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आयुर्वेद का कमाल (रोगों के निदान में)

Ayurved Ka Kamaal (Rogon Ke Nidan Mein)

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri Edition · Sahib Bandgi Sant Ashram Ranjri, Jammu (उद्गम)

DevanagariHindipublished112 पृष्ठ

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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विष खा लिया है

लहसुन का कमाल

जितना अधिक हो सके, लहसुन खिलाएँ ताकि उल्टी हो सके।

हींग का कमाल

हींग को पानी में घोल पर पिलाएँ।

अन्य और सहायक उपचार

  • ▣ दूध में 225 ग्राम गाय का या कोई भी देसी घी डालकर पिला दें।

वीर्य की कमी है

अदरक का कमाल

  • ▣ 5 ग्राम अदरक को पीसकर, 5 ग्राम शहद, 5 ग्राम सफेद प्याज का रस और 5 ग्राम देसी घी में मिलाकर सुबह खाली पेट चाटा करें। बहुत ही लाभकारी है।

अन्य और सहायक उपचार

  • ▣ उड़द के लड्डू दूध के साथ खाएँ।

वीर्य पतला है

बबूल का कमाल

बबूल की फली (कच्ची), शतावर, मौलिसरी की छाल, मोचरस-सबको कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 3 ग्राम यह चूर्ण रोज खाएँ।

जामुन का कमाल

जामुन की गुठली को पीसकर चूर्ण बना लें। 6 ग्राम यह चूर्ण दूध के साथ लें।

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साहिब बन्दगी

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ नारियल का सेवन करें।

शरीर से दुर्गंध आती है

बेल का कमाल

बेल के पत्तों का रस मलें।

श्वेत प्रदर है

गूलर का कमाल

25 ग्राम कच्चे गूलर को पीसकर उसमें बराबर की मात्रा में ही मिश्री और शहद मिलाकर खाने के बाद गाय का एक कप दूध पी लें।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ इमली के पत्तों के रस का सेवन करें।
  • ❑ फालसे का सेवन करें।
  • ❑ चुकन्दर का रस निलाकर उसमें 3-4 गुणा गाजर का रस मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • ❑ रोज 2 पके हुए केले खाएँ।

सन्निपात है

थूहर का कमाल

थूहर का दूध निकालकर उसमें पीपल को डाल दें। ढाई दिन तक भिगोने के बाद निकालकर सुखा लें। अब अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम यह चूर्ण डेढ़ हफ्ता सेवन करें।

नागरमोथा का कमाल

नागरमोथा, बड़ी हर की छाल, सोंठ-सबको पीसकर चूर्ण बना

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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लें। 5 ग्राम यह चूर्ण हफ्ता-भर खिलाएँ।

सफेद कोढ़ है

अकरकरा का कमाल

अकरकरा के पत्तों का रस निकालकर कोढ़ वाली जगह लगाएँ।

अकरकरा का कमाल

अकरकरा और कालेदाने-दोनों को पीसकर कोढ़ वाली जगह लेप करना बड़ा ही लाभकारी सिद्ध होता है।

नीम का कमाल

नीम की पत्ती, फूल और निबौली-सबको पीसकर शरबत बनाकर पिएँ।

सफेद दारा हैं

काले चने का कमाल

सुबह 8-9 बजे 30 ग्राम काले चनों में 12 ग्राम त्रिफला चूर्ण मिलाकर पानी में भिगोने के लिए रख दें। शाम को 8-9 बजे कोई साफ कपड़ा लें और उसमें डालकर बाँध दें। सुबह खाली पेट खूब चबा-चबाकर खाएँ।

सामान्य ज्वर है

चिरायता का कमाल

चिरायता, नागरमोथा, सोंठ, नीम की छाल, निशोथ, पीपली, कुटकी, बायविडंग-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम यह चूर्ण रोज पानी के साथ लें।

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साहिब बन्दगी

करौंदे का कमाल

करौंदे की जड़ को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े का रोगी के शरीर पर लेप करें।

