संग्रह पर लौटें




















रसरत्नसमुच्चय (सुरत्नोज्ज्वला हिन्दी व्याख्या सहित)
Rasaratna Samuchchaya Hindi
रस-वाग्भटाचार्य (टीकाकार: पं. अम्बिकादत्त शास्त्री) द्वारा
स्रोत: Rasaratna Samuchchaya with Suratnojjvala Hindi Commentary by Pt. Ambika Datta Shastri (1939) (उद्गम)
DevanagariHindipublished362 पृष्ठ
पृष्ठ 30स्थायी लिंक
[ १२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सत्त्वलक्षणम् | २३१ | उत्थापनादिलक्षणम् | २३७ |
| एककोलिसकलक्षणम् | ” | बन्धनलक्षणम् | ” |
| द्रावणादिकर्मसाधनेकाष्ठनिर्देशः | ” | पातनलक्षणम् | ” |
| हिङ्गुलाकृष्टो रसः | ” | रोधनलक्षणम् | २३८ |
| घोषाकृष्टताम्रलक्षणम् | ” | नियमनलक्षणम् | ” |
| वरनागलक्षणम् | २३२ | दीपनलक्षणम् | २३९ |
| उत्थापनलक्षणम् | ” | ग्रासमानम् | ” |
| ढालनलक्षणम् | ” | जारणाभेदनिर्देशः | ” |
| नागसम्भूतचपलः | ” | निर्मुखजारणालक्षणम् | २४० |
| वङ्गसम्भूतचपलः | २३३ | बीजादिनिर्देशः | ” |
| चपलकार्यम् | ” | मुखलक्षणम् | ” |
| बद्धरसोपयोगः | ” | सम्मुखजारणालक्षणम् | ” |
| धौतम् | ” | राक्षसवरसलक्षणम् | ” |
| द्वन्द्दानम् | २३४ | चारणालक्षणम् | २४१ |
| भञ्जनी | ” | गर्भद्रुतिलक्षणम् | ” |
| चुल्लका | ” | बाह्यद्रुतिलक्षणम् | ” |
| पतङ्गीरागः | ” | द्रुतेर्भेदाः | ” |
| आवापः | ” | द्रुतेः स्वरूपम् | ” |
| अभिषेकः | २३५ | जारणाभेदः | ” |
| निर्वापलक्षणम् | ” | जारणालक्षणम् | ” |
| प्रतिवापसमयनिर्देशः | ” | बिडादिलक्षणम् | २४२ |
| शुद्धावर्तः | ” | रञ्जनलक्षणम् | ” |
| बीजावर्तः | ” | सारणालक्षणम् | ” |
| स्वाङ्गशीतलम् | ” | वेधलक्षणं भेदाश्च | ” |
| बहिःशीतलम् | २३६ | लेपवेधलक्षणम् | २४३ |
| स्वेदनलक्षणम् | ” | क्षेपवेधलक्षणम् | ” |
| मर्दनलक्षणम् | ” | कुन्तवेधलक्षणम् | ” |
| मूर्च्छनलक्षणम् | ” | धूमवेधलक्षणम् | ” |
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[ १३ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शब्दवेधलक्षणम् | २४४ | प्रकारान्तरम् | २५४ |
| उद्घाटनलक्षणम् | ,, | नालिकायन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनलक्षणम् | ,, | भूधरयन्त्रम् | ,, |
| सन्न्यास लक्षणम् | ,, | पुटयन्त्रम् | ,, |
| रसस्वेदसन्यासगुणाः | २४५ | कोष्ठीयन्त्रम् | २५५ |
| परिभाषाऽऽवश्यकता | ,, | वलभीयन्त्रम् | ,, |
| अध्यायपठनफलम् | ,, | तिर्यक्पातनयन्त्रम् | २५६ |
| नवमोऽध्यायः । | पालिकायन्त्रम् | ,, | |
| यन्त्राणि | २४६ | घटयन्त्रम् | ,, |
| यन्त्रशब्द निरुक्तिः | ,, | इष्टिकायन्त्रम् | २५७ |
| दोलायन्त्रम् | ,, | हिङ्गुलाकृष्टिविद्याधरयन्त्रम् | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रम् | २४७ | डमरुयन्त्रम् | २५८ |
| पातनायन्त्रम् | ,, | नालियन्त्रम् | ,, |
| अधःपातनयन्त्रम् | २४८ | तोयमृल्लक्षणम् | ,, |
| कच्छपयन्त्रम् | ,, | वह्निमृत्सा | २५९ |
| दीपिकायन्त्रम् | ,, | शेषनाभियन्त्रवर्णनम् | ,, |
| ढेकीयन्त्रम् | २४९ | ग्रस्तयन्त्रम् | ,, |
| जारणायन्त्रम् | ,, | स्थालीयन्त्रम् | २६० |
| जारणायन्त्रस्य– | ,, | धूपयन्त्रम् | ,, |
| प्रकारान्तरम् | २५० | कन्दुकयन्त्रम् | २६१ |
| विद्याधरयन्त्रम् | २५१ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सोमानलयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रम् | २६२ |
| गर्भयन्त्रम् | ,, | खल्लयन्त्रस्य त्रैविध्यनिर्देशः | ,, |
| हंसपाकयन्त्रम् | २५२ | द्विविधखल्लयोः सामान्यलक्षणम् | ,, |
| बालुकायन्त्रम् | २५३ | अर्धचन्द्राकृतिकखल्लनिर्देशः | ,, |
| बालुकायन्त्रस्य प्रकारान्तरम् | ,, | वर्तुलखल्लनिर्देशः | २६३ |
| लवणयन्त्रम् | ,, | तप्तखल्लप्रमाणनिर्देशः | ,, |
| तप्तखल्लविधिः | ,, |
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[ १४ ]
दशमोऽध्यायः ।
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| मूषादिकथनम् | २६४ | मूसलाख्यमूषा | २७१ |
| मूषायाः पर्यायाः | ,, | कोष्ठिकानिर्देशः | ,, |
| मूषाया निरुक्तिः | ,, | अङ्गारकोष्ठी | २७२ |
| मूषाया उपादानम् | २६५ | पातालकोष्ठी | २७३ |
| मूषा शंसा | ,, | गारकोष्ठी | ,, |
| सन्धिलेपस्य पर्यायाः | ,, | वङ्कनालम् | २७४ |
| मूषोपयुक्तमृत्तिका | ,, | मूषाकोष्ठी | ,, |
