आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
१० आल्हखण्ड । ४६ सुलखे पैदा भे विरमा के ताकी खुशी कही ना जाय ६० देवा पैदाभा भीषम के ठाकुर मैनपुरी चौहान ॥ सो भा साथी बघऊदन का ज्वानों सुनो चित्तदै कान ६१ याविधि लड़का इकठौरी है बाँधे छोटि छोटि तलवार ॥ छुटि छुटि ढालें सोहैं पीठि में शिरपर पगिया करैं बहार ६२ छुटि छुटि कलँगी तिनपरसोहैं छोटी बैसनके सरदार ॥ छुटि छुटि घोड़न के चढ़वैया बड़ बड़ ठकुरन केर कुमार ६३ रोज शिकारन को जावें ते बाँधे गूंरा और गुलेल ॥ जुलफै सोहैं तिन कुँवरन के जिनमाँ महकै अतरफुलेल ६४ आगे घोड़ा है आल्हा को पाछे जायँ वीर मलखान ॥ तिनके पीछे ब्रह्मा सोहैं पीछे उदयसिंह बलवान ६५ सुलखे भाई 'मलखाने का सोऊ लीन्हे हाँथ गुल्याल ॥ हिरना ढूंढें सब जंगल माँ एक ते एक दई के लाल ६६ हिरना पायो नहिं जंगल में लौटे फेरि महोबे बाल ॥ एक न लौट्यो उदयसिंह तहँ नाहर देशराजका लाल ६७ सो यह सोचै मन अपनेमाँ औ मनहीमाँ करै विचार ॥ हम कहिआये हैं माता सों माता लावैं आज शिकार ६८ हिरना मारे बिन जावें ना हमरो याही ठीक विचार ॥ यहै सोचि कै मन अपने माँ ढूंढ़न लाग्यो तहाँ शिकार ६६ हिरनादीख्यो इक झाबर में मारन चल्यो बनाफरराय ॥ हिरना भाग्यो तहँ उरईको माहिल बाग पहुँचा जाय १०० घोड़ बेंदुला को रपटाये पाछे चला बनाफर जाय ॥ खाँई ऊंची त्यहि बगियाकी ऊदन घोड़ा दीन फँदाय १०१ मारि बेंदुला की टापन सों सबियाँ बगिया दीन खुदाय ॥
महोबेका प्रथमयुद्ध । ४७ ११ छोटी दरखत बहु टूटत भे रौसैं पटरी दई गिराय १०२ यहगतिदीख्यो जब मालिनने बोल्यो उदयसिंहते आय ॥ कौने राजा के लरिकाहौ सबियाँ डार्यो बाग नशाय १०३ काह नाम है सो बतलाओ आपन देश देव बतलाय ॥ सुनिकै बातें त्यहि मालीकी बोल्यो तुरत बनाफरराय १०४ देश हमारो नगर महोबा हमरो उदयसिंह है नाम ॥ फिरिकै माली अब बोलेना नाहिं तो पठैदेवँ यमधाम १०५ सुनिकै बातें बघऊदन की माली चुप्प साधि तब लीन ॥ सुमिरि भवानी शिवशंकरको ह्याँते कलम बन्दकै दीन १०६ आशिर्वाद देवँ मुंशीसुत जीवहु प्रागनरायण भाय ॥ कीरति तुम्हरी जो सब गावैं तौफिरिकथाबहुतबढ़िजाय १०७ माथ नवावों पितु अपने को जिन म्वहिं बिद्यादीन पढ़ाय ॥ सो सुख पावैं देवलोक में गावैंललितचरितनितध्याय १०८ अब मैं ध्यावों रामचन्द्रको जो मम इष्टदेव महराज ॥ ईज्जति हमरी जग में राखैं पुरवैं सकल हमारे काज १०६ इति श्रीलखनऊनिव।सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबायू प्रयागना- रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतमहोवायुद्धऊदनशिकार वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ महोबेकाप्रथमयुद्धसमाप्त ॥
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अथ आल्हखण्ड ॥ माड़ो का युद्ध वर्णन ॥ सवैया ॥ श्वेतस्वरूप अनूपमनूप नहीं कोउ रूप कहौं ज्यहि गाई । आप समान हौ आपहि रूप स्वरूप के भूप गिरीश जमाई ॥ बैल बुढ़ान कि शूल हिरानभयो कछु आन कि आनहि भाई । पापी लस्यो ललिते शरणागत लूटत हैं त्यहि चोर सदाई १ काम औ क्रोध औ लोभौ मोहहु लूटत हैं नितही दुखदाई । राव न रंक कि शंक करें निरशंक फिरैं सबके उर जाई ॥ चार में मार अपार बली जो छली छलि देश गयो सब खाई । पापी लस्यो ललिते शरणागत लूटत हैं त्यहि चोर सदाई २ सुमिरन ॥ नित प्रति ध्यावै जो सुर्यन को होवै जौन बिसूरै काज ॥ सूर्य्य महातम जो कउ गावै ताकी बनी रहै जग लाज १ प्रातःकाल उदय पूरब दिशि पश्चिम अस्त शामको जान॥ देय अंजली जल सुर्यन को तापर खुशी होयं भगवान २ ४
