ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
७. अग्नि का वर्णन १-१०
मित्ररूप, प्रसन्न होना, हव्य स्वीकारना १-३
वनस्पतियां जलाना, चढ़ना ४-५
जानना, छिन्न-भिन्न करना, स्तुतियां, घृतभोजी, पशु प्राप्ति ६-१०
८. अग्नि की स्तुति १-७
वरेण्य, स्थान देना, विवेचक, समीप जाना १-४
स्वामी बनना, धारण करना, सिंचित ५-७
९. अग्नि की स्तुति १-७
स्तुति, बुलाना, जन्म देना, कठिनाई, लपटें फैलाना, पापों से पार होने व समृद्ध बनाने
की प्रार्थना १-७
१०. अग्नि की स्तुति १-७
अबाधगति, बल स्थित, धन व कीर्ति की प्राप्ति १-४
सर्वत्र जाना, रक्षा व समृद्धि हेतु प्रार्थना ५-७
११. अग्नि का वर्णन १-६
रक्षक, धुएं का स्थित होना, दूत, बढ़ाने की प्रार्थना, अरणि मंथन १-६
१२. अग्नि की स्तुति १-६
कामनापूरक, दीप्तिशाली, भक्तस्वामी, सेवक, शत्रु-संहार, घर मिलना १-६
१३. अग्नि की स्तुति १-६
रक्षार्थ पूजन, दीप्तिशाली, स्तुति, विस्तार करना, बल-धन मांगना १-६
१४. अग्नि का वर्णन १-६
अमर, स्तुति, प्रकाशित होना, क्रांतदर्शी, वर्धन १-६
१५. अग्नि का वर्णन १-५
स्तुति-रचना, देवप्राप्ति, पापरहित बनाना, धारण करना १-५
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१६. अग्नि का वर्णन १-५
अन्न देना, धन प्राप्ति, आघात, ग्रहण, स्तुति १-५
१७. अग्नि का वर्णन १-५
आह्वान, यशस्वी, व्याप्त करना, रथ व धन प्राप्ति, धन याचना १-५
१८. अग्नि का वर्णन १-५
कामना, स्तुति, आह्वान, अन्न रखना, घोड़े देना १-५
१९. अग्नि का वर्णन १-५
देखना, रक्षा करना, शक्ति बढ़ाना, स्तोत्र सुनने एवं सामने आने की प्रार्थना १-५
२०. अग्नि की स्तुति १-४
प्रार्थना, वरण, रक्षार्थ स्तुति १-४
२१. अग्नि की स्तुति १-४
प्रज्वलित करना, सुच से प्राप्ति, सेवा, सस ऋषि १-४
२२. अग्नि का वर्णन १-४
पूज्य, साधन, अलंकृत १-४
२३. अग्नि की स्तुति १-४
बलशाली व शत्रुजेता पुत्र मांगना, धन व प्रकाश हेतु प्रार्थना १-४
२४. अग्नि का वर्णन १-४
समीपवर्ती बनने, धन देने, पुकार सुनने की प्रार्थना, पुत्र याचना १-४
२५. अग्नि की स्तुति १-९
रक्षार्थ प्रार्थना, प्रशंसित, धनयाचना, प्रविष्ट १-४
शत्रुजयी पुत्र की कामना, स्तोत्र, शब्द करना, वंदना ५-९
२६. अग्नि की स्तुति १-९
दीप्तिशाली, लपटों वाले, प्रज्वलित करना, प्रार्थना, बल मांगना १-४
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यज्ञकर्म, बढ़ाना, वाहक ५-७
हवि पहुंचाने व कुशों पर बैठने की प्रार्थना ८-९
२७. अग्नि की स्तुति १-६
त्र्यरुण, बैलों का प्रसन्न होना, धन याचना १-६
२८. अग्नि का वर्णन १-६
विश्ववारा, रक्षक, शत्रुनाशार्थ स्तुति, यज्ञयुक्त, वरण का आग्रह १-६
२९. इंद्र एवं मरुतों की स्तुति १-१५
तेज धारण, स्तुति, अहि का वध, स्तंभित करना, एतश, पकाना, मांस भक्षण,
आह्वान १-८
कुत्स, शुष्ण व दस्युओं का वध, पहिया देना, पिप्रु असुर, गाय छुड़ाना ९-१२
धनस्वामी, निर्माण, स्तोत्र, सामान देना १३-१५
३०. इंद्र एवं अग्नि की स्तुति १-१५
घर जाना, भयानक स्थान देखना, पर्वत तोड़ना, गो प्राप्ति १-४
डरना, प्रशंसा, नमुचि-वध ५-७