| मतान्तरम् | २६६ | पुटस्य लक्षणम् | २७५ |
| मूषामृत्तिकायां संयोज्यद्रव्याणि | ,, | पुटस्य फलम् | ,, |
| वज्रमूषा | ,, | महापुटम् | २७७ |
| योगमूषा | ,, | गजपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणीमूषा | २६७ | वाराहपुटम् | २७८ |
| गारमूषा | ,, | कुक्कुटपुटम् | ,, |
| वरमूषा | ,, | कपोतपुटम् | ,, |
| वर्णमूषा | २६८ | गोर्वरस्वरूपम् | ,, |
| रौप्यमूषा | ,, | गोर्वरपुटलक्षणम् | २७९ |
| विडमूषा | ,, | भाण्डपुटम् | ,, |
| वज्रद्रावणमूषा | ,, | बालुकापुटम् | ,, |
| मूषाऽऽप्यायनम् | २६९ | भूधरपुटम् | २८० |
| वृन्ताकमूषा | ,, | लावकपुटम् | ,, |
| गोस्तनीमूषा | २७० | अनुक्तपुटमानेकर्त्तव्यनिर्देशः | २८१ |
| मल्लमूषा | ,, | उपलपर्यायाः | ,, |
| पक्कमूषा | ,, | कृत्रिमाकृत्रिमलौहनिर्देशः | ,, |
| गोलमूषा | ,, | षल्लवणानि | २८२ |
| महामूषा | २७१ | क्षारत्रयम् | ,, |
| मण्डूकमूषा | ,, | क्षारपञ्चकम् | ,, |
| मधुरत्रयम् | २८३ |
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[ १५ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| रसकर्मणितैलाहरणोपयोगिद्रव्याणि | २८३ | व्याधिविशेषेरसप्रयोगनिषेधः | २९३ |
| वसावर्गः | ,, | शुद्धमूर्च्छितरसगुणाः | ,, |
| मूत्रवर्गः | ,, | मृतपारदगुणाः | ,, |
| माहिषपञ्चकच्छागलपञ्चकयोर्निर्देशः | २८४ | रसदोषास्तेषां कार्याणि च | ,, |
| अम्लवर्गः | ,, | संस्कारार्थं पारदस्य परिमाणनिर्देशः | २९४ |
| अम्लपञ्चकम् | ,, | स्वेदनसंस्कारः | २९५ |
| पञ्चमृत्तिका | २८५ | मर्दन संस्कारः | २९६ |
| विषवर्गः | ,, | मूर्च्छनसंस्कारः | २९७ |
| उपविषवर्गः | २८६ | उत्थापनसंस्कारः | २९८ |
| दुग्धवर्गः | ,, | पातनसंस्कारः | २९९ |
| विड्वर्गः | २८७ | उर्द्ध्वाधः पातनयोः सङ्ख्यानिर्देशः | ३०० |
| रक्तवर्गः | ,, | अधःपातनविधिः | ,, |
| पीतवर्गः | २८८ | पातने प्रकारान्तराणि | ,, |
| श्वेतवर्गः | ,, | तिर्यक्पातनम् | ३०१ |
| कृष्णवर्गः | ,, | मर्दनादीनां गुणाः | ३०३ |
| रक्तवर्गादीनां प्रयोजननिर्देशः | ,, | निरोधसंस्कारः | ,, |
| शोधनीयगणः | ,, | नियमनसंस्कारः | ३०४ |
| लौहमलनाशनगणः | २८९ | प्रकारान्तरम् | ३०५ |
| लौहकाठिन्यनाशकयोगः | ,, | दीपनसंस्कारः | ,, |
| द्रावकवर्गः | ,, | प्रकारान्तरेण दीपनम् | ३०६ |
| क्षारादिकानां कार्यम् | ,, | रसभावनादौ मूलिन्यः | ३०७ |
| एकादशोऽध्यायः। | सूतसंस्कारकार्यत्वनिर्देशः | ३०९ | |
| रसशोधनादिकथनम् | २९० | रसबन्धनप्रतिज्ञा तस्य व्युत्पत्तिश्च | ,, |
| मानपरिभाषा | ,, | रसबन्धाः | ,, |
| मानपरिभाषायां मतान्तरम् | २९१ | हठबन्धः | ३१० |
| अष्टादशसंस्काराः | २९२ | आरोटबन्धः | ,, |
पृष्ठ 34स्थायी लिंक
[ १६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| आभासबन्धः | ३११ | प्रकारान्तरेण जलूकानिर्माणम् | ३२३ |
| क्रियाहीनबन्धः | ३१२ | प्रकारान्तरम् | ३२४ |
| पिष्टिकाबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| क्षारबन्धः | ,, | प्रकारान्तरम् | ३२५ |
| खोटबन्धः | ३१३ | प्रकारान्तरम् | ३२६ |
| पोटबन्धलक्षणम् | ,, | योनिद्रावणम् | ,, |
| कल्कबन्धलक्षणम् | ,, | मदनवलयम् | ३२७ |
| कजलीबन्धलक्षणम् | ३१४ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सजीवबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्म | ३२८ |
| निर्जीवबन्धलक्षणम् | ३१५ | प्रकारान्तरम् | ,, |
| निर्बीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| सबीजबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| शृङ्खलाबन्धलक्षणम् | ३१६ | प्रकारान्तरम् | ३२९ |
| द्रुतिबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| बालकबन्धलक्षणम् | ३१७ | प्रकारान्तरम् | ३३० |
| कुमारबन्धलक्षणम् | ,, | प्रकारान्तरम् | ,, |
| तरुणबन्धलक्षणम् | ३१८ | रसभस्मविधिः | ३३१ |
| वृद्धबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि पथ्यम् | ३३२ |
| मूर्तिबन्धलक्षणम् | ,, | पारदभस्मनि कुपथ्यम् | ,, |
| जलबन्धलक्षणम् | ३१९ | देवीशास्त्रोक्तककरादिगणः | ३३३ |
| अग्निबन्धलक्षणम् | ,, | श्रीकृष्णदेवोक्तककरादिगणः | ३३४ |
| सूतानां मूर्च्छाकल्पः | ,, | ककारादिनिषेधस्यापवादः | ३३५ |
| महाबन्धलक्षणम् | ३२१ | पारदविकार उपायाः | ,, |
| जलूकाबन्धः | ,, | रससेवने उपचारविधिः | ,, |
