भारतकोश
संग्रह पर लौटें

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ

[ ३५६ ] सर्वेन्द्रियगुणाभासम् ... ३ १७ १६८ सर्वतःपाणिपादं तत् ... ३ १६ १६७ सहस्रशीर्षा पुरुषः ... ३ १४ १६५ समे शुचौ शर्करावह्निवालुका० ... २ १० १४२ सवित्रा प्रसवेन जुषेत ... २ ७ १३४ सर्वाननशिरोग्रीवः ... ३ ११ १६२ समाने वृक्षे पुरुषो निमग्नः ... ४ ७ १८० सर्वव्यापिनमात्मानम् ... १ १६ १२२ सर्वाजीवे सर्वसंस्थे बृहन्ते ... १ ६ ८५ सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्य मध्ये ... ४ १४ १९० संयुक्तमेतत्क्षरमक्षरं च ... १ ८ ९५ स्वदेहमरणिं कृत्वा ... १ १४ १२० स्थूलानि सूक्ष्माणि बहूनि चैव ... ५ १२ २१५ स्वभावमेके कवयो वदन्ति ... ६ १ २१९ क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः ... १ १० १०७ ज्ञाज्ञौ द्वावजावीशनीशौ ... १ ९ १०१ ज्ञात्वा देवं सर्वपाशापहानिः ... १ ११ १०८ त्रिरुन्नतं स्थाप्य समं शरीरम् ... २ ८ १३५

॥ श्रीहरिः ॥ ग्रन्थाकारमें उपलब्ध 'कल्याण' के पुराने, अति उपयोगी पुनर्मुद्रित विशेषाङ्क शिवाङ्क (सचित्र) [वर्ष ८, सन् १९३४ ई०]—इसमें शिवतत्त्व तथा शिव-महिमापर विशद विवेचनसहित शिवार्चन, पूजन, व्रत एवं उपासनापर तात्त्विक और ज्ञानप्रद मार्ग-दर्शन करानेवाली मूल्यवान् अध्ययन-सामग्री है। द्वादश ज्योतिर्लिङ्गोंका सचित्र परिचय तथा भारतके सुप्रसिद्ध शैव-तीर्थोंका प्रामाणिक वर्णन इसके अन्यान्य महत्त्वपूर्ण (पठनीय) विषय हैं। शक्ति-अङ्क (सचित्र) [वर्ष ९, सन् १९३५ ई०]—इसमें परब्रह्म परमात्माके आद्याशक्ति- स्वरूपका तात्त्विक विवेचन, महादेवीकी लीला-कथाएँ एवं सुप्रसिद्ध शाक्त-भक्तों और साधकोंके प्रेरणादायी जीवन-चरित्र तथा उनकी उपासना-पद्धतिपर उत्कृष्ट उपयोगी सामग्री संगृहीत है। इसके अतिरिक्त भारतके सुप्रसिद्ध शक्ति-पीठों तथा प्राचीन देवी-मन्दिरोंका सचित्र दिग्दर्शन भी इसकी उल्लेखनीय विषय-वस्तुके महत्त्वपूर्ण अङ्ग हैं। योगाङ्क (सचित्र) [वर्ष १०, सन् १९३६ ई०]—इसमें योगकी व्याख्या तथा योगका स्वरूप-परिचय एवं प्रकार और योग-प्रणालियों एवं अङ्ग-उपाङ्गोंपर विस्तारसे प्रकाश डाला गया है। साथ ही अनेक योग-सिद्ध महात्माओं और योग-साधकोंके जीवन-चरित्र तथा साधना-पद्धतियोंपर इसमें रोचक, ज्ञानप्रद वर्णन हैं। सारांशतः यह विशेषाङ्क सर्वसाधारण जनोंको योगके कल्याणकारी (अवदानों) और योग-सिद्धियोंके चमत्कारी प्रभावोंकी ओर आकृष्ट कर 'योग'के सर्वमान्य महत्त्वसे परिचय कराता है। संत-अङ्क (सचित्र) [वर्ष १२, सन् १९३८ ई०] संतोंकी महिमासे मण्डित, उनकी शिक्षाओं-उपदेशों और प्रेरणाओंसे पूरित यह 'संत-अङ्क' नित्य पठनीय और सर्वदा सेवनीय है। इसमें उच्चकोटिके अनेक संतों-प्राचीन, अर्वाचीन, मध्ययुगीन एवं कुछ विदेशी भगवद्विश्वासी महापुरुषों तथा त्यागी-वैरागी महात्माओंके ऐसे आदर्श जीवन-चरित्र हैं, जो पारमार्थिक गतिविधियोंके लिये प्रेरित करनेके साथ-साथ उनके सार्वभौमिक सिद्धान्तों एवं त्याग-वैराग्यपूर्ण तपस्वी जीवन-शैलीको उजागर करके उनके पारमार्थिक आदर्श, जीवन- मूल्योंको रेखाङ्कित करते हैं। और, किसीको भी उनके पद-चिह्नोंपर चलनेकी सत्प्रेरणा दे सकते हैं। साधनाङ्क (सचित्र) [वर्ष १५, सन् १९४१ ई०]—यह अङ्क उच्चकोटिके विचारकों, वीतराग महात्माओं, एकनिष्ठ साधकों एवं विद्वान् मनीषियोंके साधनोपयोगी अनुभूत विचारों और उनके साधनापरक बहुमूल्य मार्ग-दर्शनसे ओतप्रोत होनेसे महत्त्वपूर्ण है। इसमें साधना- तत्त्व, साधनाके विभिन्न स्वरूप-ईश्वरोपासना, योगसाधना, प्रेमाराधना आदि अनेक कल्याणकारी साधनों और उनके अङ्ग-उपाङ्गोंका शास्त्रीय विवेचन है। अतः सभीके लिये विशेषतः आत्मकल्याणकामी पुरुषोंके लिये यह उत्तमोत्तम दिशा-निर्देश है। संक्षिप्त महाभारत (सचित्र-दो खण्डोंमें) [वर्ष १७, सन् १९४३ ई०]—धर्म, अर्थ, काम, मोक्षके महान् उपदेशों एवं प्राचीन ऐतिहासिक घटनाओंके उल्लेखसहित इसमें ज्ञान, वैराग्य, भक्ति, योग, नीति, सदाचार, अध्यात्म, राजनीति, कूटनीति आदि मानव-जीवनके उपयोगी विषयोंका विशद वर्णन और विवेचन है। महाभारतकी अत्यधिक महिमा और अनेक महत्त्वपूर्ण विषयोंके समावेशके कारण इसे शास्त्रोंमें 'पञ्चम वेद' और विद्वत्समाजमें भारतीय ज्ञानका 'विश्वकोश' कहा गया है।

संक्षिप्त पद्मपुराण (सचित्र) [वर्ष १९, सन् १९४५ ई०] — इसमें (पद्मपुराण-वर्णित) भगवान् विष्णुके माहात्म्यके साथ भगवान् श्रीराम तथा श्रीकृष्णके अवतार-चरित्रों एवं उनके परात्पररूपोंका विशद वर्णन है। भगवान् शिवकी महिमाके साथ इसमें श्रीअयोध्या, श्रीवृन्दावनधामका माहात्म्य भी वर्णित है। इसके अतिरिक्त इसमें शालग्रामके स्वरूप और उनकी महिमा, तुलसीवृक्षकी महिमा, भगवन्नाम-कीर्तन एवं भगवती गङ्गाकी महिमासहित, यमुना-स्नान, तीर्थ, व्रत, देवपूजन, श्राद्ध, दानादिके विषयमें भी विस्तृत चर्चा है। संक्षिप्त मार्कण्डेय-ब्रह्मपुराणाङ्क (सचित्र) [वर्ष २१, सन् १९४७ ई०] — आत्म- कल्याणकारी महान् साधनों, उपदेशों और आदर्श चरित्रोंसहित इसमें मार्कण्डेयपुराणान्तर्गत देवी-माहात्म्य (श्रीदुर्गासप्तशती), तीर्थ-माहात्म्य, भगवद्भक्ति, ज्ञान, योग, सदाचार आदि अनेक गम्भीर, रोचक विषयोंका वर्णन (इन दो संयुक्त पुराणोंमें) है। कल्याणकामी पुरुषोंके लिये इनका अनुशीलन लाभप्रद है। नारी-अङ्क (सचित्र) [वर्ष २२, सन् १९४८ ई०] — इसमें भारतकी महान् नारियोंके प्रेरणादायी आदर्श चरित्र तथा नारीविषयक विभिन्न समस्याओंपर विस्तृत चर्चा और उनका भारतीय आदर्शोचित समाधान है। इसके साथ ही विश्वकी अनेक सुप्रसिद्ध