ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
४७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
धन याचना, स्तुति, यज्ञसिद्ध की इच्छा, रक्षार्थ प्रार्थना १-५
सुदास, कुशों पर बैठने व सोमपान का आग्रह ६-१०
४८. उषा का वर्णन १-१६
अन्न व पशु मांगना, पालिका १-५
भिक्षुक व पक्षी, समीप जाना ६-७
शोषकों को भगाना, स्तुति, अन्न याचना ८-१६
४९. उषा का वर्णन १-४
लाल गाएं, आगमन, कामों में लगाना, अंधकार का नाश १-४
५०. सूर्य की स्तुति १-१३
सूर्य का जाना, नक्षत्रों का भागना, किरणें, स्वर्गलोक, स्तुति १-७
घोड़े व सात घोड़ियां ८-९
ज्योतियुक्त, रोगनाशार्थ प्रार्थना १०-१३
५१. इंद्र की स्तुति १-१५
बलवान, रक्षक, वर्षक, स्तुति, मायावियों को हराना, कुत्स, शंबर, वज्र व यज्ञ के
विरोधियों का नाश १-८
बभ्रु, घोड़े, शुक्राचार्य, शार्यात, कन्या, अश्व, रथ, धन देना, विजयी बनाना ९-१५
५२. इंद्र की स्तुति १-१५
रक्षार्थ प्रार्थना, शक्ति व निमंत्रण, पूर्णता, सहायक, घायल वृत्र १-६
त्वष्टा, वृत्रनाश, आकाश में सूर्य, वृत्रवध, बल ७-१२
पालक, अर्चना १३-१५
५३. इंद्र की स्तुति १-११
धन पर अधिकार १
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कामना पूर्ण हेतु प्रार्थना, गाय घोड़े, मांगना १-५
उपद्रव शांत करना ६
असुर नमुचि, करंज एवं पर्णय, राजा सुश्रवा ७-१०
दीर्घजीवन की प्राप्ति ११
५४. इंद्र की स्तुति १-११
शब्दायमान व वृष्टिकर्त्ता, स्तुति १-३
शंबर, नगरों का विनाश, अतुलनीय, बुद्धिबल, कामनाएं ४-९
पेट में मेघ १०
रोग मिटाने, धन, संतान व अन्न देने की प्रार्थना ११
५५. इंद्र का वर्णन १-८
वज्र रगड़ना, सोमरस के लिए दौड़ना, आगे रहना, स्तुति, श्रद्धा व कर्मों का
होना १-८
५६. इंद्र का वर्णन १-६
सोमपान, स्तोत्र का पहुंचना, शक्तिशाली मेघों से अलग करना १-६
५७. इंद्र की स्तुति १-६
बल हरना असंभव, इच्छापूरक, शौर्य की स्तुति १-६
५८. अग्नि का वर्णन १-९
अंतरिक्षलोक, ज्वालाएं, धनदाता, दाहक, डरना १-५
पूजनीय, सुखदायक, धन याचना व पापों से मुक्ति ६-९
५९. अग्नि की स्तुति १-७
धारक, वनवास १-३
स्तुति ४-७
६०. अग्नि का वर्णन १-५
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भृगुवंशी, सेवा एवं स्तुति १-५
६१. इंद्र का वर्णन १-१६
अन्न देना व हव्य विसर्जन १-४
अन्न लाभार्थ मंत्र बोलना ५
वज्र, वृत्रवध, शत्रुनाश, फल मिलना ६-११
पशु काटना, वृत्रवध, प्रशंसा १२-१४
ऋषि नोधा, एतश का रक्षण व ऋषियों की उन्नति १५-१६
६२. इंद्र का वर्णन १-१३
स्तोत्र, सरमा कुतिया को अन्न मिलना १-३
मेघों का डरना, अंधकार-नाश, नदियां भरना ४-६
वश में करना ७
रात काली व उषा उजली ८
काली व लाल गायों का सफेद दूध ९
स्तुति १०-१३
६३. इंद्र की स्तुति १-९
भय, रथ, शुष्ण असुर, कुत्स, शत्रु-असुरसंहारक, नाश १-७
धन व अन्न विस्तार हेतु प्रार्थना ८-९
६४. मरुद्गण का वर्णन १-१५
स्तुतियां, मरुद्गण, कंपन, सज्जित, वश में करना, नाश १-६
लाल घोड़ी, वृक्ष-भक्षण, गर्जन, बैठना, आयुधधारक ७-११
