ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
( ४८ ) इह नोक्तानि बहुत्वात्^२ स्पष्टगते^३रुत्तरे^५भिधास्यामि^४ । संक्रांतिर्भतिथिकरण^१ व्यतिपाताद्यंत^७ गणितानि ॥ ६७ ॥^८ ज्या^५ परिधि^८ स्पष्टीकरण^६ दिनगतिचरार्द्धं^७ करणेषु^१ । स्फुटगतिरध्याय^२ सप्तषष्टिराया द्वितीयोऽयम्^३ ॥ ६८ ॥ इति ब्रह्मगुप्ते^४ २योऽध्यायः ॥
६७. (घ) १. थिमकरण for (भतिथिकरण)
वि० इसकी श्लोक संख्या ६६ है । (ग) (क)
(क) २. बहुत्वत् for (बहुत्वात्)
३. स्पष्टगंते for (स्पष्टगते)
४. ऽभिधास्यामि for (भिधास्यामि)
६. 'करण' पद लुप्त है ।
७. व्यतीपाताद्य for (व्यतिपाताद्यंत)
(च) ४. वधास्यामि for (भिधास्यामि)
८. ।। ६६ ।। for (।।६७।।)
६८. (घ) १. +भतिथि+ (ग) (ख)
२. गति रध्यायः (ग) (क) (ख) गत्यध्यायः for (गतिरध्याय)
३. द्वितीयोयम् (ग) (च) for (द्वितीयोऽयम्)
इसकी श्लोक संख्या ६७ है। (च)
४. 'इति'—से 'अध्यायः' तक यहां अंकित नहीं इस अधिकार में केवल ६७
श्लोक हैं । (क)
(ग) ५. या for (ज्या)
६. करणां (ख) करणा for (करण)
७. दिनमानचरार्द्धं (ख) दिनरात्रिचरार्द्धं for (दिनगतिचरार्द्धं)
४. 'इति श्रीब्रह्मसिद्धान्ते स्फुटिकरणाधिकारो द्वितियः' यह नोट और ही लेखनी
का है, काग़ज़ के ऊपर दिया गया है ।
(क) ८. परिधिः for (परिधि)
(च) १. +भतिथि २. रध्यायः for (रध्याय)
४. 'इति' से 'अध्यायः' तक अंकित नहीं है ।
( ४६ ) पूर्वापरयोर्विद्धो १ तुल्य छायाग्रयो दिग्पराद्याः २ । पूर्वान्यः ५ क्रान्तिवशात्तन्मध्यात् ४ शंकुतलमितरे ३ ॥ १ ॥ नृछायाग्रगजमत्स्य १ द्वयमध्यगसूत्रयोर्युतिर्यत्र २ । सोत्तरगोले याम्या ५ शंकुतला ३ दक्षिणे सौम्या ॥ २ ॥ छायाग्रभ्रमरेखा ६ सूत्रद्युतेर्वृ २ तपरिधिरग्रस्पृक् । मध्यछायान्तरमुद्गीतरं ३ वा ५ शंकुमण्डलयोः ४ ॥ ३ ॥
१. (घ) १. विद्ध (ग) विट् (क) विन्दु (ख) विन्दु for (विद्धो)
२. दिग्पराद्यः (ग) दिगपरार्धः (क) दिग्पराधः for (दिग्पराद्याः)
(ग) ३. शंकुतलमिनरे (क) (ख) for शंकुतलमितरे)
(क) ४. तन्मध्या (ख) तन्मध्य for (तन्मध्यात्)
(ख) २. दिग्पराद्यः for (दिग्पराद्याः)
५. मूर्धन्याः for (पूर्वान्यः)
(च) २. दिग् for (दिग्)
२. (घ) १. नृछायाग्रजमत्स्य (क) त्रिछायाग्रजमत्स्य (ख) त्रिछायाग्रजमत्स्य for (नृछाया-
ग्रजमत्स्य)
(ग) १. त्रिछायाग्रजमछ्य for (नृछायाग्रजमत्स्य)
२. युति for (र्युति)
३. शंकुतला (क) कुंतला for (शंकुतला)
(क) ४. यत्र for (यंत्र)
५. दाम्यात् for (याम्या)
(क्षेप) क्षेपक नत्काले द्विवरं क्रान्त्यो लंबेन भाजितं गुणयेत् ।
तत्कर्णेन छायायाः प्राचीलब्धां गुणैरयनैः ॥ २ ॥ इतिक्षेपः
(ग) यह श्लोक इसी 'प्रति' में वह भी 'क्षेप' के नाम से उपलब्ध है ।
(क) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
(च) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
३. (घ) १. युते (ग) (क) युते (ख) (च) for (द्युते)
२. वृत्तस्पक् (ग) वृत्त (ख) वृत्त (च) for (वृंत)
३. सुदगितरं (ग) मुदगिरद्वा (क) मुदगितरथा for (मुदगीतरं)
४. मंडल्यो (च) for (मंडलयोः)
(क) ५. 'वा' पद लुप्त है । (ख) द्वा
(ख) ६. 'ग्र' लुप्त है
७. मध्या for (मध्य) ३. मुदगितर for (मुदगीतरं)
