भारतकोश
संग्रह पर लौटें

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

१२ आल्हखण्ड । ५५४ कारी अलकैं नागिन झलकैं पलकैं मूँदै औ रहिजाय ११७ ब्यला भवानी बनि महरानी पलकी चढ़ी तड़ाका धाय ॥ चलिमै पलकी फिरि बेलाकैकै लाखनिपास पहुँची आय ११८ लैकै पलकी लाखनि राना तुरतै कूच दीन करवाय ॥ सय्यद देवा धनुवाँ लैकै पहुँचा आय बनाफरराय ११९ मठी शारदा की डांड़े पर डोला तहाँ दीन धरवाय ॥ बेला पहुँची तहँ मठिया मा पूजन हेतु शारदामाय १२० चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों बेला पूज्यो मोद बढ़ाय ॥ धूप दीप दी तहँ देवी की मेवा मिश्री भोग लगाय १२१ फुलवा मालिनि ते फिरि बोली ताहर खबरि जनावो जाय ॥ बहिनि तुम्हारी के डोला को लीन्हे जाय कनौजीराय १२२ बदला लैहैं संयोगिनि का तुम्हरे जीनेका धिक्कार ॥ जल्दी आवो अब मारग में डोला रोंकि लेउ यहिवार १२३ मालिनि चलिमै तब मठिया ते दिल्ली अटी तड़ाका धाय ॥ खबरि सुनाई सब ताहर को दोऊ हाथजोरिशिरनाय १२४ सुनिकै बातैं त्यहि मालिनि की ताहर फौज लीन सजवाय ॥ बाजत डंका अहर्तका के - तुरतै कूच दीन करवाय १२५ यहु निरशंका दिल्लीवाला ताहर अटा तड़ाका आय ॥ औ ललकारा लखराना को ठाढ़े होउ कनौजीराय १२६ धरिकै डोला अब बेला का तुरतै कूच देउ करवाय ॥ नहीतो बचिहौना कनउज लग जोविधि आप बचावैआय १२७ भूरी हथिनी के ऊपर ते लाखनि गरु दीन ललकार ॥ मर्द सराहों मैं ताहर को डोला पास आउ सरदार १२८ बेला मिलिहैं अब ब्रह्मा को ताहर कूच जाउ करवाय ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५५ . ९३

ब्याह बनाफर ऊदन कीन्ह्यो लाखनिबिदालीनकरवाय१२६ काह हकीकति है ताहर कै डोला पास जाय नगच्याय ॥ जितने सँगमा तुम लै आये सब के मूड़ लेउँ कटवाय१३० तौ तौ लरिका रतीभान का नहिं ई मुच्छ डरों मुड़वाय ॥ जीवन चाहौ ताहर नाहर तौ अब कूच जाउकरवाय१३१ सुनिकै बातें ये लाखनि की ताहर बोले बचन सुनाय ॥ मारो मारो ओ रजपूतो डोला लेवो तुरत छिनाय १३२ सुनिकै बातें ये ताहर की तुरतै चलन लागि तलवार ॥ एक सहस दल पैदल सेना दुइशतबीससाथअसवार १३३ अभिरै क्षत्री अरझारा सों बाजै छपक छपक तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकीधार १३४ को गति बरणै तहँ ताहर कै नाहर दिल्ली का सरदार ॥ पैदल सेना धुनकत आवै मारत अवै घोड़ असवार १३५ यहु दलगंजन की पीठी मा सोहै दिल्ली का सरदार ॥ जहँ पर भूरी है लाखनि कै ताहर आयगयो त्यहिबार१३६ ऐंड़ लगायो दलगंजन के हौदा उपर पहूंचा जाय ॥ गुर्ज चलाई लाखनिराना मस्तक परी घोड़ेकेआय १३७ हटि दलगंजन तब दलतेगा बलते थहर थहर थर्राय ॥ जितनी सेना थी ताहर की तुरतै भागिचली भर्राय १३८ ताहर हटिगे जब मोर्चा ते लाखनि कूचदीन करवाय ॥ बाजत डंका अहलंका के निर्भयजात कनौजीराय १३६ बेला बोली तहँ ऊदन ते साँची कहौ बनाफरराय ॥ दायज दीन्ह्यों का महराजा हमते साँच देउ बतलाय १४० सुनिकै बातें ये बेला की कुण्डल तुरत दीन दिखलाय"

