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ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

७६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
आह्वान, सोमपान हेतु आह्वान, अन्न हेतु बुलाना १-६
७७. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-६
बुलाना, गाएं व अन्न मांगना, रोकने में असमर्थ, शत्रुसंहार १-४
द्युलोक से भी महान्, धनस्वामी ५-६
७८. मरुतों एवं इंद्र की स्तुति १-७
सूर्य बनाना, मित्रता, वृत्रनाश, महान् अन्न, धरती दृढ़ करना, हराना, दुधारू बनाना,
सूर्य १-७
७९. इंद्र की स्तुति १-६
बुलाने योग्य, धनदाता, स्तुति, संहारक, शक्तिस्वामी, धन मांगना १-६
८०. इंद्र की स्तुति १-७
अपाला, सोमपान हेतु जाना, कामना, धनयाचना, खेत उपजाऊ बनाने व बाल उगाने
की प्रार्थना, प्रभावान करना १-७
८१. इंद्र की स्तुति १-३३
धनदाता, आहूत, अन्नदाता, सुदक्ष ऋषि, बढ़ाना, हराना, व्याप्त, आह्वान, शत्रुनाशक,
शत्रुओं का धन देने व पास आने की प्रार्थना १-१०
वज्रधारी, प्रसन्न करना, इच्छाएं रखना, बलपुत्र, भयानक प्रसन्न बनाने की प्रार्थना,
बलदाता, दर्शनीय, स्तुति, बुलाना, विस्तार, इंद्र से बढ़कर न होना, प्रवेश ११-२३
पर्याप्त होना, श्रुतकक्ष, दानशील, धन मांगना, शूर, धनधारक, अन्नस्वामी, अधिकारी
न बनने की प्रार्थना, सबके इंद्र, स्तुतियों द्वारा सेवा २४-३३
८२. इंद्र का वर्णन व स्तुति १-३४
हितैषी, मेघ हनन, धन मांगना, सज्जनपालक, सामने जाना, आह्वान, तेजस्वी,
दीप्तिशाली, स्तुत, विरोध न होना, पूजा १-१२
दूध धारण, बली, भागना, अजातशत्रु, शक्तिशाली, कामनापूरक, सोमपान, रमण, धन
मांगना, पास जाना, विसर्जन, हरि नामक घोड़े १३-२४
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कुशा बिछाना, बल, रत्न, सुख, अन्न व मंगल, याचना, आह्वान, शतक्रतु, वृत्रहंता,
ऋषि ऋभुक्षा व ऋभु २५-३४
८३. मरुद्गण का वर्णन १-१२
सोमपान, व्रत धारण, स्तुति, सोमपान, प्रशंसा १-६
बुद्धिमान्, दीप्तिशाली, विस्तृत करना, बुलाना, स्तब्ध करना, बुलाना ७-१२
८४. इंद्र की स्तुति १-९
स्तुतिपात्र, चरु-पुरोडाश, आने व सोमपान हेतु प्रार्थना, तिरश्ची ऋषि १-४
स्तुतिवचन का निर्माण, सेवा, दशापवित्र, आह्वान, शत्रुघातक ५-९
८५. इंद्र का वर्णन १-२१
गति बढ़ाना, पर्वत तोड़ना, निकट पहुंचना, मानना, स्तुति, जीवोत्पत्ति, शत्रुजेता,
बढ़ाना, तेज आयुध १-८
असुरों को भगाने व धन हेतु प्रार्थना, सेना का संहार, बुलाना, सहायता, आनंद देना,
जल जीतना, शत्रुनाशक, रक्षक, बुलाने योग्य बनना ९-२१
८६. इंद्र की स्तुति १-१५
धन छीनना, पणि, भेजने की प्रार्थना, वृत्रहंता, आह्वान, शक्तिस्वामी, रक्षा करने व
साथ बैठने की प्रार्थना १-८
सर्वजेता, शक्तिशाली बनाना, स्तुति, बलशाली, वज्रधारी ९-१५
८७. इंद्र की स्तुति १-१२
मेधावी, तेजस्वी बनाना, मित्रता हेतु यत्न, स्वर्गस्वामी, शत्रुनगरियों के नाशक, स्तोत्र
भेजना, बढ़ाना १-८
जोड़ना, बल व धन याचना ९-१२
८८. इंद्र की स्तुति १-८
सोमपान, निचोड़ना, धन उत्पत्ति, पापहीन धन देना, हराना १-५
सेना का नाश, शत्रुजेता, बुलाना ६-८
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८९. इंद्र की स्तुति १-१२
शत्रुजेता, भाग रखना, नेम ऋषि, बढ़ाना, रोना, प्रकट करना, शरभ, वज्र मारना, सोम
लाना, वज्र प्राप्ति १-९
जल दुहना, वाणी की उत्पत्ति, पराक्रम दिखाने की प्रार्थना १०-१२
९०. मित्र, वरुण, अश्विनीकुमारों एवं सूर्या की स्तुति १-१६
हवि बनाना, कर्म करना, देवदूत, नशीला सोम, रक्षा याचना, प्रशंसा करने का आग्रह,
स्थान देखना, आह्वान १-८
