सम्पूर्ण चिकित्सा
Sampoorna Chikitsa
राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा
स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)
- • त्वचा पर सुबह की लार लगाये। 1 साल में ठीक हो जायेगी।
❖ कैंसर
कैंसर बहुत तेजी से बढ़ रहा है इस देश में, हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे हैं और हर साल नए केस आ रहे हैं और सभी डॉक्टर हाथ-पैर डाल चुके हैं।
राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना कि ..... कैंसर के मरीज को कैंसर से मृत्यु नहीं होती है बल्कि जो इलाज कैंसर के लिए दिया जाता है उससे मृत्यु होती है। मतलब कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का इलाज है। इलाज कैसा है आप सभी जानते हैं... कैम्पोथैरेपी, रोडियोथैरेपी, कोबाल्ट थेरेपी।
इसमें क्या होता है कि शरीर की जो प्रतिरक्षक शक्ति है वो बिल्कुल खत्म हो जाती है। जब कैम्पोथैरेपी दी जाती है ये बोल कर कि हम कैंसर के सेल को मारना चाहते हैं तो अच्छे सेल भी उसकी के साथ मर जाते हैं। राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो कैम्पोथैरेपी लेने के बाद आता है वे उनको बचा नहीं पाए। लेकिन इसका उल्टा भी रिकार्ड है ... राजीव भाई के पास बिना कैम्पोथैरेपी लिए हुए कोई भी रोगी आया दूसरी या तीसरी स्टेज तक वो एक भी नहीं मर पाया।
मतलब क्या है इलाज लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो मर ही गया और रोगी भी आपके हाथ से गया। डॉक्टर आपको भूल भूलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा। लेकिन अंत में वो जाता ही है। आपके घर परिवार में यदि किसी
[56]
को कैसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत करिए क्योंकि जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नहीं होगा बल्कि उसको इतना कष्ट होता है कि आप कल्पना नहीं कर सकते।
उसको जो इंजेक्शन दिए जाते हैं जो गोली खिलाई जाती है उसको जो कैम्प्योथेरीपी दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते हैं, भौहों के बाल उड़ जाते हैं, चेहरा इतना डरावना लगता है कि पहचान में नहीं आता ये अपना ही आदमी हैं। इतना कष्ट क्यों दे रहे हो उसको? सिर्फ इसलिए कि आपको एक अहंकार है कि आपके पास बहुत पैसा है तो इलाज करा के ही मानेगा। आप अपनी आस पड़ोस की बातें ज्यादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे रिश्तेदार बहुत भावनात्मक शोषण करते हैं। घर में किसी को गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार हैं वो पहले आ कर कहते हैं “अरे आल इंडिया नहीं ले जा रहे हो? पी.जी.आई. नहीं ले जा रहे हो? टाटा इंस्टीटियट मुंबई नहीं ले जा रहे हो? आप कहोगे नहीं ले जा रहा हूँ, अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नहीं कर सकते, माँ के लिए इतना नहीं कर सकते। ये बहुत खतरनाक लोग होते हैं। हो सकता है कई बार व मासूमियत के साथ कहते हो, उनका मकसद खराब नहीं होता है लेकिन उनक जानकारी कुछ भी नहीं है, बिना जानकारी के वो सलाह पर सलाह देते जाते हैं और कई बार अच्छा खासा पढ़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में, रोगी क भी गंवाता और पैसा भी जाता है।
कैसर के लिए क्या करें? हमारे घर में कैसर के लिए एक बहुत अच्छी दवा है, अब डॉक्टरों ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नहीं थे उसका नाम है – “हल्दी”। हल्दी कैसर ठीक करने की ताकत रखती है, हल्दी में एक कैमिकल है सका नाम है कर्कुमिन और ये ही कैसर सेलों को मार सकता है, बाकि कोई कैमिकल बना नहीं दुनिया में और ये भी आदमी ने नहीं भगवान ने बनाया है। हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में हैं वो हैं देशी गाय के मूत्र में। गोमूत्र माने देशी गाय के शरीर से निकला हुआ सीधा साधा मूत्र जिसे सती के आठ परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो। तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे।
[57]
अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी तथा आधा चम्मच पुनर्नवा चूर्ण तीनों को मिला के गर्म करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना। कमरे के तापमान में आने के बाद रोगी को चाय की तरह पिलाना हैं.... चुस्कियां ले ले कर सिप कर करके पीयें, इससे अच्छा नतीजा आयेगा।
