श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र (लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक)
Srimad Bhagavad Gita Rahasya by Bal Gangadhar Tilak
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा
९०० गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र अनृत २४५ ,, मार्ग ३८१ अन्तरंग-परीक्षा ६ ,, पंथ ४८९ अन्नमयकोश २६३ आधिभौतिक विवेचन ६२ अपूर्व २७३ ,, मार्ग ३८१ अपूर्वता २१, ४६६ ,, पंथ ४८९ अभ्यास २१, ४६६ आधिभौतिक पक्ष ६४, १२८, १२९ अमृत २२४, ३६१, ३६२, ३६३, ३६५ आधिभौतिक सुखदुःख ९६ अमृतत्व ४८६, ४९४ आधिभौतिक सुखवाद ७६ अमृतान्न २९४ आध्यात्मिक विवेचन ६२ अमृताणी ३८६ ,, मार्ग ३८१ अर्थवाद २२, २३, ४६६ ,, पंथ ४८९ अर्हत ४८० ,, सुखदुःख ९६ अविद्या २१२, ३६१, ३६२, ३६३, आनंद २३२ ३६५, ५२९ आनंदमय २३२ अव्यक्त १६० आनंदमयकोश २३२ अशुभ कर्मोंकी भिन्नता २७५ आपद्धर्म ४९ अष्टधा प्रकृति १८३ आप्तवचन प्रमाण ४१० असत् १५६, २४७, २५२ आर्बिटर डिक्टा २३ टि. असंभूति ३६१ आरब्ध कार्य २७४ अस्तेय ३९ आरंभवाद १५२, २४२ अहंकार १७५ आशावादी ४९५ अहंकारबुद्धि ११३ आसुरी संपत्ति ११० अहिंसाधर्म ३१ इ अज्ञान २२३, २३०, २३८ इच्छा-स्वातंत्र्य २७०, २८१, २८२ आ इन्द्रिय १७६ आचार-तारतम्य ४८, ४९ ई आचार-संग्रह ४७३ ईश्वरकी शक्ति २६६ आत्म ५०१ ईसाई सिद्धान्त १५७, १५९ आत्म-संरक्षण ४१, ४७ ईसाई संन्यासमार्ग १६०, ७१० आत्मनिष्ठ बुद्धि १४२ उ आत्माकी स्वतंत्र प्रवृत्ति २८१ उदात्त अथवा प्रेमयुक्त स्वार्थ ८३, ८४ आधिदैविक सुखदुःख ९६ उत्क्रान्तितत्त्व १५५ आधिदैवत पक्ष ६२, ६३, १२६, १२९ उपक्रम २१, २२ आधिदैविक विवेचन ६३ उपपत्ति २२, २३, ४६६
पारिभाषिक शब्दोंकी सूचि ९०१ उपपादन २२ कर्मसंन्यास ३०३ उपसंहार २१, ४६६ कर्मेन्द्रियों के व्यवहार १३२, १३८ उपासना ३६२ कर्माकर्मविवेचन ५११ ऋ काम ११३, ३२८, ३२९, ३३० ऋक्छंद ५१७ कापिलसांख्य १५०, १५३, १५९, १६० ए काम्य ३५० एकान्तिक धर्म ९ कार्याकार्यनिर्णय ६४, ६८ एषणा ३१५, ३२३ काल २९९ एसि-एसिन पंथ ५८९ कृष्णमार्ग २९८ क कृष्णार्पण ११४ कर्तव्यमूढ २७, २८ कृष्णार्पणपूर्वक कर्म ४३४ कर्तव्यधर्ममोह २५, २६, २७, २८ क्रममुक्ति ३०० कर्म ५३, ५६, २५४, २५५, २६२ क्रियमाण २७४ कर्मजिज्ञासा ५२ ग कर्म (निवृत्त) ३५०, ३५८ गति अथवा स्मृति २९९ कर्म (प्रवृत्त) ३५०, ३५८ गीता (स्मृति) ५२७, ५३६, ५३७, ५५७ कर्मट ३९६ गीता-तात्पर्य १०, ११, १२, १४ कर्मत्याग (तामस) ३२१ गीता-धर्मकी चतुःसूत्री ११६ कर्मत्यागनिषेध ११५, ११६ गीता शब्दार्थ ३ कर्मत्याग (राजस) ३२१ गुण २०४, २४२ कर्मत्याग (सात्त्विक) ३२२ गुणपरिणामवाद अथवा गुणोत्कर्ष १७३, कर्मनिष्ठा ३०५, ४५६ २५१ कर्मप्रवाहके पर्याय शब्द ७६, ७७ ग्रंथ-तात्पर्य-निर्णय २१ कर्मभोग २७५ ग्रंथपरीक्षण ७ कर्ममुक्ति २७६ च कर्मयोग ५०, ११०, ३०३, ३०४, चतुर्विध पुरुषार्थ ६५ ३०५, ३५८, ४०१, ४०५, ४३६, चतुर्व्यूह ४५३, ४५५ ४३७, ४४६, ४५२, ४५३, ४६६, चातुर्वर्ण्य-धर्म ६६ ४६९, ४७३, ५०२, ५२९ चार्वाक-धर्म ७७, ७८ कर्मयोग (गीताका) ३०८ चित् २३०, २४४ कर्मयोगशास्त्र ५३, ६१, ४७६ चित्त १३६ कर्मयोगशास्त्रका लौकिक नाम ४७६ चेतना १४४ कर्मयोगी स्थितप्रज्ञ २७५ चोदना ७०, ७१ कर्मविपाक २६४ चोदनाधर्म ७०, ७१
९०२ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र ज दैवी माया २८० जडाद्वैत १६२ द्वैताद्वैती सम्प्रदाय १७ जय ३०, ५२५ ध जीव १७९, २११ धर्म (अनेक धर्म) ८९, ५०४ जीवन्मुक्त ३०२ धर्म (उपनिषद्) ५७४ जीवात्मा २६८ धर्म (गार्हस्थ्य) ५७७ जैसेको तैसा ३१५, ३९८, ४०३ धर्म (जैन) ५७०, ५८६ ट धर्म (देवता) १२७ टीकाएँ १२ धर्म (पारलौकिक) ६५ त धर्म (प्राकृत) तत् २४७ धर्म (मीमांसकोंका अर्थ) तत्त्वमसि – जो पिण्डमें (देहमें) है, वह धर्म (यहूदी) ५८९ ब्रह्माण्ड में (सृष्टिमें) है, १४ २२८ धर्म (व्यावहारिक अर्थ) ६९ तन्मात्राएँ १७७ धर्म (सामाजिक अर्थ) तप २५७, २९४ धर्मप्रवचन ६५ तम १५८ धर्मशास्त्र ५९ तामसबुद्धि १४१ धर्माधर्म ३१, ३२ तीसरा मार्ग ३०० धर्माधर्मनिरूपण ५०८ तुष्टि ११९ धर्माधर्मनिर्णयके नियम ७१, ७२ तृष्णा १०१ धातु ५६३ त्याग ३५०, ४६४ धारणाधर्म ६६, ६७ त्रयीधर्म २९२ न त्रयीविद्या २९२ नानात्व १५८ त्रिगुणातीत १६८, २५१, ३७५, ४६३ नामरूप २१७ ४९२ नारायणीय धर्म (सात्त्वत-एकान्तिक- त्रिगुणात्मक प्रकृति २६५ भागवत) ३४२, ५१५, ५४५, त्रिगुणोंकी साम्यावस्था १५८, १५९ ५४८, ५६० त्रिवृत्करण १८६ नासदीय सूक्त २५२ द नित्यसंन्यासी ३५० दातव्य ३९४ निगंशावादी ४९५ दुःख ९६ निर्गुण २४३ दुःखनिवारक कर्ममार्ग ७०७ निर्गुणपरब्रह्म ४११ देवयान २९७, २९८, २९९, ३०० निर्गुणभवित १६८ दैव २७२, ३२८ निवृत्ति ३५८