बादल नष्ट करना, सुंदरियां घर में रखना, मिलाना, वभ्रु की गाएं, राजा
ऋणंचय ८-१५
गाएं मिलना, गाएं
३१. इंद्र की स्तुति १-१३
चलना, पत्नीयुक्त करना, योग्य बनाना, जल धारण १-६
अधिकार करना, घर पहुंचाना, अंधकार मिटाना, घोड़े मिलना, अवस्यु, गतिहीन
करना ७-११
धन देने आना, स्तुति १२-१३
३२. इंद्र का वर्णन १-१२
मार्गे खोलना, प्रसिद्ध बनाना, उत्पत्ति, मेघ-रक्षक, कर्म जानना, वृत्रवध, निम्न
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बनाना १-७
धन छीनना, नीचा होना, कल्याणकारी, प्रेरक ९-१२
३३. इंद्र की स्तुति १-१०
स्तुति बोलना, जीत प्रार्थना, रथ हांकना, नाम मिटाना, बल बढ़ाना, प्रशंसा, रक्षार्थ
प्रार्थना १-७
रथ खींचने का अनुरोध ८
ढोने का आग्रह, धन याचना ९-१०
३४. इंद्र का वर्णन १-९
स्तुत, पेट भरना, दीप्तिशाली बनना, भागना, वश में रखना १-६
धन व गाएं देना, अत्रि की स्तुति ७-९
३५. इंद्र की स्तुति १-८
अजेय, रक्षार्थ प्रार्थना, पुकारना, कामवर्षी १-४
भ्रमण, आह्वान, अग्रगंता, धन अर्पण ५-८
३६. इंद्र की स्तुति १-६
उत्तम गति, आहूत १-२
पुरावसु ऋषि, धन बांटना ३-४
वृष्टिकारी, राजा श्रुतरथ ५-६
३७. इंद्र का वर्णन १-५
प्रयत्न करना, स्तुति, महिषी लाना १-३
साथ चलना, प्रिय बनना ४-५
३८. इंद्र की स्तुति १-५
महानता, अन्नदाता, समर्थ, इच्छा, शतक्रतु १-५
३९. इंद्र की स्तुति १-५
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स्वामी, अन्न हेतु आग्रह १-२
प्रसिद्ध, स्तुति, अत्रि ऋषि ३-५
४०. इंद्र व सूर्य की स्तुति १-९
शत्रुहंता, आनंददाता, सोमपान व प्रसन्न होने का आग्रह, अंधकार, माया भगाना,
वार्तालाप १-७
माया स्वतंत्र करना ८-९
४१. विश्वेदेव की स्तुति १-२०
रक्षा करने, सेवा स्वीकारने, सुंदर स्तोत्र एवं हव्य बनाने की प्रार्थना १-३
अत्रि ४-५
बैठाने का आग्रह, हव्य देना, स्तुति ६-८
अनुकूल बनने की प्रार्थना, स्तुति, रक्षा प्रार्थना ९-११
देवों की स्तुति, आहुतियां देना १२-१४
भूमि की स्तुति, शत्रुनाशक, संतान व अन्न हेतु सेवा १५-१७
उपस्थित होने की प्रार्थना, यज्ञ की प्रशंसा, रक्षार्थ प्रार्थना १८-२०
४२. विश्वेदेव की स्तुति १-१८
प्रार्थना, वरुण, सोना मांगना, यज्ञयोग्य देवों से मिलना १-४
त्वष्टा, ऋभुक्षा, वाज, कर्मकथन, सुखदाता ५-७
पुत्रवान बनना, अव्रती, निंदक आदि को अंधकार में डालने की प्रार्थना, ओषधि-
स्वामी, राका, रूप देना, जलनिर्माता, प्रकाशित करते हुए चलना ८-१४
धनाभिलाषी, दुर्बुद्धि में न डालने व सुख भोगने की प्रार्थना, सौभाग्य याचना १५-१८
४३. विश्वेदेव की स्तुति १-१७
आह्वान, इच्छा, सोम देना, मधुर रस टपकाना, सोमरस निचोड़ना १-५
हव्य वहन की प्रार्थना, पात्र रखना, यज्ञ में लाना, स्तुतियों को सुनने व अर्थ जानने की
प्रार्थना ६-११
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अन्नधारक, पोषण, अन्न भेंट, वीर पुत्र याचना १२-१७
४४. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
अंतरात्मा, मायाहीन १-२
अजर, जल चुराना, शोभा पाना ३-५
स्थिर करना, अभिलाषा, सुख मांगना, स्तुति, अन्नपूर्ति, मद प्राप्ति, सदापृण, यजत
आदि ऋषि ६-१३