इस दवामें सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता हैं, जर्सी का मूत्र कुछ काम नहीं आता। और देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता हैं इन सब में। इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा) सही अनुपात में मिला के उबाल के ठंडा करके कांच के पात्र में स्टोर करके रखिए पर बोटल को कभी फ्रिज में मत रखिये, ये दवा कैसर के सेकंड स्टेज में और कभी-कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अच्छे परिणाम देती हैं। जब स्टेज थर्ड क्रास करके चौथी स्टेज में पहुँच जाये तब परिणाम में सफलता की प्रतिशतता थोड़ी कम हो जाती हैं और अगर आपने किसी रोगी को कैम्पोथेरेपी दे दिया तो फिर इसका कोई असर नहीं आता। कितना भी पिला दो कोई परिणाम नहीं आता। आप यदि किसी रोगी को ये दवा दे रहे हैं तो उससे पूछ लीजिए, जान लीजिए कहीं कैम्पोथेरेपी शुरू तो नहीं हो गयी? अगर शुरू हो गयी हैं तो आप उसमें हाथ मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता हैं करने दीजिए, आप भगवान से प्रार्थना कीजिए उसके लिए, इतना ही करे। और अगर कैम्पोथेरेपी शुरू नहीं हुई हैं और उसने कई ऐलपैथी ईलाज शुरू नहीं किया तो आप देखेंगे इसके चमत्कारिक परिणाम आते हैं। ये सारी दवाई काम करती हैं शरीर प्रतिकारक शक्ति पर। हमारी जो जीवनी शक्ति हैं उसका सुधार करती हैं। हल्दी को छोड़कर गोमूत्र और पुनर्नवा शरीर की जीवनी शक्ति को ताकतवर बनाती हैं और जीवनी शक्ति के ताकतवर होने के बाद कैसर के सेलों को खत्म करती हैं।
ये त बात हुई कैसर की चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैसर आए ही ना ये और भी अच्छा हैं। तो जिन्दगी में आपको कभी कैसर ना हो उसके लिए एक बात याद रखिए आप खाना बनाने में जो तेल इस्तेमाल करते हैं वो रिफाईड तेल या डालड़ा ना हो, ये देख लीजिए दूसरा जो भी खाना खा रहे हैं, उसमें रेशेदार भोजन का हिस्सा ज्यादा हो जैसे –छिलके
[58]
वाली दालें, छिलके वाली सब्जियाँ, चावल भी छिलके वाला, अनाज भी छिलके वाला तो आप निश्चित रहें आपक कभी कैसर नहीं होगा।
और कैसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तीन कारण हैं रासयनिक खाद और कीटनाशक दवाओं वाला अनाज, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटका आदि जैसी चीजों का प्रयोग।
कैसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती हैं चाहे वो डॉक्टर हो विशेषज्ञ हो या वैज्ञानिक हो कि इससे बचाव इसका उपाय है। महिलाओं में आजकल बहुत कैसर हो रहे हैं गर्भाशय के, स्तन के और ये काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले गांठ (ट्यूमर) होती है फिर वो कैसर में बदल जाता है। माता और बहनों को क्या करना है कि जिंदगी में कभी (ट्यूमर) ही ना आए। आप के लिए सबसे अच्छा बचाव का काम है जैसी ही आपके शरीर के किसी भी हिस्से में किसी रसौली या गांठ का पता चले तो सावधान हो जाइये। हालांकि सभी गांठ या रसौली कैसर नहीं होती है। 2 या 3 प्रतिशत ही कैसर में बदलती है। लेकिन आप के पास इस रसौली या गांठ को ठीक करने की दुनिया की सबसे अच्छी दवा है – “चूना”। चूना वही जो पान में खाया जाता है। पान वाले की दुकान से चूना ले आइये , यह चूना एक गेहूँ के दाने के बराबर प्रतिदिन खाइये, दही में मिला कर, लस्सी में मिला कर, छाछ या मट्टा में मिला कर, दाल में मिलाकर , सब्जी में मिलाकर या पानी में मिलाकर खा लीजिए। अधिक से अधिक तीन महीने तक।
ध्यान रहे पथरी के रोगी चूना नहीं खा सकते।
प्रमुख स्त्री रोग
महिलाओं के शरीर की आंतरिक रचना पुरुषों से एकदम अलग होती है और काफी जटिल होती है। इसलिए महिलाओं में कुछ विशेष रोग होते हैं जो पुरुषों में नहीं होते। क्योंकि महिलाओं को इन सब रोगों के बारे में चर्चा करने में संकोच होता है।
[59]
❖ श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया)
महिलाओं की योनि से सफेद रंग का तरल पदार्थ निकलना 'श्वेत प्रदर' कहलाता है। यह कभी भी निकलता रहता है तथा काफी दुर्गंध पूर्ण रहता है। इसकी वजह से शरीर में दर्द रहता है और शरीर दुर्बल भी होता जाता है।
- ● प्रातः काल पके केलों का सेवन करें और दूध में 2 चम्मच शहद मिलाकर पीने से काफी आराम मिलता है।
- ● बड़ के पतों का दूध, मिश्री के साथ लेने पर तथा उसके बाद गाय का दूध लेने से यह रोग ठीक हो जाता है।
