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सम्पूर्ण चिकित्सा

Sampoorna Chikitsa

राजीव दीक्षित / रोबिन बसराना (ऋषि वाग्भट्ट अष्टांगह्रदयम् आधारित) द्वारा

स्रोत: Hindi Ayurvedic Chikitsa based on Ashtanga Hridayam · Swadeshi Robin Basrana · 2018 (उद्गम)

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ
  • ➤ सूर्य की गर्मी से चेहरे की त्वचा झूलस जाए तो दही में गुलाबजल मिलाकर लगाएं। खीरा के रस में ग्लिसरीन मिलाकर लगाने से भी फायदा होगा।
    • ➤ दो तोला दूध मे चार कली लहसुन उबालकर चेहरे पर मलने से चेहरा खिल उठता है।
    • ➤ पलकों पर सोते समय एरण्ड के तेल की हल्की मालिश करने से पलकें घनी होती हैं।
    • ➤ दांतों को स्वस्थ और सुन्दर बनाए रखने के लिए नियमित रूप से नीम या बबूल की दातून करना श्रेष्ठ उपाय हैं।
    • ➤ भोजन व नाश्ते के बाद 1 गिलास पानी में आधे चम्मच नमक घोलकर कुल्ला करते रहने से भी दाँत निरोगी रहते हैं।
    • ➤ दाढ़ी बनाने के लिए, पहले गर्म पानी से चेहरा भिगो लीजिए, इसके बाद थोड़ा सा कच्चा दूध लेकर चेहरे पर अच्छी तरह मलिए। अब रेजर चलाइए, एकदम चिकनी दाढ़ी बनेगी। दाढ़ी बनाने के बाद क्रीम वगैरह लगाने की जरूरत एकदम समाप्त हो जाती है, क्योंकि कच्चा दूध अब्बल दर्ज का 'क्लीनिंग एजेंट' है। कच्चे दूध के इस्तेमाल से चेहरे की स्निग्धता और सौन्दर्य में वृद्धि होगी, सो अलग।
    • ➤ स्नान करने के लिए, एक नींबू एक छोटी कटोरी भर कच्चे दूध में निचोड़ दीजिए, बस अच्छे से अच्छे साबुन से भी बेहतर स्नान सामग्री तैयार है। नींबू निचोड़ने के बाद जब दूध फट जाए तो एक साफ सूती कपड़े का टुकड़ा इसमें भिगोकर शरीर पर अच्छी तरह रगड़ते हुए फेरिए और स्नान कर लीजिए। यह है आपका एकदम सौ प्रतिशत सम्पूर्ण स्नान।

काले-घने और घुँघराले बालों के लिए कुछ प्रयोग

बालों को स्वस्थ रखने के लिए आहार-विहार पर ध्यान देना सबसे जरूरी बात है। स्वास्थ्य के लिए जरूरी आहार-विहार की पर्याप्ति चर्चा विभिन्न

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प्रकरणों में आ चुकी हैं। किसी विशेष बीमारी की वजह से बालों के पकने या झड़ने की समस्या हो तो उसका इलाज कराएं। बालों की समस्याओं से निजात पाने के लिए होम्योपैथी में बहुत ही कारगर इलाज मौजूद हैं, बशर्ते लक्षणों से मेल खाती उपयुक्त दवा का चयन हो जाए। जड़ी-बूटियों से आंतरिक चिकित्सा के लिए कुछ कारगर नुस्खे तो खैर आगे दिए ही जा रहे हैं।

आंतरिक चिकित्सा के साथ-साथ बालों की बाहरी देखभाल भी जरूरी हैं, पहली बात यह कि सिर की मालिश प्रतिदिन या एकाध दिन के अंतर पर अवश्य करें। इससे त्वचा में रक्त संचार सुचारू रूप से होगा और बालों की जड़ों तक पोषण आसानी से पहुँचेगा। मालिश के लिए आप दिन तेल बदल-बदलकर न इस्तेमाल करें। कोई एक अपने अनुकूल अच्छा तेल चुन लें और नियमित इसी से मालिश करें। सिर धोने की कई देशी विधियाँ आगे दी गई हैं, उन्हें अपनाएँ तो अच्छा लाभ मिलेगा। धूम्रपान, क्रोध, अधिक रात्रि जागरण, वनस्पति घी, तेल, मिर्च, मसालों से जितना बच सकें, उतना ही बेहतर रहेगा। खान-पान का सुधार रखते हुए भोजन में आँवले का नियमित प्रयोग बालों की सेहत के लिए विशेष लाभप्रद है। आँवले के स्थान पर आमलकी रसायन का भी प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है। इतनी सावधानियों के साथ आप जरूरी लगे तो नीचे दिए जा रहे नुस्खे आजमाएं और बालों की समस्याओं से निजात पाएं।

  • • आपके बाल झड़ना शुरू हो रहें हो तो आँवले के रस में शहद मिलाकर सिर में मालिश करें।
  • • आँवला चूर्ण मेंहदी के साथ पीसकर बालों में लेप करने से बाल घने और काले होते हैं।
  • • पिसी हुई सूखी मेंहदी 1 कप, कल्था 1 चम्मच, दही 1 चम्मच, नींबू का रस 1 चम्मच, पिंसा कॉफी पाउडर 1 चम्मच, आँवला चूर्ण 1 चम्मच, ब्रह्मी बूटी का चूर्ण 1 चम्मच, सूखे पोदीने का चूर्ण 1 चम्मच ।
  • • इन सभी चीजें को एक में मिलकर गाढ़ा लेप बन सकें, इतने पानी में भिगों दें। दो ढाई घण्टे बाद इस लेप को सिर में बालों की

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जड़ों तक लगाएं और घण्टे भर बाद सूख जाने पर सिर को मुल्लानी मिट्टी या बेसन से धो दें। इस प्रयोग से आपके बाल काफी सुंदर दिखेंगे। बालों में रंग न लाना हो तो कल्या और कॉफी पाउडर का इस्तेमाल न करें। बालों को सुंदर, लंबे, घने और काले बनाए रखने का यह एक अच्छा उपाय है, बशर्ते साबुन का प्रयोग बंद कर दिया जाए।