धन व पुत्र-प्राप्ति १२-१५
६५. अग्नि का वर्णन १-१०
समीप आना, रोकना असंभव, प्रकाशमान १-१०
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६६. अग्नि का वर्णन १-१०
अन्न मांगना, आहुतियां १-१०
६७. अग्नि का वर्णन १-१०
कृपा, अग्निप्राप्ति, अन्नस्वामी, पशुप्रिय स्थानों के रक्षार्थ प्रार्थना १-६
स्तुति, पूजा एवं कर्म ७-१०
६८. अग्नि का वर्णन १-१०
तेज द्वारा रक्षा १-४
धन व पुत्रकामना, आज्ञापालन ५-१०
६९. अग्नि का वर्णन १-१०
तेजस्वी, सुखकारी, आनंदकारी, सुखदाता, हव्य वहन १-१०
७०. अग्नि का वर्णन १-११
अन्न याचना, रक्षण, पालन, सहायक १-११
७१. अग्नि का वर्णन १-१०
सेवा, शक्ति, दूत, कुशल १-५
नमस्कार से अन्न वृद्धि ६-७
प्रेरणा, मित्र व वरुण ८-९
बुढ़ापा भगाने का प्रयत्न १०
७२. अग्नि का वर्णन १-१०
अमृत व धन मिलना, मरुद्गण भी दुःखी, नाम व शरीर मिलना १-४
पूजन, रक्षक, हविवहन, भक्षण, जल बहाना, ज्वालाएं फैलाना ५-१०
७३. अग्नि का वर्णन १-१०
अन्नदान, दुःखत्राता, धनदाता, दूध पिलाना, निशा, संसार-रक्षक, शत्रुपुत्रों का वध व
कामना १-१०
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७४. अग्नि का वर्णन १-९
उपस्थित देव, धनरक्षक शोभा बढ़ाना, हव्यदान से धन, अन्न, ऐश्वर्य व शक्ति
लाभ १-९
७५. अग्नि की स्तुति १-५
स्तुति, बंधु, प्रिय मित्र एवं फलदाता १-५
७६. अग्नि की स्तुति १-५
प्रसन्नता के उपाय, पूजा, यज्ञरक्षा, संतान आदि की याचना १-५
७७. अग्नि का वर्णन १-५
तेजस्वी, हव्य देना, तेजस्वी, सोम को पीना १-५
७८. अग्नि की स्तुति १-५
गुणप्रकाशक स्तोत्र, गौतम ऋषि द्वारा स्तुति १-५
७९. अग्नि का वर्णन १-१२
मेघों का कांपना व बरसना, भिगोना १-३
धन, अन्न व रक्षार्थ याचना ४-१२
८०. इंद्र की स्तुति १-१६
अहि को पीटना १
श्येन बनने वाली गायत्री २
प्रभुत्व का प्रदर्शन, भयभीत, यज्ञकर्म समर्पित ३-१६
८१. इंद्र का वर्णन १-९
रक्षार्थ प्रार्थना, सेना के समान, गर्वहंता, अतुलनीय, धन, बुद्धि व शौर्य की
याचना १-९
८२. इंद्र की स्तुति १-६
स्तुति सुनने समीप जाना १-४
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प्रेयसी के पास जाने हेतु आग्रह ५-६
८३. इंद्र का वर्णन १-६
धन की प्राप्ति १
एक कन्या अनेक वर २
शक्ति मिलना, पूजन, प्रसन्न होना ३-६
८४. इंद्र का वर्णन १-२०
आह्वान, प्रसन्न, घोड़े, धन मिलना, छतरियां कुचलना १-८
अधिकार प्रदर्शन ९-१२
दधीचि १३
अश्वों की प्रशंसा १४-१६
रक्षा व प्रशंसा १७-२०
८५. मरुद्गण का वर्णन १-१२
अलंकार प्रिय, शक्तिशाली होना १-३
बुंदकियों वाली हरिणियां ४-५
घोड़े व निवास स्थल, भय ६-८
वृत्रवध ९
वीणा वादन, गौतम, सुख याचना १०-१२
८६. मरुद्गण की स्तुति १-१०
सोमपान व हव्य वहन १-७
पसीने से नहाना ८
उपद्रव, राक्षसों का नाश ९-१०
८७. मरुद्गण की स्तुति १-६
चमकना, वृष्टि, पर्वत को कंपाना, यज्ञपात्र, धारण, स्थान १-६
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८८. मरुद्गण का वर्णन १-६
