स्वदेशी उत्पाद विधि (भाग 3)
Swadeshi Utpad Vidhi (Bhag 3)
रोबिन बसराना / राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Swadeshi Utpad Series Part 3 (Best Out of Waste) · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
होता है इसलिए यह आपकी त्वचा को ड्राई होने से रोकता है। विच हेजल भी आपकी त्वचा पर अच्छा प्रभाव डालता है। फैक्ट यह है कि विच हेजल एक बेहतरीन कीटाणुनाशक के रूप में काम करता है, यह हैंड सैनिटाइजर के रूप में उपयोग किए जाने वाला बेहतरीन प्रोडक्ट है। टी-ट्री ऑयल आपकी त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसका उपयोग कई त्वचा संबंधी बिमारियों को दूर करने व इसका इलाज करने के लिए किया जाता है।
5. टी-ट्री ऑयल होममेड हैंड सैनिटाइजर -
आपको चाहिए -
- • टी-ट्रीऑयल
- • विटामिन ई ऑयल
- • डिस्टिल्ड वाटर
- • देवदार (सीडरवुड) एसेंशियल ऑयल
- • क्लोव (लौंग) एसेंशियल ऑयल
कैसे तैयार करें -
एक साफ, धुले और सूखे बर्तन में चार से छह चम्मच टी-ट्री ऑयल डालें। विटामिन ई, सीडरवुड और क्लोव एसेंशियल ऑयल की दो बूंद इसमें डालें। फिर धीरे-धीरे इसमें डिस्टिल्ड वाटर डालें। घोल को मिलाने के लिए हैंड ब्लेंडर का इस्तेमाल करें। इस मिश्रण को एक एयरटाइट स्प्रे बोतल में डाल दें और आपका एसेंशियल ऑयल से बना हैंड सैनिटाइजर स्प्रे तैयार है।
नोट -
1% टी-ट्री ऑयल के इस्तेमाल से लगभग सभी प्रकार के बैक्टीरिया मर जाते हैं। इसका उपयोग बड़ी संख्या में त्वचा संबंधी विकारों के लिए किया जाता है। इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों के कारण यह घर पर बनाए जाने वाले हैंड सैनिटाइजर में उपयोग किए जाने वाला एक बेहतरीन प्रोडक्ट है।
चीज़ (Cheese) बनाने की विधि
सामग्री
दही से बनाया चीज़ (लबनेह) (Yoghurt Cheese/Labneh)
- • साधा दही
- • या 1 कार्ट (1 लीटर) दूध और 1 दही का पैकेट जामन के लिए
दही को घर पर बनाएँ (यदि आप चाहे तो): आप इस प्रक्रिया को न करते हुए सीधे बाज़ार से दही ला कर चीज़ बनाने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं। अगर आप अपने इस व्यंजन विधि में खमीर उठाना चाहते हैं, तो आप ज्यादा गाढ़ा "दही का चीज़" शुरूआत से बना सकते हैं। और यह करने के लिए नीचे दिए गए प्रक्रिया को अपने चीज़ बनाने की व्यंजन विधि में मिला लें:
- • 1 कार्ट (1 लीटर) दूध को 110°F (43°C) तापमान तक ही गरम होने दें, तापमान जांचने के लिए कुकिंग थर्मामीटर का उपयोग करें। अच्छे परिणाम के लिए UHT दूध या अल्ट्रा पास्चुराइज़्ड दूध का उपयोग करना टालें।
- • गुनगुने दूध में बाज़ार से लाया हुआ या घर पर बनाया गया दही का जामन मिलाये और अच्छे से हिला लें। इसके अलावा आप दूध में 2 बड़े चम्मच (30 मिली) साधा दही, लाइव एक्टिव कल्चर (जीवित सक्रिय संवर्धित जीवाणु) के साथ दूध में मिलाएँ।
- • नीचे बताते गये चरण 2 और 3 के अनुसार दही को छलनी करके फ्रिज़ में रखने के बजाय दही को 12 से 16 घंटे दही से पानी निकालने वाली मशीन में रखें। मशीन में दही 100°F (38°C) में रहेगा जिससे बैक्टीरिया के कारण दही किण्वित (ferment) हो जाएगा।