  • • उचित आहार-विहार के साथ एक चम्मच साबुत काले तिल तथा एक चम्मच भृंगराज पंचांग कपड्डछन चूर्ण करके फॉक लें तथा ऊपर से ताजा पानी पिएं। 6 माह तक निरंतर यह प्रयोग करने से बालों का असमय पकना व झड़ना रुकेगा इस के साथ सायंकाल सोने से पूर्व सूर्यतप्त नीले नारियल तेल की भी मालिश करें तो अच्छा परिणाम मिलेगा।
  • • 200 ग्राम सूखे आँवले, 150 ग्राम शिकाकाई, 100 ग्राम कपूर कचरी, 100 ग्राम नागरमोथा, 40 ग्राम रीठा तथा 40 ग्राम कपूर लेकर सबका महीन कपड्डछन चूर्ण बनाकर रख लें।
  • • इसमें से 50 ग्राम चूर्ण लेकर लगभग 400 ग्राम उबलते पानी में 15-20 मिनट तक भिगोएं। तदन्तर मसल-छानकर इस जल से बालों में जड़ों तक मलें। इस प्रयोग से बाल मजबूत होते हैं, उनका झड़ना रुक जाता है तथा काले, मुलायम बने रहते हैं। इससे लीक-जूँ भी नष्ट होती है।
  • • चमेली के पत्ते, चित्रक के पत्ते, लाल कनेर के पत्ते तथा करंज के पत्ते- प्रत्येक 250-250 ग्राम लेकर जल में पीसकर कल्क बनाएं। अब 4 किलो तिल का तेल लेकर इसमें कल्क मिलाकर 16 किलो पानी डालकर पकाएं। तेल सिद्ध हो जाने पर छानकर रख लें।

इस तेल की मालिश से सिर या दाढ़ी के, जहाँ भी बाल उड़ गए हों, वहाँ जल्दी ही पुनः उगने लगते हैं। इस तेल

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की कुछ दिनों तक नियमित रूप से रूई के फोहे से मालिश करनी चाहिए।

बाल चकत्तों के रूप में उड़ गए हों, गंज हो या पक रहे हों तो निम्न चिकित्साक्रम अपनाना चाहिए –

  1. 1. इसके 1 घण्टे बाद 3 ग्राम शतावरी चूर्ण 10 ग्राम त्रिफला घृत में मिलाकर दूध के साथ प्रातः तथा इसी तरह सांय सेवन करें।
  2. 2. त्रिफला, काले तिल तथा भृंगराज सभी सम्भाग लेकर चूर्ण बनाकर इसके बराबर पिंसी मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से 10 ग्राम चूर्ण की एक मात्रा भोजन के बाद लें।
  3. 3. सिर में प्रतिदिन सांयकाल सोने से पूर्व भृंगराज तेल की मालिश करें।
  4. 4. यूँ चाय पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है। परंतु यदि आप आदतवश चाय पीते ही हैं तो चाय बनाने के बाद चाय की पत्ती का एक अच्छा इस्तेमाल कर सकते हैं। उबली हुई चाय पत्ती को फेंकने के बजाए इसे पुनः उबालकर छान लें और ठण्डा होने दें। अब इसमें नींबू का रस मिलाकर बालों में लगाएं तथा मल-मलकर सुखाएं, फिर धो डालें। इससे बाल साफ और चमकदार होते हैं।
  5. 5. नींबू, संतरे का रस और दही मिलाकर बालों में मलें और पानी से धो दें। यह प्रयोग बालों को सुन्दर और घना बनाने में उपयोगी हैं।
  6. 6. किसी खेत या तालाब में साफ जगह पर खोदकर 1 फुट नीचे की मिट्टी निकालकर रख लें। काली मिट्टी हो तो अति उत्तम। आवश्यकता भर यह मिट्टी पानी में गलाकर कंकड़-पत्थर छानकर साफ घोल बनाएं। इस घोल से नित्य सिर धोने से बाल खिल उठते हैं और घने, लम्बे, मुलायम बने रहते हैं।
  7. 7. दही में नींबू का रस मिलाकर बालों में मलें तथा धूप में सुखाएं। सूखने पर धो दें। इससे बाल हल्के-फुल्के और फूले-फूले से रहेंगे।

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  1. 8. यदि आप खारे पानी वाले इलाके में रहते हों तो शैम्पू आदि करने के बाद बालों को लाल सिरके से धोएं।
  2. 9. शैम्पू में थोड़ी सी दही मिलाकर बालों में मलकर 10-15 मिनट बाद धोने से आप के बाल चमकदार दिखेंगे।
  3. 10. यदि ड्राई करने या रंगने की वजह से बालों में रूखेपन की शिकायत हो तो दूध में केला मथकर बालों में लगाएं। पका पपीता भी लगा सकते हैं। इससे रूखापन दूर हो जाएगा।

शरीर और साँसों की बदबू भगाइए

शरीर और साँसों में बदबू आने के आंतरिक और बाह्य दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। एक तो खान-पान की गड़बड़ी या किसी रोग की वजह से बदबू आ सकती है, दूसरे शरीर और दाँतों व मुँह की साफ-सफाई में की जा रही लापरवाही से भी बदबू की समस्या पैदा हो सकती है। बदबू की समस्या के यदि शारीरिक विकार, जैसे कि – दाँतों, मसूड़ों की खराबी, पेट की गड़बड़ी, टॉन्सिल की सूजन- पस, नाक व साइनस विकार, श्वासनली व फेफड़ों के विकार, मुँह के छाले रक्त की कमी, मधुमेह, यकृत-गुर्दी की बीमारी, पीनस आदि कारण हों तो आहार-विहार ठीक रखते हुए आवश्यक उपचार करना चाहिए।

  • ➤ बेलपत्र, आँवला, हरड चूर्ण मिलाकर शरीर में लेप करके कुछ देर बाद धो दें। इससे शरीर और पसीने की दर्गंध से छुटकारा मिलता है।
  • ➤ साँस में बदबू आती हो तो ऐसे लोगों को नीम की दातून नियमित करनी चाहिए। इसके अलावा खाने के बाद मुँह अच्छी तरह साफ रखें।
  • ➤ दो चम्मच शहद को 1 गिलास पानी में घोलकर गरारा करने से हफ्ते भर में मुँह की दुर्गन्ध से आसानी से छुटकारा मिल जाता है। इसके साथ दाँत की सफाई और खान-पान पर भी ध्यान दें तो उत्तम है।