अन्न लाना, कल्याण, आयुध, कुआं उठाना, स्तुति १-६
८९. विश्वेदेव का वर्णन १-१०
आयुवृद्धि, धन व ओषधि हेतु याचना, कल्याण १-६
सफेद बूंदों वाले घोड़े व नाना वर्ण की गाएं ७
मानवों की आयु सौ वर्ष तय ८-९
जन्म और उसका कारण १०
९०. विश्वेदेव का वर्णन १-९
गंतव्य, धन व सुख लाभ १-३
मार्ग व मधु वर्षा ४-६
आकाश व देवों द्वारा सुख ७-९
९१. सोम का वर्णन १-२३
धन, फलदाता, सुधारक १-३
हव्य लेने हेतु प्रार्थना ४-५
जीवनदायिनी ओषधि व धन ६-७
दुःख से बचाने की प्रार्थना ८-९
यज्ञ, संपत्ति की वृद्धि व हृदय में वास १०-१३
अनुग्रही व हितकारी, अन्न कामना १४-१८
पुत्ररक्षक, शास्त्रज्ञ, पुत्रदाता १९-२०
शत्रुजेता, अंधकारनाशक, स्वामी २१-२३
९२. उषा एवं अश्विनीकुमारों का वर्णन १-१८
अंधकारनाशक, पहले तेज पूर्व में १-६
गोयुक्त अन्न-धन की याचना ७-८
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पश्चिम में तेज ९
पक्षियों की हिंसा १०
तेज का विस्तार, धन व सौभाग्य मांगना ११-१५
धन व ज्योति मिलना, आरोग्य व सुखदाता १६-१८
९३. अग्नि एवं सोम की स्तुति १-१२
सुख, गाएं, अश्व, पुत्र-पौत्र की याचना १-३
उपकारी सूर्य ४
नक्षत्र धारण व धरती का विस्तार १-६
अन्न भक्षण, पाप से बचाने की प्रार्थना ७-८
अन्य देवों से अधिक प्रसिद्धि ९
धन मांगना १०-१२
९४. अग्नि की स्तुति १-१६
कल्याण, ईंधन बटोरना, महान्, पुरोहित, अंधकारनाशक, हिंसा से बचाने की प्रार्थना,
वन घेरना, पक्षियों का डरना, संपत्तियों में निवास, आहूत १-१४
समृद्ध बनाना, आयुवृद्धि की कामना १५-१६
९५. अग्नि का वर्णन १-११
रात-दिन के पुत्र, यशस्वी, व्यापक, ऋतुविभाजक, जल उत्पत्ति का कारण, धरती व
आकाश का डरना १-५
बलों का स्वामी, किरण के समान, अन्न व धन की प्राप्ति ६-११
९६. अग्नि का वर्णन १-९
वायु व जल १
धारण करना २-७
धन व अन्न की कामना ८-९
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९७. अग्नि की स्तुति १-८
पूजा से पाप नष्ट एवं रक्षा १-६
पालनार्थ याचना ७-८
९८. अग्नि का वर्णन १-३
प्रातःकाल सूर्य से मिलना १
दिवस रात्रि में शत्रु से बचाव २
यज्ञ सफलता हेतु प्रार्थना ३
९९. अग्नि का वर्णन १
दुःखों व पापों से पार लगाने की प्रार्थना १
१००. इंद्र का वर्णन १-१९
रक्षक बनने का आग्रह १
सूर्य की चाल पाना असंभव २
मरुद्गण की सहायता से रक्षक बनना ३-१५
मानव सेना को इंद्र के अश्वों द्वारा जानना १६
वृषागिरी के पुत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति १७
शत्रुओं, राक्षसों का वध, भूमि, सूर्य व जल का बंटवारा १८
इंद्र पूजन का आग्रह १९
१०१. इंद्र का वर्णन १-११
कृष्ण असुर की पत्नियां, वृत्र, शंबर, पिप्रु, आह्वान, स्वामी १-६
मध्यमा वाणी, उदित होना, सत्यधन, हवि देना, उपजिह्वा खोलने का आग्रह,
अन्नपूजन ७-११
१०२. इंद्र की स्तुति १-११
स्तुति, सूर्य व चंद्र का घूमना, रथ, शत्रु-शक्ति, अव्याकुल व जयशील, असीमित ज्ञान,
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स्तुति १-७
