ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पश्चिम में तेज ९
पक्षियों की हिंसा १०
तेज का विस्तार, धन व सौभाग्य मांगना ११-१५
धन व ज्योति मिलना, आरोग्य व सुखदाता १६-१८
९३. अग्नि एवं सोम की स्तुति १-१२
सुख, गाएं, अश्व, पुत्र-पौत्र की याचना १-३
उपकारी सूर्य ४
नक्षत्र धारण व धरती का विस्तार १-६
अन्न भक्षण, पाप से बचाने की प्रार्थना ७-८
अन्य देवों से अधिक प्रसिद्धि ९
धन मांगना १०-१२
९४. अग्नि की स्तुति १-१६
कल्याण, ईंधन बटोरना, महान्, पुरोहित, अंधकारनाशक, हिंसा से बचाने की प्रार्थना,
वन घेरना, पक्षियों का डरना, संपत्तियों में निवास, आहूत १-१४
समृद्ध बनाना, आयुवृद्धि की कामना १५-१६
९५. अग्नि का वर्णन १-११
रात-दिन के पुत्र, यशस्वी, व्यापक, ऋतुविभाजक, जल उत्पत्ति का कारण, धरती व
आकाश का डरना १-५
बलों का स्वामी, किरण के समान, अन्न व धन की प्राप्ति ६-११
९६. अग्नि का वर्णन १-९
वायु व जल १
धारण करना २-७
धन व अन्न की कामना ८-९
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९७. अग्नि की स्तुति १-८
पूजा से पाप नष्ट एवं रक्षा १-६
पालनार्थ याचना ७-८
९८. अग्नि का वर्णन १-३
प्रातःकाल सूर्य से मिलना १
दिवस रात्रि में शत्रु से बचाव २
यज्ञ सफलता हेतु प्रार्थना ३
९९. अग्नि का वर्णन १
दुःखों व पापों से पार लगाने की प्रार्थना १
१००. इंद्र का वर्णन १-१९
रक्षक बनने का आग्रह १
सूर्य की चाल पाना असंभव २
मरुद्गण की सहायता से रक्षक बनना ३-१५
मानव सेना को इंद्र के अश्वों द्वारा जानना १६
वृषागिरी के पुत्रों द्वारा इंद्र की स्तुति १७
शत्रुओं, राक्षसों का वध, भूमि, सूर्य व जल का बंटवारा १८
इंद्र पूजन का आग्रह १९
१०१. इंद्र का वर्णन १-११
कृष्ण असुर की पत्नियां, वृत्र, शंबर, पिप्रु, आह्वान, स्वामी १-६
मध्यमा वाणी, उदित होना, सत्यधन, हवि देना, उपजिह्वा खोलने का आग्रह,
अन्नपूजन ७-११
१०२. इंद्र की स्तुति १-११
स्तुति, सूर्य व चंद्र का घूमना, रथ, शत्रु-शक्ति, अव्याकुल व जयशील, असीमित ज्ञान,
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स्तुति १-७
संसार वहन में समर्थ, शत्रुनाशक पुत्र मांगना, आह्वान, अकुटिल गति ८-११
१०३. इंद्र का वर्णन १-८
ज्योति मिलन, वृत्रवध, गमन, समूह निर्माता १-४
धन, प्रसन्न होना, शुष्ण, पिप्रु आदि का नाश ५-८
१०४. इंद्र का वर्णन १-९
वहन, समीप जाना, शिफा, अंजसी, कुलिशी, वीरपत्नी
नामक नदियां, कुयव असुर गर्भस्थ संतान, श्रद्धा, भोग्य पदार्थ, सोमपान ६-९
१०५. विश्वेदेव का वर्णन १-१९
चंद्रमा, प्रसवपीड़ा, पूर्वपुरुष, देवदूत, तीनों लोकों मे वर्तमान, पापबुद्धि शत्रु, मानसिक
कष्ट, सौतें, किरणों की स्तुति १-९
प्रशंसनीय स्तोत्र, भेड़िए को रोकना, नवीन बल, बंधुता, परमज्ञानी, मननीय स्तुति,
अतिक्रमण असंभव, त्रित, लाल वृक, अनुग्रह १०-१९
१०६. विश्वेदेव का वर्णन १-७
मार्ग, शोभनदानयुक्त देव, यज्ञवर्धक द्यावा-पृथ्वी, रक्षार्थ प्रार्थना, अन्न याचना १-४
शक्ति, वृत्रहंता, जागरूक ५-७
१०७. विश्वेदेव का वर्णन १-३
अनुग्रह याचना, स्तुत देव, रक्षार्थ प्रार्थना १-३
१०८. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-१३
