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सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

व्यक्ति को 50 मिली से अधिक नहीं पीना चाहिए। गोमूत्र केवल उन्हीं गोमाता का पीएँ जो चलती हों क्योंकि उन्हीं का मूत्र उपयोगी होता है। बैठी हुई गोमाता का मूत्र किसी काम का नहीं होता। जैसे – जर्सी गाय कभी नहीं घूमती और उसके मूत्र में केवल 3 ही पोषक तत्व पाए जाते हैं। वही देसी गाय के मूत्र में 18 पोषक तत्व पाये जाते हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सा

❖ कब्ज

हमारे द्वारा भोजन ग्रहण करने के बाद उसका पाचन संस्थान द्वारा पाचन होता है। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रूकावट होती है, तो फिर भोजन सही ढंग से नहीं पचता तथा अपच होती है और फिर कब्ज होती है। सही ढंग से मल का न निकलना कब्ज कहलाता है।

  • • सौंठ+काली मिर्च+पीपल को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें, सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें। कब्ज दूर होगी।
  • • रात में दूध के साथ दो चम्मच ईसबगोल खाने से कब्ज में आराम मिलता है।
  • • रात को गर्म दूध के साथ एक चम्मच त्रिफला लेने से कब्ज दूर होगा।
  • • भोजन के साथ सुबह शाम पपीता खाने से कब्ज दूर होता है।
  • • सौंठ + हरड + अजवायन को समान मात्रा में पानी में उबालें तथा वह पानी लेने से कब्ज दूर होगा।

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❖ पेट दर्द, एसिडिटी (अम्लपित्त)

पेट में कब्ज के दौरान अम्लपित्त बनने लगता है। खट्टी डकारें आती हैं। पेट में भारीपन लगता है। कुछ भी खाने की इच्छा नहीं होती।

  • • 1. अजवायन का चूर्ण शहद में मिलाकर लेने से बदहजमी दूर होती है।
  • • 2. अजवायन और नमक की फंकी गर्म पानी के साथ लें।
  • • 3. एक ग्राम सौंठ के चूर्ण में चुटकी भर हींग और सेंधा नमक मिलाकर सुबह शाम पानी के साथ सेवन करें।

❖ अतिसार एवं संग्रहणी

यह आंतों का रोग है। पतले और बदबूदार दस्त होना अतिसार कहलाता है। यह अधिकांशतः दूषित जल के कारण होता है या दूषित भोजन के कारण। इसमें पेट में दर्द, मरौड़, एंठन होती है और कभी गाढ़ा या पतला दस्त होता है।

  • • भुने हुए जीरे का चूर्ण दही के साथ खायें।
  • • थोड़ी सी सौंफ तवे पर भूनकर उसका पावडर बनाकर मठे के साथ लें।
  • • तेजपात के पत्ते + दालचीनी + ¼ मात्रा कल्पा का काढ़ा बनाकर पिलाने से दस्त तुरन्त बंद होते हैं।
  • • चावलों का मांड तथा थोड़ा काला नमक और जरा सी भुनी हींग मिलाकर पीने से दस्त में लाभ मिलता है।
  • • 5.10 दाने तुलसी के बीज पीसकर गाय के दूध के साथ लें।

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❖ अल्सर / पेटिक अल्सर

पेटिक अल्सर एक तरह का घाव है जो कि पेट के भीतरी हिस्से की परत में, भोजन नली में और छोटी आंत में विकसित होते हैं। पेटिक अल्सर के दौरान पेट में दर्द होता है और ये दर्द नाभि से लेकर छाती तक महसूस होता है, अल्सर कि वजह से पेट में जलन, दांत काटने जैसा दर्द, ये दर्द हमारे पीछे के हिस्से में भी हो सकता है। आमतौर पर पेट में दर्द तब होता है जब खाना खाने के कई घन्टे के बाद तक हमारा पेट खाली रहता है।

  • • गुडहल के लाल फूलों को पीसकर, पानी के साथ इसका शर्बत बनाकर पीए।
  • • गाय के दूध में हल्दी की कुछ मात्रा मिलाकर इसे प्रतिदिन पीये।
  • • बेल का जूस या बेलपत्र को पीसकर इसे पानी में घोलकर बनाए गए पेय का सेवन करने से अल्सर में लाभ मिलता है।

❖ पीलिया (जॉन्डिस)

