माक्षिकस्य गुणाः | ,, | प्रशस्तसस्यकलक्षणम् | ,, |
| माक्षिकभेदाः | ७४ | गुणाः | ८५ |
| माक्षिकगुणाः | ७५ | शोधनम् | ,, |
| सुवर्णमाक्षिकशोधनमारणे | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ,, | तुत्थखर्परमारणम् | ,, |
| विशुद्धताम्यसत्त्वलक्षणम् | ७६ | तुत्थसत्त्वपातनम् | ,, |
| सुवर्णमाक्षिकरसायनम् | ,, | मतान्तरम् | ८६ |
| सुवर्णमाक्षिकरसायनम् | ७७ | प्रयोगविधिः | ,, |
| विमलभेदाः | ,, | भालुकितन्त्रोक्तप्रयोग विधिः | ,, |
| विमलस्य लक्षणगुणाः | ७८ | अथ चपलः | ,, |
| विमलभेदानां प्रयोगनिर्देशः | ,, | गुणाः | ८८ |
| विमलशोधनम् | ,, | शोधनम् | ८९ |
[ ३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वपातनम् | ८९ | कुष्ठे गन्धकप्रयोगः | १०० |
| रसकः | ” | कण्डूहर प्रयोगः | ” |
| सस्यकस्य प्रयोगविषयो गुणाश्च | ९० | गन्धकतैलम् | १०१ |
| शोधनम् | ” | गन्धकगुणाः | ” |
| मतान्तरम् | ” | गैरिकम् | ११० |
| रसकस्य ताम्रादिरञ्जनविधिः | ९१ | गैरिकभेदाः | ” |
| खर्परस्य भस्म तथा सत्त्वपातनविधिश्च | ” | पाषाणस्वर्णगैरिकयोर्लक्षणम् | ” |
| मतान्तरम् | ९२ | गैरिकशोधनम् | १११ |
| मतान्तरम् | ” | कासीसरसायनम् | ” |
| मतान्तरम् | ” | कासीसभेदाः | ” |
| सत्त्वमारणम् | ९३ | बालुकासीसगुणाः | ११२ |
| प्रयोगविधिः | ” | पुष्पकासीसगुणाः | ” |
| तृतीयोऽध्यायः । | कासीस शोधनम् | ” | |
| उपरसानां नामानि | ” | सत्त्वग्रहणनिर्देशः | ” |
| गन्धकोत्पत्तिः | ” | शोधनान्तरम् | ११३ |
| गन्धकभेदाः | ९५ | कासीसप्रयोगः | ” |
| गन्धकगुणाः | ९६ | तुवरीनिरूपणम् | ” |
| बलिवसाख्यगन्धकोत्पत्तिः | ” | तुवरीपरिचयः | ” |
| गन्धकशुद्धिः | ९७ | तुवरीभेदाः | ११४ |
| मतान्तरम् | ” | तुवरीलक्षणगुणाः | ” |
| मतान्तरम् | ९८ | तुवरीशोधनम् | ” |
| प्रयोगः | ” | तुवरीसत्त्वपातनविधिः | ” |
| गन्धकद्रुतिः | ” | तालकसन्निरूपणम् | ११५ |
| प्रयोगविधिः | ९९ | तालकभेदाः | ” |
| अन्यविधप्रयोगविधिः | ” | पत्रतालकलक्षणम् | ” |
| गन्धकसेवने वर्ज्यानि | ” | पिण्डतालकलक्षणम् | ” |
| गुणाः | ” |
[ ४ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| हरतालशुद्धिः | ११६ | स्रोतोऽञ्जनसत्त्वपातनविधिः | १२४ |
| अशुद्धतालसेवनदोषाः | ,, | कङ्कुष्ठनिरूपणम् | ,, |
| मतान्तरेण तालशोधनम् | ,, | कङ्कुष्ठोत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| मतान्तरेण शोधनमारणनिरूपणम् | ,, | द्विविधकङ्कुष्ठलक्षणम् | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ११७ | कङ्कुष्ठोत्पत्तौ मतान्तराणि | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | गुणाः | १२५ |
| मनःशिलानिरूपणम् | ११९ | रसोपरसानां सामान्यशोधनं सत्त्वपातनविधिश्च | ,, |
| मनःशिलाया भेदाः | ,, | कङ्कुष्ठशोधनम् | ,, |
| त्रिविधमनःशिलालक्षणानि | ,, | रेचकयोगः | ,, |
| गुणाः | ,, | ताम्बूलानुपानवर्जनम् | १२६ |
| अशुद्धशुद्धदोषगुणाः | ,, | विषनाशार्थं कङ्कुष्ठप्रयोगविधिः | ,, |
| शोधनम् | १२० | साधारणरसपरिगणनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | कम्पिल्लः | ,, |