२ आल्हखण्ड । ५० निमक न खावे जो रवि दिनमें एकै बेर करै आहार ॥ बंधन छूटैं त्यहि दुनिया के नाँघै माया सिंधु अपार ३ सोय के जागै जब कोऊ नर लेवै रोज सूर्य्य के नाम ॥ जब मरजावै वहु दुनिया में पावै तुरत सूर्य्य को धाम ४ छूटि सुमिरनी गै सूर्य्यन कै औ ऊदन का सुनो हवाल ॥ ऊदन जैहैं गढ़माड़ो को लड़िहैं तहाँ केर नरपाल ५ अथ कथाप्रसंग ॥ बरस बारहीं का ऊदन रहै बाँधे सबै ज्वान हथियार ॥ माहिल ठाकुर उरई वाला खेलै ताकी बाग शिकार १ घोड़ बेंदुला तहँ थिरकत भा विषधर उरई के मैदान ॥ भारी पनिघट रहै उरई का नारिन दीख सजीला ज्वान २ धीरज छूट्यो तब नारिन के बोलीं एक एक के कान ॥ काहू राजाको बालकहै याको रूप दीन भगवान ३ नारी बोलैं अस आपस में तवलग गयो बनाफर आय ॥ ऊदन बोल्यो पनिहारिन सों घोड़ै पानी देउ पियाय ४ सुनिकै बातैं बघऊदन की बोली एक नारि रिसिआय ॥ कौनदेश के रहवैया हौ आपन नाम देव बतलाय ५ लौंड़ी तुम्हरी हम आहिनना घोड़ै पानी देयँ पियाय ॥ माहिलराजा जो सुनि पैहैं लेहैं घोड़ा तुरत छिनाय ६ देश हमारो नगर मोहोबा आल्हा केर लहुरवाभाय ॥ बेटा आहिन देशराज के हमरो नाम उदयसिंहराय ७ यह कहि लीन्हों कर गुलेलको गुल्लन गगरी दीन गिराय ॥ जितनी गगरी रहैं पनिघटमाँ सबियाँ गुल्लन दीन नशाय ८ पैंड़ा मसक्यो रसबेंदुल के घोड़ा उड़ा हवा सम जाय ॥
सवापहर के फिरि अर्सामाँ ऊदन गयो मोहोबे आय ६ हाँ पनिहारी चलि पनिघटसों माहिल द्वार पहुंची आय ॥ कही हक़ीकत सब माहिल सों आँखिन आँसू रहीं बहाय १० ईजति हमरी वहि लैडारयो बेटा देशराज के लाल ॥ गगरी सबियाँ चूरण कैकै औचलिगयो जहाँपरिमाल ११ सुनिकै बातैं पनिहारिन की माहिलजला अग्निकीज्याल ॥ काग़ज लीन्ह्यो कलपीवाला लीन्ह्यो कलमदवाइत हाल १२ शिरीसरखऊ को पहिले लिखि पाछे लिखनलाग सब हाल ॥ चिट्ठी तुमका हम भेजित है सो पढ़िलेउ रजापरिमाल १३ तुम्हरे घरका जो चाकर है जाको उदयसिंह है नाम ॥ सो चलिआयो म्वरि उरई माँ सबियाँ बाग कीन बेकाम १४ उधुम मचायो सो पनिघट में सिगरी गगरी दीन नशाय ॥ कबसे ऊदन भे तरवरिहा सो तुम उन्हें देव समुझाय १५ टँगीं खुपरियाँ देशराज की राजा जम्बा क्यरे दुवार ॥ बड़ी वीरता जो आई हो माड़ो करें जाय तलवार १६ लिखिकै चिट्ठी सो माहिलने धावन हाथ दीन पकराय ॥ साजि साँड़िनी को जल्दी सों धावन चला मोहोबे जाय १७ तीन पहर का अरसा करके फाटक उपर पहुंचा जाय ॥ बैठि साँड़िनी गै फाटक पर धावन उतरपरा तहँ आय १८ चलिभो धावन फाटक भीतर जहँ पै बैठ रजा परिमाल ॥ कीन बन्दगी महराजा को पत्री देत भयो ततकाल १६ फारि लिफाफा को जल्दी सों पत्री पढ़त भयो परिमाल ॥ लिखी हकीकत जो माहिल है सोसबबाँचिलीनत्यहिकाल २० कलम दवाइत कागज लैंकै उत्तर लिखनलाग परिमाल ॥