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  • ➤ मुँह की दुर्गंध दूर करने के लिए दोनों समय भोजन के बाद अथवा यदा-कदा सौफ़ चबाना चाहिए। इससे हाजमा भी दुरुस्त होता है।
    • ➤ नींबू को कच्चे दूध में निचोड़ कर, इसका लेप करके नहाये, पसीने की दुर्गन्ध दूर होगी।

स्त्रियों की समस्या अविकसित, बेडौल

वक्ष

  • ➤ स्त्री शरीर के लिए वक्ष-सौन्दर्य का विशेष महत्व है। सौन्दर्य की भी अपेक्षा माँ बनने और शिशु के स्वास्थ्य की दृष्टि से नारी शरीर में समुचित विकसित वक्ष का कहीं ज्यादा महत्व है। यूँ यौवनावस्था में कदम रखने के साथ ही स्तनों का भी समुचित विकास शुरू हो जाता है, परन्तु यदि किसी कारण से स्तन अविकसित रह जाएँ या अति विकसित होकर बेडौल हो जाएँ तो चिन्ता की बात हो जाती है।
  • ➤ स्तनों के अविकसित रह जाने के पीछे अत्याधिक दुबलापन, मासिक विकार, गर्भाशय की दिक्कतें, अधिक चिंता, तनाव जैसे अनेक कारण हो सकते हैं। इसी तरह शरीर पर मोटापा चढ़ने, आलसी जीवन बिताने, देर तक सोने की आदत, गरिष्ठ व ज्यादा भोजन करने अथवा समय से पूर्व अत्याधिक काम – क्रीड़ाओं में लिप्त होने, कामुक चिन्तन करने जैसे कारणों से भी स्तन अविकसित, बेडौल व ढीले हो सकते हैं। फिलहाल यहाँ नवयुवतियों की इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए कुछ स्वदेशी उपाय सुझाए जा रहे हैं, जिन्हें आजमाकर अविकसित या बेडौल स्तनों को स्वस्थ, सुडौल बनाया जा सकता है। इतना अवश्य ध्यान रखें कि किसी भी बाह्य चिकित्सा को अपनाते हुए शरीर के आन्तरिक विकार अवश्य दूर करें।
  • ➤ कोई भी आंतरिक या बाह्य उपचार करते हुए स्तनों को समुचित विकास के लिए योगासन व व्यायाम अवश्य अपनाएं। स्तन

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सौन्दर्य की दृष्टि से सूर्य नमस्कार, धनुरासन, चक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, उष्ट्रासन, पर्वतासन, हस्त पार्श्वसन, गोमुखासन आदि विशेष लाभप्रद हैं। इनकी विधियाँ मेरी पुस्तक "रोगी रोकत मुक्त बिना दवाई" पुस्तक से सीख सकते हैं।

  • ➤ स्तन कम विकसित हों तो मालिश करने से काफी लाभ होता है। तिल, जैतून या सरसों के तेल से स्तनों की नियमित मालिश करनी चाहिए। इसी के साथ ठण्डे तथा गर्म पानी की गीली पट्टी से बारी-बारी करके सेंकने से स्तन आसानी से पुष्ट होने लगते हैं।
  • ➤ चेहरे का सौन्दर्य प्रकरण में वर्णित तंबे के बर्तन में नींबू का रस, तुलसी और कसौंदी से बनने वाला नुस्खा प्रयोग करने से स्तन उन्नत, पुष्ट और सुडौल होते हैं।
  • ➤ घृतकुमारी की जड़, गोरखमुण्डी, इन्द्रायण की जड़, अरण्डी के पत्ते, छोटी कटोरी 50-50 ग्राम तथा केले का पंचाम, सहिजन के पत्ते, पीपल के पेड़ की अन्तरछाल, अनार की जड़ व छिलका, खम्भारी की अन्तरछाल, कनेर व कूठ की जड़ 10-10 ग्राम लेकर मोटा-मोटा कूटकर 5 लीटर पानी में उबालकर काथ करें। जब मात्र सवा लीटर पानी बच रहे तो उतारकर छान लें तथा इसमें सरसों व तिल का तेल 250-250 मिली डालकर पुनः उबालें। सिर्फ तेल रह जाए तो उतारकर ठण्डा करके इसमें 15 ग्राम शुद्ध कपूर मिलाकर रख लें।

इस तेल को रात में सोते समय तथा सबेरे नहाने से एकाध घण्टे पहले स्तनों पर हल्के-हल्के मालिश करें। 2-3 माह में स्तन पुष्ट व सुडौल होने लगेंगे।

कुछ नुस्खे हाथ-पैरों की देखभाल के लिए

  • • एडियाँ फटती हों तो अरंडी का तेल, गुलाबजल तथा नींबू का रस समान मात्रा में मिलाकर एडियों पर दिन में दो-तीन बार मलें।
  • • रात को सोने से पहले नारियल का तेल गुनगुना करके बिवाइयों में लगाए तथा मोजे पहनकर सो जाएं। सबेरे गर्म पानी में पैरों को

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15 मिनट तक डुबोएँ तथा किसी ब्रश से हल्के-हल्के रगड़कर एड्रियाँ साफ करें। इसके उपरांत भीगे पैरों को कपड़े से सुखाकर कोई तैलीय चीज लगा लें।

  • • एक चम्मच देशी मोम तथा एक चम्मच देशी घी गर्म करें। दोनों एकसार हो जाएं तो इस मिश्रण की गर्म-गर्म बूँदें बिवाइयों में टपकाएँ। यह प्रयोग प्रतिदिन तब तक करें जब बिवाइयों से छुटकारा न मिल जाए।
  • • जैतून का तेल सहने योग्य गर्म करके नाखुनों को कुछ दूर तक उसमें डुबाए रहिए। ऐसा कुछ दिनों तक करने से आपके नाखून मजबूत होंगे।
  • • 100 ग्राम सरसों के तेल में 25 ग्राम मोम डालकर गर्म करें तथा एक उबाल आने के बाद उतारकर ठण्डा होने से पूर्व ही किसी चौड़े मुँह के पात्र में रख लें।
  • • इसे वैसलीन की करह इस्तेमाल करें, त्वचा नहीं फटेगी। यदि फट रही हो तो ठीक हो जाएगी।
  • • सर्दी के मौसम में या पानी में काम करने से हाथ-पैरों की त्वचा फटती हो तो ग्लिसरीन में नींबू का रस मिलाकर मलना चाहिए।
  • • नींबू के छिलके नाखुनों पर मलने से नाखून चमकदार होते हैं।
  • • हथेलियों, कोहनी और एड्रियों का कालापन मिटाने और मैल हटाने के लिए नींबू के छिलकों को प्रभावित हिस्सों पर घिसकर गुनगुने पानी में धोना चाहिए।

