सौन्दर्य-निखार (स्वदेशी चिकित्सा)
Saundarya Nikhar (Swadeshi Chikitsa)
राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Azadi Bachao Andolan First Edition · Azadi Bachao Andolan · 2010 (उद्गम)
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पलकों पर सोते समय एरण्ड के तेल की हल्की मालिश करने से पलकें घनी होती हैं।
— — — — — दाँतों को स्वस्थ और सुन्दर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से नीम या बबूल की दातून करना श्रेष्ठ उपाय है।
— — — — — दोनों समय भोजन के बाद आधा चम्मच सरसों के तेल में ज़रा सा बारीक पिंसा नमक मिलाकर
— — — — — भोजन व नाश्ते के बाद 1 गिलास पानी में आधा चम्मच नमक घोलकर कुल्ला करते रहने से भी दाँत निरोगी रहते हैं।
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दूध से दाढ़ी बनाने और नहाने की बात सुनकर शायद आपको अजीब लगे, पर है यह जोरदार नुस्खा। देश के कुछ शहरों में तो दूध से दाढ़ी बनाने के बाकायदा सैलून ही खुल गए हैं। इतना ही नहीं इसके फायदों को देखते हुए लोगों ने इस नुस्खे को और आसान और सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू कर दिया है। इस नुस्खे को प्रचलन में लाने का असली श्रेय आज़ादी बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राजीव दीक्षित को जाता है। दरअसल स्वदेशी और स्वसंस्कृति के पक्ष में दिए गए अपने कई व्याख्यानों में उन्होंने इस नुस्खे ने भी शेविंग
क्रीम वगैरह का बहिष्कार करके दूध से दाढ़ी बनाने की शुरुआत कर दी है।
दूध से दाढ़ी बनाने का सामान्य तरीका यह है कि पहले आप हल्के गुनगुने पानी से चेहरा भिगो लीजिए, इसके बाद थोड़ा सा कच्चा दूध लेकर चेहरे पर अच्छी तरह मलिए। अब रेज़र चलाइए, एकदम चिकनी दाढ़ी बनेगी। दाढ़ी बनाने के बाद क्रीम वगैरह लगाने की ज़रूरत एकदम समाप्त हो जाती है, क्योंकि कच्चा दूध अब्बल दर्ज का 'क्लीनिंग एजेंट' है। कच्चे दूध के इस्तेमाल से चेहरे की स्निग्धता और सौन्दर्य में वृद्धि होगी, सो अलग।
अब आइए, दूध से स्नान करने का तरीका जानिए। यह तरीका भी एकदम आसान है। एक नींबू एक छोटी कटोरी भर कच्चे दूध में निचोड़ दीजिए, बस अच्छे से अच्छे साबुन से भी बेहतर स्नान सामग्री तैयार है। नींबू निचोड़ने के बाद जब दूध फट जाए तो एक साफ सूती कपड़े का टुकड़ा इसमें भिगोकर शरीर पर अच्छी तरह रगड़ते हुए फेरिए और स्नान कर लीजिए। यह है आपका एकदम- सौ प्रतिशत सम्पूर्ण स्नान !
इस तरह आप साबुनों के नुकसानदेह मायाजाल से तो बचेंगे ही, तमाम तरह के चर्मरोगों से भी निजात मिलेगी।
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सुन्दरता के प्रतीक काले—घने—घुँघराले बाल
किसी ज़माने में सिर के एकाध बाल सफ़ेद दिख जाने या खल्लाट पड़ना शुरू हो जाने पर लोग इसे बुजुर्गियत के आगमन की सूचना मान लेते थे। कल्पना कीजिए कि यदि आज भी इसे कसौटी माना जाए तो क्या स्थिति होगी। दृश्य कुछ ऐसा होगा कि यौवन की दहलीज़ पर कदम रखने जा रहे देश के अधिकांश नौनिहाल सीधे बुजुर्गों की जमात में खड़े दिखाई देंगे। दरअसल असमय बालों का पकना व झड़ना अब इतनी आम बात है कि इसे बुजुर्गियत की निशानी मानना बेमानी हो चुका है।
असल में इस तरह की समस्याएँ आधुनिक जीवन—शैली की सौगातें हैं। खान—पान के अलावा भाँति—भाँति के रसायनों के मिश्रण से बने कृत्रिम साबुन, तेल, शैम्पू आदि अनगिनत सौन्दर्य प्रसाधनों ने इन समस्याओं में और इज़ाफ़ा किया है। फिलहाल इस प्रकरण में आधुनिक जीवन—शैली की मीमांसा के बजाय समस्या का समाधान प्रस्तुत करना मुख्य उद्देश्य है, इसलिए आगे बालों की विभिन्न समस्याओं को लेकर कुछ आसान उपायों पर ही चर्चा की जाएगी।
बालों को स्वस्थ रखने के लिए आहार—विहार पर ध्यान देना सबसे ज़रूरी बात है। स्वास्थ्य के लिए ज़रूरी आहार—विहार की पर्याप्त चर्चा विभिन्न प्रकरणों में आ चुकी है। किसी विशेष बीमारी की वजह से बालों के पकने या झड़ने की समस्या हो तो उसका इलाज कराएं। बालों की समस्याओं से निजात पाने के लिए होम्योपैथी में बहुत ही कारगर इलाज मौजूद है, बशर्ते लक्षणों से मेल खाती उपयुक्त दवा का चयन हो जाए। जड़ी—बूटियों से आंतरिक चिकित्सा के लिए कुछ कारगर नुस्खे तो ख़ैर आगे दिए ही जा रहे हैं।