धोखे माड़ो की चरचा ना कीन्ह्यो उरई के नरपाल २१ फोरी गगरिया है माटी की ताँवे घड़ा देउँ बनवाय ॥ विषधर लड़का देशराज का जयहिकाकहीउदयसिंहराय २२ जैसे लरिका देशराज का तैसे पूत आपनो जान ॥ अनख न मानव यहि वातनका माहिल वचन हमारे मान २३ लिखिकै चिट्ठी को जल्दी सों धावन हाथ दीन पकराय ॥ माथ नायकै परिमालिक को धावन बैठ ऊंट पर जाय २४ जल्दी चलिकै फिरि मोहबे सों उरई तुरत पहुंचा आय ॥ किह्यो बन्दगी सो माहिल को पत्री दीन हाथ में जाय २५ पढ़िकै पत्री परिमालिक की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ॥ नोचि फोंचिकै त्यहि चिट्ठीको माहिल तहँपर दीन चलाय२६ एक महीना के अरसा में ऊदन खेलन चल्यो शिकार ॥ जायकै पहुंच्यो फिरि उरई में माहिल बाग गयो सरदार २७ जोड़ी मास्यो करसायल की औ फुलबगिया डस्योनशाय॥ माली दौरे सब बगिया के औयहदिखयनितमाशाआय२८ जल्दी चलि भे ते उरई को अभई पास पहुंचे जाय ॥ कह्यो हकीकत सब माली ने अभई तुरतै चला रिसाय २६ जायकै पहुँच्यो फिरिबगियामें अभई गरु दीन ललकार ॥ अवगुन कीन्ह्यो भल उरई में ओ द्यावलि के राजकुमार३० जान न पैहो अब उरई ते ऊदन खबरदार द्वैजाय ॥ सुनिकै बातें ये अभई की घोड़ते कुदा बनाफरराय ३१ पकरिकै बाहू द्वउ अभई की औ वगिया माँ दीन चलाय॥ हाँकिकै घोड़ा ऊदन चलिभे पहुँचे नगरमोहोबा आय ३२ माली दौरे फिरि बगिया ते माहिल पास पहुंचे आय ॥
माड़ोका युद्ध । ५३ ५ सुनिकै बातें तिन मालिन की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ३३ लिल्ली घोड़ी को मँगवायो तापर माहिल भयो सवार ॥ जायकै पहुँच्यो फुलबगिया में ठाकुर उरई को सरदार ३४ गोद उठायो फिरि अभई को तुरतै नलकी लीन मँगाय ॥ त्यहि पौढ़ायौ सो अभई को महलन तुरत दीनपहुँचाय ३५ अपना चलिभा फिरि मोहबेको लिल्लीघोड़ी पर असवार ॥ तिकृतिकृतिकृतिकूहांकतिआवै पहुँचा फेरि महोबेदार ३६ उतरिकै घोड़ी सों जल्दी सों चलिभो जहाँ रजापरिमाल ॥ राम जुहार कीन राजा को औफिरिकहनलागसबहाल ३७ तुमने ऊदन को पालो है राजा मोहबे के सरदार ॥ दाख छुहारेन की बगिया को ऊदन जाय कीन संहार ३८ भुजा उखारी तिन अभई की मारो हिरण बाग में जाय ॥ दूजी कीन्हीं म्वरे साथ में ओ महराजा बात बनाय ३६ ऐस बहादुर जो पैदा भे काहे न लेयँ बाप को दायँ ॥ जम्बै राजा माड़ोवाला दशहरि पुरवा लीन लुटाय ४० बाँधिकै मुश्कें देशराज की पत्थर कल्हू डरा पिरवाय ॥ लेखा पतुरिया देशराज की सो लैगयो करिंगाराय ४१ घोड़ पपीहा औ हाथी को लीन्ह्यो हार नौलखा आय ॥ सोवत मारयो बच्छराज को दशहरिपुरवा दीन फूँकाय ४२ इतना कहतै ऊदन आयों राजा गयो सनाका खाय ॥ कलहा लड़िका देशराज को जो मरिबे को नहीं डेराय ४३ सुनिकै बातें सो माहिल की ठाढ़ो भयो शीश को नाय ॥ को है राजा माड़ोवाला सांची हमें देउ बतलाय ४४ को है मारा म्वरे बाप को पुरवा कौन दीन फूँकवाय ॥
६ आल्हखण्ड । ५४ लखा पतुरिया को लैगा को घोड़ा कौन लीन छुड़वाय ४५ हार नौलखा को लैगा को मार्यो बच्छराज को आय ॥ हाल बतावो सब जल्दी सों हमरे धीर धरा ना जाय ४६ सुनिकै बातें बघऊदन की बोला तुरत रजापरिमाल ॥ तीस बरस की ई बातें हैं माहिलकहँ आजसो हाल ४७ कठिन लड़ाई भै सिलहट में तहँ पर जूझो बाप तुम्हार ॥ दशहरिपुरवा कहूँ अनते हैं फूंक्यो माड़ो के सरदार ४८ किह्यो बहाना परिमालिक ने मान्यो नहीं बनाफरराय ॥ माहिल तेरे फिर पूंछत भे साँचे हाल देव बतलाय ४६ को है राजा माड़ोवाला ज्यहिने मारा बाप हमार ॥ चरचा कीन्हीं है तुम्हीं ने ठाकुर उरई के सरदार ५० त्यहिते तुमते हम पूंछत हैं सो तुम हमें देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की माहिलकहावचनमुसुकाय ५१ जौन बतावा परिमालिक ने सोई सत्य बनाफरराय ॥ बाप तुम्हारो सिलहट जूझ्यो चरचाकीत सोईहम आय ५२ सुनिकै बातें ये माहिल की चलिभा तुरत बनाफरराय ॥ जायके पहुँच्यो त्यहि मन्दिरमें जहँ पै रहे दिवलदे माय ५३ हाथ जोरिकै तहँ पूँछत भा माता चरणन शीश नवाय ॥ किसने मार्यो म्वरे बाप को माता मोहिं देउ बतलाय ५४ लखा पतुरिया हाथी घोड़ा औ लैगयो नौलखाहार ॥ टँगी खुपरिया म्वरे बाप की माता क्यहिके अबों दुवार ५५ सत्य बतावै मोहिं माता तू नहिं मरिजाउँ पेटको मारि ॥ इतनी कहिकै बघऊदन ने औ छाती में धरी कटारि ५६ देखि तमाशा यहु ऊदन को द्यावलि मनमाँ कीन बिचार ॥
माड़ोका युद्ध । ५५ ७ माहिल आवाहै उरई ते त्यहि भुरकावा पूत हमार ५७ सोचन लागी मन अपने माँ अब मैं काह करों भगवान ॥ झूठ बतावों जो लरिका ते तो यहु छाँड़े अबै परान ५८ सत्य बतावों यहि लरिका ते तो यहु अबहीं करै पयान ॥ मोहिं पियारो बघऊदन है प्यारो नहीं आपनो प्रान ५६ साँच बतावों मैं ऊदन ते यह मन ठीक लीन ठहराय ॥ जौन विधाता की मर्जी है होवै स्वई भागवश आय ६० यहै सोचि कै मन अपने माँ द्यावलिकहन लागि सबगाय॥ जम्बै राजा माड़ोवाला त्यहिका पूत करिंगाराय ६१ सो चढ़िआयो अधीरात को मार्यो बाप तुम्हारो आय ॥ चचा तुम्हारे का सो मारा दशहरि पुरवा दीन फुँकाय ६२ लै पचशब्दा गा हाथी को पपिहाघोड़ लिहेसि छुड़वाय ॥ ल खाप तुरिया हार नौलखा सब लैगयो करिंगा आय ६३ मालखजाना परिमालिक का सोऊ सबै लीन लदवाय ॥ बिदति मचायो बड़ि पुरवामाँ बहु दहिजार करिंगाराय ६४ चुरी उतार्यों ना तबसों मैं मनमाँ यहै लीन ठहराय ॥ पूत सुपूते जो कोउ हैंहैं लेहैं दाउँ बाप को जाय ६५ चुरी उतारौं तब सागर में यह म्वरे मनै गई तब आय ॥ जन्म तुम्हारो तब भातोना पेट में रहो बनाफरराय ६६ बराबरस की नगरी भंवरी या त्यहिते मोर प्राण घबड़ायँ ॥ बाढ़ो बोड़ा फैले इल्म बीते बदला लिह्यो बापको जाय ६७ सवैया ॥ बात सुन्यो यह मातु मुखै तबहीं बघऊदन ने ललकारा। जाय हनउँ गढ़माड़व में मयँ जम्बै ठाकुर केर कुमारा ॥
नाहिं छुवउँ तलवारि न हाथ न मातु कहावों पूत तुम्हारा । ठाकुर सोइ कहैं ललिते जो मेरै रण खेतन में असिधारा ६८ इतनी कहिकै ऊदन बिगरे औ मातासों लगे बतान ॥ अब हम जइहैं गढ़ माड़ो को हमरो भलाकरैं भगवान ६६ कहा न मनिहैं हम काहू को हमरो सत्य वचन करु कान ॥ घर में माता अब तुम बैठो मनमें धरे रामको ध्यान ७० बराबरस का क्षत्रिक लरिका ज्यहिकै ऐंची अवै कमान ॥ त्यहि का बैरी सुखते स्वावै जिन्दा मुरदाके अनुमान ७१ बातैं सुनिकै ये ऊदन की द्यावलि हाथ पकरि तब लीन ॥ पकरिकै बाहू बघऊदन की आल्हानिकटगमनाफिरिकीन ७२ मलखे सुलखे देबा आल्हा ताहन बनरस का सरदार ॥ आवत दीख्यो जब माता को सबहिन कीन्ह्यो रामजुहार ७३ द्यावलि बोली तब ताहन ते छोटे देवर लगो हमार ॥ माहिल आये हैं उरई ते तिनते सुने सिछुट कवाम्बार ७४ करिया मार्यो म्वरे बाप को सो यहु बदल लेनको जाय ॥ जालिम राजा है माड़ो का ताते मोर प्राण घबड़ायँ ७५ तुमका सौंपति हौं ऊदन को इनका माड़ो लवो दिखाय ॥ इतनी सुनि कै आल्हा बोले घरमाँ बैठु लहुरवा भाय ७६ धुआँ न दीखे तू तोपन का ना रण नाँगि दीख तलवार ॥ अड़वड़ क्षत्री है माड़ो का मानि ल्यो कहा हमार ७७ इतनी सुनिकै ऊदन बोले कहाँ कहा शोभै गा त्वार ॥ टँगी खुपरिया म्वरे बाप की राजा जम्बै क्यरे दुवार ७८ नालति ऐसी रजपूती को दादा जीबे को धिक्कार ॥ क्षत्री हैकै समर सकाना ताको खायँ गिद्ध नहिंस्यार ७६