( ५० ) छायावृत्ते¹ऽर्काग्रा कर्णांगुणा⁵ ब्यासदल हृताकार्ग्रा⁴ । विषुवच्छाया² याम्या तदन्तरैक्यं भुजस्याग्रे³ ॥ ४ ॥ शंकु⁵प्रा⁷च्यपरा¹ या छाया भुजकृतिविशेषमूलं नयत्² । तत्राच्य⁶पर⁸च्छाया भुजा³ग्रयो⁴रन्तरं⁵ कोटिः⁶ ॥ ५ ॥ दिग्मध्ये² छायाग्रं कृत्वा शंकोर्यथादिशं⁴ भ्रमराम् । दिग्मध्य⁵स्थितशकोः³ छायाग्रं भ्रमति¹ विपरीतम्⁶ ॥ ६ ॥
४. (घ) १. वृत्तेकर्ग्रा (ग) (ख) वृत्तेकप्रि for (वृत्तेऽर्काग्रा)
२. विषुवच्छायाम्या (ग) विषुवच्छायायान्या for (विषुवच्छाया याम्या)
३. भुजोस्याग्रे (ग) भुजोस्याग्रे (क) भुजोस्याग्रो for (भुजस्याग्रे)
(ग) ५. कार्णांगुणा for (कर्णांगुणा)
(क) २. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया)
(ख) ४. हताकार्ग्रा for (हृताकार्ग्रा)
३. भुजोस्याग्रे for (भुजस्याग्रे)
(च) १. वृत्तेक्रांग्रा for (वृत्तेऽर्काग्रा) ४. हृताक्रांग्रा for (हृताकार्ग्रा)
२. विषुवच्छा for (विषुवच्छाया) ३. भुजोस्याग्रे for (भुजस्याग्रे)
५. (घ) १. परयो (ग) परायाः (क) परायाः for (पराया)
२. 'न' इस प्रति में नहीं है। (ग) (क) (च)
४. भुजग्रयो for (भुजाग्रयो)
(ग) ५. शंकुः (ख) शकुः for (शंकु)
(क) ६. कौशि for (कोटिः)
(ख) ७. प्राच्या for (प्राच्य)
८. रन्तरे for (रन्तरं)
(च) ६. तत्प्राच्यां for (तत्प्राच्य) ४. भुजग्रयो for (भुजाग्रयो)
६. (घ) १. अवति (क) for (भ्रमति)
(क) २. दिगमध्य (ख) दिङ्मध्ये for (दिग्मध्ये)
३. शंकेश् (ख) शंको for (शंकोः)
(ख) ४. शांकोर्य्यथादिशं for (शंकोर्यथादिशं)
५. दिङ्मध्ये for (दिग्मध्य)
(च) ३. शकोः for (शंकोः)
६. विपरितं for (विपरीतं)
( ५१ ) शंकुलंबश्छायाक्षज्या तद्वर्गसंयुते मूलम् । विषुवत्कर्णच्छाया कर्णोत्त्यदा शंकुः ॥ ७ ॥ उन्नतजीवाकोटिः छाया हग्ज्या भुजो नतज्या वा । कर्णच्छायावृत्तं व्यासार्द्धं द्वयमतोन्यत्र ॥ ८ ॥
७. (घ) १. क्षय्या (ग) क्षज्य (ख) वज्या for (क्षज्या)
२. मूलंम् (च) for (मूलम्)
३. विषुव तिथिषुव (ग) विषुवति विषुवति for (विषुवत्)
४. कर्णोन्यदा (ग) (क) कर्णोऽन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
(ग) ५. शंकुलम्बः (क) शंकुलंबश (ख) शंकुलंब for (शंकुलंब)
६. कर्णाः छाया (क) कर्णाश्छाया for (कर्णच्छाया)
(क) ७. +विषुवति+(च)
(ख) ७. +विषुवति+
४. कर्णोन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
(च) १. क्षय्या for (क्षज्या) ४. कर्णोन्यदा for (कर्णोत्त्यदा)
८. (घ) १. कोटिच्छाया for (कोटिः छाया) (ख) उत्ततजोवकोटि for (उन्नतजीवा-
कोटिः)
२. यत्रः for (यत्र)
(ग) ३. दृक्ज्या (क) शध्या for (हग्ज्या)
४. भुजानतज्यावा for (भुजोनतज्यावा) (ख) भुज्या for (भुजो)
५. कर्णाः for (कर्ण)
(क) ६. वा (छ) यः for (छाया)
७. तस्या (ज्या) द्या for (तज्या वा)
८. वृत्तव्यसार्द्धं for (वृत्तं व्यासार्द्धं)
९. द्वयासन्नोऽस्यत्रम् for (द्वयमतोन्यत्र)
इसकी श्लोक संख्या ६ है, संभवतः यह मूल है ।
(ख) १०. सार्द्धं for (सार्धं)
(च) १. कोटि for (कोटिः) ३. हग्द्या for (हग्ज्या)
( ५२ ) शंकु छाया$^७$ कृत्योस्त्रिज्या कृतितत्समास$^५$ गुणहृतया$^१$ । मूलं$^२$ लम्बाक्ष्यज्येस्तदंशकास्तद्धनुर्भागाः$^३\ ^६\ ^४$ ॥ ६ ॥ विषुवत्कर्णाहते$^६$ वा शंकु छायागते$^३$ पृथक् । त्रिज्ये$^५$ त्रिज्येतर जीवा$^१$ लंबाक्षांसो क्रमज्योना$^२$ ॥ १० ॥
६. (घ) १. हृतयो (ग) हृतयोः (ख) हतयोः for (हृतया)
२. मूले (क) (ख) for (मूलं)
३. लंबाक्ष्यज्येतदंश (क) लबाक्ष्यस्थे for (लंबाक्ष्यज्येस्तदंश)