आंतरिक चिकित्सा के साथ—साथ बालों की बाहरी देखभाल भी ज़रूरी है। पहली बात यह कि सिर की मालिश प्रतिदिन या एकाध दिन के अंतर पर अवश्य करें। इससे त्वचा में रक्त संचार सुचारू रूप से होगा और बालों की जड़ों तक पोषण आसानी से पहुँचेगा। मालिश के लिए आए दिन तेल बदल—बदलकर न इस्तेमाल करें। कोई एक अपने अनुकूल अच्छा तेल चुन लें और नियमित इसी से मालिश करें। सिर धोने के लिए रसायनों से बने साबुन—शैम्पुओं का जितना ही कम प्रयोग करें, उतना ही अच्छा है। सिर धोने की कई देशी विधियाँ आगे दी गई हैं, उन्हें अपनाएँ तो अच्छा लाभ मिलेगा। धूम्रपान, क्रोध, अधिक रात्रि जागरण, वनस्पति घी, तेल, मिर्च, मसालों से जितना बच सकें, उतना ही बेहतर रहेगा। खान—पान का सुधार रखते हुए भोजन में आँवले का नियमित प्रयोग बालों की सेहत के लिए विशेष लाभप्रद है। आँवले के स्थान पर आमलकी रसायन का भी प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है। इतनी सावधानियों के साथ आप ज़रूरी लगे तो नीचे दिए जा रहे नुस्खे आजमाएं और बालों की समस्याओं से निजात पाएं।
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असली हाथी दाँत को तवे पर भूनकर भस्म बनाएं। अब रसौत लेकर इसे पत्थर के सिल पर बकरी के दूध की सहायता से घिसकर लेई तैयार करें। इस लेई में समभाग हाथी दाँत का भस्म मिलाकर गंज पर लगाएं।
यह योग कहीं भी बालों के चकत्तों के रूप में गिर जाने पर लाभप्रद है। बकरी के दूध के स्थान पर नीम का तेल तथा हाथी दाँत न मिल पाने पर काले सुरमे का भी प्रयोग किया जा सकता है।
— — — — — आपके बाल झड़ना शुरू हो रहें हो तो आँवले के रस में शहद मिलाकर सिर में मालिश करें।
— — — — — आँवला चूर्ण मेंहदी के साथ पीसकर बालों में लेप करने से बाल घने और काले होते हैं।
— — — — — पिसी हुई सूखी मेंहदी 1 कप, कत्था 1 चम्मच, दही 1 चम्मच, नींबू का रस 1 चम्मच,पिसा कॉफी पाउडर 1 चम्मच, आँवला चूर्ण 1 चम्मच, ब्राह्मी बूटी का चूर्ण 1 चम्मच ,सूखे पोदीने का चूर्ण 1 चम्मच।
इन सभी चीजों को एक में मिलाकर गाढ़ा लेप बन सके, इतने पानी में भिगो दें। दो-ढाई घण्टे बाद इस लेप को सिर में बालों की जड़ों तक लगाएं और घण्टे भर बाद सूख जाने पर सिर को मुलतानी मिट्टी या बेसन से धो दें। इस प्रयोग से आपके बाल काफी सुंदर दिखेंगे। बालों में रंग न लाना हो तो कत्था और कॉफी पाउडर का इस्तेमाल न करें। बालों को सुंदर,लंबे,घने और काले बनाए रखने का यह एक अच्छा उपाय है, बशर्ते साबुन का प्रयोग बंद कर दिया जाए।
— — — — — पाँच अच्छे रसदार कागजी नींबू के रस में 20 ग्राम क्लमी शोरा अच्छी तरह खरल में घुटाई करके रख लें। इस मिश्रण को गंज वाले स्थान पर लेप करके दो घण्टे बाद किसी अच्छे आयुर्वेदिक शैम्पू या साबुन से सिर धो दें। पश्चात् नारियल तेल से मालिश करें। एक डेढ़ माह में गंज मिटना शुरू हो जायेगा। इसी के साथ 4-5 ग्राम आमलकी रसायन पानी या दूध से सुबह-शाम सेवन करें। यह बहुत कारगर नुस्खा है।
— — — — — उचित आहार-विहार के साथ एक चम्मच साबुत काले तिल तथा एक चम्मच भहगराज पंचांग कपडछन चूर्ण करके फॉक लें तथा ऊपर से ताजा पानी पिएं। 6 माह तक निरंतर यह प्रयोग करने से बालों का असमय पकना व झड़ना रुकेगा। इसी के साथ सायंकाल सोने से पूर्व सूर्यतप्त नीले नारियल तेल की भी मालिश करें तो अच्छा परिणाम मिलेगा।
— — — — — भृंगराज पंचांग छायाशुष्क करने के बाद कपडछन चूर्ण बनाकर काँच के बरतन में रखकर उसमें ताजे भृंगराज का रस इतना डालें कि रस 4 अंगुल ऊपर तक आ जाए। अब इसे लोहे के
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खरल में घुटाई करके सुखा लें। इस प्रकार 21 या कम से कम 7 भावनाएं भुंगराज स्वरस का देकर तैयार इस चूर्ण में इसका आधा बहेड़ा चूर्ण तथा पाँचवां हिस्सा हरड चूर्ण अच्छी तरह मिलाकर बादाम के तेल से तर करके कुल मिश्रण के बराबर मिश्री मिलाकर काँच के पात्र में रख लें। इस योग को 6-6 ग्राम प्रातः तथा सायं दूध के साथ सेवन करना चाहिए। एक सप्ताह बाद मात्रा बढ़ाकर 9 ग्राम तथा तीसरे सप्ताह से 10 ग्राम प्रतिदिन सेवन करें। 41 दिनों तक नियमित रूप से यह प्रयोग करने से सफेद बाल काले होने लगते हैं, बालों का झड़ना बंद होता है तथा इंद्रलुप्त का रोग समाप्त होता है। बहुत प्रशंसित योग है।
— — — — — उपरोक्त नुस्खे की भाँति एक अन्य योग यह है कि भाँगरा तथा त्रिफला चूर्ण समभाग मिलाकर इसमें सफेद साबुत तिल इतना ही पीसकर मिलाएं तथा बाद में सबके बराबर मिश्री मिलाकर प्रयोग करें। 6 माह तक सेवन करने से बालों के तमाम रोग ठीक हो जाते हैं। यह योग नेत्रों के लिए भी अतिशय लाभप्रद है।
— — — — — 200 ग्राम सूखे आँवले, 150 ग्राम शिकाकाई, 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागरमोथा, 40 ग्राम रीठा तथा 40 ग्राम कपूर लेकर सबका महीन कपड़छन चूर्ण बनाकर रख लें। इसमें से 50 ग्राम चूर्ण लेकर लगभग 400 ग्राम उबलते पानी में 15-20 मिनट तक भिगोएं। तदनन्तर मसल-छानकर इस जल से बालों में जड़ों तक मलें। इस प्रयोग से बाल मजबूत होते हैं, उनका झड़ना रुक जाता है तथा काले, मुलायम बने रहते हैं। इससे लीक-जूँ भी नष्ट होती हैं।
