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बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

प्रश्नाध्यायः। ७५९ प्रश्न लग्न का कलापिंड बनाकर उसके वर्ग से गुणाकर दो स्थान में रखकर।।६०।। आरूढ़छत्रयोवीर्यवलस्य वर्गणाहतम् । ओजे योगः समे हानिरिति तस्य विधीयते ।।६१।। आरूढ़ और छत्र में जो बली हो उसके वर्ग से गुणाकर विषम लग्न हो तो योग अन्यथा पृथक्स्थ में घटाकर।।६१।। स्वैः स्वैर्भागैश्च भक्तं तत्तथा मासादयःस्मृताः । यद्वा कलीकृतं लग्नं तथा कुर्याद्विचक्षणः ।।६२।। शेष में अपने २ विभाग से (मास ज्ञान के लिये १२ दिन के लिये ३० आदि से) भाग देने से मासादि का ज्ञान होता है। अथवा लग्न का कला बनाकर पूर्वरिति से सभी क्रियाओं को करके।।६२।। भावकस्य च शुद्धिं च योगं चैव करोत्यतः । नवभिश्च कलांशाद्यैस्तथैवोच्चादिभिःक्रमात् ।।६३।। भाव शुद्धि आदि क्रियाओं को करके नवकलांश और उच्च त्रिकोणादि भेद से।।६३।। एकाशीतिभिदाः संति नवकाद्यंक शोधनैः । येषां योगगते काले समांतेषु सतां यतः ।।६४।। ८१ प्रकार को करके उनमें नव शोधनादि करते हुये जहां अवसान हो वहीं मासादि जानना।।६४।। लग्न बल विचारः- राशिस्तु बलवान्स्वामिगुरुज्ञप्रेक्षणान्वितः । अन्यैः पापैरादृष्टः स्याच्छुभदृष्ट्या प्रयोजयेत् ।।६५।। जो राशि अपने स्वामी वा गुरु, बुध से दृष्ट हो, अपने पापग्रह स्वामी को छोड़कर अन्य पापग्रहों से अदृष्ट हो वह बली होती हैं।।६५।। दृष्टिविचारः। चन्द्रर्काचार्यशुक्रज्ञाः पादं मित्रभकर्मणि । पश्यन्ति *च शनिः पूणमथ धर्मसुतौ गुरुः ।।६६।। चन्द्रमा, सूर्य, गुरु, शुक्र, बुध और भौम तीसरे और दशम को पाद दृष्टि से देखते हैं। शनि ३।१० को पूर्ण दृष्टि से देखता है, ९।५ को सभी ग्रह दो

७६० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । चरण से किन्तु गुरु पूर्ण दृष्टि से देखता है।।६६।। सर्वेऽर्धबंधुमृत्यु च पूर्णं पश्यति भूमिजः । परे त्रिपादं पूर्णं च सर्वे पश्यंति सप्तमम् ।।६७।। ४।८ स्थान को भौम को छोड़कर सभी ग्रह तीन चरण से देखते हैं किन्तु भौम पूर्णदृष्टि से देखता है और सप्तम को सभी पूर्णदृष्टि से देखते हैं।।६७।। अथ ग्रहाणां स्थानदिग्बलम् - उच्चमूलसुहृत्स्वर्क्षस्वद्रेष्काणनवांशके । स्थितस्य स्थानवीर्यं स्यात्कुजार्कौंदशमेशानिः ।।६८।। प्रश्न में जो ग्रह अपने उच्च, मूलत्रिकोण, मित्र, अपनी राशि, अपने द्रेष्काण, अपने नवांश में हो तो वह स्थानवली होता हैं। भौम, सूर्य दशम स्थान में।।६८।। सप्तमेऽज्ञगुरुर्लग्ने चन्द्रशुक्रौ तु वेश्मनि । दिग्वीर्य संयुता एते नान्यत्र प्रश्न कर्मणि ।।६९।। सातवें स्थान में शनि, बुध, गुरु लग्न में, चन्द्र, शुक्र चौथे भाव में दिग्बली होते हैं।।६८-६९।। अयनबलम् - मृगादिराशिष्ट्कस्थाश्चंद्रार्कज्ञार्यभार्गवाः । बलवंतः कुजार्कीतु कर्कटादिगतौ तथा ।।७०।। मकर से ६ राशि तक चंद्र, सूर्य, बुध, गुरु और शुक्र अयन बल को प्राप्त करते हैं। कर्क से ६ राशि के अन्दर भौम शनि अयन बल से युक्त होते हैं।।७०।। अथ पक्ष चेष्टा दिवा-रात्रि बलम् - पूर्वपक्षे शुभे कृष्णे पापास्तुवलिनस्तथा । वक्रिणो बलिनः खेटाश्चेष्टावलसमन्वितः ।।७१।। शुक्ल पक्ष में शुभग्रह और कृष्णपक्ष में पापग्रह बली होते हैं। वक्रीग्रह चेष्टावली होते हैं।।७१।। शुभाः पापादिवारात्रौ वलिनः स्युः क्रमात्स्मृताः । निसर्गवलिनः प्राग्वदेवं स्युः प्रश्नकर्मणि ।।७२।। शुभग्रह दिवावली और पापग्रह रात्रिबली होते हैं। निसर्गबल पूर्वोक्तवत् जानना चाहिये। इस प्रकार प्रश्नकाल में बलों को जानना चाहिये।।७२।।

