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रोगों की पहचान

Rogon Ki Pehchaan

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

रोगों की पहचान

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लकवा होने पर

  • ▣ 30 ग्राम गर्मागर्म पानी में दो चम्मच शहद डालें। जब पानी कुछ ठंडा हो जाए तो रोगी को पिला दें। यह दवा दिन में 3-4 बार करें।

उल्टियाँ होने पर

  • ▣ शहद में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाएँ।

मधुमक्खी के काटने पर

  • ▣ शहद में माचिस का मसाला मिलाकर लगाएँ।
  • ▣ शहद में आक का दूध मिलाकर लगाएँ।

लहसुन से रोगों का निदान

हार्ट अटैक आने पर

  • ▣ लहसुन की पाँच कलियाँ चबा लें।

मिरगी रोग होने पर

  • ▣ लहसुन की 7-8 कलियाँ दूध में उबालकर नित्य लें।

स्वप्न दोष होने पर

  • ▣ लहसुन की दो कलियाँ सोते समय चबाकर खा लें।

गंज होने पर

  • ▣ लहसुन का रस गंज वाली जगह लगाएँ।

लकवा होने पर

  • ▣ 30 ग्राम लहसुन पीसकर एक गिलास दूध में डालकर उबालें। जब खीर की तरह गाढ़ा हो जाए तो उतार लें। ठंडा हो जाने पर इसका सेवन करें। यह प्रयोग रोज सुबह करें।

पीलिया होने पर

लहसुन की पाँच कलियों को एक प्याली गर्म दूध में मिलाकर

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साहिब बन्दगी

पिएँ और ऊपर से एक कप दूध और पी लें। यह दवा दिन में 5 बार लें।

पेट का कैंसर

□ लहसुन को अच्छी तरह से पीसकर पानी में मिलाकर सेवन करें।

हड्डी टूटने पर

□ लहसुन का प्रयोग करें। यह हड्डी जोड़ने में बड़ी सहायता करता है।

उच्च रक्तचाप होने पर

□ लहसुन और अदरक की चटनी भोजन के साथ नित्य लें।

अदरक से रोगों का निदान

कान दर्द होने पर

□ अदरक के रस को गर्म करके कान में डालें।

लकवा होने पर

□ दो गिलास पानी में उड़द की दाल और अदरक डालकर उबालें। जब आधा-पौन गिलास पानी रह जाए तो उसे ठंडा करके पी लें।

गठिया होने पर

□ 12 ग्राम सूखे अदरक को 120 ग्राम पानी में उबालें। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें। यह प्रयोग नित्य करें।

कमर दर्द होने पर

□ अदरक के रस में बराबर मात्रा में घी मिलाकर पिएँ।

अपच होने पर

□ भोजन से पहले और बाद में अदरक के रस में नींबू का रस और

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संधा नमक मिलाकर पी लें।

आवाज़ बैठने पर

▣ अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटें।

मुँह की दुर्गंध

▣ अदरक के रस को गर्म पानी में मिलाकर कुछे करें।

मासिक धर्म में पीड़ा होने पर

▣ सोट में पुराना गुड़ मिलाकर काढ़ा बनाकर पिएँ।

पसलियों में दर्द

▣ 32 ग्राम सोट को पीस लें। अब सवा गिलास पानी में उबालकर अच्छी तरह छान लें। यह पानी रोगी को दिन में तीन बार पिलाएँ।

आँवले से रोगों का निदान

मधुमेह होने पर

▣ ताजे आँवले के रस में शहद मिलाकर रोगी को सुबह-शाम दें।

हृदय रोग होने पर

▣ आँवले का मुरब्बा दूध के साथ लें।

▣ पिसा हुआ आँवला गाय के दूध के साथ लें।

पेट में कीड़े होने पर

▣ ताजे आँवले का रस नित्य पिएँ।

खूनी बवासीर होने पर

▣ आँवले के चूर्ण को दही में मिलाकर खाएँ।

मोतियाबिंद होने पर

▣ ताजे आँवले का रस रोज आँखों में डालें।

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साहिब बन्दगी

बाल सफेद होने पर

▯ आँवले के चूर्ण को पानी में घोल लें। फिर इसमें नींबू का रस मिला लें। इस पानी से रोज बाल धोएँ।