१४ | आल्हखण्ड । ५५६ देखि कीमती दोउ कुण्डल को बेला बड़ी खुशी ह्वैजाय १४१ चलै पालकी के संगै मा यहु रणबाघ लखुरवाभाय ॥ ताहर चलिभा राजमहल में जहँपर बैठ पिथौराराय १४२ खबरि सुनाई सब लाखनि की डोला जौन भांति लैजायँ ॥ सुनिकै बातें ये ताहर की तब जरिउठा पिथौराराय १४३ तुरत चौंड़िया को बुलवायो नाहर हुकुम दीन फरमाय ॥ लैकै फौजैं जल्दी जावो बेला डोला लेउ छिनाय १४४ जान न पावैं कनउज वाले सबके मूड़ लेउ कटवाय ॥ इतना सुनिकै चौंड़ा चलिभा डंकातुरत दीन बजवाय १४५ बाजत डंका अहतंका के चौंड़ा कूच दीन करवाय ॥ भा भटभेरा फिरि लाखनि ते दउदल गये बरोबरिआय १४६ भाला बरछी कड़ावीन की लागी होन भड़ोभड़ मार ॥ पैदल के सँग पैदल सेना औअसवारसाथअसवार १४७ सूंडि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन केरि ॥ हौदा हौदा यकमिल ह्वैगे मारैं एक एक को हेरि १४८ ना मुँह फेरैं दिल्ली वाले ना ई कनउज के सरदार ॥ तेगा चमकै बर्दवान का ऊनाचलैबिलाइतिक्यार १४६ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥ मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार १५० रुण्डन लैकै तलवारी को अद्भुत कीन तहाँपर मार ॥ बड़े लड़ैया दोऊ ठाकुर मानैं नहीं तहाँ कछुहार १५१ यहु यकदन्ता हाथी ऊपर चौंड़ा गरू देय ललकार ॥ भूरी हथिनी के ऊपर ते राजा कनउजका सरदार १५२ भा भटभेरा दउ शूरन ते दोऊ खैंचि लीन तलवार ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५७ १५ दोऊ मारैं तलवारी ते दोऊ लेयँ ढालपर वार १५३ कोऊ काहू ते कमती ना द्वउ रणपरा बरोबरि आय ॥ गुर्ज चलाई फिरि चौंड़ा ने हौदा झुके कनौजीराय १५४ ताकिकै भाला लाखनि मारा हाथी मस्तक गयो समाय ॥ हाथी गिरिगा यकदनता तहँ पैदलभयो चौंडियाराय १५५ भागि सिपाही दिल्ली वाले अपने डारि डारि हथियार ॥ लैकै डोला आगे चलिभा लाखनिकनउजकासरदार १५६ गाहरिकारा फिरि दिल्ली मा जहँ पर भरीलाग दरबार ॥ ताहर धाँधू तहँ बैठे हैं अंगदनृपतिग्वालियरक्यार १५७ तहँ हरिकारा बोलन लाग्यो दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ जूझि ग हाथी इकदन्ता है लश्कर सबैगयो भराय १५८ डोला जावत है मोहबे को साँची खबरि दीने बतलाय ॥ सुनिकै बातैं हरिकारा की लश्करतुरतलीनसजवाय १५६ आदिसयङ्कर चढ़ि गज ऊपर तुरतै कूच दीन करवाय ॥ बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्दगा छाय १६० तुरही मुरही तहँ बाजत भइँ पुप्पू पुप्पू ध्वनी लगाय ॥ धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय १६१ को गनि बरणै त्यहि समयाकै हमरे बूत कही ना जाय ॥ पहिले मारुइ भइँ तोपन्ह की गोलाचलनलागिहहराय १६२ बड़ी दुर्दशा भइँ तोपन में तब फिरि मारुवन्द है्जाय ॥ मघा के बूँदन गोली बरषी क्षत्रीगये बहुत महराय १६३ तीर तमंचा भाला बरछी कोताखानी बर्छी कटार ॥ भा भटभेरा दल पैदल का घोड़नलड़ै घोड़असवार १६४ है दलगंजन के ऊपर मा ताहर पिरथी राजकुमार ॥