| सत्त्वपातनम् | ,, | गुणाः | १२७ |
| मतान्तरम् | ,, | गौरीपाषाणः | ,, |
| अञ्जनानां संनिरूपणम् | ,, | शोधनम् | १२८ |
| अञ्जनभेदाः | ,, | सत्त्वग्रहणम् | १२९ |
| सौवीराञ्जनगुणाः | १२२ | गुणाः | ,, |
| रसाञ्जनगुणाः | ,, | नवसारनिरूपणम् | ,, |
| स्रोतोऽञ्जनगुणाः | ,, | नवसारोत्पत्तिः | ,, |
| लेखनस्वरूपम् | ,, | मतान्तरेणोत्पत्तिः | १३० |
| पुष्पाञ्जनगुणाः | १२३ | गुणाः | ,, |
| नीलाञ्जनगुणाः | ,, | वराटिकावर्णनम् | ,, |
| शोधनम् | ,, | वराटिकालक्षणम् | ,, |
| अञ्जनसत्त्वाहरणम् | ,, | उत्तमादि वराटिका | ,, |
| स्रोतोऽञ्जनलक्षणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अञ्जनरसबन्धनम् | ,, | ||
| रसाञ्जनस्य विशेषशोधनम् | ,, |
[ ५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शोधनम् | १३१ | माणिक्यम् | १३६ |
| अग्निजारनिरूपणम् | ,, | द्विविधमाणिक्यनिर्देशः | ,, |
| अग्निजारपरिचयः | ,, | श्रेष्ठमाणिक्यलक्षणम् | ,, |
| गुणाः | ,, | श्रेष्ठनीलमाणिक्यलक्षणम् | ,, |
| तस्य स्वभावतः शुद्धत्वनिर्देशः | ,, | निकृष्टमाणिक्यलक्षणम् | १३७ |
| गिरिसिन्दूरनिरूपणम् | १३२ | माणिक्यगुणाः | ,, |
| गिरिसिन्दूरगुणाः | ,, | मौक्तिकनिरूपणम् | ,, |
| हिङ्गुलनिरूपणम् | ,, | प्रशस्तमौक्तिकलक्षणम् | ,, |
| हिङ्गुलभेदाः | ,, | मौक्तिकशुक्त्योर्गुणाः | ,, |
| शुकतुण्डकस्य परिचयः | ,, | हेममौक्तिकम् | १३८ |
| हंसपादलक्षणम् | ,, | मौक्तिकगुणान्तरम् | ,, |
| हिङ्गुलगुणाः | ,, | प्रवालनिरूपणम् | ,, |
| शोधनम् | १३३ | ग्राह्यप्रवालस्वरूपः | ,, |
| हिङ्गुलसत्त्वाकर्षणविधिः | ,, | हेयप्रवालस्वरूपम् | ,, |
| मृद्दारशृङ्गम् | ,, | प्रवालगुणाः | १३९ |
| परिचयः | ,, | तार्क्ष्यम् | ,, |
| गुणाः | ,, | प्रशस्ततार्क्ष्यलक्षणम् | ,, |
| साधारणशोधननिर्देशः | १३४ | अप्रशस्ततार्क्ष्यलक्षणम् | ,, |
| सत्त्वानां सामान्यशोधनम् | ,, | तार्क्ष्यगुणाः | ,, |
| चतुर्थोऽध्यायः । | पुष्परागः | ,, | |
| रत्ननिरूपणम् | १३५ | श्रेष्ठपुष्परागलक्षणम् | ,, |
| मणयः | ,, | हेयपुष्परागलक्षणम् | १४० |
| मणीनां नामानि | ,, | पुष्परागगुणाः | ,, |
| श्रेष्ठमणीनां नामानि | ,, | वज्रम् | ,, |
| ग्रहप्रसादकरत्नानि | ,, | वज्रभेदाः | ,, |
| ग्रहानुसारेण रत्नपरिगणनम् | १३६ | पुंवज्रलक्षणम् | ,, |
| रत्नप्रयोगविषयः | ,, | स्त्रीनपुंसकवज्रयोर्लक्षणानि | ,, |
[ ६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| जातिभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | १४१ | रत्नभस्मक्रमः | १४८ |
| वर्णभेदेनाधिकारीभेदकथनम् | ,, | रत्नानां द्रावणम् | ,, |
| वज्रगुणाः | ,, | मुक्ताद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| रत्नदोषाः | १४२ | वज्रद्रावणविशेषविधिः | १५० |
| वज्रशोधनम् | ,, | वैक्रान्तद्रावणे विशेषक्रमः | ,, |
| वज्रमारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| मतान्तरेण मारणम् | १४३ | राजावर्त्तः | १५१ |
| मतान्तरेण मारणम् | १४४ | उत्तममध्यमराजावर्त्तलक्षणम् | ,, |
