ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
याचना, स्तुतियां, यज्ञनेता १-३
यूप, स्तुति ४-५
५१. अग्नि, इंद्र वायु एवं अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१५
सोमपान हेतु आग्रह, प्रिय होना, १-४
आह्वान, योग्य होना, दही मिला सोमरस ५-७
मित्रता, आह्वान ८-१०
पाप से बचाने की प्रार्थना ११-१३
धन की स्वामिनी, कल्याण व बंधुमित्रों से मिलन कराने हेतु प्रार्थना १४-१५
५२. मरुद्गण का वर्णन १-१७
प्रसन्न होना, भ्रमणकर्त्ता, स्तुत्य, हव्य देना, १-४
नेता, आयुध ५-६
मरुद्गण, परिश्रम करना, घिरना, यज्ञ धारण हेतु प्रार्थना ७-१०
दर्शनीय, कूपनिर्माण, निर्माता, आह्वान ११-१४
दान प्राप्ति, पृश्नि, रुद्र, गाएं देना १५-१७
५३. मरुद्गण की स्तुति १-१६
पृश्नि, वर्षाकारी १-२
स्तुति, प्रमुदित होना, बरसना, आकाश जाना ३-७
आह्वान, नदियां, प्रशंसा ८-१०
अनुगमन, हविदाता, बीजदाता, जल, गाय आदि मांगना ११-१४
कृपापात्र, स्तुति हेतु आग्रह १५-१६
५४. मरुद्गण का वर्णन १-१५
तेजस्वी, जल गिरना, बल संपन्न, सर्वथा समर्थ १-४
पर्वत तोड़ना, धन याचना, संरक्षण ५-७
ebook converter DEMO Watermarks*
सींचना, वर्षा करना मार्ग पार, करना, सुनहरी पगड़ी ८-१२
अक्षय, राजा श्यावाश्व, धन याचना १३-१५
५५. मरुतों की स्तुति १-१०
अन्न धारण, असीमित ज्ञान, अतिशय १-४
जलहीन न होना, बुंदकियों वाली घोड़ियां, फैलना, पीछे चलना, पाप से बचाने हेतु
प्रार्थना ५-९
५६. अग्नि एवं मरुतों की स्तुति १-९
आह्वान १-२
समूह का आना, शत्रुनाश, आह्वान, घोड़े जोड़ने हेतु प्रार्थना, देर न करना ३-९
५७. मरुतों की स्तुति १-८
जल पहुंचाना, आह्वान, वनों का कांपना, विस्तृत होना १-४
अमृत प्राप्ति, आयुध धारण करना, उत्तम संतान, धन व वर्षा हेतु प्रार्थना ५-८
५८. मरुतों की स्तुति १-८
प्रभासंपन्न, दीप्तिशाली, आह्वान, शत्रुनाशक, पुत्र हेतु प्रार्थना, गरजना, गर्भधारण,
धनस्वामी १-८
५९. मरुतों की स्तुति १-८
स्तुति, दिखाई देना, ज्ञाता, वृष्टि, युद्ध करना, हितकारी १-६
पानी गिराना, वर्षा हेतु प्रार्थना ७-८
६०. अग्नि एवं मरुतों की स्तुति १-८
स्तुति, बलसंपन्न, शब्द करना, स्वर्ग का कांपना १-३
शोभा धारण करना, नित्य युवा, आह्वान, शत्रुनाश व सोमपानार्थ प्रार्थना ४-८
६१. मरुद्गण की स्तुति एवं रानी शशीयसी का वर्णन १-१९
अकेले आना, लगाम दिखना, कोड़े लगना, हितकारी, रानी शशीयसी, महानता १-६
ebook converter DEMO Watermarks*
दान का विचार, समान, मार्ग बताना, संपत्ति देना, स्तुतियां, चमकना ७-१२
बाधाहीन गति, प्रसन्न होना, स्वर्ग, धन मांगना १३-१६
रथवीति, सूचना पहुंचाने हेतु प्रार्थना १७-१९
६२. मित्र एवं मरुत् का वर्णन १-९
सूर्यमंडल, चमकीला बनाना, आकाश, नदियों का बहना १-४
अन्नस्वामी, पापत्राता, स्वर्णरथ, ५-७
लोहे की कील, विश्वरक्षक ८-९
६३. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७
रथ पर बैठना, शासन करना, आह्वान १-३
