भारतकोश
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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

किशोर विमद, विजय, तुग्र, भुज्यु, रथ, सागर, पेदु, कक्षीवान्, कारोतर पात्र, अग्नि बुझाना, यंत्रपीडागृह, गौतम, च्यवन, वंदन, दध्यंग ऋषि, बुलाना, वध्रिमती, हिरण्यहस्त, १-१३ वर्तिका, विश्पला, ऋजाश्व, कांति पाना, स्तुति, यज्ञ के भागों का अर्पण लौहरथ १४-२० शत्रुवध, जल उठाना, स्तुति, रेभ, कर्मों का वर्णन २१-२५ ११७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५ सेवा, घर जाना, पूजित, रेभ, वंदन, प्रतिज्ञा, घोषा, नृषदपुत्र, पेदु, वीरकार्य १-१० भरद्वाज, कामवर्षक, च्यवन, तुग्र, भुज्यु, विश्वाच, ऋजाश्व, मेष को काटना, आह्वान, दुधारू बनाना, माहात्म्य, घोड़े का सिर, अनुग्रह बुद्धि, जीवनदान, वीर कर्मों का बखान ११-२५ ११८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११ रथ, पुत्रादि, दरिद्रतानाशक, तेज गति वाले, सूर्यकन्या, वंदन ऋषि, गाय, च्यवन, अत्रि, वर्तिका, विश्पला १-८ पेदु, आह्वान ९-११ ११९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१० रथ, ऊर्जानी, जयशील, भुज्यु, दिवोदास १-४ कुमारी का पति, अत्रि, शंयु, वंदन ऋषि, युवा बनाना, कामदेव, कामना, दधीचि, पेदु ५-१० १२०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२ मार्ग, स्तोत्र, वषट्कार, बुद्धि, कक्षीवान्, ऋजाश्व, वृक, अगम्य स्थान १-८ पोषण, अश्वरहित रथ, सोमपान, घृणा ९-१२ १२१. इंद्र का वर्णन १-१५ यज्ञ में आना, गाएं निकालना, आकाश धारण, दिवस का प्रकाशन, सोमपान १-८ ऋभु, शुष्ण, मेघ, वृत्र, उशना, एतश, पाप, वृद्धि ९-१५ ebook converter DEMO Watermarks*

१२२. विश्वेदेव का वर्णन १-१५ स्तुति, उषा, अन्न, कक्षीवान्, घोषा, नियमन १-७ स्तुति, यक्ष्मा, निडर, प्रशंसा, सोम, राजा इष्टाश्व, इष्टरश्मि, स्वर्णाभूषण धारण करना, राजा मशशरि व जयशील अयवस ८-१५ १२३. उषा की स्तुति १-१३ अंधकारनाश, पहले जागना, प्रकाश-अंश, घर जाना, नेत्री, धन दर्शाना, पदार्थ छिपाना, आगे रहना १-८ मिलना, स्पष्ट करना, दर्शनीय, कल्याणकारी, अनुकूलता ९-१३ १२४. उषा का वर्णन १-१३ प्रकाश, वियोग, दिशाएं नष्ट न करना, नोधा ऋषि, सुंदर, प्रसिद्ध, निर्मल, दांत, प्रकाश करना १-८ बहिन, पणि, लाल बैल जोड़ना, पक्षियों का उड़ना, उन्नति व वृद्धि की प्रार्थना ९-१३ १२५. दान का वर्णन १-७ राजा स्वनय, कक्षीवान्, सोमपान, घृतधाराएं, संतोष १-५ अमर बनना, वृद्धावस्था ६-७ १२६. भावयव्य आदि के दान का वर्णन १-७ स्वनय, कक्षीवान्, रथ देना, लाल घोड़े, गाएं लेना, लोमशा १-७ १२७. अग्नि का वर्णन १-११ अनुसरण, यजनयोग्य, शत्रु, सारवान हव्य, अन्न ग्रहण, पूजनीय, मंथन, हवन १-८ जरा निवारण, स्तुति, परमबली ९-११ १२८. अग्नि का वर्णन १-८ यज्ञवेदी, मातरिश्वा, चारों ओर चलना, अतिथि १-४ हव्य देना, स्वर्ग, पालक, रमणीय ५-८ १२९. इंद्र की स्तुति १-११ ebook converter DEMO Watermarks*