— — — — — आँवला क्वाथ, इमली का हिम क्वाथ, मेंहदी का स्वरस, भाँगरे का स्वरस, मुलहटी क्वाथ, का क्वाथ- प्रत्येक 1-1 किलो, दूध 2 किलो व तिल का तेल डेढ़ किलो।
इसे तेलपाक विधि से तैयार करके रख लें। इस तेल को सायं सोते समय बालों की जड़ों में मलना चाहिए। बालों का टूटना, सफेद होना, सिर की रूसी आदि दूर होते हैं।
— — — — — चमेली के पत्ते, चित्रक के पत्ते, लाल कनेर के पत्ते तथा करंज के पत्ते- प्रत्येक 250-250 ग्राम लेकर जल में पीसकर कल्क बनाएं। अब 4 किलो तिल का तेल लेकर इसमें कल्क मिलाकर 16 किलो पानी डालकर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाने पर छानकर रख लें।
इस तेल की मालिश से सिर या दाढ़ी के, जहाँ भी बाल उड़ गए हों, वहाँ जल्दी ही पुनः उगने लगते हैं। इस तेल की कुछ दिनों तक नियमित रूप से रूई के फाहे से मालिश करनी चाहिए।
— — — — — जटामांसी तथा वटवृक्ष के अंकुर 50-50 ग्राम, गिलोय स्वरस 4 किलो व तिल तेल 1 किलो लेकर तेल सिद्ध करें।
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इस तेल की इंद्रलुप्त के स्थान पर धीरे-धीरे मालिश करनी चाहिए तथा नस्य लेना चाहिए। यह काफी असरदार तेल है।
1 किलो अनार के पतों के रस में 125 ग्राम अनार का कल्क व आधा किलो सरसों का तेल मिलाकर तेलपाक विधि से तेल सिद्ध करके रख लें।
इस तेल की मालिश से इंद्रलुप्त तथा खालित्य विकार नष्ट होते हैं।
हरा भृंगराज, हरा आँवला तथा ताजे हरे मेंहदी के पत्ते, सभी 250-250 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर उनका रस निकाल लें। अब रस में इसके वजन के बराबर पानी मिलाएं तथा 200 ग्राम कपूर कचरी व 200 ग्राम बालछड़ भी कूटकर इसमें मिला दें और रात भर पड़ा रहने दें। सबेरे पूरा घोल धीमी आँच पर पकाएं और जब यह आधा रह जाए तो उतारकर छान लें। अब 200 ग्राम तिल का तेल धीमी आँच पर पकाते हुए तीनों दवाओं का क्वाथ थोड़ा-थोड़ा करके डालते जाएं। जब सारा रस जल जाए और मात्र तेल बच रहे तो उतारकर निथारने के बाद गाद अलग करके तेल बोटलों में भर लें।
इस तेल की मालिश रात में सोने से पूर्व बालों की जड़ों में करनी चाहिए तथा साथ ही कम-से-कम सौ बार कंधी करें। यह तेल बालों के लिए अत्यन्त हितकारी है।
गिलोय-आधा किलो, शतावरी चूर्ण-320 ग्राम, गोखरू चूर्ण-320 ग्राम, बाराहीकन्द-400 ग्राम, शुद्ध भिलावा-640 ग्राम, छिलकारहित तिल-320 ग्राम, चित्रकमूल-200 ग्राम, काली मिर्च-160 ग्राम, सोंठ-160 ग्राम, पीपल-160 ग्राम, मिश्री-1 किलो 400 ग्राम, शहद-700 ग्राम, विदारीकन्द-320 ग्राम तथा गोघृत-350 ग्राम।
पहले भिलावे तथा तिल को मिलाकर चूर्ण बनाएं। पश्चात् काष्ठौधियों का चूर्ण इसमें मिलाकर खरल करके एकरस कर शक्कर मिश्रित करके रख लें।
इसमें से 3-4 ग्राम की मात्रा दिन में दो बार घी तथा शहद के साथ सेवन करें। यह योग खालित्य, इंद्रलुप्त आदि अनेक रोगों में अत्यन्त हितकर है।
बाल चकत्तों के रूप में उड़ गए हों, गंज हो या पक रहे हों तो निम्न चिकित्साक्रम अपनाना चाहिए -
- 1 ग्राम आमलकी रसायन, 2 ग्राम मिश्री के साथ प्रातः तथा इतनी ही मात्रा सायं खाली पेट पानी से सेवन करें।
- इसके 1 घण्टे बाद 3 ग्राम शतावरी चूर्ण 10 ग्राम त्रिफला घृत में मिलाकर दूध के साथ प्रातः तथा इसी तरह सायं सेवन करें।
- त्रिफला, काले तिल तथा भृंगराज सभी समभाग लेकर चूर्ण बनाकर इसके बराबर पिप्सी मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से 10 ग्राम चूर्ण की एक मात्रा भोजन के बाद लें।
- सिर में प्रतिदिन सायंकाल सोने से पूर्व भक्ष्मराज तेल की मालिश करें।
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— — — — — यूँ चाय पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। परंतु यदि आप आदतवश चाय पीते ही हैं तो चाय बनाने के बाद चाय की पत्ती का एक अच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं। उबली हुई चाय पत्ती को फेंकने के बजाय इसे पुनः उबालकर छान लें और ठण्डा होने दें। अब इसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं तथा मल-मलकर सुखाएं, फिर धो डालें। इससे बाल साफ और चमकदार होते हैं।
— — — — — नींबू संतरे का रस और दही मिलाकर बालों में मलें और पानी से धो दें। यह प्रयोग बालों को सुन्दर और घना बनाने में उपयोगी है।