करना, घोड़े जोड़ना, भ्रमण, गरजना, यज्ञरक्षा ४-७
६४. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७
आह्वान, जाना, घर में सुख मिलने की प्रार्थना १-३
धन प्राप्ति की आशा, आह्वान ४-५
अन्नधारक, निकट आने की प्रार्थना ६-७
६५. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-६
स्तुति जानना, घूमना, रक्षार्थ प्रार्थना, उपाय बताना, रक्षार्थ प्रार्थना १-६
६६. मित्र, वरुण एवं धरती की स्तुति १-६
शत्रुनाशक, शक्ति, रक्षा हेतु स्तुति, जल बरसाना, दूरदर्शी १-६
६७. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-५
हितकारक, कल्याणकारी, भक्तरक्षक, मार्ग दिखलाना, शरण लेना १-५
६८. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-५
आह्वान, प्रशंसनीय, दानदाता, बढ़ना, रथ १-५
६९. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४
ebook converter DEMO Watermarks*
कर्मरक्षक, जलधारक, स्तुति, भूलोकधारक १-४
७०. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४
सुमति, अन्न याचना, शत्रुसंहार करने व आत्मनिर्भर बनाने की प्रार्थना १-४
७१. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-३
आह्वान, कर्म सफल बनाने व सोमपान का आग्रह १-३
७२. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-३
आह्वान, यज्ञकर्मों में लगना, सोमपान का अनुरोध १-३
७३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
आह्वान, बुलाना, लोकभ्रमण, अन्न मांगना, किरणों का बिखरना, स्तुति, अत्रि, भरण,
प्रार्थना, स्तुतियां १-१०
७४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
सेवा करना, सहायक की इच्छा, वृष्टि की प्रार्थना, युवा बनाना, आह्वान, शिरोधार्य,
विषय, हव्य १-१०
७५. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
मधु-विद्याज्ञाता, स्वर्ण रथ, अन्नयुक्त, स्तुति, हव्य देना, च्यवन ऋषि, विचित्र रूप वाले,
आह्वान, अवस्यु ऋषि, नाशहीन रथ १-९
७६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५
प्रज्वलित होना, आह्वान, रक्षार्थ प्रार्थना, घर, सौभाग्य मांगना १-५
७७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५
यज्ञधारक, तृप्त करना, दुर्गम मार्ग पार करना, संतान का पालन, सौभाग्य
मांगना १-५
७८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
आह्वान, गौरमृग, घरदाता, रक्षार्थ प्रार्थना, सप्तवध्रि ऋषि, बंद संदूक, गतिशील होने
की प्रार्थना, जरायु, जीवधारी १-९
ebook converter DEMO Watermarks*
७९. उषा की स्तुति १-१०
अश्व देने वाली, सत्यश्रवा, अंधकार हरने की प्रार्थना, स्मरण करना, स्तुति, अन्न
मांगना, स्तुति, गाएं, धन याचना, ताप न देने का आग्रह, हिंसा न करना १-१०
८०. उषा का वर्णन १-६
महती, प्रकाश फैलाना, धन स्थायी करना, भली प्रकार चलना, उपस्थित होना,
प्रकाश बिखेरना १-६
८१. सविता की स्तुति १-५
कार्यों में लगना, प्रकाश फैलाना, सीमित, मित्र बनना, श्यावाश्व ऋषि १-५
८२. सविता की स्तुति १-९