छानने वाले कंटेनर को तैयार करें: एक छलनी में चीज़क्लॉथ (जालीदार कपड़ा) को चार परत में रखें। फिर इस छलनी को बड़े तले वाले बर्तन के ऊपर रखें। आप जितना चाहे उतना दही चम्मच से चीज़क्लॉथ पर डाल दें।
- • आप दही को चीज़क्लॉथ में डालकर, उसे बर्तन के ऊपर टाँग दें।
- • 12-48 घंटों के लिए फ्रिज में रखें: जब दही में से तरल निकल जाएगा और तब आपको क्रीम जैसा गाढ़ा चीज़ मिलेगा। जितना ज्यादा तरल दही से निकलेगा उतना ज्यादा गाढ़ा और मिश्रित चीज़ आपको मिलेगा
- • अगर आप चाहे तो चीज़ को चम्मच से फेटकर और ज्यादा मुलायम बना सकते हैं।
- • सामान्य तापमान पर दही छानना, चीज़ बनाने की प्रक्रिया को शीघ्र कर देता है परंतु ऐसा करने में हानिकारक बैक्टीरिया उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है।
चीज़ को स्टोर करें: जब दही में पूरा तरल निकल जाएगा तब एक छोटे से बर्तन या कटोरे में साफ़ कपड़ा रखकर उसपर चीज़ निकाल लें। अगर आप चीज़क्लॉथ इस्तेमाल करते हैं तो चीज़ पर एक अच्छा प्रिंट आ जाएगा पर आप छलनी के लिए दूसरे कपड़े का जैसे मलमल के कपड़े का उपयोग कर सकते हैं। चीज़ का स्वाद बिगड़ने से पहले उसे खा लीजिए लगभग एक सप्ताह में खाकर खत्म कर दें।
- • अगर आप चाहें तो क्रेकर टॉपिंग (पतले नमकीन बिस्कुट) के लिए चीज़ में नमक और हर्ब मिलाये और हल्के मीठे पकवान के लिए चीज़ में चीनी मिलाये।
- • छलनी से निकले तरल को आप फेंक सकते हैं या उसे दूध की जगह खाना पकाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।
जलेबी बनाने कि विधि
घोल बनाने की सामग्री:
1/2 कप मैदा
1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर) या अशरूट पाउडर
1/4 टीस्पून बेकिंग पाउडर
एक चुटकी हल्दी पाउडर (पीला रंग पाने के लिए)
1/4 कप दही
1/4 कप पानी
चाशनी बनाने की सामग्री:
1/2 कप शक्कर
1/4 कप + 2 टेबलस्पून पानी
1 टीस्पून नींबू का रस
एक चुटकी इलायची पाउडर
5-7 केसर की किस्में, वैकल्पिक
एक मध्यम कटोरे में 1/2 कप मैदा छान लें। उसमें 1 टेबलस्पून कॉर्न स्टार्च (कॉर्न फ्लोर), 1/4 टीस्पून बेकिंग पाउडर, एक चुटकी हल्दी पाउडर और 1/4 कप दही डालें।
जरूरत के अनुसार पानी (लगभग 1/4 कप) डालें और गाढ़ा घोल (इडली के घोल की तुलना में थोड़ा मोटा) बना लें। ध्यान रहे है कि घोल में कोई गांठ ना रहे।
घोल को एक प्लेट या एक ढक्कन से ढककर 24 घंटे के लिए कमरे के तापमान पर (किचन के काउंटर टॉप पर ही रखें) फरमेट होने के लिए (खमीर उठाने के लिये) रखें। 24 घंटे के बाद, ढक्कन हटा दें। आपको घोल की सतह पर छोटे बुलबुले दिखेंगे और हल्की खट्टी गंध आयेगी। इडली के घोल की तरह यह घोल दोगुना नहीं होगा।
घोल को एक चम्मच से अच्छी तरह से फैंट लें।
अगर घोल बहुत ज्यादा पतला होगा तो जलेबी कुरकुरी तो बनेगी लेकिन उसका आकार अच्छा नहीं आयेगा। अगर घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा होगा तो जलेबी नरम रहेगी।
जलेबी बनाने की बोतल या (एक खाली सोस की बोतल) या एक जिपलॉक बेग (या कोई भी मोटी प्लास्टिक की बेग) में घोल डालें।
जलेबी के लिए चाशनी बनाने की विधि: (Sugar Syrup Banane Ki Vidhi Hindi Me):
