संग्रह पर लौटें




















रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
पृष्ठ 25स्थायी लिंक
[ ७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| खनिजस्वर्णोत्पत्तिस्तल्लक्षणगुणाश्च | १५५ | अन्यविधिः | १६२ |
| वेधजस्वर्णोत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | रौप्यस्य निरुत्थीभस्मकरणम् | ,, |
| स्वर्णरौप्ययोः सामान्यगुणाः | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| स्वर्णगुणाः | १५६ | स्वर्णरौप्ययोर्द्रावणम् | ,, |
| अशोधितामारितस्वर्णदोषाः | ,, | रौप्यप्रयोगः | १६३ |
| स्वर्णशोधनम् | ,, | ताम्रम् | ,, |
| लौहमारणार्थमुत्तमद्रव्यकथनम् | ,, | ताम्रभेदाः | ,, |
| स्वर्णमारणम् | १५७ | म्लेच्छताम्रस्य लक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | नेपालताम्रलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | रसकर्मानर्हताम्रलक्षणम् | १६४ |
| स्वर्णद्रावणम् | ,, | गुणाः | ,, |
| अन्यविधिः | १५८ | ताम्रस्य दोषाः | ,, |
| स्वर्णभस्मप्रयोगविधिः | ,, | ताम्रशुद्धिः | १६५ |
| अशुद्धामारितस्वर्णदोषाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| रजतम् | १५९ | मतान्तरम् | ,, |
| रजतभेदाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सहजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | ताम्रभस्म | ,, |
| खनिजरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | अन्यविधिः | १६६ |
| कृत्रिमरौप्योत्पत्तिर्गुणाश्च | ,, | मारणान्तरम् | ,, |
| उत्तमरौप्यलक्षणम् | ,, | सोमनाथीताम्रभस्म | ,, |
| निकृष्टरौप्यलक्षणम् | १६० | ताम्रभस्मगुणाः | १६७ |
| रौप्यगुणाः | ,, | ग्रन्थान्तरोक्त ताम्रप्रयोगः | ,, |
| गुणान्तरम् | ,, | अथलौहम् | १६८ |
| स्वर्णादिशोधनम् | ,, | लौहभेदाः | ,, |
| अशोधितमारितलोहस्य दोषाः | १६१ | मुण्डलौहभेदाः | ,, |
| रौप्यस्य विशेषशोधनम् | ,, | मृदुमुण्डलक्षणम् | ,, |
| अन्यविधिः | ,, | कुण्ठमुण्डलक्षणम् | ,, |
| रौप्यमारणम् | ,, |
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[ ८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कडारमुण्डलक्षणम् | १६९ | मारणार्थं लौहस्य परिमाणनिर्देशः | १७४ |
| मुण्डगुणाः | ,, | लौहमारणे मन्त्रः | ,, |
| अशुद्धलौहस्य दोषाः | ,, | लौहत्रयाणामुत्तरोत्तरगुणाधिक्यम् | ,, |
| तीक्ष्णलौहम् | ,, | सर्वलौहशुद्धिः | १७५ |
| तीक्ष्णलौहभेदाः | ,, | लौहस्थगिरिजदोषनाशनविधिः | ,, |
| खरलौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| सारलौहलक्षणम् | १७० | मतान्तरेण शोधनं मारणञ्च | १७६ |
| हृन्नाललौहलक्षणम् | ,, | मतान्तरेण मारणञ्च | ,, |
| सपर्यायपोगरलक्षणम् | ,, | तीक्ष्णलौहस्य मारणम् | ,, |
| वाजीरलौहलक्षणम् | ,, | कान्तलौहस्य गुणाः | १७७ |
| काललौहलक्षणम् | ,, | लौहस्य मारणान्तरम् | ,, |
| खरलौहगुणाः | १७१ | तीक्ष्णलौहस्य विशेषमारणम् | १७८ |
| अन्यसारादितीक्ष्णलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| कान्तलोहभेदाः | ,, | मतान्तरे सर्वलौहानां मारणम् | ,, |
| वर्णानुसारकार्यभेदाः | ,, | अन्यविधिः | १७९ |
| अधमादिकथनम् | १७२ | अन्यविधिः | ,, |
| भ्रामककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | ,, |
| चुम्बककर्षकलक्षणम् | ,, | कान्तलोहस्य रामराजीप्रोक्तशोधनम् | १८० |
| द्रावककान्तलक्षणम् | ,, | अन्यविधिः | १८१ |
| रोमकान्तलक्षणम् | ,, | लौहप्रयोगः | ,, |
| मुखभेदेन श्रेष्ठाश्रेष्ठकथनम् | ,, | लौहानां रामराजीप्रोक्तगुणाः | १८२ |
| भ्रामकादिलौहकार्यनिर्देशः | १७३ | श्रेष्ठकान्तलौहस्य लक्षणम् | ,, |
| रसक्रमेण कान्तस्य विशेषता | ,, | लौहद्रुतिः | ,, |
| कान्तलौहस्य ग्राह्याग्राह्यनिर्देशः | ,, | कान्तलौहस्य विशेषमारणम् | १८३ |
| कान्तलौहलक्षणम् | १७४ | अथाष्टलौहानां द्रावणम् | ,, |
| कान्तलौहगुणाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| लौहकल्पश्रेष्ठता | ,, | अशुद्धपक्वलौहदोषः | ,, |
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[ ९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उत्तरोत्तरमधिकगुणकरं लौहम् | १८४ | नागरसायनम् | १९२ |
| मण्डूरम् | ,, | पित्तलम् | ,, |