४. तर्द्धनुर्भागाः (क) सद्धक्रभागाः (ख) तद्धनुमागः for (तद्धनुर्भागाः)
(क) ५. नृत्यमासनस्य सूत्रयोः for (तत्समासगुणहृतया)
६. तदसंकाश (ख) तदशकास्व for (तदंशका)
इसकी श्लोक संख्या ८ है
(ख) ७. क्वाया for (छाया)
(च) ३. लम्बाक्ष्यजे for (लम्बाक्षजे) ६. तदंशका for (रतदंशका)
१०. (घ) १. जीवा वालंबाक्षांशो (क) (ख) जीवावलंबाक्षाशो for (जीवालंवाक्षांसो)
२. त्क्रमज्योना (क) कामावना (ख) कमज्योना for (क्रमज्योना)
३. छायाहृते (ग) (क) छायाहते (ख) हृते for (छायागते)
(ग) ४. लंबाक्षांशो for (लंबाक्षांसो)
(क) ५. त्रियेतर (ख) तिज्ये for (त्रिज्येतर) इसकी श्लोक संख्या ११ दी है।
परन्तु यह भूल प्रतीत होती है क्योंकि इसकी टीका के अन्त में १० लिखा
है।
(ख) ६. विषुत्वार्याहिते for (विषुवत्कर्णाहते)
(च) ३. छायाद्गते for (छायागते)
२. लंबाक्षांशोत्क्रमज्योना ।
( ५३ ) नवते⁴ ९०² लम्बांशात्प्रोज्य¹ ज्यौवेतराक्षलम्बज्ये⁵ । शंकुच्छायागुणिते छाया द्वादशहते वान्ये ॥ ११ ॥ लंबाक्षज्यावर्गं⁵ प्रोह्यज्या¹ कृतेः पदं वान्यौ²ः । अन्यत्र सर्वदोन्नत जीवांशा³ नयनमेव⁴ ॥ १२ ॥ इष्टदिनार्द्ध¹नतांश क्रान्त्यै²शैक्यांतरं³ क्रियतुलादौ⁴ । अक्षांशा⁵ याम्यायां⁶ छायायामंतरमजादौ⁷ ॥ १३ ॥ ११. (घ) १. लंबांशात्प्रात्सं ज्या (ग) लंबांशान् (क) लंबांशान् (त्) for (लंबांशात् प्रोज्यज्या) (ग) २. यह संख्या लुप्त है (क) ३. प्रोह्य ज्यवितराक्ष (क) प्रोह्यज्या (ख) प्राज्याज्यार्ध for (प्रोज्यज्यावे- तराक्ष) (क) ४. नवतै for (नवते) (ख) १. लंबकाशान् for (लम्बांशात्) ५. लंबज्यो for (लंबज्ये) (च) १. लंबांशात् for (लम्बांशात्) १२. (घ) १. प्रोक्तज्याकृतेः (ग) प्राज्यत्रिज्योकृतेः (क) प्रोह्य त्रिज्या for (प्रोह्यज्याकृतेः) २. वान्त्या (ग) (क) वान्यः for (वान्याः) ३. नतजीवांशा (ग) (क) (ख) नजीवांशा for (न्नतजीवांशा) ४. मेवम् (ग) (च) for (मेव) (ग) ५. वर्गं (ख) वर्ग for (वर्गं) (ख) १. प्रोज्या त्रिज्या for (प्रोह्यज्या) ४. नयनमवम् for (नयनमेव) (च) १. प्रोज्य for (प्रोह्य) २. वान्त्या for (वान्याः) १३. (घ) १. दिनार्द्धेन्नतांश (ख) दिनार्द्धेनातांश for (दिनार्द्धेनतांश) (ग) २. क्रान्ति (क) क्रान्त्यां (ख) क्रान्त्यै for (क्रान्त्यं) (ख) ३. शैक्यंतर for (शैक्यांतरं) ४. तुल्यादौ for (तुलादौ) ५. अक्षांश for (अक्षांशा) ६. षाम्यायां for (याम्यायां) ७. 'या' लुप्त है (च) १. दिनार्द्धन्नतांश for (दिनार्द्धेनतांश)
र्द्धं)Wait, look at line 2 of the main text:मेषवृषमिथुनजा स्वाहोरात्रार्द्धा चरदलप्राणान् ।Wait, does line 2 sayस्वाहोरात्रार्द्धाorस्वाहोरात्र्यार्द्धाorस्वाहोरात्रार्द्धं? It has स्वाहोरात्रार्द्धाorस्वाहोरात्र्यार्द्ध? Look at line 10: २. रात्रार्द्धं (ग) (क) रात्रर्धं (ख) रात्रार्थं for (रात्र्यार्द्धं)In line 14:(च) २. रात्रार्द्धं for (रात्र्यार्द्धं)Wait, why does the editor writefor (रात्र्यार्द्धं)? Look at line 2: स ् व ा ह ो र ा त ् र् य ा र् द्ध ा? Wait! Look at the letter after त: Is it त ् र ाorत ् र ् य ा? There is a vertical stem with a loop, like त्र्या! Wait, look at line 10: for (रात्र्यार्द्धं)! Look at line 14: for (रात्र्यार्द्धं)! The lemma in the footnote is (रात्र्यार्द्धं)`!