बाल गिरने पर

▯ सूखे आँवले को रात में पानी में भिगो दें। सुबह उस पानी से बाल धोएँ।

दस्त होने पर

▯ 20 ग्राम पानी में आँवले को भिगो दें। जब वो नरम पड़ जाए तो थोड़ा-सा नमक मिलाकर पीसें। फिर सफेद चने जितनी गोलियाँ बना लें। दिन में दो बार 2-2 गोलियाँ पानी के साथ खाएँ।

बच्चों के तुतलाने पर

▯ आँवला चबाने को दें।

बार बार पेशाब आने पर

▯ आँवले के रस को पानी में मिलाकर सेवन करें।

पथरी होने पर

▯ सूखे हुए आँवले के चूर्ण को मूली के साथ खाएँ।

प्याज़ से रोगों का निदान

विषधारियों के काटने पर

▯ प्याज़ को पीसकर उसका लेप करें।

नकसीर आने पर

▯ प्याज़ का रस नाक में डालें।

खूनी बवासीर होने पर

▯ 90 ग्राम प्याज़ के रस में 45 ग्राम शक्कर मिलाकर पी लें।

रोगों की पहचान

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पीलिया होने पर

  • ▣ प्याज को काट नींबू रस में भिगो लें। फिर ऊपर से नमक, काली मिर्च डालकर दिन में दो बार सेवन करें।

टी. बी. होने पर

  • ▣ कच्चे प्याज का सेवन नित्य करें। भोजन के साथ सलाद रूप में प्याज खाना न भूलें।

सिर में गंज होने पर

  • ▣ प्याज का रस रोज गंज वाली जगह रगड़ें।

मिरगी का दौरा आने पर

  • ▣ जैसे ही मिरगी का दौरा आए, एक प्याज को हाथ से तोड़कर आधे टुकड़े को रोगी की नाक के आगे रखें।
  • ▣ मिरगी के रोगी को रोज सुबह खाली पेट प्याज का थोड़ा रस पिलाएँ।

