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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

संयोगिनिस्वयम्बर । ३५ करन निराशा नहिं चाहत हैं मानो सत्य बचन कबिराज ॥ तुमहूं जावो निज मन्दिर को हमहूं जात आपनी राज ११६ यह सुनि गमने चन्द कवीश्वर जयचँद कूच दीन करवाय ॥ राति दिनौनन के धावा करि पहुँचेकनउजमेंफिरिआय १२० पृथुइराज निज महलन पहुँचे पद्मिनि मिली तहांपर आय ॥ करि गन्धर्व ब्याह ताके सँग औसुखकरनलागिअधिकाय १२१ पूर स्वयम्बर संयोगिनि का गायों सत्य सत्य सब हाल ॥ माथ नवावों शिवशङ्करका अम्बुजसरिसनयनत्रयलाल १२२ किहे कोपिनी हैं सर्पन की धारे जटाजूट हैं शीश ॥ सकल जगत के सो स्वामी हैं किरपाकरें ललितपर ईश १२३ माथ नवावों पितु अपने को जिन म्वहिं विद्या दीन पढ़ाय ॥ आशिर्वाद देंव मुंशीसुत जीवहु प्रागनारायणभाय १२४ रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलों तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२५ इति श्रीलखनऊनिवार्सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागनारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्त- र्गत पँडरीकलांनिवासि मिश्रबंशोद्भवबुध कृपाशङ्कर सूनु पण्डितललिताप्रसादकृत पृथुइराजजयचन्द युद्धवर्णनो नाम तृतीयस्तरङ्गः ॥ ३ ॥ संयोगिनिस्वयंम्वरसम्पूर्ण ॥ इति ॥

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अथ आल्हखण्ड ॥ महोबे का प्रथमयुद्धवर्णन ॥ सवैया ॥ काको मैं ध्यावों मनावों सदा तुमको तजिकै सुनिये रघुनाथा । मेरे तो एक तुम्हीं प्रभुजी अब काह बनाय लिखों बहुगाथा ॥ स्वारथ साथ सबै नरदेत न देत कोऊ परमारथ साथा ॥ दीन पुकार करै ललिते प्रभु बेगिकरो जनजानि सनाथा १ सुमिरन ॥ कण्ठ में बैठो तुम कण्ठेश्वरि भुजबल बैठिजाउ हनुमान ॥ बैठु शारदा मोरि जिह्वा माँ जासों करूँ आल्ह को गान १ नहीं आसरा निजभुजबलको है यहु आल्हा सिंधु अपार ॥ डगमग डगमग नैया होवै माता तुही लगावै पार २ रह्यों प्रतापी मैं सतयुग माँ त्रेता रह्यों बहुत बरियार ॥ बड़ी बड़ाई भै द्वापर माँ जबलग रहे परीक्षित यार ३ अब बृद्धाई अति छाई है गाई जाय नहीं सो यार ॥

२ आल्हखण्ड । ३८ कलियुग बाबा की रजधानी माता तुही लगावै पार ४ जप तप भाग्यो मेरि देही ते अब मैं भयौं बहुत सुकुमार ॥ ताते नैया डगमग होवै बेड़ा कौन लगावै पार ५ तुही खेवैया शारद मैया माता खेय लगावै पार ॥ नाहिं तो बूडौं मँझधारा में माता होवै हँसी तुम्हार ६ छूटि सुमिरनी गै शारद कै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ करिया आई अब मोहवे का जो जम्बैका राजकुमार ७ अथ कथाप्रसङ्ग ॥ एक समइया की बातें हैं यारो सुनिल्यो कांन लगाय ॥ परब दशहरा की बुड़की रहै गंगा न्हान सबै कोउ जाय १ बड़ा महातम श्रीगंगा को गायो वालमीकि महराज ॥ ब्यास बनायो महभारत जो तामें कह्यो जगत के काज २ सो सब जानै माड़ोवाला यहु जम्बै का राजकुमार ॥ हाथ जोरिकै फिरि बोलतभा दद्दुवा सुनिल्यो वचन हमार ३ भारी मेला श्री गंगा को दद्दुवा जाजमऊ के घाट ॥ पुरके बाहर हम देखा है जावैं राव रङ्क सब बाट ४ हुकुम जो पावैं हम दद्दुवा को तो गंगा को अवैं अन्ह्याय ॥ पाप नशावैं सब देही के गंगा चरण शरण में जाय ५ सुनिकै बातें ये करिया की जम्बै गोद लीन बैठाय ॥ चूम्यो चाट्यो गले लगायो बोल्यो बचन तुरत मुसुकाय ६ बारह वरसनका अरसा भो पैसा दीन न कनउज केर ॥ नायब मन्त्री चन्देले के तुमको लेयँ वहाँ जो हेर ७ बाँधिकै मुशकें म्वरे बचुवा त्वहिं तुरतै जेहल देयँ पहुँचाय ॥ पैसा देवौ तो बचिजावौ नाहिं तो जाय प्राणपर आय ८

