स्वदेशी उत्पाद विधि (भाग 3)
Swadeshi Utpad Vidhi (Bhag 3)
रोबिन बसराना / राजीव दीक्षित द्वारा
स्रोत: Swadeshi Utpad Series Part 3 (Best Out of Waste) · Swadeshi Robin Basrana · 2017 (उद्गम)
जलेबी के लिए चाशनी बनाने की विधि: (Sugar Syrup Banane Ki Vidhi Hindi Me):
एक गहरे पतौले या पेन में चीनी, केसर की किस्में, इलायची पाउडर और पानी डालें और मध्यम आंच पर पकने के लिये रखें।
इसे तब तक पकाइये जब तक कि हल्की 1-तार की चाशनी हो जाये।
जलेबी कैसे बनाये (Jalebi Banane Ki Vidhi Hindi Me):
जलेबी को तलने के लिए एक चौड़े मुँह वाली कड़ाही में मध्यम आंच पर घी/तेल गर्म करें। इस विधि में तलने के लिए तेल + 2 टेबलस्पून घी का उपयोग किया है। तेल तलने के लिए तैयार है या नहीं उसकी जाँच करने के लिये घोल की एक बूँद गर्म तेल में डालें और अगर यह रंग बदले बिना ही तुरंत सतह पर आती है तो तेल तलने के लिए तैयार है। जब तेल तलने के लिए तैयार हो
तब बोतल (या जिपलॉक बैग) को दबाते हुए केंद्र से शुरू करके बाहर की ओर गोल गोल घूमा के जलेबी बनाये (या बाहर से शुरू करते हैं और केंद्र की ओर घुमाये)। अगर जलेबी का सही आकार नहीं आता है तो चिंता मत करें, इसे गोल आकार में बनाने के लिए कुछ अभ्यास की आवश्यकता होती है।
उन्हें 2-3 बार (या जरूरत अनुसार) चिमटे से पलटे ताकि वे समान रूप से सुनहरी हो।
उन्हें हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक तले।
उन्हें तेल में से निकालें और तुरंत ही गर्म चाशनी में डाल दें। सिरप (चाशनी) गर्म या थोड़ा गर्म होना चाहिये, यह ठंडा नहीं होना चाहिए। उन्हें लगभग दो मिनट के लिए सिरप में रखें। एक मिनट के बाद पलट दें।
सिरप में से जलेबी निकाले और एक प्लेट में रखें। जलेबी परोसने के लिए तैयार है।
सुझाव और विविधता:
- ✦ अगर घोल बहुत मोटा (गाढ़ा) होगा तो जलेबी नरम बनेगी और अगर घोल पतला होगा तो जलेबी का आकार अच्छा नहीं आयेगा।
- ✦ चाशनी को जमने से रोकने के लिए नींबू का रस डाला जाता है। इससे स्वाद में कोई फर्क नहीं पड़ता।
- ✦ अगर फरमेन्ट होने के बाद घोल पतला हो जाये तो घोल में थोड़ा मैदा डाल के मिला दें।
स्वाद: मीठा और करारा
परोसने के तरीके: जलेबी को चिवड़ा, करारी मेथी पुरी , नमक पारे, चकली , गाठिया आदि के साथ परोसा जाता है। इसे रात के खाने के बाद एक मिठाई के रूप रबड़ी के साथ भी परोसा जा सकता है।
घर में बच्चों के लिए सेरेलक बनाने का तरीका
यहां हम शिशु के लिए घर में ही सेरेलक बनाने की पांच रेसिपी बता रहे हैं। इन्हें बनाना बेहद आसान है, ये इस प्रकार हैं :
1. चावल का सेरेलक
सामग्री :
- • आधी कटोरी चावल
- • थोड़ा-सा पानी (आवश्यकतानुसार)
बनाने की विधि :
- • चावल को करीब एक घंटे तक पानी में भिगोकर रखें।
- • इसके बाद चावल को साफ कर धूप में या पंखे के नीचे रख के सुखा लें।
- • फिर इसे मध्यम आंच पर क्रिस्पी होने तक सेक लें।
- • इसके बाद चावल को ठंडा करके पीस लें।
2. दलिया का सेरेलक
सामग्री :
- • आधी कटोरी दलिया
बनाने की विधि :
- • दलिये को पानी से अच्छी तरह साफ कर लें।
- • इसके बाद इसे धूप में या पंखे के नीचे रख के सुखा लें।
- • फिर इसे मध्यम आंच पर क्रिस्पी होने तक सेक लें।
- • जब दलिया ठंडा हो जाए, तो इसे पीसकर पाउडर बना दें।
3. ओट्स का सेरेलक
A black ceramic bowl filled with creamy oatmeal, with a spoon lifting a portion of the oatmeal. The bowl is placed on a woven mat, and there is a 'Save' button in the bottom right corner.
