ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
वचन, भारती, आह्वान, पशु-वृद्धि, अन्न, छंद ७-११ १८९. अग्नि की स्तुति १-८ ज्ञाता, साधन, प्रकाशमान, आश्रय रक्षार्थ प्रार्थना १-५ हिंसक, चोर, निंदक आदि से बचाना, पात्र, शत्रुनाशक ६-८ १९०. बृहस्पति की स्तुति १-८ स्तुत्य, मधुरभाषी, फल अन्न, चलना, समीप जाना १-५ नियंत्रक, जल व तट, स्तुतियां, फल, आयु, अन्न हेतु प्रार्थना ६-८ १९१. जीव, जंतुओं, पक्षियों एवं सूर्य का वर्णन १-१६ घिरना, विषधर, प्रभाव, लिपटना, ज्ञानशून्य, देखना, अंग, सूची वाले विषधर, पूर्व में निकलना, उदयगिरि १-९ विष फेंकना, नष्ट करना, पक्षी, नदियां, मयूरियां, व्यर्थता १०-१६ द्वितीय मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. अग्नि की स्तुति १-१६ पालक, गृहपति, विष्णु १-३ रक्षक, दानदाता, शक्तिशाली, यज्ञकर्त्ता ४-६ रत्नधारक, तेजस्वी, पालक, कल्याणकर्त्ता, शत्रुनाशक ७-९ विभु, हव्यदाता १०-११ लक्ष्मी का वास १२ जिह्वा का निर्माण १३ वृक्ष, लता आदि में रहना, मिलना-अलग होना, गोदाता १४-१६ २. अग्नि का वर्णन १-१३ ebook converter DEMO Watermarks*
स्वर्ग, संयमी, सुदर्शन, प्रकाशमान, शिखायुक्त, अविनाशी, अन्न का द्वार १-७ आधार, स्तुतियां, शत्रुजेता, प्रसन्नतादायक, गो व अन्नदाता ८-१३ ३. अग्नि का वर्णन १-११ यज्ञयोग्य, प्रकटकर्त्ता, लक्ष्य, वीरपुत्र, द्वार, फलदाता १-६ पूजा, यज्ञ, सरस्वती, इला, भारती, अन्न ७-९ ज्ञाता, कामवर्षी १०-११ ४. अग्नि का वर्णन १-९ आह्वान, भृगु, मित्र, जीभ फेरना १-६ स्वाद लेना, रक्षक, गृत्समदवंशी ऋषि ७-९ ५. अग्नि का वर्णन १-८ चेतनादाता, निर्वाहक, धारक, फलदाता, नेष्टा, हव्य, महत्त्व १-८ ६. अग्नि की स्तुति १-८ स्तुतियां, यज्ञस्वामी, हवि, विद्वान्, धनदाता, वृष्टिकर्त्ता, पूजक, हितकारी, यज्ञ १-८ ७. अग्नि की स्तुति १-६ तरुण, शत्रुता, लांघना, वंदनीय, भर्त्ता, विचित्र १-६ ८. अग्नि का वर्णन १-६ यशस्वी, आह्वान, स्तुतियां, शोभा, ऋग्वेद, रक्षित १-६ ९. अग्नि की स्तुति १-६ व्रत, धनदाता, जन्मस्थान, धनस्वामी, कांतियुक्त १-६ १०. अग्नि की स्तुति १-६ प्रज्ञा, प्रजायुक्त, अरणि, व्याप्त, वर्णयुक्त, हव्य देना १-६ ११. इंद्र की स्तुति १-२१ बढ़ाना, वृत्र, कामना, हराना, वृत्रवध, प्रशंसा, बादल, प्रसन्न होना, ध्वनि १-८ ebook converter DEMO Watermarks*
कांपना, शब्द करना, सोम, आश्रय, वीरपुत्र, धन, घर, मित्र, शक्ति याचना, दृढ़ करना, उद्धारक, उग्र दिन १-१६ दस्यु, विश्वरूप, अर्बुद, बल असुर का नाश, स्तुति १७-२१ १२. इंद्र का वर्णन १-१५ डरना, दृढ़ करना, नदियां प्रवाहित करना, असुर, शत्रु संपत्ति-नाशक, रक्षक १-६ बुलाना, प्रतिनिधि, पापीनाशक, शंबर असुर, रोहिण का वध, दृढ़ भुजाएं, रक्षक ७-१५ १३. इंद्र का वर्णन १-१३ वर्षा ऋतु, सागर १-२ प्रायश्चित्त ३ धनदाता, दोहन, ओषधि, सहवसु, दस्यु का नाश, पंचजन जतुष्ठिर, तुर्वीति, स्तुति ४-१३ १४. इंद्र का वर्णन १-१२ सोम, योग्य होना, दृमीक, उरण, अश्व, शुष्ण, पिप्रु, नमुचि आदि का वध १-५ नगरियों, विरोधियों