इसका मुख्य कारण शरीर में सही ढंग से खून ना बनना है। इस कारण शरीर में पीलापन आ जाता है। सबसे पहले आंखों में पीलापन आता है उसके बाद शरीर और मूत्र पीला होता है। भूख न लगना, भोजन को देखकर उल्टी आना, मुंह का स्वाद कड़वा होना, नाड़ी की गति धीरे चलना आदि लक्षण हैं।

  • • गिलोय का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम सादे पानी के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।
  • • त्रिफला चूर्ण का काढ़ा बनाएँ उसमें मिश्री और घी मिलाकर सेवन करें।
  • • 10 ग्राम सौंठ का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम उपयोग करें।

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❖ बवासीर(अर्श)

यह रोग मुख्यतः कब्ज के कारण होता है। जिन लोगों को कब्ज की शिकायत लंबे समय तक रहती है उनको मुख्यतः यह रोग होता है। बवासीर दो प्रकार की होती है। 1. खूनी बवासीर 2. बादी बवासीर। इस रोग में मल बहुत कठिनाई से निकलता है और मल के साथ खून भी निकलता है।

  • • आँवले चूर्ण 10 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ लेने पर बवासीर में लाभ मिलता है।
  • • मूली का रस काला नमक डालकर पीने से भी आराम मिलता है।
  • • 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण शहद के साथ चाटें।
  • • काले तिल और ताजे मक्खन को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर नष्ट होता है।

❖ उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप हृदय, गुर्दे और रक्त संचालन प्रणाली की गड़बड़ी के कारण होता है। यह रोग किसी को भी हो सकता है। जो लोग क्रोध, भय, दुख या अन्य भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्हें यह रोग अधिक होता है। जो लोग परिश्रम कम करते हैं तथा अधिक तनाव में रहते हैं, शराब या धूम्रपान अधिक करते हैं। इसमें सिर में दर्द होता है और चक्कर आने लगते हैं। दिल की धड़कन तेज हो जाती है। आलस्य होना, जी घबराना, काम में मन न लगना, पाचन क्षमता कम होना, और आँखों के सामने अंधेरा आना, नींद न आना आदि लक्षण होते हैं।

  • • कच्चे लहसुन की एक दो कली पीसकर प्रातः काल चाटने से उच्च रक्तचाप सामान्य होता है।
  • • उच्च रक्त चाप के रोगी को साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग लाभकारी होता है।

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  • • सौफ, जीरा और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनायें तथा सुबह-शाम सादे पानी से लें आराम मिलेगा।
    • • आधा चम्मच दालचीनी, आधा चम्मच शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह लें।
    • • एक चम्मच अर्जुन की छाल का पाउडर, पानी में उबालकर पीयें।

❖ निम्न रक्त चाप

व्यक्ति के भोजन न करने से अथवा अधिक आयु होने से निम्न रक्त चाप होता है। यानि कि बुढ़ापे में सामान्य रूप से यह बीमारी होती है। पाचन तंत्र ठीक न होना, असफलता, निराशा और हताशा से निम्न रक्त चाप होता है। चक्कर आना, थकाना होना, नाड़ी धीरे चलना, मानसिक तनाव, हाथ पैर ठंडे पड़ना इसके लक्षण हैं।

  • • गुड़ पानी में मिलाकर, नमक डालकर, नीबू का रस मिलाकर दिन में दो – तीन बार पीयें।
  • • मिश्री में मक्खन मिलाकर खाये।
  • • पीपल के पत्तों का रस शहद में मिलाकर चाटें।
  • • कच्चे लहसुन का प्रयोग करें, एक या दो कली प्रतिदिन दांतों से कुचलकर खायें।

❖ हृदय में दर्द

आजकल की जीवन शैली में, व्यापार में, घर में तनाव के कारण यह रोग अधिक होता है। हृदय में धमनियों द्वारा रक्त संचार बराबर मात्रा में नहीं होता। धमनियों में रूकावट के कारण ही यह रोग होता है।

  • • कच्ची लौकी का रस थोड़ा हींग, जीरा मिलाकर सुबह-शाम पीने से तत्काल लाभ मिलता है।

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  • ● अर्जुन की छाल का 10 ग्राम पाउडर और पाषाणवैध का 10 ग्राम पाउडर लेकर 500 मिली पानी में उबालें और पानी आधा रहने पर ठंडा करके सुबह शाम पीयें। इससे हृदय घात की बीमारी दूर होती है।
    • ● गाजर का रस निकालकर सूप बनाकर पीने से लाभ मिलता है।
    • ● इस बीमारी में लहसुन का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ हैं। खाने में पके रूप में और कच्चे रूप में भी ले सकते हैं

