रोगों की पहचान
Rogon Ki Pehchaan
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)
भोजन द्वारा रोगों का निदान
भोजन द्वारा रोगों का निदान
बादाम से रोगों का निदान
सूखी खाँसी होने पर
- ❑ 6 बादाम पानी में कम-से-कम 8 घण्टे के लिए भिगो दें। फिर उन्हें छील कर मिश्री मिलाकर पीस लें। अब इस दवा को खा लें।
पीलिया होने पर
- ❑ 5 बादाम की गिरी, दो छुहारे, दो छोटी इलायची लेकर रात को भिगो दें। सुबह अच्छी तरह पीसकर मिश्री और मक्खन मिलाकर खाएँ।
आँख के रोग होने पर
- ❑ बादाम की पाँच गिरी लेकर रात को भिगो दें। फिर उसका छिलका उतारकर पानी के साथ पीस लें। फिर उसमें मिश्री और दूध मिलाकर पी लें।
पेशाब में जलन होने पर
- ❑ 10 गिरी बादाम की लेकर रात को पानी में भिगो दें। अब छीलकर 6 छोटी इलायची और मिश्री मिलाकर पानी के साथ पीस लें। अब इसे पानी में मिलाकर पी लें।
हकलाने पर
- ❑ 10 गिरी बादाम की लेकर रात को पानी में भिगो दें। फिर उसका छिलका उतारकर पीस लें। अब इसे मक्खन और मिश्री
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मिलाकर खाएँ।
मासिक धर्म में रुकावट होने पर
- ▣ एक बादाम को छुहारे के साथ पानी में रात को पानी में भिगो दें। सुबह पीसकर मिश्री और मक्खन मिलाकर रोज खाएँ।
नींबू से रोगों का निदान
मोटापा होने पर
- ▣ सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिलाकर पिएँ।
कब्ज होने पर
- ▣ रात के समय 10 ग्राम नींबू का रस, 10 ग्राम शक्कर-दोनों को पानी में डालकर पी लें।
गठिया होने पर
- ▣ सुबह पौन गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर पी लें।
खुजली होने पर
- ▣ गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर स्नान करें।
- ▣ नींबू के रस में करेले का रस मिलाकर लगाएँ।
जुएँ होने पर
- ▣ नींबू का रस सिर में लगाकर धीरे-2 मलें। कुछ देर बाद स्नान कर लें।
गले में सूजन होने पर
- ▣ गर्म पानी में एक नींबू निचोड़कर गराये करें। यह काम दिन में 3-4 बार कर लें।
नाखून न बढ़ने पर
- ▣ गर्म पानी में नींबू निचोड़कर उसमें 6-7 मिनट तक उँगलियाँ डाले रखें। फिर वहाँ से निकालकर ठंडे पानी में डालें।
साहिब बन्दगी
१२ मुँह से दुर्गंध आने पर
□ पानी में नींबू निचोड़कर कुस्ने करें।
जुकाम होने पर
□ रात के समय गुनगुने पानी में एक नींबू निचोड़कर और शहद मिलाकर पिएँ।
पेट में कीड़े होने पर
□ नींबू के बीजों का १ ग्राम चूर्ण पानी के साथ लें।
हिचकी आने पर
□ नींबू के रस में शहद और थोड़ा-सा नमक मिलाकर पिएँ।
जोड़ों में दर्द होने पर
□ नींबू का रस दर्द वाले स्थान पर मलें।
दाद होने पर
□ नींबू के रस में अनार के पतों का रस मिलाकर लगाएँ।
गंज पड़ने पर
□ नींबू को काटकर गंज वाली जगह रोज रगड़ें।
हैजा होने पर
□ पौन गिलास पानी में नींबू और नमक मिलाकर रोगी को पिलाते जाएँ। उलटी की परवाह न करें। उलटी का होना जारी रहे तो आपकी दवा भी जारी रहनी चाहिए।