सामग्री :
- • आधा कटोरी ओट्स
बनाने की विधि :
- • चावल व दलिया की तरह ओट्स को भी मध्यम आंच पर सेक लें।
- • फिर जब ओट्स ठंडे हो जाएं, तो उन्हें मिक्सी में पीस लें।
4. पोहे का सेरेलक
सामग्री :
- • आधा कटोरी पोहा
बनाने की विधि :
A white bowl filled with a creamy, white rice pudding (pohe). The surface is decorated with several bright yellow mango chunks and a small garnish consisting of a red cherry and a sprig of green mint leaves. The bowl is placed on a light-colored, textured surface.
- • पोहे को किसी कपड़े से साफ करके मध्यम आंच पर सेक लें।
- • इसके बाद पोहे को ठंडा करके पीसकर पाउडर बना लें।
5. मूंग दाल व चावल दलिया
A white bowl containing a thick, yellow-colored dal and rice pudding (dal khichdi). A silver spoon with an orange handle is resting inside the bowl. The background shows a portion of an orange cloth and a white surface with grey stripes. A small red logo with the text 'Sa' is visible in the bottom right corner.
सामग्री :
- • एक कप चावल
- • एक कप मूंग दाल
बनाने की विधि :
- • चावल और मूंग दाल को पानी से धो लें।
- • फिर जब ये सूख जाएं, तो इन्हें अलग-अलग मध्यम आंच पर हल्का फ्राई कर लें।
- • ठंडा होने पर इन्हें मिक्स करके मिक्सी में डालकर पीस लें और पाउडर बना लें।
नोट : इन सभी पाउडर को आप एयर टाइट जार में करीब छह हफ्ते तक रख सकते हैं। अब जब भी जरूरत हो एक या दो चम्मच पाउडर को कटोरी में डाल दें और उसमें थोड़ा-सा गर्म पानी मिक्स करके बच्चे को खिलाएं। अगर बच्चा इसे नहीं खाता है, तो आप पानी की जगह दूध भी मिक्स कर सकते हैं। साथ ही स्वाद व पौष्टिक तत्व बढ़ाने के लिए केले व किसी अन्य फल को कुचल कर मिक्स कर सकते हैं। इन पाउडर को कहीं भी ले जाना और बनाना आसान है। आप इसमें चीनी या शहद मिक्स न करें।
घर में सेरेलक बनाते समय बरतें सावधानियां
बेशक, घर में बना सेरेलक बच्चों के लिए पौष्टिक होता है, लेकिन इसे बनाते समय कुछ सावधानियां बरतना भी जरूरी है।
- • गीले बर्तन का उपयोग न करें। किसी भी सामग्री को भुनने से पहले ध्यान रखें कि बर्तन सूखा व साफ-सुथरा हो।
- • हर सामग्री को बड़े ही ध्यान से धोएं, ताकि सामग्री से धूल-मिट्टी साफ हो जाए।
- • सभी सामग्रियों को अच्छी तरह भूनें। साथ ही बनाते समय अच्छी तरह पकाएं, ताकि शिशु के लिए उसे पचाना आसान हो।
- • सभी सामग्रियों को भूनने के बाद ठंडा होने दें, उसे बाद ही मिक्सी में पीसकर पाउडर बनाएं।
घर में बने सेरेलक को कैसे स्टोर करें?
- • सेरेलक का पाउडर बनाने के बाद एयर टाइड डिब्बे में स्टोर करके रखें।
- • इस पाउडर को एक महीने के लिए कमरे के तापमान में रखा जा सकता है। वहीं, रेफ्रिजरेटर में तीन से छह माह के लिए रखा जा सकता है।
जब बाजार से प्री-पैकेज्ड सेरेलक मिलता है, तो घर में सेरेलक क्यों बनाएं?