❖ मोटापा

शरीर में जब वसा की मात्रा बढ़ जाती है और वह शरीर में एकत्र होने लगती है तो इसी से मोटापा आता जाता है। वह एकत्र वसा ही मोटापा है। मोटापा आने के बाद शरीर में सुस्ती रहती है, थकान होने लगती है। इसी कारण शुगर, हृदय रोग, अपच, कब्ज आदि बीमारी होने लगती है।

  • ● सुबह-शाम खाली पेट गर्म पानी में नींबू निचोड़कर, सेंधा नमक मिलाकर पीयें।
  • ● 10 ग्राम सौंठ को शहद में मिलाकर चाटने से भी मोटापा कम होता है।
  • ● मूली के सलाद में नींबू और नमक मिलाकर प्रतिदिन लें।
  • ● खाने के बाद एक चुटकी काले तिल चबाकर खायें।

❖ खाज खुजली

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खाज-खुजली एक संक्रामक रोग है। जिसके कारण त्वचा पर छोटी-छोटी फुन्सियां निकल आती हैं और उनमें से पानी भी निकलता है। कभी-कभी पेट साफ न होने से, कब्ज रहने से तथा खून में अशुद्धि होने से भी ये खुजली पैदा होती है।

  • ● नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर गरम करें और खुजली वाले स्थान पर लगायें।
  • ● गाय के घी में कुछ लहसुन मिलाकर गर्म करें और उसकी मालिश खुजली वाले स्थान पर करें।
  • ● नींबू के रस में पके हुए केले को मसलकर खुजली वाले स्थान पर लगायें।
  • ● भुने हुए सुहागे को पानी में मिलाकर लगाने से खुजली में आराम मिलता है।

❖ फोड़ा फुन्सी

खून में विकार होने से फोड़े फुन्सी निकलते हैं। वर्षा ऋतु में अधिक आम खाने से या गंदे पानी में घूमने से फोड़े फुन्सी निकलते हैं।

  • ● लौंग को चंदन के साथ घिसकर लगाने से फुन्सियों में लाभ होता है।
  • ● नीम की पत्तियों की पुल्टीस बांधने से तथा नीम की छाल का पानी लगाने से फोड़े फुन्सी जल्दी ठीक हो जाते हैं।

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  • ● फोडे-फुन्सियों पर लौंग धिसकर लगाने से आराम मिलता है।
    • ● हल्दी के साथ शहद चाटें।

❖ दाद (छलन)

दाद रोग अपच होने, लू लगने, खून में विकार रहने, साबुन , चूने का अत्याधिक प्रयोग करने, माँ के दूध में खराबी होने से तथा स्त्रियों में मासिक धर्म की गड़बड़ियों की वजह से होता है। यह रोग हाथ, पैर, मुहँ, कोहनी, गर्दन, पेट आदि कहीं पर भी हो सकता है। लाल फुन्सियां शरीर पर हो जाती हैं।

  • ● सबसे पहले अत्याधिक मिर्च मसाले, मिठाई, तेल और अचार, खट्टी चीजे खाना बंद करना चाहिए। क्योंकि यह पदार्थ रोग को बढ़ाते हैं। पेट साफ रखें और कब्ज न होने दें।
  • ● नींबू के रस में सुहागे को मिलाकर लगाने से दाद समाप्त होता है।
  • ● भूना हुआ सुहागा और भुनी हुई फिटकरी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और दाद पर लगायें।

❖ जलजाना

आग या किसी गर्म चीज से अचानक से जल जाने से शरीर में फफोले पड़ जाते हैं। घी, तेल, दूध, चाय, भाप, गर्म तवे से जलने से भी फफोले पड़ जाते हैं। काफी तेज जलन होती है। कभी-कभी फफोलों में मवाद भी आ जाता है।

  • ● सबसे पहले जले हुए हिस्से को ठंडे पानी में डालकर रखें।

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  • ● दही के पानी में थोड़ा सा चूना मिलाकर जले हुए स्थान पर लगायें। (तेल से जलने पर)
    • ● आग से जल जाने पर तारपीन के तेल में कपूर मिलाकर लेप करें।
    • ● नारियल के तेल में मोम मिलाकर गरम करें और ठंडा होने पर मरहम की तरह लगायें।
    • ● मुल्लानी मिट्टी को दही में मिलाकर जले हुए स्थान पर लेप करें।

शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट

❖ मिरगी

शारीरिक तथा मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को मिरगी अधिकांश रूप से आती है। अत्याधिक शराब पीना, अधिक शारीरिक श्रम, सिर में चोट लगने से यह बीमारी हो सकती है। इस रोग में अचानक से दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ती है। हाथ और गर्दन अकड़ जाती है, पलकें एक जगह रूक जाती हैं रोगी हाथ पैर पटकता है, जीभ अकड़ जाने से बोली नहीं निकलती, मुँह से पीला झाग निकलता है। चारों तरफ या तो काला अंधेरा दिखाई देता है या सब चीजें सफेद दिखाई देती हैं। इस तरह के दौरे 10-15 मिनट से लेकर 1-2 घंटे तक के भी हो सकते हैं।

  • ● दौरा पड़ने पर रोगी को दायीं करवट लिटायें ताकि उसके मुँह से सभी झाग आसानी से निकल जायें। दौरा पड़ने के समय रोगी को कुछ भी न खिलायें बल्कि दौरे के समय अमोनिया या चुने की गंध सुघानी चाहिए, इससे उसकी बेहोशी दूर हो सकती है।
  • ● ब्रह्मी बूटी का रस 1 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम पिलाने से आधा रहने पर हल्का सा संधा नमक मिलाकर दिन में 2 बार पिलायें।

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  • ● नीम की कोमल पत्तियाँ, अजवायन और काला नमक इन सबको पानी में पीसकर पेस्ट बनाकर सेवन करें।
    • ● तुलसी के 4-5 पत्ते कुचलकर उसमें कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाये।

❖ लकवा

लकवा/पक्षाघात होने पर रोगी का आधा शरीर संवेदनहीन हो जाता है। पेट में अधिक गैस बनने, मस्तिष्क पर वायु का दबाव पड़ने और हृदय पर वायु का दबाव बढ़ने से शरीर पर वायु का झटका लगता है। स्नायु शिथिल हो जाते हैं। शरीर का आधा भाग टेढ़ा हो जाता है।

  • ● 250 मिली गाय के दूध में 8-10 लहसुन की कलियाँ डालकर उबालें। गाढ़ा होने पर रोगी को पिलायें।
  • ● 250 ग्राम सरसों के तेल में थोड़ी काली मिर्च पीसकर डालें और मालिश करें।
  • ● तुलसी के 8-10 पत्ते, सेंधा नमक और दही की चटनी बनाकर लकवे वाले स्थान पर लेप करें।
  • ● सौंठ और उड़द उबालकर उसका पानी पीने से लकवे में काफी लाभ होता है।

❖ आधा सीसी

आधा सीसी का दर्द अधिकांशतः दिन में ही होता है। यह अत्याधिक मानसिक श्रम, पेट में वायु के बने रहने से शरीर में धातु दोष होने से होता है। यह पुरुषों की अपेक्षा स्त्रियों में अधिक होता है। आधा सीसी का रोग सिर के आधे हिस्से में ही होता है और काफी ते दर्द होता है और रोगी बैचेन हो जाता है।

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  • ● छोटी पीपली का चूर्ण शहद के साथ चाटने से लाभ होता है।
    • ● संतरे के छिलके का रस उस नथुने में डाले जिस ओर आधा सीसी दर्द नहीं हो रहा है।
    • ● देशी गाय का घी नाक के नथुनों पर डालें
    • ● मेहंदी की पत्तियों को पीसकर माथे पर लेप लगायें।

❖ कमर दर्द

महिलाओं को श्वेत प्रदर या मासिक धर्म की गड़बड़ी के कारण यह दर्द रहता है। तथा पुरुषों को अधिक परिश्रम करने या वायुप्रकोप या गलत ढंग से उठने बैठने या सोने से यह रोग हो जाता है।

  • ● प्रातः काल खाली पेट अखरोट की गिरी खाने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
  • ● नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करें।
  • ● सौंठ+हरड+गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। सुबह शाम आधा चम्मच लेने से कमर दर्द में आराम मिलेगा।
  • ● पीपला की छाल का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम लें।

❖ याददाश्त कम होना

कमजोर स्मरण शक्ति आजकल प्रायः युवा लोगों में देखी जाती है। बुढ़ापे में भी इसकी आम शिकायत रहती है। अत्याधिक चिंता या भय से ग्रस्त होने पर अथवा क्रोध या शोक से प्रभावित होने पर या अत्याधिक पढ़ने से स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है।