१६ आल्हाखण्ड । ५५८ घोड़ बेंदुला की पीठौ मा ठाकुर उदयसिंह सरदार १६५ मोर्चाबन्दी भै दूनों मा दूनों लड़ैलागि त्याहिकाल ॥ अभिरै क्षत्री अरझारा सों भिड़िगैतहाँ ढाल में ढाल १६६ धाँधू धनुवाँ का मोर्चा भा सय्यदनृपतिग्वालियरक्यार ॥ को गति बरणै रजपूतन कै मारैं दऊ हाथ तलवार १६७ जैसे भेड़िन भेड़हा बैठै जैसे अहिर विडारै गाय ॥ तैसे मारै ताहर नाहर शूरन दीन्ह्यो समर वराय १६८ धाँधू धमकै तहँ तेगा को चमकै चमाचम्म तलवार ॥ अली अली कहि सय्यद दौरै रणमाहोतजातगलियार १६६ बड़ा लड़ैया अंगद राजा गोरै ढूँढ़ि ढूँढ़ि सरदार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १७० सवैया ॥ करहत शूर गिरैं रणखेतन पूरि रही ध्वनि गारु अपारा । मत्त मतंग गिरैं भहराय सो हाय दयी यह होत पुकारा ॥ छूटत तीर सो पूरि रहे तन धूरि उड़ै नहिं कीच अपारा । मीच भई रणशूरन की ललिते मन कायर जात दरारा १७१ कायर भागि चले ललिते अकुलात महामन दुःख न छाये । मोद बढ़यो रणशूरन के बलपूरन के कछु दुःख न आये ॥ कूर कुपूत रहे रजपूत ते मूत भये रण नाम घराये ॥ पूत सपूत महामजबूत सो वूतलड़ै नहिं पाउँ डिगाये १७२ घड़ी लड़ाई भै मारग में पिरथी लाखनि के मैदान ॥ मारे मारे तलवारिन के गिरिगे बड़ेसुघरवाज्वान १७३ मान न रहिगे क्यहु क्षत्रिनके सब के छूटिगये अभिमान ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध। ५५६ ' १७ आदि भयङ्कर के ऊपर ते गरुई हाँक देय चौहान १७४ मारो मारो ओ रजपूतो डोला लेवो तुरत छिनाय ॥ जान न पावैं द्यावालिवाले इनके देवो मूड़ गिराय १७५ गरुई हाँकै सुनि पिरथी की जूझन लागि सिपाही ज्वान ॥ उड़ै बेंदुला बघऊदन का खाली होत जात मैदान १७६ धाँधू धनुवाँ के मुर्चा में बाजै घूमि घूमि तलवार ॥ अंगद राजा के मुर्चा मा सय्यद बनरसका सरदार १७७ औरो क्षत्री समरभूमि मा दूनों हाथ करैं तलवार ॥ को गति बरणै त्यहि समया कै अद्भुत होय तहाँपरमार १७८ पैग पैग पै पैदल गिरिगे दुइ दुइ कसी गिरे असवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १७६ सोहैं लहासैं तहँ हाथिन की छोटे पर्वत के अनुहार ॥ परी लहासैं जो घोड़न की तिनकोजानों नदीकगार १८० मुण्डन केरे मुड़चौड़ा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥ डोला सौंप्यो फिरि धनुवाँको चलिभाकनउजकासरदार१८१ जौनी दिशिको लाखनि जावैं तादिशि होय घोरघमसान ॥ बड़े लड़ैया दिल्ली वाले ताहर समरधनी चौहान १८२ हनि हनि मारैं रजपूतन का घायल होयँ अनेकनज्वान ॥ मान न रहिगा क्यहु क्षत्रीका सब के टूटिगये अरमान १८३ फूटि फूटि शिर चूरण ह्वै गे पूरण भयो समर मैदान ॥ कहँलग गाथा त्यहि समयाकै ललिते करैयहांपर गान १८४ सो भल जानतहैं नीकी बिधि जो यह दीख्यो युद्ध ललाम ॥ सम्मुख जूझैं जे मुर्चा में ते सब जायँ रामके धाम १८५ यही तपस्याहै क्षत्री कै सम्मुख लड़ै समर मैदान ॥

१८ आल्हखण्ड । ५६० तन धन अप्पैं समरभूमि मा पावै सदा जगत में मान १८६ सज्जन मानै के भूखे हैं दुर्जन सहैं सदा अपमान ॥ मान न पावै नरदेही मा जीवतजानोश्वान निदान१८७ मान के भूखे लाखनिराना ठाना कठिन तहाँ संग्राम ॥ जौनौदिशि को लाखनिजावैं तादिशिहोतजातहंगाम १८८ लाखनिराना के मारुन मा आरी भये सिपाही ज्वान ॥ कायर भागे समरभूमि ते शूरन कीनघोरघमसान १८६ यहु महाराजा कनउजवाला मारत चला अगारी जाय ॥ आदिभयङ्कर जहाँ हाथी पर सोहत बैठि पिथौरा राय १६० तहँ कनउजिया कनउजवाला आला अटा तड़ाका जाय ॥ आदिभयङ्कर ते ललकारा यहु महराज पिथौरा राय १६१ लाखनि पगिया ना अटकीहै रण मा प्राण गँवावो आय ॥ प्यारे बेटा तुम ताहर सम मानो कही कन्नौजी राय १६२ निमक चँदेले का इन खावा दूनों भाय बनाफरराय ॥ ये मरिजावैं सँग डोला के उनकेनमक अदाहैजायँ १६३ तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है अनहक प्राण गँवावो आय ॥ बारह रानिन में इकलौता यहहमसुनाकन्नौजीराय १६४ त्यहिते तुमका समुझाइत हैं चुप्पै कूच जाउ करवाय ॥ इतना सुनिकै लाखनि बोले साँची सुनौ पिथौरा राय १६५ तीनि महीना औ त्यारादिन ' ऊदन कठिन कीन तलवार ॥ लै कै पैसा सब गाँजर का पठवा कनउज के दरबार १६६ गंगा कीन्हीं हम ऊदन ते देवे साथ बनाफरराय ॥ हमें मुनासिब यह नाहीं है जोअबकूचजायँ करवाय १६७ करब प्रतिज्ञा अब हम पूरी लड़िबे खूब पिथौराराय ॥

Here is the line-by-line transcription of the provided page:

बेलाकेगौनेका द्वितीययुद्ध । ५६१ १६ पाँव पिछारी का धरिबे ना बहुतन धजी २ उड़िजाय १६८ पता लगावै हौँ लाखनि का आल्हा केर लहुरवा भाय ॥ मारत मारत रजपूतन को पहुँचा जहाँ पिथौराराय १६६. तीर कमनिया लै हाथे मा मारन हेतु भयो तैयार ॥ तब ललकारा नर नाहर यहु ठाकुर उदयसिंह सरदार २०० तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है राजा समरधनी चौहान ॥ नहीं बराबरीके लखराना जोतुम लीन्ही तीर कमान २०१ सुनिकै बातें बचऊदन की कायल भये बीर चौहान ॥ चुप्पै हौदा पर रख दीनी राजा अपनी तीर कमान २०२ यहु दलगंजन की पीठी मा ताहर आय गयो त्यहिबार ॥ भये कनौजी त्यहिके सम्मुख लागे करन तहाँ पर मार २०३ ऊदन अंगद का मुर्चा भा दोऊ लड़न लागि सरदार ॥ दोऊ मारैं तलवारी सों दोऊ लेयँ ढाल पर वार २०४ तब ललकार्यो फिरि धाँधू को यहु महराज पिथौराराय ॥ जाय न डोला अब मोहबे का लावो जाय तड़ाकाधाय २०५ इतना सुनिकै धाँधू चलिभे डोला पास पहुँचे जाय ॥ तब ललकारा तहँ धनुवाँने क्षत्री खबरदार है जाय २०६ पाँव अगाड़ी का डोरेना नहिं यमपुरी देउँ दिखवाय ॥ कहा न माना कछु धनुवाँका धाँधू चला तड़ाका धाय २०७ तेलिके बच्चा कब्बा खैहौँ लुच्चा ठाढ़ होय यहिवार ॥ सच्चा लड़का जो क्षत्रीका तौ मुखघाँसिदेउँ तलवार २०८ इतना कहिकै धांधू क्षत्री अँगुरिन भालालीन उठाय ॥ ताकि कै मारा सो धनुवाँ का परिगा घाव जाँघ पर आय २०६ गिरिगा धनुवाँ जब खेतन मा डोला तुरत लीन उठवाय ॥ ३६

२० आल्हखण्ड । ५६२ डोला उठिगा जब बेला का सय्यदगयो तड़ाका आय २१० औ ललकारा त्यहि धाँधू का अब ना धस्यो अगारी पाँय ॥ जान न पैहौ तुम सय्यद ते क्षत्री साँच दीन बतलाय २११ इतना सुनिकै अंगद राजा तहँ पर गयो तड़ाका आय ॥ भूरी हथिनी के चढ़वैया आये तहाँ कनौजीराय २१२ ताहर नाहर दलगंजन पर सोऊ बेगि पहुँचा आय ॥ कठिन लड़ाई भै डोलों पर हमरे बूत कही ना जाय २१३ को गति बरणै त्यहि समयाकै बाजै घूमि घूमि तलवार ॥ सुनिसुनि गाजैं रजपूतन की कायर डारिभागि हथियार २१४ को गति बरणै रण शूरनकी दूनों हाथ करें तलवार ॥ कीरति प्यारी जिन क्षत्रिन को तिनको भलाकरैं करतार २१५ कीरति वाले लाखनि ताहर ठाना घोर शोर घमसान ॥ यहु महराजा कनउज वाला लीन्ही गुर्ज तड़ाकातान २१६ ऐंचिकै मारा सो ताहर के मस्तक परी घोड़के जाय ॥ घोड़ा भाग्यो तहँ ताहर का डोला लीन कनौजीराय २१७ बिना नृपति के सब सेना तहँ रणमा कौन भांति समुहाय ॥ बिन बर कन्या ज्यों मड़ये मा भौंरी कौन करावन जाय २१८ दुलहिन दुलहा की समता मा ममता कौन खवैया भान ॥ मिलै रुपैया बरतौनी ना तबलग देखिपरे तहँ लात २१६ तैसे मुर्चा की बातें हैं यारो जानिलेउ सब घात ॥ घोड़ा भाग्यो जब ताहर का लाग्योनहीं क्यहूकी लात २२० डोला चलिभा तब बेला का जहँ पर रहै चँदेलाराय ॥ ब्रह्मा ठाकुर के तम्बू मा द्वैगै भीरभार अधिकाय २२१ बाजे डङ्का अहतङ्का के शङ्का सबन दीन बिसराय ॥

बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५६३ २१ देवा सय्यद ऊदन लाखनि सबको मिलाचँदेलाराय २२२ मिला भेंट करि सब काहुन सों तम्बू बैठिगये सब आय ॥ कीन बड़ाई लखराना की तहँ पर खूब बनाफरराय २२३ सच्ची बातें उदयसिंह की नहिंकहुँ लसरफसर ब्यवहार ॥ बड़ा प्रतापी रण मण्डल मा ठाकुर उदयसिंह सरदार २२४ पाग बैंजनी शिरपर सोहै टिहुनन धरी ढाल तलवार ॥ चढ़ा उतारू भुजदण्डै हैं आनन पङ्कजकेअनुहार २२५ सत्य बड़ाई की लाखनि की भे सब खुशी तहाँ सरदार ॥ जा बिधि चलिकै सब मोहबे ते पहुँचे दिल्ली के दरबार २२६ कीनि नौकरी ज्यहि प्रकार ते कुण्डल जौन भांतिसों लीन ॥ सो सब गाथा तहँ ब्रह्मा ते ठाकुरउदयसिंहकहिदीन २२७ खेत छूटिगा दिननायक सों झण्डा गड़ा निशाको आय ॥ तारागण सब चमकन लागे सन्तन धुनी दीनपरचाय २२८ राम राम की मन रटलाये लीन्ह्यनि अंग बिभूति रमाय ॥ डारि बघम्बर या मृगछाला आला परब्रह्म को ध्याय २२६ तपनि मिटाई सब देही की रघुबर नाम औषधी पाय ॥ यह सुखदायी सब संतन को या बलदेवैं निशाबिताय २३० जब लग रैहै संजीवनि यह तबलम धर्मध्वजा फहराय ॥ माथ नवावों पितु माता को जिनबलगाथगयोंसबगाय२३१ आशीर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनारायण भाय ॥ हुकुम तुम्हारो जो पावत ना ललितेकहतकौनविधिगाय२३२ रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर २३३ विपति निवारण जगतारण के दूनों धरौं चरणपर माथ ॥

२२ आल्हाखण्ड । ५६४ बैलारानी के गौने की पूरण भई दूसरी गाथ २३४ पूरि तरंग यहाँ सों द्वैगे तव पद सुमिरि भवानीकन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छायही मोरि भगवन्त २३५ इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलानिवासि मिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत बेलागमन द्वितीययुद्धवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ बेलागमनद्वितीययुद्धसमाप्त ॥ इति ॥

अथ आल्हखण्ड ॥ बेलाऔरताहरकायुद्धवर्णन ॥ सवैया ॥ मैं बृषभान लली बिनवों सो अली सँग कुंजन जातनितय । गावत बेनु बजावत आवत मोहनलालहु नित्त तितय ॥ श्यामह श्याम भये ज्यहि ठौर सो और बखानकरै को कितय । गावत गीत सबै ललिते ज्यहि आवत जौन जहाँलों जितय १ सुमिरन ॥ राधा रानी ठकुरानी के दूनों धरौं चरण पर माथ ॥ मोहिं भरोसा अब तेरो है स्वामिनि पूरिकरो यह गाथ १ कण्ठ में बैठै तुम कण्ठेश्वरि भुज बल बैठिजाय हनुमान ॥ बैठि सरस्वति जा जिह्वामा भूले अक्षर करों बखान २ झाँग भवानी महरानी के बन्दन करों जोरि दोउ हाथ ॥ झाँग न होती जो दुनिया मा ललिते कौन देत तब साथ ३

२ आल्हखण्ड । ५६६ चढ़ै तरंगै जब भांगन की आँगन देखि परै सुरलोक ॥ दुख नहिं ब्यापै कछु देहीमा मनके छूटिजात सब शोक ४ भाँग घोटिकै नित प्रति पीवै जीवै वर्ष एक शत एक ॥ हर को ध्यावै तब सुखपावै पूरी होय तबै यह टेक ५ छूटि सुमिरनी गै देवन कै शाखा सुनो शूरमन क्यार ॥ बेला काटी शिर ताहर का सोई गाथ कहौं विस्तार ६ अथ कथाप्रसंग ॥ जहाँ चँदेले ब्रह्मा ठाकुर बेला गई तहाँ पर धाय ॥ बैठी पलँगा कर पंखालै लागी करन पवन सुखदाय १ ज्वरि २ बहियां हरि २ चुरियाँ शोभा कही बूत ना जाय ॥ शची मेनका की गिन्ती मा बेला रूप राशि अधिकाय २ यहु अलवेला ब्रह्मा ठाकुर बेलै बोला वचन सुनाय ॥ टरिजा टरिजा री आँखिनते दीखे गात सबै जरिजायँ ३ घटिहा राजा की कन्या ते कासुखहोय मोहिंअधिकाय ॥ इतना सुनिकै बेला बोली दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४ तुम्हें मुनासिब यह नाहीं है जैसी कहौ चँदेलेराय ॥ राज कुटुँब सब अपनो तजिकै आइन चरण शरणमें धाय ५ सुनि सुनि बातैं अब प्रीतमकी छाती घाव होत अधिकाय ॥ परवश कन्या की गति जैसी तैसी रही चँदेलेराय ६ ऐसी तुमको अब चहिये ना जैसी सूखी रहे सुनाय ॥ सुरपुर अहिपुर नरपुर माहीं प्रीतम कौन मोर अधिकाय ७ प्यारे प्रीतम इक तुम्हीं हैं। साँचो साँच दीन बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये बेला की बोला फेरि चँदेलाराय ८ मूड़ काटिकै अब ताहरका प्यारी मोहिं देउ दिखलाय ॥