| प्रयोगविशेषेण गुणविशेषकथनम् | ,, | गुणाः | ,, |
| वज्ररसायनम् | ,, | राजावर्त्तादिसामान्यशोधनम् | ,, |
| नीलनिरूपणम् | १४५ | राजावर्त्तशोधनम् | ,, |
| नीलभेदाः | ,, | राजावर्त्तमारणम् | ,, |
| जलशक्रनीलयोः स्वरूपम् | ,, | सत्त्वपातनम् | १५२ |
| गुणाः | ,, | द्रुतीनां दीर्घकालरक्षणोपायः | ,, |
| गोमेदः | १४६ | रत्नधारणगुणाः | ,, |
| गोमेदर्निरुक्तिः | ,, | गैरिकम् | ,, |
| प्रशस्तगोमेद लक्षणम् | ,, | गैरिकस्य शोधनं सत्त्वपातनञ्च | ,, |
| हेयगोमेदलक्षणम् | ,, | पञ्चमोऽध्यायः । | |
| गुणाः | ,, | लोहानि | १५३ |
| रत्नमारणनिषेधः | ,, | लोहजातिपरिगणनम् | ,, |
| रत्नप्रयोगः | १४७ | स्वर्णम् | १५४ |
| रत्नानां साधारणशोधनम् | ,, | स्वर्णभेदाः | ,, |
| वैदूर्यम् | ,, | प्राकृतस्वर्णस्योत्पत्तिः | ,, |
| श्रेष्ठवैदूर्यलक्षणम् | ,, | सहजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| हेयवैदूर्यलक्षणम् | ,, | वह्निजस्वर्णोत्पत्तिः | ,, |
| गुणाः | ,, | स्वर्णत्रयगुणाः | १५५ |
| रत्नशुद्धिः | ,, |
[ ७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| खनिजस्वर्णोत्पत्तिस्तल्लक्षणगुणाश्च | १५५ | अन्यविधिः | १६२ |
| वेधजस्वर्णोत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | रौप्यस्य निरुत्थीभस्मकरणम् | ,, |
| स्वर्णरौप्ययोः सामान्यगुणाः | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| स्वर्णगुणाः | १५६ | स्वर्णरौप्ययोर्द्रावणम् | ,, |
| अशोधितामारितस्वर्णदोषाः | ,, | रौप्यप्रयोगः | १६३ |
| स्वर्णशोधनम् | ,, | ताम्रम् | ,, |
| लौहमारणार्थमुत्तमद्रव्यकथनम् | ,, | ताम्रभेदाः | ,, |
| स्वर्णमारणम् | १५७ | म्लेच्छताम्रस्य लक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | नेपालताम्रलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | रसकर्मानर्हताम्रलक्षणम् | १६४ |
| स्वर्णद्रावणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अन्यविधिः | १५८ | ताम्रस्य दोषाः | ,, |
| स्वर्णभस्मप्रयोगविधिः | ,, | ताम्रशुद्धिः | १६५ |
| अशुद्धामारितस्वर्णदोषाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| रजतम् | १५९ | मतान्तरम् | ,, |
| रजतभेदाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सहजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | ताम्रभस्म | ,, |
| खनिजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | अन्यविधिः | १६६ |
| कृत्रिमरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | मारणान्तरम् | ,, |
| उत्तमरौप्यलक्षणम् | ,, | सोमनाथीताम्रभस्म | ,, |
| निकृष्टरौप्यलक्षणम् | १६० | ताम्रभस्मगुणाः | १६७ |
| रौप्यगुणाः | ,, | ग्रन्थान्तरोक्त ताम्रप्रयोगः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | अथलौहम् | १६८ |
| स्वर्णादिशोधनम् | ,, | लौहभेदाः | ,, |
| अशोधितमारितलोहस्य दोषाः | १६१ | मुण्डलौहभेदाः | ,, |
| रौप्यस्य विशेषशोधनम् | ,, | मृदुमुण्डलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | कुण्ठमुण्डलक्षणम् | ,, |
| रौप्यमारणम् | ,, |