माड़ोका युद्ध । ५७ ६ की खपरी खपरिन मिलि जैहैं की पै मिली बाप का दाउँ ॥ जो नहिं जावों गढ़माड़ो को ऊदन नाहिं कहावों नाउँ ८० मलखे बोले तब देवा ते हमको शकुन देउ बतलाय ॥ हारि हमारी माड़ो हैहै की हम जितब करिंगाराय ८१ लैकेँ पोथी समरसार की देवा शकुन विचारन लाग ॥ यजुर्वेद ऋगवेद अथर्वण जानै सामवेद बड़भाग ८२ शकुन हमारो यों बोलत है माड़ो काम सिद्धि हैजाय ॥ मूड़ मुड़ावो योगी हैकै माड़ो चलो सबै जनभाय ८३ सुनिकै बातें ये देवा की मलखे थान लीन मँगवाय ॥ रंग रँगायो ते गेरू के गुदड़ीतुरतलीन सिलवाय ८४ वइसपर्त की सिली गुदड़ियाँ जिनमें छिपैं ढाल तलवार ॥ आल्हा ऊदन मलखे देवा सय्यद बनरस का सरदार ८५ पांचों मिलिकै सम्मत कैकै योगी भेष लिह्यनि फिरिधार ॥ कड़ा सूबरण के हाथे मा कानन कुंडल करैं बहार ८६ हाथ सुमिरनी तुलसी वाली तनमा लीन्ह्यो भस्म रमाय ॥ मलखे लीन्ह्यो इकतारा को आल्हा डमरू लियो उठाय ८७ लीन सरंगी मीराताल्हन देवा खँजड़ी रहा बजाय ॥ बजै बँसुरिया बघऊदन की शोभा कही बूत ना जाय ८८ राग छतीसो गावन लागे एक ते एक शूर सरदार ॥ सुरति बिहागर जयजयवन्ती ठुमरी टप्पा और मलार ८६ धुरपद गावैं औ तिल्लाना तोरैं ग़ज़ल पर्ज पर तान ॥ भूमि भूमिकै सारँग गावैं करिकै रामचन्द्र को ध्यान ६० मलखे बोले तब ऊदन ते तुम सुनि लेउ बनाफरराय ॥ पहिले माता द्वारे चलिये तहँपर अलख जगावँ जाय ६१
१० | आल्हाखण्ड । ५८ पाछे चलिये गढ़माड़ो को जामें काम सिद्ध है जाय ॥ सम्मत कैकै पाँचो योगी ड्योढ़ी उपर पहुंचे आय ६२ रानी द्यावलि के द्वारेपर योगिन अलख जगायोजाय॥ बाँदी दौरीं तब महलन ते द्वारे तुरत पहुंचीं आय ६३ देखि तमाशा यहु द्वारेपर महलन अटीं तड़ाका धाय ॥ हाल बतायो सब योगिन का सोऊ गई द्वारपर आय ६४ रूप देखिकै सब योगिन को द्यावलि खुशी भई अधिकाय ॥ पूँछन लागी फिरि योगिन ते योगी सत्य देव बतलाय ६५ कौन देश ते तुम आयो है जावो कौन देश महराज ॥ जो कछु माँगो म्वरे महलन में पुरवों तौन तुम्हारो काज ६६ इतनी सुनिकै ऊदन बोले माता बचन करो ममकान ॥ धोखे योगी के भूलो ना अपनोपुत्र मोहिं तू जान ६७ सुनिकै बातें ये ऊदन की द्यावलि बड़ी खुशी है जाय ॥ हृदय लगायो सब लरिकनको आशिर्वाद दीन हर्षाय ६८ ऊदन बोले फिरि माता ते हमरे बचन करो परमान ॥ ड्योढ़ी माँगिहौं रनिकुशलाकी नापहिचनी करिंगा ज्वान ६६ धरि दे पंजा म्वरि पीठि मा माड़ो लेउँ बापका दायँ ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की द्यावलि गोदलीन बैठाय १०० भुजबल पूज्यो सब लरिकनके द्यावलि बार बार बलिजाय ॥ जितिहौ राजा माड़ोवाला तुम्हरो वारु न बांका जाय १०१ सुनिकै बातें सब द्यावलि की चारों धरयो चरणपर माथ ॥ बड़ी अनन्दित द्यावलि द्वैकै फेरा सबन पीठि पर हाथ १०२ विदा मांगिकै सब माताओं मनिया देवन गे हर्षाय ॥ बड़ा प्रतापी जो मोहवेमाँ अस्तुति पढ़न लाग शिरनाय १०३