स्वास्थ्य और सौन्दर्य का शत्रु मोटापा

मोटापे का अर्थ है – शरीर में चर्बी यानी वसा का ज्यादा मात्रा में इकट्ठा हो जाना। चर्बी भी अजब चीज है। अगर संतुलन में हो तो शरीर को सुडौल बनाए रखती है, कम हो तो आदमी बेडौल दिखता है और ज्यादा हो जाए तो बेडौल ही क्या पूरा शरीर डोँवाडोल हो जाता है। अर्थात् एक सीमा तक चर्बी जरूरी है, इसके बाद गैरजरूरी। जिनके शरीर में चर्बी

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संतुलित मात्रा में हैं, उनके लिए तो चिंता की कोई बात नहीं है पर जिनके शरीर में चर्बी की कमी हैं, वे चर्बी बढ़ाने के लिए और जिनके शरीर में चर्बी ज्यादा हैं, वे इसे घटाने के लिए परेशान दिखते हैं।

दरअसल मोटापे की समस्या मुख्य रूप से दो तरह से पैदा होती है। कुछ लोगों में मोटापा वंशगत प्रभाव से आता है या शरीर की अन्दरूनी मशीनरी ऐसी होती है कि वे जो कुछ खाते हैं उसका ज्यादा हिस्सा चर्बी में तब्दिल हो जाता है। यानी एक वर्ग ऐसा है जिनके शरीर में चर्बी जमा करने की खास प्रवृत्ति होती है। ऐसे लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति हमेशा चौकन्ना रहने की जरूरत होती है। मोटापे का दूसरा और सबसे व्यापक कारण है लापरवाही भरी दिनचर्या। जरूरत से ज्यादा और सारे दिन कुछ न कुछ खाते रहने, आलस्य भरा जीवन बिताने, भोजन के बाद दिन में सोने, तली-भुनी वसायुक्त बीजों का ज्यादा सेवन करने जैसी आहार-विहार की लापरवाहियों की वजह से ज्यादातर लोग मोटापे के शिकार बनते हैं। एक सवाल यह है कि आखिर किस स्थिति को हम मोटापा कहेंगे? तो इसका सामान्य सा उत्तर यह है कि जब तक शरीर की चुस्ती-फुर्ती कायम हैं और मन में उत्साह-उंमंग बना हुआ है, तब तक मोटापे या दुबलेपन जैसी कोई समस्या नहीं है। पूँ सामान्यतः जितने इंच शरीर की लंबाई हो लगभग उतने ही किलो शरीर का वजन हो तो इसे संतुलित स्थिति मानी जाती है। इसमें उन्नीस-बीस के फर्क से कोई खास अन्तर नहीं पड़ता, लेकिन जब फर्क ज्यादा बढ़ने लगे तो समझिए कि सावधान होने का समय आ गया है। जिन बुजुर्गों का वजन 30-35 वर्ष की उनकी स्वस्थ अवस्था जितना आज भी बना हुआ है, वे अपने को अच्छई स्थिति में मान सकते हैं।

मोटापे का आक्रमण सबसे पहले अक्सर पेट, कमर, कूल्हों और जाँघ पर होता है। इसके बाद गर्दन, चेहरा, हाथ-पैर व शरीर के शेष अंग इसकी गिरफ्त में आते हैं। ध्यान रखने वाली बात है कि शुरूआती दौर में, या जब तक मोटापा पेट, कमर, कूल्हों और जाँघों तक ही सीमित है तब तक इसे दूर करना ज्यादा आसान है। लेकिन जब पूरे शरीर पर मोटापा मजबूत कब्जा जमा लेता है तो इसे हटा पाना तकलीफ़देह और मशक़त भरा काम हो जाता है।

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खैर, स्थिति जो भी हो, अगर मोटापे से ग्रस्त लोग अपना स्वास्थ्य और सौन्दर्य वापस लाना चाहते हैं तो उन्हें अविलम्ब संकल्प की मजबूती के साथ कमर कसकर कुछ उपायों पर अमल करने की तैयारी कर ही लेनी चाहिए। अन्यथा भविष्य की देहरी पर मधुमेह, हाई ब्लडप्रेसर, कब्ज, गैस, हृदय रोग, दमा, गठिया आदि अन्याय रोग उनका स्वागत करने को तैयार मिलेंगे, यह जान लें।

वैसे मोटापे से त्रस्त लोग इससे निजात पाने के लिए जाने क्या-क्या करते हैं और कहाँ-कहाँ भटकते हैं, पर ज्यादातर ऐसा ही होता है कि मोटा अन्तिम दम तक साथ नहीं छोड़ता। यह भी गौरतलब है कि मोटापेके इलाज के चक्कर में अक्सर लोग ज्यादा खतरनाक बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। ऐसे में सीधी सी बात यह है कि मोटापा दूर करने का कार्यक्रम बहुत सोच-समझकर बनाएं और मुस्तैदी से उसका पालन करें। दवाओं का सहारा लेने का इरादा हो इतना याद रखें कि एलोपैथी में मोटापा घटाने की अब तक जो भी दवाएं हैं, निरापद कतई नहीं हैं। इन दवाओं से आप ज्यादा बड़ी मुसीबत में फँस सकते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आयुर्वेद तमाम नुस्खे निरापद और कारगर हो सकते हैं, पर इनमें भी हर किसी नुस्खे का सिर्फ जड़ी-बूटियों के नाम पर ही आँख मूँदकर नहीं आजमाया जा सकता है। पथ्य – अपथ्य का ध्यान रखते हुए होम्योपैथी और बायोकैमी दवाओं से वजन घटाना पूरी तरह सुरक्षित माना जा सकता है। कई लोग सोच सकते हैं कि स्वदेशी चिकित्सा की बात करते-करते होम्योपैथी का जिक्र कैसे? तो यहाँ अति संक्षेप में यह बता देना उचित है कि होम्योपैथी के सिद्धान्त और आयुर्वेद की मूल मान्यताओं में कहीं कोई विरोधाभास नहीं है, बल्कि कई मायनों में होम्योपैथी कहीं ज्यादा ‘आयुर्वेदिक पद्धति’ है। यह रहस्य वे लोग आसानी से समझ सकते हैं जिन्हें होम्योपैथी के सैद्धांतिक पक्ष की गहरी समझ है। यह भी आश्चर्यजनक बात है कि जर्मनी में खोजी गई यह पद्धति भारतीय समाज और सांस्कृतिक मूल्यों के सर्वथा अनुकूल है। ऐसी पद्धति की खोज संभवतः इसलिए भी आसान हुई, क्योंकि इसके अविष्कर्ता महात्मा