संसार वहन में समर्थ, शत्रुनाशक पुत्र मांगना, आह्वान, अकुटिल गति ८-११
१०३. इंद्र का वर्णन १-८
ज्योति मिलन, वृत्रवध, गमन, समूह निर्माता १-४
धन, प्रसन्न होना, शुष्ण, पिप्रु आदि का नाश ५-८
१०४. इंद्र का वर्णन १-९
वहन, समीप जाना, शिफा, अंजसी, कुलिशी, वीरपत्नी
नामक नदियां, कुयव असुर गर्भस्थ संतान, श्रद्धा, भोग्य पदार्थ, सोमपान ६-९
१०५. विश्वेदेव का वर्णन १-१९
चंद्रमा, प्रसवपीड़ा, पूर्वपुरुष, देवदूत, तीनों लोकों मे वर्तमान, पापबुद्धि शत्रु, मानसिक
कष्ट, सौतें, किरणों की स्तुति १-९
प्रशंसनीय स्तोत्र, भेड़िए को रोकना, नवीन बल, बंधुता, परमज्ञानी, मननीय स्तुति,
अतिक्रमण असंभव, त्रित, लाल वृक, अनुग्रह १०-१९
१०६. विश्वेदेव का वर्णन १-७
मार्ग, शोभनदानयुक्त देव, यज्ञवर्धक द्यावा-पृथ्वी, रक्षार्थ प्रार्थना, अन्न याचना १-४
शक्ति, वृत्रहंता, जागरूक ५-७
१०७. विश्वेदेव का वर्णन १-३
अनुग्रह याचना, स्तुत देव, रक्षार्थ प्रार्थना १-३
१०८. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१३
रथ, परिमाण, संयोजन, कुश फैलाना, मित्रता, श्रद्धा, आग्रह, यदु, तुर्वश, अनु आदि
के बीच स्थित होना, धरती-आकाश १-९
कामवर्षक, सोमपान, प्रसन्न होना, आदर १०-१३
१०९. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-८
स्तुति, जामाता, कन्यालाभ, परंपरा, हथेलियां १-४
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बलप्रदर्शन, महान्, ब्रह्मलोक, असुरनाशक ५-८
११०. ऋभुगण की स्तुति १-९
स्तोत्र, घर जाना, साधन, अमरता, अधिकार १-९
१११. ऋभुगण का वर्णन १-५
हरि नामक दो घोड़े बनाना, निवास, अन्नपूजन, आह्वान, विजयी बाज १-५
११२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५
शंख बजाना, ज्ञानियों की रक्षा, शासन, व्यापक, रेभ व वंदन ऋषि, कण्व, भुज्यु,
कर्कंधु, वय्य, पृश्निगु, पुरूकूत्स, ऋजाश्व, श्रोण, वसिष्ठ, कुत्स, श्रुतर्य, नर्य विपश्चला,
वश ऋषि १-१०
दीर्घश्रवा, कक्षीवान्, त्रिशोक, मांधाता, भरद्वाज, दिवोदास, पृथि, शंयु, अत्रि, ऋषि
पठर्वा, स्तोत्र, विमद, अधिगु व ऋतुस्तुभ ११-२०
कृशानु, पुरुकुत्स, मधु देना, घोड़े, कुत्स, तुर्वीति आदि, आह्वान, स्तुति २१-२५
११३. उषा एवं रात्रि का वर्णन १-२०
उत्पत्ति स्थान, विचरण, एक मार्ग, नेत्री, भुवनों का प्रकाशन, अभीष्ट, अधीश्वरी, चेतन
बनाना, कल्याण, अनुकरण १-१०
देखना, द्वेषियों को हटाने वाली, तेज से विचरना, लाल रथ से आना, तेज से बढ़ना,
अन्न बढ़ाना, धनस्वामिनी उषा, अश्व देने वाली, स्तोत्र की प्रशंसा,
कल्याणकारी ११-२०
११४. रुद्र की स्तुति १-११
स्तुतियां, मनु, सुख इच्छा, कृपादृष्टि, दृढ़ांग, स्तुति वचन बोलना १-६
शरीर का नाश, बुलाना, रक्षार्थ प्रार्थना, हनन का साधन दूर रखने व स्तुति के आदर
हेतु आग्रह ७-११
११५. सूर्य का वर्णन १-६
जंगम-स्थावर, स्तुति, परिभ्रमण, अंधकार फैलाना, अंधेरा धारण करना, पाप से
बचाने की प्रार्थना १-६
११६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५