पथरी होने पर

  • ▣ 40 ग्राम प्याज का रस सुबह खाली पेट पिएँ।

कुत्ते के काटने पर

  • ▣ प्याज को पीसकर शहद में मिला लें। यह लेप काटे वाली जगह लगाएँ।

मासिक में रुकावट होने पर

  • ▣ प्याज का सूप निकालकर थोड़ा-सा गुड़ मिला लें। इसे गर्म-गर्म ही पी लें।

सहजन के द्वारा रोगों का निदान

पथरी होने पर

  • ▣ सहजन की सब्जी खाएँ। अत्यंत लाभकारी है।

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साहिब बन्दगी

घाव होने पर

☐ सहजन की पत्तियों का लेप करें।

जोड़ों में दर्द होने पर

☐ सहजन की सब्जी खाएँ।

हींग से रोगों का निदान

सिर दर्द होने पर

☐ गर्म पानी में हींग डालकर उसका लेप करें।

पेट में कीड़े होने पर

☐ नित्य ज़रा-सी हींग का सेवन करें।

लकवा होने पर

☐ हींग में कड़वी लौकी के बीज पीसकर लेप करें।

पीलिया होने पर

☐ ज़रा-सी हींग को ग्वारपाठे के रस में मिलाकर रोगी को नित्य पिलाएँ।

चक्कर आने पर

☐ पानी में हींग घोलकर माथे पर लगाएँ।

कील मुँहासे होने पर

☐ थोड़ी-सी हींग पीसकर नारियल के तेल में मिला मुँह पर मलें।

टमाटर से रोगों का निदान

अपच होने पर

☐ टमाटर का रस पिएँ।

भूख कम लगने पर

☐ टमाटर का सूप पिएँ।

रोगों की पहचान

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मोटापा होने पर

  • ▣ कच्चे टमाटर में प्याज, नींबू और नमक मिलाकर रोज़ सेवन करें।

चर्म रोग होने पर

  • ▣ रोज़ 3 बार टमाटर का रस पिएँ।

मुँह में छाले होने पर

  • ▣ भोजन के साथ टमाटर का सेवन अधिक करें।

पीलिया होने पर

  • ▣ रोज़ पौन गिलास टमाटर का रस पिएँ।

पेट में कीड़े होने पर

  • ▣ खाली पेट काली मिर्च और नमक के साथ टमाटर खाएँ।

धनिये से रोगों का निदान

नोट : कमजोर यौनशक्ति वालों के लिए धनिये का सेवन ठीक नहीं है।

छीकें आने पर

  • ▣ धनिये की पत्तियाँ सूँघें।

गले में दर्द होने पर

  • ▣ सूखा धनिया चबाएँ।

गैस होने पर

  • ▣ धनिये को पानी में उबालकर उसका रस दिन में दो बार पिएँ।

मुँह से दुर्गंध आने पर

  • ▣ नित्य भोजन के बाद हरा धनिया चबाएँ।

स्वप्न दोष होने पर

  • ▣ 350 ग्राम सूखे धनिये के बीजों की गिरी को अच्छी तरह पीस

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साहिब बन्दगी

लें। अब इतनी ही मिश्री को भी पीसकर दोनों को मिला लें। यह दवा 5 ग्राम की मात्रा सुबह शाम बासी पानी से लें। इस दवा के कम-से-कम डेढ़ घण्टे बाद ही भोजन करना चाहिए।

अनिद्रा होने पर

□ धनिए की चटनी खाएँ।

खूनी बवासीर होने पर

□ धनिये के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करना चाहिए।

गंज होने पर

□ हरे धनिये का रस गंज वाले स्थान पर लगाएँ।

नारियल द्वारा रोगों का निदान

सिर दर्द होने पर

□ 20 ग्राम नारियल की गिरी में मिश्री मिलाकर सुबह-सुबह ही खाएँ।

बुखार होने पर

□ नारियल का पानी पिएँ।

बालों के गिरने पर

□ नारियल का तेल सिर में लगाएँ।

आग से जल जाने पर

□ नारियल के तेल में चूने का पानी मिलाकर लेप करें।

कील मुँहासे होने पर

□ नारियल का पानी चेहरे पर रोज सुबह-शाम लगाएँ।

टी. बी. होने पर

□ 20 ग्राम कच्चा नारियल रोज खाएँ।

पथरी होने पर

□ नारियल का पानी पिएँ।

रोगों की पहचान

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लौकी से रोगों का निदान

गुर्दे में दर्द होने पर

  • ▣ लौकी का रस निकालकर थोड़ा गर्म करके धीरे-धीरे मालिश करें। फिर लौकी को पीसकर उसका लेप कर दें।