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हनीमेन का जीवन भारतीय ऋषियों-महात्माओं जैसा अध्यात्म प्रेरित नैतिकतावादी रहा।

बहरहाल, मोटापा घटाने के लिए आप कुछ भी करें, अंततः आहार-विहार संयमित करने से ही बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसमें से पहले आहार की बात की जाए तो इसका सीधा सा अर्थ यह है कि आपका अपना खान-पान ऐसा संयोजित करना होगा कि शरीर को बाहर से वसा और ऊर्जामान की आपूर्ति कम से कम हो। चूँकि वसा शरीर के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने के लिए अन्दर जमा चर्बी अपघटित होकर शरीर के काम आने लगेगी और इस तरह मोटापा कम होना शुरू हो जाएगा। कैलोरी कम करने के चक्कर में अक्सर लोग भोजन एकदम कम कर देते हैं। आजकल प्रचलित 'डायटिंग' का यह तरीका काफी नुकसानदेह हो सकता है और इससे आप शक्तिहीनता और कई दूसरी बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।

दरअसल आहार को कम करने के बजाए उसे संतुलित करने की जरूरत है। भोजन में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो कम वसायुक्त हों और जिन का ऊर्जामान (कैलोरी) कम हों, परंतु वे शरीर के लिए जरूरी पोषकता की पूर्ति करने वाली हों।

आहार संतुलन के बाद विहार में भी संतुलन जरूरी है। अर्थात् पूरे दिन में से कुछ समय आपको शारीरिक श्रम के लिए अवश्य ही निकालना चाहिए। जितनी ऊर्जा शरीर को भोजन से मिलती है अगर उससे ज्यादा श्रम में खर्च होती है तो समझिए कि मोटे लोगों के लिए सार्थक परिणाम निकल सकते हैं। आहार-विहार को संतुलित करते हुए मोटापा घटाने का फिलहाल एक कार्यक्रम दिया जा रहा है, मोटे लोग इसे अपनाएं और लाभ उठाएं -

6-7 घण्टे की पर्याप्त नींद लेने के बाद सबेरे जल्दी उठने की आदत बनाएं। उठने के बाद सबसे पहले 1 गिलास गुनगुने गर्म पानी में 2 चम्मच नींबू का रस और दो चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर गटागट पी जाएं। अब कुछ देर टहलने के बाद शौच के लिए जाएं।

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शौचादि से निवृत्त होकर कम से कम 3-4 किलोमीटर तेज कदमों से टहलने निकलें, हो सके तो थोड़ी दौड़ भी लगाएं। याद रखें धीरे-धीरे चहलकदमी करने से मोटापे पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। टहलने के बाद समय हो तो कुछ योगासन व्यायाम करें। टहलने के बजाए चाहें तो केवल आसन व्यायाम से भी काम चला सकते हैं। आसनों में सूर्यनमस्कार, उत्तान पादासन, हलासन, धनुरासन, जानुशिरासन, वक्रासन, ताड़ासन, पश्चिमोत्तान आसन, भुंजगासन, पवनमुक्तासन में से पहले आसन आसनों से शुरूआत करके धीरे-धीरे जितने आसन कर सकें, करें। उड्डियान बंध तथा भस्त्रिका प्राणायाम भी करें। आसन-व्यायाम फुरसत हो तो सबेरे शाम दोनों समय खाली पेट कर सकते हैं, और बेहतर परिणाम मिलेगा। इतना अवश्य समझ लें कि आसन-व्यायाम योग्य व्यक्ति से सीख-समझकर ही शुरू करना चाहिए।

नाश्ता हल्का-फुल्का करें। कोई एक किस्म का एक पाव फल या फल का रस लें। 50 ग्राम मूँग में थोड़ा गेहूँ, थोड़ी मेथी मिलाकर अंकुरित करके सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर भी नाश्ते के रूप में सेवन कर सकते हैं। दूध पीते हों तो मलाई उतारकर एक पाव दूध में आधा चम्मच सोंठ तथा 6-7 मुनक्का या थोड़ा अंजीर डालकर उबालें और गुनगुना रहने पर पिएं। चाय पीने का इरादा हो तो अदरक य सोंठ, तुलसी, काली मिर्च, लौंग, इलयची, मुलहठी आदि जड़ी-बूटियों की चाय इस्तेमाल कर सकते हैं।

मोटापे से ग्रस्त लोगों को दोपहर और शाम के भोजन में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। तेल, घी से बनी वसायुक्त और ज्यादा प्रोटीन व कार्बोज युक्त चीजों का सेवन हर हाल में सीमित कर देना चाहिए। भोजन से पहले पर्याप्त मात्रा में सलाद खाएं। हरी सब्जियों की मात्रा भरपूर रखें और गेहूँ की रोटी कम खाएं। अगर मोटापे की समस्या ज्यादा हो तो कम से कम एक माह के लिए गेहूँ की रोटी खाना एकदम बंद कर दें। इस दौरान जो के आटे से बनी रोटी भोजन में लें या साबुत चने में जो मिलाकर पिसवा लें। इस आटे की रोटी स्वादिष्ट भी लगेगी। 10 किलो चना हो तो दो किलो जो मिलाएं तो अच्छा लाभ मिलेगा। दालों में छिलकायुक्त मूँग, मसूर का सेवन बेहतर रहेगा।