महोबेकाप्रथमयुद्ध । ३६ ३ त्यहिते तुम का समुझावत हौं बचुवा मानो कहा हमार ॥ राह कनौजी कै तहँते है ठाकुर समरधनी तलवार ६ हाथ जोरिकै करिया बोल्यो दोऊ चरणन शीश नवाय ॥ मने न करिये म्वहिं गंगा को दहुवा बार बार बलिजायँ १० पार लगे हैं श्री गंगाजी मेरो बार न बांको जाय ॥ पकरो जइहौं जो मेला में पैसा माफ लेउँ करवाय ११ हुकुम जो पावौं मैं दहुवा को तौ फिरि गंगाअवौं अन्ह्याय ॥ बिनती सुनिकै बहु करिया की जम्बै हुकुम दीन फरमाय १२ हुकुम पायकै सो जम्बै को अपने कह्यो सिपाहिन बात ॥ करो तयारी जाजमऊ की गंगा न्हान हेतु हम जात १३ हुकुम पायकै सो करिया का तुरतै होन लागि तय्यार ॥ झीलम बख्तर पहिरिसिपाहिन हाथ म लीन ढाल तलवार १४ यक यक भाला दुइ दुइ बरछी लीन्हेनि कड़ाबीन सबज्वान ॥ बजे नगारा त्यहि सम या माँ भारी होन लाग घमसान १५ करिया चलिभा त्यहि समया माँ माता भवन पहूँचा जाय ॥ हाथ जोरिकै करिया बोल्यो माता चरणन शीशनवाय १६ मोहिं आज्ञा है दंदुवा की गंगा न्हान हेतु हम जायँ ॥ आज्ञा पाऊँ जो माता की तौसब काज सिद्धह्वैजायँ १७ बातैं सुनिकै ये करिया की मातैं हुकुम दीन फरमाय ॥ चूम्यो चाट्यो हृदय लगायो आशिर्वाद दीन हर्षाय १८ बहिनि बिजैंसिनि तब बोलत भै भैया बार बार बलिजाउँ ॥ मोहिं निशानी कछु लैआयो जासों यादिकरुं तव नाउँ १६ इतनी सुनिकै करिया बोला बहिनी मानो कहा हमार ॥ लवों निशानी मैं मेलाते बहिनी कहा न टारौं त्वार २०

४ आल्हखण्ड । ४० इतनी कहिकै करिया चलिभो फौजन फेरि पहुँचा आय ॥ तुरत नगड़ची को ललकार्यो मारू डंका देय बजाय २१ बजा नगाड़ा तब माड़ो में क्षत्रिन धरा रकावन पायँ ॥ आपो चढ़िकै फिरि घोड़ापर मनमें रामचन्द्र को ध्याय २२ कूच कराय दयो माड़ो सों पहुँचे जाजमऊ में जाय ॥ तम्बू गड़िगे तहँ करिया के चकरन विस्तर दीन बिछाय २३ उतरयो करिया तब तम्बू में मनमें सुमिरि शारदा माय ॥ लैकै धोती रेशमवाली गंगा निकट पहुँचा जाय २४ न्हवन करिकै श्री गंगा में आसन तहाँ लीन बिछवाय ॥ संध्या वन्दन करि प्रातः की विप्रन तुरत लीन बुलवाय २५ दान दक्षिणा दै विप्रन को तम्बू फेरि पहुँचा आय ॥ पहिरिकै कपड़ा अलबेला सो मेला फेरि पहुँचा जाय २६ जाय दुकानन माँ देखतभा कतहुँ न मिला नौलख्यहिहार ॥ तबलों माहिल उरई वाला तासों हैगै राम जुहार २७ माहिल बोल्यो तब करियाते ओ जम्बै के राजकुमार ॥ काह खरीदन को आयो है जो तुम घूमो सकल बजार २८ सुनिकै बातें ये माहिल की करिया बोला वचन उदार ॥ हार लखौटा नीको ढूंढें सो नहिं पावा कतौं बजार २९ बहिनि बिजैसिनि म्वरिमांगहैं ताते खोज करौं अधिकाय ॥ तुम्हरो जानों जो कतहूँ हो मोको वेगि देव बतलाय ३० सुनिकै बातें ये करिया की माहिल कहा वचन मुसुकाय ॥ हार नौलखा है मोहबे माँ तुरतै चला तहाँको जाय ३१ बहिनि हमारी मल्हना जानों औ बहनोई रजा परिमाल ॥ कऊ लड़ैया तिन घर नाहीं मानों सत्य सत्य सब हाल ३२