एक गहरे पतौले या पेन में चीनी, केसर की किस्में, इलायची पाउडर और पानी डालें और मध्यम आंच पर पकने के लिये रखें।
इसे तब तक पकाइये जब तक कि हल्की 1-तार की चाशनी हो जाये।
जलेबी कैसे बनाये (Jalebi Banane Ki Vidhi Hindi Me):
जलेबी को तलने के लिए एक चौड़े मुँह वाली कड़ाही में मध्यम आंच पर घी/तेल गर्म करें। इस विधि में तलने के लिए तेल + 2 टेबलस्पून घी का उपयोग किया है। तेल तलने के लिए तैयार है या नहीं उसकी जाँच करने के लिये घोल की एक बूँद गर्म तेल में डालें और अगर यह रंग बदले बिना ही तुरंत सतह पर आती है तो तेल तलने के लिए तैयार है। जब तेल तलने के लिए तैयार हो
तब बोतल (या जिपलॉक बैग) को दबाते हुए केंद्र से शुरू करके बाहर की ओर गोल गोल घूमा के जलेबी बनाये (या बाहर से शुरू करते हैं और केंद्र की ओर घुमाये)। अगर जलेबी का सही आकार नहीं आता है तो चिंता मत करें, इसे गोल आकार में बनाने के लिए कुछ अभ्यास की आवश्यकता होती है।
उन्हें 2-3 बार (या जरूरत अनुसार) चिमटे से पलटे ताकि वे समान रूप से सुनहरी हो।
उन्हें हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक तले।
उन्हें तेल में से निकालें और तुरंत ही गर्म चाशनी में डाल दें। सिरप (चाशनी) गर्म या थोड़ा गर्म होना चाहिये, यह ठंडा नहीं होना चाहिए। उन्हें लगभग दो मिनट के लिए सिरप में रखें। एक मिनट के बाद पलट दें।
सिरप में से जलेबी निकाले और एक प्लेट में रखें। जलेबी परोसने के लिए तैयार है।
सुझाव और विविधता:
- ✦ अगर घोल बहुत मोटा (गाढ़ा) होगा तो जलेबी नरम बनेगी और अगर घोल पतला होगा तो जलेबी का आकार अच्छा नहीं आयेगा।
- ✦ चाशनी को जमने से रोकने के लिए नींबू का रस डाला जाता है। इससे स्वाद में कोई फर्क नहीं पड़ता।
- ✦ अगर फरमेन्ट होने के बाद घोल पतला हो जाये तो घोल में थोड़ा मैदा डाल के मिला दें।
स्वाद: मीठा और करारा
परोसने के तरीके: जलेबी को चिवड़ा, करारी मेथी पुरी , नमक पारे, चकली , गाठिया आदि के साथ परोसा जाता है। इसे रात के खाने के बाद एक मिठाई के रूप रबड़ी के साथ भी परोसा जा सकता है।
घर में बच्चों के लिए सेरेलक बनाने का तरीका
यहां हम शिशु के लिए घर में ही सेरेलक बनाने की पांच रेसिपी बता रहे हैं। इन्हें बनाना बेहद आसान है, ये इस प्रकार हैं :
1. चावल का सेरेलक
सामग्री :
- • आधी कटोरी चावल
- • थोड़ा-सा पानी (आवश्यकतानुसार)
बनाने की विधि :
- • चावल को करीब एक घंटे तक पानी में भिगोकर रखें।
- • इसके बाद चावल को साफ कर धूप में या पंखे के नीचे रख के सुखा लें।
- • फिर इसे मध्यम आंच पर क्रिस्पी होने तक सेक लें।
- • इसके बाद चावल को ठंडा करके पीस लें।
2. दलिया का सेरेलक
सामग्री :
- • आधी कटोरी दलिया
बनाने की विधि :
- • दलिये को पानी से अच्छी तरह साफ कर लें।
- • इसके बाद इसे धूप में या पंखे के नीचे रख के सुखा लें।
- • फिर इसे मध्यम आंच पर क्रिस्पी होने तक सेक लें।
- • जब दलिया ठंडा हो जाए, तो इसे पीसकर पाउडर बना दें।
3. ओट्स का सेरेलक
A black ceramic bowl filled with creamy oatmeal, with a spoon lifting a portion of the oatmeal. The bowl is placed on a woven mat, and there is a 'Save' button in the bottom right corner.
