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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

( ४३ ) <sup></sup>जिनभागज्या <sup></sup>गुणिता <sup></sup>सूर्याद्या व्यासदलहृता<sup></sup><sub></sub>लब्धम् । <sup></sup>३२७० <sup></sup>इष्टापक्रमजीवा <sup></sup>विषुवदुग् दक्षिणा <sup></sup>सवितुः ॥ ५५ ॥ <sup></sup>इष्टापक्रमवर्ग<sup></sup>मिज्यावर्गाद्<sup></sup>विशोध्य <sup></sup>१०६६१६०० शेषपदम् । विषुवदुदग् <sup></sup>दक्षिणतः <sup></sup>स्वाहोरात्र्यार्द्ध <sup></sup>विष्कंभः ॥ ५६ ॥

५५. (घ) १. +१३२६+(च)
२. +३२७०+(ग) (च)
३. यह संख्या यहाँ पर 'हृता' के पश्चात् है ।
४. दृष्टा for (इष्टा)
५. विषुवदुदिग्दक्षिणा (ग) विष्वदुदिग्दक्षिणे for (विषुवदुग्दक्षिणा)
६. सदितु (ख) सदितु (च) for (सवितुः)
(ग) ७. +१३२६+सूर्याज्ज्या (क) सूर्याज्ज्या (ख) सूर्यज्य for (सूर्याद्या)
(क) ८. दक्षिणो (ख) दक्षिण for (दक्षिणा)
(ख) ६. जिनभागाज्या for (जिनभागज्या)
(च) ५. विष्वदुदग्दक्षिणा for (विषुवदुग्दक्षिणा)
५६. (घ) १. वर्ग त्रिज्या (ग) (क) (ख) वर्ग त्रिज्या for (वर्गमिज्या)
२. वर्गाद्विशोध्य (ख) वर्गाद्विशेषपदम् for (वर्गाद्विशोध्य)
३. दक्षणात: (च) for (दक्षिणतः)
४. स्वाहोराद्धं (ग) स्वाहोरात्रार्द्धं (क) स्वाहोरात्रार्द्ध for (स्वाहोरात्र्यार्द्ध)
(ग) ५. +१०६६२६००+
(ख) ६. इष्टमपक्रम for (इष्टापक्रम)
७. ‘ग्’ लुप्त
४. स्वांहोरात्रार्ध for (स्वाहोरात्र्यार्द्ध)
८. विष्कभ्रः for (विष्कंभः)
(च) १. वर्गं त्रिज्या for (वर्गमिज्या)
४. स्वाहोराद्धं for (स्वाहोरात्र्यार्ध)

( ४४ ) क्रान्तिज्या विषुवच्छाया गुणा द्वादशो धृता क्षितिजा । स्वाहोरात्रेऽनष्टा व्यासार्धेनाहता भक्ता ॥ ५७ ॥ स्वाहोरात्रार्द्धेन क्षयवृद्धिर्ज्याधनुश्चरप्राणाः । षट्कोधृता विनाड्यो विनाडिका नाडिका षष्ट्या ॥ ५८ ॥ चरदलघटिका गुणिता भुक्तिः षष्ट्याहता कलाद्याप्तम् । ऋणमुदयेऽस्तमये धनमुत्तरगोलेऽन्यथा याम्ये ॥ ५९ ॥

५७. (घ) १. त्सायाया (ग) छायया (ख) विषुच्छाया for (विषुवच्छाया)
२. धृता (ग) (ख) हृता for (धृता)
३. स्वाहोरात्रे नष्टा (ख) (क) स्वाहारात्रे नष्टा for (स्वाहोरात्रेऽनष्टा)
४. भक्ताः (ग) for (भक्ता)
(ग) ५. व्यार्द्धेनाहता (ख) सार्धेन हता for (व्यासार्धेनाहता)
(ख) ६. गुण for (गुणा)
(च) २. दृता for (धृता) ३. स्वाहोरात्र for (स्वाहोरात्रे)
५. व्यासार्द्धे for (व्यासार्धे) ४. भक्ताः for (भक्ता)
५८. (घ) १. धृता (ग) (क) (ख) (च) for (धृता)
२. षष्ट्याः (ख) षष्टा for (षष्ट्या)
(ग) ३. विड्यो for (विनाड्यो)
(ख) ४. शर for (चर)
५. +भवंति नाड्यो+
६. ‘डका’ लुप्त है
(च) २. षष्ट्याः for (षष्ट्या)
५९. (घ) १. घाप्तम् (ग) घातम् (ख) द्यप्तम् for (द्याप्तम्)
२. गोलेन्यथा (ग) (च) for (गोलेऽन्यथा)
(ग) ३. पल for (दल)
४. रूप for (ऋण)
५. ऽस्तसमये for (ऽस्तमये)
(क) ६. भुक्ति for (भुक्तिः)
७. हृता (च) for (हृता)
८. मुत्तरं for (मुत्तर) (ख) धनूत्तरगोलेन्यथा for (धनमुत्तरगोलेऽन्यथा)
(च) ५. अवग्रहचिह्न लुप्त