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चिकित्सा के शुरू में यदि एकाध हफ्ते तक सिर्फ मौसमी फल, फलों के रस, सलाद और हरी सब्जियों व दाल पर ही निर्वाह करें तो अच्छा है। इसके बाद धीरे-धीरे जो की रोटी सेवन करना शुरू करें। एक डेढ़ माह के बाद गेहूँ की रोटी खाना शुरू कर सकते हैं। दोनों समय का भोजन इसी तरह का करें। शाम को सोने से दो-तीन घण्टे पूर्व एक गिलास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला में दो चम्मच ईसबगोल मिलाकर सेवन करें। त्रिफला के स्थान पर आँवले का चूर्ण भी ले सकते हैं। वैसे भी भोजन आदि के साथ ताजा या सूखे आँवले का चूर्ण, जो भी मिले, अवश्य सेवन करें।

दोपहर के भोजन के साथ मलाई रहित दूध से जमाई दही या छाछ भी ले सकते हैं। इससे मोटापा घटाने में मदद मिलेगी। भोजन में यह पूरा सुधार अपनाने हुए इतना याद रखें कि शुरू में एक हफ्ते तक फल-सब्जियों पर निर्वाह करने के बाद अचानक ही ढेर सारी रोटियों न खाना शुरू कर दें। एक-दो रोटी से शुरू करके धीरे-धीरे रोटियों की संख्या यथोचित मात्रा तक बढ़ाएं।

मोटापा, खासतौर से पेट और कमर का, घटाने के लिए एक अच्छा प्रयोग यह है कि दोनों समय भोजन करने के तुरंत बाद आधा गिलास उबला हुआ गर्म पानी चाय की तरह जितना गर्म पी सकें पी जाएं। यह प्रयोग डेढ़-दो माह तक कर सकते हैं। इसे बहुत लंबे समय तक नहीं चलाना चाहिए। यह प्रयोग प्रसव के बाद महिलाओं के पेट बढ़ने की समस्या में विशेष लाभप्रद हैं। गठिया, कब्ज, गैस, यकृत रोग, मासिक धर्म की अनियमितता, आँखों के नीचे के कालेपन आदि में भी गर्म पानी का प्रयोग काफी हितकर हैं।

दोपहर और शाम के भोजन में 8-9 घण्टे का अंतराल हो तो बीच में 3 या 4 बजे तक कोई हल्का पेय या फल लें। थोड़े भुने चनों के साथ आयुर्वेदिक चाय लेकर भी काम चला सकते हैं।

इतने उपायों पर अमल करते हुए आप कुछ दिनों में मोटापे की समस्या पर तो विजय पा ही जाएंगे, आपके पोर-पोर में स्फूर्ति का भी संचार होगा। इन उपायों के साथ चाहें तो बायोकैमी की कल्केरिया फास

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3x या 6x, काली फास 3x, काली म्यूर 6x, नेट्रम म्यूर 3x तथा साइलीशिया 12x नामक दवाओं की एक-एक टिकिया मिलाकर एक घूँट गर्म पानी के साथ दिन में तीन-चार बार जब तक मोटापा न कम हो जाए तब तक सेवन कर सकते हैं। याद रखें कि बायोकेमिक दवा की टिकिया निगलने के बजाए जीभ पर रखकर चूसनी होती है। यह उपाय सोने पर सुहागा का काम करेगा। इसके अलावा चरित्रागत विशेषताओं के आधार पर चुनी गई कई होम्योपैथी औषधियाँ भी मोटापा घटाने में अच्छा प्रभाव दिखा सकती हैं।

मोटापा घटाने में सहायक कुछ अन्य नुस्खे

  • ➤ 1 गिलास पानी में 4 बड़े चम्मच भर सिरका खाली पेट सेवन करते रहने से कमर का मोटापा दूर होता है।
  • ➤ कुलथों को पकाकर खाने से शरीर की चर्बी छँटती है।
  • ➤ सांयकाल के समय 6 माशा त्रिफला कोरे मिट्टी के पात्रा में लगभग छटाँक भर जल में भिगो दें। प्रातः मसल-छानकर तथा एक तोला शहद मिलाकर नियमित पिएं।
  • ➤ पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करने के लिए भाप सेंक करना चाहिए। यदि प्राकृतिक चिकित्सालय आदि में व्यवस्था न हो तो यह उपाय आप घर में भी कर सकते हैं। इसके लिए एक बड़े भगोने या पतीली में एक चम्मच नमक तथा तीन-चार चम्मच अजवायन डालकर पानी भर दें। बर्तन पर जाली या चलनी आदि रखकर पानी को उबालें। जब भाप उठने लगे तो दो छोटे तौलिए ठण्डे पानी में भिगोकर निचोड़ लें तथा बारी-बारी से जाली पर रखकर भाप से गर्म करके पेट, कमर तथा कूल्हों की सेंक करें। इस उपाय से धीरे-धीरे चर्बी छँटने लगेगी।
  • ➤ प्रातः शौच जाने से पूर्व एक गिलास ठण्डे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर नियमित कुछ दिनों तक पीने से चर्बी कम होने लगती है।

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  • ➤ 1 तोला मूली चूर्ण इतने ही शहद में मिलाकर पानी के साथ सेवन करने से चर्बी छँटती है।
    • ➤ त्रिफला व गिलोय के काढ़े में 250 मि.ग्रा. लौह भस्म मिलाकर पीने से मोटापा बढ़ना रुक जाता है।
    • ➤ 12 ग्राम शहद में 3 ग्राम चित्रकमूल का चूर्ण मिलाकर चाटने से पेट बढ़ना रुक जाता है।

दुबलापन भगाइए सौन्दर्य बचाइए

मोटापे की तरह दुबलापन भी एक समस्या है। हालाँकि दुबलेपन की समस्या उतनी बड़ी नहीं है जितनी कि मोटापे की। मोटे लोगों की तुलना में दुबले लोग प्रायः कम ही बीमार पड़ते हैं और उनके ज्यादा दिनों तक ज़िन्दा रहने की भी संभावना रहती है। फिर भी, अगर देह हड्डियों का कंकाल सा नजर आए तो समझिए कि कुछ मांसलता लाने की ज़रूरत है। ठीक अनुपात में मांसल शरीर स्वास्थ्य व सौन्दर्य की दृष्टि से उचित है।