माड़ोका युद्ध । ५६ ११ सवैया ॥ जय जय देव मनावत तोहिं औ ध्यावतहउँ मैं गरीवनिवाजा । बदला पितुकोज्यहिभांति मिलै सोकरो बिभुदेवनहोय अकाजा ॥ भक्ततुम्हार उदयसिंह ठाढ़ सो आयसु काह मिलय महराजा । यहिभांति अनेकनबारकह्योशिरनायरह्यो ललितेनिजकाजा १०४ अस्तुति कीन्ह्यो मलखाने ने देबा ज्वरे खड़ा दोउहाथ ॥ पूजा कीन्ह्यो भल आल्हाने पाछे धरा चरणपर माथ १०५ मन्दिर बाहर सैयद ठाढ़ो सोऊ ध्यायरहा मनमांझ ॥ चरि चरि गौवें घरका डगरीं औ द्वैगई तहांपर सांझ १०६ उड़ि उड़ि पक्षी गये बसेरन नखतन कीन तहाँ उजियार ॥ पूजाकरिकै सब बिधिवतसों तहँते चलत भये सरदार १०७ जायकै पहुंचे निज महलन में नयनन गई नींद अतिछाय ॥ मलखे देबा आल्हा ऊदन सोये रामचन्द्र को ध्याय १०८ सैयद सुमिरयो बिसमिल्ला को नाहर बनरस का सरदार ॥ बिकट निशाकी ये बातें हैं ज्वानो मानो कही हमार १०६ योगी जागैं सब आनंद सों चोरन बड़ी खुशी भै आय ॥ माथ नवावों श्रीगणेश को औ रट राम राम मनलाय ११० दोउ पद बन्दौं पितु अपने के जिन मोहिं विद्या दीनपढ़ाय ॥ स्वर्ग में बैठे सो सुख भोगैं सेवक कहै नित्त यशगाय १११ सब अभिलाषा पूरी हैगै आशा रही राम के पाँय ॥ आगे फौजें मोहबे सजिहैं माड़ो जई बनाफरराय ११२ इतिश्री लखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशी नवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागनारायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गत पँडरीकलां निवासि मिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशंकरसूनु पं०ललिताप्रसादकृत ऊदनमातासंवादेप्रथमस्तरङ्गः १ ॥
१२ आल्हखण्ड । ६० सवैया ॥ तव पद प्रेम बढ़ायों नितै अब जावों कहाँ मोहिं देहु बताई । सूझत और न ठौर कहूं तजिकै तव चरणन की सेवकाई ॥ भाई औ बन्धु सहाई कोऊ नहिं देखि परो तुमहीं रघुराई । ललिते अबआशनिराशकरै क्यों भूलिगयों प्रभुकी प्रभुताई १ सुमिरन ॥ रामको ध्यावों औलछिमनको बेटा अंजनि को हनुमान ॥ वालि के अंगद तुमका ध्यावों लंका किह्यो घोर घमसान १ मान न राख्योक्यहुंनिशचरको रोप्यो पैर सभा में जाय ॥ मेघनाद सम कोटिन योध तुमहरो पैर न सके हिलाय २ दानिन ध्यावों बलि हरिचन्दै कुंतीपुत्र करण सरदार ॥ इन्द्रहुआये ज्यहि द्वारे में औ यश सुनिकै परमउदार ३ अब मैं ध्यावों सुत गंगा को भीषम जौन शूर सरदार ॥ टारि प्रतिज्ञा दीन कृष्णकी करिकै बड़ी भयंकर मार ४ कहौं सपूती शिरीकृष्ण की जिन गोबर्द्धन लीन उठाय ॥ सात दिनोंलौं मेघा बरसे झम २ हहरि २ हहराय ५ बई कँगुलियांपर गिरिधारे ठाढ़े रहे कृष्ण महराज ॥ लाज रखैया सोइ स्वामी हैं हमपर कृपाकरैं ब्रजराज ६ छूटि सुमिरनी गय देवन कै शाकासुनो शूरमन क्यार ॥ ऊदन जैहैं गढ़माड़ो को हैहैं फौज सबै तय्यार ७ अथ कथाप्रसंग ॥ मुर्गा बोले सब गांवन में पक्षी जागिपरे त्यहि काल ॥ शब्द चहचहा बोलन लागे जागा मोहबे का नरपाल १ आल्हा ऊदन मलखे देवा जागा बनरस का सरदार ॥
मांडोका युद्ध । ६१ १३ सय्यद सुमिरखो बिसमिल्ला को मलखे सुमिरख्यो नन्दकुमार २ बिंध्यबासिनी आल्हासुमिरख्यो देबा रह्यो रामपद ध्याय ॥ देवी शारदा मइहरवाली सुमिरनलाग लहुरवाभाय ३ चरण शरण में हम तुम्हरी हैं दाया करो शारदामाय ॥ जीति कै अइहौं जो माड़ो ते सोने छत्र चढ़ैहौं आय ४ लज्जा राख्यो ओ महरानी मैं हौं सदा तुम्हारो दास ॥ नहीं भरोसा निज भुजबलका केवल एक तुम्हारी आस ५ ध्याय शारदा को ऊदन फिरि दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ किह्यो दण्डवत महरानी की जो गाढ़े मा होयँ सहाय ६ ऊदन बोल्यो फिरि आल्हा सों दादा मानौ कही हमार ॥ क्षण क्षण बीतै जो मोहबे मा सो हम जानैं वर्ष हजार ७ जल्दी चलिये राजभवन में जहँ पै बैठि रजापरिमाल ॥ बिदा मांगिकै महाराजा सों दादा चलन चही ततकाल = सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा लीन ढाल तलवार ॥ उठिकै ठाढ़े भे जल्दी सों सँगमें बनरसका सरदार ६ सभामें पहुँचे परिमालिक की पाँचो ठाढ़ भये शिरनाय ॥ बोले आल्हा सों परिमालिक काहे खड़े बनाफरराय १० सुनिकै बातें परिमालिक की आल्हा कही हकीकत गाय ॥ भई लहुरवा यहु बिगराहै माड़ो लेई बापका दाँय ११ सुनिकै बातें ये आल्हा की राजा गयो सनाकाखाय ॥ बोलि न आवा परिमालिकसे मुँहका बिरा गयो कुम्हिलाय १२ बड़ी उदासी मुखपर छाई शिरसों गिरा छत्र भहराय ॥ सोचनलाग्योपरिमालिकफिरि मन ना कछू ठीक ठहराय १३ बहुतसोचिकैपरिमालिक फिरि बोल्यो सुनो उदयसिंहराय ॥
१४ आल्हाखण्ड । ६२ उमर तुम्हारी बहु थोरी है ताते धरा धीर ना जाय १४ जालिम राजा माड़ोवाला ऊदन मानो कही हमार ॥ धुआँ न दीख्यो तुम तोपनका नहिंरणनांगिदीख तलवार १५ पटा बनेठी बाना गदका सीखो रोज बनाफरराय ॥ जो जी चाहै सो तुम खावो कुश्ती लड़ो अखाड़े जाय १६ पै नहिं जावो तुम माड़ो को बेटा म्वरे उदयसिंहराय ॥ सुनिकै बातैं परिमालिक की बोला तुरत बनाफरराय १७ बरा बरस का क्षत्री लरिका रणमा गहै नहीं तलवार ॥ लालति त्यहिके फिरि जीवैका पैदा होवेका धिकार १८ बारह बरसके कृष्णचन्द्र रहें मथुरा कंस पछारयो जाय ॥ कालयमन औ जरासन्ध फिरि तिनपर कीन चढ़ाई आय १६ मोहरा मारा तिन दुष्टनका यह नित कहैं विप्र सब गाय ॥ मोहिं भरोसा शिरीकृष्ण का तिन बल लेउँ बापका दाँय २० सुनिकै बातैं ये ऊदन की तब मन जानिलीन परिमाल ॥ कहा हमारो यहु मानी ना नाहर देशराज का लाल २१ यहै सोचिकै परिमालिक ने घोड़ा पांच लीन मँगवाय ॥ लीन कबुतरी को मलखाने बेंदुल लीन उदयसिंहराय २२ घोड़ करिलिया आल्हा लीन्ह्यो सिरगा बनरस का सरदार ॥ लीन गनोहर फिर घोड़े को यहु भीषम का राजकुमार २३ जूझक कङ्कण सवालाख का ऊदने हाथ दीन पहिराय ॥ आशिप दीन्ह्यो परिमालिक ने माड़ो लेउ बाप का दाँय २४ जितनी फौजैं म्वरे मोहबे मा सबियाँ बेगि लेउ सजवाय ॥ जावो माड़ो में पांचों मिलि मारो जाय करिंगाराय २५ सुनिकै बातैं परिमालिक की पांचों चलत भये शिरनाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६३ १५ मल्हना रानी के महलन में तुरतै गये बनाफरराय २६ हाथ जोरि औ बिनती कैकै बोला बचन उदयसिंहराय ॥ जावैं माता हम माड़ो को आयसु आपु देउ फरमाय २७ मोहिं आज्ञा महराजा की माया आपु देउ बिसराय ॥ दाया करिकै म्वरे बालक पर माता हुकुम देउ फरमाय २८ सुनिकै बातें ये ऊदन की रानी गई सनाकाखाय ॥ काह विधाता की मरजी है ऐसो कहै लहुरखा भाय २९ यहै सोचिकै मन अपने मा औ सूर्यनको शीश नवाय ॥ मल्हना बोली बघऊदन ते हमरे सुनो बनाफरराय ३० बिटिया बनियां की आहिन ना जो रण सुनिकै जायँ डेराय ॥ जौनि आज्ञा महराजा की आयसु स्वई बनाफरराय ३१ सवैया ॥ जावहु पूत लड़व गढ़ माड़व आवो जीति यही हम चाहैं। सिंहिनि मातु नहीं मन सोच सदा यह वेद पुराणहु काहैं ॥ धर्म कि मारग जेई चलैं सुख तेई सदा जग में निरबाहैं। बाप तुम्हार हन्यो करिया ललिते त्यहि मारो तबै सुखलाहैं ३२ बातें सुनिकै ये मल्हना की बोले तुरत बनाफरराय ॥ आठ महीना की मुहलत दे नवयें चरण पूजिहौं आय ३३ वादा सुनिकै बघऊदन का मल्हना बिदा कीन हर्षाय ॥ पाँचो चलिभे फिरि महलन ते औ लश्कर में पहुँचे आय ३४ तुरत नगड़ची को बुलवायो सय्यद बनरस का सरदार ॥ बजै नगाड़ा अब मोहबे मा सबियाँ फौज होय तय्यार ३५ हुकुम पायकै सो ताल्हन को दौड़त चला नगड़ची जाय ॥