[ ८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कडारमुण्डलक्षणम् | १६९ | मारणार्थं लौहस्य परिमाणनिर्देशः | १७४ |
| मुण्डगुणाः | ,, | लौहमारणे मन्त्रः | ,, |
| अशुद्धलौहस्य दोषाः | ,, | लौहत्रयाणामुत्तरोत्तरगुणाधिक्यम् | ,, |
| तीक्ष्णलौहम् | ,, | सर्वलौहशुद्धिः | १७५ |
| तीक्ष्णलौहभेदाः | ,, | लौहस्थगिरिजदोषनाशनविधिः | ,, |
| खरलौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सारलौहलक्षणम् | १७० | मतान्तरेण शोधनं मारणञ्च | १७६ |
| हृन्नाललौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरेण मारणञ्च | ,, |
| सपर्यायपोगरलक्षणम् | ,, | तीक्ष्णलौहस्य मारणम् | ,, |
| वाजीरलौहलक्षणम् | ,, | कान्तलौहस्य गुणाः | १७७ |
| काललौहलक्षणम् | ,, | लौहस्य मारणान्तरम् | ,, |
| खरलौहगुणाः | १७१ | तीक्ष्णलौहस्य विशेषमारणम् | १७८ |
| अन्यसारादितीक्ष्णलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| कान्तलोहभेदाः | ,, | मतान्तरे सर्वलौहानां मारणम् | ,, |
| वर्णानुसारकार्यभेदाः | ,, | अन्यविधिः | १७९ |
| अधमादिकथनम् | १७२ | अन्यविधिः | ,, |
| भ्रामककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| चुम्बककर्षकलक्षणम् | ,, | कान्तलोहस्य रामराजीप्रोक्तशोधनम् | १८० |
| द्रावककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | १८१ |
| रोमकान्तलक्षणम् | ,, | लौहप्रयोगः | ,, |
| मुखभेदेन श्रेष्ठाश्रेष्ठकथनम् | ,, | लौहानां रामराजीप्रोक्तगुणाः | १८२ |
| भ्रामकादिलौहकार्यनिर्देशः | १७३ | श्रेष्ठकान्तलौहस्य लक्षणम् | ,, |
| रसक्रमेण कान्तस्य विशेषता | ,, | लौहद्रुतिः | ,, |
| कान्तलौहस्य ग्राह्याग्राह्यनिर्देशः | ,, | कान्तलौहस्य विशेषमारणम् | १८३ |
| कान्तलौहलक्षणम् | १७४ | अथाष्टलौहानां द्रावणम् | ,, |
| कान्तलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| लौहकल्पश्रेष्ठता | ,, | अशुद्धपक्वलौहदोषः | ,, |
[ ९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उत्तरोत्तरमधिकगुणकरं लौहम् | १८४ | नागरसायनम् | १९२ |
| मण्डूरम् | ,, | पित्तलम् | ,, |
| मण्डूरशोधनम् | ,, | पित्तलभेदः | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | रीतिकालक्षणम् | ,, |
| लौहमण्डूरयोर्गुणसाम्यता | १८५ | काकतुण्डी लक्षणम् | ,, |
| वङ्गनिरूपणम् | ,, | रीतिकाया गुणाः | ,, |
| वङ्गस्य द्वैविध्यनिर्देशः | ,, | काकतुण्ड्या गुणाः | १९३ |
| खुरकवङ्गस्य मिश्रकवङ्गस्य च लक्षणम् | ,, | शुभरीतिकालक्षणम् | ,, |
| वङ्गगुणाः | ,, | अशुभरीतिलक्षणम् | ,, |
| खुरकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिकाशोधनम् | ,, |
| मिश्रकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिका मारणम् | ,, |
| नागवङ्गकांस्यताम्राणां सामान्यशोधनम् | ,, | मतान्तरम् | १९४ |
| वङ्गभस्म | ,, | पित्तलरसायनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | पित्तलद्रुतिः | ,, |
| मतान्तरम् | १८६ | कांस्यम् | १९५ |
| मतान्तरम् | ,, | कांस्योत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| वङ्गरसायनम् | ,, | प्रशस्तकांस्यलक्षणम् | ,, |