प्रार्थना, ऐश्वर्य, कामना, दरिद्रता, अमंगल भगाने की प्रार्थना, धन धारण हेतु प्रार्थना,
सेवा, प्रेरणा १-९
८३. पर्जन्य की स्तुति १-१०
गर्भधारण, भागना, वर्षायुक्त करना, गरजना-टपकना, झुकना, पालक, जल धारण
हेतु प्रार्थना, मुदित होना, स्तुतियां मिलना १-१०
८४. पृथिवी की स्तुति १-३
प्रसन्न करना, बादलों को फेंकना, वनस्पतियां धारण करना १-३
८५. वरुण की स्तुति १-८
विस्तृत करना, सोमलता का विस्तार, धरती को गीला करना, बादल शिथिल करना,
नापना, विरोधहीन स्तुति, अपराध नष्ट करने व प्रिय बनाने की प्रार्थना १-८
८६. इंद्र व अग्नि का वर्णन १-६
तर्क काटना, स्तुति, वज्र, प्रशंसनीय, अश्व हेतु स्तुति, अन्न मांगना १-६
८७. मरुद्गण का वर्णन १-९
एवयामरुत्, स्थिर होना, पुकार सुनना, बल व तेजयुक्त, अपार महिमा, विस्तृत गृह,
पाप भगाने व निंदकों को वश में करने की प्रार्थना १-९
ebook converter DEMO Watermarks*
षष्ठम मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-१३
प्रार्थना, अनुगमन, अन्न-धन हेतु स्तुति, माता-पिता, आनंददाता, स्तुति १-८
क्रांतदर्शी, सेवा, अन्न व धन के लिए प्रार्थना, सौभाग्य व धन हेतु स्तुति ९-१३
२. अग्नि की स्तुति १-११
अन्न मांगना, सेवा करना, आह्वान व घर याचना १-५
दीप्तियुक्त, पालक, अरणि में वास, ज्वालाएं, समृद्धि व गृह हेतु स्तुति ६-११
३. अग्नि की स्तुति १-८
दीर्घायु, शांत बनाना, ज्वालाएं, तीक्ष्ण, विचित्र गति, तेजस्वी, वेगशाली १-८
४. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञपूर्ण करने व अन्न हेतु स्तुति १-२
पवित्रकर्त्ता, अन्नदाता, स्तुति, अंधकारनाशक ३-६
गतिशील, शतायु हेतु स्तुति ७-८
५. अग्नि की स्तुति १-७
धनदाता, स्थापित, शत्रुनाशार्थ स्तुति, अन्न ओर धन याचना १-७
६. अग्नि की स्तुति १-७
होता, युवा, ज्वालाएं, वनदाहक, शत्रुनाश हेतु प्रार्थना, अन्न, धन, संतान याचना १-७
७. अग्नि की स्तुति १-७
उत्पत्ति, धन में वास, धन हेतु स्तुति, अमरपद दाता, सूर्य की स्थापना, उच्चस्थल, पालक १-७
८. अग्नि का वर्णन १-७
ebook converter DEMO Watermarks*
व्याप्त, व्रतरक्षक, शक्तिधारक, अर्चनीय स्वामी, अजर, पुत्र, धन याचना, रक्षार्थ
स्तुति १-७
९. अग्नि का वर्णन १-७
अंधकारनाशक, ताना-बाना, ज्ञाता, होता, अमर, प्रधानकर्त्ता, उत्सुक बुद्धि,
नमस्कार १-७
१०. अग्नि का वर्णन १-७
दीप्तिशाली, भेंट देना, समृद्धि एवं गोशाला दाता, अंधकारनाशक १-४
अन्न, धन, बल याचना, शतायु हेतु स्तुति ५-७
११. अग्नि की स्तुति १-६
यज्ञकर्त्ता, ज्वाला, अंगिरा, भरद्वाज, वेदी में वास, धन प्राप्ति व शत्रु से दूर रखने हेतु
प्रार्थना १-६
१२. अग्नि का वर्णन १-६
यज्ञस्वामी, हव्य पहुंचाने हेतु प्रार्थना, ज्ञान कराने वाली, जातवेद, सुशोभित, संतान
याचना १-६
१३. अग्नि की स्तुति १-६
धन की उत्पत्ति, धन मांगना, ज्ञानसंपन्न, संपत्ति पाना, अन्न मांगना, संतान के साथ
जीने की प्रार्थना १-६
१४. अग्नि की स्तुति १-६