| क्रियाविशेषेण जलूकाया गुणविशेषः | ३२२ | द्वादशोऽध्यायः । | |
| जलूकायाः त्रिविधप्रमाणनिर्देशः | ,, | ज्वरचिकित्सा | ३३६ |
| जलूकायाः संस्कारविशेषः | ३२३ | रोगगणना | ,, |
पृष्ठ 35स्थायी लिंक
[ १७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| वातज्वरलक्षणम् | ३३७ | चातुर्थिकगजाङ्कुशरसः | ३६८ |
| पित्तज्वरलक्षणम् | ३३८ | मृत्युञ्जयरसः | ३६९ |
| कफज्वरलक्षणम् | ,, | पञ्चवक्त्ररसः | ,, |
| द्विदोषजत्रिदोषजज्वरकथनम् | ३३९ | उन्मत्तरसः | ३७० |
| त्रैलोक्यसुन्दररसः | ३४० | सन्निपाताञ्जनरसः | ,, |
| त्रैलोक्यडम्बररसः | ३४१ | नस्यम् | ३७१ |
| मेघनादरसः | ३४३ | प्रतापलङ्केश्वररसः | ,, |
| ज्वरगजहरिरसः | ,, | प्राणेश्वररसः | ३७३ |
| दीपिकारसः | ३४४ | मृतसञ्जीवनरसः | ३७४ |
| शीतभञ्जीरसः | ३४५ | द्वितीयमृतसञ्जीवनरसः | ३७५ |
| प्रकारान्तरेण शीतभञ्जीरसः | ३४६ | सन्निपातकुठाररसः | ३७६ |
| मृतजीवनरसः | ३४७ | नवज्वरारिरसः | ३७७ |
| वृद्धज्वराङ्कुशरसः | ३४९ | जलमञ्जरीरसः | ३७८ |
| महाज्वराङ्कुशरसः | ,, | कान्तरसः | ३७९ |
| मृत्युञ्जयरसः | ३५१ | चन्द्रोदयरसः | ,, |
| सर्व्वज्वरादिरसः | ,, | जीर्णज्वरारिरसः | ३८० |
| चन्द्रसूर्यरसः | ३५२ | नवज्वरमुरारिरसः | ३८१ |
| विषप्रयोगायोग्यनिर्देशः | ३५३ | त्रयोदशोऽध्यायः। | |
| उमाप्रसादनोरसः | ३५४ | रक्तपित्तम् | ३८४ |
| ज्वराङ्कुशरसः | ३५५ | रक्तपित्ताङ्कुशरसः | ३८५ |
| सर्वाङ्गसुन्दरचिन्तामणिरसः | ३५६ | चन्द्रकलारसः | ३८६ |
| लोकनाथगुटिका | ३५७ | पटोलादियोगः | ३८८ |
| सूचिकाभरणरसः | ३५९ | रसेन्द्रयोगः | ३८९ |
| शार्ङ्गष्टादिवर्गः | ३६४ | अन्यश्च | ,, |
| सूचीमुखरसः | ३६५ | नवनीतादियोगः | ,, |
| सन्निपातगजाङ्कुशरसः | ३६६ | शिरोलेपः | ,, |
| चातुर्थिकहरो रसः | ३६७ | द्राक्षादिक्वाथः | ३९० |
३ र० स०
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[ १८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| योगद्वयम् | ३९० | कज्जलयोगः | ४०७ |
| सितामृता | ,, | शिलापूतरसः | ,, |
| कासः | ,, | मन्थानभैरवरसः | ४०९ |
| कासनाशनरसः | ३९१ | विश्वादिवटिका | ४१० |
| कासहररसः | ,, | सामान्योपचाराः | ४११ |
| रक्तकाण्डरसः | ३९२ | तत्र रास्नादिक्षीरम् | ,, |
| भूताङ्कुशरसः | ३९३ | हिक्काघ्नधूमः | ,, |
| बोलबद्धरसः | ३९४ | गन्धपाषाणयोगः कफेभेषजविशेषनिर्देशश्च | ४१२ |
| अग्निरसः | ३९५ | स्वरभङ्गः | ,, |
| स्वयमग्निरसः | ,, | पर्पटीरसः | ४१३ |
| सामान्योपायाः | ३९६ | कफरोगे क्रियासूत्रम् | ४१७ |
| भृङ्गराजयोगः | ,, | चतुर्दशोऽध्यायः । | |
| अर्कादियोगः | ,, | राजयक्ष्मा | ,, |
| कासघ्नधूमद्वयम् | ,, | कनकसुन्दररसः | ४१८ |
| क्षयकासान्तकयोगः | ३९८ | राजमृगाङ्करसः | ४२१ |
| श्वासः | ,, | शङ्खेश्वररसः | ,, |
| ऊर्ध्वश्वासादिः | ३९९ | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२२ |
| सूर्यावर्तरसः | ,, | मृगाङ्कपोट्टलीरसः | ४२३ |
| श्वासान्तकरसः | ४०० | यक्ष्मणि औषधविशेषसेवनोपदेशः | ,, |
| श्वासारिवटकः | ४०१ | पञ्चामृतरसः | ४२४ |
| सप्तामृतावटी | ,, | जयन्तीप्रयोगः | ,, |
| नीलकण्ठरसः | ४०२ | क्षयशामकरसः | ,, |
| श्वासकासकरिकेसरी रसः | ४०३ | लोकनाथरसः | ४२५ |
| सूर्यरसः | ४०४ | वैद्यनाथरसः | ४२८ |
| सामान्योपचाराः | ,, | लोकनाथरसः | ४२९ |
| हिक्का | ४०५ | ||
| हिक्कानाशनरसः | ४०७ |
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[ १९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्राणनाथरसः | ४३० | वातार्शोलक्षणम् | ४५२ |
| वज्ररसः | ४३१ | अर्शःकुठाररसः | ४५३ |
| महावीररसः | ४३३ | पित्तार्शोहररसः | ४५४ |
| अरुचिस्तस्या निदानम् | ४३५ | सर्व्वलोकाश्रयरसः | ४५५ |
| अरुचेः सलक्षणभेदाः | ,, | अर्शोघ्नवटकम् | ४५६ |
| अरुचि-चिकित्सा | ,, | अर्शोघ्नी वटिका | ४५७ |
| यवानीखाण्डवचूर्णम् | ,, | मूलकुठाररसः | ४५८ |
| छर्द्दिरोगः | ४३६ | महोदयप्रत्ययसाररसः | ४६१ |
| वान्तिचिकित्सायां मातुलुङ्गादि योगः- | ४३७ | कनकसुन्दररसः | ४६२ |
| रजन्यादियोगः | ,, | भर्कैशः | ४६४ |
| सुगन्धालककयोगौ | ४३८ | तीक्ष्णमुखरसः | ४६६ |
| हृदयरोगः | ४३८ | अर्शःकुठाररसः | ४६७ |
| हृदयरोग-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यतिलकरसः | ४६८ |
| दशमूलादिक्वाथः | ,, | सामान्योपचाराः | ४७२ |