रथ, परिमाण, संयोजन, कुश फैलाना, मित्रता, श्रद्धा, आग्रह, यदु, तुर्वश, अनु आदि
के बीच स्थित होना, धरती-आकाश १-९
कामवर्षक, सोमपान, प्रसन्न होना, आदर १०-१३
१०९. इंद्र व अग्नि की स्तुति १-८
स्तुति, जामाता, कन्यालाभ, परंपरा, हथेलियां १-४
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बलप्रदर्शन, महान्, ब्रह्मलोक, असुरनाशक ५-८
११०. ऋभुगण की स्तुति १-९
स्तोत्र, घर जाना, साधन, अमरता, अधिकार १-९
१११. ऋभुगण का वर्णन १-५
हरि नामक दो घोड़े बनाना, निवास, अन्नपूजन, आह्वान, विजयी बाज १-५
११२. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५
शंख बजाना, ज्ञानियों की रक्षा, शासन, व्यापक, रेभ व वंदन ऋषि, कण्व, भुज्यु,
कर्कंधु, वय्य, पृश्निगु, पुरूकूत्स, ऋजाश्व, श्रोण, वसिष्ठ, कुत्स, श्रुतर्य, नर्य विपश्चला,
वश ऋषि १-१०
दीर्घश्रवा, कक्षीवान्, त्रिशोक, मांधाता, भरद्वाज, दिवोदास, पृथि, शंयु, अत्रि, ऋषि
पठर्वा, स्तोत्र, विमद, अधिगु व ऋतुस्तुभ ११-२०
कृशानु, पुरुकुत्स, मधु देना, घोड़े, कुत्स, तुर्वीति आदि, आह्वान, स्तुति २१-२५
११३. उषा एवं रात्रि का वर्णन १-२०
उत्पत्ति स्थान, विचरण, एक मार्ग, नेत्री, भुवनों का प्रकाशन, अभीष्ट, अधीश्वरी, चेतन
बनाना, कल्याण, अनुकरण १-१०
देखना, द्वेषियों को हटाने वाली, तेज से विचरना, लाल रथ से आना, तेज से बढ़ना,
अन्न बढ़ाना, धनस्वामिनी उषा, अश्व देने वाली, स्तोत्र की प्रशंसा,
कल्याणकारी ११-२०
११४. रुद्र की स्तुति १-११
स्तुतियां, मनु, सुख इच्छा, कृपादृष्टि, दृढ़ांग, स्तुति वचन बोलना १-६
शरीर का नाश, बुलाना, रक्षार्थ प्रार्थना, हनन का साधन दूर रखने व स्तुति के आदर
हेतु आग्रह ७-११
११५. सूर्य का वर्णन १-६
जंगम-स्थावर, स्तुति, परिभ्रमण, अंधकार फैलाना, अंधेरा धारण करना, पाप से
बचाने की प्रार्थना १-६
११६. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५
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किशोर विमद, विजय, तुग्र, भुज्यु, रथ, सागर, पेदु, कक्षीवान्, कारोतर पात्र, अग्नि
बुझाना, यंत्रपीडागृह, गौतम, च्यवन, वंदन, दध्यंग ऋषि, बुलाना, वध्रिमती,
हिरण्यहस्त, १-१३
वर्तिका, विश्पला, ऋजाश्व, कांति पाना, स्तुति, यज्ञ के भागों का अर्पण
लौहरथ १४-२०
शत्रुवध, जल उठाना, स्तुति, रेभ, कर्मों का वर्णन २१-२५
११७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-२५
सेवा, घर जाना, पूजित, रेभ, वंदन, प्रतिज्ञा, घोषा, नृषदपुत्र, पेदु, वीरकार्य १-१०
भरद्वाज, कामवर्षक, च्यवन, तुग्र, भुज्यु, विश्वाच, ऋजाश्व, मेष को काटना, आह्वान,
दुधारू बनाना, माहात्म्य, घोड़े का सिर, अनुग्रह बुद्धि, जीवनदान, वीर कर्मों का
बखान ११-२५
११८. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-११
रथ, पुत्रादि, दरिद्रतानाशक, तेज गति वाले, सूर्यकन्या, वंदन ऋषि, गाय, च्यवन,
अत्रि, वर्तिका, विश्पला १-८
पेदु, आह्वान ९-११
११९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
रथ, ऊर्जानी, जयशील, भुज्यु, दिवोदास १-४
कुमारी का पति, अत्रि, शंयु, वंदन ऋषि, युवा बनाना, कामदेव, कामना, दधीचि,
पेदु ५-१०
१२०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१२