- ● आँवले के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से श्वेत प्रदर में लाभ होता है।
- ● सूखा आँवला+मुलहठी समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनायें और सुबह शाम शहद के साथ चाटें उसके बाद गाय का दूध पीयें।
❖ रक्त प्रदर
- ● लौकी के बीजों को छीलकर घी में भूनें और मिश्री डालकर हलवा बनायें। प्रातः काल खाली पेट खायें लाभ होगा।
- ● ½ चम्मच अशोक की जड़ का चूर्ण शहद के साथ चाटने से रक्त प्रदर में आराम मिलता है।
- ● अशोक की छाल 100 ग्राम तथा सफेद चंदन, कमल का फूल, आतिस, आँवला, नागरमोथा, जीरा, चिते की छाल 50-50 ग्राम लेकर बारीक पावडर बनायें अब 10 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर चाटें।
- ● अरहर के पतों का रस पानी में घोलकर पीयें।
[60]
❖ मासिक धर्म की अनियमितता
- ● मैथी, गाजर और मूली के बीजों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसें तथा 1 चम्मच चूर्ण को अशोकारिष्ट, के साथ नियमित पीयें, अनियमितता ठीक हो जायेगी।
- ● लाल गुड़हल के फलों को कांजी के साथ पीसकर पीयें।
- ● आम की सुखी पत्तियाँ आग में जलाकर पावडर बनायें और पानी में घोलकर पीयें बीमारी में लाभ मिलेगा।
- ● तेजपात का काढ़ा पीने से काफी लाभ होता है।
❖ मासिक धर्म की अधिकता
- ● धनिये का काढ़ा बनायें और छानकर पिलायें।
- ● जामुन की हरी ताजी छाल को सूखाकर पावडर बनालें सुबह-शाम गाय के दूध में एक चम्मच मिलाकर पीयें।
- ● असंगंध के चूर्ण को मिश्री मिलाकर पानी के साथ लेने से मासिक धर्म में आने वाले खून में कमी आयेगी।
❖ बांझपन
- ● ढाक के पत्तों का रस गाय के दूध में मिलाकर पीने से लाभ मिलेगा। गर्भ ठहरने के बाद भी ढाक के पत्ते दूध में पीसकर पीने से ओजस्वी संतान की प्राप्ति होती है।
- ● गाय के दूध में नागकेसर चूर्ण मिलाकर पीने से स्त्रियां जल्दी गर्भवती होती हैं।
- ● नागकेसर और सुपारीपाक चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर नित्य सेवन करें।
[61]
❖ गर्भावस्था
जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चुना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है और चूना कैल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है। गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में – अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाकर रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिए तो चार फायदे होंगे – पहला फायदा होगा के माँ को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नहीं होगी और नार्मल डिलीवरी होगा, दूसरा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हस्त-पुष्ट और तंदुरुस्त होगा, तीसरा फायदा वो बच्चा जिंदगी में जल्दी बीमार नहीं पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया, और चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत इंटेलीजेंट होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है।
❖ बच्चे का पेट में उल्टा होना
यह एक बहुत ही गंभीर स्थिति है जिससे अधिकांश महिलाएं प्रसव के दौरान गुजरती हैं, अपने विकास काल के दौरान कभी-कभी शिशु गर्भाशय में आड़ा या उल्टा हो जाता है, यह स्थिति माता और शिशु दोनों के ही जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। होम्योपैथी में पुनः सही कर देती हैं जिसका नाम है PULSATILA 200
❖ प्रसव में समस्या
प्रसव में देरी होने पर या गर्भ में पल रहे हैं बच्चे का आड़ा या उल्टा होने की सबसे अच्छी दवाई है जब डॉक्टर कितना भी चिल्लाये ऑपरेशन करवाओ तब आप अपने मरीज को घर ले आओ या ऐसे किसी डॉक्टर के पास मरीज को लेकर ही मत जाइए।
[62]
गाय के गोबर और गोमूत्र एक ऐसी विशिष्ट दवा हैं जो इस प्रकार के आपात अवस्था में देने पर फौरेन अपना प्रभाव उत्पन्न करती है चाहे डॉक्टर कितना ही चिल्लाये आप किसी देशी बछड़ी का गोमूत्र और गोबर लेकर आपस में मिलाइये और उसका रस निकाल कर माँ को चार चार घंटे के अंतर में 3 बार पिला दीजिए पेट में उल्टा बच्चा भी सीधा हो जाता है और बिना किसी दर्द बच्चा बाहर आ जाता है लेकिन ये दवा 9 महीना पूरा होने के बाद होने वाले प्रसव में ही काम आती है उससे पहले ये अगर बच्चा 7-8 महीने में होता है तो ये दवा इतना काम नहीं करती है।
