ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
२९. इंद्र एवं अश्विनीकुमारों की स्तुति १-८
हितैषी, त्रिशोक ऋषि, शक्तिशाली, स्तुति, दाता १-५
माता, बढ़ना, घेरना ६-८
३०. जल की स्तुति व वर्णन १-१५
मन, दशापवित्र, जाने का आग्रह, बिना काष्ठों के जलना, मुदित, परिचय, छुड़ाना,
तरंग १-८
ऊपर जाना, बढ़ना, सोम धारण, आना, स्थित हेना ९-१५
३१. विभिन्न देवों का वर्णन १-११
स्तुत्य, धनाभिलाषा, सुख पाना, प्रजापति १-४
भरना, पोषक, अजर, प्रकाश, अरणि, कण्व ५-११
३२. इंद्र, उनके घोड़ों व यजमान का वर्णन १-९
स्वाद लेना, घोड़े, बुलाना, गायत्री, आना १-५
यज्ञरक्षक, पूछना, नित्य युवा, धन देना ६-९
३३. कवष व कुरुश्रवण राजा का वर्णन १-९
कवष व कुरुश्रवण, सौत, स्तोता, धन मांगना, हरे घोड़े, दृष्टांत, स्तोता १-७
मानव-स्वामी, वियोग ८-९
३४. जुआ व जुआरी का वर्णन १-१४
तख्ते, पत्नी द्वारा छोड़ना, आदर नहीं, पत्नी को छूना, पहुंचना, जुआघर जाना, हार-
जीत, घाती पाशे, अवश पाशे, झुकना, दाहक पाशे १-९
कर्ज चढ़ना, बदहाली, आग के पास सोना, नमस्कार, जुआ छोड़ने का आग्रह, सुख
याचना १०-१४
३५. विभिन्न देवों का वर्णन व स्तुति १-१४
वरण करना, सुख व धन मांगना, अंधकारनाशक, स्तुति, जानना १-८
जाना, होता, बुलाना, मनपसंद घर, अन्न कामना, कामना पूरक ९-१४
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३६. विभिन्न देवों का वर्णन व स्तुति १-१४
आह्वान, रक्षा याचना, अक्षय ज्योति, मरुतों का सुख, प्रशंसित बृहस्पति, रक्षा याचना,
आह्वान, दीप्तियुक्त, सोमपान का आग्रह, यज्ञयोग्य देव १-१०
अद्वितीय देव, रक्षा याचना, सत्य स्वभाव, धन व आयु की याचना ११-१४
३७. विभिन्न देवों का वर्णन व स्तुति १-१२
नमस्कार, बहना, अनुगमन, चमकाना, यज्ञरक्षा करने, कृपादृष्टि रखने व चिरंजीवी
बनने की प्रार्थना १-७
विशेष दृष्टि, विश्राम, धन याचना, पापहीन, सुख मांगना, निवासस्थान दाता ८-१२
३८. इंद्र की स्तुति १-५
सिंहनाद, वासदाता, युद्ध की कामना, धन प्राप्ति, प्रेरक १-५
३९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१४
नाम लेना, मधुर वचन, वर खोजना, च्यवन, वैद्य, आह्वान १-६
विवाह, कलि ऋषि, रेभ ऋषि, राजा पेदु, प्रशंसनीय, रथ, वर्तिका चिड़िया, रथ
सजाना ७-१४
४०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१४
यज्ञनेता, अनुकूल बनाना, स्तुतियां, अन्नदाता, घोषा, कुत्स, भुज्यु, वश, अत्रि, उशना,
कृश, शंयु, वधिमती १-८
युवती बनना, समेटना, युवा पति, उदकस्वामी, कामना, दर्शनीय ९-१४
४१. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-३
रथ, घर जाना, आह्वान १-३
४२. इंद्र की स्तुति एवं वर्णन १-११
स्तुति का आग्रह, जारतुल्य, धनस्वामी, मित्र बनाना, उपद्रव रोकना, अधिकार,
धनसंपन्न बनाना १-९
भूख मिटाना, धन मांगना १०-११
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४३. इंद्र की स्तुति एवं वर्णन १-११
कृष्ण ऋषि, अभिलाषा, बढ़ाना, पास जाना, सूर्य ढूंढना, हराना, जाना १-७
प्रेरणा, सज्जनपालक, दुर्बुद्धि, रक्षार्थ प्रार्थना ८-११
४४. इंद्र की स्तुति १-११
क्षीण करना, पालक, वज्रधारी, सामर्थ्य, स्तुति, स्वर्ग जाना, नरक प्राप्ति, क्रुद्ध
होना १-८
स्तुति, कोंचना, आहूत, धन मांगना ९-११
४५. अग्नि की स्तुति व वर्णन १-१२
उत्पत्ति, रूप जानना, प्रज्वलन, चाटना, शोभाधारी, मेघभेदन, प्रेरणा, चमकना १-८
पुआ, प्रिय होना, द्वार खोलना, स्तुति ९-१२
४६. अग्नि एवं यज्ञों का वर्णन १-१०
होता, स्तुतियां, त्रित ऋषि, यज्ञनेता, कर्म प्राप्ति, बैठना १-६
गतिशील, स्तुतियां, त्वष्टा, भृगु, यश प्राप्ति ७-१०
४७. इंद्र की स्तुति १-८
गोस्वामी, रक्षायुक्त, महान्, शत्रुहंता, घिरा रहना, धन, बुद्धि व घर की याचना १-८
४८. इंद्र द्वारा अपना वर्णन १-११
अन्न देना, दध्यङ्, दधीचि, वज्र, जीतना, स्वामी, झुकाना, नष्ट करना १-७
गुंगु जनपद, असुर वध, आयुध धारण, अजेय व अन्नार्थ बनाना ८-११
४९. इंद्र का आत्मवर्णन १-११
अनुष्ठान, ‘इंद्र’ नाम रखना, उशना, कुत्स, शुष्ण, आर्य, दस्यु, वेत्सु नामक देश, तुग्र,
स्वदिभ, रांथय, असुर वेश, षड्गृभि असुर, नववास्त्व, बृहद्रथ, शत्रुनाश, तुर्वश,
यदु १-८
मार्ग देना, सुखद बनाना, हरि नामक अश्व ९-११
५०. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-७
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बल, पूजन, शक्तिदाता, शत्रुजेता १-४
रक्षाशक्ति जानना, यज्ञधारक, मनोमार्ग ५-७
५१. अग्नि व देवों का संवाद १-९
प्रवेश, विविध शरीर, पहचानना, आना, तेजपुंजधारी, तीन भाई १-६
अजर आयु, उत्पत्ति, हव्यभाग ७-९
५२. अग्नि का देवों के प्रति कथन १-६
होता, अध्वर्यु, नियुक्त १-३
पांच मार्ग, सेवा, बैठाना ४-६
५३. अग्नि का वर्णन १-११
आना, बैठना, कल्याण करना, पंचजन, यज्ञपात्र, मार्ग, आठ रथ १-७
अश्मन्वती नदी, सोमपात्र, कुठार, अमरत्व, जीतना ८-११
५४. इंद्र की स्तुति १-६
कीर्ति, वृत्रवधादि, उत्पत्ति १-३
अजेय, दाता, स्तोत्र ४-६
५५. इंद्र की स्तुति १-८
दीप्त करना, प्रसन्न होना, सात तत्त्व १-३
मित्रता, सामर्थ्य, लाल पक्षी, सहायक, बढ़ाना ४-८
५६. बृहदुक्थ ऋषि का अपने मृत पुत्र वाजी से कथन १-७
सूर्य, ज्योति धारण, अनुगमन १-३
प्रवेश, परिक्रमा, चिरस्थायी, बृहदुक्थ ४-७
५७. इंद्र की स्तुति व मन का वर्णन १-६
यजमान, आह्वनीय, बुलाना १-३
सुबंधु, इंद्रियां लौटाने का आग्रह, सोमदेव ४-६
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५८. मृत सुबंधु के भ्राता आदि उसके मन के प्रति कहते हैं १-१२
विवस्वान् पुत्र, लौटाना, धरती, लौटाना १-१२
५९. पाप देवता निर्ऋति, असुनीति व इंद्र आदि की स्तुति १-१०
आयु पाना, निर्ऋति, शत्रु रोकना, वृद्धावस्था, बढ़ाना, रक्षार्थ प्रार्थना १-६
प्राण देने व हिंसा रक्षार्थ प्रार्थना, ओषधियां, उशीनर की पत्नी ७-१०
६०. असमाति राजा का वर्णन व इंद्रादि की स्तुति १-१२
असमाति, जेता, पराभव, पंचजन, स्थित करना, अगस्त्य, पणि, जीवनदाता, मन
धारण १-८
अविनाशी, संबंधु का मन, बहना, तपना, हाथ ९-१२
६१. विविध देवों की स्तुतियां व वर्णन १-२७
नाभानेदिष्ट, शत्रुनाशक, चरु पकाना, आह्वान, सिंचन, अभिगमन, वास्तोष्पति,
अंगिरागोत्रीय ऋषि, उत्पत्ति, फल, मित्रता, ढूंढना, शुष्ण १-१३
जातवेदा, दीप्तिशाली, प्रशंसित, कांपना, शंयु ऋषि, स्तुति, सत्यरूप, सुखवर्धक,
स्तुति, नरपालक, प्रिय होना, अन्नदाता, सेवा, धारा, अन्न मांगना १४-२७
६२. अंगिरागोत्रीय ऋषियों की स्तुति १-११
अमरता, पणि, स्थापना, ब्रह्मतेज, गंभीर कर्म वाले, धन देना, उद्धार १-७
सावर्णि मनु, दक्षिणा, यदु, तुर्वसु, अन्न मांगना ८-११
६३. विभिन्न देवों का वर्णन १-१७