का नाश सोम, फलदाता, राजा, धन याचना ६-१२ १५. इंद्र का वर्णन १-१० त्रिकद्रुक, सिद्ध, निर्माण, मार्ग रोकना, नदी सुखाना, गाड़ी तोड़ना, परावृज, द्वार खोलना, चुमुरि, धुनि का वध, भजनीय १-१० १६. इंद्र का वर्णन १-९ आह्वान, शक्तिकेंद्र, अपराजित, ज्ञानी, अन्नदाता, इच्छापूरक, आयुध, रक्षक, घेरना, स्तुति १-९ १७. इंद्र का वर्णन १-९ स्वतंत्र, शीश, विवश, घेरना, अचल, जल गिराना, क्रिवि-वध धन मांगना, भजनीय, आह्वान १-९ ebook converter DEMO Watermarks*
१८. इंद्र का वर्णन १-९ हवन, विजयदाता, अश्व, धनशाली, आह्वान, सोम रखना, आहूत, विपत्तिनाशक, सेवनीय १-९ १९. इंद्र का वर्णन १-९ अन्नवासी, गमन, प्रेरणा, सहायक, एतश १-५ कुत्स, शुष्ण, अशुष, कुयव, पीयु, गृत्समद ऋषि, दक्षिणा ६-९ २०. इंद्र का वर्णन १-९ दीप्यमान, श्रद्धालु, रक्षक, यज्ञ, अभिलाषापूरक, गाएं लेना, नगर विनाश, दास, मस्तक काटना, सेना व लौहनगरी का नाश, दक्षिणा १-९ २१. इंद्र का वर्णन १-६ जलविजयी, स्तुति, प्रशंसा, प्रेरक, गाएं ढूंढना, पुष्टि १-६ २२. इंद्र का वर्णन १-४ तृप्तिदाता, पूर्ण करना, भला विचारना, प्रसिद्ध १-४ २३. बृहस्पति की स्तुति १-१९ गणपति, जनक, शत्रुनाशक, सेनाएं रोकना, पथप्रदर्शक, प्रसन्नता, रक्षक १-८ धन याचना, कामपूरक, पुण्यलाभ, शत्रुसेना नाशक ९-१३ पराक्रम, पूजनीय, विरोधियों को न सौंपने की प्रार्थना, ऋण चुकाना, गायों का आना, संतान रक्षार्थ प्रार्थना १४-१९ २४. बृहस्पति का वर्णन १-१६ विश्वस्वामी, हंता, उद्धारक, भेदन, धन की प्राप्ति १-६ बाण फेंकना, मिलाना, भोगना ७-१० रक्षक, स्तुतियां, सुनना, विभाजन, अन्नयुक्त विश्वनियंत्रक ११-१६ २५. बृहस्पति का वर्णन १-५ दीर्घायु, धनविस्तार, समर्थ, ब्रह्मणस्पति, सुख प्राप्ति १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
२६. बृहस्पति का वर्णन १-४ रक्षा याचना, धन प्राप्ति, उपकारी १-४ २७. आदित्यगण का वर्णन १-१७ घृत टपकाना, अनिंदनीय, अहिंसित, तेजस्वी, जगत्धारक, स्तुति १-४ पापों का त्याग, सुगमपथ, सुख प्राप्ति, महिमा वर्धन ५-८ तेजधारक, वरुण व आदित्य की स्तुति ९-१२ स्वामी, ज्योति, मंगलकारी, पाश, धन याचना १३-१७ २८. वरुण की स्तुति १-११ क्रांतदर्शी, प्रार्थना, जल रचना, नदी, पाप, नाश, हिंसक, प्रकाश १-७ शक्तिसंपन्न, ऋण, याचना, चोर, भेड़िया ८-११ २९. विश्वेदेव की स्तुति १-७ पाप, गुप्त स्थान, कल्याण, सुख, न मारना, बचाना, पुत्र याचना १-७ ३०. इंद्र, बृहस्पति, सोम आदि की स्तुति १-११ पानी, समुद्र, वृत्र, असुर पुत्र, शत्रुनाश, समृद्धि, प्रेरक, थकान न देने की प्रार्थना १-७ षंडामर्क का वध, धन याचना, उपासना ८-११ ३१. विश्वेदेव का वर्णन १-७ रक्षा, घोड़े, उत्तम कर्म, पूषा व सूर्या के पति, हव्य स्तुति, बलाभिलाषी १-७ ३२. द्यावा-पृथिवी आदि का वर्णन १-८ अन्न कामना, मित्रता, स्तुति, बुलाना, कर्मों को बुनना, धन, राका देवी, सिनीवाली, सरस्वती, इंद्राणी, वरुणाणी १-८ ३३. रुद्र की स्तुति १-१५ सुख, शतायु, उत्तम, हिंसा-बुद्धि, ओषधियां, स्वामी, रक्षक, उग्र रुद्र १-११ स्तुति, कामना, सुख देने व क्रोध न करने की प्रार्थना १२-१५ ebook converter DEMO Watermarks*