पारिभाषिक शब्दोंकी सूची ९०३ निवृत्तिमार्ग १३ प्रकृति (तम) १५८, १५९, २६५ निर्वाण ५७७ प्रकृति (त्रिगुणात्मक) २६५ निर्वाणस्थिति २३३ प्रकृति-विकृति १८१ निर्वाणकी परमशांति ११९ प्रतीक २०८, ४२०, ४२१ निर्वैर ३९३, ३९४, ३९६ प्रवृत्तिस्वातंत्य २७१, २८३ निष्काम-गीतार्म ७७ प्रस्थानत्रय १२ निष्ठा २१६, २१७, ४५६ प्राण अर्थात् इंद्रियां १७९, १८० नीतिधर्म ५११ प्रारब्ध २७४, २७५ नीतिशास्त्र ४९ प्रारंभ ४६६ नैष्कर्म्य २७६ प्रेय ९३, १२० नैष्कर्म्यसिद्धि २७६ फ प फल २१, ४६७ परमाणुवाद (कणाद) १५१, १५२ फलाशा ११३, ३२७ परमात्मा २०२, ४८६ फलाशात्याग ४३३ परमार्थ ४०५ ब परमेश्वरका अपरस्वरूप १८३ बहिरंगपरीक्षण ७, ८ परार्थप्रधान पक्ष ९०, ९१ बुद्धि १३०, १६६, ३७७, ४७७, ४७८ पंचमहाभूत १७७, १७८, १८७ ४८५, ४८६, ४८९ पंचरात्रधर्म ५४५, ५४७ बुद्धि (आत्मनिष्ठ) १४३ पंचीकरण १८४ ,, (सात्विक) १४० पातञ्जलयोग ५७३ ,, (तामस) १४१ पिण्डज्ञान १६८ बुद्धि (राजस) १४१ पितृयान २९७, २९८, २९९, ३०० ,, (वासनात्मक) १३८, १३९, ४०७ पुरुष १६३, १६५ ,, (व्यवसायात्मक) १३५, ४७१ पुरुषार्थ ५४, ६५ ,, (सदसद्विवेक) १२५ पुरुषोत्तम २०१ बुद्धिके कार्य १३८, १४० पुष्टि १७, १२०, १२१ बुद्धि के नाम १७४ पुष्टिमार्ग १६ बुद्धिभेद ३३३ पोषण १६ बुद्धियोग ३८२ पौराणिक कर्म ५५ बौद्धसिद्धान्त ५८२ प्रकृति (अष्टधा) १८३ ब्रह्म २१३ प्रकृति (मूल) १८१ ब्रह्मनिर्देश २४५ प्रकृति (सत्त्व) १५८, १५९, २६५ ब्रह्मनिर्वाण मोक्ष २५० प्रकृति (रज) १५८, १५९, २६५ ब्रह्मसूत्र १२
९०४ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र ब्रह्मसृष्टि २६२ मूलप्रकृति १८१ ब्रह्मार्पण ११४, ४८८ मृत्यु ३६२ ब्रह्मार्पणपूर्वक कर्म ४२५ मोह २२१, २३८ भ मोक्ष (धर्म) ६५ भक्ति ४११, ५३० मोक्ष (ब्रह्मनिर्वाण) २५०, ४६७, ४९१ भक्तिमार्ग ६५, ४१४, ४१५, ५२९, मोक्ष (सांख्योका अर्थ) १६५ ४६१, ४६२, ५३० य भक्तियोग ४५५ यज्ञ २९२, ४७० भग १२० योग ५६, ५७ भागवत ३४४ योग (गीतार्थ) ६०, ३०७, ३४३, भागवतधर्म ३४२, ४४८, ४९९ ३५२, ४४३, ४४९, ४५५, ४५६ म योग (धात्वर्थ) ५६ मन १३३ योगभ्रष्ट २८६ मनके कार्य १३६, १६० योगविधि १११ मन (व्याकरणात्मक) १३५ योगशास्त्र ६१, ४७३ मनःपूत १२७ र मनुष्यत्व ९२ रज १५८ मनोदेवता १२५, १२७ राग ३२९ मनोमय कोश २६४ राजगुह्य ४१८, ४२०, ४६१ मरणका मरण २३४, ५३६ राजसबुद्धि १४१ महाभारत ३०, ५२४ ल महायान पथ ५८२, ५८३ लिङ्ग किंवा सूक्ष्मशरीर २६३ मात्रा १०० लोकसंग्रह ३३० से ३३८, ३६२, ४०३ मानवधर्म ५०५ व माया १६१, २११, २२१, २२५, २५३ २६४, २६६, ५२९ वर्णाश्रमधर्म ५०४ माया (देवी) २४० वस्तुतत्त्व २१८ टी., २२०, २४४ मायासृष्टि २६२ वासनात्मकबुद्धि १३८, ३८०, ४४९ मिथ्या २१८ वासनास्वातंत्र्य २९१ मीमांसक-मार्ग २९२, ५४२ वासुदेव परमात्मा २०७ मीमांसा अथवा मीमांसा सूत्र २९२ विकल्प १३४ मुक्त १६६, ४६३ विकृति १५८ मुक्ति (क्रम) ३०० विघस २७१ मुक्ति (विदेह) ३०० विदेहमुक्त ३००
पारिभाषिक शब्दोंकी सूचि ९०५ विद्या २०८, २७७, २७८, ३६१, ३६२, सत्य ३३, २१८, २१९, २२४ ३६३, ३६४, ४१८ सत्यानृतविवेक ३५, ३६ विनाश ३४३ सत्त्व १५८ विवर्तवाद २४२, २४३ सदसद्विवेकदेवतापक्ष १२६, १३१ विशिष्टाद्वैत १६, १८ सदसद्विवेकबुद्धि १२५ विशेष (पंचमहाभूत) १७८, १८२ समता ३९५ वृत्ति १०१ समत्वबुद्धियोग ३८२ वेदान्ती २९३ संकल्प १३४ वेदान्ती (कर्मयोगी) ३५३ सर्वभूतहित ८४, ८६ वेदान्ती (संन्यासी) ३५३ सग १३३, ३२८, ३३० वैदिकधर्म ५८० संग्रह (कोशार्थ) ३३१ वैष्णव पंथ १६, १७ संग्रह (राष्ट्रोंका) ३३१ व्यक्त १५९ संघात १४७ व्यवसाय १३५ संचित २७३ व्यवसायात्मक बुद्धि १३५ संन्यास ३०४, ३०६, ३५०, ४३६, व्याकरणात्मक मन १३५ ४४८, ४५६, ४६४, ५०० व्यावहारिक धर्मनीति ६५ संन्यासनिष्ठा १४ श संन्यासी ३०७ शारीर आत्मा २४८ संन्यासी स्थितप्रज्ञ ३७४ शारीरक सूत्र १२ संपत् (आसुरी) ११० शास्त्र ७६, ४७३ संभूति ३६१ शास्त्रीय प्रतिपादन पंथ ६२ संसार २६६ शांति ११९, १२० सात्वत धर्म ९ शुक्लमार्ग २९८ सात्त्विक बुद्धि १४०, १४१ शुद्ध द्वैत १८ साम्य ४७२ शुद्ध वासना ३७१ सांख्य (दो अर्थ) १५३ शैवपंथ १६ सांख्य (धात्वर्थ) १७५ श्रद्धा ४२३ सांख्य (ज्ञानी) ३०४, ३५४, ३६५, श्रेय ९३, ११८ ४४८, ४५०, ४५६, ४६५ स सिद्धावस्था २५१ सच्चा (पूरा) ज्ञान २१५, २५१ सुखदुःख ९६ सत् २२७, २४६, २४७, २५३ ,, (आध्यात्मिक) १६१ सत्कार्यवाद १४६, २३८, २४५ ,, (आधिदैविक) १६१ सत्तासामान्यत्व २१८ ,, (आधिभौतिक) १६१
