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सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

दाद ठीक होने का साथ सिर में रूसी समाप्त हो जाती हैं एवं बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।

  • ➤ चेहरे के मुहासों को दूर करने के लिए – कैलि-ब्रोम 30
  • ➤ चेहरे पर फुंसियां होने पर, नाक, ठोड़ी पर फुंसियां होने पर – ऐस्टोरियास-रूबेन्स 6 शक्ति
  • ➤ यदि रोगी के चेहरे पर होने वाली फुंसियों की काफी चिकित्सा करवाने के बाद भी कोई लाभ नहीं – आर्स-आयोडाइड 3X
  • ➤ गर्म प्रकृति के रोगियों के बाल झड़ने पर – फ्लोरिक ऐसिड 6 या 30 शक्ति
  • ➤ उम्र से पहले बाल सफेद होने पर – ऐसिड फास
  • ➤ बालों में रूसी, खुशकी, पपड़िया जम जाना, खुजली होना – मेजेरियम 6 या 30 शक्ति
  • ➤ सिर में रूसी के साथ, बालों का बहुत अधिक मात्रा में झड़ना – फॉस्फोरस 30 शक्ति

❖ अर्थराइटिस

  • ➤ गठिया रोग की शुरुआत में – ऐकोनाइट 30
  • ➤ रोगी में अचानक ही गठिया दर्द होने पर, उसके जोड़ों में तेज दर्द होता है - 2 चम्मच गर्म पानी में 5 बूंद अटिका यूरेन्स , हर 4 घंटे के अन्तर पर। इसके साथ गर्म पट्टी पर कोलचिकम औषधि के मूलार्क को 20-25 बूंद की मात्रा डालकर दर्द वाले स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

❖ पित्त रोग

  • ➤ त्वचा पर लाल, पीले रंग के चकत्तेदार दाने होना, खुजली होना – एपिस औषधि की 1x, 3x या 6 शक्ति का उपयोग करें। 2 दिन बाद लाभ न मिले तो क्लोरेलम औषधि की 3x मात्रा का सेवन करें। औषधि का सेवन 8 घंटे के अंतर में करें।

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  • ➤ त्वचा पर चकत्तेदार दाने व डंक मारने जैसा दर्द – अर्टिका 3X हर चार घंटे में सेवन
    • ➤ पित्त पथरी में दर्द होने के साथ जिगर में भी दर्द होना – कार्डीयस-मेरियेनम मदर टिचर औषधि की 5 से 10 बूंद की मात्रा दिन में 3 – 3 घंटे के अंतराल पर ले।
    • ➤ पित्त की पथरी के किसी भी लक्षणों के लिए एवं दर्द कम करने के लिए – अर्निका 3X या 6 शक्ति

❖ अन्य होम्योपैथिक दवाइयां

  • ➤ चाय छोड़ने के लिए – ARSENIC 200
  • ➤ गुटखा, तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी छोड़ने के लिए – PHOSPHORUS 200
  • ➤ बुखार के लिए – OCIMUM 200
  • ➤ पथरी के लिए – BERBERIS VULGARIS
  • ➤ बिस्तर पर पेशाब करना – पल्साटिला 30
  • ➤ मूत्रनली में जलन व दर्द होने पर – अर्निका 3X
  • ➤ मूत्र अवरोध के लिए – CANTHRIS – 200 की 2-2 बूंद दिन में 3 बार
  • ➤ डायरिया व फूड़ प्वायजनिंग होने पर – NUX VOMICA – 200 , 2-2 बूंद, 3 बार

❖ सौन्दर्यवर्धक नुस्खे

सौन्दर्य प्रसाधनों के दिन-दूने रात चौगुने बढ़ते बाजार को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोग सुन्दरता के लिए कितने परेशान हैं। स्त्री पुरुष यहाँ तक कि नई पीढ़ी के बच्चे तक सुन्दर दिखने के लिए मेकअप के नए-नए तरीके आजमाने में लगे हैं। सुन्दरता के प्रति इतनी जागरूकता शायद पहले कभी नहीं रही। यदि इतनी ही जागरूकता

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समूचे स्वास्थ्य को लेकर लोगों में होती तो चिन्ता की विशेष बात नहीं थी। लेकिन दुर्भाग्य से लोग स्वास्थ्य के प्रति पूरी मनमानी करते हुए भी कृत्रिम प्रसाधनों के सहारे अपना सौन्दर्य निखारना चाहते हैं। अब कौन समझाय कि हँसना और गाल फुलाना, दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं। यदि कुछ लोग यह सोचते हैं कि वे स्वास्थ्य के प्रति पूरे लापरवाह रहकर भी अपने सौन्दर्य की हिफाजत कर लेंगे तो निरा भ्रम के ही शिकार हैं। बाजारू सौन्दर्य प्रसाधनों का नकली आवरण असलियत को कितनी देर छुपाएगा? वास्तव में सच्चे सौन्दर्य का रहस्य तो अच्छे स्वास्थ्य में ही छुपा हैं। स्वास्थ्य निखरेगा तो सौन्दर्य में अपने आप निखार आ जायेगा, यह तय हैं।

कहने का सीधा सा अर्थ यह है कि अगर सौन्दर्य चाहिए तो स्वास्थ्य को सही-सलामत रखने का इन्तजाम भी अनिवार्यता करना ही पड़ेगा। अब सवाल यह हो सकता है कि स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए किया क्या जाए? तो इसका सीधा सा उत्तर है कि दिनचर्या सुधार ली जाए, तो बहुत कुछ ठीक हो जाएगा।

दिनचर्या में आहार, निद्रा और व्यायाम पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण बातें हैं। जिन्हें अपने सौन्दर्य – रक्षा की चिन्ता है उन्हें शुद्ध सात्विक शाकाहार अपनाना चाहिए। दाल, चावल, गेहूँ, जौ, बाजरा आदि विविध अन्नों के साथ हरी साग,-सब्जी, फल व सलाद की समुचित मात्रा अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। यह जरूरी नहीं है कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए आप महींगे फल-मेवे की तरफ ही भागें। मौसम के अनुसार मिलने वाले ढेरों सस्ते फल, सब्जियाँ आदि हैं जिनका उपयोग अपनी शारीरिक प्रकृति को देखते हुए किया जाए तो स्वास्थ्य-रक्षा का काम बखूबी हो सकता है।