स्तुति स्वीकारना, गतिशील, मेघ का भेदन, शत्रुसंहार, जगत्पालक, निंदकों का वध १-६ स्तुतियां, शत्रुसेना का नाश, मिलना, महिमावान, रक्षक ७-११ १३०. इंद्र की स्तुति १-१० आह्वान, सोमरस, सोम व पणियों को खोजना, शत्रुनाश, नदी निर्माण, प्रशंसा, राजा दिवोदास, शंबर १-७ कृष्ण, उशना, स्तुति ८-१० १३१. इंद्र की स्तुति १-७ नत होना, सेना के आगे रखना, यज्ञ, शत्रु-नगर विनाश, सागर को छीनना, सिंहनाद, असाधारण, कान १-७ १३२. इंद्र का वर्णन १-६ अन्न लाना, स्वर्ग का मार्ग, वृष्टि, गाएं छुड़ाना, इंद्रलोक, शत्रु-नाश १-६ १३३. इंद्र की स्तुति १-७ धरती को जानना, बैरीभक्षक, शक्ति का नाश, शत्रु-नाश, पीले पिशाच, घिरा रहना, अन्नस्वामी बनना १-७ १३४. इंद्र की स्तुति १-६ रथ, रुचि देख चलना, सावधान करना, अमृत बरसना, समीप जाना, स्तुति, सोम योग्य १-६ १३५. वायु की स्तुति १-९ आह्वान, अनुग्रह, बुलाना, अन्नभक्षण, सोम १-५ कुश, शब्द होना, आहुति, पुरोडाश, चाल न रुकना ६-९ १३६. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-७ बल, यज्ञ में जाना, यज्ञस्वामी, शोभित, नमस्कार, प्रसन्न करना १-७ १३७. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-३ ebook converter DEMO Watermarks*

कूटना, प्रस्तुत, निचोड़ना १-३ १३८. पूषा की स्तुति १-४ बल, प्रशंसनीय घोड़े, धन याचना, स्तोत्र १-४ १३९. पूषा की स्तुति १-११ अग्नि, जल देना, श्लोक, रथ, कर्मरूप, स्तुतियां, दुहना १-७ प्रकाशयुक्त शक्ति, पितर, आवाज, महिमा ८-११ १४०. अग्नि का वर्णन १-१३ यज्ञवेदी, धान्य, यजमान, उपयोगी, प्रकाश, लकड़ियां, तेजोमय बनाना १-७ आलिंगन, गमन, दानाभिलाषी, तेज, नाव, उषाएं ८-१३ १४१. अग्नि का वर्णन १-१३ दृढ़ता, धरती पर रहना, उत्पत्ति, लताओं का प्रवेश, चढ़ना, पूजन, स्तुतियां, भागना, उत्पत्ति १-९ हव्य, पुत्र देना, स्वर्ग, स्तुति १०-१३ १४२. अग्नि का वर्णन १-१३ यज्ञ, तनूनपात, सींचना, स्तुति, यज्ञवर्धक, यज्ञपावक, कुश, फलसाधक, भारती, वाक्, सरस्वती, पुष्टि, हव्य, स्वाहा १-१३ १४३. अग्नि का वर्णन १-८ यज्ञ, मातरिश्वा, चिनगारियां, शत्रुसंहार १-५ स्तुति, बुद्धि, मंगलकारी ६-८ १४४. अग्नि का वर्णन १-७ प्रज्ञा, जल, मिलाना, अजर १-४ प्रकाशमान, स्वामी, आश्रयदाता ५-७ १४५. अग्नि का वर्णन १-५ ebook converter DEMO Watermarks*

प्रशासक, सहारा, स्तुति, कर्म ज्ञान देना १-५ १४६. अग्नि का वर्णन १-५ मस्तक, व्याप्त, ज्ञानधारक, अजीर्ण, दर्शनीय १-५ १४७. अग्नि की स्तुति १-५ लपटें, वंदना, दीर्घतमा, हृदय, स्तोता १-५ १४८. अग्नि का वर्णन १-५ बढ़ाना, स्तोत्र, स्तुतियां, दीप्त, तृप्ति १-५ १४९. अग्नि का वर्णन १-५ वस्तुएं देना, पुरोडाश, वेदी, जलपात्र, पुत्रवान १-५ १५०. अग्नि की स्तुति १-३ हव्य, देवविरोधी, आह्लादक १-३ १५१. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-९ रक्षा, इच्छापूरक, प्रशंसा, यज्ञ, रंभाना, पूजन १-६ शोभनमति यजमान, स्तुति, धन व अन्न धारण ७-९ १५२. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७ सृष्टियां, कर्म, विरोध, उषाएं, गमन, दीर्घतमा, नमस्कारयुक्त १-७ १५३. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४ पोषण, सुखभागी, प्रसन्न, अग्निदाता १-४ १५४. विष्णु का वर्णन १-६ अंतरिक्ष, पादक्षेप, नापना, लोकधारक, बंधु, परमपद १-६ १५५. इंद्र एवं विष्णु का वर्णन १-६ अपराजेय, आदर, शक्तिवर्धन, परिक्रमा, चरणक्षेप, कालचक्र १-६ १५६. विष्णु वर्णन १-५ ebook converter DEMO Watermarks*