पेट दर्द होने पर
□ १० ग्राम नींबू के रस में, ५ ग्राम शहद और ५ ग्राम अदरक का रस मिलाकर पिएँ।
सिर में दर्द होने पर
□ नींबू की पत्तियों का रस निकालकर सूँघें।
□ एक कप चाय में एक नींबू निचोड़ कर पिएँ।
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मुँहासे होने पर
- ▣ दूध की थोड़ी-सी मलाई (गर्म) पर एक नींबू निचोड़कर मुँह पर मलें।
तुलसी से रोगों का निदान
मलेरिया होने पर
- ▣ सुबह-दुपहर-शाम तुलसी के पत्तों का 5 बूँद रस पानी के साथ दें।
मोटापा होने पर
- ▣ तुलसी के पत्तों का रस और शहद पानी में मिलाकर नित्य पिएँ।
चक्कर आने पर
- ▣ तुलसी के 21 पत्ते लेकर उन्हें पीस लें। फिर उसमें शहद मिलाकर चाटें।
गर्भ न ठहरने पर
- ▣ तुलसी के बीजों का काढ़ा बनाकर नित्य लंबे समय तक पिएँ।
गले में दर्द होने पर
- ▣ तुलसी के पत्तों के रस में शहद मिलाकर चाटें।
जोड़ों में दर्द होने पर
- ▣ तुलसी के पत्तों के रस को दर्द वाली जगह मलें।
सिर दर्द होने पर
- ▣ तुलसी के पत्तों का रस नींबू के रस में मिलाकर पिएँ।
पुराना ज्वर होने पर
- ▣ तुलसी के पत्तों का एक तोला रस रोज़ पिएँ।
- ▣ 6 तुलसी की पत्तियों में 3 काली मिर्च और एक पीपर, 8 ग्राम मिश्री मिलाकर सबको पानी के साथ पीस लें। यह दवा सुबह
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साहिब बन्दगी
खाली पेट 20 दिन तक देनी होगी।
पेट में कीड़े होने पर
0 तुलसी के पत्तों का रस पिएँ।
पुराना सिर दर्द होने पर
0 30 तुलसी के पत्ते, 10 नग तुरिया और 1 सफेद मिर्च को जल में पीस लें। इसका रस निकालकर रोज सेवन करें।
गुर्दे में दर्द होने पर
0 तुलसी की 22 ग्राम पत्तियों को छाया वाले स्थान में सुखा लें। फिर 12 ग्राम सेंधा नमक और 22 ग्राम अजवायन-तीनों को अच्छी तरह से पीस लें और चूर्ण बना लें। यह दवा दिन में दो बार गर्म पानी के साथ लें। बहुत लाभकारी है।
साँप के काटने पर
0 तुलसी के पत्तों को पीस लें। फिर उसमें मक्खन मिलाकर काटे हुए स्थान पर लगाएँ। जब लेप काला हो जाए तो वो लेप उतारकर दूसरा लेप लगा दें।
मुँह से दुर्गंध आने पर
0 भोजन के बाद तुलसी के पत्ते चबाया करें।
खाँसी होने पर
0 तुलसी के पत्ते और काली मिर्च को पीसकर उनकी छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। दिन में 3 बार यह गोली खाएँ।
साँफ से रोगों का निदान
गर्भाशय में विकार होने पर
0 यदि मोटी स्त्री 5 ग्राम साँफ के चूर्ण को दुगुनी मात्रा में देसी घी के साथ कुछ महीने खाएँ तो बहुत लाभकारी सिद्ध हो।
रोगों की पहचान
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पेट दर्द
- ▣ सौंफ के साथ संधा नमक मिलाकर जरा-से गर्म पानी के साथ लें।
आँव आने पर
- ▣ सौंफ के 6 बूँद तेल में स्वाद के लिए चीनी या मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार रोगी को दें।
गन्ने से रोगों का निदान