आहार के विषय में यह ध्यान देने वाली बात है कि वर्तमान में जो लोगों की दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने की आदत बढ़ रही है, यह गलत है। इसके अलावा 'फास्ट फूड' संस्कृति ने आहार के मामले में और भी ज्यादा भ्रष्टाचार फैला दिया है। अगर अपने स्वास्थ्य व सौन्दर्य की हिफाजत करनी है तो इन आदतों को भी सुधारना ही पड़ेगा। दिन भर में मुख्य भोजन सिर्फ दो बार करना ही सेहत की दृष्टि से उचित है।

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यदि दोपहर 12 बजे तथा शाम 8 बजे के आस-पास भोजन करने की आदत हो तो सबेरे 8 बजे और तीसरे पहर 4 बजे के आस-पास हल्का सुपाच्य नाश्ता लिया जा सकता है। वैसे शाम का भोजन सूर्यास्त तक कर लेना श्रेयस्कर है। जो लोग दोपहर का भोजन जल्दी करते हैं, वे सबेरे नाश्ते की आदत न बनायें तो अच्छा है। भोजन के साथ ढेर सारा पानी पीने की भी लोगों की अक्सर गलत आदत देखने को मिलती है। यह आदत एक न एक दिन पाचन संबंधी विकारों का कारण अवश्य बनती है। भोजन में यदि रोटी आदि सूखी चीजें ज्यादा मात्रा में हों, तो ही बीच-बीच में यदा-कदा एकाध घूंट पानी लिया जा सकता है, अन्यथा भोजन के कम से कम डेढ़ दो घंटे बाद ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना उचित है। स्वास्थ्य की दृष्टि से दिन भर में कम से कम 7-8 गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए। दोपहर के भोजन के बाद आधा घंटा विश्राम तथा रात के भोजन के बाद लगभग आधा घंटा टहलने की आदत स्वस्थ के लिए लाभप्रद है।

आहार के बाद निद्रा पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रात देर तक जागने तथा सवेरे देर तक सोने की आदत आजकल आम बात हो गई है। यदि कोई विशेष विवशता न हो तो रात 10 बजे तक सो जाना तथा सवेरे 4-5 बजे तक जाग जाना आदर्श स्थिति है। अलबत्ता, कुछ लोगों की शारीरिक प्रकृति ऐसी भी हो सकती है, जिन्हें नींद का समय कुछ कम या ज्यादा भी करना पड़ सकता है। सामान्य नियम यह है कि जितनी नींद से मन और शरीर में प्रफुल्लता और ताजगी बनी रहे, उतनी नींद पर्याप्त है।

आहार और निद्रा के बाद व्यायाम अथवा शारीरिक श्रम सबसे जरूरी चीज है। शरीर को सुडौल तथा कार्यश्रम बनाए रखने के लिए व्यायाम वास्तव में अनिवार्य है। जो लोग व्यायाम या शरीर श्रम पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते वे पौष्टिक आहार का भी उचित लाभ नहीं ले सकते। खाया पिया शरीर में अच्छी तरह हो, इसके लिए व्यायाम या श्रम जरूरी है। स्वास्थ्य और सौन्दर्य रक्षा के लिए प्रतिदिन एकाध घंटे का समय व्यायाम के लिए अवश्य दिया जाना चाहिए। योगासन-व्यायाम की किसी अच्छी पुस्तक से इस विषय में जानकारी ली जा सकती है। बेहतर

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हैं कि किसी योगासन- व्यायाम केन्द्र या विशेषज्ञ व्यक्ति से उचित विधि से प्रशिक्षण लेने के बाद ही इसे दिनचर्या में शामिल किया जाए।

अन्त में स्वास्थ्य और सौन्दर्य की दृष्टि से ब्रह्मचर्य पालन पर भी किंचित संकेत कर देना आवश्यक है। वैसे ब्रह्मचर्य के व्यापक अर्थों में आहार, निद्रा, व्यायाम जैसी चीजें भी शामिल हैं, परन्तु यहाँ ब्रह्मचर्य का उल्लेख वीर्य-रक्षा के विशेष अर्थ में किया जा रहा है। विवाहित लोगों के लिए सिर्फ इतना संकेत पर्याप्त है कि अगर उन्हें स्वास्थ्य और सौन्दर्य को बरकरार रखना है तो वे स्त्री-संसार के मामले में ऋतुगामी बनें, अर्थात् अति करने से बचें और संयम से काम लें। सांस्कृतिक मूल्यों के अनुसार जो ऋतुगामी हैं वह समझिए कि ब्रह्मचारी ही हैं। अविवाहित युवाओं के लिए तो खैर हर प्रकार से ब्रह्मचर्य पालन अनिवार्य है। भारतीय संस्कृति में यदि 25 वर्ष की आयु तक ब्रह्मचर्यपूर्वक विद्या प्राप्ति का संदेश दिया गया है तो इसका वास्तव में बहुत व्यापक उद्देश्य है। जिसने युवावस्था में ब्रह्मचर्य का मन, वचन, कर्म से समुचित पालन किया, उसका पूरा जीवन ही सौन्दर्यता से परिपूर्ण, आनन्दमय और तेजस्वी हो जाता है। महापुरुषों के जीवन-चरित्र पढ़ने से इसके ढेरों प्रमाण मिल जाते हैं। आज अगर उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रवाह के चलते ब्रह्मचर्य विनाश की परिस्थितियाँ दिख रही हैं तो यह हम सबके लिए ही चिन्ता का विषय होना चाहिए। यहाँ पृष्ठ सीमा के नाते ब्रह्मचर्य पालन की विस्तार से चर्चा न करके सिर्फ कुछ संकेतिक बातें ही कही गई हैं। वैसे जिनको ब्रह्मचर्य पालन का वैज्ञानिक तरीके से महत्व जानना हो, उन्हें डॉ. सत्यव्रत सिद्धान्तालंकार लिखित 'ब्रह्मचर्य-संदेश' नामक पुस्तक एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए।

चेहरे को सुन्दर बनाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे

दरअसल चेहरे के सौन्दर्य का असली अर्थ यह है कि चेहरा स्वस्थ हो तथा ओज और ताजगी से परिपूर्ण रहे। चेहरे के स्वास्थ्य और सौन्दर्य सुधारने का यह भी अर्थ नहीं है कि यह कोई एकदम से अलग विषय है। सही बात यह है कि अगर आपका शरीर स्वस्थ है तो स्वास्थ्य की झलक चेहरे पर भी दिखाई ही देगी। हाँ, थोड़ी अतिरिक्त देखभाल करके चेहरे की चमक, दमक और रौनक अवश्य बढ़ायी जा सकती हैं।