सुखकर्त्ता, वृत्तांत, सेवा, मेघ, यज्ञार्थ आना १-५ १५७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ उषा, रथ, सौभाग्य, कशा, गर्भरक्षा, समर्थ १-६ १५८. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-६ दीर्घतमा, अन्न, तुग्रपुत्र, पाशबद्ध, दास, त्रितन, निर्देशक १-६ १५९. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-५ अनुग्रह, अमृत देना, हितकारी, बहिनें, धन याचना १-५ १६०. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-५ सुखदाता, रक्षक, दूध, श्रेष्ठ, विस्तार १-५ १६१. ऋभुगण का वर्णन १-१४ चमस, भाग, युवा करना, स्त्री, पानपात्र, नवीन रथ, मृतक गाय, सोमरस, चार भाग १-९ रक्त रखना, फसलें, बलवती वाणी, अभिलाषा १०-१४ १६२. अश्वमेध के अश्व का वर्णन १-२२ पराक्रम, बकरे ले जाना, पुरोडाश, भाग, जल, यूप, सुडौल, लगाम, छुरी १-९ मांस, रस, कामनाएं, परीक्षा, छुरी, अश्व, घास, पात्र, वषट्कार, वस्तुएं, शब्द करना, हड्डियां १०-१८ प्रकाशक, अकुशल, समीप जाना, तेज व बल १९-२२ १६३. अश्वमेध के अश्व का वर्णन १-१३ शब्द, अश्व प्राप्ति, व्रतधारी, बंधन, लगाम, सिर, रूप, सौभाग्य, सिर-पैर, पंक्ति में चलना १-१० वायुवत् चलने वाला, उड़ना, बकरा, कुशल घोड़ा ११-१३ १६४. विश्वदेव का वर्णन १-५२ पुत्र, सूर्यरथ, गाएं, संसार, धागे, लोक, गाएं, पूजन, तीन माता-पिता, पहिया, चरण, ebook converter DEMO Watermarks*

सात चक्र, घूमना, पांच वर्ण, सूर्यमंडल, निर्माता १-१५ क्रांतदर्शी, जाना, लोकपालक, बोझा ढोना, दो पक्षी, संसार की रक्षा, किरणें, पद, पूजामंत्र, वर्षा रोकना, गाय को बुलाना, आना, तृप्त करना, हराना, स्वधा, सूर्य का आना-जाना १६-३१ प्रजाओं का कारण, पालक आकाश, उत्पत्ति स्थान, यज्ञ, घेरना, बंधना, जानना, अधिष्ठित होना, भक्षण, वाणी, वर्षा, सोमरस, धरती को देखना, चार पद, नाम ३२-४६ भीगना, अरे, धनरक्षा, यजमान, प्रसन्न होना, आह्वान ४७-५२ १६५. इंद्र एवं मरुद्गण का संवाद १-१५ सींचना, उड़ना, पालक, यज्ञकर्म, अनुभव, अहि, कर्म करना, कामना, प्रसन्नता, दूसरों द्वारा न होना १-९ उग्र विद्वान्, आनंद, यश, अन्न, मनोरम स्तोत्र, वाणी १०-१५ १६६. मरुद्गण की स्तुति १-१५ ज्वाला, प्रसन्नचित्त, जल, अट्टालिकाएं, डरना, पशुनाश, अर्चना, पुत्र-पौत्रादि, शस्त्र, शोभन १-१० महिमा, यजमान, मैत्री, दीर्घकालीन यज्ञ, कामना ११-१५ १६७. इंद्र एवं मरुतों का वर्णन १-११ उपाय, धन, वाणी, यत्न, बिजली, सेवा, महिमा, जल टपकना, हराना, महिमा, स्तुति १-११ १६८. मरुद्गण का वर्णन १-१० समान भावना, कंपनशील, हस्तत्राण, पापहीन, अन्न, जल, कल्याण १-७ बिजली, अन्न, शरीर की पुष्टि ८-१० १६९. इंद्र की स्तुति १-८ मरुत्, लड़ना, हव्य, दक्षिणा १-४ ebook converter DEMO Watermarks*