ययाति, यज्ञयोग्य, दूध बहाना, उन्नत प्रदेश, सेवा, सजाना, होता, सर्वज्ञ, पापमोचक,
द्युलोक, आह्वान १-११
सुख मांगना, ले जाना, बढ़ाना, रथ, कल्याणार्थ प्रार्थना, धरती, गय ऋषि १२-१७
६४. विभिन्न देवों का वर्णन १-१७
स्तुत्य, कामनाएं, पोषक, बढ़ना, रथ, धन लाना, यज्ञ, आह्वान, त्वष्टा, ऋभुक्षा, वाज,
सुंदर मरुद्गण, आना, अदिति १-१३
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रक्षा, अभिलाषी, गय ऋषि, प्रभुता १४-१७
६५. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
पूर्ण करना, बढ़ाना, मैत्री, स्तुति, याचना, स्तुति, निकालना, व्याप्त, आह्वान, धन
याचना, कार्य, विष्णाप्व १-१२
सरस्वती, स्तुतियां, अन्न याचना १३-१५
६६. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
आह्वान, तैयारी, अभ्युदय, बुलाना, मकान मांगना, इच्छापूरक, पूजन, जलरचना, पूर्ण
करना १-९
स्वर्गधारक, स्तुति व स्तोत्र सुनने की प्रार्थना, सेवा, धन मांगना वंदना १०-१५
६७. बृहस्पति का वर्णन १-१२
अयास्य ऋषि, सरल मन, स्तुति, गाएं निकालना, गरजना, रुलाना, स्तोत्रस्वामी,
सहयोगी १-८
बढ़ाना, स्तुति, प्रसन्नतादाता, नदी प्रवाहित करना ९-१२
६८. बृहस्पति का वर्णन १-१२
स्तुति, प्रकाश पहुंचाना, गाय निकालना, पणि, बल राक्षस, वध, भेदन १-७
गाएं देखना, उषा प्राप्ति, असमर्थता, प्रकाश धारण, नमस्कार ८-१२
६९. अग्नि की स्तुति व वर्णन १-१२
वध्यश्व ऋषि, दीप्त होना, सुमित्र ऋषि, रक्षार्थ प्रार्थना, शत्रुजेता, हितकारी,
आच्छादित, सुमित्रवंशी, महिमा १-९
शत्रुवध, संहार, स्तुत्य १०-१२
७०. अग्नि, यज्ञशाला, ऋत्विज्, होता आदि की स्तुति १-११
उत्तरवेदी, स्तुत्य, रथ, प्रसन्नचित्त, अधिष्ठित, देवगण, यज्ञपात्र, हव्य सेवन १-८
देवभाग, रशना, स्वाहा ९-११
७१. भाषा का वर्णन १-११
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सरस्वती, भाषा, छंद, विसर्जन, मायारूपिणी धेनु, त्यागना, भाव, विचार १-८
हल चलाना, पाप दूर होना, प्रायश्चित्त ९-११
७२. देवों की उत्पत्ति का वर्णन १-९
स्तोत्र, उत्पत्ति, भूमि, अदिति व बंधु देवों का जन्म, धूल उड़ना १-६
सूर्य, स्थिर, अदिति का जाना ७-९
७३. इंद्र एवं मरुतों की स्तुति व वर्णन १-११
प्रशंसा, वर्षा जल, धारण करना, मित्रता, माया का नाश, शत्रुसंहार १-६
नमुचि, शक्तिमान्, चक्र, जन्म, बुद्धि याचना ७-११
७४. मरुतों का वर्णन १-६
धनदान, प्रकाश करना, रत्नदाता स्तुति, शरण, वृत्रनाशक १-६
७५. नदियों के जल का वर्णन १-९
सिंधु, मार्ग बनाना, गरजना, सहायक नदी, गोमती, तुष्टामा, सुसर्त आदि नदियां,
दर्शनीय, सिंधु, बहना, ढका रहना, रथ १-९
७६. सोमरस निचोड़ने में सहायक पत्थर की स्तुति १-८
उषा, धनदाता, मनु, धन मांगना, सुधन्वा, सोम निचोड़ना, मुखशुद्धि, दिव्य धाम १-८
७७. मरुतों का वर्णन व स्तुति १-८
जनक, आक्रमणशील, शत्रुघाती, अन्नदाता, श्येन पक्षी, पथिक, धन, सोमपान,
आना १-८
७८. मरुतों का वर्णन व स्तुति १-८
गृहस्वामी, सुशोभित, दानी, दीपयुक्त, सामगान, दीप्तिशाली, पथिक, रत्नदान १-८
७९. अग्नि का वर्णन १-७
भक्षण, नमस्कार, जलाना, ज्ञानी, ज्वालाएं, हरितवर्ण, रस्सी १-७
८०. अग्नि का वर्णन १-७
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वीरप्रसविनी, प्रेरणा, जरुथ, रूप धरना, घिरना, गंधर्ववचन, स्तुति रचना १-७
८१. सृष्टिक्रम का वर्णन १-७