मार्ग, स्तोत्र, वषट्कार, बुद्धि, कक्षीवान्, ऋजाश्व, वृक, अगम्य स्थान १-८
पोषण, अश्वरहित रथ, सोमपान, घृणा ९-१२
१२१. इंद्र का वर्णन १-१५
यज्ञ में आना, गाएं निकालना, आकाश धारण, दिवस का प्रकाशन, सोमपान १-८
ऋभु, शुष्ण, मेघ, वृत्र, उशना, एतश, पाप, वृद्धि ९-१५
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१२२. विश्वेदेव का वर्णन १-१५
स्तुति, उषा, अन्न, कक्षीवान्, घोषा, नियमन १-७
स्तुति, यक्ष्मा, निडर, प्रशंसा, सोम, राजा इष्टाश्व, इष्टरश्मि, स्वर्णाभूषण धारण करना,
राजा मशशरि व जयशील अयवस ८-१५
१२३. उषा की स्तुति १-१३
अंधकारनाश, पहले जागना, प्रकाश-अंश, घर जाना, नेत्री, धन दर्शाना, पदार्थ
छिपाना, आगे रहना १-८
मिलना, स्पष्ट करना, दर्शनीय, कल्याणकारी, अनुकूलता ९-१३
१२४. उषा का वर्णन १-१३
प्रकाश, वियोग, दिशाएं नष्ट न करना, नोधा ऋषि, सुंदर, प्रसिद्ध, निर्मल, दांत, प्रकाश
करना १-८
बहिन, पणि, लाल बैल जोड़ना, पक्षियों का उड़ना, उन्नति व वृद्धि की प्रार्थना ९-१३
१२५. दान का वर्णन १-७
राजा स्वनय, कक्षीवान्, सोमपान, घृतधाराएं, संतोष १-५
अमर बनना, वृद्धावस्था ६-७
१२६. भावयव्य आदि के दान का वर्णन १-७
स्वनय, कक्षीवान्, रथ देना, लाल घोड़े, गाएं लेना, लोमशा १-७
१२७. अग्नि का वर्णन १-११
अनुसरण, यजनयोग्य, शत्रु, सारवान हव्य, अन्न ग्रहण, पूजनीय, मंथन, हवन १-८
जरा निवारण, स्तुति, परमबली ९-११
१२८. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञवेदी, मातरिश्वा, चारों ओर चलना, अतिथि १-४
हव्य देना, स्वर्ग, पालक, रमणीय ५-८
१२९. इंद्र की स्तुति १-११
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स्तुति स्वीकारना, गतिशील, मेघ का भेदन, शत्रुसंहार, जगत्पालक, निंदकों का
वध १-६
स्तुतियां, शत्रुसेना का नाश, मिलना, महिमावान, रक्षक ७-११
१३०. इंद्र की स्तुति १-१०
आह्वान, सोमरस, सोम व पणियों को खोजना, शत्रुनाश, नदी निर्माण, प्रशंसा, राजा
दिवोदास, शंबर १-७
कृष्ण, उशना, स्तुति ८-१०
१३१. इंद्र की स्तुति १-७
नत होना, सेना के आगे रखना, यज्ञ, शत्रु-नगर विनाश, सागर को छीनना, सिंहनाद,
असाधारण, कान १-७
१३२. इंद्र का वर्णन १-६
अन्न लाना, स्वर्ग का मार्ग, वृष्टि, गाएं छुड़ाना, इंद्रलोक, शत्रु-नाश १-६
१३३. इंद्र की स्तुति १-७
धरती को जानना, बैरीभक्षक, शक्ति का नाश, शत्रु-नाश, पीले पिशाच, घिरा रहना,
अन्नस्वामी बनना १-७
१३४. इंद्र की स्तुति १-६
रथ, रुचि देख चलना, सावधान करना, अमृत बरसना, समीप जाना, स्तुति, सोम
योग्य १-६
१३५. वायु की स्तुति १-९
आह्वान, अनुग्रह, बुलाना, अन्नभक्षण, सोम १-५
कुश, शब्द होना, आहुति, पुरोडाश, चाल न रुकना ६-९
१३६. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-७
बल, यज्ञ में जाना, यज्ञस्वामी, शोभित, नमस्कार, प्रसन्न करना १-७
१३७. मित्र एवं वरुण का वर्णन १-३
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कूटना, प्रस्तुत, निचोड़ना १-३
१३८. पूषा की स्तुति १-४
बल, प्रशंसनीय घोड़े, धन याचना, स्तोत्र १-४
१३९. पूषा की स्तुति १-११
अग्नि, जल देना, श्लोक, रथ, कर्मरूप, स्तुतियां, दुहना १-७
प्रकाशयुक्त शक्ति, पितर, आवाज, महिमा ८-११
१४०. अग्नि का वर्णन १-१३