— — — — — किसी खेत या तालाब में साफ जगह पर खोदकर 1 फुट नीचे की मिट्टी निकालकर रख लें। काली मिट्टी हो तो अति उत्तम। आवश्यकताभर यह मिट्टी पानी में गलाकर कंकड़-पत्थर छानकर साफ घोल बनाएं। इस घोल से नित्य सिर धोने से बाल खिल उठते हैं और घने, लम्बे, मुलायम बने रहते हैं।
— — — — — 100 ग्राम आँवला, 6 आम की गुठलियाँ, 40 ग्राम अनार के छिलके, 100 ग्राम जवाकुसुम के फूल, 50 ग्राम नीम की पतियाँ, 50 ग्राम मेंहदी तथा 8 बड़े चम्मच नींबू का रस लेकर 2 लीटर नारियल तेल में डालकर लगभग आधा घण्टा तक पकाएं। पकने के बाद इसे तीन दिन रखा रहने दें और फिर छानकर बोटलों में भर लें। इसी अनुपात में इसे कम या ज्यादा भी बनाया जा सकता है।
रात को सोते समय इस तेल की सिर में मालिश करनी चाहिए। पैरों के तलवों में भी इस तेल की दबाव देकर मालिश करें। बालों को पोषण मिलेगा और तमाम केश रोग दूर होंगे। एक-दो दिन के अन्तर पर भी इस प्रयोग को कर सकते हैं।
— — — — — तथा धूप में सुखाएं। सूखने पर धो दें। इससे बाल हल्के-फुल्के और फूलें-फूल से रहेंगे।
— — — — — यदि आप खारे पानी वाले इलाके में रहते हों तो शैम्पू आदि करने के बाद बालों को लाल सिरके से धोएं।
— — — — — शैम्पू में थोड़ी सी दही मिलाकर बालों में मलकर 10-15 मिनट बाद धोने से आप के बाल चमकदार दिखेंगे।
— — — — — यदि डाई करने या रंगने की वजह से बालों में रूखेपन की शिकायत हो तो दूध में कैंला मथकर बालों में लगाएं। पका पपीता भी लगा सकते हैं। इससे रूखापन दूर हो जाएगा।
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आँवला, शिकाकाई, रीठा, नीम की छाल, मुलतानी मिट्टी, अच्छी जगह से निकाली हुई काली मिट्टी 250-250 ग्राम तथा मेथी दाना 150 ग्राम, चंदन चूर्ण 100 ग्राम, छबीला पाउडर 150 ग्राम, मेंहदी 150 ग्राम व ब्राह्मी 100 ग्राम लेकर कूट-पीसकर कपड़छन चूर्ण बनाकर सुरक्षित रख लें।
इसमें से 4-5 चम्मच चूर्ण लेकर पानी में गाढ़ा लेप बनाकर बालों में मसलें। आधा घण्टा बाद हल्के गर्म पानी से बालों को धोएं। इस प्रयोग के साथ रात में सोते समय शुद्ध नारियल तेल या सूर्यतप्त नीला नारियल तेल बालों की जड़ों में मालिश करके लगभग 100 बार कंधी करें। कुछ दिनों तक लगातार यह प्रयोग करके चाहें तो एक दो दिन के अंतराल पर करते रहें। धीरे-धीरे बाल लंबे, मुलायम, काले, घने और खूबसूरत दिखने लगेंगे।
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भूंगराज की पत्ती, विधारा, अश्वगंधा तीनों समान मात्रा में कूट पीसकर कपड़छन चूर्ण बनाकर इसमें कुल चूर्ण का दो तिहाई हिस्सा पिसी मिश्री मिलाकर रख लें।
इस चूर्ण को एक दो चम्मच (लगभग आधा तोला) की मात्रा में सबेरे एवं रात को गरम दूध से सेवन करना चाहिए। दवा सेवन काल में ब्रह्मचर्य पालन के साथ तेल, गुड़, खटाई, मिर्च-मसाला कम सेवन करें।
धीरे-धीरे बालों का गिरना तथा सफेद होना अच्छा होगा।
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यदि आप साबुन-शैम्पू से बचना चाहते हों तो बिना ज्यादा खटराग किए आसान तरीका यह है कि चने के बेसन से सिर धोएं। यदि सिर में ज्यादा तेल लगा हो तो कटोरी में बेसन घोलकर पहले आधा घोल बालों में मलें और धो दें। पुनः शेष घोल को मलते हुए सिर धोएं। आपके बाल एकदम खिल उठेंगे। बेसन पूरे शरीर में मलकर स्नान करें तो शरीर में भी साबुन लगाने की आवश्यकता न रहेगी। उपलब्धता हो तो इसमें थोड़ा छाछ भी मिला सकते हैं। यह सोने पे सुहागा वाली बात होगी।
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आम की गुठली की मिगी तथा गुठली रहित आँवला, दोनों समान भाग लेकर सिल पर पानी के साथ महीन पीसकर गाढ़ा लेप सा तैयार करें और बालों में लगाएं। घण्टे भर बाद इसे धो डालें। यह प्रयोग बालों के लिए अत्यन्त हितकर है।
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गाय का गोबर 2 चम्मच, गोमूत्र 5 चम्मच, सूखे आँवले का चूर्ण 1 चम्मच, शतावरी का चूर्ण 1 चम्मच, अदरक का रस 1 चम्मच तथा ज़रूरत भर मुलतानी मिट्टी लेकर सबका गाढ़ा लेप तैयार करें तथा बालों में जड़ों तक अच्छी तरह लगा लें। एकाध घण्टे बाद इसे धो दें।
यदि किसी विशेष रोग से ग्रस्त न होंगे तो इस प्रयोग से सिर के उड़े हुए बाल पुनः उग आएंगे।
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आँवला, रीठा, शिकाकाई तथा ब्राह्मी बराबर-बराबर वजन में लेकर कूट-पीसकर एक में मिलाकर रख लें। लोहे की कढ़ाई में थोड़ा सा पानी गर्म करके इसमें 25 ग्राम यह चूर्ण तथा 5 ग्राम मेथी दाना डालकर अच्छी तरह चला दें और कढ़ाई उतारकर ढककर रख दें। दूसरे दिन इस पानी को छानकर इससे बालों को धोएं।
यह प्रयोग करते रहने से बाल लंबे, घने, काले बने रहते हैं।