आच्छादन, विश्वकर्मा, निर्माण, भुवन, परम धाम, स्वर्गफलदाता, सुखोत्पादक १-७
८२. सृष्टिक्रम का वर्णन १-७
भाग, सप्तर्षि, भुवन, धन व्यय, ईश्वर, ब्रह्मांड, स्तुतियां १-७
८३. क्रोध की स्तुति १-७
उत्पादक, मन्यु, शक्तिशाली, सहनशील आह्वान, बंधु, होम १-७
८४. क्रोध की स्तुति १-७
नेता, धन मांगना, उग्र बल, शत्रुजेता, स्तोत्र, तेजधारक, अन्न याचना १-७
८५. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-४७
रोकना, नक्षत्रों के निकट, पीसना, सुरक्षित, वर्षरक्षक, वस्त्र गाथा, कोष, अग्रगामी,
रथमार्ग १-११
गाड़ी, दहेज, समर्थन, रथचक्र, पहिया, नमस्कार, ऋतुनिर्माण, चिरजीवन देना, अमृत
स्थान, स्तुति, पूजन १२-२२
अर्यमा देव, स्थापना, सौभाग्य, पूषा, समृद्ध बनने का आग्रह, प्रवेश, श्रीहीन, रोग,
शत्रु, रक्षार्थ प्रार्थना, आशीर्वाद, वधूवस्त्र, सूर्या, गृहस्थ धर्म, कल्याणी बनाने की
प्रार्थना, संतानरहित पति २३-३८
शतायु की कामना, तीसरा पति, धन व पुत्र मिलना, पुत्र व नाती, कल्याणकारक बनने
की कामना, वीरजननी, वधू व महारानी बनने का आशीर्वाद, हृदयों को मिलाने हेतु
प्रार्थना ३९-४७
८६. इंद्र एवं इंद्राणी का संवाद १-२३
वृषाकपि, सोमरस, अन्नदाता, कुत्ता, दुष्कर्मी उत्तम इंद्र, प्रिय वचन, वीरपत्नी, सखा,
आदर पाना १-१०
बुढ़ापा, समीप जाना, हवि, बैल पकाना, दधिमंथन, समर्थ-असमर्थ, गाड़ी, दास व
आर्य ११-१९
दूरी, आह्वान, पुत्र जनना २०-२३
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८७. अग्नि की स्तुति १-२५
हवन, मांसभक्षी, दीप्त अग्नि, बाण झुकाना, मांसाहारी, जातवेद, ऋष्टियां, तेज,
अनुकूल, तीन मस्तक, जलने की प्रार्थना, दध्यङ् अथर्वा ऋषि १-१२
क्रोध, शोकमन, झूठा, दूध चुराना, मानवदर्शक, असार अंश, दिव्य आयुध, किरणें,
सखा १३-२१
मेधावी धर्षक, वध प्रार्थना, प्रशंसा, नाश का आग्रह २२-२५
८८. अग्नि व सूर्य की स्तुति एवं वर्णन १-१९
बढ़ाना, प्रसन्न होना, विस्तार, संसार, तेज चलना, अंगरक्षक, चिंतन, तृप्त करना,
विभाजन १-१०
स्थापना, उत्पत्ति, तपना, दो मार्ग, ठहरना, विवाद, स्पर्धा नहीं, पास बैठना ११-१९
८९. इंद्र की स्तुति व वर्णन १-१८
हराना, घुमाना, मित्र, स्तुतियां, समानता नहीं, तोड़ना, लोप, वज्र, आह्वान, नदियां,
वध हेतु आग्रह १-१२
अनुगमन, छेदन, ज्योति वाली रात, आह्वान, स्तुति, बुलाना १३-१८
९०. विराट् पुरुष के रूप में ईश्वर का वर्णन १-१६
हजार शीर्ष, अमृत, ब्रह्मांड, ऊपर उठना, विस्तार, वेदोत्पत्ति, ऋतु बनाना, पशु
उत्पत्ति, संकल्प, ब्राह्मण, वर्णों की उत्पत्ति १-१२
चंद्रमा व सूर्य आदि की उत्पत्ति, परिधियां, उपासक १३-१६
९१. अग्नि का वर्णन व स्तुतियां १-१५
व्यवहार, आश्रय, धन बढ़ाना, विमल, उन्मुक्त, जन्म, दहन, वरण, द्रव्य, नेष्टा,
दूत १-११
वृद्धि, स्पर्श, स्तुति, उत्तम यश १२-१५
९२. नाना देवों का वर्णन व स्तुतियां १-१५
सोना, चूमना, अमरता, नमस्कार, सींचना, रुद्रपुत्र, सहायक, डरना १-८
नमस्कार, यज्ञ जानना, पूजन, बुद्धिमान्, अन्न, अदिति, वर्षा ९-१५
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९३. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
रक्षायाचना, परिचर्या, धन, हवि स्वामी, समान धनी, बचना, अन्नस्वामी,
सामगान १-८
स्तुति, अन्न याचना, सिद्धि, स्तोत्र पाठ, पृथवान्, गो याचना ९-१५