( ४५ ) दिनरात्रिमानघटिकाश्चरार्द्धनाडीभिरुत्तरगोले । पंचदश १५$^{२}$ युक्तहीना$^{४}$ याम्ये$^{५}$ हीनाधिका$^{६}$ द्विगुणाः$^{१}$ $^{२}$ $^{३}$॥ ६० ॥ भान्यश्विन्यादीनि ग्रहलिप्ता खखवसु ८०० द्वृताल्लब्धम् । भुक्तिहृते$^{५}$ $^{३}$ गतगम्ये दिवसाः दिवसा षष्ट्याहते घटिका ॥ ६१ ॥ अर्कोन$^{८}$ चन्द्र लिप्ताः खयम$^{६}$ स्वर$^{७}$ ७२०$^{४}$ भाजिता फलं तिथयः$^{५}$ । गतगम्ये षष्टिगुणे भुक्तन्तर भाजिते घटिका$^{१}$ $^{६}$ ॥ ६२ ॥

६०. (ग) १. रुत्तरे (क) (ख) कत्तरे for (रुत्तर)
२. यह संख्या लुप्त है
३. यहां (:) लुप्त हैं (क)
(क) ४. युक्ति for (युक्त)
५. ६ 'याम्ये हीना' पद लुप्त हैं । (ख)
(च) १. रुत्तरे for (रुत्तर)
६१. (घ) १. खखवसूद्धृता (क) (ख) खखावस्तूह्रता for (खखवसु ८०० द्वृता)
२. यह '८००' संख्या यहां न होकर 'लब्धम्' के पश्चात् है (ग)
३. 'दिवसा' इस प्रति में विद्यमान नहीं (क) (ख) विवसाः for (दिवसा)
(ग) ४. यह पद यहां लुप्त है (ख)
(क) ५. भान्यस्विन्वादीनि (ख) भन्याश्विन्यादीनि for (भान्यश्विन्यादीनि)
६. लिप्ताः for (लिप्ता)
(ख) ७. भुक्तिहृते for (भुक्तिहृते)
८. गुणे च्च घटिका for (षष्ट्याहते घटिका)
(च) १. वसूद्धृता for (वसुद्धृता)
६२. (घ) १. लिप्ता (क) for (लिप्ताः)
२. गुण (ग) for (गुणे)
३. घटिकाः (च) for (घटिका)
(ग) ४. यह संख्या 'भाजिता' और 'फलं' के बीच में है
५. तिथियः (ख) तिथ्ययः for (तिथयः)
(क) ६. खयमा for (खयम)
(ख) ७. खर for (स्वर)
(च) ८. अर्को for (अर्कोन) ४. संख्या लुप्त

( ४६ ) रविचन्द्रयोगलिप्ताः खयमस्वरभाजिताः फलं योगः¹ ॥ गतगम्ये षष्टिगुणे भुक्तिसमासाद्धृते² नाड्यः ॥ ६३ ॥ राश्यंशकला⁴ विकलाः⁵ स्फुटमासांते³ लिप्तिका⁶ विकला⁷ ।¹ पक्षांते⁸ तिथ्यंते समा रवीन्दोः² कला विकलाः ॥ ६४ ॥

६३. (घ) वि० यह श्लोक इस प्रति में उपलब्ध नहीं। न इस संख्या का कोई दूसरा श्लोक
ही। ऐसा प्रतीत होता है कि लिपिकार द्वारा यह श्लोक लिखने से रह गया ।
(ग) यह श्लोक इस प्रति में भी उपलब्ध नहीं है ।
(क) इस प्रति में उपलब्ध नहीं ।
(च) १. योगाः for (योगः) २. समासाधृते for (समासाद्धृते)
वि० यह श्लोक इस प्रति में १५A पृष्ठ पर ऊपर की ओर किसी अन्य हाथ से
लिखित है ।
६४. (घ) १. विकलाः (ग) (क) (च) (विकला)
२. रवीन्द्वोः (ग) (क) रवीस्ताः (ख) रवीन्द्रोः (च) for (रवीन्दोः)
(ग) ३. मासांतेश (घ) (क) (ख) मासांतेशा for (मासांते)
वि० इसकी श्लोक संख्या ६३ है ।
(क) ४. राश्यंश (ख) राशांश for (राश्यंश)
५. विकला for (विकलाः)
६. लिप्तिको for (लिप्तिका)
७. विवरलाश्चा for (विकलाः)
इसकी श्लोक संख्या ६३ है ।
(ख) ८. पक्षातो for (पक्षांते)
(च) ३. मासांतेश for (मासांते)

( ४७ )

कृष्णचतुर्दश्यन्ते¹ शकुनि⁴ पर्वणि चतुष्पद²प्रथमे । तिथ्यर्द्धते³ नागं⁵ किंस्तुघ्नं⁷ प्रतिपदाद्यर्द्धे⁶ ॥ ६५ ॥ व्यर्केंदु⁷ कला भक्ताः³ खरसगुणैः⁴ ३६० लब्ध⁵मूनमेकेन । चल⁸करणानि व⁹वादीन्यग हृतशेषे⁶ तिथिवदन्यत्¹ ² ॥ ६६ ॥


६५. (घ) यह श्लोक इस प्रति में उपलब्ध नहीं है ।

(ग) १. र्दश्यंते शशकुनिः for (र्दश्यन्ते शकुनि) (ख) चतुर्दशांते for (चतुर्दश्यन्ते)
२. चतुष्पदं (क) (ख) (च) for (चतुष्पद)
३. तिथ्यर्द्धेत्येनागं (क) तिथ्यर्द्धेऽन्ये (ख) तिथ्यर्वेत्यनागः for (तिथ्यर्द्धते नागं)

(क) ४. शकुनिः (ख) for (शकुनि)
५. मार्ग for (नागं)