३४. मरुद्गण की स्तुति १-१५ व्याप्त, उत्पत्ति, सोने के टोप वाले, पहुंचना, आयुधधारक, अन्न व बल याचना १-७ अन्नदाता, शत्रुता, हंता, धन मांगना, अंधकार का नाश रूप धरना, होता, पापत्राता ८-१५ ३५. अग्नि का वर्णन १-१५ अन्न, उत्तम रूप, निर्माता, बाड़वाग्नि, अपांनपात्, इड़ा, सरस्वती, भारती १-५ उच्चैःश्रवा अश्व, संसार की उत्पत्ति ६ घर में रहना, वनस्पतियों के उत्पादक ७-८ नदियां, धन देना, भाग्य स्तुति, व्याप्त, उत्तम स्थान, पुत्र-पौत्र प्राप्ति हेतु प्रार्थना १२-१५ ३६. इंद्र, त्वष्टा, अग्नि, वरुण एवं मित्र की स्तुति १-६ भेड़ के बाल, दशापवित्र, भरत के पुत्र, देवपत्नियां मधु, सोमपान, प्राचीन स्तुतियां १-६ ३७. अग्नि की स्तुति १-६ द्रविणोदा, सोमरूप मधु, नेष्टा १-३ मृत्यु निवारक, रथ, सोमपान हेतु प्रार्थना ४-६ ३८. सविता का वर्णन १-११ दाता, हाथ फैलाना, सविता का त्याग, प्रकाश समेटना, शय्या का त्याग, घर अभिलाषा, कार्य क्षीण न होना, निवास, बुलाना १-९ रक्षक, आह्वान १०-११ ३९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-८ बाधा, ज्ञाता, वेगवान्, दुःखत्राता, बुढ़ापा, सुखदाता १-६ स्तुतियां, स्तोत्र रचना ७-८ ४०. सोम व पूषा की स्तुति १-६ ebook converter DEMO Watermarks*
अमरता, सेवा, रथ, वरणीय एवं कीर्तिशाली प्राणि-उत्पत्ति, धनस्वामी १-६ ४१. इंद्र, वायु मित्र, वरुण आदि की स्तुति १-२१ नियतगुण, पुकार, दाता, सोमरस, हजार खंभे, दानशील, पेय सोम, धन, नाना रूप, अचंचल, कल्याण, मेधावी, पुकार, प्रसन्नदाता, दान १-१५ उत्तम सरस्वती, शुनहोत्र, हव्य, प्रार्थना, साधक, यज्ञयोग्य देवता १६-२१ ४२. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३ प्रेरित करना, मंगलकारी, चोर एवं पाप की बात १-३ ४३. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३ बोल, पुण्यकारी शब्द, सुमति की इच्छा १-३ तृतीय मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. अग्नि की स्तुति १-२३ वाहक, समिधा, उत्तम बंधु, बढ़ाना, शुद्धि, धारण करना १-६ माता-पिता-धरती, आकाश, किरणें, जल बहाना, लोकपोषण, शयन, प्रकाशमान ७-१२ जन्म, बढ़ना, तेज, स्तुति, यज्ञ, अनुग्रह, होता, भूमि याचना १३-२३ २. अग्नि का वर्णन १-१५ संस्कार, पूजन, स्तुति, हितकारक, यज्ञमंडप, अग्नि, अन्नार्थ जाना, ज्ञाता, चारों ओर जाने वाले, प्रजास्वामी १-१० गरजना, स्वर्गारोहण, धन-अन्न याचना ११-१५ ३. अग्नि का वर्णन १-११ दूषित न करना, प्रेरणा, सुख चाहना १-३ ebook converter DEMO Watermarks*