९४. सोमरस निचोड़ने में सहायक पत्थर का वर्णन १-१४
स्तुति का आग्रह, हव्य भक्षण, सोमपान, अचल रहना, धारण, सोमरस टपकाना,
ग्रहण, अंश, शक्ति दिखाना १-९
यज्ञसेवन, शक्तिशाली, पूर्ण करना, शब्द करना १०-१४
९५. पुरूरवा व उर्वशी का संवाद १-१८
मन, दुष्प्राप्य, सिंहनाद, रमणसुख, शयनकक्ष, सुजूर्णि, श्रेणि आदि, बढ़ाना, भागना,
संपर्क बनाना, दीर्घायु, पुत्ररूप में होना १-११
ससुराल, अज्ञानी, दीनता, मैत्री, विचरना, वासदाता, आनंद प्राप्ति १२-१८
९६. इंद्र एवं उनके घोड़ों का वर्णन १-१३
प्रशंसा, बुलाना, धनी, दीप्ति, सुंदर, स्तुत्य, स्थित होना १-७
हरी दाढ़ी, सोमपान, अन्न देना, पूर्ण करना, साधन, सवन ८-१३
९७. ओषधियों की स्तुति व वर्णन १-२३
उत्पत्ति, सौ कर्मों वाली, जयशील, घोड़ा, गाय आदि देना, अधिकारिणी, रोगनाशक,
स्तुति, इष्कृति, रोगनाश, आत्मा १-११
चोर, बाज, वायु, वचन व रोग से बचाने की प्रार्थना, पाश, कथन, शांति व शक्ति
मांगना, जीव १२-२०
शक्ति हेतु प्रार्थना, वार्तालाप २१-२३
९८. नाना देवों का वर्णन व स्तुति १-१२
राजा शांतनु, स्तुति, निर्दोष, देवापि, वर्षा, स्तोत्र, शक्ति प्राप्ति, जलाना, दक्षिणा १-९
शूर, मार्गज्ञान, वर्षा याचना १०-१२
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९९. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-१२
धन देना, सामगीत सुनना, हराना, बहाना, छीनना, वध, नाश, भेदन, लोहमय
पीठ १-८
शुष्ण, उशना, अरूरु का वध, ऋजिश्व्रा, वज्र ऋषि ९-१२
१००. विभिन्न देवों की स्तुतियां १-१२
वरण, दूध पीना, ऋजुकामी, सोम, धारण, सेव्य, वासदाता, पाप नाशार्थ प्रार्थना,
पालक १-९
ओषधि, रक्षक, दुवस्यु ऋषि १०-१२
१०१. विभिन्न विषयों का वर्णन १-१२
आह्वान, नख बनाने, बैल जोड़ने व बरतन बनाने का आग्रह १-८
दूध, बरतन, पहिए, बुलाना ९-१२
१०२. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-१२
धन कामना, मुद्गलानी, दास, आर्य, प्रहार, मुद्गल, अनुगमन, बांधना, उद्धार १-८
द्रुघण, विजयी, अन्न याचना, धनदाता ९-१२
१०३. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-१३
जीतना, युद्धकर्त्ता, शत्रुनाशक, बुलाना, उत्तम वीर, जयशील, यज्ञस्वामी,
देवसेना १-८
जलवर्षक, रथ, विजय याचना, अप्वा, कल्याणार्थ प्रार्थना ९-१३
१०४. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-११
सोमपानार्थ अनुरोध, भेंट देना, उशिजवंशी, रक्षा, दान, धनयुक्त १-७
बढ़ाना, वृत्रवध, स्तुति, बुलाना ८-११
१०५. इंद्र का वर्णन एवं स्तुति १-११
नालियां, बुलाना, थकना, बटोरना, भोजन मांगना, ऋभु, हरी दाढ़ी १-७
स्तुतिहीन, उद्धार, मधु लेना, रक्षा ८-११
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१०६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
बढ़ाना, आना, देवपूजा, आह्वान, स्थित, हंता, रथ प्राप्ति १-७
धनरक्षक, सुनना, दूध भरने हेतु प्रार्थना, भूतांश ऋषि ८-११
१०७. दक्षिणा का वर्णन १-११
मार्ग, अमरता, देवपूजा, अधिकारी, मुखिया, सामगायक १-६
रक्षासाधन, व्यथा, वधू, घर, रक्षा ७-११
१०८. सरमा कुक्कुरी व पणियों का संवाद १-११
अभिलाषा, निधि, दूती, रोक न पाना, आयुध, पददलित १-७
सुरक्षित, अयास्य व नवगु ऋषि, भाग देना, संबंध, सत्याश्रित पर्वत ८-११
१०९. बृहस्पति द्वारा पत्नी त्याग का वर्णन १-७
संतान, लाना, दूत, पहुंचाना १-४