| नागः | १८८ | त्याज्यकांस्यलक्षणम् | ,, |
| शुद्धसीसकलक्षणम् | ,, | कांस्यगुणाः | ,, |
| सीसकगुणाः | १८९ | कांस्यशोधनम् | १९६ |
| नागशुद्धिः | ,, | कांस्यमारणम् | ,, |
| नागभस्म | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| मतान्तरम् | १९० | वर्तलौहम् | ,, |
| नागस्य निरुत्थभस्मीकरणम् | ,, | वर्तलौहस्वरूपः | ,, |
| मतान्तरम् | १९१ | वर्तलौहगुणाः | ,, |
| वर्तलौहशोधनम् | १९७ | ||
| वर्तलौहमारणम् | ,, |
[ १० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसोपरसलोहानां सूतसाधकत्वनिर्देशः | १९७ | ध्यानम् | २०७ |
| रत्नादीनां सूतयोग्यत्वनिर्देशः | ” | देवीपूजनमन्त्रम् | ” |
| भूनागसत्त्वपातनम् | १९८ | कुम्भस्थापनादिशिष्यदीक्षादानविधिः | २०८ |
| मतान्तरम् | १९९ | कालिनीलक्षणम् | २०९ |
| भूनागमुद्रिका | २०० | कालिन्यभावे तदनुकल्पविधिः | ” |
| तैलपातनविधिः | ” | होमविधिः | २१० |
| मतान्तरम् | ” | रससिद्ध्यर्थं सङ्ग्रहणीयपदार्थास्तत्पूजनादिकञ्च | २११ |
| मतान्तरम् | २०१ | रसशक्तयः | ” |
| मतान्तरम् | ” | उपरसाः | ” |
| तैलपातनम् | २०२ | महारसाः | २१२ |
| विष्णुसृष्टितैलपातनम् | ” | अष्टलौहपूजाक्रमः | ” |
| जैपालतैलपातनम् | ” | उपकरणानां पूजाविधिः | ” |
| वाकुचीतैलाहरणविधिः | ” | रससिद्धीश्वरब्राह्मणादीनां पूजनम् | २१३ |
| कृष्णमिश्रश्वेतगुञ्जाबीजतैलपातनविधिः | ” | अदीक्षितस्य रसविद्यासाधनवैफल्यनिर्देशः | २१४ |
| षष्ठोऽध्यायः । | रससाधने सिद्धिलाभहेतुनिर्देशः | ” | |
| शिष्योपनयननिरुपणम् | २०३ | कस्मै किमर्थं रसविद्यादातव्या तन्निर्देशः | २१५ |
| क्रमयुक्तशास्त्रम् | ” | गुरुसन्तोषस्य सर्वसिद्धिहेतुत्वनिर्देशः, | ” |
| शास्त्रक्रमयोः परस्परापेक्षा | ” | रसविद्याया अवश्यगोप्यत्वनिर्देशः | ” |
| रसविद्यागुरुः | ” | सप्तमोऽध्यायः । | |
| शिष्यगुणाः | २०४ | रसशाला | २१६ |
| अनुचरगुणाः | ” | रससाधनीयपदार्थाः | २१७ |
| अयोग्यशिष्याः | ” | चालनीभेदलक्षणादिकम् | २१८ |
| रससाधनरसशालारस मण्डपाः | २०५ | रससिद्ध्युपकरणानि | ” |
| रसलिङ्गस्थापनादि | २०६ | ||
| रसलिङ्गपूजनफलम् | ” |
[ ११ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उपलनामानि | २१९ | कजली | २२५ |
| कूपीनिर्माणद्रव्याणि | ,, | रसपङ्कः | ,, |
| कूपीपर्यायाः | ,, | पिष्टी | ,, |
| चषकस्य पर्यायाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| शूर्पादीनां समर्चनम् | ,, | पातनपिष्टी | ,, |
| रसविद्यायां कीदृशा वैद्या अन्ये वा नियोज्यास्तत्कथनम् | २२० | स्वर्णरौप्ययोः कृष्टिः | २२६ |
| रसपाककाले मन्त्रजपस्य कर्तव्यतानिर्देशः | ,, | कृष्ट्या उपयोगः | ,, |
| परिचारकलक्षणम् | ,, | स्वर्णकृष्ट्याः कार्यम् | ,, |
| पद्महस्तवैद्यलक्षणम् | २२१ | वरलोहकम् | ,, |
| अमृतहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्ती | ,, |
| दग्धहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्तीप्रयोगः | ,, |
| निधिरक्षायोग्यपुरुषाः | ,, | ताररक्ती | २२७ |
