आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
१६ आल्हखण्ड । ६४ धर्यो नगाड़ा फिरि सँड़ियापर भादों मेघ अस हहराय ३६ बोलि दरोगा घोड़े वाला चांदी कड़ा दीन डरवाय ॥ हुकुम लगायो बघऊदन ने सबियाँ घोड़ सवाँरो जाय ३७ बूढ़ो दुर्बल रोगी घोड़ा एको नहीं किह्यो तय्यार ॥ कच्छी मच्छी ताजी तुरकी हरियलमुश्की घोड़अपार ३८ लक्खा गर्रा पँचकल्यानी सुर्खा सुरँगा रंग विरङ्ग ॥ देर लगावो अब तनको ना घोड़ेनजायकसो सब तङ्ग ३६ सुनिकै बातैं बघऊदन की दौरत चला दरोगा जाय ॥ जितने घोड़ा घोड़शारे माँ सबिसँवेगि लीन कसवाय ४० हथी महावत हाथी लैके तिनका करन लाग तैयार ॥ अंगद पंगद मकुना भौंरा छोटे पर्वत के अनुहार ४१ मैनकुंज मलिया धौरागिरि औ भौंरागिरि दीन विछाय ॥ धरिकै सीढ़ी सांखो वाली हाथी सजैं महावत धाय ४२ डारि बिछौना मखमल वाले ऊपर हौदा दीन धराय ॥ हिरा बिराजैं अम्बारेन में शोभा कही बूत ना जाय ४३ बारह कलशा सोने वाले हौदा ऊपर करैं बहार ॥ यक यक हाथी के हौदा पर दुइ दुइ शूर भये असवार ४४ बोलि दरोगा तोपन वाला रुपिया मुहरैं दई इनाम ॥ बड़ि बड़ि तोपैं जल्दी साजो जासों होय हमारो काम ४५ सुनिकै बातैं मलखाने की दौरत चला दरोगा जाय ॥ कुवाँ सुखावनि गर्भ गिरावनि चर्खी ऊपर दीन चढ़वाय ४६ सूर्य्य लपकानि चन्दझपकनि बिजुली तड़पनि लीन मँगाय ॥ मेघगरज्जनि अष्टधातु की गोला एक मना को खाय ४७ तोप संकटा औ लछिमिनियाँ भैरौं तोप लीन मँगवाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६५ १७ पहिया दुरकैं तिन तोपन के धसकतिचलीं रसातल जायँ ४८ को गति बरणै तिन तोपनकै कायर देखि देखि सकुचायँ ॥ शूर सिपाही ईजति वाले मनमाँ बड़े खुशी द्वैजायँ ४९ ऊदन बोले तब लश्कर में हमरे सुनो सिपाही भाय ॥ जिन्हें पियारी हों घरतिरिया दोहरी तलब लेयँ घरजायँ ५० जिन्हें पियारा हो रणलोहा जूझै चलैं हमारे साथ ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की क्षत्रिन नाय रामको माथ ५१ हाथ जोरिकै सब बोलतभे मानो कही बनाफरराय ॥ पाँउँ पछारी को डारै ना बहुतनधजीधजीउड़िजाय ५२ सुनिकै बातें रजपूतन की बोला द्यावलि क्यार कुमार ॥ स्याबसि स्याबसि ओ रजपूतो कलियुग रखिहौ धर्महमार ५३ भीलमबखतरपहिरि सिपाहिन हाथ में लीन ढाल तलवार ॥ रणकी मौहरि बाजन लागी रणका होनलाग ब्यवहार ५४ ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार ॥ चढ़ा कबूतरी पर मलखाने ऊदन बेंबुलपर असवार ५५ घोड़ करिलिया आल्हा बैठे सिरगा बनरस का सरदार ॥ बैठ मनोहरा की पीठीपर देवा भीषम केर कुमार ५६ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥ तिसर नगाड़ाके बाजत खन लश्करचलिभासाठिहजार ५७ आगे आगे तोपैं चलिभैं पाछे चले मस्त गजराज ॥ घंटा बाजैं गर हाथिन के मानो कोपकीन सुरराज ५८ खर खर खर खर कै रथ दौरैं चह चह धुरी रहीं चिल्लाय ॥ चला रिसाला घोड़नवाला ताकी शोभा कही नाजाय ५६ सत्रह दिनकी मैजलि करिकै माड़ो धुरा दवायनि जाय ॥ ५
१८ . आल्हाखण्ड । ६६ जायकै पहुँचे बबुरीबनमाँ तहँ पर तम्बू दीन गड़ाय ६० तंग बछेड़न की छोरीगइँ हाथिन हौदा घरे उतार ॥ बैठक साजीगय आल्हाकै लागीं छोटी बड़ी बजार ६१ लै लै सीधा चले सिपाही भोजन करन हेतु तय्यार ॥ बनी रसोइयाँ राजपूतन की ज्वानन खूबकीन ज्यौनार ६२ दिन दश बीते बबुरीवनमाँ ग्यरहें बोले उदयसिंहराय ॥ किहिकीनिंदिया आल्हा सोये औ कब ल्यहैं बापका दायँ ६३ तुरत बुलायो फिरि यकवा का बोल्यो बचन बनाफरराय ॥ शकुन विचारो अब जल्दी सों माड़ो काम सिद्धि है जाय ६४ सुनिकै बातें बघऊदन की देवा पोथी लीन उठाय ॥ सोचि समुझिकै देवा बोल्यो हमरे सुनो बनाफरराय ६५ जल्दी चलिये अब माड़ो को साइति बहुत गई नगच्याय ॥ सुनिकै बातें ये देवा की बोला बचन बनाफरराय ६६ उठिये दादा सावधान हो नहिं सब जैहैं काम नशाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा उठे रामको ध्याय ६७ पाँचो मिलिकै तम्बू चलिभे जहँ पै रहें द्यावलदे माय ॥ देखिबालकनको द्यावलि फिरि सबको छाती लीनलगाय ६८ बड़ी प्रीति करि मलखाने सों बोली जियो बनाफरराय ॥ मस्तक सूँघ्यो सब लरिकनको पीठिमैं दीन्ह्यो हाथ फिराय ६६ द्यावलि बोली फिरि सय्यदसौं राजा बनरस के सरदार ॥ जैसे लड़िका ई हमरे हैं तैसे लड़िका लगैं तुम्हार ७० रक्षा कीन्ह्यो सब लड़िकन कै द्यावर बड़ा भरोसा त्वार ॥ सुनिकै बातें ये द्यावलि की बोला बनरस का सरदार ७१ बार न बांका इनका जाई द्यावलि मानो कही हमार ॥
[Header] माड़ोका युद्ध । ६७ १६
रक्षा करिहैं बिसमिल्ला जी करिहैं खुदा खैर यहि बार ७२ पायं लागिकै महतारी के योगी बने उदयसिंहराय ॥ छोड़ि आसरा जिंदगानी को औ सब मयामोह बिसराय ७३ पहिरिकैगूदड़ीआपनिआपनि चारो भाय बनाफरराय ॥ पहिरिकै गुदड़ी बनरस वाला खँझड़ीआपनिलीनउठाय ७४ पाँचो चलिभे गढ़माड़ो को गावतपर्ज और ध्वनि ख्याल ॥ भाइ लहुरवा थिरकति जावै बेटा देशराज को लाल ७५ को गति बरणै तिन योगिनकै हमरे बूत कही ना जाय ॥ बबुरीबनके बाहर ह्वैकै माड़ो तरे पहुँचे आय ७६ बजै सरंगी भल देवाकै सय्यद खँझरी रहा बजाय ॥ कर इकतारा मलखाने के आल्हा डमरू रहे घुमाय ७७ ध्वनि सुनि डमरूकै खँझड़ीतहँ तामें मिलै तुरतही आय ॥ डमरू ध्वनि में इकतारा मिलि औ सारँगि को रहा बुलाय ७८ चारो मिलिकै इकमिल ह्वैकै पाँचो शब्द पहुँचै जाय ॥ शब्द मिलावै द्यावलि वालो यहु आल्हाकलहुरवाभाय ७९ को गति बरणै बघऊदन कै गावै गीत छतीसो राग ॥ बड़ी भक्तिभय कृष्णचंद्रमें पूरो भयो तहाँ अनुराग ८० बाहू दोऊ फरकन लागीं नैना अग्नि बरण होजायँ ॥ देबी शारदाको ध्यावतभो यहु आल्हाकलहुरवाभाय ८१ अईं शारदा उर ऊदन के औ सब हाल दीन बतलाय ॥ बड़ी खुशहाली भय ऊदन के जाना मिला बापका दाँय ८२ तब तो थिरकै भल गलियन में फाटक तरे पहुँचा जाय ॥ अलख जगावै शब्द सुनावै योगिन धूनी दीन रमाय ८३ तब दरवानी बोलन लागे बाबा मतलब देउ बताय ॥
२० आल्हाखण्ड । ६८ कहाँ ते आयो औ कहँ जइहौ आपन भेद देउ बतलाय ८४ सुनिकै बातें दरवानी की बोला तुरत बनाफरराय ॥ हमतो आवैं बङ्गालेते आगे हिंगलाज को जायँ ८५ करब याँचना हम महलन में फाटक हमैं देउ खुलवाय ॥ सुनिकै बातें ये योगिन की बोला द्वारपाल हर्षाय ८६ खबरि सुनावैं महाराजा को तुमसे कहैं फेरि हम आय ॥ कहि हरकारा यह दौरतभा ड्योढ़ी तरे पहुँचा जाय ८७ बेटा अनूपी का जम्मानृप ताको खबरि सुनाई जाय ॥ आये योगी हैं द्वारे पर शोभा कही बूत ना जाय ८८ सवैया ॥ देख म पाँच लखइमाँ सांच सुनो नृप यांचि यही हम चाहें। पाँच के साथ मिले हम सांच पवैं बर यांचि अबैं अवगाहें ॥ देश बिदेश लखे नहिं पांच जो रूप में सांच सचे सच आहें। सांच कभी ललिते नहिं यांच चहै दशपांच मनै अरसाहैं ८६ सुनिकै बातें हरकारा की बोला माड़ो का सरदार ॥ जल्दी लावो तुम योगिन को शोभा लखी तासु की द्वार ६० सुनिकै बातें महाराजा की धावन चला तड़ाका धाय ॥ खबरि सुनाई सब योगिन को लय दरबार पहुँचा जाय ६१ बइसपर्त की गुदड़ी लीन्हे ज्यहिमाँ परी ढाल तलवार ॥ कुंडल सोहैं भल कानन में शिरपर टोपी करै बहार ६२ सोहैं सुमिरनी कर दहिने में आल्हा डमरू रहे बजाय ॥ बजै सरंगी भल देवा कै सय्यद खँझरी रहा उड़ाय ६३ कर इकतारा मलखे लीन्हे ऊदन बंशी रहे बजाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६६ २१ को गति वरणै तहँ योगिन कै शोभा कही बूत ना जाय ६४ लिहे बांसुड़ी सबसों आगे सनमुख गयो उदयसिंहराय ॥ बायें हाथ सों कीन वन्दगी मन में ध्याय शारदामाय ६५ देखिकै तुरतै राहूट द्वैगा जम्बै माड़ो का सरदार ॥ सनमुख ठाढ़े त्यहि योगी को गरुई हांक दीन ललकार ६६ कउने गँवारे के चेला हौ योगिउकियो शत्रु का काम ॥ जउने हाथ सों जपै सुमिरनी जउने लेयँ रामको नाम ६७ करै वन्दगी हम त्यहि सों ना यह फिरि कह्यो बनाफरराय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की राजा मनै गयो शरमाय ६८ मता अनूपी नृप जम्बा की तहँ पर गई रहै तब आय ॥ शोभा लखिलखि सो योगिनकै मनमाँ बड़ी खुशी है जाय ६६ औ फिरि बोली यह योगिनसों तुम्हरी योग सिद्धि है जाय ॥ चलिकै नाचो म्वरे महलन में योगेश्वरै कृष्णको ध्याय १०० सुनिकै बातें ये रानी की महलन तुरत पहुँचे जाय ॥ मलखे लीन्हे इकत्तारा को सय्यद खँझरी रहे बजाय १०१ बजै सरंगी भल देवा कै आल्हा डमरू रहे घुमाय ॥ बजै बांसुरी बघऊदन कै थिरकन लाग लँहुरवा भाय १०२ टप्पा ठुमरी भजन रेखता धुरपद बिहंगड़ो कल्यान ॥ जयजयवन्ती औ तिल्लाना तोरै ग़ज़ल पर्ज पर तान १०३ भाव बतावै सब अँगुलिन सों यहु द्यावलि को राजकुमार ॥ ता ता थे ई ता ता थे ई कबहूं निकरै शब्द अपार १०४ रानी कुशला की बाँदी तहँ देखै सबै काम बिसराय ॥ एक पहरते दुइ लग बीते तीसरपहरू गयोनगच्याय १०५ बाँदी गमनी तब महलन को देखत रानी उठी रिसाय ॥
२२ आल्हखण्ड । ७० बड़ी देर भइ हत्यारी तोहिं कात्वरिअकिलगईहिराय १०६ क्यहिके महलन में यटकीरहि सांची सांचु देइ बतलाय ॥ सुनिकै बातें महरानी की बांदीहाथजोरिशिरनाय १०७ कही हकीकति सब योगिनकै शोभा बार बार गयगाय ॥ कीतो आये इन्द्रलोक ते की वै गये स्वर्ग ते आय १०८ शोभा बरणै को योगिनकै रानी कही बूत ना जाय ॥ सुनिकै बातें ये बांदी की तुरतैहुकुम दीन फरमाय १०६ जल्दी लावो तुम योगिनको दर्शन मोहिं देउ करवाय ॥ मोरि लालसा यह डोलति है योगीजायँ महलमेंआय ११० सुनिकै बातें ये रानी की बांदी चली हवा के साथ ॥ मता अनूपी के महलन में योगिनजायनवायोमाथ १११ कह्यो हकीकति सब रानी की बांदी बार बार शिरनाय ॥ मता अनूपी तब बोलत भै योगीचरणशीशनवाय ११२ घर घर मांगे कछु बनिहैना कुशलामहल चले तुम जाउ ॥ बहु धन पैहौ त्यहि महलन में बैठे चहौ जन्मभर खाउ ११३ जैसी औषधि रोगी चाहै बैदन तैसी दई बताय ॥ बड़ी खुशाली भै ऊदन के जनुमिलिगयोबापकादायँ ११४ चले पछोड़ी सब योगी फिरि बांदी चली अगाड़ी जाय ॥ को गति वरणै तिन योगिनकै जनु गे देवलोक ते आय ११५ सवैया ॥ देखत योगिन रूप अनूप चले नर नारि सबै पुर केरे । आये मनो मघवापुरते यह बात करैं वै सबै मिलिकेरे ॥ हेरे तेई नहिं फेरे फिरैं बड़भाग कही जे रहे कोउ नेरे । योगिन योगिन भेष लखैं ललिते ते कहैं बड़भागहैं मेरे ११६
माड़ोका युद्ध । ७१ २३ रय्यत मोही गढ़ माड़ो की काहू धरा धीर ना जाय ॥ पहिली ड्योढ़ी योगी पहुँचे बांदी बोली शीश नवाय ११७ तनुकबिलामिजाउतुमड्योढ़ीपर भीतर खबर सुनावों जाय ॥ सुनिकै बातें ये बांदी की योगी ठाढ़ भये हरियाय ११८ घोड़ पपीहा तहँ बांधो थो हाथी खड़ा महोबे क्यार ॥ देखिकै दोऊ रोवनलागे आल्हाछाँड़िदीनडिंडकार ११९ देखि तमाशा ऊदन बोले आल्है बार बार शिरनाय ॥ काहे रोये तुम ददुवां हौ सांचे हाल देउ बतलाय १२० सुनिकै आल्हा बोलन लागे हमरे सुनो लहुरवा भाय ॥ हाथी घोड़ा दोउ मोहबे के इनका देखि मोहगाआय १२१ सुनिकै बातें ऊदन बोले दादा हुकुम देउ फरमाय ॥ हाथी घोड़ा दोउ लैजावैं औ फौजनमें पहुँचैं जाय १२२ सुनिकै बातें मलखे बोले ऊदन अकिल गई हेराय ॥ चोरी चोराते लै जैहौ कलियुग चोर कहैहौ जाय १२३ दाग लागि जाय रजपूती माँ औ सब क्षत्रीधर्म नशाय ॥ वादिन लीन्ह्यो हाथी घोड़ा जादिनलिह्योबापका दायँ १२४ तबलों बांदी दौरत आई योगिन माथ नवायो आय ॥ आगे बांदी पाछे योगी दूसरे फटक पहुँचे जाय १२५ तहँना बिरवा रह बरगदका छाया घनी रही तहँ छाय ॥ योगी बैठे त्यहि छाया में मनमें श्रीगणेशको ध्याय १२६ देशराज औ बच्छराज ये दोऊ भाय बनाफरराय ॥ पत्थर कोल्हुन में पिरवायो जम्बै पूत करिंगाराय १२७ खुपड़ी टाँगी त्यहि बरगद में औरन बोलि बोलि रहिजायँ । लड़का हैगे बैरागी हैं कोधौं ल्यई हमारो दायँ १२८
२४ आल्हखण्ड । ७२ पूत सुपूते जो घर होते हमरी गया देत करवाय ॥ सुनि सुनि बातें ये रन केरी ऊदन गये सनाकाखाय १२६ आल्हा मलखे रोवन लागे सय्यद नैन नीरगा छाय ॥ बांदी बोली तब योगिन ते योगी कहा गयो बौराय १३० कौने राजा के लड़िका हौ सांचे हाल देउ बतलाय ॥ देखि खुपड़ियनको रोवत कस हमरे धरा धीर ना जाय १३१ सुनिकै बातें ये बांदी की मलखे बोले बचन बनाय ॥ छोटो योगी यहु बालक है जो रन सुनिकैगयो डेराय १३२ तासों रोवैं हम योगी सब बांदी काह गई - बौराय ॥ भूत चुरैलैं हैं कोल्हुन में आभाबोलिबोलिरहिजायँ १३३ छोटो योगी यहु लड़िका है हिंयना चौंकिपरो सो आय ॥ तासों रोवैं हम सब योगी बांदी सत्य दीन बतलाय १३४ सुनिकै बातें ये योगिन की बाँदी गई हृदय हर्षाय ॥ रानी कुशला की ड्योढ़ी पर योगी सबै पहुँचे जाय १३५ बांदी बोली फिरि योगिन ते भीतर चलो सबै जन भाय ॥ इतनी सुनिकै मलखे बोले बांदी काह गई बौराय १३६ हम ना जैहैं रङ्गमहल को जो सुनिलैय बघोलाराय ॥ गये जनाने में योगी हैं नाहक हमें डरी मरवाय १३७ सुनिकै बातें ये योगिन की बांदी गिरी चरण पर धाय ॥ तुम्हें बुलायो महरानी है तब हम फेरि जुहाराआय१३८ साधु सन्त को सब कोउ मानैं छत्री बाम्हन हैं अधिकाय ॥ यह नहिं लङ्का है रावण की ना हिंयवसैनिशाचरभाय १३६ निर्भय चलिये तुम भीतर को योगी भरम देउ बिसराय ॥ सुनिकै बातें ये बाँदी की योगी सबै चले हर्षाय १४०
माड़ोका युद्ध । ७३ २५ सीढ़िन सीढ़िन सों ऊपर गे पहुँचे रंगमहल में जाय ॥ खिरकी लागीं मलयागिरि की शोभा कही बूत ना जाय १४१ बैठि कबूतर हैं छज्जा पर कहुँ कहुँ नाचिरहे हैं मोर ॥ सुवा पहाड़ी कहुँ पिंजरनमाँ मैना बोलि रहे अतिजोर १४२ राजा जम्बा की महरानी खिरकिन परदा दीन डराय ॥ पतले कपड़ा के परदा हैं योगी तासों परैं दिखाय १४३ चढ़ाउतारू भुजदण्डैं हैं जिनका सिंहवरण करिहायँ ॥ छाती चौड़ीहै योगिनकै नैनन रही लालरी छाय १४४ रूप देखिकै तिन योगिन का रानी गई सनाका खाय ॥ डाटन लागी तब बाँदी को बाँदी काह गई बौराय १४५ ऐसे योगी हम दीखे ना ये कोउ राजन केर कुमार ॥ तुइ छल कीन्हे म्वरे साथमाँ बाँदी पेट फरैहौं त्वार १४६ योगी बोले तब रानीते रानी भर्म देउ सब छाँड़ ॥ बाप हमारे बारे मरिगे माता बरी बैस भै राँड़ १४७ देश हमारे सूखा परिगा माता ब्यँचा योगिन के हाथ॥ रूप बिधाता हमका दीन्ह्यो पै हम भजैं सदारघुनाथ १४८ इतनी सुनिकै रानी बोली ओ योगिनके राजकुमार ! कहाँते आयो औ कहँ जैहौ कहँ है देश रावरे क्यार १४६ कड़ा सूबरण के क्यहि दीन्हे गुदड़ी कौन दीन बनवाइ ॥ सुनिकै बातें ये रानी की मलखे बोले बचन बनाय १५० देश हमारो बंगालो है औ हम हिंगलाजको जायँ ॥ राजा जयचँद कनउज वाला ड्योढ़ी मँगी तासुकीमाय १५१ मोहित ह्वैगा सो योगिनपर गुदड़ी तुरत दीन बनवाइ ॥ कड़ा सूबरण के अपने कर योगिन स्वईदीन पहिराय १५२