यज्ञवेदी, धान्य, यजमान, उपयोगी, प्रकाश, लकड़ियां, तेजोमय बनाना १-७
आलिंगन, गमन, दानाभिलाषी, तेज, नाव, उषाएं ८-१३
१४१. अग्नि का वर्णन १-१३
दृढ़ता, धरती पर रहना, उत्पत्ति, लताओं का प्रवेश, चढ़ना, पूजन, स्तुतियां, भागना,
उत्पत्ति १-९
हव्य, पुत्र देना, स्वर्ग, स्तुति १०-१३
१४२. अग्नि का वर्णन १-१३
यज्ञ, तनूनपात, सींचना, स्तुति, यज्ञवर्धक, यज्ञपावक, कुश, फलसाधक, भारती,
वाक्, सरस्वती, पुष्टि, हव्य, स्वाहा १-१३
१४३. अग्नि का वर्णन १-८
यज्ञ, मातरिश्वा, चिनगारियां, शत्रुसंहार १-५
स्तुति, बुद्धि, मंगलकारी ६-८
१४४. अग्नि का वर्णन १-७
प्रज्ञा, जल, मिलाना, अजर १-४
प्रकाशमान, स्वामी, आश्रयदाता ५-७
१४५. अग्नि का वर्णन १-५
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प्रशासक, सहारा, स्तुति, कर्म ज्ञान देना १-५
१४६. अग्नि का वर्णन १-५
मस्तक, व्याप्त, ज्ञानधारक, अजीर्ण, दर्शनीय १-५
१४७. अग्नि की स्तुति १-५
लपटें, वंदना, दीर्घतमा, हृदय, स्तोता १-५
१४८. अग्नि का वर्णन १-५
बढ़ाना, स्तोत्र, स्तुतियां, दीप्त, तृप्ति १-५
१४९. अग्नि का वर्णन १-५
वस्तुएं देना, पुरोडाश, वेदी, जलपात्र, पुत्रवान १-५
१५०. अग्नि की स्तुति १-३
हव्य, देवविरोधी, आह्लादक १-३
१५१. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-९
रक्षा, इच्छापूरक, प्रशंसा, यज्ञ, रंभाना, पूजन १-६
शोभनमति यजमान, स्तुति, धन व अन्न धारण ७-९
१५२. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-७
सृष्टियां, कर्म, विरोध, उषाएं, गमन, दीर्घतमा, नमस्कारयुक्त १-७
१५३. मित्र एवं वरुण की स्तुति १-४
पोषण, सुखभागी, प्रसन्न, अग्निदाता १-४
१५४. विष्णु का वर्णन १-६
अंतरिक्ष, पादक्षेप, नापना, लोकधारक, बंधु, परमपद १-६
१५५. इंद्र एवं विष्णु का वर्णन १-६
अपराजेय, आदर, शक्तिवर्धन, परिक्रमा, चरणक्षेप, कालचक्र १-६
१५६. विष्णु वर्णन १-५
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सुखकर्त्ता, वृत्तांत, सेवा, मेघ, यज्ञार्थ आना १-५
१५७. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
उषा, रथ, सौभाग्य, कशा, गर्भरक्षा, समर्थ १-६
१५८. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-६
दीर्घतमा, अन्न, तुग्रपुत्र, पाशबद्ध, दास, त्रितन, निर्देशक १-६
१५९. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-५
अनुग्रह, अमृत देना, हितकारी, बहिनें, धन याचना १-५
१६०. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-५
सुखदाता, रक्षक, दूध, श्रेष्ठ, विस्तार १-५
१६१. ऋभुगण का वर्णन १-१४
चमस, भाग, युवा करना, स्त्री, पानपात्र, नवीन रथ, मृतक गाय, सोमरस, चार
भाग १-९
रक्त रखना, फसलें, बलवती वाणी, अभिलाषा १०-१४
१६२. अश्वमेध के अश्व का वर्णन १-२२
पराक्रम, बकरे ले जाना, पुरोडाश, भाग, जल, यूप, सुडौल, लगाम, छुरी १-९
मांस, रस, कामनाएं, परीक्षा, छुरी, अश्व, घास, पात्र, वषट्कार, वस्तुएं, शब्द करना,
हड्डियां १०-१८
प्रकाशक, अकुशल, समीप जाना, तेज व बल १९-२२
१६३. अश्वमेध के अश्व का वर्णन १-१३
शब्द, अश्व प्राप्ति, व्रतधारी, बंधन, लगाम, सिर, रूप, सौभाग्य, सिर-पैर, पंक्ति में
चलना १-१०
वायुवत् चलने वाला, उड़ना, बकरा, कुशल घोड़ा ११-१३