कामना, स्तोत्र प्राप्ति १४-१५
४५. विभिन्न देवों की स्तुति १-११
वज्र फेंकना, स्थिरता, बरसना, बुलाना १-५
द्वार खुलना, पूजा, सरमा, पहुंचना, झुकना, रक्षित होने व पाप लांघने में समर्थ होने
की प्रार्थना ६-११
४६. विभिन्न देवों का वर्णन १-८
भारवहन, प्रार्थना, आह्वान, सुख व धन याचना, अदिति, सुख मांगना, हव्य भक्षण की
प्रार्थना १-८
४७. विभिन्न देवों का वर्णन १-७
स्वर्ग से आना, गतिशील होना, रथ का प्रवेश १-३
प्रेरणा, स्तुत्य, कपड़े बुनना, नमस्कार ४-७
४८. विभिन्न देवों का वर्णन १-५
विस्तार करना, ढकना १-२
घूमना, धन देना, सुशोभित होना ३-५
४९. विभिन्न देवों का वर्णन १-५
मित्रता, प्रशंसा का आग्रह, लकड़ी खाना व तेज फैलाना १-३
तिरस्कार न होना, प्रसन्न होने की प्रार्थना ४-५
५०. विभिन्न देवों का वर्णन १-५
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याचना, स्तुतियां, यज्ञनेता १-३
यूप, स्तुति ४-५
५१. अग्नि, इंद्र वायु एवं अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१५
सोमपान हेतु आग्रह, प्रिय होना, १-४
आह्वान, योग्य होना, दही मिला सोमरस ५-७
मित्रता, आह्वान ८-१०
पाप से बचाने की प्रार्थना ११-१३
धन की स्वामिनी, कल्याण व बंधुमित्रों से मिलन कराने हेतु प्रार्थना १४-१५
५२. मरुद्गण का वर्णन १-१७
प्रसन्न होना, भ्रमणकर्त्ता, स्तुत्य, हव्य देना, १-४
नेता, आयुध ५-६
मरुद्गण, परिश्रम करना, घिरना, यज्ञ धारण हेतु प्रार्थना ७-१०
दर्शनीय, कूपनिर्माण, निर्माता, आह्वान ११-१४
दान प्राप्ति, पृश्नि, रुद्र, गाएं देना १५-१७
५३. मरुद्गण की स्तुति १-१६
पृश्नि, वर्षाकारी १-२
स्तुति, प्रमुदित होना, बरसना, आकाश जाना ३-७
आह्वान, नदियां, प्रशंसा ८-१०
अनुगमन, हविदाता, बीजदाता, जल, गाय आदि मांगना ११-१४
कृपापात्र, स्तुति हेतु आग्रह १५-१६
५४. मरुद्गण का वर्णन १-१५
तेजस्वी, जल गिरना, बल संपन्न, सर्वथा समर्थ १-४
पर्वत तोड़ना, धन याचना, संरक्षण ५-७
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सींचना, वर्षा करना मार्ग पार, करना, सुनहरी पगड़ी ८-१२
अक्षय, राजा श्यावाश्व, धन याचना १३-१५
५५. मरुतों की स्तुति १-१०
अन्न धारण, असीमित ज्ञान, अतिशय १-४
जलहीन न होना, बुंदकियों वाली घोड़ियां, फैलना, पीछे चलना, पाप से बचाने हेतु
प्रार्थना ५-९
५६. अग्नि एवं मरुतों की स्तुति १-९
आह्वान १-२
समूह का आना, शत्रुनाश, आह्वान, घोड़े जोड़ने हेतु प्रार्थना, देर न करना ३-९
५७. मरुतों की स्तुति १-८
जल पहुंचाना, आह्वान, वनों का कांपना, विस्तृत होना १-४
अमृत प्राप्ति, आयुध धारण करना, उत्तम संतान, धन व वर्षा हेतु प्रार्थना ५-८
५८. मरुतों की स्तुति १-८
प्रभासंपन्न, दीप्तिशाली, आह्वान, शत्रुनाशक, पुत्र हेतु प्रार्थना, गरजना, गर्भधारण,
धनस्वामी १-८
५९. मरुतों की स्तुति १-८
स्तुति, दिखाई देना, ज्ञाता, वृष्टि, युद्ध करना, हितकारी १-६
पानी गिराना, वर्षा हेतु प्रार्थना ७-८
६०. अग्नि एवं मरुतों की स्तुति १-८
स्तुति, बलसंपन्न, शब्द करना, स्वर्ग का कांपना १-३
शोभा धारण करना, नित्य युवा, आह्वान, शत्रुनाश व सोमपानार्थ प्रार्थना ४-८