२६ आल्हखण्ड । ७४ महल तुम्हारे जो कछु पावैं लै कै हरद्वार को जायँ ॥ शंका लावो कछु मनमें ना साँचे हाल दीन बतलाय १५३ सुनिकै बातैं ये योगिन की रानी कुर्सी लीन मँगाय ॥ बैठे कुर्सिनमाँ योगी तब मन में श्रीगणेश पद ध्याय १५४ करों तरंग यहाँ सों पूरण तवपद सुमिरि भवानी कन्त ॥ पारलगायो रघुनन्दन मोहिं कीन्होरूपफेरि भगवन्त १५५ इति श्रीलखनऊ निवासि (सी, आई, ई) मुंशी नवलकिशोर आत्मज बाबू प्रयागनारायणजी की आज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँडरीकलां निवासि मिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृत योगिरानी गृहप्रवेशो नाम द्वितीयस्तरंगः २ ॥ सवैया ॥ श्रुति शत्रुलसैं नितअंगनमें मन भंगकरैं पथदेखि कुचाला । रक्षक सोयगयो नँदलाल बिहाल करै सबको कलिक्राला ॥ बस एकचलैनहिं दीनदयाल बिना तब ध्यानधरे सुरपाला । शरण गये ललिते निबहै औ मिटै सबही मनके भ्रमजाला १ सुमिरन ॥ तोहिं भवानी मैं ध्यावतहौं शारद बैठु कण्ठमें आय ॥ भूले अक्षर जो कछु होवैं करगहि देवो कलम लिखाय १ गदका उठिगा भीमसेन बिन अर्जुन बिना हिराने बान ॥ पोथी उठिगै भइ सहदेव बिन अब को बाँचै वेद पुरान २ पुण्य न रहिगै कहूँ कलियुगमाँ सबके मनै समान्यो पाप ॥ सुखी न देखा हम काहूको सबके चढ़ी रहै नित ताप ३ विधवा नारी घर घर देखी घर घर जुदे बाप सों पूत ॥ नहीं वीरता क्यहू में देखी देखे बड़े बड़े रजपूत ४
माड़ोका युद्ध । ७५ २७ छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ रानी कुशला के महलन में योगी बने बैठि सरदार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ रानी बोली तब योगिनते हमको भजन सुनावो गाय ॥ सुनिकै बातें ये रानी की सय्यद खँझड़ी लीन उठाय १ लइ इकतारा मलखे ठाढ़े आल्हा डमरू रहे घुमाय ॥ बजै सरंगी भल देवाकै झुकिकुकिनचैउदयसिंहराय २ ता ता थे ई ता ता थे ई मलखे हाथन रहे बताय ॥ भाव बतावै कमर झुकावै थिरकति फिरै लहुरवाभाय ३ कबौं बँसुरिया धरि ओठनमाँ ऊदन बहुत निकारै राग ॥ देखि तमाशा सब योगिन का रानी बड़ा कीन अनुराग ४ मोती मँगायो फिरि थाराभरि औ योगिनका दीन दिवाय ॥ भरिकै मूठी तिन मोतिन का सूंघन लाग लहुरवा भाय ५ कौन रूख माँ ई उपजंत हैं रानी हमैं देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की रानी मनै रही पछिताय ६ कौन तपस्या खंडित ह्वैगै बारे डार्यो मूड़ मुड़ाय ॥ मोती समुंदर में पैदा हैं केहू रूख न लागैं भाय ७ सुनिकै बातें ये रानी की ऊदन मोती दीन फैलाय ॥ हीरा मोती जो हम बाँधैं मारग लेवैं चोर छिनाय ८ रानी मल्हना मोहबे वाली त्यहि दै डरयो नौलखाहार ॥ तैसि निशानी जो ह्याँ पावैं योगी खुशी होयँ तब द्वार ६ सुनिकै बातें ये योगिन की रानी कहा वचन हर्षाय ॥ करो तमाशा तुम महलन में तुमको हार देउँ मँगवाय १० बेटी बिजैसिनि है अंटापर रूपा बाँदी लाउ बुलाय ॥
२८ आल्हखण्ड । ७६ देखि तमाशा ले योगिन का जामें जन्म सुफल है जाय ११ सुनिकै बातें महरानी की बाँदी चढ़ी अटापर धाय ॥ स्ववत जगायो सतखंडापर बाँदी बार बार शिरनाय १२ तुमहिं बुलायो कुशला रानी जल्दी चलो हमारे साथ ॥ सुनिकै बातें ये बाँदी की नायो रामचन्द्र को माथ १३ लैके डिब्बा पानन वाला कई इक वीरा लीन लगाय ॥ दुइ इक खाये मुख अपने माँ दुइ इक लीन्हे हाथ चपाय १४ चलिभै बेटी फिर अंटा ते सीढ़िन उतरि तरे गै आय ॥ रानी कुशला के महलन में बेटी तुरत पहुँची जाय १५ बीरा दीन्ह्यो बैरागिन को सो ऊदन ने डरा चबाय ॥ रूप देखिकै बघऊदन का मूर्च्छितगिरी धरणिभहराय १६ नैन बाण ऊदन के लागे सोऊ गिरे मूर्च्छा खाय ॥ देखि तमाशा रानी कुशला तुरतै गई सनाका खाय १७ योगी नाहीं तुम भोगी हौ औ छल किह्यो यहाँपर आय ॥ जल्दी बाँदी जा ड्योढ़ी पर औ करियाका लाउ बुलाय १८ बाँधिकै मुशकें सब योगिन की औ कोल्हू माँ दरों पिराय ॥ देखिविजयसिनियोगीगिरिगा यहिका पेट दरों चिरवाय १६ भुसा भरावों यहि पेटेमाँ अपने महल देउँ टँगवाय ॥ इतना सुनिकै मलखाने फिरि बोले तुरतै बचन बनाय २० छोटो योगी जो मरिहैं है महलन आगि देउँ लगवाय ॥ डारि तमाखू वीरा लाई सो योगीका दिह्यो खवाय २१ पीक लीलिगा बारो योगी मुूर्च्छा खाय गिरा भहराय ॥ लै जल छिनकन मलखे लागे तबजगि परा लहुरखाभाय २२ बेटी विजैसिनि उठि ठाढ़ी भै रानी गोद बैठिगै जाय ॥
माड़ोका युद्ध । ७७ २६ पूँछन लागी तब बेटी ते काहे बदन गयो कुँभिलाय २३ रूप देखिकै इन योगिन का उरमें गई दया फिरि आय ॥ मात पिता बारे ते मरिगे तब इन डारे मूड़ मुड़ाय २४ ठाढ़े सोचों मैं मनमें यह तबलों पाँव रपटिगा माय ॥ डारि तमाखू बीरा लायूं ताते योगी गिरा भहराय २५ पाप न लावो कछु मन अपने माता सत्य दीन बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये बिटिया की मनमाूसत्य समझिगैमाय २६ रानी बोली फिरि योगिन ते अब तुम करो तमाशा भाय ॥ सुनिकै बातें ये रानी की नाचन लाग लखुरवाभाय २७ गावन लागे मलखाने तब धुरपद सरंगीत औ ख्याल ॥ धनि धनि माता इनकी कहिये ऐसा कहन लगीं सबबाल २८ एकते दूसरी बोलन लागी हमरी सुनो सखी तुम बात ॥ बालम हमरे जो ये होवैं ऐसो बिधी बनावै नात २९ बैठि बिजनिया इनके ढोरैं मुख में सखी खवावैं पान ॥ सुफल जन्म आपन हम मानैं मानो सखी बचन परमान ३० तीसरि बोली फिरि आली सों आली करो बचन ममकान ॥ रूप उजागर सब गुणआगर योगीसकलगुणनिकेखान ३१ हमहूँ मोहिन इन योगिन पर मानो सखी बचन तुम साँच ॥ धड़कै आली म्वरि छाती अब औजरिहिनबिरहकीआँच३२ चौथी बोली का तुम बोलो हमरे लगे करेजे बान ॥ तीखे नैना हैं योगिन के मानो अबै उतारे शान ३३ पँचयीं बोली का तुम बोलो सखियो सबै गइउ बौराय ॥ कबहुँक पावैं हम पलँगा पर तौ बैकुण्ठ धामको जायँ ३४ छठयीं बोली फिरि सखियन सों हमनिज जियकी देयँबताय ॥
३० आल्हखण्ड । ७८ हम सुखपावैं इन योगिन सँग चाहौ भीख मागिकै खायँ ३५ सतयीं बोली का तुम बोलो जो यह लिखा होत कर्त्तार ॥ हमहूं होइत क्यहु योगी घर तब ये होते मोरि भतार ३६ अठयीं बोली का तुम बोलो याही लिखा रहै कर्त्तार ॥ नैनन देखै मन सों मोहै ताको जानो पूर भतार ३७ नवयीं बोली का तुम बोलो तुम्हरे खाउँ पूत औ भाय ॥ तुम्हरे सबके ई पति होवैं हमका कौन दई लैजाय ३८ दशयीं बोली तब रिस करिकै राँड़ो अबना करो चवाउ ॥ देखो तमाशा तुम योगिन का बातन काह घरे लैजाउ ३६ सुनिकै बातैं त्यहि दशयीं की सखियां सबै गईं शरमाय ॥ जितनी नारी गढ़माड़ो की सो योगिन पर गईं लुभाय ४० दिह्यो रुपैया केहु योगिन का केहू दीन मोतिन का हार ॥ रानी कुशला वैरागिन को तुरतै दीन नौलखाहार ४१ चलिभे योगी तब महलन ते फाटक ऊपर पहुँचे जाय ॥ बेटी बिजैसिनि तहँ जल्दी सों ऊदन पास पहुँची आय ४२ पकरिकै बाहू दोउ ऊदन की औ यह बोली बचन सुनाय ॥ मैं पहिचानति त्वाहिं ऊदन है नाहक डारयो मूड़ मुड़ाय ४३ योगीके बालक तुम आहिवना आहिव देशराज के लाल ॥ जल्दी चलिदे अन्वरे महलन में नाहीं तोर पहुँचा काल ४४ सुनी बिजैसिनि की ई बातें बोला तुरत लहुरखा भाय ॥ कहँना दीख्यो तुम ऊदन का साँचे हाल देउ बतलाय ४५ सुनिकै बातें बघऊदन की बोली तुरत बिजैसिनि बैन ॥ अभई लड़का जो माहिल का देखा तासु ब्याह में नैन ४६ हमहूं न्याते गईं सिरउँज माँ तहँ तुम गये बराती भाय ॥