प्रवेश, स्थापना, आना-जाना, प्रेरणा, नमस्कार, प्रशंसा, घेरना, पूर्ण करना, उत्पत्ति ४-११ ४. अग्नि का वर्णन १-११ मित्र, यज्ञ, कुशल, समीप जाना, मार्ग बनाना, कृपा १-६ आह्वान, सोमरस ८-९ जन्मदाता, आह्वान १०-११ ५. अग्नि का वर्णन १-११ द्वार खोलना, जागना, स्थापित, रक्षक, उत्पादक, नया बनाना, धारण करना, बुलाना १-९ अग्नि जलाना, पुत्र-याचना १०-११ ६. अग्नि का वर्णन १-११ सुच, पूजा, दीप्तियां, स्तुति, फलदाता, आह्वान, घोड़े, जलभाग जलाना, यज्ञयोग्य, आह्वान १-९ होता, भूमि, पुत्र व गाय की याचना १०-११ ७. अग्नि का वर्णन १-११ अन्नदाता, नदी में वास, घोड़ियां, वहन, आज्ञापालन, सुख, यज्ञ में जाना, रक्षा, अलंकरण, ज्वालाएं १-९ पापनाशार्थ प्रार्थना, गौ मांगना १०-११ ८. यूप अर्थात् बलिस्तंभ का वर्णन १-११ धन याचना, पाप, नापना, आना, बनाने वाला, गड्ढे में डालना, यज्ञ-साधक १-८ अंतरिक्ष, रक्षार्थ प्रार्थना, सौभाग्य प्राप्ति ९-११ ९. अग्नि का वर्णन १-९ वरण, शांत होना, प्राप्ति होना, अरणिमंथन, ग्रहण, पूजन, १-९ १०. अग्नि का वर्णन १-९ ebook converter DEMO Watermarks*
प्रजास्वामी, यज्ञरक्षक पुत्र-पौत्र प्राप्ति, सिक्त होना १-४ तेजधारी, बढ़ाना, शत्रुजेता, पापशोधक, उत्पत्ति ५-९ ११. अग्नि का वर्णन १-९ ज्ञाता, देवदूत, अंधकारनाशक, अग्रगामी, अवध्य, घर पाना, धन याचना, प्रवेश १-९ १२. इंद्र एवं अग्नि की स्तुति १-९ आह्वान, सोमपान, वरण, अन्नदाता, अर्चना, नगरों को कंपाना, उपस्थित रहना, धन में अभिन्नता, ज्ञान १-९ १३. अग्नि का वर्णन १-७ श्रेष्ठ, द्यावा-पृथिवी, सेवा, नियामक, प्रचलन, रक्षा व धन याचना १-७ १४. अग्नि का वर्णन १-७ प्रज्ञा प्रार्थना, सिंचन, धारक, द्रव्य देना, रक्षण व अन्न हेतु अग्नि के समीप जाना १-७ १५. अग्नि की स्तुति १-७ विनाश, स्तुतियां, फल, शत्रु-नगर, धन, हव्य वहन, विजय व पुत्र-पौत्र हेतु प्रार्थना १-७ १६. अग्नि का वर्णन १-६ पापनाशक, शत्रुजेता, धनयुक्त, रक्षक, विश्व में निवास, कीर्तिदाता १-६ १७. अग्नि की स्तुति १-५ स्वीकार्य, जातवेद, तीन अन्न, अमृत की नाभि, यज्ञ पूर्णता हेतु प्रार्थना १-५ १८. अग्नि की स्तुति १-५ साधक, शत्रुनाशक, अन्न याचना १-५ १९. अग्नि की स्तुति १-५ वरण, पात्र, महिमायुक्त १-३ तेजधारक, अन्न याचना ४-५ ebook converter DEMO Watermarks*
२०. अग्नि का वर्णन १-५ अधिकारहीन उदरपूरक, अमर, वृत्रनाशक, आह्वान १-५ २१. अग्नि की स्तुति १-५ चर्बी, बूंदें टपकना, मेधावी, यज्ञपालक, आह्वान, निवासदाता १-५ २२. अग्नि का वर्णन १-५ सोम, विस्तारक, प्रेरक, अन्न, पुत्र-पौत्र याचना १-५ २३. अग्नि की स्तुति १-५ जरारहित, देवाश्रय, देववात, सुबुद्धि, उंगलियों से उत्पन्न १-३ दृषद्वती, आपया व सरस्वती ४-५ २४. अग्नि की स्तुति १-५ अजित, मरणहीन, जागृत, धन एवं संतान मांगना १-५ २५. अग्नि की स्तुति १-५ ज्ञाता, अन्नदाता, जनक, आह्वान, प्रकाशमान १-५ २६. अग्नि का वर्णन १-९ स्तुति, आह्वान, कुशिक गोत्री, कंपाना, गरजना, जलदाता, मरुत्, यज्ञ में जाना १-६ प्राण, रमणीय बनाना, पालक ७-९ २७. अग्नि का वर्णन १-१५ देव प्राप्ति, स्तुति, छुटकारा, मनचाहा फल, हव्य वहन, अभिमुख, अग्रगामी, मेधावी, गर्भ १-९ हव्य, प्रदीप्त करना, स्तुति, दर्शनीय, हव्यवाहक, प्रज्वलित करना १०-१५ २८. अग्नि की स्तुति १-६ पुरोडाश, कर्मकुशल, पुरोडाश सेवनार्थ प्रार्थना १-६ २९. अग्नि का वर्णन १-१६ ebook converter DEMO Watermarks*