वि० इसकी श्लोक संख्या ६४ है ।

(ख) ७. किस्तुघ्नप्रति for (किंस्तुघ्नं प्रति)

(च) ३. तिथ्यर्

( ४८ ) इह नोक्तानि बहुत्वात्^२ स्पष्टगते^३रुत्तरे^५भिधास्यामि^४ । संक्रांतिर्भतिथिकरण^१ व्यतिपाताद्यंत^७ गणितानि ॥ ६७ ॥^८ ज्या^५ परिधि^८ स्पष्टीकरण^६ दिनगतिचरार्द्धं^७ करणेषु^१ । स्फुटगतिरध्याय^२ सप्तषष्टिराया द्वितीयोऽयम्^३ ॥ ६८ ॥ इति ब्रह्मगुप्ते^४ २योऽध्यायः ॥

६७. (घ) १. थिमकरण for (भतिथिकरण)
वि० इसकी श्लोक संख्या ६६ है । (ग) (क)
(क) २. बहुत्वत् for (बहुत्वात्)
३. स्पष्टगंते for (स्पष्टगते)
४. ऽभिधास्यामि for (भिधास्यामि)
६. 'करण' पद लुप्त है ।
७. व्यतीपाताद्य for (व्यतिपाताद्यंत)
(च) ४. वधास्यामि for (भिधास्यामि)
८. ।। ६६ ।। for (।।६७।।)
६८. (घ) १. +भतिथि+ (ग) (ख)
२. गति रध्यायः (ग) (क) (ख) गत्यध्यायः for (गतिरध्याय)
३. द्वितीयोयम् (ग) (च) for (द्वितीयोऽयम्)
इसकी श्लोक संख्या ६७ है। (च)
४. 'इति'—से 'अध्यायः' तक यहां अंकित नहीं इस अधिकार में केवल ६७
श्लोक हैं । (क)
(ग) ५. या for (ज्या)
६. करणां (ख) करणा for (करण)
७. दिनमानचरार्द्धं (ख) दिनरात्रिचरार्द्धं for (दिनगतिचरार्द्धं)
४. 'इति श्रीब्रह्मसिद्धान्ते स्फुटिकरणाधिकारो द्वितियः' यह नोट और ही लेखनी
का है, काग़ज़ के ऊपर दिया गया है ।
(क) ८. परिधिः for (परिधि)
(च) १. +भतिथि २. रध्यायः for (रध्याय)
४. 'इति' से 'अध्यायः' तक अंकित नहीं है ।

( ४६ ) पूर्वापरयोर्विद्धो १ तुल्य छायाग्रयो दिग्पराद्याः २ । पूर्वान्यः ५ क्रान्तिवशात्तन्मध्यात् ४ शंकुतलमितरे ३ ॥ १ ॥ नृछायाग्रगजमत्स्य १ द्वयमध्यगसूत्रयोर्युतिर्यत्र २ । सोत्तरगोले याम्या ५ शंकुतला ३ दक्षिणे सौम्या ॥ २ ॥ छायाग्रभ्रमरेखा ६ सूत्रद्युतेर्वृ २ तपरिधिरग्रस्पृक् । मध्यछायान्तरमुद्गीतरं ३ वा ५ शंकुमण्डलयोः ४ ॥ ३ ॥

१. (घ) १. विद्ध (ग) विट् (क) विन्दु (ख) विन्दु for (विद्धो)
२. दिग्पराद्यः (ग) दिगपरार्धः (क) दिग्पराधः for (दिग्पराद्याः)
(ग) ३. शंकुतलमिनरे (क) (ख) for शंकुतलमितरे)
(क) ४. तन्मध्या (ख) तन्मध्य for (तन्मध्यात्)
(ख) २. दिग्पराद्यः for (दिग्पराद्याः)
५. मूर्धन्याः for (पूर्वान्यः)
(च) २. दिग् for (दिग्)
२. (घ) १. नृछायाग्रजमत्स्य (क) त्रिछायाग्रजमत्स्य (ख) त्रिछायाग्रजमत्स्य for (नृछाया-
ग्रजमत्स्य)
(ग) १. त्रिछायाग्रजमछ्य for (नृछायाग्रजमत्स्य)
२. युति for (र्युति)
३. शंकुतला (क) कुंतला for (शंकुतला)
(क) ४. यत्र for (यंत्र)
५. दाम्यात् for (याम्या)
(क्षेप) क्षेपक नत्काले द्विवरं क्रान्त्यो लंबेन भाजितं गुणयेत् ।
तत्कर्णेन छायायाः प्राचीलब्धां गुणैरयनैः ॥ २ ॥ इतिक्षेपः
(ग) यह श्लोक इसी 'प्रति' में वह भी 'क्षेप' के नाम से उपलब्ध है ।
(क) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
(च) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
३. (घ) १. युते (ग) (क) युते (ख) (च) for (द्युते)
२. वृत्तस्पक् (ग) वृत्त (ख) वृत्त (च) for (वृंत)
३. सुदगितरं (ग) मुदगिरद्वा (क) मुदगितरथा for (मुदगीतरं)
४. मंडल्यो (च) for (मंडलयोः)
(क) ५. 'वा' पद लुप्त है । (ख) द्वा
(ख) ६. 'ग्र' लुप्त है
७. मध्या for (मध्य) ३. मुदगितर for (मुदगीतरं)