निश्चित करना, हव्य ले जाना, प्रशंसा उपदेशक, उषा का दिखाई देना, स्थित होना,
गोवध न करने का आग्रह, दीप्तिशाली ९-१६
९१. अग्नि का वर्णन व स्तुति १-२२
अन्न देना, दीप्तिशाली, अतिशय युवा, बुलाना, आह्वान, सागरवासी, निकट आने व
कर्त्तव्यों को बढ़ाने का आग्रह, आह्वान, यशस्वी, प्रज्वलित होना, स्तोता १-१२
सेवा करना, अग्नि में जल का होना, रक्षायुक्त होना, आह्वान, अग्नि की उत्पत्ति, देवों
का चारों ओर बैठना, धारण करना १३-१९
लकड़ियां धारण, काठ, बढ़ाना २०-२२
९२. अग्नि व मरुद्गण की स्तुति १-१४
स्तुतियों का जाना, स्वर्ग में रहना, कांपना, वीरपुत्र मिलना, शत्रु का अन्न नष्ट करना,
पात्र मिलना, दर्शनीय, दाताश्रेष्ठ, यशदाता १-९
अतिप्रिय, धन न लाना, स्तुत, स्तुति, सोमपान हेतु प्रार्थना १०-१४
नवम मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. सोम की स्तुति १-१०
सोम निचोड़ना, बैठना, अतिशय दाता, बल व अन्न मांगना, सेवा करना, दशापवित्र
दस उंगलियां, तीन जगह, रहना, शुद्धि, धन प्राप्ति १-१०
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२. सोम की स्तुति १-१०
प्रवेशार्थ प्रार्थना, सर्वधारक, जल ढकना, जल का आना, शुद्ध होना, रोना व
सुशोभित होना, याचना, मादक के गिरने की प्रार्थना, संतान व अन्न आदि के
दाता १-१०
३. सोम का वर्णन १-१०
कलश की ओर जाना, अजेय, सजाना, इच्छा, अभिलाषापूरक, जल में प्रवेश १-६
स्वर्ग जाना, पवमान, दशापवित्र, गिरना ७-१०
४. सोम की स्तुति १-१०
सेवा का आग्रह, सौभाग्य याचना, कल्याण व मंगल की प्रार्थना, सूर्य देखने की
कामना १-६
धन मांगना, बढ़ाना, सर्वत्र जाना ७-१०
५. सोम का वर्णन १-११
विराजमान होना, बढ़ना, सुशोभित होना, बल से जाना, चढ़ना, अभिलाषा,
बुलाना १-७
आह्वान, त्वष्टा, संस्कार करने व देवों से सोम की ओर जाने की प्रार्थना ८-११
६. सोम की स्तुति का वर्णन १-९
अभिलाषापूरक, घोड़े, अन्न व बल मांगना, अनुगमन, सेवा करना, मिलाने का
आग्रह १-६
तृप्ति, यज्ञ की आत्मा, शब्द भरना ७-९
७. सोम का वर्णन १-९
यज्ञमार्ग, नहाना, शब्द करना १-३
स्तुतियां जानना, प्रेरणा, स्तुतियां सुनना, देवों की प्राप्ति, मिलना, अन्न व धन
याचना ४-९
८. सोम का वर्णन १-९
बल बढ़ाना, स्थित होना, अभिलषित बनना, सेवा १-४

मिलाना, ढकना, शत्रुओं का नाश करने, शक्ति देने, संतान व अन्न हेतु प्रार्थना ५-९
९. सोम की स्तुति १-९
मेधावी, आह्वान, प्रकाशन, प्रसन्न करना १-४
उंगलियां धारण करना, नदियां देखना, राक्षसों को मारने, प्रकाश फैलाने, बुद्धि देने व
मनोरथ पूरा करने की प्रार्थना ५-९
१०. सोम का वर्णन १-९
आना, सोम उठाना, संस्कृत होना, धारा में चलना, शब्द करना, द्वार खोलना, बैठना,
दुहना, दीप्तिशाली १-९
११. सोम की स्तुति १-९
जाने के इच्छुक, दूध मिलाना, सुख मांगना, बलशाली, पावन बनाने का आग्रह १-५
प्रस्तुत करने का आग्रह, संतुष्टिकारक, पात्रों में भरना, बल व धन मांगना ६-९
१२. सोम का वर्णन १-९
निर्माण, आह्वान, वाणी, पूजित होना, प्रवेश १-५
शब्द करना, यज्ञ-वास, स्थान प्राप्ति, घर मांगना ६-९
१३. सोम की स्तुति १-९
जाना, शोधक, टपकना, धारा गिराने, धन व शक्ति देने की प्रार्थना १-५
दशापवित्र, धारण करना, शत्रु-वध करने व बैठने की प्रार्थना ६-९
१४. सोम का वर्णन १-८
बहना, अलंकृत करना, मुदित, टपकना, मसलना १-५
तिरछा चलना, पीठ पर चढ़ना, आह्वान ६-८
१५. सोम का वर्णन १-८
स्वर्ग जाना, इच्छा, सोम को देना, कंपाना, जाना १-५
लांघना, निचोड़ना, मसलना ६-८
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१६. सोम की स्तुति व वर्णन १-८
चलना, मिलाना, अजेय, पहुंचना १-४