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  • ➤ चेहरे पर काली मिट्टी का लेप लगाएं, यह ऊपरी चिकनाहट दूरकर मृत त्वचा को हटाती है।
    • ➤ नीम की जड़ को महीन पीसकर लेप करने से मुहोंसे जल्दी ठीक होते हैं।
    • ➤ एक छोटा चम्मच जौ का आटा, आधा चम्मच चंदन पाउडर, चुटकी भर हल्दी लेकर नींबू के रस में घोल बनाएं तथा चेहरे पर लगाकर आधे घण्टे बाद धो लें।
    • ➤ पहले चेहरा ठण्डे पानी से धो ले और फिर गर्म पानी में तौलिय गीला करके चेहरे पर रखकर भाप सेंक करें। इसके तुरंत बाद ठण्डे पानी में भीगा तौलिया चेहरे पर रखें। चेहरे को तैलीय न होने दें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुहोंसों से आसानी से छुटकारा मिल जाएगा।
    • ➤ त्वचा का स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आँवला, कच्चा नारियल, मक्खन-मिश्री, सलाद, संतरें जैसी चीजें विशेष लाभप्रद हैं। चूने के पानी का शर्बत त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसको बनाने का तरीका यह है कि खाने का चूना पानी में भिगोकर 4-5 दिन तक रख दें। इसे दिन में 2-3 बार साफ लकड़ी से हिलाकर चला दिया करें। पाँचवें दिन ऊपर का निथरा हुआ पानी अलग कर लें। इसमें शक्कर मिलाकर शर्बत योग्य चाशनी बनाकर ठण्डा करके बोटल में भर लें। इस शर्बत को भोजन के बाद दोनों समय एक-एक चम्मच की मात्रा में 40 दिनों तक सेवन करना चाहिए।
    • ➤ जिन महिलाओं के चेहरे व होंठों के ऊपर घने रोएं हों। उन्हें बेसन, मैदा, शहद और नींबू का रस 1-1 चम्मच लेकर एक में मिलाकर चेहरे पर लेप करना चाहिए। लेप सूखने लगे तो मसलकर छुड़ा दें। इस प्रयोग से धीरे-धीरे अनावश्यक बालों की समस्या से निजात मिल जाएगी। इसके अलावा चेहरे की त्वचा भी मुलायम, चिकनी और चमकीली बन जाएगी।
    • ➤ नींबू का रस और तुलसी के पत्तों का रस समान मात्रा में मिलाकर झाँइयों पर लगाने से झाँइयों से मुक्ति मिल जाती है। इससे मुहोंसों भी समाप्त होते हैं।

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  • ➤ चेहरे पर निखार लाने के लिए एक चम्मच चूने के पानी में थोड़ा शहद मिलाकर लेप करें और लगभग आधे घण्टे बाद चेहरा धो लें।
    • ➤ काली कसौदी का रस नींबू और तुलसी पत्तों के रस में मिलाकर ताँबे की कटोरी में भरकर धूप में रख दें। यह घोल जब गाढ़ा हो जाए तो मुहोंसों पर लगाएं, काफ़ी लाभ होगा।
    • ➤ दो चम्मच दही में एक चम्मच मसूर की दाल भिगोएं। दाल फूल जाए तो पीसकर इसमें थोड़ा सा मक्खन और चुटकी भर हल्दी मिलाकर चेहरे व गर्दन पर लगाएं। लगभग आधे घण्टे बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। नियमित यह प्रयोग करने से चेहरे की स्निग्धता और चमक बढ़ेगी।
    • ➤ मलाई में नींबू का रस मिलाकर 10-15 मिनट तक चेहरे की मालिश करें। कुछ देर रुककर चेहरा धो लें। कुछ दिनों के प्रयोग से चेहरा दमकने लगेगा।
    • ➤ आँखों के नीचे काले गड़दे पड़ जाएं तो एक भाग नींबू के रस में चार भाग पानी मिलाकर मालिश करते हुए धोएं। थोड़े दिनों में स्याहपन मिटने लगता है। या फिर सुबह की मुहँ की लार आँखों के नीचे लगाये।
    • ➤ एक-दो चम्मच बेसन में तिल का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं तथा मलकर छुड़ा दें। चेहरे की आभा बढ़ेगी।
    • ➤ चेहरे पर चेचक के दाग हों तो मुरदार-श्वग में नींबू का रस मिलाकर लगाना चाहिए। इस प्रयोग से गहरे दाग होंगे ते हल्के हो जायेंगे और हल्के दाग होंगे तो समाप्त हो जाएंगे।
    • ➤ माता के दाग दूर करने के लिए नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करें।
    • ➤ खीरा व ककड़ी का रस मिलाकर मलने से आँखों के नीचे का स्याहपन मिटता है।
    • ➤ ग्लिसरीन, नींबू का रस तथा गुलाबजल बराबर मात्रा में लेकर घोल बनाकर रख लें। सर्दी के दिनों में चेहरे पर लगाने का यह अच्छा लोशन है। त्वचा की खुशकी दूर तो होगी ही, त्वचा के रोग भी खत्म होंगे।