बवासीर होने पर

  • ▣ लौकी के पत्तों को पीसकर लेप करें।

बिच्छू के काटने पर

  • ▣ लौकी का रस निकालकर पिलाएँ और लौकी को पीसकर काटे स्थान पर लेप कर दें।

पैरों में जलन होने पर

  • ▣ लौकी को काटकर पैरों के तलवे पर मलें।

टी. बी होने पर

  • ▣ लौकी के गूदे पर स्वादानुसार मिश्री डालकर नित्य खाएँ।

पपीते से रोगों का निदान

नोट : गर्भावस्था में पपीते का सेवन अधिक करने से गर्भ गिर सकता है।

पेट में कीड़े होने पर

  • ▣ पपीते के 8 बीज पानी में पीस कर आधा प्याली पानी के साथ हफ्ता-दस दिन लें।

लीवर की खराबी होने पर

  • ▣ सुबह मूली के साथ नित्य पपीते का सेवन करें।

कब्ज होने पर

  • ▣ सुबह पपीता खाकर ऊपर से दूध पी लें।

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साहिब बन्दगी

सेब द्वारा रोगों का निदान

भूख कम लगने पर

☐ खट्टे सेब का रस निकालकर उसमें आटा गूँदे और वो रोटी खाएँ।

अनिद्रा होने पर

☐ सेब का मुरब्बा नित्य खाएँ।

बवासीर के मससे होने पर

☐ खट्टे सेब का रस मससों पर लगाएँ। बहुत लाभकारी है।

पथरी होने पर

☐ नित्य सेब के रस का सुबह-शाम सेवन करें।

ज्वर होने पर

☐ सेब ज्वर को उतारने में सहायक है। अतः ज्वर में इसका सेवन करें।

जामुन द्वारा रोगों का निदान

नोट : जामुन के साथ या एक घण्टे तक दूध पीना ठीक नहीं।

पाचन क्रिया में खराबी होने पर

☐ पेड़ से उतारे गये ताजे जामुन का सेवन करें।

पेट दर्द होने पर

☐ जामुन के रस में सेंधा नमक डालकर पिएँ।

मधुमेह होने पर

☐ हररोज़ जामुन का सेवन करें और जामुन की गुठली का चूर्ण पानी के साथ लें। यह बहुत ही लाभकारी है।

रोगों की पहचान

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पेट में कीड़े होने पर

  • ▣ पेट भरकर जामुन खाएँ।

गला बैठने पर

  • ▣ जामुन की गुठलियों का चूर्ण बनाकर उसमें शहद मिलाकर छोटी-छोटी बेर के बराबर गोलियाँ बना लें। ऐसी 3 गोलियाँ दिन में तीन बार चूसें।

अतिसार होने पर

  • ▣ जामुन की तीन पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाकर छोटी-छोटी बेर के समान गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम यह गोली खाएँ।

बथुए से रोगों का निदान

मूत्र संबंधी रोग होने पर

  • ▣ 600 ग्राम बथुए को सवा किलो पानी में उबालें। बाद में पानी को अच्छी तरह से छान लें। फिर इसमें काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर पी लें।

मासिक धर्म में रुकावट होने पर

  • ▣ ढाई चम्मच बथुए के बीजों को सवा गिलास पानी में डालकर उबालें। जब पानी लगभग आधा रह जाए तो उसे उतार कर छान लें और पी जाएँ।

जुएँ होने पर

  • ▣ बथुए को उबालकर उस पानी से सिर को धोएँ।

पेट दर्द होने पर

  • ▣ बथुए का रस पिएँ।

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साहिब बन्दगी

फालसे द्वारा रोगों का निदान

सूज़ाक होने पर

☐ फालसे खाएँ।

रक्त की कमी होने पर

☐ फालसे रक्तवर्द्धक हैं, अतः रक्त की कमी में इसका सेवन करें।

हृदय रोग होने पर

☐ एक कप पानी में फालसे मसल कर डालें और उसमें शक्कर मिलाकर पी लें।

श्वेत प्रदर होने पर

☐ फालसे का सेवन करें, लाभकारी है।

मौसमी से रोगों का निदान

टायफायड होने पर

☐ मौसमी का रस न पीकर ऐसे ही खाना ज्यादा हितकर है।

दमा होने पर

☐ मौसमी के रस में जीरा, सोंठ और थोड़ा गर्म पानी मिलाकर पिएँ।

हृदय रोग होने पर

☐ मौसमी का सेवन करें।

जुकाम होने पर

☐ मौसमी के रस को थोड़ा-सा गर्म करके अदरक की 4 बूँदें मिलाकर पिएँ।

अनिद्रा होने पर

☐ मौसमी का रस लगातार सेवन करें।

रोगों की पहचान

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दूध से रोगों का निदान

दूध अमृत समान है। जिनको दूध अच्छा नहीं लगता, वे अभागे हैं। दूध को गर्म करके खूब फेंटकर झाग बनाकर पीना चाहिए। हो सके तो रात को दूध मत पिएँ। इसका समय शाम 7 बजे से पहले-पहले ही रखें। इसे बिना चीनी मिलाए पीने की आदत डालें। दूध के स्वाभाविक स्वाद को नष्ट मत करें। दूध पीने वाले ताकतवर होते हैं। दूध तमाम रोगों से बचाता है। कब्ज हो, फेफड़े संबंधी रोग हों, आँखों के रोग हों, थकान हो जाए, सूखा रोग हो जाए, दूध का सेवन करें।