जाना, रहना, दशापवित्र ५-८
१७. सोम का वर्णन व स्तुति १-८
जाना, गिरना, दशापवित्र, बढ़ना १-४
प्रकाशन, स्तुति, शुद्ध करना, पेय बनने की प्रार्थना ५-८
१८. सोम की स्तुति १-७
सर्वोत्तम, मेधावी, प्राप्त करना, धन देना १-४
दुहना, ढकना, शब्द करना ५-७
१९. सोम का वर्णन १-७
धन, गोपालक, बैठना, सारवान् होने की कामना, रस दुहना १-५
वस्तुएं लाने व तेजनाशार्थ प्रार्थना ६-७
२०. सोम की स्तुति १-७
हराना, अन्न देना, धन व रस मांगना, अनोखा, रगड़ना, दानदाता ५-७
२१. सोम की स्तुति १-७
जाना, अन्न देना, टपकना, ले जाना धन मांगना, प्रेरणा १-७
२२. सोम का वर्णन १-७
नीचे जाना, निकलना, व्याप्त करना, न थकना १-४
सोम प्राप्ति, शब्द करना ५-७
२३. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-७
स्तुतियां, जाना, धन, घर व अन्न मांगना, क्षीण होना, बचाना, अभिलाषी, शत्रु-
वध १-७
२४. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-७
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मसलना, व्याप्त करना, पास पहुंचना, शत्रुजेता, पर्याप्त होना, शत्रु-वध,
तृप्तिकारक १-७
२५. सोम का वर्णन १-६
साधक, पकड़ा जाना, सर्वप्रिय जाना, क्रांतप्रज्ञा १-६
२६. सोम का वर्णन १-६
मसलना, स्तुति, स्वर्ग भेजना, बढ़ाना, प्रेरणा, बढ़ना १-६
२७. सोम का वर्णन १-६
मेधावी, शक्तिदाता, सर्वज्ञ, शब्द करना, छोड़ना, इंद्र मिलना १-६
२८. सोम का वर्णन १-६
चलना-गिरना, शोभा पाना, कामपूरक, सर्वद्रष्टा, पापनाशक १-६
२९. सोम की स्तुति १-६
बहना, शुद्ध करना, स्तुत्य, शत्रु भगाने व रक्षार्थ आग्रह, बल लाने की प्रार्थना १-६
३०. सोम का वर्णन १-६
ध्वनि करना, दीप्तिशाली, विरोधियों के बलक्षरण हेतु प्रार्थना, टपकना, कूटना,
नशीला सोम १-६
३१. सोम की स्तुति १-६
जाना, बढ़ाने की प्रार्थना, वायु से तृप्त होना, अन्नदाता बनने की प्रार्थना, दूध-दही
देना, कामना १-६
३२. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-६
जाना, कुचलना, प्रवेश, बैठने हेतु जाना, प्रशंसा, अन्न-धन व बुद्धि देने की
प्रार्थना १-६
३३. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-६
नीचे जाना, अमृतधारा, पास जाना, स्तुतियां, कामना पूर्ति हेतु प्रार्थना १-६
३४. सोम का वर्णन १-६
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शिथिल बनाना, पास जाना, दुहना, शुद्ध होना, दुहना, मिलना १-६
३५. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-६
धन मांगना, कंपाना, धन, अन्न व स्थान देना, पालक १-६
३६. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-६
गति करना, देवाभिलाषी, प्रेरणार्थ प्रार्थना, छनना, धन, पशु आदि मांगना १-६
३७. सोम का वर्णन १-६
प्रवेश, सर्वद्रष्टा, प्रकाशन, अजेय, महान् १-६
३८. सोम का वर्णन १-६
जाना, कुचलना, शुद्ध करना, बैठना, प्रवेश, जाना १-६
३९. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-६
बुद्धिमान्, बरसने की प्रार्थना, दीप्त बनाना, टपकना १-६
४०. सोम की स्तुति १-६
अलंकृत करना, बैठना, धन लाने की प्रार्थना, दीप्तिशाली, धन, अन्न व पुत्र
मांगना १-६
४१. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-६
दीप्तिशाली, प्रशंसा करना, शब्द सुनाई देना, पशु, बल, धन लाने, द्यावा-पृथिवी को
पूर्ण करने व धारा पूर्ण करने की प्रार्थना १-६
४२. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
ढकना, गिरना, निचोड़ना, सींचना, जाना, धन व अन्न मांगना १-६
४३. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
मिलाना, दीप्तिशाली बनाना, जाना, धन मांगना, शब्द करना, पुत्र याचना १-६