पथरी होने पर
- ▣ गन्ना अधिक चूसें और उसका रस भी पिएँ।।
हिचकियाँ आने पर
- ▣ गन्ने का रस पिएँ।
कूकर खाँसी
- ▣ गन्ने के रस में 60 ग्राम मूली का रस मिलाकर पिएँ।
पीलिया होने पर
- ▣ भुने हुए जौ खाकर गन्ने का रस पी लें।
शहद से रोगों का निदान
शहद स्त्रियों के कई दोष काटता है। यह बड़ा गुणकारी है। मूत्र संबंधी रोगों को यह जड़ से नष्ट करता है। पर आजकल असली शहद मुश्किल से मिलती है। असली शहद की पारख के लिए उसे कागज के ऊपर डालें। यदि असली है तो कागज के नीचे निशान नहीं पड़ेगा। दूसरी पारख है कि कुत्ते के आगे रखें। यदि कुत्ता नहीं खाए तो शहद असली है।
मोटापा होने पर
- ▣ रोज सुबह पौन गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पिएँ।
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साहिब बन्दगी
टी. बी. होने पर
☐ शहद को मक्खन के साथ मिलाकर सुबह-शाम लें।
बच्चों के दाँत निकलने पर
☐ दाँत निकलते समय बच्चों के मसूड़ों पर शहद लगाएँ। इससे बच्चों को दर्द कम होता है।
आवाज़ बैठने पर
☐ आधा गिलास गर्म पानी में चम्मच-भर शहद मिलाकर गरारे करें।
लू लगने पर
☐ शहद में लौंग, इलायची, हल्दी, कालीमिर्च और जीरा सब समान मात्रा में मिलाकर सेवन करें।
पिप्ती की खराबी होने पर
☐ 22 ग्राम शहद में 5 ग्राम नागकेसर मिलाकर खाएँ। यह प्रयोग दिन में 2-3 बार करें।
पुराना बुखार होने पर
☐ शहद में गिलोय का चूर्ण मिलाकर सेवन करें।
मूत्र रोग होने पर
☐ सुबह खाली पेट शौच से पहले एक गिलास शीतल जल में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य पिएँ।
कान दर्द होने पर
☐ शहद में लौंग का तेल मिलाकर कान में डालें।
मिरगी के दौर पड़ने पर
☐ यदि किसी को बार-बार मिरगी के दौर पड़ते हैं तो करौंदों के रस में आधा चम्मच शहद मिलाकर हर रोज पिलाएँ।
रोगों की पहचान
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लकवा होने पर
- ▣ 30 ग्राम गर्मागर्म पानी में दो चम्मच शहद डालें। जब पानी कुछ ठंडा हो जाए तो रोगी को पिला दें। यह दवा दिन में 3-4 बार करें।
उल्टियाँ होने पर
- ▣ शहद में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाएँ।
मधुमक्खी के काटने पर
- ▣ शहद में माचिस का मसाला मिलाकर लगाएँ।
- ▣ शहद में आक का दूध मिलाकर लगाएँ।
लहसुन से रोगों का निदान
हार्ट अटैक आने पर
- ▣ लहसुन की पाँच कलियाँ चबा लें।
मिरगी रोग होने पर
- ▣ लहसुन की 7-8 कलियाँ दूध में उबालकर नित्य लें।
स्वप्न दोष होने पर
- ▣ लहसुन की दो कलियाँ सोते समय चबाकर खा लें।
गंज होने पर
- ▣ लहसुन का रस गंज वाली जगह लगाएँ।
लकवा होने पर
- ▣ 30 ग्राम लहसुन पीसकर एक गिलास दूध में डालकर उबालें। जब खीर की तरह गाढ़ा हो जाए तो उतार लें। ठंडा हो जाने पर इसका सेवन करें। यह प्रयोग रोज सुबह करें।
पीलिया होने पर
लहसुन की पाँच कलियों को एक प्याली गर्म दूध में मिलाकर