संतोषदाता, घोड़े, मेघ, स्तुति ५-८ १७०. इंद्र एवं अगस्त्य का संवाद १-५ मन, भाग, बात, अमृत, मित्र १-५ १७१. मरुतों की स्तुति १-६ याचना, स्तोत्र, सुखदाता, भागना, जगाना, शक्तिशाली १-६ १७२. मरुतों की स्तुति १-३ आगमन, आयुध, प्रार्थना १-३ १७३. इंद्र का वर्णन १-१३ सामगान, यज्ञ, अन्न, स्तोत्र, उत्तम, व्याप्त, युद्ध, सखा १-९ मित्र बनाना, बढ़ना, वंदना १०-१३ १७४. इंद्र की स्तुति १-१० उद्धारक, नगरियों का नाश, रक्षक, बढ़ाना, कुत्स ऋषि, शत्रु १-६ दुर्योणि, कुयवाच, वृत्र असुर, यदु, तुर्वसु, रक्षक ७-१० १७५. इंद्र की स्तुति १-६ आह्वान, प्रसन्नतादाता, शुष्ण का वध, वृत्रघाती, सुख १-६ १७६. इंद्र का वर्णन १-६ घेरना, हव्य, पांच जन, धन मांगना, अन्नस्वामी, स्तुति १-६ १७७. इंद्र की स्तुति १-५ घोड़े, रथ, तैयार, आह्वान, प्रार्थना १-५ १७८. इंद्र की स्तुति १-५ समर्थ, हवि, पुकार, हराना, शक्तिशाली १-५ १७९. अगस्त्य एवं लोपामुद्रा का रति विषयक संवाद १-६ सौंदर्यनाश, सत्य, भोग, ब्रह्मचर्य, कामनाएं, आशीर्वाद १-६ ebook converter DEMO Watermarks*

१८०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१० नेमियां, रथ, स्तुति, सोमरस, भुज्यु, अन्न १-६ प्रशंसनीय, जगाना, यज्ञ, रथ ७-१० १८१. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९ यज्ञ, शीघ्रगामी अश्व, वर्षा, आकाशपुत्र, स्तुतियां १-५ पास आना, स्तुतियां, यज्ञगृह, स्तोता ६-९ १८२. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-८ नाती, कर्मकुशल, मेधावी, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, नाव, भुज्यु, रथ, स्तुति १-८ १८३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ पास जाना, उषा, आह्वान, भाग, गौतम, पुरुमीढ़, अत्रि ऋषि, स्तोत्र १-६ १८४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६ आह्वान, अन्वेषण, सूर्यपुत्री, स्तोत्र, देवमार्ग १-६ १८५. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-११ घूमना, धारण करना, धन प्राप्ति, अनुगमन, जल, बुलाना, स्तुति, जामाता, संतुष्ट, प्रकाशमान, दीर्घायु १-११ १८६. विश्वेदेव का वर्णन १-११ प्रार्थना, मित्र, वरुण, अर्यमा देव, अतिथि, स्तुति, इच्छा, जल के नाती १-६ घेरना, उपजाऊ बनाना, सुखार्थ प्रार्थना, प्रसिद्ध ज्योति ७-११ १८७. अन्न का वर्णन १-११ स्तुति, रक्षक, सुखदाता, रस, दान, वृत्रवध १-६ भोजन, वनस्पतियां, गो भक्षण, सत्तू, अन्न ७-११ १८८. अग्नि की स्तुति १-११ कवि व दूत, मिलना, अन्न, आदित्य, जल गिराना, अग्नि १-६ ebook converter DEMO Watermarks*

वचन, भारती, आह्वान, पशु-वृद्धि, अन्न, छंद ७-११ १८९. अग्नि की स्तुति १-८ ज्ञाता, साधन, प्रकाशमान, आश्रय रक्षार्थ प्रार्थना १-५ हिंसक, चोर, निंदक आदि से बचाना, पात्र, शत्रुनाशक ६-८ १९०. बृहस्पति की स्तुति १-८ स्तुत्य, मधुरभाषी, फल अन्न, चलना, समीप जाना १-५ नियंत्रक, जल व तट, स्तुतियां, फल, आयु, अन्न हेतु प्रार्थना ६-८ १९१. जीव, जंतुओं, पक्षियों एवं सूर्य का वर्णन १-१६ घिरना, विषधर, प्रभाव, लिपटना, ज्ञानशून्य, देखना, अंग, सूची वाले विषधर, पूर्व में निकलना, उदयगिरि १-९ विष फेंकना, नष्ट करना, पक्षी, नदियां, मयूरियां, व्यर्थता १०-१६ द्वितीय मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. अग्नि की स्तुति १-१६ पालक, गृहपति, विष्णु १-३ रक्षक, दानदाता, शक्तिशाली, यज्ञकर्त्ता ४-६ रत्नधारक, तेजस्वी, पालक, कल्याणकर्त्ता, शत्रुनाशक ७-९ विभु, हव्यदाता १०-११ लक्ष्मी का वास १२ जिह्वा का निर्माण १३ वृक्ष, लता आदि में रहना, मिलना-अलग होना, गोदाता १४-१६ २. अग्नि का वर्णन १-१३ ebook converter DEMO Watermarks*