( ५५ )
स्वचरासुभिस्सूनयुता १६१७ क्रमोत् क्रमस्थैः क्रमोक्रमन्यस्ताः । उदयप्राणा व्यस्ताश्चार्कं तात्कालिकं कृत्वा ॥ १७ ॥ रविणा भुक्त्याराशेः कला गुणाः स्वोदयासुभिर्भक्ताः । राशिकलाभिर्लब्धा प्रश्नासुभ्योऽशवः शोध्याः ॥ १८ ॥
१७. (घ) १. रूनयुताः (ग) रूनयुताः (क) (ख) नूनयुता for (सूनयुता) २. + १७६५, १६३५, १६३५, १३६५, १६००+ ३. क्रमोक्रमन्यस्ताः (ग) (क) क्रमोत्क्रमास्ते (ख) क्रमोक्रमभ्यस्ताः for (क्रमोक्रमन्यस्ताः) (ग) २. यहाँ कोई संख्या नहीं दी गई । (ख) ४. स्ववरासुभिः for (स्वचरासुभि) ५. क्रमाक्रमो for (क्रमोत्क्रमस्थै) ६. : विसर्ग लुप्त हैं ७. रचार्क for (श्चार्कं) ८. 'कृत्वा' पद लुप्त है । (च
( ५६ ) ⁶प्रक्षिप्य ²राशय भुक्तं शेषां सुभ्यः ³क्रमेण ⁴यावंतः । ¹शुद्धांत्फदया सूर्ये ताव॑तो राशयः ⁵क्षेप्याः ।। १६ । ¹शेषांत्रिशत् ²गुणितानस्तन ⁴शुद्धोदया सुभिर्विभजेत् । ⁶लब्धंभागादिरवौ ³प्रक्षिप्य तथा कृते लग्नम् ।। २० ।।
१६. (घ) १. शुध्यंत् (ग) शुध्यत्युदयाः (क) शुध्यंत्युदयाः (ख) for (शुद्धांत्फदया)
(ख) २. राश for (राश्य)
३. क्रमण for (क्रमेण)
४. यावतः for (यावंत)
५. 'क्षेप्याः' पदलुप्त है ।
(च) ६. + १७६५ ⎫ पिछले श्लोक के फुटनोट में संख्याएं दर्शा दी गई हैं ।
१६३५ ⎪
१६३५ ⎬
१३६५ ⎪
१५०६ ⎭
१. शुद्धांत्युदयाः for (शुद्धांत्फदया)
२०. (घ) १. शेषांस्तुंशद् (ग) शेषांस्त्रिंशद् for (शेषांत्रिशत्)
२. गुणिताः श्येनस्तन for (गुणितानस्तन) (ग) नसून for (नस्तन)
(क) दविशुद्धस्योदयाः for (नस्तनशुद्धोदया)
(क) ३. प्रक्षेप्यं for (प्रक्षिप्य)
(ख) १. शेषास्त्रिशद्गुणा for (शेषांत्रिशत् गुणिता)
२. तसून for (नरतन)
४. शुद्धासुभि for (शुद्धोदयासुभिर्)
५. वित्तजेत् for (विभजेत्)
६. लब्धा for (लब्धं)
(च) १. शेषांत्रिशद्गुणिताः ३० नस्तन for (शेषां त्रिशत् गुणितानस्तन)
७. क्रम संख्या लुप्त
( ५७ ) रविराशयभुक्तलिप्तास्तदुदय गुणिता हता॑ ग्रह॑क॑लाभिः १८००। लब्धं प्राणास्थाप्याः प्रक्षिप्यार्के ग्रहाभुक्तम् ॥ २१ ॥ तावत्सूर्ये राशि न क्षिपेत्समो लग्नराशिभिर्यावत् । क्षिप्रग्रहाणां प्राणान् प्रक्षिप्य स्थापितेष्वसुषु ॥ २२ ॥ तदधिककालोदयवधराशि कलाभिर्भजेत् फलं प्राणान् । प्रक्षिप्य प्राणेषु प्राणाः सूर्योदयादसकृत् ॥ २३ ॥
२१. (घ) १. हृतो (क) हृता (ख) कृता for (हतो)
२. गृहकलाभिः (ग) (क) (ख) गृहकालाभिः for (ग्रहकलाभिः)
३. गृहाभुक्तम् (ग) (क) (ख) गृहामुक्तम् for (ग्रहाभुक्तम्)
४. रविराश्यभुक्त (ग) (क) (ख) रविराशिभुक्त for (रविराशयभुक्त)
(ग) ५. लब्धंप्रा
( ५८ ) प्रागुदयैः प्रश्नासुभिरूनोर्को भुक्तराशिभिर्लग्नम् । कृत्वैवमूनमर्कं लग्नसमं प्राग्भवेत्कालः ॥ २४ ॥ गतशेषालपास्याह्नः सौम्योत्तरगोलयोश्चरार्द्धेन । ऊनाधिकस्य जीवा स्वाहोरात्र्यार्द्धं संगुणिता ॥ २५ ॥ -- त्रिज्याहता युतोना क्षितिज्यया सौम्ययाम्ययोश्छेदः । छेदोवलम्बकगुणो व्यासाद्धं विभाजितः शंकुः ॥ २६ ॥ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 २४. (घ) १. भुक्तः (ग) भुक्ति for (भुक्त) (ग) २. प्रश्नाशुभि for (प्रश्नासुभि) ३. मूनमर्कं (ख) मूनमर्कलग्नसमं for (मूनमर्कं लग्नसमं) (ख) ४. रुभोको for (रूनोर्को) ५. लग्नम् for (र्लग्नम्) ६. कलः for (कालः) (च) ४. रूनोक्रों for (रूनोर्को) ३ मवर्के for (मर्कं) २५. (घ) १. गत शेषालपस्याह्नः (ग) गतशेखालपस्याह्नः for (गतशेषालपास्याह्नः) २. सौम्येतर (ग) (क) (ख) सौम्यैतर for (सौम्योत्तर) (ग) ३. रात्राद्धं (क) (ख) (च) for रात्र्यार्द्धं) (क) १. गतशेषालपस्याह्नः (ख) गतशोषालपस्याह्नाः for (गतशेषालपास्याह्नः) (ख) ४. चरार्द्धेनः for (चरार्द्धेनः) ५. ऊनाधिक़ास्य for (ऊनाधिकस्य) (च) १. गतशेषालपस्याह्नः for (गतशेषालपास्याह्नः) २. सौम्येतर for (सौम्योत्तर) २६. (घ) १. विभाजितशंकुः (च) for (विभाजितःशंकुः) २. त्रिज्याहृता (च) for (त्रिज्याहता) ३. छेदावलम्बकगुणो (च) for (छेदोवलम्बकगुणो) (ग) ४. छेद (क) याम्ययोश्छेदः (ख) for (याम्ययोश्छेदः) (ख) ५. व्यासार्धं for (व्यासाद्धं)
( ५६ ) विषुवत्कर्णविभक्तः १ छेद्यो वा द्वादशाहतः ३ शंकुः । शंकुकृति २ विहीनाया व्यासाद्धं कृतेः पदं दृग्ज्या ४ ॥ २७ ॥ दृग्ज्या द्वादश गुणिता ३ विभाजिता शंकुना ७ फल १ छाया । व्यासाद्धं ४ छेदहतं ५ विषुवत्कर्णाहतं ६ कर्णः ॥ २८ ॥ गुणितं वा द्वादशभिर्व्यासाद्धं २ शंकुनाहतं १ कर्णः । जीवा क्षयवृद्धिर्ज्याययुतहीना ज्या ३ क्रियतुल्यादौ ॥ २९ ॥ २७. (घ) १. विभक्तं (च) for (विभक्तः) २. शंकुकृतिविहीनाया (ग) (क) (ख) for (शंकुकृतिविहीनाया) (क) ३. हतः (ख) हतशंकुः for (हतःशंकुः) (ख) ४. फलं दृग्जा for (पदंदृग्ज्या) (च) द्वादशाहतः for (द्वादशाहतः) २. शंकुकृतिविहीनाया for (शंकुकृतिविहीनाया) २८. (घ) १. फलं (ग) (क) (ख) फलं for (फल) २. कर्णं for (कर्ण) ३. +१२+ (च) +१२+ (ग) ४. व्यासाद्धच्छेदहतं for (व्यासाद्धं छेदहतं) (क) ५. हतं (च) for (हतं) (ख) ७. शांकुला for (शंकुना) २६. (घ) १. हतं for (हतं) (ग) (क) (ख) हतकर्ण for (हतकर्णः) (क) २. व्यासाद्धं (ख) व्यासाधं for (व्यासाद्धं) (ख) ३. जा for (ज्या)
( ६० ) स्वाहोरात्र्यर्द्धं¹ गुणा⁷ व्यासार्द्धं² विभाजिताऽथवा छेदः । ₆शंक्वादि प्राग्वज्ज्या स्वाहोरात्र्यर्द्ध³धात⁵ कृता⁴ ॥ ३० ॥ व्यासार्द्धकृति¹ गुणिता² विषुवत्कर्णेन वा भवेत्³कर्णः । लम्बगुणो ₄घातः शंकु₆ व्यासार्द्धकृतिभक्तः⁵ ॥ ३१ ॥
३०. (घ) १. रात्रार्द्धं (ग) (क) (ख) रात्रार्धं for (रात्र्यर्द्धं)
२. व्यासार्धं (ग) (ख) for (व्यासार्द्धं)
३. राद्धं (ग) (क) रात्रार्थं (ख) for (रात्र्यर्द्धं)
४. हृता (ग) (क) हृता (ख) हता for (कृता)
(ग) ५. घात (क) (ख) for (धात)
६. शंकवादि for (शंक्वादि)
(ख) ७. गुण for (गुणा)
(च) १. रात्रार्द्धं for (रात्र्यर्द्धं) ४. हृता for (कृता)
३१. (घ) १. व्यासार्धकृति १०६६२६०० (ग) व्यासार्द्धकृति १०६६२६०० for (व्यासा-
र्द्धकृति)
२. गुंणिता (ग) (क) (च) for (गुणिता)
३. भवति (ग) (क) (ख) (च) for (भवेत्)
४. व्याघातः (ग) (क) वा घातः (ख) वाघतः for (घातः)
५. कृतिवक्तः (ग) कृतिभुक्तः for (भक्तः)
(ग) ६. शंकुर्व्यासार्द्धं (क) (ख) शंकुव्यासार्धं for (शंकुव्यासार्द्धं)
(ख) १. व्यासार्धकृति १०६६२६०० for (व्यासार्द्धकृति) २. गुंणिता for (गुणिता)
४. व्याघातः for (घातः)
( ६१ ) घातोवार्कगुणाँ⁴ १२ स्त्रिंज्या विषुवत्कर्ण¹बंधः² हतः³ शंकुः । कर्णकृते⁵ संशोध्य द्वादशवर्ग १४४ पदं छाया⁶ ॥ ३२ ॥ अल्पप्रश्नासूनां² यदि बहवश्चरदलासवः क्षितिजा । हतयोना¹ जीवोना क्षयवृद्धिज्योक्तवच्छेषं³ ॥ ३३ ॥ स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः¹ क्षितिज्यया⁶ युतविहीनं । द्युदलान्त्यज्या²भिज्य³ क्षयवृद्धिर्ज्या⁴ युतोनांत्या⁵ ॥ ३४ ॥