महोबेका प्रथमयुद्ध । ४१ ५ सुनिकै बातें ये माहिल की करिया चरण शीश नवाय ॥ बिदा माँगिकै फिरि माहिलसों तम्बू तुरत पहुंचा आय ३३ हुकुम लगायो सब क्षत्रिनको हाँते कूच देव करवाय ॥ करो तयारी अब मोहबे की सीताराम चरणको ध्याय ३४ सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्री सबै भये हुशियार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ३५ कूच के डंका बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥ चालिभो करिया फिरि मोहबेको मनमें किहे गंगको ध्यान ३६ त्यही समय की बातें हैं यारो सुनिल्यो कान लगाय ॥ चारो भाई हैं बकसर के जिनका कही बनाफरराय ३७ रहिमलें टोंडेर बच्छराजैं औ चौथे देशराजैं महराज ॥ मीराताल्हन हैं बनरस के जिनके नौ लड़िका शिरताज ३८ अली अलोमत औ दरियाखां बेटा जानबेगें सुल्तानै ॥ मियांबिसारतैं औ दरियाई नाहर कारे औ कल्यानै ३६ कारे बाना करे निशाना कारे घोड़न पर असवार ॥ चीरा शिर पर है सुलतानी मीराताल्हन केर कुमार ४० ये सब मिलिकै यकठौरी है डाँड़ पै किहेनि बखेड़ाजाय ॥ जयचंद केरी तहँ ठकुरी है जिनका कही कनौजीराय ४१ सब फिरियादी गे कनउज को पहुँचे नगर महोबा जाय ॥ नगर महोबा सों कनउज को रस्ता सीध निकरिगै भाय ४२ यक हरिकारा सों पूँछत भे चारों भई बनाफरराय ॥ जावा चाहें हम कनउज को जहँपै रहैं चँदेलोराय ४३ सुनिकै बातें इन चारों की सोऊ कहा बचन हर्षाय ॥ कौने मतलब को जावत हौ हमते सत्य देव बतलाय ४४

६ आल्हखण्ड । ४२ सुनिकै बातें हरिकारा की ताल्हन बोला बनारसक्यार ॥ भयो बखेड़ा है धूरेपर . हूँवनाचली बिषमतलवार ४५ हम फिरियादी कनउज जावैं राजा जयचंद के दरबार ॥ सुनिकै बातें ये ताल्हनि की सोऊ बोला बचन उदार ४६ उन घर नायब चंदेलो है जो परिमाल मोहोबे क्यार ॥ एक महीना की छुट्टी लै आयो घरे आपने यार ४७ तुमचलिजावो परिमालिकढिग तौ सब काज सिद्धि ह्वैजाय ॥ नाहिं तो बरसैं तुमका लगिहैं मानो सत्य सत्य सबभाय ४८ सुनिकै बातें हरिकारा की ये चलिगयो जहाँ परिमाल ॥ तुरतै मिलिकै परिमालिक सों अपनो गायगयो सबहाल ४६ बड़ी प्रीतिसों परिमालिक तब इनको द्वार दीन टिकवाय ॥ सिधा मँगायो सब क्षत्रिन को ताल्हनि खानादीन मँगाय ५० बनी रोसइयाँ राजपूतन की क्षत्रिन जेइँ लीन ज्यँवनार ॥ अब यहु लड़िका जम्बैवाला ठाकुर माड़ोका सरदार ५१ दावतिआवै सो मोहवे को करिया करिया के अनुमान ॥ बजै नगाड़ा त्यहि फौजन माँ भारी होय घोर घमसान ५२ सुन्यो नगाड़ा के शब्दन को चक्रित भयो रजापरिमाल ॥ तब हरिकारा दुइ आवतभे तेसब कह्यो वहाँ परहाल ५३ सुनिकै बातें हरिकारा की फाटक बन्द लीन करवाय ॥ तवलों करिया फौजैं लै कै फाटक ऊपर पहुँचा आय ५४ हुकुम लगायो राजपूतन को कुल्हड़न फाटक देव गिराय ॥ मर्दिगर्दै करि सब मोहवे को नेका टकालेउँ निकराय ५५ तौतौ लरिका मैं जम्बै का नाहिं ई डारौं मुच्छमुड़ाय ॥ नीके गहना ये देहैं ना कादर बंश चँदेलाराय ५६