बेलाताहरकामैदान । ५६७ ३ घाव करेजे का तब पूरे औ सुख सम्पति मोहिं सुहाय ६ इतना सुनिकै बेला बोली स्वामी बचन करो परमान ॥ कपड़ा घोड़ा दै कोड़ा निज पठवो मोहिं समर मैदान १० एक लालसा पै डोलति है स्वामी पूरिकरो यहि काल ॥ नगर महोबा मोहिं पठवावो दर्शन करों सासुके हाल ११ इतना सुनिकै ब्रह्मा बोले जावो साथ लहुरवाभाय ॥ बेला बोली तब स्वामी ते यहनहिंउचितमोहिंदिखलाय १२ ब्रह्मा बोले फिरि लाखनि ते तुमहीं जाउ कनौजीराय ॥ बेला बोली फिरि स्वामी ते यहनहिंउचितमोहिंदिखलाय १३ बदला लैहैं संयोगिनि का रखिहैं मोहिं कनौजे जाय ॥ दुई हँसौवा दुहुँ तरफा का प्रीतम करिहौ कौन उपाय १४ ब्रह्मा बोले फिरि आल्हा ते तुम चलिजाउ बनाफरराय ॥ यह मन भाई तब बेला के पलकी चढ़ी तड़ाकाधाय १५ चढ़ि पचशब्दा हाथी ऊपर अल्हा ठाकुर भये तयार ॥ डोला चलिभा फिरि बेला का संगै चले बहुत असवार १६ यह गति देखी माहिल ठाकुर लिल्ही उपर भये असवार ॥ जहाँ पर बैठे पृथीराज हैं पहुँचा उरई का सरदार १७ बड़ी खातिरी राजा कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥ जो कछु गाथा थी तम्बू की माहिल यथानथ्य गा गाय १८ तब महराजा दिल्लीवाला चौंडे तुरत लीन बुलवाय ॥ खबरि सुनाई सब चौंड़ा को जो कछु माहिल दीन बताय १६ नार कँकरिहा पर तुम घेरो डोला लावो बेगि छिनाय ॥ हुकुम पायकै महराजा को फौजें तुरत लीन सजवाय २० चढ़ि इकदन्ता हाथी ऊपर चौंड़ा कूचदीन करवाय ॥

आल्हखण्ड । ५६८


बाजत डंका अहलंका के पहुँचा नार उपरसो आय २१ दीख्यो आल्हा को चौंडाने गरुई हाँक कहा गुहराय ॥ डोला धरिकै अब बेला का जावो लौटि बनाफरराय २२ हुकुम पिथौरा का याही है आल्हा साँच दीन बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये चौंड़ा की बोला फेरि बनाफरराय २३ डोला लौटनको नाहीं है चौंड़ा काह गये बौराय ॥ एक पिथौरा की गिन्ती ना लाखन चढ़ैं पिथौरा आय २४ नगर मोहोवे डोला जाई चौंड़ा साँच दीन बतलाय ॥ गा हरिकारा फिरि तहँना ते जहँना बैठ बनाफरराय २५ डोला घेरा है बेला का बोला हाथ जोरि शिरनाय ॥ इतना सुनिकै ऊदन ठाकुर तुरतै कूच दीन करवाय २६ जहँ पर फौजैं हैं चौंड़ा की पहुँचा तुरत लहुरवाभाय ॥ हाथ जोरिकै ऊदन बोले दादा कूच जाउ करवाय २७ इतना सुनिकै चौंड़ा बक्शी तुरतै हुकुम दीन फर्माय ॥ जान न पावैं मोहवे वाले सब के देवो मूड़गिराय २८ हुकुम चौंड़िया का पावतखन क्षत्रिन खैंचि लीन तलवार ॥ झुके सिपाही दुहुँ तरफा के लागी होन भड़ाभड़ मार २९ गोली ओला सम बरसी तहँ कोताखानी चलीं कटार ॥ भा खलभल्ला औ हल्ला अति जूझन लागि शूर सरदार ३० कटि कटि कल्ला गिरैं बछेड़ा घूमैं मूड़ बिना असवार ॥ खट खट खट खट तेगा बोलैं बोलैं छपक छपक तलवार ३१ झल् झल् झल् झल् झीलमझलकें नीलम रंग परै दिखलाय ॥ चम् चम् चम् चम् छूरीचमकैं कउँधालपकनिखङ्गदिखाय ३२ मर् मर् मर् मर् दालैंच्वालैं तेगा टन्र टन्र टन्राय ॥