३२: (घ) १. कर्णाः (च) for (कर्ण)
२. वधः (ग) वध (क) for (बंधः) (ख) 'बंध' पद लुप्त है।
३. हृतः (ग) (क) (च) for (हतः)
(ग) ४. गुणास्त्रिज्या (क) (ख) for (कृते)
५. कृतेः (क) (ख) गुणास्त्रिज्या for (गुणा १२ स्त्रिंज्या)
६. छायाः for (छाया)
(क) संख्याएँ मूल में अंकित नहीं हैं ।
(ख) ७. संशोद्ध्या for (संशोध्य)
८. वर्गंगयछाया for (वर्ग १४४ पदं छाया)
(च) ४. घातोवार्कगुणा १२ for (घातोवार्कगुणा १२) २. वधः for (बंधः)
१. कर्णाः for (कर्ण)
३३. (घ) १. हृतयोना (ग) (च) for (हतयोना)
(ग) २. अल्पप्रश्नासूना for (अल्पप्रश्नासूनां)
(क) मूल श्लोक अंकित नहीं है—केवल टीका लिखी हुई है।
(ख) ३. छाषम् for (छेषम्)
३४. (घ) १. उदकदक्षिणयोः (ग) स्वाहोरात्रामुदग्दक्षिणयोः (ख) for (स्वाहोरात्रार्द्धमुद-
कदक्षिणयोः)
(ग) २. द्युदलांतिज्या for (द्युदलान्त्यज्या)
३. त्रिज्या (क) (ख) त्रिज्या (च) for (भिज्या)
४. वृद्ध्य for (वृद्धिर्ज्या)
५. नांत्याः for (नांत्या)
(क) १. स्वाहोरात्रार्धमुदग्दक्षिणयोः for (स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः)
६. क्षितिजया (ख) पितिज्यया for (क्षितिज्यया)
(च) १. मुदग्दक्षिणयोः for (मुदकदक्षिणयोः)
( ६२ ) छेदहता^[१]^ द्युदलांत्या दिनार्द्ध^[४]^ कर्णेन वा कर्णाः^[२]^ । भक्ता ज्यया ऽथवाऽन्त्या दिनार्द्ध कर्णा हृता^[३]^ कर्णाः ॥ ३५ ॥ द्युदलान्नतो^[१]^ क्रमज्या स्वाहोरात्रार्द्धा^[४]^ संगुण विभजेत् । व्यासार्द्धेन फलोना^[५]^ द्युदलान्त्ययाथवा^[३]^ छेदः ॥ ३६ ॥ अन्त्यानतो^[१]^ क्रमज्या हीनां ज्या षट् पृथक्^[२]^ छेदः^[३]^ । ज्याभ्यां^[४]^ च सह फलानि छाया नयनानि षट्^[६]^ त्रिंशत् ॥ ३७ ॥
३५. (घ) २. वा गुणा for (वा) (ग) संगुणा for (वा) (क) संगुणा for (वा) (ख)
कर्णाः for (वाकर्णाः)
१. छेदहता (ग) (क) (च) for (छेदहता)
(ग) ३. कर्णांहता (क) कर्णांहिता (ख) कर्णाः हता for (कर्णाहृता)
(ख) ४. नबागुणाः for (र्द्धकर्णेन)
(च) २. वागुणाकर्णाः for (वाकर्णाः)
३६. (घ) १. द्युदलान्ततोत्क्रमज्यां (ग) (क) (च) for (द्युदलान्नतो क्रमज्या)
२. स्वाहारात्रार्ध संगुणं विभजेत् । (ग) स्वाहोरात्रार्द्धंसंगुण विभजेत् for
(स्वाहोरात्रार्द्धं संगुणा विभजेत्)
३. दलान्त्य ज्याथवा for (द्युदलान्त्ययाथवा)
(ग) ३. दलान्त्यज्या यथा (क) द्युदलान्त्यज्याथवा (ख) for (द्युदलान्त्ययाथवा)
(क) ४. संगुणाम् (ख) संगुणं for संगुणा
(ख) १. द्युदलन्नतोरुकमजां for (द्युदलान्नतो क्रमज्या)
२. स्वाहोरात्रार्द्धं for (स्वाहोरात्रार्द्धं)
५. फलेना for (फलोना)
(च) २. स्वाहोरात्रार्द्धं for (स्वाहोरात्रार्द्धं)
४. संगुणां for (संगुणा)
३७. (घ) १. अन्त्यानतोत्क्रमज्याहीना (ग) (क) (ख) for (अन्त्यानतो क्रमज्याहीनां)
३. छेदाः (ग) (ख) छेदा for (छेदः)
(च) ४. 'च' अतिरिक्त पाठ
५. फलनि for (फलानि)
६. ष्टट्त्रिंशत् for (षट्त्रिंशत्)
(च) १. अन्त्यानतोत्क्रमज्याहीन for (अन्त्यानतो क्रमज्याहीनां) ३ छेदाः for (छेदः)