सामग्री :
- • आधा कटोरी ओट्स
बनाने की विधि :
- • चावल व दलिया की तरह ओट्स को भी मध्यम आंच पर सेक लें।
- • फिर जब ओट्स ठंडे हो जाएं, तो उन्हें मिक्सी में पीस लें।
4. पोहे का सेरेलक
सामग्री :
- • आधा कटोरी पोहा
बनाने की विधि :
A white bowl filled with a creamy, white rice pudding (pohe). The surface is decorated with several bright yellow mango chunks and a small garnish consisting of a red cherry and a sprig of green mint leaves. The bowl is placed on a light-colored, textured surface.
- • पोहे को किसी कपड़े से साफ करके मध्यम आंच पर सेक लें।
- • इसके बाद पोहे को ठंडा करके पीसकर पाउडर बना लें।
5. मूंग दाल व चावल दलिया
A white bowl containing a thick, yellow-colored dal and rice pudding (dal khichdi). A silver spoon with an orange handle is resting inside the bowl. The background shows a portion of an orange cloth and a white surface with grey stripes. A small red logo with the text 'Sa' is visible in the bottom right corner.
सामग्री :
- • एक कप चावल
- • एक कप मूंग दाल
बनाने की विधि :
- • चावल और मूंग दाल को पानी से धो लें।
- • फिर जब ये सूख जाएं, तो इन्हें अलग-अलग मध्यम आंच पर हल्का फ्राई कर लें।
- • ठंडा होने पर इन्हें मिक्स करके मिक्सी में डालकर पीस लें और पाउडर बना लें।
नोट : इन सभी पाउडर को आप एयर टाइट जार में करीब छह हफ्ते तक रख सकते हैं। अब जब भी जरूरत हो एक या दो चम्मच पाउडर को कटोरी में डाल दें और उसमें थोड़ा-सा गर्म पानी मिक्स करके बच्चे को खिलाएं। अगर बच्चा इसे नहीं खाता है, तो आप पानी की जगह दूध भी मिक्स कर सकते हैं। साथ ही स्वाद व पौष्टिक तत्व बढ़ाने के लिए केले व किसी अन्य फल को कुचल कर मिक्स कर सकते हैं। इन पाउडर को कहीं भी ले जाना और बनाना आसान है। आप इसमें चीनी या शहद मिक्स न करें।
घर में सेरेलक बनाते समय बरतें सावधानियां
बेशक, घर में बना सेरेलक बच्चों के लिए पौष्टिक होता है, लेकिन इसे बनाते समय कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी है।
- • गीले बर्तन का उपयोग न करें। किसी भी सामग्री को भुनने से पहले ध्यान रखें कि बर्तन सूखा व साफ-सुथरा हो।
- • हर सामग्री को बड़े ही ध्यान से धोएं, ताकि सामग्री से धूल-मिट्टी साफ हो जाए।
- • सभी सामग्रियों को अच्छी तरह भूनें। साथ ही बनाते समय अच्छी तरह पकाएं, ताकि शिशु के लिए उसे पचाना आसान हो।
- • सभी सामग्रियों को भूनने के बाद ठंडा होने दें, उसे बाद ही मिक्सी में पीसकर पाउडर बनाएं।
घर में बने सेरेलक को कैसे स्टोर करें?