( ५० ) छायावृत्ते¹ऽर्काग्रा कर्णांगुणा⁵ ब्यासदल हृताकार्ग्रा⁴ । विषुवच्छाया² याम्या तदन्तरैक्यं भुजस्याग्रे³ ॥ ४ ॥ शंकु⁵प्रा⁷च्यपरा¹ या छाया भुजकृतिविशेषमूलं नयत्² । तत्राच्य⁶पर⁸च्छाया भुजा³ग्रयो⁴रन्तरं⁵ कोटिः⁶ ॥ ५ ॥ दिग्मध्ये² छायाग्रं कृत्वा शंकोर्यथादिशं⁴ भ्रमराम् । दिग्मध्य⁵स्थितशकोः³ छायाग्रं भ्रमति¹ विपरीतम्⁶ ॥ ६ ॥

४. (घ) १. वृत्तेकर्ग्रा (ग) (ख) वृत्तेकप्रि for (वृत्तेऽर्काग्रा)
२. विषुवच्छायाम्या (ग) विषुवच्छायायान्या for (विषुवच्छाया याम्या)
३. भुजोस्याग्रे (ग) भुजोस्याग्रे (क) भुजोस्याग्रो for (भुजस्याग्रे)
(ग) ५. कार्णांगुणा for (कर्णांगुणा)
(क) २. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया)
(ख) ४. हताकार्ग्रा for (हृताकार्ग्रा)
३. भुजोस्याग्रे for (भुजस्याग्रे)
(च) १. वृत्तेक्रांग्रा for (वृत्तेऽर्काग्रा) ४. हृताक्रांग्रा for (हृताकार्ग्रा)
२. विषुवच्छा for (विषुवच्छाया) ३. भुजोस्याग्रे for (भुजस्याग्रे)
५. (घ) १. परयो (ग) परायाः (क) परायाः for (पराया)
२. 'न' इस प्रति में नहीं है। (ग) (क) (च)
४. भुजग्रयो for (भुजाग्रयो)
(ग) ५. शंकुः (ख) शकुः for (शंकु)
(क) ६. कौशि for (कोटिः)
(ख) ७. प्राच्या for (प्राच्य)
८. रन्तरे for (रन्तरं)
(च) ६. तत्प्राच्यां for (तत्प्राच्य) ४. भुजग्रयो for (भुजाग्रयो)
६. (घ) १. अवति (क) for (भ्रमति)
(क) २. दिगमध्य (ख) दिङ्मध्ये for (दिग्मध्ये)
३. शंकेश् (ख) शंको for (शंकोः)
(ख) ४. शांकोर्य्यथादिशं for (शंकोर्यथादिशं)
५. दिङ्मध्ये for (दिग्मध्य)
(च) ३. शकोः for (शंकोः)
६. विपरितं for (विपरीतं)

( ५१ ) शंकुलंबश्छायाक्षज्या तद्वर्गसंयुते मूलम् । विषुवत्कर्णच्छाया कर्णोत्त्यदा शंकुः ॥ ७ ॥ उन्नतजीवाकोटिः छाया हग्ज्या भुजो नतज्या वा । कर्णच्छायावृत्तं व्यासार्द्धं द्वयमतोन्यत्र ॥ ८ ॥

७. (घ) १. क्षय्या (ग) क्षज्य (ख) वज्या for (क्षज्या)
२. मूलंम् (च) for (मूलम्)
३. विषुव तिथिषुव (ग) विषुवति विषुवति for (विषुवत्)
४. कर्णोन्यदा (ग) (क) कर्णोऽन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
(ग) ५. शंकुलम्बः (क) शंकुलंबश (ख) शंकुलंब for (शंकुलंब)
६. कर्णाः छाया (क) कर्णाश्छाया for (कर्णच्छाया)
(क) ७. +विषुवति+(च)
(ख) ७. +विषुवति+
४. कर्णोन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
(च) १. क्षय्या for (क्षज्या) ४. कर्णोन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
८. (घ) १. कोटिच्छाया for (कोटिः छाया) (ख) उत्ततजोवकोटि for (उन्नतजीवा-
कोटिः)
२. यत्रः for (यत्र)
(ग) ३. दृक्ज्या (क) शध्या for (हग्ज्या)
४. भुजानतज्यावा for (भुजोनतज्यावा) (ख) भुज्या for (भुजो)
५. कर्णाः for (कर्ण)
(क) ६. वा (छ) यः for (छाया)
७. तस्या (ज्या) द्या for (तज्या वा)
८. वृत्तव्यसार्द्धं for (वृत्तं व्यासार्द्धं)
९. द्वयासन्नोऽस्यत्रम् for (द्वयमतोन्यत्र)
इसकी श्लोक संख्या ६ है, संभवतः यह मूल है ।
(ख) १०. सार्द्धं for (सार्धं)
(च) १. कोटि for (कोटिः) ३. हग्द्या for (हग्ज्या)

( ५२ ) शंकु छाया$^७$ कृत्योस्त्रिज्या कृतितत्समास$^५$ गुणहृतया$^१$ । मूलं$^२$ लम्बाक्ष्यज्येस्तदंशकास्तद्धनुर्भागाः$^३\ ^६\ ^४$ ॥ ६ ॥ विषुवत्कर्णाहते$^६$ वा शंकु छायागते$^३$ पृथक् । त्रिज्ये$^५$ त्रिज्येतर जीवा$^१$ लंबाक्षांसो क्रमज्योना$^२$ ॥ १० ॥