बेलाताहरकामैदान । ५६६

सन् सन् सन् सन् गोली बरसें तीरन मन्न मन्न गा छाय ३३ धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय ॥ बड़ी खुशहाली रणशूरन के कायेर गये तहाँ सन्नाय ३४ कायर सोचत मन अपनेमा नाहक प्राण गँवाये आय ॥ माठा रोटी घरमा खाइत आपनि भैंसिचराइत जाय ३५ यह गति जानित जो पहिलेते काहे फँसित समर में आय ॥ नई बहुरिया घरमा बैठी कैसे धरा धीर उरजाय ३६ हाय रुपैया बैरी ह्वैगे हमरे गई प्राणपर आय ॥ को समुझाई घर दुलहिनिका देवी देवता रहे मनाय ३७ कायर बिनवैं मन सूरजते पश्चिम जाउ आज महराज ॥ तौ हम भागैं समरभूमि ते औ रहिजायजगतमें लाज ३८ शूर सिपाही ईजतिवाले दहिनी धरैं मुच्छ पर हाथ ॥ हनि हनि मारैं समरभूमि मा कटिकटिगिरैं चरणऔमाथ ३९ को गतिवरणै त्यहिसमया कै बाजै घूमि घूमि तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ४० मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥ घोड़ बेंदुला के ऊपर ते नाहर उदयसिंह सरदार ४१ फिरि फिरि मारै औ ललकारै बेटा देशराज का लाल ॥ गरुई हाँकैं सुनि ऊदन की कम्पित होयँ तहाँ नरपाल ४२ ऐंड़ लगावै रस बेंदुल के हौदा उपर पहुँचै जाय ॥ मारि महाउत को हनिडारै औ असवारै देय गिराय ४३ • यह गति दीख्यो जब ऊदन कै चौंड़ा हाथी दीन बढ़ाय ॥ औ ललकारा समरभूमि मा ठाढ़े होउ बनाफरराय ४४ गरुई हाँकैं सुनि चौंड़ा की ऊदन घोड़ा दीन उड़ाय ॥

६ आल्हखण्ड । ५७० भाला मारा इकइन्ताके भाग्यौ तुरत पछाराखाय ४५ खेत छूटिगा तब चौंड़ा ते आल्हा कूच दीन करवाय ॥ डोला पहुँचा बरइन पुरवा बेला बोली बैन सुनाय ४६ नगर मोहोबा का याही है 'साँची कहौ बनाफरराय ॥ नगर मोहोवे का पुरवा यह बेला रानी परै दिखाय ४७ खबरि पायकै सुखिया बारिनि तहँ पर गई तड़ाका आय ॥ संग सहेलिन को लैके सो परछन कीन तहाँपर जाय ४८ चलिभा डोला फिरि आगे को मालिनि पुरै पहुँचा आय ॥ खबरि पायकै फुलियामालिनि सोऊ चली तड़ाका धाय ४९- संग सहेलिन को लीन्हे सो डोला पास पहुँची आय ॥ कीनि आरती सो बेला की देखिकै रूप गई सन्नाय ५० हाय ! विधाता यह का कीन्ही सुरपुर पती दीन पठवाय ॥ इतना कहिकै फुलियामालिनि दाँते अँगुरी लीन चपाय ५१ सुनिकै बातैं ये फुलिया की बेला गयो क्रोध उरछाय ॥ हुकुम लगायो इक चाकर को जूतिन देवो मूड ठठाय ५२ हुकुम पायकै सो बेला को मारन लाग तड़ाका धाय ॥ आल्हा बोले तब बेला ते यहनहिंतुम्हहिंमुनासिवआय ५३ अवै न डोला गा मोहबे का रैयानि प्रथम रहिउ पिटवाय ॥ सुनिकै बातैं ये आल्हा की बेला तुरत दीन छुड़वाय ५४ मालिनि पुरवा ते डोला चलि पहुँचा नगर मोहोबे आय ॥ खबरि पायकै बारह रानी मल्हनामहलगई सबधाय ५५ द्यावलि सुनवाँ फुलवा मल्हना द्वारे सबै पहुँची आय ॥ कीन आरती तहँ बेला की सबहिनदुःख शोकविसराय ५६ संगै लैके फिरि बेला का महलन गई तड़ाका आय ॥

[Header] बेलाताहरकामौदान । ५७१ ७

भा अति मेला तहँ नारिन का शोभा कही वूत ना जाय ५७ मुहँ दिखलाई रानी मल्हना तहँपर दीन नौलखाहार ॥ पायँ लागिकै बेला रानी कङ्कण तुरतै दीन उतार ५८ भीर मेहरियन कै हटिगै जब अक्सर बहू रही त्यहिताँय ॥ मल्हना पूँछै तब बेला ते साँची साँच देय बतलाय ५६ बालम तुम्हरे अब कैसे हैं कहँ कहँ लगे अंग किनघाय ॥ इतना सुनिकै बेला बोली दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ६० बाईं दहिनी दूउ कोखिन मा लागीं सेल कटारी घाय ॥ गाँसी खटकति है मस्तक में मैया बिपति कही ना जाय ६१ वातैं सुनिकै ये बेला की मल्हना गिरी पछारखाय ॥ कथा पुराणन की वातैं बहु बेला कहा तहाँ समुझाय ६२ कथा सुनाई गंधारी की ज्यहि के मरे एकशत पूत ॥ कथा बताई यदुनन्दन की जहाँ मरिगये सबै रजपूत ६३ कथा बखानी रघुनन्दन की नृपपद छूटि मिला बनबास ॥ कही कहानी दशकन्धर की ज्यहिके भई वंशकी नाश ६४ बेला बानी सुनि रानी सब तुरतै शोक दीन बिसराय ॥ प्रसव वेदना ज्यहि पर बीती जीतीस्वईशोक अधिकाय ६५ बेला बोली चन्द्रावलि ते ननँदी साँच देयँ बतलाय ॥ भैया अपने को सतखण्डा ननँदी मोहिं देय दिखलाय ६६ इतना सुनिकै चन्द्रावलि तहँ गै सतखण्डा तुरत लिवाय ॥ को गति बरणै सतखण्डाकै साँचो इन्द्र धाम दिखलाय ६७ चँदन किंवरिया जहाँ लागी हैं खम्भन रत्न जटित को काम ॥ कैसो सम्भ्रम मन जो होवै बैठत लहै तहाँ विश्राम ६८ बेला पहुँची जब छज्जा पर पखिन भीर दीख अधिकाय ॥