- • सेरेलक का पाउडर बनाने के बाद एयर टाइड डिब्बे में स्टोर करके रखें।
- • इस पाउडर को एक महीने के लिए कमरे के तापमान में रखा जा सकता है। वहीं, रेफ्रिजरेटर में तीन से छह माह के लिए रखा जा सकता है।
जब बाजार से प्री-पैकेज्ड सेरेलक मिलता है, तो घर में सेरेलक क्यों बनाएं?
बेशक, बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद सेरेलक को बनाना आसान है, लेकिन वो शिशु के लिए पौष्टिक है, इस पर शक है। यहां कुछ ऐसे ही कारण बता रहे हैं, जो साबित करते हैं कि घर का सेरेलक बाजार में मिलने वाले सेरेलक से बेहतर है।
- 1. केमिकल युक्त : बाजार में मिलने वाले सेरेलक प्रिजर्वेटिव यानी केमिकल युक्त होती हैं और कोई भी मां नहीं चाहती कि वह अपने शिशु को ऐसी चीज खिलाए। ऐसे सेरेलक में सॉडियम लॉरियल सल्फेट (एसएलएस) मिक्स होता है, जिससे शिशु की त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं। साथ ही इसमें विभिन्न तरह के खनिज तेल भी मिले होते हैं, जिससे शिशु के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं। वो बात और है कि सेरेलक के डिब्बे पर ये सभी जानकारी नहीं होती हैं।
- 2. स्टोरेज : यह कहना मुश्किल है कि डिब्बे में बंद सेरेलक को किस प्रकार से बनाया जाता है। वह किस-किस प्रक्रिया से गुजरता है। साथ ही इसके बनने से लेकर पैक होने तक और फिर मार्केट में आने से लेकर आपकी रसोई में पहुंचने तक कितने हाथों से गुजरा होगा। इसलिए, बेहतर होगा कि आप इससे दूर ही रहें।
- 3. एलर्जी : इस तरह के सेरेलक में कुछ ऐसे केमिकल भी हो सकते हैं, जो आपके शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे आपके शिशु को एलर्जी हो सकती है। ऐसे में यह पता करना मुश्किल हो जाएगा कि इसमें मिक्स किस चीज से शिशु को नुकसान हो रहा है। इसलिए, डिब्बाबंद सेरेलक की जगह घर में बना सेरेलक देना ही बेहतर होगा।
आर्टिकल के इस भाग में हम घर में ही सेरेलक बनाने की कुछ रेसिपी बता रहे हैं।
गोबर से बिजली बनाने की विधि
गोबर से बिजली बनाने की विधि को अंग्रेजी भाषा में Biogas कहा जाता है। अगर आप भी रोजाना बढ़ रहे बिजली के बिल से परेशान आ चुके हैं तो अब आप घर बैठे बैठे ही फ्री बिजली का लाभ उठा सकते हैं। दरअसल, बायोगैस एक प्रकार की गैस है जो कई चीजों के मिश्रण से तैयार की जाती है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बायोगैस यानि गोबर से बिजली बनाने की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं। मगर इससे पहले हम आपको बताते चले कि Biogas/Gobar gas घर के कचरे, गाय के गोबर और गले सड़े पदार्थों के मिश्रण से तैयार की जाती है। इसके इलावा ये गैस आक्सीजन की मौजूदगी में बनाई जाती है। बायोगैस को पवन एवं सूर्या ऊर्जा की श्रेणी में गिना जाता है। क्योंकि बाकी अन्य ऊर्जा स्रोतों की तरह ये गैस भी नविकरणीय ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
विज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो ये गैस (Gobar gas) मीथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), Siloxanes, हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) आदि गैसों के मिश्रण से बनाई जाती है। इस गैस का इस्तेमाल ना केवल घर में बल्कि आप
अपने डेरी फार्म में भी कर सकते हैं. अगर आप भी कम पैसें में परमानेंट बिजली का स्रोत ढूँढ़ रहे हैं तो बायोगैस आपके लिए एक अच्छा उदाहरण है.