स्वर्ग, संयमी, सुदर्शन, प्रकाशमान, शिखायुक्त, अविनाशी, अन्न का द्वार १-७ आधार, स्तुतियां, शत्रुजेता, प्रसन्नतादायक, गो व अन्नदाता ८-१३ ३. अग्नि का वर्णन १-११ यज्ञयोग्य, प्रकटकर्त्ता, लक्ष्य, वीरपुत्र, द्वार, फलदाता १-६ पूजा, यज्ञ, सरस्वती, इला, भारती, अन्न ७-९ ज्ञाता, कामवर्षी १०-११ ४. अग्नि का वर्णन १-९ आह्वान, भृगु, मित्र, जीभ फेरना १-६ स्वाद लेना, रक्षक, गृत्समदवंशी ऋषि ७-९ ५. अग्नि का वर्णन १-८ चेतनादाता, निर्वाहक, धारक, फलदाता, नेष्टा, हव्य, महत्त्व १-८ ६. अग्नि की स्तुति १-८ स्तुतियां, यज्ञस्वामी, हवि, विद्वान्, धनदाता, वृष्टिकर्त्ता, पूजक, हितकारी, यज्ञ १-८ ७. अग्नि की स्तुति १-६ तरुण, शत्रुता, लांघना, वंदनीय, भर्त्ता, विचित्र १-६ ८. अग्नि का वर्णन १-६ यशस्वी, आह्वान, स्तुतियां, शोभा, ऋग्वेद, रक्षित १-६ ९. अग्नि की स्तुति १-६ व्रत, धनदाता, जन्मस्थान, धनस्वामी, कांतियुक्त १-६ १०. अग्नि की स्तुति १-६ प्रज्ञा, प्रजायुक्त, अरणि, व्याप्त, वर्णयुक्त, हव्य देना १-६ ११. इंद्र की स्तुति १-२१ बढ़ाना, वृत्र, कामना, हराना, वृत्रवध, प्रशंसा, बादल, प्रसन्न होना, ध्वनि १-८ ebook converter DEMO Watermarks*

कांपना, शब्द करना, सोम, आश्रय, वीरपुत्र, धन, घर, मित्र, शक्ति याचना, दृढ़ करना, उद्धारक, उग्र दिन १-१६ दस्यु, विश्वरूप, अर्बुद, बल असुर का नाश, स्तुति १७-२१ १२. इंद्र का वर्णन १-१५ डरना, दृढ़ करना, नदियां प्रवाहित करना, असुर, शत्रु संपत्ति-नाशक, रक्षक १-६ बुलाना, प्रतिनिधि, पापीनाशक, शंबर असुर, रोहिण का वध, दृढ़ भुजाएं, रक्षक ७-१५ १३. इंद्र का वर्णन १-१३ वर्षा ऋतु, सागर १-२ प्रायश्चित्त ३ धनदाता, दोहन, ओषधि, सहवसु, दस्यु का नाश, पंचजन जतुष्ठिर, तुर्वीति, स्तुति ४-१३ १४. इंद्र का वर्णन १-१२ सोम, योग्य होना, दृमीक, उरण, अश्व, शुष्ण, पिप्रु, नमुचि आदि का वध १-५ नगरियों, विरोधियों का नाश सोम, फलदाता, राजा, धन याचना ६-१२ १५. इंद्र का वर्णन १-१० त्रिकद्रुक, सिद्ध, निर्माण, मार्ग रोकना, नदी सुखाना, गाड़ी तोड़ना, परावृज, द्वार खोलना, चुमुरि, धुनि का वध, भजनीय १-१० १६. इंद्र का वर्णन १-९ आह्वान, शक्तिकेंद्र, अपराजित, ज्ञानी, अन्नदाता, इच्छापूरक, आयुध, रक्षक, घेरना, स्तुति १-९ १७. इंद्र का वर्णन १-९ स्वतंत्र, शीश, विवश, घेरना, अचल, जल गिराना, क्रिवि-वध धन मांगना, भजनीय, आह्वान १-९ ebook converter DEMO Watermarks*

१८. इंद्र का वर्णन १-९ हवन, विजयदाता, अश्व, धनशाली, आह्वान, सोम रखना, आहूत, विपत्तिनाशक, सेवनीय १-९ १९. इंद्र का वर्णन १-९ अन्नवासी, गमन, प्रेरणा, सहायक, एतश १-५ कुत्स, शुष्ण, अशुष, कुयव, पीयु, गृत्समद ऋषि, दक्षिणा ६-९ २०. इंद्र का वर्णन १-९ दीप्यमान, श्रद्धालु, रक्षक, यज्ञ, अभिलाषापूरक, गाएं लेना, नगर विनाश, दास, मस्तक काटना, सेना व लौहनगरी का नाश, दक्षिणा १-९ २१. इंद्र का वर्णन १-६ जलविजयी, स्तुति, प्रशंसा, प्रेरक, गाएं ढूंढना, पुष्टि १-६ २२. इंद्र का वर्णन १-४ तृप्तिदाता, पूर्ण करना, भला विचारना, प्रसिद्ध १-४ २३. बृहस्पति की स्तुति १-१९ गणपति, जनक, शत्रुनाशक, सेनाएं रोकना, पथप्रदर्शक, प्रसन्नता, रक्षक १-८ धन याचना, कामपूरक, पुण्यलाभ, शत्रुसेना नाशक ९-१३ पराक्रम, पूजनीय, विरोधियों को न सौंपने की प्रार्थना, ऋण चुकाना, गायों का आना, संतान रक्षार्थ प्रार्थना १४-१९ २४. बृहस्पति का वर्णन १-१६ विश्वस्वामी, हंता, उद्धारक, भेदन, धन की प्राप्ति १-६ बाण फेंकना, मिलाना, भोगना ७-१० रक्षक, स्तुतियां, सुनना, विभाजन, अन्नयुक्त विश्वनियंत्रक ११-१६ २५. बृहस्पति का वर्णन १-५ दीर्घायु, धनविस्तार, समर्थ, ब्रह्मणस्पति, सुख प्राप्ति १-५ ebook converter DEMO Watermarks*