४४. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
आना, विस्तार, जाना, सेवा करना, प्रेरणा, अन्न व बल जीतने की प्रार्थना १-६
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४५. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
द्रष्टा, पेय होना, शुद्ध करना, पास जाना, वर्णन १-६
४६. सोम का वर्णन १-६
तैयार करना, वायु प्राप्ति, प्रसन्न करना, हाथ, मार्ग प्रदाता, पवित्र करना १-६
४७. सोम का वर्णन १-५
शब्द करना, ऋण चुकाना, धनदाता, कामना, शत्रुधन देना १-५
४८. सोम की स्तुति व वर्णन १-५
धन याचना, प्रशंसनीय, स्वर्ग से लाना, यज्ञरक्षक, महत्त्व पाना १-५
४९. सोम की स्तुति १-५
अन्न देने, टपकने, बरसने व देव द्वारा शब्द सुनने की प्रार्थना, टपकना १-५
५०. सोम की स्तुति १-५
वेग से चलना, निकलना, रखना, नशीले, मादक १-५
५१. सोम का वर्णन १-५
दशापवित्र, अमृतवत्, ग्रहण करना, पास जाना, बुद्धिमान् १-५
५२. सोम की स्तुति १-५
दीप्तिशाली, दशापवित्र, बहने वाले, आहूत, धनदाता १-५
५३. सोम की स्तुति १-४
वेग का उठना, स्तुति, कर्म न सहा जाना, मादक सोम १-४
५४. सोम का वर्णन १-४
दुहना, संसार देखना, लोकों के ऊपर रहना, इंद्राभिलाषी १-४
५५. सोम की स्तुति १-४
संपत्तियां देने, कुशों पर बैठने व टपकने की प्रार्थना, शत्रुहंता १-४
५६. सोम का वर्णन व स्तुति १-४
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अन्न देना, सौ धाराएं, मसलना, पाप से बचाने की प्रार्थना १-४
५७. सोम की स्तुति १-४
अन्न देना, आना, बैठना, संपत्तियों को लाने की प्रार्थना १-४
५८. सोम की प्रार्थना १-४
पापत्राता, गति करना, धन व वस्त्र लेना, चलना १-४
५९. सोम की स्तुति १-४
धनजेता, बहने व कुशों पर बैठने की प्रार्थना, शत्रुजेता १-४
६०. सोम की स्तुति १-४
स्तुति का आग्रह, शुद्ध करना, जाना, अन्न मांगना १-४
६१. सोम की स्तुति १-३०
गिरने की प्रार्थना, शंबर, यदु, तुर्वश, अन्न मांगना, मित्रता करने, सुखी बनाने व धन
लाने की प्रार्थना, मिलना, टपकने की प्रार्थना १-९
द्युलोक में अन्न व धन प्राप्ति, गिरने की प्रार्थना, पास जाना, बढ़ाने की प्रार्थना, सुख
देने की प्रार्थना, वैश्वानर का जन्म, जाना, दर्शनीय, राक्षसहंता १०-१९
संग्राम में भाग लेना, मिश्रित, रक्षा करना, अमहीयु, धारा में गिरना, संतानयुक्त यश
मांगना, धनदाता, टपकने की प्रार्थना २०-२८
वध करने की कामना, निंदा से बचाने की प्रार्थना २९-३०
६२. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-३०
ले जाना, पापनाशक, सुखदाता, बैठना, अन्न स्वादिष्ट बनाना, सजाना, धाराएं बनाना,
टपकने व दूध, घी बरसाने की प्रार्थना, विशेषद्रष्टा, धन देना १-११
धन मांगना, बहना, टपकना, यज्ञ में जाना, बैठने जाना, रथ जोतना, शक्तिशाली,
निडर बैठना, दुहना, देवप्रिय, धारा बनाना १२-२२
मिलना, अन्न देने, फल देने व बरसने की प्रार्थना, आज्ञा पालन, जाना, शुद्ध करने का
आग्रह, बैठना २३-३०
६३. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-३०
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धन मांगना, मादक, गिरना, धावा बोलना, प्रेरक, स्थान प्राप्ति, हितकारी जल, घोड़े
जोड़ना, एतश, सींचने की प्रार्थना, शत्रु, अक्षय धन, अन्न, बल मांगना १-१२
तेजस्वी, गिरना, टपकना, मादक, मसलना, धन मांगना, सींचने का आग्रह, मसलना,
प्रेरणा, दीप्तिशाली, प्रशंसनीय धन, शत्रुनाशक, राक्षसों के नाश की प्रार्थना, सोम
बनाना, निर्माण, शत्रुओं, राक्षसों का वध करने, श्रेष्ठ बल व धन याचना १३-३०
६४. सोम की स्तुति १-३०