९०६ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र सुखवाद (आधिभौतिक) ७६ विचार १४३, १५० सूक्ष्म १६० क्षेत्रक्षेत्रज्ञविचार १३२, १४३ सूक्ष्मशरीर २६३ क्षेत्रज्ञ (आत्मा) १४९ स्थितप्रज्ञ ३७६, ४६३ ज्ञ सेश्वर नैयायिक १५२ ज्ञ १६३ स्थूल १६० ज्ञान २०२, २७८, २७९, २८० स्मार्त ३४४, ३४५ ज्ञान और विज्ञान ३१३, ४६१, ४६२, स्मार्त कर्म ५४ ४६३ स्मार्त यज्ञ ५४ ज्ञानकर्मसमुच्चयपक्ष ४३२ स्वधर्म ४९७ ज्ञानकांड २१२ स्वार्थ (सिज्विक-हेल्वेशियस) ८२, ८८ ज्ञानकी पूर्णावस्था २३०, २३१ स्वार्थ (केवल, चार्वाक) ७७, ५८, ७९ ज्ञाननिष्ठा १४, ३०४, ४१३, ४५६ स्वार्थ (दूरदर्शी, हॉब्स) ८०, ८१ ज्ञान-भक्तियुक्त कर्मयोग ४७४ स्वार्थ (उदात्त-भूतदयासे प्रेमयुक्त) ८३ ज्ञानमय कोश २६३ ह ज्ञानमार्ग ४१४, ४१५, ४२९, ४६२ हीनयान ५८ ज्ञानी २९७ क्ष ज्ञानेंद्रियोका व्यवहार १३३, १३८ क्षराक्षरविचार अथवा व्यक्ताव्यक्त-
हिंदू धर्म-ग्रंथोंका संक्षिप्त परिचय हिंदू धर्मके मूलभूत ग्रंथोंमें, महत्त्व और कालानुक्रमकी दृष्टिसे, वेद श्रेष्ठ और आद्य ग्रंथ हैं, और संहिता, ब्राह्मण तथा उपनिषदोंका उन्हींमें समावेश किया जाता है। यज्ञयागादिके कर्मकाण्ड और परमार्थ-विचारोंके ज्ञानकाण्ड, इन दोनोंका मूल उक्त त्रयीमें है। तथापि ज्ञानकाण्डके मूलभूत आधार-ग्रंथ उपनिषद् हैं। हिंदू- धर्मके सामाजिक व्यवहारोंका नियंत्रण स्मृतिग्रंथोंके द्वारा किया जाता है; परंतु उनका मूल आधार गृह्यसूत्र हैं। गृह्यसूत्रोंके अतिरिक्त औरभी अनेक सूत्र-ग्रंथ हैं; परंतु उनका संबंध धर्मव्यवहारोंसे नहीं है, बल्कि केवल विश्वके रहस्यका उद्- घाटन करनेवाली विविध विचार-परंपराओंसे है। इन विविध विचार-परंपराओं- कोही षड्दर्शन कहते हैं। गौतमके न्यायसूत्र, सांख्यसूत्र, वैशेषिकसूत्र, जैमिनीके पूर्वमीमांसासूत्र, बादरायणके वेदान्त अथवा ब्रह्मसूत्र, पतंजलीके योगसूत्र इत्यादिका षड्दर्शनमें समावेश होता है; परंतु षड्दर्शनके सिवाभी अन्य अनेक सूत्र-ग्रंथ हैं। उन्हींमें पाणिनीसूत्र, शाण्डिल्यसूत्र, नारदसूत्र इत्यादिकी गणना होती है। प्राचीन मूर्तिपूजारहित और निर्मल पारमार्थिक स्वरूपके वैदिक धर्ममें परिवर्तन होकर उपास्य देवताओंको माननेकी प्रवृत्ति जारी होनेके बाद पुराणोंका जन्म हुआ। महाभारत और रामायण पुराण नहीं, किंतु इतिहास हैं। पुराणोंमेंही गीताओंका समावेश होता है। गीतारहस्य-ग्रंथमें इस विषयका प्रसंगानुसार ऊहापोह किया गया है; परंतु पाठकोंको उसका एकत्र ज्ञान करा देनेके उद्देश्यसे तालिकाके रूपमें निम्नलिखित जानकारी दी जाती है। ( १ ) वेद अथवा श्रुतिग्रंथ :- वेद :- अथर्व, ऋग्वेद । संहिता :- ( ऋचाओंका अथवा मंत्रोंका संग्रह । कर्म अथवा यज्ञकांड ) तैत्तिरीय, मनु, वाजसनेयी, सूत । ब्राह्मण :- ( आरण्यक । कर्म अथवा यज्ञकांड ) आर्षेय, ऐतरेय, कौषिक, कौषीतकी, तैत्तिरीय, शतपथ । उपनिषद् :- ( ज्ञानकांड) अमृतबिंदु, ईश ( ईशावास्य), ऐतरेय, कठ, केन, कैवल्य, कौषीतकी ( कौ. ब्राह्मण ), गर्भ, गोपालतापनी, छांदोग्य, छुरिका, जाबाल-संन्यास, तैत्तिरीय, ध्यानबिंदु, नारायणीय, नृसिंहोत्तरतापनीय, प्रश्न, बृहदारण्यक, महानारायण, मांडूक्य, मुंडक ( मुंड ), मैन्नी ( मैत्रा- यणी ), योगतत्त्व, रामतापनी, वज्रसूची, श्वेताश्वतर, सर्व । ( २ ) शास्त्र :- १. धर्मग्रंथ -- गृह्य-सूत्र, स्मृति-ग्रंथ ( मनु, याज्ञवल्क्य और हारीत ) ।
९०८ गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र २. सूत्र ( षड्दर्शन ) :- जैमिनी ( मीमांसा अथवा पूर्वमीमांसा ), ब्रह्म ( वेदान्त, शारीरक अथवा उत्तर-मीमांसा ), न्याय ( गौतम ), योग ( पातंजल ), सांख्य ( सांख्यकारिका ), वैशेषिक । ( ३ ) अन्य सूत्र :- आपस्तंब, आश्वलायन, गृह्यशेष, तैत्तिरीय, नारद, नारद- पंचरात्र, बोधायनधर्म, बोधायनगृह्य, शांडिल्य । ( ४ ) व्याकरण :- पाणिनी । ( ५ ) इतिहास :- रामायण, महाभारत ( हरिवंश ) । ( ६ ) पुराण :- अष्टादश-महापुराण, अष्टादश-उपपुराण और गीताएँ । अष्टादश-पुराण :- अग्नि, कूर्म, गणेश, गरुड, गौडीय पद्मोत्तर, देवी-भागवत, नारद, नृसिंह, पद्म, ब्रह्मांड, भागवत, मत्स्य, मार्कंडेय, लिंग, वराह, विष्णु, स्कंद, हरिवंश । गीताएँ :- अवधूत, अष्टावक्र, ईश्वर, उत्तर, कपिल, गणेश, देवी, पराशर, पांडव, पिंगल, ब्रह्म, बोध्य, भिक्षु, मंकि, यम, राम, विचित्र्यु, व्यास, वृत्त, शिव, शंपाक, सूत, सूर्य, हरि, हंस, हारीत । ( ७ ) पाली-ग्रंथ :- अमितायुसुत्त, उदान, चुल्लवग्ग, तारानाथ, तेविज्जसुत्त ( तैविद्यसूत्र ), थेरगाथा, दशरथजातक, दीपवंस, धम्मपद, ब्रह्मजालसुत्त, ब्राह्मणधम्मिकमुत्त, महापरिनिब्बाणसुत्त, महावंस, महावग्ग, मिलिंदप्रश्न, वत्थुगाथा, सद्धर्मपुंडरीक, सुत्तनिपात, सेल्लसुत्त, सब्बासवसुत्त ।
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Central Archaeological Library, NEW DELHI. 70833 Call No. 181.41 Til Author—Tilak, Bal Gangadhar Srimad Bhagavad-Gita- Title—rahasya athava Karma- yoga-shastra. Borrower No. Date of Issue Date of Return