१६४. विश्वदेव का वर्णन १-५२
पुत्र, सूर्यरथ, गाएं, संसार, धागे, लोक, गाएं, पूजन, तीन माता-पिता, पहिया, चरण,
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सात चक्र, घूमना, पांच
वर्ण, सूर्यमंडल, निर्माता १-१५
क्रांतदर्शी, जाना, लोकपालक, बोझा ढोना, दो पक्षी, संसार की रक्षा, किरणें, पद,
पूजामंत्र, वर्षा रोकना, गाय को बुलाना, आना, तृप्त करना, हराना, स्वधा, सूर्य का
आना-जाना १६-३१
प्रजाओं का कारण, पालक आकाश, उत्पत्ति स्थान, यज्ञ, घेरना, बंधना, जानना,
अधिष्ठित होना, भक्षण, वाणी, वर्षा, सोमरस, धरती को देखना, चार पद,
नाम ३२-४६
भीगना, अरे, धनरक्षा, यजमान, प्रसन्न होना, आह्वान ४७-५२
१६५. इंद्र एवं मरुद्गण का संवाद १-१५
सींचना, उड़ना, पालक, यज्ञकर्म, अनुभव, अहि, कर्म करना, कामना, प्रसन्नता, दूसरों
द्वारा न होना १-९
उग्र विद्वान्, आनंद, यश, अन्न, मनोरम स्तोत्र, वाणी १०-१५
१६६. मरुद्गण की स्तुति १-१५
ज्वाला, प्रसन्नचित्त, जल, अट्टालिकाएं, डरना, पशुनाश, अर्चना, पुत्र-पौत्रादि, शस्त्र,
शोभन १-१०
महिमा, यजमान, मैत्री, दीर्घकालीन यज्ञ, कामना ११-१५
१६७. इंद्र एवं मरुतों का वर्णन १-११
उपाय, धन, वाणी, यत्न, बिजली, सेवा, महिमा, जल टपकना, हराना, महिमा,
स्तुति १-११
१६८. मरुद्गण का वर्णन १-१०
समान भावना, कंपनशील, हस्तत्राण, पापहीन, अन्न, जल, कल्याण १-७
बिजली, अन्न, शरीर की पुष्टि ८-१०
१६९. इंद्र की स्तुति १-८
मरुत्, लड़ना, हव्य, दक्षिणा १-४
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संतोषदाता, घोड़े, मेघ, स्तुति ५-८
१७०. इंद्र एवं अगस्त्य का संवाद १-५
मन, भाग, बात, अमृत, मित्र १-५
१७१. मरुतों की स्तुति १-६
याचना, स्तोत्र, सुखदाता, भागना, जगाना, शक्तिशाली १-६
१७२. मरुतों की स्तुति १-३
आगमन, आयुध, प्रार्थना १-३
१७३. इंद्र का वर्णन १-१३
सामगान, यज्ञ, अन्न, स्तोत्र, उत्तम, व्याप्त, युद्ध, सखा १-९
मित्र बनाना, बढ़ना, वंदना १०-१३
१७४. इंद्र की स्तुति १-१०
उद्धारक, नगरियों का नाश, रक्षक, बढ़ाना, कुत्स ऋषि, शत्रु १-६
दुर्योणि, कुयवाच, वृत्र असुर, यदु, तुर्वसु, रक्षक ७-१०
१७५. इंद्र की स्तुति १-६
आह्वान, प्रसन्नतादाता, शुष्ण का वध, वृत्रघाती, सुख १-६
१७६. इंद्र का वर्णन १-६
घेरना, हव्य, पांच जन, धन मांगना, अन्नस्वामी, स्तुति १-६
१७७. इंद्र की स्तुति १-५
घोड़े, रथ, तैयार, आह्वान, प्रार्थना १-५
१७८. इंद्र की स्तुति १-५
समर्थ, हवि, पुकार, हराना, शक्तिशाली १-५
१७९. अगस्त्य एवं लोपामुद्रा का रति विषयक संवाद १-६
सौंदर्यनाश, सत्य, भोग, ब्रह्मचर्य, कामनाएं, आशीर्वाद १-६
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१८०. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-१०
नेमियां, रथ, स्तुति, सोमरस, भुज्यु, अन्न १-६
प्रशंसनीय, जगाना, यज्ञ, रथ ७-१०
१८१. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-९
यज्ञ, शीघ्रगामी अश्व, वर्षा, आकाशपुत्र, स्तुतियां १-५
पास आना, स्तुतियां, यज्ञगृह, स्तोता ६-९
१८२. अश्विनीकुमारों का वर्णन १-८
नाती, कर्मकुशल, मेधावी, शत्रुनाशार्थ प्रार्थना, नाव, भुज्यु, रथ, स्तुति १-८
१८३. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