महोबेका प्रथमयुद्ध । ४३ ७ सुनिकै बातें ये करिया की क्षत्रिन लिह्यो कुल्हाड़ाहार्थ ॥ मरै कुल्हाड़ा फिरि फाटक में नायकै रामचन्द्र को माथ ५७ यह गति चारो भाइन दीख्यो ताल्हन बनरस को सरदार ॥ पांचों मिलिकै सम्मत करिकै गरुई हांक दीन ललकार ५८ जल्दी खोलो अब फाटक को मूरति दखौं करिंगा केरि ॥ जान न पाई माड़ोवाला मारौ एक एक को हेरि ५६ यह कहि फाटक को खुलवायो औ फौजनमाँ परे दबाय ॥ मारन लागे चारो भाई जिनका कही बनाफरराय ६० जौनी दिशि को ताल्हन जावैं कोउ न पैर अड़ावै ज्वान ॥ जौनी दिशिको बच्छराजजायँ त्यहिदिशिमारिकैरैंखरिहान ६१ को गति बरौ देशराजकै सरबरि करै कौन सरदार ॥ बड़ा लड़ैया रहिमलतोंड़र दोऊहाथ करै तलवार ६२ मूंड़नकेरे मुड़चौरा भे औ रुंडनके लाग पहार ॥ खूनकिनदिया तहँ बहिनिकरी जूझे बड़े बड़े सरदार ६३ बड़ा लड़ैया माड़ोवाला यहु जम्बैको राजकुमार ॥ ताल्हनकेरे यहु मुरचापर कीन्हेसि पाँचघरी तलवार ६४ जीति न दीख्यो जब ताल्हनसों तब फिरि भागा लिहेपरान ॥ बचे खुचे जे माड़ोवाले तेऊ भागिगये सब ज्वान ६५ यह सुनि पावा रनिमलहनांने चारिउ कुँवर लीन बुलवाय ॥ बड़ी बड़ाई करि चारों की औ परिमालसों कहा बुझाय ६६ इन्हें टिकावो तुम मोहबे माँ इनके ब्याह देव करवाय ॥ ईजति हमरी इन राखी है औ गाढ़ेमाँ भये सहाय ६७ बातें सुनिकै रनिमलहना की फिरि दरबार पहुंचे आय ॥ देशराज औ बच्छराज को दोउन लीन्ह्यो हृदय लगाय ६८

= आल्हाखण्ड । १४ तिनसों बोल्यो परिमालिक फिरि हमरी बात सुनो दोउ भाय ॥ दूध पूत औ धनदौलत के मालिक तुम्हीं बनाफरराय ६९ मीराताल्हन वनरस वाले तिनसों बोल्यो रजापरिमाल ॥ फौजनकेरे तुम मालिक हौ हमरे बचन करौ प्रतिपाल ७० नाई बारी को बुलवायो तिनसों कह्यो बचन समुझाय ॥ जाति बिरादर जहाँ हमरे हैं तिनका खबरि सुनायो जाय ७१ लरिका द्वारे परिमालिक घर ब्याहन योग भये हैं आय ॥ क्वारी कन्या जिनघर होवैं टीका तुरत देयँ पठवाय ७२ सुनिकै बातें परिमालिक की नाइन पतालगायो जाय ॥ दलपतिराजा ग्वालीयर का त्यहिफिरि टीका दीनपठाय ७३ देशराज औ बच्छराज को लैके पहुँचिगयो परिमाल ॥ द्यावलि विरमाँ दूनो कन्या इनको ब्याहिदीन नरपाल ७४ देशराज का द्यावलि सँगमें विरमाँ बच्छराज के साथ ॥ ब्याहिकै चलिभे परिमालिक फिरि मनमें सुमिरि भवानीनाथ ७५ दोनों बहुवन को सँग में लै मोहवे आयगये परिमाल ॥ खबरि जनायो यह सखियनने मल्हनावहुत भई खुशियाल ७६ दौरति आई फिरि द्वारे पर औ आरती उतारी आय ॥ बाँह पकरिलइ दोउ बहुवन की राखी रंगमहल में जाय ७७ हार नौलखा के लेबे को आयो रहै करिंगाराय ॥ स्वई हार लै रानी मल्हना औद्यावलिको दीन पहिराय ७८ दूसर हार और तैसे लै विरमागले दीन फिर डार ॥ अनँद बधैया बाजन लागी घर घर होयं मंगलाचार ७९ को गनि बरणै त्यहिसमया कै हमरे बूत कही ना जाय ॥ सुखमाँ सोयो परिमालिक फिरि मल्हना संग महल हर्षाय ८०