कर्म धारण, अभिलाषापूरक, हिनहिनाना, पशु व संतान मांगना, निर्माण, छनना, धन
मांगना, धाराओं का बनना, धन याचना, शब्द करना, बढ़ाना, बैठना १-११
देवाभिलाषी, गायों के समीप आने, अन्न, धन देने व इंद्र के स्थान पर जाने की
प्रार्थना १२-१५
बनना, जाना, घर-रक्षार्थ प्रार्थना, जलवास, यज्ञ छोड़ना, नरक में डूबना, टपकने की
प्रार्थना, मसलना, अर्यमा आदि, सोमपान, पवित्र सोम १६-२५
वाणी देने व द्रोणकलश में जाने की प्रार्थना, मिलना, चलना २६-३०
६५. सोम की स्तुति १-३०
दीप्तिशाली, धन देने व वर्षा भेजने की प्रार्थना, बुलाना, शोभन-आयुध, भरना, व्यश्व
ऋषि, अवरोधक, वरण, धन देना, धारक, सर्वद्रष्टा, ओजस्वी १-१४
दुहना, प्रशंसित, धन-बल मांगना, जाना, बहना, धन व पुत्र मांगना, शुद्ध होना,
मसलना १५-३०
६६. सोम एवं अग्नि की स्तुति १-३०
प्रार्थना, राजा बनना, सुशोभित होना, आह्वान, विस्तार, शासन मानना, धन देना,
प्रशंसा, निचोड़ना, दौड़ना, मसलने की इच्छा, जाना, आना, मित्रता चाहना १-१४
प्रवेश हेतु प्रार्थना, शत्रुधन जीतना, दानी, वरण करना, जीवनरक्षक, याचना, गाएं
मांगना, सूर्य के समान देखना, समीप जाना, तेज की उत्पत्ति, गिरना, व्याप्त करना,
टपकना, सुख मांगना १५-३०
६७. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-३२
धाराएं चाहना, यज्ञधारक, शब्द करना, आह्वान, धन मिलना, धन मांगना, इंद्र प्राप्ति,
पवित्र होना, प्रेरणा, यात्रा में रक्षा करने व नारियां देने की प्रार्थना, रत्नदाता,
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द्रोणकलश, जाना १-१५
मादक सोम, अन्न मिलना, वायु बनाना, प्रयाण, द्रोणकलश में आने, भय भगाने,
पापहीन करने, पवित्र करने व पापों से छुड़ाने की प्रार्थना १६-२७
द्रव डालने की प्रार्थना, निकट जाना, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, अन्न भक्षण, दूध व सोम को
दुहना २८-३२
६८. सोम का वर्णन १-१०
टपकाना, धन देना, बल प्राप्ति, रक्षा करना, जलगर्भ, मसलना, अन्न देना १-७
प्रेरणा, शोभित होना, द्यावा-पृथिवी को पुकारना ८-१०
६९. सोम का वर्णन १-१०
अर्पण, मुख में पहुंचना, चमकना, स्वयं को ढकना, तेज स्थापित, छनना १-६
पहुंचना, अंगिरा ऋषि, प्रेरणा, सुखदाता ७-१०
७०. सोम का वर्णन १-१०
बढ़ना, ढकना, स्तुतियां मिलना, वाक् में रहना, बाधा पहुंचाना, सर्वत्र जाना १-६
शुद्ध करना, ऊंची जगह जाना, मार्ग बताना, शत्रु संहारार्थ प्रार्थना ७-१०
७१. सोम का वर्णन १-९
सूर्य स्थिर करना, शत्रुनाशक, शुद्ध होना, सींचना, पास जाना, स्वर्णिम जगह
जाना १-६
सुशोभित होना, गाएं मांगना, ज्ञान कराना ७-९
७२. सोम का वर्णन व इंद्र की स्तुति १-९
प्रसन्न करना, दुहना, उपेक्षा, लक्ष्य करना, गिरना, आना १-५
उत्तरवेदी, सुख हेतु जाना, धनदाता, आह्वान ६-९
७३. सोम का वर्णन १-९
मिलना, बढ़ाना, बैठना, वृष्टियुक्त करना, भगाना, उत्पत्ति १-६
स्तुति, पीड़ा देना, जलवास ७-९
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७४. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-९
रोना, धारक, मार्ग विस्तृत होना, अमृत उत्पत्ति, शब्द करना १-५
अमृत भरना, उज्ज्वल करना, लांघना, पुत्र प्राप्ति, दौड़ना ६-९
७५. सोम का वर्णन १-५
टपकना, अजेय, सुशोभित होना, गिरना, प्रेरणा हेतु प्रार्थना १-५
७६. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-५
टपकना, आयुध, अन्नदाता, सोम का कर्म, प्रवेश १-५
७७. सोम का वर्णन १-५
जाना, मिलना, दर्शनीय, गर्भधारण करना, इधर-उधर जाना १-५
७८. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-५