२६. बृहस्पति का वर्णन १-४ रक्षा याचना, धन प्राप्ति, उपकारी १-४ २७. आदित्यगण का वर्णन १-१७ घृत टपकाना, अनिंदनीय, अहिंसित, तेजस्वी, जगत्धारक, स्तुति १-४ पापों का त्याग, सुगमपथ, सुख प्राप्ति, महिमा वर्धन ५-८ तेजधारक, वरुण व आदित्य की स्तुति ९-१२ स्वामी, ज्योति, मंगलकारी, पाश, धन याचना १३-१७ २८. वरुण की स्तुति १-११ क्रांतदर्शी, प्रार्थना, जल रचना, नदी, पाप, नाश, हिंसक, प्रकाश १-७ शक्तिसंपन्न, ऋण, याचना, चोर, भेड़िया ८-११ २९. विश्वेदेव की स्तुति १-७ पाप, गुप्त स्थान, कल्याण, सुख, न मारना, बचाना, पुत्र याचना १-७ ३०. इंद्र, बृहस्पति, सोम आदि की स्तुति १-११ पानी, समुद्र, वृत्र, असुर पुत्र, शत्रुनाश, समृद्धि, प्रेरक, थकान न देने की प्रार्थना १-७ षंडामर्क का वध, धन याचना, उपासना ८-११ ३१. विश्वेदेव का वर्णन १-७ रक्षा, घोड़े, उत्तम कर्म, पूषा व सूर्या के पति, हव्य स्तुति, बलाभिलाषी १-७ ३२. द्यावा-पृथिवी आदि का वर्णन १-८ अन्न कामना, मित्रता, स्तुति, बुलाना, कर्मों को बुनना, धन, राका देवी, सिनीवाली, सरस्वती, इंद्राणी, वरुणाणी १-८ ३३. रुद्र की स्तुति १-१५ सुख, शतायु, उत्तम, हिंसा-बुद्धि, ओषधियां, स्वामी, रक्षक, उग्र रुद्र १-११ स्तुति, कामना, सुख देने व क्रोध न करने की प्रार्थना १२-१५ ebook converter DEMO Watermarks*

३४. मरुद्गण की स्तुति १-१५ व्याप्त, उत्पत्ति, सोने के टोप वाले, पहुंचना, आयुधधारक, अन्न व बल याचना १-७ अन्नदाता, शत्रुता, हंता, धन मांगना, अंधकार का नाश रूप धरना, होता, पापत्राता ८-१५ ३५. अग्नि का वर्णन १-१५ अन्न, उत्तम रूप, निर्माता, बाड़वाग्नि, अपांनपात्, इड़ा, सरस्वती, भारती १-५ उच्चैःश्रवा अश्व, संसार की उत्पत्ति ६ घर में रहना, वनस्पतियों के उत्पादक ७-८ नदियां, धन देना, भाग्य स्तुति, व्याप्त, उत्तम स्थान, पुत्र-पौत्र प्राप्ति हेतु प्रार्थना १२-१५ ३६. इंद्र, त्वष्टा, अग्नि, वरुण एवं मित्र की स्तुति १-६ भेड़ के बाल, दशापवित्र, भरत के पुत्र, देवपत्नियां मधु, सोमपान, प्राचीन स्तुतियां १-६ ३७. अग्नि की स्तुति १-६ द्रविणोदा, सोमरूप मधु, नेष्टा १-३ मृत्यु निवारक, रथ, सोमपान हेतु प्रार्थना ४-६ ३८. सविता का वर्णन १-११ दाता, हाथ फैलाना, सविता का त्याग, प्रकाश समेटना, शय्या का त्याग, घर अभिलाषा, कार्य क्षीण न होना, निवास, बुलाना १-९ रक्षक, आह्वान १०-११ ३९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-८ बाधा, ज्ञाता, वेगवान्, दुःखत्राता, बुढ़ापा, सुखदाता १-६ स्तुतियां, स्तोत्र रचना ७-८ ४०. सोम व पूषा की स्तुति १-६ ebook converter DEMO Watermarks*