६. (घ) १. हृतयो (ग) हृतयोः (ख) हतयोः for (हृतया)
२. मूले (क) (ख) for (मूलं)
३. लंबाक्ष्यज्येतदंश (क) लबाक्ष्यस्थे for (लंबाक्ष्यज्येस्तदंश)
४. तर्द्धनुर्भागाः (क) सद्धक्रभागाः (ख) तद्धनुमागः for (तद्धनुर्भागाः)
(क) ५. नृत्यमासनस्य सूत्रयोः for (तत्समासगुणहृतया)
६. तदसंकाश (ख) तदशकास्व for (तदंशका)
इसकी श्लोक संख्या ८ है
(ख) ७. क्वाया for (छाया)
(च) ३. लम्बाक्ष्यजे for (लम्बाक्षजे) ६. तदंशका for (रतदंशका)
१०. (घ) १. जीवा वालंबाक्षांशो (क) (ख) जीवावलंबाक्षाशो for (जीवालंवाक्षांसो)
२. त्क्रमज्योना (क) कामावना (ख) कमज्योना for (क्रमज्योना)
३. छायाहृते (ग) (क) छायाहते (ख) हृते for (छायागते)
(ग) ४. लंबाक्षांशो for (लंबाक्षांसो)
(क) ५. त्रियेतर (ख) तिज्ये for (त्रिज्येतर) इसकी श्लोक संख्या ११ दी है।
परन्तु यह भूल प्रतीत होती है क्योंकि इसकी टीका के अन्त में १० लिखा
है।
(ख) ६. विषुत्वार्याहिते for (विषुवत्कर्णाहते)
(च) ३. छायाद्गते for (छायागते)
२. लंबाक्षांशोत्क्रमज्योना ।

( ५३ ) नवते⁴ ९०² लम्बांशात्प्रोज्य¹ ज्यौवेतराक्षलम्बज्ये⁵ । शंकुच्छायागुणिते छाया द्वादशहते वान्ये ॥ ११ ॥ लंबाक्षज्यावर्गं⁵ प्रोह्यज्या¹ कृतेः पदं वान्यौ²ः । अन्यत्र सर्वदोन्नत जीवांशा³ नयनमेव⁴ ॥ १२ ॥ इष्टदिनार्द्ध¹नतांश क्रान्त्यै²शैक्यांतरं³ क्रियतुलादौ⁴ । अक्षांशा⁵ याम्यायां⁶ छायायामंतरमजादौ⁷ ॥ १३ ॥ ११. (घ) १. लंबांशात्प्रात्सं ज्या (ग) लंबांशान् (क) लंबांशान् (त्) for (लंबांशात् प्रोज्यज्या) (ग) २. यह संख्या लुप्त है (क) ३. प्रोह्य ज्यवितराक्ष (क) प्रोह्यज्या (ख) प्राज्याज्यार्ध for (प्रोज्यज्यावे- तराक्ष) (क) ४. नवतै for (नवते) (ख) १. लंबकाशान् for (लम्बांशात्) ५. लंबज्यो for (लंबज्ये) (च) १. लंबांशात् for (लम्बांशात्) १२. (घ) १. प्रोक्तज्याकृतेः (ग) प्राज्यत्रिज्योकृतेः (क) प्रोह्य त्रिज्या for (प्रोह्यज्याकृतेः) २. वान्त्या (ग) (क) वान्यः for (वान्याः) ३. नतजीवांशा (ग) (क) (ख) नजीवांशा for (न्नतजीवांशा) ४. मेवम् (ग) (च) for (मेव) (ग) ५. वर्गं (ख) वर्ग for (वर्गं) (ख) १. प्रोज्या त्रिज्या for (प्रोह्यज्या) ४. नयनमवम् for (नयनमेव) (च) १. प्रोज्य for (प्रोह्य) २. वान्त्या for (वान्याः) १३. (घ) १. दिनार्द्धेन्नतांश (ख) दिनार्द्धेनातांश for (दिनार्द्धेनतांश) (ग) २. क्रान्ति (क) क्रान्त्यां (ख) क्रान्त्यै for (क्रान्त्यं) (ख) ३. शैक्यंतर for (शैक्यांतरं) ४. तुल्यादौ for (तुलादौ) ५. अक्षांश for (अक्षांशा) ६. षाम्यायां for (याम्यायां) ७. 'या' लुप्त है (च) १. दिनार्द्धन्नतांश for (दिनार्द्धेनतांश)

र्द्धं)Wait, look at line 2 of the main text:मेषवृषमिथुनजा स्वाहोरात्रार्द्धा चरदलप्राणान् ।Wait, does line 2 sayस्वाहोरात्रार्द्धाorस्वाहोरात्र्यार्द्धाorस्वाहोरात्रार्द्धं? It has स्वाहोरात्रार्द्धाorस्वाहोरात्र्यार्द्ध? Look at line 10: २. रात्रार्द्धं (ग) (क) रात्रर्धं (ख) रात्रार्थं for (रात्र्यार्द्धं)In line 14:(च) २. रात्रार्द्धं for (रात्र्यार्द्धं)Wait, why does the editor writefor (रात्र्यार्द्धं)? Look at line 2: स ् व ा ह ो र ा त ् र् य ा र् द्ध ा? Wait! Look at the letter after : Is it त ् र ाorत ् र ् य ा? There is a vertical stem with a loop, like त्र्या! Wait, look at line 10: for (रात्र्यार्द्धं)! Look at line 14: for (रात्र्यार्द्धं)! The lemma in the footnote is (रात्र्यार्द्धं)`!