जाना, स्थित होना, बढ़ाना, पवित्र करना, शुद्ध होना, १-५
७९. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-५
हरितवर्ण, मद टपकाने वाले, शत्रुनाशक, रस निकालना, सोम १-५
८०. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-५
चमकना, प्रशंसा, बढ़ाना, दुहना, जाना १-५
८१. सोम का वर्णन १-५
उन्मत्त होना, व्याप्त करना, धनी सोम, आह्वान १-५
८२. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-५
दर्शनीय, पूजनीय, मेघपुत्र, सुखदाता, जल का सोम से मिलना १-५
८३. सोम का वर्णन व स्तुति १-५
विस्तृत, सोमकिरणों का स्थिर होना, पुष्ट करना, जकड़ना, अन्न जीतना १-५
८४. सोम का वर्णन १-५
विशेषद्रष्टा, व्याप्त होना, प्रसन्न करना, जाना १-५
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८५. सोम का वर्णन व स्तुति १-१२
रोगनाशार्थ प्रार्थना, दक्ष, स्तुति, रस टपकाना, सेवा योग्य, स्वादिष्ट, मसलना १-७
धन जीतने की प्रार्थना, स्थित होना, निचोड़ना, प्रशंसा, रूप देखना ८-१२
८६. सोम की स्तुति एवं वर्णन १-४८
व्यापक, पास जाना, शुद्ध होना, सेवित, गिरना, निचुड़ना हरा सोम, देवस्थान जाना,
धारक, शब्द करना, इंद्र वर्धक वर्षाकारक १-११
युद्ध, दशापवित्र, बहना, युद्ध में जाना, कष्ट न देना, आनाजाना, संतानदाता,
अभिलाषापूरक, जल उत्पत्ति, लोककर्त्ता, आरोहण १२-२२
प्रवेश, स्तुति, प्रेरणा, सुगम बनाना, दशापवित्र पर जाना, मसलना, तेजधारी, साधन,
अर्पण, रोना, विस्तार, जाना, यज्ञमार्ग, युद्धों में जाना, विशेषद्रष्टा, जनक, जल
उद्धारक लोकों में जाने वाले, ज्ञाता, गतिकर्त्ता २३-३९
स्तुतियां, प्रेरणा, मध्य भाग, जाना, बढ़ना, स्तुति, शब्द करना, कामना, मिलाना,
प्रशंसनीय ४०-४८
८७. सोम व इंद्र की स्तुति व सोम का वर्णन १-९
साफ करना, राक्षसनाशक, दूध प्राप्ति, स्थित रहना, शुद्धि, अन्न-धन याचना, दौड़ना,
गाएं प्राप्त, सोम का अन्न १-९
८८. सोम की स्तुति १-८
आह्वान, जीतना, मनोवेगवान्, कर्मकर्त्ता, प्रेरणा १-५
जाना, यज्ञपात्र, पूज्य ६-८
८९. सोम का वर्णन व स्तुति १-७
बहना, दुहना, पालक, बली बनाना, सेवा करना, धारक, शत्रुनाशक १-७
९०. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
अन्न, धन-रत्न देना, शत्रुजेता, शब्द करना, पापनाशक १-६
९१. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
निर्माण, जाना, कामपूरक, नगरियां नष्ट करने, मार्ग बनाने की प्रार्थना, पुत्र
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मांगना १-६
९२. सोम का वर्णन व स्तुति १-६
देवसेवा, जलधारक, अनुगमन, शुद्धि, रक्षा, जाना १-६
९३. सोम का वर्णन व स्तुति १-५
शुद्ध होना, वरेण्य, ढकना, धन व संतान याचना १-५
९४. सोम का वर्णन व स्तुति १-५
निचोड़ना, बांटना, धन देना, आयुदाता, पशु याचना १-५
९५. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-५
शब्द करना, प्रेरणा, प्रवेश, शत्रुनिवारक, सौभाग्य याचना १-५
९६. सोम का वर्णन व स्तुति १-२४
आगे जाना, निचोड़ना, पेय, रक्षाकामना, शुद्ध होना, पार जाना १-६
प्रेरणा, मदकारक, रमणीय, मार्ग बताना, यज्ञकर्म, अन्न देना, यज्ञस्वामी सोम, अन्न
अभिलाषी, लांघना, शुद्ध होना, फलवाहक, प्रशंसित, जलप्रेरक ७-१९
बैठना, चमू पात्र, प्रवेश, प्रशंसित सोम, जाना २०-२४
९७. सोम का वर्णन व स्तुति १-५८
प्रेरक, आच्छादक, यशस्वी, स्वादिष्ट, जाना, हरितवर्ण, वृषगण ऋषि, प्रहारक, प्रकाश
करना, राक्षसनाशक, छनना, ढकना, शब्द करना, शुद्ध, गायों की कामना,
दीप्तिशाली १-१६
अन्नयुक्त, शब्द करना, अजेय, द्रोणकलश, संतान मांगना, धनदाता, जलधारक,