| ककुभाद्यं चूर्णम् | ,, | वचादिमोदकः | ,, |
| हृदयार्णवोरसः | ४४० | लौहादिचूर्णम् | ,, |
| नागार्जुनाभ्रम् | ,, | श्लेष्मार्शसि औषधविशेषनिर्देशः | ४७३ |
| पञ्चाननरसः | ४४१ | अर्शोहरयोगः | ,, |
| तृष्णारोगः | ,, | देवदाल्दादिलेपः | ,, |
| तृष्णाहररसः | ४४२ | अर्शःकुठारलेपः | ४७४ |
| मदात्ययरोगः | ,, | अर्शोघ्नशौचः | ,, |
| राजावर्त्तरसः | ४४४ | दुर्नामहरलेपः | ,, |
| द्वितीयराजावर्त्तरसः | ,, | अर्शोघ्नीवर्तिः | ,, |
| भैरवनाथी पञ्चामृतपर्पटी | ४४५ | अर्कक्षीरादिलेपः | ४७५ |
| पञ्चदशोऽध्यायः। | ४५० | शिग्रुमूलादिलेपः | ,, |
| अर्शः | ,, | षोडशोऽध्यायः। | ४७६ |
| पित्तार्शोलक्षणम् | ४५१ | उदावर्त्तः | ,, |
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[ २० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| उदावर्त्तहरघृतम् | ४७७ | सामान्योपायाः | ५०४ |
| अतिसारः | ४७९ | वह्यादिचूर्णम् | ,, |
| दर्दुररसः | ४८० | दग्धशम्बूकादियोगः | ,, |
| द्वितीयदर्दुररसः | ४८१ | अन्योपायः | ५०५ |
| आनन्दभैरवरसः | ,, | अजीर्णम् | ,, |
| सुधासाररसः | ४८२ | अजीर्णकण्टकरसः | ५०६ |
| रसोत्तमः | ४८४ | विध्वंसरसः | ,, |
| स्वेदनीयन्त्रलक्षणम् | ४८५ | विसूचीविजयरसः | ५०७ |
| लोकेश्वररसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ,, |
| लोकनाथरसः | ४८६ | वडवाग्निरसः | ५०८ |
| नागसुन्दररसः | ,, | वैश्वानरपोटलीरसः | ५०९ |
| षणिष्कतैलम् | ४८८ | चराचरवटी लक्षणम् | ५१० |
| सङ्ग्रहणी | ४८६ | श्रेष्ठमध्यमाधमवराटिकायालक्षणम् | ५११ |
| वज्रकपाटरसः | ,, | पुंवराटलक्षणं तस्य दोषाश्च | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ४९० | वडवामुखी गुटी | ,, |
| कनकसुन्दररसः | ४९१ | क्रव्यादरसः | ५१२ |
| ग्रहणीहररसः | ४९२ | राजशेखरवटी | ५१४ |
| चण्डसङ्ग्रहगदैककपाटरसः | ,, | अग्निकुमाररसः | ५१५ |
| लघुसिद्धाभ्रकरसः | ४९३ | अमृतवटी | ५१६ |
| सर्वरोगरसः | ४९४ | राक्षसनामारसः | ५१७ |
| ग्रहणीगजकेसरीरसः | ४९७ | जीवननामारसः | ५१८ |
| शीघ्रप्रभावरसः | ४९९ | वडवानलरसः | ५१९ |
| पोट्टलीरसः | ५०० | अग्निजननीवटी | ५२० |
| वह्निज्वालावटोरसः | ५०१ | सर्वरोगान्तका वटी | ,, |
| वज्रधररसः | ५०२ | सामान्योपायः | ५२१ |
| ग्रहणीकपाटरसः | ,, | सप्तदशोऽध्यायः । | |
| सौवर्चलादिचूर्णम् | ५०३ | मूत्रकृच्छ्राश्मर्यादिचिकित्सनम् | ५२३ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ५०४ |
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[ २१ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाषाणभेदीरसः | ५२६ | सञ्जीवन रसः | ५५१ |
| द्वितीयपाषाणभेदीरसः | ५२७ | मेहमर्दनरसः | ५५२ |
| गोक्षुरादिचूर्णम् | ५२८ | रामबाणरसः | ५५३ |
| त्रिविक्रमरसः | ,, | राजमृगाङ्करसः | ५५५ |
| आनन्दभैरवी वटी | ५२९ | मेहहररसः | ५५७ |
| अश्मरीहरयोगः | , | उदयभास्कररसः | ५५८ |
| यवक्षारप्रयोगः | ५३० | हिमांशुरसः | ५६० |
| हरिद्राप्रयोगः | ,, | वसन्तकुसुमाकररसः | ५६१ |
| शिवोक्तयोगः | ,, | सर्वमेहान्तकरसः | ५६३ |
| लघुलोकेश्वररसः | , | मेहारिरसः | ,, |
| सामान्योपायः | ५३१ | मेहबद्धरसः | ५६६ |
| गोक्षुरप्रयोगः | ,, | हरिशङ्कररसः | ,, |
| पाण्डूरादियोगः | ,, | वङ्गेश्वरो रसः | ५६७ |
| शुक्लपिण्याकादियोगः | ५३२ | गुडमार्कण्डी | ,, |
| मूत्रकृच्छ्रान्तको रसः | ,, | ताम्रयोगः | ५६८ |
| विदार्यादिकषायः | ,, | रक्तमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| क्षारप्रयोगः | ५३३ | शुक्रमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| प्रमेहः | ,, | मधुमेहे वङ्गप्रयोगः | ,, |
| चन्द्रप्रभावटी | ५३९ | शाल्मलिप्रयोगः | ५६९ |
| प्रमेहगजसिंहरसः | ५४० | रक्तमेहे बोलबद्धरसोपदेशः | ,, |
| महाविद्यागुटी | ५४१ | श्लेष्मातकक्वाथः | ,, |
| मेहध्वान्तविवस्वान् रसः | ५४२ | कुष्माण्डस्वरसप्रयोगः | ,, |
| उमाशम्भुरसः | ५४४ | स्त्रीणांरक्तस्रावे तौवरयोगः | ५७० |
| रसेन्द्रनागरसः | ५४६ | मेहकुठारो रसः | ,, |
| अष्टादशोऽध्यायः । | |||
| मेहशत्रुरसः | ५४७ | विद्रधिः | ५७१ |
| कासीसबद्धरसः | ५४८ | सर्वेश्वरपोटलीरसः | ५७२ |
| भोमपराक्रमरसः | ५५० |
पृष्ठ 40स्थायी लिंक
[ २२ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सर्वामयहरो रसः | ५७५ | देवदार्वादिचूर्णम् | ५९३ |