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किशोर विमद, विजय, तुग्र, भुज्यु, रथ, सागर, पेदु, कक्षीवान्, कारोतर पात्र, अग्नि
बुझाना, यंत्रपीडागृह, गौतम, च्यवन, वंदन, दध्यंग ऋषि, बुलाना, वध्रिमती,
हिरण्यहस्त, १-१३
वर्तिका, विश्पला, ऋजाश्व, कांति पाना, स्तुति, यज्ञ के भागों का अर्पण
लौहरथ १४-२०
शत्रुवध, जल उठाना, स्तुति, रेभ, कर्मों का वर्णन २१-२५
११७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५
सेवा, घर जाना, पूजित, रेभ, वंदन, प्रतिज्ञा, घोषा, नृषदपुत्र, पेदु, वीरकार्य १-१०
भरद्वाज, कामवर्षक, च्यवन, तुग्र, भुज्यु, विश्वाच, ऋजाश्व, मेष को काटना, आह्वान,
दुधारू बनाना, माहात्म्य, घोड़े का सिर, अनुग्रह बुद्धि, जीवनदान, वीर कर्मों का
बखान ११-२५
११८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
रथ, पुत्रादि, दरिद्रतानाशक, तेज गति वाले, सूर्यकन्या, वंदन ऋषि, गाय, च्यवन,
अत्रि, वर्तिका, विश्पला १-८
पेदु, आह्वान ९-११
११९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
रथ, ऊर्जानी, जयशील, भुज्यु, दिवोदास १-४
कुमारी का पति, अत्रि, शंयु, वंदन ऋषि, युवा बनाना, कामदेव, कामना, दधीचि,
पेदु ५-१०
१२०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२
मार्ग, स्तोत्र, वषट्कार, बुद्धि, कक्षीवान्, ऋजाश्व, वृक, अगम्य स्थान १-८
पोषण, अश्वरहित रथ, सोमपान, घृणा ९-१२
१२१. इंद्र का वर्णन १-१५
यज्ञ में आना, गाएं निकालना, आकाश धारण, दिवस का प्रकाशन, सोमपान १-८
ऋभु, शुष्ण, मेघ, वृत्र, उशना, एतश, पाप, वृद्धि ९-१५
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१२२. विश्वेदेव का वर्णन १-१५
स्तुति, उषा, अन्न, कक्षीवान्, घोषा, नियमन १-७
स्तुति, यक्ष्मा, निडर, प्रशंसा, सोम, राजा इष्टाश्व, इष्टरश्मि, स्वर्णाभूषण धारण करना,
राजा मशशरि व जयशील अयवस ८-१५
१२३. उषा की स्तुति १-१३
अंधकारनाश, पहले जागना, प्रकाश-अंश, घर जाना, नेत्री, धन दर्शाना, पदार्थ
छिपाना, आगे रहना १-८
मिलना, स्पष्ट करना, दर्शनीय, कल्याणकारी, अनुकूलता ९-१३
१२४. उषा का वर्णन १-१३
प्रकाश, वियोग, दिशाएं नष्ट न करना, नोधा ऋषि, सुंदर, प्रसिद्ध, निर्मल, दांत, प्रकाश
करना १-८
बहिन, पणि, लाल बैल जोड़ना, पक्षियों का उड़ना, उन्नति व वृद्धि की प्रार्थना ९-१३
१२५. दान का वर्णन १-७
राजा स्वनय, कक्षीवान्, सोमपान, घृतधाराएं, संतोष १-५
अमर बनना, वृद्धावस्था ६-७
१२६. भावयव्य आदि के दान का वर्णन १-७
स्वनय, कक्षीवान्, रथ देना, लाल घोड़े, गाएं लेना, लोमशा १-७
१२७. अग्नि का वर्णन १-११
अनुसरण, यजनयोग्य, शत्रु, सारवान हव्य, अन्न ग्रहण, पूजनीय, मंथन, हवन १-८
जरा निवारण, स्तुति, परमबली ९-११
१२८. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञवेदी, मातरिश्वा, चारों ओर चलना, अतिथि १-४
हव्य देना, स्वर्ग, पालक, रमणीय ५-८
१२९. इंद्र की स्तुति १-११
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स्तुति स्वीकारना, गतिशील, मेघ का भेदन, शत्रुसंहार, जगत्पालक, निंदकों का