महोबेका प्रथमयुद्ध । ४५. ९ सवैया ॥ सोय उठी परिमाल कि नारि तबै मनमें यह सोचन लागी । मंदिर एक कसामसि होय नई दुलही सुलही बड़ भागी ॥ दुःख मिलै इन नारिन को मन में यह सोचि उरै अनुरागी । सोय उठे ललिते परिमाल तबै यह नारि सुनावन लागी =१ सुनिकै परिमाल कह्योहँसिकै इनको हम आनहि ठौर टिकावैं । उठिकै पुर दूर कछू यक जाय तहां पुरवा कर नेव डरावैं ॥ नामधर्यो दशहरिपुर ताहि यहाँ दउकुँवरन फेरि बुलावैं । ललिते दउबन्धु टिकेतहँजाय न गायसकों जोमहासुखपावैं=२ को गति बरणै त्यहि पुरवा कै हमरे बूत कही ना जाय ॥ तहँही द्यावलि के आल्हा भे प्याट म रहे उदयसिंहराय =३ बिरमा केरे मलखाने भे सुलखे गये गर्भ में आय ॥ तबहीं करिया माड़ोवाला आधीरात पहुँचा आय =४ सोवत मास्यो बच्छराज को काट्यो देशराज शिरजाय ॥ आगि लगायो फिरि पुरवा में सबियाँ जेवर लीन मँगाय =५ लीन्ह्यो हाथी देशराज का घोड़ा पपिहा लिह्यो खुलाय ॥ लखा पतुरिया देशराज की सोऊ करिया लीन बुलाय =६ मालखजाना परिमालिक का सबियाँ बेगि लीन लुटवाय ॥ हार नौलखा को लैकै फिरि मोहबेते कूच दीन करवाय =७ आठरोजकी मंजिल करिकै माड़ो गयो करिंगाराय ॥ खबरि सुनाईती माहिलने सोऊ गयो तहाँ फिरि आय =८ बड़ी बड़ाई भै माहिलकै राजा जम्बै के दरबार ॥ अनँद बधैया माड़ो बाजी घरघरभये मंगलाचार =६ ब्रह्मारंजित भे मल्हना के औ द्यावलिके उदयसिंहराय ॥

१० आल्हखण्ड । ४६ सुलखे पैदा भे विरमा के ताकी खुशी कही ना जाय ६० देवा पैदाभा भीषम के ठाकुर मैनपुरी चौहान ॥ सो भा साथी बघऊदन का ज्वानों सुनो चित्तदै कान ६१ याविधि लड़का इकठौरी है बाँधे छोटि छोटि तलवार ॥ छुटि छुटि ढालें सोहैं पीठि में शिरपर पगिया करैं बहार ६२ छुटि छुटि कलँगी तिनपरसोहैं छोटी बैसनके सरदार ॥ छुटि छुटि घोड़न के चढ़वैया बड़ बड़ ठकुरन केर कुमार ६३ रोज शिकारन को जावें ते बाँधे गूंरा और गुलेल ॥ जुलफै सोहैं तिन कुँवरन के जिनमाँ महकै अतरफुलेल ६४ आगे घोड़ा है आल्हा को पाछे जायँ वीर मलखान ॥ तिनके पीछे ब्रह्मा सोहैं पीछे उदयसिंह बलवान ६५ सुलखे भाई 'मलखाने का सोऊ लीन्हे हाँथ गुल्याल ॥ हिरना ढूंढें सब जंगल माँ एक ते एक दई के लाल ६६ हिरना पायो नहिं जंगल में लौटे फेरि महोबे बाल ॥ एक न लौट्यो उदयसिंह तहँ नाहर देशराजका लाल ६७ सो यह सोचै मन अपनेमाँ औ मनहीमाँ करै विचार ॥ हम कहिआये हैं माता सों माता लावैं आज शिकार ६८ हिरना मारे बिन जावें ना हमरो याही ठीक विचार ॥ यहै सोचि कै मन अपने माँ ढूंढ़न लाग्यो तहाँ शिकार ६६ हिरनादीख्यो इक झाबर में मारन चल्यो बनाफरराय ॥ हिरना भाग्यो तहँ उरईको माहिल बाग पहुँचा जाय १०० घोड़ बेंदुला को रपटाये पाछे चला बनाफर जाय ॥ खाँई ऊंची त्यहि बगियाकी ऊदन घोड़ा दीन फँदाय १०१ मारि बेंदुला की टापन सों सबियाँ बगिया दीन खुदाय ॥