शत्रु-धन की प्राप्ति, कुशल, यज्ञहीन, शत्रुनाशक, रक्षक, दीप्तिसंपन्न १-६
१५. अग्नि का वर्णन १-१९
प्रजारक्षक, स्तुत्य, भरद्वाज, एतश, पूज्य, क्रांतदर्शी, पालक, सुख याचना, यजन,
अभिलाषापूरक, यज्ञकर्ता, गृहस्वामी, सर्वव्यापक, रक्षार्थ प्रार्थना १-१५
देवप्रमुख, मंथन, आह्वान, गार्हपत्य यज्ञ १६-१९
१६. अग्नि की स्तुति १-४८
होता बनाना, हव्य, यज्ञ विधाता, यजन १-४
ebook converter DEMO Watermarks*
सुख व हेतु प्रार्थना भरद्वाज, स्तुति, दर्शनीय तेज, विद्वान्, स्तुति, बढ़ाना, धन
मांगना ५-१२
अग्नि मंथन, दध्यङ् प्रज्वलन, स्तुतियां १३-१६
अनुग्रह, दृष्टिरक्षार्थ याचना, पालक, महिमा, विस्तार करना, शत्रुनाशक, देवदूत,
पवित्रकर्मा, अन्नदाता १७-२८
जातवेद, विशेषद्रष्टा, रक्षा, याचना, स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना २९-३४
शत्रुनाश, अन्न, संतान प्राप्ति हेतु प्रार्थना, शरण लेना, तेज सींग ३५-३९
अग्नि पकड़ना, हव्य, सुखकर, आह्वान, दीप्ति संपन्न, यजन योग्य, ऋचाएं,
स्तुति ४०-४८
१७. इंद्र की स्तुति १-१५
गाएं खोजना, शत्रुरक्षक, अन्न हेतु प्रार्थना, सर्वगुणी १-४
स्थापक, दुधारू बनाना, धरती को पूर्ण बनाना ५-७
अग्रणी, वृत्रवध, वज्र बनाना, भैंसे पकाना, नदियां मुक्त करना ८-१२
स्तुतियां, बल, अन्न प्राप्ति व सौ वर्ष तक प्रसन्न रहने के लिए प्रार्थना १३-१५
१८. इंद्र की स्तुति १-१५
इच्छापूरक, सोमपानकर्त्ता, पुत्र देना, वासदाता, शत्रुनाशक १-४
बल असुर का वध, नगरों का नाश ५
वंदनीय, चुमुरि, पिप्रु, शंबर, शुष्ण व धुनि का वध, माया-नाशक, महिमा ६-१२
कुत्स, आयु एवं दिवोदास १३
धन प्राप्ति हेतु प्रार्थना, स्तोत्र के जनक १४-१५
१९. इंद्र की स्तुति १-१३
अपराजित, युद्ध संचालन, आह्वान, धनस्वामी, धन, पुत्र व पौत्र हेतु प्रार्थना १-१०
आह्वान, धन से प्रसन्नता मांगना ११-१३
२०. इंद्र की स्तुति १-१३
ebook converter DEMO Watermarks*
धनस्वामी, वृत्रसंहारक, सोम के राजा १-३
पणि की सेनाएं, शुष्ण, निमि, नगरों का नाश ४-७
सुखदाता, अपराजित, नगरों का नाश ८-१०
उशना को बढ़ाना ११
यदु व तुर्वसु को सागर पार कराना १२
धुनि व चुमुरि को सुलाना १३
२१. इंद्र की स्तुति १-१२
शूर, बुद्धिमान्, बलशाली, प्रसिद्ध कर्म १-४
अंगिरा द्वारा स्तुति ५-१०
विद्वान्, मार्ग-निर्माता ११-१२
२२. इंद्र का वर्णन १-११
सत्यभाषी, शत्रुहंता, धन याचना, असुरनाशक, शक्तिदाता, वृत्रनाशक १-६
पापों से बचाने, राक्षसों को जलाने व वज्र धारण करने हेतु प्रार्थना ७-९
संपत्ति मांगना, आह्वान १०-११
२३. इंद्र का वर्णन १-१०
वैदिक स्तुतियां १
यजमान रक्षक, निवास स्थान व पुत्रदाता २-४
वेदमंत्रों व स्तोत्रों का उच्चारण ५-६
सोमपान हेतु आग्रह, सन्मार्ग प्रेरक ७-१०
२४. इंद्र का वर्णन १-१०
स्तुति व अन्नस्वामी, शूर, बुद्धिमान्, विलक्षण कर्मकर्त्ता १-५
अन्नेच्छुक, भरद्वाजगोत्रीय ऋषि ६
शरीर वृद्धि, पर्वत का भी सुगम होना ७-८