वध १-६
स्तुतियां, शत्रुसेना का नाश, मिलना, महिमावान, रक्षक ७-११
१३०. इंद्र की स्तुति १-१०
आह्वान, सोमरस, सोम व पणियों को खोजना, शत्रुनाश, नदी निर्माण, प्रशंसा, राजा
दिवोदास, शंबर १-७
कृष्ण, उशना, स्तुति ८-१०
१३१. इंद्र की स्तुति १-७
नत होना, सेना के आगे रखना, यज्ञ, शत्रु-नगर विनाश, सागर को छीनना, सिंहनाद,
असाधारण, कान १-७
१३२. इंद्र का वर्णन १-६
अन्न लाना, स्वर्ग का मार्ग, वृष्टि, गाएं छुड़ाना, इंद्रलोक, शत्रु-नाश १-६
१३३. इंद्र की स्तुति १-७
धरती को जानना, बैरीभक्षक, शक्ति का नाश, शत्रु-नाश, पीले पिशाच, घिरा रहना,
अन्नस्वामी बनना १-७
१३४. इंद्र की स्तुति १-६
रथ, रुचि देख चलना, सावधान करना, अमृत बरसना, समीप जाना, स्तुति, सोम
योग्य १-६
१३५. वायु की स्तुति १-९
आह्वान, अनुग्रह, बुलाना, अन्नभक्षण, सोम १-५
कुश, शब्द होना, आहुति, पुरोडाश, चाल न रुकना ६-९
१३६. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-७
बल, यज्ञ में जाना, यज्ञस्वामी, शोभित, नमस्कार, प्रसन्न करना १-७
१३७. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-३
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कूटना, प्रस्तुत, निचोड़ना १-३
१३८. पूषा की स्तुति १-४
बल, प्रशंसनीय घोड़े, धन याचना, स्तोत्र १-४
१३९. पूषा की स्तुति १-११
अग्नि, जल देना, श्लोक, रथ, कर्मरूप, स्तुतियां, दुहना १-७
प्रकाशयुक्त शक्ति, पितर, आवाज, महिमा ८-११
१४०. अग्नि का वर्णन १-१३
यज्ञवेदी, धान्य, यजमान, उपयोगी, प्रकाश, लकड़ियां, तेजोमय बनाना १-७
आलिंगन, गमन, दानाभिलाषी, तेज, नाव, उषाएं ८-१३
१४१. अग्नि का वर्णन १-१३
दृढ़ता, धरती पर रहना, उत्पत्ति, लताओं का प्रवेश, चढ़ना, पूजन, स्तुतियां, भागना,
उत्पत्ति १-९
हव्य, पुत्र देना, स्वर्ग, स्तुति १०-१३
१४२. अग्नि का वर्णन १-१३
यज्ञ, तनूनपात, सींचना, स्तुति, यज्ञवर्धक, यज्ञपावक, कुश, फलसाधक, भारती,
वाक्, सरस्वती, पुष्टि, हव्य, स्वाहा १-१३
१४३. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञ, मातरिश्वा, चिनगारियां, शत्रुसंहार १-५
स्तुति, बुद्धि, मंगलकारी ६-८
१४४. अग्नि का वर्णन १-७
प्रज्ञा, जल, मिलाना, अजर १-४
प्रकाशमान, स्वामी, आश्रयदाता ५-७
१४५. अग्नि का वर्णन १-५
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प्रशासक, सहारा, स्तुति, कर्म ज्ञान देना १-५
१४६. अग्नि का वर्णन १-५
मस्तक, व्याप्त, ज्ञानधारक, अजीर्ण, दर्शनीय १-५
१४७. अग्नि की स्तुति १-५
लपटें, वंदना, दीर्घतमा, हृदय, स्तोता १-५
१४८. अग्नि का वर्णन १-५
बढ़ाना, स्तोत्र, स्तुतियां, दीप्त, तृप्ति १-५
१४९. अग्नि का वर्णन १-५
वस्तुएं देना, पुरोडाश, वेदी, जलपात्र, पुत्रवान १-५
१५०. अग्नि की स्तुति १-३
हव्य, देवविरोधी, आह्लादक १-३
१५१. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-९
रक्षा, इच्छापूरक, प्रशंसा, यज्ञ, रंभाना, पूजन १-६
शोभनमति यजमान, स्तुति, धन व अन्न धारण ७-९