| मण्डूरशोधनम् | ,, | पित्तलभेदः | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | रीतिकालक्षणम् | ,, |
| लौहमण्डूरयोर्गुणसाम्यता | १८५ | काकतुण्डी लक्षणम् | ,, |
| वङ्गनिरूपणम् | ,, | रीतिकाया गुणाः | ,, |
| वङ्गस्य द्वैविध्यनिर्देशः | ,, | काकतुण्ड्या गुणाः | १९३ |
| खुरकवङ्गस्य मिश्रकवङ्गस्य च लक्षणम् | ,, | शुभरीतिकालक्षणम् | ,, |
| वङ्गगुणाः | ,, | अशुभरीतिलक्षणम् | ,, |
| खुरकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिकाशोधनम् | ,, |
| मिश्रकवङ्गशोधनम् | ,, | रीतिका मारणम् | ,, |
| नागवङ्गकांस्यताम्राणां सामान्यशोधनम् | ,, | मतान्तरम् | १९४ |
| वङ्गभस्म | ,, | पित्तलरसायनम् | ,, |
| मतान्तरम् | ,, | पित्तलद्रुतिः | ,, |
| मतान्तरम् | १८६ | कांस्यम् | १९५ |
| मतान्तरम् | ,, | कांस्योत्पत्तिवर्णनम् | ,, |
| वङ्गरसायनम् | ,, | प्रशस्तकांस्यलक्षणम् | ,, |
| नागः | १८८ | त्याज्यकांस्यलक्षणम् | ,, |
| शुद्धसीसकलक्षणम् | ,, | कांस्यगुणाः | ,, |
| सीसकगुणाः | १८९ | कांस्यशोधनम् | १९६ |
| नागशुद्धिः | ,, | कांस्यमारणम् | ,, |
| नागभस्म | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| मतान्तरम् | १९० | वर्तलौहम् | ,, |
| नागस्य निरुत्थभस्मीकरणम् | ,, | वर्तलौहस्वरूपः | ,, |
| मतान्तरम् | १९१ | वर्तलौहगुणाः | ,, |
| वर्तलौहशोधनम् | १९७ | ||
| वर्तलौहमारणम् | ,, |
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[ १० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसोपरसलोहानां सूतसाधकत्वनिर्देशः | १९७ | ध्यानम् | २०७ |
| रत्नादीनां सूतयोग्यत्वनिर्देशः | ” | देवीपूजनमन्त्रम् | ” |
| भूनागसत्त्वपातनम् | १९८ | कुम्भस्थापनादिशिष्यदीक्षादानविधिः | २०८ |
| मतान्तरम् | १९९ | कालिनीलक्षणम् | २०९ |
| भूनागमुद्रिका | २०० | कालिन्यभावे तदनुकल्पविधिः | ” |
| तैलपातनविधिः | ” | होमविधिः | २१० |
| मतान्तरम् | ” | रससिद्ध्यर्थं सङ्ग्रहणीयपदार्थास्तत्पूजनादिकञ्च | २११ |
| मतान्तरम् | २०१ | रसशक्तयः | ” |
| मतान्तरम् | ” | उपरसाः | ” |
| तैलपातनम् | २०२ | महारसाः | २१२ |
| विष्णुसृष्टितैलपातनम् | ” | अष्टलौहपूजाक्रमः | ” |
| जैपालतैलपातनम् | ” | उपकरणानां पूजाविधिः | ” |
| वाकुचीतैलाहरणविधिः | ” | रससिद्धीश्वरब्राह्मणादीनां पूजनम् | २१३ |
| कृष्णमिश्रश्वेतगुञ्जाबीजतैलपातनविधिः | ” | अदीक्षितस्य रसविद्यासाधनवैफल्यनिर्देशः | २१४ |
| षष्ठोऽध्यायः । | रससाधने सिद्धिलाभहेतुनिर्देशः | ” | |
| शिष्योपनयननिरुपणम् | २०३ | कस्मै किमर्थं रसविद्यादातव्या तन्निर्देशः | २१५ |
| क्रमयुक्तशास्त्रम् | ” | गुरुसन्तोषस्य सर्वसिद्धिहेतुत्वनिर्देशः, | ” |
| शास्त्रक्रमयोः परस्परापेक्षा | ” | रसविद्याया अवश्यगोप्यत्वनिर्देशः | ” |
| रसविद्यागुरुः | ” | सप्तमोऽध्यायः । | |
| शिष्यगुणाः | २०४ | रसशाला | २१६ |
| अनुचरगुणाः | ” | रससाधनीयपदार्थाः | २१७ |
| अयोग्यशिष्याः | ” | चालनीभेदलक्षणादिकम् | २१८ |
| रससाधनरसशालारस मण्डपाः | २०५ | रससिद्ध्युपकरणानि | ” |
| रसलिङ्गस्थापनादि | २०६ | ||
| रसलिङ्गपूजनफलम् | ” |
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[ ११ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उपलनामानि | २१९ | कजली | २२५ |
| कूपीनिर्माणद्रव्याणि | ,, | रसपङ्कः | ,, |
| कूपीपर्यायाः | ,, | पिष्टी | ,, |
| चषकस्य पर्यायाः | ,, | मतान्तरम् | ,, |
| शूर्पादीनां समर्चनम् | ,, | पातनपिष्टी | ,, |
| रसविद्यायां कीदृशा वैद्या अन्ये वा नियोज्यास्तत्कथनम् | २२० | स्वर्णरौप्ययोः कृष्टिः | २२६ |
| रसपाककाले मन्त्रजपस्य कर्तव्यतानिर्देशः | ,, | कृष्ट्या उपयोगः | ,, |
| परिचारकलक्षणम् | ,, | स्वर्णकृष्ट्याः कार्यम् | ,, |
| पद्महस्तवैद्यलक्षणम् | २२१ | वरलोहकम् | ,, |
| अमृतहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्ती | ,, |
| दग्धहस्तवैद्यलक्षणम् | ,, | हेमरक्तीप्रयोगः | ,, |
| निधिरक्षायोग्यपुरुषाः | ,, | ताररक्ती | २२७ |
| बलिसाधने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | दलम् | ,, |
| रसायने नियोज्यपुरुषलक्षणम् | २२२ | अन्यविधदलम् | ,, |
| स्वर्णादिधातुसिद्धिनियुक्तियोग्यपुरुषाः | ,, | शुल्बनागम् | ,, |
| भेषजाहरणे नियोज्यपुरुषलक्षणम् | ,, | शुल्बनागगुणाः | २२८ |
| केषां रससिद्धिर्भवतीत्याह | ,, | पिञ्जरी | ,, |