ये रुकी हुई प्रसव पीड़ा को पुनः प्रारंभ करती है, शिशु जन्म को सरल बनाती है, तथा गर्भ में शिशु की स्थिति को भी पुनः सही कर देती है।
❖ दमा, अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा
- ● आधा कप देशी गाय का गोमूत्र सुबह पीने से दमा अस्थमा, ब्रोन्कियल अस्थमा सब ठीक होता है, और गोमूत्र पीने से टीबी भी ठीक हो जाता है, लगातार पांच छह महीने पीना पड़ता है।
- ● दमा अस्थमा की और एक अच्छी दवा है दालचीनी, इसका पाउडर प्रतिदिन सुबह आधे चम्मच खाली पेट गुड़ या शहद मिलाकर गर्म पानी के साथ लेने से दमा अस्थमा ठीक कर देती है।
❖ शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट
कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे कोई डार्बिटिक पेशेंट है चोट लग गयी तो उसका सारा दुनिया जहाँ एक ही जगह है, क्योंकि जल्दी ठीक ही नहीं होता है, और उसके लिए कितना भी चेष्टा करे डॉक्टर हर बार उसको सफलता नहीं मिलता है, और अंत में वो चोट धीरे-धीरे गँभीर (अंग का सड़ जाना) में बदल जाता है और
[63]
फिर काटना पड़ता है, उतने हिस्से को शरीर से निकालना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में एक औषधि है, जो गैंग्रीन को भी ठीक करती है और अस्थिमज्जा का प्रदाह को भी ठीक करती है।
गैंग्रीन माने अंग का सड़ जाना, जहाँ पर नए कोशिका विकसित नहीं होते। ना तो मांस में और ना ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते चले जाते हैं। इसी को एक छोटा भाई हैं ओस्टोमएलइटिसइस (अस्थिमज्जा का प्रदाह) में भी कोशिका कभी पुनर्जीवित नहीं होते, जिस हिस्से में होता है वहाँ बहुत बड़ा घाव हो जाता है और वो ऐसा सड़ता है कि डॉक्टर कहता है कि इसको काट के ही निकालना है और कोई दूसरा उपाय नहीं है। ऐसे परिस्थिति में जहाँ शरीर का कोई अंग काटना पड़ जाता हो या पड़ने की संभावना हो, घाव बहुत हो गया हो उसके लिए आप एक औषधि अपने घर में तैयार कर सकते हैं।
औषधि है देशी गाय का मूत्र (सती के आठ परत कपड़ों में छान कर) , हल्दी और गेंदे का फूल। गेंदे के फूल की पीली या नारंगी पंखड़ियाँ निकालना है, फिर उसमें हल्दी डालकर गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है। अब चोट कितना बड़ा है उसकी साइज के हिसाब से गेंदे के फूल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटे भाग में है तो एक फूल, बड़े हैं तो दो, तीन, या चार अंदाजे से लेना है, इसकी चटनी बनाकर इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल रहा है और ठीक नहीं हो रहा। कितनी भी दवा खा रहे हैं पर ठीक नहीं हो रहा, ठीक ना होने का एक कारण तो है डायबिटीज दूसरा कोई जिनगत कारण भी हो सकते हैं। इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाकर उसके ऊपर रूई पट्टी बांध दीजिए ताकि उसका असर बाँड़ी पर रहे और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पड़ेगा, इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करें। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिए।
यह इतना प्रभावशाली है कि आप सोच नहीं सकते, चमत्कार जैसा लगेगा। इस औषधि को हमेशा ताजा बनाकर लगाना है। किसी का भी जख्म किसी भी औषधि से ठीक नहीं हो रहा है तो ये लगाइए। जो
[64]
सोराइसिस गिला हैं जिसमें खून भी निकलता है, पस भी निकलता है उसको यह औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देता है। अक्सर यह एक्सीडेंट के केस में खूब प्रयोग होता है। क्योंकि ये लगाते ही खून बंद हो जाता है। आपरेशन का कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है। गीला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है, जले हुए जख्म में भी काम करता है।
चूना खाने के फायदे
भारत के जो लोग चूने से पान खाते हैं, बहुत होशियार लोग हैं, पर तंबाकू नहीं खाना, तम्बाकू जहर हैं और चूना अमृत हैं, तो चूना खाइए, तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चूने का उसमें कल्था मत लगाइए, कल्था कैसर करता है, पान में सुपारी मत डालिए सोंट डालिए, उसमें इलाइची, लौंग, केसर डालिए।