साधन, प्रकट होना, स्थापना, सुखयुक्त, अवरोधहीन, हव्यवाहक, अन्न याचना १-८ कामवर्षक, शोभा, नराशंस, उत्तम स्थान, शब्द, सनातन, कुशिकगोत्रीय, वरण ९-१६ ३०. इंद्र की स्तुति १-२२ विरोध, आना, भयंकर, स्थित होना, मिलाना, शक्ति याचना, धनदान, वृत्रवध, समतल, सुगम बनाना, शूर १-११ दिशाएं निश्चित, उत्तम कर्म, गाय का भ्रमण १२-१४ शत्रुवध, राक्षसों पर अस्त्र फेंकने, अश्व स्वामी बनाने की प्रार्थना १५-१८ इच्छाएं बढ़ना, स्तुति, आह्वान १९-२२ ३१. इंद्र का वर्णन १-२२ धेवता, कन्या का अधिकार, पुत्र, इंद्र से मिलना १-४ गो प्राप्ति, सरमा नामक देवशुनी, गाएं मिलना, शुष्णवध, अमरता, नियुक्ति, निमित्त, निर्माण, शक्तियां घोड़ियां, उत्पत्ति, जल उत्पत्ति, मरुतों की सहायता ५-१७ स्वामी, नवीन, पापनाशक, बंद करना, आह्वान १८-२२ ३२. सोम व इंद्र की स्तुति १-१७ घोड़ों के जबड़ों में घास भरना १ दान, सुंदर ठोढ़ी, गमनशील, जल छोड़ना २-६ नित्य तरुण, लोकधारक, तेजस्वी, सोमपान ७-१० धरती दबाना, वृद्धि, आकर्षित करना, पुकारना, सामने जाना, आह्वान ११-१७ ३३. इंद्र का वर्णन १-१३ विश्वामित्र व नदियों का संवाद, सतलज व व्यास नदी, भरतवंशियों का उनके पास जाना १-१३ ३४. इंद्र का वर्णन १-११ धरती व आकाश की तृप्ति, स्तुति १-२ ebook converter DEMO Watermarks*
वध, युद्ध जीतना, पीसना, धन बांटना, वरणीय दान, पालन, दमन, आह्वान ३-११ ३५. इंद्र की स्तुति १-११ सोम देना, घोड़े जोड़ना, जौ, रथ में जोड़ना, हरी नामक घोड़े, सोमपानार्थ प्रार्थना, जौ, स्तुतियां १-८ सहायता, आह्वान ९-११ ३६. इंद्र की स्तुति १-११ संगति, सोमरस, ओज, गाएं, अंतरिक्ष, लताएं निचोड़ना, बांटना, धन मांगना, आह्वान १-११ ३७. इंद्र की स्तुति १-११ प्रेरणा, अनुकूल बनाना, शतक्रतु, मानवाधारक, धन देने एवं असुर नाशार्थ पुकारना १-६ वृत्रहंता, जागरणशील, पांच जन, अन्न देने व यज्ञ में आने की प्रार्थना ७-११ ३८. इंद्र का वर्णन १-१० स्मरण, स्वर्ग प्राप्ति, सुशोभित, इंद्रसभा, जल निर्माण, देखना, समर्पण, मिलन, कर्मों को देखना, पुकारना १-१० ३९. इंद्र का वर्णन १-९ स्तुतियों का पितरों के पास से आना १-२ यज्ञकर्मों से संगत होना ३ पितरों का निंदक ४ सूर्य दर्शन, असुर, वरण, धन याचना, विश्वनेता इंद्र ५-९ ४०. इंद्र की स्तुति १-९ सोमपान हेतु आह्वान, आग्रह, बढ़ना, आह्वान १-९ ४१. इंद्र की स्तुति १-९ आह्वान, कुश बिछाना, स्तुतियां, पुरोडाश, उक्थ, शक्तिस्वामी १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
हवि, सोमयुक्त, रथ ६-९ ४२. इंद्र की स्तुति १-९ तृप्त, सामने जाना, धन मांगना, सोमपानार्थ आग्रह, प्रेरित करना १-९ ४३. इंद्र की स्तुति १-८ घोड़े खोलने, समीप आने व स्तुतियां सुनने हेतु प्रार्थना १-४ धन याचना, हरि नामक घोड़े, सोमाभिलाषी, उत्साही ५-८ ४४. इंद्र की स्तुति १-५ इंद्र का सोम, वृद्धिकर्त्ता, गायों को छुड़ाने वाले १-५ ४५. इंद्र की स्तुति १-५ यज्ञ में रथ से आने की प्रार्थना १-२ सोम से मिलना, पुत्र याचना, स्तुत इंद्र ३-५ ४६. इंद्र की स्तुति १-५ प्रसिद्ध, पूज्य, अज्ञेय, रक्षक, सोमधारक १-५ ४७. इंद्र की स्तुति १-५ स्वामी, वृत्रहंता, सहायता व प्रसन्न करना, आह्वान १-५ ४८. इंद्र का वर्णन १-५ जलवर्षक, सोम पिलाना, सोम देखना, शत्रुजेता, आह्वान १-५ ४९. इंद्र का वर्णन १-५ पाप व फलदाता, शत्रुनाशक, हवनीय, अन्न के विभाजक १-५ ५०. इंद्र का वर्णन १-५ आग्रह, कुशिकगोत्रीय ऋषि, विनाशकारी १-५ ५१. इंद्र का वर्णन १-१२ प्रशंसनीय, नेता, स्तुति, नमस्कार, शासक, सखा १-६ ebook converter DEMO Watermarks*