महान् महिला- रत्नोंके जीवन-परिचय और जीवनादर्शोंपर मूल्यवान् प्रेरक-सामग्री इसके उल्लेखनीय विषय हैं। माता-बहनों और देवियोंसहित समस्त नारीजाति और नारीमात्रके लिये आत्मबोध करानेवाला यह अत्यन्त उपयोगी और प्रेरणादायी मार्ग-दर्शक है। हिन्दू-संस्कृति-अङ्क (सचित्र) [वर्ष २४, सन् १९५० ई०] — भारतीय संस्कृति-विशेषतः हिन्दू-धर्म, दर्शन, आचार-विचार, संस्कार, रीति-रिवाज, पर्व-उत्सव, कला-संस्कृति और आदर्शोंपर प्रकाश डालनेवाला यह तथ्यपूर्ण बृहद् (सचित्र) दिग्दर्शन है। इस प्रकार भारतीय संस्कृतिके उपासकों, अनुसंधानकर्ताओं और जिज्ञासुओंके लिये यह अवश्य पठनीय, उपयोगी और मूल्यवान् दिशा-निर्देशक है। संक्षिप्त स्कन्दपुराणाङ्क (सचित्र) [वर्ष २५, सन् १९५१ ई०] — इसमें भगवान् शिवकी महिमा, सती-चरित्र, शिव-पार्वती-विवाह, कुमार कार्तिकेयके जन्मकी कथा तथा तारकासुर-वध आदिका वर्णन है। इसके अतिरिक्त अनेक आख्यान एवं बहुत-से रोचक, ज्ञानप्रद प्रसंग और आदर्श चरित्र भी इसमें वर्णित हैं। शिव-पूजनकी महिमाके साथ-साथ तीर्थ, व्रत, जप, दानादिका महत्त्व- वर्णन आदि इसके विशेषरूपसे पठनीय विषय हैं। भक्तचरिताङ्क (सचित्र) [वर्ष २६, सन् १९५२ ई०] — इसमें भगवद्विश्वासको बढ़ानेवाले अनेकों भगवद्भक्तों, ईश्वरोपासकों और महात्माओंके जीवन-चरित्र एवं विभिन्न विचित्र भक्तिपूर्ण भावोंकी ऐसी पवित्र, सरस, मधुर कथाएँ हैं जो मानव-मनको प्रेम-भक्ति-सुधारससे अनायास सराबोर कर देती हैं। रोचक, ज्ञानप्रद और निरन्तर अनुशीलनयोग्य ये भक्तगाथाएँ भगवद्विश्वास और प्रेमानन्द बढ़ानेवाली तथा शान्ति प्रदान करनेवाली होनेसे अवश्य ही नित्य पठनीय हैं। बालक-अङ्क (सचित्र) [वर्ष २७, सन् १९५३ ई०] — यह अङ्क बालकोंसे सम्बन्धित सभी उपयोगी विषयोंका बृहद् संग्रह है। यह सर्वजनोपयोगी-विशेषतः बालकोंके लिये आदर्श मार्ग-दर्शक है। प्राचीन कालसे अबतकके भारतके महान् बालकों एवं विश्वभरके सुविख्यात आदर्श बालकोंके प्रेरक, शिक्षाप्रद, रोचक, ज्ञानवर्धक तथा अनुकरणीय जीवन-वृत्त एवं इसके बालोचित आदर्श चरित्र बार-बार पठनीय और प्रेरणाप्रद हैं। सत्कथा-अङ्क (सचित्र) [वर्ष ३०, सन् १९५६ ई] — जीवनमें भगवत्प्रेम, सेवा, त्याग, वैराग्य, सत्य, अहिंसा, विनय, प्रेम, उदारता, दानशीलता, दया, धर्म, नीति, सदाचार और शान्तिका प्रकाश भर देनेवाली सरल, सुरुचिपूर्ण सत्प्रेरणादायी छोटी-छोटी सत्कथाओंका यह बृहत् संग्रह सर्वदा अपने पास रखनेयोग्य है। और इसकी कल्याणकारी बातें हृदयङ्गम करने लायक, सर्वदा अनुकरणीय हैं।