प्रश्नाध्यायः । ७६१ दशवर्गबलम् - लग्नहोराद्रेष्काणार्कनवांशाः सप्तमांशकः । कलांशः कालहोरा च त्रिंशांशःषष्ठिभाजकः ।।७३।। पूर्वपूर्वोवलीप्रोक्ता न बली चोत्तरोत्तरः । लग्न, होरा, द्रेष्काण, द्वादशांश, नवांश, सप्तांश, षोडशांश, कालहोरांश, त्रिंशांश और षष्ठ्यंश यह उत्तरोत्तर हीनबली होते हैं।।७३।। प्रश्नलग्नाज्जन्मलग्नादीनांज्ञानम् - प्रश्नलग्नं कलीकृत्य नवघ्नं भेन भाजितम् ।।७४।। प्रश्न लग्न का कला करके नव से गुणाकर २७ का भाग देने से।।७४।। लब्धं नवांशकं ज्ञेयं शिष्टमेकत्रसंस्थिते । लब्धं सप्तगुणं वेदभक्तं शिष्टमिहांशकः ।।७५।। लब्धिनवांश होता है शेष को पृथक् रखना, लब्धि को सात से गुणाकर ४ से भाग देना लब्धि नवांश होती है।।७५।। नवांशसदृशं लग्नं यद्वा त्रिघ्नार्कभाजितम् । सप्ताप्तशिष्टं लग्नं च सप्तमे मासि निश्चिते ।।७६।। सौम्येतदेव कर्मक्षं जन्मक्षं वा भवेद्वलम् । इसी के समान जन्मलग्न होता है। अथवा त्रिगुणित करके १२ से भाग देना जो शेष हो वही जन्मलग्न होता है। अथवा शेष को सात से भाग देने से जो आवे वह सातवें मास का लग्न जानना। शुभग्रह की राशि हो तो वही कर्मनक्षत्र वा जन्मनक्षत्र जानना।।७६।। शास्त्रस्य वेदांगत्वप्रतिपादनम् - इदं शास्त्रं मया प्रोक्तमाद्यंतं तव सुव्रत ।।७७।। हे मैत्रेय! मैंने जो यह आद्यंत ज्योतिष शास्त्र को कहा है।।७७।। नाशिष्याय प्रदातव्यं नापुत्राय कदाचन । गुणशीलयुतायैव शिष्यायैव द्विजातये । दातव्यं तु प्रयत्नेन वेदांगमिदमुच्यते ।।७८।। वह कुपुत्र, कुशिष्य को कभी नहीं देना। जो गुणी, शीलसंयुक्त शिष्य हो और द्विजाति हो उसे प्रयत्नपूर्वक देना चाहिये क्योंकि यह वेदांग है।।७८।। इति पाराशरहोरायामुत्तरार्धेऽष्टादशोऽध्यायः ।।१८।।

७६२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । अध्यायानुक्रमः ।। ९९ ।। अध्यानुक्रमं वक्ष्ये त्वादौ शास्त्रावतारणम् । प्रादुर्भावो ग्रहाणां तु द्वितीये च प्रकीर्त्तितः ।। १ ।। ततो राशिस्वभावश्च चतुर्थे दृष्टिवर्णनम् । गर्भाधानं ततः पश्चात्सूतिकाविधिरेव च ।। २ ।। अरिष्टं सप्तमाध्याये सुतस्य तदनंतरम् । पित्रोश्च मातुलादीनां तद्भंगोदशमात्स्मृतः ।। ३ ।। धूमाद्येकादशे मिश्रः पंचागानां फलं तथा । कारकादि फलं तद्भावानां च फलं तथा ।। ४ ।। द्वादश द्वादशाऽध्याये द्विग्रहाद्याश्चषट्स्मृताः । अष्टवर्गादि चैकस्मिन्नाभसादिस्तु चापरे ।। ५ ।। चिरायुषादि योगांश्च पंचाध्यायास्ततः परम् । राजयोगास्तथावस्था अंतर्दायविधिस्ततः ।। ६ ।। दायानां च फलं सप्तस्वांतर्दायस्त्रयोदश । लक्षणं शुभवर्गाणां योगादिषु बलं ततः ।। ७ ।। एवमशीतिरध्यायाः पूर्वभागे समीरिताः । स्पष्ट है।।१-७।। उत्तरार्धस्यानुक्रमणिका- कलौ युगे ततः प्रोक्तं प्रथमेऽष्टकवर्गकः ।। ८ ।। द्वितीये भावदृग्वीर्यमिष्टकष्टबलं ततः । चतुर्थे रश्मिसंभूतिरिष्टकष्टं द्विजोत्तम ।। ९ ।। लोकयात्रैकदेशे च पंचमे च ततः परम् । त्रयं च लोकयात्राणादेकदेशस्यचाष्टमे ।। १० ।। नवमे लोकयात्रा च दशमे दाय एव च । अंतर्दायस्तथाध्याये दायानां विषयस्ततः ।। ११ ।।