बेल का कमाल

बेल की जड़ का काढ़ा बनाकर पिलाएँ।

अगस्त का कमाल

अगस्त के पत्तों का रस निकालकर (हाथों से ही रगड़कर) कुछ देर तक सूँघें। यह काम दिन में तीन बार कर लें। बहुत ही लाभदायक प्रयोग है।

तुलसी का कमाल

60 ग्राम तुलसी के पत्ते, 10 ग्राम काली मिर्च, 10 ग्राम लौंग-सबको कूट-पीसकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें। दिन में दो बार यह गोली पानी के साथ लें।

अन्य और सहायक उपचार

□ पिसे हुए एक लौंग को गर्म पानी के साथ रोगी को 2 बार दें।

सिर में जुएँ हैं

सीताफल का कमाल

सीताफल के बीज का तेल बालों की जड़ों में मलें।

नींबू का कमाल

नींबू के रस से सिर की मालिश करें। यह काम नहाने के आधा घण्टा पहले करें।

बथुए का कमाल

बथुए के साग को उबालकर उस पानी से सिर धोना बहुत

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में लाभकारी रहता है।

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सिर में दर्द है

अगस्त का कमाल

अगस्त वृक्ष के पत्तों के रस की 2-2 बूँद नाक के दोनों नथनों में डालें। बड़ा लाभकारी है।

छोटी इलायची का कमाल

छोटी इलायची को पीसकर सिर पर लेप करें।

नीम का कमाल

नीम की छाल, हरड, गुरुच, योगराज गुग्गुल, बहेड़ा, चिरायता, हल्दी और आँवला-सबको मिलाकर काढ़ा बना लें और फिर उसमें गुड़ मिलाकर सेवन करें।

नींबू का कमाल

नींबू की पत्तियों को घोंट रस निकालकर सूँघें और फिर उसके बाद चाय में एक नींबू निचोड़कर पी लें। सुबह की चाय में ही यह प्रयोग करें तो पुराने सिर दर्द में बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो।

अंजीर का कमाल

अंजीर का सेवन करने से सिर का दर्द दूर होता है।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ लौंग को पीसकर उसका लेप सिर पर करना चाहिए।
  • ❑ मिट्टी को गीला करके उसकी पट्टी बनाकर सिर पर रखें।
  • ❑ चाय में नींबू का रस डालकर पीने के बाद कुछ देर के लिए लेट जाएँ। ध्यान रहे कि चाय में दूध न डालें।

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साहिब बन्द्शी

सुनाई कम देता है

लहसुन का कमाल

7 लहसुन की कलियों को 60 ग्राम तिली के तेल में डालकर तड़का दें। फिर उस तेल को संभालकर किसी शीशी में रख लें। 2 - 3 बूँद रोज़ाना इस तेल को कानों में डालना बड़ा ही लाभकारी रहता है।

सूजन है

मुलहठी का कमाल

मुलहठी, काली मिर्च-दोनों को पीसकर उसमें मक्खन और भैंस का दूध मिलाकर लेप करें।

सूजाक है

भिण्डी का कमाल

मिश्री के साथ कच्ची भिण्डी खाना बड़ा लाभदायक रहता है।

जटासंकरी का कमाल

जटासंकरी की गाँठ को छीलकर उसे टुकड़ों में बदल दें। अब इन टुकड़ों को सुखा लें। सुखाने के बाद 15 ग्राम उन टुकड़ों को दूध के साथ सेवन करें। यह दवा बड़ी हितकारी है।

अन्य सहायक उपचार

  • ❑ सेमल की जड़ का रस निकालकर 20 ग्राम की मात्रा में नित्य सेवन करें।
  • ❑ पिप्सी हुई फिटकरी को थोड़े से जल में घोलकर सेवन किया करें।
  • ❑ 10 ग्राम पिप्सी हुई हल्दी जल से साथ लें। यह दवा आप दिन

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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में 2-3 बार ले सकते हैं।

  • ▣ 15 ग्राम सत्यनाशी की जड़ की छाल को पीसकर पानी के साथ सेवन करें।

स्तनों में दूध की कमी है

जीरे का कमाल

  • ▣ सफेद जीरा, मिश्री और सौंफ-सबको अलग-अलग चूर्ण बनाकर आपस में मिला लें। आधा चम्मच (बड़ा) यह चूर्ण दूध के साथ सुबह-शाम लें।
  • ▣ जीरे में समभाग गुड़ मिलाकर छोटी-2 गोलियाँ बना लें। सुबह-शाम 3-3 गोलियाँ पानी के साथ लें।