ebook converter DEMO Watermarks*
अन्न, संतान, रक्षा याचना, सौ वर्ष तक प्रसन्न रहने हेतु प्रार्थना ९-१०
२५. इंद्र की स्तुति १-९
अन्न प्राप्ति, शत्रु से रक्षा हेतु स्तुति १-३
विवाद, सर्वजेता, हवनकर्त्ता को धन मिलना ४-६
नेता, देवों से मिला बल, निवास हेतु स्तुति ७-९
२६. इंद्र की स्तुति १-८
अन्न के लिए स्तुति १-३
वृषभ, वेतस और राजा तुजि, तुग्र वध, दिवोदास, शंबर, दभीति, चुमुरि ४-६
बल, सुख व धन मांगना ७-८
२७. इंद्र का वर्णन १-८
सोमपान, धनस्वामी, वरशिख के पुत्रों का वध, यव्यावती नदी, अभ्यवर्ती,
चायमान १-८
२८. गायों एवं इंद्र का वर्णन १-८
नाना रंगों वाली गाएं, धन देना, गायों के साथ रहना विशसन संस्कार, इंद्र बनना,
बलिष्ठ बनाने की प्रार्थना १-६
साफ पानी पीने का आग्रह, पुष्टि हेतु प्रार्थना ७-८
२९. इंद्र की स्तुति १-६
अनुग्रह, मानवहितकारी, धनदाता, दूध-दही मिला सोमरस, अनंत शक्तिशाली, हरी
ठोढ़ी १-६
३०. इंद्र की स्तुति १-५
धनदाता, असुरनाशक, मार्ग बनाना, सबसे बड़े राजा १-५
३१. इंद्र की स्तुति १-५
एकमात्र स्वामी, जल बरसाना, कुयव का वध, नगरी-नाशक, रक्षार्थ पुकारना १-५
३२. इंद्र का वर्णन १-५
ebook converter DEMO Watermarks*
स्तुतियां, मुक्त करना, नगर नाशक, कामपूरक, दक्षिणायन सूर्य १-५
३३. इंद्र की स्तुति १-५
पुत्र मांगना, अन्न मिलना, धन याचना, गो-स्वामी १-५
३४. इंद्र का वर्णन १-५
विचारधाराएं, प्रसन्न करना, सोमरस अर्पित, संग्राम-रक्षक १-५
३५. इंद्र की स्तुति १-५
यज्ञकर्म, धन याचना, गोदाता स्तोत्र, गाय व अन्न मांगना प्रार्थना १-५
३६. इंद्र का वर्णन १-५
हितकारक, बल पूजा, स्तुतियों का मिलना, धन मांगना, शत्रुधन जीतने के लिए
अनुरोध १-५
३७. इंद्र का वर्णन १-५
स्तुति, सोमरस का बहना, रथ में जुड़े घोड़े, धन, संतान व बलदाता १-५
३८. इंद्र का वर्णन १-५
सोमपान, प्रेरक स्तुतियां, मास, संवत्सर व दिन, बल, धन, रक्षा हेतु सेवा १-५
३९. इंद्र की स्तुति १-५
सोमपान का आग्रह, इंद्र-पणि युद्ध १-२
शोभन जन्म वाली, तेज से भरना, सेवक मांगना ३-५
४०. इंद्र की स्तुति १-५
अन्न याचना, सोमपान, आह्वान, सोमपान का आग्रह, आह्वान १-५
४१. इंद्र की स्तुति १-५
आह्वान, शत्रुनाश की कामना, सोमरस, आह्वान, रक्षार्थ प्रार्थना १-५
४२. इंद्र का वर्णन १-४
युद्धनेता, आह्वान, अभिलाषापूरक १-४
ebook converter DEMO Watermarks*
४३. इंद्र की स्तुति १-४
शंबर का वध, सोमपान आग्रह १-४
४४. इंद्र की स्तुति १-२४
प्रसन्नता देने की कामना १-३
शत्रुजेता, शत्रुधनहर्ता, रक्षक, ४-७
आविर्भूत होने की कामना, धन मांगना, रक्षार्थ प्रार्थना, सोमरस देना, प्रसन्न होने की
कामना, धनस्वामी, अभिलाषापूरक ८-२१
आयुध बेकार होना, अमृत मिलना व दूध धारण करना २२-२४
४५. इंद्र एवं बृहस्पति का वर्णन १-३३
तुर्वश व यदु राजा १
शत्रुओं का धन जीतना २
अनंत रक्षासाधन, बुद्धिदाता, रक्षा, समृद्धि हेतु प्रार्थना ३-६
आह्वान, हाथों में संपत्तियां ७-८