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साहिब बन्दगी
पिएँ और ऊपर से एक कप दूध और पी लें। यह दवा दिन में 5 बार लें।
पेट का कैंसर
□ लहसुन को अच्छी तरह से पीसकर पानी में मिलाकर सेवन करें।
हड्डी टूटने पर
□ लहसुन का प्रयोग करें। यह हड्डी जोड़ने में बड़ी सहायता करता है।
उच्च रक्तचाप होने पर
□ लहसुन और अदरक की चटनी भोजन के साथ नित्य लें।
अदरक से रोगों का निदान
कान दर्द होने पर
□ अदरक के रस को गर्म करके कान में डालें।
लकवा होने पर
□ दो गिलास पानी में उड़द की दाल और अदरक डालकर उबालें। जब आधा-पौन गिलास पानी रह जाए तो उसे ठंडा करके पी लें।
गठिया होने पर
□ 12 ग्राम सूखे अदरक को 120 ग्राम पानी में उबालें। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें। यह प्रयोग नित्य करें।
कमर दर्द होने पर
□ अदरक के रस में बराबर मात्रा में घी मिलाकर पिएँ।
अपच होने पर
□ भोजन से पहले और बाद में अदरक के रस में नींबू का रस और
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संधा नमक मिलाकर पी लें।
आवाज़ बैठने पर
▣ अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटें।
मुँह की दुर्गंध
▣ अदरक के रस को गर्म पानी में मिलाकर कुछे करें।
मासिक धर्म में पीड़ा होने पर
▣ सोट में पुराना गुड़ मिलाकर काढ़ा बनाकर पिएँ।
पसलियों में दर्द
▣ 32 ग्राम सोट को पीस लें। अब सवा गिलास पानी में उबालकर अच्छी तरह छान लें। यह पानी रोगी को दिन में तीन बार पिलाएँ।
आँवले से रोगों का निदान
मधुमेह होने पर
▣ ताजे आँवले के रस में शहद मिलाकर रोगी को सुबह-शाम दें।
हृदय रोग होने पर
▣ आँवले का मुरब्बा दूध के साथ लें।
▣ पिसा हुआ आँवला गाय के दूध के साथ लें।
पेट में कीड़े होने पर
▣ ताजे आँवले का रस नित्य पिएँ।
खूनी बवासीर होने पर
▣ आँवले के चूर्ण को दही में मिलाकर खाएँ।
मोतियाबिंद होने पर
▣ ताजे आँवले का रस रोज आँखों में डालें।
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साहिब बन्दगी
बाल सफेद होने पर
▯ आँवले के चूर्ण को पानी में घोल लें। फिर इसमें नींबू का रस मिला लें। इस पानी से रोज बाल धोएँ।
बाल गिरने पर
▯ सूखे आँवले को रात में पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी से बाल धोएँ।
दस्त होने पर
▯ 20 ग्राम पानी में आँवले को भिगो दें। जब वो नरम पड़ जाए तो थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीसें। फिर सफेद चने जितनी गोलियाँ बना लें। दिन में दो बार 2-2 गोलियाँ पानी के साथ खाएँ।
बच्चों के तुतलाने पर
▯ आँवला चबाने को दें।
बार बार पेशाब आने पर
▯ आँवले के रस को पानी में मिलाकर सेवन करें।
पथरी होने पर
▯ सूखे हुए आँवले के चूर्ण को मूली के साथ खाएँ।
प्याज़ से रोगों का निदान
विषधारियों के काटने पर
▯ प्याज़ को पीसकर उसका लेप करें।
नकसीर आने पर
▯ प्याज़ का रस नाक में डालें।
खूनी बवासीर होने पर