[Header] ८ आल्हखण्ड । ५७२

कोकिल हंस मोर पारावत तीतर लवा सुवा सुखदाय ६९ शोभा देखत तहँ छज्जा की बेला बार बार पछिताय ॥ जीवत प्रीतम हमरे होते तौ सुखभोग होत अधिकाय ७० आज काल्ह दिन प्रीतम भेलैं ताते नरक सरिस दिखलाय ॥ हाय ! विधाताकी मरजी अस भारी विपति गई शिर आय ७१ प्रीतम प्यारे के सतखण्डा हम पर फाटि गिरो अरराय ॥ यह मन विनवत बेला रानी महलन गई तड़ाका आय ७२ बेला बोली फिरि मल्हनाते दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ मोरि लालसा यह डोलति है चन्दन वगिया देउ दिखाय ७३ सुनिकै बातें ये बेला की पालकी तुरत लीन मँगवाय ॥ बैठि पालकी महरानी सब चन्दन बाग पहुँचिं जाय ७४ पुष्पवाटिका तहँ राजत है छाजत सबै दिनन ऋतुराज ॥ बेला चमेली औ नेवारकी पंक्तीं रहीं एक दिशि छाज ७५ बिसुनकान्ता कहुँ कहुँ फूले कहुँ कहुँ फूले सुर्ख अनार ॥ श्वेत रक्त औ मधुर गुलाबी पाटल फूले भांति अपार ७६ फुली चांदनी श्वेत वरणहैं जिन पर केलि करत बहुभृंग ॥ को गति वरणै दुपहरिया कै ज्यहिको रक्तवरण है रंग ७७ श्वेत रक्त औ मधुर गुलाबी सब विधि फूलि रहा करवीर ॥ कदली केंवँड़ा यकदिशि राजत छूटत देखि मुनिनको धीर ७८ श्वेत रक्त तहँ चन्दन छाजैं राजैं कोकिल मोर चकोर ॥ पीव पपीहा की रट सुनिकै बिरहिनि पीर होय अतिघोर ७६ यह सुख सम्पति बेला लखिकै कीन्ह्यो घोर शोर चिग्घार ॥ जितनी रानी थीं वगिया में सबहिन छांड़िदीन डिंडकार ८० मोती ऐसे आँसू ढरकें बेला हृदय शोक गा छाय ॥

तब समुझावै मलहना रानी बहुवर शोक देउ बिसराय ८१ पारस पत्थर घर तुम्हरेमा बहुवर बैठिकरो तुम राज ॥ हुकुम तुम्हारो रैयति मानी द्वैहैं सबै धर्म के काज ८२ द्यावलि बोली फिरि बेला ते रानी बचन करो परमान ॥ धर्म सनातन को याही है राखै सासु श्वशुरको मान ८३ इतना सुनिकै बेला बोली यहु दुख दून तुम्हारो दीन ॥ घर बैठार्यो दोउ पुत्रन को मोहबा बंशनाश तुम कीन ८४ इतना सुनिकै द्यावलि बोली साँची मानो कही हमार ॥ यह सब करतब है माहिल कै जिनके चुगुलिनका बैपार ८५ सवन चिरैया ना घर छोड़ै ना बनिजरा बनिजको जाय ॥ चुगुली करिकै माहिलठाकुर मोको तुरत दीन निकराय ८६ गे जगनायक जब कनउजका आवैं नहीं बनाफरराय ॥ मैं समुझायों दुउ भाइन का लाये संग कनौजीराय ८७ घाटबयालिस तेरह घाटी सब रुकववा पिथौराराय ॥ जीति पिथौरा को लखराना सबियाँ लीन्हे घाट छँड़ाय ८८ पान धरायो जब गौने का तब नहिं बीरा कऊ चबाय ॥ बीरा लीन्ह्यो जब ऊदन ने ब्रह्मा लीन्ह्यो तुरत छँड़ाय ८६ यह सब करतब है माहिल कै डार्यनि वंशनाश करवाय ॥ काल नगीचे ज्यहि के आवै त्यहिकै देवै बुद्धि नशाय ९० इतना कहतै तहँ द्यावलि के आल्हा गये तड़ाकाआय ॥ बेला बोली तहँ आल्हा ते कीरतिसागर लयो दिखाय ९१ यह मन भाई सब रानिनके पलकी चढ़ीं तड़ाकाधाय ॥ चलीं पालकी महरानिन की संगै चले बनाफरराय ६२ कीरतिसागर फिरि आई सब नौका पास लीन मँगवाय ॥