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  • ➤ संतरे और नींबू के छिलके सुखाकर महीन पीसें तथा इसमें दूध मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं। इसे चेहरे या पूरे शरीर पर लगाकर सूखने दें फिर स्नान करें। शरीर कान्तिमान होने लगेगा।
    • ➤ नींबू व संतरे के सूखे छिलकों के चूर्ण में दही, बेसन तथा गुलाबजल मिलाकर लेप बनाएं तथा चेहरे पर मलें। मुहासे और झाँइयों से छुटकारा मिलेगा। यदि इसे पूरे शरीर में उबटन की भाँति लगाया जाए तो त्वचा का रंग साफ होकर मुलायमियत आती है।
    • ➤ नींबू का रस, शहद, मैद और बेसन चारों समान मात्रा में लेकर किंचित पानी के साथ गाढ़ा लेप बनाकर कुछ देर तक चेहरे पर अच्छी तरह मलें। नियमित प्रयोग से कुछ दिनों में चेहरे से अनावश्यक रोएं साफ हो जाएंगे।
    • ➤ सूखे आँवलों के कपड़छन चूर्ण में उचित मात्रा में दही मिलाकर चेहरे पर अच्छी तरह लगाकर सूखने दें। सूखने के बाद लेप को मसलकर छुड़ा दें। अब गर्म पानी से भीगे तौलिए से चेहरे की सेंक करें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुहोंसे तो ठीक ही होंगे, चेहरा साफ, सुंदर, चमकदार भी दिखेगा।
    • ➤ रात सोने से पूर्व चेहरे पर मलाई मलने से स्निग्धता बढ़ती है।
    • ➤ काली मिर्च, लाल चंदन तथा जायफल समान भाग लेकर पानी में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुहोंसों से छुटकारा मिल जाता है।
    • ➤ गोबर के रस में पीसकर लेप करने से त्वचा की विकृतियाँ ठीक हो जाती हैं और वर्ण निखरता है।
    • ➤ त्वचा रूखी-सूखी रहती हो तो आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच जैतून का तेल तथा आधा चम्मच पिसी मुल्लानी मिट्टी मिलाकर गाढ़ा लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं तथा आधा घण्टा बाद धो दें।
    • ➤ फटे होंठों पर अरणडी के तेल में गुलाबजल और शहद मिलाकर लगाये या फिर नाभि पर नीम का तेल लगाने से होठ मुलायम होते हैं।

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  • ➤ सूर्य की गर्मी से चेहरे की त्वचा झूलस जाए तो दही में गुलाबजल मिलाकर लगाएं। खीरा के रस में ग्लिसरीन मिलाकर लगाने से भी फायदा होगा।
    • ➤ दो तोला दूध मे चार कली लहसुन उबालकर चेहरे पर मलने से चेहरा खिल उठता है।
    • ➤ पलकों पर सोते समय एरण्ड के तेल की हल्की मालिश करने से पलकें घनी होती हैं।
    • ➤ दांतों को स्वस्थ और सुन्दर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से नीम या बबूल की दातून करना श्रेष्ठ उपाय हैं।
    • ➤ भोजन व नाश्ते के बाद 1 गिलास पानी में आधे चम्मच नमक घोलकर कुल्ला करते रहने से भी दाँत निरोगी रहते हैं।
    • ➤ दाढ़ी बनाने के लिए, पहले गर्म पानी से चेहरा भिगो लीजिए, इसके बाद थोड़ा सा कच्चा दूध लेकर चेहरे पर अच्छी तरह मलिए। अब रेजर चलाइए, एकदम चिकनी दाढ़ी बनेगी। दाढ़ी बनाने के बाद क्रीम वगैरह लगाने की जरूरत एकदम समाप्त हो जाती है, क्योंकि कच्चा दूध अब्बल दर्ज का 'क्लीनिंग एजेंट' है। कच्चे दूध के इस्तेमाल से चेहरे की स्निग्धता और सौन्दर्य में वृद्धि होगी, सो अलग।
    • ➤ स्नान करने के लिए, एक नींबू एक छोटी कटोरी भर कच्चे दूध में निचोड़ दीजिए, बस अच्छे से अच्छे साबुन से भी बेहतर स्नान सामग्री तैयार है। नींबू निचोड़ने के बाद जब दूध फट जाए तो एक साफ सूती कपड़े का टुकड़ा इसमें भिगोकर शरीर पर अच्छी तरह रगड़ते हुए फेरिए और स्नान कर लीजिए। यह है आपका एकदम सौ प्रतिशत सम्पूर्ण स्नान।

काले-घने और घुँघराले बालों के लिए कुछ प्रयोग

बालों को स्वस्थ रखने के लिए आहार-विहार पर ध्यान देना सबसे जरूरी बात है। स्वास्थ्य के लिए जरूरी आहार-विहार की पर्याप्ति चर्चा विभिन्न

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प्रकरणों में आ चुकी हैं। किसी विशेष बीमारी की वजह से बालों के पकने या झड़ने की समस्या हो तो उसका इलाज कराएं। बालों की समस्याओं से निजात पाने के लिए होम्योपैथी में बहुत ही कारगर इलाज मौजूद हैं, बशर्ते लक्षणों से मेल खाती उपयुक्त दवा का चयन हो जाए। जड़ी-बूटियों से आंतरिक चिकित्सा के लिए कुछ कारगर नुस्खे तो खैर आगे दिए ही जा रहे हैं।

आंतरिक चिकित्सा के साथ-साथ बालों की बाहरी देखभाल भी जरूरी हैं, पहली बात यह कि सिर की मालिश प्रतिदिन या एकाध दिन के अंतर पर अवश्य करें। इससे त्वचा में रक्त संचार सुचारू रूप से होगा और बालों की जड़ों तक पोषण आसानी से पहुँचेगा। मालिश के लिए आप दिन तेल बदल-बदलकर न इस्तेमाल करें। कोई एक अपने अनुकूल अच्छा तेल चुन लें और नियमित इसी से मालिश करें। सिर धोने की कई देशी विधियाँ आगे दी गई हैं, उन्हें अपनाएँ तो अच्छा लाभ मिलेगा। धूम्रपान, क्रोध, अधिक रात्रि जागरण, वनस्पति घी, तेल, मिर्च, मसालों से जितना बच सकें, उतना ही बेहतर रहेगा। खान-पान का सुधार रखते हुए भोजन में आँवले का नियमित प्रयोग बालों की सेहत के लिए विशेष लाभप्रद है। आँवले के स्थान पर आमलकी रसायन का भी प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है। इतनी सावधानियों के साथ आप जरूरी लगे तो नीचे दिए जा रहे नुस्खे आजमाएं और बालों की समस्याओं से निजात पाएं।

  • • आपके बाल झड़ना शुरू हो रहें हो तो आँवले के रस में शहद मिलाकर सिर में मालिश करें।
  • • आँवला चूर्ण मेंहदी के साथ पीसकर बालों में लेप करने से बाल घने और काले होते हैं।
  • • पिसी हुई सूखी मेंहदी 1 कप, कल्था 1 चम्मच, दही 1 चम्मच, नींबू का रस 1 चम्मच, पिंसा कॉफी पाउडर 1 चम्मच, आँवला चूर्ण 1 चम्मच, ब्रह्मी बूटी का चूर्ण 1 चम्मच, सूखे पोदीने का चूर्ण 1 चम्मच ।
  • • इन सभी चीजें को एक में मिलकर गाढ़ा लेप बन सकें, इतने पानी में भिगों दें। दो ढाई घण्टे बाद इस लेप को सिर में बालों की