किसी बाह्य या आभ्यन्तर प्रयोग के साथ रात में सोते समय षड़बिन्दु तेल की 2-2 बूँद दाना नासा-छिद्रों में डालते रहने से बालों के झड़ने तथा पकने की समस्या से जल्दी निजात मिलती है।
मुलहटी, कूठ, उड़द, चिरौंजी और सेंधा नमक बारीक पीसकर शहद के साथ लेप बनाकर सिर में लगाने से रूसी की समस्या समाप्त हो जाती है।
सरसों का तेल, कमल, मुनकका, मुलहटी, घी और शहद मिलाकर बनाया गया लेप सिर में मलने से इंद्रलुप्त रोग समाप्त होकर बाल घने और मजबूत बनते हैं।
गोखरू और तिल के फूल बराबर मात्रा में पीसकर इसमें शहद तथा घी मिलाकर लेप करने से बाल तेजी से लंबे होते हैं।
चित्रकमूल, चमेली के फूल, करंज के बीज, कनेर की जड़ को समान मात्रा में कल्क (लुगदी) बनाकर इसके चौगुने तेल में पकाएं। तेल सिद्ध हो जाए तो छानकर काँच की बोतल में रख लें। इस तेल की सिर में मालिश करते रहने से केश संबंधी अनेक बीमारियाँ धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं और केश अच्छे बन जाते हैं।
जैतून के तेल से सिर की मालिश करके गुनगुने पानी में भिगोकर निचोड़े गए तौलिए को सिर में लगभग आधा घण्टा बाँधें। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं।
बायबिडंग, कमल तथा गंधक का कल्क बनाकर इसमें गोमूत्र मिलाकर सरसों के तेल में पकाएं। जब तेल सिद्ध हो जाए तो छानकर रख लें। इस तेल की मालिश से जूँ नष्ट हो जाते हैं।
बेल की जड़ पीसकर गोमूत्र मिलाकर लगाने से जूँ की समस्या से निजात मिल जाती है।
बेर की एक पाव पतियों को थोड़े पानी में पीसकर एक दिन के लिए रख छोड़ें। अब इसे आधा किलो नारियल के तेल में इतना पकाएं कि सारा पानी जल जाए। पश्चात् इसे छानकर रख
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लें और नित्य लगाकर मालिश करें। इस तेल से बालों में चमक आती है तथा कालापन बढ़ता है।
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शरीर और साँसों की बदबू भगाइए
शरीर और साँसों में बदबू आने के आंतरिक और बाह्य दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। एक तो खान-पान की गड़बड़ी या किसी रोग की वजह से बदबू आ सकती है, दूसरे शरीर और दाँतों व मुँह की साफ़-सफ़ाई में की जा रही लापरवाही से भी बदबू की समस्या पैदा हो सकती है। बदबू की समस्या के यदि शारीरिक विकार, जैसे कि -दाँतों, मसूड़ों की ख़राबी, पेट की गड़बड़ी, टॉन्सिल की सूजन-पस, नाक व साइनस विकार, श्वासनली व फेफड़ों के विकार, मुँह के छाले, रक्त की कमी, मधुमेह, यकृत-गुर्दों की बीमारी, पीनस आदि कारण हों तो आहार-विहार ठीक रखते हुए आवश्यक उपचार करना चाहिए और यदि बाह्य कारण हों, तो साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखते हुए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं-
- - - - - बेलपत्र, आँवला, हरड चूर्ण मिलाकर शरीर में लेप करके कुछ देर बाद धो दें। इससे शरीर और पसीने की दुर्गंध से छुटकारा मिलता है।
- - - - - सुपारी, जायफल, शीतलचीनी, कपूर, लौंग तथा लता कस्तूरी को पान में रखकर ज़रा सा चूना लगाकर चबाने से मुख शुद्धि होती है तथा दुर्गंध खत्म होती है। यह पान मसूड़े, दाँत तथा जीभ के लिए भी हितकारी है। ध्यान रखने योग्य इतना सा है कि रक्त-पित्त के रोगियों, बहुत दुर्बल, भूखे, प्यासे तथा मूर्च्छा से पीड़ित लोगों के लिये पान सेवन वर्जित है।
- - - - - साँस में बदबू आती हो तो ऐसे लोगों को नीम की दातून नियमित करनी चाहिए। इसके अलावा खाने के बाद मुँह अच्छी तरह साफ़ रखें।
- - - - - दो चम्मच शहद को 1 गिलास पानी में घोलकर गरारा करने से हफ़्ते भर में मुँह की दुर्गन्ध से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ दाँत की सफ़ाई और खान-पान पर भी ध्यान दें तो उत्तम है।
- - - - - मुँह की दुर्गंध दूर करने के लिए दोनों समय भोजन के बाद अथवा यदा-कदा सौफ़ चबाना चाहिए। इससे हाज़मा भी दुरुस्त होता है।
- - - - - चंदन, मुक्ता, हरड, नागरमोथा, उशीर व लोध का लेप बनाकर शरीर में लगाने से दुर्गंध की समस्या से निजात मिलती है।
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कूठ, हरड और नागरपान समान मात्रा में पीसकर पानी के साथ लेप बनाकर शरीर में लगाने से दुर्गंध आनी बंद होती है।
— — — — — वच, कूठ, तज, छोटी इलायची, कमल की जड़, नागकेसर सभी सममात्रा में लेकर कपड़छन चूर्ण बनाएं और शहद में मिलाकर 250 मि. ग्रा. की गोलियाँ बना लें।
इन गोलियों को चूसने से मुँह की दुर्गंध दूर होकर सुगंध आने लगती है।
— — — — — लोध, अनार का छिलका, रीठे के पत्ते, धाय के फूल एक में मिलाकर पीसकर लेप करने से शरीर की दुर्गंध मिटती है
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स्वस्थ, सुन्दर त्वचा के लिए