| रससिद्धसाधकस्य कर्तव्यनिर्देशः | ,, | चन्द्रार्कम् | ,, |
| रससिद्धमर्त्यफलम् | २२३ | निर्वापणम् | २२९ |
| अष्टमोऽध्यायः । | निर्वापणद्रव्यमात्रा | ,, | |
| परिभाषा | २२४ | वारितरलौहलक्षणम् | ,, |
| धन्वन्तरिभागः | ,, | मृतलौहलक्षणम् | ,, |
| रुद्रभागः | ,, | अपुनर्भवलक्षणम् | ,, |
| विश्वासघातकवैद्यलक्षणम् | ,, | उत्तमभस्मलक्षणम् | २३० |
| निरुत्थलौहलक्षणम् | ,, | ||
| बीजलक्षणम् | ,, | ||
| ताडनस्वरूपम् | ,, | ||
| धान्याभ्रलक्षणम् | ,, |
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[ १२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वलक्षणम् | २३१ | उत्थापनादिलक्षणम् | २३७ |
| एककोलिसकलक्षणम् | ” | बन्धनलक्षणम् | ” |
| द्रावणादिकर्मसाधनेकाष्ठनिर्देशः | ” | पातनलक्षणम् | ” |
| हिङ्गुलाकृष्टो रसः | ” | रोधनलक्षणम् | २३८ |
| घोषाकृष्टताम्रलक्षणम् | ” | नियमनलक्षणम् | ” |
| वरनागलक्षणम् | २३२ | दीपनलक्षणम् | २३९ |
| उत्थापनलक्षणम् | ” | ग्रासमानम् | ” |
| ढालनलक्षणम् | ” | जारणाभेदनिर्देशः | ” |
| नागसम्भूतचपलः | ” | निर्मुखजारणालक्षणम् | २४० |
| वङ्गसम्भूतचपलः | २३३ | बीजादिनिर्देशः | ” |
| चपलकार्यम् | ” | मुखलक्षणम् | ” |
| बद्धरसोपयोगः | ” | सम्मुखजारणालक्षणम् | ” |
| धौतम् | ” | राक्षसवरसलक्षणम् | ” |
| द्वन्द्दानम् | २३४ | चारणालक्षणम् | २४१ |
| भञ्जनी | ” | गर्भद्रुतिलक्षणम् | ” |
| चुल्लका | ” | बाह्यद्रुतिलक्षणम् | ” |
| पतङ्गीरागः | ” | द्रुतेर्भेदाः | ” |
| आवापः | ” | द्रुतेः स्वरूपम् | ” |
| अभिषेकः | २३५ | जारणाभेदः | ” |
| निर्वापलक्षणम् | ” | जारणालक्षणम् | ” |
| प्रतिवापसमयनिर्देशः | ” | बिडादिलक्षणम् | २४२ |
| शुद्धावर्तः | ” | रञ्जनलक्षणम् | ” |
| बीजावर्तः | ” | सारणालक्षणम् | ” |
| स्वाङ्गशीतलम् | ” | वेधलक्षणं भेदाश्च | ” |
| बहिःशीतलम् | २३६ | लेपवेधलक्षणम् | २४३ |
| स्वेदनलक्षणम् | ” | क्षेपवेधलक्षणम् | ” |
| मर्दनलक्षणम् | ” | कुन्तवेधलक्षणम् | ” |
| मूर्च्छनलक्षणम् | ” | धूमवेधलक्षणम् | ” |
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[ १३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शब्दवेधलक्षणम् | २४४ | प्रकारान्तरम् | २५४ |
| उद्घाटनलक्षणम् | ,, | नालिकायन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनलक्षणम् | ,, | भूधरयन्त्रम् | ,, |
| सन्न्यास लक्षणम् | ,, | पुटयन्त्रम् | ,, |
| रसस्वेदसन्यासगुणाः | २४५ | कोष्ठीयन्त्रम् | २५५ |
| परिभाषाऽऽवश्यकता | ,, | वलभीयन्त्रम् | ,, |
| अध्यायपठनफलम् | ,, | तिर्यक्पातनयन्त्रम् | २५६ |
| नवमोऽध्यायः । | पालिकायन्त्रम् | ,, | |
| यन्त्राणि | २४६ | घटयन्त्रम् | ,, |
| यन्त्रशब्द निरुक्तिः | ,, | इष्टिकायन्त्रम् | २५७ |
| दोलायन्त्रम् | ,, | हिङ्गुलाकृष्टिविद्याधरयन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रम् | २४७ | डमरुयन्त्रम् | २५८ |
| पातनायन्त्रम् | ,, | नालियन्त्रम् | ,, |
| अधःपातनयन्त्रम् | २४८ | तोयमृल्लक्षणम् | ,, |
| कच्छपयन्त्रम् | ,, | वह्निमृत्सा | २५९ |
| दीपिकायन्त्रम् | ,, | शेषनाभियन्त्रवर्णनम् | ,, |
| ढेकीयन्त्रम् | २४९ | ग्रस्तयन्त्रम् | ,, |
| जारणायन्त्रम् | ,, | स्थालीयन्त्रम् | २६० |
| जारणायन्त्रस्य– | ,, | धूपयन्त्रम् | ,, |
| प्रकारान्तरम् | २५० | कन्दुकयन्त्रम् | २६१ |
| विद्याधरयन्त्रम् | २५१ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सोमानलयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रम् | २६२ |
| गर्भयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रस्य त्रैविध्यनिर्देशः | ,, |
| हंसपाकयन्त्रम् | २५२ | द्विविधखल्लयोः सामान्यलक्षणम् | ,, |
| बालुकायन्त्रम् | २५३ | अर्धचन्द्राकृतिकखल्लनिर्देशः | ,, |
| बालुकायन्त्रस्य प्रकारान्तरम् | ,, | वर्तुलखल्लनिर्देशः | २६३ |
| लवणयन्त्रम् | ,, | तप्तखल्लप्रमाणनिर्देशः | ,, |
| तप्तखल्लविधिः | ,, |
पृष्ठ 32स्थायी लिंक
[ १४ ]
दशमोऽध्यायः ।
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| मूषादिकथनम् | २६४ | मूसलाख्यमूषा | २७१ |
| मूषायाः पर्यायाः | ,, | कोष्ठिकानिर्देशः | ,, |
| मूषाया निरुक्तिः | ,, | अङ्गारकोष्ठी | २७२ |