६१. मरुद्गण की स्तुति एवं रानी शशीयसी का वर्णन १-१९
अकेले आना, लगाम दिखना, कोड़े लगना, हितकारी, रानी शशीयसी, महानता १-६
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दान का विचार, समान, मार्ग बताना, संपत्ति देना, स्तुतियां, चमकना ७-१२
बाधाहीन गति, प्रसन्न होना, स्वर्ग, धन मांगना १३-१६
रथवीति, सूचना पहुंचाने हेतु प्रार्थना १७-१९
६२. मित्र एवं मरुत् का वर्णन १-९
सूर्यमंडल, चमकीला बनाना, आकाश, नदियों का बहना १-४
अन्नस्वामी, पापत्राता, स्वर्णरथ, ५-७
लोहे की कील, विश्वरक्षक ८-९
६३. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७
रथ पर बैठना, शासन करना, आह्वान १-३
करना, घोड़े जोड़ना, भ्रमण, गरजना, यज्ञरक्षा ४-७
६४. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७
आह्वान, जाना, घर में सुख मिलने की प्रार्थना १-३
धन प्राप्ति की आशा, आह्वान ४-५
अन्नधारक, निकट आने की प्रार्थना ६-७
६५. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-६
स्तुति जानना, घूमना, रक्षार्थ प्रार्थना, उपाय बताना, रक्षार्थ प्रार्थना १-६
६६. मित्र, वरुण एवं धरती की स्तुति १-६
शत्रुनाशक, शक्ति, रक्षा हेतु स्तुति, जल बरसाना, दूरदर्शी १-६
६७. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-५
हितकारक, कल्याणकारी, भक्तरक्षक, मार्ग दिखलाना, शरण लेना १-५
६८. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-५
आह्वान, प्रशंसनीय, दानदाता, बढ़ना, रथ १-५
६९. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४
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कर्मरक्षक, जलधारक, स्तुति, भूलोकधारक १-४
७०. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४
सुमति, अन्न याचना, शत्रुसंहार करने व आत्मनिर्भर बनाने की प्रार्थना १-४
७१. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-३
आह्वान, कर्म सफल बनाने व सोमपान का आग्रह १-३
७२. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-३
आह्वान, यज्ञकर्मों में लगना, सोमपान का अनुरोध १-३
७३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
आह्वान, बुलाना, लोकभ्रमण, अन्न मांगना, किरणों का बिखरना, स्तुति, अत्रि, भरण,
प्रार्थना, स्तुतियां १-१०
७४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
सेवा करना, सहायक की इच्छा, वृष्टि की प्रार्थना, युवा बनाना, आह्वान, शिरोधार्य,
विषय, हव्य १-१०
७५. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
मधु-विद्याज्ञाता, स्वर्ण रथ, अन्नयुक्त, स्तुति, हव्य देना, च्यवन ऋषि, विचित्र रूप वाले,
आह्वान, अवस्यु ऋषि, नाशहीन रथ १-९
७६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५
प्रज्वलित होना, आह्वान, रक्षार्थ प्रार्थना, घर, सौभाग्य मांगना १-५
७७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-५
यज्ञधारक, तृप्त करना, दुर्गम मार्ग पार करना, संतान का पालन, सौभाग्य
मांगना १-५
७८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