र हो, नैन-नक्श कितने ही आकर्षक हों, पर अगर त्वचा रोगग्रस्त हो तो सारी संदरता पर ग्रहण सा लग जाता है। हमारे देश में त्वचा को स्वस्थ, संदर बनाए रखने के लिए उबटन आदि की प्राचीन परंपरा रही है। कृत्रिम सौन्दर्य प्रसाधनों के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक स्वदेशी उपायों को अपनाना ही ज्यादा बेहतर है। इस प्रकरण में त्वचा को स्निग्ध, संदर, मुलायम और स्वस्थ बनाये रखने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इन्हें आजमाकर लाभ उठाया जा सकता है—
— — — — — आँवले के चूर्ण का उबटन शरीर पर लगाने से त्वचा साफ, स्वच्छ तथा मुलायम होती है। — — — — —
स्नान से पूर्व एक गिलास पानी में दो चम्मच शहद तथा एक नींबू का रस घोलकर चेहरे और शरीर पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें; इसके बाद स्नान करें। इससे त्वचा की स्निग्धता और चमक बढ़ती है तथा चर्मरोग भी दूर होते हैं। — — — — —
जौ, बाजरा तथा चने का आटा, सब 1-1 चम्मच लेकर इसमें 1 चम्मच नींबू का रस तथा 1 चम्मच हल्दी चूर्ण मिलाएं। अब जैतून का तेल इतना लें कि सब गाढ़ा उबटन बन जाए।
इस उबटन को चेहरे पर लगाएं या शरीर में, इससे त्वचा साफ और संदर बनती है। पूरे शरीर पर लगाना हो तो सभी चीजों की मात्रा बढ़ा लेनी चाहिए। — — — — —
त्वचा को निरोगी रखने के लिए पानी में नींबू का रस मिलाकर स्नान करना चाहिए। — — — — —
पानी में नींबू का रस तथा शहद मिलाकर नियमित पीने से रक्त साफ होता है तथा त्वचा रोग नहीं होते।
हालाँकि साँवली त्वचा को एकदम से गोरा बनाने के लिए अभी तक ऐसा कोई नुस्खा नहीं बना है, परंतु जो लोग अपनी त्वचा का रंग साफ और कातिमान बनाना चाहते हैं, उन्हें कोई भी उपचार अपनाने से पहले अपना आहार-विहार ठीक करना चाहिए। किसी भी हालत में कब्ज़ न होने दें। स्त्रियाँ अनियमित मासिक धर्म और प्रदर आदि की बीमारियों से बचें।
इतने उपाय के बाद 25 ग्राम साफ तथा 25 ग्राम कच्चा नारियल दिन में एक बार सबेरे या भोजन के बाद खूब चबा-चबाकर नियमित 6 माह तक खाएं। इससे त्वचा में निखार आता है और त्वचा का रंग उजला होता है। गर्भवती महिलाएं पूरे गर्भकाल में यह प्रयोग करें तो संतान गोरी पैदा होती है।
इस आंतरिक प्रयोग के साथ अपने अनुकूल कोई बाह्य प्रयोग भी अपना सकते हैं। — — — — —
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नींबू और संतरे का रस मिलाकर शरीर और चेहरे पर लगाने से मैल साफ होता है तथा रंगत सुधरती है।
नींबू, आँवला और संतरे का रस दही में मिलाकर चेहरे तथा शरीर की त्वचा पर लगाकर मालिश करें और सूखने पर धो दें या स्नान कर लें। यह त्वचा को निखारने का बड़िया नुस्खा है। कुछ दिन नियमित प्रयोग करें।
स्नान से कुछ समय पहले लगभग 100 ग्राम मिट्टी किसी कटोरे में पानी डालकर भिगो दें। मिट्टी गल जाए तो मसलकर पानी में एकरस कर लेप सा बना लें तथा इसे शरीर में साबुन की तरह मलकर लगाएं। इसके बाद स्नान करके साफ तौलिए से शरीर पांछ लें। मिट्टी का यह प्रयोग त्वचा को स्वच्छ, मुलायम और चमकीला बनाता है। मिट्टी खेत में साफ जगह से एक फुट गहराई से खोदकर लेनी चाहिए।
रात को जब सोने जाएं तो हाथ-पैर-मुँह आदि को अच्छी तरह धोकर पांछ लें। इसके बाद ग्लिसरीन, गुलाबजल बराबर मात्रा में मिलाकर ऊपर से किंचित नींबू का रस डाल लें तथा हाथ, पैर और चेहरे पर मलें। इससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहती है।
चुकंदर का रस, टमाटर का रस तथा पिसी हल्दी 4:4:1 के अनुपात में मिलाकर मलने से त्वचा का सौंदर्य कम होता है।
घमौरियों से परेशान हों तो बंदगोभी के रस में गुलाबजल मिलाकर लगाएं, राहत मिलेगी।
दूध की मलाई और टमाटर का रस समान मात्रा में मिलाकर लेप करके लगभग आधे घण्टे बाद धो दें। इससे चेहरे के काले दाग-धब्बे दूर होंगे।
गोमूत्र, बेसन, पिसी हल्दी तथा मुलतानी मिट्टी सभी समान मात्रा में लेकर गाढ़ा लेप बनाएं। इसे चेहरे सहित पूरे शरीर पर लगाएं तथा 15 मिनट बाद धोकर गुनगुने पानी से स्नान कर लें। यह प्रयोग निरंतर कुछ दिनों तक करते रहने से शरीर का रंग निखर उठेगा तथा त्वचा कान्तिपूर्ण हो जाएगी।
कच्चे या गुनगुने दूध में रूई का फाहा भिगोकर चेहरे तथा शरीर के विभिन्न अंगों की त्वचा पर हल्के-हल्के फेरिए। लगभग आधा घण्टा बाद ताजे या गुनगुने पानी से धो दें। दाग, धब्बे, झुर्रियाँ मिट जाएंगे तथा त्वचा स्निग्ध रहेगी।
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एक कटोरी में दूध लेकर इसमें चौथाई नींबू निचोड़ दें। जब दूध फट जाए तो इसे चेहरे के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों पर धीरे-धीरे मलें और कुछ देर बाद स्नान कर लें या धो दें। इससे त्वचा में मुलायमियत आएगी और त्वचा कांतिमय हो उठेगी।