आहार विहार में उचित सुधार करके देह का दुबलापन दूर किया जा सकता है। कुछ लोग वंशगत प्रभाव से दुबले-पतले होते हैं। उनके शरीर की आंतरिक संरचना कुछ ऐसी होती है कि वे कितना भी पौष्टिक खाएँ-पिएँ पर शरीर में चर्बी इकट्ठा ही नहीं हो पाती और चाहकर भी वे मांसल नहीं दिखते। ऐसे लोगों का दुबलापन दूर होना थोड़ा मुश्किल तो है पर असंभव नहीं है।

दुबलापन दूर करने का कार्यक्रम बनाने से पहले यह देख लेना चाहिए कि कहीं किसी रोग की वजह से तो ऐसा नहीं है। यदि कोई रोग हो तो पहले उसे ठीक करने का उपाय करें। ज्यादा संभव है कि आरोग्य होते ही दुबलापन भी खुद-ब-खुद दूर हो जाएगा। बिना किसी खास बीमारी के होते हुए भी दुबलापन है तो इसके पीछे कम भोजन करना या

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भूखे रहना, पौष्टिकता रहित भोजन करना, रात में देर तक जागना, कम विश्राम करना या क्षमता से ज्यादा श्रम करना, ज्यादा उपवास करना, तनाव-चिंता-शोक में जीवन बिताना, पाचनशक्ति कमजोर होना आदि कारण हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि यदि उक्त कारण जिम्मेदार हों तो दुबलापन दूर करने की कोशिश करने के साथ-साथ इन गड़बड़ियों को भी दूर करना चाहिए और ईर्ष्या, द्वेष, चिंता, शोक, क्रोध से मुक्त होकर प्रसन्नचित्त, उर्मग भरा जीवन बिताते हुए निम्न उपाय करने चाहिए –

दुबलापन दूर करने की पहली शर्त यह है कि आप अपनी पाचनशक्ति मजबूत करें ताकि खाया-पिया शरीर में अच्छी तरह जज्ब हो खुलकर भूख लें। इसके लिए हफ्ते भर विधिपूर्वक उपवास कर सकते हैं। तरीका यह है कि जब उपवास करना हो तो एक दिन पहले मूँग की खिचड़ी आदि हल्का भोजन लें। रात में दूध या पानी के साथ 2 चम्मच ईसबगोल, एरण्ड तेल अथवा त्रिफला सेवन करके उदर की सफाई करें। दूसरे दिन रोटी बंद कर दें और मौसमी फलों व उबली हरी साग-सब्जियों पर निर्वाह करें। तीसरे दिन 2-3 घंटे के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके सिर्फ फलों का रस पिएं। चौथे दिन सिर्फ पानी पीकर रहें। साथ में नींबू और शहद ले सकते हैं। पाँचवें दिन पुनः फलों का रस लें। छठे दिन फल व उबली साग-सब्जी पर रहें। सातवें दिन एक-दो चपाती से शुरू करके धीरे-धीरे खुराक बढ़ाएं। इस उपवास काल में दो-तीन दिन एनिमा द्वारा पेट की सफाई कर लें तो बेहतर परिणाम मिलेगा।

उपवास करने के बाद प्रायः भूख खूब लगने लगती है और खुराक बढ़ जाती है। इस तरह से बढ़ी हुई खुराक दुबलापन दूर करने में अत्यंत सहायक है।

दुबले लोग सबेरे पौष्टिक नाश्ता लें, पर इसका समय भोजन से 3-4 घण्टा पहले और सोकर उठने के 2-3 घण्टे बाद रखें। एक पौष्टिक नाश्ता यह है कि थोड़े चनों में गेहूँ, मूँगफली, मूँग मिलाकर अंकुरित कर लें। इस अंकुरित अन्न में नींबू और थोड़ा नमक डालकर नाश्ते के रूप में सेवन कर सकते हैं। नमक, नींबू न मिलाना चाहें तो इसे गुड़ के साथ या इसमें

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थोड़ी भिगोई किशमिश व खजूर मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं। ऊपर से चाहें तो थोड़ा दूध पिएं। नमक, नींबू मिलाएं तो दूध न पिएं।

इसके अलावा आगे वर्णित खजूर और दूध वाला नाश्ता भी कर सकते हैं या अनुकूल पड़े तो केला-दूध लें। जाड़े के दिनों में उड़द का आटा, बबूल का गोद, देशी घी, अक्ष्गंध तथा मेवे मिलाकर बनाया गया लड्डू भी पाचनशक्ति के अनुसार सेवन कर सकते हैं। पौष्टिक नाश्ते और भी कई हैं, उन्हें सोच-समझकर सेवन करके लाभ उठाया जा सकता है।

दोपहर और शाम के भोजन में पर्याप्त पौष्टिक पदार्थों का सेवन खूब चबा-चबाकर करें। उपलब्धता के हिसाब से गाजर, पालक, चोलाई, टिण्डा, परवल व विभिन्न हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, घी का तड़का लगी दाल, आँवले का मुरब्बा, दूध, घी, मक्खन, चावल की खीर आदि सेवन करें। रोटियाँ गेहूँ की खाएं। चाहें तो गेहूँ में तिहाई भाग चने मिलाकर पिसवा लें और इस आटे की रोटी खाएं। भोजन के बाद एक-दो कले और आगरे का पेठा या आँवले का मुरब्बा लें तो अच्छा है। रात के भोजन में एकाध रोटी कम खाएं। भोजन के बाद आगे वर्णित अक्ष्गंधारिष्ट वाला नुस्खा भी सेवन कर सकते हैं।