| वरुणकषायः | ५७७ | देवदालीपञ्चाङ्गचूर्णम् | ,, |
| शोभाञ्जनादिक्वाथः | ,, | तक्रासवः | ,, |
| वृद्धिचिकित्सा | ५७८ | एरण्डक्षारम् | ५९४ |
| वातारिरसः | ,, | शरपुङ्खादियोगः | ५९५ |
| सामान्योपायः | ५७९ | वज्रक्षारप्रयोगः | ,, |
| दार्वीप्रयोगः | ,, | काञ्चनीप्रयोगः | ,, |
| वातारिरसस्य प्रयोगोपदेशः | ,, | प्लीहिरक्तमोक्षणोपदेशः | ,, |
| तैलाईर्द्रकप्रयोगः | ५८० | शूलचिकित्सा | ५९६ |
| आन्त्रवृद्धौ पानीयतैलम् | ,, | अग्निमुखरसः | ,, |
| आन्त्रवृद्धौ पानीयतैलान्तरघृतञ्च | ,, | त्रिनेत्ररसः | ५९८ |
| अन्त्रवृद्धौ मांसरसः | ५८१ | सौभाग्ययोगः | ५९९ |
| अन्त्रवृद्धौ द्वितीयमांसरसः | ,, | चिन्तामणिरसः | ,, |
| गुल्मः | ५८२ | शूलकेसरीरसः | ६०० |
| गन्धकादिपोट्टलीरसः | ,, | मृतोत्थापनरसः | ६०१ |
| गन्धकादिपोट्टल्याः प्रयोगान्तरम् | ५८३ | क्षारताम्ररसः | ६०३ |
| वज्रेश्वररसः | ५८४ | शूलान्तकरः | ६०४ |
| शिखिवाडवरसः | ५८५ | द्वितीयोऽग्निमुखरसः | ६०५ |
| दीप्तामररसः | ५८६ | द्वितीयत्रिनेत्ररसः | ६०६ |
| विद्याधररसः | ,, | उदयभास्कररसः | ६०७ |
| रक्तोदरकुठाररसः | ५८७ | शूलगजकेसरीरसः | ६०८ |
| वैश्वानररसः | ५८८ | द्वितीयक्षारताम्रम् | ६०९ |
| अग्निकुमाररसः | ५८९ | ताम्राष्टकम् | ६१० |
| सर्वाङ्गसुन्दररसः | ,, | वडवानलगुटिका | ,, |
| गुल्मनाशनरसः | ५९२ | अग्निकुमाररसः | ६११ |
| सामान्योपायः | ५९३ | शूलहरक्षारः | ६१३ |
| तिलकक्वाथः | ,, | क्षारवटी | ६१४ |
पृष्ठ 41स्थायी लिंक
$$[ \text{ २३ } ]$$
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| सामान्योपायः | ६१४ | वातोदरलक्षणम् | ६३२ |
| शम्बूकादिलौहम् | ,, | उदरघ्नरसः | ६३३ |
| अथेन्द्रवारुणिकादिचूर्णम् | ६१५ | विनोदविद्याधररसः | ,, |
| भूदार्वादियोगः | ,, | सुरेचनकररसः | ६३४ |
| सद्यःशूलहरोयोगः | ,, | मृत्युञ्जयरसः | ,, |
| सद्यःशूलहरयोगद्वयम् | ६१६ | उदरे विरेचनविधिः | ६३६ |
| कार्श्य-चिकित्सा | ,, | त्रैलोक्यसुन्दररसः | ,, |
| अमृतार्णवरसः | ,, | महावह्निरसः | ६३७ |
| पूर्णचन्द्ररसः | ६१७ | गुडनागरप्रयोगः | ६३८ |
| स्थौल्यचिकित्सा | ६१८ | वैश्वानररसः | ,, |
| वडवाग्निमुखरसः | ,, | उदयमार्त्तण्डरसः | ६३९ |
| स्थौल्ये पूर्वकृत्यनिर्देशः | ,, | सूर्यप्रभागुटिका | ६४० |
| मध्वार्द्रकप्रयोगः | ,, | वज्रक्षारम् | ,, |
| अग्निकुमाररसः | ,, | सामान्योपायाः | ६४२ |
| अम्लपित्त-चिकित्सा | ६२३ | खदिरादियोगः | ,, |
| तत्रादौ अम्लपित्तलक्षणम् | ,, | पिप्पलीप्रयोगः | ,, |
| लीलाविलासरसः | ,, | पाण्डुरोगः | ६४३ |
| ताम्रद्रुतिरसः | ६२५ | हंसमण्डूरः | ,, |
| कुष्माण्डखण्डलेहः | ६२७ | कालविध्वंसनरसः | ६४४ |
| सामान्योपायः | ६२८ | पञ्चाननरसः | ६४६ |
| वमनयोगः | ,, | आरोग्यसागररसः | ६४८ |
| विरेचनयोगः | ६२९ | पाण्डुपङ्कशोषणरसः | ६५० |
| पित्तरोग-चिकित्सा | ,, | पित्तपाण्ड्वरिरसः | ,, |
| पित्तान्तरसः | ,, | त्रैलोक्यसुन्दररसः | ६५१ |
| दशसारचूर्णम् | ६३० | त्रिनेत्राख्यरसप्रयोगः | ,, |
| एकोनविंशोऽध्यायः । | जयपालरसः | ,, | |
| उदरादिचिकित्सा | ६३१ | देवदालीचूर्णम् | ६५२ |
| जलोदरलक्षणम् | ,, |
पृष्ठ 42स्थायी लिंक
[ २४ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| पाण्डुहारीहरीतकी | ६५० | कुष्ठजिद्रसः | ६६९ |
| विजयावटिका | ६५३ | तालेश्वररसः | ,, |
| टङ्कणादियोगः | ६५४ | महातालेश्वररसः | ६७१ |
| कामला | ,, | ककनसुन्दररसः | ६७२ |
| कामलाप्रणुद्रसः | ,, | हरिबोलाङ्कुशरसः | ६७३ |
| त्रयोनिरसः | ६५५ | त्रिपुरान्तकरसः | ,, |
| कामेश्वररसः | ६५६ | विश्वहितरसः | ६७४ |
| सिन्दूरभूषणरसः | ६५७ | व्योषादिगुटिका | ६७५ |
| सुधापञ्चकरसः | ६५८ | कुष्ठकुठाररसः | ६७६ |
| मुस्तादिचूर्णम् | ,, | वज्रशेखररसः | ६७७ |
| सामान्योपायः | ६५९ | दद्रुकुष्ठविद्रावणरसः | ६७९ |
| विंशोऽध्यायः । | माणिक्यतिलकरसः | ,, | |
| विसर्पजिद्रसः | ६६० | परहितरसः | ६८० |
| विसर्पनाशनतैलम् | ६६१ | तालकेश्वररसः | ६८२ |
| विसर्पहरतैलम् | ,, | खगेश्वररसः | ६८४ |
| कुष्ठरोगः | ६६२ | कुष्ठनाशनरसः | ६८५ |
| गलत्कुष्ठलक्षणम् | ,, | आरोग्यवर्धिनी गुटिका | ,, |
| श्वित्रकुष्ठलक्षणं भेदाश्च | ,, | नारायणरसः | ६८७ |
| वातकुष्ठहररसः | ६६३ | मेदिनीसाररसः | ६८८ |