शार्यात, विभूषित होना, मित्रभाव ७-९ सोमपान का आग्रह १०-१२ ५२. इंद्र का वर्णन १-८ सोमपान, पुरोडाश भक्षण हेतु प्रार्थना १-२ भक्षण, सेवा, जौ, उत्साहित करना ३-८ ५३. इंद्र का वर्णन १-२४ हव्य खाने, यज्ञ में रहने व कुशों पर बैठने का आग्रह १-३ पत्नीयुक्त घर, प्रयोजन, कल्याणी, पत्नी, विश्वामित्र, रूप बदलना, सरिता रोकना, सोमपान का आग्रह, राजा सुदास, भरतवंशीय, वज्रधारी, प्रमंगद, अमृतरूप, अन्न, जमदग्नि ४-१६ दृढ़ रथ, बैल, खदिर, शीशम, रथ १७-२० उपाय, कुल्हाड़ी, सर्वज्ञ, भरतवंशी क्षत्रिय, वसिष्ठ २१-२४ ५४. विश्वेदेव का वर्णन १-२२ स्तोत्र बोलना, अनुभव, नमस्कार, महत्त्व जानना, स्वर्गमार्ग १-५ धरती व आकाश देखना, जागरूक, विभाजन, दुःखी न होना, वाहन, जिह्वा, यज्ञ में आना, याचना ६-१२ ऋष्टि, पादविक्षेप, इंद्र, अश्विनीकुमार, देवत्व, वरुण १३-१८ आकाश, मरुद्गण, स्तुति सुनने का आग्रह १९-२० मित्रता, हव्य का स्वाद २१-२२ ५५. उषा, अग्नि, इंद्र एवं धरती-आकाश की स्तुति १-२२ बल, हिंसा न करने की प्रार्थना, प्रकाशक, अरणि, वृक्षों में रहना, सूर्य का सोना १-६ मूलकारण, प्राणियों का भागना, सूर्य के साथ चलना, भूवन ज्ञाता, जोड़ा धारण करना, स्तुति ७-१२ भीगना, पुण्यात्मा, पापात्मा १३-१६ ebook converter DEMO Watermarks*
गर्जन, वृष्टि, ऋतुएं, पांच अश्व १७-१८ प्रजापालन, शत्रुओं से संपत्ति छीनना १९-२० मरुतों का आगे रहना, ओषधि २१-२२ ५६. विश्वेदेव का वर्णन १-८ बाधक न बनना, ऋतुएं, संवत्सर, जल १-४ इला, सरस्वती एवं भारती से यज्ञ में आने की प्रार्थना ५ धन याचना, वाग्देवी ६-७ तीन उत्तम स्थान ८ ५७. विश्वेदेव का वर्णन १-६ ज्ञानी, मनचाही वर्षा, ओषधियां, दीप्तियां १-४ प्रेरणा देना, उत्तम बुद्धि ५-६ ५८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९ दूध देना, रथ, वृत्ति १-३ सूर्य का उदय होना, स्तोत्र, जाह्नवी गंगा, नित्यतरुण अश्विनीकुमार, हवि अन्न, शुद्ध घर ४-९ ५९. मित्र अर्थात् सूर्य का वर्णन १-९ कामों में लगाना, अनुग्रह, यज्ञ के समीप रहना, सेव्य, नमस्कार के योग्य १-५ मित्र का अन्न, अंतरिक्ष को हराना, हवि देना, अन्नदाता ६-९ ६०. ऋभुगण एवं इंद्र की स्तुति १-७ कर्म जानना, देवत्व, अमृत पद की प्राप्ति, सीमा जानना असंभव, सुधन्वा १-५ कर्म निश्चित, आह्वान ६-७ ६१. उषा का वर्णन १-७ स्तुत, सच बोलना, सूर्य का ज्ञान कराने वाली, सूर्य की पत्नी, तेज धारण करना १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