बेशक, बाजार में मिलने वाले डिब्बाबंद सेरेलक को बनाना आसान है, लेकिन वो शिशु के लिए पौष्टिक है, इस पर शक है। यहां कुछ ऐसे ही कारण बता रहे हैं, जो साबित करते हैं कि घर का सेरेलक बाजार में मिलने वाले सेरेलक से बेहतर है।
- 1. केमिकल युक्त : बाजार में मिलने वाले सेरेलक प्रिजर्वेटिव यानी केमिकल युक्त होती हैं और कोई भी मां नहीं चाहती कि वह अपने शिशु को ऐसी चीज खिलाए। ऐसे सेरेलक में सॉडियम लॉरियल सल्फेट (एसएलएस) मिक्स होता है, जिससे शिशु की त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं। साथ ही इसमें विभिन्न तरह के खनिज तेल भी मिले होते हैं, जिससे शिशु के रोमछिद्र बंद हो सकते हैं। वो बात और है कि सेरेलक के डिब्बे पर ये सभी जानकारी नहीं होती हैं।
- 2. स्टोरेज : यह कहना मुश्किल है कि डिब्बे में बंद सेरेलक को किस प्रकार से बनाया जाता है। वह किस-किस प्रक्रिया से गुजरता है। साथ ही इसके बनने से लेकर पैक होने तक और फिर मार्केट में आने से लेकर आपकी रसोई में पहुंचने तक कितने हाथों से गुजरा होगा। इसलिए, बेहतर होगा कि आप इससे दूर ही रहें।
- 3. एलर्जी : इस तरह के सेरेलक में कुछ ऐसे केमिकल भी हो सकते हैं, जो आपके शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे आपके शिशु को एलर्जी हो सकती है। ऐसे में यह पता करना मुश्किल हो जाएगा कि इसमें मिक्स किस चीज से शिशु को नुकसान हो रहा है। इसलिए, डिब्बाबंद सेरेलक की जगह घर में बना सेरेलक देना ही बेहतर होगा।
आर्टिकल के इस भाग में हम घर में ही सेरेलक बनाने की कुछ रेसिपी बता रहे हैं।
गोबर से बिजली बनाने की विधि
गोबर से बिजली बनाने की विधि को अंग्रेजी भाषा में Biogas कहा जाता है। अगर आप भी रोजाना बढ़ रहे बिजली के बिल से परेशान आ चुके हैं तो अब आप घर बैठे बैठे ही फ्री बिजली का लाभ उठा सकते हैं। दरअसल, बायोगैस एक प्रकार की गैस है जो कई चीजों के मिश्रण से तैयार की जाती है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको बायोगैस यानि गोबर से बिजली बनाने की विधि के बारे में बताने जा रहे हैं। मगर इससे पहले हम आपको बताते चले कि Biogas/Gobar gas घर के कचरे, गाय के गोबर और गले सड़े पदार्थों के मिश्रण से तैयार की जाती है। इसके इलावा ये गैस आक्सीजन की मौजूदगी में बनाई जाती है। बायोगैस को पवन एवं सूर्या ऊर्जा की श्रेणी में गिना जाता है। क्योंकि बाकी अन्य ऊर्जा स्रोतों की तरह ये गैस भी नविकरणीय ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है।
विज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो ये गैस (Gobar gas) मीथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), Siloxanes, हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S) आदि गैसों के मिश्रण से बनाई जाती है। इस गैस का इस्तेमाल ना केवल घर में बल्कि आप
अपने डेरी फार्म में भी कर सकते हैं. अगर आप भी कम पैसें में परमानेंट बिजली का स्रोत ढूँढ़ रहे हैं तो बायोगैस आपके लिए एक अच्छा उदाहरण है.
ये हैं गोबर गैस (Gobar Gas) के प्रमुख फ़ायदे
- • खाना पकाने के लिए: अक्सर हम लोग अपने घरों में खाना बनाने के लिए LPG गैस सिलिंडर का इस्तेमाल करते हैं. मगर लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण इस गैस की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है. मगर अगर आप इसकी जगह गोबर गैस (Gobar Gas) का उपयोग करें तो ये आपके पैसें की बचत में आपका साथ देगी. इसके इलावा आपको हम बता दें कि यदि आप बायोगैस (Gobar gas) का इस्तेमाल खाना पकाने के लिए करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक बर्नर अलग से खरीदना होगा.
- • घर की बिजली के लिए: बायोगैस का इस्तेमाल हम घर में साधारण बिजली की तरह कर सकते हैं इसके इलावा ये गैस mantle lamps में भी आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है.
- • वाहनों के लिए है उपयोगी: बायोगैस की सहायता से हम आसानी से ट्रक और डीजल कार जैसे वाहन चला सकते हैं. इसके इलावा ये गैस (Gobar gas) रिक्शा चलाने के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकती है.