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  • ● शंख पुष्पी को पीसकर चूर्ण बनायें और 250 ग्राम दूध में आधा चम्मच शंख पुष्पी और 1 चम्मच शहद मिलाकर प्रातःकाल लें।
    • ● आठ दस बादाम की मिगी रात्रि में पानी में भिगायें तथा सुबह इनके छिलके उतारकर अच्छी तरह पीसें। 250 ग्राम देशी गय के गर्म दूध में इसे मिलाये तथा थोड़ा सा काली मिर्च चूर्ण और दो चम्मच शहद दूध में मिलाये, (ठंडा होने पर), इसके साथ दूध में 1 चम्मच देशी गाय का घी भी मिलायें और सेवन करें।
    • ● प्रतिदिन गाय के दूध में मुलहठी का 1 चम्मच चूर्ण डालकर पीयें।

❖ अनिद्रा

अनिद्रा मानसिक अशांति के कारण होती है। बहुत अधिक थकान, गलत ढंग के खाने पीने से, कब्ज रहने से, मानसिक तनाव और चिंता रहने से, या शरीर के किसी भी भाग के रोगग्रस्त हो जाने से यह बीमारी होती है। अत्याधिक धूम्रपान और मदिरापान करने से भी यह बीमारी होती है।

  • ● रात्रि में सोने से पूर्व अच्छे ढंग से गर्म पानी से हाथ पैर धोकर तलवों पर सरसों के तेल की मालिश करें।
  • ● 2 चम्मच शहद में 1 चम्मच प्याज का रस मिलाकर चाटें।
  • ● रात्रि को भोजन के बाद घूमने अवश्य जाये, भोजन जल्दी करें, देर रात में न खाये, हल्का भोजन करें।
  • ● 10 मिनट ध्यान मुद्रा योग करें, बहुत अच्छी नींद आयेगी।

❖ सिरदर्द

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पेट की खराबी बढ़हजमी या पेट में गैस बनने से सिरदर्द हो सकता है। दर्द के कारण नींद नहीं आती तथा सिर फटता हुआ सा महसूस होने लगता है। सिर दर्द में कई बार उल्टियाँ भी होती हैं।

  • • तुलसी के पत्तों के रस में जरा सी सौंठ मिलाकर माथे पर लेप करें।
  • • लहसुन की एक कली को घी में भुन कर खाये
  • • हल्दी और ऐलोवेरा को मिलाकर माथे पर लेप करें।
  • • दो चम्मच त्रिफला चूर्ण और थोड़ी सी मिश्री मिलाकर भोजन से पूर्व ले।

श्वसन संस्थान के रोग

श्वसन संस्थान हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हमारे साँस लेने से लेकर और साँस निकालने तक की प्रक्रिया में ढेर सारे अंगों का उपयोग होता है। नाक, गला, हृदय, फेफड़े, पसलियाँ, डायफ्राम, आदि अंगों का उपयोग होता है। यदि हमें पर्याप्त मात्रा में शुद्ध ऑक्सीजन ना मिले तो इन सभी अंगों में बीमारियाँ उत्पन्न होने लगती हैं। अत्याधिक शराब पीने, चिंता करने, तम्बाकू, गुटखा खाने, दूषित और विषैले भोज्य पदार्थ खाने से तथा अत्याधिक धूम्रपान करने से यह अंग खराब होते हैं। इनके अंतर्गत खाँसी, दमा, सर्दी, जुकाम, टॉन्सिल्स, श्वास रोग आदि सब होते हैं।

❖ ब्रेन मलेरिया, टाइफाईड, चिकुनगुनिया, डेंगू,

स्वाइनफ्लू, इन्सेफेलाइटिस, माता व अन्य के बुखार

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  • ● 20 पत्ते तुलसी, नीम की गिलोई 5 ग्राम, सोंठ(सूखी अदरक) 10 ग्राम, 10 छोटी पीपर के टुकड़े, सब आपके घर में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इन सब को एक गिलास पानी में उबालकर काढ़ा बनाना है ठण्डा होने के बाद दिन में सुबह, दोपहर और शाम तीन बार पीना चाहिए।
    • ● नीम गिलोई – इसका डेंगू रोग में श्वेत रक्त कणिकाये, प्लेट-लेट्स कम होने पर तुरंत बढ़ाने में बहुत ज्यादा काम आता है।
    • ● एक और अच्छी दवा है, एक पेड़ होता है उसे हिन्दी में हारसिंगार कहते हैं, संस्कृत में पारिजात कहते हैं बंगला में शिउली कहते हैं, उस पेड़ पर छोटे छोटे सफेद फूल आते हैं, और फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमें खुशबु आती है, रात को फूल खिलते हैं और सुबह जमीन में गिर जाते हैं। इस पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पीस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गर्म करो के पानी आधा हो जाए फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस से बीस साल पुराना गठिया का दर्द इससे ठीक हो जाता है। और यही पत्ते को पीस के गर्म पानी मे डाल के पियो तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दवा से ठीक नहीं होता वो इससे ठीक होता है जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते हैं।