ये हैं गोबर गैस (Gobar Gas) के प्रमुख फ़ायदे
- • खाना पकाने के लिए: अक्सर हम लोग अपने घरों में खाना बनाने के लिए LPG गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते हैं. मगर लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण इस गैस की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है. मगर अगर आप इसकी जगह गोबर गैस (Gobar Gas) का उपयोग करें तो ये आपके पैसें की बचत में आपका साथ देगी. इसके इलावा आपको हम बता दें कि यदि आप बायोगैस (Gobar gas) का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक बर्नर अलग से खरीदना होगा.
- • घर की बिजली के लिए: बायोगैस का इस्तेमाल हम घर में साधारण बिजली की तरह कर सकते हैं इसके इलावा ये गैस mantle lamps में भी आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है.
- • वाहनों के लिए है उपयोगी: बायोगैस की सहायता से हम आसानी से ट्रक और डीजल कार जैसे वाहन चला सकते हैं. इसके इलावा ये गैस (Gobar gas) रिक्शा चलाने के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है.
गोबर से बिजली बनाने की विधि
गोबर से बिजली बनाने की विधि बेहद आसान है. इस गैस को आप चाहे तो मार्किट से खरीद सकते हैं और घर पर भी तैयार कर सकते हैं. गोबर गैस (Gobar Gas) से बिजली पैदा करने के उपकरण को बायोगैस प्लांट (Biogas Plant) कहा जाता है. तो चलिए जानते हैं आखिर बायोगैस प्लांट कैसे काम करता है और इसको बनाने के लिए हमें किन चीजों की जरूरत पड़ेगी.
बायोगैस प्लांट(Biogas Plant)का साइज
| Plant Size | Daily Feedstock | Daily Water |
|---|---|---|
| 4 m3 | 24 kg | 24 ltr |
| 6 m3 | 36 kg | 36 ltr |
| 8 m3 | 48 kg | 48 ltr |
| 10 m3 | 60 kg | 60 ltr |
| 15 m3 | 90 kg | 90 ltr |
| 20 m3 | 120 kg | 120 ltr |
अगर आप बायोगैस उचित मात्रा में प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए इसका आकार सही निर्माण विधि से बनाया जाना आवश्यक है. अधिकतर बायोगैस प्लांट 4 से लेकर 20 क्यूबिक मीटर की कैपेसिटी के होते हैं. हर प्लांट की कैपेसिटी के आधार पर ही उसकी उत्पादन क्षमता तय की जा सकती है. इसके इलावा इसका एक खास साइज होता है जिस को अंग्रेजी भाषा में फीड स्टॉक कैपेसिटी कहा जाता है.
बायोगैस प्लांट बनाने की कुल लागत
अगर आप बायोगैस प्लांट घर पर बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कम से कम 35 दिन लगेंगे। आप अपनी जरूरत के हिसाब से इसका साइज तय कर सकते हैं। छोटे साइज वाले बायोगैस प्लांट छोटे परिवार के लिए खाना बनाने और घर को रोशन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं जबकि बड़े आकार के बायोगैस प्लांट बड़े उद्योगों एवं कारखानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि 1m3 प्लांट का मूल्य ₹17000 है। यह एक से 5 kg की कैपेसिटी के साथ आता है और यह गैस (Gobar gas) हम 2 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट का मूल्य बढ़ता जाता है वैसे वैसे ही इस की कैपेसिटी और इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ती जाती है।
आखिर यह प्लांट कैसे काम करता है?