| बलिसाधने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | दलम् | ,, |
| रसायने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | २२२ | अन्यविधदलम् | ,, |
| स्वर्णादिधातुसिद्धिनियुक्तियोग्यपुरुषाः | ,, | शुल्बनागम् | ,, |
| भेषजाहरणे नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | शुल्बनागगुणाः | २२८ |
| केषां रससिद्धिर्भवतीत्याह | ,, | पिञ्जरी | ,, |
| रससिद्धसाधकस्य कर्तव्यनिर्देशः | ,, | चन्द्रार्कम् | ,, |
| रससिद्धमर्त्यफलम् | २२३ | निर्वापणम् | २२९ |
| अष्टमोऽध्यायः । | निर्वापणद्रव्यमात्रा | ,, | |
| परिभाषा | २२४ | वारितरलौहलक्षणम् | ,, |
| धन्वन्तरिभागः | ,, | मृतलौहलक्षणम् | ,, |
| रुद्रभागः | ,, | अपुनर्भवलक्षणम् | ,, |
| विश्वासघातकवैद्यलक्षणम् | ,, | उत्तमभस्मलक्षणम् | २३० |
| निरुत्थलौहलक्षणम् | ,, | ||
| बीजलक्षणम् | ,, | ||
| ताडनस्वरूपम् | ,, | ||
| धान्याभ्रलक्षणम् | ,, |
[ १२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वलक्षणम् | २३१ | उत्थापनादिलक्षणम् | २३७ |
| एककोलिसकलक्षणम् | ” | बन्धनलक्षणम् | ” |
| द्रावणादिकर्मसाधनेकाष्ठनिर्देशः | ” | पातनलक्षणम् | ” |
| हिङ्गुलाकृष्टो रसः | ” | रोधनलक्षणम् | २३८ |
| घोषाकृष्टताम्रलक्षणम् | ” | नियमनलक्षणम् | ” |
| वरनागलक्षणम् | २३२ | दीपनलक्षणम् | २३९ |
| उत्थापनलक्षणम् | ” | ग्रासमानम् | ” |
| ढालनलक्षणम् | ” | जारणाभेदनिर्देशः | ” |
| नागसम्भूतचपलः | ” | निर्मुखजारणालक्षणम् | २४० |
| वङ्गसम्भूतचपलः | २३३ | बीजादिनिर्देशः | ” |
| चपलकार्यम् | ” | मुखलक्षणम् | ” |
| बद्धरसोपयोगः | ” | सम्मुखजारणालक्षणम् | ” |
| धौतम् | ” | राक्षसवरसलक्षणम् | ” |
| द्वन्द्दानम् | २३४ | चारणालक्षणम् | २४१ |
| भञ्जनी | ” | गर्भद्रुतिलक्षणम् | ” |
| चुल्लका | ” | बाह्यद्रुतिलक्षणम् | ” |
| पतङ्गीरागः | ” | द्रुतेर्भेदाः | ” |
| आवापः | ” | द्रुतेः स्वरूपम् | ” |
| अभिषेकः | २३५ | जारणाभेदः | ” |
| निर्वापलक्षणम् | ” | जारणालक्षणम् | ” |
| प्रतिवापसमयनिर्देशः | ” | बिडादिलक्षणम् | २४२ |
| शुद्धावर्तः | ” | रञ्जनलक्षणम् | ” |
| बीजावर्तः | ” | सारणालक्षणम् | ” |
| स्वाङ्गशीतलम् | ” | वेधलक्षणं भेदाश्च | ” |
| बहिःशीतलम् | २३६ | लेपवेधलक्षणम् | २४३ |
| स्वेदनलक्षणम् | ” | क्षेपवेधलक्षणम् | ” |
| मर्दनलक्षणम् | ” | कुन्तवेधलक्षणम् | ” |
| मूर्च्छनलक्षणम् | ” | धूमवेधलक्षणम् | ” |
[ १३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शब्दवेधलक्षणम् | २४४ | प्रकारान्तरम् | २५४ |
| उद्घाटनलक्षणम् | ,, | नालिकायन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनलक्षणम् | ,, | भूधरयन्त्रम् | ,, |
| सन्न्यास लक्षणम् | ,, | पुटयन्त्रम् | ,, |
| रसस्वेदसन्यासगुणाः | २४५ | कोष्ठीयन्त्रम् | २५५ |
| परिभाषाऽऽवश्यकता | ,, | वलभीयन्त्रम् | ,, |
| अध्यायपठनफलम् | ,, | तिर्यक्पातनयन्त्रम् | २५६ |
| नवमोऽध्यायः । | पालिकायन्त्रम् | ,, | |
| यन्त्राणि | २४६ | घटयन्त्रम् | ,, |
| यन्त्रशब्द निरुक्तिः | ,, | इष्टिकायन्त्रम् | २५७ |