❖ खाँसी

खाँसी तीन प्रकार की होती है, सुखी खाँसी, काली खाँसी और कफ खाँसी। खाँसी आने पर मुहँ से खों- खों की आवाज आती है। सूखी खाँसी में रोगी खाँसने से बेहाल हो जाता है। लेकिन बलगम वाली खाँसी में कफ बाहर निकलता है। यहाँ जो घरेलू नुस्खे दिये जा रहे हैं वह तीनों प्रकार की खाँसी के लिए हैं।

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  • • अदरक के टुकड़ों को नमक लगाकर चूसते रहने से खाँसी में आराम मिलता है।
    • • काली खांसी में दो रती शोधित हींग चाटने पर आराम मिलता है।
    • • लौंग को पीसकर आग पर भून लें तथा शहद में मिलाकर चाटे।
    • • 7 – 8 काली मिर्च का पाउडर 2 चम्मच शहद में मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटें।
    • • थोड़ी सी हल्दी और 1 चुटकी नमक सादे पानी में मिलाकर पीएँ।

❖ न्यूमोनिया

जब फेफड़ों में लगातार दर्द रहने लगे तो न्यूमोनिया कहलाता है। यह मुख्य रूप से ठंड लग जाने के कारण तथा फेफड़ों में सूजन आ जाने से हो जाता है। सर्दी, गर्मी में परिवर्तन एका एक पसीना आना, जीवाणुओं द्वारा संक्रमण आदि के कारण हो जाता है। इस बीमारी में फेफड़ों में कफ बढ़ जाता है। छाती में तेज दर्द रहता है। रोगी को बेहोशी आने लगती है। श्वास लेने में कष्ट होता है और खाँसी की भी शिकायत रहती है।

  • • गेहूँ की जगह जो की रोटी और गर्म लगातार पिलाने से न्यूमोनिया में काफी लाभ होता है।
  • • 2.हल्दी की गांठ को बालू में भूनकर उसका चूर्ण बना लें तथा दिन में दो बार गर्म पानी के साथ सेवन करें।
  • • अदरक और तुलसी का रस बराबर मात्रा में निकलाकर शहद के साथ चाटने से काफी आराम मिलता है।
  • • बच्चों के लिए 1 चुटकी हींग पानी में घोलकर पिलाने से जमा हुआ कफ बाहर निकलता है।

❖ दमा

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जब फेफड़ों में जकड़न एवं संकुचन होने के कारण साँस लेने में तकलीफ हो तो दमा की स्थिति कहलाती है। ज्यादातर यह रोग अधिक उम्र के लोगों को होता है। धूल और धुआँ भरे माहौल में रहने के कारण भी यह हो सकता है। प्रायः यह रोग अनुवांशिक होता है। अत्याधिक धूम्रपान करने वालों को भी यह रोग होता है। इसमें रोगी को साँस लेने में तकलीफ होती है यह तकलीफ कभी कम कभी ज्यादा घटती-बढ़ती रहती है। कभी-कभी खाँसी के साथ कफ निकलता है तो रोगी को आराम मिलता है। बलगम न निकले तो रोगी का हाल बेहाल हो जाता है।

  • • तेजपात के पतों का चूर्ण अदरक के रस के साथ लेने से दमे में काफी लाभ होता है।
  • • प्रातः काल खाली पेट 3-4 चम्मच अदरक का रस शहद के साथ लेने से काफी आराम मिलता है।
  • • तुलसी के पतों के साथ 2-3 काली मिर्च चबाने से रोग में आराम मिलता है।
  • • जब दमे का दौरा पड़े उस समय जरा सी फिटकरी जीभ पर रखकर चूसने से तुरंत आराम मिलता है।
  • • लहसुन की कच्ची कली पर लौंग के तेल की दो-तीन बूंदे चबायें और गर्म पानी पीयें। दमा के दौरे नहीं पड़ेगे।