| मूषाया उपादानम् | २६५ | पातालकोष्ठी | २७३ |
| मूषा शंसा | ,, | गारकोष्ठी | ,, |
| सन्धिलेपस्य पर्यायाः | ,, | वङ्कनालम् | २७४ |
| मूषोपयुक्तमृत्तिका | ,, | मूषाकोष्ठी | ,, |
| मतान्तरम् | २६६ | पुटस्य लक्षणम् | २७५ |
| मूषामृत्तिकायां संयोज्यद्रव्याणि | ,, | पुटस्य फलम् | ,, |
| वज्रमूषा | ,, | महापुटम् | २७७ |
| योगमूषा | ,, | गजपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणीमूषा | २६७ | वाराहपुटम् | २७८ |
| गारमूषा | ,, | कुक्कुटपुटम् | ,, |
| वरमूषा | ,, | कपोतपुटम् | ,, |
| वर्णमूषा | २६८ | गोर्वरस्वरूपम् | ,, |
| रौप्यमूषा | ,, | गोर्वरपुटलक्षणम् | २७९ |
| विडमूषा | ,, | भाण्डपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणमूषा | ,, | बालुकापुटम् | ,, |
| मूषाऽऽप्यायनम् | २६९ | भूधरपुटम् | २८० |
| वृन्ताकमूषा | ,, | लावकपुटम् | ,, |
| गोस्तनीमूषा | २७० | अनुक्तपुटमानेकर्त्तव्यनिर्देशः | २८१ |
| मल्लमूषा | ,, | उपलपर्यायाः | ,, |
| पक्कमूषा | ,, | कृत्रिमाकृत्रिमलौहनिर्देशः | ,, |
| गोलमूषा | ,, | षल्लवणानि | २८२ |
| महामूषा | २७१ | क्षारत्रयम् | ,, |
| मण्डूकमूषा | ,, | क्षारपञ्चकम् | ,, |
| मधुरत्रयम् | २८३ |
पृष्ठ 33स्थायी लिंक
[ १५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसकर्मणितैलाहरणोपयोगिद्रव्याणि | २८३ | व्याधिविशेषेरसप्रयोगनिषेधः | २९३ |
| वसावर्गः | ,, | शुद्धमूर्च्छितरसगुणाः | ,, |
| मूत्रवर्गः | ,, | मृतपारदगुणाः | ,, |
| माहिषपञ्चकच्छागलपञ्चकयोर्निर्देशः | २८४ | रसदोषास्तेषां कार्याणि च | ,, |
| अम्लवर्गः | ,, | संस्कारार्थं पारदस्य परिमाणनिर्देशः | २९४ |
| अम्लपञ्चकम् | ,, | स्वेदनसंस्कारः | २९५ |
| पञ्चमृत्तिका | २८५ | मर्दन संस्कारः | २९६ |
| विषवर्गः | ,, | मूर्च्छनसंस्कारः | २९७ |
| उपविषवर्गः | २८६ | उत्थापनसंस्कारः | २९८ |
| दुग्धवर्गः | ,, | पातनसंस्कारः | २९९ |
| विड्वर्गः | २८७ | उर्द्ध्वाधः पातनयोः सङ्ख्यानिर्देशः | ३०० |
| रक्तवर्गः | ,, | अधःपातनविधिः | ,, |
| पीतवर्गः | २८८ | पातने प्रकारान्तराणि | ,, |
| श्वेतवर्गः | ,, | तिर्यक्पातनम् | ३०१ |
| कृष्णवर्गः | ,, | मर्दनादीनां गुणाः | ३०३ |
| रक्तवर्गादीनां प्रयोजननिर्देशः | ,, | निरोधसंस्कारः | ,, |
| शोधनीयगणः | ,, | नियमनसंस्कारः | ३०४ |
| लौहमलनाशनगणः | २८९ | प्रकारान्तरम् | ३०५ |
| लौहकाठिन्यनाशकयोगः | ,, | दीपनसंस्कारः | ,, |
| द्रावकवर्गः | ,, | प्रकारान्तरेण दीपनम् | ३०६ |
| क्षारादिकानां कार्यम् | ,, | रसभावनादौ मूलिन्यः | ३०७ |
| एकादशोऽध्यायः। | सूतसंस्कारकार्यत्वनिर्देशः | ३०९ | |
| रसशोधनादिकथनम् | २९० | रसबन्धनप्रतिज्ञा तस्य व्युत्पत्तिश्च | ,, |
| मानपरिभाषा | ,, | रसबन्धाः | ,, |
| मानपरिभाषायां मतान्तरम् | २९१ | हठबन्धः | ३१० |
| अष्टादशसंस्काराः | २९२ | आरोटबन्धः | ,, |
पृष्ठ 34स्थायी लिंक
[ १६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| आभासबन्धः | ३११ | प्रकारान्तरेण जलूकानिर्माणम् | ३२३ |
| क्रियाहीनबन्धः | ३१२ | प्रकारान्तरम् | ३२४ |
| पिष्टिकाबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| क्षारबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ३२५ |
| खोटबन्धः | ३१३ | प्रकारान्तरम् | ३२६ |
| पोटबन्धलक्षणम् | ,, | योनिद्रावणम् | ,, |
| कल्कबन्धलक्षणम् | ,, | मदनवलयम् | ३२७ |
| कजलीबन्धलक्षणम् | ३१४ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सजीवबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्म | ३२८ |
| निर्जीवबन्धलक्षणम् | ३१५ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| निर्बीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सबीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| शृङ्खलाबन्धलक्षणम् | ३१६ | प्रकारान्तरम् | ३२९ |
| द्रुतिबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| बालकबन्धलक्षणम् | ३१७ | प्रकारान्तरम् | ३३० |
| कुमारबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| तरुणबन्धलक्षणम् | ३१८ | रसभस्मविधिः | ३३१ |
| वृद्धबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि पथ्यम् | ३३२ |
| मूर्तिबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि कुपथ्यम् | ,, |