( ६३ ) छाया कर्णविभक्ता⁴ विषुवत्कर्णेन संगुणा² नृज्या¹ । लब्धं सौम्येतरयोः⁵ क्षितिज्यया⁶ हीनसंयुक्तं³ ॥ ३८ ॥ गुणितं व्यासाद्धेन स्वाहोरात्राद्धं¹ भक्तमाप्तधनुः² । उत्तर गोले युक्तं याम्ये हीनं चरप्राणैः³ ॥ ३९ ॥ दिनगतशेषच्छेदप्राणाः³ ⁴ प्रागपरदिनाद्ध॑योविशोध्याप्तम्⁶ । व्यासाद्धे¹ छेषो⁵ क्रमजीवा चापं नताः² प्राणाः ॥ ४० ॥ स्वाहोरात्राद्धेन छायाकर्णार्हतेन² भक्ताया¹ । विषुवत्कर्णं³ गुणण्या व्यासाद्ध॑कृतेः⁴ फलं सौम्ये ॥ ४१ ॥
३८. (ग) १. त्रिज्या (क) (ख) त्रिज्या for (नृज्या)
(क) २. संगुण for (संगुणा)
३. संयुक्तम् (ख) for (संयुक्तं)
(ख) ४. विभक्त for (विभक्ता)
५. सौम्येतरयो for (सौम्येतरयोः)
६. ज्याया for (ज्यया)
३९. (ख) १. रात्रार्द्ध for (रात्राद्धं)
२. भक्तमप्तधनुः for (भक्तमाप्तधनुः)
३. प्राणै for (प्राणैः)
४०. (घ) १. व्यासाद्धच्छिषोत्क्रम (ग) व्यासाद्धर्द्धातिशेषोत्क्रम for (व्यासाद्धे छेषोक्रम)
२. नता (क) नत for (नताः)
(ग) ३. शेषप्राणः (क) शेषप्राणाः for (शेषच्छेद प्राणाः)
(क) ४. 'च्छेद' पद लुप्त है । (ख)
५. शेषोत्क्रम (ख) छेषोत्क्रम for (छेषोक्रम)
(ख) ६. विशोध्यत्तम् for (विशोध्याप्तम्)
(च) १. व्यासाद्धच्छिषोत्क्रम for (व्यासाद्धे छेषो क्रम)
४१. (ग) १. भक्तायाः (क) (ख) for (भक्ताया)
(ख) २. कर्णाहतेन for (कर्णार्हतेन)
(ख) ३. विषुवत्कर्णा for (विषुवत्कर्णं)
४. गुणाय for (गुणण्या)
५. कृते for (कृतेः)
( ६४ ) क्षयवृद्धिद्विज्याहीनं युक्तं याम्ये² धनुश्चरप्राणैः³ ।⁴ सौम्येयुतं विहीनं याम्ये प्रागपरयोः⁵ प्राणाः¹ ।। ४२ ।। अह््नोगताऽवशेषाः³ फलमन्त्याया विशोध्य शेषस्य । धनुरुत्क्रमजीवाभिः¹ पूर्वापरयोर्नताः² प्राणाः⁴ ।। ४३ ।। दिनदलकरणगुणान्त्य³ छायाकर्णोद्धृता⁴ फलोनान्त्या² । शेषस्योत्क्रमजीवा⁵ धनुर्दिनाद्ध्र्नताः¹ प्राणाः ।। ४४ ।। चरदल जीवोनाधिक फल क्रमज्यो¹ धनुश्चरार्द्धेन । युतहीनं पूर्वाह्ने³ दिवसगतं शेषं⁴ अपराह्ने² ।। ४५ ।।
४२. (क) १. प्राणैः (ख) प्राणः for (प्राणः)
(ख) २. याम्यो for (याम्ये)
३. धनुशर for (धनुश्चर)
४. प्रणै for (प्राणैः)
५. प्रागपरयो for (प्रागपरयोः)
४३. (घ) १. धनुरुत्क्रमजीवाभिः (ग) (क) (ख) (च) for (धनुरुत्क्रमजीवाभिः)
(ग) १. नंन्ता (क) नत for (नंताः)
(क) ३. अह््नोगतावशेषात् (ख) अह््नोगतावशेषा for (अह््नोगताऽवशेषाः)
(ख) ४. प्राणः for (प्राणाः)
(च) ३. अवग्रहचिह्न लुप्त
४४. (घ) १. दिनाद्धान्नताः for (दिनाद्ध्र्नताः) (ग) (क) दिनाद्ध्नत for (दिनाद्ध्र्नताः)
(ग) २. नान्त्या (ख) नान्त्या for (नान्त्या)
(ख) ३, गुणान्त्या
४. कर्णाद्वृता for (कर्णोद्धृता)
५. जीव for (जीवा)
१. दिनाधोन्नतप्राणः for (दिनाद्ध्र्नताः प्राणाः)
(च) १. धनुर्दिनाद्धन्निताः for (धनुर्दिनाद्ध्र्नताः)
४५. (घ) १. क्रमज्या (ग) (क) (ख) क्रमज्या for (क्रमज्यो)
२. शेषमपराह्ने (ग) (ख) शेषमपराह्वे (च) for (शेषं अपराह्ने)
(ग) ३. पूर्वाह्वे (ख) पूर्वाह्न for (पूर्वाह्ने)
(ख) ४. विवसगतं for (दिवसगतं)
( ६५ ) उत्क्रमजीवाभ्यधिक क्रमज्यया संयुक्तं (तं) धनुर्धनुषां । व्यस्तविशुद्धौ हीनाश्चरांसवः पूर्ववच्छेषं ॥ ४६ ॥ दिनमध्यार्का क्रांत्याक्षभागयोगांतरं सामान्यदिशोः । नतभागा नवते प्राक् ज्योन्नताः शेषाः ॥ ४७ ॥ नतभागज्या द्वादशगुणोन्नतांशज्यया हृताल्लब्धम् । इष्टदिनार्द्धच्छाया यथोक्तकरणैर्द्दिनार्द्धाद्वा ॥ ४८ ॥ ४६. (घ) १. संयुतम् (ग) (क) (ख) संयुते for (संयुक्तं) २. चरासवः (ग) (क) (ख) (च) for (चरांसवः) ३. पूर्ववच्छेषं (ग) पूर्ववत्सेषम् for (पूर्ववच्छेषं) ५. व्यक्त for (व्यस्त) (ज) १. संयुतं for (संयुक्तं) ६. धनुर्द्धनुषा for (धनुर्धनुषां) ४७. (घ) १. दिनमध्यार्क (