( ५५ )

स्वचरासुभिस्सूनयुता १६१७ क्रमोत् क्रमस्थैः क्रमोक्रमन्यस्ताः । उदयप्राणा व्यस्ताश्चार्कं तात्कालिकं कृत्वा ॥ १७ ॥ रविणा भुक्त्याराशेः कला गुणाः स्वोदयासुभिर्भक्ताः । राशिकलाभिर्लब्धा प्रश्नासुभ्योऽशवः शोध्याः ॥ १८ ॥


१७. (घ) १. रूनयुताः (ग) रूनयुताः (क) (ख) नूनयुता for (सूनयुता) २. + १७६५, १६३५, १६३५, १३६५, १६००+ ३. क्रमोक्रमन्यस्ताः (ग) (क) क्रमोत्क्रमास्ते (ख) क्रमोक्रमभ्यस्ताः for (क्रमोक्रमन्यस्ताः) (ग) २. यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई । (ख) ४. स्ववरासुभिः for (स्वचरासुभि) ५. क्रमाक्रमो for (क्रमोत्क्रमस्थै) ६. : विसर्ग लुप्त हैं ७. रचार्क for (श्चार्कं) ८. 'कृत्वा' पद लुप्त है । (च

( ५६ ) ⁶प्रक्षिप्य ²राशय भुक्तं शेषां सुभ्यः ³क्रमेण ⁴यावंतः । ¹शुद्धांत्फदया सूर्ये ताव॑तो राशयः ⁵क्षेप्याः ।। १६ । ¹शेषांत्रिशत् ²गुणितानस्तन ⁴शुद्धोदया सुभिर्विभजेत् । ⁶लब्धंभागादिरवौ ³प्रक्षिप्य तथा कृते लग्नम् ।। २० ।।

१६. (घ) १. शुध्यंत् (ग) शुध्यत्युदयाः (क) शुध्यंत्युदयाः (ख) for (शुद्धांत्फदया)
(ख) २. राश for (राश्य)
३. क्रमण for (क्रमेण)
४. यावतः for (यावंत)
५. 'क्षेप्याः' पदलुप्त है ।
(च) ६. + १७६५ ⎫ पिछले श्लोक के फुटनोट में संख्याएं दर्शा दी गई हैं ।
१६३५ ⎪
१६३५ ⎬
१३६५ ⎪
१५०६ ⎭
१. शुद्धांत्युदयाः for (शुद्धांत्फदया)
२०. (घ) १. शेषांस्तुंशद् (ग) शेषांस्त्रिंशद् for (शेषांत्रिशत्)
२. गुणिताः श्येनस्तन for (गुणितानस्तन) (ग) नसून for (नस्तन)
(क) दविशुद्धस्योदयाः for (नस्तनशुद्धोदया)
(क) ३. प्रक्षेप्यं for (प्रक्षिप्य)
(ख) १. शेषास्त्रिशद्गुणा for (शेषांत्रिशत् गुणिता)
२. तसून for (नरतन)
४. शुद्धासुभि for (शुद्धोदयासुभिर्)
५. वित्तजेत् for (विभजेत्)
६. लब्धा for (लब्धं)
(च) १. शेषांत्रिशद्गुणिताः ३० नस्तन for (शेषां त्रिशत् गुणितानस्तन)
७. क्रम संख्या लुप्त

( ५७ ) रविराशयभुक्तलिप्तास्तदुदय गुणिता हता॑ ग्रह॑क॑लाभिः १८००। लब्धं प्राणास्थाप्याः प्रक्षिप्यार्के ग्रहाभुक्तम् ॥ २१ ॥ तावत्सूर्ये राशि न क्षिपेत्समो लग्नराशिभिर्यावत् । क्षिप्रग्रहाणां प्राणान् प्रक्षिप्य स्थापितेष्वसुषु ॥ २२ ॥ तदधिककालोदयवधराशि कलाभिर्भजेत् फलं प्राणान् । प्रक्षिप्य प्राणेषु प्राणाः सूर्योदयादसकृत् ॥ २३ ॥

२१. (घ) १. हृतो (क) हृता (ख) कृता for (हतो)
२. गृहकलाभिः (ग) (क) (ख) गृहकालाभिः for (ग्रहकलाभिः)
३. गृहाभुक्तम् (ग) (क) (ख) गृहामुक्तम् for (ग्रहाभुक्तम्)
४. रविराश्यभुक्त (ग) (क) (ख) रविराशिभुक्त for (रविराशयभुक्त)
(ग) ५. लब्धंप्रा