गोबर से बिजली बनाने की विधि
गोबर से बिजली बनाने की विधि बेहद आसान है. इस गैस को आप चाहे तो मार्किट से खरीद सकते हैं और घर पर भी तैयार कर सकते हैं. गोबर गैस (Gobar Gas) से बिजली पैदा करने के उपकरण को बायोगैस प्लांट (Biogas Plant) कहा जाता है. तो चलिए जानते हैं आखिर बायोगैस प्लांट कैसे काम करता है और इसको बनाने के लिए हमें किन चीजों की जरूरत पड़ेगी.
बायोगैस प्लांट(Biogas Plant)का साइज
| Plant Size | Daily Feedstock | Daily Water |
|---|---|---|
| 4 m3 | 24 kg | 24 ltr |
| 6 m3 | 36 kg | 36 ltr |
| 8 m3 | 48 kg | 48 ltr |
| 10 m3 | 60 kg | 60 ltr |
| 15 m3 | 90 kg | 90 ltr |
| 20 m3 | 120 kg | 120 ltr |
अगर आप बायोगैस उचित मात्रा में प्राप्त करना चाहते हैं तो इसके लिए इसका आकार सही निर्माण विधि से बनाया जाना आवश्यक है. अधिकतर बायोगैस प्लांट 4 से लेकर 20 क्यूबिक मीटर की कैपेसिटी के होते हैं. हर प्लांट की कैपेसिटी के आधार पर ही उसकी उत्पादन क्षमता तय की जा सकती है. इसके इलावा इसका एक खास साइज होता है जिस को अंग्रेजी भाषा में फीड स्टॉक कैपेसिटी कहा जाता है.
बायोगैस प्लांट बनाने की कुल लागत
अगर आप बायोगैस प्लांट घर पर बनाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कम से कम 35 दिन लगेंगे। आप अपनी जरूरत के हिसाब से इसका साइज तय कर सकते हैं। छोटे साइज वाले बायोगैस प्लांट छोटे परिवार के लिए खाना बनाने और घर को रोशन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं जबकि बड़े आकार के बायोगैस प्लांट बड़े उद्योगों एवं कारखानों में इस्तेमाल किए जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि 1m3 प्लांट का मूल्य ₹17000 है। यह एक से 5 kg की कैपेसिटी के साथ आता है और यह गैस (Gobar gas) हम 2 घंटे तक इस्तेमाल कर सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट का मूल्य बढ़ता जाता है वैसे वैसे ही इस की कैपेसिटी और इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ती जाती है।
आखिर यह प्लांट कैसे काम करता है?
हर प्लांट के पांच मुख्य सेक्शन होते हैं इन्हीं 5 सेक्शन पर पूरा प्लांट निर्भर करता है।
- • इनलेट टैंक (Inlet Tank)
- • डाइजेस्टर वेसल (Digester Vessel)
- • डोम (Dome)
- • आउटलेट चैंबर (Outlet Chamber)
- • कम्पोस्ट पिट्स (Compost Pits)
गोबर से बिजली बनाने की विधि
सबसे पहले बायोगैस प्लांट में गोमूत्र, गोबर और पानी को इनलेट टैंक में मिलाया जाता है। यह मिश्रित तैयार होने के बाद फीड स्टॉक डाइजेस्टर वेसल में जाता है। इसी डाइजेस्टर में मीथेन गैस द्वारा उत्पन्न गुब्बंद में जमा कर लिया जाता है और फिर इसी गुब्बंद में लगे पाइप के माध्यम से गैस (Gobar gas) की निकासी करके उसको इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है। अब डाइजेस्टर में बचा हुआ घोल मैनहोल से आउटलेट चैंबर में जमा हो जाता है और अधिक बहाव के चलते कम्पोस्ट पिट्स में पहुंच जाता है। जिसको आप निकाल कर खेतों में खाद के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
प्लांट बनाने के लिए उपयोगी सामग्री
| Material | Unit | 4 m3 | 6 m3 | 8 m3 | 10 m3 | 15 m3 | 20 m3 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Bricks | Pieces | 1200 | 1400 | 1700 | 2000 | 2400 | 2800 |
| Sand | Bag | 60 | 70 | 80 | 90 | 110 | 120 |
| Gravel | Bag | 30 | 35 | 40 | 50 | 60 | 70 |
| Cement | Bag | 11 | 13 | 16 | 19 | 27 | 34 |
| Rod | Meter | 50 | 60 | 70 | 70 | 90 | 100 |
किसी भी प्लांट की कालिटी मजबूत करने के लिए उसकी सामग्री अहम भूमिका निभाती है। इसलिए बायोगैस (Gobar gas) के निर्माण के समय आप उसकी सामग्री की कालिटी का खास ध्यान रखें। इसके लिए आप उत्तम कालिटी से बनी ईंटें, सीमेंट, मिट्टी, सरिये आदि का इस्तेमाल करें।
बायोगैस प्लांट के फायदे
- 1. बायोगैस (Gobar gas) एक ऐसी ऊर्जा देता है जो कि किसी प्रकार का कोई प्रदूषण नहीं फैलाती। इसके इलावा यह ऊर्जा का renewable स्रोत है.