आह्वान, गौरमृग, घरदाता, रक्षार्थ प्रार्थना, सप्तवध्रि ऋषि, बंद संदूक, गतिशील होने
की प्रार्थना, जरायु, जीवधारी १-९
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७९. उषा की स्तुति १-१०
अश्व देने वाली, सत्यश्रवा, अंधकार हरने की प्रार्थना, स्मरण करना, स्तुति, अन्न
मांगना, स्तुति, गाएं, धन याचना, ताप न देने का आग्रह, हिंसा न करना १-१०
८०. उषा का वर्णन १-६
महती, प्रकाश फैलाना, धन स्थायी करना, भली प्रकार चलना, उपस्थित होना,
प्रकाश बिखेरना १-६
८१. सविता की स्तुति १-५
कार्यों में लगना, प्रकाश फैलाना, सीमित, मित्र बनना, श्यावाश्व ऋषि १-५
८२. सविता की स्तुति १-९
प्रार्थना, ऐश्वर्य, कामना, दरिद्रता, अमंगल भगाने की प्रार्थना, धन धारण हेतु प्रार्थना,
सेवा, प्रेरणा १-९
८३. पर्जन्य की स्तुति १-१०
गर्भधारण, भागना, वर्षायुक्त करना, गरजना-टपकना, झुकना, पालक, जल धारण
हेतु प्रार्थना, मुदित होना, स्तुतियां मिलना १-१०
८४. पृथिवी की स्तुति १-३
प्रसन्न करना, बादलों को फेंकना, वनस्पतियां धारण करना १-३
८५. वरुण की स्तुति १-८
विस्तृत करना, सोमलता का विस्तार, धरती को गीला करना, बादल शिथिल करना,
नापना, विरोधहीन स्तुति, अपराध नष्ट करने व प्रिय बनाने की प्रार्थना १-८
८६. इंद्र व अग्नि का वर्णन १-६
तर्क काटना, स्तुति, वज्र, प्रशंसनीय, अश्व हेतु स्तुति, अन्न मांगना १-६
८७. मरुद्गण का वर्णन १-९
एवयामरुत्, स्थिर होना, पुकार सुनना, बल व तेजयुक्त, अपार महिमा, विस्तृत गृह,
पाप भगाने व निंदकों को वश में करने की प्रार्थना १-९
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षष्ठम मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-१३
प्रार्थना, अनुगमन, अन्न-धन हेतु स्तुति, माता-पिता, आनंददाता, स्तुति १-८
क्रांतदर्शी, सेवा, अन्न व धन के लिए प्रार्थना, सौभाग्य व धन हेतु स्तुति ९-१३
२. अग्नि की स्तुति १-११
अन्न मांगना, सेवा करना, आह्वान व घर याचना १-५
दीप्तियुक्त, पालक, अरणि में वास, ज्वालाएं, समृद्धि व गृह हेतु स्तुति ६-११
३. अग्नि की स्तुति १-८
दीर्घायु, शांत बनाना, ज्वालाएं, तीक्ष्ण, विचित्र गति, तेजस्वी, वेगशाली १-८
४. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञपूर्ण करने व अन्न हेतु स्तुति १-२
पवित्रकर्त्ता, अन्नदाता, स्तुति, अंधकारनाशक ३-६
गतिशील, शतायु हेतु स्तुति ७-८
५. अग्नि की स्तुति १-७
धनदाता, स्थापित, शत्रुनाशार्थ स्तुति, अन्न ओर धन याचना १-७
६. अग्नि की स्तुति १-७
होता, युवा, ज्वालाएं, वनदाहक, शत्रुनाश हेतु प्रार्थना, अन्न, धन, संतान याचना १-७
७. अग्नि की स्तुति १-७
उत्पत्ति, धन में वास, धन हेतु स्तुति, अमरपद दाता, सूर्य की स्थापना, उच्चस्थल, पालक १-७
८. अग्नि का वर्णन १-७
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व्याप्त, व्रतरक्षक, शक्तिधारक, अर्चनीय स्वामी, अजर, पुत्र, धन याचना, रक्षार्थ
स्तुति १-७
९. अग्नि का वर्णन १-७
अंधकारनाशक, ताना-बाना, ज्ञाता, होता, अमर, प्रधानकर्त्ता, उत्सुक बुद्धि,
नमस्कार १-७
१०. अग्नि का वर्णन १-७
दीप्तिशाली, भेंट देना, समृद्धि एवं गोशाला दाता, अंधकारनाशक १-४