सत्ययुक्त, प्रकाश फैलाना ६-७ ६२. इंद्र, वरुण, बृहस्पति, पूषा व सोम की स्तुति १-१८ अन्नदाता, स्तुति सुनने, रक्षा करने हेतु प्रार्थना १-३ हव्य सेवनार्थ प्रार्थना, बल व मनचाहा फल मांगना, सामने आने की प्रार्थना ४-८ रक्षक, तेज का ध्यान, दान चाहना ९-११ सेवा करना, यज्ञ में आना, पशुओं को रोगरहित अन्न देने की याचना १२-१४ यज्ञ में बैठने, मधुर रस देने की प्रार्थना, सुशोभित बनने व सोमपान का आग्रह १५-१८ चतुर्थ मंडल सूक्त विषय मंत्र सं. १. अग्नि एवं वरुण की स्तुति १-२० प्रेरक, सेव्य, ज्ञाता, दीप्तिशाली, पूजनीय, आह्वान १-७ ज्वालाएं, उत्तरवेदी, सिंचन, श्रेष्ठ, स्तुति, अंगिरा का यज्ञ फलदाता, उद्घाटन ८-१५ उषा, ऊपर पहुंचना, गोधन, स्तुति, पूजनीय १६-२० २. अग्नि की स्तुति १-२० स्थापना, दर्शनीय, स्तुति, आह्वान, हव्य अन्न, रक्षक दानी, प्रसन्न करना, सेवा १-९ होता, छांटना, मेधावी, धन मांगना १०-१३ अरणि मंथन, दीप्ति युक्त, गाएं निकालना, गोधन, संपन्न, अग्नि धारण, वरेण्य १४-२० ३. अग्नि की स्तुति १-१६ यज्ञस्वामी, तय करना, स्तोत्र, कारण पूछना, फलदाता, कहानी, सत्यरूप १-८ दूध याचना, सर्वत्र जाना, पहाड़ उखाड़ना, नदियों का बहना, कुटिलबुद्धि, उन्नत ebook converter DEMO Watermarks*
बनाने व मंत्र स्वीकार हेतु प्रार्थना, स्तुतियां ९-१६ ४. अग्नि की स्तुति १-१५ आगे बढ़ने, चिनगारियों को फैलाने, अनिष्ट से बचाने, राक्षसों, शत्रुओं का नाश करने व प्रकाशित होने का आग्रह १-६ फलदाता, स्तुति, सेवा, आतिथ्य, गौतम, रक्षक ७-१२ दीर्घतमा, अन्न देने व अपयश से बचाने की प्रार्थना १३-१५ ५. अग्नि का वर्णन १-१५ स्वर्ग थामना, नेताश्रेष्ठ, विराजमान, तीखे दांत, नरक, धन याचना १-६ स्थापना, रक्षक, वैश्वानर, जिह्वा, प्रतिज्ञा, जातवेद, उषाएं, अतृप्त लोग, ज्वालाएं ७-१५ ६. अग्नि की स्तुति १-११ होता, प्रजा, प्रदक्षिणा, परिक्रमा १-४ कल्याणी मूर्ति, प्रकाशित होना, अंगुलियां, आह्वान, आवाज करना, धन याचना ५-११ ७. अग्नि का वर्णन १-११ स्थापित, ग्रहण, यज्ञशाला, कल्याणार्थ लाना, तेज १-५ स्थापना, प्रसन्न करना, स्वर्ग, दूत, जलाना, बलयुक्त करना ६-११ ८. अग्नि का वर्णन १-८ बढ़ाना, ज्ञाता, धन देना, दूतकर्म, प्रसन्न करना, प्रसिद्ध बनना, पापनाशक १-८ ९. अग्नि की स्तुति १-८ आह्वान, जाना, होता, ब्रह्मा १-४ उपवक्ता, हव्य वहन, स्तोत्र सुनने का आग्रह, रक्षक ५-८ १०. अग्नि की स्तुति १-८ उपकारक, नेता, तेजस्वी गमनकर्त्ता, शब्द करना, शोभित होना, पापरहित, ebook converter DEMO Watermarks*
पापनाशक, द्योतमान १-८ ११. अग्नि की स्तुति १-६ तेज, स्तुत, उक्थ, अश्व, सेवा, बलपुत्र १-६ १२. अग्नि की स्तुति १-६ जातवेद, धन प्राप्ति, स्वामी, पापरहित करने, सुख देने व आयु बढ़ाने की प्रार्थना १-६ १३. अग्नि का वर्णन १-५ आगमन, सहारा, वहन, अंधकार का नाश, स्वर्गपालक १-५ १४. अग्नि का वर्णन १-५ बढ़ना, सहारा, उषा का आना १-३ सोमरस, सूर्य ४-५ १५. अग्नि, सोम एवं अश्विनीकुमारों का वर्णन १-१० अग्नि लाना, हव्य, घेरना, सृज्व १-४ तेजस्वी, समर्थ, कुमार, घोड़े लेना, कुमार के दीर्घायु हेतु प्रार्थना ५-१० १६. इंद्र का वर्णन १-२१ सोम