| जलबन्धलक्षणम् | ३१९ | देवीशास्त्रोक्तककरादिगणः | ३३३ |
| अग्निबन्धलक्षणम् | ,, | श्रीकृष्णदेवोक्तककरादिगणः | ३३४ |
| सूतानां मूर्च्छाकल्पः | ,, | ककारादिनिषेधस्यापवादः | ३३५ |
| महाबन्धलक्षणम् | ३२१ | पारदविकार उपायाः | ,, |
| जलूकाबन्धः | ,, | रससेवने उपचारविधिः | ,, |
| क्रियाविशेषेण जलूकाया गुणविशेषः | ३२२ | द्वादशोऽध्यायः । | |
| जलूकायाः त्रिविधप्रमाणनिर्देशः | ,, | ज्वरचिकित्सा | ३३६ |
| जलूकायाः संस्कारविशेषः | ३२३ | रोगगणना | ,, |
पृष्ठ 35स्थायी लिंक
[ १७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| वातज्वरलक्षणम् | ३३७ | चातुर्थिकगजाङ्कुशरसः | ३६८ |
| पित्तज्वरलक्षणम् | ३३८ | मृत्युञ्जयरसः | ३६९ |
| कफज्वरलक्षणम् | ,, | पञ्चवक्त्ररसः | ,, |
| द्विदोषजत्रिदोषजज्वरकथनम् | ३३९ | उन्मत्तरसः | ३७० |
| त्रैलोक्यसुन्दररसः | ३४० | सन्निपाताञ्जनरसः | ,, |
| त्रैलोक्यडम्बररसः | ३४१ | नस्यम् | ३७१ |
| मेघनादरसः | ३४३ | प्रतापलङ्केश्वररसः | ,, |
| ज्वरगजहरिरसः | ,, | प्राणेश्वररसः | ३७३ |
| दीपिकारसः | ३४४ | मृतसञ्जीवनरसः | ३७४ |
| शीतभञ्जीरसः | ३४५ | द्वितीयमृतसञ्जीवनरसः | ३७५ |
| प्रकारान्तरेण शीतभञ्जीरसः | ३४६ | सन्निपातकुठाररसः | ३७६ |
| मृतजीवनरसः | ३४७ | नवज्वरारिरसः | ३७७ |
| वृद्धज्वराङ्कुशरसः | ३४९ | जलमञ्जरीरसः | ३७८ |
| महाज्वराङ्कुशरसः | ,, | कान्तरसः | ३७९ |
| मृत्युञ्जयरसः | ३५१ | चन्द्रोदयरसः | ,, |
| सर्व्वज्वरादिरसः | ,, | जीर्णज्वरारिरसः | ३८० |
| चन्द्रसूर्यरसः | ३५२ | नवज्वरमुरारिरसः | ३८१ |
| विषप्रयोगायोग्यनिर्देशः | ३५३ | त्रयोदशोऽध्यायः। | |
| उमाप्रसादनोरसः | ३५४ | रक्तपित्तम् | ३८४ |
| ज्वराङ्कुशरसः | ३५५ | रक्तपित्ताङ्कुशरसः | ३८५ |
| सर्वाङ्गसुन्दरचिन्तामणिरसः | ३५६ | चन्द्रकलारसः | ३८६ |
| लोकनाथगुटिका | ३५७ | पटोलादियोगः | ३८८ |
| सूचिकाभरणरसः | ३५९ | रसेन्द्रयोगः | ३८९ |
| शार्ङ्गष्टादिवर्गः | ३६४ | अन्यश्च | ,, |
| सूचीमुखरसः | ३६५ | नवनीतादियोगः | ,, |
| सन्निपातगजाङ्कुशरसः | ३६६ | शिरोलेपः | ,, |
| चातुर्थिकहरो रसः | ३६७ | द्राक्षादिक्वाथः | ३९० |
३ र० स०
पृष्ठ 36स्थायी लिंक
[ १८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| योगद्वयम् | ३९० | कज्जलयोगः | ४०७ |
| सितामृता | ,, | शिलापूतरसः | ,, |
| कासः | ,, | मन्थानभैरवरसः | ४०९ |
| कासनाशनरसः | ३९१ | विश्वादिवटिका | ४१० |
| कासहररसः | ,, | सामान्योपचाराः | ४११ |
| रक्तकाण्डरसः | ३९२ | तत्र रास्नादिक्षीरम् | ,, |
| भूताङ्कुशरसः | ३९३ | हिक्काघ्नधूमः | ,, |
| बोलबद्धरसः | ३९४ | गन्धपाषाणयोगः कफेभेषजविशेषनिर्देशश्च | ४१२ |
| अग्निरसः | ३९५ | स्वरभङ्गः | ,, |
| स्वयमग्निरसः | ,, | पर्पटीरसः | ४१३ |
| सामान्योपायाः | ३९६ | कफरोगे क्रियासूत्रम् | ४१७ |
| भृङ्गराजयोगः | ,, | चतुर्दशोऽध्यायः । | |
| अर्कादियोगः | ,, | राजयक्ष्मा | ,, |
| कासघ्नधूमद्वयम् | ,, | कनकसुन्दररसः | ४१८ |
| क्षयकासान्तकयोगः | ३९८ | राजमृगाङ्करसः | ४२१ |
| श्वासः | ,, | शङ्खेश्वररसः | ,, |
| ऊर्ध्वश्वासादिः | ३९९ | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२२ |
| सूर्यावर्तरसः | ,, | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२३ |
| श्वासान्तकरसः | ४०० | यक्ष्मणि औषधविशेषसेवनोपदेशः | ,, |
| श्वासारिवटकः | ४०१ | पञ्चामृतरसः | ४२४ |
| सप्तामृतावटी | ,, | जयन्तीप्रयोगः | ,, |
| नीलकण्ठरसः | ४०२ | क्षयशामकरसः | ,, |
| श्वासकासकरिकेसरी रसः | ४०३ | लोकनाथरसः | ४२५ |
| सूर्यरसः | ४०४ | वैद्यनाथरसः | ४२८ |
| सामान्योपचाराः | ,, | लोकनाथरसः | ४२९ |
| हिक्का | ४०५ | ||
| हिक्कानाशनरसः | ४०७ |
पृष्ठ 37स्थायी लिंक
[ १९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्राणनाथरसः | ४३० | वातार्शोलक्षणम् | ४५२ |
| वज्ररसः | ४३१ | अर्शःकुठाररसः | ४५३ |
| महावीररसः | ४३३ | पित्तार्शोहररसः | ४५४ |
| अरुचिस्तस्या निदानम् | ४३५ | सर्व्वलोकाश्रयरसः | ४५५ |
| अरुचेः सलक्षणभेदाः | ,, | अर्शोघ्नवटकम् | ४५६ |
| अरुचि-चिकित्सा | ,, | अर्शोघ्नी वटिका | ४५७ |
| यवानीखाण्डवचूर्णम् | ,, | मूलकुठाररसः | ४५८ |
| छर्द्दिरोगः | ४३६ | महोदयप्रत्ययसाररसः | ४६१ |
| वान्तिचिकित्सायां मातुलुङ्गादि योगः- | ४३७ | कनकसुन्दररसः | ४६२ |