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350 ग्राम पानी में 60 ग्राम इमली भिगोकर फूलने दें। तत्पश्चात् उसे मसलकर लेई सा बनाकर शरीर पर मलें और 15-20 मिनट बाद स्नान करें। कुछ दिनों में वर्ण में सुधार होने लगता है। इससे झाँई, दाग, धब्बे भी ठीक होते हैं। गर्मियों में एक-दो दिन नागा करके तीन-चार सप्ताह तक यह प्रयोग करके देखें।
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यदि बरसात और गर्मी के दिनों में घमौरियों की समस्या से ग्रस्त हों तो बाह्य उपचार के साथ एक गिलास जौ के पानी (बाली वाटर) में एक नींबू निचोड़कर पिएं। यदि दिन में दो बार इसे कुछ दिन पिएं तो घमौरियों से जल्दी ही छुटकारा मिल जाएगा।
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जौ हल्का सा भूनकर पीस लें तथा इसमें थोड़ी हल्दी व कुछ बूँदें सरसों का तेल मिलाकर उबटन की भाँति चेहरे तथा शरीर पर लगाएं। त्वचा में धीरे-धीरे निखार आएगा।
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आँवला व सेब का मुरब्बा दोनों का नियमित रूप से प्रातः सेवन करते रहने से त्वचा की खुशकी दूर होकर कांतिमान बनती है।
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नागकेसर, कुमुद, कमल के फूल तथा तगर और तालीसपत्र एक में पीसकर लेप करने से त्वचा कांतिमयता आती है।
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तगर की जड़, कूठ और तालीसपत्र को पानी में लेप बनाकर लगाने से त्वचा में निखार आता है।
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ताजे पानी में तुलसी की पतियाँ तथा गुलाब के फूल की पंखुडियाँ डालकर कुछ देर पड़ा रहने दें। पश्चात् इस पानी से स्नान करें, शरीर में ताज़गी आएगी।
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सर्दी के दिनों में जैतून के तेल में थोड़ा सा नमक मिलाकर शरीर में मालिश करने से त्वचा मुलायम बनती है और यौवन में निखार आता है।
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गाय का गोबर, पीली सरसों, हल्दी, नागरमोथा, कपूर, चिरौंजी, लाल चंदन, छड़ीला, नारंगी का सूखा छिलका-सभी को महीन पीसकर चमेली के तेल में उबटन बनाएं तथा नित्य प्रति चेहरे सहित पूरे शरीर पर मलें। इससे दाग-धब्बे समाप्त होकर त्वचा सुंदर बन जाएगी।
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नारियल के पानी में मलाई मिलाकर त्वचा पर मलने से दाग-धब्बे मिटकर त्वचा की मुलायमियत बढ़ती है।
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चंदन पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा की चमक बढ़ती है।
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स्त्रियों की समस्या अविकसित, बेडौल वक्ष
स्त्री शरीर के लिए वक्ष-सौन्दर्य का विशेष महत्व है। सौन्दर्य की भी अपेक्षा माँ बनने और शिशु के स्वास्थ्य की दृष्टि से नारी शरीर में समुचित विकसित वक्ष का कहीं ज्यादा महत्व है। यूँ यौवनावस्था में कदम रखने के साथ ही स्तनां का भी समुचित विकास शुरू हो जाता है, परंतु यदि किसी कारण से स्तन अविकसित रह जाएँ या अति विकसित होकर बेडौल हो जाएं तो चिन्ता की बात हो जाती है।
स्तनां के अविकसित रह जाने के पीछे अत्यधिक दुबलापन, मासिक विकार, गर्भाशय की दिक्कतें, अधिक चिंता, तनाव जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। इसी तरह शरीर पर मोटापा चढ़ने, आलसी जीवन बिताने, देर तक सोने की आदत, गरिष्ठ व ज्यादा भोजन करने अथवा समय से पूर्व अत्यधिक काम-क्रीड़ाओं में लिप्त होने, कामुक चिन्तन करने जैसे कारणों से भी स्तन अविकसित, बेडौल व ढीले हो सकते हैं। फिलहाल यहाँ नवयुवतियों की इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए कुछ स्वदेशी उपाय सुझाए जा रहे हैं, जिन्हें आजमाकर अविकसित या बेडौल स्तनां को स्वस्थ, सुडौल बनाया जा सकता है। इतना अवश्य ध्यान रखें कि किसी भी बाह्य चिकित्सा को अपनाते हुए शरीर के आन्तरिक विकार अवश्य दूर करें।
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कोई भी आंतरिक या बाह्य उपचार करते हुए स्तनां के समुचित विकास के लिए योगासन व व्यायाम अवश्य अपनाएं। स्तन सौन्दर्य की दृष्टि से सूर्य नमस्कार, धनुरासन, चक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, उष्ट्रासन, पर्वतासन, हस्त पाशर्वासन, गोमुखासन आदि विशेष लाभप्रद हैं। इनकी विधियाँ किसी योगासन विशेषज्ञ से सीखी जा सकती हैं।