अन्य और सहायक उपचार

  • ▣ गाजर का रस पीएँ।
  • ▣ कच्ची मूँगफली का सेवन बहुत लाभकारी रहता है।
  • ▣ अरबी की सब्जी बनाकर खाना लाभकारी है।

स्वप्रदोष है

जामुन का कमाल

जामुन की गुठली को पीसकर चूर्ण कर लें। 5 ग्राम यह चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ लें।

गुलाब का कमाल

गुलाब के 5 फूल तोड़ लाएँ। अब मिश्री को पीसकर उन पर नमक की तरह डालें और चबा-चबाकर खाएँ। इस दवा के बाद दूध का सेवन जरूर करें।

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साहिब बन्दशी

हल्दी का कमाल

6 ग्राम त्रिफला और ढाई ग्राम कच्ची हल्दी को पीसकर कपड़े से छान लें। 4 ग्राम यह चूर्ण पानी के साथ लें। यह दवा दिन में दो बार जरूर लें।

हाथी पाँव है

तुलसी का कमाल

□ रोज सुबह तुलसी और नीम के 11-11 पत्ते खाएँ।

हिचकियाँ आ रही हैं

अदरक का कमाल

ताजे अदरक को काटकर चूसना बड़ा ही लाभकारी है।

ग्वारपाठे का कमाल

ग्वारपाठे के रस में सोंठ डालकर सेवन करें।

नींबू का कमाल

एक चम्मच शहद में इतना ही नींबू का रस और थोड़ा-सा सेंधा नमक डालकर सेवन करें।

अन्य और सहायक उपचार

□ चम्मच-भर देसी घी को गर्म करके पी लो।

हिस्टीरिया है

लहसुन का कमाल

जब भी बेहोशी आए तो लहसुन का रस नाक में टपकाएँ।

हींग का कमाल

हींग, नींबू, जीरा, पोदीना, नमक-थोड़ी-2 मात्रा में लेकर गर्म

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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पानी में डालकर पीएँ।

असगन्ध का कमाल

3 ग्राम असगन्ध, 3 ग्राम खुरासानी और 13 ग्राम जटामासी लेकर 125 ग्राम पानी में पका लें। जब पानी आधा रह जाए तो उतारकर छान लें। इस दवा का सेवन बड़ा ही लाभकारी है।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ फलों का सेवन करें।
  • ❑ दौरा आने पर हींग सुँघाएँ।

हृदय रोग है

अडूसे का कमाल

अडूसे के छोटे पेड़ को जड़ और पत्तों सहित उखाड़कर पानी से साफ कर लें और फिर कुछ देर छाया में सुखा लें। अब अच्छी तरह से पीसकर छान लें। यह चूर्ण (हथेली-भर) रोज़ खाना बहुत लाभदायक सिद्ध होता है।

पीपल का कमाल

पीपल, कचूर, हर की छाल, सोंठ, पुष्करमूल, बच और राक्षा सबको समान मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस लें। यह चूर्ण आपको रोज़ दूध के साथ लेना है। इसे जल के साथ भी लिया जा सकता है।

आँवले का कमाल

सूखे आँवलों को कूट-पीस लें। फिर मिश्री मिलाकर रख लें। दवा तैयार है। ढाई चम्मच यह दवा रोज़ सुबह खाली पेट पानी के साथ लें।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ नारंगी का सेवन करें।

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साहिब बन्दगी

  • ❑ मौसमी का सेवन करें।
  • ❑ अंगूर खाएँ और उसका रस निकालकर पिएँ।
  • ❑ पिसे आँवले को गाय के दूध के साथ सेवन करें।

हैजा है

बेल का कमाल

बेल और सोंठ दोनों का काढ़ा बनाकर रोगी को दें।

छोटी इलायची का कमाल

गुलाबजल लेकर उसमें छोटी इलायची का 20 ग्राम छिलका डाल दें। अब इसे उबालने के लिए आग पर रखें और जब गुलाबजल लगभग आधा रह जाए तो उतार लें। यह दवा रोगी को पिलाएँ।