| रजन्यादियोगः | ,, | भर्कैशः | ४६४ |
| सुगन्धालककयोगौ | ४३८ | तीक्ष्णमुखरसः | ४६६ |
| हृदयरोगः | ४३८ | अर्शःकुठाररसः | ४६७ |
| हृदयरोग-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यतिलकरसः | ४६८ |
| दशमूलादिक्वाथः | ,, | सामान्योपचाराः | ४७२ |
| ककुभाद्यं चूर्णम् | ,, | वचादिमोदकः | ,, |
| हृदयार्णवोरसः | ४४० | लौहादिचूर्णम् | ,, |
| नागार्जुनाभ्रम् | ,, | श्लेष्मार्शसि औषधविशेषनिर्देशः | ४७३ |
| पञ्चाननरसः | ४४१ | अर्शोहरयोगः | ,, |
| तृष्णारोगः | ,, | देवदाल्दादिलेपः | ,, |
| तृष्णाहररसः | ४४२ | अर्शःकुठारलेपः | ४७४ |
| मदात्ययरोगः | ,, | अर्शोघ्नशौचः | ,, |
| राजावर्त्तरसः | ४४४ | दुर्नामहरलेपः | ,, |
| द्वितीयराजावर्त्तरसः | ,, | अर्शोघ्नीवर्तिः | ,, |
| भैरवनाथी पञ्चामृतपर्पटी | ४४५ | अर्कक्षीरादिलेपः | ४७५ |
| पञ्चदशोऽध्यायः। | ४५० | शिग्रुमूलादिलेपः | ,, |
| अर्शः | ,, | षोडशोऽध्यायः। | ४७६ |
| पित्तार्शोलक्षणम् | ४५१ | उदावर्त्तः | ,, |
पृष्ठ 38स्थायी लिंक
[ २० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उदावर्त्तहरघृतम् | ४७७ | सामान्योपायाः | ५०४ |
| अतिसारः | ४७९ | वह्यादिचूर्णम् | ,, |
| दर्दुररसः | ४८० | दग्धशम्बूकादियोगः | ,, |
| द्वितीयदर्दुररसः | ४८१ | अन्योपायः | ५०५ |
| आनन्दभैरवरसः | ,, | अजीर्णम् | ,, |
| सुधासाररसः | ४८२ | अजीर्णकण्टकरसः | ५०६ |
| रसोत्तमः | ४८४ | विध्वंसरसः | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रलक्षणम् | ४८५ | विसूचीविजयरसः | ५०७ |
| लोकेश्वररसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ,, |
| लोकनाथरसः | ४८६ | वडवाग्निरसः | ५०८ |
| नागसुन्दररसः | ,, | वैश्वानरपोटलीरसः | ५०९ |
| षणिष्कतैलम् | ४८८ | चराचरवटी लक्षणम् | ५१० |
| सङ्ग्रहणी | ४८६ | श्रेष्ठमध्यमाधमवराटिकायालक्षणम् | ५११ |
| वज्रकपाटरसः | ,, | पुंवराटलक्षणं तस्य दोषाश्च | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ४९० | वडवामुखी गुटी | ,, |
| कनकसुन्दररसः | ४९१ | क्रव्यादरसः | ५१२ |
| ग्रहणीहररसः | ४९२ | राजशेखरवटी | ५१४ |
| चण्डसङ्ग्रहगदैककपाटरसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ५१५ |
| लघुसिद्धाभ्रकरसः | ४९३ | अमृतवटी | ५१६ |
| सर्वरोगरसः | ४९४ | राक्षसनामारसः | ५१७ |
| ग्रहणीगजकेसरीरसः | ४९७ | जीवननामारसः | ५१८ |
| शीघ्रप्रभावरसः | ४९९ | वडवानलरसः | ५१९ |
| पोट्टलीरसः | ५०० | अग्निजननीवटी | ५२० |
| वह्निज्वालावटोरसः | ५०१ | सर्वरोगान्तका वटी | ,, |
| वज्रधररसः | ५०२ | सामान्योपायः | ५२१ |
| ग्रहणीकपाटरसः | ,, | सप्तदशोऽध्यायः । | |
| सौवर्चलादिचूर्णम् | ५०३ | मूत्रकृच्छ्राश्मर्यादिचिकित्सनम् | ५२३ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ५०४ |
पृष्ठ 39स्थायी लिंक
[ २१ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाषाणभेदीरसः | ५२६ | सञ्जीवन रसः | ५५१ |
| द्वितीयपाषाणभेदीरसः | ५२७ | मेहमर्दनरसः | ५५२ |
| गोक्षुरादिचूर्णम् | ५२८ | रामबाणरसः | ५५३ |
| त्रिविक्रमरसः | ,, | राजमृगाङ्करसः | ५५५ |
| आनन्दभैरवी वटी | ५२९ | मेहहररसः | ५५७ |
| अश्मरीहरयोगः | , | उदयभास्कररसः | ५५८ |
| यवक्षारप्रयोगः | ५३० | हिमांशुरसः | ५६० |
| हरिद्राप्रयोगः | ,, | वसन्तकुसुमाकररसः | ५६१ |
| शिवोक्तयोगः | ,, | सर्वमेहान्तकरसः | ५६३ |
| लघुलोकेश्वररसः | , | मेहारिरसः | ,, |
| सामान्योपायः | ५३१ | मेहबद्धरसः | ५६६ |
| गोक्षुरप्रयोगः | ,, | हरिशङ्कररसः | ,, |
| पाण्डूरादियोगः | ,, | वङ्गेश्वरो रसः | ५६७ |
| शुक्लपिण्याकादियोगः | ५३२ | गुडमार्कण्डी | ,, |
| मूत्रकृच्छ्रान्तको रसः | ,, | ताम्रयोगः | ५६८ |
| विदार्यादिकषायः | ,, | रक्तमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| क्षारप्रयोगः | ५३३ | शुक्रमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| प्रमेहः | ,, | मधुमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| चन्द्रप्रभावटी | ५३९ | शाल्मलिप्रयोगः | ५६९ |
| प्रमेहगजसिंहरसः | ५४० | रक्तमेहे बोलबद्धरसोपदेशः | ,, |
| महाविद्यागुटी | ५४१ | श्लेष्मातकक्वाथः | ,, |
| मेहध्वान्तविवस्वान् रसः | ५४२ | कुष्माण्डस्वरसप्रयोगः | ,, |
| उमाशम्भुरसः | ५४४ | स्त्रीणांरक्तस्रावे तौवरयोगः | ५७० |