( ५८ ) प्रागुदयैः प्रश्नासुभिरूनोर्को भुक्तराशिभिर्लग्नम् । कृत्वैवमूनमर्कं लग्नसमं प्राग्भवेत्कालः ॥ २४ ॥ गतशेषालपास्याह्नः सौम्योत्तरगोलयोश्चरार्द्धेन । ऊनाधिकस्य जीवा स्वाहोरात्र्यार्द्धं संगुणिता ॥ २५ ॥ -- त्रिज्याहता युतोना क्षितिज्यया सौम्ययाम्ययोश्छेदः । छेदोवलम्बकगुणो व्यासाद्धं विभाजितः शंकुः ॥ २६ ॥ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 २४. (घ) १. भुक्तः (ग) भुक्ति for (भुक्त) (ग) २. प्रश्नाशुभि for (प्रश्नासुभि) ३. मूनमर्कं (ख) मूनमर्कलग्नसमं for (मूनमर्कं लग्नसमं) (ख) ४. रुभोको for (रूनोर्को) ५. लग्नम् for (र्लग्नम्) ६. कलः for (कालः) (च) ४. रूनोक्रों for (रूनोर्को) ३ मवर्के for (मर्कं) २५. (घ) १. गत शेषालपस्याह्नः (ग) गतशेखालपस्याह्नः for (गतशेषालपास्याह्नः) २. सौम्येतर (ग) (क) (ख) सौम्यैतर for (सौम्योत्तर) (ग) ३. रात्राद्धं (क) (ख) (च) for रात्र्यार्द्धं) (क) १. गतशेषालपस्याह्नः (ख) गतशोषालपस्याह्नाः for (गतशेषालपास्याह्नः) (ख) ४. चरार्द्धेनः for (चरार्द्धेनः) ५. ऊनाधिक़ास्य for (ऊनाधिकस्य) (च) १. गतशेषालपस्याह्नः for (गतशेषालपास्याह्नः) २. सौम्येतर for (सौम्योत्तर) २६. (घ) १. विभाजितशंकुः (च) for (विभाजितःशंकुः) २. त्रिज्याहृता (च) for (त्रिज्याहता) ३. छेदावलम्बकगुणो (च) for (छेदोवलम्बकगुणो) (ग) ४. छेद (क) याम्ययोश्छेदः (ख) for (याम्ययोश्छेदः) (ख) ५. व्यासार्धं for (व्यासाद्धं)

( ५६ ) विषुवत्कर्णविभक्तः १ छेद्यो वा द्वादशाहतः ३ शंकुः । शंकुकृति २ विहीनाया व्यासाद्धं कृतेः पदं दृग्ज्या ४ ॥ २७ ॥ दृग्ज्या द्वादश गुणिता ३ विभाजिता शंकुना ७ फल १ छाया । व्यासाद्धं ४ छेदहतं ५ विषुवत्कर्णाहतं ६ कर्णः ॥ २८ ॥ गुणितं वा द्वादशभिर्व्यासाद्धं २ शंकुनाहतं १ कर्णः । जीवा क्षयवृद्धिर्ज्याययुतहीना ज्या ३ क्रियतुल्यादौ ॥ २९ ॥ २७. (घ) १. विभक्तं (च) for (विभक्तः) २. शंकुकृतिविहीनाया (ग) (क) (ख) for (शंकुकृतिविहीनाया) (क) ३. हतः (ख) हतशंकुः for (हतःशंकुः) (ख) ४. फलं दृग्जा for (पदंदृग्ज्या) (च) द्वादशाहतः for (द्वादशाहतः) २. शंकुकृतिविहीनाया for (शंकुकृतिविहीनाया) २८. (घ) १. फलं (ग) (क) (ख) फलं for (फल) २. कर्णं for (कर्ण) ३. +१२+ (च) +१२+ (ग) ४. व्यासाद्धच्छेदहतं for (व्यासाद्धं छेदहतं) (क) ५. हतं (च) for (हतं) (ख) ७. शांकुला for (शंकुना) २६. (घ) १. हतं for (हतं) (ग) (क) (ख) हतकर्ण for (हतकर्णः) (क) २. व्यासाद्धं (ख) व्यासाधं for (व्यासाद्धं) (ख) ३. जा for (ज्या)

( ६० ) स्वाहोरात्र्यर्द्धं¹ गुणा⁷ व्यासार्द्धं² विभाजिताऽथवा छेदः । ₆शंक्वादि प्राग्वज्ज्या स्वाहोरात्र्यर्द्ध³धात⁵ कृता⁴ ॥ ३० ॥ व्यासार्द्धकृति¹ गुणिता² विषुवत्कर्णेन वा भवेत्³कर्णः । लम्बगुणो ₄घातः शंकु₆ व्यासार्द्धकृतिभक्तः⁵ ॥ ३१ ॥

३०. (घ) १. रात्रार्द्धं (ग) (क) (ख) रात्रार्धं for (रात्र्यर्द्धं)
२. व्यासार्धं (ग) (ख) for (व्यासार्द्धं)
३. राद्धं (ग) (क) रात्रार्थं (ख) for (रात्र्यर्द्धं)
४. हृता (ग) (क) हृता (ख) हता for (कृता)
(ग) ५. घात (क) (ख) for (धात)
६. शंकवादि for (शंक्वादि)
(ख) ७. गुण for (गुणा)
(च) १. रात्रार्द्धं for (रात्र्यर्द्धं) ४. हृता for (कृता)
३१. (घ) १. व्यासार्धकृति १०६६२६०० (ग) व्यासार्द्धकृति १०६६२६०० for (व्यासा-
र्द्धकृति)
२. गुंणिता (ग) (क) (च) for (गुणिता)
३. भवति (ग) (क) (ख) (च) for (भवेत्)
४. व्याघातः (ग) (क) वा घातः (ख) वाघतः for (घातः)
५. कृतिवक्तः (ग) कृतिभुक्तः for (भक्तः)
(ग) ६. शंकुर्व्यासार्द्धं (क) (ख) शंकुव्यासार्धं for (शंकुव्यासार्द्धं)
(ख) १. व्यासार्धकृति १०६६२६०० for (व्यासार्द्धकृति) २. गुंणिता for (गुणिता)
४. व्याघातः for (घातः)