❖ नजला जुकाम

सामान्य रूप से ठंड लगने, या ठंडे पानी में चलने-फिरने से नजला-जुकाम हो जाता है। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है। जुकाम होने पर बार-बार छींके आती हैं और नाक से पानी आता है कभी-कभी बलगम भी आता है।

  • • कच्चे लहसुन की 1-2 कली चबाकर खायें और पानी पीयें।
  • • 10 पत्ते पुदीना और 6 दाने काली मिर्च और 1 चुटकी सेंधा नमक और 10 पत्ते तुलसी इन सबको मिलाकर काढ़ा बनायें तथा आधा पानी रह तने पर काढ़ा पिलाएं।

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  • • ऑवले के रस को शहद में मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।
    • • राई पीसकर नाक पर लगाने से जुकाम में आराम मिलता है।
    • • दालचीनी और जायफल बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और सुबह शाम लें।
    • • गाय का घी नाक में डालें।

❖ तपेदिक (टी.बी.)

टी.बी. का रोग किटाणुजन्य होता है। इसके अलावा प्रदूषित वातावरण में रहने से, अधिक श्रम करने से, चिंता करने से और पौष्टिक आहार न मिलने से यह रोग होता है। शुरूआत में हल्का बुखार आता है और थकान का अनुभव होता है। धीरे-धीरे थकान बढ़ती जाती है और खाँसी शुरू होती है और खाँसी के साथ खून भी आने लगता है। धीरे-धीरे वजन कम होता जाता है और भूख भी नहीं लगती। छाती में लगातार दर्द रहना, अपच होना, मिचली आना और साँस लेने में तकलीफ और पतले दस्त होना और बूंद-बूंद करके पेशाब आना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

  • ● केले के पत्तों को सुखाकर उसकी राख बनायें। आधा चम्मच राख शहद के साथ प्रतिदिन चाटें। इसके साथ – साथ कच्चे केले की सब्जी बनाकर खायें और 2 चम्मच केले के तने का रस भी पीयें। भोजन के बाद पके केले खाने से भी रोग में काफी आराम मिलता है।
  • ● आधा चम्मच पीपल के फलों का चूर्ण गाय के दूध के साथ लें।
  • ● दालचीनी का चूर्ण शहद के साथ दिन में 3-4 बार चाटें।
  • ● देशी गाय के घी में 2 लौंग का चूर्ण बनाकर चाटें।
  • ● मुलहठी का चूर्ण, शहद और मिश्री को समान मात्रा में लेकर मिलायें, तथा प्रातः काल में सेवन करें।

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  • ● आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से टीबी ठीक हो जाता है, लगातार 5-6 महीने पीने पड़ता है।

❖ गले में कोई भी इन्फेक्शन, टौन्सिल

गले में कितनी भी खराब से खराब बीमारी हो, कोई भी इन्फेक्शन हो, इसकी सबसे अच्छी दवा है हल्दी। जैसे गले में दर्द है, खरास है, गले में खांसी है, गले में कफ जमा है, गले में टौन्सिल हो गया, ये सब बीमारियों में आध चम्मच कच्ची हल्दी क रस लेना और मुँह खोल कर गले में डाल देना, और फिर थोड़ी देर चुप हकर बैठ जाना तो ये हल्दी गले में नीचे उतर जाएगी लार के साथ, और एक खुराक में ही सब बीमारी ठीक होगी दुबारा डालने की जरूरत नहीं। ये छोटे बच्चों को तो जरूर करना ये बच्च के टौन्सिल जब बहुत तकलीफ देते हैं ना तो हम ऑपरेशन करवाकर उनको कटवाते हैं वो करने की जरूरत नहीं है हल्दी से सब ठीक होता है।

❖ मधुमेह (डायबिटीज)

आजकल मधुमेह की बीमारी आम बीमारी है। जब किसी व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी होती है। इसका मतलब है वह व्यक्ति दिन भर में जितनी भी मीठी चीजें खाता है (चीनी, मिठाई, शक्कर, गुड़ आदि) वह ठीक प्रकार से नहीं पचती अर्थात् उस व्यक्ति का अग्राशय उचित मात्रा में उन चीजों से इन्सुलिन नहीं बना पाता इसलिए वह चीनी तत्व मूत्र के साथ सीधी निकलता है। इसे पेशाब में शुगर आना भी कहते हैं। जिन लोगों को अधिक चिंता, मोह, लालच, तनाव रहते हैं। उन लोगों को मधुमेह की बीमारी अधिक होती है। मधुमेह रोग में शुरू में तो भूख बहुत लगती है, लेकिन धीरे-धीरे भूख कम हो जाती है। शरीर सूखने लगता है, कब्ज की शिकायत रहने लगती है। अधिक पेशाब आना और पेशाब में चीनी आना शुरू हो जाती है और रोगी का वजन कम होती जाता है। शरीर में कहीं भी जख्म/घाव होने पर वह जल्दी नहीं भरता।