▯ 90 ग्राम प्याज़ के रस में 45 ग्राम शक्कर मिलाकर पी लें।
रोगों की पहचान
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पीलिया होने पर
- ▣ प्याज को काट नींबू रस में भिगो लें। फिर ऊपर से नमक, काली मिर्च डालकर दिन में दो बार सेवन करें।
टी. बी. होने पर
- ▣ कच्चे प्याज का सेवन नित्य करें। भोजन के साथ सलाद रूप में प्याज खाना न भूलें।
सिर में गंज होने पर
- ▣ प्याज का रस रोज गंज वाली जगह रगड़ें।
मिरगी का दौरा आने पर
- ▣ जैसे ही मिरगी का दौरा आए, एक प्याज को हाथ से तोड़कर आधे टुकड़े को रोगी की नाक के आगे रखें।
- ▣ मिरगी के रोगी को रोज सुबह खाली पेट प्याज का थोड़ा रस पिलाएँ।
पथरी होने पर
- ▣ 40 ग्राम प्याज का रस सुबह खाली पेट पिएँ।
कुत्ते के काटने पर
- ▣ प्याज को पीसकर शहद में मिला लें। यह लेप काटे वाली जगह लगाएँ।
मासिक में रुकावट होने पर
- ▣ प्याज का सूप निकालकर थोड़ा-सा गुड़ मिला लें। इसे गर्म-गर्म ही पी लें।
सहजन के द्वारा रोगों का निदान
पथरी होने पर
- ▣ सहजन की सब्जी खाएँ। अत्यंत लाभकारी है।
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साहिब बन्दगी
घाव होने पर
☐ सहजन की पत्तियों का लेप करें।
जोड़ों में दर्द होने पर
☐ सहजन की सब्जी खाएँ।
हींग से रोगों का निदान
सिर दर्द होने पर
☐ गर्म पानी में हींग डालकर उसका लेप करें।
पेट में कीड़े होने पर
☐ नित्य ज़रा-सी हींग का सेवन करें।
लकवा होने पर
☐ हींग में कड़वी लौकी के बीज पीसकर लेप करें।
पीलिया होने पर
☐ ज़रा-सी हींग को ग्वारपाठे के रस में मिलाकर रोगी को नित्य पिलाएँ।
चक्कर आने पर
☐ पानी में हींग घोलकर माथे पर लगाएँ।
कील मुँहासे होने पर
☐ थोड़ी-सी हींग पीसकर नारियल के तेल में मिला मुँह पर मलें।
टमाटर से रोगों का निदान
अपच होने पर
☐ टमाटर का रस पिएँ।
भूख कम लगने पर
☐ टमाटर का सूप पिएँ।
रोगों की पहचान
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मोटापा होने पर
- ▣ कच्चे टमाटर में प्याज, नींबू और नमक मिलाकर रोज़ सेवन करें।
चर्म रोग होने पर
- ▣ रोज़ 3 बार टमाटर का रस पिएँ।
मुँह में छाले होने पर
- ▣ भोजन के साथ टमाटर का सेवन अधिक करें।
पीलिया होने पर
- ▣ रोज़ पौन गिलास टमाटर का रस पिएँ।
पेट में कीड़े होने पर
- ▣ खाली पेट काली मिर्च और नमक के साथ टमाटर खाएँ।
धनिये से रोगों का निदान
नोट : कमजोर यौनशक्ति वालों के लिए धनिये का सेवन ठीक नहीं है।
छीकें आने पर
- ▣ धनिये की पत्तियाँ सूँघें।
गले में दर्द होने पर
- ▣ सूखा धनिया चबाएँ।
गैस होने पर
- ▣ धनिये को पानी में उबालकर उसका रस दिन में दो बार पिएँ।
मुँह से दुर्गंध आने पर
- ▣ नित्य भोजन के बाद हरा धनिया चबाएँ।
स्वप्न दोष होने पर
- ▣ 350 ग्राम सूखे धनिये के बीजों की गिरी को अच्छी तरह पीस
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साहिब बन्दगी