| पित्तकुष्ठहररसः | ,, | जन्तुघ्नीगुटिका | ६९० |
| कफकुष्ठहररसः | ६६४ | धन्वन्तरिरसः | ६९१ |
| सन्निपातकुष्ठहररसः | ,, | वज्रधाररसः | ६९२ |
| विजयरसः | ६६५ | महातालेश्वररसः | ,, |
| सर्वेश्वररसः | ६६६ | कुष्ठकुठाररसः | ६९४ |
| सप्तकुष्ठारिरसः | ६६७ | स्वर्णक्षीररसः | ६९५ |
| प्रतापलङ्केश्वरः | ६६८ | त्रैलोक्यविजयतैलम् | ६९६ |
| कुष्ठनाशनरसः | ,, | कुष्ठान्तपर्पटीरसः | ,, |
पृष्ठ 43स्थायी लिंक
[ २५ ]
| विषया: | पृष्ठाङ्का: | विषया: | पृष्ठाङ्का: |
|---|---|---|---|
| कासीसबद्धरसः | ६९७ | श्वेतकुष्ठहरचूर्णम् | ७१४ |
| सर्वेश्वररसः | ६९८ | सामान्योपायः | ७१५ |
| योगराजगुग्गुलुप्रयोगोपदेशः | ६९९ | सिध्मेगन्धपाषाणलेपः | ” |
| श्वित्रारिरसः | ” | सिध्मे वराटिकालेपः | ” |
| चन्द्रप्रभावटिका | ७०० | दद्रुकुष्ठे मयूरक्षारादिलेपः | ७१६ |
| किलासनाशनरसः | ७०१ | चर्मकुष्ठे पर्पटरसप्रयोगविधिः | ” |
| उदयादित्यरसः | ” | मेघनादाद्युद्वर्त्तनम् | ” |
| अल्पश्वित्रे शिलादिलेपः | ७०३ | निर्गुण्ड्यादिप्रलेपः | ७१७ |
| अङ्कोलतैलादिलेपद्वयम् | ” | गुञ्जाद्युद्वर्त्तनम् | ” |
| श्वित्रान्तकरसः | ७०४ | काञ्चन्यादिप्रयोगः | ७१८ |
| श्वेतारियोगः | ७०५ | कुमार्यादिलेपः | ” |
| कृष्णीकरणयोगः | ” | महामुण्डीलेपः | ” |
| श्वित्रकुष्ठारिरसः | ७०६ | कण्डूव्रणादिहरः शिलादिप्रलेपः | ” |
| स्नुह्यादितैलम् | ” | गन्धकादिप्रयोगः | ७१९ |
| आरग्वधादितैलम् | ” | कुष्ठविध्वंसनो लेपः | ” |
| गन्धपिष्टीतैलम् | ७०७ | कृमिचिकित्सा | ७२० |
| सर्वकुष्ठान्तकृत्तैलम् | ७०८ | कृमिलक्षणम् | ” |
| कुष्ठविद्रावणतैलम् | ” | अग्नितुण्डरसः | ” |
| वज्रतैलम् | ७०९ | कृमिज्वरे आखुपर्णीप्रयोगः | ७२१ |
| महाभल्लाततैलम् | ७१० | क्रिमौ पर्पटीप्रयोगोपदेशः | ” |
| महामार्त्तण्डतैलम् | ” | कीटमर्दनरसः | ” |
| श्वित्रारितैलम् | ७१२ | कृमिघ्नरसः | ७२२ |
| कुष्ठारितैलम् | ” | क्रिमिहररसः | ” |
| कुष्ठामयघ्नगणः | ७१३ | कृमिशूलहरो रसः | ७२३ |
| महानिम्बादिचूर्णम् | ” | सूतभस्मप्रयोगः | ” |
| सर्वकुष्ठाङ्कुशचूर्णम् | ७१४ | एकविंशोऽध्यायः। | |
| श्वित्रनाशनचूर्णम् | ” | अष्टो महारोगाः | ७२४ |
पृष्ठ 44स्थायी लिंक
[ २६ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शीतवातलक्षणम् | ७२४ | रक्तवातेऽपथ्यम् | ७३६ |
| वातारिरसः | ७२५ | आमवातः | ” |
| विजयागुटिकाप्रयोगोपदेशः | ” | आमवातेवातारिरसप्रयोगोपदेशः | ” |
| शीतारिरसः | ७२६ | अनिलारियोगः | ७३७ |
| स्पर्शवातः | ” | आमवातेऽरण्डतैलप्रशंसा | ” |
| सर्वेश्वररसः | ७२७ | अपस्मारः | ” |
| अर्केश्वररसः | ७२८ | पर्पटीरसप्रयोगविधिः | ७३८ |
| स्पर्शवातघ्नरसः | ” | ब्राह्म्यादिनस्यम् | ” |
| गन्धाश्मगर्भरसः | ७२९ | गवाक्ष्यादिनस्यम् | ” |
| द्वितीयगन्धाश्मगर्भरसः | ७३० | श्वेतापराजितादिनस्यम् | ७३९ |
| स्पर्शवातारिरसः | ७३१ | अपस्मारहरनस्यम् | ” |
| स्पर्शवातान्तकृद्वटी | ” | अपस्मारहरो योगः | ” |
| स्पर्शवातारितैलम् | ७३२ | उन्मादः | ७४० |
| स्पर्शवाते राजवृक्षप्रयोगः | ७३३ | माहेश्वरधूपः | ” |
| स्पर्शवाते चक्रमर्दादिः | ” | उन्मादे पर्पटीरसप्रयोगोपदेशः | ७४१ |
| अस्पर्शवाते त्रिगन्धप्रयोगः | ७३४ | उन्मादे उपचारविशेषाः | ” |
| अस्पर्शवाते हियावलीप्रयोगः | ” | एकाङ्गवातः | ७४२ |
| यवानीघृतम् | ” | वडवानलरसः | ” |
| स्पर्शान्तकरोऽर्कदुग्धप्रयोगः | ” | मार्त्तण्डेश्वररसः | ७४३ |
| स्पर्शान्तको हल्यादियोगः | ७३५ | चतुःसुधारसः | ७४५ |
| स्पर्शवाते रसेन्द्रलेपः | ” | सर्ववातारिरसः | ७४७ |
| रक्तवात-चिकित्सा | ” | वातविध्वंसनरसः | ७४९ |
| रक्तवातलक्षणम् | ” | वृकोदरगुटिका | ७५१ |
| सामान्योपायाः | ” | प्रभावती वटी | ७५२ |
| त्रियोनिरसप्रयोगः | ” | स्वच्छन्दभैरवरसः | ७५३ |
| कोकिलाक्षादिकषायः | ७३६ | स्वच्छन्दभैरवरसः | ७५४ |
| संशोधनोपदेशः | ” | वडवानलरसः | ” |
पृष्ठ 45स्थायी लिंक
[ २७ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| त्र्यम्बकेश्वररसः | ७५५ | अमृतप्राशचूर्णम | ७६८ |
| गगनगर्भा वटी | ७५६ | ऐलेयकतैलम् | ७७० |
| वातगजाङ्कुशरसः | ” | ऐलेयसर्पिः | ७७१ |
| शतावरी गुग्गुलुः | ७५७ | ऐलेयकप्रयोगः | ७७२ |
| योगराज गुग्गुलुः | ७५८ | द्वाविंशोऽध्यायः । | |
| द्वितीयो योगराजगुग्गुलुः | ७६० | वन्ध्यादिचिकित्सा | ७७३ |