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  • • जामुन मधुमेह के रोगी के लिए सर्वोत्तम दवाई हैं। सीधे जामुन खाना लाभदायक तो है ही, लेकिन जामुन की गुठली का चूर्ण ताजे पानी के साथ दिन में 2-3 बार लेने पर मधुमेह में बहुत लाभकारी होता है। इसके साथ जामुन के हरे पत्तों की चटनी बनाकर 1 ग्लास पानी में प्रतिदिन पीने से लाभ होता है।
    • • पान के साथ चार पत्ती बंग भस्म लेने से मधुमेह दूर होता है।
    • • प्रातःकाल 20 ग्राम गिलोय का रस बराबर मात्रा में शहद के साथ मिलाकर लेने से बीमारी में लाभ मिलता है।
    • • प्रतिदिन रात्रि विश्राम से पहले शहद के साथ त्रिफला चूर्ण लेने से लाभ होता है।
    • • इन्द्र जौ, बादाम और चने का चूर्ण बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन सुबह और शाम फीके दूध से लें।
    • • त्रिफला चूर्ण में मैथी के दानों का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाये और प्रतिदिन प्रातः काल 2 चम्मच चूर्ण गुनगुने जल के साथ सेवन करें।

❖ बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना)

बहुमूत्र रोग में बार-बार पेशाब आता है। और थोड़ा-थोड़ा पेशाब आता है। यह रोग बच्चों तथा युवाओं को अधिक होता है और अधिकांशतः अनुवांशिक है। इस रोग में कब्ज, अपच, अधिक मूत्र आना, और नींद न आना इस तरह की शिकायतें रहती हैं। रोगी प्रतिदिन कमजोर होता जाता है कमर और कमर के नीचे के हिस्सों में दर्द रहता है।

  • • आँवले का सूखा चूर्ण या आँवले का रस गुड़ के साथ मिलाकर लेने से बीमारी में लाभ होता है।
  • • 20 ग्राम काले तिल और 10 ग्राम अजवायन को मिलाकर पाउडर बना लें फिर इस पाउडर को 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम 1-1 चम्मच सेवन करें।

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  • • प्रातःकाल खाली पेट अदरक का रस १ चम्मच लेने से बहुमूत्र की शिकायत दूर होती है।
    • • रात्रि विश्राम से पहले गाय के दूध में पकाये हुए ४ छुआरे खाने से बहुमूत्र के रोग में आराम मिलता है।

❖ मूत्राशय प्रदाह (जलन)

इस रोग में मूत्राशय में दर्द होता है। और बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है और पेशाब करते समय मूत्राशय में जलन और दर्द रहता है कष्ट के साथ पेशाब आती है।

  • • प्रतिदिन गाजर का रस पीने से जलन में आराम मिलता है।
  • • चावल के मांड में मिश्री मिलाकर पीने से बीमारी में लाभ होता है।
  • • त्रिफला चूर्ण का काढ़ा गुड़ मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
  • • ३ चम्मच मूली का रस जरा सी सेंधा नमक डालकर पीयें।

❖ गुर्दे की पथरी

जिन लोगों के मूत्र में कैल्शियम अधिक मात्रा में बनता है उनको पथरी जल्दी होती है। यह भिन्न भिन्न प्रकार के छोटे-छोटे क्षारीय तत्व होते हैं। जो किन्हीं कारणों से मूत्राशय तथा मूत्रनली से नहीं निकल पाते और धीरे-धीरे एकत्र होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। पथरी होने के बाद जब व्यक्ति मूत्र त्याग करता है तब उसे दर्द का अनुभव होता है। ऐसे में मूत्र धीरे-धीरे और रूककर बाहर आता है।

  • • चौलाई अथवा बथुआ के साग को अच्छी तरह धोकर पानी में उबालें और यह उबला हुआ पानी कपड़े से छान लें तथा इसमें कालीमिर्च, जीरा, तथा जरा सा सेंधा नमक मिलाकर दिन में कई बार पियें कुछ ही सप्ताह में लाभ अवश्य मिलेगा।

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