शास्त्र फलं तथा शास्त्र परम्परा । ७६३ त्रयोदशे तथा भाग्यं कलांशादि फलं द्विज । चतुर्दशेऽब्दचर्या च विजानीहि ततः परम् ।।१२।। अब्दचर्या फलं पश्चान्मासचर्या फलं ततः । दिनचर्या ततः प्रश्न जातकं प्रब्रवीति हि ।।१३।। अध्यायानुक्रमं पश्चाद्विंशे शास्त्रफलं द्विज । एवं होराशताध्यायी सर्वपाप प्रणाशिनी । युगेषु च चतुर्ष्वेव प्रत्यक्षफलदायिनी ।।१४।। स्पष्ट ही है।।८-१४।। इति पाराशर होरायामुत्तरार्धे एकोनविंशतितमोऽध्यायः ।।१९।। शास्त्र फलं तथा शास्त्र परम्परा ।।२०।। होराशास्त्रमिदं सर्वं श्रद्धाविनयसंयुतः । श्रुत्वा गुरुमुखादेव बुद्धिमानवलोक्य च ।।१।। इस होराशास्त्र को बुद्धिमान् श्रद्धा विजय से युक्त होकर गुरु के मुख से सुनकर और देखकर ।।१।। यो यानाति सशास्त्रार्थं सर्वपापैः प्रमुच्यते । श्रावयेद्दर्शयेद्विद्वानन्यो गर्गो द्विजोत्तमः ।।२।। सर्वपापविनिर्मुक्तोब्रह्मलोकं स गच्छति । जो शास्त्र के अर्थ को जानता है वह सभी पापों से छूट जाता है और ऐसा विद्वान दूसरे को सुनाता और दिखाता है वह दूसरा गर्ग होता है और सभी पापों से मुक्त होकर ब्रह्मलोक को जाता है।।२।। वेदेभ्यश्चसमुद्धृत्यब्रह्मा प्रोवाच विस्तृतम् ।।३।। यह वहीं वेदाङ्ग और वेद का नेत्ररूपी शास्त्र है जिसे ब्रह्माजी ने वेद से निकाल कर गर्गऋषि को बताया था और गर्गजी से मैंने सुना ।।३।। शास्त्रमाद्यं तदेवेदं वेदाङ्गं वेदचक्षुषी । गार्गस्तस्मादिदं प्राह मया तस्माद्यथातथा ।।४।। तदुक्तं तव मैत्रेय शास्त्रमाद्यंतमेव हि ।।५।। हे मैत्रेय ! उसी शास्त्र को आद्यंत मैंने तुमसे कहा है ।।१-५।। इति पाराशरहोरायामुत्तरार्धे विंशोऽध्यायः ।।२०।।

७६४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । अथान्तर्दशादिचक्रम्।

सूर्यन्तर्दशाचक्रम्।

ग्रसूचंमंराबृशबुकेशु
व००००००००१
मा३६४१०९१११०४०
दि१८०६२४१८१२६६०

चन्द्रान्तर्दशाचक्रम्।

ग्रचंमंराबृशबुकेशुसू
व००११११०१०
मा१०७६४७५७८६
दि.०००००००००

भौमान्तर्दशाचक्रम्।

ग्रमंराबृशबुकेशुसूचं
व०१०१००१००
मा४०१११११४२४७
दि२७१८६९२७२७०६०

राहोरन्तर्दशाचक्रम्।

ग्रराबृशबुकेशुसूचंमं
व२२२२१३०११
मा८४१०६००१०६०
दि१२२४६१८१८०२४०१८

गुरोरन्तर्दशाचक्रम्।

ग्रबृशबुकेशुसूचंमंरा
व२२२०२०१०२
मा१६११८९४११४
दि१८१२६६०१८०६२४

शनेरन्तर्दशाचक्रम्।

ग्रशबुकेशुसूचंमंराबृ
व३२१३०११२२
मा०८९२११७११०६
दि३९९०१२०९६१२

बुधान्तर्दशाचक्रम्।

ग्रबुकेशुसूचंमंराबृश
व२०२०१०२२२
मा४१११०१०५११६३८
दि२७२७०६०२७१८६९

केतोरन्तर्दशाचक्रम्।

ग्रकेशुसूचंमंराबृशबु
व०१०००१०१०
मा४२४७४३१११११
दि२७०६०२७१८६९२७

अन्तरदशादिचक्रम् । ७६५ भृगोरन्तर्दशाचक्रम्। सूर्य की दशा में सूर्य के अन्तर में प्रत्यन्तर

प्रशुसूचंमंराबृशबुकेप्रसूचंमंराबृशबुकेशु
व३१११३२३२१व०००००००००
मा४०८२०८२१०२मा०००००००००
दि०००००००००दि५९६१६१४१७१५६१८
घघ००१८१२२४६१८१८०
सूर्य की दशा में चन्द्रमा के अन्तर सूर्य की दशा में भौम के अन्तर में
में चन्द्रमा का प्रत्यंतर प्रत्यंतर
प्रचंमंराबृशबुकेशुसूप्रमंराबृशबुकेशुसूचं
---------------------------------------------------------------
व०००००००००व०००००००००
मा०००००००१०मा०००००००००
दि१५१०२७२४२८२५१००९दि७१८१६१९१७७२१६१०
घ०३०००३०३०३०००घ२१५४४८५७५१२१०१८०३
सूर्य की दशा में राहु के अन्तर में सूर्य की दशा में गुरु के अंतर में
प्रत्यन्तर प्रत्यन्तर
प्रराबृशबुकेशुसूचंमंप्रबृशबुकेशुसूचंमंरा
---------------------------------------------------------------
व०००००००००व०००००००००
मा१११००१०००मा१११०१०००१
दि१८१३२११५१८२४१६२७१८दि८१५१०१६१८१४२४१६१३
घ३६१२१८५४५४०१२०५४घ२४३६४८४८०२४०४८१२
सूर्य की दशा में शनि के अन्तर में सूर्य की दशा में बुध के अंतर में
प्रत्यंतर प्रत्यंतर
प्रशबुकेशुसूचंमंराबृप्रबुकेशुसूचंमंराबृश
---------------------------------------------------------------
व०००००००००व०००००००००
मा११०१०००११मा१०१०००१११
दि२४१८१९२७१७२८१९१९१२दि१३१७२११५२५१७१५१०१८
घ९२७५७०६३०५७१८३६घ२१५१०१८३०५१५४४८२७

७६६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।

सूर्य की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रकेशुसूचंमंरावृशबु
व०००००००००
मा०००००००००
दि७२१६१०७१८१६१९१७
घ२१०१८४३०२१५४४८५७५१

सूर्य की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर

| ग्र | शु | सू | चं | मं | रा | वृ | श | बु | के | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | २ | ० | १ | ० | १ | १ | १ | १ | ० | | दि | ० | १८ | ० | २१ | २४ | १८ | २७ | २१ | २१ | | घ | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० |