- 2. घर में इस्तेमाल की जाने वाली LPG गैस, कोयला और लकड़ी आदि बच्चों और महिलाओं के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती हैं परंतु बायोगैस से किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.
- 3. बायोगैस (Gobar gas) के इस्तेमाल से हमारा वातावरण स्वस्थ रहता है और हमें लंबा जीवन दान देता है.
रसोई के कचरे से खाद कैसे बनायें?
आज के दिन में रसोई के कचरे से खाद (compost) बनाना भी एक बहुत ही बेहतरीन तरीका है। इससे एक तो कचरा को इधर-उधर फैंक कर गंदगी नहीं फैलता है दूसरा तो इससे आपके पेड़ पौधों के लिए प्राकृतिक खाद मिलता है जो बिलकुल भी शरीर के लिए हानिकर नहीं होता हो।
भारत में प्रतिदिन शहरी क्षेत्रों में एक व्यक्ति 700-800 ग्राम ठोस कचरा फैंक देता है यानि की एक साल में लगभग 250-300 किलो। अगर आपके घर में 5 सदस्य रहते हैं तो सोचिये आपका परिवार एक वर्ष में लगभग 1500 किलो ठोस कचरा फैंक देते हैं। क्या आप जानते हैं आप घरपर ही उस कचरे से प्राकृतिक खाद बना सकते हैं।
खाद बनाना – समिश्रण – कम्पोस्टिंग क्या है? What is Composting?
कम्पोस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आर्गेनिक या कार्बनिक पदार्थ या खाद्य कूड़े को पानी, वायु की मदद से सूक्ष्मजीव खाद के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। यह खाद घर में या खेतों में उगाने वाले पौधों के लिए ही अच्छा होता है और क्योंकि इसमें किसी भी प्रकार का रासायनिक पदार्थ नहीं होता है यह हमारे मिटटी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है।
सूक्ष्मजीव कम्पोस्टिंग के लिए 4 चीजों का होना बहुत आवश्यक होता है
- 1. सुखी पत्तियाँ, धूल-मिटटी, कागज़ की मदद से – कार्बोन
- 2. बचे खुचे फल और सब्जियों के कचरा से – नाइट्रोजन
- 3. हमारे वायुमंडल से – ऑक्सीजन
- 4. पानी की सही मात्रा जिससे की ऊपर के तीन चीजों को मिलाकर बना कचरा सड़ सके।
8 आसान स्टेप्स जिनकी मदद से आप अपने रसोई के कचरे से कम्पोस्ट बना सकते हैं Best 8 Steps to Make Compost at Home from Kitchen Waste
- 1. अपने रसोई घर के गीले कचरे जैसे बची खुची सब्जियाँ, खाना का बचा हुआ कचरे को अलग कूड़ेदान में रखें।
गीली हरी चीजें – इनमें नाइट्रोजन की भरी मात्रा होती है
- • बचा खुचा खाना
- • सब्जियों और फलों का बचा हुआ कचरा
- • चाये बचा हुआ
- • फूल
- • छोटे घांस के टुकड़े
- • अंडे का छिलका
- 2. सूखे पत्ते, और ठोस छोटे-मोटे कचरे को एक छोटे से एनी कूड़ेदान में रखें।
सुखी भूरी चीजें – इनमें कार्बन की अधिक मात्र होती है
- • सुखी पत्तियाँ
- • लकड़ी का पाउडर
- • हल्का धूल मिटटी
- • भूसा या धन का छिलका
3. एक बड़ा सा मिटटी का मटका या एक बाल्टी(Compost Bin) ले लीजिये। आप चाहें तो घर के पीछे एक छोटा गड्ढा भी खोद सकते हैं जिसे Compost Pit कहा जाता है। उसके बाद कम्पोस्ट बिन के चरों भाग में 4-5 छेद कर दें जिससे की उसमें रखने वाले कूड़े में हवा लग सके।
5. उस पात्र(Compost Bin) के नीचले भाग में थोड़ा सा मिटटी बिछा दें। उसके बाद गीले कचरे और सूखे कचरे को एक के ऊपर एक थोड़े-थोड़े परतों में उस पात्र में डालते जाऐं।
6. जब वह पात्र दोनों प्रकार सूखे और गीले कचरे के परतों से भर जाये तो उसे एक प्लास्टिक या लकड़ी के फट्टे से ढक दें। ढकने से पात्र के अंदर नमी या गीलापन बना रहता है।
7. कुछ-कुछ दिनों में देखते रहें। अगर पात्र के अन्दर मिश्रण ज्यादा सुखा हुआ है हांथों से हल्का-हल्का पानी का छिड़काव करें और दोबारा प्लास्टिक को ढक दें।
8. 2-3 महीने के बाद सुखा खाद बन्ना अपने आप शुरू हो जायेगा। जो दिखने में गाढ़ा भूरा और काला सा होता है और मिटटी की खुशबु उसमें होती है।
कम्पोस्ट बनाने के लिए कूड़ेदान में क्या ना डालें? What not to Add in Compost Mixture?