१५२. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७
सृष्टियां, कर्म, विरोध, उषाएं, गमन, दीर्घतमा, नमस्कारयुक्त १-७
१५३. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४
पोषण, सुखभागी, प्रसन्न, अग्निदाता १-४
१५४. विष्णु का वर्णन १-६
अंतरिक्ष, पादक्षेप, नापना, लोकधारक, बंधु, परमपद १-६
१५५. इंद्र एवं विष्णु का वर्णन १-६
अपराजेय, आदर, शक्तिवर्धन, परिक्रमा, चरणक्षेप, कालचक्र १-६
१५६. विष्णु वर्णन १-५
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सुखकर्त्ता, वृत्तांत, सेवा, मेघ, यज्ञार्थ आना १-५
१५७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
उषा, रथ, सौभाग्य, कशा, गर्भरक्षा, समर्थ १-६
१५८. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-६
दीर्घतमा, अन्न, तुग्रपुत्र, पाशबद्ध, दास, त्रितन, निर्देशक १-६
१५९. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-५
अनुग्रह, अमृत देना, हितकारी, बहिनें, धन याचना १-५
१६०. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-५
सुखदाता, रक्षक, दूध, श्रेष्ठ, विस्तार १-५
१६१. ऋभुगण का वर्णन १-१४
चमस, भाग, युवा करना, स्त्री, पानपात्र, नवीन रथ, मृतक गाय, सोमरस, चार
भाग १-९
रक्त रखना, फसलें, बलवती वाणी, अभिलाषा १०-१४
१६२. अश्वमेध के अश्व का वर्णन १-२२
पराक्रम, बकरे ले जाना, पुरोडाश, भाग, जल, यूप, सुडौल, लगाम, छुरी १-९
मांस, रस, कामनाएं, परीक्षा, छुरी, अश्व, घास, पात्र, वषट्कार, वस्तुएं, शब्द करना,
हड्डियां १०-१८
प्रकाशक, अकुशल, समीप जाना, तेज व बल १९-२२
१६३. अश्वमेध के अश्व का वर्णन १-१३
शब्द, अश्व प्राप्ति, व्रतधारी, बंधन, लगाम, सिर, रूप, सौभाग्य, सिर-पैर, पंक्ति में
चलना १-१०
वायुवत् चलने वाला, उड़ना, बकरा, कुशल घोड़ा ११-१३
१६४. विश्वदेव का वर्णन १-५२
पुत्र, सूर्यरथ, गाएं, संसार, धागे, लोक, गाएं, पूजन, तीन माता-पिता, पहिया, चरण,
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सात चक्र, घूमना, पांच
वर्ण, सूर्यमंडल, निर्माता १-१५
क्रांतदर्शी, जाना, लोकपालक, बोझा ढोना, दो पक्षी, संसार की रक्षा, किरणें, पद,
पूजामंत्र, वर्षा रोकना, गाय को बुलाना, आना, तृप्त करना, हराना, स्वधा, सूर्य का
आना-जाना १६-३१
प्रजाओं का कारण, पालक आकाश, उत्पत्ति स्थान, यज्ञ, घेरना, बंधना, जानना,
अधिष्ठित होना, भक्षण, वाणी, वर्षा, सोमरस, धरती को देखना, चार पद,
नाम ३२-४६
भीगना, अरे, धनरक्षा, यजमान, प्रसन्न होना, आह्वान ४७-५२
१६५. इंद्र एवं मरुद्गण का संवाद १-१५
सींचना, उड़ना, पालक, यज्ञकर्म, अनुभव, अहि, कर्म करना, कामना, प्रसन्नता, दूसरों
द्वारा न होना १-९
उग्र विद्वान्, आनंद, यश, अन्न, मनोरम स्तोत्र, वाणी १०-१५
१६६. मरुद्गण की स्तुति १-१५
ज्वाला, प्रसन्नचित्त, जल, अट्टालिकाएं, डरना, पशुनाश, अर्चना, पुत्र-पौत्रादि, शस्त्र,
शोभन १-१०
महिमा, यजमान, मैत्री, दीर्घकालीन यज्ञ, कामना ११-१५
१६७. इंद्र एवं मरुतों का वर्णन १-११