चन्द्रमा की दशा में चन्द्रमा के अंतर में प्रत्यंतर

| ग्र | चं | मं | रा | वृ | श | बु | के | शु | सू | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ० | ० | १ | १ | १ | १ | ० | १ | ० | | दि | २५ | १७ | १५ | १० | १७ | १२ | १७ | २० | १५ | | घ | ० | ३० | ० | ० | ३० | ३० | ३० | ० | ० |

चन्द्रमा की दशा में भौम के अंतर में प्रत्यंतर

| ग्र | मं | रा | वृ | श | बु | के | शु | सू | चं | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ० | १ | ० | १ | ० | ० | १ | ० | ० | | दि | १२ | १ | २८ | ३ | २९ | १२ | ५ | १० | १७ | | घ | १५ | ३० | ० | १५ | ४५ | १५ | ० | ३० | ३० |

चन्द्रमा की दशा में राहु के अन्तर में प्रत्यंतर

| ग्र | रा | वृ | श | बु | के | शु | सू | चं | मं | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | २ | २ | २ | ० | १ | ३ | ० | १ | १ | | दि | २१ | १२ | २५ | १६ | १ | ० | २७ | १५ | १ | | घ | ० | ० | ३० | ३० | ३० | ० | ० | ० | ३० |

चन्द्रमा की दशा में गुरु के अन्तर में प्रत्यंतर

| ग्र | वृ | श | बु | के | शु | सू | चं | मं | रा | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | २ | २ | २ | ० | २ | ० | १ | ० | २ | | दि | ४ | १६ | ८ | २८ | २० | २४ | १० | १८ | १२ | | घ | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० |

चन्द्रमा की दशा में शनि के अंतर में प्रत्यंतर

| ग्र | श | बु | के | शु | सू | चं | मं | रा | वृ | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ३ | २ | १ | ३ | ० | १ | १ | २ | २ | | दि | ० | २० | ३ | ५ | २८ | १७ | ३ | २५ | १६ | | घ | १५ | ४५ | १५ | ० | ३० | ३० | १५ | ३० | ० |

चन्द्रमा की दशा में बुध के अंतर में प्रत्यंतर

| ग्र | बु | के | शु | सू | चं | मं | रा | वृ | श | |---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---| | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | २ | ० | २ | ० | १ | ० | २ | २ | २ | | दि | १२ | २९ | २५ | २५ | १२ | २९ | १६ | ८ | २० | | घ | १५ | ४५ | ० | ३० | ३० | ४५ | ३० | ० | ४५ |

अन्तरदशादिचक्रम् । ७६७ चन्द्रमा की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रकेशुसूचंमंरावृशबु
व०००००००००
मा०१०००१०१०
दि१२५१०१७१२१२८३२९
घ१५०३०३०१५३००१५४५
चन्द्रमा की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रशुसूचंमंराबृशबुके
------------------------------
व०००००००००
मा३१११३२३२१
दि१००२०५०२०५२५५
घ०००००००००
चन्द्रमा की दशा में सूर्य के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रसूचंमंरावृशबुकेशु
------------------------------
व०००००००००
मा००००००००१
दि९१५१०२७२४२८२५१००
घ००३०००३०३०३००
भौम की दशा में भौम के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रमंराबृशबुकेशुसूचं
------------------------------
व०००००००००
मा०००००००००
दि८२२१९२३२०८२४७१२
घ३४३३६१६४९३४३०२११५
प३०३००३०३०३००००
भौम की दशा में राहु के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रराबृशबुकेशुसूचंमं
------------------------------
व०००००००००
मा११११०२०१०
दि२६२०२९२३२२३१८१२२
घ४२२४५१३३३०५४३०३
प.
भौम की दशा में गुरु के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रबृशबुकेशुसूचंमंरा
------------------------------
व०००००००००
मा१११०१०००१
दि१४२३१७१९२६१६२८१९२०
घ४८१२३६३६०४८०३६२४
भौम की दशा में शनि के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रशबुकेशुसूचंमंराबृ
------------------------------
व०००००००००
मा२१०२०१०११
दि३२६२३६१९३२३२९२३
घ१०३११६३०५७१५१६५११२
प३०३०३००००३०००
भौम की दशा में बुध के अंतर में प्रत्यंतर
ग्रबुकेशुसूचंमंराबृश
------------------------------
व०००००००००
दि१०१०००१११
मा२०२०२९१७२९२०२३१७२६
घ३९४९३०५१४५४९३३३६३१
प३०३००००३०००३०

७६८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।


भौम की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रकेशुसूचंमंराबृशबु
व०००००००००
मा०००००००००
दि८२४७१२८१२१९२३२०
घ३४३०२११५३४३०३६१६४९
प३००००३०००३०३०

भौम की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रशुसूचंमंराबृशबुके
व०००००००००
दि२०१०२१२१०
मा१०२१५२४३२६६२९२४
घ०००३०००३०३०३०

भौम की दशा में सूर्य के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रसूचंमंराबृशबुकेशु
व०००००००००
मा०००००००००
दि६१०७१८१६१९१७७२१
घ१८३०२१५४४८५७५१२१०

भौम की दशा में चंद्रमा के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रचंमंराबृशबुकेशुसू
व०००००००००
मा००१०१००१०
दि१७१२१२८३२९१२५१०
घ३०१५३००१५४५१५०३०

राहु की दशा में राहु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रराबृशबुकेशुसूचंमं
व०००००००००
मा४४५४१५१२१
दि२५९३१७२६४२१८२१
घ४८३६५४४२३६०३६०४२