- 1. बदबूदार एक-दो दिन पुराना खाना का कचरा
- 2. मांस और हड्डियां
- 3. जानवरों का मल
- 4. रसायन पदार्थ
- 5. बैटरी
- 6. बीमार लगे पौधे
- 7. दवाईयां
- 8. प्लास्टिक बैग या पॉलिथीन
गुलाब जामुन बनाने की विधि
सामग्री:
1/2 कप मैदा 1 कप कढ़कस किया हुआ खोया (मावा) 1/8 टीस्पून बेकिंग सोडा घी या तेल, तलने के लिए 3-4 हरी इलायची या 1/4 टीस्पून हरी इलायची का पाउडर 8-10 केसर की किस्में 1 1/2 कप चीनी 2 1/2 कप पानी
विधि (Khoya Me Se Gulab Jamun Banane Ki Vidhi Hindi Me): इस स्वादिष्ट मिठाई बनाने के लिए 3 मुख्य चीज बनानी होंगी – खोया, चाशनी और जामुन। निचे दी गई रेसिपी में हर एक को घर पर आसानी से कैसे बनाना है ये बताया गया है।
खोया (मावा) बनाने के लिए
घर पर खोया बनाने के लिए नीचे दिए गए स्टेप का पालन करें या इस लिंक “खोया बनाने की रेसिपी स्टेप बाय स्टेप फोटो के साथ” का पालन करें।
एक नॉन स्टिक पैन या भारी तले वाले पैन में 1 लीटर दूध (फूल क्रीम भैंस का दूध) को कम आँच पर तब तक उबाले जब तक कि यह गाढ़े मिश्रण में बदल जाये और पानी का भाग न रहे, इसमें लगभग 1 1/2 घंटे का समय लगेगा। जलने से रोकने के लिए इसे अक्सर बीच बीच में चम्मच से चलाते रहे। 1 लीटर फूल फेद दूध में से लगभग 1 कप खोया तैयार होगा।
नॉथ: यदि आप घर पर खोया बनाना नहीं चाहते हैं, तो आप किसी भी भारतीय ग्रीसरी स्टोर/किराने की दुकान (अगर आप भारत के बाहर रहते हैं) से या डेयरी की दुकान से (यदि आप भारत में रहते हैं) खरीद सकते हैं।
कैसर के स्वाद वाली चाशनी (चीनी का सिरप) तैयार करने के लिए
- 1. एक गहरे बर्तन में 1 1/2 कप चीनी, 3-4 हरी इलायची (या 1/4 टीस्पून इलायची का पाउडर) और 8-10 कैसर की किस्में डालें।
- 2. इसमें 2 1/2 कप पानी डालें और तेज आंच पर उबालने रखें। जब यह उबलने लगे तब आंच को मध्यम कर दें और तब तक उबालें जब तक की चाशनी थोड़ी चिपचिपी लगने लगे, बीच में कभी-कभी कलछी से हिलाते रहें। इसमें करीब 10-12 मिनट का समय लगेगा। गैस बंद कर दें और इसे एक तरफ रख दें। जब जामुन तलने के बाद तैयार हो जायें तब 4-5 मिनट के लिए चाशनी को फिर से गरम कर लें।
जामुन बनाने के लिए
- 1. ऊपर दी गई विधि का पालन करके 1 कप खोया बनाइये या रेडीमेड खोया का उपयोग करें। खोया को कट्टकस कर लें। 1/8 टीस्पून बेकिंग सोडा और 1/2 कप मैदा छानकर डालें।
- 2. एक चम्मच से उन्हें अच्छे से मिलाएं।
- 3. आप देख सकते हैं की खोये में नमी की वजह से आटा आसानी से खोया के साथ मिल रहा है।
- 4. उन सभी को एक साथ मिलाकर नरम आटा गूंध लें। अगर जरूरत लगी तो कुछ टीस्पून दूध डाल सकते हैं (दूध थोड़ा थोड़ा ही डालिये, एक समय में एक टीस्पून दूध डालें)।
- 5. आटे को 16 बराबर भागों में बाँट लें। अपनी हथेलियां तेल या घी लगाकर चिकनी कर लें और आटे में से गोले बना लें। ध्यान रहे की गोले में दरारें नहीं होनी चाहिए वरना यह तलने के समय पर खुलने लगेगा। अगर दरारें हैं तो आटे को नरम बनाने की जरूरत है, आटे में थोड़ा दूध मिलाकर उसे नरम बनाइये आर बाद में उसमें से गोले बनाइये। बहुत ज्यादा बड़े गोले मत बनाइये क्योंकि यह चाशनी में डुबोने के बाद फूलकर और भी बड़े हो जायेंगे।