दीप्तिशाली, भयंकर, धाराएं, लहरों का निर्माण, छनना, चमकना, धाराएं गिराना,
पास जाना, पूछना, कल्याणकारी, स्पर्श, अंधकारनाशक १७-३८
बढ़ने वाले, जलधारक, ओज देना, पवित्र होना, सरल गति वाले, धनवर्षक, शुद्ध,
गिरना, पवित्र होना, रथस्वामी, स्तुत सोम, स्वर्ण व रथ याचना, जमदग्नि ऋषि,
जाना ३९-५२
धन देना, शत्रुनाशक, शत्रुजेता, दौड़ना, सर्वज्ञाता, मसलना, सहायक ५३-५८
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९८. सोम का वर्णन १-१२
अन्नदाता, गिरना, छनना, दान देना, निवासदाता, नहलाना पास जाना, धन देना १-८
तेजपूर्ण, निचोड़ा जाना, भगाना, ज्ञानी ९-१२
९९. सोम का वर्णन १-८
फैलाना, भेजना, सोमपान, स्तुति, प्रार्थना, स्थित होना, नहाना, ले जाना १-८
१००. सोम की स्तुति १-९
पास जाना, दीप्तिशाली, धन बढ़ाना, दौड़ना, क्रांतदर्शी, अन्नदाता १-६
पवमान, राक्षसघाती, धारक ७-९
१०१. सोम का वर्णन व स्तुति १-१६
भक्ष्य, जाना, निचोड़ना, छनना, टपकना, प्रेरक, पोषक, दीप्त, प्रशंसनीय रस, ज्ञाता,
मेधावी १-१०
शब्द करना, उपभोग्य, मिलना, ढकना, छनना ११-१६
१०२. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-८
व्याप्त करना, स्तुति, स्तोत्र बोलना, सोम की प्रशंसा, सेवन, कवि १-६
मिलना, प्रेरणा हेतु प्रार्थना ७-८
१०३. सोम का वर्णन १-६
यज्ञविधाता, हरा सोम, स्तुति, बैठना, धनदाता, दौड़ना १-६
१०४. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-६
सजाना, देवरक्षक, साधन, १-३
मिलाना, मदस्वामी, मित्रता हेतु प्रार्थना ४-६
१०५. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-६
स्तुति का आग्रह, मिलाना, मधुरता देना १-३
दूध मिलाना, अश्वस्वामी, माया से बचाने की प्रार्थना ४-६
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१०६. सोम का वर्णन एवं स्तुति १-१४
शीघ्र उत्पन्न, टपकना, धनुषधारी, जागने वाले, विशेषद्रष्टा, स्वादिष्ट, गिरने की प्रार्थना,
बढ़ना १-८
सर्वज्ञ, शब्द करना, बढ़ाना, तैयार करना, धन देना, देवाभिलाषी ९-१४
१०७. सोम का वर्णन व स्तुति १-२६
हवि, मिलाना, टपकना, बैठना, दुहना, जागरणशील, जाना, छनना, प्रवेश, सजाना,
जाना १-१२
मसलना, सर्वज्ञाता, बहना, नियमित, छनना, जाना, प्रसन्न रहना, जाना, धन देना,
जाना, समुद्रधारक, प्रेरित करना, जाना १३-२६
१०८. सोम की स्तुति व वर्णन १-१६
बुद्धिदाता, सर्वद्रष्टा, शब्द करना, मादक, फैलाना, अश्ववत्, स्तुत्य, बढ़ना, अन्नस्वामी,
शोभन बल वाले १-१०
दोहन, धारक, अन्न, पशु व घर लाने वाले, अभिमुख करना, संयत,
स्वर्गधारक ११-१६
१०९. सोम की स्तुति व वर्णन १-२२
स्वादिष्ट, रसपान का आग्रह, पालक, दीप्तिशाली, शक्तिशाली, शोभन धाराओं वाले,
संयमित, धन याचना, वेगशाली, शुद्ध करना १-११
जलपुत्र, शुद्ध होना, पोषक, सोमपान, बहना, मसलना, संयमित, तैयार करना,
मिलाना, जलवासी, प्रेरक १२-२२
११०. सोम की स्तुति व वर्णन १-१२
सहनशील, स्तुति, वेगशाली, अमर, पार जाना, स्तुति, बुद्धि धारण, स्तुति १-८
अधिकारी बनना, शक्तियुक्त, अन्नदाता, भगाना ९-१२
१११. सोम की स्तुति व वर्णन १-३
राक्षसों का नाश, गोधन प्राप्ति, स्तुतियां सुनना १-३
११२. सोम का वर्णन व स्तुति १-४
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विविध कर्म, बाण बनाना, भिन्न काम करना, कामना १-४
११३. सोम की स्तुति १-११
शर्यणावत तालाब, ऋजीक देश, सोम लाना, रस गिराना, धारा बहना, रस गिराने,
क्षयरहित लोक ले जाने व अमर बनाने की प्रार्थना १-११
११४. सोम की स्तुति १-४
भाग्यशाली, कश्यप ऋषि, सात ऋत्विज्, शत्रु से रक्षार्थ प्रार्थना १-४
दशम मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-७