महोबेका प्रथमयुद्ध । ४७ ११ छोटी दरखत बहु टूटत भे रौसैं पटरी दई गिराय १०२ यहगतिदीख्यो जब मालिनने बोल्यो उदयसिंहते आय ॥ कौने राजा के लरिकाहौ सबियाँ डार्यो बाग नशाय १०३ काह नाम है सो बतलाओ आपन देश देव बतलाय ॥ सुनिकै बातें त्यहि मालीकी बोल्यो तुरत बनाफरराय १०४ देश हमारो नगर महोबा हमरो उदयसिंह है नाम ॥ फिरिकै माली अब बोलेना नाहिं तो पठैदेवँ यमधाम १०५ सुनिकै बातें बघऊदन की माली चुप्प साधि तब लीन ॥ सुमिरि भवानी शिवशंकरको ह्याँते कलम बन्दकै दीन १०६ आशिर्वाद देवँ मुंशीसुत जीवहु प्रागनरायण भाय ॥ कीरति तुम्हरी जो सब गावैं तौफिरिकथाबहुतबढ़िजाय १०७ माथ नवावों पितु अपने को जिन म्वहिं बिद्यादीन पढ़ाय ॥ सो सुख पावैं देवलोक में गावैंललितचरितनितध्याय १०८ अब मैं ध्यावों रामचन्द्रको जो मम इष्टदेव महराज ॥ ईज्जति हमरी जग में राखैं पुरवैं सकल हमारे काज १०६ इति श्रीलखनऊनिव।सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबायू प्रयागना- रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतमहोवायुद्धऊदनशिकार वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ महोबेकाप्रथमयुद्धसमाप्त ॥

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अथ आल्हखण्ड ॥ माड़ो का युद्ध वर्णन ॥ सवैया ॥ श्वेतस्वरूप अनूपमनूप नहीं कोउ रूप कहौं ज्यहि गाई । आप समान हौ आपहि रूप स्वरूप के भूप गिरीश जमाई ॥ बैल बुढ़ान कि शूल हिरानभयो कछु आन कि आनहि भाई । पापी लस्यो ललिते शरणागत लूटत हैं त्यहि चोर सदाई १ काम औ क्रोध औ लोभौ मोहहु लूटत हैं नितही दुखदाई । राव न रंक कि शंक करें निरशंक फिरैं सबके उर जाई ॥ चार में मार अपार बली जो छली छलि देश गयो सब खाई । पापी लस्यो ललिते शरणागत लूटत हैं त्यहि चोर सदाई २ सुमिरन ॥ नित प्रति ध्यावै जो सुर्यन को होवै जौन बिसूरै काज ॥ सूर्य्य महातम जो कउ गावै ताकी बनी रहै जग लाज १ प्रातःकाल उदय पूरब दिशि पश्चिम अस्त शामको जान॥ देय अंजली जल सुर्यन को तापर खुशी होयं भगवान २ ४

२ आल्हखण्ड । ५० निमक न खावे जो रवि दिनमें एकै बेर करै आहार ॥ बंधन छूटैं त्यहि दुनिया के नाँघै माया सिंधु अपार ३ सोय के जागै जब कोऊ नर लेवै रोज सूर्य्य के नाम ॥ जब मरजावै वहु दुनिया में पावै तुरत सूर्य्य को धाम ४ छूटि सुमिरनी गै सूर्य्यन कै औ ऊदन का सुनो हवाल ॥ ऊदन जैहैं गढ़माड़ो को लड़िहैं तहाँ केर नरपाल ५ अथ कथाप्रसंग ॥ बरस बारहीं का ऊदन रहै बाँधे सबै ज्वान हथियार ॥ माहिल ठाकुर उरई वाला खेलै ताकी बाग शिकार १ घोड़ बेंदुला तहँ थिरकत भा विषधर उरई के मैदान ॥ भारी पनिघट रहै उरई का नारिन दीख सजीला ज्वान २ धीरज छूट्यो तब नारिन के बोलीं एक एक के कान ॥ काहू राजाको बालकहै याको रूप दीन भगवान ३ नारी बोलैं अस आपस में तवलग गयो बनाफर आय ॥ ऊदन बोल्यो पनिहारिन सों घोड़ै पानी देउ पियाय ४ सुनिकै बातैं बघऊदन की बोली एक नारि रिसिआय ॥ कौनदेश के रहवैया हौ आपन नाम देव बतलाय ५ लौंड़ी तुम्हरी हम आहिनना घोड़ै पानी देयँ पियाय ॥ माहिलराजा जो सुनि पैहैं लेहैं घोड़ा तुरत छिनाय ६ देश हमारो नगर मोहोबा आल्हा केर लहुरवाभाय ॥ बेटा आहिन देशराज के हमरो नाम उदयसिंहराय ७ यह कहि लीन्हों कर गुलेलको गुल्लन गगरी दीन गिराय ॥ जितनी गगरी रहैं पनिघटमाँ सबियाँ गुल्लन दीन नशाय ८ पैंड़ा मसक्यो रसबेंदुल के घोड़ा उड़ा हवा सम जाय ॥