सावधानी बरतें

  • ❑ दूध के साथ खट्टी वस्तुएँ भूल से भी मत खाएँ। कई भयंकर रोगों की उत्पत्ति हो सकती है।
  • ❑ खाँसी, दमा, पेट दर्द आदि में दूध का सेवन मत करें।

अनन्नास से रोगों का निदान

अजीर्ण होने पर

  • ❑ अनन्नास की फाँक पर काली मिर्च और नमक डालकर खाएँ।

टॉक्सिल होने पर

  • ❑ अनन्नास रोज खाएँ।

फुँसिया होने पर

  • ❑ अनन्नास का गूदा लगाएँ।

पाचन शक्ति कमज़ोर होने पर

  • ❑ अनन्नास का सेवन खाली पेट करें।

करेले से रोगों का निदान

पथरी होने पर

  • ❑ करेले की सब्जी और करेले का रस दोनों का सेवन करें।

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साहिब बन्दगी

पेट में कीड़े होने पर

☐ करेले का रस पिएँ।

जोड़ों में दर्द होने पर

☐ करेले के पत्तों के रस की मालिश करें।

रक्त दूषित होने पर

☐ रोज करेले के 80 ग्राम रस का सेवन करें।

अजवायन से रोगों का निदान

जोड़ों में दर्द होने पर

☐ अजवायन के तेल की मालिश करें।

हैजा होने पर

☐ रोज पाँच बूँद अजवायन के तेल का सेवन करें।

हृदय में पीड़ा होने पर

☐ अजवायन का सेवन करें।

खाँसी होने पर

☐ अजवायन खाकर ऊपर से थोड़ा गर्म पानी पी लें।

मुँहासे होने पर

☐ 25 ग्राम अजवायन को बारीक पीस लें। अब उसमें इतना ही दही मिलाकर अच्छी तरह से पीसकर मुँहासों पर लगाएँ। रात को यह काम करें तो अच्छा है। सुबह ठंडे पानी से चेहरा न धोकर गर्म पानी का इस्तेमाल करें।

बाँझपन होने पर

☐ 25 ग्राम अजवायन और 25 ग्राम मिश्री, 100 ग्राम पानी के साथ मिट्टी के बर्तन में भिगो दें। यह काम रात के समय ही करें। फिर सुबह उसे पीसकर पी लें। जैसे ही मासिक धर्म शुरू हो, यह

रोगों की पहचान

101

प्रयोग लगातार 7 दिन तक करें।

खाज, खुजली होने पर

  • ▣ अजवायन को गर्म पानी में पीसकर लेप करें।

फ्लू होने पर

  • ▣ 10 ग्राम अजवायन को एक गिलास पानी में उबालें। जब पानी आधा शेष रह जाए तो उतार लें। अब ठंडा होने पर छानकर पी लें।

गुर्दे में दर्द होने पर

  • ▣ अजवायन को पीसकर उसमें अच्छी तरह से गुड़ मिलाकर रख लें। दिन में तीन बार एक सामान्य चम्मच यह दवा खाएँ।