यज्ञस्वामी, अन्न व धन के लिए आह्वान ९-११
जीतने योग्य बनना १२
धन जीतना १३-१६
सुख याचना, असुरसंहारक, आह्वान १७-१९
एकमात्र स्वामी, गोपालक, आह्वान २०-२२
गायों सहित अन्न देने वाले, गाएं को प्रकट करना, गाय-घोड़ा देने वाले बनने का
अनुरोध २३-२६
निंदक, गायों का बछड़ों के पास जाना, बृबु, गाएं देना, स्तुतिपात्र, शत्रुनाशक, धन के
लिए प्रेरणा का अनुरोध २७-३३
४६. इंद्र की स्तुति १-१४
आह्वान, स्तुति, पालक १-३
ebook converter DEMO Watermarks*
संतान, अन्न की प्राप्ति व शत्रु की हार हेतु स्तुति ४-६
धन, बल व अन्न की प्राप्ति व शत्रु को जीतने हेतु प्रार्थना ७-९
आक्रमण से बचाने व शत्रु भगाने हेतु स्तुति १०-१२
घोड़ों को आगे बढ़ाने हेतु स्तुति १३-१४
४७. सोमरस का वर्णन एवं इंद्र की स्तुति १-३१
मधुर सोम, मदमत्त होना, वाणी का तेज होना, जल, दृढ़ करना, स्वर्ग धारण
करना १-५
धन देने का आग्रह, भरोसा, अन्न-धन के लिए प्रार्थना ६-९
बुद्धि देने की प्रार्थना, आह्वान, रक्षक १०-१२
शोभन, मिलाना, आगे-पीछे पैर रखना, सेवकों को बुलाना, मित्र १३-१७
रथ, घोड़े, मार्गदर्शन हेतु स्तुति १८-२०
शंबर व वर्ची का वध, प्रस्तोक, दिवोदास २१-२३
दान, पूजा, रथ, दिव्य रथ, दुंदुभि २४-२९
दृढ़ता की याचना, गाएं लाने की प्रार्थना ३०-३१
४८. अग्नि का वर्णन १-२२
प्रिय, रक्षक, अभिलाषापूरक, हव्य अन्न के लिए स्तुति १-४
प्रकट होना, धन हेतु स्तुति, गृहपति, धन के नेता, पालन हेतु प्रार्थना ५-१०
बछड़ों को अलगाना, आना, दुधारू गाय, अन्न व धन के लिए मरुतों से
याचना ११-१५
शत्रुओं को भगाने, निंदकों का नाश करने हेतु प्रार्थना, मित्रता व अनुग्रह के लिए पूषा
की स्तुति १६-१९
मार्गदर्शिका वाणी २०
बल धारण, स्वर्ग व धरती की उत्पत्ति २१-२२
४९. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
ebook converter DEMO Watermarks*
बलसंपन्न मित्र, प्रेरणा १-२
सूर्य की दो कन्याएं—रात और दिन ३
धन हेतु वायु की स्तुति ४
अभिलाषा पूर्ण करने हेतु अश्विनीकुमारों की स्तुति ५
देवों की स्तुति, सोने की सींग वाली गाएं ६-८
अन्नधारक ९-१०
वृक्षों को सींचने हेतु प्रार्थना ११
स्तुति १२
तीन लोकों को नापना, याचना १३-१४
अन्न व घर मांगना १५
५०. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
आह्वान, अग्निजिह्व, बल याचना १-३
आह्वान, प्राणियों का कांपना ४-५
अन्न हेतु इंद्र की स्तुति ६
हितकारी जल ७
धनदाता ८
पुत्र-पौत्र से युक्त करने हेतु आग्रह ९
युद्ध से बचाने के लिए प्रार्थना १०
धन प्राप्ति हेतु प्रार्थना ११
अन्न बढ़ाने हेतु आग्रह १२
रक्षा हेतु देवों की स्तुति १३-१५
५१. विभिन्न देवों का वर्णन १-१६
सूर्य, मित्र व वरुण का तेज १
ebook converter DEMO Watermarks*
अभिलाषापूरक, स्तुति २-३
सज्जनपालक, सुख याचना ४-५
वृक व वृकी ६
शत्रुनाश की प्रार्थना ७
पापों का दूर होना, झुकना ८-९
दुर्गुणों के नाश हेतु वरुण, मित्र अग्नि की स्तुति १०
मार्गदर्शक, रक्षक बनने व भवन हेतु याचना ११-१२