अन्न, धन, बल याचना, शतायु हेतु स्तुति ५-७
११. अग्नि की स्तुति १-६
यज्ञकर्त्ता, ज्वाला, अंगिरा, भरद्वाज, वेदी में वास, धन प्राप्ति व शत्रु से दूर रखने हेतु
प्रार्थना १-६
१२. अग्नि का वर्णन १-६
यज्ञस्वामी, हव्य पहुंचाने हेतु प्रार्थना, ज्ञान कराने वाली, जातवेद, सुशोभित, संतान
याचना १-६
१३. अग्नि की स्तुति १-६
धन की उत्पत्ति, धन मांगना, ज्ञानसंपन्न, संपत्ति पाना, अन्न मांगना, संतान के साथ
जीने की प्रार्थना १-६
१४. अग्नि की स्तुति १-६
शत्रु-धन की प्राप्ति, कुशल, यज्ञहीन, शत्रुनाशक, रक्षक, दीप्तिसंपन्न १-६
१५. अग्नि का वर्णन १-१९
प्रजारक्षक, स्तुत्य, भरद्वाज, एतश, पूज्य, क्रांतदर्शी, पालक, सुख याचना, यजन,
अभिलाषापूरक, यज्ञकर्ता, गृहस्वामी, सर्वव्यापक, रक्षार्थ प्रार्थना १-१५
देवप्रमुख, मंथन, आह्वान, गार्हपत्य यज्ञ १६-१९
१६. अग्नि की स्तुति १-४८
होता बनाना, हव्य, यज्ञ विधाता, यजन १-४
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सुख व हेतु प्रार्थना भरद्वाज, स्तुति, दर्शनीय तेज, विद्वान्, स्तुति, बढ़ाना, धन
मांगना ५-१२
अग्नि मंथन, दध्यङ् प्रज्वलन, स्तुतियां १३-१६
अनुग्रह, दृष्टिरक्षार्थ याचना, पालक, महिमा, विस्तार करना, शत्रुनाशक, देवदूत,
पवित्रकर्मा, अन्नदाता १७-२८
जातवेद, विशेषद्रष्टा, रक्षा, याचना, स्तुति, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना २९-३४
शत्रुनाश, अन्न, संतान प्राप्ति हेतु प्रार्थना, शरण लेना, तेज सींग ३५-३९
अग्नि पकड़ना, हव्य, सुखकर, आह्वान, दीप्ति संपन्न, यजन योग्य, ऋचाएं,
स्तुति ४०-४८
१७. इंद्र की स्तुति १-१५
गाएं खोजना, शत्रुरक्षक, अन्न हेतु प्रार्थना, सर्वगुणी १-४
स्थापक, दुधारू बनाना, धरती को पूर्ण बनाना ५-७
अग्रणी, वृत्रवध, वज्र बनाना, भैंसे पकाना, नदियां मुक्त करना ८-१२
स्तुतियां, बल, अन्न प्राप्ति व सौ वर्ष तक प्रसन्न रहने के लिए प्रार्थना १३-१५
१८. इंद्र की स्तुति १-१५
इच्छापूरक, सोमपानकर्त्ता, पुत्र देना, वासदाता, शत्रुनाशक १-४
बल असुर का वध, नगरों का नाश ५
वंदनीय, चुमुरि, पिप्रु, शंबर, शुष्ण व धुनि का वध, माया-नाशक, महिमा ६-१२
कुत्स, आयु एवं दिवोदास १३
धन प्राप्ति हेतु प्रार्थना, स्तोत्र के जनक १४-१५
१९. इंद्र की स्तुति १-१३
अपराजित, युद्ध संचालन, आह्वान, धनस्वामी, धन, पुत्र व पौत्र हेतु प्रार्थना १-१०
आह्वान, धन से प्रसन्नता मांगना ११-१३
२०. इंद्र की स्तुति १-१३
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धनस्वामी, वृत्रसंहारक, सोम के राजा १-३
पणि की सेनाएं, शुष्ण, निमि, नगरों का नाश ४-७
सुखदाता, अपराजित, नगरों का नाश ८-१०
उशना को बढ़ाना ११
यदु व तुर्वसु को सागर पार कराना १२
धुनि व चुमुरि को सुलाना १३
२१. इंद्र की स्तुति १-१२
शूर, बुद्धिमान्, बलशाली, प्रसिद्ध कर्म १-४
अंगिरा द्वारा स्तुति ५-१०
विद्वान्, मार्ग-निर्माता ११-१२
२२. इंद्र का वर्णन १-११
सत्यभाषी, शत्रुहंता, धन याचना, असुरनाशक, शक्तिदाता, वृत्रनाशक १-६
पापों से बचाने, राक्षसों को जलाने व वज्र धारण करने हेतु प्रार्थना ७-९