राहु की दशा में गुरु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रबृशबुकेशुसूचंमंरा
व०००००००००
मा२४४०४०२०४
दि५५१६२५०२४४३१२
घ१२४८२४२४०१२०२४३६

राहु की दशा में शनि के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रशबुकेशुसूचंमंराबृ
व०००००००००
मा५४१५१२१५४
दि१२२५२९२१२१२५२९३१६
घ२७२१५१०१८३०५१५४४८

राहु की दशा में बुध के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रबुकेशुसूचंमंराबृश
व०००००००००
मा४१५१२१४४४
दि१०२३३१५१६२३१७२२५
घ३३३०५४३०३३४२२४२१

अन्तरदशादिचक्रम् । ७६९

राहु की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रकेशुसूचंमंरावृशबु
व०००००००००
मा०२०१०११११
दि२२३१८१२२२६२०२९२३
घ३०५४३०३४२२४५१३३

राहु की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रशुसूचंमंरावृशबुके
व०००००००००
मा६१३२५४५५२
दि०२४०३१२२४२१३३
घ०००००००००

राहु की दशा में सूर्य के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रसूचंमंरावृशबुकेशु
व०००००००००
मा०००११११०१
दि१६२७१८१८१३२११५१८२४
घ१२०५४३६१२१८५४५४०

राहु की दशा में चन्द्रमा के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रसूचंमंरावृशबुकेशु
व०००००००००
मा०११२२२२१३
दि२७१५१२११२२५१६१०
घ००३०००३०३०३००

राहु की दशा में भौम के अन्तर में प्रत्यंतर

ग्रमंरावृशबुकेशुसूचं
व०००००००००
मा०११११०२०१
दि२२२६२०२९२३२२३१८१
घ३४२२४५१३३३०५४३०

गुरु की दशा में गुरु के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रवृशबुकेशुसूचंमंरा
व०००००००००
मा३४३१४१२१३
दि१२११८१४८८४१४२५
घ२४३६४८४८०२४०४८१२

गुरु की दशा में शनि के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रशबुकेशुसूचंमंरावृ
व०००००००००
मा४४१५१२१४४
दि२४९२३२१५१६२३१६१
घ२४१२१२०३६०१२४८३६

गुरु की दशा में बुध के अंतर में प्रत्यंतर

ग्रबुकेशुसूचंमंरावृश
व०००००००००
मा३१४१२१४३४
दि२५१७१६१०८१७२१८९
घ३६३६०४८०३६२४४८१२

७७० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । गुरु की दशा में केतु के अंतर गुरु की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर में प्रत्यंतर

ग्रकेशुसूचंमंराबृशबु
व०००००००००
मा०१०००११११
दि१९२६१६२८१९२०१४२३१७
घ३६०४८०३६२४४१९३६
ग्रशुसूचंमंराबृशबुके
व०००००००००
मा५१२१४४५४१
दि१०१८२०२६२४८२१६२६
घ०००००००००
गुरु की दशा में सूर्य के अंतर गुरु की दशा में चंद्रमा के अंतर
में प्रत्यंतर प्रत्यंतर
ग्रसूचंमंराबृशबुकेशु
------------------------------
व०००००००००
मा०००११११०१
दि२४२४१६१३८१५२०१६१८
घ२४०४८१२२४३६४८४८०
ग्रचंमंराबृशबुकेशुसू
व०००००००००
मा१०२२२२०२०
दि१०२८१२९१६८२८२०२४
घ०००००००००
गुरु की दशा में भौम के अंतर गुरु की दशा में राहु के अंतर
में प्रत्यंतर में प्रत्यंतर
ग्रमंराबृशबुकेशुसूचं
------------------------------
व०००००००००
मा०११११०१००
दि१९२०१४२३१७१९२६१६२८
घ३६२४४८१२३६३६०४८०
ग्रराबृशबुकेशुसूचंमं
व०००००००००
मा४३४४१४१२१
दि९२५१६२२०२४१३१२२०
घ३६१२४८२४२४०१६०२४
शनि की दशा में शनि के अंतर शनि की दशा में बुध के अंतर
में प्रत्यंतर में प्रत्यंतर
ग्रशबुकेशुसूचंमंराबृ
------------------------------
व०००००००००
मा५५२६१३२५४
दि१९३३०२४०३१२२४
घ२८२५१०३०९१५२०२७२४
प३०३०३००००३०००
ग्रबुकेशुसूचंमंराबृश
व०००००००००
मा४१५१२१४४५
दि१७२६१११८२०२६२५९३
घ१६३१३०२७४५३१२११२२५
प३०३००००३०००३०