हर प्लांट के पांच मुख्य सेक्शन होते हैं इन्हीं 5 सेक्शन पर पूरा प्लांट निर्भर करता है।
- • इनलेट टैंक (Inlet Tank)
- • डाइजेस्टर वेसल (Digester Vessel)
- • डोम (Dome)
- • आउटलेट चैंबर (Outlet Chamber)
- • कम्पोस्ट पिट्स (Compost Pits)
गोबर से बिजली बनाने की विधि
सबसे पहले बायोगैस प्लांट में गोमूत्र, गोबर और पानी को इनलेट टैंक में मिलाया जाता है। यह मिश्रित तैयार होने के बाद फीड स्टॉक डाइजेस्टर वेसल में जाता है। इसी डाइजेस्टर में मीथेन गैस द्वारा उत्पन्न गुब्बंद में जमा कर लिया जाता है और फिर इसी गुब्बंद में लगे पाइप के माध्यम से गैस (Gobar gas) की निकासी करके उसको इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है। अब डाइजेस्टर में बचा हुआ घोल मैनहोल से आउटलेट चैंबर में जमा हो जाता है और अधिक बहाव के चलते कम्पोस्ट पिट्स में पहुंच जाता है। जिसको आप निकाल कर खेतों में खाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
प्लांट बनाने के लिए उपयोगी सामग्री
| Material | Unit | 4 m3 | 6 m3 | 8 m3 | 10 m3 | 15 m3 | 20 m3 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Bricks | Pieces | 1200 | 1400 | 1700 | 2000 | 2400 | 2800 |
| Sand | Bag | 60 | 70 | 80 | 90 | 110 | 120 |
| Gravel | Bag | 30 | 35 | 40 | 50 | 60 | 70 |
| Cement | Bag | 11 | 13 | 16 | 19 | 27 | 34 |
| Rod | Meter | 50 | 60 | 70 | 70 | 90 | 100 |
किसी भी प्लांट की कालिटी मजबूत करने के लिए उसकी सामग्री अहम भूमिका निभाती है। इसलिए बायोगैस (Gobar gas) के निर्माण के समय आप उसकी सामग्री की कालिटी का खास ध्यान रखें। इसके लिए आप उत्तम कालिटी से बनी ईंटें, सीमेंट, मिट्टी, सरिये आदि का इस्तेमाल करें।
बायोगैस प्लांट के फायदे
- 1. बायोगैस (Gobar gas) एक ऐसी ऊर्जा देता है जो कि किसी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं फैलाती। इसके इलावा यह ऊर्जा का renewable स्रोत है.
- 2. घर में इस्तेमाल की जाने वाली LPG गैस, कोयला और लकड़ी आदि बच्चों और महिलाओं के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं परंतु बायोगैस से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.
- 3. बायोगैस (Gobar gas) के इस्तेमाल से हमारा वातावरण स्वस्थ रहता है और हमें लंबा जीवन दान देता है.
रसोई के कचरे से खाद कैसे बनायें?
आज के दिन में रसोई के कचरे से खाद (compost) बनाना भी एक बहुत ही बेहतरीन तरीका है। इससे एक तो कचरा को इधर-उधर फैंक कर गंदगी नहीं फैलता है दूसरा तो इससे आपके पेड़ पौधों के लिए प्राकृतिक खाद मिलता है जो बिलकुल भी शरीर के लिए हानिकर नहीं होता हो।
भारत में प्रतिदिन शहरी क्षेत्रों में एक व्यक्ति 700-800 ग्राम ठोस कचरा फैंक देता है यानि की एक साल में लगभग 250-300 किलो। अगर आपके घर में 5 सदस्य रहते हैं तो सोचिये आपका परिवार एक वर्ष में लगभग 1500 किलो ठोस कचरा फैंक देते हैं। क्या आप जानते हैं आप घरपर ही उस कचरे से प्राकृतिक खाद बना सकते हैं।
खाद बनाना – समिश्रण – कम्पोस्टिंग क्या है? What is Composting?
कम्पोस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आर्गेनिक या कार्बनिक पदार्थ या खाद्य कूड़े को पानी, वायु की मदद से सूक्ष्मजीव खाद के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। यह खाद घर में या खेतों में उगाने वाले पौधों के लिए ही अच्छा होता है और क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ नहीं होता है यह हमारे मिटटी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।