शत्रु को दूर रखने व सुख देने के लिए स्तुति १३
पणि को मारने के लिए सोम से प्रार्थना १४
सुख देने व मार्ग सुरक्षित बनाने के लिए देवों की स्तुति १५
शत्रुनाश व धन प्राप्ति का मार्ग १६
५२. विभिन्न देवों का वर्णन १-१७
यज्ञ को अयोग्य मानना १
विरोधियों को जलाने हेतु प्रार्थना २
निंदा उद्धारक ३
रक्षा के लिए उषा, नदियों, पर्वतों एवं पितरों से प्रार्थना ४
सूर्य दर्शन हेतु अग्नि से प्रार्थना ५
रक्षा हेतु पुकार ६
विश्वेदेव का आह्वान ७
घृतमिश्रित हव्य ८
विश्वेदेव, दूध स्वीकारने हेतु प्रार्थना ९-१०
हव्य स्वीकारने का अनुरोध ११
यज्ञ पूरा करने हेतु याचना १२
ebook converter DEMO Watermarks*
यज्ञ के भोक्ता १३
सुखपूर्वक रहने की कामना १४
जीवन भर अन्न प्राप्ति हेतु प्रार्थना १५
संतानयुक्त अन्न हेतु अग्नि और पर्जन्य से आग्रह १६
तृप्त होने के लिए विश्वेदेव की स्तुति १७
५३. पूषा की स्तुति १-१०
पूसा को सामने करना, मानव हितकारी, प्रेरणा, यज्ञ पूरा करने के लिए प्रार्थना १-४
पणियों को घायल करने व उन्हें वश में करने की प्रार्थना ५-७
पणियों के हृदयों पर निशान बनाने हेतु आग्रह, सुखकामना ८-९
सेवक देने वाला बनाने का अनुरोध १०
५४. पूषा की स्तुति १-१०
कृपा चाहना १-२
चक्ररूप आयुध, हव्य द्वारा सेवा ३-४
घोड़े के रक्षक व अन्नदाता ५-६
गायों की सुरक्षा, धन की याचना, अमर करने हेतु स्तुति ७-९
गाएं लौटाने हेतु आग्रह १०
५५. पूषा का वर्णन १-६
धन याचना, दीप्तिशाली १-३
उषा के प्रेमी, स्तुति ४-५
रथ में जुड़े बकरे ६
५६. पूषा का वर्णन १-६
घृतमिश्रित जौ का सत्तू १
सज्जनपालक, स्वर्णरथ, धन के लिए स्तुति २-४
ebook converter DEMO Watermarks*
गायों के अभिलाषी ५
पापरहित व धनयुक्त रक्षा ६
५७. इंद्र व पूषा की स्तुति १-६
आह्वान १
सोमरस, जौ का सत्तू २
पूषा का वाहन बकरा व इंद्र का वाहन घोड़ा ३
वर्षा में सहायक पूषा ४
कृपा का सहारा, कल्याण के लिए आह्वान ५-६
५८. पूषा का वर्णन १-४
रात-दिन भिन्न रूप वाले, आकाश में घूमना, सोने की नाव, अन्नस्वामी १-४
५९. इंद्र एवं अग्नि की स्तुति १-१०
कार्यों का वर्णन, जन्म की महिमा, आह्वान, यज्ञवर्धक १-४
भांति-भांति से चलने वाले घोड़े ५
अचरण उषा ६
धनुष फैलाना ७
शत्रुसेना ८
पुष्टकारी धन ९
सोमपान हेतु आह्वान ९-१०
६०. इंद्र एवं अग्नि की स्तुति १-१५
सेवा, युद्ध, वृत्रहंता व अग्नि का आह्वान १-५
सज्जनपालक, सुखदाता, आह्वान, स्तुति, जल बरसाना, घोड़े, आह्वान ६-१५
६१. सरस्वती का वर्णन १-१४
ऋण से छुटकारा, पर्वत भेदन, असुरनाशार्थ प्रार्थना, रक्षा याचना १-४
ebook converter DEMO Watermarks*
स्तुति, धन याचना, अपराजित बल ४-८
सहायता मांगना ९
सात बहिनें १०
निंदकों से रक्षार्थ प्रार्थना ११
लोकों में व्याप्त, प्रधान सरस्वती, पीड़ा न देने की प्रार्थना के लिए स्तुति १२-१४
६२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
शत्रु निवारक, मरुभूमि के पार, संपन्न बनाना, घोड़े जोड़ना, सुखदाता १-५