अन्तरदशादिक्रमम् । ७७१ शनि की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | के | शु | सू | चं | मं | रा | बृ | श | बु | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ० | २ | ० | १ | ० | १ | १ | २ | १ | | दि | २३ | ६ | १९ | ३ | २३ | २९ | २३ | ३ | २६ | | घ | १६ | ३० | ५७ | १५ | १६ | ५१ | १२ | १० | ३१ | | प | ३० | ० | ० | ० | ३० | ० | ० | ३० | ३० | शनि की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | शु | सू | चं | मं | रा | बृ | श | बु | के | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | दि | ६ | १ | ३ | २ | ५ | ५ | ६ | ५ | २ | | मा | १० | २७ | ५ | ६ | २१ | २ | ० | ११ | ६ | | घ | ० | ० | ० | ३० | ० | ० | ३० | ३० | ३० | शनि की दशा में सूर्य के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | सू | चं | मं | रा | बृ | श | बु | के | शु | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ० | ० | ० | २ | २ | २ | २ | ० | १ | | दि | १७ | २९ | २० | २३ | १७ | २६ | २० | २० | २९ | | घ | ४५ | ३० | ३९ | ६ | १२ | ३ | ९ | ३९ | ० | शनि की दशा में चन्द्रमा के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | चं | मं | रा | बृ | श | बु | के | शु | सू | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | १ | १ | २ | २ | ३ | २ | १ | ३ | ० | | दि | १७ | ३ | २५ | १६ | ० | २० | ३ | ५ | २८ | | घ | ३० | १५ | ३० | ० | १५ | ४५ | १५ | ० | ३० | शनि की दशा में भौम के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | मं | रा | बृ | श | बु | के | शु | सू | चं | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ० | ० | १ | २ | १ | ० | २ | ० | १ | | दि | २३ | २९ | २३ | ३ | २६ | २३ | ६ | १९ | ३ | | घ | १६ | ५१ | १२ | १० | ३१ | १६ | ३० | ५७ | १५ | | प | ३० | ० | ० | ३० | ३० | ३० | ० | ० | ० | शनि की दशा में राहु के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | रा | बृ | श | बु | के | शु | सू | चं | मं | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ५ | ४ | ५ | ४ | १ | ५ | १ | २ | १ | | दि | ३ | १६ | १२ | २५ | २९ | २१ | २१ | २५ | २१ | | घ | ५४ | ४८ | २७ | २१ | ५१ | ० | १८ | ३० | ५१ | | प | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | शनि की दशा में गुरु के अन्तर में प्रत्यंतर | ग्र | बृ | श | बु | के | शु | सू | चं | मं | रा | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ४ | ४ | ४ | १ | ५ | १ | २ | १ | ४ | | दि | १ | २४ | ९ | २३ | २ | १५ | १६ | २३ | १६ | | घ | ३६ | २७ | १२ | १२ | ० | ३६ | ० | १२ | ४८ | बुध की दशा में बुध के अंतर में प्रत्यंतर | ग्र | बु | के | शु | सू | चं | मं | रा | बृ | श | | व | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | ० | | मा | ४ | १ | ४ | १ | २ | १ | ४ | ३ | ४ | | दि | २ | २० | २४ | १३ | १२ | २४ | १० | २५ | १७ | | घ | ४९ | ३४ | ३० | २१ | १५ | ३४ | ३ | ३६ | १६ | | प | ३० | ३० | ० | ० | ० | ३० | ० | ० | ३० |

७७२ वृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् । बुध की दशा में केतु के अन्तर में प्रत्यंतर

ग्रकेशसूचंमंराबृशबु
व०००००००००
मा०१०००११११
दि२०२९१७२९२०२३१७२६२०
घ४९३०५१४५४९३३३६३१३४
प३००००३०००३०३०
बुध की दशा में शुक्र के अन्तर
में प्रत्यंतर
ग्रशुसूचंमंराबृशबुके
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा५१२१५४५४१
दि२०२१२५२९३१६११२४२९
घ०००३०००३०३०३०
बुध की दशा में सूर्य के अंतर
में प्रत्यंतर
ग्रसूचंमंराबृशबुकेशु
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा०००११११०१
दि१५२५१७१५१०१८१३१७२१
घ१८३०५१५४४८२७२१५१०
बुध की दशा में चंद्रमा के अंतर
में प्रत्यंतर
ग्रचंमंराबृशबुकेशुसू
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा१०२२२२०२०
दि१२२९१६८२०१२२९२५२५
घ३०४५३००४५१५४५०३०
बुध की दशा में भौम के अंतर
में प्रत्यंतर
ग्रमंराबृशबुकेशुसूचं
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा०११११०१००
दि२०२३१७२६२०२०२९१७२९
घ४९३३३६३१३४४९३०५१४५
प३०००३०३०३००००
बुध की दशा में राहु के अंतर
में प्रत्यंतर
ग्रराबृशबुकेशुसूचंमं
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा४४४४१५१२१
दि१७२२५१०२३३१५१६२३
घ४२२४२१३३३०५४३०३३
बुध की दशा में गुरु के अन्तर
में प्रत्यंतर
ग्रबृशबुकेशुसूचंमंरा
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा३४३१४१२१४
दि१८९२५१७१६१०८१७२
घ४८१२३६३६०४८०३७२४
बुध की दशा में शनि के अन्तर
में प्रत्यंतर
ग्रशबुकेशुसूचंमंराबृ
:---:---:---:---:---:---:---:---:---:---
व०००००००००
मा५४१५१२१४४
दि३१७२६१११८२०२९२५९
घ२५१६३१३०२७४५३१२११९
प३०३०३००००३०००

अन्तरदशादिक्रमम् । ७७३

केतु की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर

प्रकेशुसूचंमंराबृशबु
व०००००००००
मा०००००००००
दि८२४७१२८२२१९२३२०
घ३४३०२११५३३०३६१६४९
प३००००३००००३०

केतु की दशा में शुक्र के अंतर में प्रत्यंतर

प्रशुसूचंमंराबृशबुके
व०००००००००
मा२०१०२०२१०
दि१०२१५५४३१६२९२४
घ०००३००२६३०३०३०

केतु की दशा में सूर्य के अन्तर में प्रत्यंतर

प्रसूचंमंराबृशबुकेशु
व०००००००००
मा०००००००००
दि६१०७१८१६१९१७७२१
घ१८३०२१५४४८५७५१२१०

केतु की दशा में चन्द्रमा के अन्तर में प्रत्यंतर

प्रचंमंराबृशबुकेशुसू
व०००००००००
मा००१०१००१०
दि१७१२१२८३२९१२५१०
घ३०१५३००२५४५१५०३०

केतु की दशा में भौम के अंतर में प्रत्यंतर

प्रमंराबृशबुकेशुसूचं
व०००००००००
मा०००००००००
दि८२२१९१३२०८२४७१२
घ३४३३६१६४९३४३०२११५
प३०००३०३०३००००

केतु की दशा में राहु के अंतर में प्रत्यंतर

प्रराबृशबुकेशुसूचंमं
व०००००००००
मा११११०२०१०
दि२६२०२९२३२२३१८१२२
घ२४२४५१३३३०५४३००

केतु की दशा में गुरु के अन्तर में प्रत्यंतर

प्रबृशबुकेशुसूचंमंरा
व०००००००००
मा१११०१०००१
दि१४२३१७१९२६१६२८१९२०
घ४८१२३३३३०४८०३६२४

केतु की दशा में शनि के अन्तर में प्रत्यंतर

प्रशबुकेशुसूचंमंराबृ
व०००००००००
मा२१०२०१०११
दि३२६२३६१९३२३२९२३
घ१०३११६३०५७१५१६५११२
प३०३०३००००३०००

७७४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् !