नीम का कमाल

  • ❑ नीम की 22 पत्तियाँ लेकर पीस लें। अब आधा गिलास पानी में इसे मिलाकर रोगी को पिलाएँ।

विषधारियों ने काटा है

विषधारियों ने काटा है

कनखजूरा चिपका है

मूली का कमाल

कनखजूरे पर सरसों का तेल डालना ठीक रहता है। ऊपर से यदि मूली के पत्तों का रस भी डाल दिया जाए तो कनखजूरे के पास उतर जाने के सिवा कोई चारा नहीं रहता है। पर यह सब करने से पहले आपको एक काम कर लेना होगा और वो यह कि जहाँ कनखजूरा चिपका हो, उस जगह के चारों तरफ गीला गूँथा हुआ आटा लगा दें। यह इसलिए कि न तो कनखजूरा आगे बढ़ने पाए और न ही उसपर डाली गयी दवा उसके स्पर्श से दूसरों अंगों तक न जाने पाए।

कुत्ते ने काट लिया है

साबुन का कमाल

कुत्ते ने काट लिया हो तो उस जगह को साबुन से अच्छी तरह धो लें।

छोटे-2 कीड़े-मकौड़े, मच्छर आदि ने काटा है

नींबू का कमाल

काटे गये स्थान पर नींबू का रस मलें।

पागल कुत्ते ने काटा है

लाल मिर्च का कमाल

लाल मिर्च पीसकर उसमें सरसों का तेल मिलाएँ और काटे स्थान पर लेप कर दें।

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साहिब बन्दगी

बंदर ने काटा है

शहद का कमाल

प्राथमिक चिकित्सा के रूप में शहद में गोबर मिलाकर लगाएँ।

बिच्छू ने काटा है

लाल मिर्च का कमाल

लाल मिर्च पीसकर काटे स्थान पर लगाएँ।

नीम का कमाल

नीम के पत्ते मसलकर लगाएँ।

लौकी का कमाल

लौकी को काटकर रस निकालकर लें। लौकी को पीसकर उस स्थान पर लेप कर दें और निकाला हुआ रस रोगी को पिला दें।

फिटकरी का कमाल

फिटकरी को पत्थर पर पानी के साथ घिसकर लेप बनाकर लगाएँ।

अन्य और सहायक उपचार

❑ बिच्छू काट लेने पर सबसे पहले तुरंत नहा लेना दर्द को ऊपर चढ़ने से रोकता है।

❑ लहसुन और अमचूर को समान मात्रा में पीसकर मिला लें। इस दवा को काटे हुए स्थान पर लगाएँ।

भौरै ने काटा है

तुलसी का कमाल

तुलसी के पत्तों को पीसकर नमक मिलाकर लेप करें।

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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मकड़ी ने काटा है

आम का कमाल

अमचूर को पानी के साथ घिसकर लेप बना लें। यह लेप काटे हुए स्थान पर लगाएँ।

मधुमक्खी ने काटा है

शहद का कमाल

  • ❑ शहद में माचिस का मसाला मिलाकर लगाएँ।
  • ❑ शहद में आक का दूध मिलाकर लगाएँ।

साँप ने काटा है

अंकोल का कमाल

अंकोल की जड़ को अच्छी तरह से पीस रस निकालकर पिलाएँ।

बेल का कमाल

बेल और कैथ-दोनों की जड़ को पानी में पीसकर पिलाएँ। बड़ी लाभकारी है।

करौंदे का कमाल

करौंदे की जड़ को पानी में उबालकर पिलाएँ।

अन्य और सहायक उपचार

  • ❑ 18 ग्राम प्याज के रस में इतना ही सरसों का तेल मिलाकर रोगी को पिलाएँ। पौन घण्टे बाद फिर यही दवा दें। फिर पौन घण्टे बाद एक और दवा दें।
  • ❑ नीम की पत्तियाँ खिलाएँ।
  • ❑ विषखपरा का रस पिलाएँ।
  • ❑ पानी में फिटकरी घोल कर पिलाएँ।