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जड़ों तक लगाएं और घण्टे भर बाद सूख जाने पर सिर को मुल्लानी मिट्टी या बेसन से धो दें। इस प्रयोग से आपके बाल काफी सुंदर दिखेंगे। बालों में रंग न लाना हो तो कल्या और कॉफी पाउडर का इस्तेमाल न करें। बालों को सुंदर, लंबे, घने और काले बनाए रखने का यह एक अच्छा उपाय है, बशर्ते साबुन का प्रयोग बंद कर दिया जाए।

  • • उचित आहार-विहार के साथ एक चम्मच साबुत काले तिल तथा एक चम्मच भृंगराज पंचांग कपड्डछन चूर्ण करके फॉक लें तथा ऊपर से ताजा पानी पिएं। 6 माह तक निरंतर यह प्रयोग करने से बालों का असमय पकना व झड़ना रुकेगा इस के साथ सायंकाल सोने से पूर्व सूर्यतप्त नीले नारियल तेल की भी मालिश करें तो अच्छा परिणाम मिलेगा।
  • • 200 ग्राम सूखे आँवले, 150 ग्राम शिकाकाई, 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागरमोथा, 40 ग्राम रीठा तथा 40 ग्राम कपूर लेकर सबका महीन कपड्डछन चूर्ण बनाकर रख लें।
  • • इसमें से 50 ग्राम चूर्ण लेकर लगभग 400 ग्राम उबलते पानी में 15-20 मिनट तक भिगोएं। तदन्तर मसल-छानकर इस जल से बालों में जड़ों तक मलें। इस प्रयोग से बाल मजबूत होते हैं, उनका झड़ना रुक जाता है तथा काले, मुलायम बने रहते हैं। इससे लीक-जूँ भी नष्ट होती है।
  • • चमेली के पत्ते, चित्रक के पत्ते, लाल कनेर के पत्ते तथा करंज के पत्ते- प्रत्येक 250-250 ग्राम लेकर जल में पीसकर कल्क बनाएं। अब 4 किलो तिल का तेल लेकर इसमें कल्क मिलाकर 16 किलो पानी डालकर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाने पर छानकर रख लें।

इस तेल की मालिश से सिर या दाढ़ी के, जहाँ भी बाल उड़ गए हों, वहाँ जल्दी ही पुनः उगने लगते हैं। इस तेल

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की कुछ दिनों तक नियमित रूप से रूई के फोहे से मालिश करनी चाहिए।

बाल चकत्तों के रूप में उड़ गए हों, गंज हो या पक रहे हों तो निम्न चिकित्साक्रम अपनाना चाहिए –

  1. 1. इसके 1 घण्टे बाद 3 ग्राम शतावरी चूर्ण 10 ग्राम त्रिफला घृत में मिलाकर दूध के साथ प्रातः तथा इसी तरह सांय सेवन करें।
  2. 2. त्रिफला, काले तिल तथा भृंगराज सभी सम्भाग लेकर चूर्ण बनाकर इसके बराबर पिंसी मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से 10 ग्राम चूर्ण की एक मात्रा भोजन के बाद लें।
  3. 3. सिर में प्रतिदिन सांयकाल सोने से पूर्व भृंगराज तेल की मालिश करें।
  4. 4. यूँ चाय पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। परंतु यदि आप आदतवश चाय पीते ही हैं तो चाय बनाने के बाद चाय की पत्ती का एक अच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं। उबली हुई चाय पत्ती को फेंकने के बजाए इसे पुनः उबालकर छान लें और ठण्डा होने दें। अब इसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं तथा मल-मलकर सुखाएं, फिर धो डालें। इससे बाल साफ और चमकदार होते हैं।
  5. 5. नींबू, संतरे का रस और दही मिलाकर बालों में मलें और पानी से धो दें। यह प्रयोग बालों को सुन्दर और घना बनाने में उपयोगी हैं।
  6. 6. किसी खेत या तालाब में साफ जगह पर खोदकर 1 फुट नीचे की मिट्टी निकालकर रख लें। काली मिट्टी हो तो अति उत्तम। आवश्यकता भर यह मिट्टी पानी में गलाकर कंकड़-पत्थर छानकर साफ घोल बनाएं। इस घोल से नित्य सिर धोने से बाल खिल उठते हैं और घने, लम्बे, मुलायम बने रहते हैं।
  7. 7. दही में नींबू का रस मिलाकर बालों में मलें तथा धूप में सुखाएं। सूखने पर धो दें। इससे बाल हल्के-फुल्के और फूले-फूले से रहेंगे।

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  1. 8. यदि आप खारे पानी वाले इलाके में रहते हों तो शैम्पू आदि करने के बाद बालों को लाल सिरके से धोएं।
  2. 9. शैम्पू में थोड़ी सी दही मिलाकर बालों में मलकर 10-15 मिनट बाद धोने से आप के बाल चमकदार दिखेंगे।
  3. 10. यदि ड्राई करने या रंगने की वजह से बालों में रूखेपन की शिकायत हो तो दूध में केला मथकर बालों में लगाएं। पका पपीता भी लगा सकते हैं। इससे रूखापन दूर हो जाएगा।

शरीर और साँसों की बदबू भगाइए

शरीर और साँसों में बदबू आने के आंतरिक और बाह्य दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। एक तो खान-पान की गड़बड़ी या किसी रोग की वजह से बदबू आ सकती है, दूसरे शरीर और दाँतों व मुँह की साफ-सफाई में की जा रही लापरवाही से भी बदबू की समस्या पैदा हो सकती है। बदबू की समस्या के यदि शारीरिक विकार, जैसे कि – दाँतों, मसूड़ों की खराबी, पेट की गड़बड़ी, टॉन्सिल की सूजन- पस, नाक व साइनस विकार, श्वासनली व फेफड़ों के विकार, मुँह के छाले रक्त की कमी, मधुमेह, यकृत-गुर्दी की बीमारी, पीनस आदि कारण हों तो आहार-विहार ठीक रखते हुए आवश्यक उपचार करना चाहिए।