लें। अब इतनी ही मिश्री को भी पीसकर दोनों को मिला लें। यह दवा 5 ग्राम की मात्रा सुबह शाम बासी पानी से लें। इस दवा के कम-से-कम डेढ़ घण्टे बाद ही भोजन करना चाहिए।
अनिद्रा होने पर
□ धनिए की चटनी खाएँ।
खूनी बवासीर होने पर
□ धनिये के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए।
गंज होने पर
□ हरे धनिये का रस गंज वाले स्थान पर लगाएँ।
नारियल द्वारा रोगों का निदान
सिर दर्द होने पर
□ 20 ग्राम नारियल की गिरी में मिश्री मिलाकर सुबह-सुबह ही खाएँ।
बुखार होने पर
□ नारियल का पानी पिएँ।
बालों के गिरने पर
□ नारियल का तेल सिर में लगाएँ।
आग से जल जाने पर
□ नारियल के तेल में चूने का पानी मिलाकर लेप करें।
कील मुँहासे होने पर
□ नारियल का पानी चेहरे पर रोज सुबह-शाम लगाएँ।
टी. बी. होने पर
□ 20 ग्राम कच्चा नारियल रोज खाएँ।
पथरी होने पर
□ नारियल का पानी पिएँ।
रोगों की पहचान
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लौकी से रोगों का निदान
गुर्दे में दर्द होने पर
- ▣ लौकी का रस निकालकर थोड़ा गर्म करके धीरे-धीरे मालिश करें। फिर लौकी को पीसकर उसका लेप कर दें।
बवासीर होने पर
- ▣ लौकी के पत्तों को पीसकर लेप करें।
बिच्छू के काटने पर
- ▣ लौकी का रस निकालकर पिलाएँ और लौकी को पीसकर काटे स्थान पर लेप कर दें।
पैरों में जलन होने पर
- ▣ लौकी को काटकर पैरों के तलवे पर मलें।
टी. बी होने पर
- ▣ लौकी के गूदे पर स्वादानुसार मिश्री डालकर नित्य खाएँ।
पपीते से रोगों का निदान
नोट : गर्भावस्था में पपीते का सेवन अधिक करने से गर्भ गिर सकता है।
पेट में कीड़े होने पर
- ▣ पपीते के 8 बीज पानी में पीस कर आधा प्याली पानी के साथ हफ्ता-दस दिन लें।
लीवर की खराबी होने पर
- ▣ सुबह मूली के साथ नित्य पपीते का सेवन करें।
कब्ज होने पर
- ▣ सुबह पपीता खाकर ऊपर से दूध पी लें।
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साहिब बन्दगी
सेब द्वारा रोगों का निदान
भूख कम लगने पर
☐ खट्टे सेब का रस निकालकर उसमें आटा गूँदे और वो रोटी खाएँ।
अनिद्रा होने पर
☐ सेब का मुरब्बा नित्य खाएँ।
बवासीर के मससे होने पर
☐ खट्टे सेब का रस मससों पर लगाएँ। बहुत लाभकारी है।
पथरी होने पर
☐ नित्य सेब के रस का सुबह-शाम सेवन करें।
ज्वर होने पर
☐ सेब ज्वर को उतारने में सहायक है। अतः ज्वर में इसका सेवन करें।
जामुन द्वारा रोगों का निदान
नोट : जामुन के साथ या एक घण्टे तक दूध पीना ठीक नहीं।
पाचन क्रिया में खराबी होने पर
☐ पेड़ से उतारे गये ताजे जामुन का सेवन करें।
पेट दर्द होने पर
☐ जामुन के रस में सेंधा नमक डालकर पिएँ।
मधुमेह होने पर
☐ हररोज़ जामुन का सेवन करें और जामुन की गुठली का चूर्ण पानी के साथ लें। यह बहुत ही लाभकारी है।
रोगों की पहचान
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पेट में कीड़े होने पर
- ▣ पेट भरकर जामुन खाएँ।
गला बैठने पर