| दोलायन्त्रम् | ,, | हिङ्गुलाकृष्टिविद्याधरयन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रम् | २४७ | डमरुयन्त्रम् | २५८ |
| पातनायन्त्रम् | ,, | नालियन्त्रम् | ,, |
| अधःपातनयन्त्रम् | २४८ | तोयमृल्लक्षणम् | ,, |
| कच्छपयन्त्रम् | ,, | वह्निमृत्सा | २५९ |
| दीपिकायन्त्रम् | ,, | शेषनाभियन्त्रवर्णनम् | ,, |
| ढेकीयन्त्रम् | २४९ | ग्रस्तयन्त्रम् | ,, |
| जारणायन्त्रम् | ,, | स्थालीयन्त्रम् | २६० |
| जारणायन्त्रस्य– | ,, | धूपयन्त्रम् | ,, |
| प्रकारान्तरम् | २५० | कन्दुकयन्त्रम् | २६१ |
| विद्याधरयन्त्रम् | २५१ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सोमानलयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रम् | २६२ |
| गर्भयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रस्य त्रैविध्यनिर्देशः | ,, |
| हंसपाकयन्त्रम् | २५२ | द्विविधखल्लयोः सामान्यलक्षणम् | ,, |
| बालुकायन्त्रम् | २५३ | अर्धचन्द्राकृतिकखल्लनिर्देशः | ,, |
| बालुकायन्त्रस्य प्रकारान्तरम् | ,, | वर्तुलखल्लनिर्देशः | २६३ |
| लवणयन्त्रम् | ,, | तप्तखल्लप्रमाणनिर्देशः | ,, |
| तप्तखल्लविधिः | ,, |
[ १४ ]
दशमोऽध्यायः ।
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| मूषादिकथनम् | २६४ | मूसलाख्यमूषा | २७१ |
| मूषायाः पर्यायाः | ,, | कोष्ठिकानिर्देशः | ,, |
| मूषाया निरुक्तिः | ,, | अङ्गारकोष्ठी | २७२ |
| मूषाया उपादानम् | २६५ | पातालकोष्ठी | २७३ |
| मूषा शंसा | ,, | गारकोष्ठी | ,, |
| सन्धिलेपस्य पर्यायाः | ,, | वङ्कनालम् | २७४ |
| मूषोपयुक्तमृत्तिका | ,, | मूषाकोष्ठी | ,, |
| मतान्तरम् | २६६ | पुटस्य लक्षणम् | २७५ |
| मूषामृत्तिकायां संयोज्यद्रव्याणि | ,, | पुटस्य फलम् | ,, |
| वज्रमूषा | ,, | महापुटम् | २७७ |
| योगमूषा | ,, | गजपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणीमूषा | २६७ | वाराहपुटम् | २७८ |
| गारमूषा | ,, | कुक्कुटपुटम् | ,, |
| वरमूषा | ,, | कपोतपुटम् | ,, |
| वर्णमूषा | २६८ | गोर्वरस्वरूपम् | ,, |
| रौप्यमूषा | ,, | गोर्वरपुटलक्षणम् | २७९ |
| विडमूषा | ,, | भाण्डपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणमूषा | ,, | बालुकापुटम् | ,, |
| मूषाऽऽप्यायनम् | २६९ | भूधरपुटम् | २८० |
| वृन्ताकमूषा | ,, | लावकपुटम् | ,, |
| गोस्तनीमूषा | २७० | अनुक्तपुटमानेकर्त्तव्यनिर्देशः | २८१ |
| मल्लमूषा | ,, | उपलपर्यायाः | ,, |
| पक्कमूषा | ,, | कृत्रिमाकृत्रिमलौहनिर्देशः | ,, |
| गोलमूषा | ,, | षल्लवणानि | २८२ |
| महामूषा | २७१ | क्षारत्रयम् | ,, |
| मण्डूकमूषा | ,, | क्षारपञ्चकम् | ,, |
| मधुरत्रयम् | २८३ |
[ १५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसकर्मणितैलाहरणोपयोगिद्रव्याणि | २८३ | व्याधिविशेषेरसप्रयोगनिषेधः | २९३ |
| वसावर्गः | ,, | शुद्धमूर्च्छितरसगुणाः | ,, |
| मूत्रवर्गः | ,, | मृतपारदगुणाः | ,, |
| माहिषपञ्चकच्छागलपञ्चकयोर्निर्देशः | २८४ | रसदोषास्तेषां कार्याणि च | ,, |
| अम्लवर्गः | ,, | संस्कारार्थं पारदस्य परिमाणनिर्देशः | २९४ |
| अम्लपञ्चकम् | ,, | स्वेदनसंस्कारः | २९५ |