पास जाना, उषा, आह्वान, भाग, गौतम, पुरुमीढ़, अत्रि ऋषि, स्तोत्र १-६
१८४. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-६
आह्वान, अन्वेषण, सूर्यपुत्री, स्तोत्र, देवमार्ग १-६
१८५. द्यावा-पृथिवी का वर्णन १-११
घूमना, धारण करना, धन प्राप्ति, अनुगमन, जल, बुलाना, स्तुति, जामाता, संतुष्ट,
प्रकाशमान, दीर्घायु १-११
१८६. विश्वेदेव का वर्णन १-११
प्रार्थना, मित्र, वरुण, अर्यमा देव, अतिथि, स्तुति, इच्छा, जल के नाती १-६
घेरना, उपजाऊ बनाना, सुखार्थ प्रार्थना, प्रसिद्ध ज्योति ७-११
१८७. अन्न का वर्णन १-११
स्तुति, रक्षक, सुखदाता, रस, दान, वृत्रवध १-६
भोजन, वनस्पतियां, गो भक्षण, सत्तू, अन्न ७-११
१८८. अग्नि की स्तुति १-११
कवि व दूत, मिलना, अन्न, आदित्य, जल गिराना, अग्नि १-६
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वचन, भारती, आह्वान, पशु-वृद्धि, अन्न, छंद ७-११
१८९. अग्नि की स्तुति १-८
ज्ञाता, साधन, प्रकाशमान, आश्रय रक्षार्थ प्रार्थना १-५
हिंसक, चोर, निंदक आदि से बचाना, पात्र, शत्रुनाशक ६-८
१९०. बृहस्पति की स्तुति १-८
स्तुत्य, मधुरभाषी, फल अन्न, चलना, समीप जाना १-५
नियंत्रक, जल व तट, स्तुतियां, फल, आयु, अन्न हेतु प्रार्थना ६-८
१९१. जीव, जंतुओं, पक्षियों एवं सूर्य का वर्णन १-१६
घिरना, विषधर, प्रभाव, लिपटना, ज्ञानशून्य, देखना, अंग, सूची वाले विषधर, पूर्व में
निकलना, उदयगिरि १-९
विष फेंकना, नष्ट करना, पक्षी, नदियां, मयूरियां, व्यर्थता १०-१६
द्वितीय मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-१६
पालक, गृहपति, विष्णु १-३
रक्षक, दानदाता, शक्तिशाली, यज्ञकर्त्ता ४-६
रत्नधारक, तेजस्वी, पालक, कल्याणकर्त्ता, शत्रुनाशक ७-९
विभु, हव्यदाता १०-११
लक्ष्मी का वास १२
जिह्वा का निर्माण १३
वृक्ष, लता आदि में रहना, मिलना-अलग होना, गोदाता १४-१६
२. अग्नि का वर्णन १-१३
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स्वर्ग, संयमी, सुदर्शन, प्रकाशमान, शिखायुक्त, अविनाशी, अन्न का द्वार १-७
आधार, स्तुतियां, शत्रुजेता, प्रसन्नतादायक, गो व अन्नदाता ८-१३
३. अग्नि का वर्णन १-११
यज्ञयोग्य, प्रकटकर्त्ता, लक्ष्य, वीरपुत्र, द्वार, फलदाता १-६
पूजा, यज्ञ, सरस्वती, इला, भारती, अन्न ७-९
ज्ञाता, कामवर्षी १०-११
४. अग्नि का वर्णन १-९
आह्वान, भृगु, मित्र, जीभ फेरना १-६
स्वाद लेना, रक्षक, गृत्समदवंशी ऋषि ७-९
५. अग्नि का वर्णन १-८
चेतनादाता, निर्वाहक, धारक, फलदाता, नेष्टा, हव्य, महत्त्व १-८
६. अग्नि की स्तुति १-८
स्तुतियां, यज्ञस्वामी, हवि, विद्वान्, धनदाता, वृष्टिकर्त्ता, पूजक, हितकारी, यज्ञ १-८
७. अग्नि की स्तुति १-६
तरुण, शत्रुता, लांघना, वंदनीय, भर्त्ता, विचित्र १-६
८. अग्नि का वर्णन १-६
यशस्वी, आह्वान, स्तुतियां, शोभा, ऋग्वेद, रक्षित १-६
९. अग्नि की स्तुति १-६
व्रत, धनदाता, जन्मस्थान, धनस्वामी, कांतियुक्त १-६
१०. अग्नि की स्तुति १-६
प्रज्ञा, प्रजायुक्त, अरणि, व्याप्त, वर्णयुक्त, हव्य देना १-६
११. इंद्र की स्तुति १-२१
बढ़ाना, वृत्र, कामना, हराना, वृत्रवध, प्रशंसा, बादल, प्रसन्न होना, ध्वनि १-८