कुछ ध्यान देने योग्य बातें

कुछ ध्यान देने योग्य बातें

मल-मूत्र के विसर्जन में ध्यान दें

  • ▣ मल-मूत्र को अधिक देर तक रोके रखना रोगों को आमंत्रित करना है।
  • ▣ उकडू बैठकर मल-विसर्जन करें। इससे मल अच्छी तरह विसर्जित होता है।

भोजन करने में ध्यान दें

  • ▣ जब मल-मूत्र का वेग हो तब भोजन नहीं करना चाहिए।
  • ▣ भोजन करते समय मौन रहें।
  • ▣ भोजन करते समय पानी 1-2 घूँट करके ही पिएँ। बहुत अधिक पानी भोजन के साथ मत लें। भोजन के साथ घूँट-2 पानी अमृत समान है, लेकिन बहुत अधिक पानी ठीक नहीं। भोजन के तुरंत बाद पानी मत पिएँ, यह विष समान है।
  • ▣ एक बार भोजन करके दूसरी बार भोजन करने में पाँच-छः घण्टे का अंतर जरूर रखें।
  • ▣ भोजन को चबा-चबाकर तरल बनाकर खाएँ।
  • ▣ हो सके तो भोजन खुली-ताजी-स्वच्छ हवा और धूप में खाएँ। पर यदि कमरे में खाना हो तो ताजी हवा के आने का मार्ग बंद न करें।
  • ▣ भोजन का समय भी निश्चित होना चाहिए। असमय भोजन करना भी हानिकारक हो जाता है। यदि आप शाम को 6 बजे भोजन करते हैं तो ज्यादा-से-ज्यादा साढ़े छः ही होने दें।
  • ▣ सुबह पाचन-शक्ति तेज होती है, फिर यह शाम तक लगातार

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आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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धीरे-धीरे कम होती जाती है, इसलिए भोजन का अधिक अंश सुबह ही कर लें। शाम को कम भोजन करना चाहिए और रात को सोते समय तो बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।

▣ शाम का भोजन सोने से कम-से-कम दो घण्टा पहले होना चाहिए। ऐसे में नींद भी अच्छी आयेगी।

▣ बहुत गर्म और बहुत ठण्डे खाद्य पदार्थ के सेवन से बचें।

▣ चखो पर चरो मत, चरो तो फरो, न फरो तो मरो। किसी ने कितना प्यारा कहा है। भोजन के मामले में अल्प आहारी बनें। यानी कुछ भी खाना हो, बहुत ज्यादा नहीं खाएँ। यदि ज्यादा खा लिया तो फिर सैर कर लो। यदि खुराक बहुत है और सैर भी नहीं करते हो तो जल्दी मरने के लिए तैयार रहो।

पानी पीने में ध्यान दें

▣ खड़े होकर पानी मत पिएँ।

▣ साधारणतया हररोज दो लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।

▣ सुबह उठकर एक बड़े गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीना मल की सही सफाई के लिए बड़ा लाभाकारी होता है।

▣ जल घूँट-2 करके पीना चाहिए। दो-तीन सैकेण्ड मुँह में रखने के बाद ही नीचे उतारना चाहिए।

▣ जो जल आप पी रहे हैं, ध्यान रहे कि वो न अधिक गर्म हो और न अधिक ठण्डा। चाहे कितनी भी गर्मी हो, पर अधिक ठण्डे जल का सेवन मत करें। वो हानिकारक ही होता है।

▣ भूख लगने पर पानी मत पिएँ, इससे जलोदर रोग हो सकता है।

स्वच्छता में ध्यान दें

▣ साफ-सुथरे वस्त्र पहनें।

▣ स्वच्छ पानी पिएँ।

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साहिब बन्दशी

  • □ अत्यंत स्वच्छता से बना हुआ भोजन करें। रसोई में चप्पल का प्रयोग वर्जित कर दें।
  • □ आटा गूँथते समय मुँह और नाक को चुनरी से ढक लें।
  • □ स्नान किए बिना भोजन न बनाएँ।
  • □ किसी का जुटा बिलकुल मत खाएँ और न ही जुठी थाली में भोजन करें।
  • □ तौलिया, कंघी आदि भी जुटा न हो बल्कि अपना अलग होना चाहिए।
  • □ सोने का बिस्तर साफ-सुथरा होना चाहिए।
  • □ घर की साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • □ मुँह ढाँपकर मत सोएँ।