( ६६ ) उन्नतजीवाभक्तं⁴ व्यासार्द्धं⁵ द्वादशाहतं³ कर्णः । मध्यच्छायाकर्ण¹द्वादशक्रान्त्यन्तरं² पदं वा ॥ ४६ ॥ कुदलांत्याज्या¹ छेदोमध्यछाया यथोक्तकरणैर्वा । अन्त्याज्या⁴ छेदाद्यं⁵ मध्यच्छायाऽथवा बहुधा । ५० ॥ विषुवत्करणेन⁶ गुणा¹ विषुवच्छाया हतोत्तरा क्रान्तिः । यद्युनाक्षक्षज्याया³ शकुसममंडलस्थेऽर्के⁵ ⁴ ⁷ ॥ ५१ ॥
४६. (घ) १. छायाम् for (छाया)
\hspace{1.8cm} २. कृत्यन्तरपदम् (ग) (क) कृत्यन्तरपदं वा for (क्रान्त्यतरं पदं वा)
\hspace{1.8cm} ३. द्वादशाहतं ११ for (द्वादशाहतं)
\hspace{0.9cm} (ग) ४. भुक्तं for (भक्तं)
\hspace{0.9cm} (ख) ५. व्यासार्ध for (व्यासार्द्धं)
\hspace{1.8cm} १. 'मध्यच्छायाकर्णं' पद लुप्त हैं।
\hspace{1.8cm} २. कृतंतर for (क्रान्त्यतरं) यहां दूसरी पंक्ति 'द्वादश' से आरम्भ है।
\hspace{0.9cm} (च) १. छायां for (छाया) २. कृत्यंतरपदं वा for (क्रान्त्यतरं पदं वा)
५०. (घ) १. घुदलां (ग) (क) (ख) (च) for (कुदलां)
\hspace{0.9cm} (ग) २. त्यज्या (क) (ख) for (त्याज्या)
\hspace{1.8cm} ३. वरगौर्वा (ख) करणौ वाः for (करणैर्वा)
\hspace{0.9cm} (क) ४. अन्त्यज्या (ख) अत्याज्याः for (अन्त्याज्या)
\hspace{0.9cm} (ख) ५. मध्यछाया for (मंध्यछाया)
\hspace{0.9cm} (च) ६. अवग्रह चिह्न लुप्त
५१. (घ) १. विषुवच्छाया (ग) (ख) 'विषुवच्छाया for (विषुवत्छाया)
\hspace{1.8cm} २. हतोत्तरा for (हतोत्तरा) (क) छायोद्धूतोत्तरा for (छायाहतोत्तरा)
\hspace{1.8cm} ३. यदूनाक्षय्याया (ग) यूनाअज्यायाः (क) यदूनाक्षज्यायाः for (यद्युनाक्ष-
\hspace{2.3cm} क्षज्याय)
\hspace{1.8cm} ४. समं (च) for (सम)
\hspace{0.9cm} (ग) ५. शंकुः (क) (ख) 'शंकु' लुप्त पद for (शंकु)
\hspace{0.9cm} (क) ६. बिषुवत्कर्णन for (विषुवत्करणेन)
\hspace{1.8cm} ३. यदूनाक्षज्यायाः for (यद्युनाक्षक्षज्याया)
\hspace{1.8cm} ७. मंडलास्थेर्के for (मंडलस्थे ऽर्के)
\hspace{0.9cm} (च) १. विववच्छाया for (विषुवत्छाया)
\hspace{1.8cm} २. हृतोत्तरा for (हतोत्तरा) ३ यदूनाक्षज्याया for (यद्युनाक्षक्षज्याया)
या? No. Wait, let's look at line 9 again very carefully: २. विषुवच्छाया (ग) for (विषुवच्छाया)Wait, look at(विषुवच्छाया)in line 9: Wait! Is thatघ्छाया? Look at (विषुवच्छाया)in line 9: Wait, the loop on the left ofछ: In line 2 of the verse: विषुव²च्छाया- wait, the footnote number२is right aboveच्छ! विषुव²च्छायाCould it beविषुवच्छाया? Wait, why would it say २. विषुवच्छाया (ग) for (विषुवच्छाया)? Wait, look at the letters in line 9: २ . वि षु व च्छा या ( ग ) f o r ( वि षु व च्छा या )Wait, look at the first word: is thatविषुवच्छाया? Wait, is there a dot? No. Let's look at line 9 in comparison with line 18: Line 18: १. विषुवच्छाया (ग) (च) for (विषुवघ्छाया)Wait, in line 18, it's definitelyविषुवघ्छाया` in parentheses! Look at the