पूर्ण करना, मथित, त्रित ऋषि, सेवा, यज्ञज्ञापक, नाभि, विस्तारक १-७
२. अग्नि की स्तुति व वर्णन १-७
श्रेष्ठ होता, मेधावी, ज्ञाता, धनी, यज्ञकर्त्ता, ज्ञापक, उत्पत्ति १-७
३. अग्नि का वर्णन व स्तुति १-७
भयानक, चमकना, जाना, प्रसिद्ध होना, व्याप्त करना, श्वेतवर्ण, आह्वान १-७
४. अग्नि की स्तुति १-७
सुखद, घूमना, धारण, निवास, प्रसन्न करना, मथना, बुद्धिमान् १-७
५. अग्नि का वर्णन १-७
धनधारक, रक्षा करना, बढ़ाना, सेवा १-४
प्रशंसित, जलवास, उत्पत्ति ५-७
६. अग्नि का वर्णन व स्तुति १-७
बढ़ना, अजेय, गतिशील, तेज चलना, स्तुति, संपत्ति स्थान, अनुगमन १-७
७. अग्नि का वर्णन व स्तुति १-७
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दिव्यगुणयुक्त, धनदाता, आराधना, रक्षक, उत्पत्ति अनुष्ठान, पूजनीय १-७
८. अग्नि की स्तुति व इंद्र का वर्णन १-९
शब्द करना, प्रसन्न होना, रमण करना, पहले आना, यज्ञ प्रकाशक, रक्षक १-५
जलनेता, त्रित, युद्ध, वध, सिर काटना ६-९
९. जल की स्तुति १-९
सुखाधार, सुखकर रस, प्रसन्न होना, दिव्य जल, निवासदाता १-५
जलवास, पुष्टि हेतु प्रार्थना, पाप दूर करने व तेजस्वी बनाने का आग्रह ६-९
१०. यम और यमी का संवाद १-१४
निवेदन, देखने की बात कहना, त्याज्य, असत्य से बचना, प्रजापति, जानना, इच्छा,
गुप्तचर, बंधु, आग्रह १-१०
मूर्च्छित होकर बोलना, पाप, कमजोर बतलाना, सुझाव ११-१४
११. अग्नि का वर्णन एवं स्तुति १-९
गिराना, गंधर्वपत्नी, उदय, लाना, जाना, शंका १-६
सेवा, रत्नदाता, रथ ७-९
१२. अग्नि का वर्णन एवं स्तुति १-९
प्राण, जाना, धारक, स्तुति १-४
परिचरण, सूर्य, प्रकाश पाना, पापनाशक, रथ ५-९
१३. हविधारक गाड़ियों का वर्णन १-५
पत्नीशाला, लादना, उपकरण, यज्ञ करना, स्तुतियां १-५
१४. पितृलोक, पितरों व यम का वर्णन १-१६
पुरोडाश, मार्गज्ञाता, ऋक्व, अंगिरा, बुलाना, योग्य, प्रसन्न होना, व्रियमान १-८
स्थान देना, चितकबरे कुत्ते, गृहरक्षक, यमदूत, दूत बनाने वाला, आयु याचना,
नमस्कार, त्रिकद्रुक ९-१६
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१५. पितृलोक का वर्णन, अग्नि व पितरों की स्तुति १-१४
पितर, नमस्कार, नित्यता, रक्षा व धन याचना, पितर बुलाना १-८
हव्य ग्रहणार्थ आना, हव्य भक्षक, पितर अग्निष्वात्त, स्तुति, स्वधा, जानना, प्रसन्न
होना ९-१४
१६. अग्नि की स्तुति व प्रेत का वर्णन १-१४
न जलाने की प्रार्थना, पितर, प्राण, कल्याणकारी, ऊपर जाना, निरोग हेतु प्रार्थना,
तैयार, प्रसन्न होना १-८
आग हटाना, प्रवेश, सामग्री, स्थापना, प्रज्वलित करना, दूब, वनस्पतियां ९-१४
१७. सरण्यू, पूषा व सूर्य आदि का वर्णन १-१४
विवाह, जन्म, रक्षक, पूषा, दिशाएं जानना, घूमना, बुलाना, प्रसन्न होना १-८
आह्वान, धन मांगना, जल, निकलना, हवन, गिरना, स्तुतिवचन ९-१४
१८. मृत्यु, मृतक, धरती व प्रजापति आदि की स्तुति १-१४
न मारने की प्रार्थना, पितृयान, पितृमेध, पत्थर, ऋतु, त्वष्टा, सधवा, पाणिग्रहण, धनुष
लेकर कहना १-१०
उपचार, दक्षिणादाता, धान देने, सहारा देने की प्रार्थना, खूंटी, संकुसुक ऋषि ११-१४
१९. गो व इंद्र की स्तुति १-८
धन मांगना, गायों को वश में करने, पास रखने व गोशाला हेतु प्रार्थना, पहचानना,
चराने जाना, गायों सहित लौटने व गाएं लाने का अनुरोध १-६
सेवा, गाएं लाने की प्रार्थना ७-८
२०. अग्नि की स्तुति व वर्णन १-१०
स्तुति, अजेय, फल देना, व्याप्त करना, आना, जाना, इच्छा १-७
बढ़ाना, चमकीला, ऋषि विमद ८-१०
२१. अग्नि की स्तुति १-८
वरण, शोभा बढ़ाना, सेवा, अमर, ज्ञाता १-५
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