| षडङ्गगुग्गुलुः | ७६१ | वन्ध्यादोषभेदादिकथनम् | ” |
| विजयभैरवतैलम् | ७६२ | जयसुन्दररसः | ७७५ |
| द्वितीयविजयभैरवतैलम् | ” | रत्नभागोत्तररसः | ७७७ |
| सूततैलम् | ७६३ | चक्रिकावन्चरसः | ७७८ |
| एरण्डतैलत्रिफलादिसिद्धघृतवानन्द-भैरवोपदेशश्च | ७६४<br>” | वर्धमानरसः | ७८० |
| सामान्योपायाः | ” | द्रुतिसाररसः | ७८३ |
| पर्पटरसप्रयोगविधिः | ” | सामान्योपायाः | ७८५ |
| सर्जतैलम् | ७६५ | देवदालीप्रयोगः | ” |
| एकाङ्गवाते पर्पटीरसप्रयोगविध्यन्तरम् | ”<br>” | शरपुङ्खाप्रयोगः | ७८६ |
| धूमसारादिषडङ्गप्रयोगः | ” | रुद्राक्षादिप्रयोगः | ” |
| निर्गुण्डीप्रयोगः | ७६६ | श्वेतकण्टकारीप्रयोगः | ” |
| रक्तैरण्डप्रयोगः | ” | विष्णुक्रान्ताप्रयोगः | ७८७ |
| इन्द्रवारुणीप्रयोगः | ” | अश्वगन्धाप्रयोगः | ७८८ |
| सर्वाङ्गैकाङ्गवातारिरसः | ” | शिवोक्ततान्त्रिकप्रयोगः | ” |
| वातरक्तः | ७६७ | मृतवत्सालक्षणम् | ” |
| अधिकारान्तरोक्तौषधप्रयोगोपदेशः | ” | शङ्खरोक्तदेवव्यपाश्रयचिकित्सा | ” |
| वातरक्तादिसर्वरोगे सर्वेश्वरी पर्पटी | ” | युक्तिव्यपाश्रये वन्ध्याकर्कटकीप्रयोगः | ७९१ |
| पित्तरोग-चिकित्सा | ” | गर्भिणीरोगः | ” |
| चन्द्रावलेहः | ” | गर्भिणीरोगापनयन-गर्भपोषण-सामान्योपायाः | ” |
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[ २८ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| प्रथममासे पद्माकादिकल्कः | ७९१ | गर्भिण्या वातरोगे बालबिल्वादिसाधितक्षीरप्रयोगः | ७९७ |
| द्वितीयमासे नीलोत्पलादिकल्कः | ,, | गर्भिण्या मूत्ररोगे श्वदंष्ट्रादिकषायः | ,, |
| तृतीयमासे श्रीखण्डादिकल्कः | ७९२ | गर्भिण्या मासानुमासिकयोगः | ,, |
| तृतीयमासे नीलोत्पलादिकल्कान्तरम् | ,, | मूढगर्भचिकित्सा | ८०० |
| गर्भिणीज्वरहरः पाठादिकषायः | ,, | अन्तर्मृतापत्याया लक्षणम् | ,, |
| गर्भिणीज्वरहरश्छिन्नादिकषायः | ७९३ | मूढगर्भाया असाध्यलक्षणम् | ,, |
| गर्भिणीज्वरहरः पयस्यादिकषायः | ,, | गर्भप्रसवसामान्योपायाः | ८०१ |
| गर्भिणीज्वरहानिः | ७९४ | तत्र करञ्जबीजादिप्रलेप अहिन्निर्मोकस्नुहीक्षीरौ च | ,, |
| गर्भिण्यतीसारहरो वृक्षकत्वगादिकषायः | ,, | हलिनीप्रयोगः | ,, |
| गर्भिण्यतिसारहरौ श्रीपर्ण्यादिबलादिक्वाथौ | ,, | यष्टिकादिकल्कः | ,, |
| गर्भिण्युदावर्त्तादिहरः पुनर्नवादिकषायः | ,, | लाङ्गल्यादिलेपः | ८०२ |
| गर्भिण्याः शोथहरोऽपायः | ७९५ | मातुलुङ्गीरम्भाप्रयोगौ | ,, |
| गर्भिणीशोथहरः पुनर्नवादिलेपः | ,, | सिद्धार्थादिवस्तिः | ,, |
| गर्भिण्युदावर्त्तादिहरोवर्षाभूक्वाथः | ,, | सिद्धार्थकानुवासनम् | ,, |
| गर्भिण्याः पित्तार्त्तिहरोयष्टिकादिक्वाथः | ,, | सूतिका-चिकित्सा | ८०३ |
| गर्भिण्याः श्वासकासहरस्तिक्तकादिकषायः | ७९६ | पर्पटीरसः | ,, |
| गर्भिणीकासे मरिचप्रयोगः | ,, | सूतिकारोगनाशनरसः | ,, |
| गर्भिण्या वान्तौ लाजादिकषायः | ,, | सौभाग्यशुण्ठी | ,, |
| गर्भिण्या हिक्कायां बालबिल्वादिक्वाथः | ,, | सामान्योपायाः | ८०५ |
| गर्भिण्या अग्निमान्द्ये अजमोदादिचूर्णम् | ,, | तत्रादौ कौरण्टकादिक्वाथः | ,, |
| पञ्चमूलक्वाथः | ,, | ||
| भूनिम्बादितैलम् | ,, | ||
| योनिव्यापच्चिकित्सा | ८०६ | ||
| योनिशूलहरोनिर्गुण्ड्यादिप्रयोगः | ,, | ||
| प्रधंसिन्यां कारलीकन्दप्रयोगः | ,, |
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[ २९ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| शिथिलयोनौ इन्द्रगोपप्रयोगः | ८०६ | गुदपाकचिकित्सा | ८१४ |
| विवृतायां माकन्दमूलादिलेपः | ” | मुखपाकचिकित्सा | ८१५ |
| श्रीपर्णीतैलम् | ८०७ | नाभिपाकचिकित्सा | ” |
| बालरोगः | ” | कुण्डलचिकित्सा | ” |
| माहेश्वरधूपः | ” | बालपञ्चामृतम् | ८१६ |
| विजयधूपः | ८०८ | तिक्ताद्यं घृतम् | ” |
| ग्रहनाशिनीगुटिका | ” | राजीकुष्ठादि लेपः | ” |
| सामान्योपायाः | ८०९ | छिन्नातैलम् | ८१७ |
| कणास्वर्णप्रयोगः | ” | स्फूर्जकादितैलम् | ” |
| सद्योजातबालस्य संज्ञाजननोपायः | ” | निम्बादिघृतं क्षीरञ्च | ” |
| सद्योजातबालस्य ज्वरादिनिवारणोपायः | ” | त्रयोविंशोऽध्यायः ।<br>उन्मादरोगः | ८१८ |
| पित्तज्वरे रोहिणीक्षीरम् | ” | उन्मादस्य निदानसम्प्राप्ती | ” |
| पित्तज्वरे अश्वत्थक्षीरम् | ८१० | उन्मादलक्षणम् | ८१९ |
| गन्धोत्पलजटादिकल्कः | ” | उन्मादचिकित्सा | ” |
| सहदेव्यादिचूर्णम् | ” | ग्रहघ्नधूपः | ” |