प्राप्ति, ब्रह्मपत्नी, पापहीन बनाना ५-७
११०. अग्नि, होता, यूप की स्तुति व वर्णन १-११
कार्यकुशल, भोजन, ज्वाला, प्रार्थनीय, फैलाना, शरीर दर्शाना, दीप्ति वाली, प्रकाश,
बुलाना १-८
त्वष्टा देव, शमिता, भक्षणार्थ आग्रह ९-११
१११. इंद्र की स्तुति व वर्णन १-१०
बुलाना, व्याप्त, सनातन, बल संचार, धारण १-५
माया का नाश, शोभा प्राप्ति, दूर जाना, बहाना, जलस्वामी ६-१०
११२. इंद्र की स्तुति १-१०
वीरता, आह्वान, श्रेष्ठरूप, बुलाना, स्तुति, पात्र प्राप्ति १-६
बुलाना, प्रशंसा, कुशल, धन मांगना ७-१०
११३. इंद्र की स्तुति १-१०
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रक्षा याचना, वृत्रवध, महिमा, वृष्टि, वज्र, क्रोध १-६
वीरता, भक्षण, दभीति, धन याचना ७-१०
११४. विविध विषयों का वर्णन १-१०
व्याप्त करना, व्रत, भाग प्राप्ति, प्रवेश, बारह पात्र, रथ १-६
विभूतियां, वाणी, पुरोहित, श्रम निवारण ७-१०
११५. अग्नि का वर्णन एवं स्तुति १-९
दूत, हव्य भक्षण, स्तुति, अजर, आश्रय, होनहार १-६
शत्रुनाश, बलपुत्र, वषट्कार ७-९
११६. इंद्र की स्तुति १-९
वृष्टि याचना, उत्तरवेदी, शत्रु-संहार, वृष्टि व शक्तिदाता १-५
शरीर, द्रव्य, अभिलाषाएं, धनदाता ६-९
११७. दान का वर्णन १-९
मृत्यु, भिखारी, खोजना, दाता, जाना १-५
पापी, दानी, धन मांगना, दान ६-९
११८. अग्नि की स्तुति १-९
पवित्र व्रत, सुच, घृतसिंचन, प्रशंसित, अमर, दीप्तिधारक, अद्वितीय तेज, स्तुति १-९
११९. इंद्र द्वारा अपना वर्णन १-१३
सोमपान, कंपाना, ऊपर उठाना, स्तुतियां, स्थान बनाना, पंचजन, हराना, धरती
रखना १-९
जलाना, स्वर्ग, महान्, सुशोभित १०-१३
१२०. इंद्र का वर्णन १-९
स्वागत, डराना, नाती, प्रसन्न होना, प्रेरणा १-५
विश्वसनीय, कर्म, जीतना, शक्ति ६-९
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१२१. प्रजापति का वर्णन १-१०
पुरोडाश, सेवा, पूजा, भुजाएं, आदित्य, प्रजापति, रक्षक १-७
एकमात्र देव, आनंदवर्धक, हवन ८-१०
१२२. अग्नि की स्तुति १-८
होता, कर्त्तव्य, धन याचना, बलदाता, भृगुवंशी ऋषि १-५
आचरण, दूत, स्तुति ६-८
१२३. राजा वेन का वर्णन व स्तुति १-८
अर्चना, अनुचर, शब्द, जलस्वामी १-४
कक्ष, भर्त्ता, चमकना, जल निर्माण ५-८
१२४. देवों के प्रति अग्नि का कथन १-९
नियामक, अरणि, जाना, रक्षा, राष्ट्र १-५
द्रव्य, निकलना, वृत्र, प्रशंसा ६-९
१२५. वाणी देवी द्वारा परमात्मा का वर्णन १-८
घूमना, धन देना, आविष्ट, बात बताना, सेवित १-५
व्याप्त, विस्तृत होना, विशाल ६-८
१२६. विभिन्न देवों का वर्णन १-८
बचाना, रक्षा व सुख याचना १-४
आह्वान, शत्रु रक्षार्थ प्रार्थना व आयु याचना ५-८
१२७. रात्रि का वर्णन १-८
शोभा प्राप्ति, बाधा, हानि, शयन, बाज, चोर, अंधकार, स्तोत्र भेंट १-८
१२८. विभिन्न देवों का वर्णन १-९
अध्यक्ष, अभिलाषा, संतान, आशीर्वाद, मनोरथ, छह देवियां, बुद्धि, स्तुति, सुख
याचना, सर्वज्ञ १-९
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१२९. प्रलय की दशा का वर्णन १-७
अभाव, ब्रह्मा, प्रलयदशा, विचारना, कामना, कारण खोजना, निकृष्ट अन्न, देवगण,
बोध न होना १-७
१३०. प्रजापति द्वारा सृष्टि का विस्तार १-७
विश्वप्राण, साममंत्र, यज्ञ, कल्पना, यज्ञ पूर्ण करना, अनुसरण १-७
१३१. इंद्र एवं अश्विनीकुमारों का वर्णन १-७
सुख, भोजन, मित्रता, सहायता, शत्रु, बल व कृपा याचना १-७