  • ➤ बेलपत्र, आँवला, हरड चूर्ण मिलाकर शरीर में लेप करके कुछ देर बाद धो दें। इससे शरीर और पसीने की दर्गंध से छुटकारा मिलता है।
  • ➤ साँस में बदबू आती हो तो ऐसे लोगों को नीम की दातून नियमित करनी चाहिए। इसके अलावा खाने के बाद मुँह अच्छी तरह साफ रखें।
  • ➤ दो चम्मच शहद को 1 गिलास पानी में घोलकर गरारा करने से हफ्ते भर में मुँह की दुर्गन्ध से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ दाँत की सफाई और खान-पान पर भी ध्यान दें तो उत्तम है।

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  • ➤ मुँह की दुर्गंध दूर करने के लिए दोनों समय भोजन के बाद अथवा यदा-कदा सौफ़ चबाना चाहिए। इससे हाजमा भी दुरुस्त होता है।
    • ➤ नींबू को कच्चे दूध में निचोड़ कर, इसका लेप करके नहाये, पसीने की दुर्गन्ध दूर होगी।

स्त्रियों की समस्या अविकसित, बेडौल

वक्ष

  • ➤ स्त्री शरीर के लिए वक्ष-सौन्दर्य का विशेष महत्व है। सौन्दर्य की भी अपेक्षा माँ बनने और शिशु के स्वास्थ्य की दृष्टि से नारी शरीर में समुचित विकसित वक्ष का कहीं ज्यादा महत्व है। यूँ यौवनावस्था में कदम रखने के साथ ही स्तनों का भी समुचित विकास शुरू हो जाता है, परन्तु यदि किसी कारण से स्तन अविकसित रह जाएँ या अति विकसित होकर बेडौल हो जाएँ तो चिन्ता की बात हो जाती है।
  • ➤ स्तनों के अविकसित रह जाने के पीछे अत्याधिक दुबलापन, मासिक विकार, गर्भाशय की दिक्कतें, अधिक चिंता, तनाव जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। इसी तरह शरीर पर मोटापा चढ़ने, आलसी जीवन बिताने, देर तक सोने की आदत, गरिष्ठ व ज्यादा भोजन करने अथवा समय से पूर्व अत्याधिक काम – क्रीड़ाओं में लिप्त होने, कामुक चिन्तन करने जैसे कारणों से भी स्तन अविकसित, बेडौल व ढीले हो सकते हैं। फिलहाल यहाँ नवयुवतियों की इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए कुछ स्वदेशी उपाय सुझाए जा रहे हैं, जिन्हें आजमाकर अविकसित या बेडौल स्तनों को स्वस्थ, सुडौल बनाया जा सकता है। इतना अवश्य ध्यान रखें कि किसी भी बाह्य चिकित्सा को अपनाते हुए शरीर के आन्तरिक विकार अवश्य दूर करें।
  • ➤ कोई भी आंतरिक या बाह्य उपचार करते हुए स्तनों को समुचित विकास के लिए योगासन व व्यायाम अवश्य अपनाएं। स्तन

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सौन्दर्य की दृष्टि से सूर्य नमस्कार, धनुरासन, चक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, उष्ट्रासन, पर्वतासन, हस्त पार्श्वसन, गोमुखासन आदि विशेष लाभप्रद हैं। इनकी विधियाँ मेरी पुस्तक "रोगी रोकत मुक्त बिना दवाई" पुस्तक से सीख सकते हैं।

  • ➤ स्तन कम विकसित हों तो मालिश करने से काफी लाभ होता है। तिल, जैतून या सरसों के तेल से स्तनों की नियमित मालिश करनी चाहिए। इसी के साथ ठण्डे तथा गर्म पानी की गीली पट्टी से बारी-बारी करके सेंकने से स्तन आसानी से पुष्ट होने लगते हैं।
  • ➤ चेहरे का सौन्दर्य प्रकरण में वर्णित तंबे के बर्तन में नींबू का रस, तुलसी और कसौंदी से बनने वाला नुस्खा प्रयोग करने से स्तन उन्नत, पुष्ट और सुडौल होते हैं।
  • ➤ घृतकुमारी की जड़, गोरखमुण्डी, इन्द्रायण की जड़, अरण्डी के पत्ते, छोटी कटोरी 50-50 ग्राम तथा केले का पंचाम, सहिजन के पत्ते, पीपल के पेड़ की अन्तरछाल, अनार की जड़ व छिलका, खम्भारी की अन्तरछाल, कनेर व कूठ की जड़ 10-10 ग्राम लेकर मोटा-मोटा कूटकर 5 लीटर पानी में उबालकर काथ करें। जब मात्र सवा लीटर पानी बच रहे तो उतारकर छान लें तथा इसमें सरसों व तिल का तेल 250-250 मिली डालकर पुनः उबालें। सिर्फ तेल रह जाए तो उतारकर ठण्डा करके इसमें 15 ग्राम शुद्ध कपूर मिलाकर रख लें।

इस तेल को रात में सोते समय तथा सबेरे नहाने से एकाध घण्टे पहले स्तनों पर हल्के-हल्के मालिश करें। 2-3 माह में स्तन पुष्ट व सुडौल होने लगेंगे।

कुछ नुस्खे हाथ-पैरों की देखभाल के लिए

  • • एडियाँ फटती हों तो अरंडी का तेल, गुलाबजल तथा नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर एडियों पर दिन में दो-तीन बार मलें।
  • • रात को सोने से पहले नारियल का तेल गुनगुना करके बिवाइयों में लगाए तथा मोजे पहनकर सो जाएं। सबेरे गर्म पानी में पैरों को

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15 मिनट तक डुबोएँ तथा किसी ब्रश से हल्के-हल्के रगड़कर एड्रियाँ साफ करें। इसके उपरांत भीगे पैरों को कपड़े से सुखाकर कोई तैलीय चीज लगा लें।