गुर्दे में पथरी होने पर

  • ▣ रोज 5 ग्राम अजवायन को ऐसे ही फाँक लें।

आम से रोगों का निदान

रक्त की कमी होने पर

  • ▣ आम खाकर ऊपर से ठंडा दूध पिएँ।

गुर्दे कमजोर होने पर

  • ▣ आम का सेवन गुर्दे को ताकत प्रदान करता है।

दाँत कमजोर होने पर

  • ▣ आम के पत्ते चबाएँ।

अनिद्रा होने पर

  • ▣ रात के समय आम खाकर ऊपर से ठंडा दूध पी लें।

बवासीर होने पर

  • ▣ 20 ग्राम दही, एक चम्मच अदरक के रस को पौन कप मीठे आमरस में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करें।

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साहिब बन्दगी

पाचन शक्ति कमजोर होने पर

  • ▣ 60 ग्राम मीठे आमरस में ढाई ग्राम सॉट का रस मिलाकर सुबह रोज़ पिएँ।

नीम से रोगों का निदान

मलेरिया होने पर

  • ▣ 50 ग्राम नीम के पत्तों के साथ 3 काली मिर्च पीसकर पौन गिलास पानी में मिला लें। फिर छानकर यह पानी पी लें। बड़ा लाभदायक है।

चेचक होने पर

  • ▣ चेचक के रोगी को नीम की छत्रछाया में रखें। नीम की पत्तियों का रस पिलाएँ, नीम की पत्तियों पर लियाएँ, रात को सोते समय नीम की पत्तियों को पीसकर चेहरे पर लेप कर दें और सुबह धो लें।

बाल झड़ने पर

  • ▣ 100 ग्राम नीम की पत्तियों को उबालकर ठंडा कर लें। फिर इस पानी से सिर धो लें। यह प्रयोग लगातार डेढ़ हफ्ते तक करें।

मासिक धर्म में जाँघों में पीड़ा होने पर

  • ▣ 10 ग्राम अदरक का रस और 5 ग्राम नीम के पत्तों का रस थोड़े-से पानी में मिलाकर पिलाएँ। बहुत लाभकारी है।

आँख आने पर

  • ▣ नीम की पत्तियों के रस का सेवन करें।

हैजा होने पर

  • ▣ नीम की 21 पत्तियाँ लेकर पीस लें। फिर इसे आधा गिलास

रोगों की पहचान

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पानी में मिलाकर रोगी को पिलाएँ।

स्तन पीड़ा होने पर

  • ▣ नीम की पत्तियाँ, साँठी के चावल, सफेद जीरा सबको दूध में पकाकर कुछ दिन पिएँ।

साँप के काटने पर

  • ▣ नीम के पत्ते खिलाएँ। जब पत्ते कड़वे लगना शुरू हो जाएँ तो समझ लेना चाहिए कि विष उतर गया है।

कील मुँहासे होने पर

  • ▣ नीम के बीजों को सिरके में पीसकर लेप करें।

मोतियाबिंद होने पर

  • ▣ ताजी निबौली लेकर पत्थर पर घिस लें। रोज़ रात को सुरमँ की तरह आँखों में दो-2 सलाई लगाएँ।

घाव होने पर

  • ▣ नीम के हरे पत्तों को पीसकर उनका रस निकाल लें। अब रूई को इस रस में डालकर अच्छी तरह से तर कर लें। फिर एक प्याली में थोड़ा देसी घी डालकर उसमें रूई को डालकर गर्म करने के लिए रखें। अब उतारकर सहने योग्य गर्म रहने पर उस रूई को घाव वाली जगह रखें और पट्टी बाँध दें। नित्य यह पट्टी बदलें।

मूत्राशय या गुर्दे में पथरी होने पर

  • ▣ नीम की पत्तियों की राख को फॉक कर डेढ़ चम्मच शीतल जल पी लें। यह काम दिन में 4 बार करें।

सफेद कोढ़ होने पर

  • ▣ नीम की पत्तियाँ, फूल, निबौली-सबको पीसकर शरबत के रूप में सेवन करें। लगातार दो महीने यह दवा लें।

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साहिब बन्दगी

गठिया होने पर

▣ नीम के तेल की मालिश करें।

मासिक धर्म में रुकावट होने पर

▣ 20 ग्राम नीम की छाल, 5-5 ग्राम सोंठ और गुड़ लेकर काढ़ा बनाकर पिएँ। यह लाभकारी है।