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कांपना, शब्द करना, सोम, आश्रय, वीरपुत्र, धन, घर, मित्र, शक्ति याचना, दृढ़ करना,
उद्धारक, उग्र दिन १-१६
दस्यु, विश्वरूप, अर्बुद, बल असुर का नाश, स्तुति १७-२१
१२. इंद्र का वर्णन १-१५
डरना, दृढ़ करना, नदियां प्रवाहित करना, असुर, शत्रु
संपत्ति-नाशक, रक्षक १-६
बुलाना, प्रतिनिधि, पापीनाशक, शंबर असुर, रोहिण का वध, दृढ़ भुजाएं,
रक्षक ७-१५
१३. इंद्र का वर्णन १-१३
वर्षा ऋतु, सागर १-२
प्रायश्चित्त ३
धनदाता, दोहन, ओषधि, सहवसु, दस्यु का नाश, पंचजन जतुष्ठिर, तुर्वीति,
स्तुति ४-१३
१४. इंद्र का वर्णन १-१२
सोम, योग्य होना, दृमीक, उरण, अश्व, शुष्ण, पिप्रु, नमुचि आदि का वध १-५
नगरियों, विरोधियों का नाश सोम, फलदाता, राजा, धन याचना ६-१२
१५. इंद्र का वर्णन १-१०
त्रिकद्रुक, सिद्ध, निर्माण, मार्ग रोकना, नदी सुखाना, गाड़ी तोड़ना, परावृज, द्वार
खोलना, चुमुरि, धुनि का वध, भजनीय १-१०
१६. इंद्र का वर्णन १-९
आह्वान, शक्तिकेंद्र, अपराजित, ज्ञानी, अन्नदाता, इच्छापूरक, आयुध, रक्षक, घेरना,
स्तुति १-९
१७. इंद्र का वर्णन १-९
स्वतंत्र, शीश, विवश, घेरना, अचल, जल गिराना, क्रिवि-वध धन मांगना, भजनीय,
आह्वान १-९
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१८. इंद्र का वर्णन १-९
हवन, विजयदाता, अश्व, धनशाली, आह्वान, सोम रखना, आहूत, विपत्तिनाशक,
सेवनीय १-९
१९. इंद्र का वर्णन १-९
अन्नवासी, गमन, प्रेरणा, सहायक, एतश १-५
कुत्स, शुष्ण, अशुष, कुयव, पीयु, गृत्समद ऋषि, दक्षिणा ६-९
२०. इंद्र का वर्णन १-९
दीप्यमान, श्रद्धालु, रक्षक, यज्ञ, अभिलाषापूरक, गाएं लेना, नगर विनाश, दास, मस्तक
काटना, सेना व लौहनगरी का नाश, दक्षिणा १-९
२१. इंद्र का वर्णन १-६
जलविजयी, स्तुति, प्रशंसा, प्रेरक, गाएं ढूंढना, पुष्टि १-६
२२. इंद्र का वर्णन १-४
तृप्तिदाता, पूर्ण करना, भला विचारना, प्रसिद्ध १-४
२३. बृहस्पति की स्तुति १-१९
गणपति, जनक, शत्रुनाशक, सेनाएं रोकना, पथप्रदर्शक, प्रसन्नता, रक्षक १-८
धन याचना, कामपूरक, पुण्यलाभ, शत्रुसेना नाशक ९-१३
पराक्रम, पूजनीय, विरोधियों को न सौंपने की प्रार्थना, ऋण चुकाना, गायों का आना,
संतान रक्षार्थ प्रार्थना १४-१९
२४. बृहस्पति का वर्णन १-१६
विश्वस्वामी, हंता, उद्धारक, भेदन, धन की प्राप्ति १-६
बाण फेंकना, मिलाना, भोगना ७-१०
रक्षक, स्तुतियां, सुनना, विभाजन, अन्नयुक्त विश्वनियंत्रक ११-१६
२५. बृहस्पति का वर्णन १-५
दीर्घायु, धनविस्तार, समर्थ, ब्रह्मणस्पति, सुख प्राप्ति १-५
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२६. बृहस्पति का वर्णन १-४
रक्षा याचना, धन प्राप्ति, उपकारी १-४
२७. आदित्यगण का वर्णन १-१७
घृत टपकाना, अनिंदनीय, अहिंसित, तेजस्वी, जगत्धारक, स्तुति १-४
पापों का त्याग, सुगमपथ, सुख प्राप्ति, महिमा वर्धन ५-८
तेजधारक, वरुण व आदित्य की स्तुति ९-१२
स्वामी, ज्योति, मंगलकारी, पाश, धन याचना १३-१७
२८. वरुण की स्तुति १-११
क्रांतदर्शी, प्रार्थना, जल रचना, नदी, पाप, नाश, हिंसक, प्रकाश १-७
शक्तिसंपन्न, ऋण, याचना, चोर, भेड़िया ८-११
२९. विश्वेदेव की स्तुति १-७
पाप, गुप्त स्थान, कल्याण, सुख, न मारना, बचाना, पुत्र याचना १-७
३०. इंद्र, बृहस्पति, सोम आदि की स्तुति १-११