- 6. एक कड़ाही में मध्यम आंच पर घी या तेल (या आधा घी और आधा तेल) गरम करने रखें। जब घी मध्यम गरम हो जायें तब उसमें मिश्रण में से एक छोटा सा भाग तोड़कर घी में डालें और देखें कि अगर वह रंग बदलें बिना ही तुरंत ऊपर आ जाता है तो घी तलने के लिए तैयार है। अगर वह तुरंत ही भूरा हो जाता है तो घी ज्यादा गरम है। मध्यम गरम घी में धीरे से 4-6 गोले (या कड़ाही की साइज के अनुसार) डालें और धीमी-मध्यम आंच पर तलें। आप देख सकते हैं कि 1-मिनट में वे फूलने लगे हैं और हल्के सुनहरे रंग के होने लगे हैं।
- 7. 3-4 मिनट के बाद, गोले हल्के सुनहरे भूरे रंग के होने लगेगा।
- 8. उन्हें सुनहरे भूरे रंग के होने तक तल लें, इसमें लगभग 6-7 मिनट का समय लगेगा। नरम जामुन बनाने के लिए उन्हें एक समान तापमान पे तलना जरूरी है और इसके लिए आवश्यकता अनुसार आप आंच को कम या तेज कर सकते हैं।
- 9. उन्हें एक प्लेट में पेपर नैपकिन के ऊपर निकाल दें और 5 मिनट के लिए ठंडे होने दें। आप देख सकते हैं कि तलने के बाद गोले बड़े हो गए हैं। उन्हें सीधे गर्म चाशनी में मत डालें।
- 10. तले हुए गोलों को हल्की गर्म (ज्यादा गर्म नहीं) चाशनी में डालें। अगर आप उन्हें ज्यादा गर्म चाशनी में डालेंगे तो वे सिकुड़ (आकार में छोटा) जायेंगे।
- 11. परोसने से पहले कम से कम 1-2 घंटे के लिए उन्हें चाशनी में डुबोकर रखें। आप फोटो में देख सकते हैं कि जामुन का आकार लगभग दोगुना हो गया है। गुलाब जामुन परोसने लिए तैयार हैं। उन्हें गर्म या ठंडा परोसें।
सुझाव और विविधता:
- • अगर आप उच्च आंच पर जामुन को तलेंगे तो वे बाहर से तुरंत ही भूरे हो जायेंगे लेकिन अंदर से कच्चे रहेंगे, उन्हें धीमी-मध्यम आंच पर तलें।
- • आटे में से बहुत बड़े जामुन मत बनायें क्योंकि वह तलने और चाशनी में भिगोने के बाद लगभग दोगुने हो जायेंगे।
- • तले हुए जामुन को सीधे गर्म चाशनी में मत डालें और ध्यान रहे कि चाशनी भी ज्यादा गर्म न हो अन्यथा वे सिकुड़ (आकार में छोटा) जायेंगे।
- • चाशनी में गुलाब का स्वाद पाने के लिए आप कैसर के बदले थोड़ा गुलाब जल और गुलाब की पंखुड़िया डाल सकते हैं।
- • आकर्षक बनाने के लिए उसे पिस्ता पाउडर या कट्टकस किये हुए नारियल के साथ सजायें।
स्वाद: मीठा और नरम
परोसने के तरीके:
उन्हें आप वनीला आइसक्रीम के साथ डेज़र्ट के रूप में या खाने के साथ मिठाई के रूप में परोस सकते हैं। इसे दिवाली और दशहरा जैसे भारतीय त्योहारों में भी मिठाई के रूप में परोस सकते हैं।
मूँगफली और गुड़ की चिककी
A close-up photograph of a rectangular piece of Indian sweet, known as chicki, served on a white plate with a decorative floral pattern. The chicki is made from moong dal (split yellow peas) and ghee, resulting in a golden-brown, textured appearance with visible seeds and a slightly glossy surface. The plate is set against a light-colored wooden background.