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स्तन कम विकसित हों तो मालिश करने से काफी लाभ होता है। तिल, जैतून या सरसों के तेल से स्तनां की नियमित मालिश करनी चाहिए। इसी के साथ ठण्डे तथा गर्म पानी की गीली पट्टी से बारी-बारी करके सेंकने से स्तन आसानी से पुष्ट होने लगते हैं।
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घृतकुमारी की जड़, गोरखमुण्डी, इन्द्रायण की जड़, अरण्डी के पत्ते, छोटी कटेरी 50-50 ग्राम तथा कंले का पंचांग, सहिजन के पत्ते, पीपल के पेड़ की अन्तरछाल, अनार की जड़ व छिलका, खम्भारी की अन्तरछाल, कनेर व कूठ की जड़ 10-10 ग्राम लेकर मोटा-मोटा कूटकर 5 लीटर पानी में उबालकर क्वाथ करें। जब मात्र सवा लीटर पानी बच रहे तो उतारकर छान लें तथा इसमें सरसों व तिल का तेल 250-250 मि.ली. डालकर पुनः उबालें। सिर्फ तेल रह जाए तो उतारकर ठण्डा करके इसमें 15 ग्राम शुद्ध कपूर मिलाकर रख लें।
इस तेल को रात में सोते समय तथा सबेरे नहाने से एकाध घण्टे पहले स्तनां पर हल्के-हल्के मालिश करें। 2-3 माह में स्तन पुष्ट व सुडौल होने लगेंगे।
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गम्भारी की छाल 800 ग्राम तथा गम्भारी की छाल की लुगदी 200 ग्राम को सवा लीटर पानी में इतना उबालें कि चौथाई अंश शेष रह जाए। अब इसमें 800 मि.ली. तिल का तेल डालकर धीमी आँच पर पकाएं। जब सिर्फ तेल बच रहे तो उतार लें। इसी प्रकार से तीन बार गम्भारी छाल व कल्क(लुगदी) के साथ इस तेल को पकाएं। तीसरी बार में पकाने के बाद गर्म तेल में 15 ग्राम मोम डालकर उतारकर ठण्डा होने दें। कुछ ठण्डा होने के बाद तेल छानकर सुरक्षित रख लें।
इस तेल की प्रयोगविधि यह है कि इसमें कपड़े की पट्टी भिगोकर निचोड़ लें तथा स्तनों के ऊपर रखकर पान के पत्ते से ढँककर बाँध दें। प्रतिदिन सोते समय रात में यह प्रयोग करें। इससे धीरे-धीरे स्तन पुष्ट, सुडौल होने लगेंगे। यह 'श्रीपर्णी तेल' के नाम से बाज़ार में भी बिकता है।
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'चेहरे का सौन्दर्य' प्रकरण में वर्णित ताँबे के बरतन में नीबू का रस, तुलसी और कसांदी से बनने वाला नुस्खा प्रयोग करने से स्तन उन्नत, पुष्ट और सुडौल होते हैं।
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कुछ नुस्खे हाथ-पैरों की देखभाल के लिए
एडियों फटती हों तो अरंडी का तेल, गुलाबजल तथा नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर एडियों पर दिन में दो-तीन बार मलें।
— — — — — वाला मोम लेकर गर्म करें। पिघल जाए तो इसमें इसका आधा सरसों का तेल मिलाएं। अब किसी बरतन में पानी भरकर उसी में यह मिश्रण छान दें। जब यह पानी में नीचे बैठ जाए तो पानी फेंककर इसे किसी शीशी में रख लें। सोते समय रात में इस नुस्खे को एडियों में लगाने से एक सप्ताह में बिवाइयों में आराम मिल जाता है।
— — — — — रात को सोने से पहले नारियल का तेल गुनगुना करके बिवाइयों में लगाएं तथा मोजे पहनकर सो जाएं। सबेरे गर्म पानी में पैरों को 15 मिनट तक डुबोएं तथा किसी ब्रश से हल्के-हल्के रगड़कर एडियाँ साफ़ करें। इसके उपरांत भीगे पैरों को कपड़े से सुखाकर कोई तैलीय चीज़ लगा लें।
— — — — — एक चम्मच देशी मोम तथा एक चम्मच देशी घी गर्म करें। दोनों एकसार हो जाएं तो इस मिश्रण की गर्म-गर्म बूँदें बिवाइयों में टपकाएं। यह प्रयोग प्रतिदिन तब तक करें जब तक बिवाइयों से छुटकारा न मिल जाए।
— — — — — जैतून का तेल सहने योग्य गर्म करके नाखूनों को कुछ देर तक उसमें डुबाए रहिए। ऐसा कुछ दिनों तक करने से आपके नाखून मज़बूत होंगे।
— — — — — 100 ग्राम सरसों के तेल में 25 ग्राम मोम डालकर गर्म करें तथा एक उबाल आने के बाद उतारकर मुँह के पात्र में रख लें।
इसे वैसलीन की तरह इस्तेमाल करें, त्वचा नहीं फटेगी। यदि फट रही हो तो ठीक हो जाएगी।
— — — — — पैरों में गट्टे (गोखरू) हों तो पीड़ित स्थान पर मेंहदी का गाढ़ा लेप लगाकर पट्टी बाँध दें। दो-तीन घण्टे बाद इसे खोलकर धो दें। कुछ दिनों के अन्तराल पर कुछ ही बार यह प्रयोग करने से गट्टे समाप्त हो जाएंगे।
— — — — — सर्दी के मौसम में या पानी में काम करने से हाथ-पैरों की त्वचा फटती हो तो ग्लिसरीन में नींबू का रस मिलाकर मलना चाहिए।
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नींबू के छिलके नाखूनों पर मलने से नाखून चमकदार होते हैं।
हथेलियों, कोहनी और एड़ियों का कालापन मिटाने और मैल हटाने के लिए नींबू के छिलकों को प्रभावित हिस्सों पर घिसकर गुनगुने पानी से धोना चाहिए।
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