| रसेन्द्रनागरसः | ५४६ | मेहकुठारो रसः | ,, |
| अष्टादशोऽध्यायः । | |||
| मेहशत्रुरसः | ५४७ | विद्रधिः | ५७१ |
| कासीसबद्धरसः | ५४८ | सर्वेश्वरपोटलीरसः | ५७२ |
| भोमपराक्रमरसः | ५५० |
पृष्ठ 40स्थायी लिंक
[ २२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सर्वामयहरो रसः | ५७५ | देवदार्वादिचूर्णम् | ५९३ |
| वरुणकषायः | ५७७ | देवदालीपञ्चाङ्गचूर्णम् | ,, |
| शोभाञ्जनादिक्वाथः | ,, | तक्रासवः | ,, |
| वृद्धिचिकित्सा | ५७८ | एरण्डक्षारम् | ५९४ |
| वातारिरसः | ,, | शरपुङ्खादियोगः | ५९५ |
| सामान्योपायः | ५७९ | वज्रक्षारप्रयोगः | ,, |
| दार्वीप्रयोगः | ,, | काञ्चनीप्रयोगः | ,, |
| वातारिरसस्य प्रयोगोपदेशः | ,, | प्लीहिरक्तमोक्षणोपदेशः | ,, |
| तैलाईर्द्रकप्रयोगः | ५८० | शूलचिकित्सा | ५९६ |
| आन्त्रवृद्धौ पानीयतैलम् | ,, | अग्निमुखरसः | ,, |
| आन्त्रवृद्धौ पानीयतैलान्तरघृतञ्च | ,, | त्रिनेत्ररसः | ५९८ |
| अन्त्रवृद्धौ मांसरसः | ५८१ | सौभाग्ययोगः | ५९९ |
| अन्त्रवृद्धौ द्वितीयमांसरसः | ,, | चिन्तामणिरसः | ,, |
| गुल्मः | ५८२ | शूलकेसरीरसः | ६०० |
| गन्धकादिपोट्टलीरसः | ,, | मृतोत्थापनरसः | ६०१ |
| गन्धकादिपोट्टल्याः प्रयोगान्तरम् | ५८३ | क्षारताम्ररसः | ६०३ |
| वज्रेश्वररसः | ५८४ | शूलान्तकरः | ६०४ |
| शिखिवाडवरसः | ५८५ | द्वितीयोऽग्निमुखरसः | ६०५ |
| दीप्तामररसः | ५८६ | द्वितीयत्रिनेत्ररसः | ६०६ |
| विद्याधररसः | ,, | उदयभास्कररसः | ६०७ |
| रक्तोदरकुठाररसः | ५८७ | शूलगजकेसरीरसः | ६०८ |
| वैश्वानररसः | ५८८ | द्वितीयक्षारताम्रम् | ६०९ |
| अग्निकुमाररसः | ५८९ | ताम्राष्टकम् | ६१० |
| सर्वाङ्गसुन्दररसः | ,, | वडवानलगुटिका | ,, |
| गुल्मनाशनरसः | ५९२ | अग्निकुमाररसः | ६११ |
| सामान्योपायः | ५९३ | शूलहरक्षारः | ६१३ |
| तिलकक्वाथः | ,, | क्षारवटी | ६१४ |
पृष्ठ 41स्थायी लिंक
$$[ \text{ २३ } ]$$
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सामान्योपायः | ६१४ | वातोदरलक्षणम् | ६३२ |
| शम्बूकादिलौहम् | ,, | उदरघ्नरसः | ६३३ |
| अथेन्द्रवारुणिकादिचूर्णम् | ६१५ | विनोदविद्याधररसः | ,, |
| भूदार्वादियोगः | ,, | सुरेचनकररसः | ६३४ |
| सद्यःशूलहरोयोगः | ,, | मृत्युञ्जयरसः | ,, |
| सद्यःशूलहरयोगद्वयम् | ६१६ | उदरे विरेचनविधिः | ६३६ |
| कार्श्य-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यसुन्दररसः | ,, |
| अमृतार्णवरसः | ,, | महावह्निरसः | ६३७ |
| पूर्णचन्द्ररसः | ६१७ | गुडनागरप्रयोगः | ६३८ |
| स्थौल्यचिकित्सा | ६१८ | वैश्वानररसः | ,, |
| वडवाग्निमुखरसः | ,, | उदयमार्त्तण्डरसः | ६३९ |
| स्थौल्ये पूर्वकृत्यनिर्देशः | ,, | सूर्यप्रभागुटिका | ६४० |
| मध्वार्द्रकप्रयोगः | ,, | वज्रक्षारम् | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ,, | सामान्योपायाः | ६४२ |
| अम्लपित्त-चिकित्सा | ६२३ | खदिरादियोगः | ,, |
| तत्रादौ अम्लपित्तलक्षणम् | ,, | पिप्पलीप्रयोगः | ,, |
| लीलाविलासरसः | ,, | पाण्डुरोगः | ६४३ |
| ताम्रद्रुतिरसः | ६२५ | हंसमण्डूरः | ,, |
| कुष्माण्डखण्डलेहः | ६२७ | कालविध्वंसनरसः | ६४४ |
| सामान्योपायः | ६२८ | पञ्चाननरसः | ६४६ |
| वमनयोगः | ,, | आरोग्यसागररसः | ६४८ |
| विरेचनयोगः | ६२९ | पाण्डुपङ्कशोषणरसः | ६५० |
| पित्तरोग-चिकित्सा | ,, | पित्तपाण्ड्वरिरसः | ,, |
| पित्तान्तरसः | ,, | त्रैलोक्यसुन्दररसः | ६५१ |
| दशसारचूर्णम् | ६३० | त्रिनेत्राख्यरसप्रयोगः | ,, |
| एकोनविंशोऽध्यायः । | जयपालरसः | ,, | |
| उदरादिचिकित्सा | ६३१ | देवदालीचूर्णम् | ६५२ |
| जलोदरलक्षणम् | ,, |
पृष्ठ 42स्थायी लिंक
[ २४ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाण्डुहारीहरीतकी | ६५० | कुष्ठजिद्रसः | ६६९ |
| विजयावटिका | ६५३ | तालेश्वररसः | ,, |
| टङ्कणादियोगः | ६५४ | महातालेश्वररसः | ६७१ |
| कामला | ,, | ककनसुन्दररसः | ६७२ |
| कामलाप्रणुद्रसः | ,, | हरिबोलाङ्कुशरसः | ६७३ |
| त्रयोनिरसः | ६५५ | त्रिपुरान्तकरसः | ,, |
| कामेश्वररसः | ६५६ | विश्वहितरसः | ६७४ |
| सिन्दूरभूषणरसः | ६५७ | व्योषादिगुटिका | ६७५ |
| सुधापञ्चकरसः | ६५८ | कुष्ठकुठाररसः | ६७६ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ,, | वज्रशेखररसः | ६७७ |
| सामान्योपायः | ६५९ | दद्रुकुष्ठविद्रावणरसः | ६७९ |