माड़ोका युद्ध । ७६ ११ पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ठाढ़े रहौ बनाफरराय ४७ धक्का मार्यो म्वारि छाती मा चोली मसकि गई त्यहितॉय ॥ तब हम चितई दिशितुम्हरीका औ यह मनै लीन ठहराय ४८ ब्याही जैवै की ऊदन सँग की मरिजाव जहरको खाय ॥ इतना सुनिकै ऊदन चलिभे अंटा उपर पहुँचे जाय ४६ सेज बिछायो सो जल्दी सों तब यह कह्यो बनाफरराय ॥ क्वारी कन्या की सेजिया पर ऊदन कबों धरै ना पाँय ५० मूड़ मुड़ावा तुम्हरे कारण घर घर अलख जगावा आय ॥ पहिले अरुझे को सुरझावो पाछे सेज बिछायो जाय ५१ हाल बताओ सब माड़व का जासों लेयँ बापका दायँ ॥ चोरी चोरा लैजैबै ना साँचेहाल दीन बतलाय ५२ तेहाराखी रजपूती का गुदड़ी अबों परी तलवार ॥ हमको चाहो हाल बताओ नहीं तजो प्रीति का तार ५३ सुनिकै बातैं बघऊदन की बोली तुरत बिजैसिनि नारि ॥ किरिया करिल्यो श्रीगंगा की याही लगे मोरि है आरि ५४ सुनिकै बातें ये कन्या की तुरतै खैंचिलीन तलवार ॥ बिना बियाहे तुमका छाँड़ों तो मोहिं लागै पाप अपार ५५ सुनिकै बातें उदयसिंह की कन्या कह्यो बचन शिरनाय ॥ किला कठिन है लोहागढ़का तहँ नाजयो बनाफरराय ५६ पनिहासोते लों खंदक हैं जम्बा करै तहाँ को राज ॥ गर्भ गिराविनि - तहँ तोपै हैं वहँ नहिं सरै तुम्हारोकाज ५७ किला कठिन है फिरिझांसीका जहँ पर रहै करिंगाभाय ॥ किला तीसरे सूरज भैया तहौं न जयो बनाफरराय ५८ तोप लगावो बबुरी बनमा तौ मिलिजाय बापका दायँ ॥
३२ आल्हखण्ड । ८० बात हमारी पै भूल्यो ना साँचिकिह्यो उदयसिंहराय ५६ बिना बियाहे तुमका जावैं हमका लौटि भगौती खायँ ॥ आल्हा देखें ह्याँ गलियनमा कहूं न दीख लघुरवा भाय ६० ठाढ़े सोचन आल्हा लागे मनमा बारबार पछिताय ॥ मुख दिखलैहौं कस मल्हनाको राजै काह सुनैहौं जाय ६१ द्यावलि माता जो सुनि पैहैं तौ मरिभायँ पुत्र के घाय ॥ सिढ़ियन सिढ़ियन ते नीचे है ऊदन तुरत पहुँचे आय ६२ देखिकै ऊदन को आल्हा ने तुरतै छाती लीन लगाय ॥ देर लगाई कहँ भाई तुम सो मोहिं हाल देबबतलाय ६३ सुनिकै बातें ये आल्हा की बोले उदयसिंह बलवान ॥ ब्यटीबिजैसिनि रनिकुशलाकी सो वह हमें गई पहिंचान ६४ ब्याह हमारे सँगमा कीन्ह्यो हमते कसम लीन करवाय ॥ हाल बतायो सब माड़ो का दादा सत्य दीन बतलाय ६५ सुनिकै बातें ये ऊदन की आल्हा बोले वचन रिसाय ॥ ब्याह न करिहैं हम वैरी घर मानो कही उदयसिंहराय ६६ जब सुधिकरिहैं निजघर केरी स्वावत हनै त्वरे तलवारि ॥ मरे केकई सों दशरथ हैं अजहूं करें दुर्दशा नारि ६७ इतनी सुनिकै मलखे बोले दादा मानो कही हमार ॥ पहिले बदला लेउ बाप को पाछे फेरि किह्यो तकरार ६८ इतनी सुनिकै पांचो चलिभे लोहागढ़ पहुँचे आय ॥ देखिकै फाटक लोहागढ़ को आल्हासोचिसोचिरहिजायँ ६६ कठिन मवासी गढ़माड़ो है कैसे मिलै बाप का दायँ ॥ बातें सुनिकै ये आल्हा की बोले तुरत बनाफरराय ७० कृपा जो होई नारायण की तौ मिलि जई बापका दायँ ॥
मांडोका युद्ध । ८१ ३३ कायर सोचैं इन बातन का दादा तुम्हरी ख्वचै बलाय ७१ राजा जम्बै की ड्योढ़ी माँ योगी सबै पहुंचे जाय ॥ मलखे बोले दरवानी सों हमरी खबरि जनावो जाय ७२ योगी आये बंगाले ते आगे हरद्वार को जायँ ॥ सुनिकै बातें ये योगिन की बोला द्वारपाल मुसुकाय ७३ जैसे पहिले द्वै आयेते तैसे फेरि पहूंचोजाय ॥ राजा जम्बै की ड्योढ़ीमाँ योगिनअलखजगायोआय ७४ लागि कचहरी है जम्बैकी भारी लाग राजदरबार ॥ बैठक बैठे सबक्षत्री हैं एकते एक शूरसरदार ७५ करिया बैठो तहँ दाहिने है टिहुनन धरे नांगितलवार ॥ बाँयें हाथे किह्यो बन्दगी यहद्यावलिका राजकुमार ७६ देखिकै करिया राहुट हैगा नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥ करिया देख्यो दिशियोगिनके कारेनाग ऐस मन्नाय ७७ बँयें हाथते किह्यो बन्दगी योगी काहगयो बौराय ॥ सम्मुख हमरे अब आवोना नाहीं सबैदेउँ पिटवाय ७८ सुनिकै बातें ये करियाकी बोला उदयसिंह ज्यहिनाम ॥ दहिने करसों जपें सुमिरनी दहिने लेयँ रामकानाम ७६ तौने करसों करें बन्दगी हमरो योगभंग द्वैजाय ॥ सुनिकै बातें ये योगीकी बोला तुरत करिंगाराय ८० सच्चे गुरुके तुम चेलाहौ योगी सच्चा ज्ञान तुम्हार ॥ तान सुनावो म्वरेमहलन्में योगी मानो कही हमार ८१ लीन सरंगी को देवा तब सय्यद खँझरी लीनउठाय ॥ लै इकतारा मलखे ठाढ़े आल्हा डमरू रहे घुमाय ८२ जैसे जङ्गल नचैमुरैला तैसे नचै लङ्गरवाभाय ॥
३४ आल्हाखण्ड । ८२ जैसी रागिनी मलखेगावैं देवा तैसे देय बजाय ८३ बजै बँसुरिया भल ऊदनकी थेई थेई रहे मचाय ॥ ताताथेई ताताथेई मुखसों बोलैं अँगुरिन भावबतावतजायँ ८४ सवैया ॥ मोहिगयो माड़व शिरताज सो राजके काज सबै विसराये । तानके वान नथा करिया अरिऊपर चित्तको सोउ लुभाये ॥ होनी चहै सो होन भलीविधि ज्ञान औ बुद्धि न होत सहाये । तानके वानलगै मलखानके ज्वानगिरैं ललिते मुरझाये ८५ रय्यति मोही सब माड़ो की मोहे बाल वृद्ध औ ज्वान ॥ राजा बोला तब माड़व का योगिउ वचनकरो परमान८६ लाखापातुरि म्वरे महलन में ताकी तानसुनी हम भाय ॥ की हम मोहे त्वरि तानन में योगी सत्य दीन बतलाय८७ सुनिकै बातें महाराजा की तुरतै ब्वला लहुरवा भाय ॥ तुम बुलवावो त्यहि पातुरिको हमको तान सुनावैआय ८८ हुकुम लगायो महाराजा ने लाखा तुरत पहुंची आय ॥ तबला गमके ब्रजवासिनि के औध्वनिगई मंजीरनछाय ८६ लिह्यो सरंगी को भँडुवा तब लाखानचनलागि त्यहिठायाँ ॥ को गति वरणै तब लाखाकै हमरे बूत कही ना जाय ६० जब दिशिआई वह योगिन के तब फिरि ब्वलालहुरवाभाया। हुकुम जो पावै हमे दादा को याको हार देयँ पहिराय ६१ आल्हा बोले तब ऊदनते भैया मानो कही हमार॥ पहिरे देखी जम्बैराजा लाखा गले नौलखाहार ६२ मूड कटाई सब योगिन के भैया काहगयो बौराय ॥ कही न मानी सो आल्हाकी ताको हार दीन पहिराय ६३
माड़ौका युद्ध । ८३ ३५ हरवा देखत लाखापातुरि तुरतै हाल गई सब जानि ॥ ईतो लड़का हैं द्यावलि के अपनो वदन छिपायो आनि ६४ किह्यो इशारा अस योगिनको ज्यहिमाँ चले बेगिही जायँ ॥ जो कहुँ जानी जम्बै राजा तुरतै डारी इन्हें मराय ६५ जानि इशारा को योगी गे तुरतै ब्वला लहुरवा भाय ॥ बारह बरसैं तुमका हइगें अब हम मोहबा देव दिखाय ६६ बिदा मांगिकै महराजा सों योगी चले तुरतही धाय ॥ योगी पहुँचे पचपेड़न तर लाखा लीन्ह्यो हार छिपाय ६७ उड़ा दुपट्टा जब बायू सों चमकन लाग नौलखा हार ॥ चमकत दीख्यो त्यहि हरवाको राजा माड़ो का सरदार ६८ जम्बै बोलै तब लाखा ते सांचे हाल देव बतलाय ॥ हरवा दीन्ह्यो को तुम को है हमरे धीर धरा ना जाय ६६ हाथ जोरिकै लाखा बोली यह तकसीर माफ़ ह्वैजाय ॥ राह चलन्ते योगी आये हम को हार गये पहिराय १०० इतना सुनिकै राजा जम्बा तुरतै गयो सनाकाखाय ॥ करिया बेटा ते बोलत भा अब तुम रंगमहलको जाय १०१ हार नौलखा मोहबे वाला सो मोहिं बेगि दिखावै आय ॥ इतना सुनिकै करिया चलिभा पहुँचा रंगमहल में जाय १०२ आवत दीख्यो जब करिया को कुशला मिली तुरतही आय ॥ कौन काम को तुम आये हौ करिया हमैं देउ बतलाय १०३ हार मँगाय देउ मोहबे का राजै तुरत दिखावैं जाय ॥ लरी टूटिगय त्यहि हरवा कै सो पटवा घर दीन पठाय १०४ टूट्यो टाटो जस कछु होवै तस तुम हमें देव मँगवाय ॥ थर थर कांपी महरानी तब बोली कछू कही ना जाय १०५