  • • एक चम्मच देशी मोम तथा एक चम्मच देशी घी गर्म करें। दोनों एकसार हो जाएं तो इस मिश्रण की गर्म-गर्म बूँदें बिवाइयों में टपकाएँ। यह प्रयोग प्रतिदिन तब तक करें जब बिवाइयों से छुटकारा न मिल जाए।
  • • जैतून का तेल सहने योग्य गर्म करके नाखुनों को कुछ दूर तक उसमें डुबाए रहिए। ऐसा कुछ दिनों तक करने से आपके नाखून मजबूत होंगे।
  • • 100 ग्राम सरसों के तेल में 25 ग्राम मोम डालकर गर्म करें तथा एक उबाल आने के बाद उतारकर ठण्डा होने से पूर्व ही किसी चौड़े मुँह के पात्र में रख लें।
  • • इसे वैसलीन की करह इस्तेमाल करें, त्वचा नहीं फटेगी। यदि फट रही हो तो ठीक हो जाएगी।
  • • सर्दी के मौसम में या पानी में काम करने से हाथ-पैरों की त्वचा फटती हो तो ग्लिसरीन में नींबू का रस मिलाकर मलना चाहिए।
  • • नींबू के छिलके नाखुनों पर मलने से नाखून चमकदार होते हैं।
  • • हथेलियों, कोहनी और एड्रियों का कालापन मिटाने और मैल हटाने के लिए नींबू के छिलकों को प्रभावित हिस्सों पर घिसकर गुनगुने पानी में धोना चाहिए।

स्वास्थ्य और सौन्दर्य का शत्रु मोटापा

मोटापे का अर्थ है – शरीर में चर्बी यानी वसा का ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाना। चर्बी भी अजब चीज है। अगर संतुलन में हो तो शरीर को सुडौल बनाए रखती है, कम हो तो आदमी बेडौल दिखता है और ज्यादा हो जाए तो बेडौल ही क्या पूरा शरीर डोँवाडोल हो जाता है। अर्थात् एक सीमा तक चर्बी जरूरी है, इसके बाद गैरजरूरी। जिनके शरीर में चर्बी

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संतुलित मात्रा में हैं, उनके लिए तो चिंता की कोई बात नहीं है पर जिनके शरीर में चर्बी की कमी हैं, वे चर्बी बढ़ाने के लिए और जिनके शरीर में चर्बी ज्यादा हैं, वे इसे घटाने के लिए परेशान दिखते हैं।

दरअसल मोटापे की समस्या मुख्य रूप से दो तरह से पैदा होती है। कुछ लोगों में मोटापा वंशगत प्रभाव से आता है या शरीर की अन्दरूनी मशीनरी ऐसी होती है कि वे जो कुछ खाते हैं उसका ज्यादा हिस्सा चर्बी में तब्दिल हो जाता है। यानी एक वर्ग ऐसा है जिनके शरीर में चर्बी जमा करने की खास प्रवृत्ति होती है। ऐसे लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति हमेशा चौकन्ना रहने की जरूरत होती है। मोटापे का दूसरा और सबसे व्यापक कारण है लापरवाही भरी दिनचर्या। जरूरत से ज्यादा और सारे दिन कुछ न कुछ खाते रहने, आलस्य भरा जीवन बिताने, भोजन के बाद दिन में सोने, तली-भुनी वसायुक्त बीजों का ज्यादा सेवन करने जैसी आहार-विहार की लापरवाहियों की वजह से ज्यादातर लोग मोटापे के शिकार बनते हैं। एक सवाल यह है कि आखिर किस स्थिति को हम मोटापा कहेंगे? तो इसका सामान्य सा उत्तर यह है कि जब तक शरीर की चुस्ती-फुर्ती कायम हैं और मन में उत्साह-उंमंग बना हुआ है, तब तक मोटापे या दुबलेपन जैसी कोई समस्या नहीं है। पूँ सामान्यतः जितने इंच शरीर की लंबाई हो लगभग उतने ही किलो शरीर का वजन हो तो इसे संतुलित स्थिति मानी जाती है। इसमें उन्नीस-बीस के फर्क से कोई खास अन्तर नहीं पड़ता, लेकिन जब फर्क ज्यादा बढ़ने लगे तो समझिए कि सावधान होने का समय आ गया है। जिन बुजुर्गों का वजन 30-35 वर्ष की उनकी स्वस्थ अवस्था जितना आज भी बना हुआ है, वे अपने को अच्छई स्थिति में मान सकते हैं।

मोटापे का आक्रमण सबसे पहले अक्सर पेट, कमर, कूल्हों और जाँघ पर होता है। इसके बाद गर्दन, चेहरा, हाथ-पैर व शरीर के शेष अंग इसकी गिरफ्त में आते हैं। ध्यान रखने वाली बात है कि शुरूआती दौर में, या जब तक मोटापा पेट, कमर, कूल्हों और जाँघों तक ही सीमित है तब तक इसे दूर करना ज्यादा आसान है। लेकिन जब पूरे शरीर पर मोटापा मजबूत कब्जा जमा लेता है तो इसे हटा पाना तकलीफ़देह और मशक़त भरा काम हो जाता है।

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खैर, स्थिति जो भी हो, अगर मोटापे से ग्रस्त लोग अपना स्वास्थ्य और सौन्दर्य वापस लाना चाहते हैं तो उन्हें अविलम्ब संकल्प की मजबूती के साथ कमर कसकर कुछ उपायों पर अमल करने की तैयारी कर ही लेनी चाहिए। अन्यथा भविष्य की देहरी पर मधुमेह, हाई ब्लडप्रेसर, कब्ज, गैस, हृदय रोग, दमा, गठिया आदि अन्याय रोग उनका स्वागत करने को तैयार मिलेंगे, यह जान लें।

वैसे मोटापे से त्रस्त लोग इससे निजात पाने के लिए जाने क्या-क्या करते हैं और कहाँ-कहाँ भटकते हैं, पर ज्यादातर ऐसा ही होता है कि मोटा अन्तिम दम तक साथ नहीं छोड़ता। यह भी गौरतलब है कि मोटापेके इलाज के चक्कर में अक्सर लोग ज्यादा खतरनाक बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। ऐसे में सीधी सी बात यह है कि मोटापा दूर करने का कार्यक्रम बहुत सोच-समझकर बनाएं और मुस्तैदी से उसका पालन करें। दवाओं का सहारा लेने का इरादा हो इतना याद रखें कि एलोपैथी में मोटापा घटाने की अब तक जो भी दवाएं हैं, निरापद कतई नहीं हैं। इन दवाओं से आप ज्यादा बड़ी मुसीबत में फँस सकते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आयुर्वेद तमाम नुस्खे निरापद और कारगर हो सकते हैं, पर इनमें भी हर किसी नुस्खे का सिर्फ जड़ी-बूटियों के नाम पर ही आँख मूँदकर नहीं आजमाया जा सकता है। पथ्य – अपथ्य का ध्यान रखते हुए होम्योपैथी और बायोकैमी दवाओं से वजन घटाना पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है। कई लोग सोच सकते हैं कि स्वदेशी चिकित्सा की बात करते-करते होम्योपैथी का जिक्र कैसे? तो यहाँ अति संक्षेप में यह बता देना उचित है कि होम्योपैथी के सिद्धान्त और आयुर्वेद की मूल मान्यताओं में कहीं कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि कई मायनों में होम्योपैथी कहीं ज्यादा ‘आयुर्वेदिक पद्धति’ है। यह रहस्य वे लोग आसानी से समझ सकते हैं जिन्हें होम्योपैथी के सैद्धांतिक पक्ष की गहरी समझ है। यह भी आश्चर्यजनक बात है कि जर्मनी में खोजी गई यह पद्धति भारतीय समाज और सांस्कृतिक मूल्यों के सर्वथा अनुकूल है। ऐसी पद्धति की खोज संभवतः इसलिए भी आसान हुई, क्योंकि इसके अविष्कर्ता महात्मा