| पञ्चमृत्तिका | २८५ | मर्दन संस्कारः | २९६ |
| विषवर्गः | ,, | मूर्च्छनसंस्कारः | २९७ |
| उपविषवर्गः | २८६ | उत्थापनसंस्कारः | २९८ |
| दुग्धवर्गः | ,, | पातनसंस्कारः | २९९ |
| विड्वर्गः | २८७ | उर्द्ध्वाधः पातनयोः सङ्ख्यानिर्देशः | ३०० |
| रक्तवर्गः | ,, | अधःपातनविधिः | ,, |
| पीतवर्गः | २८८ | पातने प्रकारान्तराणि | ,, |
| श्वेतवर्गः | ,, | तिर्यक्पातनम् | ३०१ |
| कृष्णवर्गः | ,, | मर्दनादीनां गुणाः | ३०३ |
| रक्तवर्गादीनां प्रयोजननिर्देशः | ,, | निरोधसंस्कारः | ,, |
| शोधनीयगणः | ,, | नियमनसंस्कारः | ३०४ |
| लौहमलनाशनगणः | २८९ | प्रकारान्तरम् | ३०५ |
| लौहकाठिन्यनाशकयोगः | ,, | दीपनसंस्कारः | ,, |
| द्रावकवर्गः | ,, | प्रकारान्तरेण दीपनम् | ३०६ |
| क्षारादिकानां कार्यम् | ,, | रसभावनादौ मूलिन्यः | ३०७ |
| एकादशोऽध्यायः। | सूतसंस्कारकार्यत्वनिर्देशः | ३०९ | |
| रसशोधनादिकथनम् | २९० | रसबन्धनप्रतिज्ञा तस्य व्युत्पत्तिश्च | ,, |
| मानपरिभाषा | ,, | रसबन्धाः | ,, |
| मानपरिभाषायां मतान्तरम् | २९१ | हठबन्धः | ३१० |
| अष्टादशसंस्काराः | २९२ | आरोटबन्धः | ,, |
[ १६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| आभासबन्धः | ३११ | प्रकारान्तरेण जलूकानिर्माणम् | ३२३ |
| क्रियाहीनबन्धः | ३१२ | प्रकारान्तरम् | ३२४ |
| पिष्टिकाबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| क्षारबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ३२५ |
| खोटबन्धः | ३१३ | प्रकारान्तरम् | ३२६ |
| पोटबन्धलक्षणम् | ,, | योनिद्रावणम् | ,, |
| कल्कबन्धलक्षणम् | ,, | मदनवलयम् | ३२७ |
| कजलीबन्धलक्षणम् | ३१४ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सजीवबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्म | ३२८ |
| निर्जीवबन्धलक्षणम् | ३१५ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| निर्बीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सबीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| शृङ्खलाबन्धलक्षणम् | ३१६ | प्रकारान्तरम् | ३२९ |
| द्रुतिबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| बालकबन्धलक्षणम् | ३१७ | प्रकारान्तरम् | ३३० |
| कुमारबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| तरुणबन्धलक्षणम् | ३१८ | रसभस्मविधिः | ३३१ |
| वृद्धबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि पथ्यम् | ३३२ |
| मूर्तिबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि कुपथ्यम् | ,, |
| जलबन्धलक्षणम् | ३१९ | देवीशास्त्रोक्तककरादिगणः | ३३३ |
| अग्निबन्धलक्षणम् | ,, | श्रीकृष्णदेवोक्तककरादिगणः | ३३४ |
| सूतानां मूर्च्छाकल्पः | ,, | ककारादिनिषेधस्यापवादः | ३३५ |
| महाबन्धलक्षणम् | ३२१ | पारदविकार उपायाः | ,, |
| जलूकाबन्धः | ,, | रससेवने उपचारविधिः | ,, |
| क्रियाविशेषेण जलूकाया गुणविशेषः | ३२२ | द्वादशोऽध्यायः । | |
| जलूकायाः त्रिविधप्रमाणनिर्देशः | ,, | ज्वरचिकित्सा | ३३६ |
| जलूकायाः संस्कारविशेषः | ३२३ | रोगगणना | ,, |