उपाय, धन, वाणी, यत्न, बिजली, सेवा, महिमा, जल टपकना, हराना, महिमा,
स्तुति १-११
१६८. मरुद्गण का वर्णन १-१०
समान भावना, कंपनशील, हस्तत्राण, पापहीन, अन्न, जल, कल्याण १-७
बिजली, अन्न, शरीर की पुष्टि ८-१०
१६९. इंद्र की स्तुति १-८
मरुत्, लड़ना, हव्य, दक्षिणा १-४
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संतोषदाता, घोड़े, मेघ, स्तुति ५-८
१७०. इंद्र एवं अगस्त्य का संवाद १-५
मन, भाग, बात, अमृत, मित्र १-५
१७१. मरुतों की स्तुति १-६
याचना, स्तोत्र, सुखदाता, भागना, जगाना, शक्तिशाली १-६
१७२. मरुतों की स्तुति १-३
आगमन, आयुध, प्रार्थना १-३
१७३. इंद्र का वर्णन १-१३
सामगान, यज्ञ, अन्न, स्तोत्र, उत्तम, व्याप्त, युद्ध, सखा १-९
मित्र बनाना, बढ़ना, वंदना १०-१३
१७४. इंद्र की स्तुति १-१०
उद्धारक, नगरियों का नाश, रक्षक, बढ़ाना, कुत्स ऋषि, शत्रु १-६
दुर्योणि, कुयवाच, वृत्र असुर, यदु, तुर्वसु, रक्षक ७-१०
१७५. इंद्र की स्तुति १-६
आह्वान, प्रसन्नतादाता, शुष्ण का वध, वृत्रघाती, सुख १-६
१७६. इंद्र का वर्णन १-६
घेरना, हव्य, पांच जन, धन मांगना, अन्नस्वामी, स्तुति १-६
१७७. इंद्र की स्तुति १-५
घोड़े, रथ, तैयार, आह्वान, प्रार्थना १-५
१७८. इंद्र की स्तुति १-५
समर्थ, हवि, पुकार, हराना, शक्तिशाली १-५
१७९. अगस्त्य एवं लोपामुद्रा का रति विषयक संवाद १-६
सौंदर्यनाश, सत्य, भोग, ब्रह्मचर्य, कामनाएं, आशीर्वाद १-६
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१८०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
नेमियां, रथ, स्तुति, सोमरस, भुज्यु, अन्न १-६
प्रशंसनीय, जगाना, यज्ञ, रथ ७-१०
१८१. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
यज्ञ, शीघ्रगामी अश्व, वर्षा, आकाशपुत्र, स्तुतियां १-५
पास आना, स्तुतियां, यज्ञगृह, स्तोता ६-९
१८२. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-८
नाती, कर्मकुशल, मेधावी, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, नाव, भुज्यु, रथ, स्तुति १-८
१८३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
पास जाना, उषा, आह्वान, भाग, गौतम, पुरुमीढ़, अत्रि ऋषि, स्तोत्र १-६
१८४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
आह्वान, अन्वेषण, सूर्यपुत्री, स्तोत्र, देवमार्ग १-६
१८५. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-११
घूमना, धारण करना, धन प्राप्ति, अनुगमन, जल, बुलाना, स्तुति, जामाता, संतुष्ट,
प्रकाशमान, दीर्घायु १-११
१८६. विश्वेदेव का वर्णन १-११
प्रार्थना, मित्र, वरुण, अर्यमा देव, अतिथि, स्तुति, इच्छा, जल के नाती १-६
घेरना, उपजाऊ बनाना, सुखार्थ प्रार्थना, प्रसिद्ध ज्योति ७-११
१८७. अन्न का वर्णन १-११
स्तुति, रक्षक, सुखदाता, रस, दान, वृत्रवध १-६
भोजन, वनस्पतियां, गो भक्षण, सत्तू, अन्न ७-११
१८८. अग्नि की स्तुति १-११
कवि व दूत, मिलना, अन्न, आदित्य, जल गिराना, अग्नि १-६
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