१३२. मित्र व वरुण की स्तुति १-७
बढ़ाना, मित्रता, हव्य, भिन्न, शरीर रक्षा व धन याचना, नृमेध १-७
१३३. इंद्र की स्तुति १-७
डोरियां, स्तुति, दानशीलता, बाधक, शत्रु, नाशार्थ व दूध हेतु याचना १-७
१३४. इंद्र की स्तुति १-७
उत्पत्ति, माता, अन्न मांगना, रक्षासाधन, दुर्बुद्धि, ज्ञानी, यज्ञ पूर्ण करना १-७
१३५. नचिकेता एवं यम का संवाद १-७
इच्छा, अनुराग, रथ, उपदेश, शर्त, बांसुरी १-७
१३६. अग्नि, सूर्य एवं वायु का वर्णन १-७
सूर्य, गति, शरीर, प्रियमित्र मुनि १-४
सागर में निवास, आनंददाता, वाणी ५-७
१३७. विभिन्न विषयों का वर्णन १-७
रक्षा व शक्ति याचना, देवदूत, शक्तियुक्त, प्राणी, ओषधि, छूना १-७
१३८. इंद्र की स्तुति १-६
कुत्स, दीप्तिशाली, पिप्रु, धन छीनना, गाड़ी चलाना, रथचक्र १-६
१३९. सविता, विश्वावसु व सोम का वर्णन १-६
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रक्षक, प्रकाशक, सत्यधर्मा, ऊपर आना, बुद्धि, बल मांगना १-६
१४०. अग्नि की स्तुति १-६
अन्न व बल देना, खेलना, बलपुत्र, यज्ञ छूना, धन याचना १-६
१४१. विभिन्न देवों की स्तुति १-६
प्रजास्वामी, सरस्वती, आह्वान, बुलाना, प्रेरणा १-६
१४२. अग्नि की स्तुति व वर्णन १-८
दुःखी, चलना, धरती, सफाई, चढ़ना, वासदाता, आधार, सागर १-८
१४३. अश्विनीकुमारों की स्तुति व वर्णन १-६
अत्रि, कक्षीवान्, मुक्त, सुंदर, स्तुतियां, नौका, गोधन १-६
१४४. इंद्र की स्तुति व वर्णन १-६
सोमरस, ऋभु, वंश, सुपर्ण, आयु याचना, रक्षा करना १-६
१४५. सौत की पीड़ा का वर्णन १-६
प्रेम, ओषधि, प्रधान, दूर भेजना, शक्तिहीन, मन १-६
१४६. विशाल वनों का वर्णन १-६
निर्भय, यश, गाड़ियां, शब्द, फल, स्तुति १-६
१४७. इंद्र की स्तुति १-५
कांपना, प्रशंसा, पूजा, अन्न याचना १-५
१४८. इंद्र की स्तुति १-५
स्तुति, जीतना, अर्पण, स्तोत्र, स्तुति १-५
१४९. सविता का वर्णन १-५
बांधना, विस्तार पाना, गरुड़, पत्नी, सावधान १-५
१५०. अग्नि की स्तुति व वर्णन १-५
आह्वान, बुलाना, प्रियव्रत, अग्नि, सुख मांगना, अत्रि, भरद्वाज, कण्व आदि १-५
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१५१. श्रद्धा की स्तुति व वर्णन १-५
जानना, मनचाहा फल, निश्चय, सेवा, बुलाना १-५
१५२. इंद्र की स्तुति १-५
शत्रुशक्षक, अभयकर्त्ता, अप्रिय शत्रु, अंधकार, आयुध १-५
१५३. इंद्र की स्तुति १-५
शोभनधन, अभिलाषा, टिकाना, धारण, अधिकार १-५
१५४. मृत व्यक्ति का वर्णन व यम की स्तुति १-५
घृत, तप करना, दक्षिणा, उत्तम कर्म, सूर्यरक्षक १-५
१५५. दरिद्रता की निंदा १-५
शिरिंबिष्ठ, दरिद्रता, तैरना, सोना, अन्न देना १-५
१५६. अग्नि की स्तुति १-५
धन जीतना, रक्षासाधन, धन मांगना, प्रकाशक, ज्ञाता १-५
१५७. इंद्र एवं अन्य देवों का वर्णन १-५
सुख याचना, प्रजारक्षण, रक्षक, अमरता, वर्षा देखना १-५
१५८. सूर्य की स्तुति १-५
रक्षा व नेत्र याचना, देखना १-५
१५९. शची का आत्मवर्णन १-६
वश में करना, हराना, कीर्ति, शत्रुहीन, तेज, अधिकार १-६
१६०. इंद्र की स्तुति व वर्णन १-५
सोमरस, स्तुतियां, धनदाता, धनी, आह्वान १-५
१६१. इंद्र द्वारा रोगी को सांत्वना १-५
यक्ष्मा निवारणार्थ प्रार्थना, निर्ऋति, पार ले जाना, रोगनाश, शतायु याचना,
लौटना १-५
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१६२. गर्भ की रक्षा हेतु सांत्वना १-६