स्नान में ध्यान दें

  • □ जब स्नान करें तो सबसे पहले सिर पर पानी डालें।
  • □ रात के समय स्नान मत करें।

सोने और जागने पर ध्यान दें

  • □ दिन में सोना ठीक नहीं है।
  • □ अधिक सोना भी ठीक नहीं है।
  • □ सुबह सूर्योदय से पहले जगने वाले कई रोगों से बचे रहते हैं।
  • □ सुबह चार बजे जगना उत्तम है।

ब्रश करने पर ध्यान दें

  • □ ब्रश करते समय दाँतों पर जोर से नहीं रगड़ें।
  • □ हो सके तो दातुन जरूर करें।
  • □ जो ब्रश आप कर रहे हैं, ध्यान दें कि उसके रेशे कोमल हों।

प्राणायाम और योगासनों द्वारा स्वास्थ्य रक्षा

प्राणायाम और योगासनों

द्वारा स्वास्थ्य रक्षा

वस्त्रिका प्राणायाम

पद्मासन या सुखासन या कैसे भी बैठकर कमर को सीधा रखें। धीरे-धीरे दोनों नथुनों से स्वांस अंदर भरें। स्वांस नाभि तक जाना चाहिए और पेट थोड़ा अंदर की ओर जाना चाहिए। छाती स्वांस से फूली हुई नजर आनी चाहिए। बिना रोके अब धीरे-धीरे स्वांस को बाहर निकालें। इस तरह 3 से 5 मिनट तक करें।

कपालभाती प्राणायाम

पद्मासन या सुखासन में बैठकर दोनों हाथ दोनों घुटनों पर ज्ञानमुद्रा (छोटी उँगली और अंगूठे को मिलाते हुए बाकी उँगलियाँ सीधी रखें) में रखें। अब सांस को बाहर छोड़ें। ऐसे में नाभि को पीछे झटका लगेगा। सांस लेना बिलकुल नहीं है। एक बार छोड़ने और दूसरी बार छोड़ने के बीच में जो अंतर आता है, वो अपने आप ही अंदर चला जाता है।

सांस इस प्रकार छोड़ना है, मानो नाक साफ कर रहे हों और पेट को झटना लग रहा हो। यह भी 4-5 मिनट तक कर सकते हैं।

अनुलोमविलोम प्राणायाम

दाएँ नथुने को दाएँ हाथ के अंगूठे से बंद करते हुए बाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस ऊपर खींचें।

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साहिब बन्दगी

अब दाएँ हाथ की ही बीच वाली दो उँगलियों से बाएँ नथुने को बंद करते हुए दाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ दें। ऐसे में अंगूठा हटा लें।

अब दाएँ नथुने से पहले की तरह धीरे-धीरे सांस खींचें। फिर दाएँ हाथ के अंगूठे से दाएँ नथुने को बंद करते हुए बाएँ नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।

इस तरह से एक चक्र पूरा होगा। ऐसे आप 5 से 15 मिनट तक करें।

ध्यान रहे, शुरू करते समय बाएँ नथुने से सांस खींचनी है और समाप्त करते समय भी बाएँ नथुने से ही सांस को बाहर छोड़कर खत्म करना है।

लाभ: हृदय, मेदा, अंतर्द्वियाँ, ज्विगर, फेफड़े, दिमाग, कैंसर, लीवर आदि से संबंधित जितनी भी बीमारियाँ हैं, सबमें ये बहुत लाभकारी हैं।

भुजंगासन की विधि

पेट के बल इस तरह लेटें कि आपका माथा जमीन को छू ले और टोड़ी छाती से लग जाए। पैरों को मोड़कर बाहर की ओर करें। टाँगें एक साथ जोड़े रखें। हाथों को कंधे के पास रखें।