| विंशोऽध्यायः । | माणिक्यतिलकरसः | ,, | |
| विसर्पजिद्रसः | ६६० | परहितरसः | ६८० |
| विसर्पनाशनतैलम् | ६६१ | तालकेश्वररसः | ६८२ |
| विसर्पहरतैलम् | ,, | खगेश्वररसः | ६८४ |
| कुष्ठरोगः | ६६२ | कुष्ठनाशनरसः | ६८५ |
| गलत्कुष्ठलक्षणम् | ,, | आरोग्यवर्धिनी गुटिका | ,, |
| श्वित्रकुष्ठलक्षणं भेदाश्च | ,, | नारायणरसः | ६८७ |
| वातकुष्ठहररसः | ६६३ | मेदिनीसाररसः | ६८८ |
| पित्तकुष्ठहररसः | ,, | जन्तुघ्नीगुटिका | ६९० |
| कफकुष्ठहररसः | ६६४ | धन्वन्तरिरसः | ६९१ |
| सन्निपातकुष्ठहररसः | ,, | वज्रधाररसः | ६९२ |
| विजयरसः | ६६५ | महातालेश्वररसः | ,, |
| सर्वेश्वररसः | ६६६ | कुष्ठकुठाररसः | ६९४ |
| सप्तकुष्ठारिरसः | ६६७ | स्वर्णक्षीररसः | ६९५ |
| प्रतापलङ्केश्वरः | ६६८ | त्रैलोक्यविजयतैलम् | ६९६ |
| कुष्ठनाशनरसः | ,, | कुष्ठान्तपर्पटीरसः | ,, |
पृष्ठ 43स्थायी लिंक
[ २५ ]
| विषया: | पृष्ठाङ्का: | विषया: | पृष्ठाङ्का: |
|---|---|---|---|
| कासीसबद्धरसः | ६९७ | श्वेतकुष्ठहरचूर्णम् | ७१४ |
| सर्वेश्वररसः | ६९८ | सामान्योपायः | ७१५ |
| योगराजगुग्गुलुप्रयोगोपदेशः | ६९९ | सिध्मेगन्धपाषाणलेपः | ” |
| श्वित्रारिरसः | ” | सिध्मे वराटिकालेपः | ” |
| चन्द्रप्रभावटिका | ७०० | दद्रुकुष्ठे मयूरक्षारादिलेपः | ७१६ |
| किलासनाशनरसः | ७०१ | चर्मकुष्ठे पर्पटरसप्रयोगविधिः | ” |
| उदयादित्यरसः | ” | मेघनादाद्युद्वर्त्तनम् | ” |
| अल्पश्वित्रे शिलादिलेपः | ७०३ | निर्गुण्ड्यादिप्रलेपः | ७१७ |
| अङ्कोलतैलादिलेपद्वयम् | ” | गुञ्जाद्युद्वर्त्तनम् | ” |
| श्वित्रान्तकरसः | ७०४ | काञ्चन्यादिप्रयोगः | ७१८ |
| श्वेतारियोगः | ७०५ | कुमार्यादिलेपः | ” |
| कृष्णीकरणयोगः | ” | महामुण्डीलेपः | ” |
| श्वित्रकुष्ठारिरसः | ७०६ | कण्डूव्रणादिहरः शिलादिप्रलेपः | ” |
| स्नुह्यादितैलम् | ” | गन्धकादिप्रयोगः | ७१९ |
| आरग्वधादितैलम् | ” | कुष्ठविध्वंसनो लेपः | ” |
| गन्धपिष्टीतैलम् | ७०७ | कृमिचिकित्सा | ७२० |
| सर्वकुष्ठान्तकृत्तैलम् | ७०८ | कृमिलक्षणम् | ” |
| कुष्ठविद्रावणतैलम् | ” | अग्नितुण्डरसः | ” |
| वज्रतैलम् | ७०९ | कृमिज्वरे आखुपर्णीप्रयोगः | ७२१ |
| महाभल्लाततैलम् | ७१० | क्रिमौ पर्पटीप्रयोगोपदेशः | ” |
| महामार्त्तण्डतैलम् | ” | कीटमर्दनरसः | ” |
| श्वित्रारितैलम् | ७१२ | कृमिघ्नरसः | ७२२ |
| कुष्ठारितैलम् | ” | क्रिमिहररसः | ” |
| कुष्ठामयघ्नगणः | ७१३ | कृमिशूलहरो रसः | ७२३ |
| महानिम्बादिचूर्णम् | ” | सूतभस्मप्रयोगः | ” |
| सर्वकुष्ठाङ्कुशचूर्णम् | ७१४ | एकविंशोऽध्यायः। | |
| श्वित्रनाशनचूर्णम् | ” | अष्टो महारोगाः | ७२४ |
पृष्ठ 44स्थायी लिंक
[ २६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शीतवातलक्षणम् | ७२४ | रक्तवातेऽपथ्यम् | ७३६ |
| वातारिरसः | ७२५ | आमवातः | ” |
| विजयागुटिकाप्रयोगोपदेशः | ” | आमवातेवातारिरसप्रयोगोपदेशः | ” |
| शीतारिरसः | ७२६ | अनिलारियोगः | ७३७ |
| स्पर्शवातः | ” | आमवातेऽरण्डतैलप्रशंसा | ” |
| सर्वेश्वररसः | ७२७ | अपस्मारः | ” |
| अर्केश्वररसः | ७२८ | पर्पटीरसप्रयोगविधिः | ७३८ |
| स्पर्शवातघ्नरसः | ” | ब्राह्म्यादिनस्यम् | ” |
| गन्धाश्मगर्भरसः | ७२९ | गवाक्ष्यादिनस्यम् | ” |
| द्वितीयगन्धाश्मगर्भरसः | ७३० | श्वेतापराजितादिनस्यम् | ७३९ |
| स्पर्शवातारिरसः | ७३१ | अपस्मारहरनस्यम् | ” |
| स्पर्शवातान्तकृद्वटी | ” | अपस्मारहरो योगः | ” |
| स्पर्शवातारितैलम् | ७३२ | उन्मादः | ७४० |
| स्पर्शवाते राजवृक्षप्रयोगः | ७३३ | माहेश्वरधूपः | ” |
| स्पर्शवाते चक्रमर्दादिः | ” | उन्मादे पर्पटीरसप्रयोगोपदेशः | ७४१ |
| अस्पर्शवाते त्रिगन्धप्रयोगः | ७३४ | उन्मादे उपचारविशेषाः | ” |
| अस्पर्शवाते हियावलीप्रयोगः | ” | एकाङ्गवातः | ७४२ |
| यवानीघृतम् | ” | वडवानलरसः | ” |
| स्पर्शान्तकरोऽर्कदुग्धप्रयोगः | ” | मार्त्तण्डेश्वररसः | ७४३ |
| स्पर्शान्तको हल्यादियोगः | ७३५ | चतुःसुधारसः | ७४५ |
| स्पर्शवाते रसेन्द्रलेपः | ” | सर्ववातारिरसः | ७४७ |
| रक्तवात-चिकित्सा | ” | वातविध्वंसनरसः | ७४९ |
| रक्तवातलक्षणम् | ” | वृकोदरगुटिका | ७५१ |
| सामान्योपायाः | ” | प्रभावती वटी | ७५२ |
| त्रियोनिरसप्रयोगः | ” | स्वच्छन्दभैरवरसः | ७५३ |
| कोकिलाक्षादिकषायः | ७३६ | स्वच्छन्दभैरवरसः | ७५४ |
| संशोधनोपदेशः | ” | वडवानलरसः | ” |