सामग्री:
1 कप मूंगफली के दाने 3/4 कप गुड़, कसा हुआ या बारीक कटा हुआ 1 टेबलस्पून घी
गुड़ का उपयोग करके चिककी बनाने की विधि (Peanut Chikki Banane Ki Vidhi Hindi Me):
- 1. मूंगफली को एक भारी तले वाली कड़ाही में मध्यम आंच पर 5-6 मिनट के लिए भुनें। जलने से रोकने के लिए और अच्छे से भुनने के लिए लगातार चमचे से हिलाते रहें।
- 2. भुने हुए मूंगफली के दाने को 3-4 मिनट के लिए ठंडा होने दें। जब वे थोड़े गर्म हों तभी उन्हें रगड़ के छिलके हटा दें और हिस्सों में तोड़ें।
- 3. एक बड़ी थाली की पीछे की सतह और बेलन को तेल/घी लगाकर चिकना कर लें। आप चिककी को बेलने के लिए थाली के बदले किचन के काउंटर टॉप पे भी तेल लगा सकते हैं।
- 4. एक भारी तले वाली कड़ाही में मध्यम आंच पर घी गरम करें। उसमें गुड़ डालें और लगातार चमचे से हिलाते रहें।
- 5. जब गुड़ घुल जाये, उसके बाद उसे धीमी आंच पर लगातार चमचे से हिलाते हुए 4-5 मिनट के लिए पकाइये।
- 6. गुड़ पक गया है या नहीं उसकी जांच करने के लिए एक छोटी पानी से भरी कटोरी में गुड़ की छोटी सी बूंद डालें। अगर गुड़ पानी में तुरंत ही पिघलता नहीं है तो वे पक गया है अन्यथा कुछ और समय के लिए इसे पकाइये।
- 7. गैस बंद करें और मूंगफली डालें। जब तक सभी मूंगफली गुड़ से अच्छे से लपेट जाती है तब तक पकाइये।
- 8. पहले से चिकनी की हुई सतह पर मिश्रण डालें।
- 9. जल्दी से बेलन का उपयोग करके मिश्रण को फैला दें और लगभग 1/3-इंच मोटाई रखें।
- 10. तुरंत ही चाकू से लगभग 2 इंच के चौकोर टुकड़ों में काट लें।
- 11. जब ठंडा हो जाये तब उसे टुकड़ों में तोड़ें और कंटेनर में भर दें। मूंगफली और गुड़ की चिककी तैयार है।
चीनी का उपयोग करके चिककी बनाने के लिए नीचे दिए गए स्टेप का पालन करें।
- 1. स्टेप-1 से स्टेप -3 का पालन करें।
- 2. स्टेप-4 में गुड़ के बदले 1 कप चीनी डालें।
- 3. जब चीनी घुलना शुरू हो जाती है और हल्के भूरे रंग की होने लगती है तब गैस बंद कर दें और उसमें भूनी हुई मूंगफली डालें।
- 4. स्टेप-7 से स्टेप-11 का पालन करें।
सुझाव और विविधता:
- • मूंगफली चिककी का रंग गुड़ के रंग पर निर्भर करता है। अगर आप सुनहरे भूरे रंग के गुड़ का उपयोग करेंगे तो यह गहरे भूरे रंग की होगी। यदि आप हल्के भूरे रंग की चिककी बनाना चाहते हैं तो हल्के पीले रंग के गुड़ का उपयोग करें।
- • अगर बहुत ज्यादा समय तक गुड़/चीनी को पकायेंगे तो चिककी सख्त बनेगी।
- • जब मिश्रण गर्म हो तभी चिकनी की हुई थाली पे फैला दें क्योंकि मिश्रण ठंडा होने के बाद आसानी से फैलाना मुश्किल हो जायेगा।
- • आप मूंगफली के बदले तिल या भूनी हुई चना दाल (दालिया दाल) या सूखे मेवे का उपयोग करके भी चिककी बना सकते हैं।
स्वाद: मीठा
परोसने के तरीके: मूंगफली की चिककी बच्चों और वयस्कों सभी के लिए एक बढ़िया मिठाई है क्योंकि यह प्रोटीन और आयर्न से भरपूर होती है।