- ▣ जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर उसमें शहद मिलाकर छोटी-छोटी बेर के बराबर गोलियाँ बना लें। ऐसी 3 गोलियाँ दिन में तीन बार चूसें।
अतिसार होने पर
- ▣ जामुन की तीन पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर छोटी-छोटी बेर के समान गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम यह गोली खाएँ।
बथुए से रोगों का निदान
मूत्र संबंधी रोग होने पर
- ▣ 600 ग्राम बथुए को सवा किलो पानी में उबालें। बाद में पानी को अच्छी तरह से छान लें। फिर इसमें काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर पी लें।
मासिक धर्म में रुकावट होने पर
- ▣ ढाई चम्मच बथुए के बीजों को सवा गिलास पानी में डालकर उबालें। जब पानी लगभग आधा रह जाए तो उसे उतार कर छान लें और पी जाएँ।
जुएँ होने पर
- ▣ बथुए को उबालकर उस पानी से सिर को धोएँ।
पेट दर्द होने पर
- ▣ बथुए का रस पिएँ।
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साहिब बन्दगी
फालसे द्वारा रोगों का निदान
सूज़ाक होने पर
☐ फालसे खाएँ।
रक्त की कमी होने पर
☐ फालसे रक्तवर्द्धक हैं, अतः रक्त की कमी में इसका सेवन करें।
हृदय रोग होने पर
☐ एक कप पानी में फालसे मसल कर डालें और उसमें शक्कर मिलाकर पी लें।
श्वेत प्रदर होने पर
☐ फालसे का सेवन करें, लाभकारी है।
मौसमी से रोगों का निदान
टायफायड होने पर
☐ मौसमी का रस न पीकर ऐसे ही खाना ज्यादा हितकर है।
दमा होने पर
☐ मौसमी के रस में जीरा, सोंठ और थोड़ा गर्म पानी मिलाकर पिएँ।
हृदय रोग होने पर
☐ मौसमी का सेवन करें।
जुकाम होने पर
☐ मौसमी के रस को थोड़ा-सा गर्म करके अदरक की 4 बूँदें मिलाकर पिएँ।
अनिद्रा होने पर
☐ मौसमी का रस लगातार सेवन करें।
रोगों की पहचान
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दूध से रोगों का निदान
दूध अमृत समान है। जिनको दूध अच्छा नहीं लगता, वे अभागे हैं। दूध को गर्म करके खूब फेंटकर झाग बनाकर पीना चाहिए। हो सके तो रात को दूध मत पिएँ। इसका समय शाम 7 बजे से पहले-पहले ही रखें। इसे बिना चीनी मिलाए पीने की आदत डालें। दूध के स्वाभाविक स्वाद को नष्ट मत करें। दूध पीने वाले ताकतवर होते हैं। दूध तमाम रोगों से बचाता है। कब्ज हो, फेफड़े संबंधी रोग हों, आँखों के रोग हों, थकान हो जाए, सूखा रोग हो जाए, दूध का सेवन करें।
सावधानी बरतें
- ❑ दूध के साथ खट्टी वस्तुएँ भूल से भी मत खाएँ। कई भयंकर रोगों की उत्पत्ति हो सकती है।
- ❑ खाँसी, दमा, पेट दर्द आदि में दूध का सेवन मत करें।
अनन्नास से रोगों का निदान
अजीर्ण होने पर
- ❑ अनन्नास की फाँक पर काली मिर्च और नमक डालकर खाएँ।
टॉक्सिल होने पर
- ❑ अनन्नास रोज खाएँ।
फुँसिया होने पर
- ❑ अनन्नास का गूदा लगाएँ।
पाचन शक्ति कमज़ोर होने पर
- ❑ अनन्नास का सेवन खाली पेट करें।
करेले से रोगों का निदान
पथरी होने पर
- ❑ करेले की सब्जी और करेले का रस दोनों का सेवन करें।