राक्षसहंता, स्तुति मंत्र, भगाना, जांघें फैलाना, संतान नाशक को भगाना १-६
१६३. यक्ष्मा के नाश हेतु सांत्वना १-६
यक्ष्मा निकालना, रोग भगाना, बाहर करना, सभी भागों से निकालना, जोड़ १-६
१६४. बुरे स्वप्नों के नाश हेतु सांत्वना १-५
निर्ऋति, मनोरथ, नेत्र, पाप, प्रचेता, पापहीन १-५
१६५. विभिन्न प्राणियों का वर्णन १-५
दूत, दूर ले जाने व पाप से बचाने की प्रार्थना, कल्याण, नमस्कार, अन्न १-५
१६६. इंद्र से शत्रुनाश के लिए प्रार्थना १-५
जेता, अहिंसित, बांधना, छीनना, बोलना १-५
१६७. इंद्र की स्तुति १-४
स्वर्गजय, शरण, सोमपान, स्तुति १-४
१६८. वायु की महिमा का वर्णन १-४
धूल उड़ाना, भुवनस्वामी, जलमित्र, पूजन १-४
१६९. गायों के महत्त्व का वर्णन १-४
रक्षार्थ प्रार्थना, गाय की उत्पत्ति, शरीर देना, बछड़े १-४
१७०. सूर्य का वर्णन व स्तुति १-४
प्रजा रक्षा, तेज, विस्तार, भरना १-४
१७१. इंद्र की स्तुति १-४
त्यट् ऋषि, घर जाना, अस्वबुधन, ले जाना १-४
१७२. उषा की स्तुति व वर्णन १-४
गायों का चलना, यज्ञ की समाप्ति, पूजा, अंधकार नाश १-४
१७३. राजा की स्तुति एवं राज्याभिषेक का वर्णन १-६
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अधिकार, राष्ट्र, आशीर्वाद, अविचल, ध्रुव रूप, भक्त १-६
१७४. राजा की स्तुति १-५
राज्यप्राप्ति, द्वेषी व दानरहित, आश्रय, यज्ञ, स्वामी १-५
१७५. सोमरस निचोड़ने में सहायक पत्थर की स्तुति १-४
कर्म, ओषधितुल्य, प्रयोग, यजमान १-४
१७६. ऋभुगण एवं अग्नि का वर्णन १-४
दुग्धपान, दिव्य स्तोत्र, हव्यवाहक, आयुवृद्धि १-४
१७७. माया का वर्णन १-३
जीवात्मारूपी पक्षी, रक्षक वाणी, सूर्य १-३
१७८. गरुड़ का वर्णन १-३
बुलाना, द्यावा-पृथिवी, विस्तार १-३
१७९. इंद्र की स्तुति व वर्णन १-३
भाग, उपासना, दानी १-३
१८०. इंद्र की स्तुति १-३
धन मांगना, आना, तेजसहित जन्म १-३
१८१. विभिन्न विषयों का वर्णन १-३
पृथु, सुप्रथ, सुरक्षित, साममंत्र लाना, प्राप्ति १-३
१८२. बृहस्पति एवं अग्नि से रक्षा हेतु प्रार्थना १-३
शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, दुर्बुद्धि, अमंगल नाश हेतु प्रार्थना १-३
१८३. यजमान, यजमानपत्नी व उसके गर्भ की रक्षा हेतु प्रार्थना १-३
पुत्र व गर्भाधान की कामना, जन्म देना १-३
१८४. गर्भ की सुरक्षा हेतु प्रार्थना १-३
भाग, गर्भधारण हेतु प्रार्थना, आह्वान १-३
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१८५. आदित्य व वरुण से जीवन रक्षा हेतु प्रार्थना १-३
रक्षार्थ प्रार्थना, दबाना असंभव, ज्योति देना १-३
१८६. जीवन को अमृतमय बनाने की वरुण से प्रार्थना १-३
दीर्घायु हेतु प्रार्थना, यज्ञ का आग्रह, अमृत याचना १-३
१८७. अग्नि से शत्रुओं से बचाने की प्रार्थना १-५
स्तुति, आना, रक्षा याचना, एक-एक कर देखना, रक्षार्थ प्रार्थना १-५
१८८. अग्नि से प्रार्थना १-३
ज्ञानी, स्तुति, रक्षा की प्रार्थना १-३
१८९. सूर्य की महिमा का वर्णन १-३
जाना, व्याप्त करना, शोभा पाना १-३
१९०. सृष्टिक्रम की उत्पत्ति का वर्णन १-३
तप से यज्ञ, सत्य, रात-दिन की उत्पत्ति, सागर, सवंत्सर, सूर्य, चंद्रमा, द्युलोक, पृथिवी
व अंतरिक्ष की सृष्टि १-३
१९१. अग्नि से कल्याण एवं धन की प्रार्थना १-४
धन याचना, मिलकर भोगने का आग्रह, अभिमंत्रित करना, संगठित रहने का
आग्रह १-४
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