संपत्ति मांगना, आह्वान १०-११
२३. इंद्र का वर्णन १-१०
वैदिक स्तुतियां १
यजमान रक्षक, निवास स्थान व पुत्रदाता २-४
वेदमंत्रों व स्तोत्रों का उच्चारण ५-६
सोमपान हेतु आग्रह, सन्मार्ग प्रेरक ७-१०
२४. इंद्र का वर्णन १-१०
स्तुति व अन्नस्वामी, शूर, बुद्धिमान्, विलक्षण कर्मकर्त्ता १-५
अन्नेच्छुक, भरद्वाजगोत्रीय ऋषि ६
शरीर वृद्धि, पर्वत का भी सुगम होना ७-८
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अन्न, संतान, रक्षा याचना, सौ वर्ष तक प्रसन्न रहने हेतु प्रार्थना ९-१०
२५. इंद्र की स्तुति १-९
अन्न प्राप्ति, शत्रु से रक्षा हेतु स्तुति १-३
विवाद, सर्वजेता, हवनकर्त्ता को धन मिलना ४-६
नेता, देवों से मिला बल, निवास हेतु स्तुति ७-९
२६. इंद्र की स्तुति १-८
अन्न के लिए स्तुति १-३
वृषभ, वेतस और राजा तुजि, तुग्र वध, दिवोदास, शंबर, दभीति, चुमुरि ४-६
बल, सुख व धन मांगना ७-८
२७. इंद्र का वर्णन १-८
सोमपान, धनस्वामी, वरशिख के पुत्रों का वध, यव्यावती नदी, अभ्यवर्ती,
चायमान १-८
२८. गायों एवं इंद्र का वर्णन १-८
नाना रंगों वाली गाएं, धन देना, गायों के साथ रहना विशसन संस्कार, इंद्र बनना,
बलिष्ठ बनाने की प्रार्थना १-६
साफ पानी पीने का आग्रह, पुष्टि हेतु प्रार्थना ७-८
२९. इंद्र की स्तुति १-६
अनुग्रह, मानवहितकारी, धनदाता, दूध-दही मिला सोमरस, अनंत शक्तिशाली, हरी
ठोढ़ी १-६
३०. इंद्र की स्तुति १-५
धनदाता, असुरनाशक, मार्ग बनाना, सबसे बड़े राजा १-५
३१. इंद्र की स्तुति १-५
एकमात्र स्वामी, जल बरसाना, कुयव का वध, नगरी-नाशक, रक्षार्थ पुकारना १-५
३२. इंद्र का वर्णन १-५
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स्तुतियां, मुक्त करना, नगर नाशक, कामपूरक, दक्षिणायन सूर्य १-५
३३. इंद्र की स्तुति १-५
पुत्र मांगना, अन्न मिलना, धन याचना, गो-स्वामी १-५
३४. इंद्र का वर्णन १-५
विचारधाराएं, प्रसन्न करना, सोमरस अर्पित, संग्राम-रक्षक १-५
३५. इंद्र की स्तुति १-५
यज्ञकर्म, धन याचना, गोदाता स्तोत्र, गाय व अन्न मांगना प्रार्थना १-५
३६. इंद्र का वर्णन १-५
हितकारक, बल पूजा, स्तुतियों का मिलना, धन मांगना, शत्रुधन जीतने के लिए
अनुरोध १-५
३७. इंद्र का वर्णन १-५
स्तुति, सोमरस का बहना, रथ में जुड़े घोड़े, धन, संतान व बलदाता १-५
३८. इंद्र का वर्णन १-५
सोमपान, प्रेरक स्तुतियां, मास, संवत्सर व दिन, बल, धन, रक्षा हेतु सेवा १-५
३९. इंद्र की स्तुति १-५
सोमपान का आग्रह, इंद्र-पणि युद्ध १-२
शोभन जन्म वाली, तेज से भरना, सेवक मांगना ३-५
४०. इंद्र की स्तुति १-५
अन्न याचना, सोमपान, आह्वान, सोमपान का आग्रह, आह्वान १-५
४१. इंद्र की स्तुति १-५
आह्वान, शत्रुनाश की कामना, सोमरस, आह्वान, रक्षार्थ प्रार्थना १-५
४२. इंद्र का वर्णन १-४
युद्धनेता, आह्वान, अभिलाषापूरक १-४
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४३. इंद्र की स्तुति १-४
शंबर का वध, सोमपान आग्रह १-४
४४. इंद्र की स्तुति १-२४
प्रसन्नता देने की कामना १-३
शत्रुजेता, शत्रुधनहर्ता, रक्षक, ४-७
आविर्भूत होने की कामना, धन मांगना, रक्षार्थ प्रार्थना, सोमरस देना, प्रसन्न होने की