अमरता, सेवा, रथ, वरणीय एवं कीर्तिशाली प्राणि-उत्पत्ति, धनस्वामी १-६ ४१. इंद्र, वायु मित्र, वरुण आदि की स्तुति १-२१ नियतगुण, पुकार, दाता, सोमरस, हजार खंभे, दानशील, पेय सोम, धन, नाना रूप, अचंचल, कल्याण, मेधावी, पुकार, प्रसन्नदाता, दान १-१५ उत्तम सरस्वती, शुनहोत्र, हव्य, प्रार्थना, साधक, यज्ञयोग्य देवता १६-२१ ४२. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३ प्रेरित करना, मंगलकारी, चोर एवं पाप की बात १-३ ४३. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३ बोल, पुण्यकारी शब्द, सुमति की इच्छा १-३ तृतीय मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. अग्नि की स्तुति १-२३ वाहक, समिधा, उत्तम बंधु, बढ़ाना, शुद्धि, धारण करना १-६ माता-पिता-धरती, आकाश, किरणें, जल बहाना, लोकपोषण, शयन, प्रकाशमान ७-१२ जन्म, बढ़ना, तेज, स्तुति, यज्ञ, अनुग्रह, होता, भूमि याचना १३-२३ २. अग्नि का वर्णन १-१५ संस्कार, पूजन, स्तुति, हितकारक, यज्ञमंडप, अग्नि, अन्नार्थ जाना, ज्ञाता, चारों ओर जाने वाले, प्रजास्वामी १-१० गरजना, स्वर्गारोहण, धन-अन्न याचना ११-१५ ३. अग्नि का वर्णन १-११ दूषित न करना, प्रेरणा, सुख चाहना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*

प्रवेश, स्थापना, आना-जाना, प्रेरणा, नमस्कार, प्रशंसा, घेरना, पूर्ण करना, उत्पत्ति ४-११ ४. अग्नि का वर्णन १-११ मित्र, यज्ञ, कुशल, समीप जाना, मार्ग बनाना, कृपा १-६ आह्वान, सोमरस ८-९ जन्मदाता, आह्वान १०-११ ५. अग्नि का वर्णन १-११ द्वार खोलना, जागना, स्थापित, रक्षक, उत्पादक, नया बनाना, धारण करना, बुलाना १-९ अग्नि जलाना, पुत्र-याचना १०-११ ६. अग्नि का वर्णन १-११ सुच, पूजा, दीप्तियां, स्तुति, फलदाता, आह्वान, घोड़े, जलभाग जलाना, यज्ञयोग्य, आह्वान १-९ होता, भूमि, पुत्र व गाय की याचना १०-११ ७. अग्नि का वर्णन १-११ अन्नदाता, नदी में वास, घोड़ियां, वहन, आज्ञापालन, सुख, यज्ञ में जाना, रक्षा, अलंकरण, ज्वालाएं १-९ पापनाशार्थ प्रार्थना, गौ मांगना १०-११ ८. यूप अर्थात् बलिस्तंभ का वर्णन १-११ धन याचना, पाप, नापना, आना, बनाने वाला, गड्ढे में डालना, यज्ञ-साधक १-८ अंतरिक्ष, रक्षार्थ प्रार्थना, सौभाग्य प्राप्ति ९-११ ९. अग्नि का वर्णन १-९ वरण, शांत होना, प्राप्ति होना, अरणिमंथन, ग्रहण, पूजन, १-९ १०. अग्नि का वर्णन १-९ ebook converter DEMO Watermarks*

प्रजास्वामी, यज्ञरक्षक पुत्र-पौत्र प्राप्ति, सिक्त होना १-४ तेजधारी, बढ़ाना, शत्रुजेता, पापशोधक, उत्पत्ति ५-९ ११. अग्नि का वर्णन १-९ ज्ञाता, देवदूत, अंधकारनाशक, अग्रगामी, अवध्य, घर पाना, धन याचना, प्रवेश १-९ १२. इंद्र एवं अग्नि की स्तुति १-९ आह्वान, सोमपान, वरण, अन्नदाता, अर्चना, नगरों को कंपाना, उपस्थित रहना, धन में अभिन्नता, ज्ञान १-९ १३. अग्नि का वर्णन १-७ श्रेष्ठ, द्यावा-पृथिवी, सेवा, नियामक, प्रचलन, रक्षा व धन याचना १-७ १४. अग्नि का वर्णन १-७ प्रज्ञा प्रार्थना, सिंचन, धारक, द्रव्य देना, रक्षण व अन्न हेतु अग्नि के समीप जाना १-७ १५. अग्नि की स्तुति १-७ विनाश, स्तुतियां, फल, शत्रु-नगर, धन, हव्य वहन, विजय व पुत्र-पौत्र हेतु प्रार्थना १-७ १६. अग्नि का वर्णन १-६ पापनाशक, शत्रुजेता, धनयुक्त, रक्षक, विश्व में निवास, कीर्तिदाता १-६ १७. अग्नि की स्तुति १-५ स्वीकार्य, जातवेद, तीन अन्न, अमृत की नाभि, यज्ञ पूर्णता हेतु प्रार्थना १-५ १८. अग्नि की स्तुति १-५ साधक, शत्रुनाशक, अन्न याचना १-५ १९. अग्नि की स्तुति १-५ वरण, पात्र, महिमायुक्त १-३ तेजधारक, अन्न याचना ४-५ ebook converter DEMO Watermarks*