उल्टियाँ होने पर

▣ 20 ग्राम नीम के पत्ते पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर अच्छी तरह से छान लें। यह पानी रोगी को दें।

लौंग से रोगों का निदान

एसीडिटी होने पर

▣ चार लौंग, 10 ग्राम आँवला रस और एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार पिएँ।

गैस होने पर

▣ एक कप पानी में तीन लौंग डालकर उबालें और ठण्डा करके पी लें। यह प्रयोग दिन में दो बार करें।

ज्वर होने पर

▣ लौंग को पीसकर फाँक लें और गुनगुना पानी पी लें। दिन में 3-4 बार कर लें।

सिर दर्द होने पर

▣ लौंग को अच्छी तरह पीसकर लेप बना लें। यह लेप सिर दर्द में बड़ा ही लाभकारी है।

अमरूद से रोगों का निदान

पुराना जुकाम होने पर

▣ 2-3 दिन केवल अमरूद का सेवन करें।

रोगों की पहचान

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पुराने दस्त होने पर

  • ▣ अमरूद की नयी पत्तियों को उबालकर उनका पानी पिएँ।

कब्ज होने पर

  • ▣ अमरूद खाकर ऊपर से गर्म दूध पी लें।

पेट दर्द होने पर

  • ▣ अमरूद की नयी पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर पिएँ।

मुनक्के से रोगों का निदान

टी. बी. होने पर

  • ▣ मुनक्के के साथ पीपल और शक्कर पीसकर रोज खाएँ।

चक्कर आने पर

  • ▣ 22 ग्राम मुनक्के को घी में सेंक लें। फिर उसपर सेंधा नमक डालकर खाएँ।

भूख न लगने पर

  • ▣ मुनक्के में मिर्च-नमक डालकर गर्म करके खाने से लाभ मिलता है।

हल्दी से रोगों का निदान

चेचक होने पर

  • ▣ इमली के बीजों का चूर्ण बना लें। इस चूर्ण का हल्दी के साथ सेवन करें।

स्तन पीड़ा होने पर

  • ▣ हल्दी की गाँठ को साफ पत्थर पर पानी के साथ घिसकर स्तनों पर लेप करें।

जुकाम होने पर

  • ▣ गर्म दूध में हल्दी डालकर सेवन करें।

106

साहिब बन्दगी

अन्दरूनी चोट लगने पर

❑ ढाई ग्राम हल्दी को पाव-भर दूध में अच्छी तरह से उबालें और उतारकर गुनगुना होने पर पी लें।

दांतों में दर्द होने पर

❑ हल्दी के साथ हींग को थोड़े-से पानी के साथ पीस लें। अब इसकी छोटी-सी गोली बनाकर दुखते हुए दाँत के नीचे रख दें।

घाव या घाव में कीड़े हो जाने पर

❑ हल्दी में थोड़ा-सा तेल डालकर घाव वाली जगह डालें।

जुकाम होने पर

❑ आधा गिलास गर्म दूध में डेढ़ चम्मच (छोटा) हल्दी घोल कर पी लें।

पोदीने से रोगों का निदान

गैस होने पर

❑ 50 ग्राम पोदीना, 7 ग्राम अजवायन, 8 ग्राम अदरक-सबको पौन गिलास (बड़े) पानी में उबालें। फिर इसमें पौन कप दूध और थोड़ी मिश्री या गुड़ मिला लें। यह दवा बहुत लाभकारी है।

रक्त जम जाने पर

❑ पोदीने का रस निकालकर पिएँ। लाभदायक है।

पेट दर्द होने पर

❑ ढाई चम्मच सूखे पोदीने में मिश्री मिलाकर लें। बच्चा है तो डेढ़ चम्मच ही दें।

गाजर से रोगों का निदान

नोट : बुखार होने पर गाजर का रस मत पिएँ।