भारतकोश
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छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

( २६४ )

मन्त्रप्रतीकानिअ०खं०मं०पृ०
यद्वै तत्पुरुषे शरीरमिदम्१२२८२
यद्वै तद्ब्रह्मे तीदम्१२२८५
यस्तद्वेद स वेद२१२०६
यस्यामृचि तामृचम्७४
यां दिशमभिष्ठोष्यन्११७५
या वाक्सर्त्तस्मात्६९
यावान्वा अयमाकाशः८०९
या वै सा गायत्रीयम्१२२८०
या वै सा पृथिवीयम्१२२८१
येनच्छन्दसा१०७५
येनाश्रुतँ॒ श्रुतम्५७६
यो वै भूमा तत्सुखम्२३७८५
योषा वाव गौतमाग्निः४९३
यो ह वा आयतनम्४४५
यो ह वै ज्येष्ठं च श्रेष्ठं च४४३
यो ह वै प्रतिष्ठां वेद४४४
यो ह वै वसिष्ठं वेद४४४
यो ह वै सम्पदं वेद४४५
रैक्वेमानि षट्शतानि३६३
लवणमेतदुदकेऽवधायाथ१३६८०
लो ३ कद्दारमपावा ३ र्णू२४२३६
,, ,,२४२३८
,, ,,२४१२२४०
लोकेषु पञ्चविधँ॒ सामोपासीत१५४
लोम हिङ्कारस्त्वक्प्रस्तावः१९२००
वसन्तो हिङ्कारः१६१९६
वसिष्ठाय स्वाहेत्यग्नावाज्यस्य४६६
वागेव ब्रह्मणश्चतुर्थः१८३४०
वागेवर्क् प्राणः३७
वाग्वाव नाम्नो भूयसी७२१
वायुर्वाव संवर्गो यदा३६९
विज्ञानं वाव ध्यानाद्भूयः७४१

( १६५ )

मन्त्रप्रतीकानिअ०खं०मं०पृ०
विनर्दि साम्नो वृणे२२२०८
वृष्टौ पञ्चविधम्१५९
वेत्थ यथासौ लोको न४७४
वेत्थ यदि॒तोऽधि प्रजाः४७३
व्याने तृप्यति श्रोत्रं तृप्यति२०५६५
श्यामाच्छबलं प्रपद्ये१३९३७
श्रुतँ ह्येव मे भगवद्दृशेभ्यः३९८
श्रोत्रँ॒ होच्चक्राम१०४४९
श्रोत्रमेव ब्रह्मणश्चतुर्थः१८३४२
श्रोत्रमेवङ्मर्नः९९
श्वेतकेतुर्हारुणेयः४७२
” ”५७४
षोडशकलः सोम्य६३३
संकल्पो वाव मनसः७२७
स एतां त्रयीं विद्याम्१७४३५
स एतास्तिस्रो देवताः१७४३५
स एवाधस्तात्स उपरि०२५७९३
स एष परोवरीयानुद्गीथः११८
स एष ये चैतस्मात्१०३
स एष रसानाँ॒ रसतमः३४
स जातो यावदायुषम्.४९८
सत्यकामो ह जाबालः३८०
सदेव सोम्येदमग्रे५८२
स ब्रूयान्नास्य जरयैतत्८१३
समस्तस्य खलु१४९
समान उ एवायं चासौ६६
समाने तृप्यति मनस्तृप्यति२२५६७
स य आकाशं ब्रह्मेत्युपास्ते१२७६०
स य आशां ब्रह्मेत्युपास्ते१४७६५
स य इदमविद्वानग्निहोत्रम्२४५६९
स य एतदेवं विद्वानक्षरम्८१
स य एतदेवं विद्वान्१५२

( ९६६ )

मन्त्रप्रतीकानिअ०खं०मं०पृ०
स य एतदेवममृतं वेद२५९
” ”२६२
” ”२६४
” ”२६८
” ”१०२७०
स य एतमेवं विद्वाँश्चतुष्कलम्३८८
” ”३९१
” ”३९३
” ”३९५
स य एतमेवं विद्वानादित्यम्१९३५०
स य एतमेवं विद्वानुपास्ते११४१०
” ”१२४१२
” ”१३४१४
स य एवमेतत्साम२१२०५
स य एवमेतद्वृहदादित्ये१४१९३
स य एवमेतद्यज्ञायज्ञीयमङ्गेषु१९२००
स य एवमेतद्रथन्तरमग्नौ१२१९०
स य एवमेतद्गायत्रम्१११८८
स य एवमेतद्राजनं देवतासु२०२०२
स य एवमेतद्वामदेव्यम्१३१९१
स य एवमेतद्वैराजमृतुषु१६१९६
स य एवमेतद्वैरूपम्१५१९५
स य एवमेताः शक्वर्यो लोकेषु१७१९८
स य एवमेता रेवत्यः१८१९९
स य एषोऽणिमैतदात्म्यम्६६१
” ”६६६
” ”१०६६९
” ”१२६७९
” ”१३६८४
” ”१४६९३
” ”१५६९६
स यः संकल्पं ब्रह्मेत्युपास्ते७३२

( ९६७ )