  • ➤ दोनों भोजन के बीच 8 घण्टे का अंतर रखते हुए मध्यकाल में किसी मौसमी फल या जूस का हल्का पाचक पौष्टिक अल्पाहार ले सकते हैं।
  • ➤ पानी भोजन के डेढ़-दो घण्टे बाद पीने की आदत बनाएं। इसके अलावा दिन भर में डेढ़-दो घण्टे अंतराल पर 6-8 गिलास तक खूब पानी पीते रहें।
  • ➤ रात में भोजन से दो-तीन घण्टे बाद और सोने से पूर्व गुनगुने दूध में एक चम्मच घी के साथ मिश्री या दो-तीन चम्मच शहद मिलाकर पिएं।
  • ➤ इतना उपाय करते हुए सबेरे अपने अनुकूल व्यायाम, योगासन, प्राणायाम अवश्य करें। इस संबंध में किसी पुस्तक या योग्य व्यक्ति से जानकारी प्राप्त की जा सकती है। याद रखें, पौष्टिक

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आहार के साथ बिना उचित मात्रा में श्रम, व्यायाम किए स्वस्थ सुझौल बनना नामुमकिन हैं।

❖ जनरल टॉनिक

  • ➤ अर्जुनारिष्ट, बलारिष्ट, अंगूरसव, अश्वगंधारिष्ट तथा दशमूलारिष्ट-प्रत्येक 500-500 मिली. लौह भस्म, अश्वक भस्म तथा शुद्ध शिलाजीत 10-10- ग्राम
  • ➤ सभी आसव अरिष्ट एक में मिलाकर उसमें दोनों भस्म व शिलाजीत अच्छी तरह घोल दें। इसे 2 से 4 चम्मच दिन में दो बार बराबर पानी मिलाकर लेना चाहिए।

यह बढ़िया जनरल टॉनिक हैं। इससे शारीरिक और मानसिक शक्ति बढ़ती है। थकावट, आलस्य, कमजोरी दूर होकर चुस्ती-फुर्ती व अच्छी नींद आती है।

  • ➤ सफेद मूसली और असगंध समान मात्रा में लेकर कपड़छन चूर्ण बनाएं तथा एक छोटी चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करें। इससे मांस और बल दोनों की वृद्धि होती है।
  • ➤ असगंध का चूर्ण सबेर-शाम 1-1 चम्मच की मात्रा में शहद में मिलाकर चाटने तथा साथ में एक पाव मिश्री मिला गर्म दूध पीते रहने से शरीर का दुबलापन मिटता है।
  • ➤ शतावरी, छिलका रहित कौंच के बीज, सफेद मूसली, असगंध, गोखरू- सभी 100-100 ग्राम।

सभी चीजों को अलग-अलग कूट-पीसकर कपड़छन चूर्ण करके मिलाकर रख लें। यह चूर्ण सबेर-शाम खाली पेट थोड़े देशी घी में 5-5 ग्राम मिलाकर सेवन करें। चाहें तो एक पाव मिश्री मिला गुनगुना दूध पी सकते हैं। शाम वाली खुराक चाहें तो रात में सोने से आधा घण्टे पूर्व भी सेवन कर सकते हैं। अलबत्ता, भोजन किये हुए कम से कम दो घण्टे अवश्य बीत गए हों।

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इस प्रयोग से दुबलापन दूर होता है, पौरुषशक्ति बढ़ती है। यह पौष्टिक, धातुवर्द्धक और श्रेष्ठ बाजीकारक नुस्खा है। इसे ब्रह्मचर्य के साथ लगभग तीन माह तक प्रयोग करना चाहिए।

  • ➤ शरीर दुबला हो और ऐसा किसी विशेष रोग की वजह से न हो तो प्रतिदिन दो पके केले खाकर ऊपर से गर्म मिश्री मिला 1 पाव दूध पिएं। दूध उबालते समय इसमें एक-दो इलायची भी पीसकर मिला दें। तीन चार माह में शरीर मांसल होने लगेगा।
  • ➤ 125 ग्राम सालमपंजा तथा 250 ग्राम बादाम मिगी को महीन पीसकर मिला लें। प्रातः और रात में सोने से पूर्व भोजन से 2-3 घण्टे बाद 10-10 ग्राम यह चूर्ण गुनगुने मीठे दूध से सेवन करते रहने से शरीर का दुबलापन व कमजोरी दूर होती है तथा यौनशक्ति बढ़ती है। स्त्री-पुरुष दोनों के लिए उपयोगी है।
  • ➤ छिलका उतारे हुए 60 ग्राम जौ की आधा लीटर दूध में खीर बनाएं और इस खीर का ही नियमित नाश्ता करें। यदि किसी विशेष बीमारी की स्थिति न हो तो दो माह में इस प्रयोग से दुबलापन दूर होने लगता है।

कुछ अन्य उपचार

हाथ पैर में कम्पन - लहसुन की कली का पेस्ट, तिल का तेल और सेधा नमक मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें।

मुँहासे दूर करने के लिए - संतरे के छिलको को धूप में सुखाकर बारीक पीस लें। इसके एक चम्मच में गुलाबजल मिलाकर चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं तथा बाद में चेहरा धो लें।

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दस्तों के लिए - मोटी सौफ़ तथा जीरा बराबर मात्रा में लेकर हल्का सा भून कर पीस ले, दिन में तीन बार सादे पानी के साथ सेवन करें।

गले की खराश - एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच सिरका व थोड़ा सा संधा नमक मिलाकर गराये करें।

सर्दी - जुकाम, खांसी ठीक करने के लिए - 2 चम्मच शहद और उसके बराबर मात्रा में अदरक रस मिलाकर बार बार चाटें।

हिचकी आने पर - थोड़ा सा गर्म घी पी लेने से तुरन्त राहत

मुँह से दुर्गंध - भुना जीरा मुँह में डाले।

स्मरण शक्ति के लिए - दो अखरोट की गिरी के साथ दस किशमिश का सेवन

जोड़ों में दर्द - प्याज के रस को सरसों के तेल में मिलाकर मालिश करना ।

तैलीय त्वचा के लिए - नींबू का रस तथा गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएँ।

पेट के कीड़ों के लिए - अजवायन के चूर्ण को छाछ के साथ सेवन।

मुँह का बिगड़ा स्वाद ठीक करने के लिए - लौंग को मुँह में रखकर चूसें।

फोड़े - फुन्सियों हेतु उपचार - बेल की ताजी पतियों को अच्छी तरह धोकर पीसकर, फोड़े - फुन्सियों पर लगाकर पट्टी बाँधें।

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