केतु की दशा में बुध के अन्तर में प्रत्यंतर

ग्रबुकेशुसूचंमंराबृश
व०००००००००
मा१०१०००१११
दि२०२०२९१७२९२०२३१७२६
घ३४४९३०५१४५४९३३३६३१
प३०३००००३०००३०

शुक्र की दशा में शुक्र के अन्तर में प्रत्यंतर

प्रशुसूचंमंराबृशबुके
व०००००००००
मा६२३२६५६५२
दि२००१०२००२०१०२०१०
घ०००००००००

शुक्र की दशा में सूर्य के अन्तर में प्रत्यंतर

ग्रसूचंमंराबृशबुकेशु
व०००००००००
मा०१०११११०२
दि१८०२१२४१८२७२१२१०
घ

७७५ अन्तरदशादिचक्रम्। शुक्र की दशा में बुध के अंतर | शुक्र की दशा में केतु के अंतर में प्रत्यंतर | में प्रत्यंतर

प्रबुकेशूसूचंमंरावृश
व०००००००००
मा४१५१२१५४५
दि२४२९२०२१२५१९०१६११
घ३०३००००३०३०३०
प्रकेशूसूचंमंरावृशबु
व०००००००००
मा०२०१०२१२१
दि२४१०२१५२४३२४६२९
घ३००००३०००३०३०

इति प्रत्यंतर्दशा चक्रम्। अथ नवांश दशावर्ष अन्तर्दशादिचक्रम्। मेषांश में मेष दशा वर्ष ७ में अन्तर्दशा | मेषांश में वृष दशा वर्ष १६ में अन्तर्दशा

मेवृमिकसिकंतुवृध
व०१०१००१०
मा५१७५४७१५
दि२६१३१६१९६१६१३२६
घ२४१२४८१२०४८१२२४
प००००००००
वृमिकसिकंतुवृधमे
व२१३०१२११
मा६५४९५६१६
दि२१८९१८०२११३०
घ३६२४३६०२४३६१२०
प००००००००

मेषांश में मिथुन दशा वर्ष ९ में अन्तर्दशा | मेषांश में कर्क दशा वर्ष २१ में अन्तर्दशा

मिकसिकंतुवृधमेवृ
व०१००१०००
मा९१०५९५७१०७
दि२१२०१२२१८१६२४१६
घ३६२४०३६२४४८०४८
प००००००००
कसिकंतुवृधमेवृमि
व४११११२१३
मा४०१०४५१५४
दि२७१८२०९१९६१९९
घ३६०२४३६१२०१२३६
प००००००००

मेषांश में सिंह दशा वर्ष ५ में अन्तर्दशा | मेषांश में कन्या दशा वर्ष ९ में अन्तर्दशा

सिकंतुवृधमेवृमिक
व००००००००
मा३५९४६४९५
दि०१२१८६०६१८१२
घ००००००००
प००००००००
कंतुवृधमेवृमिकसि
व०१०००१०१
मा९५७१०७५९१०
दि२१८१६२४१६८२१२०
घ३६२४४८०४८२४३६२४
प००००००००

७४६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।

मेषांश में तुला दशा वर्ष १६ में

अन्तर्दशा

तुवृधमेवृमिकसिंकं
व२१११२१३०१
मा६१७१६५४९५
दि२११३६१३२१८९१८८
घ३६१२०१२३६२४३६०२४
प०००००००००

मेषांश में वृश्चिक दशा वर्ष ७ में

अन्तर्दशा

वृधमेवृमिकसिंकंतु
व०००१०१००१
मा५८५१७५४७१
दि२६१२२६१३१६१९६१५१३
घ२८०२४१२४८१२०४८१२
प०००००००००

मेषांश में धनु दशा वर्ष १० में

अन्तर्दशा

धमेवृमिकसिंकंतुवृ
व१०१०२००१०
मा०८७१०१६१०७८
दि०१२६२४६०२४०१२
घ०००००००००
प०००००००००

वृषांश में मकर दशा वर्ष ४ में

अन्तर्दशा

मंकुंमीबृतुकसिंकंमि
व०००००००००
मा२२५३९५११२४
दि७७१९२८१२२५२४२
घ४५४५१४३५३२८४५४२४८
प५३५३४२१८३२१४५३२११४

वृषांश में कुम्भ दशा वर्ष ४ में

अन्तर्दशा

कुंमीवृतुकंकसिंमिम
व०००००००००
मा२५३९५११२५२
दि७१९२८१२२५२४२७
घ४५५४३५३१८४५४२२८४५
प४३४२१८३२१४५३२११४५३

वृषांश में मीन दशा वर्ष १० में

अन्तर्दशा

मीवृतुकंकसिंमिमकुं
व१०११२०१००
मा२९१००५७०५५
दि३२६१७२११९१२११९१९
घ३१२८३८१०२४४५१०२४२४
प४६१४४९३५४२५३३५४३४३