तीर्थाङ्क (सचित्र) [वर्ष ३१, सन् १९५७ ई०]—इस अङ्कमें तीर्थोंकी महिमा, उनका स्वरूप, वर्तमान स्थिति एवं तीर्थ-सेवनके महत्त्वपर उत्कृष्ट मार्ग-दर्शन-अध्ययनका विषय है। इसमें देव-पूजन-विधिसहित, तीर्थोंमें पालन करनेयोग्य तथा त्यागनेयोग्य उपयोगी बातोंका भी उल्लेख है। अतः भारतके प्रायः समस्त तीर्थोंका अनुसंधानात्मक ज्ञान करानेवाला यह एक ऐसा संकलन है जो सभी तीर्थाटन-प्रेमियोंके लिये महत्त्वपूर्ण मार्ग-दर्शक (गाइड) हो सकता है। संक्षिप्त श्रीमद्देवीभागवत (सचित्र) [वर्ष ३४, सन् १९६० ई०]—इसमें पराशक्ति भगवतीके स्वरूप-तत्त्व, महिमा आदिके तात्त्विक विवेचनसहित श्रीमद्देवीकी लीला-कथाओंका सरस एवं कल्याणकारी वर्णन है। श्रीमद्देवीभागवतके विविध, विचित्र कथा-प्रसंगोंके रोचक और ज्ञानप्रद उल्लेखके साथ देवी-माहात्म्य, देवी-आराधनाकी विधि एवं उपासनापर इसमें महत्त्वपूर्ण प्रकाश डाला गया है। अतः साधनाकी दृष्टिसे यह अत्यन्त उपादेय और अनुशीलनयोग्य है। संक्षिप्त योगवासिष्ठाङ्क (सचित्र) [वर्ष ३५, सन् १९६१ ई०]—योगवासिष्ठके इस संक्षिप्त रूपान्तरमें जगत्की असत्ता और परमात्मसत्ताका प्रतिपादन है। पुरुषार्थ एवं तत्त्व-ज्ञानके निरूपणके साथ-साथ इसमें शास्त्रोक्त सदाचार, त्याग-वैराग्ययुक्त सत्कर्म और आदर्श व्यवहार आदिपर सूक्ष्म विवेचन है। कल्याणकामी साधकोंके लिये इसका अनुशीलन उपादेय है। संक्षिप्त शिवपुराण (सचित्र) [वर्ष ३६, सन् १९६२ ई०]—सुप्रसिद्ध शिवपुराणका यह संक्षिप्त अनुवाद परात्पर परमेश्वर शिवके कल्याणमय स्वरूप-विवेचन, तत्त्व-रहस्य, महिमा, लीला-विहार, अवतार आदिके रोचक, किंतु ज्ञानमय वर्णनसे युक्त है। इसकी कथाएँ अत्यन्त सुरुचिपूर्ण, ज्ञानप्रद और कल्याणकारी हैं। इसमें भगवान् शिवकी पूजन-विधिसहित महत्त्वपूर्ण स्तोत्रोंका उपयोगी संकलन भी है। संक्षिप्त ब्रह्मवैवर्तपुराणाङ्क (सचित्र) [वर्ष ३७, सन् १९६३ ई०]—इसमें भगवान् श्रीकृष्ण और उनकी अभिन्नस्वरूपा प्रकृति-ईश्वरी श्रीराधाकी सर्वप्रधानताके साथ, गोलोक- लीला तथा अवतार-लीलाका विशद वर्णन है। इसके अतिरिक्त इसमें कुछ विशिष्ट ईश्वरकोटिक सर्वशक्तिमान् देवताओंकी एकरूपता, महिमा तथा उनकी साधना-उपासनाका भी सुन्दर प्रतिपादन है। इसकी कथाएँ रोचक, बड़ी मधुर, ज्ञानप्रद और कल्याणकारी हैं। यह वैष्णवपुराणका साररूप कहा जाता है। उपयोगी अनुष्ठेय सामग्रीके रूपमें इसमें अनेक स्तोत्र, मन्त्र, कवच आदि भी दिये गये हैं। परलोक और पुनर्जन्माङ्क (सचित्र) [वर्ष ४३, सन् १९६९० ई०]—मनुष्यमात्रको मानव-चरित्रके पतनकारी आसुरी-सम्पदाके दोषोंसे सदा दूर रहने तथा परम विशुद्ध उज्ज्वल चरित्र होकर सर्वदा सत्कर्म करते रहनेकी शुभ प्रेरणाके साथ इसमें परलोक तथा पुनर्जन्मके रहस्यों और सिद्धान्तोंपर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। आत्म-कल्याणकामी पुरुषों तथा साधकमात्रके लिये इसका अध्ययन-अनुशीलन अति उपयोगी है। श्रीहनुमान-अङ्क (सचित्र) [वर्ष ४९, सन् १९७५ ई०]—इसमें