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कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

Kabir Sagar (11 Parts Complete)

by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Devanagarihipublished2,136 pages

कबीरसाहबका चौका करके धर्मदासजीको परवाना देना आरती विधि

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अनुरागसागर

( ११३ )

छन्द

चतुर्भुज बंकेज सहतेज, और चौथे तुम अहौ ॥ चार गुरुकडिहार जगके वचन यह निश्चय गहौ ॥ यही चार अंश संसारमें, जीव काज प्रगटाइया ॥ स्वसंवेदसोइनसंग दियो, जेहि सुनि काल भगाइया ॥७४॥

सोरठा-चरोंमें धर्मदास, जम्बुदीपके गुरु साहि ॥ व्यालिस वंश विलास तैं जीव तेहि शरणगहि ॥७८॥

आरतीविधिवर्णन

कबीर साहबका चौका करके धर्मदासको परवाना देना धर्मदास वचन

धर्मदास पद गहि अनुरागा । हो प्रभु मोहि कीन्ह सुभागा ॥ हे प्रभु ! नहि रसना प्रभुताई । अमित रसन गुण वरनिन जाई ॥ महिमा अमित अहै तुम स्वामी । केहि विधि बरनों अंतरयामी ॥ मैं सब विधि अयोग्य अविचारी । मुझ अधमहिं तुम लीन उबारी ॥ अब चौका भेद कहो मुहि स्वामी । काहि कहहु तिनका सुखभामी ॥ जो तुम कहो करौ मैं सोई । तामहैं फेर न परि हैं कोई ॥

कबीर वचन चौकाका साज

धर्मदास सुनु आरति साजा । जाते भागि चले यमराजा ॥ सात हाथको बस्तर लाओ । श्वेत चँदोबा छत्र तनाओ ॥ घर आंगन सब शुद्ध कराओ । चौका करि चन्दन छिड़काओ ॥ तापर आँटा चौक पुराओ । सवासेर तंदुल ले आओ ॥ स्वेत सिंहासन तहाँ बिछाई । नाना सुगंध धरु तहाँ लगाई ॥ स्वेत मिठाई स्वेतै पाना । पुंगीफल स्वेतहि परमाना ॥ लौंग इलायची कपुर सँवारो । मेवा अष्ट केरा पनवारो ॥

कबीरसाहबका धर्मदासको उपदेश देना

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नारायणदासजीका कबीरसाहबकी अवज्ञा करना

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द्वादश पन्थका वर्णन

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अनमङ्ग वृत्तका पन्थ ४

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अखिलभङ्ग दूतका पंथ ८

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धर्मदास साहबको आत्म अंशका दर्शन होना

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चूड़ामणिकी उत्पत्तिकी कथा

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ब्यालीस वंशके राज्यकी स्थापना

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चूड़ामणिको कबीरसाहबका उपदेश देना

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वंश का माहात्म्य

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भविष्य कथा प्रारम्भ

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निरंजनका अपने चार अंशको पंथ चलानेकी आज्ञा देना

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चार दूतों का नाम वर्णन

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