छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
( ९१८ )
| मन्त्रप्रतीकानि | अ० | खं० | मं० | पृ० |
|---|---|---|---|---|
| स ह क्षत्तान्यिष्य | ४ | १ | ७ | ३६१ |
| स ह खादित्वातिशेषान् | १ | १० | ५ | १२६ |
| स ह गौतमो राज्ञः | ५ | ३ | ६ | ४७७ |
| स ह द्वादशवर्ष उपेत्य | ६ | १ | २ | ५७५ |
| स ह पञ्चदशाहानि | ६ | ७ | २ | ६३४ |
| स ह प्रातः संजिहानः | १ | १० | ६ | १२६ |
| स ह व्याधिनानशितुम् | ४ | १० | ३ | ४०२ |
| स ह शिलकः | १ | ८ | ३ | १०९ |
| स ह सम्पादयाञ्चकार | ५ | ११ | ३ | ५३९ |
| स ह हारिद्रुमतं गौतमम् | ४ | ४ | ३ | ३८२ |
| स हाशाथ हैनमुपससाद | ६ | ७ | ४ | ६३६ |
| स हेभ्यं कुल्माषान्खादन्तम् | १ | १० | २ | १२३ |
| स होवाच किं मेऽन्नम् | ५ | २ | १ | ४५८ |
| स होवाच किं मे वासः | ५ | २ | २ | ४६० |
| स होवाच भगवन्तं वा | १ | ११ | २ | १३१ |
| स होवाच महात्मनः | ४ | ३ | ६ | ३७३ |
| स॒ होवाच विजानाम्यहम् | ४ | १० | ५ | ४०४ |
| सा ह वागुच्चक्राम | ५ | १ | ८ | ४४८ |
| सा हैनमुवाच नाहम् | ४ | ४ | २ | ३८१ |
| सेयं देवतैक्षत | ६ | ३ | २ | ६०६ |
| सैषा चतुष्पदा षड्विधा | ३ | १२ | ५ | २८३ |
| सोऽधस्ताच्छकटस्य | ४ | १ | ८ | ३६१ |
| सोऽहं भगवो मन्त्रविदेवास्मि | ७ | १ | ३ | ७१४ |
| स्तेनो हिरण्यस्य सुराम् | ५ | १० | ९ | ५३४ |
| स्मरो वावाकाशाद्भूयः | ७ | १३ | १ | ७६१ |
| हँस्ते पादं वक्तेति | ४ | ७ | १ | ३९२ |
| हन्ताहमेतद्भगवतो वेदानीति | १ | ८ | ७ | ११४ |
॥ श्रीहरिः ॥
गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित विभिन्न गीताएँ
श्रीमद्भगवद्गीता-तत्त्वविवेचनी—
(टीकाकार-श्रीजयदयालजी गोयन्दका)
श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी टीका—
(टीकाकार-स्वामी रामसुखदासजी महाराज)
गीता-दर्पण— (स्वामी रामसुखदासजी महाराज)
गीता-दर्पण— (पाकेट साइज)
गीता-माधुर्य
गीता-शांकरभाष्य
गीता-चिन्तन— (ले० श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार)
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल, पदच्छेद, अन्वय, साधारण भाषाटीका
श्रीमद्भगवद्गीता— माहात्म्यसहित, सटीक मोटे अक्षरोंमें
श्रीमद्भगवद्गीता— श्लोक, साधारण भाषाटीका, टिप्पणी-प्रधान विषय, मोटा टाइप, अजिल्द
श्रीमद्भगवद्गीता— केवल भाषा
श्रीमद्भगवद्गीता— साधारण भाषाटीका, पाकेट साइज
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल मोटे अक्षरोंमें
श्रीपञ्चरत्नगीता— (श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णुसहस्रनाम, श्रीभीष्मस्तवराज, श्रीअनुस्मृति, श्रीगजेन्द्रमोक्षके मूल-पाठ)
श्रीमद्भगवद्गीता— श्रीविष्णुसहस्रनामसहित छोटा साइज
गीताताबीजी— मूल
॥ श्रीहरिः ॥
गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित
उपनिषद्
| ईशादि नौ उपनिषद् | अन्वय, हिंदी व्याख्यासहित |
|---|---|
| ईशावास्योपनिषद् | हिंदी अनुवाद शांकरभाष्यसहित |
| केनोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| कठोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| माण्डूक्योपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| मुण्डकोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| प्रश्नोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| तैत्तिरीयोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| ऐतरेयोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| श्वेताश्वतरोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| छान्दोग्योपनिषद् | ( ,, ,, ) |
| बृहदारण्यकोपनिषद् | ( ,, ,, ) |
[सील/मुहर: K. P. SABHA AMBPHALA LIBRARY No . . . . . . Date. . . . . . JAMMU]
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मिलनेका पता— गीताप्रेस, पो० गीताप्रेस ( गोरखपुर )