पानी, समुद्र, वृत्र, असुर पुत्र, शत्रुनाश, समृद्धि, प्रेरक, थकान न देने की प्रार्थना १-७
षंडामर्क का वध, धन याचना, उपासना ८-११
३१. विश्वेदेव का वर्णन १-७
रक्षा, घोड़े, उत्तम कर्म, पूषा व सूर्या के पति, हव्य स्तुति, बलाभिलाषी १-७
३२. द्यावा-पृथिवी आदि का वर्णन १-८
अन्न कामना, मित्रता, स्तुति, बुलाना, कर्मों को बुनना, धन, राका देवी, सिनीवाली,
सरस्वती, इंद्राणी, वरुणाणी १-८
३३. रुद्र की स्तुति १-१५
सुख, शतायु, उत्तम, हिंसा-बुद्धि, ओषधियां, स्वामी, रक्षक, उग्र रुद्र १-११
स्तुति, कामना, सुख देने व क्रोध न करने की प्रार्थना १२-१५
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३४. मरुद्गण की स्तुति १-१५
व्याप्त, उत्पत्ति, सोने के टोप वाले, पहुंचना, आयुधधारक, अन्न व बल याचना १-७
अन्नदाता, शत्रुता, हंता, धन मांगना, अंधकार का नाश रूप धरना, होता,
पापत्राता ८-१५
३५. अग्नि का वर्णन १-१५
अन्न, उत्तम रूप, निर्माता, बाड़वाग्नि, अपांनपात्, इड़ा, सरस्वती, भारती १-५
उच्चैःश्रवा अश्व, संसार की उत्पत्ति ६
घर में रहना, वनस्पतियों के उत्पादक ७-८
नदियां, धन देना, भाग्य स्तुति, व्याप्त, उत्तम स्थान, पुत्र-पौत्र प्राप्ति हेतु
प्रार्थना १२-१५
३६. इंद्र, त्वष्टा, अग्नि, वरुण एवं मित्र की स्तुति १-६
भेड़ के बाल, दशापवित्र, भरत के पुत्र, देवपत्नियां मधु, सोमपान, प्राचीन
स्तुतियां १-६
३७. अग्नि की स्तुति १-६
द्रविणोदा, सोमरूप मधु, नेष्टा १-३
मृत्यु निवारक, रथ, सोमपान हेतु प्रार्थना ४-६
३८. सविता का वर्णन १-११
दाता, हाथ फैलाना, सविता का त्याग, प्रकाश समेटना, शय्या का त्याग, घर
अभिलाषा, कार्य क्षीण न होना, निवास, बुलाना १-९
रक्षक, आह्वान १०-११
३९. अश्विनीकुमारों की स्तुति १-८
बाधा, ज्ञाता, वेगवान्, दुःखत्राता, बुढ़ापा, सुखदाता १-६
स्तुतियां, स्तोत्र रचना ७-८
४०. सोम व पूषा की स्तुति १-६
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अमरता, सेवा, रथ, वरणीय एवं कीर्तिशाली प्राणि-उत्पत्ति, धनस्वामी १-६
४१. इंद्र, वायु मित्र, वरुण आदि की स्तुति १-२१
नियतगुण, पुकार, दाता, सोमरस, हजार खंभे, दानशील, पेय सोम, धन, नाना रूप,
अचंचल, कल्याण, मेधावी, पुकार, प्रसन्नदाता, दान १-१५
उत्तम सरस्वती, शुनहोत्र, हव्य, प्रार्थना, साधक, यज्ञयोग्य देवता १६-२१
४२. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३
प्रेरित करना, मंगलकारी, चोर एवं पाप की बात १-३
४३. कपिंजल पक्षी रूपी इंद्र का वर्णन १-३
बोल, पुण्यकारी शब्द, सुमति की इच्छा १-३
तृतीय मंडल
सूक्त विषय मंत्र सं.
१. अग्नि की स्तुति १-२३
वाहक, समिधा, उत्तम बंधु, बढ़ाना, शुद्धि, धारण करना १-६
माता-पिता-धरती, आकाश, किरणें, जल बहाना, लोकपोषण, शयन,
प्रकाशमान ७-१२
जन्म, बढ़ना, तेज, स्तुति, यज्ञ, अनुग्रह, होता, भूमि याचना १३-२३
२. अग्नि का वर्णन १-१५
संस्कार, पूजन, स्तुति, हितकारक, यज्ञमंडप, अग्नि, अन्नार्थ जाना, ज्ञाता, चारों ओर
जाने वाले, प्रजास्वामी १-१०
गरजना, स्वर्गारोहण, धन-अन्न याचना ११-१५
३. अग्नि का वर्णन १-११
दूषित न करना, प्रेरणा, सुख चाहना १-३
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