सवापहर के फिरि अर्सामाँ ऊदन गयो मोहोबे आय ६ हाँ पनिहारी चलि पनिघटसों माहिल द्वार पहुंची आय ॥ कही हक़ीकत सब माहिल सों आँखिन आँसू रहीं बहाय १० ईजति हमरी वहि लैडारयो बेटा देशराज के लाल ॥ गगरी सबियाँ चूरण कैकै औचलिगयो जहाँपरिमाल ११ सुनिकै बातैं पनिहारिन की माहिलजला अग्निकीज्याल ॥ काग़ज लीन्ह्यो कलपीवाला लीन्ह्यो कलमदवाइत हाल १२ शिरीसरखऊ को पहिले लिखि पाछे लिखनलाग सब हाल ॥ चिट्ठी तुमका हम भेजित है सो पढ़िलेउ रजापरिमाल १३ तुम्हरे घरका जो चाकर है जाको उदयसिंह है नाम ॥ सो चलिआयो म्वरि उरई माँ सबियाँ बाग कीन बेकाम १४ उधुम मचायो सो पनिघट में सिगरी गगरी दीन नशाय ॥ कबसे ऊदन भे तरवरिहा सो तुम उन्हें देव समुझाय १५ टँगीं खुपरियाँ देशराज की राजा जम्बा क्यरे दुवार ॥ बड़ी वीरता जो आई हो माड़ो करें जाय तलवार १६ लिखिकै चिट्ठी सो माहिलने धावन हाथ दीन पकराय ॥ साजि साँड़िनी को जल्दी सों धावन चला मोहोबे जाय १७ तीन पहर का अरसा करके फाटक उपर पहुंचा जाय ॥ बैठि साँड़िनी गै फाटक पर धावन उतरपरा तहँ आय १८ चलिभो धावन फाटक भीतर जहँ पै बैठ रजा परिमाल ॥ कीन बन्दगी महराजा को पत्री देत भयो ततकाल १६ फारि लिफाफा को जल्दी सों पत्री पढ़त भयो परिमाल ॥ लिखी हकीकत जो माहिल है सोसबबाँचिलीनत्यहिकाल २० कलम दवाइत कागज लैंकै उत्तर लिखनलाग परिमाल ॥

धोखे माड़ो की चरचा ना कीन्ह्यो उरई के नरपाल २१ फोरी गगरिया है माटी की ताँवे घड़ा देउँ बनवाय ॥ विषधर लड़का देशराज का जयहिकाकहीउदयसिंहराय २२ जैसे लरिका देशराज का तैसे पूत आपनो जान ॥ अनख न मानव यहि वातनका माहिल वचन हमारे मान २३ लिखिकै चिट्ठी को जल्दी सों धावन हाथ दीन पकराय ॥ माथ नायकै परिमालिक को धावन बैठ ऊंट पर जाय २४ जल्दी चलिकै फिरि मोहबे सों उरई तुरत पहुंचा आय ॥ किह्यो बन्दगी सो माहिल को पत्री दीन हाथ में जाय २५ पढ़िकै पत्री परिमालिक की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ॥ नोचि फोंचिकै त्यहि चिट्ठीको माहिल तहँपर दीन चलाय२६ एक महीना के अरसा में ऊदन खेलन चल्यो शिकार ॥ जायकै पहुंच्यो फिरि उरई में माहिल बाग गयो सरदार २७ जोड़ी मास्यो करसायल की औ फुलबगिया डस्योनशाय॥ माली दौरे सब बगिया के औयहदिखयनितमाशाआय२८ जल्दी चलि भे ते उरई को अभई पास पहुंचे जाय ॥ कह्यो हकीकत सब माली ने अभई तुरतै चला रिसाय २६ जायकै पहुँच्यो फिरिबगियामें अभई गरु दीन ललकार ॥ अवगुन कीन्ह्यो भल उरई में ओ द्यावलि के राजकुमार३० जान न पैहो अब उरई ते ऊदन खबरदार द्वैजाय ॥ सुनिकै बातें ये अभई की घोड़ते कुदा बनाफरराय ३१ पकरिकै बाहू द्वउ अभई की औ वगिया माँ दीन चलाय॥ हाँकिकै घोड़ा ऊदन चलिभे पहुँचे नगरमोहोबा आय ३२ माली दौरे फिरि बगिया ते माहिल पास पहुंचे आय ॥