२०. अग्नि का वर्णन १-५ अधिकारहीन उदरपूरक, अमर, वृत्रनाशक, आह्वान १-५ २१. अग्नि की स्तुति १-५ चर्बी, बूंदें टपकना, मेधावी, यज्ञपालक, आह्वान, निवासदाता १-५ २२. अग्नि का वर्णन १-५ सोम, विस्तारक, प्रेरक, अन्न, पुत्र-पौत्र याचना १-५ २३. अग्नि की स्तुति १-५ जरारहित, देवाश्रय, देववात, सुबुद्धि, उंगलियों से उत्पन्न १-३ दृषद्वती, आपया व सरस्वती ४-५ २४. अग्नि की स्तुति १-५ अजित, मरणहीन, जागृत, धन एवं संतान मांगना १-५ २५. अग्नि की स्तुति १-५ ज्ञाता, अन्नदाता, जनक, आह्वान, प्रकाशमान १-५ २६. अग्नि का वर्णन १-९ स्तुति, आह्वान, कुशिक गोत्री, कंपाना, गरजना, जलदाता, मरुत्, यज्ञ में जाना १-६ प्राण, रमणीय बनाना, पालक ७-९ २७. अग्नि का वर्णन १-१५ देव प्राप्ति, स्तुति, छुटकारा, मनचाहा फल, हव्य वहन, अभिमुख, अग्रगामी, मेधावी, गर्भ १-९ हव्य, प्रदीप्त करना, स्तुति, दर्शनीय, हव्यवाहक, प्रज्वलित करना १०-१५ २८. अग्नि की स्तुति १-६ पुरोडाश, कर्मकुशल, पुरोडाश सेवनार्थ प्रार्थना १-६ २९. अग्नि का वर्णन १-१६ ebook converter DEMO Watermarks*

साधन, प्रकट होना, स्थापना, सुखयुक्त, अवरोधहीन, हव्यवाहक, अन्न याचना १-८ कामवर्षक, शोभा, नराशंस, उत्तम स्थान, शब्द, सनातन, कुशिकगोत्रीय, वरण ९-१६ ३०. इंद्र की स्तुति १-२२ विरोध, आना, भयंकर, स्थित होना, मिलाना, शक्ति याचना, धनदान, वृत्रवध, समतल, सुगम बनाना, शूर १-११ दिशाएं निश्चित, उत्तम कर्म, गाय का भ्रमण १२-१४ शत्रुवध, राक्षसों पर अस्त्र फेंकने, अश्व स्वामी बनाने की प्रार्थना १५-१८ इच्छाएं बढ़ना, स्तुति, आह्वान १९-२२ ३१. इंद्र का वर्णन १-२२ धेवता, कन्या का अधिकार, पुत्र, इंद्र से मिलना १-४ गो प्राप्ति, सरमा नामक देवशुनी, गाएं मिलना, शुष्णवध, अमरता, नियुक्ति, निमित्त, निर्माण, शक्तियां घोड़ियां, उत्पत्ति, जल उत्पत्ति, मरुतों की सहायता ५-१७ स्वामी, नवीन, पापनाशक, बंद करना, आह्वान १८-२२ ३२. सोम व इंद्र की स्तुति १-१७ घोड़ों के जबड़ों में घास भरना १ दान, सुंदर ठोढ़ी, गमनशील, जल छोड़ना २-६ नित्य तरुण, लोकधारक, तेजस्वी, सोमपान ७-१० धरती दबाना, वृद्धि, आकर्षित करना, पुकारना, सामने जाना, आह्वान ११-१७ ३३. इंद्र का वर्णन १-१३ विश्वामित्र व नदियों का संवाद, सतलज व व्यास नदी, भरतवंशियों का उनके पास जाना १-१३ ३४. इंद्र का वर्णन १-११ धरती व आकाश की तृप्ति, स्तुति १-२ ebook converter DEMO Watermarks*