( ६१ ) घातोवार्कगुणाँ⁴ १२ स्त्रिंज्या विषुवत्कर्ण¹बंधः² हतः³ शंकुः । कर्णकृते⁵ संशोध्य द्वादशवर्ग १४४ पदं छाया⁶ ॥ ३२ ॥ अल्पप्रश्नासूनां² यदि बहवश्चरदलासवः क्षितिजा । हतयोना¹ जीवोना क्षयवृद्धिज्योक्तवच्छेषं³ ॥ ३३ ॥ स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः¹ क्षितिज्यया⁶ युतविहीनं । द्युदलान्त्यज्या²भिज्य³ क्षयवृद्धिर्ज्या⁴ युतोनांत्या⁵ ॥ ३४ ॥

३२: (घ) १. कर्णाः (च) for (कर्ण)
२. वधः (ग) वध (क) for (बंधः) (ख) 'बंध' पद लुप्त है।
३. हृतः (ग) (क) (च) for (हतः)
(ग) ४. गुणास्त्रिज्या (क) (ख) for (कृते)
५. कृतेः (क) (ख) गुणास्त्रिज्या for (गुणा १२ स्त्रिंज्या)
६. छायाः for (छाया)
(क) संख्याएँ मूल में अंकित नहीं हैं ।
(ख) ७. संशोद्ध्या for (संशोध्य)
८. वर्गंगयछाया for (वर्ग १४४ पदं छाया)
(च) ४. घातोवार्कगुणा १२ for (घातोवार्कगुणा १२) २. वधः for (बंधः)
१. कर्णाः for (कर्ण)
३३. (घ) १. हृतयोना (ग) (च) for (हतयोना)
(ग) २. अल्पप्रश्नासूना for (अल्पप्रश्नासूनां)
(क) मूल श्लोक अंकित नहीं है—केवल टीका लिखी हुई है।
(ख) ३. छाषम् for (छेषम्)
३४. (घ) १. उदकदक्षिणयोः (ग) स्वाहोरात्रामुदग्दक्षिणयोः (ख) for (स्वाहोरात्रार्द्धमुद-
कदक्षिणयोः)
(ग) २. द्युदलांतिज्या for (द्युदलान्त्यज्या)
३. त्रिज्या (क) (ख) त्रिज्या (च) for (भिज्या)
४. वृद्ध्य for (वृद्धिर्ज्या)
५. नांत्याः for (नांत्या)
(क) १. स्वाहोरात्रार्धमुदग्दक्षिणयोः for (स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः)
६. क्षितिजया (ख) पितिज्यया for (क्षितिज्यया)
(च) १. मुदग्दक्षिणयोः for (मुदकदक्षिणयोः)

( ६२ ) छेदहता^[१]^ द्युदलांत्या दिनार्द्ध^[४]^ कर्णेन वा कर्णाः^[२]^ । भक्ता ज्यया ऽथवाऽन्त्या दिनार्द्ध कर्णा हृता^[३]^ कर्णाः ॥ ३५ ॥ द्युदलान्नतो^[१]^ क्रमज्या स्वाहोरात्रार्द्धा^[४]^ संगुण विभजेत् । व्यासार्द्धेन फलोना^[५]^ द्युदलान्त्ययाथवा^[३]^ छेदः ॥ ३६ ॥ अन्त्यानतो^[१]^ क्रमज्या हीनां ज्या षट् पृथक्^[२]^ छेदः^[३]^ । ज्याभ्यां^[४]^ च सह फलानि छाया नयनानि षट्^[६]^ त्रिंशत् ॥ ३७ ॥

३५. (घ) २. वा गुणा for (वा) (ग) संगुणा for (वा) (क) संगुणा for (वा) (ख)
कर्णाः for (वाकर्णाः)
१. छेदहता (ग) (क) (च) for (छेदहता)
(ग) ३. कर्णांहता (क) कर्णांहिता (ख) कर्णाः हता for (कर्णाहृता)
(ख) ४. नबागुणाः for (र्द्धकर्णेन)
(च) २. वागुणाकर्णाः for (वाकर्णाः)
३६. (घ) १. द्युदलान्ततोत्क्रमज्यां (ग) (क) (च) for (द्युदलान्नतो क्रमज्या)
२. स्वाहारात्रार्ध संगुणं विभजेत् । (ग) स्वाहोरात्रार्द्धंसंगुण विभजेत् for
(स्वाहोरात्रार्द्धं संगुणा विभजेत्)
३. दलान्त्य ज्याथवा for (द्युदलान्त्ययाथवा)
(ग) ३. दलान्त्यज्या यथा (क) द्युदलान्त्यज्याथवा (ख) for (द्युदलान्त्ययाथवा)
(क) ४. संगुणाम् (ख) संगुणं for संगुणा
(ख) १. द्युदलन्नतोरुकमजां for (द्युदलान्नतो क्रमज्या)
२. स्वाहोरात्रार्द्धं for (स्वाहोरात्रार्द्धं)
५. फलेना for (फलोना)
(च) २. स्वाहोरात्रार्द्धं for (स्वाहोरात्रार्द्धं)
४. संगुणां for (संगुणा)
३७. (घ) १. अन्त्यानतोत्क्रमज्याहीना (ग) (क) (ख) for (अन्त्यानतो क्रमज्याहीनां)
३. छेदाः (ग) (ख) छेदा for (छेदः)
(च) ४. 'च' अतिरिक्त पाठ
५. फलनि for (फलानि)
६. ष्टट्त्रिंशत् for (षट्त्रिंशत्)
(च) १. अन्त्यानतोत्क्रमज्याहीन for (अन्त्यानतो क्रमज्याहीनां) ३ छेदाः for (छेदः)