महिलाओं के लिए गर्भाशय की बीमारियों में यह बहुत अच्छा काम करता है जैसे कि सफेद पानी आना, लाल पानी आना, माहवारी आगे-पीछे होना, गर्भाशय में गांठ बन जाना तथा अन्य सभी गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों को चूना ठीक करता है। बाल टूटना, चेहरे के मुहांसे, हड्डी के टूटने पर, जोड़ों के दर्द में, हीमोग्लोबिन का प्रतिशत कम हो तो, हैपेटाईटिस A,B,C,D,E स्मरण शक्ति कम हो तो, हाथी पैर हो गया तो इन सब बीमारियों में चूना दही में अथवा पानी में मिला कर लेना चाहिए। पुरुषों में शुक्राणु बढ़ाने के लिए चूना गन्ने या संतरे या मौसमी के रस में लेना चाहिए। 14 साल से कम आयु के बच्चे जिनका कद छोटा हो, महिलाएं जिनमें वक्ष का कम विकास हो, दांतों की किसी भी तरह की समस्या, इन सबमें चूनेका सेवन करना लाभदायक है। मात्रा – एक गेहूँ के दाने बराबर दिन में एक बार जोड़ों का दर्द यदि बहुत पुराना हो भले 20 से 30 साल पुराना हो या जब डॉक्टर कहे कि घुटने बलदने पड़ेंगे उस समय चूना काम नहीं करेगा। उसको चूने की जगह हारश्रृंगार के पत्तों का काढ़ा देना पड़ेगा। इस पेड़ के 7-8 पत्तों को बारीक पीस कर चटनी जैसा बनाकर एक गिलास पानी में उबालें, आधा गिलास रह जाने
[65]
पर सुबह खाली पेट पी लें। तीन महीने में यह समस्या बिल्कुल ठीक हो जायेगी। किसी तरह का बुखार होने की स्थिति में भी यह काढ़ा काम करता है। उस स्थिति में 7-8 दिन ही देना हैं।
बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना। और हमारे घर में जो माताएं हैं जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी हैं और उनका मासिक धर्म बंद हुआ , उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना।
जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है और चूना कैल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है। गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिए तो चार फायदे होंगे -
पहला फायदा होगा की माँ को बच्चे के जन्म के समय कोई तकलीफ नहीं होगी और नॉर्मल डिलीवरी होगी, दूसरा यह है कि जब बच्चा पैदा होगा वो बहुत हस्ट-पुष्ट और तंदरूस्त होगा, तीसरा फायदा - वो बच्चा जिन्दगी में जल्दी से बीमार नहीं पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया है, चौथा सबसे बड़ा लाभ है वो बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत इंटेलीजेंट होता है, उसका IQ बहुत अच्छा होता है।
चूना घुटने का दर्द ठीक करता है, कमर का दर्द ठीक करता है, कंधे का दर्द ठीक करता है, एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis , वो चूने से ठीक होता है, कई बार हमारे रीढ़ की हड्डी में जो मनके होते है उसमें दूरी बढ़ जाती है, ये चूने से ठीक हो जाता है। अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है। चूना खाइए सुबह को खाली पेट।
यदि मुँह में ठंडा गर्म पानी लगता है तो चूना खाओ बिल्कुल ठीक हो जाता है, मुँह में अगर छाले हो गए हैं तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है। शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरूर लेना चाहिए, अनीमिया है खून की कमी है, उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना, चूना
[66]
पीते रहो गन्ने के रस में, या संतरे के रस में, नहीं तो सबसे अच्छा है अनार के रस में – अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढ़ता है। एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट।
राजीव भाई कहते हैं कि चूना खाइए पर चूना लगाइए मत किसी को भी॥
हृदय ब्लॉक का आयुर्वेदिक इलाज
दोस्तो अमेरिका की बड़ी बड़ी कंपनियां जो दवाइयां भारत में बेच रही हैं। वो अमेरिका में 20-20 साल से बंद हैं। आपको जो अमेरिका की सबसे खतरनाक दवा दी जा रही है। वो आज कल दिल के रोगी को सबसे ज्यादा दी जा रही हैं। भगवान ना करे कि आपको कभी जिंदगी में दिल का दौरा आए। लेकिन अगर आ गया तो आप जाएंगे डाक्टर के पास।
आपको मालूम ही है एक एंजियोप्लास्टी आपरेशन होता है, एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन में डॉक्टर दिल की नली में एक स्प्रिंग डालते हैं। उसको स्टेंट कहते हैं, और ये स्टेंट अमेरिका से आता है और इसका Cost of Production सिर्फ 3 डालर का है, और यहाँ लाकर वो 3 से 5 लाख रुपये में बेचते हैं और ऐसे लूटते हैं आपको।
और एक बार अटैक में एक स्टेंट डालेंगे। दूसरी बार दूसरा डालेंगे, डॉक्टर को कमीशन भी है, इसलिए वे बार बार कहता है एंजियोप्लास्टी करवाओ। इस लिए कभी मत करवाए।
तो फिर आप बोलेंगे हम क्या करें???
आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करें, बहुत ही सरल है। पहले आप एक बात जान लीजिए। एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता। क्योंकि डॉक्टर जो स्प्रिंग दिल की नली में डालता है, वो स्प्रिंग बिल्कुल चमद के स्प्रिंग की तरह होता है और कुछ दिन उस स्प्रिंग की दोनो साइड आगे और पीछे फिर ब्लॉकिंग जमा होनी शुरू हो जाएगी। और फिर दूसरा अटैक आता है और डॉक्टर आपको फिर कहता है।
[67]
एंजियोप्लास्टी ऑपरेशन करवाओ, और इस तरह आपको लाखो रूपये लूटता है और आपकी जिन्दगी इसी में निकल जाती है।
हमारे देश भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुए थे उनका नाम था महाऋषि वागभट्ट जी।
वे कहते हैं कि कभी भी हृदय घात हो रहा है, मतलब दिल की नलियों में ब्लॉकिज होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त(ब्लाड) में एसिडिटी(अम्लता) बढ़ी हुई है।
अम्लता दो तरह की होती है, एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त की अम्लता।
आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है, तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी-खट्टी डकार आ रही है। मुहँ से पानी निकल रहा है, और अगर ये अम्लता और बढ़ जाये तो हाइपर एसिडिटी होगी, और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता (ब्लाड एसिडिटी) होती है।
और जब ब्लाड में एसिडिटी बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त दिल की नलियों में से निकल नहीं पाता, और नलियों में ब्लॉकिज कर देता है। तभी दिल का दौरा होता है। इसके बिना दिल का दौरा नहीं होता। और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डॉक्टर आपको बताता नहीं, क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है।
वागभट्ट जी लिखते हैं कि जब रक्त (ब्लाड) में अम्लता (एसिडिटी) बढ़ गई है। तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं। आप जानते है दो तरह की चीजे होती हैं।
अम्लीय और क्षारीय (एसिड और एल्काइन)
अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो न्यूट्रल(उदासीन) होती है सब जानते हैं।
तो वागभट्ट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(एल्काइन) चीजे खाओ। तो रक्त की अम्लता (एसिडिटी) न्यूट्रल
[68]
(उदासीन) हो जाएगी और रक्त में अम्लता न्यूट्रल(उदासीन) हो गई, तो दिल का दौरा की जिंदगी में कभी संभावना ही नहीं। ये है सारी कहानी।
अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय है और हम खाये...
आपके रसोई घर में सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं, जिन्हें आप खाये तो कभी दिल का दौरा ना आए, और अगर आ गया हैं तो दुबारा ना आए।
सबसे ज्यादा आपके घर में क्षारीय चीज हैं वह हैं लोकी, जिसे दूदी भी कहते हैं। अंग्रेजी में Bottle gourd । जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं, इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है। तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो, या कच्ची लोकी खाओ।
प्रतिदिन 200 से 300 मिलीग्राम पियो, सुबह खाली पेट (शौच जाने के बाद) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं। इस लोकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं, इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो, तुलसी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं, पुदीना भी बहुत क्षारीय है। इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डालें, ये भी बहुत क्षारीय है। लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डालें, वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी ना डालें।
2 से 3 महीने आपकी सारी हार्ट की ब्लॉकेंज ठीक कर देगा। 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा।
लोकी परीक्षण – आप लोकी पर नाखून लगाकर देख लीजिए की नाखून पूरा अंदर जाता है या नहीं।
यदि नाखून पूरा अंदर जाता है तो लोकी असली है।
अगर नाखून पूरा अंदर नहीं जाता है और वह केवल निशान बन जाता है तो लोकी इंजेक्शन लगाई हुई है।
कोई ऑपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी, घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा। और आपका अनमोल शरीर और