अब धीरे-धीरे हाथों के सहारे सिर को ऊपर उठाते जाएँ, पर बाहों पर ज्यादा भार न पड़े। ऐसा करते हुए आप अंदर की ओर सांस लें। पेड़ स्थान (नाभि के नीचे का स्थान) जमीन के साथ लगा रहे, बाकी शरीर को ऊपर उठा लें। आँखों से 90° ऊपर देखने का प्रयास करें। ऊपर जितनी देर रुक सकें, रुकें और खास बात ध्यान दें कि ऊपर जितनी देर रुकें सांस को भी रोके रखें।

अब धीरे-धीरे नीचे वापिस लाते हुए सांस को भी धीरे-धीरे

आयुर्वेद का कमाल रोगों के निदान में

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छोड़ते जाएँ और हाथों को पीछे मोड़ लें।

अब पुनः इस प्रक्रिया को दोहराएँ। 3 बीर लगातार यह प्रक्रिया कर लें।

लाभ :

  • ❑ पेट की बीमारियों को ठीक करता है
  • ❑ कमर संबंधित रोग नहीं होने देता।
  • ❑ गुदों से संबंधित रोगों में बहुत लाभकारी है।

मत्स्यासन की विधि

सबसे पहले पद्मासन में बैठें। दोनों पैरों को एक-दूसरी जाँघ पर रखें।

अब कोहनियों के सहारे बाकी शरीर को धीरे-धीरे पीछे ले जाते हुए लिटा दें और हाथों से पैरों के अँगूठे पकड़कर कुछ देर इसी मुद्रा में रहें।

अब कमर को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर गर्दन को इस तरह पीछे की ओर मोड़ें कि सिर का ऊपरी भाग जमीन को स्पर्श करे और चेहरा पीछे की ओर हो जाए।

अब इस स्थिति में सांस लेते-2 कुछ देर के लिए रोक लें।

अब आपको वापिस सामान्य स्थिति में आना है। इसके लिए सबसे पहले आपने जो पैर के अँगूठे पकड़े हैं, उन्हें छोड़ें, फिर सिर और कमर को सामान्य अवस्था में लाकर लेट जाएँ। अब कोहनियों के सहारे से वापिस पद्मासन वासी स्थिति में पहुँचें। अब टोंगों को जाँघों पर से हटाएँ। यह सब क्रियाएँ धीरे-धीरे करें।

लाभ :

  • ❑ टॉन्सिल को ठीक करता है।
  • ❑ फेफड़े संबंधी रोग ठीक करता है।

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साहिब बन्दशी

  • □ जुकाम को ठीक करता है।
  • □ मुँहासे दूर करके चेहरे पर रंगत लाता है।

वज्रासन की विधि

घुटनों के बल बैठकर पाँवों को पीछे बाहर की ओर इस तरह फैलाएँ कि अँगूठे आपस में मिले रहें। अब एड़ियों पर बैठ जाएँ। अब दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखें। अँगुलियाँ नीचे भी जा सकती हैं। सांस प्रक्रिया सामान्य ही चलती रहे। ध्यान दें कि रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी रहे और सिर भी सीधा रहे। जितनी देर इस स्थिति में बैठ सकते हैं, बैठें।

लाभ :

  • □ कमर दर्द ठीक करता है।
  • □ पाचन क्रिया में लाभकारी है।

सिंह मुद्रासन की विधि

वज्रासन की तरह घुटनों के बल बैठें। अंतर यह रहे कि पैरों को बाहर की ओर न फैलाकर उनके अँगूठों की दिशा अंदर की ओर ही रखें और घुटनों को खुला-2 रखें।

अब शरीर को थोड़ा झुकाकर हाथों को उलटा करके जमीन पर फैलाकर रखें ताकि हाथों की उँगलियाँ घुटने को स्पर्श करें।

अब सिर को आगे की ओर झुकाकर ठोड़ी को छाती के साथ स्पर्श कराएँ और मुँह और नाक दोनों से बाहर की ओर सांस बाहर निकालते हुए जीभ को जितना हो सके बाहर निकालें।

अब इसी तरह से आँखों को चौड़ा करते हुए सामने की ओर देखें। मात्र तीन सेंकेंड बाद जीभ धीरे-धीरे वापिस अंदर करें और नाक