मन्त्रप्रतीकानिअ०खं०मं०पृ०
स यः स्मरं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७१३७६३
स यथा तत्र.... ६१६७०१
स यथा शकुनिः सूत्रेण.... ६६४६
स यथोभयपाद्व्रजन्नथः.... ४१६४३२
स यदवोचं प्राणम्.... ३१५३२०
स यदशिशिषति.... ३१७३३०
स यदि पितरं वा मातरम्.... ७१५७७०
स यदि पितृलोककामः.... ८८२१
स यश्चित्तं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७३६
स यस्तेजो ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७११७५७
स यावदादित्य उत्तरतः.... ३१०२७१
स यावदादित्यः.... ३२६०
स यावदादित्यः पश्चात्.... ३२६९
स यावदादित्यः पुरस्तात्.... ३२६३
स यावदादित्यो दक्षिणतः.... ३२६४
स यो ध्यानं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७४१
स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७१९
स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७५१
स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७१०७५३
स यो बलं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७४७
स यो मनो ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७२६
स यो वाचं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७२३
स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते.... ७७४३
सर्वं खल्विदं ब्रह्म.... ३१४३०३
सर्वकर्मा सर्वकामः.... ३१४३१२
सर्वास्वप्सु पञ्चविधम्.... २१६१
सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मानः.... २२२२१०
सर्वे स्वरा घोषवन्तः.... २२२२१२
स वा एष आत्मा हृदि.... ८८२९
स समित्पाणिः पुनरेयाय.... ८१०८९५
” ”.... ८११९०३

( ९१८ )

मन्त्रप्रतीकानिअ०खं०मं०पृ०
स ह क्षत्तान्यिष्य३६१
स ह खादित्वातिशेषान्१०१२६
स ह गौतमो राज्ञः४७७
स ह द्वादशवर्ष उपेत्य५७५
स ह पञ्चदशाहानि६३४
स ह प्रातः संजिहानः१०१२६
स ह व्याधिनानशितुम्१०४०२
स ह शिलकः१०९
स ह सम्पादयाञ्चकार११५३९
स ह हारिद्रुमतं गौतमम्३८२
स हाशाथ हैनमुपससाद६३६
स हेभ्यं कुल्माषान्खादन्तम्१०१२३
स होवाच किं मेऽन्नम्४५८
स होवाच किं मे वासः४६०
स होवाच भगवन्तं वा१११३१
स होवाच महात्मनः३७३
स॒ होवाच विजानाम्यहम्१०४०४
सा ह वागुच्चक्राम४४८
सा हैनमुवाच नाहम्३८१
सेयं देवतैक्षत६०६
सैषा चतुष्पदा षड्विधा१२२८३
सोऽधस्ताच्छकटस्य३६१
सोऽहं भगवो मन्त्रविदेवास्मि७१४
स्तेनो हिरण्यस्य सुराम्१०५३४
स्मरो वावाकाशाद्भूयः१३७६१
हँस्ते पादं वक्तेति३९२
हन्ताहमेतद्भगवतो वेदानीति११४

॥ श्रीहरिः ॥

गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित विभिन्न गीताएँ

श्रीमद्भगवद्गीता-तत्त्वविवेचनी—
(टीकाकार-श्रीजयदयालजी गोयन्दका)

श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी टीका—
(टीकाकार-स्वामी रामसुखदासजी महाराज)

गीता-दर्पण— (स्वामी रामसुखदासजी महाराज)
गीता-दर्पण— (पाकेट साइज)
गीता-माधुर्य
गीता-शांकरभाष्य
गीता-चिन्तन— (ले० श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार)
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल, पदच्छेद, अन्वय, साधारण भाषाटीका
श्रीमद्भगवद्गीता— माहात्म्यसहित, सटीक मोटे अक्षरोंमें
श्रीमद्भगवद्गीता— श्लोक, साधारण भाषाटीका, टिप्पणी-प्रधान विषय, मोटा टाइप, अजिल्द
श्रीमद्भगवद्गीता— केवल भाषा
श्रीमद्भगवद्गीता— साधारण भाषाटीका, पाकेट साइज
श्रीमद्भगवद्गीता— मूल मोटे अक्षरोंमें
श्रीपञ्चरत्नगीता— (श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णुसहस्रनाम, श्रीभीष्मस्तवराज, श्रीअनुस्मृति, श्रीगजेन्द्रमोक्षके मूल-पाठ)
श्रीमद्भगवद्गीता— श्रीविष्णुसहस्रनामसहित छोटा साइज
गीताताबीजी— मूल

॥ श्रीहरिः ॥

गीताप्रेस, गोरखपुरसे प्रकाशित

उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्अन्वय, हिंदी व्याख्यासहित
ईशावास्योपनिषद्हिंदी अनुवाद शांकरभाष्यसहित
केनोपनिषद्( ,, ,, )
कठोपनिषद्( ,, ,, )
माण्डूक्योपनिषद्( ,, ,, )
मुण्डकोपनिषद्( ,, ,, )
प्रश्नोपनिषद्( ,, ,, )
तैत्तिरीयोपनिषद्( ,, ,, )
ऐतरेयोपनिषद्( ,, ,, )
श्वेताश्वतरोपनिषद्( ,, ,, )
छान्दोग्योपनिषद्( ,, ,, )
बृहदारण्यकोपनिषद्( ,, ,, )

[सील/मुहर: K. P. SABHA AMBPHALA LIBRARY No . . . . . . Date. . . . . . JAMMU]

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