[69]
लाखों रुपय ऑपरेशन के बच जाएँगे, और पैसे बच जायेंगे। इन पैसे को आप किसी गौशाला में दान कर दे, डॉक्टर से अच्छा है किसी गौशाला में दान ने, हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा।।
होम्योपैथी चिकित्सा
आमजन के मस्तिष्क में यह बात बहुत गहराई तक बैठी हुई है कि गंभीर इमरजेन्सी से होम्योपैथिक दवा का कोई नाता नहीं है क्योंकि गंभीर इमरजेन्सी में यह नाकाम है लेकिन यह तथ्य पूर्णतः गलत है, कुछ विशिष्ट होम्योपैथिक दवाएं गंभीर इमरजेन्सी को फौरन नियंत्रित करने में सक्षम हैं।
हड्डी टूटना – हड्डी टूटने पर होम्योपैथी दवा अर्निका 1M देना है, जो दर्द को दूर करता है। अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।
अगर हड्डी टूट गई है तो टूटी हड्डी को पुनः जोड़ने के लिए अगले दिन एक दाना गेहूँ के बराबर चुना दही में मिलाकर दिन में एक बार 15 से 20 दिन तक देना है।
[70]
❖ मोच
अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।
❖ सामान्य चोट
शरीर के किसी भी भाग में बिना रक्त निकले चोट लगने या मुड़ जाने पर या मार लगने, गिरने पर अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।
❖ खून बहने पर
शरीर पर चोट लगने से खून बहने पर होम्योपैथी दवा हाईपेरिकम 200 की 2-2 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार, यदि चोट ज्यादा है और खून बह रहा है तो हाईपेरिकम 1M 1-1 बूंद हर आधे घण्टे में तीन बार देना है।
❖ चोट लगने लेकिन खून ना बहने पर
अर्निका 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है।
❖ टिटनेस
लोहे की जंग लगी वस्तु से चोट लगने पर या वाहन से दुर्घटना होने पर टिटनेस का खतरा पैदा हो जाता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है, होम्योपैथी में टिटनेस के लिए दोनों विकल्प मौजूद हैं –
Hypericum 200 की 2-2 बूंद आधे घण्टे में तीन बार
❖ सांप के काटने पर चिकित्सा
सांप काटने पर नाजा 30 हर दस मिनट में 2-2 बूंद तीन बार देना है। अगर ठीक हो रहा है, तो इसी को चालू रखना है। अगर समय ज्यादा हो गया या फर्क नहीं है तो नाजा 200 की 2-2 बूंद हर दस मिनट में तीन बार देना है। ठीक होने पर कोई भी दवा नहीं देना है।
[71]
यदि नाजा 200 से भी ठीक नहीं है तो नाजा 1M की 2 बूंद आधा कप पानी में डालकर एक चम्मच हर आधे घण्टे में तीन बार पिलाना है। अगर इससे भी ठीक ना हो तो नाजा 10M की आधा कप पानी में एक बूंद डाल कर एक चम्मच एक ही बार पिलाना है। जब नियंत्रण में आए तो गर्म पानी य मूंगदाल का उबला हुआ पानी देना है। खाना अगर देना है तो थोड़ी मूंगदाल की खिचड़ी दे सकते हैं।
❖ बिच्छू, मधुमक्खी के काटने पर, सूर्य या काटा लगने की चिकित्सा
बिच्छू के काटने पर Silicea 200 की एक बूंद 10-10 मिनट के अंतर पर तीन पर जीभ पर रखकर लेनी है। 10-10 मिनट पर एक – एक बूंद और आप देखेंगे कि वो डंक अपने आप निकल कर बाहर निकल कर आ जायेगा। सिर्फ तीन डोज में आधे घण्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते हैं।
यह दवाई और भी बहुत काम आती है। अगर आप सिलाई मशीन में काम करती हैं तो कभी-कभी सूर्य चुभ जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये दवाई ले लीजिए। ये सूर्य को भी बाहर निकाल देगी। आप इस दवाई को और भी कई परिस्थितियों में ले सकते हैं जैसे कांटा लग गया हो, कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमक्खी ने काट लिया हो तो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते हैं उन सब के लिए आप इसको ले सकते हैं। बंदूक की गोली लगने पर गोली को बाहर निकालने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। बहुत तेज दर्द निवारक हैं और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है, उसको बाहर निकालने की दवाई हैं। बहुत सस्ती दवाई हैं। 5 मि.ली सिर्फ 10 रुपये की आती हैं। इससे कम से कम 50 से 100 लोगों का भला हो सकता है।
मकड़ी मलने पर – लीडम पाल 200 दिन में 3 बार
❖ पागल कुत्ता काटने पर
[72]
कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंता मत करिए। दवा का नाम है Hydrophohinum 200 और इसको 10 – 10 मिनट पर जीभ में तीन ड्रॉप डालना है। कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दवा दे दीजिए और भूल जाइये कि कोई इंजेक्शन देना है। इस दवा को सूरज की धूप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। रोबीज सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटने से रोबीज नहीं होता। आवारा कुत्तों ने अगर काट दिया है तो राजीव भाई के अनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दवा दे सकते हैं लेकिन उससे कुछ नहीं होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हम परेशान रहते हैं, और कुछ डर डाक्टरों ने बिठा रखा है की इंजेक्शन तो लेना ही पड़ेगा। अपने शरीर में थोड़े, बहुत Resistance सबके पास हैं अगर कुत्ते के काटने से उनके लार-ग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये हैं तो उनको खत्म करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो खत्म कर ही लेता है। लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको यकीन नहीं होता जब तक 20000-50000 खर्च नहीं कर लेते ये उस समय के लिए राजीव भाई ने ये दवा लेने की बात कही है। और इसका एक-एक ड्रॉप 10-10 मिनट में जीभ पर तीन बार डाल के छोड़ दीजिए। 30 मिनट में ये दवा सब काम कर देगा।
कई बार कुत्ता घर के बच्चों के साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जख्म में थोड़ा हल्दी लगा दीजिए पर साबुन से उस जख्म को बिल्कुल मत धोये नहीं तो वो पक जायेगा, हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititanatic, Antiinflammatory है।
❖ हार्ट अटैक
हार्ट अटैक (हृदय घात) जैसी गंभीर इमरजेंसी में होम्योपैथिक दवा ACONITE 200 की 2-2 बूंद हर आधा घंटे में तीन बार देना है। अगर आपने इतना भी कर दिया तो रोगी की जान बच जायेगी, आगे रोगी को कहीं भी हॉस्पिटल में ले जाने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।
[73]
❖ डायरिया, उल्टी या दस्त होने पर
NUX VOMICA 200 2-2 बूंद दिन में तीन बार सुबह, दोपहर व शाम को दो तीन दिन चालू रखना हैं।
हरिया के लिए NUX VOMICA 1M 1-1 बूंद दिन में तीन बार प्रत्येक एक-एक घण्टे से फिर वापिस 15 दिन या फिर 15 दिन बाद तीन महीने तक।
❖ घात जाने पर
NUX VOMICA 1M सुबह खाली पेट प्रत्येक 1-1 घण्टे में तीन बार देना है।
❖ अपेन्डेक्स(Appendix)
NUX VOMICA 200 रात के भोजन के एक घण्टे बाद 2 बूंद फिर तीन दिन बाद 2 बूंद (दस बार तक ले सकते हैं)
या
NUX VOMICA 30 – प्रतिदिन रात को एक बूंद
SULPHAR 200 – हफ्ते में एक दिन सुबह-दोपहर-शाम एक – एक बूंद दिन में तीन बार
नोट – अस्थमा के मरीज को कभी भी सल्फर नहीं देना
❖ स्वपन दोष
NUX VOMICA 200 रात को सोते समय 2 बूंद हर तीन दिन बाद फिर से ले सकते हैं। प्रतिदिन नहीं।
❖ पीलिया
[74]
हेपेटाईटस A,B,C,D,E के ईलाज
गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस के साथ पान में लगाकर दिन में एक बार 10 से 12 न तक लेना हैं।
पीलिया होने पर NUX VOMICA 30 की 2-2 बूंद दिन में तीन बार 10 से 12 दिन तक लेना हैं।
यदि पीलिया रोग की शुरुआत में ही रोगी को ऐकोनाइट औषधि दी जाए तो इससे पीलिया को रोग पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
BERBERIS VULGARIS (Mother Tincher) की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/4) कप गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में चार बार (सुबह-दोपहर-शाम और रात) को लेना हैं।
❖ बवासीर, फिस्टला या भगन्दूर होने पर
एक केले के बीच से चीरा लगाकर चूना बीच में रख दें, फिर इसे खाए इससे बवासीर एकदम ठीक हो जाती है साथ में देशी गाय का मूत्र भी पीयें।
यदि रोग बढ़ गया है तो आपको साथ में ये होम्योपैथिक दवा भी खाना होगा
NUX VOMICA 30 – रोज रात को एक बूंद
SULPHAR 200 – हफ्ते में एक दिन सुबह – दोपहर-शाम एक-एक बूंद दिन में तीन बार
❖ गंभीर लकवा होने पर, रोगी को शरीर में सुन्नता, छूने पर कोई संवेदना नहीं होना, नसों में जकड़न
नसों में जकड़न और पक्षाघात या Paralysis में एक दवा का नाम है, RHUSTOX – 30 जिस दिन पक्षाघात आता है रोगी को 15-15 मिनट पर तीन बार दो-दो बूंद मुंह में दें और इसी RHUSTOX -30 को लगातार करते हुए रोज सुबह, दोपहर, शाम दें साथ में एक और दवा है।
[75]