निकालना, रथस्वामी, महान् क्रोध ६-८
शस्त्र फेंकना, रथ, गोशाला ९-११
६३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
आहूत, सोमपानार्थ, घृतस्वामी १-४
सूर्यपुत्री, सूर्या की शोभा ५-६
तेज रथ, गाय, अन्न हेतु स्तुति ७-८
स्वर्णरथ ९
भरद्वाज, धन हेतु स्तुति १०-११
६४. उषा की स्तुति १-६
कल्याणी, सुशोभित, अंधकारनाशक, धन हेतु स्तुति, धन ढोना, दाता १-६
६५. उषा की स्तुति १-६
स्वर्गपुत्री, रथ वाली, अन्न, धन व रत्न हेतु स्तुति १-४
गोसमूह प्राप्ति, धन हेतु स्तुति ५-६
६६. मरुतों का वर्णन १-११
सफेद जल, रथ, रुद्रपुत्र, पापनाशक, अभिलाषापूरक मध्यमा वाक्, सारथिहीन
रथ १-७
ebook converter DEMO Watermarks*
पुत्र, पौत्र व गोरक्षा, पृथिवी का कांपना अजेय, स्तुति ८-११
६७. मित्र व वरुण की स्तुति १-११
उत्तम नियंता, घर मांगना, वश में करने हेतु स्तुति, सत्ययुक्त, जीतना, बल धारण, जल
भरना १-७
मायाहीन, यज्ञहीन को नष्ट करने, अन्य देवों के साथ न चलने व घर देने के लिए
प्रार्थना ८-११
६८. इंद्र व वरुण की स्तुति १-११
सोमरस बनाना, शत्रुहिंसक, रक्षक, बढ़ना, धन व पुत्र प्राप्ति १-६
रक्षित धन हेतु याचना व स्तुति ७-८
अजर वरुण ९
सोमपान हेतु प्रार्थना १०-११
६९. इंद्र व विष्णु की स्तुति १-८
हवि देना १
स्तुतियां प्राप्त होने, उनको सुनने, महान कर्म करने हेतु स्तुति २-५
आधार, नशीला सोम, सदा विजेता ६-८
७०. द्यावापृथ्वी का वर्णन १-६
प्रसिद्ध, पवित्र कर्म वाली, भुवन की निवास १-३
सुख याचना, जल टपकाना, संतान, बल व धन मांगना ४-६
७१. सविता की स्तुति १-६
भुजाएं, द्विपद व चतुष्पद प्राणी १-२
घर की रक्षा, अन्न, आनंद व धन हेतु स्तुति ३-६
७२. इंद्र एवं सोम की स्तुति १-५
भूत निर्माण, प्रार्थना, वृत्रहंता, दूध धारण, कल्याणकारी १-५
ebook converter DEMO Watermarks*
७३. बृहस्पति का वर्णन १-३
अंगिरापुत्र, नगर जलाना, शत्रुनाशक बृहस्पति का वर्णन १-३
७४. सोम एवं रुद्र की स्तुति १-४
रत्नधारक, अन्न देने, पाप भगाने व रक्षा हेतु स्तुति १-४
७५. कवच, धनुष आदि युद्ध सामग्री का वर्णन १-१९
रक्षार्थ प्रार्थना, जीतने की कामना, डोर का कान तक पहुंचना, रक्षा याचना, तरकस,
घोड़ों को वश में करना, कुचलना, बढ़ाना १-८
आश्रय योग्य, रक्षार्थ प्रार्थना ९-१०
बाण, सुख याचना, चोट करना, रक्षा करना, नमस्कार, शत्रुनाश हेतु प्रार्थना ११-१६
सुख याचना १७
कवच से ढकना १८
मंत्र ही रक्षा कवच है १९
सप्तम मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-२५
अरणि, पूजनीय, ज्वालायुक्त, संतानदाता कुशल, पुत्र-पौत्र वाला धन मांगना, राक्षसों
को जलाना, प्रसन्न होना, आह्वान १-९
स्तुति १०
प्रजायुक्त घर, रक्षार्थ आग्रह ११-१३
सेवा करना, रक्षक परिक्रमा १४-१६
धनस्वामी होने की कामना, हव्य, सत्ययुक्त १७-१९
अन्न देने, सहायक बनने, मृत्यु से छुड़ाने हेतु प्रार्थना, धनी होना, पूर्ण आयु वाला होने
ebook converter DEMO Watermarks*