१६ आल्हखण्ड । ६४ धर्यो नगाड़ा फिरि सँड़ियापर भादों मेघ अस हहराय ३६ बोलि दरोगा घोड़े वाला चांदी कड़ा दीन डरवाय ॥ हुकुम लगायो बघऊदन ने सबियाँ घोड़ सवाँरो जाय ३७ बूढ़ो दुर्बल रोगी घोड़ा एको नहीं किह्यो तय्यार ॥ कच्छी मच्छी ताजी तुरकी हरियलमुश्की घोड़अपार ३८ लक्खा गर्रा पँचकल्यानी सुर्खा सुरँगा रंग विरङ्ग ॥ देर लगावो अब तनको ना घोड़ेनजायकसो सब तङ्ग ३६ सुनिकै बातैं बघऊदन की दौरत चला दरोगा जाय ॥ जितने घोड़ा घोड़शारे माँ सबिसँवेगि लीन कसवाय ४० हथी महावत हाथी लैके तिनका करन लाग तैयार ॥ अंगद पंगद मकुना भौंरा छोटे पर्वत के अनुहार ४१ मैनकुंज मलिया धौरागिरि औ भौंरागिरि दीन विछाय ॥ धरिकै सीढ़ी सांखो वाली हाथी सजैं महावत धाय ४२ डारि बिछौना मखमल वाले ऊपर हौदा दीन धराय ॥ हिरा बिराजैं अम्बारेन में शोभा कही बूत ना जाय ४३ बारह कलशा सोने वाले हौदा ऊपर करैं बहार ॥ यक यक हाथी के हौदा पर दुइ दुइ शूर भये असवार ४४ बोलि दरोगा तोपन वाला रुपिया मुहरैं दई इनाम ॥ बड़ि बड़ि तोपैं जल्दी साजो जासों होय हमारो काम ४५ सुनिकै बातैं मलखाने की दौरत चला दरोगा जाय ॥ कुवाँ सुखावनि गर्भ गिरावनि चर्खी ऊपर दीन चढ़वाय ४६ सूर्य्य लपकानि चन्दझपकनि बिजुली तड़पनि लीन मँगाय ॥ मेघगरज्जनि अष्टधातु की गोला एक मना को खाय ४७ तोप संकटा औ लछिमिनियाँ भैरौं तोप लीन मँगवाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६५ १७ पहिया दुरकैं तिन तोपन के धसकतिचलीं रसातल जायँ ४८ को गति बरणै तिन तोपनकै कायर देखि देखि सकुचायँ ॥ शूर सिपाही ईजति वाले मनमाँ बड़े खुशी द्वैजायँ ४९ ऊदन बोले तब लश्कर में हमरे सुनो सिपाही भाय ॥ जिन्हें पियारी हों घरतिरिया दोहरी तलब लेयँ घरजायँ ५० जिन्हें पियारा हो रणलोहा जूझै चलैं हमारे साथ ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की क्षत्रिन नाय रामको माथ ५१ हाथ जोरिकै सब बोलतभे मानो कही बनाफरराय ॥ पाँउँ पछारी को डारै ना बहुतनधजीधजीउड़िजाय ५२ सुनिकै बातें रजपूतन की बोला द्यावलि क्यार कुमार ॥ स्याबसि स्याबसि ओ रजपूतो कलियुग रखिहौ धर्महमार ५३ भीलमबखतरपहिरि सिपाहिन हाथ में लीन ढाल तलवार ॥ रणकी मौहरि बाजन लागी रणका होनलाग ब्यवहार ५४ ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार ॥ चढ़ा कबूतरी पर मलखाने ऊदन बेंबुलपर असवार ५५ घोड़ करिलिया आल्हा बैठे सिरगा बनरस का सरदार ॥ बैठ मनोहरा की पीठीपर देवा भीषम केर कुमार ५६ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥ तिसर नगाड़ाके बाजत खन लश्करचलिभासाठिहजार ५७ आगे आगे तोपैं चलिभैं पाछे चले मस्त गजराज ॥ घंटा बाजैं गर हाथिन के मानो कोपकीन सुरराज ५८ खर खर खर खर कै रथ दौरैं चह चह धुरी रहीं चिल्लाय ॥ चला रिसाला घोड़नवाला ताकी शोभा कही नाजाय ५६ सत्रह दिनकी मैजलि करिकै माड़ो धुरा दवायनि जाय ॥ ५