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हनीमेन का जीवन भारतीय ऋषियों-महात्माओं जैसा अध्यात्म प्रेरित नैतिकतावादी रहा।

बहरहाल, मोटापा घटाने के लिए आप कुछ भी करें, अंततः आहार-विहार संयमित करने से ही बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसमें से पहले आहार की बात की जाए तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि आपका अपना खान-पान ऐसा संयोजित करना होगा कि शरीर को बाहर से वसा और ऊर्जामान की आपूर्ति कम से कम हो। चूँकि वसा शरीर के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने के लिए अन्दर जमा चर्बी अपघटित होकर शरीर के काम आने लगेगी और इस तरह मोटापा कम होना शुरू हो जाएगा। कैलोरी कम करने के चक्कर में अक्सर लोग भोजन एकदम कम कर देते हैं। आजकल प्रचलित 'डायटिंग' का यह तरीका काफी नुकसानदेह हो सकता है और इससे आप शक्तिहीनता और कई दूसरी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।

दरअसल आहार को कम करने के बजाए उसे संतुलित करने की जरूरत है। भोजन में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो कम वसायुक्त हों और जिन का ऊर्जामान (कैलोरी) कम हों, परंतु वे शरीर के लिए जरूरी पोषकता की पूर्ति करने वाली हों।

आहार संतुलन के बाद विहार में भी संतुलन जरूरी है। अर्थात् पूरे दिन में से कुछ समय आपको शारीरिक श्रम के लिए अवश्य ही निकालना चाहिए। जितनी ऊर्जा शरीर को भोजन से मिलती है अगर उससे ज्यादा श्रम में खर्च होती है तो समझिए कि मोटे लोगों के लिए सार्थक परिणाम निकल सकते हैं। आहार-विहार को संतुलित करते हुए मोटापा घटाने का फिलहाल एक कार्यक्रम दिया जा रहा है, मोटे लोग इसे अपनाएं और लाभ उठाएं -

6-7 घण्टे की पर्याप्त नींद लेने के बाद सबेरे जल्दी उठने की आदत बनाएं। उठने के बाद सबसे पहले 1 गिलास गुनगुने गर्म पानी में 2 चम्मच नींबू का रस और दो चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर गटागट पी जाएं। अब कुछ देर टहलने के बाद शौच के लिए जाएं।

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शौचादि से निवृत्त होकर कम से कम 3-4 किलोमीटर तेज कदमों से टहलने निकलें, हो सके तो थोड़ी दौड़ भी लगाएं। याद रखें धीरे-धीरे चहलकदमी करने से मोटापे पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। टहलने के बाद समय हो तो कुछ योगासन व्यायाम करें। टहलने के बजाए चाहें तो केवल आसन व्यायाम से भी काम चला सकते हैं। आसनों में सूर्यनमस्कार, उत्तान पादासन, हलासन, धनुरासन, जानुशिरासन, वक्रासन, ताड़ासन, पश्चिमोत्तान आसन, भुंजगासन, पवनमुक्तासन में से पहले आसन आसनों से शुरूआत करके धीरे-धीरे जितने आसन कर सकें, करें। उड्डियान बंध तथा भस्त्रिका प्राणायाम भी करें। आसन-व्यायाम फुरसत हो तो सबेरे शाम दोनों समय खाली पेट कर सकते हैं, और बेहतर परिणाम मिलेगा। इतना अवश्य समझ लें कि आसन-व्यायाम योग्य व्यक्ति से सीख-समझकर ही शुरू करना चाहिए।

नाश्ता हल्का-फुल्का करें। कोई एक किस्म का एक पाव फल या फल का रस लें। 50 ग्राम मूँग में थोड़ा गेहूँ, थोड़ी मेथी मिलाकर अंकुरित करके सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर भी नाश्ते के रूप में सेवन कर सकते हैं। दूध पीते हों तो मलाई उतारकर एक पाव दूध में आधा चम्मच सोंठ तथा 6-7 मुनक्का या थोड़ा अंजीर डालकर उबालें और गुनगुना रहने पर पिएं। चाय पीने का इरादा हो तो अदरक य सोंठ, तुलसी, काली मिर्च, लौंग, इलयची, मुलहठी आदि जड़ी-बूटियों की चाय इस्तेमाल कर सकते हैं।

मोटापे से ग्रस्त लोगों को दोपहर और शाम के भोजन में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। तेल, घी से बनी वसायुक्त और ज्यादा प्रोटीन व कार्बोज युक्त चीजों का सेवन हर हाल में सीमित कर देना चाहिए। भोजन से पहले पर्याप्त मात्रा में सलाद खाएं। हरी सब्जियों की मात्रा भरपूर रखें और गेहूँ की रोटी कम खाएं। अगर मोटापे की समस्या ज्यादा हो तो कम से कम एक माह के लिए गेहूँ की रोटी खाना एकदम बंद कर दें। इस दौरान जो के आटे से बनी रोटी भोजन में लें या साबुत चने में जो मिलाकर पिसवा लें। इस आटे की रोटी स्वादिष्ट भी लगेगी। 10 किलो चना हो तो दो किलो जो मिलाएं तो अच्छा लाभ मिलेगा। दालों में छिलकायुक्त मूँग, मसूर का सेवन बेहतर रहेगा।

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