वृषांश में वृश्चिक दशा वर्ष ७ में

अन्तर्दशा

वृतुकंकसिंमिमकुंमी
व०१०१०००००
मा६३८८४८३३९
दि२७२४२६२२२८२६२८२८२६
घ३१३१४९३५१४४९४५३५२८
प४६१०२५१७७२५१८१८१४

वृषांश में तुला दशा वर्ष १६ में

अन्तर्दशा

तुकंकसिंमिमकुंमीवृ
व३१३०१००११
मा०८११११८९९१०३
दि४९१३८९१११७२४
घ१४५२३४९५२३३३८२१
प७५६३२२५५६३२३२४९११

अन्तरदशादिचक्रम् । ७७७

वृषांश में कन्या दशा वर्ष ९ में

अन्तर्दशा

ककसिंमिमकुंमीवृतु
व०२००००१०१
मा११२६११५५००८
दि१३२०१०१३२२२१२६९
घ३२८३५३२८२८१०४९५२
प३२१४१८३२१४१४३५२५५६

वृषांश में कर्क दशा वर्ष २१ में

अन्तर्दशा

कसिंमिमकुंमीवृतुकुं
व५१२००२१३२
मा२२२११११५८११२
दि७२४२०२५२५१९२२१३२०
घ४५४२२८४५४५२४३५३२८
प५३२११४५३५३४३१७२३१४

वृषांश में सिंह दशा वर्ष ५ में

अंतर्दशा

सिंमिमकुंमीवृतुकंक
व००००००००१
मा३६२२७४११६२
दि१५१०२४२४१२८८१०२४
घ५२३५४२४२४५१४४९३५४२
प५६१८२१२१५३७२५१८१४

वृषांश में मिथुन दशा वर्ष ५ में

अंतर्दशा

मिमकुंमीवृतुकंकसिं
व०००१०१०२०
मा११५५०८८११३६
दि१३२२२१२६९१३२०१०
घ३२८२८१०४९५२१२८३५
प३२१४१४३५२५५६३२१४१८

मिथुनांश में वृष दशा वर्ष १६ में

अन्तर्दशा

वृमेमीकुंमधमेवृमि
व३११००११११
मा१४११९९११४१८
दि०५३७७३ ३५०२४
घ२१४७५८३५३५५८४७२१३४
प४१०३३२५२५३३०४१४२

मिथुनांश में मेष दशा वर्ष ७ में

अन्तर्दशा

मेमीकुंमधमेवृमिबृ
व००००००१०१
मा७१०४४१०७४९४
दि२३११३२५३५
घ३१३६२६२६३६३१४७१५४७
प४८५२४५४५५२४८०१००

मिथुनांश में मीन दशा वर्ष १० में अन्तर्दशा

मीकुंमधमेवृमिबृमे
व१००१०१११०
मा२५५२१०११११११०
दि१३२३२३१३३३०३३
घ४४२९२९४४३६५८२१५८३६
प६३८३८६५२३३४२३३५२

मिथुनांश में कुंभ दशा वर्ष ४ में अन्तर्दशा

कुंमधमेवृमिबृमेमी
व०००००००००
मा२२५४९५९४५
दि९९२३१७६७१२३
घ२३२३२९२६३५८३५२६२९
प५२५२३८४५२५४०२५४५३८

७७८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् ।

मिथुनांश में मकर दशा वर्ष ४

में अन्तर्दशा

मधमेवृमिवृमेमीकुं
व०००००००००
मा२५४९५६५५२
दि९२३१७६७६२३९
घ२३२९२६३५८३५८२९२३
प५२३८४५२४४०२४४०३८५२

मिथुनांश में धन दशा वर्ष १०

में अन्तर्दशा

धमेवृमिवृमेमीकुंम
व१०१११०१००
मा२१०११११११०२५५
दि१३३३०१३१३२३२३
घ४४२६५८२१५८३६४४२९२९
प६५२३३४२३३५२६३८३८

मिथुनांश में मेष दशा वर्ष ७ में

अन्तर्दशा

मेवृमिवृमेमीकुंमध
व०१०१०००००
मा७४९४७१०४४१०
दि२५३५२३११३
घ३१४७१५४७३१३६२६२६३६
प४८०१००४०५२४५४५५२

कर्कांश में वृष दशा वर्ष १६ में

अन्तर्दशा

वृमिवृमेमीकुंमधमे
व३१३११००११
मा१८१४११९९११४
दि०२४०५३७७१५
घ२१३४२१४७५८३५३५५८४७
प४१४२४१०३३२५२५३३०

मिथुनांश में मिथुन दशा वर्ष ९

में अन्तर्दशा

मिवृमेमीकुंमधमेवृ
व०१०१००१०१
मा११८९१५५१९८
दि२१२४३०६६०३२४
घ१९३४१५२१८८२११५३४
प३२४२१०४२४०४०४२१०४२

कर्कांश में कर्क दशा वर्ष २१

में अन्तर्दशा

कसिंकंतुवृधमकुमी
व५१२३१२००२
मा१२२१०८५११११५
दि१६१९११२६१५९२१२१९
घ२३२९३२०४३७३७४
प४७५४६४२५६११४१४१११

कर्कांश में सिंह दशा वर्ष २

में अन्तर्दशा

सिंकतुवृधमकुंमीकं
व००००००००१
मा३६११४६२२६२
दि१४८४२६२९२३२३२९१९
घ३९२२५३३०१८४३४३१८३२
प४२०१४२९१८१८९५

कर्कांश में कन्या दशा वर्ष ९

में अन्तर्दशा

कतुवृधमकुंमीकंसिं
व०१०१००१२०
मा११८८०५५०२६
दि९२२३१६००१६११८
घ४४७४३४४४१४१४४९२२
प११२५१५४०५१५१४०४६३०