निचोड़ना, स्तुति, किरणें, अंधकार का नाश १-४ महिमा, बरसा, प्रेरणा ५-७ विदीर्ण करना, कुत्स ऋषि, शची, शत्रुनाशक, शुष्ण, कुयव को मारना ८-१२ मृगय का वध, ऋजिश्व्रा, भयानक, समीप जाना, आह्वान, रक्षक बनने की प्रार्थना १३-१७ हिंसारहित, धनपूर्ण, स्तोत्र की रचना, अन्न वृद्धि हेतु प्रार्थना १८-२१ १७. इंद्र का वर्णन १-२१ बल स्वीकारना, प्यास मिटाना, शत्रुजेता, उत्पत्ति, स्तुति १-५ ebook converter DEMO Watermarks*
प्रजाधारक, रक्षक, स्तुति, अन्नधारक, शत्रुनाशक, गाएं छीनना, धन बांटना ६-११ बल प्राप्ति, धनदाता, भिगाना, झुकना १२-१६ सुखदाता, पूजन, शत्रुहंता, प्रजाधारक, नई स्तुतियां १७-२१ १८. इंद्र का वर्णन १-१३ इंद्र एवं वामदेव का वार्तालाप १-४ घेरना, मेघ भेदना, वृत्रवध, निगलना, सिर काटना, अजेय इंद्र ५-१० वार्ता, कुत्ते की आंत ११-१३ १९. इंद्र का वर्णन १-११ समर्थ, पानी रोकना, वृत्रवध, जल छिन्न-भिन्न करना १-४ जलभरना, तुर्वीति व वय्य, गो दोहन, छुड़ाना, वल्मीक, वर्णन, नई स्तुतियां ५-११ २०. इंद्र की स्तुति १-११ घिरना, यज्ञ में आने, उसे पूरा करने व सोमरस पीने की प्रार्थना, प्रशंसा करना १-५ विशाल, आहूत, शासक, बुद्धिबल, धन मांगना, स्तुतियां ६-११ २१. इंद्र का वर्णन १-११ आह्वान, शत्रु हराना, बुलाना १-३ स्थूल व विशाल, लोक-स्तंभक, क्रोधी, पालक, गौर व गवय की प्राप्ति, उत्तम कर्म, स्तुतियां ४-११ २२. इंद्र का वर्णन १-११ हव्य आदि स्वीकार करना, परुष्णी नदी, धरती व आकाश कंपाना १-३ शब्द करना, अहि का नाश, अधिक दूध देना, स्तुति ४-७ प्रेरणा, बल, गाय व अन्न हेतु प्रार्थना ८-११ २३. इंद्र का वर्णन १-११ अभिलाषा, कृपादृष्टि, उपाय जानना, स्तुतियां, मित्रता, गतिशील १-६ ebook converter DEMO Watermarks*
तेज आयुध, स्तुतियों का प्रवेश ७-८ गायों का प्रवेश, ऋतदेव, स्तुतियां स्वीकार हेतु प्रार्थना ९-११ २४. इंद्र का वर्णन १-११ बलशाली, धनदाता, रक्षक, यज्ञ, पुरोडाश १-५ मित्र बनाना, बल धारण, संग्राम, कम मूल्य मिलना, स्तुतियां ६-११ २५. इंद्र का वर्णन १-८ हितैषी, प्रार्थना, सोमरस निचोड़ना, पुरोडाश १-६ हिसा, मित्र, अन्न हेतु पुकारना ७-८ २६. इंद्र का वर्णन १-७ उशना कवि, संकल्प, दिवोदास, मनु प्रजापति, सोम लाना १-५ श्येन पक्षी, शत्रुनाश ६-७ २७. श्येन पक्षी का वर्णन १-५ जन्म जानना, हराना, सोम छीनना, भुज्यु, सोमपानार्थ आग्रह १-५ २८. इंद्र एवं सोम की प्रार्थना १-५ प्रेरणा, पहिया तोड़ना, सेनानाश, गुणहीन बनाना, गोदान १-५ २९. इंद्र व सोम की स्तुति १-५ आह्वान, प्रसन्न रहना, डर भगाने की प्रार्थना, घोड़े जोड़ना, धन-पात्र बनना १-५ ३०. इंद्र की स्तुति १-२४ प्रसिद्ध न होना, महान्, युद्ध, पहिया चुराना, युद्ध करना, एतश ऋषि, दनुपुत्र का नाश १-७ उषा का वध, टूटी गाड़ी, गाड़ी का गिरना, स्थापना, नगरों का नाश, शंबर, वचि व सेवकों का वध, परावृक्त, तुर्वश एवं यदु नामक राजा ८-१७ और्व व चित्ररथ का वध, कृपा करना, दिवोदास को नगर देना, राक्षसों का संहार, अजेय, शत्रु विदारक १८-२४ ebook converter DEMO Watermarks*