माड़ोका युद्ध । ५३ ५ सुनिकै बातें तिन मालिन की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ३३ लिल्ली घोड़ी को मँगवायो तापर माहिल भयो सवार ॥ जायकै पहुँच्यो फुलबगिया में ठाकुर उरई को सरदार ३४ गोद उठायो फिरि अभई को तुरतै नलकी लीन मँगाय ॥ त्यहि पौढ़ायौ सो अभई को महलन तुरत दीनपहुँचाय ३५ अपना चलिभा फिरि मोहबेको लिल्लीघोड़ी पर असवार ॥ तिकृतिकृतिकृतिकूहांकतिआवै पहुँचा फेरि महोबेदार ३६ उतरिकै घोड़ी सों जल्दी सों चलिभो जहाँ रजापरिमाल ॥ राम जुहार कीन राजा को औफिरिकहनलागसबहाल ३७ तुमने ऊदन को पालो है राजा मोहबे के सरदार ॥ दाख छुहारेन की बगिया को ऊदन जाय कीन संहार ३८ भुजा उखारी तिन अभई की मारो हिरण बाग में जाय ॥ दूजी कीन्हीं म्वरे साथ में ओ महराजा बात बनाय ३६ ऐस बहादुर जो पैदा भे काहे न लेयँ बाप को दायँ ॥ जम्बै राजा माड़ोवाला दशहरि पुरवा लीन लुटाय ४० बाँधिकै मुश्कें देशराज की पत्थर कल्हू डरा पिरवाय ॥ लेखा पतुरिया देशराज की सो लैगयो करिंगाराय ४१ घोड़ पपीहा औ हाथी को लीन्ह्यो हार नौलखा आय ॥ सोवत मारयो बच्छराज को दशहरिपुरवा दीन फूँकाय ४२ इतना कहतै ऊदन आयों राजा गयो सनाका खाय ॥ कलहा लड़िका देशराज को जो मरिबे को नहीं डेराय ४३ सुनिकै बातें सो माहिल की ठाढ़ो भयो शीश को नाय ॥ को है राजा माड़ोवाला सांची हमें देउ बतलाय ४४ को है मारा म्वरे बाप को पुरवा कौन दीन फूँकवाय ॥

६ आल्हखण्ड । ५४ लखा पतुरिया को लैगा को घोड़ा कौन लीन छुड़वाय ४५ हार नौलखा को लैगा को मार्यो बच्छराज को आय ॥ हाल बतावो सब जल्दी सों हमरे धीर धरा ना जाय ४६ सुनिकै बातें बघऊदन की बोला तुरत रजापरिमाल ॥ तीस बरस की ई बातें हैं माहिलकहँ आजसो हाल ४७ कठिन लड़ाई भै सिलहट में तहँ पर जूझो बाप तुम्हार ॥ दशहरिपुरवा कहूँ अनते हैं फूंक्यो माड़ो के सरदार ४८ किह्यो बहाना परिमालिक ने मान्यो नहीं बनाफरराय ॥ माहिल तेरे फिर पूंछत भे साँचे हाल देव बतलाय ४६ को है राजा माड़ोवाला ज्यहिने मारा बाप हमार ॥ चरचा कीन्हीं है तुम्हीं ने ठाकुर उरई के सरदार ५० त्यहिते तुमते हम पूंछत हैं सो तुम हमें देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की माहिलकहावचनमुसुकाय ५१ जौन बतावा परिमालिक ने सोई सत्य बनाफरराय ॥ बाप तुम्हारो सिलहट जूझ्यो चरचाकीत सोईहम आय ५२ सुनिकै बातें ये माहिल की चलिभा तुरत बनाफरराय ॥ जायके पहुँच्यो त्यहि मन्दिरमें जहँ पै रहे दिवलदे माय ५३ हाथ जोरिकै तहँ पूँछत भा माता चरणन शीश नवाय ॥ किसने मार्यो म्वरे बाप को माता मोहिं देउ बतलाय ५४ लखा पतुरिया हाथी घोड़ा औ लैगयो नौलखाहार ॥ टँगी खुपरिया म्वरे बाप की माता क्यहिके अबों दुवार ५५ सत्य बतावै मोहिं माता तू नहिं मरिजाउँ पेटको मारि ॥ इतनी कहिकै बघऊदन ने औ छाती में धरी कटारि ५६ देखि तमाशा यहु ऊदन को द्यावलि मनमाँ कीन बिचार ॥