श्रीहनुमान्जीका आद्योपान्त जीवन-चरित्र और श्रीरामभक्तिके प्रतापसे सदा अमर बने रहकर उनके द्वारा किये गये क्रिया-कलापोंका तात्त्विक और प्रामाणिक एवं सुरुचिपूर्ण चित्रण है। श्रीहनुमान्जीको प्रसन्न करनेवाले विविध स्तोत्र, ध्यान एवं पूजन-विधियाँ आदि साधनोपयोगी बहुमूल्य सामग्रीका भी इसमें उपयोगी संकलन है। अतः साधकोंके लिये यह उपादेय है। शिवोपासनाङ्क (सचित्र) [वर्ष ६७, सन् १९९३ ई०]—इसमें शिवतत्त्व एवं शिवोपासनापर तथ्यपूर्ण विवेचनके साथ, भगवान् विष्णुकी शिवोपासना, जगन्माता लक्ष्मीकी शिव-निष्ठा, भगवान् नृसिंहकी शिव-भक्ति और महर्षि वसिष्ठ, दुर्वासा, लोमश, महामुनि गर्ग तथा महर्षि वाल्मीकि आदिकी शिवशरणागति एवं भक्ति-विषयक सुन्दर आख्यान हैं तथा सुप्रसिद्ध शैव-तीर्थों एवं द्वादश ज्योतिर्लिङ्गोंके वर्णनसहित इसमें भारतके एवं विश्वके सुविख्यात शिवालयों (शिव-मन्दिरों) का सचित्र वर्णन भी उपलब्ध है। अनेकों शिवभक्तों और उपासकोंके रोचक, शिक्षाप्रद चरित्र इसके उल्लेखनीय आकर्षण हैं।

गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित तुलसी-साहित्य श्रीरामचरितमानस—मोटा टाइप, बृहदाकार, भाषाटीकासहित, सचित्र, सजिल्द श्रीरामचरितमानस—मोटा टाइप, भाषाटीकासहित, सचित्र, सजिल्द श्रीरामचरितमानस—सटीक, मझला साइज श्रीरामचरितमानस—बड़े अक्षरोंमें केवल मूल पाठ, सचित्र, सजिल्द श्रीरामचरितमानस—मूल, मझला साइज, सचित्र श्रीरामचरितमानस—मूल, गुटका सचित्र श्रीरामचरितमानस—बालकाण्ड सटीक श्रीरामचरितमानस—अयोध्याकाण्ड सटीक श्रीरामचरितमानस—अरण्यकाण्ड सटीक श्रीरामचरितमानस—किष्किन्धाकाण्ड सटीक श्रीरामचरितमानस—सुन्दरकाण्ड, मूल गुटका श्रीरामचरितमानस—सुन्दरकाण्ड सटीक श्रीरामचरितमानस—सुन्दरकाण्ड मूल, मोटा लाल रंगमें श्रीरामचरितमानस—लंकाकाण्ड सटीक श्रीरामचरितमानस—उत्तरकाण्ड सटीक मानस-रहस्य— मानस-शङ्का-समाधान विनयपत्रिका—सरल हिंदी भावार्थसहित, अनुवादक—श्रीहनुमानप्रसाद पोद्दार, गीतावली—सरल भावार्थसहित कवितावली—सरल भावार्थसहित दोहावली—सरल भावार्थसहित रामाज्ञा-प्रश्न—सरल भावार्थसहित जानकी-मङ्गल—सरल भावार्थसहित हनुमानबाहुक—सरल भावार्थसहित पार्वती-मङ्गल—सरल भावार्थसहित वैराग्य-संदीपनी—सरल भावार्थसहित बरवैरामायण—सरल भावार्थसहित

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॥ श्रीहरिः ॥ गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित उपनिषद् ईशादि नौ उपनिषद् अन्वय, हिंदी व्याख्यासहित ईशावास्योपनिषद् हिंदी अनुवाद शांकर भाष्यसहित केनोपनिषद् (,, ,,) कठोपनिषद् (,, ,,) माण्डूक्योपनिषद् (,, ,,) मुण्डकोपनिषद् (,, ,,) प्रश्नोपनिषद् (,, ,,) तैत्तिरीयोपनिषद् (,, ,,) ऐतरेयोपनिषद् (,, ,,) श्वेताश्वतरोपनिषद् (,, ,,)