कामना, धनस्वामी, अभिलाषापूरक ८-२१
आयुध बेकार होना, अमृत मिलना व दूध धारण करना २२-२४
४५. इंद्र एवं बृहस्पति का वर्णन १-३३
तुर्वश व यदु राजा १
शत्रुओं का धन जीतना २
अनंत रक्षासाधन, बुद्धिदाता, रक्षा, समृद्धि हेतु प्रार्थना ३-६
आह्वान, हाथों में संपत्तियां ७-८
यज्ञस्वामी, अन्न व धन के लिए आह्वान ९-११
जीतने योग्य बनना १२
धन जीतना १३-१६
सुख याचना, असुरसंहारक, आह्वान १७-१९
एकमात्र स्वामी, गोपालक, आह्वान २०-२२
गायों सहित अन्न देने वाले, गाएं को प्रकट करना, गाय-घोड़ा देने वाले बनने का
अनुरोध २३-२६
निंदक, गायों का बछड़ों के पास जाना, बृबु, गाएं देना, स्तुतिपात्र, शत्रुनाशक, धन के
लिए प्रेरणा का अनुरोध २७-३३
४६. इंद्र की स्तुति १-१४
आह्वान, स्तुति, पालक १-३
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संतान, अन्न की प्राप्ति व शत्रु की हार हेतु स्तुति ४-६
धन, बल व अन्न की प्राप्ति व शत्रु को जीतने हेतु प्रार्थना ७-९
आक्रमण से बचाने व शत्रु भगाने हेतु स्तुति १०-१२
घोड़ों को आगे बढ़ाने हेतु स्तुति १३-१४
४७. सोमरस का वर्णन एवं इंद्र की स्तुति १-३१
मधुर सोम, मदमत्त होना, वाणी का तेज होना, जल, दृढ़ करना, स्वर्ग धारण
करना १-५
धन देने का आग्रह, भरोसा, अन्न-धन के लिए प्रार्थना ६-९
बुद्धि देने की प्रार्थना, आह्वान, रक्षक १०-१२
शोभन, मिलाना, आगे-पीछे पैर रखना, सेवकों को बुलाना, मित्र १३-१७
रथ, घोड़े, मार्गदर्शन हेतु स्तुति १८-२०
शंबर व वर्ची का वध, प्रस्तोक, दिवोदास २१-२३
दान, पूजा, रथ, दिव्य रथ, दुंदुभि २४-२९
दृढ़ता की याचना, गाएं लाने की प्रार्थना ३०-३१
४८. अग्नि का वर्णन १-२२
प्रिय, रक्षक, अभिलाषापूरक, हव्य अन्न के लिए स्तुति १-४
प्रकट होना, धन हेतु स्तुति, गृहपति, धन के नेता, पालन हेतु प्रार्थना ५-१०
बछड़ों को अलगाना, आना, दुधारू गाय, अन्न व धन के लिए मरुतों से
याचना ११-१५
शत्रुओं को भगाने, निंदकों का नाश करने हेतु प्रार्थना, मित्रता व अनुग्रह के लिए पूषा
की स्तुति १६-१९
मार्गदर्शिका वाणी २०
बल धारण, स्वर्ग व धरती की उत्पत्ति २१-२२
४९. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
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बलसंपन्न मित्र, प्रेरणा १-२
सूर्य की दो कन्याएं—रात और दिन ३
धन हेतु वायु की स्तुति ४
अभिलाषा पूर्ण करने हेतु अश्विनीकुमारों की स्तुति ५
देवों की स्तुति, सोने की सींग वाली गाएं ६-८
अन्नधारक ९-१०
वृक्षों को सींचने हेतु प्रार्थना ११
स्तुति १२
तीन लोकों को नापना, याचना १३-१४
अन्न व घर मांगना १५
५०. विभिन्न देवों का वर्णन १-१५
आह्वान, अग्निजिह्व, बल याचना १-३
आह्वान, प्राणियों का कांपना ४-५
अन्न हेतु इंद्र की स्तुति ६
हितकारी जल ७
धनदाता ८
पुत्र-पौत्र से युक्त करने हेतु आग्रह ९
युद्ध से बचाने के लिए प्रार्थना १०
धन प्राप्ति हेतु प्रार्थना ११
अन्न बढ़ाने हेतु आग्रह १२
रक्षा हेतु देवों की स्तुति १३-१५
५१. विभिन्न देवों का वर्णन १-१६
सूर्य, मित्र व वरुण का तेज १
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