| न्यग्रोधादिक्वाथः | ” | सामान्योपायाः | ” |
| रक्तातिसारहरचूर्णम् | ८११ | अर्कमूर्तिरसस्यप्रयोगविधिः | ” |
| सक्षीरबोलप्रयोगः | ” | निर्गुण्डिकादितैलम् | ८२० |
| मूत्रविङ्ग्रहहरं मधुकादि | ” | अपस्मारः | ” |
| यष्ट्यादिघृतम् | ” | अपस्मारसम्प्राप्तिलक्षणे | ” |
| शङ्खनाभ्यादिवर्तिः | ८१२ | अपस्मारचिकित्सा | ८२१ |
| अश्वगन्धाघृतम् | ” | अपस्मारनाशनरसः | ” |
| तालुकण्टलक्षणम् | ” | नवाङ्गवटिका | ८२२ |
| तालुकण्टकचिकित्सा | ८१३ | सूतकप्रत्ययः | ” |
| गुदकीटस्य निदानलक्षणे | ” | सर्वेश्वररसः | ८२३ |
| गुदकीटचिकित्सा | ८१४ | धूस्तूरपञ्चाङ्गघृतम् | ८२४ |
पृष्ठ 48स्थायी लिंक
[ ३० ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| चूर्णाञ्जनम् | ८२४ | पित्ताभिष्यन्दे तीक्ष्णादिवर्तिः | ८३७ |
| मसीयोगः | ” | पित्ताभिष्यन्दे नागादिवर्तिः | ” |
| तिलजदीपाञ्जनम् | ८२५ | ताम्रादिवर्तिः | ” |
| चण्डभैरवरसः | ” | पारदादिवर्तिः | ८३८ |
| पर्पटीरसप्रयोगविधिः | ८२६ | एकत्रिशाङ्गवर्तिः | ” |
| पर्पटीरसस्य प्रकारान्तरेण सेवनोपदेशः | ” | षडङ्गवर्तिः | ८३९ |
| नेत्ररोगाणां संख्या | ” | द्वादशाङ्गवर्तिः | ” |
| नेत्ररोग-चिकित्सा | ८२७ | पटलहरेन्द्ररसः | ८४० |
| ताम्रवर्तिः | ” | खर्णादिवर्तिः | ” |
| ताम्रद्रुतिः | ” | विशायाञ्जनम् | ” |
| ताम्रद्रुतिः | ” | पुष्पहराञ्जनम् | ८४१ |
| ताम्रद्रुतिः | ८२९ | शिग्रुमूलाद्याश्च्योतनम् | ” |
| गन्धकद्रुतिः | ८३० | नेत्रशूलघ्नमाश्च्योतनम् | ” |
| गरुडाञ्जनम् | ८३१ | पौनर्नवाञ्जनम् | ” |
| तिमिरहराञ्जनम् | ८३२ | नेत्रजलस्रावहरोयोगः | ” |
| पटलहराञ्जनम् | ” | वक्ररोमहराञ्जनञ्च | ” |
| रक्ताञ्जनम् | ८३३ | नृकपालाञ्जनम् | ८४२ |
| शम्बूकादिवर्तिः | ” | काचान्धह्राञ्जनम् | ” |
| नक्तान्ध्ये पञ्चाङ्गगुटिका | ” | राज्यन्धहराञ्जनम् | ” |
| नवनेत्रदात्रीवर्तिः | ८३४ | अभिष्यन्दहरो योगः | ८४३ |
| नयनरोगहरा वर्तिः | ” | राज्यन्धे व्योषाञ्जनम् | ” |
| शिग्रुतैलम् | ८३५ | राज्यन्धे मरिचाञ्जनम् | ” |
| नागादिवर्तिः | ” | तिमिरहराञ्जनम् | ” |
| वाताभिष्यन्दे इन्द्रादिवर्तिः | ” | चतुर्विंशोऽध्यायः । | ८४५ |
| श्लेष्माभिष्यन्दे शुल्वादिवर्तिः | ८३६ | कर्णरोगः | ” |
| त्रिदोषाभिष्यन्दे रसेन्द्रवर्तिः | ” | कर्णरोगनामानि | ” |
| कर्णरोगचिकित्सा | ८४६ |
पृष्ठ 49स्थायी लिंक
[ ३१ ]
| विषयाः | पृष्ठाङ्काः | विषयाः | पृष्ठाङ्काः |
|---|---|---|---|
| कर्णरोगहरी वज्रादिवटिका | ८४६ | धातुबद्दरसगुटिका | ८५३ |
| कर्शामयघ्नतैलम् | ” | महासरस्वतीचूर्णम् | ८५५ |
| क्रिमिकर्णारितैलम् | ८४७ | मुखरोगादिगलगण्डमालारोगाणां सामान्योपायाः | ” |
| सामान्योपायाः | ” | गलकीलके आमलकप्रयोगः | ” |
| कर्णशूले लवणाद्रकप्रयोगः | ” | विषतिन्दुकादि वटी च | ” |
| कर्णशूले तिलपर्णीप्रयोगः | ” | गलकीलके सैन्धवप्रयोगः | ८५६ |
| अर्कपत्रप्रयोगः | ” | गलकीलके भल्लातकप्रयोगः | ” |
| लशुनरसप्रयोगः | ” | दन्तदार्ढ्यंकरोजिह्वापूतिगन्धहरश्च जयाप्रयोगः | ” |
| पूयहरो मेघनाद स्वरसः | ८४८ | मुखपाके पर्पटीरसः | ” |
| बाधिर्यहरं रुषल्यादिचूर्णम् | ” | मुखशोषे महाराष्ट्री गुटिका | ८५७ |
| कर्णमूलस्फोटहरः केतकादिलेपः | ” | सामान्योपायाः | ” |
| कर्णगलादिस्फोटहरः पुत्रजीवलेपः | ” | मुखवैवर्ण्ये पुनर्नवायुद्वर्तनम् | ” |
| गोमक्षिकानिःसारणार्थं तगरचर्वणादिकम् | ” | नीलिकायां रजन्यादिलेपः | ” |
| कर्णपालीवर्धको मुषलीप्रयोगः | ८४९ | मुखवैवर्ण्ये वङ्गभस्मप्रयोगः | ८५८ |
| कर्णवर्धकचर्मचेटप्रयोगः | ” | मुखवैवर्ण्यदौ मातुलुङ्गादिप्रलेपः | ” |
| कर्णवृद्धिकरोवराहतैलप्रलेपः | ” | मञ्जिष्ठादिप्रलेपः | ” |
| नासारोगाः | ८५० | मुखदौर्गन्ध्यनाशिनी कुष्ठादिवटी | ” |
| मणिपर्पटीरसः | ” | मुखदौर्गन्ध्ये गृहधूमक्वाथः | ८५९ |
| पूयास्रलक्षणम् | ८५१ | मुखदौर्गन्ध्ये पथ्यादि वटिका | ” |
| सामान्योपायः | ” | मुखवैरस्ये लाजादिचूर्णम् | ” |
| कुङ्कुमादिनस्यम् | ८५२ | उपजिह्वायां निर्गुण्ड्यादियोगः | ” |
| कामलाहराञ्जनम् | ” | कृमिदन्ते अभयादिगुटिका | ८६० |
| कामलाहरमञ्जनान्तरम् | ” | कृमिदन्ते वासीसादिगुटिका | ” |
| मुखरोगः | ” | कृमिदन्ते विशालाधूमः | ” |
| मुखरोग-चिकित्सा | ८५३ | चलदन्ते जात्यादिदन्तधावनम् | ” |
| ताप्यादिवटी | ” |